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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

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मुझे याद हैं जब मैं हाई स्कूल में थी तब एक बार मेरी मम्मी मेरे पापा से ये बात कर रही थी। मैं तो इतनी बड़ी थी नहीं कि उन बातों में कोई दिलचस्पी दिखाती। वैसे भी मेरे घर वालो ने मना कर दिया था।

मैंने संजू को जवाब दिया, हां याद हैं, मेरी मम्मी पापा से बात कर रही थी और यही कारण दिया था। मैंने पूछा तुम्हे पता था?

वो बोला मैंने ही तो भेजा था उनको। मैं चुप हो गयी।

संजू ने पूछा अगर तुम्हारी मम्मी तुमसे राय मांगती तो तुम क्या कहती?

मैंने कहा पता नहीं, मैं तो छोटी थी, पढाई करनी थी तो शायद ना ही बोलती।

संजू ने पूछा अच्छा अगर ये सवाल तुम्हारे कॉलेज ख़त्म होने के बाद पूछा होता तो तुम क्या बोलती?

अब मैं असमंजस में पड़ गयी। अगर ना बोलती, तो कारण क्या बताती, अगर हां बोलू तो पता नहीं मेरे बारे में क्या सोचेगा।

सच्चाई तो ये थी की जब मैंने मेरे मम्मी पापा को उस ऑफर के बारे में बात करते सुना था तो मैं शर्मा गयी थी। उसके बाद जब भी वो हमारे घर आता था तो उसको देख कर मैं सामने जाने से कतराती थी पर छुप कर जरूर देखती थी।

शायद मन ही मन उसको अपना मंगेतर मान लिया था, जब तक कि कुछ सालों बाद मेरी सच मैं मेरे पति के साथ सगाई नहीं हो गयी थी।

फिलहाल मैंने सोचा उसका दिल क्या दुखाना सच तो खैर यही हैं, इसलिए मैंने जवाब दिया कि हां कह देती, ऐसा कुछ ना कहने के लिए था ही नहीं।

संजू बोला मैं तुम्हारे भैया से मिलने तुम्हारे घर आता था, असल में मैं इसलिए आता था कि इस बहाने से तुम्हे देखने का मौका मिल जाता था। कभी कभार तुमसे बात हो जाती तो आवाज सुनने को भी मिल जाती थी।

वो एक के बाद एक ऐसे राज बता रहा था और मुझे भी कुरेद कर मेरे दिल को टटोल रहा था।

उसने कहा कि स्कूल कॉलेज के समय से लेकर अब तक तुम काफी बदल गयी हो।

उसने पूछा एक बात बताउ, बुरा तो नहीं मानोगी?

मैंने कहा मैं अब पांच सात साल उम्र में ज्यादा हो गयी होंगी ओर क्या।

वो बोला नहीं, तुम पहले से भी ज्यादा खूबसूरत हो गयी हो। पहले सलवार कुर्ता पहनती थी और अब साड़ी, जिससे तुम्हारी पतली सेक्सी कमर अब अच्छे से दिखती हैं।

अपनी तारीफ़ सुन मैंने अपनी हंसी अंदर ही दबा ली और शर्मा गयी। उसने तारीफ़ जारी रखी, पहले तुम्हारे सीने का हल्का उभार था अब इतना ज्यादा कि अच्छी अच्छी हीरोइने भी देख कर शर्मा जाए।

तुम्हारे ब्लाउज के पीछे के जालीदार हिस्से से झांकती तुम्हारी पीठ की स्किन पहले नहीं दिखती थी अब दिखती है। और तुम्हारे…

मैंने उसको बीच में ही टोंकते हुए कहा बस बहुत हुई तारीफ़।

खाना तैयार था तो मैंने उसको थाली में लगा दिया उसको खाने के लिए बोल दिया। एप्रन निकाल कर रख दिया और बाहर जाने लगी।

उसने मुझे रोकना चाहा और कहा कि वो मेरे प्यार में पागल था। मैंने वहां से जाना ही ठीक समझा और बिना रुके उसके सामने से होते हुए निकलने लगी।

पर उसने पीछे से मेरे साड़ी का पल्लू पकड़ लिया था। जैसे ही मैं तेजी से आगे बढ़ी तो पल्लू खिंच गया और कंधे पर साड़ी और ब्लाउज पर लगी पिन की वजह से मेरा ब्लाउज कंधे से नीचे खिसक गया। फिर झटके से पिन भी निकल गयी और शरीर के ऊपरी भाग से साड़ी नीचे गिर गयी।

मेरी ब्रा का एक स्ट्रेप दिखने लगा और एक कंधा भी नंगा हो गया था। मेरे पेट से लेकर ऊपर के हिस्से में सिर्फ एक ब्लाउज ही बचा था। मैंने तुरंत पल्लू पकड़ा और अपनी तरफ खिंचा।

संजू अब पल्लू को अपनी कलाई पर लपेटता हुआ मेरे नजदीक आ गया। पास आते ही उसने मेरा नीचे खिसका हुआ ब्लाउज फिर से कंधे पर चढ़ा दिया। फिर उसने मेरा पल्लू भी छोड़ दिया।

मैंने फिर से पल्लू अपने ऊपर डाला और किचन के बाहर आ गयी।

 
वो भी मेरे पीछे पीछे बाहर आया और कहने लगा मैं अब भी तुमसे उतना ही प्यार करता हूँ।

उसने मुझसे पूछा क्या तुम्हे भी मुझसे कभी प्यार रहा हैं।

मैंने कोई जवाब नहीं दिया।

वह ऊपर सीढ़ियों पर चढ़ने लगा और कहा, मैं ऊपर अपने कमरे में जा रहा हूँ, अगर तुम्हे मुझसे कभी भी थोड़ा सा भी प्यार रहा हो तो ऊपर आ जाना। मैं अब नीचे आके तुम्हे ओर परेशान नहीं करूँगा।

संजू सीढ़ियां चढ़ते हुए ऊपर जा चूका था। मैं वही दो मिनट खड़ी रही और सोचने लगी।

दिमाग कह रहा था अब कोई मतलब नहीं, इससे किसी का भी भला नहीं होने वाला। पर दिल कह रहा था कि थोड़े समय के लिए ही सही मुझे उससे प्यार और आकर्षण तो रहा था।

मैं इसी दुविधा में थी कि क्या करना चाहिए और मेरे कदम खुद-ब-खुद सीढ़ियां चढ़ रहे थे।

थोड़ी ही देर में मैं ऊपर पहुंच उसके कमरे के दरवाज़े के बाहर खड़ी थी। अंदर झाँका तो वो मेरी तरफ पीठ कर खिड़की से बाहर देख रहा था।

मैंने कमरे में प्रवेश किया और हाथ हिलने से मेरी चूड़ियाँ बज उठी। आवाज़ सुनते ही वो ख़ुशी से पलटा। मेरी करीब आया और कहने लगा मुझे पता था तुम जरूर आओगी।

उसने आगे बढ़ कर मुझे अपने सीने से लगा लिया।

मैं उसकी बाहों में जैसे पिघल रही थी। उसका हाथों की उंगलिया मेरे ब्लाउज की जालीनुमा डिज़ाइन से मेरे पीठ को छू रही था। मेरे वक्ष उसके सीने से थोड़ा दब से गए थे। अब मैंने भी अपने हाथ उसकी भुजाओ के अंदर डालते हुए पीछे से उसके कंधे पकड़ लिए।

