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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

ना तो मैं राहुल के बच्चे की माँ बन पा रही थी और ना ही हम अशोक और पूजा के साथ कोई डील फाइनल कर पाए थे कि पूजा राहुल के बच्चे को पैदा कर सके।

उसके कुछ दिनों बाद राहुल के माँ बाप ने मुझे उनसे मिलने बुलाया. मुझे थोड़ी ख़ुशी मिली कि शायद राहुल ने अपने माँ बाप को समझा दिया हैं कि वो मुझे ऐसे ही स्वीकार करने को तैयार हैं।

मै उनसे मिलने पहुंची पर राहुल वहां नहीं था। उन्होने मुझे स्वीकार करने नहीं बुलाया था पर इमोशनली ब्लैकमैल करने बुलाया था। उन्होने मुझको दूहाई दी कि मै क्युँ उनके बेटे की पीछे पड़ी हूँ और उसकी ज़िन्दगी खराब करने पर तुली हूँ. मेरे चक्कर में उसने किसी और से शादी के लिए मना कर दिया था।

उनकी इतनी जायदाद हैं, उसका वारीस कौन होगा! उनको अपने बेटे से इतने अरमान हैं कि उसका छोटा परिवार हो, बच्चा हो, पर मै तो उनको कुछ नहीं दे सकती. उन्होने मुझ जैसे बच्चे वाली तलाकशुदा औरत को भी भारी मन से स्वीकार किया था और अब मै माँ नहीं बन सकती फिर तो मै उनके किसी काम की ही नहीं थी।

उन्होने मुझे बहुत समझाया कि मै उनके बेटे का पीछा छोड़ कर उन बुढ़े माँ बाप पर अहसान कर दू. अगर मुझे पैसे चाहिये तो वो चाहे उतना दे सकते हैं पर मै उनके बेटे की ज़िन्दगी से दूर हो जाऊ.

मेरे सिर पर तो पहाड़ टूट पड़ा. मुझे इतनी जली कटी तो कभी सुनने को नहीं मिली थी। उनको तो मेरी नीयत पर ही शक था कि मै उनकी सम्पति हड़पने के लिए यह सब कर रही हूँ और मै लालची हूँ.

मै वहां से इतना सुनने के बाद रोते धोते निकली थी। मेरा तो दुनिया से मोह ही भंग हो गया था। उनकी बातें मुझे बहुत बुरी तरह से चुभ रही थी।

देखा जाऐ तो वो सही भी थे. उनके बेटे में कोई कमी नहीं हैं। उनको किसी अच्छे खानदान की खुबसूरत बहू मिल जाएगी जो सही तरीके से माँ भी बन सकती थी।

राहुल मेरा आखिरी सहारा था और मै उसको छोड़ना नहीं चाहती थी पर हमेशा अपने बारे में सोचने वाले स्वार्थी होते हैं। राहुल मेरे प्यार की खातिर इतना त्याग कर रहा था कि अपने माँ बाप से भी बगावत कर ली थी।

अगर मुझे राहुल से सच्चा प्यार हैं तो मुझे भी त्याग करना होगा। मैंने भारी मन से फैसला कर लिया कि राहुल से नाता तोड़ लुंगी ताकि वो अपनी नयी ज़िन्दगी शुरु कर पाये।

ऑफिस में रूबी से मिली और मैंने उसको अपनी सारी कहानी पहली बार बताई.

रूबी: “मुझे अच्छा लगा कि तुम्हारी लाईफ सेट हो जाएगी पर मुझे पता हैं, तलाकशुदा औरतो का जीवन क्या होता हैं। मै तुम्हारी जगह होती तो स्वार्थी बन जाती और राहुल को कभी नहीं छोड़ती. मगर मुझे पता हैं तुम ऐसा नहीं करोगी. तो फिर तुमने क्या सोचा?”

मैं: “मेरे समझाने से तो वो मानेगा नहीं. मै राहुल का दिल तोडूंगी, ताकि वो मुझे भूल जाऐ और अपनी नयी ज़िन्दगी शुरु करे”

रूबी: “क्या करने वाली हो तुम?”

मैं: “बेवफाई करुंगी. मै कुछ ऐसा करुंगी कि मै राहुल की नजरो में गिर जाऊ. मुझे तुम्हारी मदद चाहिये होगी. मै राहुल के सामने किसी और को किस करुंगी. तुम्हारे यहाँ इतने आशिक हैं, किसी को इस काम के लिए मना सकती हो?”

रूबी: “यार प्रतिमा, यह सब मत कर. चीजे गलत भी हो सकती हैं। राहुल तुझसे प्यार करता हैं। उसका दिल टूटा तो फिर कभी ना जुड़े यह भी हो सकता हैं। वैसे भी तुम्हे त्याग करने की जरुरत नहीं. उसके बुढ्ढे माँ बाप कितने साल ज़िंदा रहेंगे . फिर तो तुम और राहुल ही रहोगे ना. तुम दोनो अपने लिए जियो, किसी और के लिए नहीं”

मैं: “मुझे तो बुरी परिस्तिथि में भी ज़िंदा रहने की आदत हैं। मै सिर्फ अपना प्रयास करुंगी, बाकी सब ठीक ही होगा”

रूबी: “हमारे ऑफिस में जो लड़का हैं अमन, वो जल्दी ही जॉब छोड़ने वाला हैं। मै उसको तैयार कर लुंगी. तुमको किस करते देखने के बाद राहुल वैसे ही उसको जॉब से निकाल देगा, तो फर्क नहीं पड़ेगा”

मैं: “ठीक हैं तुम उसको समझा देना”

अगले दिन रूबी मुझे फिर मिली.

रूबी: “कब करना हैं बता दो?”

मैं: “आज ही करना हैं”

रूबी: “आज नहीं, कल करते हैं। उसने इस नाटक के बदले चोदने की शर्त रखी हैं। वो अकेला नहीं हैं, उसके 3-4 दोस्त और भी हैं। सब मिलकर चोदना चाहते हैं”

मैं: “मै यह नहीं कर सकती”

रूबी: “तुम्हे कुछ नहीं करना हैं। वो मै आज रात करवा लुंगी. तुम्हारी दोस्ती की खातिर मै इतना तो कर ही सकती हूँ”

मैं: “हम किसी और की मदद ले लेंगे”

रूबी: “कौन अपनी जॉब खतरे में डालेगा. जो मिल रहा हैं कर लेते हैं”

मैं: “मगर इतने लोगो के साथ एक साथ. तुमने इतने के साथ कभी किया हैं?”

रूबी: “हर चीज कभी ना कभी तो पहली बार करते ही हैं। मेरी चिंता मत कर.”

मुझे रूबी के लिए बहुत बुरा लग रहा था। मेरी वजह से वो 3-4 मर्दो से एक साथ चुदवाएगी. अगले दिन मै अपने सबसे बड़े इम्तिहान के लिए तैयार थी। बहुत नर्वस थी पर करना तो था ही. मुझे रूबी मिली, उसकी तबियत खराब लग रही थी और कुछ लंगड़ाते हुए चल रही थी।

मैं: “क्या हुआ तुम्हे? अमन तैयार हैं ना?”

रूबी: “साला हरामी, 3-4 की बजाय 5 दोस्तों को साथ ले आया। बुरी तरह थका दिया मुझे. मगर तुम फिर सोच लो, तुम्हे ये करना हैं!”

