• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
मै भी उसको निराश नहीं करना चाहती थी इसलिए दर्द होने के बावजूद मै उसको चोदने के लिए उकसाती थी। मै अपना दर्द छिपा कर उसके चेहरे पर आती ख़ुशी देख खुश होती।

अब आप इसे कूदरत का चमत्कार कहेंगे या कुछ और, जहा डॉक्टर ने मुझे बोल दिया था कि मै अब कभी माँ नहीं बन सकती थी, पर जोसफ के उस घोड़े जैसे लंड ने वो चमत्कार कर दिया था। हालांकि जोसफ इसे वहां के डॉक्टरो का चमत्कार मानता हैं।

शादी के 3 महीने बाद ही मै गर्भवती हो चुकी थी। मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। मेरी हमेशा ख्वाहिश थी कि मै अपने पति के बच्चे की माँ बनु और वो होने वाला था।

शायद मेरी किस्मत में यहीं लिखा था कि एक दिन में अपने पति के बच्चे की माँ बनु और वो पति जोसफ ही होगा। 9 महीने बाद मैंने एक बच्चे को जन्म दिया। वो गौरे काले का मिश्रण था। उसके घुंघराले बाल, भूरी आंखे और चपटी नाक, पुरी तरह जोसफ पर गया था।

जोसफ की माँ का मुझ पर पूरा भरोसा था और उस भरोसे की लाज ऊपर वाले ने रखी थी। जहा भरोसा होता हैं वहीं सफलता होती हैं।

रूबी के साथ में टच में रही. रूबी कहती रहती कि मै भी उसके लिए जोसफ की तरह कोई काला आदमी पसंद कर लु और उसकी भी शादी करवा लु।

जब मेरा बच्चा 3 महीने का हो गया तो मै उसे लेकर भारत आयी ताकि उसको अपने घर वालो से भी मिलवा सकू. सब लोग बहुत खुश हुए कि मै अब खुश हूँ.

काफी दिनों बाद रूबी से फेस तो फेस मिली. मै उसके घर ही रुक गयी क्युँ अब मेरा उस शहर में कोई घर तो था नहीं। उसको मैंने अपने छोटे बच्चे से भी मिलवाया।

रूबी: “यार, तुम्हारी जवानी तो और भी खिल गयी हैं। बिना मेकअप के गाल कैसे चमक रहे हैं। अगर मोटे लंड से चुदवाने से ऐसे शरीर दमकता हैं तो मुझे भी दिलवा दे कभी”

मैं: “शरीर खुशियों से दमकता हैं। तू भी शादी करके खुश हो जा”

रूबी: “यह बता जब जोसफ इतना भारी भरकम हैं तो उसकी पिचकारी कितनी बड़ी होगी और उसमे कितना पानी भरा होगा जो तुम्हारी चूत में खाली करता होगा?”

मैं: “पूछ मत, हालत खराब हो जाती हैं। उसको तो मै अपने ऊपर कम ही आने देती हूँ। अधिकतर मै ही उस पर चढ़ कर चोदती हूँ तो कण्ट्रोल रहता हैं। हालांकि वो मेरा ध्यान रखता हैं क्युँ कि उसे भी पता हैं कि मुझे दर्द होगा”

रूबी: “तेरी बातें सुनकर मेरी भी इच्छा हो रही हैं कि एक बार इतने बड़ा लंड जरूर लु। जोसफ को बोलकर एक बार मुझे भी दिलवा दे उसका लंड।”

मैं: “मेरे पति का लंड सिर्फ मेरा हैं, मै उसे किसी के साथ शेयर नहीं कर सकती।”

रूबी: “उसके लंड से जड़ने पर कितना पानी निकालता होगा! डॉक्टर ने तो तुम्हे बोल दिया था कि अब कभी माँ नहीं बन सकती पर उसके लंड से निकले ढेर सारे पानी ने तुम्हे माँ बना ही डाला”

मैं: “शादी के बाद शुरु के 2 सप्ताह तक तो ना मैंने उसको बोला और ना उसने मुझे चोदने की कोशिश की। मै उसके लंड को हाथ और मुंह से रगड़ कर ही उसका पानी निकालती थी। इतना पानी निकलता था कि मेरा पूरा चेहरा ही भीग जाता उसके पानी से ”

रूबी: “उसने तुम्हारे चेहरे पर लंड का पानी डाला?”

मैं: “मैने तो उसको अपनी चूत पर या मम्मो पर पानी छोड़ने को बोला था पर उसको मेरे मुंह पर पानी डालना अच्छा लगता हैं।”

रूबी: “तो फिर चुदाई कब शुरु की तुमने?”

मैं: “उसको तड़पता देखकर एक दिन मैंने ही बोल दिया कि चुदाई शुरु करते हैं, ऐसे डर कर कब तक रहेंगे। फिर हमने चुदाई शुरु कर दी। शुरु शुरु में दर्द होता हैं पर थोड़ी देर बाद चूत एडजस्ट हो जाती हैं और मजा ज्यादा आता हैं।”

रूबी: “अब तो तुम्हे छोटे लंड से चुदने में मजा ही नहीं आएगा!”

मैं: “लंड की साइज से कुछ नहीं होता हैं। अंदर डाल कर हिलाने का तरीका ज्यादा जरुरी होता हैं।”

रूबी: ” अब तो तुम उसे चोदने देती हो और बच्चा भी पैदा कर दिया, जोसफ सेक्सुअल लाईफ से खुश तो हैं?”

मैं: “उसकी एक ही इच्छा बाकी रह गयी हैं, उसने आज तक कभी किसी लड़की की गांड नहीं मारी हैं। उसका इतना मोटा लंबा लंड कोई कैसे अपनी गांड में ले सकता हैं, गांड फट ना जाए!”

रूबी: “मेरे पास भेज दे, मै अपनी गांड फड़वाने को तैयार हूँ उसके मोटे लंड से ”
 
मैं: “चल मजाक बंद कर। मै सोच रही थी कि राहुल से भी मिल लु एक बार। उसकी शादी शुदा लाईफ कैसी चल रही हैं पता करती हूँ।”

रूबी: “तुम्हारा प्यार जो ठहरा राहुल। मिल आ राहुल से भी। अब तो तुम उसके बच्चे की माँ भी बन सकती हो, तुम्हारी परेशानी हल हो गयी हैं”

मैं: “मेरी शादी हो चुकी हैं और उसकी भी किसी से हुयी होगी। अब मै उसके बच्चे की माँ क्युँ बनुंगी भला!”

