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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

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अगली बार जब मैं अपनी सास के घर गयी तो मैं पूजा से भी मिली। वो अभी भी स्वीमिंग के लिए जाती थी। इसी की वजह से वो एकदम फिट थी। पर कूल्हे मटकाती वो अभी भी चल रही थी और उसे देख मैं खुद शरमा रही थी कि इसने मेरे पति को ही नहीं, कितने और मर्दो को दीवाना बना रखा होगा।

मैंने पूजा को बोल दिया कि अब मैं भी फिर से स्वीमिंग चालू करुँगी और हम साथ में करेंगे। हम दोनों अब रोज शाम को क्लब में स्वीमिंग पूल पर मिलते.

नितिन रोज पूजा को लेने आता और मुझे चोरी चुपके जरूर देखता। मुझे बिकिनी में देखने के चक्कर में वो पूजा को लेने थोड़ा जल्दी ही आ जाता। झूठ बोलकर जो उसने मुझे चोदा था, उसकी गलती उसकी आँखों में थी।

अशोक इस बीच रोज परेशान करता रहा कि मैं कब नितिन पूजा से बात करुँगी पर मैं उसको सही समय का इन्तेजार करने को बोलती रही। इस बीच पूजा से मेरी दोस्ती फिर गहरी होती रही और अब मैं उस से सेक्स लाइफ के बारे में भी मजाक मजाक में पूछ ही लेती थी ।

फिर पता चला कि पूजा और नितिन की शादी की सालगिरह आने वाली हैं और वो दोनों हमेशा की तरह मनाने वाले हैं। मुझे लगा शायद यही मौका हैं जब हम दोनों कपल करीब आ सकते हैं।

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नितिन कपल एक्सचेंज के लिए मान चूका था और अब पूजा को मनाने के लिए एक अच्छे अवसर की प्रतीक्षा थी । फिर पता चला कि पूजा और नितिन की शादी की साल गिरह आनी वाली और मैंने अपना प्लान बनाया।

अगले दिन मै स्वीमिंग के लिए 15 मिनट्स जल्दी चली गयी। पूजा अपने रेगुलर टाइम पर आयी। मैं उसके स्वीमिंग पूल से बाहर निकलने के 15 मिनट्स पहले ही बाहर आ गयी और कपडे पहन लिए।

नितिन अपनी आदत के अनुसार मुझे बिकिनी में देखने के लिए जल्दि आया और मैंने उसको अकेले में पकड़ ही लिया। वो मुझे पूरे कपड़ो में देख थोड़ा निराश हुआ।

मैं: “नितिन, मुझे तुमसे बात करनी थी”

नितिन: ” आई एम सॉरी, होली वाले दिन के लिए”

मैं:”तो तुमने मुझे झूठ बोला था?”

नितिन: “मुझे नहीं पता, मुझे बस उन दोनों पर शक था जो मैंने तुम्हे बता दिया था”

मैं:”मेरे हिसाब से उन दोनों के बीच कुछ नहीं हैं। पर अब अगर वो करना चाहे तो तुम क्या करोगे?”

नितिन: “पिछली बार मुझे शक था तो मैंने तुम्हारे साथ वो सब कर दिया। तुम्हे भी उनसे बदला लेना हो तो मैं तैयार हूँ फिर से करने को”

मैं:”छुप छुप कर क्या करना ! अगर वो दोनों एक दूसरे के साथ कर रहे हैं तो हम भी खुल कर उनसे बात कर लेते हैं कि हम दोनों भी करेंगे। शायद फिर उनकी अकल ठिकाने आ जाए और ये सब बंद कर दे”

नितिन: “मुझे चलेगा, उनको करना हैं तो करे। मुझे तुम्हारे साथ करने को मिलेगा तो मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं”

मैं: “तो तो फिर तुम पूजा से बात कर लो। मना लो उसको अगर वो अदला बदली के लिए तैयार हैं। उसका सच में अशोक के साथ कुछ चक्कर हैं तो तुम्हे भी पता चल जाएगा”

नितिन: “उसको पूछने की हिम्मत होती तो बहुत पहले ही पूछ चूका होता जब मुझे उस पर शक था। तुम उसके घर वालो को नहीं जानती, बहुत खतरनाक हैं। तुम ही बात करो, मेरी मंजूरी हैं”

अशोक और नितिन दोनों ही बीवियों की इस अदला बदली के लिए तैयार थे पर दोनों मर्दो में हिम्मत नहीं थी कि वो पूजा से इस बारे में बात कर सके। सारा जिम्मा अब मुझ पर था जब कि इस अदला बदली में मेरी कोई रूचि नहीं थी। मेरा सिर्फ इतना मकसद था कि पति पर एक अहसान कर दू ताकि आगे कभी अपना काम निकलवा सकू।

मैं: “पूजा ने बताया कि तुम्हारी शादी की सालगिरह आने वाली हैं। तुम अपनी पार्टी में सिर्फ हम चारो को रखना, उसी दिन मैं पूजा को मना लुंगी और हम यह अदला बदली कर लेंगे”

मैंने अब नितिन से विदा ली और घर आकर अशोक को बताया कि मैंने नितिन को मना लिया हैं। अशोक खुश हुआ कि उसका आधा काम हो चूका हैं।

मैंने अशोक को बोल दिया कि अब वो नितिन के साथ मिलकर थोड़ा प्लान कर ले। उसकी सालगिरह मनाते समय ही हम वो अदला बदली करने वाले थे। अगले दिन ही स्वीमिंग क्लब में पूजा ने मुझसे बात की।

पूजा: “प्रतिमा, मेरी शादी की सालगिरह की पार्टी में तुम आ सकती हो क्या?”

मैं:: “मैं आकर क्या करुँगी? तुम दोनों मियां बीवी मजे करो, मैं कबाब में हड्डी क्या करुँगी!”

पूजा: “हर साल हम दोनों अकेले ही मनाते हैं। नितिन बता रहा था कि इसी दिन तुम और अशोक भी पहली बार मिले थे और तुम लोग भी इस दिन को मनाते हो। तो फिर हम लोग साथ मिलकर पार्टी करते हैं। एक से भले दो कपल हो जायेंगे”

नितिन ने यह एक झूठ बोल कर पूजा को हमारे साथ पार्टी करने को मना लिया था।

मैं: “हां, हम लोग भी यह दिन मनाते हैं। पर हमारी वजह से तुम लोगो को कोई परेशानी तो नहीं होगी ना?”