मैं: “मेरी वजह से तुम्हारी यह हालत हुयी, तुम्हारा त्याग मै बेकार नहीं जाने दूंगी. मै और अमन मेरे केबिन में किस करेंगे. तुम राहुल को मेरे केबिन में किसी बहाने भेज देना”

मेरे इस फैसला से रूबी मुझसे ज्यादा निराश थी. राहुल के आने का समय होने वाला था और मैं अपने केबिन में थी।
 
अमन मेरे केबिन के बाहर राहुल के आने का इंतजार कर रहा था। जैसे ही उसे राहुल के आने की भनक लगी और वो मेरे केबिन में घुस गया।

मेरे हाथ पैर थर थर कांप रहे थे। अमन मेरे करीब आया और मुझे अपना शर्ट भी खोल कर मम्मे दिखाने को कहा ताकि प्रभाव ज्यादा आये, पर मैंने उसको मना कर दिया।

उसने अपने होंठ आगे लाकर बुरी तरह से मेरे होंठ कस के दबा दिए और फिर चूसने लगा, जैसे कोई भड़ास निकाल रहा हो. फिर उस कमीने ने अपने एक हाथ से शर्ट के ऊपर से मेरा एक मम्मा बुरी तरह से दबोच लिया।

मुझे बहुत दर्द हुआ और मै उसका हाथ हटाटी उसके पहले ही मेरे केबिन का दरवाजा खुला और राहुल अंदर आया।

मैने अमन को दूर हटाया और उसने मुझे चूमना छोड़ा पर मम्मा फिर भी दबोचे रखा। फिर राहुल का गुस्से वाला चेहरा देखकर उसने मेरा मम्मा छोड़ा और केबिन से बाहर चला गया।

मैने ऐसी शक्ल बनाते हुए नजरे झुका ली जैसे मेरी चोरी पकड़ी गयी हो .

राहुल: “तुम ये सब क्युँ कर रही हो? मुझे पता हैं तुम ऐसी नहीं हो. मै भी तुम्हे इतनी आसानी से नहीं छोड़ुंगा”

फिर वो बाहर चला गया। मैंने और रूबी ने इतना त्याग किया और राहुल पर ज्यादा असर नहीं हुआ था। मै थोड़ी देर बाद राहुल के केबिन में गयी।

मैं: “राहुल, मै तुम्हारे साथ शादी नहीं कर सकती. बेहतर होगा तुम अपने माँ बाप की मर्जी से किसी अच्छी सी लड़की से शादी कर घर बसाओ.”

राहुल: “मुझे क्या करना हैं, मुझे मत सिखाओ”

कुछ समय ऐसे ही निकला, राहुल मुझे ऐसे ही मनाता रहा पर मै नहीं मानी. मैंने उस से दूरी बना ली थी। रूबी भी मुझे समझाती रही कि ऐसा मत करो.

मेरा एक साल का नोटिस पिरीयड खत्म हुआ और कोर्ट ने मुझे अशोक से तलाक दिलवा दिया। पूजा अपने खुद के तलाक पूरा होने का इंतजार कर रही थी ताकि अशोक से शादी कर ले पर वो साथ रह रहे थे.

राहुल मुझ पर भी दबाव डालता रहा कि मुझे उस से शादी कर लेनी चाहिये पर मै अपनी ज़िद पर अड़ी थी। मगर वो सुनने को तैयार ही नहीं था।

फिर हार मान कर मैंने उसको 2 दिन बाद अपने जन्मदिन के दिन मेरे घर आने को कहा. उसने ख़ुशी से मुझे गले लगा दिया। उस दिन मै उस से आखिरी बार गले मिली थी।

मैने रूबी से फिर मदद मांगी.

मैं: “राहुल नहीं मान रहा हैं। मैंने उसको 2 दिन बाद अपने जन्मदिन के दिन अपने घर बुलाया हैं”

रूबी: “क्या बात हैं! तुम उस से शादी करने को तैयार हो!”

मैं: “नहीं, उसका दिल अच्छे से तोड़ना हैं। वो जब मेरे घर आएगा, तब वो मुझे किसी के साथ चुदते हुए देखेगा. मुझे तुम्हारी मदद चाहिये। तुम अपने दीवाने किसी मर्द को भेज दो”

रूबी: “तुम पागल हो गयी हो! तुम्हे पता हैं ना अमन ने पिछली बार क्या किया था। अपने 5 दोस्तों को ले आया था। सारे मर्द ऐसे ही होते हैं, फायदा उठाएंगे तुम्हारा”

मैं: “अब बस आर पार का फैसला हो जाने दो. 5 क्या वो 10 मर्दो को भी ले आये, मुझे मंजूर हैं”

रूबी: “तुने निर्णय कर लिया और नहीं मानेगी मतलब?”

मैं: “हां”

रूबी: “मै नहीं चाहती कि तू यह सब करे, पर तुने निर्णय कर ही लिया हैं तो मै अमन जैसे किसी को नहीं भेजुंगी. मेरा वो पडौसी याद हैं जो तुम्हारी चूत के पानी का दीवाना हैं। वो सीधा इंसान हैं। वो चलेगा तुम्हे? थोड़ी उम्र ज्यादा हैं पर वो तुम्हे परेशान नहीं करेगा”

मैं: “कोई भी चलेगा, मुझे कौन सी शादी करनी हैं। मुझे तो शादी तोड़नी हैं”

रूबी: “ठीक हैं मै उसको भेज दूंगी”

मैं: “तुम भी आ जाना, तुम वहां रहोगी तो अच्छा लगेगा”

मेरे जन्मदिन वाले दिन सुबह से ही मेरा मन नहीं मान रहा था। मुझे नहीं पता था कि मै जो करने वाली हूँ वो काम करेगा या नहीं पर मुझे कोशिश तो करनी थी।

राहुल जितनी बजे आने वाला था उस से एक घंटा पहले ही रूबी अपने पडौसी को लेकर आ गयी थी। उसके पडौसी को पहली बार देखा था, हालांकि वो मेरे चूत के पानी से पहले ही मिल कर चख चुका था। वो एक 45 साल का अधेड़ उम्र का आदमी था। इतने बड़ी उम्र के आदमी से मैंने कभी चुदवाया नहीं था।

रूबी ने मुझको एक और बार सोचने की सलाह दी पर मै तो कब का सोच चुकी थी। उसकी जॉब खतरे में ना पड़े इसलिए मैंने उसको राहुल के आने से पहले अंदर ही छुप जाने को बोला.

राहुल समय का बहुत पक्का था मुझे पता था। उसके आने के आधे घंटे पहले हमने कार्यक्रम शुरु कर दिया। मै और पडौसी अपने सारे कपड़े उतार नंगे हो गए.

एक जवान औरत और वो भी इतने अच्छे फिगर वाली, वो अधेड़ पडौसी तो आंखे फाड़ता हुआ पागल सा हो गया था। रूबी खिड़की पर नजर रखे थी ताकि राहुल के आते ही हमें खबर कर दे.

पडौसी ने मेरे बदन को अच्छे से छूकर मजे लिए. ख़ास तौर से मेरे मम्मो से उसका हाथ ही नहीं हट रहा था। दो बार उसने मेरे मम्मो को अपने दांतो से काटा कर निशान भी बना दिया था।

मेरी कमर, चूत, गांड को अपनी उंगलियों से अच्छे से दबा कर मजे लिए और मेरे होंठो को भी काटा दिया था।

उसने मेरी चूत में ऊँगली घुसा कर उसे अच्छे से रगड़ा. मेरी आहें निकलना शुरु हो गया था और वो और भी तेजी से अपनी ऊँगली रगड़ने लगा। फिर वो मेरी चूत को चाटने लगा।

अपनी जुबान जब उसने मेरी चूत में रगड़ी तो मेरी चूत का पानी चखते ही वो खुश हो गया। उसको क्या पता कि वो यह पानी पहले ही चख चुका था।

उसको मेरी चूत का पानी इतना पसंद आया कि वो कुछ मिनट तक वो ही करता रहा। फिर उसका मन भरा तो मैंने उसको चोदना शुरु करने को कहा.

