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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

रूबी ने दरवाजा बंद किया और हम दोनो ने अपनी शरारत पर खुश होते हुए एक दूसरे को गले लगा दिया। इस चक्कर में मेरे मम्मे रूबी के बंधे हुए मम्मो से टकरा कर दब जरूर गए और हमारी चूत का नंगापन भी टकरा गया था। मै फिर जल्दी से कपड़े पहन वहां से रवाना हुयी.

बाद में रूबी ने बताया कि उसका जो जरुरी काम था वो उसके पडौसी से निकलवा लिया हैं। अब हमें दरवाजे के पिछे छुपकर किया काम नहीं करना पड़ेगा.

जब सब कुछ ठीक चल रहा था तो मेरी ज़िन्दगी में फिर एक तूफान आया। मेरे पति काफी समय से शांत थे, मैंने उनको अब महीने में एक बार ही चोदने देती थी.

अशोक: “तुम्हे नहीं लगता पिछले कुछ समय से हमारी सेक्स लाईफ कमजोर पड़ गयी हैं। अब हमें फिर से मसाला लाना चाहिये। हम किसी कपल के साथ अदला बदली करते हैं”

मैं: “अब तो नाम भी मत लेना. पिछली बार याद हैं ना पूजा के साथ क्या हुआ था!”

अशोक: “अभी वो टेंशननहीं हैं। लड़की को मैंने मना लिया हैं। तुम्हे सिर्फ लड़के को मनाना हैं। वो तो तुम्हारे लिए आसान हैं। तुम लड़के को अच्छे से जानती भी हो”

मैं: “मैने सोच लिया हैं कि मै अब यह सब नहीं करुंगी. मै अब और कोई पार्टनर अदला बदली नहीं करुंगी”

अशोक: “तुमने मुझसे वादा किया था कि हम करेंगे और तुम साथ दोगी. सिर्फ एक अनुभव पूजा वाला खराब हुआ तो तुम मना कर रही हो. उसके पहले के ग्रुप सेक्स तो तुमने एन्जॉय किए थे ना!”

मैं: “मुझे अब और नहीं करना हैं”

अशोक: “‘यह तो कोई बात नहीं हुयी. यह मेरी अल्टीमेट फंतासी हैं”

कुछ समय पहले एक ग्रुप सेक्स के इवेंट में सबको उनकी फंतासी पुछी गयी थी। तब अशोक ने कहा था कि वो अपनी शादीशुदा गर्लफ्रेंड के साथ पार्टनर अदला बदली कर चोदना चाहता हैं।

मुझे डर लगा कही उसकी उसी फंतासी के बारे में तो बात नहीं कर रहा। जैसा कि आपको मेरी पिछली कहानियो से पता हैं कि मेरे पति की गर्लफ्रेंड मेरी भाभी ही हैं। उनके साथ पार्टनर अदला बदली करने का मतलब मुझे मेरे भाई के साथ चुदवाना होगा।

मैं: “तुम किस अल्टीमेट फंतासी की बात कर रहे हो?”

अशोक: “तुम्हे पता हैं उसके बारे में. मै तुम्हारी भाभी को मना चुका हूँ. अब तुम्हे अपने भाई को मनाना पड़ेगा”

मैं: “तुम्हारा दिमाग तो खराब नहीं हो गया! अब मै अपने भाई के साथ यह काम करुंगी, तुमने सोच भी कैसे लिया? मैंने तुम्हारी बात रखने के लिए ग्रुप सेक्स में जाने को तैयार हो गयी। फिर मैंने तुम्हारे कारण पूजा का चांटा भी खा लिया। तुम्हारी हिम्मत इतनी बढ़ गयी कि मुझे मेरे ही भाई के साथ सुलाओगे!”

अशोक: “इतना भड़क क्युँ रही हो. ग्रुप सेक्स के इवेंट्स में मै अकेले मजे नहीं ले रहा था। भूलो मत तुमने मुझसे भी ज्यादा मजे लिए हैं। तुम्हे तो मेरा शुक्रगुजार होना चाहिये कि तुम्हे मेरे जैसा खुली सोच वाला पति मिला हैं”

मैं: “अब मेरा मुंह मत खुलवाओ। मुझे सब पता हैं, तुमने सुमन के साथ मिलकर प्लान बनाया और मुझे उस दिन सौरभ के साथ पकड़ा था। ताकि तुम मुझे ग्रुप सेक्स के लिए ले जा पाओ”

इस घटना के बारे में और जानने के लिए आप मेरी कहानी “Jab Main Bani Love Guru” पढ़े.

अशोक: “प्लान किया था तो क्या हुआ! तुम अपनी इच्छा से सौरभ के साथ चुदवा रही थी। पकड़े जाने के बाद भी तुम्हे उसके साथ चुदवाया”

मैं: “हां मै ऐसी ही हूँ. मुझे तलाक दे दो फिर. मगर मै अपने भाई के साथ यह घिनौना काम नहीं करुंगी. या तो अपनी यह ज़िद छोड़ दो या मुझे तलाक दे दो”

अशोक: “तुम तलाक तक क्युँ पहुंच रही हो. तुम शान्ति से इस बारे में सोच लो. इसमें कुछ बुरा नहीं हैं। भाई भी तो एक मर्द ही होता हैं ना, दूसरे मर्दो की तरह उसके भी एक लंड हैं। तुम इतने लंड अपनी चूत में ले चुकी हो तो यह एक और सही. लंड पर तुम्हारे भाई का नाम थोड़े ही लिखा हैं।”

मैं: “छी, कितनी गंदी सोच हैं तुम्हारी. तुम्हे मेरी भाभी के साथ करना हैं तो करो, पर मै यह सब नहीं कर सकती”

अशोक: “हमने एक दूसरे से वादा किया हैं कि किसी और के साथ करेंगे तो अदला बदली करके एक दूसरे की अनुमति से ही करेंगे”

मैं: “एक बात तुम अच्छे से समझ लो कि मै अपने भाई के साथ कुछ नहीं करुंगी”

अशोक: “तुम्हे बात नहीं करनी हैं तो ठीक हैं। मै तुम्हारी भाभी को बोलता हूँ, वो तुम्हारे भाई को मना लेगी”

मैं: “तुम पागल हो चुके हो. अगर तुमने फिर ये बात की तो मै तुम्हे छोड़ कर चली जाउंगी”

मेरा दिमाग पूरा घूम चुका था। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करु. रूबी के साथ मिलकर मैंने अच्छी खासी प्रैक्टिस कर ली थी और तलाक के लिए तैयार भी थी। पर सोचा नहीं था कि वो समय इतना जल्दी आ जायेगा.

रूबी मुझे उदास देखकर मुझसे मेरी परेशानी जानना चाहती थी पर उसको कैसे बताती की मेरा पति मुझे मेरे भाई के साथ सुलाना चाहता हैं।

रूबी ने एक बार फिर वहीं रिपिट किया कि मुझे अपने पति से तलाक ले लेना चाहिये। अगले 2- दिन अशोक ने फिर अदला बदली का नाम नहीं लिया। फिर अगले दिन वो रात को मेरे सामने आ गया।

अशोक: “मै एक गेट टुगेदर प्लान कर रहा हूँ, तुम्हारे भाई भाभी को साथ ले लेंगे. वहीं पर हम अदला बदली कर लेंगे. तुम्हारी भाभी तब तक तुम्हारे भाई को तुम्हे चोदने के लिए मना लेगी”

मैं: “खबरदार जो मेरे भाई के साथ ऐसी कोई बात की तो”

अशोक: “क्युँ! तुम्हे डर लग रहा हैं कि कही तुम्हारा भाई तुम्हे चोदने के लिए मान जाऐगा!”

मैं: “मेरा भाई तुम्हारी तरह नहीं हैं। उसको भाई बहन के रिश्ते की क़द्र हैं”

अशोक: “और अगर वो मान गया तो ! क्या फिर तुम चुदवाने को तैयार हो?”

मैं “मेरा भाई ऐसा कभी नहीं करेगा”

अशोक: “तुम्हे अपने भाई पर इतना यकीन हैं तो तुम हां बोल दो. वो ना बोल देगा तो वैसे ही कुछ नहीं होगा।..क्या हुआ, बोलती बंद हो गयी?”

मै कुछ नहीं बोली. मुझे मेरे भाई पर यकीन हैं पर फिर भी मन में एक डर था। मर्द तो मर्द ही होते हैं, उनके मन में क्या चल रहा हो क्या पता.

मेरे बदन को देख कर तो लड़कियां भी अपने आप पर काबू नहीं रखती फिर मेरा भाई मेरे बारे में कुछ सोच ही सकता हैं। अशोक ने मेरे मन में एक संदेह डाल दिया था। मैंने अशोक को इस बारे में बात करने से ही मना बोल दिया।
 
इस बातचीत के 3 दिन बाद ही मुझे भाभी का मैसेज मिला कि अशोक ने हम चारो के घुमने का प्लान बनाया हैं और वो लोग लंबे समय बाद वेकेशन की तैयारी कर रहे हैं। अशोक के आते ही मै उस पर टूट पड़ी.

