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चार हसीन मुसीबतें सीरीज़
यह कहानी हैं एक लड़के अजय की, 26-27 साल की उमर हैं. आगे की कहानी अजय की ज़ुबानी सुनिए.
मैं अजय, 2 साल पहले ही अर्चना से शादी हुई हैं. अर्चना मुझसे 1-2 साल छोटी हैं. यह मेरे और मेरी बीवी की कहानी हैं पर कहानी की शुरुआत अपने ससुर रमाकांत जी से करता हूँ.
रमाकांत जी एक बहुत ही धार्मिक आदमी हैं. सरकारी नौकरी मे हैं. मगर वो पहले इतना धार्मिक नही थे. सुना हैं की वो धार्मिक तब बने जब उनको एक के बाद एक दो बेटियाँ पैदा हो गयी.
कइयो की तरह उनकी भी तमन्ना थी की उनको भी एक लड़का हो. जब दूसरा बच्चा भी लड़की निकली तो अचानक से उपर वाले मे आस्था कुच्छ ज़्यादा ही बढ़ गयी. अलग अलग धार्मिक स्थानो पर माथा टेकने लगे इस उम्मीद मे की अगली बार लड़का ही हो.
रमाकांत की बीवी लड़का लड़की मे कोई फ़र्क नही करती थी. वो दो लड़कियो को पैदा करने के बाद थोड़ा बीमार रहने लगी थी और थक चुकी थी और आगे फिर से मा नही बनना चाहती थी.
मगर रमाकांत जी की ज़िद थी की वो एक बार फिर से लड़के का ट्राइ करे. रमाकांत की बीवी को बात माननी पड़ी. मगर तबीयत खराब रहती थी इसलिए कुच्छ साल वेट करना पड़ा.
मेरे पिताजी रमाकांत जी के अच्छे दोस्त थे. मेरे पिता का अच्छा ख़ासा खानदानी कारोबार था. मेरी मम्मी भी रमाकांत जी की बीवी की पक्की सहेली थी.
जब रमाकांत जी को दो लड़किया हो गयी तो नौकरी पेशा रमाकांत जी को भी चिंता हुई और मेरे पिता जी से वादा ले लिया की वो अपने दोनो बेटों की शादी उनकी दोनो बेटियो से करेंगे.
मेरा घर मे मम्मी पापा के अलावा एक बड़ा भाई विनोद भी हैं. इस तरह बचपन मे ही मेरे बड़े भाई और मेरी शादी के लिए लड़किया पसंद कर ली गयी.
रमाकांत जी की बड़ी बेटी वंदना की शादी मेरे बड़े भाई विनोद के साथ और मैं अजय, मेरी शादी रमाकांत की दूसरी बेटी अर्चना से पक्की हो गयी. मगर यह बात तब सिर्फ़ रमाकांत जी और मेरे पिता को ही पता थी.
रमाकांत जी की थोड़ी टेन्षन कम हुई की उनकी दोनो बेटियो की शादी का इंतज़ाम उन्होने अपने ही दोस्त के घर मे कर लिया हैं. जब रमाकांत जी की बीवी की तबीयत थोड़ी सुधरी तो रमाकांत जी ने अपने तीसरे बच्चे की तैयारी की.
रमाकांत जी की बीवी की तबीयत बिगड़ती गयी और बच्चा पैदा करते हुए उनकी मरने जैसी हालत हो गयी. रमाकांत जी को तीसरी बार भी लड़की ही पैदा हुई.
रमाकांत जी की बीवी ने अपनी सहेली यानी मेरी मेरी मम्मी को अपने पास बुलाया और कहा की वो उनकी तीसरी बेटी को गोद ले ले क्यू की मेरी मम्मी को भी एक बेटी चाहिए थी जब की मेरे पापा तीसरी संतान नही चाहते थे.
मेरी मम्मी ने देखा की उस वक़्त रमाकांत जी की बीवी की हालत अच्छी नही हैं इसलिए यूही उनसे झूठा वादा कर दिया की वो उनकी तीसरी बेटी को गोद ले लेगी.
मम्मी को नही पता था की रमाकांत जी की बीवी असली मे चल बसेगी. एक दूध मूही बच्ची को छोड़ कर उसकी मा चली गयी. मेरी मा को सदमा लगा. उन्होने एक मरते इंसान से एक वादा किया था.
मेरी मम्मी ने गोद वाली बात मेरे पापा को बताई. पापा ने उनको अपना खुद का दिया वादा बताया की उन्होने दोनो बेटों की शादी का वादा पहले ही रमाकांत जी से कर दिया हैं.
पर मेरी मम्मी अपना वादा नही तोड़ना चाहती थी. वैसे भी नवजात बच्ची को पालने वाली मा घर मे नही थी. मा ने उस बच्ची को गोद ले लिया.