रूबी: “शादी तुमने भले ही जोसफ से की हो पर मुझे पता हैं प्यार तो तुम अभी भी राहुल से ही करती हो”

मैं: “क्या फर्क पड़ता हैं, वो मेरी किस्मत में नहीं लिखा था”

रूबी: “मै तो कहती हूँ तुम एक बार कोशिश कर लो, उसके बच्चे की माँ बनोगी तो तुम्हे ज़िन्दगी भर के लिए प्यार का तोहफा मिलेगा”

मैं: “नहीं, मै जोसफ को धोखा नहीं दे सकती। मै सिर्फ राहुल को एक बार मिलुंगी बस, और उसको उसकी शादी की मूबारकबाद दूंगी”

रूबी: “ठीक हैं, मै तुम्हारे बच्चो का ख्याल रखने के लिए घर पर ही रुक जाउंगी, तुम राहुल से मिल आना”

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

जोसफ से शादी के बाद मैं उसके बच्चे की माँ बन चुकी थी और मेरी खुशिया लौट आयी थी। अब मैं राहुल से मिलकर उसकी खुशहाल ज़िंदगी का भी जायजा लेना चाहती थी ।

पहली बार इतने लंबे अंतराल के बाद राहुल से मिलने जा रही थी। जिस तरह हम अलग हुए थे और उसने मुझे जिस हालत में गैर मर्द के साथ पकड़ा था, उसके बाद पता नहीं वो मुझसे मिलना पसंद भी करेगा या नहीं। ख़ास तौर से क्युकी अब उसकी शादी हो चुकी थी तो शायद मुझे पहले की तरह ना मिले। फिर भी मुझे अपने मन की शान्ति के लिए उस से मिलना था।

हालांकि मै उसको रिझाने नहीं जा रही थी पर फिर भी मैंने उसके पसंद के कलर की साड़ी पहनी. उसको मेरे पीठ से ज्यादा खुले ब्लाउज पसंद हैं तो मै वैसे ही ब्लाउज रखती रही हूँ.

मैने चमकीले बोर्डर वाली काली साड़ी और उस के साथ सिल्वर कलर का स्लीवलैस ब्लाउज पहना, जिसमे से मेरी पीठ लगभग नंगी दिख रही थी।

पेटीकोट भी मैंने उसकी पसंद के हिसाब से नाभी के 3-4 इंच नीचे बाँधा, पर फिर सोचा यह ज्यादा हो जायेगा तो 2 इंच नीचे बांध दिया। मेरा आधा पतला गौरा पेट फिर भी काफी अच्छे से दिखता हुआ लूभा रहा था।

मै जिसकी तरह बन संवर कर तैयार हो रही थी मुझे लग नहीं रहा था कि मै शादी शुदा होकर भी उस पुराने प्रेमी से मिलने जा रही थी जिस से मैंने किस तरह संबंध तोड़े थे.

जो भी हो, मैंने प्यार तो सिर्फ उसी से किया था तो मै अच्छे से अपने आप को उसके सामने प्रस्तुत करना चाहती थी। हम दोनो वैसे ही अपनी अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ चुके हैं तो शायद वो मुझे माफ़ कर दे।

रूबी: “जैसे तूम तैयार हुयी हो, राहुल से सिर्फ मिलने जा रही हो या और भी कुछ गंदा काम करने का इरादा हैं?”

मैं: “नहीं, सिर्फ मिलने जा रही हूँ। मैं कुछ ज्यादा बन संवर गयी क्या, कम करु कुछ?”

रूबी: “हां, एक काम करो, पेटीकोट 1-2 इंच थोड़ा और नीचे बांधो, ताकि तुम्हारी सेक्सी कमर अच्छे से दिखे तो सही। और यह ब्लाउज थोड़ा और खुले गले का होता और क्लीवेज दिखता तो मजा आता”

मैं:”वैसे ही बच्चा होने के बाद मेरे मम्मे और ज्यादा भर कर फुल गए हैं, मेरे ब्लाउज में ढंग से आ भी नहीं रहे हैं, अगर साड़ी ना हो तो देखो कितने बाहर झाँक रहे हैं!”

रूबी: “राहुल के सामने आते ही अपना पल्लू गिरा देना, बेचारा बेहोश हो जायेगा तुम्हारा क्लीवेज देख कर”

मैं: “वो अपनी बीवी का क्लीवेज देखता होगा, अब मेरे क्युँ देखेगा ! चल मै चलती हूँ, मेरे बच्चो का ख्याल रखना, मै जल्दी आ जाउंगी”

रूबी: “चिंता मत कर, आराम से चुदवा कर आएगी तो भी कोई बात नहीं”

मै सीधा ऑफिस पहुंच गयी राहुल से मिलने. वहां का अधिकतर स्टाफ पुराना ही था तो हम मिलकर खुश थे। फिर मैं राहुल के केबिन के बाहर दस्तक देने के बाद उसके बुलाने पर अंदर गयी।
 
दरवाजा खोलते ही देखा राहुल अपनी सीट पर बैठा अपने काम में व्यस्त था। उसके केबिन को देख फिर पुरानी यादें ताजा हो गयी। इसी केबिन में पता नहीं कितनी बार हम दोनो के बीच चुदाई हुयी थी।

मैने राहुल को आवाज लगायी और मेरी आवाज सुनते ही वो पहचान गया और एक झटके में अपना सिर उठा कर मुझे देखा और देखता ही रह गया।

प्यार ऐसी चीज हैं जो कभी खत्म नहीं होती। वो तुरंत अपनी सीट से उठ गया और हम दोनो एक दूसरे की तरफ चलते हुए पास आ गए। हम दोनो के चेहरे पर एक चौड़ी स्माईल थी।

पास में आकर इधर मैंने अपना हाथ आगे बढाया ताकि हाथ मिला पाऊ और ऊधर उसने अपनी दोनो बाहें आगे कर दी मुझे गले लगाने के लिए।

मुझे हाथ मिलाते देख उसने अपनी बाहें नीचे कर दी और अपना हाथ मिलाने को आगे बढाया और उसी वक्त मैंने अपनी दोनो बाहें फैला दी उसको गले लगाने को।

हम दोनो का मिसकोर्डिनेशन देखने के बाद हम दोनो ही हस पड़े और फिर एक दूसरे के गले लग गए। इतने समय बाद उसके गले लग मेरे दिल को एक ठंडक पहुंची। वो मुझसे नाराज नहीं था यह जान ख़ुशी भी थी।

उसने मुझे इतना टाइट हग कर लिया था कि मेरे मम्मे जितने दब सकते थे उतना दब गए और उसके हाथों ने मेरी नंगी पीठ से छू कर मुझे हल्का सा करंट दिया।

सच ही हैं, असली सुकून तो अपने प्यार की बाहों में ही होता हैं। हमें कुछ सेकण्ड लगे यह अहसास करने में कि हम दोनो ही किसी और से शादी शुदा हैं और हम एक दूजे की बाहों से अलग हुए।

राहुल: “इतने समय बाद तुम्हे देखकर बहुत अच्छा लगा। तुम तो और भी खुबसूरत होती जा रही हो !”

मैं: “थैंक यू, तुम भी वैसे के वैसे ही हो, एकदम हैंडसम”

राहुल: “बॉब ने मुझको बताया था कि तुमने जोसफ से शादी कर ली हैं और बधाई हो अब तो तुम्हे बच्चा भी हो गया जो मै तुम्हे नहीं दे पाया”

मैं: “सब किस्मत का खेल हैं”

राहुल: “तुम चाहती तो हम दोनो एक हो सकते थे”

मैं: “वो सब बातें छोड़ो. अपनी बीवी से नहीं मिलवाओगे ?”

राहुल: “मेरी टेबल पर जो काम पड़ा हैं, वो ही मेरी बीवी हैं”

मैं: “मजाक मत करो, तुमने जो सगाई का निमंत्रण भेजा था वो लड़की, शादी तो कर ही ली होगी तुमने अब तक!”

राहुल: “तुम एक अंजान आदमी के साथ अपनी इज्जत गवाने का नाटक कर सकती हो तो मै क्या एक झूठी सगाई का नाटक नहीं कर सकता?”

मैं: “यह क्या बोल रहे हो तुम?”