मैं: “मैने तुम्हे मना किया था फिर भी तुमने मेरे भाई भाभी को इसमें घसीट लिया!”

अशोक: “इतना गुस्सा क्युँ हो रही हो. तुम्हारा भाई मान गया हैं और तुम्हे चोदने के लिए बेकरार हो रहा हैं, इसलिए प्लान बनाया हैं। अब क्या बोलती हो? इतना मत सोचो. भाई हो या पति सबके पास लंड ही होता हैं जो मजे दिलाता हैं। एक बार उस से बात कर लो, उसको बोल दो कि तुम उसके साथ चुदवाने को बेताब हो. सब सेट हो जायेगा”

मैं: “ठीक हैं, मैंने भी फैसला कर लिया हैं”

अशोक: “यह हुयी ना बात। यह बताओ एक ही रूम बुक कराऊ या अलग अलग. अगर तुम्हे मेरे सामने अपने भाई को चोदने में शर्म आये तो दो कमरे बुक कर देता हूँ”

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मैंने अपनी चुदाई की लत पर काबू पा लिया था और फिर अशोक ने मुझे मेरे ही भाई के साथ सोने का फरमान सुना दिया और अब मुझे अपनी ज़िन्दगी का फैसला लेना था।

मैं: “मैने ये निर्णय कर लिया हैं कि मै तुम्हे तलाक दे रही हूँ”

अशोक: “अपने भाई भाभी के साथ अदला बदली के बाद तलाक दोगी या पहले? तलाक क्या मजाक हैं!”

अगले दिन ही जाकर मै रूबी की मदद से एक वकील से मिली और अपने तलाक की प्रक्रिया शुरु कर दी. भाभी को मैंने बोल दिया कि मै बहुत व्यस्त हूँ और घुमने का कार्यक्रम रोकना पड़ेगा.

एक दिन जाकर मैंने तलाक के कागज़ अशोक के सामने रख दिए. अशोक को यकीन नहीं हुआ कि जो लड़की इतने सालो से उसकी ज्यादतियां बर्दाश्त कर रही थी वो ऐसा कदम भी ले सकती हैं।

उसने मुझे बहुत मनाने की कोशिश की पर मै अब ठान चुकी थी कि अब बहुत हो चूका. घर परिवार वालो को पता चला तो बहुत बवाल हुआ पर मै पीछे नहीं हटी.

कोर्ट से हमको एक साल का समय मिला सोचने के लिए और उसके बाद ही तलाक मिल सकता था। मैंने अपने लिए अलग घर किराये पर ले लिया था, बच्चा कभी मेरे तो कभी मेरे पति के साथ रहता.

हम दोनो ही काम करते थे तो बच्चा दिन भर उसकी दादी के घर ही रहता और शाम को हम पति पत्नी दोनो अपनी बारी के हिसाब से उसे अपने पास रखते।

मै अपने घर जाकर अपने भाई को क्या मुंह दिखाती, जब कि वो खुद मुझे चोदने को तैयार हो चुका था। पर माँ के बुलावे पर मुझे जाना पड़ा.

वहां जाकर मैंने भाभी से बात कर ली. तब मुझे पता चला कि मेरे पति अशोक ने मुझसे झूठ बोला था। भाभी को इस अदला बदली के बारे में कुछ नहीं पता था, उन्हे सिर्फ वेकेशन के बारे में पता था।

अशोक की गंदी सोच को देखते हुए भाभी ने कसम खा ली कि वो अशोक से अपने रिश्ते तोड़ देगी. मुझे ख़ुशी मिली कि कम से कम मेरे भाई का घर बर्बाद नहीं होगा।

रूबी मेरे फैसला से बहुत खुश थी। मुझे अब किसी मर्द की चुदाई मिलना बंद हो चुका था पर रूबी अपनी ऊँगली से मेरी मदद कर देती थी।

कभी कभी मुझे आश्चर्य होता था कि रूबी को ऊँगली से चुदने की जरुरत नहीं होती. मुझे भी उसके जैसा बनना था जब मुझे ऊँगली करने तक की जरुरत महसूस ना हो और पूरा कण्ट्रोल कर पाऊ जैसे रूबी करती हैं।

मैंने एक बार उसको पूछ ही लिया कि वो चाहे तो मै भी उसको अपनी ऊँगली से मजा दिला सकती हूँ, पर उसने मना बोल दिया कि उसको ऊँगली की जरुरत नहीं.

मैने भी सोचा मुझे भी अपनी चूत में ऊँगली की आदत छोड़ने की कोशिश करनी होगी. ऑफिस में भी यह बात पता चल गयी कि मै अपने पति से अलग रह रही हूँ.

जैसा कि रूबी ने बताया था, अकेली औरत को देख मर्द लाईन मारते ही हैं। मेरे ऑफिस में भी मर्द अब मुझे आकर अफ़सोस जताते और मुझे कोई मदद चाहिये हो तो वो मदद देने की पेशकश करते.

शुरू शुरु मै तो मुझे लगता कि वो लोग मेरी मदद करना चाहते हैं पर फिर रूबी ने बताया कि वो मेरी किस तरह की मदद की बात कर रहे थे.

अकेली औरतो की परेशानी मुझे अब समझ आने लगी थी और रूबी के प्रति मेरा आदर और बढ़ गया था। मैंने यह भी महसूस किया कि अब मेरा बॉस राहुल मुझसे ज्यादा बातें करने लगा था।
 
हमारे बीच पहले जो कुछ भी हुआ था, मुझे पता था कि वो मुझसे आज भी प्यार करता हैं। मैंने तो उसको कब का माफ़ कर दिया था पर मै शादी शुदा होकर उसके साथ कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती थी।

पर अब में फिर से सिंगल थी और राहुल के साथ रिश्ता बनाने का मौका भी था। शायद राहुल को भी इसमें एक मौका दिखाई दिया।

वैसे भी मैंने राहुल को अपने पति के बाद का दुसरा विकल्प माना था। शायद मेरे लिए यह सबसे सही अवसर था कि मै राहुल के साथ अपने प्यार को आगे बढा पाऊ. मगर मै आगे बढ़कर राहुल को कैसे बोलती इसलिए चुप ही रही.

अशोक और मेरे बीच यह निर्णय हुआ था कि दोपहर में बच्चा मेरी सासुजी के घर ही रहेगी और शाम को ऑफिस के आने के बाद हम दोनो बारी बारी से उसे अपने पास रखेंगे।

एक दिन जब मै अपने बच्चे को पिक अप करने सासुजी के घर के बाहर पहुंची और कार से बाहर निकली तो सामने से पूजा आती दिखी. एक नजर उस पर पड़ते ही मै डर गयी और घर की तरफ बढ़ी। फिर उसकी आवाज सुनाई दी जो मुझे पूकार रही थी।

यहाँ बीच मोहल्ले में वो फिर से मुझे थप्पड़ ना लगा दे या सबके सामने मुझे डाँट कर मेरी पोल खोल ना दे इस डर से मै गेट खोल कर अंदर जाने लगी।

तब तक वो मेरे पास आ गयी थी और मेरे कंधे पर हाथ रख दिया। मैंने अपना एक हाथ अपने गाल पर रखे उसको देखने लगी।

पूजा: ”मुझे नजरअंदाज कर रही हो? आई एम सॉरी , उस दिन मैंने तुम्हे चांटा मार दिया। मुझे एसी प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिये थी। उसके बाद मैंने तुम्हे कई बार माफ़ी मांगने के लिए फ़ोन किया पर लगा ही नहीं. प्लीज माफ़ कर दो.”

मैने थोड़ा आश्चर्य हुआ कि गलती तो मैंने की फिर भी वो माफ़ी मांग रही थी। हो सकता हैं उसने भी मुझे माफ़ कर फिर से दोस्ती करने की सोच ली हो.

मैं: “तुम क्युँ माफ़ी मांग रही हो? माफ़ी तो मुझे मांगनी थी, मैंने तुम्हे ऐसा कुछ करने को बोला. तुमने तो मुझे सही रास्ता बता दिया”

पूजा: “यार, तुमने नितीन के सामने ऐसा बोला इसलिए घबरा कर मैंने थप्पड़ मार दिया। नितीन पहले ही मुझ पर शक करता हैं, मै हां बोलती तो फिर उसको लगता कि मै सच में चरित्रहीन हूँ”

मैं: “मतलब… नितीन नहीं होता तो तुम तैयार थी!”

पूजा: “हां”

मैं: “फिर भी तुमने उन दोनो के सामने मुझे थप्पड़ मार कर मेरा अपमान किया और खुद को बड़ा चरित्रवान दिखाया!!”

