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Guest
वो मुझे ऐसे ही उठाये थोड़ा आगे लेकर आया जहा पूल का पानी थोड़ा कम गहरा था। उसने मुझे नीचे उतार पैर जमीन पर टिकाये और मेरी सलामती पूछने लगा।
उसने मुझे अभी भी पकड़े रखा था। मैंने उसको धक्का दिया और पूल की सीढ़ियों की तरफ भागी बाहर आने को। पर मेरी साड़ी खींची और मैं रुक गयी।
मैंने पलट कर देखा उसके हाथ में मेरी साड़ी का पल्लू था, शायद धक्का देते वक्त उसके हाथ में आ गया था। मैंने उसको साड़ी छोड़ने को बोला पर वो मुझे रुकने के लिए बोलने लगा और मेरी तरफ बढ़ा।
मैंने अपनी साड़ी जल्दी से पेटीकोट से अलग की और आगे बढ़ी। मेरी पूरी साड़ी पेटीकोट से अलग हो गयी और मैं पूल की सीढ़ी से ऊपर चढ़ गयी और पूल से बाहर आयी। मगर उसने पूल में खड़े खड़े ही मेरा एक पाँव पकड़ लिया और जाने नहीं दिया।
मैं वही बैठ गयी और अपना पाँव झटक कर छुड़ाने लगी पर उसने नहीं छोड़ा। मैंने मदद के लिए देखा, उसका केयरटेकर जहां रहता था वहा ताला लगा था, शायद उसने उसको कल रात को ही छुट्टी दे दी थी ताकि मेरे साथ रात गुजार पाए। अब सीढ़ी से चढ़ वो भी बाहर आ गया।
बाहर आते ही उसने मेरा पाँव छोड़ा और मुझे अपनी बात सुनाना चाहा पर मैं उठ कर फिर भागी अपने पर्स की तरफ। वो मेरे पीछे ही था।
अपने भीगे कपड़ो में मैं बहुत असहज महसूस कर रही थी। मैं जैसे ही अपने पर्स को उठाने के लिए झुकी उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया। मैं वही औंधे मुँह गिर पड़ी और वो मेरे ऊपर। उसने मुझे सीधा किया और अपनी बात सुनानी चाही पर मैं उसपर चीखते हुए हटाती रही।
अपनी बात सुनाने के लिए उसे मुझे कमजोर करना बहुत जरुरी था और उसे मेरी कमजोरी अब तक पता चल गयी थी। उसने मेरा गीला पेटीकोट नीचे से थोड़ा ऊपर उठाया और अपना हाथ अंदर डाल मेरी पैंटी खींच कर बाहर निकालने लगा।
मैंने उसको रोकना चाहा पर कामयाब नहीं हुई और उसने मेरी पैंटी थोड़ी नीचे खिसका दी और अपनी एक ऊँगली मेरी चूत में घुसा दी।
अंदर ऊँगली जाते ही उसने ऊँगली को अंदर गोल गोल घुमा अंदर बाहर करने लगा। जैसे एक रोते हुए बच्चे के मुँह में निप्पल डाल उसको शांत करा देते हैं वैसे ही उसकी ऊँगली के मेरी चूत में हरकत होते ही मेरा चिल्लाना बंद हो गया और हलकी सिसकियाँ निकलने लगी।
उससे अच्छे से पता था मुझे नियंत्रण करने की चाबी कहा हैं और वो मेरी चाबी घुमा कर मुझे नशा दे रहा था । एक हाथ से मेरा कंधा दबाये उसका चेहरा मेरे चेहरे के पास था।
राहुल: “आई एम सॉरी इसके लिए पर मैं ऐसा नहीं करता तो तुम मेरी बात नहीं सुनती। अब सुनो ”
मेरे सर पर नशा चढ़ रहा था और मैं उसकी बात नहीं सुनना चाहती थी। मुझे कुछ नहीं सुझा और अपने होंठो से उसको होंठो को काटना चाहा पर उसके होंठ पर छूते ही उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया। मैं कुछ ना कर पायी और नीचे चूत में होती हलचल के साथ ही मैं खुद भी उसको चूमने लगी। थोड़ी देर तक हम एक दूसरे को यु ही चूमते रहे फिर उसने मुझे कहना शुरू किया ।
