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Adultery Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ

तभी एक भक्त चिल्लाया

“बोलिए ज्ञानियो से ज्ञानी , ध्यानियो से ध्यानी , सिद्ध पुरुष , माना मानव , चूतियाओ के चूतिया महा चूतिया .. चूतिया महराज की ..”

जय जय ………

आक्ष मे एक घोष होने लगा था …….
 
“मुझे यहाँ कुछ ठीक नही लग रहा है अंकित, ये लोग कैसी कैसी बाते कर रहे है ..”

महिमा का चेहरा उतर गया था

“अरे मा आपने इन्हे पहचाना नही ??”

नेहा की बात से हम सभी उसे ही देखने लगे

“अरे ये डॉक्टर चुन्नी लाल है .. डॉक्टर चूतिया, पापा के दोस्त ,बस दाढ़ी बढ़ा ली है ..”

महिमा ने फिर से उसे देखा और उसके चेहरे मे एक चमक आ गयी ..

थोड़ी ही देर मे सब भीड़ हट गयी थी और हमे बाबा जी के कमरे मे भेजा गया ,

हमने देखा की वो अपनी दाढ़ी उतार रहे थे ..

“ऊओफ्फ साला ये काम भी बड़ा अजीब है … कैसे कैसे चूतिए यहाँ आते रहते है “

उन्होने पास मे रखा पानी पी लिया, फिर हमारे ओर देखने लगे

“हाई महिमा कैसी हो , हाई नेहा बेबी “

“डॉक्टर साहब ये आप किन नाटको मे पड़े है “

महिमा की बात सुन कर डॉक्टर जोरो से हंस पड़ा ..

“अरे मत पूछो यार बस एक काम के चक्कर मे यहाँ फँसा हुआ हू , जो बाबा जी यहाँ थे वो नही है तो मैं ही बाबा बना हुआ हू “

“लेकिन ऐसे मे तो आश्रम की ऐसी की तैसी हो जाएगी “

मैने मुस्कुराते हुए कहा

“कोई नही देखेंगे ऐसे भी मैं एक डॉक्टर हू तो लोगो का इलाज करने की कोशिस करता हू .. थोड़े अलग तरीके से , तुम लोग बताओ की यहाँ आना कैसे हुआ ..”

डॉक्टर की बात से सभी के चेहरे मे एक मुस्कान आ गयी थी .

“डॉक्टर साहब हम एक मुसीवत मे फँस गये है “

महिमा की बात से डॉक्टर थोड़े अलर्ट हो गये थे, मैने अपनी कहानी बतानी शुरू की , की कैसे हम गाँव से शहर पहुचे और कैसे भाभी को जीवा गैंग ने ईस्तमाल किया ,कैसे मर्डर्स हुए और शिवा का नाम यूज किया गया जो की मेरा ही पैट नेम है , कैसे हमे ये नही पता की कौन हमारे साथ है और कौन हमारे खिलाफ … और अब हमे कोमल की ज़रूरत है जो हमे सच्ची बता सके की आख़िर हुआ क्या था .. वही महिमा ने भी अपने बारे मे सब बताया ..

“ओह्ह्ह्ह तो तुम कोमल को ढूँढते हुए आए हो , काजल के कहने पर …हुम्म सही जगह आए हो लेकिन तुम्हे एक दिन दो का इंतजार करना होगा ..”

“क्यो..??”

मेरे मूह से अचानक से निकल गया ..

“क्योकि कोमल उर्फ शक्ति तुम्हे ढूँढती हुई शहर चली गयी है … “

“व्हाट ..:व्हाट:”

सभी के मूह से एक साथ निकला
 
“हा जब से तुम लोग गाँव छोड़कर गये तब से वो भी तुम्हे ढूंढते हुए शहर चली गयी , क्योकि उसे ये अंदाज़ा लग गया था की तुम्हारे चेहरे के कारण तुम फँस सकती हो .. कुछ दिनों तक वो मेरे पास ही थी ..”

“व्हाट…”

हम सभी के मूह से फिर से निकला

“अब इसमे इतना चौकाने वाली क्या बात है , क्या तुम लोगो को नही पता की उसे तिवारी और जीवा से छुपाकर इस गाँव मे बसाने वाला मैं ही था “

हम सब एक दूसरे का चेहरा देखने लगे थे

“वो जब शहर आई तो पहले मेरे पास ही रुकी थी , हम तुम्हे ढूँढ ही रहे थे की पांडे का मर्डर हो गया , इसी बीच मुझे भी इधर आना हो गया .. हमे ये तो पता चल गया की तुम लोग संपत के हवेली मे हो .. शक्ति सामने नही आना चाहती थी इसलिए वो तुमसे नही मिली .. और मुझे इसी दौरान एक काम के सिलसिले मे यहाँ आना पड़ गया तब से मैं यही हू ..”

“तो मा कहा है ??”