राहुल: “मै तुमसे दूर हो जाऊ और तुम्हे भूल जाऊ इसके लिए तुम हर किसी के साथ किस करने और यहाँ तक कि चुदवाने से भी नहीं कतराई! मै नहीं चाहता था कि तुम मेरी वजह से यह गंदे काम और कर अपनी इज्जत दांव पर लगाओ, इसलिए मैंने तुमसे नाराज होने का नाटक किया और वो झूठी सगाई का नाटक”

मैं: “तो फिर मेरा त्याग तुम व्यर्थ जाने दोगे? तुम किसी लड़की से शादी क्युँ नहीं कर लेते?”

राहुल: “प्यार या तो रूही से किया या फिर तुम से। तुम दोनों ही मुझे छोड़ गए। शादी करता तो तुम्ही से करता। तुम्हारे तलाक के बाद थोड़ी उम्मीद जागी थी पर तुमने वो भी तोड़ी। पर अच्छा हुआ, मुझसे दूर होकर तुम माँ तो बन पायी ”

मैं: “तुम सोच नहीं सकते मुझे कितना बुरा लग रहा हैं। मैने शादी कर घर बसा लिया और तुम मेरे लिए ऐसे ही रह गए। अब क्या करना हैं तुम्हे?”

राहुल: “मै अब भी तुमसे शादी करने को तैयार हूँ। फिर से इंतजार कर लूंगा, अगर तुम कभी भी जोसफ से तलाक लो तो मेरे दरवाजे हमेशा खुले हैं”

मैं: “मैने सिर्फ तुमसे प्यार किया हैं, और मुझे तुमसे ज्यादा प्यार करने वाला कभी मिल भी नहीं सकता। मगर मै शादीशुदा हूँ और बच्चे की माँ भी बन गयी हूँ। अब मै तुम्हारी नहीं हो सकती”

राहुल: “पहले भी तो तुम अशोक की बीवी थी और एक बच्चे की माँ, फिर भी हमारा एक होने का समय आया था”

मैं: “अशोक से तो मै वैसे ही परेशान थी, पर जोसफ बहुत अच्छा इंसान हैं। तुम मेरा इंतजार बंद कर दो, इसके बदले तुम जो चाहोगे मै तुम्हे दूंगी”

राहुल: “पक्का?”

मैं: “तुमसे प्यार किया हैं, तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ”

राहुल: “मै चाहता हूँ कि तुम मेरें बच्चे की माँ बनो। अब तो तुम्हारी मेडीकल परेशानी दूर हो गयी हैं। वो बच्चा मै पालुंगा, हमारे प्यार की निशानी।”

मैं: “यह क्या कह रहे हो राहुल? मै अशोक को धोखा दे सकती थी पर जोसफ को धोखा नहीं दे सकती। यह गलत हैं, तुम कुछ और मांग लो।”

राहुल: “मुझे तुमसे बस यहीं चाहिये। या तो मुझसे शादी कर लो नहीं तो मुझे मेरा बच्चा पैदा करके दो। अगर नहीं दे सकती तो कोई बात नहीं, मै वैसे भी जी रहा हूं तुम्हारी याद में, जी लूंगा”

मैं: “प्लीज मुझे ऐसे मत फंसाओ”

मेरे तो हाथ पैर यह सोच सोच कर ही कांप रहे कि मै राहुल के साथ अब कैसे चुदवा सकती हूँ और कैसे उसके बच्चे की माँ बन सकती हूँ, यह गलत होगा।

राहुल ने मेरी दोनो हथेलियां पकड़ ली, मेरे हाथ अभी भी कांप रहे थे। फिर उसने एक हाथ से मेरी साड़ी का पल्लू मेरे कंधे से गिराना चाहा और उसके लिए वो कंधे पर लगी पिन खोलने लगा।

मैं: “नहीं राहुल, मै तुम्हे मना नहीं कर पाउंगी पर यह गलत हैं”

राहुल: “अगर यह गलत हैं तो मुझे रोक लो मै उसी वक्त रुक जाऊंगा”

उसने मेरा पल्लू गिरा दिया और मै ऊपर से सिर्फ स्लीवलैस ब्लाउज में खड़ी थी। मेरी तेज तेज साँसों के साथ ही माँ बनने के बाद मेरे और भारी हो चुके मम्मे ऊपर नीचे तेजी से हिलने लगे।

राहुल: “मै अपनी सेक्रटरी को बोल देता हूँ कि वो किसी को केबिन में ना आने दे और हमें डिस्टर्ब ना करें। इस बीच तुम चाहो तो अपना पल्लू फिर ढक कर अपनी ना बता सकती हो”

राहुल अपनी डेस्क पर लगे फ़ोन से फ़ोन करने लगा और मै ऐसे ही पल्लू नीचे गिराए खड़ी रही और तेज तेज साँसों के साथ अपने ब्लाउज के नीचे बंधे अपने मम्मो का प्रदर्शन करती रही। राहुल का त्याग देख कर उसको मना करने की इच्छा नहीं हो रही थी।

राहुल फ़ोन रखकर फिर मेरे पास आया। उसने अपने होंठ आगे लाकर मेरे ऊपर के पतले होंठ को अपने होंठो में हल्के से भर लिया और खिंच कर छोड़ दिया।
 
फिर उसने मेरे नीचे के होंठ के साथ भी यहीं किया। फिर हम दोनो एक दूसरे के होंठो को चूसने में मगन हो गए और 2-3 मिनट तक ऐसे ही चूमते रहे।

उसके बाद राहुल मेरे पीछे आया और और मेरे ब्लाउज का हूक खोल कर उसको ढीला कर दिया। फिर वो आगे आया और मेरा ब्लाऊज मेरे कंधे और बाहों से निकाल कर मुझे ब्रा में ले आया।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मै क्या करु। मै शादीशुदा होकर अपने पुराने आशिक़ के सामने आधी नंगी खड़ी थी और वो मुझे चोदने वाला था। जोसफ का ख्याल कर मुझे बहुत बुरा लग रहा था।

मै अब कोई एक्स्ट्रा मैरीटल अफैयर में नहीं पड़ना चाहती थी, पर मै राहुल को मना नहीं बोल पा रही थी क्युँ कि वो मेरा आज भी इंतजार कर रहा था।

उसने अब मेरे पेटीकोट से साड़ी निकालनी शुरु कर दी। मेरे चारो और घुमते हुए उसने मेरी साड़ी को निकाल कर नीचे गिरा दिया। फिर मेरे पेटीकोट पर हाथ रख उसको बांधे डोरी की गांठ भी खोल कर मेरा पेटीकोट निकाल दिया।

मै जब यहाँ राहुल से मिलने आयी थी तब सोचा नहीं था कि मै उसके सामने इस तरह अंदर के कपड़ो में खड़ी होउंगी। मै जो गुनाह करने जा रही थी उसके डर के मारे मेरे हाथ पैर अभी भी कांप रहे थे।

राहुल की उंगलिया अब मेरे नंगे पेट, कमर, जांघो, सीने और पीठ पर फिरते हुए मुझे नशा दिला रही थी। अब वो मेरे पिछे खड़ा था और मेरे ब्रा का हूक खोलने लगा।

ब्रा ढीला होकर मेरे मम्मो से थोड़ा खिसका और फिर उसने ब्रा को भी मेरे शरीर से अलग कर मुझे टॉपलैस कर दिया। उसके हाथ जल्दी ही मेरे नंगे मम्मो पर थे और प्यार से हाथ फेर रहा था। पिछली बार जब उसने मेरे मम्मो को छुआ तो तब से अब तक मेरे मम्मे और भी बड़े हो चुके थे और उनमे दूध भी भरा था।