राहुल: “मैं मानता हु की मैंने तुम्हे पाने के लिए गलत तरीका इस्तेमाल किया था पर मैं तुम्हे प्यार करता हु। पता नहीं जोसफ ने तुम्हे पूरा वीडियो भेजा या नहीं पर तुमने जो सुना वो आधा सच हैं ”
मैं: “अहह मुझे नहीं सुनना उम्म अहह अहह ”
उसने अपनी ऊँगली निकाल दी। किसी बैटरी से चलने वाले खिलौने की बैटरी निकाल दी हो वैसे मेरी सिसकियाँ शांत हो गयी पर उस हलके नशे में अभी भी पड़ी थी।
उसने मेरी पैंटी पूरी निकाल दी और आगे से पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया। वो मेरे ऊपर चढ़ गया और अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। पतली ऊँगली के बाद उसके मोटे लंड के मेरी चूत के अंदर जाते ही मेरा नशा और बढ़ गया।
इसके बाद उसने एक के बाद एक जोर के धक्के मारना शुरू कर दिया और मैं अपने हाथ दोनों तरफ फैलाये आहें भरने के अलावा कुछ नहीं कर पायी।
थोड़ी देर मुझे वही खुले में चोदते हुए वो अपनी सफाई दिए जा रहा था कि वो मुझे बहुत प्यार करता हैं और मैं उसकी गलती को पहली गलती मान उसे माफ़ कर दू।
मेरे पति ने तो सिर्फ मजे के लिए मुझे अपने दोस्तों को सौंप दिया था इसने तो मुझे दुसरो के हाथों में जाने से बचाया ही था । मुझे उसके प्यार पर कभी शक नहीं था और उसकी आँखों में सच्चाई दिख रही थी पर मैं उसके धोखे को कैसे भुला देती। तभी मेरे मोबाइल की घंटी सुनाई दी जो पर्स के अंदर से आ रही थी।
मैंने अपना हाथ पीछे बढ़ा कर पर्स को अपनी तरफ खिंचा और अंदर से मोबाइल निकाला।
उसने मुझे अभी भी पकड़े रखा था। मैंने उसको धक्का दिया और पूल की सीढ़ियों की तरफ भागी बाहर आने को। पर मेरी साड़ी खींची और मैं रुक गयी।
मैंने पलट कर देखा उसके हाथ में मेरी साड़ी का पल्लू था, शायद धक्का देते वक्त उसके हाथ में आ गया था। मैंने उसको साड़ी छोड़ने को बोला पर वो मुझे रुकने के लिए बोलने लगा और मेरी तरफ बढ़ा।
मैंने अपनी साड़ी जल्दी से पेटीकोट से अलग की और आगे बढ़ी। मेरी पूरी साड़ी पेटीकोट से अलग हो गयी और मैं पूल की सीढ़ी से ऊपर चढ़ गयी और पूल से बाहर आयी। मगर उसने पूल में खड़े खड़े ही मेरा एक पाँव पकड़ लिया और जाने नहीं दिया।
मैं वही बैठ गयी और अपना पाँव झटक कर छुड़ाने लगी पर उसने नहीं छोड़ा। मैंने मदद के लिए देखा, उसका केयरटेकर जहां रहता था वहा ताला लगा था, शायद उसने उसको कल रात को ही छुट्टी दे दी थी ताकि मेरे साथ रात गुजार पाए। अब सीढ़ी से चढ़ वो भी बाहर आ गया।
बाहर आते ही उसने मेरा पाँव छोड़ा और मुझे अपनी बात सुनाना चाहा पर मैं उठ कर फिर भागी अपने पर्स की तरफ। वो मेरे पीछे ही था।
अपने भीगे कपड़ो में मैं बहुत असहज महसूस कर रही थी। मैं जैसे ही अपने पर्स को उठाने के लिए झुकी उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया। मैं वही औंधे मुँह गिर पड़ी और वो मेरे ऊपर। उसने मुझे सीधा किया और अपनी बात सुनानी चाही पर मैं उसपर चीखते हुए हटाती रही।