भाभी लगभग चिल्ला पड़ी

“शहर मे मेरे घर मे ही रह रही थी लेकिन मेरे आने के बाद से उसका कोई पता नही है , उसने तुम्हारे पिता को वापस भेज दिया वो अभी इसी आश्रम है , थोड़ी देर मे आता होगा … लेकिन तुम्हारी मा वही रुक गयी “

“क्या.. पिता जी ऐसा कैसे कर सकते है , उन्होने मा को अकेले कैसे छोड़ दिया “

भाभी मानो आग बाबूला हो गयी थी , उन्हे इतने गुस्से मे मैने कभी नही देखा था ..

उनकी बात सुनकर डॉक्टर मुस्कुरा उठे

“बाबू वो शक्ति है, उसकी चिंता तुम छोड़ ही दो .. और उसके सामने तो बड़े बड़े गॅंग्स्टर्स की नही चली तुम्हारे पिता तो बेचारे भोले भाले से इंसान है … उसने कह दिया तो बेचारे को वापस आना ही पड़ा ..”

डॉक्टर की बात सुनकर भाभी भी शांत हो गयी थी , इतने दिनों मे उन्हे ये तो पता चल ही गया था की उनकी मा आख़िर चीज़ क्या है ..

“तो क्या वो दो खून ..”

मेरे मन मे अचानक से एक शंका जागी

“कुछ भी कह नही सकते .. “

डॉक्टर ने भी सफाई दे दी

“लेकिन काजल ने इस बारे मे हमे क्यो नही बताया ..”

मुझे काजल पर गुस्सा आ रहा था ..

“अब उसे खुद पता हो तब वो बताएगी , और मुझे क्या पता था की वो इस केस मे फँस जाएगी , और मैं भी तो इतने दिनों से यहा ही हू , सब से दूर … काजल और मेरी इस बारे मे बात ही नही हुई … चलो तुम लोग तक गये होगे तुम लोग आराम करो और जब तक कोमल का पता नही चल जाता यही रहो क्योकि बाहर तिवारी और जीवा के लोग भी तुम्हे ढूंड रहे होंगे .. और सबसे पहले वो इस गाँव मे भी चक्कर काट लेंगे .. मैं कोमल को ढूँढने के लिए अपने लोगो को लगा देता हू , तुम्हारा नाम सुनते ही वो यहाँ चली आएगी उसे पता है की मैं कहा हू “

“लेकिन आख़िर मा शहर गयी ही क्यो सब मेरी ग़लती है “

भाभी अपना सर पकड़कर रो रही थी

“आरती तुम्हारी मा बहुत ही चालाक महिला है , उसकी शक्ति और बुद्धि की लोग मिशाले दिया करते थे .. जब तुम दोनो गाँव से भागे तो उसने तुरंत ही पता कर लिया की आख़िर तुम गये कहा हो और किसके हाथ लग गये , वो ये भी जानती थी की जीवा पहले तुमसे तुम्हारे गाँव का पता निकलवाएगा फिर अपने आदमियो की कोमल को पकड़ने के लिए भेजेगा , इसलिए वो भी तुरंत ही गाँव छोड़कर चली गयी .. और ऐसा हुआ भी जीवा से तुम लोगो के मिलने के दूसरे दिन ही कोमल की पता करने वाले आने लगे थे , कॉलेज के बाहर ही एक नयी दुकान भी खुल गयी , जो हर हरकत पर नज़र बनाए हुए है , अब तुम समझ सकते हो की तुम लोगो का यहाँ आना भी उन्हे पता चल गया होगा , और शायद यहाँ रुकना भी तो तुम्हे झूठ मूठ ही सही लेकिन फिर से गाँव मे जाकर एक गेम खेलना होगा ताकि तुमपर नज़र बनाए रखने वाले गुमराह हो सके …लेकिन वो सब कल ही करना .. ऐसे भी यहाँ शहर से जो लोग आते है एक दिन रुककर ही जाते है “

डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा ..
 
कोमल शहर मे थी , जिसके लिए हम यहाँ आए थे वो ही गायब थी , क्या वही शिवा बनकर कतल कर रही थी ???????

मैने अभी तक जितनी भी चीज़े देखी थी मुझे लगने लगा था की कुच्छ भी हो सकता है , मुझे तो अब सब पर ही शक होता रहता था ,,

डॉक्टर चूतिया के आश्रम मे बैठे बैठे मैं बोर हो रहा था , हम लोगो के पास कोई भी काम भी तो नही था , तभी मेरे दिमाग़ मे एक विचार कौंध गया ..

मैने अपना चेहरा ढक लिया और कही निकल गया, शाम का वक़्त था ..

मैं सबकी नज़रो से बचता हुआ अपने गाँव पहुच चुका था..

अपने घर के बाहर , ये वही घर था जिसमे मैने अपना बचपन बिताया था , जिसमे मा बाप का प्यार मिला और फिर भाई से दुड़कार भी ,

यही वो घर था जहाँ से मुझे और मेरी भाभी को बेइज्जत करके निकाल दिया गया था ..

मैं कुच्छ देर तक वही खड़ा रहा , सारे दृश्य जैसे मेरे आँखो मे आ गये थे , जैसे कोई फिल्म चल रही हो ,मेरे आँखो मे आँसू आ गये थे..

