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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

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सैंड्रा बिस्तर से उतर कर कुछ ले लायी। उसके हाथ में एक डिब्बी थी जिसमे से उसने कुछ अपने हाथ में भरा। ये कोई जैल था जो उसने जोसफ के लंड पर अच्छे से लपेट दिया। उसका लंड उस जैल में लिपट कर और चमकने लगा। लुब्रीकेंट तो मैंने भी उस दिन ककड़ी पर लगाया था पर कोई फायदा नहीं हुआ था।

सैंड्रा अब जोसफ के लंड पर दोनों तरफ पाँव कर घुटनो के बल खड़ी हो गयी। उसकी पतली कमर और छोटी सी गांड के दोनों उभार दिख बहुत सेक्सी लग रही थी। उसकी चूत जोसफ के लंड से सात आठ इंच दूर थी।

जोसफ का लंड उसके पेट की तरफ झुक कर खड़ा था। सैंड्रा ने उसका लंड पकड़ा और सीधा खड़ा कर दिया। जोसफ का लंड सैंड्रा की चूत के एकदम पास था।

इतना चौड़ा लंड और सैंड्रा की गांड के बीच की छोटी सी दरार के बीच से नीचे की ओर दिखती उसकी छोटी पतली सी चूत, लंड का अंदर जाना नामुमकिन सा लग रहा था।

सैंड्रा ने लंड की टोपी अपनी चूत के छेद के पास लाकर अपना शरीर थोड़ा नीचे किया। अब जोसफ का लंड बिना पकड़े ही सैंड्रा की चूत से अटक कर सीधा कुतुबमीनार की तरह खड़ा था।

सैंड्रा अब धीरे धीरे नीचे होती जा रही थी और जोसफ का लंड उसकी चूत में घुसना शुरू हो गया था। लंड की टोपी सैंड्रा की चूत में घुस गयी थी और अब लंड का मोटाई वाला भाग धीरे धीरे अंदर जाने लगा और सैंड्रा के मुँह से कराहट निकलनी शुरू हो गयी। मुझे अपनी आँखों के ऊपर विश्वास नहीं हो रहा था। मेरी ककड़ी तो अटक अटक कर जा रही थी।

जैसा मैंने सोचा था तीन इंच अंदर जाने के बाद सैंड्रा कराहते हुए रुक गयी। जोसफ ने सैंड्रा का हौंसला बढ़ाया और अंदर घुसाते रहने को कहा।

जोसफ: “कम ऑन डार्लिंग, पुश इट फरदर। ”

सैंड्रा अब और जोर से चीखी और ऐसी आवाज निकलने लगी जैसे कोई बाहर भारी सामान उठा रही हो। आईईईई करते हुए वो नीचे बैठती रही और फिर धीरे धीरे जोसफ का लंड सैंड्रा की चूत में उतरता रहा। मुझे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था और जल्द ही लंड का लगभग छह इंच हिस्सा सैंड्रा की चूत में गायब हो चूका था।

जरूर वो जैल उच्च श्रेणी का रहा होगा जो इतना मोटा लंड अंदर फिसलता हुआ जा रहा था। इतने मोटे लंड के अंदर जाने से नीचे से सैंड्रा की गांड के दोनों उभार फट कर एक दूसरे से दूर हो गए थे।

सैंड्रा की चूत अब जोसफ के लंड की जड़ो तक आ गयी, उसने उसको अपने में पूरा उतार लिया था। सैंड्रा ने एक चैन की सांस ली और ख़ुशी मनाई।

मैंने सोचा असली परीक्षा तो अब होने वाली थी। जिस तरह ककड़ी मेरी चूत में फंस गयी थी वैसे जोसफ का लंड भी सैंड्रा की चूत में अटक जायेगा। ऐसे में जैक को सहायता करनी पड़ेगी। जरुरत पड़ी तो मैं भी कमरे में जाकर सैंड्रा को खीचूँगी और लंड बाहर निकालने में मदद कर दूंगी।

सैंड्रा ने जोसफ के ऊपर चढ़ कर लंड तो काफी मुश्किल से अपनी चुत में ले लिया था पर मुझे डर था क्या वो मोटा लंड वापिस बाहर निकाल पायेगी।

सैंड्रा ने अपने दोनों हाथ जोसफ के पेट पर रखे और एक जोर की हुंकार भरी और अपना शरीर का जोर लगाते हुए ऊपर उठने लगी और उसके शरीर के ऊपर उठने के साथ ही जोसफ का गायब हो चूका लंड एक बार फिर बाहर आता दिखने लगा। मेरे लिए तो वो किसी जादू से कम नहीं था।

लंड लगभग पूरा बाहर आ चुका था और सैंड्रा की कराह भी जारी थी और उसी सांस में उसने फिर अपना शरीर नीचे करते हुए जोसफ का लंड अपनी चूत में छुपा दिया। अब वो बिना ज्यादा परेशानी के ऊपर नीचे हो पा रही थी, मगर उसकी कराह से पता चल रहा था कि दर्द तो हो रहा था।

मैंने वो जैल की डिब्बी को ढूंढना शुरू किया, ये सारा जादू शायद उसी का था। मगर मैं उस जैल का क्या करुँगी, मुझे कौनसा जोसफ जैसा लंड मिलने वाला था। मैंने फिर से उनकी चुदाई का मजा लेना शुरू किया।

सैंड्रा थोड़ी देर में जोसफ के ऊपर सीने से सीना मिला झुक गयी। उसके झुकते ही मुझे उसकी चूत साफ़ दिखाई देने लगी। इतना मोटा लंड अपने अंदर समाने के बाद उसकी छोटी सी चूत फटी पड़ी थी । जोसफ सैंड्रा की गांड अपने मोटे हाथों से सहला रहा था। शायद ऐसा करने से सैंड्रा का दर्द कम हो सके।

सैंड्रा अब आगे पीछे होने लगी और धीरे धीरे जोसफ का लंड दो तीन इंच उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा। सैंड्रा की चूत के पतले गुलाबी होंठ एक दम खींचे हुए थे। जोसफ ने अपना एक हाथ सैंड्रा की गांड से हटाते हुए ऊपर ले गया और सैंड्रा की ब्रा का हुक खोल कर ब्रा निकाल दिया।

अब सैंड्रा के शरीर पर सिर्फ उसके हाई हील सैंडल बचे थे। सैंड्रा अब इतना जोर नहीं लगा पा रही थी तो जोसफ ने उसकी पीठ को पकड़ा और खुद ही जोर लगा कर अपना लंड सैंड्रा की चूत में अंदर बाहर करने लगा। इससे उसका लंड अब पूरा अंदर बाहर हो सैंड्रा की चूत को रगड़ते हुए चोदने लगा।

ऐसा करने से सैंड्रा और जोर से आवाज निकाल आहें भरने लगी। ये सब देख मेरी तो पैंटी गीली होने लगी थी। जैक को तो कोई फरक ही नहीं पड़ा, उसके लिए तो ये शायद रोज का था।
 
अब सैंड्रा के शरीर पर सिर्फ उसके हाई हील सैंडल बचे थे। सैंड्रा अब इतना जोर नहीं लगा पा रही थी तो जोसफ ने उसकी पीठ को पकड़ा और खुद ही जोर लगा कर अपना लंड सैंड्रा की चूत में अंदर बाहर करने लगा। इससे उसका लंड अब पूरा अंदर बाहर हो सैंड्रा की चूत को रगड़ते हुए चोदने लगा।

ऐसा करने से सैंड्रा और जोर से आवाज निकाल आहें भरने लगी। ये सब देख मेरी तो पैंटी गीली होने लगी थी। जैक को तो कोई फरक ही नहीं पड़ा, उसके लिए तो ये शायद रोज का था।

जोसफ आराम से धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था और कुछ मिनटों में ही सैंड्रा की चूत से निकला पानी जोसफ के लंड की जड़ो में आकर इकट्ठा होना शुरू हो गया। मेरे हाथ पैर कांपने लगे ये नजारा देख कर। एक मोटा काला लंड एक गौरी सी चूत को भेद रहा था और एक गौरे काले का संगम बड़ा मनोहारी लग रहा था।

थोड़ी देर में सैंड्रा ने जोसफ को रुकने को बोला और उस पर से उतर कर साइड में लेट गयी। जोसफ भी उठा और सैंड्रा को दूसरी दिशा में लेटाया जिससे वो मेरी खिड़की के समानांतर हो लेटी थी।

साइड से लेटे हुए सैंड्रा के बड़े बड़े मम्मे बड़े आकर्षक लग रहे थे। उसने संभवत प्लाटिक सर्जरी से बड़े करवाए होंगे। वो बहुत ही चिकने थे। वो शायद कभी माँ नहीं बनी थी इसलिए उसके निप्पल मेरी तरफ मोटे और लम्बे नहीं थे। उसके सफ़ेद झक मम्मो पर गुलाबी निप्पल एक केक पर रखे अनारदाने की तरह थे। जोसफ ने आगे बढ़ कर अपने काले मोटे होंठो में उस अनारदाने को भर लिया।

थोड़ी देर एक ही निप्पल से खेलता रहा। सैंड्रा ने जैक की तरफ देखा और उसको भी बुलाने लगी।

सैंड्रा : “स्वीटहार्ट, तुम अपने हिस्से की चूंचियाँ चुसोगे? ”

जैक ने मना कर दिया, और मुझे अच्छा लगा कि उसको मेरी कुदरती चूंचियाँ ज्यादा पसंद थी। जोसफ ने दूसरे मम्मे को मुँह नहीं लगाया। शायद सैंड्रा ने अपने दोनों सौतेले बेटो में अपना एक एक मम्मा बाँट दिया था।