कुछ मिनटों तक हम यही अहसास करते रहे कि पहले पहले पुराने प्यार की बाहों में कैसा सकून मिलता हैं। जब ये अहसास हुआ की ये सपना नहीं सच हैं तो हमने एक दूंसरे से गले लगना छोड़ा और अनायास ही हमारे होंठ एक दूंसरे के होठों की तरफ बढे और छू गए।

एक दूंजे के मुलायम होठों को छूते ही दोनों को एक झटका सा लगा और हम थोड़ा पीछे हट गए। फिर एक अल्पविराम के बाद दोनों के होंठ एक बार फिर मिले और इस बार एक दूंसरे का रस चूसने का मजा लिए बिना नहीं हटे।

कुछ सेकंड तक तो हमें होशो हवास ही नहीं रहा। जैसे तीन दिन के भूखे खाने पे टूट पड़ते हैं, वैसे ही हम एक दूंसरे के होंठों को दबा दबा के चूस रहे थे। जब हम दोनों का पेट भर गया तो एक दूंसरे को छोड़ा।

संजू के होठों पर मेरी लिपस्टिक लग गयी थी। मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए उसके होंठ पोछने लगी। उसने तुरंत मेरी कमर में हाथ डाला और पकड़ कर अपनी तरफ खिंच कर नीचे से मुझको अपने से चिपका दिया। हम दोनों के नाजुक अंग कपड़ो के अंदर से ही एक दूंसरे को छू रहे थे।

उसने अब पीछे हाथ ले जाकर मेरे नितम्बो को पकड़ लिया और कहने लगा, शुरू से इच्छा थी इनको पकडू और बिना कपड़ो के देखु, मेरी एक इच्छा पूरी कर दो।

मैंने अपने आप को छुड़ाया और उसकी और पीठ करके खड़ी हो गयी और कहा, कर लो अपनी इच्छा पूरी। वो मुझे धकियाते हुए बिस्तर के पास ले गया और पेट के बल उल्टा लेटा दिया।

उसने अब मेरा पेटीकोट साड़ी सहित ऊपर उठाया, जब तक की मेरी पैंटी पूरी ना दिख गयी। फिर उसने मेरी पैंटी पकड़ कर नीचे खींच दी और मेरे बड़े नितम्बो पर दोनों हाथों को फेरते हुए दबाने लगा।

अब उसने मेरी पैंटी पैरो से पूरी बाहर निकाल दी। मैं तुरंत उठ खड़ी हुई और अपने पेटीकोट साडी को नीचे कर दिए।

मैंने कहा बात सिर्फ देखने और छूने की हुई थी तो हो गया।

वो बोला किस अंग से छूना हैं वो थोड़े ही ना डीसाईड हुआ था। ऐसा कह कर उसने अपनी पैंट और अंडरवियर निकाल दी।

मैं उसका लंड देखने लगी जो कड़क होकर तैयार था। इतना आगे बढ़ने के बाद मुझे भी पीछे मुड़ना ठीक नहीं लगा।

उसने कहा, अब ओर मत तड़पाओ, मिलन होने जाने दो, बहुत सालो से तड़पा हूँ।

मैंने पूछा प्रोटेक्शन कहाँ हैं?

उसने कहा वो तो नहीं हैं, मैंने और बीवी ने बच्चा प्लान किया था तो प्रोटेक्शन की जरुरत ही नहीं थी कुछ महीनो से।

मैंने कहा सिर्फ तुम्हारे लिए मैं थोड़ा रिस्क लेने को तैयार हूँ बिना प्रोटेक्शन के पर तुम बहुत ध्यान रखना, कुछ गड़बड़ नहीं होनी चाहिए।

समय भी कितना तेजी से बदलता हैं, कुछ समय पहले मैं और पति एक बच्चे के लिए कितने लोगो से मदद ली और दुआ करते थे अब कुछ हो जाए और आज मैं कोशिश करती हूँ कि कुछ ना हो।

खैर मैंने अब उसको बिस्तर पर लेटा दिया। सारी जिम्मेदारी मुझे ही लेनी थी। मैंने अपने कपडे नीचे से ऊपर किये और अपने दोनों पाँव उसके दोनों तरफ फैला कर उसके लंड पर इस तरह बैठी की मेरी पीठ उसके मुँह की तरफ रहे।

 
खैर मैंने अब उसको बिस्तर पर लेटा दिया। सारी जिम्मेदारी मुझे ही लेनी थी। मैंने अपने कपडे नीचे से ऊपर किये और अपने दोनों पाँव उसके दोनों तरफ फैला कर उसके लंड पर इस तरह बैठी की मेरी पीठ उसके मुँह की तरफ रहे।

मैंने उसको कहा तुम्हारी पसंद के अनुसार मिलन के समय तुम मेरे नितंब देखते रह पाओगे और छू भी पाओगे। मैं थोड़ा ऊपर उठी और उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत में घुसा दिया।

इतनी देर की छुअन से वैसे भी मेरे अंदर गीला हो चूका था, तो उसका फट से अंदर फिसलता हुआ घुस गया। उसकी एक जोर की आह निकली। जिसको दिल से प्यार करते हो तो शारीरिक सम्बन्ध के वक़्त वैसे भी मजा कुछ ओर होता हैं।

मैं ऊपर नीचे होने लगी, उसका लंड मेरी चूत की दीवारों को रगड़ते हुए अंदर बाहर होने लगा। उसकी जोर जोर से सिसकिया चालु हो गयी। उसकी आवाज़ सुन मुझे भी मजा आने लगा।

वो मेरे नीचे के कपड़ो को अपने हाथ से बार बार उठा कर ऊपर रखने की कोशिश कर रहा था। उसने शिकायत की के मेरे कपडे नीचे गिर रहे हैं जिससे वो मेरा पसंदीदा अंग देख नहीं पा रहा हैं।

मैंने अब अपनी साडी के प्लीट्स पेटीकोट से बाहर निकालने लगी। वो भी मदद करते हुए साड़ी को पेटीकोट से अलग करने लगा।

साडी निकाल कर अलग रखने के बाद मैंने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोला और टीशर्ट के भांति सर के ऊपर से निकाल दिया।

जिससे अब वो मेरी पतली कमर और नितम्बो को अब आसानी से देख सकता था। वो मेरी कमर और कूल्हों पर हाथ फेराने लगा।

अब मैं उसके पैरो की तरफ आगे झुक गयी और ऊपर नीचे हरकत करते हुए उसके लंड को अंदर बाहर करते हुए उसको मजा दिलाती रही।

रवि की माँ और बहन ने कैसे एक चुदक्कड रूप धारण किया और उसके साथ चुदाई के मजे लिए, यह उसकी हिन्दी चुदाई स्टोरी में जानिए।

उसने भी मेरे नितम्बो को पकड़ के चौड़ा कर दिया, जिससे वो अपने लंड को मेरे छेद में अंदर बाहर होते हुए देख पाए। वो सिसकिया मारते हुए बोले जा रहा था, आज तो मजा आ गया, तुम्हारे सेक्सी कूल्हों को नंगा देखा और मेरे लंड को अंदर बाहर होते हुए देख कर जन्नत मिल गयी।