मैने वहाँ से पलटा और फिर किसी गंतव्य स्थान की ओर चल दिया ..

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“कौन है ..??”

“मैं मुंबई से आया हू , अनुराग साहब को आपका काम इतना पसंद आया की आपको तुरंत ही मुंबई बुलाए है ..”

“क्या??”

हरिया जैसे खुद पड़ा था , मेरा चेहरा बँधा था मैं मेरे बचपन के दोस्त हरिया के घर के बाहर खड़ा था , इन दिनों मे मेरा शरीर भी बहुत कुच्छ बदल गया था और आवाज़ मैने खुद थोड़ी सी बदल ली थी ..

मुझे पता था की हरिया अनुराग कश्यप की फ़िल्मो का बहुत बड़ा वाला पंखा था , और जैसे एक कीड़ा सबके दिलो मे पलता है वैसा ही उसके दिल मे भी पल रहा था फेमस होने का , वो भी हीरो बनकर ..

वो मुझे हमेशा कहता था की हम जैसे देहाती लोगो को अगर कोई चान्स दे सकता है तो वो है अनुराग कश्यप ..

मुझे लगा ही था की ये साला ज़रूर ट्राइ कर रहा होगा ..

“अनुराग भैया हमको बुलाए है ??”

हरिया जैसे बौरा ही गया था ..

“अरे बिल्कुल अपने ही गाँव घर के आदमी हो तुमका देखे तो बोले की अगली फिल्मवा मे हमरा हीरो यही होगा , हरिया ..”

हरिया का शरीर जैसे कपाने लगा था ..

“अरे भैया आप तनिक अंदर आओ हो .. थोड़ा बैठो “

मैं अभी अंदर नही आना चाहता था ..

मुझे हरिया को ऐसे देखकर बहुत ही मज़ा आ रहा था .. असल मे मैं तो उसे जोरो से गले से लगाना चाह रहा था लेकिन क्या करे जब कोई खेल शुरू हो गया हो तो फिर उसे अंजाम तक भी तो पहुचना पड़ता है ..

“अरे हरिया भैया आपके वो दोस्त कहा है सोहन ..”

हरिया अचानक से मेरी ओर देखने लगा

“क्यो भैया ??”

“अरे साइड आक्टर की भी ज़रूरत पड़ती है ना , और आपके फ़ेसबुक मे अपने उसके साथ फोटो डाली थी ..”

जैसे हरिया को सब समझ आ गया हो

“अरे हा हा , चलो तो उससे भी मिल आते है “

हम दोनो सोहन के घर की ओर निकल गये , ये साले कैसे लोग थे दिमाग़ के नाम पर कुच्छ चलते ही नही , किसी की भी बात पर यकीन कर लेते है , भोले थे लेकिन दिल के बिल्कुल ही सॉफ कोई कड़वाहट नही कोई दाग नही ..

बस प्रेम से भरे हुए लोग थे ..
 
हम दोनो सोहन के घर की ओर निकल गये , ये साले कैसे लोग थे दिमाग़ के नाम पर कुच्छ चलते ही नही , किसी की भी बात पर यकीन कर लेते है , भोले थे लेकिन दिल के बिल्कुल ही सॉफ कोई कड़वाहट नही कोई दाग नही ..

बस प्रेम से भरे हुए लोग थे ..

मेरे सामने सोहन खड़ा हुआ था , सोहन , हरिया की तरह बावला नही था उसे थोड़ी समझ थी ..

“ये कौन है “

“अबे मुंबई से आए है”

हरिया ने पूरी कहानी बताई , रात हो चुकी थी और कहानी सुन कर सोहन के भाव चढ़ गये , उसने मुझे बहुत ही संदेह की निगाहो से देखा ..

“आप अपना चेहरा क्यो छुपाए हुए है “

मेरे सामने मेरे दोस्त खड़े थे , और मैं उन्हे सीने से लगाना चाहता था उन्हे एक साथ देखकर मेरे आँखो मे आँसू आ गये जो सोहन से नही छुप पाया था ..

उसने बस मेरे आँखो मे देखा ..

“साले सोनू..”

उसने थोड़ा उच्छा बोला लेकिन मेरा इशारा मिलते ही वो चुप हो गया और सीधे मेरे सीने से आ लगा ,

हरिया थोड़ा हड़बड़ाया हुआ हमे देख रहा था लेकिन जैसे ही उसे समझ आया की ये क्या हो रहा है वो भी खुशी मे कूद पड़ा था ..

हम तीनो खेत मे बैठकर दारू पी रहे थे , जी हा मेरे दोस्त मेरे आने की खुशी मे कही से देसी दारू और देसी मुर्गे का इंतज़ाम कर लाए थे, ये सोहन की सब्जी की बड़ी थी..

“भाई जब से तू गया है ना वो मज़ा नही आता बे “

हरिया अभी भी एमोशनल हो रहा था ..

“और बता शहर कैसा है , साले तू तो चमक ही गया बे , बिल्कुल ही पहचान नही आ रहा , बिल्कुल ही साहब लग रहा है ,मादरचोद ये घड़ी तो देख ..”

