S
StoryPublisher
Guest
"आह्ह.. बापू.. आप तो कैसे चूस रहे है.. ऊईई.. ओह्ह" रूखी ने अपनी निप्पल को ससुर के मुंह में दबा दिया.. वो बूढ़ा भी ऐसे चूस रहा था जैसे दुनिया का सबसे बढ़िया हेल्थ ड्रिंक पी रहा हो.. थोड़ी देर तक चूसने के बाद वह बोला
"बेटा.. गाय के थन जैसी छाती है तेरी.. थोड़ा सा ही चूसने पर पूरा मुंह दूध से भर गया मेरा.. बेचारा लल्ला इतना सारा दूध कहाँ से पी पाएगा!! इतना दूध है की पूरे घर के लिए काफी है.. काश हमारे खेत भी तेरी इन छातियों जीतने उपजाऊ होते"
"ओह्ह बापू.. क्या कर दिया आपने!! मुझे तो कुछ कुछ हो रहा है.. आह्ह.. " रूखी का पूरा जिस्म हवस की आग में झुलसने लगा था। उसका एक हाथ ससुर के सिर पर था और दूसरे हाथ से उसने अपनी भोस सहलाना शुरू कर दिया..
"आह्ह बापू.. धीरे धीरे.. काटिए मत.. ऊईई माँ.. बस बस बहुत हो गया.. थोड़ा सा लल्ला के लिए भी छोड़ दीजिए.. अभी वो जाग गया तो उसे क्या पिलाऊँगी.. " रूखी और उसके ससुर का यह कामुक मिलन देखते हुए.. शीला ने अपने दोनों स्तन ब्लाउस से बाहर निकाल लिए थे और पागलों की तरह अपनी निप्पलों को मसल रही थी। शीला ने पास पड़े हँसिये को उठाकर उसके लकड़े से बने हेंडल को अपनी चुत पर रगड़ना शुरू कर दिया था। उन दोनों का खेल देखकर शीला का मन कर रहा था की वो भी उस खटिया में जाकर उस बूढ़े से लिपट पड़े.. पर फिलहाल ऐसा करना मुमकिन नहीं था
"तेरी छातियाँ तो रसिक की अम्मा से भी बड़ी बड़ी है.. " आखिर ससुर ने रूखी की निप्पलों को छोड़ दिया
"आपने तो सारा दूध खतम कर दिया बापू" उस बूढ़े के पीठ पर हाथ पसारते हुए रूखी ने कहा.. वह अपने ससुर को ऐसे सहला रही थी जैसे कसाई हलाल करने से पहले बकरे को सहलाता है..
ससुर ने रूखी की लचकदार चर्बी वाली कमर पर अपना खुरदरा हाथ फेरा.. रूखी के भोसड़े से कामरस की धारा बह रही थी.. बूढ़े ने रूखी के घाघरे में हाथ डालकर उसके गोल मटके जैसे दोनों कूल्हों को पकड़ लिया..
रूखी को बहोत गुस्सा आ रहा था.. ये बहनचोद हर जगह हाथ फेर रहा है पर मेरी चुत को क्यों नहीं छु रहा!! कैसे कहूँ.. शर्म आ रही है.. और अभी वो बुढ़िया भी आ टपकेगी..
रूखी ने बूढ़े को अपनी छातियों से दूर कर दिया..
"क्या हुआ बहु?" ससुर आश्चर्य से रूखी को देखने लगा
"अब दूसरे वाले की बारी.. दोनों तरफ एक सा वजन होना चाहिए ना.. " कहते हुए रूखी ने अनुभवी रंडी की अदा से अपना दूसरा भारी स्तन ससुर के हाथों में थमा दिया
"बहु.. इतनी भारी छातियों का वज़न नहीं लगता तुझे.. ?? कम से कम ३-४ किलो का होगा एक.. "
बिना जवाब दिए रूखी खटिया पर लेट गई.. और अपने ससुर को बगल में लिटा दिया.. अपना बाँया उरोज मुंह में देते हुए बोली
"बातें बाद में करेंगे.. पहले जो काम करने बैठे है उसे तो खतम कर लो.. कब से बस बोलें ही जा रहे हो..!!" रूखी ने अपने पैर को घुटने से मोड़ा और ऐसी स्थिति में लेकर आई की उसका घुटना सीधा बूढ़े के लंड से जा टकराए..