उसने पहले अपना लंड मुझे चूसने को बोला. उसके लंड पर छोटे छोटे बाल उगे हुए थे और मुझे उसको चूसना पड़ा. रूबी को चोद चोद कर उसके लंड की जवानी बरकरार थी।

राहुल के आने में कुछ ही मिनट बचे थे और मैंने उसको चोदना शुरु करने को बोला. वो भी अपना लंड चुसवा कर खुश था।
 
मै अब सोफे पर लेट गयी और वो मेरे ऊपर पूरा लेट गया। पर मैंने उसको मेरे मुंह से दूर रहने को कहा. ताकि राहुल मेरी शक्ल ठीक से देख पाये।

वो फिर मेरी दोनो टांगो के बीच बैठ कर अपना लंड मेरी चूत में डालने लगा। उसके पहले मैंने उसको कंडोम पहना दिया ताकि उसकी कोई बीमारी मुझे ना लगे।

उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल चोदना शुरु कर दिया। मैंने सुना था कि आदमी और घोड़ा कभी बुढ़े नहीं होते. जितनी जिसकी ताकत से मुझे चोद रहा था मुझे लग गया कि वो कहावत सही हैं।

वो काफी अनुभव के साथ मुझे तरीके से चोद रहा था। उसको पता था कि औरत को खुश कैसे करते हैं। मै अपनी चूत में पड़ते धक्को से जो आहें निकाल रही थी उन्हे वो पढ़ रहा था।

कुछ धक्को के बाद ही उसको पता चल गया कि मुझे कितना अंदर और किस दिशा में चोदने से मुझे ज्यादा मजा आएगा. उसने अब उसी चीज पर ध्यान किया और मुझे एक ही जगह चोदना शुरु कर दिया। तभी रूबी दौड़ते हुए आयी.

रूबी: “राहुल आ गया हैं और साथ में एक बड़ा गिफ्ट लाया हैं। तुम्हे अभी भी यह करना हैं?”

एक बार तो मै सोच में पड़ गयी। राहुल के सामने ये सब करना ठीक नहीं था। मगर मै निर्णय कर चुकी थी और इसी में उसके माँ-बाप की भलाई भी थी।

मैं: “तुम दरवाजा थोड़ा खुला छोड़ दो ताकि वो सीधा अंदर आ जाऐ। फिर तुम अंदर जाकर छुप जाओ”

रूबी ने वैसा ही किया और अंदर छुप गयी। पडौसी अभी भी मुझे तबियत से चोद रहा था। मेरी सिसकियां तो पहले ही निकल रही थी। मैंने अपनी सिसकियां थोड़ी बढा दी थी। नहीं बढ़ाती तो भी पडौसी के लंड के झटको से मै वैसे ही बेहाल हो चुकी थी।

उसके झटके अचानक बढ़ गए थे। इतनी खुबसूरत औरत के अच्छे फिगर को चोदते शायद उसके जड़ने का समय भी जल्दी आ गया था।

राहुल ने मेरा नाम पुकारा और फिर दरवाजा खुलने की आवाज आयी। मैंने आंखे बंद कर दी और सिसकियां भरती चुदवाती रही. राहुल की लगभग चिखते हुए मेरा नाम लेने की आवाज आयी।

मैने आंखे खोल कर देखा, राहुल की आंखे गुस्से में लाल थी और वो सदमे में मुझे चुदते हुए देख रहा था।

इधर पडौसी जड़ने लगा था और तेज दहाड़े मारते हुए मुझे बहुत तेज झटके मारने लगा, मै भी लगभग चीख पड़ी थी।

मै राहुल को देख आहें भरते हुए चुदवाती रही. राहुल ने अपने हाथ में पकड़ा गिफ्ट वहीं नीचे पटक दिया।

राहुल बाहर चला गया और जाते जाते जोर से दरवाजा बंदकर गया। पडौसी मेरी चूत में जड़ चुका था और मुझ पर पूरा लेट गया था।

पडौसी अब मेरे ऊपर से उठा और मेरे आंसू टपकने शुरु हो चुके थे। सामने रूबी खड़ी थी जिसकी खुद की आंखे नम थी।

उसने आगे बढ़कर मुझे उठाया और गले से लगा दिया और हम दोनो एक साथ रो रहे थे. पडौसी को कुछ समझ नहीं आया कि क्या हो रहा हैं। मेरा काम हो चुका था।

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राहुल मुझे भूल कर अपने माँ बाप की पसंद से शादी कर ले, इसके लिए मैंने उसका दिल तोड़ने के लिए उसके सामने एक गैर मर्द से चुदवा कर बेवफाई कर ली।

अगले ही दिन मैंने अपनी नौकरी से इस्तिफा दे दिया। मुझे एक महीने का नोटिस पिरीयड पूरा करना था तो ऑफिस आते रहना था। मैने ऑफिस जाना जारी रखा और राहुल ने मुझसे बात तक नहीं की थी। उसको जो भी कहना होता अपनी सेक्रटरी के द्वारा बोल देता या ईमेल से बताता.

3 सप्ताह बाद ही उसकी सगाई की खबर आ गयी। मेरा ऑफिस में जो लास्ट दिन होने वाला था उसके अगले ही दिन उसकी सगाई थी। ऑफिस में सब खुश थे कि आखिर उनके बॉस ने शादी करने की ठान ली थी। सिर्फ एक जना ऑफिस में खुश नहीं था और वो रूबी थी।

रूबी ने मुझको समझाया कि अभी भी देर नहीं हुयी हैं और वो सब संभाल लेगी पर मैंने उसको मना कर दिया।

मेरा ऑफिस में आखिरी दिन था और मैंने सबसे विदा लेना शुरु किया. राहुल को भी उसकी सगाई के लिए बधाई दे कर मैंने उस से विदा ली. उसने सिर्फ धन्यवाद बोला और कुछ नहीं. जाते वक्त रूबी से भी मिली.

रूबी: “तो क्या सोचा, क्या करोगी?”

मैं: “मै यह शहर छोड़कर कही और चली जाउंगी”

रूबी: “मै भी यह ऑफिस और जगह छोड़ रही हूँ”

मैं: “तुम क्युँ छोड़ रही हो?”

रूबी: “तुम्हे तो पता ही हैं, इस ऑफिस में मेरे कितने आशिक हैं। वो पडौसी भी मुझे रोज परेशान करता हैं चोदने के लिए”

मैं: “तो क्या हुआ! तुम्हे तो ऐसी ही आज़ादी वाली लाईफ चाहिये थी”

रूबी: “तुम्हारे चक्कर में मै सुधर गयी। जब से तुमने वो कांड किया हैं मैंने चुदवाया नहीं हैं”

मैं: “तुम तो एक दिन भी बिना चुदाये रह नहीं सकती, तुमने बिना चुदवायें एक महीना निकाल दिया!”

रूबी: “तुम्हे लगता था कि मैंने तुम्हे सुधरा, पर असल में तुमने मुझे सुधार दिया”

मैं: “तुमने मेरी बड़ी मदद की थी ऐसे दौर में। मुझे याद हैं तुम मेरी चूत में ऊँगली कर मेरी आदत सुधारती थी। चल आज मै तुम्हारी चूत में ऊँगली कर तुम्हारी इच्छा पूरी करुंगी”

मै रूबी के साथ उसके घर आ गयी। उसने अपने कपड़े खोले और नंगी हो गयी। उसकी चूत पर भी बड़े बड़े बाल उगे थे। यह सबूत था कि वो भी चुदाई से सन्यास ले चुकी थी। मैंने जल्दी ही उसकी चूत को अपनी ऊँगली से रगड़ कर उसको जड़ने में मदद की।

उसके जड़ने के दौरान ही बाहर दरवाजे पर उसका वो ही पडौसी आया था। रूबी उठ कर गयी और आज पहली बार उसने अपनी चूत का पानी अपने पडौसी को चखाया.

