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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

उसने अपना एक हाथ मेरे कूल्हों पर रखा और दूसरा गाँड के छेद के ऊपर रख अपनी एक ऊँगली मेरी गांड के छेद में डाल दी। मैं दोनों छेद में चूदने से आह्ह आह्ह अम्म आह्ह आह्ह अम्म की लगातार आहें भरने लगी।

हम दोनों अब सोफे पर लेटे थे , मैं आगे और वो मेरे पीछे था। मेरी टाँगे सैंड्रा की तरफ थी, मैंने अपनी टांग ऊपर कर मोड़ पकड़ ली ताकि सैंड्रा को अच्छे से दिखा जला पाऊ।

जैक ने मेरी गांड पकड़ दरार को चौड़ा किया और मुझे तेज तेज चोदना शुरू किया। मैं अब बेतहाशा आह्ह आह्ह आह्ह आह्ह उम्म करने लगी। मुझे खुद इतना मजा आ रहा था कि मुझसे अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था।

जैक अब सोफे पर सीधा बैठ गया और मुझे उसकी गोद में आने को कहा। मैं उसकी गोद में चढ़ कर उसके लंड पर बैठ गयी। मेरी पीठ उसकी तरफ थी और मैंने अपने पाँव मोड़ पीछे कर लिए थे। मेरे हाथ पीछे उसके सीने पर थे। नीचे से जैक ने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। मेरी चूत पूरी खुल चुकी थी उसका लंबा सा लंड मेरे काफी अंदर तक जा रहा था।

जैक ने अब मुझे मेरी मम्मो के साइड से कमर के बीच पकड़ लिया था और मुझे ऊपर नीचे कर रहा था। मैं भी ऊपर नीचे जोर लगा कर चूद रही थी।

थोड़ी देर में मैंने ऊपर नीचे होना बंद कर दिया तो जैक ने नीचे से धक्के मारना शुरू। उसके झटके नीचे से भी काफी जोर से पड़ रहे थे और मेरी चूत को छलनी कर रहे थे। मेरी हालत अब ख़राब होने लगी।

मैं अब चीखते हुए आहें भर रही थी आआआआआह आआआआआह। जैक ने मेरे बालो को चोटी की तरह पकड़ खिंच मेरा मुँह ऊपर छत की तरफ कर दिया और जोर जोर से झटके मारता रहा। मैं अपना मुँह खोले ऊपर छत की तरफ देखते हुए आहें भर रही थी। सीईई ओह्हो ओह्हो ओह्हो करते हुए अपना पानी छोड़ने लगी।

उधर जैक भी सिसकिया भर रहा था और जिस तरह से तेज धक्के मारता हुआ अचानक गहरे धीमे धक्के मार रहा था वो भी अपना पानी मेरी चूत में निकाल रहा था। थोड़ी देर बाद हम दो प्रेमी एक दूसरे के प्यार से सरोबार हो झड़ चुके थे ।

मैं उसके ऊपर से हटी और देखा उसका गोरा लंड सफ़ेद गाढ़े पानी से भरा हुआ था। सैंड्रा अभी भी ताके जा रही थी। मैं नीचे बैठी और उसकी तरफ नजरे कर मैंने जैक का लंड चूस कर साफ कर दिया।

मुझे वो गन्दगी चूसना अच्छा तो नहीं लगा पर उसको ये दिखाना मुझे जरुरी लगा कि अब जैक पूरा मेरा हो चूका हैं। मैंने अपने होंठ हाथों से पोंछते हुए सैंड्रा को घुरा। फिर जैक का हाथ पकड़ उसको वाशरूम में ले गयी। उसके साथ नहा ली और जब पंद्रह मिनट के बाद वापिस आयी तो सैंड्रा तैयार हो कर जा जाने वाली थी।

मुझे आज वैसे भी ऑफिस नहीं जाना था तो मैं शाम तक जैक के साथ घूमती रही। शाम होने से पहले मैं फिर उसके गेस्ट हाउस आ गयी और सैंड्रा का इंतजार करने लगी। शाम को मैं जैक का मूड फिर बनाने लगी और हम दोनों पुरे नंगे हो गए। जैसे ही सैंड्रा की कार बाहर आने की आवाज आयी मैं जैक को लेकर उसके बेडरूम में आयी और दुसरी बार चूदाई की तैयारी कर ली।

सैंड्रा के कमरे में आने तक मैं जैक पर चढ़ कर उसकी मस्त चुदाई कर रही थी। मैं जैक को तृप्त कर देना चाहती थी ताकि उसे रात को सैंड्रा की जरुरत ना पड़े। मैंने उससे दोपहर में ही वादा ले लिया कि वो अब से सैंड्रा को नहीं चोदेगा।

जैक एक भारतीय खूबसूरत औरत को चोद कर बहुत खुश था । मैं पहली बार एक गौरे लंड का स्वाद चख कर और सैंड्रा को जला कर खुश थी।

हालांकि होम करते मेरे हाथ भी जले थे। सैंड्रा को जलाने चक्कर में मैंने अपनी इज्जत जैक के हवाले कर दी। पर मैं वैसे भी उसको सब दे देती, उसको देखते ही मुझे प्यार हो गया था।

असल में वो जैक ही था जिसने मेरा साल भर का व्रत तोड़ने को मजबूर कर दिया था। और एक गलती के बाद मैं एक से बढ़ एक गलती करती गयी।

मैं: “मेरे पास जोसफ और सैंड्रा का सेक्स वीडियो हैं। मुझे नहीं पता तुम्हारे पापा को पता हैं या नहीं इस बारे में, पर सैंड्रा की पोल खोलना जरुरी हैं। ”

जैक: “जोसफ अच्छा इंसान हैं, वो इसमें फंस जाएगा”

मैं: “उसको भी सैंड्रा से आजादी मिलेगी। वो अभी सिर्फ सैंड्रा का गुलाम बना हुआ हैं। वैसे भी मुझे नहीं लगता बॉब कभी जोसफ को छोड़ेगा ”

मैंने उसको वो वीडियो भेज दिया।

अगले दिन मैं ऑफिस पहुंची। जब राहुल अपने केबिन में गया तो एक नजर मेरी सीट पर डाली और अंदर चला गया।

शायद उसे राहत मिली होगी मुझे ऑफिस में देख कर। सिर्फ एक बार मैं काम से अंदर गयी थी और उसको मैंने साफ़ बोल दिया था कि मेरे ऑफिस आने का मतलब ये नहीं कि मैंने उसे माफ़ कर दिया।

अब हमारे बीच सिर्फ व्यावसायिक संबंध ही रहेंगे। प्रमोशन के बाद मेरा काम का बोझ बढ़ गया हैं और अब उसे अपने लिए दूसरी सेक्रटरी ढूंढनी होगी।

उसकी पुरे दिन हिम्मत नहीं हुई मुझे अपने केबिन में बुलाने की; सिर्फ मेल और मैसेज ही मिल रहे थे।

कल जैक वापिस जाने वाला था और मैं उससे आखिरी बार मिलने गेस्ट हाउस पहुंची। और सैंड्रा की आँखों के सामने एक दूसरे को चूमा । सैंड्रा के चेहरे पर खीझ देख कर मुझे बहुत सुकून मिला । उससे विदा लेने से पहले हम दोनों एक दूजे से गले मिल बहुत रोये।

अगले दिन शाम को जोसफ का एक वीडियो मैसेज मिला, जिसको पढ़कर मैं भावुक हो गयी। उसका हिंदी अनुवाद भी नहीं करुँगी। कुछ चीजे ओरिजिनल ही अच्छी होती हैं।

Joseph: “Hi Pratima, I don’t know how to tell this. First I want to apologise, in our first meeting I made an awkward comment. That’s how I have been brought up and think towards girls. But when I observed you I realised what a woman should be.