उसने अपने दोनो हाथ मेरी नंगी पतली कमर पर रखे और अपना मुंह मेरे निप्पल पर लगा दिया और चूसने लगा। मेरे मम्मो में अभी थोड़ा दूध था तो थोड़ा उसने भी पी लिया।

थोड़ा दूध दोनो मम्मो से पीने के बाद उसने मुझे अपनी गोद में उठाया और सोफे पर लेटा दिया। वो मेरी टांगो की तरफ बैठा था।

उसने हाथ आगे बढा कर मेरी पैंटी नीचे उतारना शुरु कर दिया। पैंटी निकालने के बाद उसने मेरी चूत को छुआ और मै झटके साथ पूरा हिल गयी। मुझे रह रह कर झटके लग रहे थे।

उसने अपनी ऊँगली मेरी चूत पर रगड़ना शुरु किया और मेरी आहें निकलने लगी और मै आंखे बंद किए सिसकियाँ मारने लगी।

फिर वो उठा और अपने कपड़े भी खोलने लगा। कपड़े खोलते हुए मुझे राहुल में जोसफ दिखाई दिया। वो भी इसी तरह कपड़े खोल कर मुझे चोदता हैं। पर फिर जोसफ की याद आने के साथ ही अहसास हुआ कि मैं जो करने जा रही हूँ वो गलत हैं।

मैं: “मै तुम्हे नहीं रोक रही राहुल, पर तुम अगर मुझे चोदोगे तो यह जबरदस्ती चोदने जैसा होगा”

राहुल अपने कपड़े उतारते हुए मेरी बात सुनकर रुक गया।

राहुल: “तुम मेरे बच्चे की माँ बनोगी पर अब मै तुम्हे तब तक नहीं चोदुगा जब तक कि तुम खुद मेरे ऊपर आकर मुझे नहीं चोद देती। तुम्हे जितना समय चाहिये सोच लो, मुझे तुम्हारा हां या ना दोनो मंजूर हैं पर कोई जबरदस्ती नहीं करनी”

यह कहते हुए उसने अपने कपड़े वापिस पहनना शुरु कर दिया। मै सोफे पर ऐसे ही नंगी लेटी थी। फिर उसको कपड़े पहनते देख मै उठी और अपने कपड़े उठा कर फिर पहनना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद मै कपड़े पहन तैयार हो गयी और वो मुझे ऐसे ही खड़े खड़े देखता रहा।

राहुल: “कल छूट्टी हैं, मै तुम्हारा फार्म हाऊस पर इंतजार करूँगा। तुम मेरे ऊपर आकर मुझे चोदोगी तो मै समझ जाऊंगा कि तुम मेरे बच्चे की माँ बनने को तैयार हो”

एक तरफ पति के प्रति मेरी वफ़ादारी तो दूसरी तरफ मेरे प्यार में तड़पता राहुल। मेरे सामने दुविधा थी कि मैं क्या करू।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
जोसफ से शादी और फिर बच्चा पैदा करने के बाद मैं पहली बार राहुल से मिलने उसके ऑफिस गयी। राहुल मुझे जबरदस्ती नहीं चोदना चाहता था पर अब वो चाहता था कि मैं खुद उसको चोद कर उसके बच्चे की माँ बन उसको होने वाला बच्चा सौंप दू।

मै बिना कुछ बोले ऑफिस से चली गयी। एक गुनाह करने से मै बाल बाल बच गयी थी । पर मुझे राहुल को बहुत पहले ही रोक देना चाहिये था। उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया और मै खड़े खड़े कुछ नहीं कर पायी।

मै रूबी से मिली और उसको सब कुछ बताया.

रूबी: “तू जोसफ के साथ रहना चाहती हैं तो कोई बात नहीं, कम से कम राहुल को अपने प्यार की निशानी तो दे ही सकती हैं। जोसफ से बात करले, मुश्किल हैं पर शायद वो मान जाऐ।”

मैं: “कोई पति भला अपनी बीवी को किसी और के बच्चे की माँ क्युँ बनने देगा। अगर वो मेरी खातिर मान भी जाऐ तो भी हैं तो यह गलत ही”

रूबी: “तुझे दोनो में से किसी ना किसी का तो दिल तोड़ना ही हैं। राहुल का दिल तुमने कई बार तोड़ा हैं, एक बार और तोड़ दे फिर”

मैं: “मुझे किसी का भी दिल नहीं तोड़ना हैं। राहुल पहले ही प्यार में तड़प रहा हैं। पर इसमें जोसफ का क्या दोष हैं, बेवजह उस से मैं बेवफाई क्युँ करु?”

रूबी: “पूरी रात आराम से सोच ले। जिसको तू ज्यादा प्यार करती हैं, उसका दिल मत तोड़ना”

मैं: “प्यार तो मैने राहुल से ही किया हैं”

रूबी: “तो बस हो गया फैसला”

मैं: “तो फिर जोसफ को क्या बोलूंगी, कि यह बच्चा राहुल का हैं और उसको गिफ्ट करना हैं!”

रूबी: “जोसफ को क्या बोलना हैं बाद में सोच लेंगे, उसके लिए कुछ महीने बाकी हैं”

मैं: “पक्का? मै कुछ गलत तो नहीं करने जा रही हूँ? तू मेरी जगह होती तो क्या करती ?”

रूबी: “मै तेरी जगह होती तो आंख बंद कर इतने प्यार करने वाले से शादी कर लेती और जोसफ को छोड़ देती. उसको तो वैसे भी उसके प्यार की निशानी उसका बच्चा मिल ही गया हैं तूझ से ”

मैं: “नहीं, जोसफ ने कुछ गलत नहीं किया हैं, मै उसके साथ ही रहुंगी, पर अपने प्यार की खातिर मै राहुल के बच्चे की माँ बनुंगी। बाद में मै जोसफ को समझाने की कोशिश करुंगी। वो नाराज होगा तो मै उसकी नाराजगी सहन कर लुंगी”

रात को रह रह कर मेरी नींद टूट रही थी। अंदर से आवाज आ रही थी कि मै गलत करने जा रही हूँ। फिर अंदर सेएक आवाज आती कि मै सही कर रही हूँ। सुबह उठने पर मै क्लीयर थी कि मुझे राहुल के पास जाना था।

मैं: “रूबी बता क्या पहनु?”

रूबी: “कुछ भी पहन ले, वहां जाकर तो नंगा ही होना हैं”

मैं: “राहुल को मुझे साड़ी में देखना बहुत पसंद हैं पर वहां साड़ी पहनने और बंद करने में बहुत समय लग जाऐगा, मै कोई ड्रेस ही पहन लेती हूँ”

रूबी: “हां, ड्रेस एक झटके में खोलते ही उस पर कुद जाना और चुदवा लेना. शर्माना मत और अच्छे से चुदवाना, माँ जो बनना हैं”

मैं: “पहले मुझे ही उसे चोदना होगा, उसने बोला हैं कि मै ही पहल करुंगी”

रूबी: “तुम्हे तो प्रैक्टिस भी अच्छी हो गयी होगी, जोसफ को ऊपर चढ़ कर जो चोदती हो तुम. पर राहुल का लंड तो जोसफ से छोटा हैं, तुम्हे मजा बराबर नहीं आएगा”

मैं: “मैने लिया हैं मुझसे पूछो, राहुल का लंड सामान्य मर्दो से मोटा हैं, कसरती बदन जो हैं। उसके जैसा कोई नहीं चोद सकता. …मै भी कैसी बातें कर रही हूँ. अपने पति के लंड को अपने प्रेमी से तूलना कर रही हूँ”