पूजा: “मैने तुम्हे बताया तो था कि डांस करते करते ही मै बहक गयी थी। मेरे अंदर कपड़े गीले हो चुके थे, कण्ट्रोल करना मुश्किल हो गया था”

मैं: “मुझे तो तुम्हारा मना करना पसंद आया था कि तुम ऐसी नहीं हो. तुमसे प्रेरित होकर तो मै अशोक से अलग हो गयी”

पूजा: “तुम्हारे बारे में सुनकर बुरा लगा। पर अशोक ने उस दिन मुझ पर जादू कर दिया था। काश उस दिन नितीन साथ में नहीं होता तो मेरी इच्छा पूरी हो जाती। तुम तो वैसे ही अशोक से अलग हो गयी हो, वो भी अकेला होगा, तुम अशोक से बात कर सकती हो मेरे बारे में, नितीन को पता नहीं चलना चाहिये बस”

मेरी काटो तो खून नहीं वाली हालत थी। मैंने पूजा को क्या समझा और वो क्या निकली. वो तो तैयार बैठी थी अशोक के साथ चुदवाने के लिए. पर अब मुझे वैसे भी क्या फर्क पड़ता.

मैं: “तुम खुद बात क्युँ नहीं कर लेती, वो तो वैसे ही तैयार हैं”

पूजा: “आगे बढ़कर उसको कैसे बोलू? वैसे भी वो मुझे मिलता कहा हैं। तुम भी आज इतने दिनों बाद बड़ी मुश्किल से मिली हो. तुम तो मेरी सहेली हो, मेरे एक काम नहीं करोगी?”

मैं: “मै देखती हूँ, क्या कर सकती हूँ”

अब उसकी मदद करना मतलब नितीन के साथ मुझे सोना पड़ेगा जो मै करना नहीं चाहती थी। मै उस ज़िन्दगी से बहुत दूर आ चुकी थी।

मुझे इस चीज से कोई परेशानी नहीं थी कि पूजा मेरे पति से चुदवाना चाहती थी। पर बुरा यह लगा कि इस पूजा ने ही सबसे पहले मुझे यह अहसास दिलाया था कि मै गलत रास्ते पर हूँ, मगर वो खुद गलत रास्ते पर ही थी।

पर मुझे ख़ुशी थी कि उसके चक्कर में मै अब सही रास्ते पर आ चुकी थी। हर औरत तो पूजा की तरह नहीं हो सकती. रूबी अभी भी मेरी ताकत थी।

फिर थोड़े दिन बाद जब मै अपने बच्चे को पिक अप करने अशोक के घर गयी थी तो अशोक ने भी विनती की.

अशोक: “आज रात यहीं रुक जाओ, बहुत दिनों से करने को नहीं मिला मुझे”

मैं: “तुम्हे मेरी क्या जरुरत हैं, तुम्हारे लिए तो बहुत सी लड़कियां तैयार होगी”

अशोक: “कोई लड़की नहीं हैं! एक रात की ही तो बात हैं, रुक जाओ”

मैं: “तुम्हारे तो इतने दोस्त हैं, चले जाओ किसी के भी घर, वो अपनी बीवी दे देंगे तुम्हे चोदने के लिए”

अशोक: “तुम्हे पाने की लालच में दे भी देते पर अब कौन देगा?”

मैं: “तुम्हारी पूजा मिली थी थोड़े दिन पहले, वो तैयार हैं। कर लो उसके साथ”

अशोक: “अच्छा!! पर वो नितीन क्युँ मानेगा? तुम मेरे साथ ना सही ,नितीन के साथ चुदवाने को तैयार हो जाओ तो वो मुझे पूजा को चोदने देगा. अब तो पूजा भी तैयार हैं तो कोई परेशानी ही नहीं हैं”

मैं: “तुम्हारी गलत इच्छाओ के लिए मै क्युँ बलि दू? मुझे ऐसा कोई शौक नहीं हैं। मैंने तुम्हे खाली बता दिया हैं कि पूजा तैयार हैं, अब तुम्हे कैसे करना हैं वो तुम दोनो देख लो”

अशोक: “ऐसे मत करो, वो नितीन तो पूजा पर पहरा रखता हैं, उसकी इजाजत के बिना मै नहीं कर सकता”

मैं: “मै तुम्हारी इसमें कोई मदद नहीं कर सकती”
 
अशोक: “मेरा जन्मदिन आने वाला हैं। मै पूजा और तुम्हारी सुलह के बहाने उन दोनो को पार्टी पर बुलाता हूँ, तुम भी आ जाना. मेरी थोड़ी मदद कर देना, नितिन को थोड़ा व्यस्त रखना तब तक मै पूजा के साथ कर लूंगा. इस बहाने तुम पूजा की भी मदद कर दोगी”

मैं: “तुम ध्यान से सुन लो, मै नितीन के साथ कुछ करने वाली नहीं हूँ”

अशोक: “तुम्हे कुछ नहीं करना हैं, सिर्फ पार्टी में आ जाना बस. हर साल तुम मुझे जन्मदिन गिफ्ट देती हो, इस बार तुम्हारा आना ही मेरे लिए गिफ्ट होगा, प्लीज…प्लीज”

पूजा ने मुझे अशोक और नितीन के सामने थप्पड़ मारा था और मुझे उसके मुकाबले चरित्रहीन साबित कर दिया था। यह मौका था जब मै पूजा से उन्ही लोगो के सामने माफ़ी मंगवा सकती थी। तो मैंने पार्टी में आने का हां बोल दिया।

अगले दिन मैंने पूजा को फ़ोन कर बोल दिया कि अशोक उसे और नितीन को अपनी जन्मदिन पार्टी में बुलाने वाला हैं। तो उसके पास अशोक से चुदने का भी मौका होगा और मुझसे उन दोनो के सामने माफ़ी मांगने का भी.

पूजा यह सुनकर बहुत खुश हुयी. मै खुश थी कि मेरा जो अपमान हुआ था उसका बोझ उतर जाऐगा और हो सकता हैं मै अशोक और पूजा की एक होने में मदद भी कर दू .

जन्मदिन वाले दिन मै अशोक के घर पहुंची. वो अकेला ही था। उसने मेरे अलावा सिर्फ पूजा और नितीन को ही बुलाया था। यहाँ तक कि हमारा बच्चा भी नहीं था।

अशोक: “धन्यवाद , तुम आ गयी। यार तुम अगर नितीन के साथ करने को मान जाओ तो मेरा और पूजा का काम आसान हो जायेगा”

मैं: “तुम चाहते हो कि मै चली जाऊ तो चली जाती हूँ, पर फिर यह विनती मत करना”

अशोक: “मेरे अंदर आग लगी हैं, मुझे चोदना हैं। ना तुम करने दे रही हो, और ना मेरी मदद कर रही हो”

मैं: “मुझे जितनी मदद करनी थी वो मैंने कर दी. इस से ज्यादा उम्मीद मत रखना”

अशोक: “अच्छा ठीक हैं, मै अगर पूजा को लेकर अंदर जाऊ तो नितीन को यहाँ रोके रखना”

मैं: “मै 5-10 मिनट से ज्यादा नहीं रोक पाउंगी, नितीन भी कोई पागल नहीं हैं, उसे पता चल जाऐगा. 5-10 मिनट में जो कर सकते हो कर लेना”

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अशोक की बर्थडे पार्टी में अशोक और पूजा का चुदाई का इरादा था और मेरा मकसद था पूजा से माफ़ी मंगवाना। मैं तय समय पर पहुंच गयी थी पर अशोक मुझे नितिन के साथ चुदने को मना रहा था।

तभी डोरबैल बजी और अशोक ने जाकर दरवाजा खोला. नितिन और पूजा आ गए थे। पूजा आज तो कुछ ज्यादा ही सजी संवरी थी। बालो का जूड़ा बना था और उसकी वो ही दो लम्बी झुल्फे दोनो तरफ लटकी थी।

मरून लिपस्टिक में रंगे उसके होंठ चमक रहे थे और मादक लग रहे थे और उसकी बड़ी सी स्माईल में खिल रही थी। माथे पर छोटी सी चमकीली बिंदी थी।

उसने आज भी चमकीली साड़ी पहनी थी पर उस दिन से ज्यादा फर्क था। आज उसकी साड़ी पारदर्शी थी। पेटीकोट को नाभी से 3 इंच नीचे बाँधा था और पारदर्शी साड़ी से उसका पतला पेट और नाभी साफ़ दिख रही थी।

जब वो पीछे मुड़ी तो उसकी पीठ पूरी नंगी थी और सिर्फ ब्लाउज की दो डोरिया बंधी थी। उसको भी अच्छी तरह आता था कि मर्दो को कपड़ो से दीवाना कैसे करते हैं।

हमेशा की तरह उसका आकर्षण उसकी मटकती गांड थी जो उस टाइट बंधी साड़ी में अच्छे से खिल कर दिख रही थी। वो तीनो चल मेरे पास आये.

अशोक: “चलो भाई, प्रतिमा और पूजा अपने गिले शिकवे मिटा लो”

पूजा ने मुझ गले लगाया. उसके बड़े से मम्मे मेरे मम्मो से टकरा कर थोड़ा दब गए. उसके मम्मे बहुत मुलायम थे.