“बस भाई वहाँ कुच्छ अच्छे दोस्त मिल गये , सालो तुम्हारी बहुत याद आती थी बे , और गाँव की भी … यार भैया और उस रांड़ के क्या हाल चाल मन करता है साले को घर से निकाल कर मारु , लेकिन अभी किसी के सामने आने मे ख़तरा है ..”

“कैसा ख़तरा बे , ऐसे भी तेरा भाई कब ऐसा नही रह गया की तेरा कुच्छ उखाड़ भी पाए , वो तो खुद ही भिखारी हो गया है ..”

“क्या ..??”

“हा वो साली सच मे बहुत बड़ी रांड़ है भाई , पहले तेरे भाई को फँसा कर भाभी और तुझे निकलवा दी , फिर खुद सारा जायदाद अपने नाम करवा लिया और अब तेरे भाई को भी घर से धक्का मार कर निकलवा दिया ..”

“क्या..?”

ये मेरे लिए एक नया बॉम्ब था

“अरे हा तेरा भाई साला भिखारी जैसे चौराहे पर पड़ा रहता है , शायद उसके पाप की यही सज़ा दी है भगवान ने उसे , और जिसके लिए उसने हमारी भाभी को घर से निकाला था अब वो अपने यारो के साथ मिलकर घर मे बस ऐयाशी करती है, सालो ने पूरे गाँव का ही महॉल खराब कर रखा है “

भैया के बारे मे जानकर पता नही क्यो मुझे थोड़ा दुख हुआ , आख़िर मेरा भाई था ..

लेकिन फिर जब मेरे सामने वो रात की बात आई जब उसने भाभी और मुझे घर से निकाल दिया था , हमारे रिश्ते को बदनाम किया था .. ये सोचकर ही फिर से उसके लिए दिल मे बस गुस्सा और घृणा ही पैदा हुई ..

“अबे उस चूतिए को लेकर अपना मूड मत खराब कर , उसे जो सज़ा मिलनी चाहिए थी वो तो कुदरत ने ही उसे दे दी , तू सुना साले क्या कर रहा है शहर मे जो ऐसा चमक रहा है , और इन दिनों मे साले किसी की ली या अभी भी वही कुवरा छोरा है ..बॉडी वोडी तो सॉलिड बना लिया बे “

उनकी बात सुनकर मेरे होंठो मे मुस्कान आ गयी ..

मैने उन्हे बताया की कैसे मैं शहर पहुचा और कैसे कलवा से मुलाकर हुई , कैसे पांडे को मारा और संपत से जा मिला , कैसे कॉलेज गया और दोस्त बने फिर कैसे फिर से मर्डर हुए और मेरा नाम यूज किया गया , फिर सुस जो मेरी फ्रेंड वित बेनेफिट बनी , रानी की मैने ली और उनकी भाभी नेहा के बारे मे बताया … और फिर पार्टी और भाभी और कोमल के बारे मे ..

वो कभी हँसे तो कभी आश्चर्य से उनका मूह ही खुला गया, कभी उन्हे यकीन ही नही आया की मैं सच बोल रहा हू लेकिन खबर तो उन्होने भी पढ़ी या सुनी थी …

“बाप रे भाई , यहाँ से तो तू अच्छा भला निकला था बे , इतने कांड कर डाले .. “

सोहन को यकीन ही नही हो रहा था की उसका वो भोला भला दोस्त जो उसके सलाह के बिना कुच्छ भी नही करता था ऐसा सयाना कैसे बन गया ..:)

“अरे वो सब छोड़ साले भाभी से कब मिला रहा है “

हरिया उच्छल उठा

“भाई अभी वो अपनी मा के कारण थोड़ा परेशान है “

“अबे हम हमारी भाभी की बात कर रहे है “

मैने उसे अजीब निगाहो से देखा

“मैं तो तेरी ही भाभी की बात कर रहा हू “

“अबे नही मैं शहर वाली भाभी की बात कर रहा हू “

“अबे गान्डु मैं भी शहर वाली भाभी की ही बात कर रहा हू “

“अबे चूतिए मैं भाभी की बात कर रहा हू भाभी की नही “

हरिया की बात सुनकर सोहन जोरो से हंस पड़ा

“अबे चूतिए साफ साफ बोल ना की तू आरती भाभी की बात कर रहा है या नेहा भाभी की ??”

“मैं नेहा भाभी की बात कर रहा था “ हरिया ने च्चिदते हुए कहा

“साले गान्डु मैं भी उसी के बारे मे ही बता रहा था ..”

मैने अपना सर पकड़ लिया और सभी जोरो से हंस पड़े ..

***********
 
हम एक गाड़ी मे 3 लोग आश्रम की ओर जा रहे थे , जैसा हम अक्सर घुमा करते थे , दारू अच्छी ख़ासी चढ़ि हुई थी ,इतने दिनों बाद दोस्तो से मिलने की वजह से हमने बहुत मस्ती की

ना जाने कितनी बाते उनसे करनी थी , रात के 3 बज चुके थे , मैने उन्हे बहुत मना किया लेकिन वो मुझे आश्रम तक छोड़ने पर तुले हुए थे , हम चौराहे से गुजर रहे थे तभी मेरी नज़र एक भिखारी पर पड़ी ..

