जल्द ही उसने अपने एक एक हाथ से मेरी दोनों कूल्हों की हड्डी को साइड से दबोचा और दबाने लगा। एक हलके मीठे दर्द के साथ बड़ी राहत सी मिली। थोड़े कपडे नीचे हटाने पड़े पर ये मसाज बहुत ही आनंददायक थी।
अगले कुछ मिनट तक वो ऐसे ही कूल्हे की मसाज करता रहा और बीच बीच में, मैं सुकून भरी आ ह आ ह करने लगी। उसका ओर उत्साहवर्धन हुआ और अच्छे से मसाज करता रहा।
अब वो वापिस कमर के मध्य भाग की मालिश करने लगा। हाथ फेरते हुए वो मेरे नितंब तक ले आया और शॉर्ट्स के थोड़ा अंदर भी उंगलिया मलने लगा।
वो अब अपने हाथ के बीच वाली दो उंगलियों से, वो हड्डी दबाने लगा जहा नितंबो की दरार शुरू होती हैं। उसकी उंगलिया लगभग मेरी दरार को छू रही थी।
हड्डी दबते ही हलके मीठे दर्द के साथ एक मजेदार झौंका लगा और मैंने एक गहरी आह भरी।
वह अब वही हड्डी के ऊपर दरार में ऊँगली दबाए अपना हाथ हिलाने लगा, जिसके कम्पन से एक मसाज सी महसूस हुई और मैं कहने लगी आ हा हा मजा आ गया।
थोड़ी देर इसी तरह वह मुझे उस एरिया में मसाज करता रहा और फिर वापिस कमर के मध्य भाग पर आ गया।
उसने कहा की अब वो पीठ की मसाज करेगा।
अब उसने कमर पर दोनों हाथ रख शुरू किया और हाथ रगड़ते हुए मेरे शर्ट के अंदर होते हुए पीठ तक चला गया, और ऊपर ले जाकर मेरे कंधे की हड्डी पकड़ कर दबाने लगा।
कंधे दबते ही मुझे फिर आराम मिला। उसने अब हाथ फिर खींचते हुए शर्ट के बाहर निकाल कमर तक आ गया। उसने एक बार फिर वही रिपीट किया और कंधे दबते ही मैं आ हा हा की आवाज करने लगी।
कमर पर वापिस हाथ लाने के बाद वो बोला “शर्ट के अंदर हाथ जाने से शर्ट बहुत टाइट हो जाता हैं जिससे हाथ अंदर बाहर करने में परेशानी हो रही हैं। हाथ आसानी से आये जाए इसके लिए एक काम करो, बाकी बचे बटन भी खोल ही दो। मसाज हो रही हैं तो अच्छे से हो जाए”।
इतनी अच्छी मसाज के बाद मैं मना ही नहीं कर पायी। मुझे पता था मेरे मम्मे आगे की ओर से वैसे भी नीचे दबे रहने से उसे नहीं दिखेंगे। मैंने अपना एक हाथ सर के नीचे से हटाया और अपने सीने पर ले जाकर बाकी के दोनों बटन भी खोल दिए।
मैंने अपना शरीर थोड़ा ऊपर उठाया और एक एक करके शर्ट के खुले दोनों पल्लो को शरीर के आगे से सावधानी से हटा दिया।
मेरा शर्ट अब आगे से पूरा खुल चूका था और मेरे मम्मे अब बिना कपड़ो के बिस्तर से नीचे चिपके थे। शर्ट अब काफी ढीला हो चूका था तो राज ने मसाज करना शुरू किया।
कमर से होते हुए वो अपना हाथ आराम से पीठ पर ला पा रहा था और कंधे दबा रहा था। उसके हाथ अब आराम से मेरी पीठ पर घूम पा रहे थे।
अब वो मेरे कंधे से लेकर कूल्हों तक की मसाज कर रहा था और मैं आराम से रिलैक्स अंदाज़ में दोनों हाथ सर के नीचे रख लेटी थी।
उसने मेरा शर्ट पीछे से काफी ऊपर उठा दिया था, मैंने आईने में देखा मेरे हाथ ऊपर होने से मेरे मम्मे नीचे बिस्तर से दबकर साइड से थोड़े दिख रहे हैं। मैं बड़े आराम से लेटी थी तो हाथ नीचे कर कुछ ढकने का मन भी नहीं हो रहा था।
जल्द ही मसाज करते करते उसने मेरी कमर के साइड से होते हुए अपना हाथ ऊपर लाते हुए मेरी कांख के नीचे तक लाया, जिससे उसकी उंगलिया मेरे फुले हुए मम्मे जो बाहर झांक रहे थे उनसे छू गयी।
मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, पर वो अब उसी हिस्से में ज्यादा मसाज करने लगा और इस बहाने मेरे मम्मो को छू रहा था।
उसके इरादे भांपते ही मैंने कहा “बस, अब हो गयी सारी बॉडी मसाज” । उसने अपने हाथ मेरे शरीर से हटा लिए।
राज बोला, “कोई बात नहीं, पीठ की मसाज वैसे भी ख़त्म होने ही वाली थी। मैं अब पेट की मालिश शुरू करने वाला था”।
मैंने आश्चर्य से पूछा “पेट की मालिश ! मुझे थोड़े ही कोई पेट दर्द हैं “.
उसने कहा “अरे, मेरी इतनी बात मानी, अब बस पेट ही बचा हैं, उसको क्यों छोड़ दे। मेरा यकीन मानो ये आखिरी हैं। चलो अब सीधी लेट जाओ “।
उसने जब तक मेरे मम्मे के साइड में हाथ नहीं लगाया था, तब तक वैसे भी सब सही चल रहा था, तो मैंने सोचा चलो अब एक आखिरी मालिश बची हैं तो मौका दे देते हैं।
क्यों कि मेरा शर्ट आगे से पूरा खुला था तो मैंने अपने शर्ट के दोनों पल्लो को पकड़ा और अपने शरीर के नीचे घुसाना शुरू किया, ताकि फिर से बटन लगा सकू।
उसने मुझे सँभलने का मौका भी नहीं दिया और मेरी कूल्हे की हड्डी से पकड़ मुझे करवट दे सीधा करने लगा। मैंने जल्दी से अपने दोनों हाथों से शर्ट के पल्लो को अपने सीने से चिपका अपना शरीर ढक लिया।
मैंने उससे शिकायत की कि “मुझे शर्ट के बटन तो लगाने देते”।
वो बोला “पेट की मालिश करनी हैं तो वैसे भी बटन नीचे से खुले ही रखने होंगे”।