थोड़ी देर हम दोनों ऐसे मजे लेते रहे। अब मैं फिर सीधी बैठ गयी। मैंने अपने हाथ पीछे किये और पीछे झुकते हुए दोनों हाथ उसके सीने पर रख दिए।

अब मैं एक बार फिर ऊपर नीचे होने लगी। उसने अपने दोनों हाथ मेरे ब्लाउज पर रख चुचियाँ दबाने लगा। फिर पीछे से मेरे ब्लाउज और ब्रा के हुक खोल दिए।

मैंने एक एक करके हाथ सीधा किया और उसने ब्लाउज और ब्रा को मेरे हाथों से पूरा निकाल दिया। मैं अब पूरी नंगी हो चुकी थी।

मेरा सीना छत की तरफ था और वो अपने दोनों से मेरे आगे पीछे उछलते हुए चूँचियो को दबा कर मसलने लगा।

मेरी चुत में अंदर बाहर होते लंड के साथ चूंचियो के दबने से मुझे भी मजा आने लगा। पर फिर मैंने सोचा ज्यादा देर करना भी थोड़ा रिस्की हैं। मैं सीधा बैठ गयी और उसके ऊपर से उठ गयी।

हालांकि दोनों का झड़ना बाकी था पर रिस्क भी नहीं लेना था। मेरा बाहर निकालना उसको भी पसंद नहीं आया। जैसे ही मैं बिस्तर से उतरी वो भी उतर गया और मुझे पीछे से पकड़ लिया।

उसने मुझे बिस्तर पर धक्का देते हुए उल्टा लेटा दिया और दोनों टाँगे ऊपर उठा कर चौड़ी करते हुए, अपनी कमर के दोनों तरफ ले गया, जिससे उसका लंड फिर मेरी चुत को छू गया।

मैं सिर्फ कोहनियो के बल बिस्तर पर थी और बाकी का शरीर हवा में था। वो मेरी दोनों जांघो को हवा में पकडे अपने कड़क लंड से मेरी चुत में निशाना लगाने लगा। थोड़ी ही देर में उसका निशाना लगा और उसने फिर मेरे अंदर अपना लंड डाल दिया।

 
वो मेरी दोनों जांघो को पकडे आगे पीछे करते हुए मजे लेने लगा। हवा में इतनी करतबबाजी से मैंने पहले कभी नहीं चुदवाया था और मुझे मजे आने लगे। मैं जोर जोर से आई ऊई करने लगी।

थोड़ी ही देर में फचाक फचाक की आवाज़े आने लगी और मैं झड़ने को आई तो सिसकिया चीखों में बदलने लगी।

अह्ह्ह्हह्ह संजू आज कर लो अपनी इच्छा पुरी अह्ह्ह्हह ठोको मेरी चूत को ऐसे ही अह्ह्ह्हह्ह ऐसे ही करो मेरी चूत की ठुकाई!

ये सब बड बडाते हुए, थोड़ी ही देर में चीखते चिल्लाते हुए मैं झड़ गयी।

वो अब भी मुझे बुरी तरह से चोदे जा रहा था। मैंने उसको कहा अब छोड़ दो वरना कुछ हो जायेगा। वो भी इतनी देर से मुझे आधा उठाये उठाये अब थकने लगा था तो मुझे छोड़ दिया। मैंने चैन की सांस ली।

उसका अभी हुआ नहीं था, तो मेरी तरफ तरसती निगाहो से देख रहा था।

मैंने कहा अभी मुझे रिस्क नहीं लेना हैं, तुम्हारा काम मैं हाथ से ही कर देती हूँ। उसको तो पूरा अंदर घुस कर ही करना था पर उसने हां बोल दिया, भागते भूत की लंगोटी ही सही।

उसने कहा, वाश रूम में कर लेते हैं यहाँ कमरे में गन्दा हो जायेगा। वाशरूम नीचे की तरफ था।

मैंने अपने सारे कपडे वापस पहन लिए। वो अपनी पैंट हाथ में पकडे मेरे साथ सीढ़ियों से होते हुए नीचे आने लगा।

मैंने उसको पूछा कोई अंदर आ तो नहीं जायेगा।

उसने कहा नहीं आएगा, मम्मी चाबी लेकर नहीं गए हैं। हम दोनों अब वाशरूम में घुस गए।

मैंने देखा इतनी देर में उसका लंड मुरझा कर लटक रहा था। मैंने थोड़ा नीचे झुकी और उसका लंड अपनी मुट्ठी में भरकर आगे पीछे खींचने लगी।

कुछ मिनटों की इस खींचातानी से वो फिर से खड़ा होने लगा। एक बार खड़ा हुआ तो मैंने उसको हाथ से रगड़ने लगी। थोड़ी ही देर में उसकी सिसकिया निकलनी शुरू हो गयी।

उसकी फरमाइश थी कि वो मेरे मम्मो के बीच में लंड रख कर रगड़ना चाहता है। मैंने कहा ठीक हैं पर कैसे करोगे, यहाँ तो बैठने की भी जगह नहीं।

उसने कहा बाहर हॉल में सोफे पर करते हैं।

मैंने पूछा वहा गन्दा नहीं होगा क्या, तुम्हारा पानी कहाँ निकालोगे।

उसने कहा वो मेरी चूचियों पर ही पानी निकालेगा।

पर मैंने मना कर दिया कि ऐसी गन्दगी मुझे नहीं चाहिए। आखिर में ये डीसाईड हुआ कि वो मेरे मम्मो के बीच लंड रगड़ेगा पर पानी वाशरूम में आकर ही निकालेगा।

अब हम लोग सोफे पर आ गए। मैंने अपना पल्लू हटा कर ब्लाउज और ब्रा निकाल दिया। उसने मुझे सोफे पर लेटाया और मुझ पर झुक कर अपना लंड मेरे दोनों मम्मो के बीच रख दिया।

मैंने अब अपने दोनों मम्मो को साइड से दबाते हुए उसका लंड को बीच में झकड़ लिया। वो अब आगे पीछे होता हुआ मेरे मम्मो के बीच चोदने लगा।

थोड़ी देर तक ऐसे ही करते करते वो आहें भरने लगा। मेरे सीने पर रगड़ से पसीना होने लगा या वो उसका रिसता हुआ पानी था ये पता नहीं चला।

मैंने उसको फिर चेताया पानी निकलने से पहले उठ जाना, मेरे ऊपर मत डालना। उसने बोला अभी टाइम हैं और जोर से झटके मारने लगा।

कुछ मिनट तक ऐसे करते रहने के बाद उसने अपना लंड पीछे खिंच लिया। मैंने अपने मम्मे छोड़ दिए और कहा अब वाशरूम में जाकर कर आओ।

मैंने अपना वाक्य पूरा ही किया था कि उसके लंड से एक पानी का फव्वारा छूटा और मेरी आँख पर टकराया। फिर दूंसरा फव्वारा मेरे होंठ पर आया। फिर बड़ी बड़ी बुँदे मेरी चूचियों पर आ गिरी।

मैं उसको गुस्सा में कुछ बोलती उससे पहले ही वो कान पकड़ कर सॉरी बोलने लगा और कहा कि क्या करू कण्ट्रोल नहीं हुआ। तुम्हारे मम्मे हैं ही इतने जबरदस्त।