सोहन नशे मे था और गाड़ी ले जाकर उसके सामने रोक दिया , भिखारी जैसे हड़बड़ाते हुए उठ बैठा ,

ऐसा लग रहा था जैसे कई दिनों से नहाया नही है ना ही ढंग से खाना ही मिला है , कपड़े के नाम पर शरीर मे बस चिथड़े थे , शरीर डर से कांप रहा था …

उसने तुरंत ही हमारे सामने हाथ जोड़ लिया ..

“नही मुझे मत मारना मुझे माफ़ कर दो , तुम उसके साथ कुच्छ भी करो मैं कुच्छ नही बोलूँगा .. “

“ये क्या बोल रहा है “

“उस रांड़ चंचल को इसने एक दिन अपने आशिक़ो के साथ नंगे पकड़ लिया था , इसने गुस्से मे आकर उसपर हाथ छोड़ दिया सोचा होगा की ये भी भोली भाली आरती भाभी की तरह मार खा जाएगी और इस बार तो उसकी ग़लती साफ साफ सामने थी .. सभी ने इसे कमरे मे बंद करके इतना मारा था की थोड़ा हिल गया .. 10 दिन तक एक कमरे मे बंद रखा था , रोज कुत्तों की तरह इसे मारते थे खाने को खुच्छ देते नही थे , सुना है की वो इसके मूह मे मुतती थी ..

फिर इसे घर से बाहर फेक दिया , गाँव वाले दया करके खाने के लिए दे देते है , लेकिन तब से ये थोड़ा पागल जैसा हो गया है .. कोई भी हल्के से भी धमका दे तो डर जाता है , रात रात भर रोता रहता है .. शायद अपने गुनाहो की माफी माँगता है ..”

ये मेरा भाई था , मैने उसकी आँखो मे देखा , वो ना तो मेरे दोस्तो को पहचान रहा था ना ही मुझे, वो ऐसे डरा हुआ था जैसे कोई उसकी जान लेने वाला है ..

वो डर से काँप रहा था , ये सज़ा थी , ये सज़ा थी जो कुदरत ने उसे दी थी ..

ये उसके पापो की सज़ा थी , इस नशे की हालत मे भी मेरे आँखो मे पानी सा आ गया था , ये खुशी था या की गम …

खुदा की मेहर ही थी की उसने इसे इसके पापो की सज़ा दे दी , लेकिन इसके इस अवस्था को देखकर भी तो दिल मे एक दर्द सा हो रहा था ..

मैने जेब से कुच्छ पैसे निकाले और उसके ऊपर फेक दिए ..

“इन्ही कागज के कुच्छ टुकड़ो के कारण तूने मेरी भाभी की पवित्रता पर शक़ किया था , हमारे संबंधो की प्रेम को बदनाम किया , तेरे कारण देख आज हम क्या से क्या हो गये है , कितने दर्द झेले , एक सामान्य सी जिंदगी थी हमारी लेकिन तूने.. तूने सब बर्बाद कर दिया.. किसके कारण .. किस चीज़ की वासना थी तुझे.. जिस्म की ?? दौलत की ?? देख .. देख की आज तेरे पास क्या है .. जिस्म का सुख.. नही , तू बीमार है , तका हुआ है विक्षिप्त होकर घूम रहा है , खाने के लिए भी तुझे भीख माँगनी पड़ रही है … और दौलत .. (मैं जोरो से हंस पड़ा था , लेकिन फिर भी मेरे आँखो मे पानी था ) दौलत … तूने मुझे इसीलिए फसाया था ना ताकि दौलत को हड़प सके … जो कुआ तूने हमारे लिए खोदा था उसमे तू खुद ही गिर गया रे .. ये ले पकड़ खा इसे … “

मैने अपने हाथो मे पकड़ा हुआ चिकन का टुकड़ा उसके सामने फेक दिया .. वो बड़ी ही लालच के साथ उसे देख रहा था ..

“सोनू जाने दे उसे कुच्छ समझ नही आएगा “ सोहन ने मुझे खींच लिया ..

मैं जैसे ही पीछे हटा उसने वो चिकन का टुकड़ा उठा लिया वो उसे ऐसे खा रहा था जैसे कोई कुत्ता रोटी को ख़ाता है ..

अपने भाई की ये हालत देख कर मान मे एक दुख तो हुआ लेकिन फिर उसकी करनी को याद करके मैं वहाँ से हट गया लेकिन जाते जाते मैने अपने मोबाइल से उसका वीडियो बना लिया ……
 
दिल मे एक अजीब सा नया विचार लेकर मैं यहाँ से जा रहा था ..

शायद इस कुदरत के नियम ऐसे है की जो जैसा करेगा वो वैसा भरेगा …

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“अरे उठो ना ये क्या घोड़ा बेचकर सो रहे हो “

नेहा मुझे जोरो से उठा रही थी ,

जब नींद टूटी तो शराब के नशे का आभास होने लगा, रात काअभी भी अच्छे से नही उतरा था ..