वो गाली देता हुआ वहां से चला गया कि ऐसा टेस्ट उसको करवाया। हम दोनो हस पड़े। रूबी ने मेरी भी जड़ने में मदद की पेशकश की पर मैंने उसको मना बोल दिया।

अगले दिन राहुल की सगाई थी और मैंने अपना सोशल मिडिया स्टेटस चेंज कर सिंगल कर दिया। अगले ही दिन मुझे एक जाने पहचाने आदमी का मैसेज मिला जो मुझे एक तरफा प्यार करता था।

पिछली बार जब वो विशाल कद काठी का काला इंसान भारत आया था और मुझसे मिला था तो मेरे प्यार में पड़ गया था। जो कि उसने जाते वक्त एक लव लैटर के मध्यम से बताया था।

उसने वादा किया था कि वो मेरे सोशल मिडिया स्टेटस पढता रहेगा. शायद वो इसी दिन का इंतजार कर रहा था। उसने मुझे अपना नंबर भी दिया था।

हम दोनो ने बात की। मैंने उसको बताया कि मैं अपने पति से तलाक ले चुकी हूँ और राहुल की जॉब भी छोड़ चुकी हूँ। उसने मुझे अपने पास जॉब का ऑफर दिया।

मैने अपने पुराने पति अशोक से बात कर ली कि मै हमारे बच्चे को साथ लेकर भारत से बाहर जाना चाहती हूँ। अशोक को तो वैसे भी अपने नयी बीवी पूजा से बच्चा पैदा करना था तो उसने मुझे इजाजत दे दी।

मैने अपने वीजा का प्रक्रिया शुरू कर दिया और कुछ महीनो के बाद ही मै देश छोड़कर अपने बच्चे के साथ जोसफ के यहाँ चली गयी।

उसने बड़े अपनेपन से हमारा स्वागत किया। उसने अपने नाजायज बाप बॉब की मदद से अपनी खुद की कंपनी शुरु कर दी थी और सौतेली माँ सैंड्रा के चंगूल से आज़ाद था।

मै वहां बॉब के बेटे जैक से भी मिली। जब जैक भारत आया था तो जैक और मै एक दूसरे के आकर्षण में पड़ गए थे। पर अब वो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ लीव इन में रह रहा था और जल्दी ही बाप भी बनने वाला था।

6 महीने बाद ही जोसफ ने मुझे शादी के लिए प्रोपोज़ कर दिया। मुझे पता था कि वो मुझे सच्चे दिल से प्यार करता हैं पर मै उस से कुछ छुपाना नहीं चाहती थी।

मैने उसको सब सच बता दिया पर फिर भी उसने मुझसे शादी करने की ठान ली थी। मैंने उसको उसकी माँ से भी अनुमति लेने की सलाह दी। उसकी माँ बहुत अच्छे दिल की थी और उसने मुझे स्वीकार लिया।

मैने उनको बोल दिया कि मै मेडीकल परेशानी की वजह से जोसफ के बच्चे की माँ नहीं बन पाउंगी। फिर भी उन्होने मुझे स्वीकार कर लिया कि मै अपना बच्चा खुद साथ लायी हूँ तो तो वो उसे ही अपना पोता मान लेगी।

एक तरफ राहुल के माँ बाप थे जो मुझे स्वीकार नहीं कर रहे थे और दुसरी तरफ जोसफ की माँ बाहें फेलाएं हमारे स्वागत को तैयार थी।

मुझे अच्छे से पता था कि जोसफ का लंड घोड़े की तरह बड़ा था और उस से शादी करने का मतलब उस दर्द को हमेशा के लिए झेलना था। पर उस दर्द के मुकाबले उसका प्यार ज्यादा भारी था। मैंने उसकी चुदाई से मिलने वाले दर्द को स्वीकार कर लिया।

जब मैंने अपने घर वालो को यह खबर दी कि मै एक काले आदमी, जो कि सांड की तरह दिखता हैं से शादी करुंगी तो वो शॉक में आ गए.

पर फिर मेरी आगे की ज़िन्दगी को देखते हुए वो मान गए. मेरे घर वाले मेरी शादी में आये थे। मै अपने बच्चे के साथ जोसफ के घर में खुश थी।

जोसफ को भी पता था कि उसके लंड से चुदवाने से मुझे कितना दर्द होगा इसलिए उसने मुझे पूरी छूट दी थी। मेरी इच्छा होती तो ही वो मुझसे चोदता और ज्यादा दर्द नहीं देने की कोशिश करता था।
 
मै भी उसको निराश नहीं करना चाहती थी इसलिए दर्द होने के बावजूद मै उसको चोदने के लिए उकसाती थी। मै अपना दर्द छिपा कर उसके चेहरे पर आती ख़ुशी देख खुश होती।

अब आप इसे कूदरत का चमत्कार कहेंगे या कुछ और, जहा डॉक्टर ने मुझे बोल दिया था कि मै अब कभी माँ नहीं बन सकती थी, पर जोसफ के उस घोड़े जैसे लंड ने वो चमत्कार कर दिया था। हालांकि जोसफ इसे वहां के डॉक्टरो का चमत्कार मानता हैं।

शादी के 3 महीने बाद ही मै गर्भवती हो चुकी थी। मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। मेरी हमेशा ख्वाहिश थी कि मै अपने पति के बच्चे की माँ बनु और वो होने वाला था।

शायद मेरी किस्मत में यहीं लिखा था कि एक दिन में अपने पति के बच्चे की माँ बनु और वो पति जोसफ ही होगा। 9 महीने बाद मैंने एक बच्चे को जन्म दिया। वो गौरे काले का मिश्रण था। उसके घुंघराले बाल, भूरी आंखे और चपटी नाक, पुरी तरह जोसफ पर गया था।

जोसफ की माँ का मुझ पर पूरा भरोसा था और उस भरोसे की लाज ऊपर वाले ने रखी थी। जहा भरोसा होता हैं वहीं सफलता होती हैं।

रूबी के साथ में टच में रही. रूबी कहती रहती कि मै भी उसके लिए जोसफ की तरह कोई काला आदमी पसंद कर लु और उसकी भी शादी करवा लु।

जब मेरा बच्चा 3 महीने का हो गया तो मै उसे लेकर भारत आयी ताकि उसको अपने घर वालो से भी मिलवा सकू. सब लोग बहुत खुश हुए कि मै अब खुश हूँ.

काफी दिनों बाद रूबी से फेस तो फेस मिली. मै उसके घर ही रुक गयी क्युँ अब मेरा उस शहर में कोई घर तो था नहीं। उसको मैंने अपने छोटे बच्चे से भी मिलवाया।

रूबी: “यार, तुम्हारी जवानी तो और भी खिल गयी हैं। बिना मेकअप के गाल कैसे चमक रहे हैं। अगर मोटे लंड से चुदवाने से ऐसे शरीर दमकता हैं तो मुझे भी दिलवा दे कभी”

मैं: “शरीर खुशियों से दमकता हैं। तू भी शादी करके खुश हो जा”

रूबी: “यह बता जब जोसफ इतना भारी भरकम हैं तो उसकी पिचकारी कितनी बड़ी होगी और उसमे कितना पानी भरा होगा जो तुम्हारी चूत में खाली करता होगा?”

मैं: “पूछ मत, हालत खराब हो जाती हैं। उसको तो मै अपने ऊपर कम ही आने देती हूँ। अधिकतर मै ही उस पर चढ़ कर चोदती हूँ तो कण्ट्रोल रहता हैं। हालांकि वो मेरा ध्यान रखता हैं क्युँ कि उसे भी पता हैं कि मुझे दर्द होगा”

रूबी: “तेरी बातें सुनकर मेरी भी इच्छा हो रही हैं कि एक बार इतने बड़ा लंड जरूर लु। जोसफ को बोलकर एक बार मुझे भी दिलवा दे उसका लंड।”

मैं: “मेरे पति का लंड सिर्फ मेरा हैं, मै उसे किसी के साथ शेयर नहीं कर सकती।”

रूबी: “उसके लंड से जड़ने पर कितना पानी निकालता होगा! डॉक्टर ने तो तुम्हे बोल दिया था कि अब कभी माँ नहीं बन सकती पर उसके लंड से निकले ढेर सारे पानी ने तुम्हे माँ बना ही डाला”

मैं: “शादी के बाद शुरु के 2 सप्ताह तक तो ना मैंने उसको बोला और ना उसने मुझे चोदने की कोशिश की। मै उसके लंड को हाथ और मुंह से रगड़ कर ही उसका पानी निकालती थी। इतना पानी निकलता था कि मेरा पूरा चेहरा ही भीग जाता उसके पानी से ”

रूबी: “उसने तुम्हारे चेहरे पर लंड का पानी डाला?”

मैं: “मैने तो उसको अपनी चूत पर या मम्मो पर पानी छोड़ने को बोला था पर उसको मेरे मुंह पर पानी डालना अच्छा लगता हैं।”

रूबी: “तो फिर चुदाई कब शुरु की तुमने?”