फिर मैं भी क्या कर सकती थी। उसको कुछ साफ़ करने के लिए लाने को कहा। वो भागता हुआ गया और नैपकिन ले आया। मैंने नैपकिन से गन्दा पानी साफ़ किया। मेरा मुँह और चूचियाँ चिपचिपी हो गयी थी।

मैंने अपना ब्लाउज और ब्रा उठाया और वाशरूम में जाकर पानी से पोछ कर चिकनाई मिटाई। उसने भी अपने आप को साफ़ किया और हम कपडे पहन कर हॉल में आ गये।

उसने 5 मिनट में जल्दी जल्दी खाना खा लिया। फिर बाहर की घंटी बजी। दरवाजा खोला तो हम दोनों की मम्मिया आ गयी थी।

उन्होंने कहा सब जगह थोड़ी थोड़ी देर रुकना पड़ा और चाय नाश्ता करना पड़ा इस कारण बहुत देर हो गयी। आंटी ने पूछा तुम दोनों भी खाना खाकर ही जाओ। मेरी भूख प्यास तो वैसे ही उनके बेटे ने मिटा दी थी।

हम लोग इजाजत लेकर वहां से निकल पड़े। मम्मी ने पूछा हम गए थे तब तुम्हारी शक्ल पे बारह बजे थे, अभी आये तो एकदम खुश लग रही थी।

कुछ शक हो उसके पहले ही मैंने बोल दिया आपका इंतज़ार करते करते इतना टाइम हो गया, तो आपको देख कर ही खुश हो गयी।

फंक्शन के दिन देर सुबह मेरे पति हमारे बच्चे सहित मेरे पीहर पहुंच गए थे। सारा कार्यक्रम घर के पास पांच मिनट की दुरी पर एक कम्युनिटी हॉल में रखा गया था।

संजू भी शाम को फंक्शन में आने वाला था। मुझे डर था कि हमारे बीच उसके घर जो भी हुआ उसके बाद कही वो पति के सामने कोई ऐसी वैसी हरकत ना कर दे कि पति को शक हो जाए।

पापा और भैया नाश्ता करने के बाद ही कार्यक्रम स्थल पर व्यवस्था सँभालने के लिए चले गए।

 
संजू भी शाम को फंक्शन में आने वाला था। मुझे डर था कि हमारे बीच उसके घर जो भी हुआ उसके बाद कही वो पति के सामने कोई ऐसी वैसी हरकत ना कर दे कि पति को शक हो जाए।

पापा और भैया नाश्ता करने के बाद ही कार्यक्रम स्थल पर व्यवस्था सँभालने के लिए चले गए।

बाकी हम सब लोग भी नाश्ते के बाद घर का काम निपटा कर नहा धो कर तैयार हो गए थे। पति चूँकि सफर से आये ही थे तो वो नहा कर नाश्ते के लिए आ गए।

मम्मी ने कहाँ कि हॉल में शाम की तैयारी में सहायता के लिए जाना हैं, तो एक जन दामादजी को नाश्ता कराने रुक जाओ बाकि सब चलते हैं।

मैंने कहा मैं रुक जाती हूँ। भाभी ने सुझाव दिया कि उन्हें वैसे भी बर्तन धोने बाकी हैं तो उनको रुकना ही पड़ेगा, तो वो मेरे पति को नाश्ता करवा देंगे और बाद में हॉल में ले आएंगे।

तो फिर मैं अपनी मम्मी और अपने और भैय्या के बच्चो के साथ हॉल की तरफ निकल पड़े।

पांच मिनट में हम वह पहुंच गए।

हॉल में पहुंचने पर याद आया मेरा मोबाइल तो घर पर ही छूट गया। मैं माँ को बोलकर फिर घर के लिए निकली। जाते वक़्त शायद हमने बाहर का दरवाज़ा लॉक नहीं किया था तो थोड़ा खुला ही था। मैं सीधा अंदर चली गयी।

डाइनिंग टेबल पर देखा तो पति नहीं थे। मैंने टेबल पर रखा मोबाइल उठाया। फिर उत्सुकतावश किचन की तरफ देखा, वहां भी भाभी नजर नहीं आये।

एक स्त्री होने के नाते दिमाग में कुछ खटका। मैंने देखा भैय्या के कमरे का दरवाज़ा बंद था, पर भैय्या तो कम्युनिटी हॉल में थे।

मैं अब धीरे धीरे भैया के कमरे की तरफ बढ़ी और दरवाज़े के बाहर खड़े होकर कान लगा सुनने की कोशिश करने लगी।

अंदर से रह रह के भाभी के खिलखिलाने की आवाज़ आ रही थी।

देसी कहानी पर आपके लिए बहुत सी हिन्दी पोर्न स्टोरी उपलभध है जिनका आप मजा ले सकते है!

मुझे शक हुआ कही मेरे पति भाभी के साथ अंदर तो नहीं। मैं थोड़ी देर के लिए अतीत में चली गयी।

मेरे पति मेरी भाभी को हमारी शादी के पहले से जानते थे, क्यों कि मेरे पति के बड़े चचेरे भाई की साली बाद में मेरी भाभी बनी थी।

हमारी शादी के पहले ही इन दोनों की अच्छी खासी बातें होती थी। पर पहले कभी मुझे शक नहीं हुआ था, क्योकि शादी के बाद से ही हम दूसरे शहर में रहते थे।

कमरे के अंदर से आती आवाज़ों से मैं बेचैन होने लगी। एक इच्छा हुई कि दरवाज़ा तोड़ के अंदर चली जाऊ और उनको रंगे हाथों पकड़ लु। फिर सोचा अगर अंदर गयी और कुछ नहीं निकला तो मेरी ही फजीहत हो जाएगी।

फिर मैंने फैसला किया कि मकान के साइड में इस कमरे की खिड़की हैं, वहां से झांक कर देखती हु, शायद कुछ दिख जाए।

मैं बाहर निकली और खिड़की के करीब पहुची।

अंदर झाँका तो कांच की खिड़की बंद थी, अंदर पर्दा लगा हुआ था और कुछ दिख नहीं रहा था। मैं थोड़ी निराश हुई कि अब क्या किया जाए।

मैं फिर घर के अंदर पहुंची। फिर मैंने देखा कि कमरे के दरवाज़े के ऊपर का रोशनदान खुला हैं।

मैंने अपने बैग से सेल्फी स्टिक निकाली और अपना मोबाइल उस पर लगा के वीडियो मोड चालू कर दिया। मैंने अपनी सेल्फी स्टिक पूरी लम्बी की और रोशनदान के वहां लगा दिया और अंदर का दृश्य देखने लगी।

मोबाइल से अंदर का नजारा देख कर मेरे होश उड़ गए।

मेरे पति मेरी भाभी के साथ बिस्तर पर थे और दोनों अर्धनग्न हालत में थे। भाभी नीचे लेटी थी और पति उनकी चूचियों को चुस रहे थे। मेरी हालत काटो तो खून नहीं वाली हो गयी।

थोड़ी देर तो कुछ सुझा ही नहीं। मेरा माथा ठनक गया, और लड़ाई के मोड में आ गयी। मगर फिर अपने किये हुए काण्ड याद आ गए। पति की पीठ पीछे मैंने भी तो ऐसा ही कुछ किया हैं। यहाँ तक कि एक काण्ड का तो गवाह भी हैं।

अगर किसी दिन पति को पता चल गया तो। फिर सोचा कभी पकड़ी गयी तो ये वीडियो मेरे काम आएगा पति को चुप कराने के लिए।