जोसफ अपने भद्दे होठो में सैंड्रा के मोटे मम्मे को भर भर के चूस कर छोड़ रहा था। और सैंड्रा को मजे आ रहे थे। मुझे ऐसा अहसास हो रहा था जैसे वो सैंड्रा के नहीं मेरे मम्मे को चूस रहा था, क्यों कि अब तक मेरे मम्मे भी एक बार फिर फूल चुके थे। मुझे दबाव कम करने के लिए अपने शर्ट के दो तीन बटन खोलने पड़े।

जोसफ अब सैंड्रा के पैरो की तरफ आया और उसके पैर चौड़े कर बीच में घुटनो के बल बैठ गया। सैंड्रा की दोनों टाँगे मौड़ कर अपनी तरफ खिंचा और और अपना लंड एक बार फिर सैंड्रा की चूत में घुसाना शुरू किया, मुझे सैंड्रा की जांघो के बीच में आ जाने से ज्यादा कुछ दिखा तो नहीं पर सैंड्रा की कराहटों और जोसफ की गति से पता चल रहा था।

सैंड्रा और जोसफ के बीच की दुरी कम होती जा रही थी और सैंड्रा की चीखे बढ़ती जा रही थी। थोड़ी देर बाद जोसफ का हिलना और सैंड्रा की आहें दोनों बंद हो गयी। लगता था जोसफ ने अपना पूरा लंड सैंड्रा की चूत में उतार दिया था। मेरी इच्छा हुई मैं अंदर जाकर उस नज़ारे को अच्छे से देख पाऊ पर कर नहीं सकती थी।

जोसफ की गोल गांड अब आगे पीछे हिल रही थी, उसने झटके मारना शुरू कर दिया था। वो झटके धीमे थे और सैंड्रा की आहें भी उस अनुसार धीमी थी। थोड़ी देर बाद सैंड्रा खुद ही जोसफ को जोर से चोदने को बोलने लगी। मुझे लगा वो पागल हो गयी हैं, इतने दर्द के बावजूद वो ऐसा कैसे कर सकती हैं।

जोसफ की गांड अब और तीव्र गति से आगे पीछे जल्दी जल्दी धक्के मारने लगी और सैंड्रा की आहें भी जल्दी जल्दी और तेज आवाज में आने लगी। उसकी कराहट अब शुरुआत जैसी नहीं थी।

पहले दर्द ज्यादा झलक रहा था पर अब उसमे मजा लेने का अहसास ज्यादा था। मैं मन ही मन सैंड्रा की हिम्मत की तारीफ़ किये बिना नहीं रह पायी। क्या इस मोटे लंड से चुदाना इतना आसान नहीं था जितना सैंड्रा दिखा रही थी।

सैंड्रा की मादक आहों के साथ अब जोसफ की भी आवाजे आने लगी थी। वो आहें नहीं थी, वो तो जैसे गुर्रा रहा था। कमरा सैंड्रा की तेज आहों और जोसफ की गुर्राहट से गूंज सा गया और एक अलग ही माहौल बन चूका था। जैक ने कुछ क्षणों के लिए मेरी तरफ देखा और मुस्कुराया।

मेरी इच्छा हुई अभी जैक मेरे पास आ जाये, वो मुझे चोदे या नहीं पर मैं जरूर उसको चोद दूंगी । शायद उस वक़्त वहा कोई और मर्द भी होता तो मैं अपनी किसी से ना चुदवाने की कसम भुला कर तैयार हो जाती। शायद राहुल होता तो उसको भी मना नहीं कर पाती । मेरे चेहरे पर तो ऐसे भाव थे जैसे उस वक्त मैं खुद चुदवा रही हूँ।

अंदर से अब फच्चाक फच्चाक की आवाज आने लगी थी । क्या सैंड्रा को गर्भवती होने की भी चिंता नहीं थी। जरूर कुछ साधन लगाती होगी या शायद माँ बनने में सक्षम नहीं होगी तभी बिना डर के चुदवाती रही हैं। वरना अब तक तो काले बच्चो की फ़ौज खड़ी कर देती। मैं सोचने लगी इतने मोटे लंड से पानी कितना निकलता होगा। खैर वो तो थोड़ी देर में पता लग ही जायेगा।
 
मैं अपना एक हाथ अपने स्कर्ट के ऊपर से ही अपनी चूत पर रख दबाये हुई थी। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। अंदर से आवाजे बढ़ती जा रही थी। आहहह आह्ह ओ हनी , फक मी हार्ड , ओ ओ ओ

मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैंने अपने स्कर्ट के नीचे से हाथ डालने की कोशिश की पर टाइट स्कर्ट को ज्यादा उठा नहीं पायी। मैंने वीडियो रिकॉर्ड कर रहे मोबाइल को नीचे रखा और अपनी स्कर्ट का हुक खोल दिया और उसे पांवो में नीचे गिरा दिया। अपना हाथ अपनी पैंटी में डाला और अपनी उंगलिया चूत की दरारों में रगड़ने लगी।

मुझे थोड़ी राहत मिली, चूत तो पहले ही गीली पड़ी थी और मेरी उंगलिया चिकनी हो आराम से फिसलने लगी। एक हाथ से मैं अपनी चूत रगड़ रही थी और दूसरे से अपना मुँह पकड़ बंद रखा था।

मैंने अपना काम जारी रखते हुए एक बार फिर खिड़की के कौने से अंदर देखना शुरू किया। जोसफ सैंड्रा के ऊपर पूरा लेट चूका था। नीचे सैंड्रा की सफ़ेद परत और उस पर चिपकी एक काली परत। जोसफ का भारी भरकम शरीर सैंड्रा को दबाये हुए बुरी तरह से चोद रहा था।

वो नजारा ऐसा था जैसे संगमरमर को एक काली मशीन घिस घिस कर चिकना बना रही थी। जोसफ बिस्तर का सहारा ले तेज झटके मार रहा था।

मैंने अपनी पैंटी को भी घुटनो के नीचे तक उतार दिया और पाँव चौड़े कर और तेज तेज अपनी उंगलिया अपनी चूत पर चलाने लगी। मुझे नहीं पता जैक ये सब कैसे सहन कर पा रहा था, उसकी इच्छा नहीं हो रही होगी !

जोसफ के तेज झटको से सैंड्रा जोर जोर से चीखते हुए झड़ने लगी और साथ ही जोसफ की गुर्राहट तेज हुई, शायद उसके झड़ने का ये ही तरीका था। उनकी आवाज सुन मेरी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया। मैं अब खिड़की से हटी।

मेरी उंगलिया चिकने पानी से पूरी गन्दी हो चुकी थी। मैं दूसरे हाथ से पर्स में से नैपकिन निकाला और हाथ पोंछा और फिर अपनी चूत को भी पोंछ दिया। अंदर से उन लोगो की बातें करने की आवाजे आ रही थी। मैंने अपनी पैंटी और स्कर्ट को ऊपर खिंच कर शर्ट अंदर डाल फिर पहन लिया। फिर अपने शर्ट के खुले बटन को भी बंद कर दिया।

जोसफ: “हम वापिस ऑफिस जाने वाले हैं?”

सैंड्रा : “तुमसे चुदवाने के दो घंटे बाद तक मैं कभी कोई काम कर पायी हूँ ! मुझे रेस्ट चाहिए।”

मैं घबरा गयी, ये लोग नहीं गए तो मैं बाहर कैसे निकलूंगी।

जोसफ: “चलो डार्लिंग, साथ में नहा कर साफ़ तो हो जाये।”

मैंने खिड़की के कोने से फिर देखना शुरू किया। जोसफ बिस्तर के पास खड़ा था और सैंड्रा आराम से लेटी थी, दोनों अभी भी नंगे थे । जोसफ ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और सैंड्रा को बिस्तर से उठा दिया और सहारा दे बाथरूम की ओर ले जाने लगा। उनकी पीठ मेरी तरफ थी।

जोसफ ने सैंड्रा के साथ चलते हुए उसकी गौरी छोटी सी गांड को दबा मजे लेता रहा जैसे किसी छोटे बच्चे के गाल दबाते हैं।

मुझे जोसफ किसी एक्शन मूवी के हीरो सा लग रहा था। मैंने सोचा क्या मुझे कभी उससे चुदवाने का सौभाग्य प्राप्त होगा। मेरा उसके मोटे लंड से डर थोड़ा बहुत निकल चूका था। उस दर्द से कही ज्यादा उसके लंड से मिलने वाला मजा होगा। बस वो जैल मिल जाये।
 
मुझे जोसफ किसी एक्शन मूवी के हीरो सा लग रहा था। मैंने सोचा क्या मुझे कभी उससे चुदवाने का सौभाग्य प्राप्त होगा। मेरा उसके मोटे लंड से डर थोड़ा बहुत निकल चूका था। उस दर्द से कही ज्यादा उसके लंड से मिलने वाला मजा होगा। बस वो जैल मिल जाये।

उन दोनों के बाथरूम में जाते ही जैक खिड़की में आया और मुझे अंदर आने को कहा। उसने पीछे का दरवाजा खोला और मुझे अंदर लिया आगे के दरवाजे से मुझे मैन गेट तक ले आया।

हम दोनों का काम आज भी नहीं हो पाया था, हालांकि मेरा काम मैंने खुद ही कर दिया था। शायद जैक और मैं करते तो भी इतना मजा नहीं आता जितना जोसफ और सैंड्रा को करते हुए देखा था।

जैक ने कहा वो मौका देख कर कल मुझे फ़ोन करेगा और हम मिलेंगे। मैं जैक से विदा ले वहा से सीधा ऑफिस चली गयी, अब छुट्टी मारने का क्या फायदा।

राहुल को भी आश्चर्य हुआ मैं वापिस कैसे आ गयी। मैंने उसको सारी बात बतायी कि मैंने भी वीडियो बना लिया हैं। अब जोसफ और सैंड्रा हमें डरा नहीं पाएंगे ।

राहुल: “अब हम बिज़नेस छोड़ लोगो को ब्लैकमेल करेंगे क्या?”