You changed me. I never said this to any woman but I am telling you that I love you. I don’t know what you think about me but I can never forget you.

Whatever happened between us in guest house that day was forced one, but I will never forget that experience. That was the best love I ever made. Till the time you’ll receive this message I’ll be gone from your life forever.

I have your number and will keep looking at your profile picture and status messages you will change. I can’t call you or I don’t have courage to face you, because I will cry like a baby like am doing right now. If I cry like baby, then it won’t look good with this heavy body. Some love stories are tend to be short lived, mine is same.

Take care, Love You. Joseph”

*** (इस मेसेज का हिन्दी अनुवाद!) ***

जोसफ: हेल्लो प्रतिमा, मुझे नहीं पता मैं ये कैसे कहूँ। पहले तो मैं हमारी पहली मुलाकात के दोरान मेरे द्वारा तुम्हारे बारे में कही बातो के लिए माफ़ी चाहता हूँ। शायद औरतों के बारे में मेरी सोच ऐसी ही रही है। पर जब मैंने तुम्हे समझा तो जाना की सभी औरतें तुम्हारी तरह की ही होनी चाहिए!

सच में तुमने मुझे बदल दिया, मैंने आज तक ये किसी भी औरत से नहीं कहा पर तुमसे कह रहा हूँ की आई लव यू। मुझे नहीं पता तुम मेरे बारे में क्या सोचती हो, पर मैं तुम्हे कभी भी नहीं भूल पाउँगा।

उस दिन गेस्ट हाउस में हमारे बिच जो कुछ भी हुआ वो जबरदस्ती था, पर मैं उड़ दिन के अनुभव को कभी नही भूलूंगा। क्योकि वो मेरी जिदगी का सबसे बेहतर अनुभव था। जिस समय तम्हे ये मेसेज मिलेगा तब तक मैं तुम्हारी जिंदगी से बहुत दूर जा चूका होऊंगा।

मेरे पास तुम्हारा नंबर है, मैं हमेश तुम्हारी प्रोफाइल पिक और स्टेट्स देखता रहूँगा। मैं तुम्हे फ़ोन नहीं करूँगा, क्योकि मुझमे तुमसे बात करने और तुम्हारा सामना करने की हिम्मत नहीं है। क्योकि मुझे पता है मैं एक छोटे बच्चे की तरह रो पडूंगा जैसे की मैं अब रो रहा हूँ। अगर मैं रोऊंगा तो मेरे इस बड़े शरीर पर वो बिलकुल अच्छा नहीं लगेगा। कुछ प्यार की कहानियां यु ही छोटी होती है, जैसे की मेरी है!

अपना ख्याल रखना, लव यू! जोसफ!

***
 
मैंने उसको तुरंत जोसफ को फ़ोन करना चाहा पर नंबर स्विच ऑफ था और वो हमेशा के लिए मेरी ज़िन्दगी से चला गया था। उसको कुछ भी कहना होता हैं तो अपना स्टेटस मैसेज बदल लेती हूँ। मुझे पता हैं वो पढ़ रहा होगा पर मैं उसकी सुन नहीं सकती।

ऑफिस में राहुल को मैंने कई बार मुझे ताड़ते हुए पकड़ा हैं। हर बाहरी मीटिंग में वो मुझे जानबूझ कर शामिल करता हैं ताकि मेरे साथ कार में कुछ समय साथ बैठ पाए। शायद इस आस में कि किसी दिन मैं मान जाऊ। उसकी आँखों में वो तड़प हैं मुझे पाने की।

मैंने सोचा शायद एक दिन मैं उसे मौका दे दू, जब मेरे पति अशोक की तरफ से मेरे लिए सब दरवाजे बंद हो जायेगे।

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मेरी पिछली कुछ कहानियो आपने पढ़ा की कैसे मेरी ज़िन्दगी में एक बड़ा बदलाव आया और मेरे पति अशोक और मैं कुछ ग्रुप सेक्स के इवेंट में गए और क्या क्या मजेदार अनुभव लिए। मेरे पति इस बदलाव से खुश थे क्यों की उनको अलग अलग औरतो को चोदने का शौक था और अब मेरी इजाजत से वो यह सब काम मेरे सामने कर सकते थे।

मेरे लिए ये सब थोड़ा अजीब था क्यों की पति पत्नी का रिश्ता एक भरोसे और समर्पण का होता हैं और अब हम किसी और के साथ यह सब काम कर रहे थे। मगर मैं भी अब बेशरम होकर इन सब चीजों में घुस चुकी थी ।

बस एक यही दुआ थी की मेरे पुराने काण्ड खुलकर मेरे पति सामने ना आये, क्यों की मैं अभी भी मेरे पति की नजरो में एक शर्मीली छुईमुई थी। हम जो चाहे वही हो यह जरुरी नहीं। मेरा इतिहास एक बार फिर मुझे एक झलक दिखाने वाला था। फुर्सत के लम्हो में मेरे पति ने मुझसे इसी बारे में बात कर रहे थे।

अशोक: “प्रतिमा, सेक्स के मजे हमने खूब ले लिए. अब तुम भी थोड़ा कम्फ़र्टेबल होने लगी हो। हमें अब किसी एक कपल के साथ भी पार्टनर बदल कर मजे करना चाहिए”

मैं: “अब तुमने यह सोचा हैं तो इसका मतलब तुमने वो कपल पहले ही ढूंढ लिया होगा ! ”

अशोक: “हां, मेरा क्रश हैं वो। मुझे बहुत पसंद हैं वो लड़की और एक बार उसको चोदने की बहुत इच्छा हैं। ”

मैं: “कौन हैं वो लड़की ?”

अशोक: “एक ही तो लड़की हैं, जिसकी पीछे से चाल देखकर हर कोई दीवाना हो जाये। चलते वक़्त उसके कूल्हे जो मटकते हैं। तुम समझ गयी ना मैं किसकी बात कर रहा हूँ?”

मैं: “ओह नो, तुम कही उसकी बात तो नहीं कर रहे !”

अशोक: “तुम समझ गयी !”

मैं: “आई होप कि मैं गलत समझ रही हूँ। तुम्ही बताओ, मैं नहीं बताउंगी”

आपने मेरी पिछली एक कहानी “होली के रंग, कर गए दंग” पढ़ी होगी, अगर नहीं तो पहले उसे जरूर पढ़े ताकि आपको नितिन और पूजा की कहानी पता चल सके। संक्षेप में कहु तो होली के दिन नितिन मेरे घर आया, और अकेली देख उसने मुझे कहाँ कहाँ नहीं छुआ और अंत में मेरा फायदा उठाने की कोशिश भी की।

फिर नितिन ने मुझे एक कहानी सुनाई थी की मेरे पति अशोक और उसकी बीवी पूजा के बीच कोई चक्कर चालू हैं, और मुझे यह कहानी सुनाकर बहका फुसला दिया और फिर मुझे चोदने के भरपूर मजे लिए थे।

हालांकि बाद में, मैं यह पता नहीं कर पायी कि क्या सच में पूजा और अशोक के बीच कभी कुछ हुआ था। अभी तक ये मेरे लिए राज ही था और अभी अशोक मुझसे कह रहा था कि वो पूजा को पहली बार चोदना चाहता हैं।

अब मैं इसका क्या मतलब निकालू! उस दिन नितिन ने जो कुछ कहा था वो सब झूठ था या फिर शायद अशोक मुझसे अभी झूठ बोल रहा हैं !