पूजा: “उस दिन मैंने प्रतिमा को ग़लतफ़हमी में चांटा मार दिया था। वो तो सिर्फ डांस पार्टनर के लिए बात कर रही थी और मै कुछ और ही गलत समझ गयी”

हम सब उसकी शक्ल देखने लगे, जो मुस्कुरा रही थी। उसने बड़ी सफाई से झूठ भी बोल दिया और माफ़ी भी मांग ली थी।

पूजा: “प्रतिमा, मुझे उस दिन लगा तुम कुछ गंदी बात कर रही हो, पर बाद में मुझे लगा तुम तो सिर्फ डांस के लिए मुझे अशोक के साथ पार्टनर बना रही थी। आज तुम जो बोलोगी वो करेंगे. क्युँ नितिन?”

नितीन: “मुझे तो उस दिन भी कोई परेशानी नहीं थी और आज भी नहीं हैं”

अशोक: “हां तो चलो संगीत से शुरु करते हैं”

अशोक ने पहले ही शायद तैयारी कर रखी थी और बहुत ही मादक गानो को प्ले कर दिया। कमरे में हल्की लाल रंग की रोशनी कर दी. अशोक तो पूजा का हाथ पकड़े डांस के लिए ले गया।

नितीन मुझे भी आग्रह करने लगा पर मैंने उसको रुकने को बोला. मै और नितीन अब बैठ कर डांस देखने लगे। अशोक तो इतने दिन से किसी औरत को हाथ लगाने के लिए भी तड़प रहा था ऊपर से वो मादक गाना.
 
अशोक ने पूजा की कमर, पीठ, जांघे, सीना, चेहरा सब छू कर रगड़ रगड़ आकर डांस किया. ख़ास तौर से उसने पूजा की गांड को निशाना बना कर उसको पीछे पकड़ कर अपना लंड से बहुत देर तक रगड़ा.

मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ राह था पर नितीन ने यह सब देखने के बाद भी कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी और अपनी बीवी को इस मादक तरीके से अपने ही दोस्त के हाथों मजे लेते देखता रहा।

अशोक की पैंट में उसका लंड कड़क हो थोड़ा आगे हो गया था और मै देख सकती थी। शायद नितीन ने भी देख लिया होगा। पर वो क्या कर सकता था, उसने ही उन दोनो को डांस की अनुमति दी थी।

अशोक ने मुझे और नितीन को भी डांस के लिए बोला और फिर जबरदस्ती उठा कर ले आये. मै वापिस बैठना चाहती थी पर नितीन ने मेरे दोनो हाथ अपने हाथ में ले लिए और डांस शुरु कर लिया।

अशोक इशारा कर रहा था कि मै नितीन की पीठ उनकी तरफ रखु ताकि वो आराम से डांस कर पाये। मुझे भी देखना था वो कैसी हदें पार करते हैं।

नितीन को डांस तो आता नहीं था तो मैंने नितीन को अपने सामने रखा और उसकी पीठ हमेशा पूजा और अशोक की तरफ रही.

इस मौके का फायदा उठा कर अशोक एक बार फिर पूजा के पीछे से चिपक गया था और अपना कड़क लंड पूजा की गांड में रगड़ रहा था। कुछ ही सेकण्ड में उसने पूजा का पल्लू भी खोल कर नीचे गिरा दिया।

पूजा ने अपने दोनो हाथ ऊपर उठा कर पीछे लाकर अशोक की गरदन के पिछे लगा दिए. पूजा की छाती फुल गयी। वो तो वैसे ही नशे में डुब चुकी थी तो उसके मम्मे अच्छे खासे फूले हुए थे.

अशोक तो कण्ट्रोल ही नहीं कर पा रहा था। एक हाथ पूजा के पेट के थोड़ा नीचे रख दूसरे से उसके ब्लाउज के ऊपर से अंदर हाथ डाल दिया और पूजा के मम्मे दबाने लगा।

पूजा आंख बंद किए तभी आंख खोले मजे ले रही थी। मै थोड़ा डर भी रही थी, कही नितीन यह देख ना ले। मैंने नितीन को और टाइट पकड़ लिया, उसने मुझे अपने सीने से लगा दिया।

मेरे मम्मे भी उसके सीने से दब गए, इस बहाने ही सही वो अब मेरे ज्यादा कण्ट्रोल में था। मै उसको घुमने से रोक सकती थी। हम एक दूसरे से चिपके डांस कर रहे थे.

अशोक इतना तड़प रहा था कि उसने हिलना बंद कर दिया और अब पूजा की ब्लाउज की डोरिया पीछे से खोल दी थी और उसका ब्लाउज ढीला होकर बाहों में अटक गया।

अशोक ने अब पूजा के पेट को दबा कर उसकी गांड अपने लंड से चिपका दी. दूसरे हाथ से उसने पूजा के सीने को दबा कर अपनी छाती पूजा की पीठ से एकदम चिपका दी. दायें बायें हिलने की बजाय उसने एक दो धक्के पूजा की गांड पर जरूर मारे.

तभी नितीन ने अपना एक हाथ जो अब तक मेरी कमर को लपेटे था, उस से मेरी गांड को दबा दिया। मुझे उसकी बदतमीजी पसंद नहीं आयी और उसका हाथ झटक दिया।

मगर उसने अब अपने दोनो हाथों से मेरी गांड को दबाया. फिर मै उस से दूर हुयी. वो मुझ पर हस रहा था। मैंने उसके पीछे डांस करते पूजा और अशोक को देखा जो अभी भी एक दूजे से चिपके थे.

पूजा अब जरूर दायें बायें अपनी गांड हिलाते हुए अशोक के लंड को रगड़ते हुए मजा दिला रही थी। अशोक भी पूजा के नंगे कंधे को चुम रहा था। मुझे ऊधर देखते देख नितीन ने भी पीछे मुड़कर देखा.

पूजा और अशोक की तो आंखे बंद थी और मजे ले रही थे। नितीन मुड़ कर पूजा के सामने गया। मुझे लगा आज तो पूजा और अशोक की खैर नहीं हैं।

नितीन ने वहां जाकर पूजा के आधे खुले ब्लाउज को खिंच कर पूजा की बाहों से निकाल दिया। पूजा ने अंदर ब्रा भी नहीं पहना था तो उसके गोल मम्मे बाहर आ गए और वो टॉपलेस हो गयी। पूजा और अशोक की आंखे खुल गयी, मगर अशोक ने पूजा को अपने से चिपकाये रखा।

नितीन ने पूजा की साड़ी की पटली को उसके पेटीकोट से बाहर कर दिया और फिर साड़ी के बाकी भाग को भी पेटीकोट से बाहर खींचने लगा। मेरी तरह पूजा को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि नितीन कैसे गुस्सा निकाल रहा हैं।

मै भी क्या कर सकती थी, पूजा को थोड़ा ध्यान रखना चाहिये था। अब सजा तो मिलेगी ही. पूजा की साड़ी अब नितीन ने पूरा खोल कर हटा दी और अब उसने पूजा के पेटीकोट को बंधी डोरी की गांठ खोल कर उसका पेटीकोट भी खोल दिया।

अब पूजा सिर्फ अपनी पैंटी में खड़ी थी। मैंने पूजा को कई बार बिकिनी में स्वीमिंग पूल में देखा था, पर आज पहली बार टॉपलेस सिर्फ पैंटी में देख कर मै भी उसके फिगर की दीवानी हो गयी।

इतने समय तक स्वीमिंग करने का असर उसके फिगर पर दिख रहा था। अशोक अभी भी पूजा से चिपका था। नितीन ने अभी तक अशोक को कुछ नहीं कहा था। नितीन ने अब पूजा की पैंटी खोल उसको पूरा नंगा कर दिया।

पूजा की तेज सांसें उसके हिलते बदन से साफ़ दिख रही थी। उसका पेट तेजी से अंदर बाहर हो रहा था और उसके बड़े से मम्मे हल्का सा फुल कर सिकुड़ रहे थे और सांस ले रहे थे.
 
साथ ही पूजा के मम्मे ऊपर नीचे हल्का से हिल रहे थे। पूजा की आँखों में एक प्रश्नचिन्ह था। अंदर उत्तेजना भरी थी पर डर उसकी आँखों और चेहरे पर था।

नितीन अब पूजा के सामने हाथ बाँध कर खड़ा था। अशोक ने अपने दोनो हाथों से पूजा के नंगे धड़कते मम्मो को दबोच लिया और उन दोनो मम्मो को अपने हाथों में लेकर मसलना शुरु कर दिया।

पूजा मुंह खोले आहें भर रही थी पर संगीत के शोर में उसकी आहें सुनाई नहीं दे रही थी। अशोक ने जब पूजा के मम्मे छोड़े और पीछे हटा तो पूजा अपने दोनो हाथों को मलते हुए नीचे जमीन पर देखने लगी।

अशोक ने अपने कपड़े एक झटके में निकाल दिए और पूरा नंगा हो गया। उसको अभी भी चोदने की पड़ी थी, जब कि नितीन सामने था।

नंगा होते ही अशोक ने पूजा को आगे बढा कर सोफे के साइड से आगे झुका दिया। पूजा के नंगे मम्मे सोफे के सिरहाने से चिपक कर दब गए.