मैं: “इसमें क्या गलत हैं, वो भी तो यही कर रहे हैं। ”

राहुल: “ठीक हैं, मौका आने पर देखते हैं। तुम ठीक तो हो ना।”

उसका मतलब मैं समझ गयी थी, मेरे चेहरे पर चुदने के बाद की लाली थी।

मैं: “मेरे और जैक के बीच में ऐसा कुछ नहीं हुआ हैं। ”

हम दोनों आगे क्या होने वाला था उसकी तैयारी करने लगे।

अगले दिन दोपहर बाद ऑफिस में काम करते वक्त मुझे जैक का फ़ोन आया कि वो बाहर पार्किंग में मेरा इंतजार कर रहा हैं। मैंने उसे कहा मैं अभी आती हूँ। मैंने सोचा राहुल को बोलूंगी तो वो मुझे फिर भाषण सुना देगा। मैंने अपनी तबियत ख़राब होने का बहाना बना राहुल से छुट्टी ली और जैक के पास आ गयी।

जैक: “चलो हम गेस्ट हाउस चलते हैं ”

मैं: “नहीं, वो लोग फिर से आ गए तो।”

जैक: “तो क्या करे, तुम्हारे पास कोई ओर जगह हैं? ”

मैं: “हम लोग मेरे घर जा सकते हैं, यहाँ पास ही में हैं। इस वक्त वहा कोई नहीं होता हैं । ”

मैं और जैक मेरे घर पर आ गए। आज हमें जोसफ का कोई खतरा नहीं था। मैंने उसे कल के जोसफ और सैंड्रा के वीडियो के बारे में बता दिया। वो मेरी चतुराई पर हंसने लगा।

मैं उसे अपने बैडरूम में ले आयी। इतना खूबसूरत लड़का पहली बार मेरे बैडरूम में आया था। मैं उसके चेहरे को ही निहार रही थी। उसकी नीली आँखें मुझे बुला रही थी। मैं उसके नजदीक आ गयी।

मैंने आगे बढ़ उसके हलके गुलाबी होंठो को अपने लाल रंगे होंठो में भर लिए। वो भी मेरे होंठो को चूसने लगा। उसने चूमते चूमते ही मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए और शर्ट को मेरे कंधे से बाहर कर पूरा हाथों से निकाल दिया।

उसका चूमना अभी भी जारी था। एक दूसरे के होंठो को चूसने की आवाज सुनाई दे रही थी। उसने अब अपने हाथ मेरी पीठ ले जाकर मेरे ब्रा का हुक खोल दिया। चूमना जारी रख उसने मेरा ब्रा मेरे शरीर से हटा मुझे टॉपलेस कर दिया।

उसने मुझे चूमना छोड़ा और अपने होंठ मेरे दोनों मम्मो के बीच ऊपर रख दिये । मेरे दोनों मम्मे पकड़ साइड में किये और अपने होंठो के लिए मम्मो के बीच जगह बनाई और वहा चूसने लगा। चूसते चूसते वो मेरे एक मम्मे की मोटाई को दांतो से हलके से काटने लगा।

उसके होंठ अब मेरे निप्पल को अपने में दबा कामुक तरीके से चूसने लगे। मेरे मम्मे अब तक काफी फुल चुके थे और निप्पल भी तन कर खड़े हो गए थे। वो बारी बारी से मेरे कुदरती मम्मो को चूसने के मजे लेता रहा। वो बच्चो की तरह मेरे मम्मो से जैसे दूध पी रहा था, हालाँकि वहा दूध तो था नहीं। पर मुझे एक मीठी सी गुदगुदी हो रही थी।

जब उसका चूसने से मन भरा तो वो सीधा हुआ। मैंने उसका टीशर्ट निकाल दिया और उसको भी टॉपलेस कर दिया। बिना बालो वाला उसका गौरा और चिकना दूध सा सफ़ेद बदन देख मैं खुद को रोक ना पायी और उसको अपने गले से लगा कर अपने मम्में उसके सीने से दबा लिए।

हम दोनों एक दूसरे पीठ पर हाथ फेरते हुए एक दूसरे के शरीर को महसुस कर रहे थे।

अब हम अलग हुए और उसने मेरे स्कर्ट का साइड में लगा हुक खोल दिया। मेरी पेंसिल स्कर्ट थोड़ी ढीली हुई और उसने उसको नीचे खिसका दिया। मैंने उसे अपनी पांवो से बाहर निकाल दिया। उसने बिना देरी किये मेरी पैंटी भी निकाल दी। मैं अब पूरी नंगी उसके सामने चुदवाने को तैयार खड़ी थी।

उसने मुझे बिस्तर के कोने पर बैठाया और पाँव ऊपर उठा कर चौड़े कर दिए। मेरी गहरी गुलाबी चूत उसके सामने खुल गयी। वो अपनी एक गुलाबी ऊँगली मेरी चूत की दरार में फेराने लगा, मैं सिसकियाँ मारने लगी।

उसन आगे झुक का अब अपने वो पतले होंठ मेरी चूत के होंठो पर रख दिए। जिस तरह उसने मेरे मुँह के होंठो को चूसा था उसी तरह वो मेरे चूत के होंठो को भी चूस रहा था। मैं आहें निकाल मदहोश हुए जा रही थी, मेरा पानी निकलना शुरू हो गया। पता नहीं उसको मेरा पानी देख कही बुरा ना लग जाये, पर वो अब अपनी जबान को मेरी चूत की दरार में रगड़ चाटने लगा।

शायद उसको मेरे पानी का स्वाद भा रहा था। मैंने उसके सुनहरे लंबे बालों में अपनी उंगलिया उलझा दी और हाथ फेरने लगी। मजा तो बहुत आ रहा था पर मैं अब जल्दी से उसके लंड को देखना चाहती थी। वो इतना खूबसूरत हैं तो उसका लंड भी तो खूबसूरत होगा । पर उसका मन तो जैसे मेरी चूत को चाटने में ही लग गया था। मैंने उसको उसकी दिल की इच्छा पूरी करने दी।

तभी मेरे मोबाइल पर कॉल आया। मैंने बिस्तर पर पड़े अपने फ़ोन को उठाया तो अशोक का नाम था। उससे बात करते वक्त सिसकी ना निकल जाए इसलिए मैंने जैक को चाटने से रोका और बताया कि मेरे पति का फ़ोन आया हैं । वो रुक गया और मेरी चूत को निहारने लगा। मैंने फ़ोन उठाया।

मैं: “हां अशोक”

अशोक: “अरे तुम थोड़ी देर के लिए घर जा सकती हो क्या?”

मैं: “क्यों क्या हुआ ? ”

अशोक: “अरे वो चार बजे प्लंबर आने वाला था तो मैंने माँ को बोला था घर आने के लिए । माँ निकल गयी हैं घर आने के लिए पर मैं उनको चाबी देना भूल गया था सुबह। तुम्हारे ऑफिस के तो पास ही घर हैं, ज़रा चाबी दे आओ, माँ पहुंचने ही वाली होगी। ”

मैं: “क्या माँ यहाँ पहुंचने वाली हैं !”

अशोक: “तुम्हारे ऑफिस नहीं, हमारे घर पर। तुम क्या घर पर ही हो?”

मैं: “हां मेरी तबियत ख़राब थी तो अभी आयी ही थी।”

अशोक: “फिर ठीक हैं अपना ध्यान रखो, बाय”

मैंने जैक को जल्दी वहा से जाने को कहा। वो अपना टीशर्ट पहनने लगा और मैंने अपनी ब्रा और पैंटी पहन ली। फिर अपने बिखरे कपड़े अलमारी में डाल एक गाउन निकाल पहन लिया। तब तक जैक मुझसे विदा ले बाहर चला गया।
 
मैंने कपडे पहनने के बाद बाहर आकर देखा, जैक अपनी कार में बैठ वहा से निकल गया। मैंने चैन की सांस ली कि मेरी सासुमां अब तक नहीं पहुंची थी। मैं रंगे हाथों पकड़े जाने से बच गयी। मेरी आधी छुट्टी भी ख़राब हो गयी और काम भी पूरा नहीं हो पाया।

वो तो अच्छा हुआ की सासुमां के पास मेरे घर की चाबी नहीं थी वरना वो आज अपनी संस्कारी बहु की इज्जत को किसी विदेशी के हाथों लुटते हुए देख लेती।

शायद मेरी किस्मत में ही जैक के साथ संगम नहीं लिखा था, ये तीसरी बार था जब जैक और मुझे काम शुरू होने के पहले ही छोड़ना पड़ा था। अच्छी बात ये थी कि हर बार हम कुछ कदम आगे बढ़ रहे थे। शायद अगली बार मौका मिला तो हमारा पूरा मिलन हो जाए। हमारे पुरे मिलन में सबसे बड़ी बाधा था जोसफ।

अगले दिन मैं ऑफिस में पहुंची, इस डर के साथ कि आज शायद सैंड्रा का संदेशा आ जाये कि वो डील कैंसल कर रही हैं। राहुल को भी शायद ये अंदेशा था। जब कि असली स्तिथि से अनजान बाकी का सारा स्टाफ बेसब्री से डील मिलने की खबर का इंतजार कर रहा था । सबके पिछले कुछ समय के अधूरे सपने इस डील के बाद पुरे हो सकते थे।

वो लोग इतने समय से इस डील के लिए इतनी ज्यादा मेहनत कर रहे थे, मुझे अच्छा नहीं लग रहा था कि सिर्फ मेरी वजह से ना सिर्फ राहुल मगर उन सबके सपने भी टूट जायेंगे।

आधा दिन बित गया और मैं राहुल के केबिन में तीन चार बार जाकर पूछ चुकी थी कि कोई समाचार आया कि नहीं। उसने मुझे सांत्वना दी कि जो भी होगा देखा जायेगा, और कुछ खबर आते ही वो मुझे बता देगा। मैंने तो आज अपना लक्की शार्ट कुर्ता भी पहना था, ताकि बुरी खबर दूर रहे ।

दोपहर बाद राहुल ने मुझे केबिन में बुलाया। मेरे हाथ पैर कांप गए, लगता था खबर आ चुकी हैं। मैंने ऊपर वाले को याद किया और बेचैनी से राहुल के केबिन में पहुंची। उसने मुझे बैठने को कहा, उसका चेहरा गंभीर था। मतलब कोई बुरी खबर थी।

राहुल: “सैंड्रा का फ़ोन था, उसको तुम्हारे और जैक के बारे में सब पता चल गया हैं। ”

मैं: “ओह माय गॉड, इस जोसफ के पेट में कोई बात नहीं टिकती। क्या कहा सैंड्रा ने? डील पर तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ”

राहुल: “पता नहीं, उसने तुम्हे और मुझे अकेले में बुलाया हैं, कुछ बात करनी हैं। ”

मैं: “तो फिर, क्या करे हम?”