पूजा: “अरे नहीं, ज्यादा मजा आएगा। मैं नितिन को बोल दूंगी, हम मिलकर प्लान कर लेंगे कैसे पार्टी करनी हैं”
 
उसके बाद अशोक और नितिन ने मिलकर पूरा प्लान बना दिया और मुझे भी बता दिया। उन लोगो ने होटल में एक कमरा बूक कर दिया था जहा हम अदला बदली कर चोदने वाले थे।

उसके पहले डिनर और डांस का कार्यक्रम था। इसके लिए उन्होंने एक प्राइवेट जगह बूक की थी जहा हमारे चारो के अलावा कोई नहीं होगा। इसी जगह इस दौरान मुझे पूजा को मनाना था और फिर हम होटल के कमरे में जाकर मजे करने वाले थे। मुझे आशा थी कि मैं पूजा को मना ही लुंगी।

पूजा अपनी सालगिरह को लेकर बहुत उत्साहित थी और नितिन के लिए वो क्या गिफ्ट ले उसके लिए मुझसे पूछ रही थी। उस बेचारी को क्या पता था कि सालगिरह के ही दिन उसको किसी गैर मर्द के साथ चुदवाना पड़ेगा।

इन कुछ दिनों में मैंने पूजा की सेक्स लाइफ के बारे में भी जानने की कोशिश की और उसने भी मेरी सेक्स लाइफ में जानने की रूचि दिखाई। वो जितना पूछती मैं उसको कुछ ज्यादा ही बता कर उसका मूड बनाती जा रही थी ताकि वो अशोक की तरफ आकर्षित हो।

आखिर वो दिन भी आया। मैंने एक अच्छी से सेक्सी ड्रेस पहनी और अशोक भी अपनी चाहत पूजा को लुभाने के लिए कोट पहन कर अच्छे से तैयार था।

अशोक इतना उतावला था कि वो ठीक समय पर मुझे लेकर होटल पहुंच गया। कुछ ही देर में पूजा और नितिन भी आ गए थे। चमकीली शरीर दिखाऊ साड़ी में मेकअप से लिपटी पूजा क़यामत ढा रही थी।

लाल लिपस्टिक में रंगे उसके होंठो के बीच उसकी चौड़ी मुस्कान से दीखते दांत चमक रहे थे और गाल भी रौशनी पड़ते ही दमक रहे थे। पूजा ने सिर पर बालो का जुड़ा बना रखा था और उसके चेहरे के दोनों तरफ एक एक लम्बी घुंघराली जुल्फे निकली हुयी थी। ऐसा लगा जैसे उसकी आज शादी की सालगिरह नहीं बल्कि सुहागरात हैं।

अशोक की हालत मैं देख सकती थी। मुझे डर था कि कही अशोक का पानी उसकी पैंट में ही ना छूट जाए। वो आज आखिर पूजा को चोद पायेगा यह सोच कर ही वो जैसे हवा में उड़ रहा था।

हम चारो उस निजी कक्ष में थे जहा एक टेबल और चार कुर्सियां रखी थी। रोमांटिक संगीत बज रहा था और हलकी मध्यम रौशनी थी। वेटर बीच बीच में आकर खाने पीने का सामान ला रहा था जो हमने आर्डर किया था।

थोड़ी देर बैठने के बाद सॉफ्ट ड्रिंक लेने के बाद अशोक बोलने लगा कि डांस करना चाहिए। उसकी इच्छा थी कि वो पूजा के साथ डांस करे पर सीधा बोलना मुश्किल था।

नितीन ने भी साथ दिया कि डांस करना चाहिये, पर पूजा तैयार नहीं थी। मैंने उसको उत्साहित किया कि थोड़ा डांस तो करना चाहिये। फिर वो मान गयी।

उस हल्की रोशनी में रोमांटिक संगीत के बीच नितीन और पूजा डांस करने लगे। उनके पास ही मै और अशोक डांस कर रहे थे। अशोक की नजरे बराबर साड़ी में लिपटी पूजा की गांड पर थी।

अशोक तो मरे जा रहा था पूजा के साथ डांस करने के लिए ताकि उसके बदन को छू पाये। ऊधर नितीन का भी अशोक वाला ही हाल था।

उसकी बाहों में इतनी खुबसूरत बीवी थी पर वो मुझे देख तड़प रहा था।

पूजा इस बीच पूरा स्माईल करते हुए चहक रही थी। अब मुझे ही कुछ करना था। मैंने अशोक के साथ डांस करना छोड़ा और हम दोनो नितीन और पूजा के पास पहुचे. नितीन ने हमें देख पूजा के साथ डांस करना छोड़ा.

पूजा और नितीन खड़े खड़े ही हल्का हिलते हुए अकेले डांस कर रहे थे। मैंने नितीन को देखा और अपना हाथ आगे बढाया और उसने पूजा से अलग होकर मेरा हाथ पकड़ा और डांस करने लगा।

पूजा डांस करते रुक गयी थी और मुझे नितीन के साथ डांस करते देखने लगी। पूजा के चेहरे पर अभी भी एक स्माईल थी। दुसरी तरफ अशोक कोशिश कर रहा था कि वो पूजा का हाथ पकड़ पाये।

अशोक ने अब अपना हाथ आगे कर पूजा की तरफ बढाया. पूजा की आंखे हिरणी की तरह और बड़ी हो गयी और एक हल्की नर्वस भरी स्माईल के साथ वो मुझे और नितीन को देखने लगी।

मै और नितीन स्माईल करते बराबर उन दोनो की तरफ देख डांस में लगे हुए थे और अशोक का हाथ अभी भी पूजा की तरफ आगे बढा हुआ था।

मैने पूजा को इशारा किया कि वो डांस करे। उसके चेहरे पर अभी भी एक हल्की स्माईल थी पर उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था। नितीन ने भी पूजा को इशारा किया कि वो डांस कर ले।

पूजा ने थोड़ी झिझक के साथ अपना हाथ अशोक के हाथ में दे दिया। फिर अशोक नहीं रुका और उसने पूजा को हल्का सा अपने बाहों में ले लिया और उसकी कमर को एक हाथ लपेट दुसरा हाथ उसके हाथ में रखा।
 
मैने पूजा को इशारा किया कि वो डांस करे। उसके चेहरे पर अभी भी एक हल्की स्माईल थी पर उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था। नितीन ने भी पूजा को इशारा किया कि वो डांस कर ले।

पूजा ने थोड़ी झिझक के साथ अपना हाथ अशोक के हाथ में दे दिया। फिर अशोक नहीं रुका और उसने पूजा को हल्का सा अपने बाहों में ले लिया और उसकी कमर को एक हाथ लपेट दुसरा हाथ उसके हाथ में रखा।

वो दोनो अब डांस करने लगे थे और इधर नितीन मेरी कमर पकड़े डांस कर रहा था। नितीन को डांस करना बिल्कुल नहीं आता वो मुझे जल्दी ही पता चल गया।

वो डांस कम कर रहा था और मुझसे टकरा ज्यादा रहा था। जिसकी वजह से मेरी हंसी ज्यादा निकल रही थी। पूजा का भी ध्यान मेरी तरफ था कि जिस तरह मै हस रही थी।

मुझे देख उसकी भी हंसी निकल रही थी। मै नितीन के साथ डांस करते उसको सीखा भी रही थी उसको मुव कैसे करना हैं। दुसरी तरफ अशोक ने पूजा को अच्छे से नियंत्रित करते हुए उसके साथ प्रोपर डांस करना शुरु कर दिया था।

वो दोनो अब काफी करीब आकर सीरियस डांस करने लगे थे। अशोक कभी पूजा को अपनी एक बांह में तो कभी दुसरी बांह में झूलाते हुए डांस कर रहा था। फिर एक समय वो भी आया जब अशोक ने पिछे से हाथ आगे लाकर पूजा के पतले पेट को नाभी के ऊपर से दोनो हाथों से पकड़ लिया और पूजा का पिछवाड़ा जाकर अशोक के आगे के अंगो से छू गया।

उस वक्त अशोक की हालत खराब हो गयी। वो मुंह फाड़े आहें भरता आंखे बंद किए ऊपर छत की तरफ देख रहा था। पक्का उस वक्त उसका थोड़ा पानी लंड से छूट गया होगा।

मगर 2-3 सेकण्ड बाद ही पूजा घुमते हुए फिर दूर हुयी और अशोक के सामने आ गयी थी। दोनो बाहों में बाहें ड़ाले काफी देर डांस करते रहे और भूल ही गए कि हम एक दूसरे के पार्टनर के साथ ज्यादा डांस कर रहे थे और खुद के पार्टनर के साथ बहुत कम देर डांस किया था।

यहीं मेरी जीत थी, मेरा प्लान काम कर रहा था। पूजा अब अशोक के साथ कम्फर्टेबल हो चुकी थी। वो अब इतना चिपक कर डांस कर रहे थे कि पूजा के मम्मे रह रह कर अशोक के सीने को छू कर पूरी तरह दब रहे थे, पर पूजा फिर भी एक स्माईल के साथ डांस कर रही थी।

पूजा इतना खुलकर डांस इसलिए भी कर रही थी कि उसका खुद का पति नितीन मेरे साथ काफी आराम से डांस कर रहा था। कभी वो अपना लंड मेरी गांड से चिपकाए थोड़ा रगड़ देता तो कभी आगे से मेरी चूत का भाग अपने लंड से चिपका देता.