ससुर की लंगोट.. मधुमक्खी के छत्ते की तरह उभर गई थी.. रूखी के भोसड़े में आग लग गई थी.. उसने ससुर के लंड को अपने घुटने से छूते हुए उसे अपने पास खींचा
"ये क्या कर रही हो बेटा.. नहीं नहीं.. ये ठीक नहीं है"
रूखी ने अपने घुटनों से एक जोरदार धक्का लगा दिया ससुर के लंड पर.. बूढ़े की चीख निकल गई..
"अब चुपचाप जो कहती हूँ वो करो.. दूध तो पी लिया है मेरा.. अब वसूल भी तो करने दो मुझे.. खबरदार जो किसी को एक शब्द भी बताया है तो" अपने ससुर को बाहों में दबाते हुए रूखी ने कहा.. गुस्साई शेरनी जैसी रूखी उस बूढ़े पर टूट पड़ी.. ससुर को नीचे लिटाकर वह उसके ऊपर चढ़ गई.. दोनों के वज़न से खटिया का एक पैर टूट गया.. खटिया के टूटते ही दोनों फर्श पर आ गिरे.. ऐसे गिरे जैसे बुमराह के बाउन्सर के सामने झिम्बाब्वे का बेट्समेन गिर जाता है.. दोनों को मुंह से एक साथ चीख निकल गई.. ससुर इसलिए चीखा की उसकी पीठ नीचे फर्श पर टकराई और रूखी का पूरा वज़न उस पर गया.. रूखी इसलिए चिल्लाई क्योंकी नीचे गिरने के कारण उसकी निप्पलें बूढ़े के मुंह के साथ बड़े जोर से दब गई।
रूखी के वज़न तले लाचार ससुर ऐसे दबा था जैसे महंगाई के बोज तले प्रजा दबी हुई है.. दोनों के जिस्म एक दूसरे में उलझे हुए थे तभी.. बाहर दरवाजा खुलने की आवाज आई.. मर गए.. जिसका डर था वही हुआ.. बुढ़िया आ गई!!
"अरे.. इतनी देर में रसिक की अम्मा वापिस भी आ गई.. !! उसे तो मंदिर में भी चैन नहीं है" कहते हुए ससुर रूखी को अपने शरीर के ऊपर से हटाते हुए खड़ा हुआ और भागकर अपने कमरे में चला गया
रूखी उठकर शीला के पास आई.. शीला हँसिये के हेंडल को अपनी चुत में घुसेड़कर खड़ी खड़ी मुस्कुरा रही थी।
"कमिनी.. तूने तो अपने ससुर को ही सेट कर लिया" रूखी की कमर पर चिमटी काटते हुए शीला ने कहा
"भाभी.. मुझे शक है की मेरे ससुर ने मुझे जीवा के साथ देख लिया है.. जिस रात रघु और जीवा मुझे चोद कर गए थे.. तब से इस बूढ़े ने मुझे सताना शुरू कर दिया था.. मेरे साथ रोज अश्लील बातें करता है और छातियों को घूरता रहता है"
"अच्छा.. तो ये बात है!!" शीला ने कहा
रूखी: "हाँ भाभी.. पर बूढ़ा है बड़े काम की चीज.. छाती तो ऐसे चूस रहा था.. मेरे छेद में से नलके की तरह पानी बहने लगा था.. सब गीला गीला हो गया"
शीला: "साली, एक नंबर की हरामी है तू ..."
रूखी ने शीला के ब्लाउस के बटन बंद करते हुए कहा "इसीलिए तो मुझे हँसिये को अंदर डालने की जरूरत नहीं पड़ती है भाभी" कहते हुए उसने शीला की चुत से हँसिये को खींचकर बाहर निकाला..