“सोने दे ना “

“दोपहर हो गयी है और साहब को सोना है , यहाँ काम से आए हो या दारू पीने , अभी तक पूरे शरीर से दारू की बदबू आ रही है , चलो उठो.. यहाँ कांड हो गया है और तुम्हे कोई फ़िक्र ही नही है “

कांड????

“क्या हुआ ?”

“फ्रेश हो कर आ जाओ भाभी जल्दी बुला रही है ,अब की नही उठे ना तो पूरा बाल्टी तुम्हारे ऊपर डाल दूँगी “

नेहा ने थोड़ा ज़ोर दे कर कहा, ऐसा लग रहा था जैसे कोई अपने पति को उठा रही हो , ये ख़याल आते ही मेरे होंठो मे एक मुस्कान आ गयी ..

“ओके जानू “

माने थोड़ी शुरुआत से कहा था जिससे उसके होंठो मे भी मुस्कान आ गयी

“बड़े आए जानू वाले जल्दी आओ”

वो वहाँ से निकल गयी थी , मैं भी तैयार होकर तुरंत भाभी के कमरे मे पहुचा , टीवी ऑन था और लगभग सभी वही बैठे थे..

“तू पागल हो गये हो क्या कहा थे रात भर …(फिर अपना नाक बंद करती है ) देसी शराब पी कर घूम रहे हो यानी गाँव गये थे “भाभी ने मुझे घूरा तो मैं झूठ नही बोल पाया

“हा भाभी वो दोस्तो के साथ ..”

“तुम पागल हो गये हो क्या .. ये देखो ये क्या हो गया है गाँव मे “

मैने टीवी की ओर देखा न्यूज़ चल रही थी ..

“शिवा के नाम से कत्ल करने वाली शक्ति गेंग की सदाशी आज पकड़ी गयी , पुलिस ने उसे उसके घर से तब गिरफ्तार किया जब उसने 3 नये खून किए वो भी अपने ही आशिक़ो के , गाँव वालो के अनुसार इस कातिल का नाम चंचल है और ये अपने पति का घर छोड़कर गाँव मे रहा करती थी , वही इसने एक शादी शुदा मर्द से संबंध बनाया और फिर उसके घर मे रहने लगी लेकिन चंचल के संबंध तिवारी गैंग के 3 गुंडों से भी था , जिसके कारण उस व्यक्ति को उसी के घर से निकाल कर वो उन गुंडों के साथ रहने लगी थी , लेकिन कल रात उसी शैली मे 3नो का कतल कर दिया जिसे कतल शहर मे हो रहे है …इससे पुलिस ने ये मान लिया है की शहर मे तिवारी गैंग से जुड़े हुए लोगो को मारने वाली भी यही औरत है …”

न्यूज सुनकर मैने भाभी, महिमा, नेहा और डॉक्टर की ओर देखा जो की वही बैठे थे ..

“तो तुम्हे क्या लगता है शिवा की ये शिवा के नाम पर खून किसने किया होगा , क्या तुम्हे लगता है की ये इसी औरत ने किया है जो तुम्हारे भाई की रखैल थी ..??”

डॉक्टर ने मुझे अंकित या सोनू ना कहकर शिवा कहा था जिससे मैं थोड़ा झेप गया ..

“मुझे क्या पता डॉक्टर साहब , ऐसे भी काजल और पूर्वी दोनो ने ही एक चीज़ कही थी वो था की कातिल कोई औरत है “

डॉक्टर ना जाने क्यो मेरी बात सुनकर हसने लगा ..

“औरत हा हा औरत ही तो है , और शायद अब मुझे समझ आने लगा है की वो औरत कौन है “

उसने हम सभी को घूरा और भाभी ,मेरे और महिमा के चेहरे का भाव एक साथ बदलने लगा ……..
 
शाम होते ही मेरे दोस्त गाँव पहुच चुके थे , हमे आश्रम से निकलने की सख्त मनाही थी क्योकि बाहर की हालत सही नही चल रही थी , गाँव मे एक कत्ल हो गया था शहर से पुलिस और क्राइम ब्रांच के अलावा स्पेशल इनवेस्टिगटेर्स की टीम भी आई थी जिसमे पूर्वी और विजय भी थे , तिवारी के गैंग के साथ साथ जीवा गैंग वाले भी कुत्तों की तरह हमे ढूँढनेमे लगे थे और इस कांड के बाद तो सभी का ध्यान गाँव पर चला गया था …

लेकिन मेरे दोस्तो को कौन समझाए ऐसे भी गाँव के कई लोग आश्रम आते रहते थे तो ये लोग भी आ ही गये ..

साथ मे एक देसी दारू की बोतल भी थी , हम जंगल के अंदर एक झरने के किनारे बैठे थे ..

