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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

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अशोक ने पूजा की कमर, पीठ, जांघे, सीना, चेहरा सब छू कर रगड़ रगड़ आकर डांस किया. ख़ास तौर से उसने पूजा की गांड को निशाना बना कर उसको पीछे पकड़ कर अपना लंड से बहुत देर तक रगड़ा.

मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ राह था पर नितीन ने यह सब देखने के बाद भी कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी और अपनी बीवी को इस मादक तरीके से अपने ही दोस्त के हाथों मजे लेते देखता रहा।

अशोक की पैंट में उसका लंड कड़क हो थोड़ा आगे हो गया था और मै देख सकती थी। शायद नितीन ने भी देख लिया होगा। पर वो क्या कर सकता था, उसने ही उन दोनो को डांस की अनुमति दी थी।

अशोक ने मुझे और नितीन को भी डांस के लिए बोला और फिर जबरदस्ती उठा कर ले आये. मै वापिस बैठना चाहती थी पर नितीन ने मेरे दोनो हाथ अपने हाथ में ले लिए और डांस शुरु कर लिया।

अशोक इशारा कर रहा था कि मै नितीन की पीठ उनकी तरफ रखु ताकि वो आराम से डांस कर पाये। मुझे भी देखना था वो कैसी हदें पार करते हैं।

नितीन को डांस तो आता नहीं था तो मैंने नितीन को अपने सामने रखा और उसकी पीठ हमेशा पूजा और अशोक की तरफ रही.

इस मौके का फायदा उठा कर अशोक एक बार फिर पूजा के पीछे से चिपक गया था और अपना कड़क लंड पूजा की गांड में रगड़ रहा था। कुछ ही सेकण्ड में उसने पूजा का पल्लू भी खोल कर नीचे गिरा दिया।

पूजा ने अपने दोनो हाथ ऊपर उठा कर पीछे लाकर अशोक की गरदन के पिछे लगा दिए. पूजा की छाती फुल गयी। वो तो वैसे ही नशे में डुब चुकी थी तो उसके मम्मे अच्छे खासे फूले हुए थे.

अशोक तो कण्ट्रोल ही नहीं कर पा रहा था। एक हाथ पूजा के पेट के थोड़ा नीचे रख दूसरे से उसके ब्लाउज के ऊपर से अंदर हाथ डाल दिया और पूजा के मम्मे दबाने लगा।

पूजा आंख बंद किए तभी आंख खोले मजे ले रही थी। मै थोड़ा डर भी रही थी, कही नितीन यह देख ना ले। मैंने नितीन को और टाइट पकड़ लिया, उसने मुझे अपने सीने से लगा दिया।

मेरे मम्मे भी उसके सीने से दब गए, इस बहाने ही सही वो अब मेरे ज्यादा कण्ट्रोल में था। मै उसको घुमने से रोक सकती थी। हम एक दूसरे से चिपके डांस कर रहे थे.

अशोक इतना तड़प रहा था कि उसने हिलना बंद कर दिया और अब पूजा की ब्लाउज की डोरिया पीछे से खोल दी थी और उसका ब्लाउज ढीला होकर बाहों में अटक गया।

अशोक ने अब पूजा के पेट को दबा कर उसकी गांड अपने लंड से चिपका दी. दूसरे हाथ से उसने पूजा के सीने को दबा कर अपनी छाती पूजा की पीठ से एकदम चिपका दी. दायें बायें हिलने की बजाय उसने एक दो धक्के पूजा की गांड पर जरूर मारे.

तभी नितीन ने अपना एक हाथ जो अब तक मेरी कमर को लपेटे था, उस से मेरी गांड को दबा दिया। मुझे उसकी बदतमीजी पसंद नहीं आयी और उसका हाथ झटक दिया।

मगर उसने अब अपने दोनो हाथों से मेरी गांड को दबाया. फिर मै उस से दूर हुयी. वो मुझ पर हस रहा था। मैंने उसके पीछे डांस करते पूजा और अशोक को देखा जो अभी भी एक दूजे से चिपके थे.

पूजा अब जरूर दायें बायें अपनी गांड हिलाते हुए अशोक के लंड को रगड़ते हुए मजा दिला रही थी। अशोक भी पूजा के नंगे कंधे को चुम रहा था। मुझे ऊधर देखते देख नितीन ने भी पीछे मुड़कर देखा.

पूजा और अशोक की तो आंखे बंद थी और मजे ले रही थे। नितीन मुड़ कर पूजा के सामने गया। मुझे लगा आज तो पूजा और अशोक की खैर नहीं हैं।

नितीन ने वहां जाकर पूजा के आधे खुले ब्लाउज को खिंच कर पूजा की बाहों से निकाल दिया। पूजा ने अंदर ब्रा भी नहीं पहना था तो उसके गोल मम्मे बाहर आ गए और वो टॉपलेस हो गयी। पूजा और अशोक की आंखे खुल गयी, मगर अशोक ने पूजा को अपने से चिपकाये रखा।

नितीन ने पूजा की साड़ी की पटली को उसके पेटीकोट से बाहर कर दिया और फिर साड़ी के बाकी भाग को भी पेटीकोट से बाहर खींचने लगा। मेरी तरह पूजा को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि नितीन कैसे गुस्सा निकाल रहा हैं।

मै भी क्या कर सकती थी, पूजा को थोड़ा ध्यान रखना चाहिये था। अब सजा तो मिलेगी ही. पूजा की साड़ी अब नितीन ने पूरा खोल कर हटा दी और अब उसने पूजा के पेटीकोट को बंधी डोरी की गांठ खोल कर उसका पेटीकोट भी खोल दिया।

अब पूजा सिर्फ अपनी पैंटी में खड़ी थी। मैंने पूजा को कई बार बिकिनी में स्वीमिंग पूल में देखा था, पर आज पहली बार टॉपलेस सिर्फ पैंटी में देख कर मै भी उसके फिगर की दीवानी हो गयी।

इतने समय तक स्वीमिंग करने का असर उसके फिगर पर दिख रहा था। अशोक अभी भी पूजा से चिपका था। नितीन ने अभी तक अशोक को कुछ नहीं कहा था। नितीन ने अब पूजा की पैंटी खोल उसको पूरा नंगा कर दिया।

पूजा की तेज सांसें उसके हिलते बदन से साफ़ दिख रही थी। उसका पेट तेजी से अंदर बाहर हो रहा था और उसके बड़े से मम्मे हल्का सा फुल कर सिकुड़ रहे थे और सांस ले रहे थे.
 
साथ ही पूजा के मम्मे ऊपर नीचे हल्का से हिल रहे थे। पूजा की आँखों में एक प्रश्नचिन्ह था। अंदर उत्तेजना भरी थी पर डर उसकी आँखों और चेहरे पर था।

नितीन अब पूजा के सामने हाथ बाँध कर खड़ा था। अशोक ने अपने दोनो हाथों से पूजा के नंगे धड़कते मम्मो को दबोच लिया और उन दोनो मम्मो को अपने हाथों में लेकर मसलना शुरु कर दिया।

पूजा मुंह खोले आहें भर रही थी पर संगीत के शोर में उसकी आहें सुनाई नहीं दे रही थी। अशोक ने जब पूजा के मम्मे छोड़े और पीछे हटा तो पूजा अपने दोनो हाथों को मलते हुए नीचे जमीन पर देखने लगी।

अशोक ने अपने कपड़े एक झटके में निकाल दिए और पूरा नंगा हो गया। उसको अभी भी चोदने की पड़ी थी, जब कि नितीन सामने था।

नंगा होते ही अशोक ने पूजा को आगे बढा कर सोफे के साइड से आगे झुका दिया। पूजा के नंगे मम्मे सोफे के सिरहाने से चिपक कर दब गए.