मैंने मन ही मन फैसला ले लिया था कि मुझे अभी कोई एक्शन नहीं लेना हैं। बस ये सबूत साथ रखना हैं समय आने पर काम आएगा।

इस बीच मेरी भाभी अब एक्शन मोड में थी और मेरे पति का लंड अपने मुँह में ले अपना हाथ उस पर घुमाते हुए मजे लेते हुए चूस रही थी। मुझसे देखा नहीं गया और बहुत जलन हुई।

मैंने अब वो सेल्फी स्टिक नीचे की और वीडियो बंद किया। फिर बाहर का दरवाज़ा धीरे से बंद कर वापिस हॉल की तरफ बढ़ी।

पुरे रास्ते कमरे के अंदर का दृश्य ही मेरी आँखों के सामने घूम रहा था। मेरे साथ मेरे भैया का घर भी बर्बाद हो रहा था। इसी चिंता के साथ मैं हॉल में दूसरे कामों को करने लगी।

आधे घंटे के बाद मेरे पति, भाभी के साथ हॉल में पहुंचे। दोनों के चेहरे की लाली देखते ही बनती थी। मुझे तो खैर पता था इस लाली का राज क्या हैं।

मैंने कई बार नोटिस किया कि काम के बीच बार बार नजरे बचा के वो दोनों एक दूसरे को शरारत भरी नजरो से देख रहे थे और हंस रहे थे।

कई बार मैं इधर उधर काम में व्यस्त होती और वो थोड़ी थोड़ी देर के लिए कही गायब भी हो जाते।

मैंने एक बार उनको फॉलो करने की सोची। पहले भाभी वहां से निकले और उसके कुछ सेकंड बाद पति उनके पीछे पीछे निकले। मैं चुपके से फॉलो करती हुई बाहर गयी।

हम निचली मंजिल पर थे, पर वो लोग दूसरी मंजिल के वाशरूम की तरफ गए थे। मैं भी छुपते हुए वहां पहुंची। वो दोनों एक ही वाशरूम में घुसे थे।

मैं बिना आवाज़ किये दरवाज़े के पास पहुंची। अंदर से फुसफुसाने की आवाज़ आ रही थी। भाभी की चूडियो के खनकने की आवाज़ तो कभी कपडे सरकने की आवाज़।

थोड़ी देर में चप चप की आवाज आने लगी, शायद ये चूचिया चूस रहे थे या भाभी उनका लंड। मैं मन मसौस कर रह गयी। गुस्सा कण्ट्रोल करना पड़ रहा था।

शायद अब तक जो मैंने पति को धोखे दिए हैं उनकी सजा इस तरह मिल रही थी। मैं यही सोचती रह गयी और अंदर से उनकी सिसकियों की आवाज़ शुरू हो गयी।

थोड़ी देर में मेरे गुस्से की जगह उनकी आवाज सुन कर मेरे को भी कुछ कुछ होने लगा। मैं अपने हाथों से अपने ही अंग दबाने लगी। काश अंदर भाभी की जगह मैं होती।

अंदर से अब जोर जोर की आवाजे आने लगी। भाभी कह रही थी अशोक धीरे धीरे करो मेरी जान निकल रही हैं, मेरी चीखें निकल रही हैं कोई सुन कर आ जायेगा।

पति हाँफते हुए बोले बाकी लोगो का काम नीचे हो रहा हैं, ऊपर सिर्फ हमारा काम हो रहा हैं, कोई नहीं आएगा।

भाभी की बीच बीच में हलकी चीखें निकल रही थी और पति तो सिसकिया भर रहे थे।

भाभी बोली तुम्हारे से करवाने का सबसे बड़ा फायदा हैं कि प्रोटेक्शन बीच में नहीं आता। तुमको कुदरत का वरदान हैं कितना भी करो लड़की माँ नहीं बन सकती।

ये बात सुनकर मैं सन्न रह गयी। मैंने और पति ने वादा किया था कि हम दोनों के अलावा ये राज किसी ओर को पता नहीं चलनी चाहिए। इसका मतलब भाभी को पता हैं कि मेरे बच्चे का बाप मेरा पति नहीं हैं।

ऐसी चीटिंग तो मैंने भी कभी नहीं की थी कि घर के राज बाहर बता दू।

थोड़ी ही देर में दोनों जोर की आवाजे निकालते हुए झड़ गए।

मैं तुरंत वहां से निकल फिर नीचे वाली मंजिल पर आ गयी और अपने कामो में लग गयी। थोड़ी देर में वो दोनों भी थोड़े थोड़े अंतराल पर वहां आ गए और इस तरह काम करने लगे जैसे कुछ हुआ ही न हो।

दिन भर मैं उनकी हरकतें इसी तरह झेलती रही। शाम को हम तैयार होने के लिए घर पर आ गये।

 
पति तो भाभी की ही खूबसूरती के पुल बांधे जा रहे थे, जैसे मैं तो वहां थी ही नहीं। देर शाम हम लोग तैयार हो कर हॉल में पहुंच गए इसके पहले की मेहमान आना शुरू ही जाये।

अब धीरे धीरे मेहमान आना शुरू हो गए थे और चहल पहल काफी बढ़ गयी थी। संजू भी आया था और बार बार मुझसे बात करने की कोशिश कर रहा था, पर दिन भर हुए काण्ड के बाद चिंता में डूबी मैंने उसको ज्यादा तवज्जो नहीं दी।

बीच बीच में समय मिलते ही ये जरूर देख लेती कि पति और भाभी कहाँ हैं और क्या कर रहे हैं। अधिकतर समय वो एक दूसरे के आस पास ही थे।

पार्टी परवान पर थी और माँ ने मुझसे कहा कि घर पर एक काम का बेग रह गया हैं तो उसको ले आ।

मैं चाबी लेकर हॉल से बाहर निकली। संजू भी मेरे पीछे पीछे आ गया। मुझसे बोलने लगा कि वो आज प्रोटेक्शन लेकर आया हैं।

मैंने उसको डांट दिया कि तो मैं क्या करू। उस दिन तुम्हारे घर पर जो भी हुआ जज्बात में हो गया, अब मुझसे फिर वही उम्मीद मत रखना। वो थोड़ा रुआंसा सा हो गया। पर सुबह से मेरी चिंता कुछ ओर थी।

संजू मेरे पीछे पीछे एक आस लिए घर तक आ गया। मैंने बाहर के दरवाजे का इनर लॉक खोला और घर में प्रवेश किया। भाभी के कमरे के आधे बंद दरवाजे से रोशनी आ रही थी।

मुझे झटका लगा कही मेरे पति और भाभी फिर से यहाँ आकर तो नहीं लग गए। मैंने संजू को इशारे से आवाज नहीं करने के लिए कहा।

हम दोनों दबे पाँव कमरे के दरवाजे के करीब पहुंचे और मैं आधे खुले दरवाजे से झाँकने लगी, संजू मेरे पीछे खड़ा हो देखने लगा।

जल्दबाजी में उन्होंने दरवाजा भी पूरा बंद नहीं किए था। दोनों शायद थोड़ी देर पहले ही पहुंचे थे, क्यों की मेरे पति मेरी भाभी की साड़ी पकड़ खींचते हुए उतार रहे थे।