“सालो इतने ख़तरे मे क्यो आ गये क्या पता तुम्हारा भी पिच्छा हो रहा होगा “

“अबे टेन्षन नही लेने का हम लोगो ने पूरा सेफ्टी रखा है, लेकिन साला ये भी कमाल हो गया कैसे , उस छूतियो को मार कर किसीने उस रंडी को फँसा दिया , मुझे तो लगा था की ये तेरा काम होगा साले दारू के नशे मे उन लोगो को पेल दिया होगा लेकिन फिर पता चला की कोई लौंडिया ये कत्ल कर रही है … बाप रे भाई साली क्या ख़तरनाक चीज़ होगी यार वो “

“हा खतरनाक तो होगी तभी ये सब कर रही है “

मैने अपना पैग हिलाते हुए कहा

तभी मुझे मेरी मारलो (सेक्रेटरी ओर डॉक्टर चूतिया ), और नेहा आते हुए दिखे , मेरी हमेशा की तरफ़ बस एक सारी मे थी जो उसके जिस्म से पूरी तरह से चिपका हुआ था , सफेद रंग की सारी मे उसका यौवन जैसे झलक कर बाहर की ओर आने को बेताब था , ऐसे भी उसके जिस्म का सबसे आकर्षक अंग उसके सीने मे उठे हुए वो पर्वत ही थे जिसपर कोई भी इंसान चढ़ने की चाह करने लगता ..

वही नेहा एक सादे सलवार कमीज़ मे थी , माथे मे छोटी सी बिंदी उसके चेहरे को और ही खूबसूरत बना रही थी , बाल खुले हुए लहरा रहे थे और दोनो के पायलो की ख़न ख़न से पूरा महॉल घुंज रहा था ..

दोनो एक दूजे से एक दम अलग लग रहे थे एक तरफ़ मेरी काम की देवी लग रही थी तो नेहा प्रेम की देवी ..

“मादरचोद ये कौन है..”

करिया के मूह से ये निकलना स्वाभाविक भी था ..

“ओह हा तुम अपनी भाभी से मिलना चाह रहे थे ना ये आ गयी “

हरिया का तो जैसे मूह ही खुला का खुला रह गया

“ये मेरे दोस्त है , और ये मेरी जी है और ये नेहा है मेरी दोस्त “

मैने दोस्त पर थोड़ा ज़ोर दिया था , जहाँ सोहन नेहा को देखकर अपने हाथ जोड़ दिया वही हरिया अपना सर गड़ाए खड़ा था ..

“अबे नज़र उठा के देख भी ले अपनी भाभी को “

इस बार मैने सीधे ही भाभी कहा

“नही भाई हमारी नज़र भाभी के चरनो पर ही रहेगी भाई मैं भाभी को नही देख सकता “

मॅरी और नेहा ने मुझे अजीब निगाहो से देखा

“अरे वो क्या है ना की गाँव मे भाभी का इतना सम्मान किया जाता है की उनका चेहरा नही देखा जाता “ सोहन ने मुश्किल से अपनी हँसी च्छूपाते हुए कहा था
 
“श सो क्यूट ,तुम बहुत ही शरीफ हो हरिया “

मॅरी ने उसके बालो को सहलाया , और हरिया जैसे कांप ही गया

“नही भाभी आप ऐसा मत कीजिए मैं आपसे दूर रहु तभी ठीक है “

अब तब मुझे भी समझ आ चुका था की हरिया ने मॅरी को अपनी भाभी समझ लिया है और इसीलिए उसको नही देख रहा है क्योकि मॅरी ने पारदर्शी कपड़े पहन रखे थे ..

लेकिन हमने थोड़ा और मज़ा लेनी की सोची

“तो क्या हुआ हरिया देख तेरी भाभी इनाम मे तुझे कुच्छ दिखाना चाहती है”

“अरे भाई इतना तो सब दिखा रही है और क्या दिखाएगी , मुझसे ये पाप नही होगा भाई “

“अरे देख ले कुच्छ नही होता शहर मे सब चलता है “

हरिया ने इस बार मुझे घूरा

“अबे मुझे पता था की शहर जाकर तू बदल गया है लेकिन इतना बदल जाएगा ये नही सोचा था यार , अरे वो हमारी भाभी है उनके जिस्म के ऐसे अंगो को तू खुद ही देखने के लिए कह रहा है .. तू पगला गया रे सोनू , चलो सोहन चले यार यहाँ से ये साला तो पाप करवाएगा रे “

हम सभी जोरो से हंस पड़े थे

“अरे देवर जी एक बार सर उठा कर देख तो लीजिए की आपकी भाभी है कौन “

इस बार नेहा ने कहा था , नेहा की आवाज़ सुनते ही जैसे हरिया को होश आया उसने सर उठा कर देखा और बस थोड़ी देर तक नेहा के चेहरे को देखता ही रहा

“वाह आप तो स्वक्षता देवी है ,,इतनी सुंदर “

उसने सीधा नेहा के चरणों मे अपने सर को रख दिया था

“अरे ये क्या कर रहे हो “ नेहा जैसे हड़बड़ा गयी , वही मेरे होंठो मे मुस्कान आ गयी ..