अशोक पूजा के पिछवाड़े था और अपना लंड पूजा की गांड में रगड़ने लगा। मैंने अपना माथा पिट लिया। वो इतनी गुस्ताखी क्युँ कर रहा था।

जब वो मार खाएगा तो मै उसको बचाने वाली नहीं थी। जल्दी ही पूजा की सांसें तेज हुयी और आंहे निकलने लगी। अशोक ने एक धक्का मारा और उसकी जांघो का ऊपरी भाग पूजा की गांड से टकराया. उसका लंड अब पूजा की गांड में घुसा चुका था।

पूजा जिस तरह दर्द भरी सिसकियां मार रही थी, मुझे यकीन था कि उसकी गांड में ही अशोक का लंड घुसा होगा। नितीन अभी भी हाथ बांधे अपनी बीवी को गांड मरवाते देख रहा था।

पूजा ने कहा था कि नितीन उस पर शक करता हैं, यह बात मुझे भी उसने बताई थी कि उसको अशोक और पूजा पर शक हैं, फिर वो इतना उदार हो गया कि पूजा को चुदने की छूट दे दी थी।

किसी पति का इतना बड़ा दिल होगा, यह मैंने नहीं सोचा था। अशोक की दिल की तमन्ना आज आखिर पूरा हो रही थी। इतने दिनों से चोदने को तड़पते मर्द को अपनी पसंद की औरत की गांड मारने को मिल रहा था। उसको तो अब तक बेस्ट जन्मदिन गिफ्ट मिल चुका था।

अशोक के झटके अब पूजा की गांड में पड़ने लगे थे। वो इतने जोर के झटके थे कि पूजा आगे पिछे पूरा हिल चुकी थी। अशोक ने आखिर अपनी इच्छा पूरी कर ली थी।

उसकी इच्छा भी तब जाकर पूरी हुयी जब उसको चुदाई की सबसे ज्यादा जरुरत थी। मै सोच रही थी मै यह चुदाई देखने तो नहीं आयी, मुझे शायद यहां से जाना चाहिये। पर जन्मदिन का केक कटना बाकी था और मुझे भी पूजा को पहली बार चुदते हुए देखना था।

पूजा भी आहें भरते हुए अभी थोड़े शॉक में थी कि नितीन क्या कर रहा हैं। पूजा की गांड पर पड़ते झटको से उसकी गांड बुरी तरह से जेली की तरह हिल रही थी।

अशोक के पूजा की गांड पर पड़ते झटको से थाप थाप की आवाजे आ रही थी। साथ में बजते संगीत के साथ चुदाई का मजा और ज्यादा बढ़ गया था।

थोड़ी देर बाद जब अशोक ने गांड मारने का मजा ले लिया तो उसने पूजा को थ्री सीटर सोफे की सीट पर सीधा लेटाया और उसका एक पांव सोफे के सिरहाने पर रख दिया और दुसरा नीचे जमीन पर.

पांव चौड़े होते ही पूजा की पूरी चूत खुल गयी। उसकी चूत की दरार गीली पड़ी थी। इतनी देर मादक डांस के बाद यह तो होना ही था।

अशोक उसकी टांग के बीच बैठ गया। उसका भी एक पांव सोफे की सीट पर तो दुसरा नीचे जमीन पर था। उसने जल्दी से पूजा की कमर पकड़ उसकी गांड को थोड़ा ऊपर उठाया और अपना लंड पूजा की चूत में डाल दिया।

अशोक ने अपनी गांड को आगे पिछे धक्के मारते हुए पूजा को चोदना चालू किया और पूजा की बुरी तरह से सिसकियां चालू हो गयी। वो तो कबसे अशोक से चुदवाने को तड़प रही थी।

उस चुदाई के मजे में उसने बिल्कुल भी ख्याल नहीं किया कि नितीन भी खड़ा देख रहा था। वो भी शायद अब बागी हो चुकी थी। वैसे भी अभी तक नितीन ने गुस्सा नहीं दिखाया था, उल्टा वो तो अपनी बीवी को चुदते हुए देख मजे ले रहा था।

अशोक अब थोड़ा नीचे हो गया था और पूजा की पीठ अब पूरी तरह सोफे पर टिकी थी। अशोक ने पूजा के दोनो पांव हवा में खड़े कर दिए और पकड़ लिए.

पूजा के दोनो पांवो को अपने हाथों में पकड़े अशोक उसे अच्छे से चोद रहा था और बीच बीच में पूजा के पांव थोड़े चौड़े भी कर देता.

पूजा खुद अपने मम्मे दबाए चिखने लगी थी। उसके लिए यह चुदाई का मजा असहनीय हो गया था। संगीत से भी ज्यादा अब पूजा की चिखें सुनाई दे रही थी।

नितीन खुश दिख रहा था और अपनी बीवी को इस तरह चुदते मजे लेते देख उसकी पैंट में उसका लंड खड़ा हो चुका था।

ऐसी चुदाई देख मेरी खुद की पैंटी गीली होने लगी थी। वो तो अच्छा था कि कल ही मैंने अपनी चूत में ऊँगली कर उसको शांत किया था, वरना अभी मेरे लिए कण्ट्रोल करना बड़ा मुश्किल हो जाता.

थोड़ी देर बाद एक के बाद एक अशोक और पूजा तेज सिसकारियां भरते हुए जड़ गए. मगर जड़ते जड़ते वो माहौल बहुत ज्यादा गरम कर गए थे.

वो दोनो अब सोफे से उठे और अशोक कपड़े पहनने लगा और पूजा अपने कपड़े उठाए वहां से अंदर रूम में चली गयी। नितीन मेरी तरफ बढा.

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अशोक ने पूजा की गांड मारने का अपना सपना पूरा किया तो पूजा की भी अशोक से चुदवाने की तमन्ना पूरी हुयी।

नितीन: “चलो, इन दोनो का तो हो गया, अब तो मुझे चोदने दो प्रतिमा”

मैं: “मेरे पास मत आना, दूर रहो”

नितीन: “अशोक ने तो पूजा को चोद दिया हैं, उसने बोला था इसके बदले तुम भी मुझे चोदने दोगी. अब पिछे क्युँ हट रही हो?”

मैं: “मैने ऐसा कोई वादा नहीं किया, अशोक ने बोला तो उसी को जाकर पूछो”

नितीन: “यह क्या हैं अशोक! प्रतिमा तो कुछ करने नहीं दे रही. यह कैसी डील हैं? तुमने बोला था कि मै तुम्हे पूजा को चोदने दुंगा तो मुझे प्रतिमा को चोदने का मौका मिलेगा. अब यह मना कर रही हैं”

अब मुझे पता चला कि नितीन क्युँ अपनी बीवी को चुदवाने को तैयार था। अशोक ने नितीन से खूफिया डील कर ली थी मुझे चोदने के बदले पूजा को चोदने की.

अशोक: “प्रतिमा मान जाओ, कभी दुसरो के लिए भी कुछ कर दिया करो”

मैं: “मैने तुम्हे पहले ही बोल दिया था कि मै अब ऐसा वैसा कुछ नहीं करुंगी. मै तो अब जा रही हूँ”

अशोक तेजी से मेरी तरफ बढ़ और मुझे रोका.