कभी मेरे पेट तो कभी सीने के ऊपर अपना एक हाथ लपेट मुझे झकड़ लेटा। डांस के दौरान 2-3 बार नितीन मुझे अपनी गोद में उठाए घुमा चुका था।

मैने इस बीच अपनी हंसी बरकरार रख माहौल का नार्मल रखा था जिसकी वजह से बाकी के लोगो को भी कोई दिक्कत नहीं हुई और वो भी स्माईल के साथ नाचते रहे.

फिर एक ऐसा पल भी आया जब मै और पूजा एक दूसरे के सामने खड़े थे और हम दोनो को पिछे से चिपके खड़े थे एक दूसरे के पति.

दोनो मर्दो का हाथ लड़कियो के पेट पर था और दुसरा हाथ लड़कियो के दोनो कंधो को सामने से टच करते हुए सीने पर लगा हुआ था।

हम चारो दायें बायें संगीत के साथ हिल रहे थे और दोनो लड़कियो की गांड को दोनो मर्द अपने लंड से रगड़ रहे थे। जल्द ही नितीन ने अपने होंठ मेरे गरदन और कंधे के बीच के नंगे भाग पर रख दिए और होंठ रगड़ने लगा।

ये देख पूजा की हंसी थोड़ी कम हो गयी। उसी वक्त अशोक ने भी यहीं किया और अपने होंठ पूजा के कंधो और गरदन के बीच हल्के से रगड़ने लगा।

पूजा की पूरी हंसी गायब हो गयी। मैंने ये देखकर थोड़ा स्माईल करना शुरु किया. ताकि पूजा थोड़ा नार्मल हो जाऐ। पर उसको हंसी नहीं आयी।

पूजा के होंठ थोड़ा खुल गए थे, और उसने छत की तरफ देखकर अपना मुंह खुला ही रखते हुए अपने शरीर को दायें बायें रगड़ना जारी रखा।

हम सब को लग गया कि अब पूजा तैयार हैं अदला बदली के लिए. फिर अशोक ने पूजा के पेट और सीने को और भी टाइट झकड़ कर लगभग उसके पिछवाड़े पर एक धक्का सा मार दिया।

मै भी समझ सकती थी कि अशोक के लिए इतनी देर रोक पाना कितना मुश्किल रहा होगा। क्युँ कि नितीन खुद मुझे कितनी बार अपने लंड से मेरी गांड पर झटके मार चुका था।

पूजा ने जैसे ही अपनी गांड पर अशोक के लंड का झटका खाया उसकी जैसे नींद उड़ गयी। वो तुरंत अशोक से दूर हुयी. उसका चेहरा गंभीर था।

वो टेबल की तरफ बढ़ी। यह देख मैंने भी नितीन को दूर किया और अब हम चारो टेबल पर आकर बैठ गए. हम तीनो ने पूजा को खुश करने की कोशिश की।

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डांस के बहाने पूजा और अशोक एक दूसरे के करीब आये। फिर जैसा सोचा था वो ही हुआ और पूजा डांस करते थोड़ा बहक गयी पर फिर संभल भी गयी थी। अब हम उसका हाल जानने लगे।

नितीन: “क्या हुआ पूजा, डांस करते थक गयी क्या?”

पूजा: “हां, अब खाना खा लेते हैं, फिर घर चलते हैं”

नितीन: “इतनी जल्दी क्या हैं? थोड़ा और डांस करते हैं ना”

मैं: “चलो पूजा, तुम्हे डांस करने में मजा नहीं आया?”

पूजा: “मजा आया पर अब भूख लग रही हैं, खाना खा लेते हैं”

फिर हम लोगो ने खाना मंगवा लिया। खाना खाते वक्त लगातार पूजा गंभीरता के साथ बीच बीच में अशोक को देख रही थी। मै दो-तीन बार उसको आंख से इशारा कर जैसे पुछा कि क्या हुआ पर वो गरदन हिला कर ना बोल देती कि कुछ नहीं हुआ।

अशोक, नितीन और मै हल्की फुलकी बातों के साथ माहौल को खुश रख रहे थे और पूजा हमारी बात सुन थोड़ा मुस्कुरा भी देती, पर फिर गंभीर हो जाती।

खाना खाने के बाद वेटर को बुलाकर केक मंगवाया गया। नितीन और पूजा ने केक काटा और एक दूसरे को खिलाया और फिर हमें भी.

मैने भी केक की फ्रॉस्ट क्रीम में अपनी ऊँगली भरी और नितीन की तरफ बढा दी. उसने मेरी ऊँगली को अपने मुंह में लेकर अच्छे से चूसना शुरु कर दिया।
 
पूजा देखते ही रह गयी कि मै इतना खुल क्युँ हो रही हूँ, या माहौल ही ऐसा था। तब तक अशोक ने भी अपनी ऊँगली को पूरी तरह फ्रॉस्ट क्रीम में लपेट दिया। उसने अपनी ऊँगली पूजा की तरफ बढ़ाई और पूजा थोड़ा पीछे हटी.

तब तक नितीन ने भी अपनी ऊँगली फ्रॉस्ट क्रीम में भर कर मेरी तरफ बढ़ाई और मैंने मजे लेते हुए उसकी ऊँगली को अच्छे से चाट कर साफ़ कर दिया।

अशोक भी अपनी ऊँगली जबरदस्ती पूजा के होंठो पर ले आया। पूजा को मुंह खोलना ही पड़ा और अशोक ने अपनी ऊँगली को पूजा के मुंह में उतार दिया और उसको चाटने को बोला.

पूजा शुरु में थोड़ा सकपकाई पर फिर मुझे नितीन की ऊँगली चाटटे देख उसने भी अशोक की ऊँगली को अपने मुंह में रख चाटटे हुए साफ़ कर दिया।

नितीन: “पूजा, तुम भी अशोक अपनी सफ़ेद क्रीम टेस्ट कराओ।”

यह सुन पूजा तो एकदम खामोश हो गयी और चेहरा उतर गया कि नितीन ने क्या बोल दिया।

नितीन: “केक की क्रीम की बात कर रहा हूँ, तुम क्या समझ गयी!”

पूजा बुरी तरह शर्मा गयी और नितीन के कंधो पर एक हाथ मारा और एक थोड़ा मुंह बनाते हुए शर्मीली स्माईल बिखेर दी।

पूजा ने भी अब अपनी ऊँगली क्रीम में भरी और अशोक के होंठो की तरफ बढा दिया। अशोक अब पूजा की ऊँगली को अच्छे से चाटने लगा और पूजा भी शर्माते हुए खिलखिला रही थी।

हम खिलखिलाते हुए हमारी बॉन्डिंग को मजबूत कर रहे थे और जो हो रहा था वो सामान्य हैं यह साबित कर रहे थे। हम लोगो ने फिर बैठ कर केक खा लिया और बीच बीच में एक दूसरे को भी खिलाते रहे।

केक खाने के बाद हम केक पर थोड़ा चर्चा करते रहे कि हमने किस मजे से एक दूसरे को केक खिलाया. इसके बाद मै पूजा के साथ हाथ साफ करने को वाशरूम में गयी और वहीं उसके दिल का हाल जानना चाहा.