राहुल: “चल के देखते हैं, मनाने की कोशिश करते हैं, अगर मान जाए तो अच्छा हैं।”

मैं: “तो चलो उसके ऑफिस, मैं उसको सब बता दूंगी ”

राहुल: “वो कही अकेले में मिलना चाहती हैं। मैंने उसको अपने फार्महाउस पर बुला लिया हैं। तुम चलोगी?”

मैं: “मुझे बुलाया हैं तो जाना ही पड़ेगा, सारी परेशानी मेरी वजह से ही हुई हैं।”

राहुल: “तुम अपने आप को दोष मत दो, चलो चलते हैं।”

राहुल और मैं उसके फार्म हाउस पर पहुंचे। राहुल सोफे पर बैठ गया मगर मैं परेशान हो हॉल में इधर उधर टहल रही थी। वो मुझे शांत रहने की सलाह दे रहा था।

थोड़ी देर में सैंड्रा और जोसफ ने हॉल में प्रवेश किया। सैंड्रा ने एक नजर मुझे ऊपर से नीचे देखा जैसे मुझे अपनी बहु बना लेगी। मैंने भी एक अच्छी बहु की तरह मुस्कुराती रही।

सैंड्रा मुझे पार कर थोड़ा आगे बढ़ी जहा राहुल था और वो दोनों एक कौने में जाकर धीरे धीरे बात कर रहे थे जो मुझे सुनाई नहीं दे रही थी क्यों कि हॉल कुछ बड़ा था।

मैं एक नजर जोसफ को देखा, और नफरत की निगाहो से उसको घूरती रही, ये सब उसी का किया हुआ था। जोसफ अपनी आँखों और हाथों से मुझे कुछ इशारा कर रहा था जो मैं समझ नहीं पा रही थी। शायद मुझे चिढ़ा रहा था।

उसने सैंड्रा और राहुल से नज़रे बचाते हुए अपने दोनों हाथो को मिला इशारा किया, मैंने होंठ हिलाते हुए बिना आवाज के डील बोला, उसने हां में सर हिलाया। फिर वो अपनी तरफ इशारा कर ना का इशारा कर रहा था।

क्या वो ये कहना चाह रहा था कि उसकी वजह से डील कैंसिल हो गयी हैं। मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया। उसने सैंड्रा और राहुल की तरफ इशारा किया, मैंने मुँह बिचकाते हुए जताया कि मुझे उसकी बातों में कोई दिलचस्पी नहीं ।

उसने फिर इशारा करते हुए अचानक अपना हाथ नीचे कर दिया और पीछे से सैंड्रा की आवाज आयी, शायद उसने देख लिया था जोसफ को मुझे चिढ़ाते हुए ।

सैंड्रा : “जोसफ, तुम अभी ऑफिस जा सकते हो। ”

जोसफ: “कोई बात नहीं, मैं रुक सकता हूँ। ”

सैंड्रा : “उसकी जरुरत नहीं, तुम जाओ मैं कह रही हूँ । ”

मुझे अच्छा लगा उसे डांट पड़ी, मैंने थोड़ा मुँह बना कर उसको चिढ़ाया और जोसफ अपना सा मुँह लेकर वहा से चला गया।

अब सैंड्रा और राहुल मेरे पास आये और सैंड्रा ने मुझे देख अपना भाषण सुनाना शुरू किया।

सैंड्रा : “तो राहुल ने तुमको चुना मेरे बेटे को फंसाने के लिए। ”

मैं: “मगर मैं…. ”

सैंड्रा : “बीच में मत बोलो, तुम्हे मौका मिलेगा बोलने का। डील लेने के लिए तुम अपने शरीर को भी बेच देती हो। राहुल ने तुम्हे लालच दिया होगा, कितना धन मिला इसके बदले। बोलो”

मैं: “देखो सैंड्रा, राहुल का इससे कुछ लेना देना नहीं हैं । जो भी था मेरे और जैक के बीच में था, निजी था , डील का इससे कोई लेना देना नहीं।”

सैंड्रा : “डील, उसके बारे में तो तुम दोनों भूल ही जाओ। ”

मैं: “प्लीज, सैंड्रा। मेरी वजह से बहुत से लोगो की मेहनत पानी में चली जाएगी। मैं माफ़ी मांगती हु, अगर जैक के साथ समय बिताने से तुम्हे बुरा लगा हो।”

सैंड्रा : “तुम्हारे माफ़ी मांगने से जैक कैसे ठीक होगा, वो तो तुम्हारे पीछे पागल हो गया हैं।”

मैं: “तुम बोलो तो मैं अब उससे कभी नहीं मिलूंगी। पर डील कैंसल मत करो। ”

सैंड्रा : “ताकि, डील मिलते ही तुम फिर जैक से मिलना शुरू कर दो। ”

मैं: “नहीं, ऐसा नहीं होगा, मैं वादा करती हूँ।”

सैंड्रा : “मैं कैसे यकीन करू?”

मैं :””तुम ही बताओ, मैं कैसे यकीन दिलाऊ”

सैंड्रा : “तुम्हे जैक के मन में अपने लिए नफरत पैदा करनी होगी, ताकि वो खुद तुम्हे भूल जाये”

मैं: “वो कैसे?”

सैंड्रा : “तुम्हे जैक की आँखों के सामने किसी और से चुदवाना होगा, ताकि उसे ये यकीन हो कि तुम किसी के भी साथ सो सकती हो पैसो के लिए ”

राहुल: “सैंड्रा, ये बहुत ज्यादा हो रहा हैं। ये मांग नाजायज हैं। और तुम किसी की इज्जत पर कीचड़ नहीं उछाल सकती। ”

सैंड्रा : “तूम बीच में मत बोलो, ये कदम प्रतिमा का निजी था तो फैसला भी ये ही लेगी। ”

मैं: “तुम मुझे जैक की नजरो में इस तरह गिरा नहीं सकती। मुझे ये मंजूर नहीं। ”

सैंड्रा : “ठीक हैं, फिर डील के बार में भूल जाओ। मैं डील कैंसल करती हूँ, हम वैसे भी कुछ दिनों में अपने देश लौट जायेंगे तुम जैक से मिल तो नहीं पाओगी वैसे भी। मैं झूठा विश्वाश दिला दूंगी उसको तुम्हारे चरित्र के बारे में, और जोसफ उसकी गवाही दे देगा। डील भी जाएगी और जैक भी। ”
 
मैं: “तुम मुझे जैक की नजरो में इस तरह गिरा नहीं सकती। मुझे ये मंजूर नहीं। ”

सैंड्रा : “ठीक हैं, फिर डील के बार में भूल जाओ। मैं डील कैंसल करती हूँ, हम वैसे भी कुछ दिनों में अपने देश लौट जायेंगे तुम जैक से मिल तो नहीं पाओगी वैसे भी। मैं झूठा विश्वाश दिला दूंगी उसको तुम्हारे चरित्र के बारे में, और जोसफ उसकी गवाही दे देगा। डील भी जाएगी और जैक भी। ”

मैं सोच में पड़ गयी, ऑफिस के सारे स्टाफ की शक्ले मेरी आँखों के सामने घूम रही थी, राहुल का चेहरा भी उतरा हुआ था। वो मेरे लिए कितना चिंतित था और मेरी सहायता कर रहा था और अब मेरी गलती की सजा इन सबको मिलेगी।

मैं: “प्लीज सैंड्रा ऐसा मत करो, तुम कुछ और ले लो पर ये काम मत करवाओ ।”

सैंड्रा : “ये ही तरीका हैं, हां हैं तो बोलो। ”

मैं: “एक काम करो, तुम जैक को मेरे घर भेज दो, मैं उसके सामने अपने पति के साथ सेक्स करते हुए उसको दिखा दूंगी। उसे थोड़े ही पता की वो मेरे पति हैं। ”

सैंड्रा : “नहीं, कोई ऐसा मर्द होना चाहिए जिसे जैक जानता हो। तुम्हारे पास सिर्फ दो ऑप्शन हैं, जोसफ या राहुल।”

मैंने राहुल की तरफ देखा, उसने आँखें झुका ली। मैं अब उसी दोराहे पर खड़ी थी जहा से एक रास्ता वहा जाता हैं जहा जाने से बचने के लिए मैंने ये नौकरी और ये नयी ज़िन्दगी चुनी थी। अब सारा दारमदार मेरे ऊपर था।

मेरे एक निर्णय से इतने लोगो की खुशिया जुडी हुई थी। मुझे कड़ा फैसला करना था। मैंने सोच लिया मैं त्याग करुँगी। एक बार की ही तो बात थी, इसके बदले कुछ लोगो को हमेशा की खुशियाँ मिल जाएगी।

सवाल ये था कि किसको चुनु। सैंड्रा को उस दिन जोसफ से चुदते हुए देखने के दृश्य अब भी मेरी आँखों के सामने थे। उस दिन मैं मन में सोच रही थी कि काश सैंड्रा की जगह मैं होती, पर आज वो मौका सामने था।

जोसफ के मोटे लंड का अनुभव लेने का अवसर था तो उसके प्रति नफरत भी थी उसने ही मुझे इस मुसीबत में फंसाया था। दूसरी तरफ राहुल था, जिसके मुँह से एक तारीफ सुनने के लिए मैंने कितने पापड़ बेले थे और आज मुझे ऐसे ही सामने से मौका मिल रहा था।

फिर सोचा अगर राहुल को चुना तो रोज ऑफिस में मैं उसका सामना कैसे करुँगी। वैसे भी मुझे उसे जीतना था ना कि धोखे से पाना। वैसे भी मैं कौनसा उस से चुदवाना चाहती थी, उस दिन पार्टी में चूमने तक नहीं दिया था मैंने उसे।

जोसफ तो कल को चला जायेगा, मुझे फिर कभी उसके सामने भी नहीं आना पड़ेगा। जोसफ मेरे ऊपर अपने मोटे लंड का पूरा गुस्सा निकालेगा जब कि राहुल मेरा बहुत ध्यान रखेगा।

मैं: “मैंने फैसला कर लिया हैं, मैं तैयार हु।। ”

राहुल: “प्रतिमा क्या बोल रही हो। तुम्हे ये सब करने की जरुरत नहीं ”

मैं: “नहीं, मैंने बिगाड़ा था, अब मैं ही बनाउंगी। मैं स्वार्थी नहीं हो सकती। ”

सैंड्रा: “ठीक हैं, राहुल तुम तैयार हो ना?”

