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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

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मैंने कहना मानते हुए नाभी से ऊपर वाला बटन भी खोल दिया और उस हिस्से के शर्ट के दो पल्लो को दोनों तरफ फैलाते हुए फिर उलटा लेट गयी।

उसने अब निकले हुए शर्ट के दोनों पल्लो को पकड़ा और कमर से पीठ की तरफ ऊपर की ओर फोल्ड करने लगा।

मैंने आईने में देखा मेरी पतली, नाजुक गौरी कमर दिखने लगी थी।

वो कुछ क्षणों के लिए रुक गया और मेरी नंगी कमर को निहारने लगा।

मैंने भी सोचा किस बन्दर के हाथ में तलवार पकड़ा दी मैंने। देखने से ही इसकी हालत ख़राब हो रही हैं तो छूने पर इसका क्या होगा।

अब उसने अपने दोनों हाथ मेरी कमर के दोनों तरफ रखे, जिससे मेरी पतली कमर उसके हाथों में समा गयी और उसके इस जादुई स्पर्श से मुझे एक गुदगुदी सी हुई और पुरे शरीर में करंट सा दौड़ गया।

मैंने सोचा मेरी ये हालत हैं तो उसका क्या हुआ होगा, उसको भी करंट तो जरूर लगा होगा।

अब वो कभी कमर के साइड्स को पकड़ के दबाता तो कभी मेरी कमर के बीचो बीच मालिश करता। उसकी मालिश से मुझे भी मजा आने लगा। बहुत रिलैक्सिंग लग रहा था।

उसने मुझको पूछा कि मुझे कैसा लग रहा हैं।

मैंने कहा कि बहुत अच्छा लग रहा हैं, ऐसा लग रहा हैं कि सो जाऊ।

उसने पूछा “तुम्हारे पास कोई तेल हो तो दे दो, उससे मालिश का ज्यादा प्रभाव पड़ेगा”।

मैंने उसको टेबल की तरफ इशारा किया जहा तेल की छोटी सी शीशी थी। उसने फिर थोड़ी देर तक तेल से मेरी कमर की पूरी मालिश कर दी।

उसने आगे प्रस्ताव रखा कि “तुम कहो तो, तुम्हारे कूल्हों के साइड की हड्डी की भी मालिश कर दूँ। वहां पर जॉइंट हैं तो मसाज से बहुत अच्छा लगेगा”।

अब तक उसने जितनी भी मसाज की थी वो सब बहुत अच्छी थी, तो मुझे यकीन था ये भी अच्छा ही होगा।

मैंने कहा ठीक हैं कर दो।

उसने कहा कि शॉर्ट्स को कूल्हों की हड्डी के नीचे तक थोड़ा खींचना पड़ेगा। मैं घबराई कही ये पूरा ही न खोल दे। मैंने उसको मना बोल दिया कि कूल्हों की मसाज की जरुरत नहीं हैं अभी।

उसने आग्रह किया कि “अरे, कुछ नहीं होगा। तुम एक बहुत अच्छी मसाज मिस कर दोगी, करवा लो।”

वो मेरे शॉर्ट्स के ऊपर कूल्हों की हड्डी पर हाथ रखते हुए बोला “चलो, थोड़ा सा ही तो खिसकाना हैं, यहाँ तक”।

उसके आग्रह के आगे मैंने फिर हार मान ली और उसको बोल दिया ठीक हैं। उसने अपनी दोनों हाथों की दो दो उंगलिया मेरे शॉर्ट्स के साइड में हुक की तरह डाली और नीचे खींचने लगा।

मैंने डर के मारे जान बुझ कर वहा से अपने शरीर को बिस्तर पर दबा दिया ताकि शॉर्ट्स ज्यादा नीचे ना खिसके। इस चक्कर में शॉर्ट्स सिर्फ पीछे की तरफ से थोड़ा खिसका और उसके छोड़ते ही एलास्टिक की वजह से फिर पुरानी जगह पर आ गया।

उसने कहा कि शॉर्ट्स को चारो तरफ से एक साथ नीचे खिसकाना होगा।

उसने इस बार शॉर्ट्स को ओर भी नीचे से पकड़ा ओर अपनी उंगलिया शॉर्ट्स में डाल नीचे खिसकाना शुरू किया, मैंने अभी भी प्रेशर पूरा रिलीज़ नहीं किया था और उसने भी ज्यादा जोर नहीं लगाया तो वो हिला भी नहीं पाया।