अशोक: “ऐसे मत करो यार. एक आखिरी बार मेरी खातिर. मेरा जन्मदिन गिफ्ट समझ कर, कर लो”

वो मेरे पैरो में गिर गया और हाथ जोड़कर विनती करता रहा। मगर मै अब उसकी बातों में नहीं आने वाली थी। मै एक सही रास्ते पर बढ़ चुकी थी और अब फिर गलत रास्ते पर जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. खासतौर से मै अशोक का उसके झूठ में क्युँ साथ दू.

इस बीच पूजा कपड़े पहन कर बाहर आ चुकी थी। उसको भी माज़रा समझ में आ गया था कि क्या हुआ हैं।

जन्मदिन पार्टी तो हुयी नहीं, अशोक ने जरूर पूजा की गांड और चूत मारने का मुफ्त में मजा ले लिया था। पूजा को भी अशोक से चुदवाना था तो उसकी भी इच्छा पूरी हो चुकी थी।

इन सब में नितीन बेवकूफ बन गया, अपनी बीवी भी चुदवा ली और उसे कुछ नहीं मिला. मै उन लोगो को वहीं छोड़ कर बाहर आ गयी। नितीन ने पिछे से पूजा और अशोक के साथ क्या किया यह मुझे नहीं पता.

नितीन अब घर जाकर पूजा की क्या खबर लेगा वो देखना था। थोड़े दिन बाद ही पता चला कि पूजा और नितीन ने भी अलग होने का फैसला कर लिया हैं।

थोड़े दिन बाद जब मै अपने बच्चे को लेने अपने पति के घर गयी तो जो कुछ देखा मुझे शॉक लगा। घर के बाहर अशोक की गाड़ी नहीं थी तो मुझे लगा वो अभी तक घर नहीं आया हैं। मेरे पास अभी भी घर की अतिरिक्त चाबी थी तो मै अंदर चली गयी थी ताकि वहां उसका इंतजार कर सकू.

मेरे बेडरुम से आती आंहो से मै रुक गयी थी। अशोक शायद बेडरुम में किसी औरत को चोद कर खुश कर रहा था। देखा जाऐ तो अभी भी मै और अशोक पति पत्नी ही थे।

मन में बहुत बुरा भी लग रहा था। अभी तलाक भी पूरा नहीं हुआ था और अशोक किसी और औरत के साथ लगा हुआ था। मै उनको डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी पर मन में एक जिज्ञासा भी थी कि वो कौन हैं।

बड़ा डर यह भी था कि कही मेरी भाभी अपना वादा तोड़ कही अशोक के साथ कुछ कर तो नहीं रही. मैंने बेडरुम में झांकना ठीक समझा.

दरवाजा खुला था और अंदर से चुदते हुए औरत की आवाज बड़ी तेजी से आ रही थी। मै दरवाजे तक पहुंची. एक गौरी चिट्टी लड़की मेरे बिस्तर पर घोड़ी बनी बैठी थी और अशोक उसके पिछे से डोगी स्टाईल में चोद रहा था।

अशोक के झटके इतने तेज थे कि मुझे बाहर तक थाक थाक की आवाजे आ रही थी। लड़की मीठे दर्द और मजे के मारे बड़ी कामूक आवाज में आहें भर रही थी।

उसके बदन को देख लग गया कि वो मेरी भाभी तो नहीं हो सकती थी। फिर भी उसका बदन जाना पहचाना सा लग रहा था।

पीछे से मै उसकी शक्ल तो देख नहीं पा रही थी। बिस्तर के पास जरूर उस लड़की की साड़ी और पेटीकोट पड़े हुए थे। अशोक लड़की की गांड को दोनो साइड से पकड़े कभी झटके मारता तो कभी बिना पकड़े मारता.

बिना पकड़े जब भी वो झटके मारता तो लड़की की चिखें निकल जाती। यह चुदाई देख मेरे पूरे शरीर में खून गरम होकर दौड़ने लगा।

मेरी खुद की चूत में हलचल होने लगी थी। इतने समय से ना तो मैंने चुदाई की थी और ना ही देखी थी। मै वहीं दरवाजे पर बिना आवाज किए खड़ी थी।
 
कई दिनों से मैंने अपनी चूत में ऊँगली तक नहीं कि थी और मेरी खुद की चुदने की इतनी इच्छा थी कि अगर उस वक्त अशोक मुझे बुलाकर चोदने लगता तो मै उसे मना नहीं कर पाती. इतने समय से मैंने कण्ट्रोल किया था पर अब अपनी आँखों के सामने यह होता देख मै अपने आप को रोक नहीं पा रही थी।

अशोक के झटके और तेज हो गए और इसी के साथ लड़की की आहें भी. लड़की खुद आगे पिछे हो चूद रही थी। शायद वो जड़ने वाले थे। मै इसी आस में खड़ी रही कि मै लड़की की शक्ल देख पाऊ.

लड़की के खुले बाल उसके चेहरे पर भी थे पर उसकी मम्मे छाती पर लटके हुए थे और काफी अच्छी शेप में थे। जिसे वो खुद अपने एक हाथ से रह रह कर दबा रही थी।

जल्द ही अशोक तेज चीखों के साथ जड़ गया और उसी जड़ने के दौरान उस लड़की ने पिछे मुड़ कर देखा और मुझे उसकी शक्ल दिखाई दी.

मेरे पैरो तले जमीन खिसक गयी। वो पूजा ही थी। नितीन से अलग होने के बाद अब वो आज़ाद हो चुकी थी और अब अशोक के साथ चुदवा सकती थी।

इस से पहले वो दोनो मुझे देखते, मै उलटे कदम बाहर आ गयी। मै दरवाजा धीरे से बंद कर मै बाहर सड़क पर आ गयी। कुछ मिनट रुक कर मैंने डोरबैल बजाई. कुछ देर के बाद अशोक ने दरवाजा खोला.

उसने बताया कि मेरा बच्चा उसकी माँ के घर हैं। मै पूजा का चेहरा देखना चाहती थी पर वो दिखी नहीं. मै अब वहां से जाने लगी तभी अशोक ने रोका.

उसने कहा कि अगर मै उस तरफ जा रही हुं तो मै पूजा को रास्ते में ड्राप कर दू. मै अंजान बनी रही कि पूजा कहा हैं और उसने मुझे रुकने को बोला.

मै अशोक के साथ बात करते रुकी रही और थोड़ी देर बाद कपड़े पहने पूजा बाहर आयी। एक बार मुझे देख वो सहमी और फिर मुझे हंसते हुए मेरा हाल चाल पुछा. मै उसको अपनी कार में बैठाये जाने लगी।

मैं: “कब से चल रहा हैं ये सब? अब नितीन की नजरो में तुम नहीं गिरी”

पूजा: “अब मै उस से अलग हो चुकी हूँ, अब मै अपने मन की कर सकती हूँ. वैसे भी तुमने अशोक को छोड़ दिया हैं तो तुम्हे मेरे इस रिश्ते से कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए”

मैं: “मुझे कोई परेशानी नहीं. अशोक तो वैसे ही तुम्हारी गांड की लचक का दीवाना हैं”

पूजा: “बताया उसने. मेरे तलाक का प्रक्रिया खत्म होते ही मै उसके साथ शादी का प्लान कर रही हूँ”

मैं: “बधाई हो, अशोक मुबारक हो. वैसे तुम्हारा कोई भाई हैं?”