राहुल: “अगर प्रतिमा को कोई आपत्ति नहीं हैं तो मैं भी तैयार हु। ”

मैं: “मैं राहुल की नहीं, जोसफ की बात कर रही थी। ”

सैंड्रा और राहुल एक दूसरे की तरफ आश्चर्य से देखने लगे। उन्हें यकीन नहीं हुआ कि मैंने राहुल के होते हुए जोसफ को चुना था। पर मैंने काफी आगे का सोच कर बहुत सोच समझ कर ही फैसला लिया था ।

सैंड्रा : “ठीक हैं, कल ग्यारह बजे गेस्टहॉउस आ जाना, तुम्हे जोसफ वही मिलेगा। तुम उसके साथ चुदवाओगी और मैं जैक को ये सब दिखा, उसको तुमसे हमेशा के लिए दूर कर दूंगी ।

राहुल: “प्रतिमा, तुम ठीक तो हो, तुम जोसफ को कैसे चुन सकती हो। मैं तुम्हे ये सब नहीं करने दूंगा।”

मैं: “मुझे करना ही पड़ेगा, इतने लोग जुड़े हुए हैं मेरी इस हां से। ”

सैंड्रा : “वाह, लगता हैं तुम दोनों एक दूसरे को बहुत चाहते हो ”

मैं: “नहीं” राहुल: “हां”

हम दोनों ने एक साथ विपरीत जवाब दिये थे। राहुल ने स्वीकार किया कि वो मुझे प्यार करता हैं। मगर मैंने तो कभी उसे प्यार ही नहीं किया था।

सैंड्रा: “देखो मेरी नजर में तुम दोनों ने मिल कर जैक को फंसाने का प्लान किया था। गलती तुम दोनों ने की थी, सजा सिर्फ प्रतिमा को मिल रही हैं। राहुल को भी सजा मिलनी चाहिए। राहुल की सजा ये हैं कि वो अभी इसी जगह मुझे चोदेगा, और वो भी अपनी माशूका के सामने। ”

राहुल: “मैं ये नहीं कर सकता।”

सैंड्रा : “प्रतिमा तो जोसफ के साथ चुदने को तैयार हैं तो तुम मुझे क्यों नहीं चोद सकते ? तुम क्या नामर्द हो ! कही ये ही तो कारण नहीं कि प्रतिमा ने तुम्हारी बजाय जोसफ को चुना।”

ये सुनकर राहुल गुस्से में लाल हो गया, पर गुस्सा करके भी क्या उखाड़ लेता।

सैंड्रा : “मेरा शक शायद सही हैं, राहुल तुम्हे शर्मिंदा करने के लिए तो प्रतिमा ही काफी हैं। प्रतिमा जरा तुम्हारे आशिक को नंगा करके देखो वो मर्द भी हैं या नहीं। ”

मैं और राहुल एक दूसरे का चेहरा देखने लगे। मैं ये कैसे कर सकती हूँ, वो मेरा बॉस हैं और मैं उसकी इतनी इज्जत करती हूँ और आज वो ही उतार दू। ये शर्म भी एक कारण थी कि जिसके मारे मैंने उसकी बजाय जोसफ को चुना था। मैं वही खड़ी की खड़ी रह गयी।

सैंड्रा : “और फिर मैं फैसला करुँगी कि मुझे इसके साथ चुदवाना हैं या नहीं । मुझे पसंद नहीं आया तो तुम दोनों आपस में चोद के बताओगे ।”

मैं एकदम घबरा गयी, राहुल के साथ नहीं करना था इसी वजह से तो जोसफ के लंड का जोखिम मौल लिया था। मैंने एक नजर राहुल की तरफ़ देखा फिर नीचे देखने लगी । उस दिन पार्टी में उसको चूमने तक नहीं दिया था और आज उसको मज़बूरी में चोदना पड़ेगा।

कही सैंड्रा सच तो नहीं बोल रही, क्या इसी नामर्दी के कारण वो मुझ जैसी खूबसूरत और सेक्सी औरत को देखता भी नहीं था। यहाँ तक कि सैंड्रा जैसी गौरी चमड़ी वाली बला की खूबसूरत औरत को भी मना कर रहा था। शायद रूही इसी वजह से छोड़ कर गयी हो। तब तक राहुल मेरे करीब आ गया।
 
राहुल: “प्रतिमा तुम मेरे कपड़े उतार सकती हो, घबराओ मत। ”

मैं अब फंस चुकी थी, पहले ही राहुल को चुन लेती तो एक बार इज्जत गवा के बच जाती, पर अब राहुल के साथ साथ जोसफ के साथ भी करवाना पड़ेगा। मेरे लिए तो डबल सजा हो गयी। मगर बचने का कोई रास्ता तो था नहीं।

राहुल अपना सूट तो आते ही खोल चूका था तो मैंने पहले उसकी टाई निकाली और फिर उसके शर्ट को पैंट के बाहर खिंच कर एक एक कर सारे बटन खोलती गयी और अंदर से उसका बनियान दिखने लगा। मैंने उसको सबसे कम कपड़ो में उस पार्टी में हाफ स्लीव टीशर्ट में देखा था। और अब उसका शर्ट निकालने के बाद उसे बनियान में देखा।

उसके हाथो के मसल्स दिखने लगे। उस दिन हाफ स्लीव टीशर्ट में ही उसके मसल्स का अनुमान तो लग गया था पर पुरे आज देखने को मिले। जोसेफ जितनी बलशाली भुजाएं तो नहीं थी पर आम मर्दो से काफी अच्छी थी। वो जिम जाता हैं ये तो मुझे पता चला था , पर इतने समय से जा रहा होगा ये अब पता चल गया था।

मैंने नीचे नजरे झुका कर उसका बनियान भी निकाल दिया। मेरी नजर उसके पेट पर पड़ी, उसके एब्स देख कर मैं बहुत प्रभावित हुई। मेरी तरह वो भी फिटनेस का बहुत ध्यान रखता हैं। उसका सीना एकदम सफाचट था। लगता हैं उसको शरीर पर बाल बिलकुल पसंद नहीं । शायद उसके लंड के आस पास भी वो सफाचट ही होगा।

मैंने उसका बेल्ट खोलने के बहाने अपना हाथ उसके एब्स पर थोड़ा छू कर महसूस कर दिया, वो बहुत सख्त थे। उसके बदन को छूते ही मुझे जैसे करंट लगा और शायद उसको भी।

मैंने उसका बेल्ट का बकल खोल दिया और फिर उसने खुद ही अपने जूते निकाल दिए ताकि मुझे उसकी पैंट निकालने में दिक्कत ना हो। मैंने उसकी पैंट का हुक और चैन खोल धीरे धीरे नीचे बैठते हुए पैंट को नीचे करने लगी। जैसे ही पैंट जांघो तक नीचे आया मैंने देखा उसने अंदर बॉक्सर पहन रखा हैं और उसमे से उसका लंड कड़क हो आगे की ओर निकला हुआ था।

मेरे कपड़े खोलने के दौरान ही लगता था उसका लंड कड़क हो तैयार हो चूका था। मतलब वो नामर्द तो नहीं था। मैं थोड़ा शरमा गयी उसके उस उभार को देख कर। मैंने उसका पैंट पूरा पाँव से निकाल दिया। अब बारी उसके आखरी कपड़े यानी बॉक्सर की थी। उसमे से बाहर झूलता हुआ लंड देख मेरी वैसे ही शरम के मारे हिम्मत नहीं हो रही थी।

मैंने अपने दोनों हाथ उसके बॉक्सर के दोनों तरफ रखे, पता नहीं अनगिनत औरतो ने अपने बॉस का लंड देखा और लिया होगा, मैं उनमे कभी शामिल नहीं होना चाहती थी पर आज शायद वो दिन था। शायद मेरा पहना हुआ लक्की कुर्ता भी आज काम नहीं आया।

फिलहाल मैं उसका बॉक्सर धीरे धीरे नीचे खींचने लगी, और उसके नीचे आते ही उसका लंड स्प्रिंग की तरह उछलते हुए मेरे चेहरे की तरफ लपका। मैं डर के थोड़ा पीछे खिसकी और गौर से देखा। उसका लंबा लंड मेरे सामने था। वहा का हिस्सा भी सफाचट था। मैं भी अपनी चूत सहित शरीर के हर हिस्से की वैक्सिंग कर चिकना रखती हु। हमारी एक और आदत मिलती थी।

मोटाई जोसफ़ के लंड जितनी तो नहीं थी पर सामान्य मर्दो के लंड की साइज से लंबा और मोटा था। शायद ये मुझे उसी दिन मिल जाता अगर मैं उसको पार्टी में मुझे चूमने देती।