ये देख मैंने शरीर को उस भाग से थोड़ा ऊपर उठाया और उसी वक्त उसने भी पिछली बार से ज्यादा जोर लगाया। नतीजा ये निकला कि उसने शॉर्ट्स कुछ ज्यादा ही नीचे खींच दिया और मेरे लगभग आधे नितंब से शॉर्ट्स हट गया।

मैं आईने में देख रही थी और इस हास्यादपद स्तिथि को देख कर हम दोनों की हंसी छूट गयी।

खैर उसने जल्दी से कूल्हों की हड्डी के नीचे तक फिर शॉर्ट्स को ऊपर खींच लिया।

मैंने आईने में देखा, मेरी कमर से लेकर कूल्हों तक का बदन पीछे से नंगा था। वो दृश्य बहुत ही उत्तेजक था। अब मुझे भी थोड़ा डर लगने लगा। कही मैं कोई गलती तो नहीं कर रही।

 
जल्द ही उसने अपने एक एक हाथ से मेरी दोनों कूल्हों की हड्डी को साइड से दबोचा और दबाने लगा। एक हलके मीठे दर्द के साथ बड़ी राहत सी मिली। थोड़े कपडे नीचे हटाने पड़े पर ये मसाज बहुत ही आनंददायक थी।

अगले कुछ मिनट तक वो ऐसे ही कूल्हे की मसाज करता रहा और बीच बीच में, मैं सुकून भरी आ ह आ ह करने लगी। उसका ओर उत्साहवर्धन हुआ और अच्छे से मसाज करता रहा।

अब वो वापिस कमर के मध्य भाग की मालिश करने लगा। हाथ फेरते हुए वो मेरे नितंब तक ले आया और शॉर्ट्स के थोड़ा अंदर भी उंगलिया मलने लगा।

वो अब अपने हाथ के बीच वाली दो उंगलियों से, वो हड्डी दबाने लगा जहा नितंबो की दरार शुरू होती हैं। उसकी उंगलिया लगभग मेरी दरार को छू रही थी।

हड्डी दबते ही हलके मीठे दर्द के साथ एक मजेदार झौंका लगा और मैंने एक गहरी आह भरी।

वह अब वही हड्डी के ऊपर दरार में ऊँगली दबाए अपना हाथ हिलाने लगा, जिसके कम्पन से एक मसाज सी महसूस हुई और मैं कहने लगी आ हा हा मजा आ गया।

थोड़ी देर इसी तरह वह मुझे उस एरिया में मसाज करता रहा और फिर वापिस कमर के मध्य भाग पर आ गया।

उसने कहा की अब वो पीठ की मसाज करेगा।

अब उसने कमर पर दोनों हाथ रख शुरू किया और हाथ रगड़ते हुए मेरे शर्ट के अंदर होते हुए पीठ तक चला गया, और ऊपर ले जाकर मेरे कंधे की हड्डी पकड़ कर दबाने लगा।

कंधे दबते ही मुझे फिर आराम मिला। उसने अब हाथ फिर खींचते हुए शर्ट के बाहर निकाल कमर तक आ गया। उसने एक बार फिर वही रिपीट किया और कंधे दबते ही मैं आ हा हा की आवाज करने लगी।

कमर पर वापिस हाथ लाने के बाद वो बोला “शर्ट के अंदर हाथ जाने से शर्ट बहुत टाइट हो जाता हैं जिससे हाथ अंदर बाहर करने में परेशानी हो रही हैं। हाथ आसानी से आये जाए इसके लिए एक काम करो, बाकी बचे बटन भी खोल ही दो। मसाज हो रही हैं तो अच्छे से हो जाए”।

इतनी अच्छी मसाज के बाद मैं मना ही नहीं कर पायी। मुझे पता था मेरे मम्मे आगे की ओर से वैसे भी नीचे दबे रहने से उसे नहीं दिखेंगे। मैंने अपना एक हाथ सर के नीचे से हटाया और अपने सीने पर ले जाकर बाकी के दोनों बटन भी खोल दिए।