अब भले ही अशोक झूठ कह रहा हो या नहीं, मगर यदि हम नितिन और पूजा के साथ पार्टनर बदल कर चोदेंगे तो हो सकता हैं कि मेरे और नितिन के बीच होली के दिन जो हुआ उसका राज बाहर आ जाए।

मैं यह होने नहीं देना चाहती थी। मैं किसी भी कीमत पर शर्मिंदा नहीं होना चाहती थी। उस होली के दिन मेरे और नितिन के बीच जो भी हुआ मेरी आँखों के सामने घूमने लगा था

मैं: “देखो अशोक, मैंने हमारे पहले ग्रुप सेक्स के बाद ही कह दिया था कि मैं अब तुम्हारे किसी दोस्त साथ पार्टनर बदल नहीं चुदुँगी”

अशोक: “मगर उसके बाद तो हम चिराग – चित्रा के साथ एक बार और ग्रुप सेक्स इवेंट में जा चुके हैं”

मैं: “चित्रा मेरी अच्छी सहेली हैं तो उसके साथ एडजस्ट हो जाता हैं”

अशोक: “पूजा भी तो तुम्हारी सहेली हैं!”

मैं: “हां कभी थी, पर अब मिलना नहीं हो पाता। पहले वो हमारी पडोसी थी, मैं उसके साथ स्वीमिंग सिखने जाती थी तो हम अच्छी सहेलिया थी। पर जब से इस नए घर में आये हैं और मैंने स्वीमिंग जाना बंद किया हैं तब से पूजा से इतना मिलना नहीं हो पाता हैं”

अशोक: “बहाना मत मारो, सहेली तो हमेशा सहेली रहेगी। प्लीज यार, मान जाओ, एक बार सिर्फ एक बार पूजा की उस मटकती गांड को देखना हैं ”

मैं: “तुम तो ऐसे बोल रहे हो जैसे तुमने उसकी गांड कभी देखी ही नहीं हो”

मैं चाहती थी कि अगर अशोक और पूजा के बीच कुछ भी हैं तो अशोक खुलकर बता दे।

अशोक: “तुम स्वीमिंग पूल की बात कर रही हो ना? पर उस वक़्त उसने स्वीमिंग के कपडे पहने थे, आधी गांड ही देख पाया था, मुझे पूरी नंगी गांड देखनी हैं। सच पूछो तो साड़ी में लिपटी उसकी ढकी हुयी गांड देखकर मैं दीवाना हो ही गया था पर फिर उस दिन तुम्हे स्वीमिंग पूल पर लेने आया था तब बिकिनी में पूजा की गांड देख मैं पूरा दीवाना हो गया”

अशोक ने अभी भी यह स्वीकार नहीं किया कि उसके और पूजा के बीच कभी कुछ हुआ हो। वो जिस तरह अपनी तड़प दिखा रहा था उस से यही लग रहा था कि उसने कभी पूजा को नंगा देखा ही नहीं था।

मैं: “पूजा की गांड तुम्हे इतनी पसंद आयी, तुम्हारी खुद की बीवी की (यानी मेरी) गांड की तारीफ़ तो कभी की नहीं !”

अशोक: “अरे तुम्हारी गांड तो दुनिया में सबसे अच्छी हैं”

मैं: “तो फिर पूजा की क्यू चाहिए?”

अशोक: “यार, वो चलते हुए जिस तरह गांड मटकाती हैं, वैसा कोई नहीं कर सकता। बस एक बार चोदना हैं। ”
 
मैं: “मेरी इजाजत हैं तुमको, तुम जाकर कर लो जो करना हैं, पर नितिन को बीच में मत लाओ। मुझे उसके साथ कुछ नहीं करना हैं”

अशोक: “नितिन अपनी बीवी को मुझे क्यू चोदने देगा भला ! उसको इसके बदले कुछ मिलेगा तो ही तो वो मुझे अपनी बीवी देगा ना !”

मैं: “तो तुम अपनी इच्छा पूरी करने के लिए मेरी बलि चढ़ाओगे?”

अशोक: “इसमें बलि की क्या बात हैं! यह तो हम मजे करने के लिए कर रहे हैं। अब यह पहली बार तो नहीं हैं हमारे लिए! वैसे भी नितिन अच्छा दिखता हैं, तुम्हे भी मजा आएगा।”

मैं: “पूजा के साथ तुम्हे जो करना हैं कर लेना पर नितिन को मत बताना”

अशोक: “पहली बात तो पूजा को कैसे मनाये इस काम के लिए ! फिर अगर वो मान भी जाए तो कल को अगर नितिन को पता चल जाए तो? कोई गलत काम करो तो पूरी सुरक्षा के साथ करना चाहिए। नितिन की जानकारी में ही होना चाहिए ताकि पूजा भी सुरक्षित महसूस करे ”

मैं: “तुम तो पूरी तैयारी कर के आये हो। तारीख भी तय कर ही दी होगी फिर तुमने!”

अशोक: “अभी आग सिर्फ एक जगह लगी हैं, मेरे अंदर। अब मैंने वो आग तुम्हारे अंदर लगा दी हैं। अब तुम मेरी मदद करो और कैसे भी पूजा और नितिन को मना लो”

मैं:: “यह क्या बकवास हैं! ऐसे कामो के लिए मैं अब लोगो को मनाती फिरू ?” नितिन तुम्हारा दोस्त हैं, तुम उसको मनाओ। मेरी कोई इज्जत नहीं क्या?”

अशोक: “मैं आगे बढ़कर नितिन को कैसे बोलु कि मैं उसकी बीवी को चोदना चाहता हूँ। वो भड़क गया तो लड़ाई हो जाएगी। तुम लड़की हो, तुम बोलोगी तो शायद मान जाएगा और ना भी माना तो भड़केगा तो नहीं। इसमें इज्जत कम होने की क्या बात हैं ! यह तो हम दोनों मजे के लिए कर रहे हैं।”

मैं::”एक्सक्यूज़ मी ! मुझे नितिन के साथ कोई मजे नहीं लेने हैं। तुम्हे पूजा के मजे लेने हैं, तुम्ही मनाओ। ”

अशोक: ” ऐसे मत करो यार। मेरी दिली तमन्ना हैं, इसको पूरा करने में मेरी मदद नहीं करोगी? प्लीज .. प्लीज .. प्लीज .. मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूँ।”

अब मैं उसको कैसे बताऊ कि मेरे लिए यह बाए हाथ का खेल हैं और नितिन तो वैसे ही तैयार बैठा हैं मुझे एक बार फिर चोदने के लिए। ऊपर से शायद नितिन को शक हैं कि उसकी बीवी पूजा का पहले ही अशोक के साथ चक्कर हैं।

नितिन मुझे पहले ही चोद चूका हैं और यह बात खुलने के डर से मैंने अशोक को साफ़ इनकार कर दिया कि मैं इसमें उसकी कोई मदद नहीं कर सकती।

एक सप्ताह निकल गया और अशोक लगातार मुझे विनती करता रहा कि मैं उसकी मदद कर दू। मैं भी इस रोज रोज की चापलूसी और विनती से परेशान हो चुकी थी।

फिर मैंने सोचा कि नितिन को मनाने के लिए भी अशोक मुझे ही बोल रहा हैं। नितिन को मैं पहले ही बोल दूंगी की होली वाले दिन हम दोनों के बीच जो भी हुआ वो अशोक को ना बताये।

फिर बची पूजा, उसके साथ मैंने बहुत सारा समय बिताया हैं। एक साथ कुछ महीनो स्वीमिंग की हैं। उसके साथ कई निजी बातें भी शेयर की हैं। शायद बातों बातों में उसको पूछ सकती हूँ।

मैं: “ठीक हैं, मैं उनको मनाने की कोशिश करुँगी। पर वादा करो कि इसके बाद हम कभी तुम्हारे किसी दोस्त के साथ इस तरह पार्टनर नहीं बदलेंगे”

अशोक: “अरे हाँ , मुझे भी बस एक बार पूजा की गांड मारनी हैं। फिर तुम जो बोलोगी वही होगा।”

मैंने अशोक से कुछ समय की मोहलत मांगी ताकि मैं मौका देखकर नितिन से बात करुँगी। साथ ही पूजा के साथ फिर रेगुलर टच में रहना था।

अगली बार जब मैं अपनी सास के घर गयी तो मैं पूजा से भी मिली। वो अभी भी स्वीमिंग के लिए जाती थी। इसी की वजह से वो एकदम फिट थी। पर कूल्हे मटकाती वो अभी भी चल रही थी और उसे देख मैं खुद शरमा रही थी कि इसने मेरे पति को ही नहीं, कितने और मर्दो को दीवाना बना रखा होगा।

मैंने पूजा को बोल दिया कि अब मैं भी फिर से स्वीमिंग चालू करुँगी और हम साथ में करेंगे। हम दोनों अब रोज शाम को क्लब में स्वीमिंग पूल पर मिलते.