पूजा: “हां एक हैं, पर उस से क्या!”

अब मै पूजा को क्या बताऊं कि मेरा अशोक से तलाक इस बात पर हुआ हैं कि वो मुझे मेरे भाई के साथ सुलाना चाहता हैं। मै तो बस पूजा को बेस्ट ऑफ़ लक ही बोल सकती थी।

मैं: “नहीं ऐसे ही पूछ लिया, उनको अशोक से कोई आपत्ति ना हो इसलिए”

पूजा: “उनको कोई परेशानी नहीं होगी, मेरी ख़ुशी में उनकी ख़ुशी हैं”

पूजा अभी तो खुश हैं पर अशोक अगर अपना असली रंग दिखाएगा तो वो पूजा को भी उसके भाई के साथ चुदने को जरूर बोलेगा या ग्रुप सेक्स के इवेंट में ले जायेगा.

कुछ दिनों बाद ऑफिस का सालाना उत्सव होने वाला था। जब मैंने पहले उत्सव में भाग लिया था तो राहुल मेरा दीवाना हो गया था। फिर दूसरे उत्सव में तो उसने मुझे चोद ही दिया था।

क्या यह उत्सव मेरे लिए एक नयी उमंग लाने वाला था। मगर मै यह निर्णय नहीं कर पा रही थी कि मुझे अब फिर किसी रिश्ते में फंसना हैं या नहीं.

मुझे रूबी के जैसी आजाद लाईफ चाहिये थी। रूबी ने बोला कि वो मुझे पिक अप कर लेगी और सालाना जल्से के लिए हम साथ में उसकी कार में राहुल के फार्म हाऊस पर जाएंगे।

मैने उसको बोला कि उसको उल्टा रास्ता पड़ेगा पर उसे वैसे ही मेरे घर की तरफ अपने बच्चे को अपने पति के पास छोड़ने आना था। पार्टी में लेट हो जाएंगे तो वो अपने बच्चे को अपने पति के पास छोड़ना चाहती थी।

शाम को अपने बच्चे को ड्राप करने के बाद वो मुझे लेने आयी और हम पार्टी में पहुचे. पहली बार मै ऑफिस की सालाना पार्टी में सिंगल स्टेटस के साथ आयी थी।

ऑफिस के मर्दो को इसमें मौका दिखाई दिया और मेरे साथ डांस करने कि इच्छा जताई. पर मेरा अब और कोई रिश्ता बनाने की कोई अरमान नहीं था।

जब से राहुल और मेरा ब्रेकअप हुआ था उसने मुझसे डांस करने की पेशकश नहीं की, क्युँ कि उसको पता था कि मै उस से अब दूर ही रहुंगी. पार्टी खत्म होने को आयी और रूबी मेरे पास आयी।

रूबी: “प्रतिमा, सॉरी यार. मै तुम्हे ड्राप नहीं कर पाउंगी. मै जिम्मी और रितेश को ले जा रही हूँ”

मैं: “पर तुम मुझे लेकर आयी थी!”

रूबी: “समझा कर यार, पार्टी का मूड हैं। पार्टी के बाद चुदवाया नहीं तो मजा अधुरा रह जाता हैं”

मैं: “यह तुम कह रही हो! तुम तो ऊँगली तक से नहीं चुदवाती, इतना कण्ट्रोल हैं अपने आप पर”

रूबी: “ऊँगली से इसलिए नहीं चुदवाती कि मुझे कोई ना कोई मर्द मिल ही जाता हैं चोदने के लिए. जिम्मी के साथ चुदवायें काफी समय हो गया हैं, आज मौका मिला हैं, मै जाने नहीं देना चाहती. आज तो दो दो मर्द मिल गए हैं। बहुत दिनों बाद थ्रीसम का मजा लुंगी”

मैं: “तुम्हारा पहले से यह कार्यक्रम था तो मुझे अपने साथ क्युँ लायी? मै खुद अपनी कार में आ जाती। अब मै फंस गयी”

रूबी: “मुझे तो उन दोनो ने बोला था कि अपनी बिवीयों के साथ आयेंगे तो मुझे लगा चांस नहीं मिलेगा, पर वो अकेले आये हैं तो सोचा लगे हाथों मजे ले ही लु”

मैं: “मुझे यकीन नहीं हो रहा हैं। तुम तो मेरी चूत को लंड का गुलाम बोलती थी। तुम भी यहीं निकली?”

रूबी: “तो क्या करती ! पति ने आदत इतनी डाल दी, कब तक ऊँगली से करती . आज़ाद लाईफ में सब मजे कर लेने चाहिये। पति की कोई पाबंदी नहीं, रोज नये नये मर्दो के साथ करवा के अपनी इच्छा पूरी करती हूँ”

मैं: “मै तो तुम्हे कितना मानती थी, और तुम क्या निकली”

रूबी: “एक काम करो, तुम वैसे ही अपने पति से अलग हो चुकी हो, तुम्हे भी जरुरत होगी चुदवाने की. एक काम करो, मेरे साथ चलो, हम फोरसम कर लेंगे”

मैं: “मुझे नहीं जाना ऐसी किसी लड़की के घर जिसकी चूत लंड की गुलाम हो”

रूबी: “तुम भी यहीं करती अगर मैंने तुम्हारी मदद ना की होती. मै तो बोलती हूँ तुम भी मजे ले लो. जिम्मी और रितेश पसंद नहीं तो किसी और को ले लो”

मैं: “तुम अभी जाओ, मुझे अभी तुमसे बात नहीं करनी”

रूबी अपने दोनो ऑफिस के साथीयों को लेकर चली गयी अपने थ्रीसम के लिए.
 
कुछ दिनों के अंतराल में मुझे दो झटके मिल चुके थे।जिन दो लड़कियो को मैंने सती सावित्री समझ अपना रास्ता ठीक कर लिया था वो दोनो ही ऐसी निकली.

मुझे और कोई लिफ्ट नहीं मिल रही थी क्युँ कि बचे हुए लोग सभी अपनी परिवार के साथ आये थे और उनकी बीवियां मुझ जैसी सिंगल और खुबसूरत औरत को देख इनसिक्योर महसूस कर रही थी कि उनके पति बहक जाएंगे।

मुझे परेशानी में देख राहुल मेरी मदद को आगे आया। उसका उस रात फार्म हाऊस में ही रुकने का प्लान था तो उसने अपने ड्राइवर को भी कार सहित छुट्टी पर भेज दिया था।

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रूबी चुड़क्कड़ निकली और मेरा भरोसा तोड़ दिया। अब मेरे सामने राहुल के साथ फार्म हाउस में रुकने के अलावा और कोई चारा नहीं था।

राहुल ने मुझे उस रात वहीं रुकने के लिए बोल दिया। मुझे अब डर भी लग रहा था। यहीं वो फार्म हाऊस था जहा राहुल ने कई बार मुझे चोदा था। अब अकेले में उसके साथ रुकना मुश्किल था।

मैने वैसे ही इतने दिन से चुदाई नहीं करवाई थी और अगर राहुल मेरे करीब आया और मुझसे कोई गलती हो गयी तो.

वैसे भी राहुल को मेरी कमजोरी पता थी, मेरी चूत में उंगली होने के बाद मै अपने आप को रोक नहीं पाती.