अपनी बात सुनाने के लिए उसे मुझे कमजोर करना बहुत जरुरी था और उसे मेरी कमजोरी अब तक पता चल गयी थी। उसने मेरा गीला पेटीकोट नीचे से थोड़ा ऊपर उठाया और अपना हाथ अंदर डाल मेरी पैंटी खींच कर बाहर निकालने लगा।
मैंने उसको रोकना चाहा पर कामयाब नहीं हुई और उसने मेरी पैंटी थोड़ी नीचे खिसका दी और अपनी एक ऊँगली मेरी चूत में घुसा दी।
अंदर ऊँगली जाते ही उसने ऊँगली को अंदर गोल गोल घुमा अंदर बाहर करने लगा। जैसे एक रोते हुए बच्चे के मुँह में निप्पल डाल उसको शांत करा देते हैं वैसे ही उसकी ऊँगली के मेरी चूत में हरकत होते ही मेरा चिल्लाना बंद हो गया और हलकी सिसकियाँ निकलने लगी।
उससे अच्छे से पता था मुझे नियंत्रण करने की चाबी कहा हैं और वो मेरी चाबी घुमा कर मुझे नशा दे रहा था । एक हाथ से मेरा कंधा दबाये उसका चेहरा मेरे चेहरे के पास था।
राहुल: “आई एम सॉरी इसके लिए पर मैं ऐसा नहीं करता तो तुम मेरी बात नहीं सुनती। अब सुनो ”
मेरे सर पर नशा चढ़ रहा था और मैं उसकी बात नहीं सुनना चाहती थी। मुझे कुछ नहीं सुझा और अपने होंठो से उसको होंठो को काटना चाहा पर उसके होंठ पर छूते ही उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया। मैं कुछ ना कर पायी और नीचे चूत में होती हलचल के साथ ही मैं खुद भी उसको चूमने लगी। थोड़ी देर तक हम एक दूसरे को यु ही चूमते रहे फिर उसने मुझे कहना शुरू किया ।
राहुल: “मैं मानता हु की मैंने तुम्हे पाने के लिए गलत तरीका इस्तेमाल किया था पर मैं तुम्हे प्यार करता हु। पता नहीं जोसफ ने तुम्हे पूरा वीडियो भेजा या नहीं पर तुमने जो सुना वो आधा सच हैं ”
मैं: “अहह मुझे नहीं सुनना उम्म अहह अहह ”
उसने अपनी ऊँगली निकाल दी। किसी बैटरी से चलने वाले खिलौने की बैटरी निकाल दी हो वैसे मेरी सिसकियाँ शांत हो गयी पर उस हलके नशे में अभी भी पड़ी थी।
उसने मेरी पैंटी पूरी निकाल दी और आगे से पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया। वो मेरे ऊपर चढ़ गया और अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। पतली ऊँगली के बाद उसके मोटे लंड के मेरी चूत के अंदर जाते ही मेरा नशा और बढ़ गया।
इसके बाद उसने एक के बाद एक जोर के धक्के मारना शुरू कर दिया और मैं अपने हाथ दोनों तरफ फैलाये आहें भरने के अलावा कुछ नहीं कर पायी।
थोड़ी देर मुझे वही खुले में चोदते हुए वो अपनी सफाई दिए जा रहा था कि वो मुझे बहुत प्यार करता हैं और मैं उसकी गलती को पहली गलती मान उसे माफ़ कर दू।
मेरे पति ने तो सिर्फ मजे के लिए मुझे अपने दोस्तों को सौंप दिया था इसने तो मुझे दुसरो के हाथों में जाने से बचाया ही था । मुझे उसके प्यार पर कभी शक नहीं था और उसकी आँखों में सच्चाई दिख रही थी पर मैं उसके धोखे को कैसे भुला देती। तभी मेरे मोबाइल की घंटी सुनाई दी जो पर्स के अंदर से आ रही थी।
मैंने अपना हाथ पीछे बढ़ा कर पर्स को अपनी तरफ खिंचा और अंदर से मोबाइल निकाला।