मैं: “उसको तड़पता देखकर एक दिन मैंने ही बोल दिया कि चुदाई शुरु करते हैं, ऐसे डर कर कब तक रहेंगे। फिर हमने चुदाई शुरु कर दी। शुरु शुरु में दर्द होता हैं पर थोड़ी देर बाद चूत एडजस्ट हो जाती हैं और मजा ज्यादा आता हैं।”

रूबी: “अब तो तुम्हे छोटे लंड से चुदने में मजा ही नहीं आएगा!”

मैं: “लंड की साइज से कुछ नहीं होता हैं। अंदर डाल कर हिलाने का तरीका ज्यादा जरुरी होता हैं।”

रूबी: ” अब तो तुम उसे चोदने देती हो और बच्चा भी पैदा कर दिया, जोसफ सेक्सुअल लाईफ से खुश तो हैं?”

मैं: “उसकी एक ही इच्छा बाकी रह गयी हैं, उसने आज तक कभी किसी लड़की की गांड नहीं मारी हैं। उसका इतना मोटा लंबा लंड कोई कैसे अपनी गांड में ले सकता हैं, गांड फट ना जाए!”

रूबी: “मेरे पास भेज दे, मै अपनी गांड फड़वाने को तैयार हूँ उसके मोटे लंड से ”
 
मैं: “चल मजाक बंद कर। मै सोच रही थी कि राहुल से भी मिल लु एक बार। उसकी शादी शुदा लाईफ कैसी चल रही हैं पता करती हूँ।”

रूबी: “तुम्हारा प्यार जो ठहरा राहुल। मिल आ राहुल से भी। अब तो तुम उसके बच्चे की माँ भी बन सकती हो, तुम्हारी परेशानी हल हो गयी हैं”

मैं: “मेरी शादी हो चुकी हैं और उसकी भी किसी से हुयी होगी। अब मै उसके बच्चे की माँ क्युँ बनुंगी भला!”

रूबी: “शादी तुमने भले ही जोसफ से की हो पर मुझे पता हैं प्यार तो तुम अभी भी राहुल से ही करती हो”

मैं: “क्या फर्क पड़ता हैं, वो मेरी किस्मत में नहीं लिखा था”

रूबी: “मै तो कहती हूँ तुम एक बार कोशिश कर लो, उसके बच्चे की माँ बनोगी तो तुम्हे ज़िन्दगी भर के लिए प्यार का तोहफा मिलेगा”

मैं: “नहीं, मै जोसफ को धोखा नहीं दे सकती। मै सिर्फ राहुल को एक बार मिलुंगी बस, और उसको उसकी शादी की मूबारकबाद दूंगी”

रूबी: “ठीक हैं, मै तुम्हारे बच्चो का ख्याल रखने के लिए घर पर ही रुक जाउंगी, तुम राहुल से मिल आना”

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जोसफ से शादी के बाद मैं उसके बच्चे की माँ बन चुकी थी और मेरी खुशिया लौट आयी थी। अब मैं राहुल से मिलकर उसकी खुशहाल ज़िंदगी का भी जायजा लेना चाहती थी ।

पहली बार इतने लंबे अंतराल के बाद राहुल से मिलने जा रही थी। जिस तरह हम अलग हुए थे और उसने मुझे जिस हालत में गैर मर्द के साथ पकड़ा था, उसके बाद पता नहीं वो मुझसे मिलना पसंद भी करेगा या नहीं। ख़ास तौर से क्युकी अब उसकी शादी हो चुकी थी तो शायद मुझे पहले की तरह ना मिले। फिर भी मुझे अपने मन की शान्ति के लिए उस से मिलना था।

हालांकि मै उसको रिझाने नहीं जा रही थी पर फिर भी मैंने उसके पसंद के कलर की साड़ी पहनी. उसको मेरे पीठ से ज्यादा खुले ब्लाउज पसंद हैं तो मै वैसे ही ब्लाउज रखती रही हूँ.

मैने चमकीले बोर्डर वाली काली साड़ी और उस के साथ सिल्वर कलर का स्लीवलैस ब्लाउज पहना, जिसमे से मेरी पीठ लगभग नंगी दिख रही थी।

पेटीकोट भी मैंने उसकी पसंद के हिसाब से नाभी के 3-4 इंच नीचे बाँधा, पर फिर सोचा यह ज्यादा हो जायेगा तो 2 इंच नीचे बांध दिया। मेरा आधा पतला गौरा पेट फिर भी काफी अच्छे से दिखता हुआ लूभा रहा था।

मै जिसकी तरह बन संवर कर तैयार हो रही थी मुझे लग नहीं रहा था कि मै शादी शुदा होकर भी उस पुराने प्रेमी से मिलने जा रही थी जिस से मैंने किस तरह संबंध तोड़े थे.

जो भी हो, मैंने प्यार तो सिर्फ उसी से किया था तो मै अच्छे से अपने आप को उसके सामने प्रस्तुत करना चाहती थी। हम दोनो वैसे ही अपनी अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ चुके हैं तो शायद वो मुझे माफ़ कर दे।

रूबी: “जैसे तूम तैयार हुयी हो, राहुल से सिर्फ मिलने जा रही हो या और भी कुछ गंदा काम करने का इरादा हैं?”

मैं: “नहीं, सिर्फ मिलने जा रही हूँ। मैं कुछ ज्यादा बन संवर गयी क्या, कम करु कुछ?”

रूबी: “हां, एक काम करो, पेटीकोट 1-2 इंच थोड़ा और नीचे बांधो, ताकि तुम्हारी सेक्सी कमर अच्छे से दिखे तो सही। और यह ब्लाउज थोड़ा और खुले गले का होता और क्लीवेज दिखता तो मजा आता”

मैं:”वैसे ही बच्चा होने के बाद मेरे मम्मे और ज्यादा भर कर फुल गए हैं, मेरे ब्लाउज में ढंग से आ भी नहीं रहे हैं, अगर साड़ी ना हो तो देखो कितने बाहर झाँक रहे हैं!”

रूबी: “राहुल के सामने आते ही अपना पल्लू गिरा देना, बेचारा बेहोश हो जायेगा तुम्हारा क्लीवेज देख कर”

मैं: “वो अपनी बीवी का क्लीवेज देखता होगा, अब मेरे क्युँ देखेगा ! चल मै चलती हूँ, मेरे बच्चो का ख्याल रखना, मै जल्दी आ जाउंगी”

रूबी: “चिंता मत कर, आराम से चुदवा कर आएगी तो भी कोई बात नहीं”

मै सीधा ऑफिस पहुंच गयी राहुल से मिलने. वहां का अधिकतर स्टाफ पुराना ही था तो हम मिलकर खुश थे। फिर मैं राहुल के केबिन के बाहर दस्तक देने के बाद उसके बुलाने पर अंदर गयी।
 
दरवाजा खोलते ही देखा राहुल अपनी सीट पर बैठा अपने काम में व्यस्त था। उसके केबिन को देख फिर पुरानी यादें ताजा हो गयी। इसी केबिन में पता नहीं कितनी बार हम दोनो के बीच चुदाई हुयी थी।

मैने राहुल को आवाज लगायी और मेरी आवाज सुनते ही वो पहचान गया और एक झटके में अपना सिर उठा कर मुझे देखा और देखता ही रह गया।

प्यार ऐसी चीज हैं जो कभी खत्म नहीं होती। वो तुरंत अपनी सीट से उठ गया और हम दोनो एक दूसरे की तरफ चलते हुए पास आ गए। हम दोनो के चेहरे पर एक चौड़ी स्माईल थी।

पास में आकर इधर मैंने अपना हाथ आगे बढाया ताकि हाथ मिला पाऊ और ऊधर उसने अपनी दोनो बाहें आगे कर दी मुझे गले लगाने के लिए।

मुझे हाथ मिलाते देख उसने अपनी बाहें नीचे कर दी और अपना हाथ मिलाने को आगे बढाया और उसी वक्त मैंने अपनी दोनो बाहें फैला दी उसको गले लगाने को।

हम दोनो का मिसकोर्डिनेशन देखने के बाद हम दोनो ही हस पड़े और फिर एक दूसरे के गले लग गए। इतने समय बाद उसके गले लग मेरे दिल को एक ठंडक पहुंची। वो मुझसे नाराज नहीं था यह जान ख़ुशी भी थी।

उसने मुझे इतना टाइट हग कर लिया था कि मेरे मम्मे जितने दब सकते थे उतना दब गए और उसके हाथों ने मेरी नंगी पीठ से छू कर मुझे हल्का सा करंट दिया।

सच ही हैं, असली सुकून तो अपने प्यार की बाहों में ही होता हैं। हमें कुछ सेकण्ड लगे यह अहसास करने में कि हम दोनो ही किसी और से शादी शुदा हैं और हम एक दूजे की बाहों से अलग हुए।

राहुल: “इतने समय बाद तुम्हे देखकर बहुत अच्छा लगा। तुम तो और भी खुबसूरत होती जा रही हो !”