अशोक पूजा के पिछवाड़े था और अपना लंड पूजा की गांड में रगड़ने लगा। मैंने अपना माथा पिट लिया। वो इतनी गुस्ताखी क्युँ कर रहा था।

जब वो मार खाएगा तो मै उसको बचाने वाली नहीं थी। जल्दी ही पूजा की सांसें तेज हुयी और आंहे निकलने लगी। अशोक ने एक धक्का मारा और उसकी जांघो का ऊपरी भाग पूजा की गांड से टकराया. उसका लंड अब पूजा की गांड में घुसा चुका था।

पूजा जिस तरह दर्द भरी सिसकियां मार रही थी, मुझे यकीन था कि उसकी गांड में ही अशोक का लंड घुसा होगा। नितीन अभी भी हाथ बांधे अपनी बीवी को गांड मरवाते देख रहा था।

पूजा ने कहा था कि नितीन उस पर शक करता हैं, यह बात मुझे भी उसने बताई थी कि उसको अशोक और पूजा पर शक हैं, फिर वो इतना उदार हो गया कि पूजा को चुदने की छूट दे दी थी।

किसी पति का इतना बड़ा दिल होगा, यह मैंने नहीं सोचा था। अशोक की दिल की तमन्ना आज आखिर पूरा हो रही थी। इतने दिनों से चोदने को तड़पते मर्द को अपनी पसंद की औरत की गांड मारने को मिल रहा था। उसको तो अब तक बेस्ट जन्मदिन गिफ्ट मिल चुका था।

अशोक के झटके अब पूजा की गांड में पड़ने लगे थे। वो इतने जोर के झटके थे कि पूजा आगे पिछे पूरा हिल चुकी थी। अशोक ने आखिर अपनी इच्छा पूरी कर ली थी।

उसकी इच्छा भी तब जाकर पूरी हुयी जब उसको चुदाई की सबसे ज्यादा जरुरत थी। मै सोच रही थी मै यह चुदाई देखने तो नहीं आयी, मुझे शायद यहां से जाना चाहिये। पर जन्मदिन का केक कटना बाकी था और मुझे भी पूजा को पहली बार चुदते हुए देखना था।

पूजा भी आहें भरते हुए अभी थोड़े शॉक में थी कि नितीन क्या कर रहा हैं। पूजा की गांड पर पड़ते झटको से उसकी गांड बुरी तरह से जेली की तरह हिल रही थी।

अशोक के पूजा की गांड पर पड़ते झटको से थाप थाप की आवाजे आ रही थी। साथ में बजते संगीत के साथ चुदाई का मजा और ज्यादा बढ़ गया था।

थोड़ी देर बाद जब अशोक ने गांड मारने का मजा ले लिया तो उसने पूजा को थ्री सीटर सोफे की सीट पर सीधा लेटाया और उसका एक पांव सोफे के सिरहाने पर रख दिया और दुसरा नीचे जमीन पर.

पांव चौड़े होते ही पूजा की पूरी चूत खुल गयी। उसकी चूत की दरार गीली पड़ी थी। इतनी देर मादक डांस के बाद यह तो होना ही था।

अशोक उसकी टांग के बीच बैठ गया। उसका भी एक पांव सोफे की सीट पर तो दुसरा नीचे जमीन पर था। उसने जल्दी से पूजा की कमर पकड़ उसकी गांड को थोड़ा ऊपर उठाया और अपना लंड पूजा की चूत में डाल दिया।

अशोक ने अपनी गांड को आगे पिछे धक्के मारते हुए पूजा को चोदना चालू किया और पूजा की बुरी तरह से सिसकियां चालू हो गयी। वो तो कबसे अशोक से चुदवाने को तड़प रही थी।

उस चुदाई के मजे में उसने बिल्कुल भी ख्याल नहीं किया कि नितीन भी खड़ा देख रहा था। वो भी शायद अब बागी हो चुकी थी। वैसे भी अभी तक नितीन ने गुस्सा नहीं दिखाया था, उल्टा वो तो अपनी बीवी को चुदते हुए देख मजे ले रहा था।

अशोक अब थोड़ा नीचे हो गया था और पूजा की पीठ अब पूरी तरह सोफे पर टिकी थी। अशोक ने पूजा के दोनो पांव हवा में खड़े कर दिए और पकड़ लिए.

पूजा के दोनो पांवो को अपने हाथों में पकड़े अशोक उसे अच्छे से चोद रहा था और बीच बीच में पूजा के पांव थोड़े चौड़े भी कर देता.

पूजा खुद अपने मम्मे दबाए चिखने लगी थी। उसके लिए यह चुदाई का मजा असहनीय हो गया था। संगीत से भी ज्यादा अब पूजा की चिखें सुनाई दे रही थी।

नितीन खुश दिख रहा था और अपनी बीवी को इस तरह चुदते मजे लेते देख उसकी पैंट में उसका लंड खड़ा हो चुका था।

ऐसी चुदाई देख मेरी खुद की पैंटी गीली होने लगी थी। वो तो अच्छा था कि कल ही मैंने अपनी चूत में ऊँगली कर उसको शांत किया था, वरना अभी मेरे लिए कण्ट्रोल करना बड़ा मुश्किल हो जाता.

थोड़ी देर बाद एक के बाद एक अशोक और पूजा तेज सिसकारियां भरते हुए जड़ गए. मगर जड़ते जड़ते वो माहौल बहुत ज्यादा गरम कर गए थे.

वो दोनो अब सोफे से उठे और अशोक कपड़े पहनने लगा और पूजा अपने कपड़े उठाए वहां से अंदर रूम में चली गयी। नितीन मेरी तरफ बढा.

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अशोक ने पूजा की गांड मारने का अपना सपना पूरा किया तो पूजा की भी अशोक से चुदवाने की तमन्ना पूरी हुयी।

नितीन: “चलो, इन दोनो का तो हो गया, अब तो मुझे चोदने दो प्रतिमा”

मैं: “मेरे पास मत आना, दूर रहो”

नितीन: “अशोक ने तो पूजा को चोद दिया हैं, उसने बोला था इसके बदले तुम भी मुझे चोदने दोगी. अब पिछे क्युँ हट रही हो?”

मैं: “मैने ऐसा कोई वादा नहीं किया, अशोक ने बोला तो उसी को जाकर पूछो”

नितीन: “यह क्या हैं अशोक! प्रतिमा तो कुछ करने नहीं दे रही. यह कैसी डील हैं? तुमने बोला था कि मै तुम्हे पूजा को चोदने दुंगा तो मुझे प्रतिमा को चोदने का मौका मिलेगा. अब यह मना कर रही हैं”

अब मुझे पता चला कि नितीन क्युँ अपनी बीवी को चुदवाने को तैयार था। अशोक ने नितीन से खूफिया डील कर ली थी मुझे चोदने के बदले पूजा को चोदने की.

अशोक: “प्रतिमा मान जाओ, कभी दुसरो के लिए भी कुछ कर दिया करो”

मैं: “मैने तुम्हे पहले ही बोल दिया था कि मै अब ऐसा वैसा कुछ नहीं करुंगी. मै तो अब जा रही हूँ”

अशोक तेजी से मेरी तरफ बढ़ और मुझे रोका.

अशोक: “ऐसे मत करो यार. एक आखिरी बार मेरी खातिर. मेरा जन्मदिन गिफ्ट समझ कर, कर लो”

वो मेरे पैरो में गिर गया और हाथ जोड़कर विनती करता रहा। मगर मै अब उसकी बातों में नहीं आने वाली थी। मै एक सही रास्ते पर बढ़ चुकी थी और अब फिर गलत रास्ते पर जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. खासतौर से मै अशोक का उसके झूठ में क्युँ साथ दू.

इस बीच पूजा कपड़े पहन कर बाहर आ चुकी थी। उसको भी माज़रा समझ में आ गया था कि क्या हुआ हैं।

जन्मदिन पार्टी तो हुयी नहीं, अशोक ने जरूर पूजा की गांड और चूत मारने का मुफ्त में मजा ले लिया था। पूजा को भी अशोक से चुदवाना था तो उसकी भी इच्छा पूरी हो चुकी थी।

इन सब में नितीन बेवकूफ बन गया, अपनी बीवी भी चुदवा ली और उसे कुछ नहीं मिला. मै उन लोगो को वहीं छोड़ कर बाहर आ गयी। नितीन ने पिछे से पूजा और अशोक के साथ क्या किया यह मुझे नहीं पता.

नितीन अब घर जाकर पूजा की क्या खबर लेगा वो देखना था। थोड़े दिन बाद ही पता चला कि पूजा और नितीन ने भी अलग होने का फैसला कर लिया हैं।

थोड़े दिन बाद जब मै अपने बच्चे को लेने अपने पति के घर गयी तो जो कुछ देखा मुझे शॉक लगा। घर के बाहर अशोक की गाड़ी नहीं थी तो मुझे लगा वो अभी तक घर नहीं आया हैं। मेरे पास अभी भी घर की अतिरिक्त चाबी थी तो मै अंदर चली गयी थी ताकि वहां उसका इंतजार कर सकू.