संजू मेरा हाथ पकड़ कर बाहर आने का इशारा करने लगा। मैं उसके साथ बाहर आ गयी। उसको भी झटका लगा था। मेरे भैय्या का दोस्त था और मेरी भाभी को भी भाभी ही बुलाता था।

वो भाभी अभी मेरे पति के साथ इस हालत में थी। उसने कहाँ तुम्हारा रिएक्शन देख कर लगा तुम्हे पहले से अपने पति और भाभी के बारे में पता था।

मैंने कहा आज सुबह ही पता चला। उसने मेरा कंधा दबाते हुए मुझे सांत्वना दी। हम एक बार फिर दबे पाँव अंदर गए देखने लगे।

अब पति और भाभी के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। भाभी मेरे पति के ऊपर सवार होने की तैयारी में थी। उस पर बैठ कर उन्होंने पति का लंड अपनी चुत में घुसा दिया। वो ऊपर नीचे हरकत करते हुए मेरे पति को चोद रही थी।

संजू मेरे पीछे खड़ा था और थोड़ी ही देर में मुझसे चिपक गया। मैं अंदर का नजारा देखने में मग्न थी तो संजू पर ध्यान ही नहीं गया।

थोड़ी देर में वो मेरे पिछवाड़े पर रगड़ खाने लगा तो मेरा ध्यान गया। मुझे भी अंदर का नजारा देखने के बाद वो रगड़ अच्छी लग रही थी।

मेरे कुछ ना बोलने से उसके हौसले भी बढे और मेरी साडी नीचे से ऊपर उठा दी और मेरी पैंटी नीचे उतार कर मेरे नितंबो पर हाथ फेरने लगा।

मैंने उसको रोका और अपने कपडे सही किये और उसका हाथ पकड़ कर घर से बाहर ले आयी। आते वक़्त वो बैग भी साथ ले लिया जो माँ ने लाने को बोला था।

बाहर आकर मैंने उससे कहा, संजू मेरा एक काम करोगे।

उसने कहा बोलो क्या करना हैं।

मैंने उसको समझाया कि तुम्हे अंदर जाकर उन दोनों को रोकना हैं और उनको समझाना हैं कि वो जो कुछ भी कर रहे हैं वो गलत हैं। उनके दिमाग में ये बात अच्छे से बैठानी हैं कि आइन्दा वो लोग इस तरह का काम से तौबा कर ले।

मैंने उसको बताया कि ये काम मैं नहीं कर सकती, क्योंकि ये हम तीनो के लिए बहुत शर्मनाक होगा और एक दूसरे से शायद फिर कभी नजरे ना मिला पाए, इसलिए ये काम तो तुम्हे ही करना पड़ेगा।

संजू बोला ठीक हैं समझा दूंगा पर फिर तुम मुझे अपने साथ करने दोगी, मैं प्रोटेक्शन भी लाया हु।

मैंने उसको डांट दिया, मैं इतनी तनाव में हु और तुमको ये सब सूझ रहा हैं। हम अपना बाद में देखेंगे पहले तुम मेरा ये काम कर दो। मैं अभी वापस हॉल में जा रही हू, ये बैग देना हैं। तुम इन दोनों को हॉल में ले आना। और मेरे बारे में मत बताना कि मैं यहाँ आयी थी और इनको देख लिया था।

संजू ने आश्वस्त किया कि वो सब समझ गया हैं। संजू अब वापस घर के अंदर गया और मैं बैग लिए वापस हॉल की तरफ चली आयी।

 
पुरे रास्ते और हॉल में पहुंच कर भी मेरी चिंता घर पे क्या हो रहा होगा इस पर थी। मैं दो तीन मिनट से ज्यादा वहां ठहर नहीं पायी और एक बार फिर अपने घर की तरफ बढ़ गयी।

रास्ते में ध्यान रख रही थी कि कही वो लोग सामने से आते हुए ना मिल जाए, कोई बहाना भी सोचने लगी।

अब मैं घर पर पहुंच गयी। चाबी मेरे पास ही रह गयी थी तो डरते डरते धीरे से बाहर का दरवाजा खोला, अंदर कोई दिखाई नहीं दे रहा था। पर अभी भी भाभी के कमरे के आधे खुले दरवाजे से रोशनी आ रही थी।

शायद वो लोग अभी भी अंदर ही थे। अंदर से कुछ आवाजे आ रही थी। मैं अंदर जाऊ या न जाऊ सोच में पड़ गयी कि कही पति और भाभी मुझे देख ना ले।

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फिर मैं हिम्मत करके कमरे के दरवाजे के पास पहुंची और अंदर झांकने लगी। अंदर का नजारा देख के मेरा सर चकरा गया। मेरी भाभी डॉगी बनी हुई थी और पीछे से संजू उनको चोद रहा था जब की उनके मुँह में मेरे पति अपना लंड घुसाए उनका मुँह चोद रहे थे।

मैंने संजू को किस काम के लिए भेजा और वो क्या कर रहा था। जिस संजू को रखवाली के लिए भेजा था वो ही तिजोरी में सेंध मार रहा था।

भाभी और पति ने मिलकर इस संजू को भी पटा लिया था या फिर संजू ने ही इन दोनों की मज़बूरी का फायदा उठाते हुए उनको ब्लैकमेल किया होगा।

संजू मेरे साथ करने के लिए जो कंडोम लाया था उसका अब वो इस्तेमाल कर रहा था। शायद मेरी ही गलती थी, मैंने ही उसको अपने साथ करने को ना बोला था, इसलिए उसको जैसे ही मौका मिला दूसरे के साथ हो लिया।

मेरी भाभी आगे पीछे दोनों छेदो में चुदवा रही थी और कही ना कही मैं भी इसकी जिम्मेदार थी, ना मैं संजू को भेजती ना भाभी फंसती।

संजू पीछे से भाभी को इतने जोर के झटके मार रहा था कि पति को कुछ करने की जरुरत ही नहीं थी, भाभी का मुँह उन झटको की वजह से अपने आप आगे पीछे होते हुए चुद रहा था।

अभी तो मैं अंदर जाकर उनको डांट कर रोक भी नहीं सकती थी, क्योंकि संजू बोल सकता था कि मैं उनको थोड़ी देर पहले ही देख कर जा चुकी हु, और मैंने ही संजू को अंदर भेजा था। मैं खुद फंस सकती थी। उससे भी बड़ी बात संजू मेरा वो भेद खोल सकता था जो हम दोनों के बीच उसके घर पर हुआ था।

मैंने चुप चाप रह कर देखते रहने का फैसला किया ताकि पता तो चले मेरे जाने के बाद इनके बीच क्या सौदा हुआ हैं।

थोड़ी देर के बाद उन्होंने पोजीशन चेंज की। पति नीचे लेट लेट गए और भाभी उनके ऊपर पेट के बल। पति ने अपना लंड भाभी की चुत में घुसा दिया। ऊपर से संजू भाभी के ऊपर लेट गया।

दो भूरी चमड़ियो वाले मर्दो के बीच भाभी का गौरा जिस्म ऐसा लग रहा था, जैसे ब्राउन ब्रेड के बीच चीस रख दिया हो। भाभी अब सैंडविच बंद चुकी थी।

संजू अब अपना लंड भी भाभी की चुत में घुसाने की कोशिश करने लगा जहां पहले से पति का लंड घुसा हुआ था।