मेरे पास और कोई उपाय नहीं था। वैसे भी मै अपने पति से अलग हो चुकी थी। मेरा पति खुद दुसरी औरतो को चोद रहा हैं तो मै क्युँ ना किसी के साथ चुदवा लु.

पूजा और रूबी, जिन्होंने मुझे हिम्मत दी थी, वो खुद ही दुसरो के साथ चुदवा रही थी। वैसे भी रात को वहां रुकने का मतलब यह नहीं था कि मै चुदवा ही लुंगी.

मैने उसको हां बोल दिया पर परेशानी यह थी कि सिर्फ उसके रूम की ही सफाई हुयी थी और सोने के लिए कोई दुसरी जगह नहीं थी।

राहुल ने मुझे उसके बिस्तर पर सोने को बोल दिया और खुद बाहर सोफे पर सोने के लिए तैयार था। पर मै नहीं मानी. मै उसी शर्त पर वहां रुकने को राजी हुयी कि मै सोफे पर सोउंगी और वो अंदर बिस्तर पर.

मै उस दिन फ्रॉक जैसी ड्रेस पहनी थी जो घुटनो के ऊपर तक ही थी।

राहुल ने मुझे ओढने के लिए कुछ दिया और एक तकिया दे दिया। जब वो वहां से चला गया तभी मै सोफे पर लेटी

मेरे दिमाग में सिर्फ रूबी और पूजा ही गुम रहे थे। उन दोनो में मिलकर मुझे सुधार दिया था पर वो दोनो ही बिगड़ैल निकली. मुझे थकान के मारे जल्दी ही नींद आ गयी।

रात को मैंने अपनी जांघो पर कुछ टच होता महसूस किया और मै एकदम से उठ बैठी. मेरी ड्रेस थोड़ी ऊपर उठ चुकी थी और मेरी आधी जांघे नंगी दिख रही थी।

राहुल मुझ पर झुका हुआ था। डर के मारे मुझे उस वक्त कुछ नहीं सुझा और मेरा हाथ चल गया और राहुल को थप्पड़ मार दिया।

मैं: “इसलिए मुझे रात रुकने को बोल रहे थे?”

मैने अपनी ड्रेस को फिर नीचे किया और उठ खड़ी हुयी

राहुल: “तुम्हारा चादर सोफे से नीचे गिर गया था और तुम ठंड से कांप रही थी इसलिए तुम पर चादर डालने आया था”

यह कहकर वो चादर वहीं सोफे पर रख अंदर बेडरुम में चला गया। मैंने अपने नंगे हाथ देखें जहा रोंगटे खड़े हुए थे। सोफे पर बैठ कर अपनी नंगी टांगे देखी, वहां भी ठंड से रोंगटे खड़े थे.

थोड़ी ठंड तो मुझे महसूस हो रही थी। शायद राहुल सही कह रहा था, वो तो सिर्फ मेरी मदद करने आया था और मैंने उसको थप्पड़ जड़ दिया।

बिना गलती के थप्पड़ खाना कितना बुरा लगता हैं वो मै समझ सकती थी। पर अब मै क्या करती . इतनी रात को उसके बेडरुम में जाकर माफ़ी मांगती.

फिर सोचा सुबह उठकर ही माफ़ी मांगुगी. तब तक शायद उसका गुस्सा भी शांत हो जाऐ। मै चादर ओढ़ कर फिर सो गयी। सुबह हल्की ठंड के साथ मेरी नींद उड़ी. चादर फिर से सोफे के नीचे पड़ा था। उठकर देखा तो ड्रेस पूरी ऊपर होकर लगभग मेरी कमर तक आ चुकी थी और मेरी पैंटी दिखने लगी थी।

मै जल्दी से कपड़े नीचे कर बदन ढका. अच्छा हुआ राहुल अभी तक नहीं उठा था। मै अब बाहर बालकनी में आयी और गार्डन की तरफ देखने लगी। सुबह को उस फार्म हाऊस का नजारा बहुत हसीन होता हैं।

देखा तो राहुल गार्डन में दौड़ लगा रहा हैं। राहुल पहले ही उठ चुका था और उसने मुझे इस तरह सोते हुए देख लिया होगा। मै शर्म से पानी पानी हो गयी।

इस बार तो उसने मुझे चादर भी नहीं ढका. ढकता भी क्युँ, पिछली बार भलाई करने गया था तो मुझसे थप्पड़ खाया था, फिर वहीं गलती क्युँ करता.

मुझे बालकनी में खड़ा देख राहुल बालकनी के नीचे आया और एक अजीब सी शक्ल बनायी और फिर मुझे बोल दिया कि उसका ड्राइवर 1 घंटे में आने वाला हैं जो मुझे मेरे घर ड्राप कर देगा. यह कह कर वो फिर चला गया अपनी जॉगिंग के लिए.

मै वाशरूम गयी और थोड़ी देर बाद अपना मेकअप टच अप कर तैयार थी। मै अब बाहर आयी। मै अब दुगुना शर्मींदा थी, एक तो सोते हुए अपने अंगप्रदर्शन से और दुसरा बेवजह राहुल को थप्पड़ मारने से . मै राहुल के पास माफ़ी मांगने गयी।

मैं: “राहुल, आई एम सॉरी रात को मैंने ग़लतफ़हमी में जो किया”

राहुल: “कोई और होता तो वो भी यहीं करता. मेरी ही गलती थी, मुझे तुम्हे उठा देना चाहिए था। पर हमारे पहले की रिश्ते को ध्यान में रखकर मैंने सोचा मै ही तुम्हे बिना उठाए चादर ओढ़ा दू”

राहुल ने मेरे लिए कॉफ़ी बनायी और मै उसके सामने सोफे पर बैठे पांव क्रॉस किए बैठी थी। ड्रेस छोटी थी तो मेरी नंगी जांघे थोड़ी दिख रही थी और मै यह देख पिछली घटना याद कर शर्माने लगी।

उसने कुछ ज्यादा ही मेरी नंगी टांगे सोते हुए देख ली थी। पर फिर सोचा हमारे पिछले सम्बन्धो के दौरान वो पहले ही मुझे पूरा नंगा देख चुका हैं, फिर यह तो कुछ नहीं था।
 
मैं: “मेरी ड्रेस थोड़ी छोटी हैं और मुझे रात को सोते वक्त इतना ध्यान नहीं रहा तो उसके लिए सॉरी , मै इस तरह सो रही थी”

उसने एक हल्की स्माईल ली और कुछ नहीं बोला और फिर वो अपनी हंसी नहीं संभाल सका और जोर जोर से ठहाका लगाते हुए हंसने लगा। एक बार तो मै बहुत शर्मींदा हुयी कि उसने मुझे कैसी स्तिथि में देखा था कि मुझ पर हस रहा था, पर फिर हंसने वाली बात थी तो मै खुद हंस पड़ी थी। शायद इस तरह मेरा वो पाप उतर जाऐ कि मैंने उसको थप्पड़ मारा था। मुझे हंसता देख वो और भी ज्यादा हंसा. फिर थोड़ी देर बाद हम दोनो शांत हुए.

मैं: “इतना क्युँ हस रहे थे?”

राहुल: “पुराणी याद आ गयी थी। जब मैंने तुम्हारी पैंटी अपने पास रख ली थी और तुम मुझसे मेरे केबिन में मांगने आयी थी”

मैं: “मै इस तरह सो रही थी तो तुम नजर नहीं फेर सकते थे! इस तरह सोती हुयी लड़की को देखते शर्म नहीं आयी?”