मेरे बेडरुम से आती आंहो से मै रुक गयी थी। अशोक शायद बेडरुम में किसी औरत को चोद कर खुश कर रहा था। देखा जाऐ तो अभी भी मै और अशोक पति पत्नी ही थे।

मन में बहुत बुरा भी लग रहा था। अभी तलाक भी पूरा नहीं हुआ था और अशोक किसी और औरत के साथ लगा हुआ था। मै उनको डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी पर मन में एक जिज्ञासा भी थी कि वो कौन हैं।

बड़ा डर यह भी था कि कही मेरी भाभी अपना वादा तोड़ कही अशोक के साथ कुछ कर तो नहीं रही. मैंने बेडरुम में झांकना ठीक समझा.

दरवाजा खुला था और अंदर से चुदते हुए औरत की आवाज बड़ी तेजी से आ रही थी। मै दरवाजे तक पहुंची. एक गौरी चिट्टी लड़की मेरे बिस्तर पर घोड़ी बनी बैठी थी और अशोक उसके पिछे से डोगी स्टाईल में चोद रहा था।

अशोक के झटके इतने तेज थे कि मुझे बाहर तक थाक थाक की आवाजे आ रही थी। लड़की मीठे दर्द और मजे के मारे बड़ी कामूक आवाज में आहें भर रही थी।

उसके बदन को देख लग गया कि वो मेरी भाभी तो नहीं हो सकती थी। फिर भी उसका बदन जाना पहचाना सा लग रहा था।

पीछे से मै उसकी शक्ल तो देख नहीं पा रही थी। बिस्तर के पास जरूर उस लड़की की साड़ी और पेटीकोट पड़े हुए थे। अशोक लड़की की गांड को दोनो साइड से पकड़े कभी झटके मारता तो कभी बिना पकड़े मारता.

बिना पकड़े जब भी वो झटके मारता तो लड़की की चिखें निकल जाती। यह चुदाई देख मेरे पूरे शरीर में खून गरम होकर दौड़ने लगा।

मेरी खुद की चूत में हलचल होने लगी थी। इतने समय से ना तो मैंने चुदाई की थी और ना ही देखी थी। मै वहीं दरवाजे पर बिना आवाज किए खड़ी थी।
 
कई दिनों से मैंने अपनी चूत में ऊँगली तक नहीं कि थी और मेरी खुद की चुदने की इतनी इच्छा थी कि अगर उस वक्त अशोक मुझे बुलाकर चोदने लगता तो मै उसे मना नहीं कर पाती. इतने समय से मैंने कण्ट्रोल किया था पर अब अपनी आँखों के सामने यह होता देख मै अपने आप को रोक नहीं पा रही थी।

अशोक के झटके और तेज हो गए और इसी के साथ लड़की की आहें भी. लड़की खुद आगे पिछे हो चूद रही थी। शायद वो जड़ने वाले थे। मै इसी आस में खड़ी रही कि मै लड़की की शक्ल देख पाऊ.

लड़की के खुले बाल उसके चेहरे पर भी थे पर उसकी मम्मे छाती पर लटके हुए थे और काफी अच्छी शेप में थे। जिसे वो खुद अपने एक हाथ से रह रह कर दबा रही थी।

जल्द ही अशोक तेज चीखों के साथ जड़ गया और उसी जड़ने के दौरान उस लड़की ने पिछे मुड़ कर देखा और मुझे उसकी शक्ल दिखाई दी.

मेरे पैरो तले जमीन खिसक गयी। वो पूजा ही थी। नितीन से अलग होने के बाद अब वो आज़ाद हो चुकी थी और अब अशोक के साथ चुदवा सकती थी।

इस से पहले वो दोनो मुझे देखते, मै उलटे कदम बाहर आ गयी। मै दरवाजा धीरे से बंद कर मै बाहर सड़क पर आ गयी। कुछ मिनट रुक कर मैंने डोरबैल बजाई. कुछ देर के बाद अशोक ने दरवाजा खोला.

उसने बताया कि मेरा बच्चा उसकी माँ के घर हैं। मै पूजा का चेहरा देखना चाहती थी पर वो दिखी नहीं. मै अब वहां से जाने लगी तभी अशोक ने रोका.

उसने कहा कि अगर मै उस तरफ जा रही हुं तो मै पूजा को रास्ते में ड्राप कर दू. मै अंजान बनी रही कि पूजा कहा हैं और उसने मुझे रुकने को बोला.

मै अशोक के साथ बात करते रुकी रही और थोड़ी देर बाद कपड़े पहने पूजा बाहर आयी। एक बार मुझे देख वो सहमी और फिर मुझे हंसते हुए मेरा हाल चाल पुछा. मै उसको अपनी कार में बैठाये जाने लगी।

मैं: “कब से चल रहा हैं ये सब? अब नितीन की नजरो में तुम नहीं गिरी”

पूजा: “अब मै उस से अलग हो चुकी हूँ, अब मै अपने मन की कर सकती हूँ. वैसे भी तुमने अशोक को छोड़ दिया हैं तो तुम्हे मेरे इस रिश्ते से कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए”

मैं: “मुझे कोई परेशानी नहीं. अशोक तो वैसे ही तुम्हारी गांड की लचक का दीवाना हैं”

पूजा: “बताया उसने. मेरे तलाक का प्रक्रिया खत्म होते ही मै उसके साथ शादी का प्लान कर रही हूँ”

मैं: “बधाई हो, अशोक मुबारक हो. वैसे तुम्हारा कोई भाई हैं?”

पूजा: “हां एक हैं, पर उस से क्या!”

अब मै पूजा को क्या बताऊं कि मेरा अशोक से तलाक इस बात पर हुआ हैं कि वो मुझे मेरे भाई के साथ सुलाना चाहता हैं। मै तो बस पूजा को बेस्ट ऑफ़ लक ही बोल सकती थी।

मैं: “नहीं ऐसे ही पूछ लिया, उनको अशोक से कोई आपत्ति ना हो इसलिए”

पूजा: “उनको कोई परेशानी नहीं होगी, मेरी ख़ुशी में उनकी ख़ुशी हैं”

पूजा अभी तो खुश हैं पर अशोक अगर अपना असली रंग दिखाएगा तो वो पूजा को भी उसके भाई के साथ चुदने को जरूर बोलेगा या ग्रुप सेक्स के इवेंट में ले जायेगा.

कुछ दिनों बाद ऑफिस का सालाना उत्सव होने वाला था। जब मैंने पहले उत्सव में भाग लिया था तो राहुल मेरा दीवाना हो गया था। फिर दूसरे उत्सव में तो उसने मुझे चोद ही दिया था।

क्या यह उत्सव मेरे लिए एक नयी उमंग लाने वाला था। मगर मै यह निर्णय नहीं कर पा रही थी कि मुझे अब फिर किसी रिश्ते में फंसना हैं या नहीं.

मुझे रूबी के जैसी आजाद लाईफ चाहिये थी। रूबी ने बोला कि वो मुझे पिक अप कर लेगी और सालाना जल्से के लिए हम साथ में उसकी कार में राहुल के फार्म हाऊस पर जाएंगे।

मैने उसको बोला कि उसको उल्टा रास्ता पड़ेगा पर उसे वैसे ही मेरे घर की तरफ अपने बच्चे को अपने पति के पास छोड़ने आना था। पार्टी में लेट हो जाएंगे तो वो अपने बच्चे को अपने पति के पास छोड़ना चाहती थी।

शाम को अपने बच्चे को ड्राप करने के बाद वो मुझे लेने आयी और हम पार्टी में पहुचे. पहली बार मै ऑफिस की सालाना पार्टी में सिंगल स्टेटस के साथ आयी थी।

ऑफिस के मर्दो को इसमें मौका दिखाई दिया और मेरे साथ डांस करने कि इच्छा जताई. पर मेरा अब और कोई रिश्ता बनाने की कोई अरमान नहीं था।

जब से राहुल और मेरा ब्रेकअप हुआ था उसने मुझसे डांस करने की पेशकश नहीं की, क्युँ कि उसको पता था कि मै उस से अब दूर ही रहुंगी. पार्टी खत्म होने को आयी और रूबी मेरे पास आयी।

रूबी: “प्रतिमा, सॉरी यार. मै तुम्हे ड्राप नहीं कर पाउंगी. मै जिम्मी और रितेश को ले जा रही हूँ”

मैं: “पर तुम मुझे लेकर आयी थी!”