मैं: “क्या हुआ, तुम काफी समय से सीरियस क्युँ हो? आयी थी तब तो काफी खुश थी। कोई बात परेशान कर रही हैं?”

पूजा: “नहीं मै खुश हूँ, कोई बात नहीं हैं”

यह बोल कर वो नकली हंसी अपने चेहरे पर ले आयी।

मैं: “नहीं कोई तो बात हैं जो तुम्हे परेशान कर रही हैं। तुम मुझे बता सकती हो. बोलो, खुल कर बात करो, मै तुम्हारी सहेली हूँ ना?”

पूजा: “तुम्हे कुछ अजीब नहीं लगा, जिसकी तरह वो दोनो डांस कर रहे थे। तुम बुरा मत मानना पर मुझे लगा कि अशोक मेरे कुछ ज्यादा ही करीब था”

मैं: “तुम भी क्या छोटी छोटी चीजे सोच रही हो. रोमांटिक गाना चल रहा हैं, तो कोई दूर रहकर थोड़े ही डांस करेगा. लड़की के पास आकर तो डांस करना ही पड़ेगा ना”

पूजा: “तुम्हे बुरा नहीं लगा! मुझे लगा नितीन भी तुम्हारे साथ कुछ ज्यादा ही खुल रहा था”

मैं: “मुझे तो कुछ अजीब नहीं लगा। सब नार्मल था। अशोक भी मेरे साथ ऐसे ही डांस करता हैं”

पूजा: “पता नहीं, मुझे बहुत गलत लगा”

मैं: “तुम भी ना, क्या क्या सोच लेती हो. अगर नितीन मेरे साथ कुछ गलत कर रहा होता तो अशोक उसको रोक नहीं देता. इसी तरह तुम्हारे साथ अशोक गलत करता तो नितीन रोक देता. तुम्हे क्या महसूस हुआ डांस करते वक्त?”

पूजा: “पता नहीं, मै बता नहीं सकती उस वक्त क्या क्या चल रहा था मेरे दिमाग में”

मैं: “मुझे लगता हैं तुम्हे अशोक के साथ डांस करना अच्छा लगा। मुझे पता हैं नितीन को डांस करना नहीं आता, शायद इस वजह से तुम्हे

अशोक के साथ डांस करना अच्छा लगा हो. एक काम करते हैं फिर से डांस करते हैं, तुम्हे पता लग जायेगा”

पूजा: “नहीं नहीं, मै तो वैसे ही घबराई हूँ पिछले डांस से ”

मैं: “इसमें घबराने की क्या बात हैं। अशोक के साथ डांस करना अच्छा लगा तो अच्छा लगा, इसमें छुपाने की क्या बात हैं। नितीन थोड़े ही बुरा

मानेगा. उसको तो अच्छा लगेगा कि सालगिरह के दिन उसकी बीवी खुश होगी. चलो बाहर तुम्हारा अशोक के साथ डांस करवाते हैं और तुम्हारा डर भगाते हैं”

पूजा: “नहीं प्लीज प्रतिमा, ऐसा मत करो. मेरे तो हाथ पैर वैसे ही कांप रहे हैं। मुझे नहीं करना ये सब”

मैं: “नर्वस होना तो और भी अच्छी निशानी हैं। चलो, शर्माओ मत. मेरी गारंटी हैं नितीन कुछ नहीं बोलेगा. बस तुम अपना मन बना लो. तुम्हे अशोक के साथ डांस करना हैं ना?”

पूजा: “पता नहीं, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा हैं। मुझे कुछ नहीं करना, हम घर चलते हैं”

मैं: “मुझे ऐसा क्युँ लगता हैं कि डांस करते हुए तुम उत्तेजित हो गयी थी। तुम्हारी अंदर की वासनाऐं भड़क गयी थी। अब उसी आग को शांत करने के लिए तुम नितीन को जल्दी से घर ले जाना चाहती हो”

पूजा: “ऐसा कुछ नहीं हैं, वो सिर्फ एक डांस था। और मेरी कोई वासनाऐं नहीं भड़की. मुझे घर जाने की कोई जल्दी नहीं हैं”
 
पूजा: “ऐसा कुछ नहीं हैं, वो सिर्फ एक डांस था। और मेरी कोई वासनाऐं नहीं भड़की. मुझे घर जाने की कोई जल्दी नहीं हैं”

मैं: “तो फिर तुम्हारी सालगिरह की पार्टी एन्जॉय करो ना. एक राऊंड डांस का हो जाए. मै भी देखती हूँ तुम्हारी वासनाऐं भड़कती हैं या काबू में रहती हैं”

पूजा: “प्लीज ऐसा मत करो प्रतिमा”

मैं: “मतलब तुम मानती हो, तुम्हारी वासनाऐं भड़की थी। इसमें छुपाने की क्या बात हैं। भड़क गयी तो भड़क गयी, इसमें क्या हैं!”

पूजा: “कोई वासना नहीं भड़की”

मैं: “तो फिर डांस करने से क्युँ डर रही हो? तुम्हारी सच्चाई बाहर आ जाएगी, यहीं ना?”

पूजा: “मै डर नहीं रही. मेरी डांस करने की इच्छा नहीं बस. घर नहीं जाना तो कोई बात नहीं, थोड़ी देर बात कर लेते हैं, चलो बाहर”

अब हम दोनो वापिस प्राइवेट रूम में आये और टेबल पर बैठ गए. नितीन और अशोक वहीं थे और जैसे आँखों से इशारा कर पूछ रहे थे कि काम हुआ कि नहीं।

मैने भी आँखों के इशारे से उनको थोड़ा इंतजार करने को कहा. वो दोनो अब रोमांटिक किस्से सुना माहौल नार्मल करने लगे। पूजा भी अब थोड़ा नार्मल हो एन्जॉय कर रही थी। मुझे अब आगे का काम करना था।

मैं: “अशोक ये पूजा तुम्हारे डांस की बहुत तारीफ कर रही थी। ”

पूजा मेरी शक्ल देखने लगी। वो मेरे पास ही बैठी थी तो टेबल के नीचे से ही हाथ मेरी जांघ पर रख दबा दी. मैंने भी उसके कंधे पर हाथ रख दिया।

मैं: “पूजा बोल रही थी कि एक राऊंड और डांस का हो जाए तो मजा आ जाऐ”

पूजा: “मैने कब कहा! ये प्रतिमा की ही इच्छा हैं और मेरा नाम ले रही हैं”

मैं: “अच्छा मेरी इच्छा हैं, अब तो डांस करोगी? चलो ऊठो, आ जाओ मैदान में”

मै अब उठ खड़ी हुयी और मुझसे पहले नितीन और अशोक तैयार थे। मै पूजा को उठाने लगी, वो अपनी जगह से हिली नहीं और सिर्फ मुस्कुराते हुए मना करती रही.

पूजा: “तुम लोगो को डांस करना हैं तो करो, मुझे नहीं करना”

मैं: “इतना क्या शर्मा रही हो? अशोक तुम्हे खा नहीं जायेगा. नितीन तुम्हे कोई आपत्ति हैं कि पूजा अशोक के साथ डांस करे?”