तभी शीला के मोबाइल पर कविता का फोन आया.. शीला ने उसके साथ कुछ बात की और फोन रख दिया
रूखी की सास.. कमरे में अंदर आई.. और बोली "अरे रूखी.. शीला बहन को ताज़ा मक्खन जरूर देना"
"हाँ अम्मा.. बस निकालने ही जा रही थी.. "
"और बताइए शीला बहन.. हालचाल ठीक है सब? भैया कैसे है?" शीला के ब्लाउस के दो खुले बटनों को देखते हुए रूखी के सास ने बड़े विचित्र ढंग से पूछा
"बेटा.. गाय के थन जैसी छाती है तेरी.. थोड़ा सा ही चूसने पर पूरा मुंह दूध से भर गया मेरा.. बेचारा लल्ला इतना सारा दूध कहाँ से पी पाएगा!! इतना दूध है की पूरे घर के लिए काफी है.. काश हमारे खेत भी तेरी इन छातियों जीतने उपजाऊ होते"
"ओह्ह बापू.. क्या कर दिया आपने!! मुझे तो कुछ कुछ हो रहा है.. आह्ह.. " रूखी का पूरा जिस्म हवस की आग में झुलसने लगा था। उसका एक हाथ ससुर के सिर पर था और दूसरे हाथ से उसने अपनी भोस सहलाना शुरू कर दिया..
"आह्ह बापू.. धीरे धीरे.. काटिए मत.. ऊईई माँ.. बस बस बहुत हो गया.. थोड़ा सा लल्ला के लिए भी छोड़ दीजिए.. अभी वो जाग गया तो उसे क्या पिलाऊँगी.. " रूखी और उसके ससुर का यह कामुक मिलन देखते हुए.. शीला ने अपने दोनों स्तन ब्लाउस से बाहर निकाल लिए थे और पागलों की तरह अपनी निप्पलों को मसल रही थी। शीला ने पास पड़े हँसिये को उठाकर उसके लकड़े से बने हेंडल को अपनी चुत पर रगड़ना शुरू कर दिया था। उन दोनों का खेल देखकर शीला का मन कर रहा था की वो भी उस खटिया में जाकर उस बूढ़े से लिपट पड़े.. पर फिलहाल ऐसा करना मुमकिन नहीं था
"तेरी छातियाँ तो रसिक की अम्मा से भी बड़ी बड़ी है.. " आखिर ससुर ने रूखी की निप्पलों को छोड़ दिया
"आपने तो सारा दूध खतम कर दिया बापू" उस बूढ़े के पीठ पर हाथ पसारते हुए रूखी ने कहा.. वह अपने ससुर को ऐसे सहला रही थी जैसे कसाई हलाल करने से पहले बकरे को सहलाता है..
ससुर ने रूखी की लचकदार चर्बी वाली कमर पर अपना खुरदरा हाथ फेरा.. रूखी के भोसड़े से कामरस की धारा बह रही थी.. बूढ़े ने रूखी के घाघरे में हाथ डालकर उसके गोल मटके जैसे दोनों कूल्हों को पकड़ लिया..
रूखी को बहोत गुस्सा आ रहा था.. ये बहनचोद हर जगह हाथ फेर रहा है पर मेरी चुत को क्यों नहीं छु रहा!! कैसे कहूँ.. शर्म आ रही है.. और अभी वो बुढ़िया भी आ टपकेगी..
रूखी ने बूढ़े को अपनी छातियों से दूर कर दिया..
"क्या हुआ बहु?" ससुर आश्चर्य से रूखी को देखने लगा
"अब दूसरे वाले की बारी.. दोनों तरफ एक सा वजन होना चाहिए ना.. " कहते हुए रूखी ने अनुभवी रंडी की अदा से अपना दूसरा भारी स्तन ससुर के हाथों में थमा दिया
"बहु.. इतनी भारी छातियों का वज़न नहीं लगता तुझे.. ?? कम से कम ३-४ किलो का होगा एक.. "
बिना जवाब दिए रूखी खटिया पर लेट गई.. और अपने ससुर को बगल में लिटा दिया.. अपना बाँया उरोज मुंह में देते हुए बोली
"बातें बाद में करेंगे.. पहले जो काम करने बैठे है उसे तो खतम कर लो.. कब से बस बोलें ही जा रहे हो..!!" रूखी ने अपने पैर को घुटने से मोड़ा और ऐसी स्थिति में लेकर आई की उसका घुटना सीधा बूढ़े के लंड से जा टकराए..