रूबी: “तू दुनिया की पहली औरत नहीं हैं जो अपने पति और आशिक से हुयी चुदाई की तुलना कर रही हैं। मैं भी इतने सालो यही कर रही थी। तू बिंदास चुदने के मजे ले, अपने पति से छुप कर आशिक से चुदवाने का मजा ही कुछ और होता हैं।”

रूबी के ऑफिस में भी छुट्टी थी तो कोई परेशानी नहीं हुयी, वो बच्चो का ख्याल रखने वहीं रुक गयी। मै उसकी कार लेकर ही फार्म हाऊस जाने वाली थी।

मै अब ड्रेस पहन फार्म हाऊस पर राहुल से मिलने के लिए तैयार हो रही थी। मुझे पता था कि मै क्या करने जा रही थी पर मै सारे परिणाम भूगतने को तैयार थी।

मै फार्म हाऊस पहुंची. वहां का स्टाफ नहीं था, शायद राहुल ने हमेशा की तरह अपने स्टाफ को छुट्टी पर भेज दिया था। दरवाजा खुला ही था तो मै अंदर गयी।
 
सामने सोफे पर राहुल बैठा था, शायद उसे मेरा ही इंतजार था। मैंने दरवाजा बंद कर दिया। पीछे मुड़ी तो राहुल अपना शर्ट निकालने लगा।

फिर उसने पैंट निकालना शुरू किया और मैंने भी अपनी ड्रेस निकाल नीचे रख दी. मै अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी और सामने राहुल भी अंदर के कपड़ो में था।

हम दोनो ने एक साथ अपने अंदर के कपड़े भी खोले और एक दूसरे से दूर आमने सामने नंगे खड़े थे। राहुल पिछे मुड़कर अपने बेडरुम में चला गया। मै भी उसके पीछे गयी।

जब मै उसके बेडरुम में पहुंची तो वो अपने बिस्तर पर हाथ पैर फेलाएं पूरा नंगा लेटा था। मै बिस्तर के करीब पहुंची और फिर उसके मुंह की तरफ पीठ करके मै उसके सीने पर बैठ गयी।

फिर में आगे की तरफ झुकी और अपने मुंह में उसका लंड ले लिया और मुंह से चूस कर उसको रगड़ने लगी ताकि वो तैयार हो जाए। इस बीच मैंने अपनी गांड पीछे खिसकायी और मेरी चूत मैंने राहुल के मुंह पर रख दी।

उसने अपने होंठो से मेरी चूत के होंठो को चूमना चाटना शुरु कर दिया और मै भी मजे के मारे लंड चाटने लगी। इतने समय बाद हम एक दूसरे के अंगो को इस तरह चुम रहे थे तो अच्छे से चूसते हुए अपनी प्यास बुझा रहे थे।

अगले 10 मिनट तक हम एक दूसरे के अंगो को चूमते और चाटटे रहे, सिर्फ बीच बीच में कुछ सेकण्ड सांस लेने को रुकते रहे। राहुल का लंड लकड़ी की भांती कठोर हो चुका था और मेरी लार से चिकना हो तैयार था।

मेरी चूत का भी यहीं हाल था, पूरी गीली पड़ी थी पर राहुल उसे चाटें जा रहा था। बीच बीच में अपनी जुबान को रोल करके मेरी चूत के छेद में भी डाल कर अंदर बाहर करता तो मेरी झुरझुरी छूट जाती।

इसके पहले कि मै और देर चूस कर उसके लंड का पानी निकाल दू, मैंने सोचा अब उसको चोद ही देती हूँ। मैंने उसका लंड अब मुंह से बाहर निकाला।

उसका लंड इतना लंबा तो था ही कि मै पूरा मुंह में नहीं उतार सकती थी, इसलिए मैंने अपने हाथ से रगड़ कर उसके लंड के ऊपरी भाग को जो कि मेरी लार से चिकना था, उस चिकनाई को उसके पूरे लंड पर फैला दिया। लंड पूरा चिकना होना जरुरी था, वरना जब वो पूरा मेरी चूत में उतारेगा तो वो मुझे दर्द देगा।

मैने उसका लंड छोड़ दिया पर उसका तो मेरी चूत को चूमने से पेट ही नहीं भरा था। उसने दोनो हाथों से मेरी गांड पकड़े हुए मुझे उठने नहीं दिया।

मेरी चूत तो वैसे ही इतनी देर चूमने से नशे में मतवाली हो चुकी थी और करंट के झटके पर झटके मार रही थी। मै भी चाहती थी कि वो ऐसे ही मुंह से मजे दिलाता रहे पर मुझे पता था कि मेरी चूत की प्यास तो उसका लंड ही बुझाएगा और मुझे माँ भी बनाएगा।

मै अब उसकी पकड़ से छुटकर नीचे उतरी और फिर उसकी तरफ मुंह कर उसके लंड पर बैठ गयी। उसने दोनो हाथों से मेरे मम्मे दबोच लिए। मैंने थोड़ा शरीर ऊपर उठाते हुए उसके लंड को अपनी चूत में थोड़ा सा उतार दिया।

राहुल: “तुम मेरे साथ जबरदस्ती कर रही हो?”

मैं: “हां, जबरदस्ती कर रही हूँ, ताकि तुम बाप बन पाओ। क्युँ कि तुम्हारी ज़िद हैं कि माँ बनाओगे तो सिर्फ मुझे और किसी को नहीं। अब तुम मुझे माँ बनाओ या नहीं, मै खुद ही तुम्हारे बच्चे की माँ बन जाउंगी”

उसके आधे लंड को मेरी चूत की गर्मी मिलते ही वो शांत हो गया और थोड़ा सा मुंह खोले इंतजार करने लगा। मै धीरे धीरे नीचे बैठती गयी और उसका मोटा लंड अपनी चूत में उतारती गयी।

जब उसका लंड पूरा मेरी चूत में उतर गया तो उसका मुंह पूरा खुल गया था। मैंने अब ऊपर नीचे उछलते हुए उसके लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर रगड़ना शुरु किया।

शुरू की कुछ देर उसका लंड घिसट घिसट कर मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था पर एक बार चिकनाई बनने के बाद वो ज्यादा आराम से मेरी चूत को रगड़ मार मुझे मजा दिला रहा था।

इतने समय तक जोसफ की दर्दनाक चुदाई की बाद राहुल का लंड मेरे लिए शान्ति भरी मजेदार चुदाई लेकर आया था। मै जोर लगाते हुए अपनी गति बढ़ाने लगी जिससे मैं आहें भरने लगी तो दुसरी तरफ राहुल की भी हल्की आहें शुरु हो चुकी थी।

उसने अब मेरे मम्मो को फिर से दबाना शुरु किया और मेरा मजा दुगुना कर दिया। चुदते हुए मम्मो में जो हलचल होती हैं उसको शांत करने के लिए उनको दबवाना जरुरी था।

अगले कुछ मिनट हम ऐसे ही चुदाई के मजे लेते रहे. फिर जब मै थोड़ा थकने लगी तो मै अपनी छाती उसके सीने पर चिपका कर लेटे लेटे आगे पिछे हो चुदती रही।

मेरे भारी मम्मे उसके सीने से दब कर शायद उसको भी सुकून दे रहे थे और मुझे भी। थोड़ी देर पहले मेरी चूत को चाट कर वो आधा मजा पहले ही दिला चुका था तो मेरा ज्यादा कम बचा नहीं था।
 