राहुल: “मैने थोड़े ही तुम्हे बोला था कि तुम अपनी पैंटी दिखाओ. तुम खुद दिखा रही थी, कोई भला क्युँ नहीं देखेगा”

मैं: “यह क्या बार बार पैंटी पैंटी बोल रहे हो. कोई तुम्हारे बारे में ऐसा बोले तो?”

राहुल: “मगर मै तो पैंटी पहनता ही नहीं हूँ”

यह बोलकर वो फिर जोर से हंसे लगा और मै भी बिना हंसे नहीं रह पायी।

राहुल: “वैसे तुम जब कभी यह ड्रेस पहनो तो बालकनी में मत खड़े होना. नीचे से अब दिखता हैं”

मेरा मुंह खुला का खुला ही रह गया। वो फिर हंसने लगा। बालकनी में खड़ी हुयी थी तब वो बालकनी के नीचे खड़े होकर मुझे बोलने आया था। तब उसने फिर मेरी ड्रेस के नीचे से मेरी पैंटी देख ली थी। शायद इसी कारण उस वक्त उसने अजीब सी शक्ल बनायी थी।

मैने सोफे पर पड़ा कुशन उठा कर उसकी तरफ गुस्से में उछाल दिया, पर कुशन उस से दूर जा गिरा. वो फिर ठहाका लगा हंसने लगा। वो मजाक मजाक में मेरा अपमान कर रहा था। मैंने कॉफ़ी मग वहीं रखा और उठ कर उसकी तरफ झपटी.

ठहाका लगाने से पहले उसने अपना कॉफ़ी मग पहले ही टेबल पर रख दिया था। मैंने कुशन से उसको मारना शुरु कर दिया पर वो हंसता रहा और मै चिढ़ती रही.

हम भूल ही गए थे कि हम रिश्तो के किस मौड़ पर थे। उसने मेरे हाथ वाला कुशन पकड़ लिया, मैंने छुड़ाने की कोशिश की. मै उस से कुशन नहीं छीन पायी। मेरी जद्दोजहद देख उसने कुशन छोड़ दिया और मै कुशन खिंचते पिछे की तरफ जा गिरी. मै पीठ के बल पीछे गिरी और मेरी टांगे ऊपर हवा में उठ गयी। मेरी ड्रेस एक बार फिर कमर तक उठ गयी और मेरी पैंटी उसको दिख गयी।

मै एक बार फिर शर्म से पानी हो चुकी थी। मै जल्दी से कपड़े संभालते खड़ी हुयी और अपने हाथ में पकड़ा कुशन उस पर दे मारा और गुस्से से ज्यादा शर्म से मै उसकी तरफ पीठ कर अपने सोफे के साइड में जाकर खड़ी हो गयी।

उसकी हंसी अब बंद हो गयी थी। कुछ सेकण्ड के बाद उसका शरीर मेरे पिछे आकर टकराया. मै पूरा हिल गयी। उसने अपना एक हाथ मेरे पेट पर लपेट कर पकड़ लिया।

मेरी गांड उसके आगे के हिस्से से चिपक गयी और थोड़ा दब गयी। दुसरा हाथ उसने मेरे हाथों में रखा और हमारी उंगलिया आपस में उलझ कर फंस गयी।

उसके होंठ मेरी गरदन को चूमते हुए मुझे नशा दिला रहे थे। मेरा अपने आप पर कण्ट्रोल जाता रहा। मै आंखे बंद किए उसके चूमने को महसूस करती रही.

उसने मुझे चूमना बंद किया और मेरा हाथ छोड़ा. फिर मेरी ड्रेस का निचला किनारा पकड़ लिया और उसको धीरे धीरे ऊपर उठाने लगा।

मैने नीचे देखा. मेरी ड्रेस मेरी जांघो तक ऊपर उठ चुकी थी, और फिर धीरे धीरे ऊपर होते हुए मेरी पैंटी तक आ चुकी थी।

मैने अपना हाथ अपनी ड्रेस के ऊपर से ही चूत पर रख दिया और वो ड्रेस आगे से ऊपर नहीं उठा सका. उसने ड्रेस वहीं छोड़ दी और वो ड्रेस फिर नीचे हो गयी। उसका एक हाथ अभी भी मुझे कमर से झकड़े हुए था।

फिर उसने पीठ पर से मेरी ड्रेस की चैन पूरी खोल दी और मेरी ड्रेस ऊपर से थोड़ी ढीली हो गयी। अगले ही पल उसने मेरा पेट छोड़ा और अपने दोनो हाथों से मेरी ड्रेस को मेरे कंधो से नीचे उतार दिया।

मेरे दोनो कंधे नंगे हो गए और मैंने दोनो हाथों से अपनी ड्रेस को कंधो से और नीचे गिरने से बचाया.

राहुल ने मेरा एक हाथ पकड़ उसको ड्रेस से हटाया. फिर दुसरा हाथ भी नीचे कर दिया।

मेरे कंधे अब पूरी तरह बाहर आ गए थे और सिर्फ ब्रा की पट्टी थी। ड्रेस मेरे मम्मो पर जाकर अटक गयी थी।

फिर उसने अपने दोनो हाथों से मेरी ड्रेस को ऊपर से नीचे खिंच कर निकालना शुरु किया. मेरे हाथ नीचे ही थे और ऊपर उठ कर मुझे नंगा होने से बचाने की कोशिश नहीं कर रहे थे.

मेरी ड्रेस मेरे मम्मो के ऊपर से उतर कर नीचे हो गयी और पेट तक आ गयी। मेरा ब्रा और उसमे झांकते गौरे मम्मो का उभार दिखने लगा था।

इतने दिन से चुदाई को तड़पते मेरे बदन ने आत्मसमर्पण कर दिया था। मेरी ड्रेस अभी भी मेरे पेट पर अटकी थी और राहुल ने मेरे ब्रा की पट्टी भी कंधे से हटा कर कोहनी तक ले आया।

ब्रा का ऊपर का सपोर्ट हटटे ही मेरा ब्रा मेरे मम्मो से थोड़ा नीचे खिसका और ऊपर का थोड़ा ज्यादा उभार दिखने लगा।

वो अपना एक हाथ अब मेरे ब्रा के ऊपर के मम्मो के उभार पर रगड़ने लगा। उसका हाथ धीरे धीरे नीचे आता गया और मेरा ब्रा नीचे खिसकता गया।

मेरा लगभग ऊपर का आधा मम्मा उसने दबोच लिया था। एक और झटका मारते ही मेरा ब्रा मेरे मम्मो से हट सकता था।
 
मेरे मम्मो के ऊपरी भाग को अपने एक हाथ झकड़े हुए उसने दुसरा हाथ से मेरी ड्रेस को नीचे खिसकाना जारी रखा। मेरी ड्रेस जो अब तक मेरे पेट पर अटकी थी अब कमर के नीचे आ गयी।

और मेरे कूल्हो से निकलते ही वो नीचे जमीन पर जा गिरी और मै सिर्फ पैंटी और ब्रा में खड़ी थी। ब्रा भी आधा तो खुल ही चुका था।

तभी बाहर कार का हॉर्न बजा, शायद उसका ड्राइवर आ गया था। राहुल ने मेरे सीने से अपना हाथ हटाया और मैंने जल्दी से अपने ब्रा की पट्टी फिर कंधे पर चढ़ा ली.