नितीन: “इसमें पुछने की क्या जरुरत हैं! डांस ही तो हैं”

मैं: “चलो पूजा, अब तो नितीन ने भी बोल दिया हैं”

पूजा: “तुम्हे करना हैं तो करो, मै देख रही हूँ”

मैं: “हम यहाँ कोई तमाशा थोड़े ही कर रहे हैं जो तुम बैठ कर देखोगी”

पूजा: “वैसे नहीं देखूंगी. मै तुम्हे देख सीखूंगी फिर वो स्टेप मै कर लुंगी, मुझे तुम्हारी तरह डांस नहीं आता”

मैं: “ठीक हैं। मै नितीन के साथ स्टेप करके बताती हूँ, फिर तुम भी करना”

मै अब नितीन को लेकर टेबल से दूर आयी और उसके साथ डांस करना शुरू किया. मै उसको स्टेप बताती जा रही थी कि उसको मुझे कैसे लिफ्ट करना हैं।

मेरे बताये अनुसार नितीन अब मुझे अलग अलग पोज़ में लिफ्ट कर रहा था और इस बहाने उसे मेरे शरीर के अलग अलग हिस्सों को पकड़ने का मौका मिल रहा था।

कभी वो मेरी जांघो को पकड़ मेरा पाँव थोड़ा उठा लेटा तो कभी मेरी गांड के नीचे से पकड़ ऊपर उठा लेटा। कभी मेरी पीठ पकड़ मेरा वजन अपने हाथ पर लेता।

पूजा और अशोक वो सब ख़ुशी ख़ुशी देख रहे थे। कभी मै नितीन की एक बांह में झूलते पूरा पिछे झुक जाती तो वो मेरे सीने पर होंठ रख पोज़ बनाता।

कभी वो मेरे पिछवाड़े से चिपक रगड़ देता तो कभी सीने को रगड़ते हुए मुझे लिफ्ट करता. मुझे जितने हॉट स्टेप्स आते थे मैंने नितीन के साथ वो सब कर लिए थे और इस बीच नितीन का लंड कड़क हो कर बार मुझे चूभता रहा।
 
मेरी नजरे बार बार पूजा और अशोक पर भी थी। वो हॉट डांस देख कर वो दोनो भी हिल चुके थे जो उनकी शक्ल बता रही थी। मुझे लग गया कि मेरे और नितीन की तरह वो दोनो भी अब गरम हो चुके हैं।

मै और नितीन अब आकर बैठ गए।

मैं: “चलो पूजा अब तुम्हारी बारी हैं”

पूजा अब नितीन को देखने लगी, जैसे उसकी अनुमति ले रही हो।

नितीन: “अब जाओ भी, इतना क्या सोच रही हो”

पूजा को एक बार फिर हमने अशोक के साथ डांस करने को भेजा,

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मैंने नितिन के साथ डांस कर पूजा को अहसास कि वो भी अशोक के साथ खुल कर डांस कर सकती हैं। अब बारी पूजा की थी अशोक के साथ हॉट डांस करने की करने की ।

पूजा तुरंत उठ गयी और अशोक उसका हाथ पकड़े उसको डांस के लिए खुली जगह ले आया। पहली ही स्टेप में अशोक ने पूजा के एक घुटने के पीछे थोड़ा ऊपर जांघो से पकड़ा और उसकी टांग मोड़ते हुए अपनी अपनी कमर से चिपका दिया। जिसकी से पूजा की चूत का हिस्सा अशोक के लंड के हिस्से टकरा गया।

फिर अशोक ने पूजा के ब्लाउज से झांकती उसकी नंगी पीठ को पकड़ अपनी तरफ खिंच कर पूजा की छाती का उभार अपने सीने से दबा लिया और अपना चेहरा पूजा के चेहरे के एकदम करीब ले आया जहा दोनो के होंठ सिर्फ एक इंच दूरी पर थे.

पूजा के होंठ एक बार तो चूमने के लिए जैसे खुल गए पर अशोक ने उसको फिर अपने से दूर कर खड़ा किया और डांस की दुसरी स्टेप की तरफ बढा.

पूजा अब अशोक के हाथ की कठपुतली बन चुकी थी। अशोक ने अब पूजा के शरीर को मनचाहे तरीके से कभी इधर ऊधर तो कभी हाथ पैर फैलाते हुए कभी अपने से चिपका दिया तो कभी हवा में उठा दिया।

अशोक ने पूजा की कमर को दबाते हुए उसको पिछे की तरफ झुका दिया और उसके गले में अपने होंठ चिपका कर होंठो को रगड़ते हुए उसके सीने तक ले आया जहा ब्लाउज बंधा था।

फिर पूजा को सीधा खड़ा करते हुए ब्लाउज के ऊपर ही चूमते हुए दोनो मम्मो के बीच से अपने होंठ चूमते हुए पूजा के पेट पर अपने होंठ रख उसकी नाभी को गीला कर दिया।

पूजा अब पूरी तरह उस नशे में डुब चुकी थी। वो गंभीरता से अपने शरीर पर अशोक के हाथ और होंठो की छुअन को एन्जॉय करने लगी थी।

जब जब अशोक के होंठ पूजा के नंगे बदन के हिस्से को छुते तो पूजा की एक आह से निकल जाती और उसके होंठ खुले के खुले रह जाते.

डांस करते हुए एक वक्त ऐसा आया जब पूजा और अशोक एक दूजे के सामने बाहों में लिपटे थे और दायें बायें हिल रहे थे.

अनायास ही पूजा ने अशोक की आँखों में झांकते हुए अपने होंठ खुद ही अशोक के होंठो के पास ले आयी। उस हल्की रोशनी में पूजा की लिपस्टिक में चमकते होंठ अशोक के होंठ को हल्का सा छू गए.

एक चिंगारी सी सूलग उठी और एक सेकण्ड में ही दोनो के होंठ जब एक दूसरे से दूर हुए तो एक लार की डोरी से बंध गए थे जैसे किसी गौंद से चिपक गए हो ऐसा लगा।

पूजा तुरंत अशोक से दूर होने लगी और पलट गयी पर अशोक ने उसको उसके पेट से पकड़ लिया और एक बार फिर उसके नंगे कंधे पर अपने होंठ रख चुम लिया।

पूजा अब सिर और पलके झुकाये आहें भरने लगी थी। कंधे को चूमते अशोक के होंठ अब गले की तरफ बढे और वहां चूमने लगे और फिर कानो के पीछे.

ये देखकर मेरी खुद की कुर्सी की सीट नीचे से गरम हो गयी थी। पूजा भी नशे में डुब चुकी थी और आंखे बंद हो चुकी थी।

पूजा के कानो के पीछे चूमते हुए अशोक ने चालाकी से पूजा के कंधे पर एक हाथ रख वो पिन निकाल जिसने पूजा की साड़ी के पल्लू को कंधे से बाँध रखा था।

एक झटके में साड़ी का चमचमाता पल्लू नीचे जा गिरा और सामने थी पूजा की छाती जो ब्लाउज के अंदर ही पूजा की तेज साँसों के साथ ऊपर नीचे हो फुल रही थी।

पूजा की सांसें अब और तेज हो गयी थी और साथ ही उसकी छाती का उभार भी तेजी से आगे पिछे हो रहा था। पूजा के ब्लाउज के हूक जैसे कभी भी टूटने वाले थे और वो ब्लाउज खुलने वाला था।
 
अशोक ने पूजा के पेट को और भी कस कर पकड़ लिया। पूजा की साँसों के साथ उसका पतला पेट भी तेजी से बहुत ज्यादा अंदर बाहर हो रहा था। उसका पेट इतना अंदर जा रहा था कि शायद उसकी साड़ी उसके पेटीकोट से बाहर अपने आप ही आ जाएगी.