उसी तरह राहुल ने भी लंबे समय से किसी को चोदा नहीं था तो वो भी जड़ने के करीब आ गया था। जब मुझे लगा मै झड़ने के करीब हूँ तो मैंने अपनी हिम्मत जुटाई और अपने धक्को की गति बढ़ाई और राहुल के लंड को तेजी से अपनी चूत में अंदर बाहर करने लगी।

मेरे ऐसा करते ही राहुल की तेज सिसकियां निकलने लगी और फिर मै भी शुरु हो गयी “आंह आह” करते चिखने लगी। राहुल ने मेरी गांड और कमर के बीच से टाइट पकड़ लिया और अपना लंड कुछ ज्यादा ही मेरी चूत में घुसा दिया और मैंने भी उसको बाहर नहीं निकाला।

उसने अपना पानी मेरी चूत में खाली कर दिया और उसी वक्त मैंने अपनी चूत को सिकोड़ते हुए उसके लंड को निचोड़ सा दिया और खुद भी जड़ गयी।

दोनो ने जड़ने के बाद एक दूसरे के होंठो को चूमते हुए रस लेना शुरु किया. राहुल और मैंने एक दूसरे को धन्यवाद बोला और मै उसके ऊपर से हटी।

................................

आखिरकार मैंने शादीशुदा होकर भी राहुल से एक बार फिर चुदवाया ताकि मैं उसके बच्चे की माँ बन पाऊ। राहुल को उसके ऊपर चढ़कर चोदने के बाद मैं उसके ऊपर से हटी।

इतने दबाव में मेरे मम्मो से 1-2 बूंद दूध निकल कर राहुल के सीने पर निकल गया था। मै शरमाई और राहुल हंसने लगा।

राहुल: “तुम्हे याद हैं एक बार मैंने तुम्हारे मम्मो का दूध दुहने की विनती की थी। उस वक्त तो तूम्हारे मम्मो में दूध नहीं था पर आज तो हैं। आज मै फिर तुम्हारे मम्मो का दूध दुहना चाहता हूँ.”

मैं: “नहीं, बिल्कुल नहीं। यह मेरे बच्चे के हिस्से का दूध हैं, मै दूध को बेकार नहीं होने दूंगी”

राहुल: “दूध तो खाना खाने के बाद फिर से बनता ही रहेगा। चलो, गाय की तरह बैठो”

मैं: “नहीं, वेस्टेज होने से माँ के दूध का अपमान होता हैं”

राहुल: “ठीक हैं, मै तुम्हारी बात का सम्मान करता हूँ। पर सिर्फ एक चुदाई से क्या होगा! बच्चा पैदा करने के लिए तो कई बार चोदना पड़ेगा”

मैं: “मै एक महीना इंडिया में ही हूँ। तब तक जितना जी चाहे चोद लेना। मगर इस शहर में यहाँ तुमसे और रूबी से मिलने मै सिर्फ 2 दिन के लिए आयी थी। फिर मै अपनी माँ पापा के शहर में रहुंगी, तुम्हे इसके बाद अगर मुझे चोदना हैं तो मेरे शहर आना पड़ेगा। अभी मै चलू या और करना हैं?”

राहुल: “थोड़ी देर रुक जाओ, लंच करके हम फिर सेकंड राउंड कर सकते हैं”

मैं: “मेरा 3 महीने का बच्चा घर पर हैं और बड़ा वाला बच्चा भी। रूबी उनका ध्यान रख रही हैं और मै सिर्फ यहाँ तुमसे चुदवाने आयी थी। अभी मुझे जाना हैं”

राहुल: “तो फिर शाम को मै रूबी के घर ही आ जाऊ तुम्हे चोदने के लिए? पता दे दो रूबी के घर का”

मैं: “पता मै देती हूँ, पर थोड़ा लेट ही आना, तब तक बच्चे सो जायेंगे”

उसी तरह राहुल ने भी लंबे समय से किसी को चोदा नहीं था तो वो भी जड़ने के करीब आ गया था। जब मुझे लगा मै झड़ने के करीब हूँ तो मैंने अपनी हिम्मत जुटाई और अपने धक्को की गति बढ़ाई और राहुल के लंड को तेजी से अपनी चूत में अंदर बाहर करने लगी।

मेरे ऐसा करते ही राहुल की तेज सिसकियां निकलने लगी और फिर मै भी शुरु हो गयी “आंह आह” करते चिखने लगी। राहुल ने मेरी गांड और कमर के बीच से टाइट पकड़ लिया और अपना लंड कुछ ज्यादा ही मेरी चूत में घुसा दिया और मैंने भी उसको बाहर नहीं निकाला।

उसने अपना पानी मेरी चूत में खाली कर दिया और उसी वक्त मैंने अपनी चूत को सिकोड़ते हुए उसके लंड को निचोड़ सा दिया और खुद भी जड़ गयी।

दोनो ने जड़ने के बाद एक दूसरे के होंठो को चूमते हुए रस लेना शुरु किया. राहुल और मैंने एक दूसरे को धन्यवाद बोला और मै उसके ऊपर से हटी।

................................

आखिरकार मैंने शादीशुदा होकर भी राहुल से एक बार फिर चुदवाया ताकि मैं उसके बच्चे की माँ बन पाऊ। राहुल को उसके ऊपर चढ़कर चोदने के बाद मैं उसके ऊपर से हटी।

इतने दबाव में मेरे मम्मो से 1-2 बूंद दूध निकल कर राहुल के सीने पर निकल गया था। मै शरमाई और राहुल हंसने लगा।

राहुल: “तुम्हे याद हैं एक बार मैंने तुम्हारे मम्मो का दूध दुहने की विनती की थी। उस वक्त तो तूम्हारे मम्मो में दूध नहीं था पर आज तो हैं। आज मै फिर तुम्हारे मम्मो का दूध दुहना चाहता हूँ.”

मैं: “नहीं, बिल्कुल नहीं। यह मेरे बच्चे के हिस्से का दूध हैं, मै दूध को बेकार नहीं होने दूंगी”

राहुल: “दूध तो खाना खाने के बाद फिर से बनता ही रहेगा। चलो, गाय की तरह बैठो”

मैं: “नहीं, वेस्टेज होने से माँ के दूध का अपमान होता हैं”

राहुल: “ठीक हैं, मै तुम्हारी बात का सम्मान करता हूँ। पर सिर्फ एक चुदाई से क्या होगा! बच्चा पैदा करने के लिए तो कई बार चोदना पड़ेगा”

मैं: “मै एक महीना इंडिया में ही हूँ। तब तक जितना जी चाहे चोद लेना। मगर इस शहर में यहाँ तुमसे और रूबी से मिलने मै सिर्फ 2 दिन के लिए आयी थी। फिर मै अपनी माँ पापा के शहर में रहुंगी, तुम्हे इसके बाद अगर मुझे चोदना हैं तो मेरे शहर आना पड़ेगा। अभी मै चलू या और करना हैं?”