नितिन रोज पूजा को लेने आता और मुझे चोरी चुपके जरूर देखता। मुझे बिकिनी में देखने के चक्कर में वो पूजा को लेने थोड़ा जल्दी ही आ जाता। झूठ बोलकर जो उसने मुझे चोदा था, उसकी गलती उसकी आँखों में थी।
 
अगली बार जब मैं अपनी सास के घर गयी तो मैं पूजा से भी मिली। वो अभी भी स्वीमिंग के लिए जाती थी। इसी की वजह से वो एकदम फिट थी। पर कूल्हे मटकाती वो अभी भी चल रही थी और उसे देख मैं खुद शरमा रही थी कि इसने मेरे पति को ही नहीं, कितने और मर्दो को दीवाना बना रखा होगा।

मैंने पूजा को बोल दिया कि अब मैं भी फिर से स्वीमिंग चालू करुँगी और हम साथ में करेंगे। हम दोनों अब रोज शाम को क्लब में स्वीमिंग पूल पर मिलते.

नितिन रोज पूजा को लेने आता और मुझे चोरी चुपके जरूर देखता। मुझे बिकिनी में देखने के चक्कर में वो पूजा को लेने थोड़ा जल्दी ही आ जाता। झूठ बोलकर जो उसने मुझे चोदा था, उसकी गलती उसकी आँखों में थी।

अशोक इस बीच रोज परेशान करता रहा कि मैं कब नितिन पूजा से बात करुँगी पर मैं उसको सही समय का इन्तेजार करने को बोलती रही। इस बीच पूजा से मेरी दोस्ती फिर गहरी होती रही और अब मैं उस से सेक्स लाइफ के बारे में भी मजाक मजाक में पूछ ही लेती थी ।

फिर पता चला कि पूजा और नितिन की शादी की सालगिरह आने वाली हैं और वो दोनों हमेशा की तरह मनाने वाले हैं। मुझे लगा शायद यही मौका हैं जब हम दोनों कपल करीब आ सकते हैं।

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नितिन कपल एक्सचेंज के लिए मान चूका था और अब पूजा को मनाने के लिए एक अच्छे अवसर की प्रतीक्षा थी । फिर पता चला कि पूजा और नितिन की शादी की साल गिरह आनी वाली और मैंने अपना प्लान बनाया।

अगले दिन मै स्वीमिंग के लिए 15 मिनट्स जल्दी चली गयी। पूजा अपने रेगुलर टाइम पर आयी। मैं उसके स्वीमिंग पूल से बाहर निकलने के 15 मिनट्स पहले ही बाहर आ गयी और कपडे पहन लिए।

नितिन अपनी आदत के अनुसार मुझे बिकिनी में देखने के लिए जल्दि आया और मैंने उसको अकेले में पकड़ ही लिया। वो मुझे पूरे कपड़ो में देख थोड़ा निराश हुआ।

मैं: “नितिन, मुझे तुमसे बात करनी थी”

नितिन: ” आई एम सॉरी, होली वाले दिन के लिए”

मैं:”तो तुमने मुझे झूठ बोला था?”

नितिन: “मुझे नहीं पता, मुझे बस उन दोनों पर शक था जो मैंने तुम्हे बता दिया था”

मैं:”मेरे हिसाब से उन दोनों के बीच कुछ नहीं हैं। पर अब अगर वो करना चाहे तो तुम क्या करोगे?”

नितिन: “पिछली बार मुझे शक था तो मैंने तुम्हारे साथ वो सब कर दिया। तुम्हे भी उनसे बदला लेना हो तो मैं तैयार हूँ फिर से करने को”

मैं:”छुप छुप कर क्या करना ! अगर वो दोनों एक दूसरे के साथ कर रहे हैं तो हम भी खुल कर उनसे बात कर लेते हैं कि हम दोनों भी करेंगे। शायद फिर उनकी अकल ठिकाने आ जाए और ये सब बंद कर दे”

नितिन: “मुझे चलेगा, उनको करना हैं तो करे। मुझे तुम्हारे साथ करने को मिलेगा तो मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं”

मैं: “तो तो फिर तुम पूजा से बात कर लो। मना लो उसको अगर वो अदला बदली के लिए तैयार हैं। उसका सच में अशोक के साथ कुछ चक्कर हैं तो तुम्हे भी पता चल जाएगा”

नितिन: “उसको पूछने की हिम्मत होती तो बहुत पहले ही पूछ चूका होता जब मुझे उस पर शक था। तुम उसके घर वालो को नहीं जानती, बहुत खतरनाक हैं। तुम ही बात करो, मेरी मंजूरी हैं”

अशोक और नितिन दोनों ही बीवियों की इस अदला बदली के लिए तैयार थे पर दोनों मर्दो में हिम्मत नहीं थी कि वो पूजा से इस बारे में बात कर सके। सारा जिम्मा अब मुझ पर था जब कि इस अदला बदली में मेरी कोई रूचि नहीं थी। मेरा सिर्फ इतना मकसद था कि पति पर एक अहसान कर दू ताकि आगे कभी अपना काम निकलवा सकू।

मैं: “पूजा ने बताया कि तुम्हारी शादी की सालगिरह आने वाली हैं। तुम अपनी पार्टी में सिर्फ हम चारो को रखना, उसी दिन मैं पूजा को मना लुंगी और हम यह अदला बदली कर लेंगे”

मैंने अब नितिन से विदा ली और घर आकर अशोक को बताया कि मैंने नितिन को मना लिया हैं। अशोक खुश हुआ कि उसका आधा काम हो चूका हैं।

मैंने अशोक को बोल दिया कि अब वो नितिन के साथ मिलकर थोड़ा प्लान कर ले। उसकी सालगिरह मनाते समय ही हम वो अदला बदली करने वाले थे। अगले दिन ही स्वीमिंग क्लब में पूजा ने मुझसे बात की।

पूजा: “प्रतिमा, मेरी शादी की सालगिरह की पार्टी में तुम आ सकती हो क्या?”

मैं:: “मैं आकर क्या करुँगी? तुम दोनों मियां बीवी मजे करो, मैं कबाब में हड्डी क्या करुँगी!”

पूजा: “हर साल हम दोनों अकेले ही मनाते हैं। नितिन बता रहा था कि इसी दिन तुम और अशोक भी पहली बार मिले थे और तुम लोग भी इस दिन को मनाते हो। तो फिर हम लोग साथ मिलकर पार्टी करते हैं। एक से भले दो कपल हो जायेंगे”

नितिन ने यह एक झूठ बोल कर पूजा को हमारे साथ पार्टी करने को मना लिया था।

मैं: “हां, हम लोग भी यह दिन मनाते हैं। पर हमारी वजह से तुम लोगो को कोई परेशानी तो नहीं होगी ना?”