इन सब के बीच पूजा दायें बायें हिल रही थी और पिछे से चिपके अशोक के लंड से रगड़ खा रही थी। वो बेसुध थी कि उसका पल्लू सीने से हट चुका हैं। अशोक को लगा कि पूजा उसके वश में आ चुकी हैं। उसने उसका हाथ जो पूजा की नाभी के ऊपर था उसे नीचे खिसकाना शुरु किया.

जैसे ही तेज लेती साँसों से पूजा का पेट अंदर गया, अशोक ने अपनी दो उंगलिया पूजा के पेटीकोट में जरा सी उतार दी. अशोक की उंगलिया पेटीकोट में जाते ही पूजा कड़क हो गयी।

पूजा ने अपनी सांस रोक ली और अपने पेट और पेटीकोट में जगह बनाए रखी। अशोक की चारो उंगलिया अब

पूजा के पेटीकोट में उतरने लगी और पूरी उंगलिया अब पेटीकोट के अंदर थी।

पूजा ने सांस लेना शुरु कर अपने पेटीकोट को टाइट कर लिया और अशोक का हाथ अंदर फिसलना बंद हुआ और वहीं रुक गया। अगली सांस अंदर जाते ही अशोक ने अपना हाथ उसके पेटीकोट से बाहर निकाल दिया।

अशोक ने पूजा के कानो के पीछे चूमना बंद किया और उसको घुमाते हुए अपने सामने किया. पूजा की नशीली आंखे खुली और अशोक की आँखों में झाँकने लगी।

अशोक ने पूजा की चूत के हिस्से को अपने लंड के हिस्से से चिपकाया । अशोक ने पूजा की कमर पर हाथ रख ऊपर के हिस्से को पीछे झुकाया और अपने होंठ पल्लू हटने के बाद खुल चुके नंगे सीने पर रख दिया।

पूजा अभी भी डांस करते लहरा रही थी और उसकी चूत अशोक के लंड से रगड़ खा रही थी। अशोक ने पूजा के मम्मो के ठीक ऊपर के भाग पर ब्लाउज के बाहर झांकते मम्मो के उभार पर अपनी जीभ लगा ली.

पूजा ने तुरंत झटका खाते हुए लहराना बंद किया और सीधी होकर पीछे हट गयी और तेजी से अपना पल्लू उठा कर फिर अपने सीने पर रख अपनी छाती को छुपा लिया।

अशोक फिर पूजा की तरफ बढा पर पूजा ने उसको हाथ आगे कर रोक दिया। फिर पूजा ने मुझे और नितीन को देखा, जैसे वो कोई गुनाह करती पकड़ी गयी थी।

मैने ताली बजाना शुरु किया ताकि पूजा थोड़ी नार्मल हो जाए और फिर नितीन और अशोक ने भी ताली बजाई. पूजा गंभीर चेहरा बनाए अब टेबल की तरफ चलते हुए आने लगी।

नितीन: “हमारे इस प्राइवेट रूम का समय खत्म होने वाला हैं। हम ऊपर रूम में चलते हैं, गिफ्ट अदला बदली कर लेते हैं”

पूजा: “रूम !! वो किसलिए?”

नितीन: “तुम्हारे लिए सरप्राइज हैं, मैंने सोचा आज रात हम होटल रूम में ही रुकेंगे. वहीं पर गिफ्ट भी अदला बदली कर लेते हैं”

अशोक: “तुम दोनो लड़कियां रूम में जाओ, हम पेमेन्ट करके आते हैं”

मैने चाबी ले ली और पूजा को लेकर रूम की तरफ ले आयी। पूजा को अभी भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा हैं। मै और पूजा अब रूम का ताला खोल कर अंदर आये. पूजा इधर ऊधर देखने लगी पर उसे वहां कोई गिफ्ट बॉक्स नहीं दिखा.

पूजा: “रूम बुक करने की जरुरत थी! हर साल तो नहीं करते. यहाँ कोई गिफ्ट भी नहीं दिख रहा”

मैं: “थोड़ा सब्र करो, तुम्हारा गिफ्ट नितीन अभी लेकर आएगा. वैसे डांस करते क्या हो गया तुम्हे. फिर से बहक गयी थी क्या?”

पूजा अब बुरी तरह से शर्मा गयी थी। उसके हाथ साड़ी के अंदर छुपे थे पर वो बुरी तरह कांप रहे थे.

पूजा: “तुम्हे ऐसा लगा? नितीन ने पता नहीं क्या सोचा होगा। मैंने कुछ गलत किया क्या? बताओ ना”

मैं: “तुमने एक ही चीज गलत की थी कि अपने आप को दबा रही थी। अपने दिल की बात छुपाओ मत. नितीन को तो तुम्हारा डांस बहुत पसंद आया। ऐसा टूट कर डांस किया कि मजा आ गया। उसने ताली भी तो बजाई थी”

पूजा: “अच्छा? मेरा तो पल्लू भी कब गिरा पता ही नहीं चला. मुझे बहुत बुरा लग रहा हैं”
 
पूजा की तेज तेज सांसें एक बार फिर शुरु हो चुकी थी। उसने अपने दोनो हाथों को आपस में बाँध लिया था और उसकी छाती तेजी से धड़क कर ऊपर नीचे हो रही थी।

मैं: “तुमने इस से पहले कभी किसी पराये मर्द के साथ डांस किया हैं?”

पूजा: “नहीं”

मैं: “तुम पहले कभी डांस करते वक्त बहकी हो?”

पूजा: “नहीं”

मैं: “इसका क्या मतलब हैं, तुम्हे पता नहीं चला?”

पूजा: “क्या!”

पूजा की सांसें अब और भी तेज हो चुकी थी और शरीर कांपने लगा था

मैं: “तुम्हे शायद जरुरत हैं”

पूजा: “किसकी?”

मैं: “तुमको अशोक पसंद आ गया हैं”

पूजा: “कैसी बातें कर रही हो तुम. वो तुम्हारा पति हैं। मै उसके बारे में ऐसा कुछ नहीं सोचती”

मैं: “तो फिर तुमने उसको रोका क्युँ नहीं जब वो तुम्हे चुम रहा था”

पूजा की जुबान अब लड़खड़ा गयी थी।

पूजा: “वो सिर्फ डांस का पार्ट था”

मैं: “उसने तुम्हारा पल्लू गिराया, वो भी डांस था?”

पूजा: “वो..वो गलती से गिर गया होगा”

मैं: “उसने तुम्हारे पेटीकोट में हाथ डाल दिया था, तुमने रोका भी नहीं”

पूजा: “मुझे ..पता नहीं चला”

मैं: “क्युँ कि तुम उसके नशे में थी, वो तुम्हे पिछे से चिपक रगड़ रहा था और तुम उसका साथ दे रही थी”

पूजा: “तुम ऐसी बातें क्युँ कर रही हो! तुम्हे यह सब लगा।..तुमने मुझे रोका क्युँ नहीं? तुम्हारा पति दुसरी औरत के साथ यह सब कर रहा था था तो उसको भी रोकना चाहिये था।”

मैं: “तुम दोनो इतना एन्जॉय कर रहे थे, कोई कैसे रोकता”

पूजा: “नहीं यह झूठ हैं। मुझे डांस करना ही नहीं चाहिये था। तुमने यह सब महसूस किया तो नितीन ने भी सब देखा होगा कि कैसे मै बहक रही थी, उसने पता नहीं मेरे बारे में क्या सोचा होगा”

मैं: “शांत हो जाओ, नितीन को कुछ बुरा नहीं लगा। वो तुम्हारे लिए खुश था। अगर नितीन यह अब मेरे साथ करता तो तुम क्या करती ? तुम मुझे और नितीन को रोकती या मजे से डांस करने देती?”