मैं: “थैंक यू, तुम भी वैसे के वैसे ही हो, एकदम हैंडसम”

राहुल: “बॉब ने मुझको बताया था कि तुमने जोसफ से शादी कर ली हैं और बधाई हो अब तो तुम्हे बच्चा भी हो गया जो मै तुम्हे नहीं दे पाया”

मैं: “सब किस्मत का खेल हैं”

राहुल: “तुम चाहती तो हम दोनो एक हो सकते थे”

मैं: “वो सब बातें छोड़ो. अपनी बीवी से नहीं मिलवाओगे ?”

राहुल: “मेरी टेबल पर जो काम पड़ा हैं, वो ही मेरी बीवी हैं”

मैं: “मजाक मत करो, तुमने जो सगाई का निमंत्रण भेजा था वो लड़की, शादी तो कर ही ली होगी तुमने अब तक!”

राहुल: “तुम एक अंजान आदमी के साथ अपनी इज्जत गवाने का नाटक कर सकती हो तो मै क्या एक झूठी सगाई का नाटक नहीं कर सकता?”

मैं: “यह क्या बोल रहे हो तुम?”

राहुल: “मै तुमसे दूर हो जाऊ और तुम्हे भूल जाऊ इसके लिए तुम हर किसी के साथ किस करने और यहाँ तक कि चुदवाने से भी नहीं कतराई! मै नहीं चाहता था कि तुम मेरी वजह से यह गंदे काम और कर अपनी इज्जत दांव पर लगाओ, इसलिए मैंने तुमसे नाराज होने का नाटक किया और वो झूठी सगाई का नाटक”

मैं: “तो फिर मेरा त्याग तुम व्यर्थ जाने दोगे? तुम किसी लड़की से शादी क्युँ नहीं कर लेते?”

राहुल: “प्यार या तो रूही से किया या फिर तुम से। तुम दोनों ही मुझे छोड़ गए। शादी करता तो तुम्ही से करता। तुम्हारे तलाक के बाद थोड़ी उम्मीद जागी थी पर तुमने वो भी तोड़ी। पर अच्छा हुआ, मुझसे दूर होकर तुम माँ तो बन पायी ”

मैं: “तुम सोच नहीं सकते मुझे कितना बुरा लग रहा हैं। मैने शादी कर घर बसा लिया और तुम मेरे लिए ऐसे ही रह गए। अब क्या करना हैं तुम्हे?”

राहुल: “मै अब भी तुमसे शादी करने को तैयार हूँ। फिर से इंतजार कर लूंगा, अगर तुम कभी भी जोसफ से तलाक लो तो मेरे दरवाजे हमेशा खुले हैं”

मैं: “मैने सिर्फ तुमसे प्यार किया हैं, और मुझे तुमसे ज्यादा प्यार करने वाला कभी मिल भी नहीं सकता। मगर मै शादीशुदा हूँ और बच्चे की माँ भी बन गयी हूँ। अब मै तुम्हारी नहीं हो सकती”

राहुल: “पहले भी तो तुम अशोक की बीवी थी और एक बच्चे की माँ, फिर भी हमारा एक होने का समय आया था”

मैं: “अशोक से तो मै वैसे ही परेशान थी, पर जोसफ बहुत अच्छा इंसान हैं। तुम मेरा इंतजार बंद कर दो, इसके बदले तुम जो चाहोगे मै तुम्हे दूंगी”

राहुल: “पक्का?”

मैं: “तुमसे प्यार किया हैं, तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ”

राहुल: “मै चाहता हूँ कि तुम मेरें बच्चे की माँ बनो। अब तो तुम्हारी मेडीकल परेशानी दूर हो गयी हैं। वो बच्चा मै पालुंगा, हमारे प्यार की निशानी।”

मैं: “यह क्या कह रहे हो राहुल? मै अशोक को धोखा दे सकती थी पर जोसफ को धोखा नहीं दे सकती। यह गलत हैं, तुम कुछ और मांग लो।”

राहुल: “मुझे तुमसे बस यहीं चाहिये। या तो मुझसे शादी कर लो नहीं तो मुझे मेरा बच्चा पैदा करके दो। अगर नहीं दे सकती तो कोई बात नहीं, मै वैसे भी जी रहा हूं तुम्हारी याद में, जी लूंगा”

मैं: “प्लीज मुझे ऐसे मत फंसाओ”

मेरे तो हाथ पैर यह सोच सोच कर ही कांप रहे कि मै राहुल के साथ अब कैसे चुदवा सकती हूँ और कैसे उसके बच्चे की माँ बन सकती हूँ, यह गलत होगा।

राहुल ने मेरी दोनो हथेलियां पकड़ ली, मेरे हाथ अभी भी कांप रहे थे। फिर उसने एक हाथ से मेरी साड़ी का पल्लू मेरे कंधे से गिराना चाहा और उसके लिए वो कंधे पर लगी पिन खोलने लगा।

मैं: “नहीं राहुल, मै तुम्हे मना नहीं कर पाउंगी पर यह गलत हैं”

राहुल: “अगर यह गलत हैं तो मुझे रोक लो मै उसी वक्त रुक जाऊंगा”

उसने मेरा पल्लू गिरा दिया और मै ऊपर से सिर्फ स्लीवलैस ब्लाउज में खड़ी थी। मेरी तेज तेज साँसों के साथ ही माँ बनने के बाद मेरे और भारी हो चुके मम्मे ऊपर नीचे तेजी से हिलने लगे।

राहुल: “मै अपनी सेक्रटरी को बोल देता हूँ कि वो किसी को केबिन में ना आने दे और हमें डिस्टर्ब ना करें। इस बीच तुम चाहो तो अपना पल्लू फिर ढक कर अपनी ना बता सकती हो”

राहुल अपनी डेस्क पर लगे फ़ोन से फ़ोन करने लगा और मै ऐसे ही पल्लू नीचे गिराए खड़ी रही और तेज तेज साँसों के साथ अपने ब्लाउज के नीचे बंधे अपने मम्मो का प्रदर्शन करती रही। राहुल का त्याग देख कर उसको मना करने की इच्छा नहीं हो रही थी।

राहुल फ़ोन रखकर फिर मेरे पास आया। उसने अपने होंठ आगे लाकर मेरे ऊपर के पतले होंठ को अपने होंठो में हल्के से भर लिया और खिंच कर छोड़ दिया।
 
फिर उसने मेरे नीचे के होंठ के साथ भी यहीं किया। फिर हम दोनो एक दूसरे के होंठो को चूसने में मगन हो गए और 2-3 मिनट तक ऐसे ही चूमते रहे।

उसके बाद राहुल मेरे पीछे आया और और मेरे ब्लाउज का हूक खोल कर उसको ढीला कर दिया। फिर वो आगे आया और मेरा ब्लाऊज मेरे कंधे और बाहों से निकाल कर मुझे ब्रा में ले आया।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मै क्या करु। मै शादीशुदा होकर अपने पुराने आशिक़ के सामने आधी नंगी खड़ी थी और वो मुझे चोदने वाला था। जोसफ का ख्याल कर मुझे बहुत बुरा लग रहा था।

मै अब कोई एक्स्ट्रा मैरीटल अफैयर में नहीं पड़ना चाहती थी, पर मै राहुल को मना नहीं बोल पा रही थी क्युँ कि वो मेरा आज भी इंतजार कर रहा था।