ससुर की लंगोट.. मधुमक्खी के छत्ते की तरह उभर गई थी.. रूखी के भोसड़े में आग लग गई थी.. उसने ससुर के लंड को अपने घुटने से छूते हुए उसे अपने पास खींचा
"ये क्या कर रही हो बेटा.. नहीं नहीं.. ये ठीक नहीं है"
रूखी ने अपने घुटनों से एक जोरदार धक्का लगा दिया ससुर के लंड पर.. बूढ़े की चीख निकल गई..
"अब चुपचाप जो कहती हूँ वो करो.. दूध तो पी लिया है मेरा.. अब वसूल भी तो करने दो मुझे.. खबरदार जो किसी को एक शब्द भी बताया है तो" अपने ससुर को बाहों में दबाते हुए रूखी ने कहा.. गुस्साई शेरनी जैसी रूखी उस बूढ़े पर टूट पड़ी.. ससुर को नीचे लिटाकर वह उसके ऊपर चढ़ गई.. दोनों के वज़न से खटिया का एक पैर टूट गया.. खटिया के टूटते ही दोनों फर्श पर आ गिरे.. ऐसे गिरे जैसे बुमराह के बाउन्सर के सामने झिम्बाब्वे का बेट्समेन गिर जाता है.. दोनों को मुंह से एक साथ चीख निकल गई.. ससुर इसलिए चीखा की उसकी पीठ नीचे फर्श पर टकराई और रूखी का पूरा वज़न उस पर गया.. रूखी इसलिए चिल्लाई क्योंकी नीचे गिरने के कारण उसकी निप्पलें बूढ़े के मुंह के साथ बड़े जोर से दब गई।
रूखी के वज़न तले लाचार ससुर ऐसे दबा था जैसे महंगाई के बोज तले प्रजा दबी हुई है.. दोनों के जिस्म एक दूसरे में उलझे हुए थे तभी.. बाहर दरवाजा खुलने की आवाज आई.. मर गए.. जिसका डर था वही हुआ.. बुढ़िया आ गई!!
"अरे.. इतनी देर में रसिक की अम्मा वापिस भी आ गई.. !! उसे तो मंदिर में भी चैन नहीं है" कहते हुए ससुर रूखी को अपने शरीर के ऊपर से हटाते हुए खड़ा हुआ और भागकर अपने कमरे में चला गया
रूखी उठकर शीला के पास आई.. शीला हँसिये के हेंडल को अपनी चुत में घुसेड़कर खड़ी खड़ी मुस्कुरा रही थी।
"कमिनी.. तूने तो अपने ससुर को ही सेट कर लिया" रूखी की कमर पर चिमटी काटते हुए शीला ने कहा
"भाभी.. मुझे शक है की मेरे ससुर ने मुझे जीवा के साथ देख लिया है.. जिस रात रघु और जीवा मुझे चोद कर गए थे.. तब से इस बूढ़े ने मुझे सताना शुरू कर दिया था.. मेरे साथ रोज अश्लील बातें करता है और छातियों को घूरता रहता है"
"अच्छा.. तो ये बात है!!" शीला ने कहा
रूखी: "हाँ भाभी.. पर बूढ़ा है बड़े काम की चीज.. छाती तो ऐसे चूस रहा था.. मेरे छेद में से नलके की तरह पानी बहने लगा था.. सब गीला गीला हो गया"
शीला: "साली, एक नंबर की हरामी है तू ..."
रूखी ने शीला के ब्लाउस के बटन बंद करते हुए कहा "इसीलिए तो मुझे हँसिये को अंदर डालने की जरूरत नहीं पड़ती है भाभी" कहते हुए उसने शीला की चुत से हँसिये को खींचकर बाहर निकाला..
तभी शीला के मोबाइल पर कविता का फोन आया.. शीला ने उसके साथ कुछ बात की और फोन रख दिया
रूखी की सास.. कमरे में अंदर आई.. और बोली "अरे रूखी.. शीला बहन को ताज़ा मक्खन जरूर देना"
"हाँ अम्मा.. बस निकालने ही जा रही थी.. "
"और बताइए शीला बहन.. हालचाल ठीक है सब? भैया कैसे है?" शीला के ब्लाउस के दो खुले बटनों को देखते हुए रूखी के सास ने बड़े विचित्र ढंग से पूछा