राहुल: “थोड़ी देर रुक जाओ, लंच करके हम फिर सेकंड राउंड कर सकते हैं”

मैं: “मेरा 3 महीने का बच्चा घर पर हैं और बड़ा वाला बच्चा भी। रूबी उनका ध्यान रख रही हैं और मै सिर्फ यहाँ तुमसे चुदवाने आयी थी। अभी मुझे जाना हैं”

राहुल: “तो फिर शाम को मै रूबी के घर ही आ जाऊ तुम्हे चोदने के लिए? पता दे दो रूबी के घर का”

मैं: “पता मै देती हूँ, पर थोड़ा लेट ही आना, तब तक बच्चे सो जायेंगे”

मैने राहुल को रूबी के घर का पता दिया और अपने कपड़े पहन फिर से रूबी के घर आ गयी। राहुल को चोदने के बाद मेरे पूरे शरीर को बहुत संतुष्टि मिल रही थी।

मैने राहुल को रूबी के घर का पता दिया और अपने कपड़े पहन फिर से रूबी के घर आ गयी। राहुल को चोदने के बाद मेरे पूरे शरीर को बहुत संतुष्टि मिल रही थी।
 
रात के आठ बजे थे और मै और रूबी अपने बच्चो के साथ खेल रहे थे कि डोरबेल बजी। रूबी ने दरवाजा खोला तो राहुल था। रूबी ने उसको अंदर लिया।

उसको इतना जल्दी यहाँ देख मै घबरा गयी। मेरा बड़ा बच्चा अभी जाग रहा था । मैंने राहुल को लेट आने को बोला था।

मैं: “तुम! इतना जल्दी!”

राहुल: “कण्ट्रोल नहीं हो रहा था”

यह सुनकर मै शर्मा गयी और रूबी पिछे खड़ी हस रही थी। अपने बच्चे के सामने मै कैसे राहुल के साथ अंदर बेडरुम में जाती, पर रूबी ने बात संभाली और राहुल को बेडरुम का रास्ता बताया।

मै रूबी के हवाले अपने छोटे बच्चे को देकर जाने लगी तो बड़े वाले ने मेरे कपड़े पकड़ मुझे रोक लिया कि मै कहा जा रही हूँ। अब मै उसको क्या एक्सप्लेन करती। रूबी ने मेरी मदद की।

रूबी: “बेटा छोड़ दो मम्मी को, मम्मी को अंकल के साथ अंदर बहुत जरुरी काम हैं”

बच्चा भी मासूम था तो पूछ ही लिया कि क्या जरुरी काम हैं। मम्मी की जगह रूबी आंटी चली जाओ।

रूबी: “नहीं बेटा, मेरी ऐसी किस्मत कहा हैं! यह जरुरी काम तुम्हारी मम्मी ही कर सकती हैं। जाने दो, तुम्हारी मम्मी कमजोर हैं ना, वो अंकल ऐसा इंजेक्शन देंगे कि तुम्हारी मम्मी मोटी हो जाएगी”

मैं: “रूबी, तुम संभाल लोगी ना?”

रूबी: “किसको? अंदर वाले को या इन बाहर वालो को?”

मैं: “अंदर वाले को मै संभाल लुंगी, फिलहाल तुम इन दोनो बच्चो को संभालो”

मै अब बेडरुम में गयी, जहा बिस्तर पर पहले ही राहुल बैठा था। मेरे आते ही वो खड़ा हो मेरे पास आ गया।

राहुल: “चलो अब इंतजार नहीं होता, जल्दी से करते हैं”

मैं: “मै तो थक चुकी हूँ, तुम्हे ही करना पड़ेगा”

राहुल: “कर लूंगा, पर अब यह मत कहना कि मै जबरदस्ती कर रहा हूँ”

मैं: “तुम्हे जबरदस्ती करनी हैं तो भी कर सकते हो, मेरी खुली छूट हैं”

राहुल ने मुझे जल्दी से नंगा कर दिया और फिर घोड़ी बना कर बिस्तर पर मेरे दोनो हाथ बाँध दिए। मै घोड़ी बनी बैठी रही और वो मेरे पास आया।

एक हाथ की ऊँगली से उसने मेरी चूत को रगड़ कर गरम किया और दूसरे हाथ से मेरे नीचे लटके मम्मो को हल्के हल्के से हाथ फेराया। उसने मेरे मम्मे दबाने की कोशिश नहीं कि वरना दूध निकल कर बेकार हो जाता।

फिर उसने मम्मो वाला हाथ मेरे पेट, कमर, पीठ जांघो सब तरह रगड़ते हुए मेरे शरीर को महसूस किया। उसके हाथ लगाने भर से मै उत्तेजित हो चुकी थी।

अब उसने मेरी चूत रगड़ना छोड़ा और मेरे पिछे आया। अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा और थोड़ा सा मेरी चूत के अंदर धकेल दिया।

उसने फिर एक झटके में अपना लंबा मोटा लंड मेरी चूत में जोर लगाते हुए उतार दिया और वो बहुत ज्यादा अंदर उतर गया, जिसकी वजह से मेरी एक चीख निकली।

मैने फिर कण्ट्रोल किया और हल्की सिसकियां निकालते हुए उसकी चुदाई का मजा लेने लगी। वो अपने दोनो हाथों से मेरी गांड पकड़े मेरी चूत को डोगी स्टाईल में चोदने लगा।

हम दोनो एक सूर में आहें भरते हुए अब उस चुदाई का आनंद ले रहे थे। कुछ मिनट के बाद मै मुंह खोले तड़पती हुयी खुद ही आगे पिछे हो चुदती रही, मेरा मजा इस से बढ़ता गया।

हम दोनो अब और तेजी से सिसकियां भर रहे थे। जैसे जैसे जड़ने के करीब आते गए उसके झटके तेज होते गए. तभी उसने अचानक अपना लंड मेरी चूत से निकाल दिया।

चुदते चुदते अचानक मेरी सिसकियां बंद हो गयी और मजा आना बंद हो गया। उसने मेरी गांड के दोनो हिस्सों को एक दूसरे से दूर किया और मेरी गांड का छेद खोल दिया। फिर अपने लंड का निशाना मेरी गांड के छेद पर लगाया।

मैं: “राहुल, गांड में नहीं। तुम्हे बच्चा चाहिये या गांड मारनी हैं”

राहुल: “दोनो चाहिए”

यह कहते हुए उसने अपना लंड का थोड़ा हिस्सा मेरी गांड में घुसा दिया। मै इस झटके के लिए तैयार नहीं थी और मै दर्द के मारे जोर से चिखी तो वो रुक गया।
 
मेरी गांड दर्द के मारे कांपने लगी थी। काफी समय से मेरी गांड ने कोई लंड नहीं लिया था तो मै कांप उठी थी। मुझे ध्यान आया कि मेरे बच्चे और रूबी बाहर ही हैं और वो मेरी चीख सुन क्या सोचेंगे !