मैंने अपना शरीर थोड़ा ऊपर उठाया और एक एक करके शर्ट के खुले दोनों पल्लो को शरीर के आगे से सावधानी से हटा दिया।

मेरा शर्ट अब आगे से पूरा खुल चूका था और मेरे मम्मे अब बिना कपड़ो के बिस्तर से नीचे चिपके थे। शर्ट अब काफी ढीला हो चूका था तो राज ने मसाज करना शुरू किया।

कमर से होते हुए वो अपना हाथ आराम से पीठ पर ला पा रहा था और कंधे दबा रहा था। उसके हाथ अब आराम से मेरी पीठ पर घूम पा रहे थे।

अब वो मेरे कंधे से लेकर कूल्हों तक की मसाज कर रहा था और मैं आराम से रिलैक्स अंदाज़ में दोनों हाथ सर के नीचे रख लेटी थी।

उसने मेरा शर्ट पीछे से काफी ऊपर उठा दिया था, मैंने आईने में देखा मेरे हाथ ऊपर होने से मेरे मम्मे नीचे बिस्तर से दबकर साइड से थोड़े दिख रहे हैं। मैं बड़े आराम से लेटी थी तो हाथ नीचे कर कुछ ढकने का मन भी नहीं हो रहा था।

जल्द ही मसाज करते करते उसने मेरी कमर के साइड से होते हुए अपना हाथ ऊपर लाते हुए मेरी कांख के नीचे तक लाया, जिससे उसकी उंगलिया मेरे फुले हुए मम्मे जो बाहर झांक रहे थे उनसे छू गयी।

मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, पर वो अब उसी हिस्से में ज्यादा मसाज करने लगा और इस बहाने मेरे मम्मो को छू रहा था।

उसके इरादे भांपते ही मैंने कहा “बस, अब हो गयी सारी बॉडी मसाज” । उसने अपने हाथ मेरे शरीर से हटा लिए।

राज बोला, “कोई बात नहीं, पीठ की मसाज वैसे भी ख़त्म होने ही वाली थी। मैं अब पेट की मालिश शुरू करने वाला था”।

मैंने आश्चर्य से पूछा “पेट की मालिश ! मुझे थोड़े ही कोई पेट दर्द हैं “.

उसने कहा “अरे, मेरी इतनी बात मानी, अब बस पेट ही बचा हैं, उसको क्यों छोड़ दे। मेरा यकीन मानो ये आखिरी हैं। चलो अब सीधी लेट जाओ “।

उसने जब तक मेरे मम्मे के साइड में हाथ नहीं लगाया था, तब तक वैसे भी सब सही चल रहा था, तो मैंने सोचा चलो अब एक आखिरी मालिश बची हैं तो मौका दे देते हैं।

क्यों कि मेरा शर्ट आगे से पूरा खुला था तो मैंने अपने शर्ट के दोनों पल्लो को पकड़ा और अपने शरीर के नीचे घुसाना शुरू किया, ताकि फिर से बटन लगा सकू।

उसने मुझे सँभलने का मौका भी नहीं दिया और मेरी कूल्हे की हड्डी से पकड़ मुझे करवट दे सीधा करने लगा। मैंने जल्दी से अपने दोनों हाथों से शर्ट के पल्लो को अपने सीने से चिपका अपना शरीर ढक लिया।

मैंने उससे शिकायत की कि “मुझे शर्ट के बटन तो लगाने देते”।

वो बोला “पेट की मालिश करनी हैं तो वैसे भी बटन नीचे से खुले ही रखने होंगे”।

 
मैं अब दोनों हाथों से अपना शर्ट पकडे सीने से लगाए लेटी थी। उसने शीशी से थोड़ा तेल मेरी नाभी पर डाल दिया। मुझे ठंडा ठंडा अहसास हुआ। उसने अब शीशी साइड में रखी और अपना एक हाथ मेरी नाभी पर रख दिया।

एक बार फिर उसके हाथ मेरे पेट पर छूते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गए। वो अब अपने हाथ की उंगलिया गोल गोल नाभी के चारो तरफ घुमाने लगा।

