हम दोनो सोहन के घर की ओर निकल गये , ये साले कैसे लोग थे दिमाग़ के नाम पर कुच्छ चलते ही नही , किसी की भी बात पर यकीन कर लेते है , भोले थे लेकिन दिल के बिल्कुल ही सॉफ कोई कड़वाहट नही कोई दाग नही ..
बस प्रेम से भरे हुए लोग थे ..
मेरे सामने सोहन खड़ा हुआ था , सोहन , हरिया की तरह बावला नही था उसे थोड़ी समझ थी ..
“ये कौन है “
“अबे मुंबई से आए है”
हरिया ने पूरी कहानी बताई , रात हो चुकी थी और कहानी सुन कर सोहन के भाव चढ़ गये , उसने मुझे बहुत ही संदेह की निगाहो से देखा ..
“आप अपना चेहरा क्यो छुपाए हुए है “
मेरे सामने मेरे दोस्त खड़े थे , और मैं उन्हे सीने से लगाना चाहता था उन्हे एक साथ देखकर मेरे आँखो मे आँसू आ गये जो सोहन से नही छुप पाया था ..
उसने बस मेरे आँखो मे देखा ..
“साले सोनू..”
उसने थोड़ा उच्छा बोला लेकिन मेरा इशारा मिलते ही वो चुप हो गया और सीधे मेरे सीने से आ लगा ,
हरिया थोड़ा हड़बड़ाया हुआ हमे देख रहा था लेकिन जैसे ही उसे समझ आया की ये क्या हो रहा है वो भी खुशी मे कूद पड़ा था ..
हम तीनो खेत मे बैठकर दारू पी रहे थे , जी हा मेरे दोस्त मेरे आने की खुशी मे कही से देसी दारू और देसी मुर्गे का इंतज़ाम कर लाए थे, ये सोहन की सब्जी की बड़ी थी..
“भाई जब से तू गया है ना वो मज़ा नही आता बे “
हरिया अभी भी एमोशनल हो रहा था ..
“और बता शहर कैसा है , साले तू तो चमक ही गया बे , बिल्कुल ही पहचान नही आ रहा , बिल्कुल ही साहब लग रहा है ,मादरचोद ये घड़ी तो देख ..”
“बस भाई वहाँ कुच्छ अच्छे दोस्त मिल गये , सालो तुम्हारी बहुत याद आती थी बे , और गाँव की भी … यार भैया और उस रांड़ के क्या हाल चाल मन करता है साले को घर से निकाल कर मारु , लेकिन अभी किसी के सामने आने मे ख़तरा है ..”
“कैसा ख़तरा बे , ऐसे भी तेरा भाई कब ऐसा नही रह गया की तेरा कुच्छ उखाड़ भी पाए , वो तो खुद ही भिखारी हो गया है ..”
“क्या ..??”
“हा वो साली सच मे बहुत बड़ी रांड़ है भाई , पहले तेरे भाई को फँसा कर भाभी और तुझे निकलवा दी , फिर खुद सारा जायदाद अपने नाम करवा लिया और अब तेरे भाई को भी घर से धक्का मार कर निकलवा दिया ..”
“क्या..?”
ये मेरे लिए एक नया बॉम्ब था
“अरे हा तेरा भाई साला भिखारी जैसे चौराहे पर पड़ा रहता है , शायद उसके पाप की यही सज़ा दी है भगवान ने उसे , और जिसके लिए उसने हमारी भाभी को घर से निकाला था अब वो अपने यारो के साथ मिलकर घर मे बस ऐयाशी करती है, सालो ने पूरे गाँव का ही महॉल खराब कर रखा है “
भैया के बारे मे जानकर पता नही क्यो मुझे थोड़ा दुख हुआ , आख़िर मेरा भाई था ..
लेकिन फिर जब मेरे सामने वो रात की बात आई जब उसने भाभी और मुझे घर से निकाल दिया था , हमारे रिश्ते को बदनाम किया था .. ये सोचकर ही फिर से उसके लिए दिल मे बस गुस्सा और घृणा ही पैदा हुई ..
“अबे उस चूतिए को लेकर अपना मूड मत खराब कर , उसे जो सज़ा मिलनी चाहिए थी वो तो कुदरत ने ही उसे दे दी , तू सुना साले क्या कर रहा है शहर मे जो ऐसा चमक रहा है , और इन दिनों मे साले किसी की ली या अभी भी वही कुवरा छोरा है ..बॉडी वोडी तो सॉलिड बना लिया बे “
उनकी बात सुनकर मेरे होंठो मे मुस्कान आ गयी ..
मैने उन्हे बताया की कैसे मैं शहर पहुचा और कैसे कलवा से मुलाकर हुई , कैसे पांडे को मारा और संपत से जा मिला , कैसे कॉलेज गया और दोस्त बने फिर कैसे फिर से मर्डर हुए और मेरा नाम यूज किया गया , फिर सुस जो मेरी फ्रेंड वित बेनेफिट बनी , रानी की मैने ली और उनकी भाभी नेहा के बारे मे बताया … और फिर पार्टी और भाभी और कोमल के बारे मे ..
वो कभी हँसे तो कभी आश्चर्य से उनका मूह ही खुला गया, कभी उन्हे यकीन ही नही आया की मैं सच बोल रहा हू लेकिन खबर तो उन्होने भी पढ़ी या सुनी थी …
“बाप रे भाई , यहाँ से तो तू अच्छा भला निकला था बे , इतने कांड कर डाले .. “
सोहन को यकीन ही नही हो रहा था की उसका वो भोला भला दोस्त जो उसके सलाह के बिना कुच्छ भी नही करता था ऐसा सयाना कैसे बन गया ..
“अरे वो सब छोड़ साले भाभी से कब मिला रहा है “
हरिया उच्छल उठा
“भाई अभी वो अपनी मा के कारण थोड़ा परेशान है “
“अबे हम हमारी भाभी की बात कर रहे है “
मैने उसे अजीब निगाहो से देखा
“मैं तो तेरी ही भाभी की बात कर रहा हू “
“अबे नही मैं शहर वाली भाभी की बात कर रहा हू “
“अबे गान्डु मैं भी शहर वाली भाभी की ही बात कर रहा हू “
“अबे चूतिए मैं भाभी की बात कर रहा हू भाभी की नही “
हरिया की बात सुनकर सोहन जोरो से हंस पड़ा
“अबे चूतिए साफ साफ बोल ना की तू आरती भाभी की बात कर रहा है या नेहा भाभी की ??”
“मैं नेहा भाभी की बात कर रहा था “ हरिया ने च्चिदते हुए कहा
“साले गान्डु मैं भी उसी के बारे मे ही बता रहा था ..”
मैने अपना सर पकड़ लिया और सभी जोरो से हंस पड़े ..
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