रूबी: “समझा कर यार, पार्टी का मूड हैं। पार्टी के बाद चुदवाया नहीं तो मजा अधुरा रह जाता हैं”

मैं: “यह तुम कह रही हो! तुम तो ऊँगली तक से नहीं चुदवाती, इतना कण्ट्रोल हैं अपने आप पर”

रूबी: “ऊँगली से इसलिए नहीं चुदवाती कि मुझे कोई ना कोई मर्द मिल ही जाता हैं चोदने के लिए. जिम्मी के साथ चुदवायें काफी समय हो गया हैं, आज मौका मिला हैं, मै जाने नहीं देना चाहती. आज तो दो दो मर्द मिल गए हैं। बहुत दिनों बाद थ्रीसम का मजा लुंगी”

मैं: “तुम्हारा पहले से यह कार्यक्रम था तो मुझे अपने साथ क्युँ लायी? मै खुद अपनी कार में आ जाती। अब मै फंस गयी”

रूबी: “मुझे तो उन दोनो ने बोला था कि अपनी बिवीयों के साथ आयेंगे तो मुझे लगा चांस नहीं मिलेगा, पर वो अकेले आये हैं तो सोचा लगे हाथों मजे ले ही लु”

मैं: “मुझे यकीन नहीं हो रहा हैं। तुम तो मेरी चूत को लंड का गुलाम बोलती थी। तुम भी यहीं निकली?”

रूबी: “तो क्या करती ! पति ने आदत इतनी डाल दी, कब तक ऊँगली से करती . आज़ाद लाईफ में सब मजे कर लेने चाहिये। पति की कोई पाबंदी नहीं, रोज नये नये मर्दो के साथ करवा के अपनी इच्छा पूरी करती हूँ”

मैं: “मै तो तुम्हे कितना मानती थी, और तुम क्या निकली”

रूबी: “एक काम करो, तुम वैसे ही अपने पति से अलग हो चुकी हो, तुम्हे भी जरुरत होगी चुदवाने की. एक काम करो, मेरे साथ चलो, हम फोरसम कर लेंगे”

मैं: “मुझे नहीं जाना ऐसी किसी लड़की के घर जिसकी चूत लंड की गुलाम हो”

रूबी: “तुम भी यहीं करती अगर मैंने तुम्हारी मदद ना की होती. मै तो बोलती हूँ तुम भी मजे ले लो. जिम्मी और रितेश पसंद नहीं तो किसी और को ले लो”

मैं: “तुम अभी जाओ, मुझे अभी तुमसे बात नहीं करनी”

रूबी अपने दोनो ऑफिस के साथीयों को लेकर चली गयी अपने थ्रीसम के लिए.
 
कुछ दिनों के अंतराल में मुझे दो झटके मिल चुके थे।जिन दो लड़कियो को मैंने सती सावित्री समझ अपना रास्ता ठीक कर लिया था वो दोनो ही ऐसी निकली.

मुझे और कोई लिफ्ट नहीं मिल रही थी क्युँ कि बचे हुए लोग सभी अपनी परिवार के साथ आये थे और उनकी बीवियां मुझ जैसी सिंगल और खुबसूरत औरत को देख इनसिक्योर महसूस कर रही थी कि उनके पति बहक जाएंगे।

मुझे परेशानी में देख राहुल मेरी मदद को आगे आया। उसका उस रात फार्म हाऊस में ही रुकने का प्लान था तो उसने अपने ड्राइवर को भी कार सहित छुट्टी पर भेज दिया था।

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रूबी चुड़क्कड़ निकली और मेरा भरोसा तोड़ दिया। अब मेरे सामने राहुल के साथ फार्म हाउस में रुकने के अलावा और कोई चारा नहीं था।

राहुल ने मुझे उस रात वहीं रुकने के लिए बोल दिया। मुझे अब डर भी लग रहा था। यहीं वो फार्म हाऊस था जहा राहुल ने कई बार मुझे चोदा था। अब अकेले में उसके साथ रुकना मुश्किल था।

मैने वैसे ही इतने दिन से चुदाई नहीं करवाई थी और अगर राहुल मेरे करीब आया और मुझसे कोई गलती हो गयी तो.

वैसे भी राहुल को मेरी कमजोरी पता थी, मेरी चूत में उंगली होने के बाद मै अपने आप को रोक नहीं पाती.

मेरे पास और कोई उपाय नहीं था। वैसे भी मै अपने पति से अलग हो चुकी थी। मेरा पति खुद दुसरी औरतो को चोद रहा हैं तो मै क्युँ ना किसी के साथ चुदवा लु.

पूजा और रूबी, जिन्होंने मुझे हिम्मत दी थी, वो खुद ही दुसरो के साथ चुदवा रही थी। वैसे भी रात को वहां रुकने का मतलब यह नहीं था कि मै चुदवा ही लुंगी.

मैने उसको हां बोल दिया पर परेशानी यह थी कि सिर्फ उसके रूम की ही सफाई हुयी थी और सोने के लिए कोई दुसरी जगह नहीं थी।

राहुल ने मुझे उसके बिस्तर पर सोने को बोल दिया और खुद बाहर सोफे पर सोने के लिए तैयार था। पर मै नहीं मानी. मै उसी शर्त पर वहां रुकने को राजी हुयी कि मै सोफे पर सोउंगी और वो अंदर बिस्तर पर.

मै उस दिन फ्रॉक जैसी ड्रेस पहनी थी जो घुटनो के ऊपर तक ही थी।

राहुल ने मुझे ओढने के लिए कुछ दिया और एक तकिया दे दिया। जब वो वहां से चला गया तभी मै सोफे पर लेटी

मेरे दिमाग में सिर्फ रूबी और पूजा ही गुम रहे थे। उन दोनो में मिलकर मुझे सुधार दिया था पर वो दोनो ही बिगड़ैल निकली. मुझे थकान के मारे जल्दी ही नींद आ गयी।

रात को मैंने अपनी जांघो पर कुछ टच होता महसूस किया और मै एकदम से उठ बैठी. मेरी ड्रेस थोड़ी ऊपर उठ चुकी थी और मेरी आधी जांघे नंगी दिख रही थी।

राहुल मुझ पर झुका हुआ था। डर के मारे मुझे उस वक्त कुछ नहीं सुझा और मेरा हाथ चल गया और राहुल को थप्पड़ मार दिया।

मैं: “इसलिए मुझे रात रुकने को बोल रहे थे?”

मैने अपनी ड्रेस को फिर नीचे किया और उठ खड़ी हुयी

राहुल: “तुम्हारा चादर सोफे से नीचे गिर गया था और तुम ठंड से कांप रही थी इसलिए तुम पर चादर डालने आया था”

यह कहकर वो चादर वहीं सोफे पर रख अंदर बेडरुम में चला गया। मैंने अपने नंगे हाथ देखें जहा रोंगटे खड़े हुए थे। सोफे पर बैठ कर अपनी नंगी टांगे देखी, वहां भी ठंड से रोंगटे खड़े थे.

थोड़ी ठंड तो मुझे महसूस हो रही थी। शायद राहुल सही कह रहा था, वो तो सिर्फ मेरी मदद करने आया था और मैंने उसको थप्पड़ जड़ दिया।

बिना गलती के थप्पड़ खाना कितना बुरा लगता हैं वो मै समझ सकती थी। पर अब मै क्या करती . इतनी रात को उसके बेडरुम में जाकर माफ़ी मांगती.

फिर सोचा सुबह उठकर ही माफ़ी मांगुगी. तब तक शायद उसका गुस्सा भी शांत हो जाऐ। मै चादर ओढ़ कर फिर सो गयी। सुबह हल्की ठंड के साथ मेरी नींद उड़ी. चादर फिर से सोफे के नीचे पड़ा था। उठकर देखा तो ड्रेस पूरी ऊपर होकर लगभग मेरी कमर तक आ चुकी थी और मेरी पैंटी दिखने लगी थी।

मै जल्दी से कपड़े नीचे कर बदन ढका. अच्छा हुआ राहुल अभी तक नहीं उठा था। मै अब बाहर बालकनी में आयी और गार्डन की तरफ देखने लगी। सुबह को उस फार्म हाऊस का नजारा बहुत हसीन होता हैं।

देखा तो राहुल गार्डन में दौड़ लगा रहा हैं। राहुल पहले ही उठ चुका था और उसने मुझे इस तरह सोते हुए देख लिया होगा। मै शर्म से पानी पानी हो गयी।

इस बार तो उसने मुझे चादर भी नहीं ढका. ढकता भी क्युँ, पिछली बार भलाई करने गया था तो मुझसे थप्पड़ खाया था, फिर वहीं गलती क्युँ करता.

मुझे बालकनी में खड़ा देख राहुल बालकनी के नीचे आया और एक अजीब सी शक्ल बनायी और फिर मुझे बोल दिया कि उसका ड्राइवर 1 घंटे में आने वाला हैं जो मुझे मेरे घर ड्राप कर देगा. यह कह कर वो फिर चला गया अपनी जॉगिंग के लिए.