थोड़ी देर वो संघर्ष करता रहा और अंत में उसने थोड़ा बहुत अंदर घुसा ही दिया। भाभी तो दर्द के मारे चीखने लगी। मुझे उन पर बहुत दया आयी। इस सब की जिम्मेदार शायद मैं ही थी।

एक मेरा पति और दूसरा मेरा पहला प्यार, दोनों ही आज मेरी भाभी के साथ लगे हुए थे। कही ना कही दोनों ही मुझे धोखा दे रहे थे। देखा जाए तो मेरा पहला प्यार, मेरे पति के पहले प्यार को चोद रहा था।

फिलहाल संजू का ज्यादा देर भाभी के अंदर टिका नहीं और उसने बाहर निकाल दिया। अब उसने भाभी के पीछे वाले छेद में अपना लंड घुसा दिया। भाभी एक बार फिर चीख पड़ी। अब उनके दोनों छेद लंड से भर गए थे।

भाभी अब जोर जोर की आवाजे निकलते हुए मस्त चुदवा रही थी। मुझे जो दर्द की चीखें लग रही थी वो दरअसल मजे की थी, क्यों कि भाभी उन दोनों को जोर से झटके मारने को बोल रही थी।

भाभी का ऐसा रूप होगा ऐसा तो कभी सोचा न था। काश उनकी जगह मैं होती, एक छेद में मेरा पति तो दूसरे में मेरा पहला प्यार, कितना मजा आता। उन लोगो को मजा लेते हुए देख मेरी भी इच्छा होने लगी, पर कुछ कर नहीं सकती थी।

कमरे में उन तीनो की आवाजे गूंजने लगी। भाभी ने दोनों को बोला एक साथ झटका मारो। दोनों ने ऐसा ही किया। हर झटके साथ तीनो की एक सुर में आह निकलने लगी।

इस तरह का ट्रिपल मजा मैंने कभी जिंदगी में नहीं देखा था। ये सब देख मेरी तो पैंटी गीली हो गयी। उस वक़्त वहां कोई ओर होता तो शायद मैं खड़े खड़े ही चुदवा लेती।

इतनी देर तक चोदते और चुदवाते तीनो ही हांफने लगे, पर उनको मजा ही इतना आ रहा था, कि वो छोड़ने को ही तैयार नहीं थे।

संजू ने पति को बोला अब में आगे से मारता हु और तुम पीछे से आओ, तुमने वैसे भी प्रोटेक्शन नहीं पहना हैं तो इसको कुछ हो जायेगा। पति अपना राज तो खोल नहीं सकते थे तो वो मान गए।

संजू पीछे हटा और भाभी को पति के ऊपर पीठ के बल लेटा दिया। पहले पति ने अपना लंड भाभी की गांड में घुसा दिया और फिर संजू भाभी की टाँगे चौड़ा कर बीच में बैठ गया।

उसने अब अपना लंड पकड़ कर भाभी की चुत में घुसा दिया। एक बार फिर झटको पे झटके लगने शुरू हो गए। भाभी चिल्लाये जा रही थी और दोनों मर्द बिना रहम किये ओर जोर से झटके मारने लगे।

 
मुझे डर लगा कही आज भाभी के दोनों छेद फट ही ना जाए।

संजू चोदते हुए बोल रहा था, बहुत दिंनो से तेरी चुत मारने का मन था आज जाके पकड़ में आयी हैं। आज तो फाड़ के रख दूंगा।

भाभी भी नशे में आ गयी थी और बेशर्मी से बोली फाड़ डालो मैं भी देखु कितना जोर हैं तुम में।

पति ने अब चोदना बंद कर दिया था, शायद इतनी आवाजों में पता ही नहीं चला कब वो झड़ गए।

थोड़ी देर में संजू और भाभी के बीच बात गन्दी बातें शुरू हो गयी।

भाभी बोली चोद दे मुझको संजू जोर से चोद।

संजू और तेजी से करते हुए बोलता ले ले अपनी चुत में मेरा सब माल।

थोड़ी देर में भाभी चिल्लाते हुए झड़ गयी और उसके बाद संजू भी कपकपाते हुए झड़ गया।

काम ख़त्म कर तीनो नंगे ही बिस्तर पे आस पास लेटे थे। भाभी के पाँव दरवाजे की तरफ थे और टाँगे खुली थी।

मैं उनके दोनों छेद देख पा रही थी जहां केले की मोटाई जितनी आकार की गुफा सी बन गयी थी। दोनों छेदो से पानी रिस रहा था।

मैं अब उनकी बातें सुनने लगी।

भाभी ने कहाँ कि कल रात को अशोक अपने शहर के लिए निकल जाएगा, उसके पहले दिन का कही प्रोग्राम बनाते हैं, वैसे भी मेरे पति तो कल काम पर जाने वाले हैं।

मेरे पति ने बोला मुश्किल हैं मेरी वाइफ का क्या करेंगे। तीनो अगले दिन का प्लान बना रहे थे, और मैं बाहर खड़ी हो सुनती रही।

मेरे पति, मेरी भाभी और मेरा पहला प्यार तीनो ने मिलकर जमकर चुदने के मजे लिए और अब वो अगले दिन का दिन का भी प्लान बना रहे थे, जब कि मैं बाहर खड़े खड़े ये सब देख रही थी। और उनके देसी ग्रुप सेक्स का मजा भी ले रही थी।

मैंने अब कान लगा कर उनका प्लान जानने की कोशिश की। जितना मुझे याद हैं उसको अक्षरत मैं आपको यहाँ बताने जा रही हूँ।

भाभी: कल रात को अशोक अपने शहर के लिए निकल जाएगा, उसके पहले दिन का कही प्रोग्राम बनाते हैं, वैसे भी मेरे पति तो कल काम पर जाने वाले हैं।

अशोक (मेरे पति): कल का मुश्किल हैं, मेरी वाइफ के सामने यहाँ से कैसे निकलेंगे।

भाभी: मैं ये मौका छोड़ना नहीं चाहती, तुम पता नहीं फिर कब आओगे।

संजू: तुम दोनों का चक्कर कब से चल रहा हैं वैसे?

अशोक: मेरे चचेरे भाई की शादी के दौरान मुलाक़ात हुई और पहली नजर में प्यार हो गया।

भाभी: ये हम दोनों का पहला प्यार था।

अशोक: पहला प्यार तो पहला प्यार होता हैं। संजू तुम्हारा पहला प्यार कौन हैं?

[बाहर मेरी हालत खस्ता हो गई, कही संजू मेरा और उसका सारा राज ना खोल दे]

संजू: वो छोडो, कल का क्या प्रोग्राम हैं, आज के जैसा ही करना हैं। मेरे एक दोस्त का घर खाली हैं। वहां मिल सकते हैं।

भाभी: ठीक हैं तो कल दोपहर में कोई बहाना बना कर मैं और अशोक आ जायेंगे, एड्रेस भेज दो हमे।

अशोक: क्या बहाना मार के जायेंगे, मेरी बीवी को शक हुआ तो?

संजू: तो उनको भी ले आओ। वैसे भी एक जन कम हैं।

अशोक: यार ये मरवाएगा। मेरी बीवी को क्या बोलूंगा? मैं तुम्हारी भाभी को चोदता चाहता हूँ तो देखने के लिए तुम भी आओ।

संजू: आपने क्या कभी अपनी बीवी से पूछा हैं? हो सकता हैं उसकी भी इच्छा हो, या फिर तुम ही अपनी बीवी को शेयर नहीं करना चाहते।

अशोक: नहीं, ऐसा नहीं हैं।

संजू: क्यू आपने कभी देखा हैं क्या अपनी पत्नी को किसी के साथ करते हुए?