मैंने बॉक्सर पूरा निकाल दिया और खड़ी हो गयी। वो एक पहलवान की तरह सीना फुलाये और अपना लंड खड़ा किये दिखा रहा था। शायद सैंड्रा और मुझे साबित कर रहा था कि वो असली मर्द हैं।

सैंड्रा : “राहुल अब तुम्हारी बारी, तुम …”

इससे पहले की सैंड्रा अपनी बात पूरी करती राहुल मेरी तरफ आगे बढ़ा और मेरे कुरते को नीचे से पकड़ लिया। मैं डर के मारे उसकी आँखों में देखने लगी, क्या वो सच में मुझे नंगा करने वाला था।

राहुल: “हाथ ऊपर करो प्रतिमा।”

वो मुझे नंगा करने के लिए कितना उतावला हुए जा रहा था, मैंने उसकी आँखों में घूरते हुए अपने हाथ ऊपर किये। मैं तो उसे वैसे ही मिलने वाली थी फिर उतावलेपन का क्या फायदा, जो भी करना हैं प्यार से करे। मेरे हाथ ऊपर करते ही उसने मेरा कुर्ता ऊपर उठाना शुरू कर दिया और सर से पूरा निकाल दिया।

मुझे बहुत शर्म आयी, अपनी इच्छा से नंगा होना और किसी के हाथो जबर्दस्ती नंगे होने में फर्क होता हैं। मैं अब ब्रा में खड़ी थी। नजरे नीचे की तो राहुल का लंड नजर आया, तो शरमा के फिर ऊपर देखने लगी। उसकी आँखें मेरे ब्रा से झांकते हुए मम्मो पर ही थी। आज तो बड़ी बेशर्मी से मेरे शरीर को निहार रहा था और ऑफिस में जब मैं दिखाने की कोशिश करती थी तब क्या हुआ था इसे !

वो अब नीचे बैठ गया और मेरी कैप्री पैंट को नीचे खिसकाने लगा और मेरी पैंटी दिखने लगी। अब तक की घटनाओ से मेरा थोड़ा पानी निकल गया था और पैंटी भी गहरे रंग की थी तो उसको साफ़ दिख गया मेरी क्या हालत हैं। हम दोनों एक दूसरे में इतना खो गए कि हम भूल ही गए थे कि सैंड्रा भी वहा खड़ी हैं।

मैंने देखा उसका लंड अब फूल कर और भी मोटा और लंबा हो चूका हैं। वो मुझे पहली बार इतने कम कपड़ो में देख रहा था, पता था हालत तो उसकी खराब होनी ही थी। वो एक बार फिर खड़ा हुआ।

उसने मुझे पीछे घुमाया और मेरी ब्रा का हुक खोल दिया। मेरे सीने पर कसाव ढीला करते ही उसने मुझे फिर अपनी तरफ घुमाया। वो मुझे नंगा करते हुए मेरा शर्माता चेहरा देखना चाहता था। उसने मेरे खुले लंबे स्ट्रैट किये हुए बालो को आगे से पीछे किया ताकि उसको मेरे मम्मे पुरे दिखे। मैंने शर्म के मारे नजरे नीचे ही की हुई थी।

उसने अपने दोनों हाथों की दो दो उंगलिया मेरे ढीले हो चुके ब्रा के नीचे रखी और ऊपर उठा मेरे मम्मे बाहर निकालने की कोशिश शरू करने ही लगा कि सैंड्रा की आवाज आयी।

सैंड्रा: “रुको”

हमने सैंड्रा की तरफ देखा, उसने अपने कपडे निकालना शुरू कर दिया था।

सैंड्रा: “मुझे यकीन हो गया हैं कि राहुल नामर्द नहीं। वैसे भी तुम दोनों के लिए ये सजा से ज्यादा मजा लग रहा हैं। राहुल की सजा तो मुझे चोदने में हैं। ”

सैंड्रा ने अपने ऊपर के कपड़े निकाल दिए थे और अब वो सिर्फ लैस वाले खूबसूरत काले ब्रा और पैंटी में थी। उसके संगरमर जैसे बदन पर काले ब्रा और पैंटी काफी आकर्षक लग रहे थे ऊपर से उसके गौरे गौरे बड़े वाले चिकने मम्मे क़यामत थे। उसके बदन को देख कर तो राहुल मुझे भी भूल जायेगा।

राहुल फिर मेरी तरफ मुड़ा और एक बार फिर अपने दोनों हाथ मेरी ब्रा की तरफ लाया। मुझे उस वक्त बहुत ख़ुशी हुई, सैंड्रा जैसी हसीना को छोड़ कर वो मेरी तरफ आकर्षित था ठीक जैक की तरह। पर इससे पहले कि वो मेरे ब्रा को हाथ भी लगा पाता सैंड्रा ने फिर रोक दिया।

तुम दोनों की इच्छा हैं तो और कभी कर लेना, पर फिलहाल मेरा मूड बन गया हैं तो राहुल तुम सिर्फ मुझे ही चोदोगे। राहुल झुँझला कर सैंड्रा की तरफ बढ़ा।

सैंड्रा : “प्रतिमा तुम जाना मत। तुम अपने आशिक को मुझे चोदते हुए देखने के मजे लो या जलो तुम्हारी इच्छा।”
 
राहुल फिर मेरी तरफ मुड़ा और एक बार फिर अपने दोनों हाथ मेरी ब्रा की तरफ लाया। मुझे उस वक्त बहुत ख़ुशी हुई, सैंड्रा जैसी हसीना को छोड़ कर वो मेरी तरफ आकर्षित था ठीक जैक की तरह। पर इससे पहले कि वो मेरे ब्रा को हाथ भी लगा पाता सैंड्रा ने फिर रोक दिया।

तुम दोनों की इच्छा हैं तो और कभी कर लेना, पर फिलहाल मेरा मूड बन गया हैं तो राहुल तुम सिर्फ मुझे ही चोदोगे। राहुल झुँझला कर सैंड्रा की तरफ बढ़ा।

सैंड्रा : “प्रतिमा तुम जाना मत। तुम अपने आशिक को मुझे चोदते हुए देखने के मजे लो या जलो तुम्हारी इच्छा।”

राहुल ने सैंड्रा के करीब पहुंच गुस्से में उसके ब्रा और पैंटी को खिंच कर निकाला और उसे नंगा कर दिया। जोर से खींचने से सैंड्रा के मम्मे ऊपर नीचे जेली की तरह उछलने लगे। राहुल ने उसके मम्मो को काटा और खिंच कर छोड़ दिया।

मैंने अपने ब्रा को बांधते हुए देखा, सैंड्रा के गौरे मम्मे पर दाँतों के काटने से लाल रंग का घेरा बन गया था। मुझे लग गया आज वो अपनी मर्दानगी सैंड्रा को साबित करके रहेगा। उसने सैंड्रा के दूसरे मम्मे का भी यही हाल किया और सैंड्रा हल्का सा चीखने के अलावा कुछ न कर पायी।

मैंने शुक्र मनाया, एक तो मैं राहुल के कोप का शिकार नहीं बनूँगी वरना अशोक को क्या बोलती ये लव बाइट किसने दिया। दूसरा ये कि मुझे अब दो लोगो के साथ नहीं चुदवाना पड़ेगा। मैंने जल्दी से अपने बाकी के कपड़े भी पहन लिए।

राहुल अब सैंड्रा के मम्मो को बुरी तरह से अपने मुँह में भर भर के चूस रहा था और सैंड्रा आहें भरते हुए राहुल के लंड को अपने हाथो में पकड़े रगड़ रही था। वहां का माहौल बहुत गरम हो गया था।

राहुल से मुझे कोई प्यार तो था नहीं, तो मुझे कोई जलन नहीं हो रही थी। ये ख़ुशी जरूर थी कि मैं पहले बिना किसी सफलता के उसका ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास करती रहती थी और आज उसकी प्राथमिकता मैं थी।

जोसफ के मोटे लंड की तरह राहुल मजा तो नहीं दिला पाता मगर राहुल के गुस्से भरे जोश से वो कमी शायद पूरी हो सकती थी।

राहुल ने सैंड्रा के मम्मे छोड़े तो सैंड्रा ने नीचे बैठ कर राहुल का लंड अपने मुँह लिया और आगे का दो तीन इंच का हिस्सा अपने मुँह में अंदर बाहर कर रगड़ने लगी और पीछे के आधे हिस्से पर अपनी पतली उंगलियों से तेजी से आगे पीछे रगड़ने लगी।

सैंड्रा के इस आक्रमण से राहुल अब मुँह फाड़कर आहें भरने लगा। राहुल को पहली बार इस तरह चीखते देख मैं हिल गयी। मैं अपने आप पर काबू रख रही थी।

थोड़ी ही देर में लंड चूसने से सुड़प सुड़प की आवाजे आने लगी थी, शायद राहुल का पानी निकलना शुरू हो गया था, पर सैंड्रा थोड़ी देर और चूसती रही। जब उसने राहुल का लंड अपने मुंह से बाहर निकाला तो लंड पूरा चिकना हो चूका था और सैंड्रा के मुँह से राहुल के पानी की लारे छूटने लगी।

राहुल ने सैंड्रा को खड़े किया और मेरे एकदम नजदीक पड़े टेबल पर लेटा दिया और उसके पाँव टेबल के बाहर थे, जिन्हे राहुल ने अपने हाथों में पकड़ रखे थे।

उसने झुकते हुए अपना मुँह सैंड्रा की चूत पर रखा और उसकी चूत पर इस तरह मुँह मारने लगा जैसे मरे हुए जानवर पर पक्षी अपनी चोंच मार मांस नोचते हैं। वो जब भी अपना मुँह चूत से दूर हटाता तो सैंड्रा चीखती, क्यों कि वो मुँह उठाते वक्त उसकी चूत के होंठो का कोई हिस्सा अपने मुँह में भर कर बाहर खींच रहा था।