धीरे धीरे वो घेरा बड़ा करता रहा। मेरा शार्ट अभी भी कुल्हो की हड्डी के नीचे खिसका था, तो उसको हाथ फेरने के लिए नाभी के नीचे भी काफी जगह मिली थी। मेरा शार्ट मेरी नाभी से चार इंच या शायद उससे भी थोड़ा ज्यादा नीचे था।

मुझे शर्म भी आ रही थी और उसके हाथों की मेरे पेट पर ऊपर नीचे होती हलचल से मीठी गुदगुदी भी हो रही थी।

मेरा पेट रह रह कर फड़क रहा था और ऊपर नीचे कूदते हुए धक् धक् कर रहा था। मेरी साँसे और गहरी होती जा रही थी। इस मधुर अहसास से मैं थोड़ा बेचैन सा होने लगी।

मैंने अपना एक हाथ फ्री किया और अपने सर पर रख दिया ताकि शायद इससे मेरी भावनाये थोड़ी काबू हो जाए। दूसरे हाथ से मैंने अब अपने शर्ट के दोनों पल्ले पकड़ रखे थे।

उसकी उंगलियों की अठखेलियों से मेरा शरीर ऊपर से नीचे थोड़ा थोड़ा हिल रहा था। मेरे पाँव थोड़ा बहुत ऊपर नीचे हो बिस्तर को रगड़ रहे थे। मैंने महसूस किया मैं तड़प रही हूँ।

उस वक्त अगर वो अपना हाथ मेरे शॉर्ट्स में डाल देता, तो भी शायद मैं उसको नहीं रोक पाती। मगर मेरी बदनसीबी या खुशनसीबी उसने ऐसा कुछ नहीं किया।

वो मेरी पतली कमर और तड़पते पेट पर हाथ फेराये जा रहा था। वो अब हाथ फेराता फेराता नाभी के ऊपर की तरफ काफी आगे बढ़ आया और मेरे मम्मो के उभार की तलहटी तक आ गया।

आधा इंच भी उसका हाथ आगे होता तो उसकी ऊँगली मेरे उभार को छू जाती।

अब मामला मेरी बर्दाश्त के बाहर होता जा रहा था। मैंने पकडे हुए शर्ट को छोड़ अपने दूसरे हाथ को भी सर पर रख दिया। मेरे शर्ट के पल्ले छूटते ही छाती पर से एक दूसरे से दूर हो गये।

शर्ट के दोनों पल्लो के बीच की बनी दरार से मेरे मम्मो के दोनों उभारो के बीच की घाटी दिखने लगी थी। मैं चाहते हुए भी उनको छिपाने के लिए अपनी सहायता नहीं कर पा रही थी।

मैंने देखा उसकी नजरे अब मेरे सीने पर ही थी और शर्ट के बीच की बनी दरार से वो मेरे अंग को ही निहार रहा था। उसके मसाज करते हुए हाथ अब धीरे धीरे पेट से चलते हुए मेरे मम्मो की तरफ बढ़ने लगे।

मेरे मन के किसी कोने से कोई एक आवाज आयी और मेरी नींद जैसे टूटी और मैंने जल्दी अपना हाथ फिर नीचे करते हुए अपने शर्ट के पल्ले फिर पकड़ के बंद कर दिए।

उसका हाथ जो धीरे धीरे मेरे मम्मो की तरफ बढ़ रहा था वो रुक कर फिर नीचे की तरफ मुड़ गया।

मैंने उसको बोला “अब मुझे मेरे पेट की ओर मालिश नहीं करवानी”।

उसने हाथ रोक दिए और बोला “अभी पूरा नहीं हुआ हैं, क्या हुआ तुम्हे नींद आ रही हैं”।

मैंने बहाना बनाया “नहीं, ऐसे ही गुदगुदी हो रही हैं”।

उसने बोला “सिर्फ पेट पर गुदगुदी हो रही हैं ! तो ठीक हैं मैं कंधो की मालिश कर देता हूँ, पीठ पर मसाज के समय तुमने बीच में रोक दिया था, वहा वैसे भी अधूरा छूट गया था”।

मैं अब ओर क्या बहाना बनाती। वैसे भी पेट के मुकाबले कंधे पर मसाज ज्यादा सुरक्षित थी। मैंने आँखों के इशारे से हां बोला।