पूजा: “पता नहीं”

तभी दरवाजे पर दस्तक हुआ और मैंने जाकर दरवाजा खोला. नितीन और अशोक अब कमरे के अंदर आये. पूजा अभी भी कांपते हुए मूर्ति की तरह रुआंसी खड़ी थी।

मैं: “क्या देख रही हो पूजा, नितीन तुम्हारा गिफ्ट लाया हैं, नहीं चाहिए?”

उसने नितीन को देखा, मगर नितीन के हाथ में कोई गिफ्ट नहीं था। मैं, नितीन और अशोक अब पूजा के सामने दो हाथ की दूरी पर खड़े थे.

मैं: “आज तुम्हे और नितीन को अब तक का सबसे अच्छा सालगिरह का गिफ्ट मिलेगा”

मैने अपना हाथ नितीन के कंधे पर लगा कर अपना सीना और बाकी का शरीर नितीन से सटा लिया।

मैं: “नितीन का गिफ्ट में खुद हूँ, और पूजा, आज रात तुम्हारा गिफ्ट अशोक हैं”

पूजा खुश होने के बजाय अभी भी शॉक में खड़ी थी। मैंने नितीन को छोड़ा और आगे बढ़कर पूजा का हाथ पकड़ अशोक की तरफ खिंचना चाहा.

पर तभी पूजा का एक हाथ दनदनाता हुआ आया और मेरे गाल पर आ पड़ा. एक तेज चटाक की आवाज हुयी और मेरा चेहरा उस आघात से दुसरी तरफ मुड़ गया।

पूजा को हमारा अदला बदली का आईडिया पसंद नहीं आया और मुझे तमाचा मार दिया।

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जब हमें लगा कि अब पूजा हमारे वश में आ गयी हैं और अदला बदली को तैयार हैं तभी उसने मुझे तमाचा मार कर अपने इरादे साफ़ कर दिए।

मेरा सिर चकराने लगा और गाल पूरे गरम हो जलने लगे। कानो में बस साय साय की आवाजे आ रही थी। कुछ सेकण्ड के लिए मुझे दिखना ही बंद हो गया।

मैने अपने गाल पर हाथ रख उस जलन को मिटाने की कोशिश की और आंख बंद कर ली. मुझे कुछ समझ नहीं आया कि क्या हो गया। जैसे अचानक कोई बम धमाका हो गया और सुनाई देना बंद हो गया था।

मैने सिर उठा कर आंखे खोली पर सामने पूजा नहीं थी। मेरे पास अशोक और नितीन खड़े थे। पीछे मुड़कर देखा तो पूजा दनदनाती हुयी दरवाजा खोलकर बाहर जाती दिखाई दी.

नितीन ने मेरे कंधे पर हाथ रख मुझे सांतवना दी और तुरंत हरकत में आया और पूजा के पीछे भागा. अशोक ने आगे बढ़कर मुझे अपने सीने से लगा कर मुझे शान्ति दी.

उस चांटे की चोट उतनी नहीं थी जितनी दिल पर चोट लगी थी। मेरी आंखे भर आयी थी और थोड़ी ही देर में आंसू बहने लगे। अशोक ने मुझे शांत करते हुए अपने रुमाल से मेरे आंसू पोंछे और मुझे लेकर रूम से बाहर आ गया।

हम बाहर आये तब तक नितीन और पूजा वहां से जा चुके थे। मुझे लगा मै पूजा को फंसा चुकी थी पर कुछ लोग इस तरह के रिश्तो को अपवित्र मानते हैं और उनकी सोच को इतनी आसानी से डिगाया नहीं जा सकता हैं।

मुझे समझ आ गया कि मैंने कितनी बड़ी गलती कर दी. मुझे अपने आप पर ही अफ़सोस हो गया कि मै ऐसी क्युँ हूँ! मै क्युँ नहीं पूजा की तरह पतिव्रता बन पायी।

पूजा की तरह मै भी कही बार भटकी थी, पर मै पूजा की तरह समय पर संभल नहीं पायी। काश मै प्रतिमा ना होकर पूजा होती तो आज मुझको अपने आप पर ज्यादा गर्व होता.

अशोक ने मुझे समझाने की कोशिश की कि मै ये सब भूल जाऊ और उसने मुझसे माफ़ी भी मांगी कि उसने मुझे इस काम के लिए फंसाया.

नितीन और अशोक का तो कुछ नहीं बिगड़ा पर पूजा की नजरो में मै हमेशा के लिए गिर चुकी थी। आईने में अपनी शक्ल देखी, उस पर पूजा की उंगलियों के निशान अब लाल हो चुके थे.

उस थप्पड़ की गूँज से मै रात भर सो नहीं पायी। बार बार मेरा दिल रो रहा था। सुबह आईने में मेरे गालो को देखते हुए मै फिर रो पड़ी.

मैने ऑफिस से छुट्टी ले ली. कुछ खाने का दिल भी नहीं कर रहा था। एक इच्छा हुयी कि अभी जाकर पूजा से मिलु और मिलकर उस से माफ़ी मांग लु और फिर उसको सब सच बता दू कि मैं सिर्फ मोहरा थी।

पर मेरी बात का वो क्युँ विश्वास करेगी. फिर मै उसका सामना कैसे कर पाउंगी. दिन भर इसी उधेड़बुन में रही. शाम को स्वीमिंग पर जाने का समय हो गया था। पर हिम्मत नहीं थी वहां जाकर पूजा का सामना कर पाऊ.

शाम को घर आकर अशोक ने मुझे फिर समझाया कि मै उस घटना से अफेक्ट ना होऊ. मेरा बच्चा मेरी हालत देख परेशान रहा। उसे लगा मै बीमार हूँ.

पर उसको क्या पता कि बीमार तो मै आज से पहले थी। पूजा ने तो थप्पड़ के रूप में मुझे एक इंजेक्शन लगाया था कि मै सुधर जाऊ. मुझे अब उस घटना से उभरना ही था और उसको एक सीख की तरह लेना था।

इन सब के बीच एक चीज तो साफ़ हो गयी कि सच में पूजा और अशोक के बीच पहले कुछ संबंध नहीं रहा था। उस होली वाले दिन जो कुछ भी नितीन ने कहा था वो सिर्फ झूठ था, मुझे कमजोर कर चोदने के लिए.