पूजा: “अरे नहीं, ज्यादा मजा आएगा। मैं नितिन को बोल दूंगी, हम मिलकर प्लान कर लेंगे कैसे पार्टी करनी हैं”
 
उसके बाद अशोक और नितिन ने मिलकर पूरा प्लान बना दिया और मुझे भी बता दिया। उन लोगो ने होटल में एक कमरा बूक कर दिया था जहा हम अदला बदली कर चोदने वाले थे।

उसके पहले डिनर और डांस का कार्यक्रम था। इसके लिए उन्होंने एक प्राइवेट जगह बूक की थी जहा हमारे चारो के अलावा कोई नहीं होगा। इसी जगह इस दौरान मुझे पूजा को मनाना था और फिर हम होटल के कमरे में जाकर मजे करने वाले थे। मुझे आशा थी कि मैं पूजा को मना ही लुंगी।

पूजा अपनी सालगिरह को लेकर बहुत उत्साहित थी और नितिन के लिए वो क्या गिफ्ट ले उसके लिए मुझसे पूछ रही थी। उस बेचारी को क्या पता था कि सालगिरह के ही दिन उसको किसी गैर मर्द के साथ चुदवाना पड़ेगा।

इन कुछ दिनों में मैंने पूजा की सेक्स लाइफ के बारे में भी जानने की कोशिश की और उसने भी मेरी सेक्स लाइफ में जानने की रूचि दिखाई। वो जितना पूछती मैं उसको कुछ ज्यादा ही बता कर उसका मूड बनाती जा रही थी ताकि वो अशोक की तरफ आकर्षित हो।

आखिर वो दिन भी आया। मैंने एक अच्छी से सेक्सी ड्रेस पहनी और अशोक भी अपनी चाहत पूजा को लुभाने के लिए कोट पहन कर अच्छे से तैयार था।

अशोक इतना उतावला था कि वो ठीक समय पर मुझे लेकर होटल पहुंच गया। कुछ ही देर में पूजा और नितिन भी आ गए थे। चमकीली शरीर दिखाऊ साड़ी में मेकअप से लिपटी पूजा क़यामत ढा रही थी।

लाल लिपस्टिक में रंगे उसके होंठो के बीच उसकी चौड़ी मुस्कान से दीखते दांत चमक रहे थे और गाल भी रौशनी पड़ते ही दमक रहे थे। पूजा ने सिर पर बालो का जुड़ा बना रखा था और उसके चेहरे के दोनों तरफ एक एक लम्बी घुंघराली जुल्फे निकली हुयी थी। ऐसा लगा जैसे उसकी आज शादी की सालगिरह नहीं बल्कि सुहागरात हैं।

अशोक की हालत मैं देख सकती थी। मुझे डर था कि कही अशोक का पानी उसकी पैंट में ही ना छूट जाए। वो आज आखिर पूजा को चोद पायेगा यह सोच कर ही वो जैसे हवा में उड़ रहा था।

हम चारो उस निजी कक्ष में थे जहा एक टेबल और चार कुर्सियां रखी थी। रोमांटिक संगीत बज रहा था और हलकी मध्यम रौशनी थी। वेटर बीच बीच में आकर खाने पीने का सामान ला रहा था जो हमने आर्डर किया था।

थोड़ी देर बैठने के बाद सॉफ्ट ड्रिंक लेने के बाद अशोक बोलने लगा कि डांस करना चाहिए। उसकी इच्छा थी कि वो पूजा के साथ डांस करे पर सीधा बोलना मुश्किल था।

नितीन ने भी साथ दिया कि डांस करना चाहिये, पर पूजा तैयार नहीं थी। मैंने उसको उत्साहित किया कि थोड़ा डांस तो करना चाहिये। फिर वो मान गयी।

उस हल्की रोशनी में रोमांटिक संगीत के बीच नितीन और पूजा डांस करने लगे। उनके पास ही मै और अशोक डांस कर रहे थे। अशोक की नजरे बराबर साड़ी में लिपटी पूजा की गांड पर थी।

अशोक तो मरे जा रहा था पूजा के साथ डांस करने के लिए ताकि उसके बदन को छू पाये। ऊधर नितीन का भी अशोक वाला ही हाल था।

उसकी बाहों में इतनी खुबसूरत बीवी थी पर वो मुझे देख तड़प रहा था।

पूजा इस बीच पूरा स्माईल करते हुए चहक रही थी। अब मुझे ही कुछ करना था। मैंने अशोक के साथ डांस करना छोड़ा और हम दोनो नितीन और पूजा के पास पहुचे. नितीन ने हमें देख पूजा के साथ डांस करना छोड़ा.

पूजा और नितीन खड़े खड़े ही हल्का हिलते हुए अकेले डांस कर रहे थे। मैंने नितीन को देखा और अपना हाथ आगे बढाया और उसने पूजा से अलग होकर मेरा हाथ पकड़ा और डांस करने लगा।

पूजा डांस करते रुक गयी थी और मुझे नितीन के साथ डांस करते देखने लगी। पूजा के चेहरे पर अभी भी एक स्माईल थी। दुसरी तरफ अशोक कोशिश कर रहा था कि वो पूजा का हाथ पकड़ पाये।

अशोक ने अब अपना हाथ आगे कर पूजा की तरफ बढाया. पूजा की आंखे हिरणी की तरह और बड़ी हो गयी और एक हल्की नर्वस भरी स्माईल के साथ वो मुझे और नितीन को देखने लगी।

मै और नितीन स्माईल करते बराबर उन दोनो की तरफ देख डांस में लगे हुए थे और अशोक का हाथ अभी भी पूजा की तरफ आगे बढा हुआ था।

मैने पूजा को इशारा किया कि वो डांस करे। उसके चेहरे पर अभी भी एक हल्की स्माईल थी पर उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था। नितीन ने भी पूजा को इशारा किया कि वो डांस कर ले।

पूजा ने थोड़ी झिझक के साथ अपना हाथ अशोक के हाथ में दे दिया। फिर अशोक नहीं रुका और उसने पूजा को हल्का सा अपने बाहों में ले लिया और उसकी कमर को एक हाथ लपेट दुसरा हाथ उसके हाथ में रखा।
 
मैने पूजा को इशारा किया कि वो डांस करे। उसके चेहरे पर अभी भी एक हल्की स्माईल थी पर उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था। नितीन ने भी पूजा को इशारा किया कि वो डांस कर ले।

पूजा ने थोड़ी झिझक के साथ अपना हाथ अशोक के हाथ में दे दिया। फिर अशोक नहीं रुका और उसने पूजा को हल्का सा अपने बाहों में ले लिया और उसकी कमर को एक हाथ लपेट दुसरा हाथ उसके हाथ में रखा।

वो दोनो अब डांस करने लगे थे और इधर नितीन मेरी कमर पकड़े डांस कर रहा था। नितीन को डांस करना बिल्कुल नहीं आता वो मुझे जल्दी ही पता चल गया।

वो डांस कम कर रहा था और मुझसे टकरा ज्यादा रहा था। जिसकी वजह से मेरी हंसी ज्यादा निकल रही थी। पूजा का भी ध्यान मेरी तरफ था कि जिस तरह मै हस रही थी।

मुझे देख उसकी भी हंसी निकल रही थी। मै नितीन के साथ डांस करते उसको सीखा भी रही थी उसको मुव कैसे करना हैं। दुसरी तरफ अशोक ने पूजा को अच्छे से नियंत्रित करते हुए उसके साथ प्रोपर डांस करना शुरु कर दिया था।

वो दोनो अब काफी करीब आकर सीरियस डांस करने लगे थे। अशोक कभी पूजा को अपनी एक बांह में तो कभी दुसरी बांह में झूलाते हुए डांस कर रहा था। फिर एक समय वो भी आया जब अशोक ने पिछे से हाथ आगे लाकर पूजा के पतले पेट को नाभी के ऊपर से दोनो हाथों से पकड़ लिया और पूजा का पिछवाड़ा जाकर अशोक के आगे के अंगो से छू गया।