नीचे झुकते हुए मैंने अपने पांवो में पड़ी अपनी ड्रेस को ऊपर खिंचते हुए फिर से अपनी पैंटी ढक दी और फिर पेट और मम्मो पर चढ़ाते हुए अपने बदन को ढक दिया।

तभी राहुल का हाथ आया और उसने पीठ पर मेरी ड्रेस की चैन बंद कर दी. मै उसकी तरफ देखें बिना अपना पर्स उठाए दरवाजे की तरफ बढ़ी और बाहर निकल कर तेजी से कार की तरफ बढ़ी।

राहुल और मैं कुछ ज्यादा ही खुल गए और हम दोनों एक गलती करते करते रह गए।

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फार्महाउस पर मजाक मजाक में मामला सिरियस हो गया और मेरे कमजोर पड़ते ही राहुल ने मुझे चोदने के लिए लगभग नंगा कर ही दिया था कि ड्राइवर मुझे लेने आ गया था और मैं बच गयी।

कार में बैठने के बाद मैंने अपने हाथ अपनी जांघो पर रखे, मेरे हाथ बुरी तरह कांप रहे थे। बिना सर्दी के मेरा शरीर में कंपन हो रहा था।

अगर वो ड्राइवर समय पर नहीं आता तो आज राहुल मुझे चोद ही डालता और मै उसे मना नहीं कर पाती. शनिवार को छुट्टी थी तो मै दिन भर घर पर ही रही और बस इसी बारे में सोच रही थी।

एक डर यह भी था कि सोमवार को ऑफिस में मै राहुल का सामना कैसे कर पाउंगी. पिछली बार मैंने उसको सब कुछ करने दिया था फिर उसने अगले दिन ऑफिस में मेरे कैसे मजे लिए थे यह तो आप मेरी पिछली कहानी में पढ़ ही चुके हैं।

दोपहर में मैंने खुद ने अपनी चूत में ऊँगली कर अपनी आग को शांत भी किया. ऊँगली करते वक्त आंखे बंद कर मै सिर्फ राहुल के बारे में सोच रही थी। जिसकी वजह से मुझे जड़ने में थोड़ी आसानी हुयी.

सोमवार को मै ऑफिस पहुंची एक डर के साथ कि राहुल मेरे साथ कैसा व्यवहार करेगा. आज तो मै जानबूझकर शरीर को पूरा कवर करते हुए कपड़े पहन आयी थी।

पूरी पैंट पहनी और ऊपर पूरी आस्तीन का शर्ट था। गले में स्कार्फ डाल अपनी छाती को ढक लिया था। किसी काम से मुझे राहुल के पास जाना था। मै उसके केबिन में गयी।

राहुल: “कौन से कलर की हैं?”

मैं: “मुझे इस तरह की बदतमीजी पसंद नहीं हैं। कल जो भी हुआ, वो गलत था, वो रिपिट नहीं होना चाहिए”

राहुल गंभीर चेहरा बना मेरी तरफ देख रहा था।

राहुल: “मै हमारे विज्ञापन कैंपेन की बात कर रहा था। कौन सा कलर फाइनल हुआ?”

अब झेंपने की बारी मेरी थी। मुझे लगा वो मेरी पैंटी का कलर पूछ कर मुझे छेड़ रहा होगा।

मैं: “आई एम सॉरी . ब्लैक कलर हैं”

राहुल: “किसका?”

मैं: “पैंट…ऐड…ऐड का”

नर्वस होकर मेरे मुंह से “पैंटी” शब्द निकल चुका था

राहुल: “मगर ब्लैक कलर तो चर्चा हुआ ही नहीं था”

राहुल सही था, मै नर्वस होकर सच में अपनी पैंटी का कलर बता चुकी थी।

मैं: “ओह सॉरी , ऑफ वाइट थीम रखा हैं”

राहुल: “प्रतिमा, आई एम सॉरी , मस्ती मजाक में उस दिन मुझसे गलती हो गयी। मै उसके लिए शर्मींदा हूँ. मैंने ज्यादा ही हद पार कर दी थी। तुम उस से अफेक्ट मत होना. मेरी एक गलती समझ माफ़ कर दो. तुम काम पर ध्यान दो”

मैं: “ऐड की डिटेल्स इस फाईल में हैं”

मै अपने हाथ में पकड़ी फाईल वहीं टेबल पर रख भाग खड़ी हुयी. बाहर आकर यहीं सोच रही थी कि मै इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकती हूँ.

शायद वो घटना मेरे दिमाग में इतनी चढ़ चुकी थी कि उतर ही नहीं रही थी। राहुल का फार्महाऊस वाला रूप ही दिखाई दे रहा था।

लंच के बाद रूबी से अकेले में बात करने का मौका मिला. पार्टी वाले दिन तो वो धोखा दे चली गयी थी।

रूबी: “क्या हुआ! अभी भी नाराज हो?”

मैं: “इतने दिन मुझे उपदेश पिलाती रही और खुद कितने मजे ले रही थी, वो छुपाए रखा”

रूबी: “मैने छुपाया नहीं था। तुमने कभी पुछा ही नहीं तो मैंने आगे बढ़कर बताया नहीं”

मैं: “मगर ऑफिस के लोगो के साथ ही! तुम्हे ऑफिस में वो लोग फिर छेड़ते नहीं”

रूबी: “ऑफिस में अकेले में छेड़ते हैं, उसी में तो मजा आता हैं। वरना ऑफिस तो बोरींग हो जायेगा.”

मैं: “ये दूसरे मर्दो के साथ चुदवाना, तुम कब से कर रही हो?”

रूबी: “जिसकी दिन तलाक के कागज पर साइन किए थे उसी दिन शाम को अपने दोस्त के घर जाकर चुदवा लिया था।”

मैं: “मुझे तो बोलती थी कि एक महीना बिना चुदवायें रह कर बताओ. तुम कितने दिन रह पाती हो?”

रूबी: “रोज कोई ना कोई तो मिल ही जाता हैं। जब कोई नहीं मिलता तो मेरा वो पडौसी तो हैं ही, जो तुम्हारे चूत के पानी का दीवाना हैं। तुम बोलो तो उसकी इच्छा पूरी कर दू और सीधा वो तुम्हारी चूत को मुंह लगा कर तुम्हारा पानी पी पाएगा.”

मैं: “दो दिन पहले तक मै तुम्हे इतना आदर करती थी, पर अब तुम्हारा यह सच जानकर सब खत्म हो गया”

रूबी: “यह बताओ, क्या गलत किया मैने? अपनी शरीर की जरुरत पूरा करना कैसे गलत हैं? मैंने किसी को धोखा तो दिया नहीं हैं”

मैं: “मगर रोज अलग अलग मर्दो के साथ. यह सही कैसे हो सकता हैं!”