राज के जादुई हाथों, मेरी पेट की मालिश से मैं तड़पने के बाद एक बार तो गिव अप कर चुकी थी। मगर किसी तरह मैंने खुद को संभाला। पर वो फिर मेरी पीठ की मसाज करना चाहता था।

मैं एक बार फिर पलट कर उलटा लेट गयी और लेटते लेटते एक बार फिर अपने शर्ट के दोनों पल्लो को आगे से खोल कर साइड में फैला दिया।

मेरे मम्मे एक बार फिर से बिना कपड़ो के बिस्तर से चिपके थे। उसने मेरे दोनों हाथ नीचे शरीर के सहारे सीधे कर दिए।

उसने अब मेरी शर्ट की कॉलर पकड़ी और नीचे खिसका कर कंधो से निकाल कर थोड़ी नीचे कर दी। उसने अब मेरे दोनों कंधो को पकड़ कर दबाया। कंधे दबते ही बहुत रिलैक्स फील हुआ।

वो अब कंधो से लेकर गर्दन तक दबा दबा कर अच्छे से मालिश कर रहा था। उस सुकून भरी मसाज से मैं मदहोश होने लगी और आधी नींद में लेटी थी। मेरी आँखें बंद थी और थोड़ी थोड़ी देर में आंखें खोल कर ड्रेसिंग टेबल के आईने में देख रही थी।

 
थोड़ी देर में उसने मेरा शर्ट कंधो से थोड़ा ओर नीचे खिसका दिया, मैंने आईने में देखा मेरी पीठ का थोड़ा ओर हिस्सा नंगा हो बाहर दिखने लगा था। मैंने फिर आँखें बंद कर ली और आनंद लेने लगी।

अब उसने शर्ट को ओर नीचे खिसका कर कोहनियो से नीचे ले आया। मैंने फिर आँखें खोल कर आईने में देखा मेरी लगभग पूरी पीठ नंगी हो चुकी थी।

मुझे अब कोई चिंता नहीं थी। मदहोशी में मैंने फिर आँखें बंद कर ली। थोड़ी देर वो ऐसे ही पीठ और कंधे की मसाज करता रहा।

अब उसने शर्ट पकड़ कर ओर नीचे खींचा और पूरा हाथों से बाहर निकाल लिया। मैं अब टॉपलेस हो चुकी थी। मेरी आँखें खुली थी पर किसी लाचारी में हिल भी न पायी।

उसने मुझसे पूछा वो मेरे ऊपर बैठ कर सीधा मालिश करना चाहता हैं। मैंने बस पलक भर झपका दी जैसे नींद में थी।

वो अब अपने घुटनो के बल बैठा और पैरो को मेरे शरीर के दोनों तरफ फैलाकर मेरी जांघो के ऊपर बैठ गया। आगे झुककर वो मेरी पूरी नंगी पीठ की मालिश करने लगा। मैं अपनी गांड पर उसका कड़क हो चूका लंड चुभता हुआ महसूस कर पा रही थी।

जैसे ही वो आगे पीछे हो मालिश करने लगा उसका लंड कपड़ो के अंदर से ही मेरी गांड की दरार में जाने लगा।

उसको भी मेरी गांड को कपड़ो सहित चोदने में जैसे मजा आ रहा था। मैं आँखें बंद किये इन सब का आनंद लिए जा रही थी।

अब उसको यकीन हो गया था कि मैंने हथियार डाल दिए हैं। मैं अब कोई ओर विरोध नहीं करूंगी, ये सोचकर उसने अगला कदम उठाया। उसने मुझे मालिश देना बंद किया और मेरे पीठ, गर्दन और कंधो पर चूमने लगा।

मेरे तन बदन में आग लग गयी। मैं सी सी करते हुए आवाजे निकालने लगी। वो चूमते चूमते कंधो से कमर तक आ गया। मजे के मारे मेरी तो पेन्टी ही गीली हो गयी।

अब वो सीधा बैठ गया और मेरी जांघो से उतर कर मेरे घुटनो पर आकर बैठ गया। उसने अपनी उंगलिया एक बार फिर मेरे शॉर्ट्स के दोनों सिरों में हुक की तरह डाली और धीरे धीरे एक एक सेंटीमीटर शॉर्ट्स को पेन्टी सहित नीचे खिसकाने लगा।