सैंड्रा बुरी तरह से सिसकिया मार तेज तेज आवाजे निकाल राहुल को और उकसा रही थी। चूत तो सैंड्रा की चूसी जा रही थी मगर महसूस मुझे भी हो रहा था।

राहुल अब खड़ा हो गया और सैंड्रा की चूत में अपना लंड घुसाने लगा। एक झटके में उसका लंड उसकी चूत में फिसल गया। ये सब जोसफ का किया कराया था, उसने ही सैंड्रा की चूत को बार बार चोद चोद कर पूरा खोल दिया था कि कोई दूसरा मर्द शायद उतने मजे नहीं ले पाए।

मगर मैंने देखा उसका लंड पूरा अंदर नहीं फिसला, तीन इंच जाने के बाद अपने आप रुक गया और राहुल को थोड़ा और जोर से धक्का मारना पड़ा।

राहुल का लंड इतना मोटा तो था कि जोसफ को थोड़ी बहुत टक्कर दे सकता था। मैं अपने बारे में सोचने लगी। कल जब जोसफ मुझे चोदेगा और मेरा छेद एक बार में ही बड़ा कर देगा तो ! मेरा पति अशोक तो फिर मेरे मजे ही नहीं ले पायेगा। अशोक का तो राहुल से थोड़ा पतला लंड हैं।

मेरी तो ज़िन्दगी भर की सेक्स लाइफ ख़राब हो जाएगी, क्यों कि मुझे भी मजा नहीं आएगा। शायद तब मुझे राहुल ही सहारा दे पायेगा, वैसे भी अब तो वो मुझे चोदने के लिए तैयार हो गया था। मेरे पास जरुरत पड़ने पर बैकअप प्लान था।
 
अपने बारे में सोचते सोचते मैं उन दोनों के बारे में भूल गयी जो वहा लगे पड़े थे। सैंड्रा अब दहाड़े मारते हुए चीख रही थी क्यों कि राहुल अब जानवरो की तरह उसे चोदते हुए उसको सबक सीखा रहा था। मेरा दिल दहल उठा उसका ये वहशी रूप देख कर। जोसफ का लंड जरूर जानवरो जैसा हैं पर उसने चुदाई इंसानो की तरह ही की थी।

शायद हर मर्द अपनी भड़ास औरतो की चूत पर ही निकालता हैं। ये राहुल क्या कभी मुझ पर भी इसी तरह जानवरो की तरह भड़ास निकालेगा। सैंड्रा को तो फिर भी जोसफ की आदत हैं वो सहन कर लेगी, पर मैं कैसे करुँगी। एक तरफ सैंड्रा की चीखें तो दूसरी राहुल के धक्को से ठाक ठाक की आवाजे तीव्र गति से ऊँची आवाजे। एक डरावना माहौल हो चूका था

मेरी चूत में किसी ने चींटिया छोड़ दी हो वैसा लगने लगा। ध्यान देने वाली बात थी सैंड्रा दर्द से चीख रही थी फिर भी राहुल को भड़काते हुए और जोर से करने को बोल रही थी। वो क्यों अपने पैरो पर पत्थर मार रही थी समझ नहीं आया, कुछ औरतो के अरमान बहुत ज्यादा ही जंगली होते हैं।

एक सामान्य आदमी इतनी देर में थक कर रुक जाता पर राहुल की गति में बिलकुल बदलाव नहीं आया। ऐ.सी. चालू होने के बावजूद राहुल के पसीना बहने लगा था। वो तो जैसे जिम में था और सैंड्रा कोई कसरत करने की मशीन थी। मैं अब राहुल की परफेक्ट शेप वाली गांड और जाँघे देख रही थी।

उसकी सारी मसल्स चोदने में लगी शक्ति से अकड़ कर फुल गयी थी। अब मेरी खुद की चुदने की इच्छा होने लगी थी, पिछली बार सैंड्रा को जोसफ के साथ करते देख मैंने अपने हाथों से अपना कर लिया था पर यहाँ तो मैं कही जा भी नहीं सकती थी सैंड्रा ने मना किया था।

थोडी देर इसी तरह चोदने के बाद राहुल ने सैंड्रा चोदना बंद कर उसी टेबल पर उल्टा लेटा दिया और उसके पाँव नीचे जमीन पर सीधे खड़े थे।

राहुल उसकी गांड के पीछे खड़ा हुआ और अपने एक हाथ से उसकी गांड को चौड़ा किया और दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़ कर उसकी चूत में गुसा दिया , लंड ज्यादा बिना परेशानी के बड़ी आसानी से अंदर चला गया था और राहुल ने अगले ही क्षण वापिस निकाल दिया।

उसको कुछ सुझा और उसने अपना लंड सैंड्रा की गांड के छेद में घुसाने की कोशिश की। मगर लंड की टोपी से ज्यादा अंदर जा ही नहीं पाया।

सैंड्रा एकदम चीखी और पीछे डालने से उसको मना किया । मुझे याद आया पीछे का छेद तो उसने जैक के लिए सुरक्षित रखा हुआ हैं ताकि किसी मोटे लंड से जैक वाला छेद चौड़ा ना हो जाये।

वैसे भी राहुल का लंड अभी गुस्से से फूलकर कुछ ज्यादा ही मोटा लग रहा था, सैंड्रा का छेद उसे सहन नहीं कर पायेगा। राहुल जबरदस्ती उसके गांड के छेद को भेदने की कोशिश कर रहा था और सैंड्रा अपना हाथ पीछे ले जाकर उसको रोक रही थी। राहुल ने सैंड्रा की पतली कलाइयों को पकड़ा और उसकी कमर पर रख अपने एक हाथ से दबोच लिया।

राहुल ने अब फिर अपना पूरा जोर लगा अपना लंड सैंड्रा की चूत में घुसाना शुरू किया और वो थोड़ा थोड़ा अंदर जाने लगा, मगर अब सैंड्रा के चीखे सबसे तेज थी, वो दर्द की चीखे थी ये पक्का था। मुझे उस पर दया आने लगी, राहुल को उस पर ऐसा जुल्म नहीं करना चाहिए था, भले ही उसने हमारे साथ कुछ भी किया हो।

सैंड्रा अपने जाल में खुद फंस चुकी थी और तड़प रही थी। दूसरी तरफ राहुल दो इंच से ज्यादा अपना लंड उसकी गाड में नहीं डाल पा रहा था। वो जितना जोर लगाता सैंड्रा उतना चीखती। राहुल से अब और अंदर नहीं डाल पा रहा था तो उसने मेरी तरफ देखा और मदद मांगी ।

राहुल:”प्रतिमा, तुम इस छिनल की गांड पकड़ कर चौड़ी करो मैं इसमें और अंदर डालता हूँ। ”

मैं सैंड्रा की हालत देख बिलकुल नहीं हिली, इस पर राहुल मुझ पर चिल्लाया।

राहुल: “करो ना, इसने हमारे साथ क्या किया नहीं पता क्या।”

मैं सहम कर पूरा हिल गयी। मैंने आगे बढ़ कर अपने दोनों हाथ सैंड्रा की गांड के दोनों हिस्सों पर रखे। उसकी गांड मेमोरी फोम की तरह नाजुक और मुलायम थी।

मैंने दबा के उसके गांड के दोनों हिस्सों को एक दूसरे से दूर कर उसकी दरार को चौड़ा किया। बड़ी आसानी से उसकी दरार खुल गयी और मैंने उसकी गांड का गुलाबी छेद देखा जो पूरी तरह से राहुल के मोटे लंड से भर कर फंसा हुआ था।

मैं जैसी ही दरार खोली तो राहुल का लंड खिसकता हुए थोड़ा और अंदर गया और साथ ही सैंड्रा जोर से चीखी।

राहुल ने मुझे और जोर लगा के गांड चौड़ी करने को कहा और मैंने मन मार कर अपना जोर लगाया और साथ ही साथ राहुल ने भी और एकदम से उसका लंड एक इंच एक साथ अंदर घुस गया और पीछे से सैंड्रा की दहाड़।

मैं ऐसे ही पकड़े खड़ी रही और अब राहुल थोड़ा बहुत आगे पीछे हो धक्के मारने लगा। उसका लंड अटक अटक कर सैंड्रा की गांड चोदने लगा। सैंड्रा अब लगभग रोते हुए चीख रही थी।

थोड़ देर में ही राहुल का लंड अब सैंड्रा की गांड को गीला कर चूका था तो ज्यादा आराम से आगे पीछे हो चोदने लगा। जिससे सैंड्रा की चीखे थोड़ी कम हो गयी और मैंने उसकी गांड को छोड़ दिया। राहुल अब भी जोर जोर से सैंड्रा की गांड पर चोट मार रहा था जिससे ठाप ठाप ठाप की आवाज आने लगी। राहुल इस बीच हिंदी में उसको गालियां देते हुए गुस्सा निकाल रहा था।

स्साली सफ़ेद चुड़ैल, बड़ा शौक था मुझसे चुदाने का अब ले। आज तेरी ऐसी गांड फाड़ूंगा कि दस दिन तक चुदाना तो दूर चल भी नहीं पाएगी।

राहुल के मुँह से पहली बार ऐसी भाषा सुन मैं शर्मिंदा हो गयी। उससे मुझे ये सब उम्मीद नहीं थी। शायद वो अपने साथ मेरा भी बदला सैंड्रा से निकाल रहा था।

सैंड्रा: “आअह्ह, क्या बोल रहा हैं दूसरी भाषा में, अहहह, गाली दे रहा हैं !”