राहुल ने अब धीरे धीरे मेरी गांड में अपना लंड अंदर बाहर करना शुरु किया। मै इस बार तैयार थी तो उसको सहन किया और अपनी चीख दबाए रखी।

राहुल को मेरे सिर्फ मजे लेने थे तो थोड़ी देर गांड मारने के बाद उसने अपना लंड फिर बाहर निकाला और चूत में घुसा दिया। मुझे फिर थोड़ी शांत मिली।

मै एक बार फिर आगे पिछे हो चुदने लगी। राहुल ने भी धक्के मारना शुरु कर दिया। कुछ मिनट की चुदाई के बाद मेरी मजे के मारे हालत खराब हो गयी और मै जोर जोर से सिसकियां मारने लगी।

राहुल ने मुझे पूरा चोद दिया और अपना पानी पूरा मेरी चूत में खाली कर दिया और उसके ठीक बाद मै भी पूरी ताकत लगाये आगे पिछे होते हुए उसके लंड को अपनी चूत में रगड़े जड़ गयी।

हमारी आवाजे शांत होने के बाद राहुल उठा और अपना लंड साफ़ करने वाशरूम में गया। वो बाहर आया तो मैंने राहुल को अपने हाथ खोलने को बोला।

तभी दरवाजे पर दस्तक हुयी और रूबी की आवाज आयी। राहुल ने अपनी पैंट पहन ली और दरवाजा खोलने चला गया, जब कि मै अभी भी नंगी बिस्तर पर घोड़ी बने बंधी थी। मैंने उसको रुकने को बोला पर वो नहीं रुका।

उसने रूबी को अंदर कमरे में ले लिया और दरवाजा बंद कर दिया। इस तरह नंगी बंधे हुए मै रूबी के सामने शर्मा रही थी। मैंने रूबी को अपने हाथ खोलने को कहा और रूबी आगे बढ़ी पर राहुल ने उसको पिछे आकर उसकी कमर से पकड़ रोक दिया। उसने उस से आने का कारण पुछा।

रूबी: “वो छोटे वाले को भूख लगी हैं, प्रतिमा को उसको दूध पिलाना पड़ेगा”

राहुल: “दूध का इंतजाम मै करता हूँ। रूबी, तुम दो कटोरी लेकर आओ”

रूबी हिचकिचा रही थी और मैंने उसको मना बोला पर राहुल ने उसको जाने को बोल दिया। रूबी बाहर जाकर दो कटोरीयां ले आयी और राहुल को दे दी। राहुल ने रूबी को बाहर जाने को बोल दिया।

मै अब भी घोड़ी बनी बैठी थी और राहुल ने दोनो कटोरीयां मेरे मम्मो के ठीक नीचे रखी और मेरे मम्मे दुहने लगा।

कल मैंने उसको दूध वेस्टेज का हवाला देते हुए मेरा दूध दुहने से मना किया था पर आज उसने उन कटोरियों में मेरा दूध दुहना शुरु कर दिया था।

आज मै कोई बहाना मार कर मना भी नहीं बोल सकती थी। उसने जल्दी ही कुछ दूध इकट्ठा कर लिया और दरवाजा खोल कर रूबी को पकड़ा दिया कि वो मेरे बच्चे को वो निकाला हुआ दूध पिला दे।

राहुल ने आकर मेरे हाथ खोले और मैंने उसको इस हिमाकत के लिए डाँट दिया। पर वो मस्ती के मूड में था और उसको कोई फर्क नहीं पड़ा। राहुल और मैंने अपने कपड़े पहने लिए और बाहर आये। राहुल ने हमसे विदा ली और चला गया।

मेरा बड़ा बच्चा मुझे कहने लगा कि रूबी आंटी कह रही थी कि उन अंकल ने आपको सुई लगायी इसलिए आप चिखी थी। मैंने रूबी को देखा जो हस रही थी। मैंने भी अपने बच्चे को हां बोल दिया कि सुई जोर की लगी थी।

अगले दिन सुबह ब्रेकफस्ट के बाद मुझे मेरे बड़े बच्चे ने बताया कि सुई वाले अंकल आये हैं। मैंने देखा रूबी राहुल को लेकर बेडरुम में आ चुकी थी।

मै तो नहा कर तैयार भी नहीं हुयी थी और अपने स्लीप शर्ट और शार्ट में ही थी। रूबी मेरे दोनो बच्चो को बेडरुम से बाहर ले गयी और मुझे राहुल के साथ अकेले छोड़ दिया। राहुल ने दरवाजा बंद कर आया।

मैं: “तुम इतना जल्दी यहाँ?”

राहुल: “मै बच्चा पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता”

मैं: “बच्चे रात को सो जाऐ उसके बाद आया करो। मै बच्चे को क्या समझाऊ कि तुम कौन हो?”

राहुल: “तुम बोलो तो चला जाता हूँ”

मैं: “अब आये हो तो करके ही जाओ”

यह सुनते ही वो मुझ पर टूट पड़ा और मुझे बिस्तर पर गिरा दिया और तुरंत मेरे कपड़े निकाल कर मुझे नंगा कर दिया और खुद भी नंगा हो गया।

एक बार फिर हमने एक दूसरे के अंगो को रगड़ कर और चूस कर तैयार किया। अभी हम चुदाई शुरु ही करने वाले थे कि रूबी ने दरवाजे पर दस्तक दी और अंदर पड़े बच्चे के नैपकिन मांगे।
 
इस बीच राहुल ने मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया। मै उठना चाह रही थी पर राहुल ने मुझे चोदना शुरु कर दिया था। मैंने उसको अपने ऊपर से हटा कर दूर किया।

मै ऐसे ही नंगी उठकर दरवाजे तक गयी और दरवाजे की आड़ में छुपकर उसको नैपकिन दिया। मेरा मुंह और एक हाथ दरवाजे के बाहर था और बाकी का शरीर कमरे के अंदर दरवाजे के पिछे छिपा था।

इस बीच चुपके से राहुल भी चलकर मेरे पीछे आ गया था और मुझे पीछे से झकड़ लिया। इसके पहले कि रूबी मेरे हाथ से नैपकिन लेती राहुल अपना लंड वहीं खड़े खड़े मेरी चूत में पिछे से डालने लगा। मै अपने शरीर को झटकते हुए राहुल को दूर करने की कोशिश कर रही थी और नैपकिन देते मेरा हाथ हिल रहा था तो रूबी को मेरा चेहरा देख सब समझ आ गया कि राहुल क्या कर रहा होगा। वो मुंह पर हाथ रख हस रही थी

राहुल का लंड कुछ सेकण्ड पहले मेरी चूत में घुसकर वैसे ही चिकना तो था ही, तो बड़े आराम से फिर मेरी चूत में उतर गया और उसने वहीं मुझे चोदना शुरू कर दिया।

एक हाथ से उसने मेरी कमर पकड़ रखी थी और दूसरे हाथ से दरवाजा पकड़ रखा था , जिसकी वजह से मै दरवाजा भी बंद नहीं कर पा रही थी।

रूबी ने नैपकिन ले लिया था पर वहीं खड़ी थी। मेरा मुंह खुला का खुला था और आंहे मै बाहर नहीं आने दे रही थी और सहन कर रही थी।

राहुल पर गुस्सा भी आ रहा था। उसको रोमांच सूझ रहा था और मै शर्मिंदा हो रही थी। मेरे बड़े बच्चे को लगा मै लुका छिपी खेल रही हूँ इसलिए दरवाजे के बाहर मुंह निकाले देख रही हूँ.

मेरे मासूम बच्चे को क्या पता कि मै उस वक्त अपने आशिक से चूद रही थी। मैंने मुंह अंदर लिया और दरवाजा बंद करने की कोशिश की पर राहुल की ताकत के आगे मै बंद नहीं कर पायी।

कुछ सेकण्ड इसी तरह चोदने के बाद ही उसने मुझे दरवाजा बंद करने दिया। मै अब बंद दरवाजे पर दोनो हाथ टिकाये झुक कर खड़ी थी और मेरे पीछे से राहुल मुझे चोद रहा था।

वो बहूत देर तक ऐसे ही मुझे चोदता रहा और मै जड़ गयी पर राहुल तो जड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था, पता नहीं क्या खाकर आया था आज वो.

मैं इस तरह झुककर खड़े थक चुकी थी और मैंने उसको लेट कर चोदने को कहा. उसने मुझे चोदना छोड़ा और मै सीधा खड़ी हुयी.

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
Back
Top