मैं आईने में देख रही थी, धीरे धीरे काले रंग के शॉर्ट्स के खिसकने के साथ ही उसका स्थान मेरी गोरी गोरी गांड के उभार ले रहे थे।

जल्द ही मेरी गांड के उभार पुरे दिखने लगे थे। राज अब भी मेरे शॉर्ट्स को नीचे खिसकाए जा रहा था, वो अब जांघो से निकलते हुए घुटनो तक आ गए।

इस मोड़ पर राज मेरे ऊपर से उतरा और शॉर्ट्स को पेन्टी सहित मेरे पैरो से पूरा बाहर निकाल दिया।

मैं अपने आप को नंगी होते हुए आईने में देखेते ही रह गयी। खुद को पूरी नंगी देख मैं शरमा गयी।

राज अब अपना एक हाथ नीचे मेरे पावो से रगड़ना शुरू करते हुए जाँघों से होते हुए मेरी गांड की उभारो पर चढ़ाते हुए कमर के उतार पर लाते हुए पीठ से गर्दन तक ले आया। इस पुरे सफर के दौरान उसका हाथ जहा जहा से गुजरा मेरे शरीर में जैसे आग लगा दी।

उसका हाथ एक बार फिर उसी रास्ते से वापस लौटा, पर इस बार मेरी गांड पर आकर रुक गया और गांड के उभार से अभिभूत होकर वही हाथ फेरने लगा।

उसकी एक ऊँगली गांड की दरारों में ऊपर नीचे हो रही थी। धीरे धीरे उसका हाथ नीचे जाता रहा और मेरी गीली चुत को छू गया।

इस सब में मैं ये तो भूल ही गयी थी कि पति अब तक नहीं लोटे थे। मैं उनके दोस्त के साथ पूरी नंगी हो लेटी थी। मुझे ऐसे देख तो वो पागल ही हो जायेंगे।

 
उसकी एक ऊँगली गांड की दरारों में ऊपर नीचे हो रही थी। धीरे धीरे उसका हाथ नीचे जाता रहा और मेरी गीली चुत को छू गया।

इस सब में मैं ये तो भूल ही गयी थी कि पति अब तक नहीं लोटे थे। मैं उनके दोस्त के साथ पूरी नंगी हो लेटी थी। मुझे ऐसे देख तो वो पागल ही हो जायेंगे।

इतनी गरमा गरम मसाज के बाद वो मुझे चुदाई के लिए मजबूर कर चूका था। राज ने अब मुझे छूना बंद दिया और बिस्तर से उतर गया। मैंने आईने में देखा वो अपने कपडे निकाल रहा था। टीशर्ट निकलने के बाद उसने अपना शार्ट निकाला।

उसके अंडरवियर के अंदर से उसका शैतान बाहर आने को आतुर हो रहा था, जो की मेरी चुत का साथी बनने का सपना देख रहा था, और जो अब शायद जल्द ही पूरा होने वाला था।

उसने जैसे ही अपनी अंडरवियर निकाला उसका लंड उछलता हुआ बाहर आ आया और स्प्रिंग की तरह ऊपर नीचे डोलने लगा।

राज का लंड काफी लम्बा था, वो खुद भी छह फ़ीट जितंना लम्बा था तो उसका लंड कम से कम छह इंच लम्बा तो रहा होगा।

काफी समय पहले ही मुझे अहसास हो गया कि आज उसके इरादे मुझे चोदने के हैं, और वो मेरे साथ कुछ तो करके ही रहेगा।

आसन से होते हुए मसाज और अब उसने मुझे अपने जाल में फंसा ही लिया था। उसने मुझे मसाज देकर इतना मदमस्त कर दिया था कि मुझे उसके सामने झुकना ही पड़ा।

अब उस कमरे में दो नंगे बदन, एक नंगा लड़का अपने दोस्त की नंगी बीवी के पास था। धमाका होना तय था।

वो बिस्तर पर आया और मुझ पर चढ़ कर लेट गया। दो गरम बदन एक दूसरे से मिले फिर भी दोनों को ठंडक मिली।