[मैंने सोचा, देखा तो हैं जब बच्चे पैदा करने के लिए साजिश कर रहे थे, क्लोसेट के अंदर से दो लोगो से चुदते हुए मुझे देख रहे थे और फिर बस के अंदर भी देखा था]

भाभी: संजू, तुम बडा इंटरेस्ट ले रहे हो इनकी बीवी में! क्या बात हैं?

संजू: नहीं ऐसे ही बस।

अशोक: सच सच बता, अगर कोई बात हैं तो। मैं नाराज नहीं हो होऊंगा। हम दोनों तो वैसे भी अभी अभी मिलकर इसको चोद रहे थे।

 
संजू: सच पूछो तो, जैसे ये भाभी आपके लिए प्यार हैं तो मेरा बचपन का प्यार आपकी बीवी हैं।

भाभी: क्या बात कर रहा हैं संजू? पहले कभी अहसास तक नहीं होने दिया। अशोक तुमको जलन हो रही नहीं ना?

अशोक: थोड़ी थोड़ी शायद हो रही हैं।

संजू: तो फिर अशोक कल तुम अपनी बीवी को भी ला रहे हो न?

अशोक: नहीं भाई, एक ही रात में उसको इन सब कामो के लिए समझाना नामुमकिन हैं। अगर ना मानी और शक हो गया तो हम लोग भी नहीं जा पाएंगे।

भाभी: चलो अभी कपडे पहनते हैं और कम्युनिटी हॉल चलते हैं, बहुत देर से गायब हैं, संजू की तरह कोई यहाँ ढूंढते हुए यहाँ ना जाए।

तीनो अब कपडे पहनने लगे और मैं वहां से निकल कर हॉल की तरफ बढ़ी। थोड़ी देर में वो तीनो भी वहां पहुंचे। मैंने संजू को एक कोने में अलग से बुलाया।

मैं: संजू तूने मुझको धोखा दिया, तुमको उन दोनों को रोकने के लिए भेजा था और तुम उनके साथ ही हो लिए।

संजू: मतलब तुम वापिस घर पर आयी थी और सब देख लिया! मैं क्या करता? मैं उनको उस हालत में देख कर अपने आप को मजे लेने से रोक नहीं पाया। तुमने तो वैसे भी मुझको मना कर दिया था। मैं तो भरा भराया बैठा था।

मैं: भरे भराये तो आज थे तो फिर कल का फिर प्रोग्राम बनाने की क्या जरुरत थी।

संजू: क्या बताऊ, थ्रीसम में कितना मजा आता हैं। मैंने तो तुमको भी शामिल करने के लिए बोला था पर वो लोग नहीं माने।

मैं: तुमको ये प्रोग्राम कैंसिल करना पड़ेगा। मैं घर पर कुढ़ती रहूंगी और तुम लोग वहां मजे लोगे।

संजू: ठीक हैं एक काम करते हैं, मेरे दोस्त का घर बड़ा हैं, उन दोनों को करने दो आपस में, हम दोनों दूसरे कमरे में अलग से कर लेंगे।

मैं: तुम्हारे साथ तो मैं अब कभी नहीं सोने वाली, मुझे छोड़ कर तुम किसी ओर के साथ कर रहे थे।

संजू: तुम अपने पति को धोखा देकर मेरे साथ सोइ थी वो धोखा नहीं पर मैं किसी के साथ सोया तो धोखेबाज! ये तो पाखंड हैं।

मैं: ठीक हैं, अभी क्या करना हैं, मैं पकडे नहीं जाना चाहती बस। पर एक बार थ्रीसम ट्राय करना है मुझे भी।

संजू: मेरे पास एक प्लान हैं, इन दोनों के घर से निकलने के पहले ही तुम अपनी सहेली से मिलने जाने का बोल कर मैं एड्रेस दूंगा वहा आ जाना। ये दोनों भी वही आने वाले हैं। तुम्हारा चेहरा छुपा के मैं तुम्हे अपनी एक दोस्त की तरह मिलवाऊंगा। तुम भी हमारे साथ मजे ले सकती हो बिना अपनी पहचान बताये।

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मैं: मेरे कपडे और आवाज सुन के पहचान नहीं जायेंगे वो दोनों?

संजू: मैं अपनी बीवी के कपडे लेते आऊंगा, वो पहन लेना। थोड़ी गले से आवाज निकाल कर बात करना तो आवाज बदल जाएगी और पहचान में नहीं आएगी। तुम्हारी बॉडी पर वैसे भी कोई निशान नहीं जिसको देख कर पति पहचान जाए।

मै: ठीक हैं तम एड्रेस भेजो मुझे, पर कुछ भी गड़बड़ हो तो संभाल लेना।

फंक्शन समाप्त होने के बाद हम सब लोग घर पहुंचे। मैं चिंतित थी कल के प्रोग्राम के बारे में। पूरी रात मैं ठीक से सो नहीं पायी, सोचा कही रात को ये निकल कर फिर मेरी भाभी से मिलने ना पहुंच जाए।

सुबह सुबह ही मैंने सबको बता दिया कि मैं दोपहर से पहले अपनी सहेली से मिलने जाने वाली हूँ और थोड़ा देर से ही आउंगी। सुबह के सारे काम ख़त्म करने के बाद माँ से पता चला कि भाभी बाजार जाने वाली हैं अपनी कुछ साड़िया बनवाने के लिए।

नाश्ता करते हुए पति ने भी बताया कि इसी शहर में उनका एक दोस्त रहता हैं, अब यहाँ आया हूँ तो सोचा उससे मिलता चलू, फिर कब मौका मिलेगा।

मैं घर से निकल गयी और संजू के बताये एड्रेस पर पहुंच गयी। वो वहां पहले से मौजूद था। पहले उसने मुझे अपनी हेयर स्टाइल बदलने को कहा। फिर उसने अपने साथ लाये हुए सलवार कमीज मुझे दिए और कपडे बदलने को कहाँ।

यहाँ तक कि मेरी ब्रा और पैंटी भी वो नयी खरीद कर लाया था। नाप तो मेरा वो कुछ दिन पहले ही ले चूका था शायद।

उसके दोस्त की बीवी का मेक अप का सामान पड़ा था, तो नए सिरे से अलग तरह का मेकअप करवाया। उसने अब मुझ पर अलग तरह का परफ्यूम छिड़का जो मैं कभी इस्तेमाल नहीं करती।

मैंने जो थोड़े बहुत गहने पहने थे वो भी खुलवा दिए, और वहां पड़े नकली गहने पहना दिए। अब मेरे ऊपर मेरी कोई पहचान नहीं बची थी।

उसने अब अपने बैग से चार मास्क निकाले। उसने कहाँ कि हम चारो ये मास्क पहन कर ही करेंगे।

इन सब के बीच मैं उसको अलग अलग तरह की आवाज बना के दिखा रही थी। हमने एक आवाज को फाइनल कर लिया था। वैसे भी मास्क पहना होगा तो आवाज वैसे भी दब के थोड़ी अलग ही आएगी।

 
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