उस वक्त अशोक की हालत खराब हो गयी। वो मुंह फाड़े आहें भरता आंखे बंद किए ऊपर छत की तरफ देख रहा था। पक्का उस वक्त उसका थोड़ा पानी लंड से छूट गया होगा।

मगर 2-3 सेकण्ड बाद ही पूजा घुमते हुए फिर दूर हुयी और अशोक के सामने आ गयी थी। दोनो बाहों में बाहें ड़ाले काफी देर डांस करते रहे और भूल ही गए कि हम एक दूसरे के पार्टनर के साथ ज्यादा डांस कर रहे थे और खुद के पार्टनर के साथ बहुत कम देर डांस किया था।

यहीं मेरी जीत थी, मेरा प्लान काम कर रहा था। पूजा अब अशोक के साथ कम्फर्टेबल हो चुकी थी। वो अब इतना चिपक कर डांस कर रहे थे कि पूजा के मम्मे रह रह कर अशोक के सीने को छू कर पूरी तरह दब रहे थे, पर पूजा फिर भी एक स्माईल के साथ डांस कर रही थी।

पूजा इतना खुलकर डांस इसलिए भी कर रही थी कि उसका खुद का पति नितीन मेरे साथ काफी आराम से डांस कर रहा था। कभी वो अपना लंड मेरी गांड से चिपकाए थोड़ा रगड़ देता तो कभी आगे से मेरी चूत का भाग अपने लंड से चिपका देता.

कभी मेरे पेट तो कभी सीने के ऊपर अपना एक हाथ लपेट मुझे झकड़ लेटा। डांस के दौरान 2-3 बार नितीन मुझे अपनी गोद में उठाए घुमा चुका था।

मैने इस बीच अपनी हंसी बरकरार रख माहौल का नार्मल रखा था जिसकी वजह से बाकी के लोगो को भी कोई दिक्कत नहीं हुई और वो भी स्माईल के साथ नाचते रहे.

फिर एक ऐसा पल भी आया जब मै और पूजा एक दूसरे के सामने खड़े थे और हम दोनो को पिछे से चिपके खड़े थे एक दूसरे के पति.

दोनो मर्दो का हाथ लड़कियो के पेट पर था और दुसरा हाथ लड़कियो के दोनो कंधो को सामने से टच करते हुए सीने पर लगा हुआ था।

हम चारो दायें बायें संगीत के साथ हिल रहे थे और दोनो लड़कियो की गांड को दोनो मर्द अपने लंड से रगड़ रहे थे। जल्द ही नितीन ने अपने होंठ मेरे गरदन और कंधे के बीच के नंगे भाग पर रख दिए और होंठ रगड़ने लगा।

ये देख पूजा की हंसी थोड़ी कम हो गयी। उसी वक्त अशोक ने भी यहीं किया और अपने होंठ पूजा के कंधो और गरदन के बीच हल्के से रगड़ने लगा।

पूजा की पूरी हंसी गायब हो गयी। मैंने ये देखकर थोड़ा स्माईल करना शुरु किया. ताकि पूजा थोड़ा नार्मल हो जाऐ। पर उसको हंसी नहीं आयी।

पूजा के होंठ थोड़ा खुल गए थे, और उसने छत की तरफ देखकर अपना मुंह खुला ही रखते हुए अपने शरीर को दायें बायें रगड़ना जारी रखा।

हम सब को लग गया कि अब पूजा तैयार हैं अदला बदली के लिए. फिर अशोक ने पूजा के पेट और सीने को और भी टाइट झकड़ कर लगभग उसके पिछवाड़े पर एक धक्का सा मार दिया।

मै भी समझ सकती थी कि अशोक के लिए इतनी देर रोक पाना कितना मुश्किल रहा होगा। क्युँ कि नितीन खुद मुझे कितनी बार अपने लंड से मेरी गांड पर झटके मार चुका था।

पूजा ने जैसे ही अपनी गांड पर अशोक के लंड का झटका खाया उसकी जैसे नींद उड़ गयी। वो तुरंत अशोक से दूर हुयी. उसका चेहरा गंभीर था।

वो टेबल की तरफ बढ़ी। यह देख मैंने भी नितीन को दूर किया और अब हम चारो टेबल पर आकर बैठ गए. हम तीनो ने पूजा को खुश करने की कोशिश की।

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डांस के बहाने पूजा और अशोक एक दूसरे के करीब आये। फिर जैसा सोचा था वो ही हुआ और पूजा डांस करते थोड़ा बहक गयी पर फिर संभल भी गयी थी। अब हम उसका हाल जानने लगे।

नितीन: “क्या हुआ पूजा, डांस करते थक गयी क्या?”

पूजा: “हां, अब खाना खा लेते हैं, फिर घर चलते हैं”

नितीन: “इतनी जल्दी क्या हैं? थोड़ा और डांस करते हैं ना”

मैं: “चलो पूजा, तुम्हे डांस करने में मजा नहीं आया?”

पूजा: “मजा आया पर अब भूख लग रही हैं, खाना खा लेते हैं”

फिर हम लोगो ने खाना मंगवा लिया। खाना खाते वक्त लगातार पूजा गंभीरता के साथ बीच बीच में अशोक को देख रही थी। मै दो-तीन बार उसको आंख से इशारा कर जैसे पुछा कि क्या हुआ पर वो गरदन हिला कर ना बोल देती कि कुछ नहीं हुआ।

अशोक, नितीन और मै हल्की फुलकी बातों के साथ माहौल को खुश रख रहे थे और पूजा हमारी बात सुन थोड़ा मुस्कुरा भी देती, पर फिर गंभीर हो जाती।

खाना खाने के बाद वेटर को बुलाकर केक मंगवाया गया। नितीन और पूजा ने केक काटा और एक दूसरे को खिलाया और फिर हमें भी.

मैने भी केक की फ्रॉस्ट क्रीम में अपनी ऊँगली भरी और नितीन की तरफ बढा दी. उसने मेरी ऊँगली को अपने मुंह में लेकर अच्छे से चूसना शुरु कर दिया।
 
पूजा देखते ही रह गयी कि मै इतना खुल क्युँ हो रही हूँ, या माहौल ही ऐसा था। तब तक अशोक ने भी अपनी ऊँगली को पूरी तरह फ्रॉस्ट क्रीम में लपेट दिया। उसने अपनी ऊँगली पूजा की तरफ बढ़ाई और पूजा थोड़ा पीछे हटी.

तब तक नितीन ने भी अपनी ऊँगली फ्रॉस्ट क्रीम में भर कर मेरी तरफ बढ़ाई और मैंने मजे लेते हुए उसकी ऊँगली को अच्छे से चाट कर साफ़ कर दिया।

अशोक भी अपनी ऊँगली जबरदस्ती पूजा के होंठो पर ले आया। पूजा को मुंह खोलना ही पड़ा और अशोक ने अपनी ऊँगली को पूजा के मुंह में उतार दिया और उसको चाटने को बोला.

पूजा शुरु में थोड़ा सकपकाई पर फिर मुझे नितीन की ऊँगली चाटटे देख उसने भी अशोक की ऊँगली को अपने मुंह में रख चाटटे हुए साफ़ कर दिया।

नितीन: “पूजा, तुम भी अशोक अपनी सफ़ेद क्रीम टेस्ट कराओ।”

यह सुन पूजा तो एकदम खामोश हो गयी और चेहरा उतर गया कि नितीन ने क्या बोल दिया।

नितीन: “केक की क्रीम की बात कर रहा हूँ, तुम क्या समझ गयी!”