मैं आईने में देख पा रही थी कि दो नंगे बदन एक दूसरे पर चिपके पड़े थे।

उसका गरमा गरम कड़क लंड मैं अपनी गांड पर महसूस कर पा रही थी। उसने अपने लंड को पकड़ा और मेरी चूत में घुसाने लगा।

मेरी गीली चूत का छेद ढूंढने में उसको ज्यादा समय नहीं लगा।

उसके लंड की टोपी मेरी चूत के छेद में जा चुकी था। उसने अपना हाथ अपने लंड से हटा दिया और अपने दोनों हाथ मेरे हाथो पर रख पकड़ लिये।

उसने अब हलके हलके धक्के मारते हुए अपने लंड की टोपी को अंदर बाहर करते रहा, और फिर अचानक एक जोर के झटके से अपना लम्बा लंड मेरी चूत में घुसा दिया। इस जोर के झटके से मेरे मुँह से आउच अह्ह्हह्ह्ह्ह निकली गयी।

उसका लंड भी मेरी चूत के लिए इतने मिनटों से तड़प रहा था, तो उसको भी एक सुकून मिला और लंड के अंदर जाते ही उसकी भी भावनाये बाहर निकली और एक लम्बी आहह्ह्ह्हह निकली।

अब वो अपना लंबा लंड मेरी चुत में झटके मारते हुए अंदर बाहर करने लगा, हर झटके के साथ मैं उइ माँ आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सीईईईइ यही पे, हां यही पे की रट लगाने लगी।

हम दोनों ही पिछले कुछ मिनटों में इतना तड़पे थे, कि प्यास मिटाने लिए अधीर हो रहे थे।

अगले कुछ मिनटों तक वो मुझे ऐसे ही जोर जोर से चोदता रहा। थोड़े समय बाद ही मेरा थोड़ा थोड़ा पानी छूटने लगा और उसमे सांप की तरह लौटते उसके लंड की वजह से चप्प चप्प की आवाज आने लगी। उस आवाज ने एक अलार्म का काम किया।

मैं अब धीरे धीरे होश में आने लगी। मेरी थोड़ी बहुत प्यास मिट गयी थी। मुझे ध्यान आया कि उसने प्रोटेक्शन तो इस्तेमाल ही नहीं किया था। शायद इसी वजह से मैं उसके लंड को इतने अच्छे से अपनी चूत में महसूस कर पा रही थी।

आखिर मेरी सुरक्षा मामला था, मैंने उसको टोंका कि वो बिना प्रोटेक्शन के ऐसे मुझको नहीं चोद सकता।

मेरी बातें अनसुना करते हुए वो मुझे ओर जोर से चोदता रहा। जिससे एक बार तो मैं फिर अपने होश खोने लगी और आहह्ह्ह्ह आहह्ह्ह्ह कर चीखने लगी।

पर मुझे इसके बुरे परिणाम भी पता थे, तो जल्द ही अपनी भावनाओ पर काबू पाया। मैंने ही अब जोर लगा के पलट कर उसको अपने ऊपर से गिरा दिया। उसका लंड मेरी चूत से बाहर आ गया। उसकी तरह मुझे भी बुरा लगा था इस तरह अधूरा छूटना।

उसकी तो हालत ही ख़राब थी, इतने जतनो से वो यहाँ तक पंहुचा था, कि मुझे तैयार कर पाया और मैंने ही उसे मना कर दिया।

उसने कहा कि उसके पास प्रोटेक्शन नहीं हैं, उसके रूम में हैं और मुझसे मांगने लगा।

मैं उसको कैसे बताती कि मेरे पति प्रोटेक्शन लगाए या ना लगाए सामने वाली चूत पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।

मैंने भी उसको देख ना ने सर हिला दिया। वो इस हालत में नहीं था कि इस सुनहरे अवसर को जाने देता।

मैं भी उससे काफी समय से थोड़ा बहुत आकर्षित थी और जिस तरह से आज उसने किया था, मैं भी उसके साथ पूरा करना चाहती थी।

उसने मुझसे गुजारिश की कि मैं उसे बिना प्रोटेक्शन के चोदने की इजाजत दूँ। वो तर्क देने लगा एक बार करने से जरुरी नहीं कि बच्चा हो ही जाए। वैसे भी कुछ होने पर अपने पति पर इल्जाम डाल सकती हूँ।

काश उसको पता होता कि मैं चाहते हुए भी अपने पति पर कभी प्रेग्नेंट करने का इल्जाम नहीं डाल सकती।

मैंने उसको ना बोल दिया, कि पति पर नहीं डाल सकती वो बहुत ध्यान रखते हैं।

उसने ओर कुछ बात नहीं बनते देख पूछा “तुम्हारा पीरियड कब गया था?”