राहुल: “नहीं, तुम्हारे फिगर की तारीफ़ कर रहा हूँ। ”

सैंड्रा : “प्रतिमा, अब तुम कल देखो, मैं तुम्हारी क्या हालत करवाती हूँ जोसफ से। राहुल की वजह से मैं दस दिन लंगड़ा के चलूंगी तो तुम जोसफ की वजह से एक महीना लंगड़ा के चलोगी। तुम्ही ने मेरी गांड पकड़ कर चौड़ी की थी ना।”

मैं अब थर थर कांपने लगी, मुझे तो उस पर दया आ रही थी, पर राहुल की वजह से मैं खुद अब फंस चुकी थी। कल तो जोसफ मेरी जान ही निकाल देगा। सैंड्रा ने कभी जोसफ का जानवर अपनी गांड में नहीं लिया, वो अब मेरी गांड में डलवायेगी ! इसके लिए तो दुनिया का कोई भी जैल लुब्रीकेंट नहीं बना हैं।

राहुल: “उसके साथ कुछ मत करना, उसको मैंने ही करने को बोला हैं। तुम वादा करो कल इसे ज्यादा परेशान नहीं करोगी तो मैं तुम्हे अभी छोड़ देता हूँ। तुम्हे लंगड़ा के नहीं चलना पड़ेगा। ”

सैंड्रा: “ठीक हैं छोडो मुझे। ”

राहुल ने उसे छोड़ दिया। सैंड्रा अब खड़ी हो गयी। उसका लुका पीटा चेहरा बता रहा था उसकी क्या हालत हुई थी। मैंने उसको भोली शकल बनाते हुए सॉरी कहा।

सैंड्रा : “कोई बात नहीं, इसमें तुम्हारी गलती नहीं। आओ राहुल ।”

ये कहते हुए उसने राहुल को सोफे पर बैठाया, और खुद उसकी गोद में दोनों तरफ पाँव चौड़े कर बैठ गयी। और उसका लंड अपनी चूत में घुसा दिया। सोफे का सहारा ले उसने ऊपर नीचे जोर जोर से उछलते हुए राहुल को चोदना शुरू कर दिया। ये नजारा दर्दनाक नहीं था पर प्यारा था। दोनों की मजे के मारे आहें निकलने लगी।

उनकी वो क्रिया और आवाजे सुन मेरे पुरे बदन में जैसे नशा चढ़ने लगा। मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था मेरी पैंटी काफी गीली हो चुकी थी। मैं बाथरूम में जाने लगी पर सैंड्रा ने देख रोक लिया।

सैंड्रा : “जब तक हमारा पूरा ना हो, तुम जा नहीं सकती। ”

मैं: “मुझे वाशरूम जाना हैं, अर्जेंट। ”

सैंड्रा : “मुझे पता हैं क्यों जाना हैं , शर्माओ मत , ये नेचुरल हैं। जो भी करना हैं यही कर लो। ”

उसकी बातें सुन मैं शरमा गयी। खड़ी हो तड़पती रही। उन लोगो ने चोदना जारी रखा।

आह्ह आह्ह ऊह्ह्ह ऊह्ह्ह उम्म आह्ह आह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह हम्म्म्म

राहुल के लंड पर फिसलती सैंड्रा की चूत का नजारा मैं देख देख कर अपने को रोक नहीं पा रही थी। राहुल से शर्म भी आ रही थी। मेरे सब्र का बांध अब टूटने लगा था।
 
राहुल के लंड पर फिसलती सैंड्रा की चूत का नजारा मैं देख देख कर अपने को रोक नहीं पा रही थी। राहुल से शर्म भी आ रही थी। मेरे सब्र का बांध अब टूटने लगा था।

मैं राहुल के पीछे की तरफ साइड में जाकर खड़ी हो गयी। सैंड्रा मुझे देख सकती थी पर राहुल नहीं। मैंने एक हाथ अपने मम्मे पर रख मसलना शुरू किया और दूसरा अपनी कैप्री पैंट के ऊपर से ही अपनी चूत पर रख हल्का रगड़ना शुरू किया।

सैंड्रा : “प्रतिमा, कपड़े खोल के कर लो, किसी को बुरा नहीं लगेगा। ”

उसके बोलने की ही देर थी और मैंने अपने नीचे वाले हाथ से अपनी पैंट को एक झटके में पैंटी सहित नीचे कर दिया।

सैंड्रा मेरी तरफ देख बोली: “क्या मस्त चूत हैं तुम्हारी।”

ये सुनते ही राहुल ने गर्दन मोड़ी और मेरी तरफ देखने लगा। वो मेरी चूत देख पाता उसके पहले ही मैंने अपना हाथ अपनी चूत पर रख छूपा लिया। फिर भी उसको मेरी चूत के साइड का नंगा एरिया और कूल्हों की हड्डी दिख गयी थी। मेरी नीचे की शेप का उसे अंदाजा हो गया था। वो मुझे ही घूर रहा था और मैंने शर्म के मारे अपना दूसरा हाथ भी नीचे ला ढक दिया।

मेरी तो जैसी सारी इच्छा ही मर गयी थी। मैंने सावधानी से एक हाथ से चूत ढकते हुए दूसरे से अपनी पैंट फिर ऊपर खिंच पहन ली। सैंड्रा और राहुल की आहें लगातार जारी थी और साथ ही मेरी चूत में चूल मच रही थी। मैं वापिस आकर सैंड्रा के पीछे आकर बैठ गयी।

मैंने देखा सैंड्रा की चूत से जैसे दुध की नदिया बह रही थी और सफ़ेद धाराएं राहुल के लंड को पूरा लपेट चुकी थी। यहाँ से राहुल सैंड्रा के पीछे छुपा था और सैंड्रा की पीठ मेरी तरफ थी। मैं सोफे पर पीछे खिसक कर पीठ टिकाये बैठ गयी। पैंट थोड़ी नीचे खिसका कर अपनी पैंटी में हाथ डाल रगड़ने लगी।

मेरे नीचे का माहौल पूरा बरसाती था। पैंटी नीचे पूरी गीली हो चुकी थी। मैं रगड़ रगड़ कर अपना काम पूरा करने लगी। उधर वो दोनों जोर जोर से चिखने लगे। शायद झड़ने वाले थे। अब भर भर के पानी सैंड्रा की चूत से निकल रहा था और राहुल की आहें भारी हो गयी थी उसने अपना पानी लगभग खाली कर दिया था। पर मेरा अभी नहीं हुआ था।

दोनों चीखते हुए झड़ कर शांत हो गए। मैं अभी भी अपनी चूत रगड़े जा रही थी। मेरे कुछ ही सेकंड बाकी थे। परन्तु सैंड्रा अब राहुल के ऊपर से उठने लगी।

मैंने जल्दी से उठ कर अपने कपड़े ऊपर कर लिए और उन दोनों ने शायद हलकी सी झलक देख ली थी कि मैंने अभी अभी बंद किया हैं। मैं वही खड़ी हो गयी। सैंड्रा ऐसे ही नंगी मेरे पास चलते हुए आयी और अपना हाथ हलके हलके से मेरी चूत पर रगड़ने लगी।

मैं तो झड़ने के एकदम मुहाने पर खड़ी थी तो उसके हाथ से होती रगड़ से मेरे अंदर कम्पन होने लगा और मैं खड़े खड़े ही आहें भरने लगी और सैंड्रा हंसने लगी। उसने मुश्किल से दस बार अपना हाथ मेरी कैप्री पैंट के ऊपर से ही मेरी चूत पर रगड़ा और मैं खड़े खड़े ही चीखते हुई झड़ गयी।

सामने से राहुल हम दोनों को देख रहा था, और मैं शर्म से जमीन में गड़ी जा रही थी। सैंड्रा मुझ पर खिलखिलाते हुए आगे बढ़ी और फ़ोन से उसने अपने ड्राइवर को बुला लिया लेने आने के लिए।

सैंड्रा: “राहुल वाशरूम किधर हैं?”

राहुल: “चलो मैं बताता हूँ, प्रतिमा तुम्हे भी जाना हैं वाशरूम।”

मैंने ना में सर हिला दिया।

सैंड्रा : “वो तो पहले ही कपड़ो सहित नहा चुकी हैं अपने ही पानी से । मैंने बोला था कपड़े निकाल कर कर ले। ”

राहुल और सैंड्रा ने अपने कपड़े उठाये, वाशरूम में गए और थोड़ी देर बाद कपड़े पहने हुए आये। मैं तब तक वही खड़ी थी। मेरे कपड़े नीचे से गीले थे और थोड़ा असहज महसूस हो रहा था। मेरा कुर्ता बिलकुल ठीक था। इस लक्की कुर्ते ने मेरी इज्जत बचा ली थी ।

सैंड्रा का ड्राइवर आ गया था वो वो जाने लगी।

सैंड्रा : “थैंक यू राहुल, इस मजेदार चुदाई के लिए। प्रतिमा कल ठीक ग्यारह बजे गेस्ट हाउस पहुंच जाना। आज तो तुम्हे कुछ नहीं मिला, कल बहुत कुछ मिलेगा। बाय ”

सैंड्रा चली गयी और मैं उसको ताकते रह गयी। शाम हो चुकी थी और ऑफिस बंद होने वाला था और अब वापिस ऑफिस नहीं जा सकते थे। सीधा घर ही जाना था पर फार्म हाउस काफी बाहरी इलाके में था तो रिक्शा कैब मिलना मुश्किल था। मैंने राहुल की तरफ देख फिर नीचे देखने लगी।

राहुल : “मेरे पास यहाँ रूही की एक दो ड्रेस पड़ी हैं। तुम वो पहन सकती हो। ”

वो अंदर गया और हाथ में रूही की एक फ्रॉक वाली ड्रेस लेकर आया। मैं वो ड्रेस लेकर बाथरूम में गयी, मेरा कुर्ता हालाँकि ख़राब नहीं था पर फ्रॉक के साथ कुर्ता पहन नहीं सकती थी तो खोल दिया।

कैप्री पैंट और पैंटी गीली थी तो उसको खोल अपना शरीर नीचे से साफ़ किया। फिर सीधा फ्रॉक पहन ली। अंदर पैंटी नहीं पहने होने से थोड़ा खाली खाली लग रहा था पर कोई उपाय नहीं था।
 
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