मुझे याद हैं तब मे 4 साल का था और मेरी मम्मी एक छोटी बच्च्ची को गोद मे लेकर घर आई और मुझे और मेरे भाई विनोद को कहा की वो हमारी बहन हैं.
उस उम्र मे हमे तो यही लगा की वो हमारी रियल बहन हैं और मा ने उसको जनम दिया हैं. अपनी दोनो बड़ी बहनो वंदना और अर्चना की तरह तीसरी बच्ची का नाम पूजा रखा गया. तीनो बहनो के नाम का एक ही मीनिंग था.
मैं और मेरे बड़े भाई विनोद को छोटी बहन पूजा मिल गयी. दूसरी तरफ हम दोनो की होने वाली बीविया वंदना और अर्चना रमाकांत जी के घर मे बड़ी हो रही थी.
हम पाँचो बच्चे इस बात से अंजान थे की पूजा के असली मा बाप कौन हैं. जो भी था रमाकांत जी की एक चिंता और कम हो गयी.
अपना बेटा पैदा करने की चाह रमाकांत जी मे अभी भी ज़िंदा थी. उन्होने एक विधवा औरत से शादी कर ली ताकि उनको एक बेटा हो जाए.
वंदना और अर्चना को एक सौतेली मा मिल गयी. मगर फिल्मी सौतेली मा की तरह वो उन पर ज़ुल्म नही करती थी. खैर रमाकांत जी फिर से बाप बनने वाले थे.
रमाकांत जी की प्रार्थना इस बार भी काम नही आई और उनके घर फिर एक बेटी पैदा हुई. रमाकांत जी टूट गये और फ़ैसला किया की अब और कोई बच्चा पैदा नही करेंगे.
रमाकांत जी ने अपनी छोटी बेटी का नाम श्रद्धा रखा. हालाँकि दुनिया की नज़रो मे श्रद्धा उनकी तीसरी बेटी थी क्यू की तीसरी बेटी पूजा को तो वो मेरे मम्मी पापा को गोद दे चुके थे मगर उनकी चार बेटियाँ थी वंदना, अर्चना, पूजा और श्रद्धा.
यह तो था हम दोनो परिवार वालो का इंट्रोडक्षन और हिस्टरी. एक तरफ मेरे मम्मी पापा के तीन बच्चे, विनोद, अजय और गोद ली बेटी पूजा. तो दूसरी तरफ रमाकांत जी के साथ उनकी दूसरी पत्नी और तीन बेटियाँ वंदना, अर्चना और श्रद्धा.
यह कहानी हैं एक लड़के अजय की, 26-27 साल की उमर हैं. आगे की कहानी अजय की ज़ुबानी सुनिए.
मैं अजय, 2 साल पहले ही अर्चना से शादी हुई हैं. अर्चना मुझसे 1-2 साल छोटी हैं. यह मेरे और मेरी बीवी की कहानी हैं पर कहानी की शुरुआत अपने ससुर रमाकांत जी से करता हूँ.
रमाकांत जी एक बहुत ही धार्मिक आदमी हैं. सरकारी नौकरी मे हैं. मगर वो पहले इतना धार्मिक नही थे. सुना हैं की वो धार्मिक तब बने जब उनको एक के बाद एक दो बेटियाँ पैदा हो गयी.
कइयो की तरह उनकी भी तमन्ना थी की उनको भी एक लड़का हो. जब दूसरा बच्चा भी लड़की निकली तो अचानक से उपर वाले मे आस्था कुच्छ ज़्यादा ही बढ़ गयी. अलग अलग धार्मिक स्थानो पर माथा टेकने लगे इस उम्मीद मे की अगली बार लड़का ही हो.
रमाकांत की बीवी लड़का लड़की मे कोई फ़र्क नही करती थी. वो दो लड़कियो को पैदा करने के बाद थोड़ा बीमार रहने लगी थी और थक चुकी थी और आगे फिर से मा नही बनना चाहती थी.
मगर रमाकांत जी की ज़िद थी की वो एक बार फिर से लड़के का ट्राइ करे. रमाकांत की बीवी को बात माननी पड़ी. मगर तबीयत खराब रहती थी इसलिए कुच्छ साल वेट करना पड़ा.
मेरे पिताजी रमाकांत जी के अच्छे दोस्त थे. मेरे पिता का अच्छा ख़ासा खानदानी कारोबार था. मेरी मम्मी भी रमाकांत जी की बीवी की पक्की सहेली थी.
जब रमाकांत जी को दो लड़किया हो गयी तो नौकरी पेशा रमाकांत जी को भी चिंता हुई और मेरे पिता जी से वादा ले लिया की वो अपने दोनो बेटों की शादी उनकी दोनो बेटियो से करेंगे.
मेरा घर मे मम्मी पापा के अलावा एक बड़ा भाई विनोद भी हैं. इस तरह बचपन मे ही मेरे बड़े भाई और मेरी शादी के लिए लड़किया पसंद कर ली गयी.