 
मैंने कहा “चार पांच दिन पहले ही ख़त्म हुआ हैं”।

उसने कहा “मैं पायल को भी पीरियड के एक हफ्ते बाद तक कभी कभार बिना प्रोटेक्शन के चोदा करता हूँ और ज्यादा रिस्क नहीं होता हैं इस दरमियान। इतना ही हैं तो मैं ध्यान रखूँगा और पानी निकलने के पहले ही लंड चूत से बाहर निकाल दूंगा”।

मुझे लगा उसको इस चीज का काफी अनुभव हैं। उसके मसाज का अनुभव तो मैं पहले ही देख चुकी थी, तो मैंने उसका यकीन कर लिया। या फिर मैं खुद उसके लंड से अपनी चूत पूरी चूदवाना चाहती थी, इसके लिए मैंने उसको इजाजत दे दी।

पर मैंने इसको कड़ी हिदायत दे दी कि वो समय रहते अपना लंड मेरी चूत से निकाल देगा और पानी अंदर नहीं छोड़ेगा।

मेरी हां सुनते ही उसकी तो बांछे खिल गयी। उसने इतनी मेहनत की थी तो उसको इसका इनाम भी मिलना चाहिए था।

वो एकदम भोली शकल बनाते हुए वादा करने लगा कि वो मुझे चोदने के बाद कुछ नहीं होने देगा और ध्यान रखेगा कि पानी निकलने के पहले ही लंड चूत से बाहर निकाल देगा।

अब मैं एक बार फिर से तैयार हो गई राज के लम्बे लण्ड से अपनी चूत की एक असुरक्षित चुदाई के लिए।

राज : “मुझे तुम्हारा चक्रासन अच्छा लगा। तुम वो आसन फिर से करो और मैं तुम्हे उसी स्तिथि में चोदूंगा”।

मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि योग के आसन करते हुए भी चोदा जा सकता हैं। उसकी नयी सोच को सुन मैं भी रोमांचित हो गयी।

मैं अब बिस्तर से नीचे उतरी और एक बार फिर चक्रासन की स्तिथि में आ गयी। उसने मुझे पाँव ओर चौड़े करने को कहा, मैंने वैसा ही किया।

बिना कपड़ो के चक्रासन करना ही अपने आप में बहुत गरम मामला था। मेरी चिकनी चूत को इस तरह देखकर वो शायद बावरा हो गया।

वह मेरे दोनों पांवो के बीच आकर खड़ा हो गया और अपना लंड पकड़ कर अपने हाथ से रगड़ते हुए ओर कड़क और लम्बा करने लगा।

वो अपने लंड को पकड़, उससे मेरी चूत पर थप्पड़ मारने लगा। चटाक चटाक की आवाजे आने लगी। उसका लंड बहुत भारी था और वो मिला मिला कर मार रहा था तो थोड़ा दर्द भी हो रहा था और उस चटाक की आवाज से मजा भी आ रहा था।

जो अरमान वो पहले पुरे नहीं कर पाया था अब पुरे करने लगा। उसने अब मेरी चूत पर हाथ लगाया और ऊपर नीचे रगड़ने लगा। मेरे मुँह से सिसकिया छूटने लगी।

वो अब नीचे बैठ गया और दोनों हाथों से मेरी चूत के दोनों होंठ को चौड़ा कर अंदर छेद में अपनी जबान रगड़ने लगा।

मैं: “आहह, रा अ ज, हम्म, ओह माय गॉड। अब ओर मत तड़पाओ, कोई मोटी चीज़ डालो प्लीज।”

राज: “अभी डालता हूँ”

यह कह कर वो उठा और मेरे चेहरे की तरफ आ गया और नीचे बैठ कर अपना कड़क कठोर लंड मेरे मुँह के पास ले आया।

 
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