ये साला इतना मासूम और देसी तो सिर्फ़ अपना हरिया ही हो सकता है ऐसे मासूम से मुझे अपने अक्की की भी याद आ गयी पता नही वो क्या कर रहा होगा , अब मैं और नेहा तो ट्यूशन नही जाने वाले थे और उसे सुस के साथ जाना था या फिर अकेले :ओ

यहाँ हरिया को देखकर मॅरी खुश हो गयी

“तुम बहुत ही क्यूट हो , आओ मैं तुझे कुछ दिखाती हू”

उसने हरिया के गालो को सहलाते हुए कहा , इस बात तो जैसे हरिया बिल्कुल कूद ही गया , क्योकि अब तक सोहन ने तो गाँव की दो तीन ओरतो की ले ली थी लेकिन हरिया का धागा अभी तक नही टूटा था ..

मॅरी ने उसे झाड़ियो के तरफ़ इशारा किया , हरिया ने बड़ी ही उम्मीद से मुझे देखा और मैने बस उसे आँख मार दिया..
 
भाभी मेरे मोबाइल मे रखा वो वीडियो ध्यान से देख रही थी जो मैने कल रात मे बनाया था ..

मैं अभी नशे मे था और अपने कमरे मे आकर बैठा था, भाभी भी मेरे कमरे मे आ गयी थी साथ ही नेहा भी बैठी थी, किसी भाभी ने ऐसे ही मोबाइल उठाया और भैया का वो वीडियो उनके सामने था ..

“ये सब क्या है सोनू ?“

“कल रात जब उनकी ये हालत देखी तो मुझे बहुत बुरा लगा भाभी , लेकिन एक खुशी भी हुई , इस आदमी ने आपको ना सिर्फ़ गाँव से बाहर निकाला बल्कि आज पूरे गाँव वाले यही समझते है की हम दोनो एक साथ भागे थे, इसने हमे और हमारे रिश्ते को भी बदनाम कर दिया है भाभी , इसे तो सज़ा मिलनी ही थी “

अब ये खुशी था या दुख मादरचोद कुच्छ भी समझ नही आ रहा था , भाभी की आँखो से भी नीर(पानी) बह रहे थे, नेहा ने उन्हे संभाला

“जैसा भी है मेरा पति है ये, मैने प्यार किया था इससे ..”

वो फफक कर रो पड़ी थी ..

“जिसने आपके साथ ऐसा किया उसे भी भगवान ने सज़ा दे ही दी , और जिसने इनके साथ ऐसा किया उसे भी “

नेहा ने सांत्वना भरे शब्दो मे कहा ..

“हा ये तो है लेकिन एक सवाल अब मेरे दिमाग़ मे और जोरो से गूंजने लगा है नेहा , आख़िर कौन है जिसने चंचल को फसाया है?? “

नेहा उसकी बात से थोड़ी हड़बड़ाई

“आपको ऐसा क्यो लगता है भाभी “

नेहा की बात सुनकर भाभी बस हल्के से मुस्कुराइ और मुझे देखने लगी

“ये बात क्या तुम्हे थोड़ी अजीब नही लगती की एक दिन अचानक सोनू को उसके भाई इस हालत मे मिलते है, और उसी रात चंचल ये कत्ल कर देती है .. अगर मारना ही था तो उसी रात क्यो ??”

“तो आप क्या बोल रही हो की मैने उसे मारा है “

मैने भी भाभी की निगाहो से अपनी निगाहो को मिला लिया

“मारा नही लेकिन मरवाया तो ज़रूर है , ये कोई इत्तफाक नही हो सकता की जिस दिन तुम्हे दुख होता की तुम्हारे भाई की हालत ऐसी हो गयी है उसी दिन वो औरत फँस जाती है …”

उनकी बात सुनकर मैं थोड़ा हंस पड़ा

“क्या भाभी आप भी “

लेकिन भाभी गंभीर थी

“सोनू …. मेरी ओर देख … बता दे .. कम से हम दोनो से तो मत छुपा रे ..”

तभी कमरे मे महिमा (नेहा की मा) भी आ गई ..

“कौन किससे क्या छुपा रहा है है भाई ..”

हम सभी के चेहरे गंभीर हो चुके थे जिसे देखकर वो भी थोड़ा गंभीर हो गयी

“क्या हुआ ..??”

“वही हुआ जो बहुत पहले हो जाना था , एक दूसरे पर पूरा विश्वास ..” इस बार ये बात डॉक्टर ने कही थी वो भी कमरे मे आ गये थे ..

“एक दूसरे पर पूरा विश्वास करो और सब कुछ साफ साफ बता दो , हम सभी को पता है की ये किसने किया है लेकिन बोल कोई नही रहा है , जिससे भी कोमल का जो भी रिश्ता है वो बोल दे …”

हम सभी एक दूसरे के चेहरे को देखने लगे थे वही नेहा बेचारी बड़े ही आश्चर्य से हमे देख रही थी ..

“देखो मैं कोमल को सालो से जानता हू जब वो सकती हुआ करती थी तब से , उसके काम करने का तरीका बड़ा ही पेचीदा है , सोनू तुम्हे नही पता लेकिन तुम्हारी भाभी को ज़रूर उसका गेम समझ आ गया होगा , वो है भी तो उसकी ही बेटी ना …
 
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