मै ही पागल थी जो उसकी बातों में आ गयी और अपने पति पर शक किया था। हालांकि मेरा पति इसी तरह का हैं जो उसने मुझे ऐसे काम के लिए भेज दिया कि मुझे मेरी ही सहेली ने थप्पड़ मार दिया।

अगले दिन मै ऑफिस गयी, बहुत उदास थी और ऑफिस वाले भी मुझे देख बीमार समझे. ख़ास तौर से मेरा बॉस राहुल मेरी हालत देख परेशान हुआ।

राहुल के साथ मेरे क्या संबंध हैं ये तो आप मेरी कहानी “Nayi Dagar , Naye Humsafar” में पढ़ ही चुके हैं। राहुल मेरे प्यार मे पड़ गया था और मै भी उसको चाहने लगी थी । पर मुझे चोदने की फिराक मे उसने मेरे साथ धोखा किया था । अब हम दोनो के बीच दूरी आ चुकी थी ।

उस वक्त राहुल की सच्चाई जान मुझे जितनी बड़ा झटका लगा था उतना ही बड़ा झटका अब पूजा का थप्पड़ खाकर लगा था।

राहुल दिन भर में जब भी मिला मुझसे मेरी परेशानी का कारण पूछता रहा पर मै उसको टालती रही कि मै ठीक हूँ.

दोपहर बाद मुझे पूजा का फ़ोन आया। अपने मोबाइल की स्क्रीन पर पूजा का नाम देखते ही मेरे गालो की जलन एक बार फिर पैदा हो गयी। मन में एक डर सा बैठ गया। कल पूजा ने सिर्फ थप्पड़ मारा था मुझे कुछ सुनाया तो था ही नहीं.

शायद आज फ़ोन पर मुझे बुरा बोल कर सुनाना चाहती थी और अपनी भड़ास निकालना चाहती होगी. पहले ही मेरा मूड उदास हैं और अब उसकी खरी खोटी सुनने की इच्छा नहीं थी।

मैने पूजा का फ़ोन नहीं उठाया. मेरी हालत देख मेरी ऑफिस की सहेली रूबी भी चिंतित थी। उसने एक साल पहले ही ऑफिस ज्वाइन किया था और जल्द ही मेरी अच्छी सहेली बन गयी थी क्युँ कि वो बहुत समझदारी की बातें करती थी।

वो एक तलाकशुदा महिला थी और 32 के करीब उम्र थी। मुझसे से कही ज्यादा हिम्मत उसमे थी जो अपने पति को सहन करने के बजाय उसको तलाक देकर अपनी आज़ादी भरी ज़िन्दगी जी रही थी।

तलाक के बाद उसका बच्चा कुछ महीनो के लिए बारी बारी से माँ या बाप के साथ रहता था। मै भी कभी कभी सोचती थी कि मै रूबी की तरह मजबूत क्युँ नहीं हूँ.
 
ऑफिस में रूबी पोस्ट में मुझसे थोड़ी नीचे थी पर उम्र में मुझसे बड़ी थी। पर हम दोनो काफी करीबी सहेलियां थी और एक दूसरे से ज्यादा कुछ छिपाती नहीं थी।

रूबी को मैंने अपने पति के बारे में सिर्फ ये बताया था कि मै उनसे थोड़ी परेशान हूँ. वो मुझे हमेशा खुद की तरह तलाक देने का आईडिया देती रहती और मै उसको हमेशा टाल देती.

दोपहर को लंच के बाद जब हम थोड़ा वॉक पर जाते हैं तो वो मुझे अलग से ले आयी और मेरा हाल जानने लगी।

रूबी: “क्या हुआ तुमको? फिर से तुम्हारे पति ने परेशान किया ना!”

मैं: “नहीं, वो बात नहीं हैं”

रूबी: “तो क्या बात हैं? जो भी हो, तुम्हारी परेशानी का कारण तुम्हारा पति ही होगा”

मैं: “हां वो ही हैं इसके पीछे, मगर पूरी तरह नहीं, इसमें मेरी भी गलती थी”

रूबी: “तू कब तक अपने पति को बचाती रहेगी और उसको सहन करती रहेगी. छोड़ क्युँ नहीं देती उसको. तलाक देकर दूर कर बीमारी. मेरी तरह आज़ाद हो कर सांस ले कर देख”

मैं: “उसकी जरुरत नहीं हैं अभी”

रूबी: “मै फिर कहती हूँ, तुम जैसी औरते अपने पति को सहन करती रहेगी, सिर्फ इसलिए कि रात को चुदने के लिए तुम्हे कोई लंड चाहिये होता हैं।”

मैं: “ये क्या बोल रही हो?”

रूबी: “मैने तुमको पहले भी बोला था ना. तुम्हे चुदने की लत लग चुकी हैं। जब तक रात को तुम्हारा पति तुम्हे चोद नहीं देता, तुम्हे खाना हजम नहीं होता. सिर्फ उस चुदने के नशे की खातिर तुम अपने पति को सहन कर रही हो”

मैं: “तुम गलत समझ रही हो, मुझे कोई नशा नहीं हैं”

रूबी: “अच्छा, नशा नहीं हैं! मैंने तुम्हे दो बार चैलेंज दिया था कि एक महीना अपने पति से मत चुदवाना, फिर क्या हुआ उस चैलेंज का?”

मैं: “मैने चैलेंज लिया तो था!”

रूबी: “लिया था तो फिर नतीजा क्या निकला? पहली बार तुमने तीसरी ही रात चुदवा लिया था। और दुसरी बार तो चैलेंज लेने के बाद 4 घंटे भी इंतजार नहीं हुआ और चुदवा लिया”

मैं: “मैने कोशिश तो की थी”

रूबी: “इसे कोशिश कहते हैं! एक महीने का चैलेंज था और 3 दिन भी नहीं टिक पायी”

मैं: “हर औरत में तुम्हारी जितनी हिम्मत नहीं होती ना जो अपने पति को छोड़ कर अलग हो जाए”

रूबी: “वो ही तो मै कह रही हूँ. तुम्हे चुदने की लत लग चुकी हैं। एक दिन भी चुदाये बिना तुम रह नहीं सकती. तुम्हारी चूत पति के लंड की गुलाम हैं”

मैं: “तुम मेरा दर्द बांटने आयी हो या बढ़ाने!”

रूबी: “मै तुम्हारी मदद को ही आयी हूँ. तुम्हारा ईलाज सिर्फ तलाक हैं”

मैं: “यह इतना आसान नहीं हैं”

रूबी: “मुझे पता हैं, यह आसान क्युँ नहीं हैं। पहले तुम्हे अपनी यह लंड की गुलामी की आदत छोड़नी होगी. वरना तुम कभी हिम्मत नहीं कर पाओगी”

मैं: “बात सिर्फ चुदने की नहीं हैं। और भी मजबूरियां हैं, मेरा एक बच्चा हैं”

रूबी: “अपनी चुदाई की लत को अपने बच्चे की आड़ में मत छुपाओ. मेरा भी बच्चा हैं, पर मैंने तलाक लिया ना!”

मैं: “तुम्हारी बात अलग हैं”

रूबी: “क्युँ, तुम्हारी चूत में कोई हीरे मोती जड़े हुए हैं कि तुम्हे रोज चुदवाना जरुरी हैं। तुम पहले कोशिश करो कि एक महीना बिना चूदे रह सकती हो”

मैं: “ठीक हैं मै आज से ही शुरु करती हूँ”

रूबी: “चलो देखते हैं, इस बार तुम कितना रुक पाती हो”

हम लोग फिर ऑफिस में आ गए और अपने काम में लग गए. शाम होने से पहले मुझे एक बार फिर पूजा का फ़ोन आया और मेरे हाथ पैर फुल गए.

मेरा फ़ोन साइलेंट पर ही था और मैंने पूरी रिंग जाने दी पर फ़ोन नहीं उठाया. कॉल ख़त्म होने के बाद मैंने पूजा का नंबर ही ब्लॉक कर दिया।

मुझमे अब हिम्मत नहीं बची थी कि मै पूजा की आवाज सुन पाऊ. किस मुंह से बात करती मै उस से .
 
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