रमाकांत जी की बड़ी बेटी वंदना की शादी मेरे बड़े भाई विनोद के साथ और मैं अजय, मेरी शादी रमाकांत की दूसरी बेटी अर्चना से पक्की हो गयी. मगर यह बात तब सिर्फ़ रमाकांत जी और मेरे पिता को ही पता थी.
रमाकांत जी की थोड़ी टेन्षन कम हुई की उनकी दोनो बेटियो की शादी का इंतज़ाम उन्होने अपने ही दोस्त के घर मे कर लिया हैं. जब रमाकांत जी की बीवी की तबीयत थोड़ी सुधरी तो रमाकांत जी ने अपने तीसरे बच्चे की तैयारी की.
रमाकांत जी की बीवी की तबीयत बिगड़ती गयी और बच्चा पैदा करते हुए उनकी मरने जैसी हालत हो गयी. रमाकांत जी को तीसरी बार भी लड़की ही पैदा हुई.
रमाकांत जी की बीवी ने अपनी सहेली यानी मेरी मेरी मम्मी को अपने पास बुलाया और कहा की वो उनकी तीसरी बेटी को गोद ले ले क्यू की मेरी मम्मी को भी एक बेटी चाहिए थी जब की मेरे पापा तीसरी संतान नही चाहते थे.
मेरी मम्मी ने देखा की उस वक़्त रमाकांत जी की बीवी की हालत अच्छी नही हैं इसलिए यूही उनसे झूठा वादा कर दिया की वो उनकी तीसरी बेटी को गोद ले लेगी.
मम्मी को नही पता था की रमाकांत जी की बीवी असली मे चल बसेगी. एक दूध मूही बच्ची को छोड़ कर उसकी मा चली गयी. मेरी मा को सदमा लगा. उन्होने एक मरते इंसान से एक वादा किया था.
मेरी मम्मी ने गोद वाली बात मेरे पापा को बताई. पापा ने उनको अपना खुद का दिया वादा बताया की उन्होने दोनो बेटों की शादी का वादा पहले ही रमाकांत जी से कर दिया हैं.
पर मेरी मम्मी अपना वादा नही तोड़ना चाहती थी. वैसे भी नवजात बच्ची को पालने वाली मा घर मे नही थी. मा ने उस बच्ची को गोद ले लिया.
मुझे याद हैं तब मे 4 साल का था और मेरी मम्मी एक छोटी बच्च्ची को गोद मे लेकर घर आई और मुझे और मेरे भाई विनोद को कहा की वो हमारी बहन हैं.
उस उम्र मे हमे तो यही लगा की वो हमारी रियल बहन हैं और मा ने उसको जनम दिया हैं. अपनी दोनो बड़ी बहनो वंदना और अर्चना की तरह तीसरी बच्ची का नाम पूजा रखा गया. तीनो बहनो के नाम का एक ही मीनिंग था.
मैं और मेरे बड़े भाई विनोद को छोटी बहन पूजा मिल गयी. दूसरी तरफ हम दोनो की होने वाली बीविया वंदना और अर्चना रमाकांत जी के घर मे बड़ी हो रही थी.
हम पाँचो बच्चे इस बात से अंजान थे की पूजा के असली मा बाप कौन हैं. जो भी था रमाकांत जी की एक चिंता और कम हो गयी.
अपना बेटा पैदा करने की चाह रमाकांत जी मे अभी भी ज़िंदा थी. उन्होने एक विधवा औरत से शादी कर ली ताकि उनको एक बेटा हो जाए.
वंदना और अर्चना को एक सौतेली मा मिल गयी. मगर फिल्मी सौतेली मा की तरह वो उन पर ज़ुल्म नही करती थी. खैर रमाकांत जी फिर से बाप बनने वाले थे.
रमाकांत जी की प्रार्थना इस बार भी काम नही आई और उनके घर फिर एक बेटी पैदा हुई. रमाकांत जी टूट गये और फ़ैसला किया की अब और कोई बच्चा पैदा नही करेंगे.
रमाकांत जी ने अपनी छोटी बेटी का नाम श्रद्धा रखा. हालाँकि दुनिया की नज़रो मे श्रद्धा उनकी तीसरी बेटी थी क्यू की तीसरी बेटी पूजा को तो वो मेरे मम्मी पापा को गोद दे चुके थे मगर उनकी चार बेटियाँ थी वंदना, अर्चना, पूजा और श्रद्धा.
यह तो था हम दोनो परिवार वालो का इंट्रोडक्षन और हिस्टरी. एक तरफ मेरे मम्मी पापा के तीन बच्चे, विनोद, अजय और गोद ली बेटी पूजा. तो दूसरी तरफ रमाकांत जी के साथ उनकी दूसरी पत्नी और तीन बेटियाँ वंदना, अर्चना और श्रद्धा.