मै वाशरूम गयी और थोड़ी देर बाद अपना मेकअप टच अप कर तैयार थी। मै अब बाहर आयी। मै अब दुगुना शर्मींदा थी, एक तो सोते हुए अपने अंगप्रदर्शन से और दुसरा बेवजह राहुल को थप्पड़ मारने से . मै राहुल के पास माफ़ी मांगने गयी।

मैं: “राहुल, आई एम सॉरी रात को मैंने ग़लतफ़हमी में जो किया”

राहुल: “कोई और होता तो वो भी यहीं करता. मेरी ही गलती थी, मुझे तुम्हे उठा देना चाहिए था। पर हमारे पहले की रिश्ते को ध्यान में रखकर मैंने सोचा मै ही तुम्हे बिना उठाए चादर ओढ़ा दू”

राहुल ने मेरे लिए कॉफ़ी बनायी और मै उसके सामने सोफे पर बैठे पांव क्रॉस किए बैठी थी। ड्रेस छोटी थी तो मेरी नंगी जांघे थोड़ी दिख रही थी और मै यह देख पिछली घटना याद कर शर्माने लगी।

उसने कुछ ज्यादा ही मेरी नंगी टांगे सोते हुए देख ली थी। पर फिर सोचा हमारे पिछले सम्बन्धो के दौरान वो पहले ही मुझे पूरा नंगा देख चुका हैं, फिर यह तो कुछ नहीं था।
 
मैं: “मेरी ड्रेस थोड़ी छोटी हैं और मुझे रात को सोते वक्त इतना ध्यान नहीं रहा तो उसके लिए सॉरी , मै इस तरह सो रही थी”

उसने एक हल्की स्माईल ली और कुछ नहीं बोला और फिर वो अपनी हंसी नहीं संभाल सका और जोर जोर से ठहाका लगाते हुए हंसने लगा। एक बार तो मै बहुत शर्मींदा हुयी कि उसने मुझे कैसी स्तिथि में देखा था कि मुझ पर हस रहा था, पर फिर हंसने वाली बात थी तो मै खुद हंस पड़ी थी। शायद इस तरह मेरा वो पाप उतर जाऐ कि मैंने उसको थप्पड़ मारा था। मुझे हंसता देख वो और भी ज्यादा हंसा. फिर थोड़ी देर बाद हम दोनो शांत हुए.

मैं: “इतना क्युँ हस रहे थे?”

राहुल: “पुराणी याद आ गयी थी। जब मैंने तुम्हारी पैंटी अपने पास रख ली थी और तुम मुझसे मेरे केबिन में मांगने आयी थी”

मैं: “मै इस तरह सो रही थी तो तुम नजर नहीं फेर सकते थे! इस तरह सोती हुयी लड़की को देखते शर्म नहीं आयी?”

राहुल: “मैने थोड़े ही तुम्हे बोला था कि तुम अपनी पैंटी दिखाओ. तुम खुद दिखा रही थी, कोई भला क्युँ नहीं देखेगा”

मैं: “यह क्या बार बार पैंटी पैंटी बोल रहे हो. कोई तुम्हारे बारे में ऐसा बोले तो?”

राहुल: “मगर मै तो पैंटी पहनता ही नहीं हूँ”

यह बोलकर वो फिर जोर से हंसे लगा और मै भी बिना हंसे नहीं रह पायी।

राहुल: “वैसे तुम जब कभी यह ड्रेस पहनो तो बालकनी में मत खड़े होना. नीचे से अब दिखता हैं”

मेरा मुंह खुला का खुला ही रह गया। वो फिर हंसने लगा। बालकनी में खड़ी हुयी थी तब वो बालकनी के नीचे खड़े होकर मुझे बोलने आया था। तब उसने फिर मेरी ड्रेस के नीचे से मेरी पैंटी देख ली थी। शायद इसी कारण उस वक्त उसने अजीब सी शक्ल बनायी थी।

मैने सोफे पर पड़ा कुशन उठा कर उसकी तरफ गुस्से में उछाल दिया, पर कुशन उस से दूर जा गिरा. वो फिर ठहाका लगा हंसने लगा। वो मजाक मजाक में मेरा अपमान कर रहा था। मैंने कॉफ़ी मग वहीं रखा और उठ कर उसकी तरफ झपटी.

ठहाका लगाने से पहले उसने अपना कॉफ़ी मग पहले ही टेबल पर रख दिया था। मैंने कुशन से उसको मारना शुरु कर दिया पर वो हंसता रहा और मै चिढ़ती रही.

हम भूल ही गए थे कि हम रिश्तो के किस मौड़ पर थे। उसने मेरे हाथ वाला कुशन पकड़ लिया, मैंने छुड़ाने की कोशिश की. मै उस से कुशन नहीं छीन पायी। मेरी जद्दोजहद देख उसने कुशन छोड़ दिया और मै कुशन खिंचते पिछे की तरफ जा गिरी. मै पीठ के बल पीछे गिरी और मेरी टांगे ऊपर हवा में उठ गयी। मेरी ड्रेस एक बार फिर कमर तक उठ गयी और मेरी पैंटी उसको दिख गयी।

मै एक बार फिर शर्म से पानी हो चुकी थी। मै जल्दी से कपड़े संभालते खड़ी हुयी और अपने हाथ में पकड़ा कुशन उस पर दे मारा और गुस्से से ज्यादा शर्म से मै उसकी तरफ पीठ कर अपने सोफे के साइड में जाकर खड़ी हो गयी।

उसकी हंसी अब बंद हो गयी थी। कुछ सेकण्ड के बाद उसका शरीर मेरे पिछे आकर टकराया. मै पूरा हिल गयी। उसने अपना एक हाथ मेरे पेट पर लपेट कर पकड़ लिया।

मेरी गांड उसके आगे के हिस्से से चिपक गयी और थोड़ा दब गयी। दुसरा हाथ उसने मेरे हाथों में रखा और हमारी उंगलिया आपस में उलझ कर फंस गयी।

उसके होंठ मेरी गरदन को चूमते हुए मुझे नशा दिला रहे थे। मेरा अपने आप पर कण्ट्रोल जाता रहा। मै आंखे बंद किए उसके चूमने को महसूस करती रही.

उसने मुझे चूमना बंद किया और मेरा हाथ छोड़ा. फिर मेरी ड्रेस का निचला किनारा पकड़ लिया और उसको धीरे धीरे ऊपर उठाने लगा।

मैने नीचे देखा. मेरी ड्रेस मेरी जांघो तक ऊपर उठ चुकी थी, और फिर धीरे धीरे ऊपर होते हुए मेरी पैंटी तक आ चुकी थी।

मैने अपना हाथ अपनी ड्रेस के ऊपर से ही चूत पर रख दिया और वो ड्रेस आगे से ऊपर नहीं उठा सका. उसने ड्रेस वहीं छोड़ दी और वो ड्रेस फिर नीचे हो गयी। उसका एक हाथ अभी भी मुझे कमर से झकड़े हुए था।

फिर उसने पीठ पर से मेरी ड्रेस की चैन पूरी खोल दी और मेरी ड्रेस ऊपर से थोड़ी ढीली हो गयी। अगले ही पल उसने मेरा पेट छोड़ा और अपने दोनो हाथों से मेरी ड्रेस को मेरे कंधो से नीचे उतार दिया।

मेरे दोनो कंधे नंगे हो गए और मैंने दोनो हाथों से अपनी ड्रेस को कंधो से और नीचे गिरने से बचाया.

राहुल ने मेरा एक हाथ पकड़ उसको ड्रेस से हटाया. फिर दुसरा हाथ भी नीचे कर दिया।

मेरे कंधे अब पूरी तरह बाहर आ गए थे और सिर्फ ब्रा की पट्टी थी। ड्रेस मेरे मम्मो पर जाकर अटक गयी थी।

फिर उसने अपने दोनो हाथों से मेरी ड्रेस को ऊपर से नीचे खिंच कर निकालना शुरु किया. मेरे हाथ नीचे ही थे और ऊपर उठ कर मुझे नंगा होने से बचाने की कोशिश नहीं कर रहे थे.

मेरी ड्रेस मेरे मम्मो के ऊपर से उतर कर नीचे हो गयी और पेट तक आ गयी। मेरा ब्रा और उसमे झांकते गौरे मम्मो का उभार दिखने लगा था।

इतने दिन से चुदाई को तड़पते मेरे बदन ने आत्मसमर्पण कर दिया था। मेरी ड्रेस अभी भी मेरे पेट पर अटकी थी और राहुल ने मेरे ब्रा की पट्टी भी कंधे से हटा कर कोहनी तक ले आया।

ब्रा का ऊपर का सपोर्ट हटटे ही मेरा ब्रा मेरे मम्मो से थोड़ा नीचे खिसका और ऊपर का थोड़ा ज्यादा उभार दिखने लगा।

वो अपना एक हाथ अब मेरे ब्रा के ऊपर के मम्मो के उभार पर रगड़ने लगा। उसका हाथ धीरे धीरे नीचे आता गया और मेरा ब्रा नीचे खिसकता गया।

मेरा लगभग ऊपर का आधा मम्मा उसने दबोच लिया था। एक और झटका मारते ही मेरा ब्रा मेरे मम्मो से हट सकता था।
 
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