उसने अब मेरे पेटीकोट से साड़ी निकालनी शुरु कर दी। मेरे चारो और घुमते हुए उसने मेरी साड़ी को निकाल कर नीचे गिरा दिया। फिर मेरे पेटीकोट पर हाथ रख उसको बांधे डोरी की गांठ भी खोल कर मेरा पेटीकोट निकाल दिया।

मै जब यहाँ राहुल से मिलने आयी थी तब सोचा नहीं था कि मै उसके सामने इस तरह अंदर के कपड़ो में खड़ी होउंगी। मै जो गुनाह करने जा रही थी उसके डर के मारे मेरे हाथ पैर अभी भी कांप रहे थे।

राहुल की उंगलिया अब मेरे नंगे पेट, कमर, जांघो, सीने और पीठ पर फिरते हुए मुझे नशा दिला रही थी। अब वो मेरे पिछे खड़ा था और मेरे ब्रा का हूक खोलने लगा।

ब्रा ढीला होकर मेरे मम्मो से थोड़ा खिसका और फिर उसने ब्रा को भी मेरे शरीर से अलग कर मुझे टॉपलैस कर दिया। उसके हाथ जल्दी ही मेरे नंगे मम्मो पर थे और प्यार से हाथ फेर रहा था। पिछली बार जब उसने मेरे मम्मो को छुआ तो तब से अब तक मेरे मम्मे और भी बड़े हो चुके थे और उनमे दूध भी भरा था।

उसने अपने दोनो हाथ मेरी नंगी पतली कमर पर रखे और अपना मुंह मेरे निप्पल पर लगा दिया और चूसने लगा। मेरे मम्मो में अभी थोड़ा दूध था तो थोड़ा उसने भी पी लिया।

थोड़ा दूध दोनो मम्मो से पीने के बाद उसने मुझे अपनी गोद में उठाया और सोफे पर लेटा दिया। वो मेरी टांगो की तरफ बैठा था।

उसने हाथ आगे बढा कर मेरी पैंटी नीचे उतारना शुरु कर दिया। पैंटी निकालने के बाद उसने मेरी चूत को छुआ और मै झटके साथ पूरा हिल गयी। मुझे रह रह कर झटके लग रहे थे।

उसने अपनी ऊँगली मेरी चूत पर रगड़ना शुरु किया और मेरी आहें निकलने लगी और मै आंखे बंद किए सिसकियाँ मारने लगी।

फिर वो उठा और अपने कपड़े भी खोलने लगा। कपड़े खोलते हुए मुझे राहुल में जोसफ दिखाई दिया। वो भी इसी तरह कपड़े खोल कर मुझे चोदता हैं। पर फिर जोसफ की याद आने के साथ ही अहसास हुआ कि मैं जो करने जा रही हूँ वो गलत हैं।

मैं: “मै तुम्हे नहीं रोक रही राहुल, पर तुम अगर मुझे चोदोगे तो यह जबरदस्ती चोदने जैसा होगा”

राहुल अपने कपड़े उतारते हुए मेरी बात सुनकर रुक गया।

राहुल: “तुम मेरे बच्चे की माँ बनोगी पर अब मै तुम्हे तब तक नहीं चोदुगा जब तक कि तुम खुद मेरे ऊपर आकर मुझे नहीं चोद देती। तुम्हे जितना समय चाहिये सोच लो, मुझे तुम्हारा हां या ना दोनो मंजूर हैं पर कोई जबरदस्ती नहीं करनी”

यह कहते हुए उसने अपने कपड़े वापिस पहनना शुरु कर दिया। मै सोफे पर ऐसे ही नंगी लेटी थी। फिर उसको कपड़े पहनते देख मै उठी और अपने कपड़े उठा कर फिर पहनना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद मै कपड़े पहन तैयार हो गयी और वो मुझे ऐसे ही खड़े खड़े देखता रहा।

राहुल: “कल छूट्टी हैं, मै तुम्हारा फार्म हाऊस पर इंतजार करूँगा। तुम मेरे ऊपर आकर मुझे चोदोगी तो मै समझ जाऊंगा कि तुम मेरे बच्चे की माँ बनने को तैयार हो”

एक तरफ पति के प्रति मेरी वफ़ादारी तो दूसरी तरफ मेरे प्यार में तड़पता राहुल। मेरे सामने दुविधा थी कि मैं क्या करू।

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जोसफ से शादी और फिर बच्चा पैदा करने के बाद मैं पहली बार राहुल से मिलने उसके ऑफिस गयी। राहुल मुझे जबरदस्ती नहीं चोदना चाहता था पर अब वो चाहता था कि मैं खुद उसको चोद कर उसके बच्चे की माँ बन उसको होने वाला बच्चा सौंप दू।

मै बिना कुछ बोले ऑफिस से चली गयी। एक गुनाह करने से मै बाल बाल बच गयी थी । पर मुझे राहुल को बहुत पहले ही रोक देना चाहिये था। उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया और मै खड़े खड़े कुछ नहीं कर पायी।

मै रूबी से मिली और उसको सब कुछ बताया.

रूबी: “तू जोसफ के साथ रहना चाहती हैं तो कोई बात नहीं, कम से कम राहुल को अपने प्यार की निशानी तो दे ही सकती हैं। जोसफ से बात करले, मुश्किल हैं पर शायद वो मान जाऐ।”

मैं: “कोई पति भला अपनी बीवी को किसी और के बच्चे की माँ क्युँ बनने देगा। अगर वो मेरी खातिर मान भी जाऐ तो भी हैं तो यह गलत ही”

रूबी: “तुझे दोनो में से किसी ना किसी का तो दिल तोड़ना ही हैं। राहुल का दिल तुमने कई बार तोड़ा हैं, एक बार और तोड़ दे फिर”

मैं: “मुझे किसी का भी दिल नहीं तोड़ना हैं। राहुल पहले ही प्यार में तड़प रहा हैं। पर इसमें जोसफ का क्या दोष हैं, बेवजह उस से मैं बेवफाई क्युँ करु?”

रूबी: “पूरी रात आराम से सोच ले। जिसको तू ज्यादा प्यार करती हैं, उसका दिल मत तोड़ना”

मैं: “प्यार तो मैने राहुल से ही किया हैं”

रूबी: “तो बस हो गया फैसला”

मैं: “तो फिर जोसफ को क्या बोलूंगी, कि यह बच्चा राहुल का हैं और उसको गिफ्ट करना हैं!”

रूबी: “जोसफ को क्या बोलना हैं बाद में सोच लेंगे, उसके लिए कुछ महीने बाकी हैं”

मैं: “पक्का? मै कुछ गलत तो नहीं करने जा रही हूँ? तू मेरी जगह होती तो क्या करती ?”

रूबी: “मै तेरी जगह होती तो आंख बंद कर इतने प्यार करने वाले से शादी कर लेती और जोसफ को छोड़ देती. उसको तो वैसे भी उसके प्यार की निशानी उसका बच्चा मिल ही गया हैं तूझ से ”

मैं: “नहीं, जोसफ ने कुछ गलत नहीं किया हैं, मै उसके साथ ही रहुंगी, पर अपने प्यार की खातिर मै राहुल के बच्चे की माँ बनुंगी। बाद में मै जोसफ को समझाने की कोशिश करुंगी। वो नाराज होगा तो मै उसकी नाराजगी सहन कर लुंगी”

रात को रह रह कर मेरी नींद टूट रही थी। अंदर से आवाज आ रही थी कि मै गलत करने जा रही हूँ। फिर अंदर सेएक आवाज आती कि मै सही कर रही हूँ। सुबह उठने पर मै क्लीयर थी कि मुझे राहुल के पास जाना था।

मैं: “रूबी बता क्या पहनु?”