पूजा बुरी तरह शर्मा गयी और नितीन के कंधो पर एक हाथ मारा और एक थोड़ा मुंह बनाते हुए शर्मीली स्माईल बिखेर दी।

पूजा ने भी अब अपनी ऊँगली क्रीम में भरी और अशोक के होंठो की तरफ बढा दिया। अशोक अब पूजा की ऊँगली को अच्छे से चाटने लगा और पूजा भी शर्माते हुए खिलखिला रही थी।

हम खिलखिलाते हुए हमारी बॉन्डिंग को मजबूत कर रहे थे और जो हो रहा था वो सामान्य हैं यह साबित कर रहे थे। हम लोगो ने फिर बैठ कर केक खा लिया और बीच बीच में एक दूसरे को भी खिलाते रहे।

केक खाने के बाद हम केक पर थोड़ा चर्चा करते रहे कि हमने किस मजे से एक दूसरे को केक खिलाया. इसके बाद मै पूजा के साथ हाथ साफ करने को वाशरूम में गयी और वहीं उसके दिल का हाल जानना चाहा.

मैं: “क्या हुआ, तुम काफी समय से सीरियस क्युँ हो? आयी थी तब तो काफी खुश थी। कोई बात परेशान कर रही हैं?”

पूजा: “नहीं मै खुश हूँ, कोई बात नहीं हैं”

यह बोल कर वो नकली हंसी अपने चेहरे पर ले आयी।

मैं: “नहीं कोई तो बात हैं जो तुम्हे परेशान कर रही हैं। तुम मुझे बता सकती हो. बोलो, खुल कर बात करो, मै तुम्हारी सहेली हूँ ना?”

पूजा: “तुम्हे कुछ अजीब नहीं लगा, जिसकी तरह वो दोनो डांस कर रहे थे। तुम बुरा मत मानना पर मुझे लगा कि अशोक मेरे कुछ ज्यादा ही करीब था”

मैं: “तुम भी क्या छोटी छोटी चीजे सोच रही हो. रोमांटिक गाना चल रहा हैं, तो कोई दूर रहकर थोड़े ही डांस करेगा. लड़की के पास आकर तो डांस करना ही पड़ेगा ना”

पूजा: “तुम्हे बुरा नहीं लगा! मुझे लगा नितीन भी तुम्हारे साथ कुछ ज्यादा ही खुल रहा था”

मैं: “मुझे तो कुछ अजीब नहीं लगा। सब नार्मल था। अशोक भी मेरे साथ ऐसे ही डांस करता हैं”

पूजा: “पता नहीं, मुझे बहुत गलत लगा”

मैं: “तुम भी ना, क्या क्या सोच लेती हो. अगर नितीन मेरे साथ कुछ गलत कर रहा होता तो अशोक उसको रोक नहीं देता. इसी तरह तुम्हारे साथ अशोक गलत करता तो नितीन रोक देता. तुम्हे क्या महसूस हुआ डांस करते वक्त?”

पूजा: “पता नहीं, मै बता नहीं सकती उस वक्त क्या क्या चल रहा था मेरे दिमाग में”

मैं: “मुझे लगता हैं तुम्हे अशोक के साथ डांस करना अच्छा लगा। मुझे पता हैं नितीन को डांस करना नहीं आता, शायद इस वजह से तुम्हे

अशोक के साथ डांस करना अच्छा लगा हो. एक काम करते हैं फिर से डांस करते हैं, तुम्हे पता लग जायेगा”

पूजा: “नहीं नहीं, मै तो वैसे ही घबराई हूँ पिछले डांस से ”

मैं: “इसमें घबराने की क्या बात हैं। अशोक के साथ डांस करना अच्छा लगा तो अच्छा लगा, इसमें छुपाने की क्या बात हैं। नितीन थोड़े ही बुरा

मानेगा. उसको तो अच्छा लगेगा कि सालगिरह के दिन उसकी बीवी खुश होगी. चलो बाहर तुम्हारा अशोक के साथ डांस करवाते हैं और तुम्हारा डर भगाते हैं”

पूजा: “नहीं प्लीज प्रतिमा, ऐसा मत करो. मेरे तो हाथ पैर वैसे ही कांप रहे हैं। मुझे नहीं करना ये सब”

मैं: “नर्वस होना तो और भी अच्छी निशानी हैं। चलो, शर्माओ मत. मेरी गारंटी हैं नितीन कुछ नहीं बोलेगा. बस तुम अपना मन बना लो. तुम्हे अशोक के साथ डांस करना हैं ना?”

पूजा: “पता नहीं, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा हैं। मुझे कुछ नहीं करना, हम घर चलते हैं”

मैं: “मुझे ऐसा क्युँ लगता हैं कि डांस करते हुए तुम उत्तेजित हो गयी थी। तुम्हारी अंदर की वासनाऐं भड़क गयी थी। अब उसी आग को शांत करने के लिए तुम नितीन को जल्दी से घर ले जाना चाहती हो”

पूजा: “ऐसा कुछ नहीं हैं, वो सिर्फ एक डांस था। और मेरी कोई वासनाऐं नहीं भड़की. मुझे घर जाने की कोई जल्दी नहीं हैं”
 
पूजा: “ऐसा कुछ नहीं हैं, वो सिर्फ एक डांस था। और मेरी कोई वासनाऐं नहीं भड़की. मुझे घर जाने की कोई जल्दी नहीं हैं”

मैं: “तो फिर तुम्हारी सालगिरह की पार्टी एन्जॉय करो ना. एक राऊंड डांस का हो जाए. मै भी देखती हूँ तुम्हारी वासनाऐं भड़कती हैं या काबू में रहती हैं”

पूजा: “प्लीज ऐसा मत करो प्रतिमा”

मैं: “मतलब तुम मानती हो, तुम्हारी वासनाऐं भड़की थी। इसमें छुपाने की क्या बात हैं। भड़क गयी तो भड़क गयी, इसमें क्या हैं!”

पूजा: “कोई वासना नहीं भड़की”

मैं: “तो फिर डांस करने से क्युँ डर रही हो? तुम्हारी सच्चाई बाहर आ जाएगी, यहीं ना?”

पूजा: “मै डर नहीं रही. मेरी डांस करने की इच्छा नहीं बस. घर नहीं जाना तो कोई बात नहीं, थोड़ी देर बात कर लेते हैं, चलो बाहर”

अब हम दोनो वापिस प्राइवेट रूम में आये और टेबल पर बैठ गए. नितीन और अशोक वहीं थे और जैसे आँखों से इशारा कर पूछ रहे थे कि काम हुआ कि नहीं।

मैने भी आँखों के इशारे से उनको थोड़ा इंतजार करने को कहा. वो दोनो अब रोमांटिक किस्से सुना माहौल नार्मल करने लगे। पूजा भी अब थोड़ा नार्मल हो एन्जॉय कर रही थी। मुझे अब आगे का काम करना था।

मैं: “अशोक ये पूजा तुम्हारे डांस की बहुत तारीफ कर रही थी। ”

पूजा मेरी शक्ल देखने लगी। वो मेरे पास ही बैठी थी तो टेबल के नीचे से ही हाथ मेरी जांघ पर रख दबा दी. मैंने भी उसके कंधे पर हाथ रख दिया।

मैं: “पूजा बोल रही थी कि एक राऊंड और डांस का हो जाए तो मजा आ जाऐ”

पूजा: “मैने कब कहा! ये प्रतिमा की ही इच्छा हैं और मेरा नाम ले रही हैं”

मैं: “अच्छा मेरी इच्छा हैं, अब तो डांस करोगी? चलो ऊठो, आ जाओ मैदान में”

मै अब उठ खड़ी हुयी और मुझसे पहले नितीन और अशोक तैयार थे। मै पूजा को उठाने लगी, वो अपनी जगह से हिली नहीं और सिर्फ मुस्कुराते हुए मना करती रही.