रूबी: “कुछ भी पहन ले, वहां जाकर तो नंगा ही होना हैं”

मैं: “राहुल को मुझे साड़ी में देखना बहुत पसंद हैं पर वहां साड़ी पहनने और बंद करने में बहुत समय लग जाऐगा, मै कोई ड्रेस ही पहन लेती हूँ”

रूबी: “हां, ड्रेस एक झटके में खोलते ही उस पर कुद जाना और चुदवा लेना. शर्माना मत और अच्छे से चुदवाना, माँ जो बनना हैं”

मैं: “पहले मुझे ही उसे चोदना होगा, उसने बोला हैं कि मै ही पहल करुंगी”

रूबी: “तुम्हे तो प्रैक्टिस भी अच्छी हो गयी होगी, जोसफ को ऊपर चढ़ कर जो चोदती हो तुम. पर राहुल का लंड तो जोसफ से छोटा हैं, तुम्हे मजा बराबर नहीं आएगा”

मैं: “मैने लिया हैं मुझसे पूछो, राहुल का लंड सामान्य मर्दो से मोटा हैं, कसरती बदन जो हैं। उसके जैसा कोई नहीं चोद सकता. …मै भी कैसी बातें कर रही हूँ. अपने पति के लंड को अपने प्रेमी से तूलना कर रही हूँ”

रूबी: “तू दुनिया की पहली औरत नहीं हैं जो अपने पति और आशिक से हुयी चुदाई की तुलना कर रही हैं। मैं भी इतने सालो यही कर रही थी। तू बिंदास चुदने के मजे ले, अपने पति से छुप कर आशिक से चुदवाने का मजा ही कुछ और होता हैं।”

रूबी के ऑफिस में भी छुट्टी थी तो कोई परेशानी नहीं हुयी, वो बच्चो का ख्याल रखने वहीं रुक गयी। मै उसकी कार लेकर ही फार्म हाऊस जाने वाली थी।

मै अब ड्रेस पहन फार्म हाऊस पर राहुल से मिलने के लिए तैयार हो रही थी। मुझे पता था कि मै क्या करने जा रही थी पर मै सारे परिणाम भूगतने को तैयार थी।

मै फार्म हाऊस पहुंची. वहां का स्टाफ नहीं था, शायद राहुल ने हमेशा की तरह अपने स्टाफ को छुट्टी पर भेज दिया था। दरवाजा खुला ही था तो मै अंदर गयी।
 
सामने सोफे पर राहुल बैठा था, शायद उसे मेरा ही इंतजार था। मैंने दरवाजा बंद कर दिया। पीछे मुड़ी तो राहुल अपना शर्ट निकालने लगा।

फिर उसने पैंट निकालना शुरू किया और मैंने भी अपनी ड्रेस निकाल नीचे रख दी. मै अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी और सामने राहुल भी अंदर के कपड़ो में था।

हम दोनो ने एक साथ अपने अंदर के कपड़े भी खोले और एक दूसरे से दूर आमने सामने नंगे खड़े थे। राहुल पिछे मुड़कर अपने बेडरुम में चला गया। मै भी उसके पीछे गयी।

जब मै उसके बेडरुम में पहुंची तो वो अपने बिस्तर पर हाथ पैर फेलाएं पूरा नंगा लेटा था। मै बिस्तर के करीब पहुंची और फिर उसके मुंह की तरफ पीठ करके मै उसके सीने पर बैठ गयी।

फिर में आगे की तरफ झुकी और अपने मुंह में उसका लंड ले लिया और मुंह से चूस कर उसको रगड़ने लगी ताकि वो तैयार हो जाए। इस बीच मैंने अपनी गांड पीछे खिसकायी और मेरी चूत मैंने राहुल के मुंह पर रख दी।

उसने अपने होंठो से मेरी चूत के होंठो को चूमना चाटना शुरु कर दिया और मै भी मजे के मारे लंड चाटने लगी। इतने समय बाद हम एक दूसरे के अंगो को इस तरह चुम रहे थे तो अच्छे से चूसते हुए अपनी प्यास बुझा रहे थे।

अगले 10 मिनट तक हम एक दूसरे के अंगो को चूमते और चाटटे रहे, सिर्फ बीच बीच में कुछ सेकण्ड सांस लेने को रुकते रहे। राहुल का लंड लकड़ी की भांती कठोर हो चुका था और मेरी लार से चिकना हो तैयार था।

मेरी चूत का भी यहीं हाल था, पूरी गीली पड़ी थी पर राहुल उसे चाटें जा रहा था। बीच बीच में अपनी जुबान को रोल करके मेरी चूत के छेद में भी डाल कर अंदर बाहर करता तो मेरी झुरझुरी छूट जाती।

इसके पहले कि मै और देर चूस कर उसके लंड का पानी निकाल दू, मैंने सोचा अब उसको चोद ही देती हूँ। मैंने उसका लंड अब मुंह से बाहर निकाला।

उसका लंड इतना लंबा तो था ही कि मै पूरा मुंह में नहीं उतार सकती थी, इसलिए मैंने अपने हाथ से रगड़ कर उसके लंड के ऊपरी भाग को जो कि मेरी लार से चिकना था, उस चिकनाई को उसके पूरे लंड पर फैला दिया। लंड पूरा चिकना होना जरुरी था, वरना जब वो पूरा मेरी चूत में उतारेगा तो वो मुझे दर्द देगा।

मैने उसका लंड छोड़ दिया पर उसका तो मेरी चूत को चूमने से पेट ही नहीं भरा था। उसने दोनो हाथों से मेरी गांड पकड़े हुए मुझे उठने नहीं दिया।

मेरी चूत तो वैसे ही इतनी देर चूमने से नशे में मतवाली हो चुकी थी और करंट के झटके पर झटके मार रही थी। मै भी चाहती थी कि वो ऐसे ही मुंह से मजे दिलाता रहे पर मुझे पता था कि मेरी चूत की प्यास तो उसका लंड ही बुझाएगा और मुझे माँ भी बनाएगा।

मै अब उसकी पकड़ से छुटकर नीचे उतरी और फिर उसकी तरफ मुंह कर उसके लंड पर बैठ गयी। उसने दोनो हाथों से मेरे मम्मे दबोच लिए। मैंने थोड़ा शरीर ऊपर उठाते हुए उसके लंड को अपनी चूत में थोड़ा सा उतार दिया।

राहुल: “तुम मेरे साथ जबरदस्ती कर रही हो?”

मैं: “हां, जबरदस्ती कर रही हूँ, ताकि तुम बाप बन पाओ। क्युँ कि तुम्हारी ज़िद हैं कि माँ बनाओगे तो सिर्फ मुझे और किसी को नहीं। अब तुम मुझे माँ बनाओ या नहीं, मै खुद ही तुम्हारे बच्चे की माँ बन जाउंगी”

उसके आधे लंड को मेरी चूत की गर्मी मिलते ही वो शांत हो गया और थोड़ा सा मुंह खोले इंतजार करने लगा। मै धीरे धीरे नीचे बैठती गयी और उसका मोटा लंड अपनी चूत में उतारती गयी।

जब उसका लंड पूरा मेरी चूत में उतर गया तो उसका मुंह पूरा खुल गया था। मैंने अब ऊपर नीचे उछलते हुए उसके लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर रगड़ना शुरु किया।

शुरू की कुछ देर उसका लंड घिसट घिसट कर मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था पर एक बार चिकनाई बनने के बाद वो ज्यादा आराम से मेरी चूत को रगड़ मार मुझे मजा दिला रहा था।

इतने समय तक जोसफ की दर्दनाक चुदाई की बाद राहुल का लंड मेरे लिए शान्ति भरी मजेदार चुदाई लेकर आया था। मै जोर लगाते हुए अपनी गति बढ़ाने लगी जिससे मैं आहें भरने लगी तो दुसरी तरफ राहुल की भी हल्की आहें शुरु हो चुकी थी।

उसने अब मेरे मम्मो को फिर से दबाना शुरु किया और मेरा मजा दुगुना कर दिया। चुदते हुए मम्मो में जो हलचल होती हैं उसको शांत करने के लिए उनको दबवाना जरुरी था।

अगले कुछ मिनट हम ऐसे ही चुदाई के मजे लेते रहे. फिर जब मै थोड़ा थकने लगी तो मै अपनी छाती उसके सीने पर चिपका कर लेटे लेटे आगे पिछे हो चुदती रही।

मेरे भारी मम्मे उसके सीने से दब कर शायद उसको भी सुकून दे रहे थे और मुझे भी। थोड़ी देर पहले मेरी चूत को चाट कर वो आधा मजा पहले ही दिला चुका था तो मेरा ज्यादा कम बचा नहीं था।
 
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