पूजा: “तुम लोगो को डांस करना हैं तो करो, मुझे नहीं करना”

मैं: “इतना क्या शर्मा रही हो? अशोक तुम्हे खा नहीं जायेगा. नितीन तुम्हे कोई आपत्ति हैं कि पूजा अशोक के साथ डांस करे?”

नितीन: “इसमें पुछने की क्या जरुरत हैं! डांस ही तो हैं”

मैं: “चलो पूजा, अब तो नितीन ने भी बोल दिया हैं”

पूजा: “तुम्हे करना हैं तो करो, मै देख रही हूँ”

मैं: “हम यहाँ कोई तमाशा थोड़े ही कर रहे हैं जो तुम बैठ कर देखोगी”

पूजा: “वैसे नहीं देखूंगी. मै तुम्हे देख सीखूंगी फिर वो स्टेप मै कर लुंगी, मुझे तुम्हारी तरह डांस नहीं आता”

मैं: “ठीक हैं। मै नितीन के साथ स्टेप करके बताती हूँ, फिर तुम भी करना”

मै अब नितीन को लेकर टेबल से दूर आयी और उसके साथ डांस करना शुरू किया. मै उसको स्टेप बताती जा रही थी कि उसको मुझे कैसे लिफ्ट करना हैं।

मेरे बताये अनुसार नितीन अब मुझे अलग अलग पोज़ में लिफ्ट कर रहा था और इस बहाने उसे मेरे शरीर के अलग अलग हिस्सों को पकड़ने का मौका मिल रहा था।

कभी वो मेरी जांघो को पकड़ मेरा पाँव थोड़ा उठा लेटा तो कभी मेरी गांड के नीचे से पकड़ ऊपर उठा लेटा। कभी मेरी पीठ पकड़ मेरा वजन अपने हाथ पर लेता।

पूजा और अशोक वो सब ख़ुशी ख़ुशी देख रहे थे। कभी मै नितीन की एक बांह में झूलते पूरा पिछे झुक जाती तो वो मेरे सीने पर होंठ रख पोज़ बनाता।

कभी वो मेरे पिछवाड़े से चिपक रगड़ देता तो कभी सीने को रगड़ते हुए मुझे लिफ्ट करता. मुझे जितने हॉट स्टेप्स आते थे मैंने नितीन के साथ वो सब कर लिए थे और इस बीच नितीन का लंड कड़क हो कर बार मुझे चूभता रहा।
 
मेरी नजरे बार बार पूजा और अशोक पर भी थी। वो हॉट डांस देख कर वो दोनो भी हिल चुके थे जो उनकी शक्ल बता रही थी। मुझे लग गया कि मेरे और नितीन की तरह वो दोनो भी अब गरम हो चुके हैं।

मै और नितीन अब आकर बैठ गए।

मैं: “चलो पूजा अब तुम्हारी बारी हैं”

पूजा अब नितीन को देखने लगी, जैसे उसकी अनुमति ले रही हो।

नितीन: “अब जाओ भी, इतना क्या सोच रही हो”

पूजा को एक बार फिर हमने अशोक के साथ डांस करने को भेजा,

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मैंने नितिन के साथ डांस कर पूजा को अहसास कि वो भी अशोक के साथ खुल कर डांस कर सकती हैं। अब बारी पूजा की थी अशोक के साथ हॉट डांस करने की करने की ।

पूजा तुरंत उठ गयी और अशोक उसका हाथ पकड़े उसको डांस के लिए खुली जगह ले आया। पहली ही स्टेप में अशोक ने पूजा के एक घुटने के पीछे थोड़ा ऊपर जांघो से पकड़ा और उसकी टांग मोड़ते हुए अपनी अपनी कमर से चिपका दिया। जिसकी से पूजा की चूत का हिस्सा अशोक के लंड के हिस्से टकरा गया।

फिर अशोक ने पूजा के ब्लाउज से झांकती उसकी नंगी पीठ को पकड़ अपनी तरफ खिंच कर पूजा की छाती का उभार अपने सीने से दबा लिया और अपना चेहरा पूजा के चेहरे के एकदम करीब ले आया जहा दोनो के होंठ सिर्फ एक इंच दूरी पर थे.

पूजा के होंठ एक बार तो चूमने के लिए जैसे खुल गए पर अशोक ने उसको फिर अपने से दूर कर खड़ा किया और डांस की दुसरी स्टेप की तरफ बढा.

पूजा अब अशोक के हाथ की कठपुतली बन चुकी थी। अशोक ने अब पूजा के शरीर को मनचाहे तरीके से कभी इधर ऊधर तो कभी हाथ पैर फैलाते हुए कभी अपने से चिपका दिया तो कभी हवा में उठा दिया।

अशोक ने पूजा की कमर को दबाते हुए उसको पिछे की तरफ झुका दिया और उसके गले में अपने होंठ चिपका कर होंठो को रगड़ते हुए उसके सीने तक ले आया जहा ब्लाउज बंधा था।

फिर पूजा को सीधा खड़ा करते हुए ब्लाउज के ऊपर ही चूमते हुए दोनो मम्मो के बीच से अपने होंठ चूमते हुए पूजा के पेट पर अपने होंठ रख उसकी नाभी को गीला कर दिया।

पूजा अब पूरी तरह उस नशे में डुब चुकी थी। वो गंभीरता से अपने शरीर पर अशोक के हाथ और होंठो की छुअन को एन्जॉय करने लगी थी।

जब जब अशोक के होंठ पूजा के नंगे बदन के हिस्से को छुते तो पूजा की एक आह से निकल जाती और उसके होंठ खुले के खुले रह जाते.

डांस करते हुए एक वक्त ऐसा आया जब पूजा और अशोक एक दूजे के सामने बाहों में लिपटे थे और दायें बायें हिल रहे थे.

अनायास ही पूजा ने अशोक की आँखों में झांकते हुए अपने होंठ खुद ही अशोक के होंठो के पास ले आयी। उस हल्की रोशनी में पूजा की लिपस्टिक में चमकते होंठ अशोक के होंठ को हल्का सा छू गए.

एक चिंगारी सी सूलग उठी और एक सेकण्ड में ही दोनो के होंठ जब एक दूसरे से दूर हुए तो एक लार की डोरी से बंध गए थे जैसे किसी गौंद से चिपक गए हो ऐसा लगा।

पूजा तुरंत अशोक से दूर होने लगी और पलट गयी पर अशोक ने उसको उसके पेट से पकड़ लिया और एक बार फिर उसके नंगे कंधे पर अपने होंठ रख चुम लिया।

पूजा अब सिर और पलके झुकाये आहें भरने लगी थी। कंधे को चूमते अशोक के होंठ अब गले की तरफ बढे और वहां चूमने लगे और फिर कानो के पीछे.

ये देखकर मेरी खुद की कुर्सी की सीट नीचे से गरम हो गयी थी। पूजा भी नशे में डुब चुकी थी और आंखे बंद हो चुकी थी।

पूजा के कानो के पीछे चूमते हुए अशोक ने चालाकी से पूजा के कंधे पर एक हाथ रख वो पिन निकाल जिसने पूजा की साड़ी के पल्लू को कंधे से बाँध रखा था।

एक झटके में साड़ी का चमचमाता पल्लू नीचे जा गिरा और सामने थी पूजा की छाती जो ब्लाउज के अंदर ही पूजा की तेज साँसों के साथ ऊपर नीचे हो फुल रही थी।

पूजा की सांसें अब और तेज हो गयी थी और साथ ही उसकी छाती का उभार भी तेजी से आगे पिछे हो रहा था। पूजा के ब्लाउज के हूक जैसे कभी भी टूटने वाले थे और वो ब्लाउज खुलने वाला था।
 
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