रूबी: “तुमने कभी अपने पति के अलावा किसी दूसरे मर्द को चोदने नहीं दिया? झूठ मत बोलना”

मैं: “चलो अंदर ऑफिस में चलते हैं”

रूबी: “टॉपिक मत बदलो”

मैं: “तुम मेरी चूत को लंड का गुलाम क्युँ बोलती रहती थी? जब कि तुम्हारी चूत खुद सबसे बड़ी लंड की गुलाम हैं। वो भी एक नहीं, अलग अलग लंड की”

रूबी: “मैने कभी इंकार नहीं किया. तुम्ही इंकार करती आयी हो. हां मै रोज नये नये मर्दो से चुदवाना पसंद करती हूँ. मुझे अच्छा लगता हैं। मेरी बॉडी हैं, मै चाहे जैसे उपयोग करु”

मैं: “शरीर की जरुरत तो एक मर्द से ही पूरी हो जाती हैं। एक पति ही काफी हैं, फिर पति से इतनी नफरत क्युँ? ”

रूबी: “मै किसी एक लंड की गुलाम नहीं बनना चाहती, इसलिए पति की गुलामी नहीं की. अब तो तुम भी आज़ाद हो. तुम भी मुझे ज्वाइन कर लो, दोनो मिलकर मर्दो के मजे लेंगे.”

मैं: “मै एक मर्द से खुश रहने वाली औरत हूँ. तुम अपनी ज़िन्दगी में खुश रहो और मै अपनी. तुम्हारी लाइफस्टाईल मेरी नहीं हो सकती”

हम दोनो वापिस ऑफिस में आ गए. मुझे डर लग रहा था कि कही मेरी लाईफ भी रूबी की तरह ना हो जाए. रूबी की तरह शादी के दौरान मेरी भी चुदवाने की आदत हो चुकी थी और अब रूबी की ऊँगली से चुदवाने की.
 
मैने सोच लिया कि मै अब सब बंद कर दूंगी और अपनी आदत सुधारुंगी. मै रूबी को गलत साबित कर दूंगी. उसके बाद मै अपनी चूत में ऊँगली करवाने के लिए रूबी के घर नहीं गयी।

3-4 दिन तो निकल गए पर फिर मेरे अंदर जोर की आग लगने लगी। मुझे शावर लेना पड़ा पर थोड़ी देर बाद वो आग फिर भड़क उठी.

उस वक्त मुझे अपनी ऊँगली से थोड़ा चूत रगड़ कर अपना काम चलाना पड़ा पर मुझे बहुत बुरा लगा।

मुझे यह सब रोकना था।मैने दुसरी चीजो में मन लगाना शुरु किया. भक्ति के कार्यक्रम देखना शुरु किया, योग में ध्यान लगाया, अच्छी किताबें पढ़ना शुरु किया.

कुछ हद तक मै अपने आप को कण्ट्रोल कर पायी। मैंने अपनी चूत को हाथ लगाना ही छोड़ दिया था। इस चक्कर में मैंने अपनी चूत की सफाई ही बंद कर दी थी। पहले मै अपनी चूत के सारे बाल हटा कर सफाचट रखती थी अब धीरे धीरे बाल उगने लगे थे।

धीरे धीरे चूत पर बालो की झाड़ियां बनने लगी थी पर मैंने ठान लिया था कि मै हाथ नहीं लगाउंगी वरना बाल हटाटे वक्त मेरी वासना भड़क सकती हैं।

जब भी मेरा मन भटकता मै कोई अच्छी चीज पढ़ना शुरु कर देती थी। यह 2 महीने बड़ी मुश्किल से गुजरे थे। कभी कभार मै अपने शार्ट या पैंट के ऊपर से ही खुजाने के बहाने थोड़ा चूत रगड़ देती थी।

जब नहाती थी तो साबून लगाने के बहाने चूत को थोड़ा ज्यादा रगड़ कर थोड़ी शान्ति महसूस करती थी। मैंने चुदाई से सन्यास ले लिया था और इसका सबूत मेरी चूत थी जिसकी पर दाढ़ी के जैसे बड़े बाल आ चुके थे.

इस दौरान रूबी रोज मुझे अपनी चुदाई के किस्से सुना कर भड़काने का प्रयास करती और मै उसको चुप करवा देती या वहां से भाग जाती

फिर एक डील के सिलसिले में मुझे राहुल के साथ दूसरे शहर जाना था। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं था पर अभी जो मै सन्यास पर चल रही थी उसमे मेरे लिए मुश्किल हो सकता था जब मुझे इतना समय राहुल के साथ गुजारना था।

कुछ घंटे की फ्लाइट के सफर के बाद हम वहां पहुंच गए और शाम की फ्लाइट से हमें वापिस आना था। पर शायद किस्मत मेरी परीक्षा ले रही थी।

हमारी वापसी फ्लाइट कैंसिल हो गयी और दुसरी कोई फ्लाइट बची नहीं थी। हमको अब अगले दिन निकलना था। इसके बदले एयरलाइन वालो ने ही होटल स्टे बुक कर दिया था।

जब मै और राहुल होटल पहुचे तो पता चला कि दो टिकट्स के लिए एक ही डबल बेड रूम बुक किया था। उनके पास कोई एक्स्ट्रा रूम खाली नहीं था। हमने वो रूम तो ले लिया पर बाहर जाकर दूसरे होटल में भी पता किया पर कही रूम नहीं मिला.

टैक्सी वाला ने एक लॉज जरूर दिखा दिया पर उस लॉज की हालत ऐसी थी कि रहना मुश्किल था। राहुल ने मुझे विकल्प दे दिया कि वो इस लॉज में रह जाऐगा और मै उस होटल के रूम में रह जाऊ.

हमने अंदर जाकर रूम भी देखा, पर उसकी हालत खराब थी और बिस्तर में खटमल थे। मै राहुल को वहां नहीं सोने दे सकती थी।

हम फिर अपने होटल में आ गए. बिस्तर तो दो लोगो के लिए था पर हम दोनो शेयर नहीं कर सकते थे

राहुल: “तुम बिस्तर पर सो जाओ, मै यहाँ नीचे कारपेट पर सो जाऊंगा”

मैं: “नहीं मै नीचे लेटूंगी और तुम मेरे ऊपर लेट जाना”

राहुल चुप होकर मेरी शक्ल देखने लगा। मैंने फिर सोचा कि क्या बोल दिया। मैंने उसको बिस्तर पर सोने की बजाय गलती से मेरे ऊपर लेटने को बोल दिया था।

राहुल के सामने आते ही नार्मल बात करते वक्त मुझे पता नहीं क्या हो जाता हैं। मै शर्म के मारे चुपचाप बिस्तर पर जाकर लेट गयी और रजाई ओढ़ कर मुंह तक ढक दिया और अंदर हस रही थी।

राहुल के कपड़े खुलने की आवाज आने लगी थी। मुझे डर लगा कही वो पूरा नंगा होकर मेरी रजाई में ही ना घुस जाऐ।

फिर वो आवाज बंद हो गयी पर वो मेरी रजाई में नहीं घुसा. मैंने रजाई थोड़ी ऊपर उठा कर एक होल से बाहर झाँका.

उसने शर्ट खोल दिया था और अंदर पहने बनियान में था। पैंट भी खुला था और अंदर शार्ट में खड़ा था।

मैने भी अपने कपड़ो के अंदर टैंक टॉप और हॉट शार्ट पहना था। पर सोचती रही मै भी चेंज करु या नहीं. इतने छोटे कपड़ो में राहुल के सामने कैसे आऊं.

राहुल ने लाइट बंद कर दी और नाईट लैंप की हल्की रोशनी रहने दी. मुझे इतने कपड़ो में सोने की आदत तो थी नहीं तो मुझे कपड़े बहुत चुभ रहे थे। मैंने रजाई के अंदर ही अपने कपड़े निकालने शुरु कर दिए. मैने सोचा सुबह राहुल के उठने से पहले मै उठ कर फिर अपने कपड़े पहन लुंगी.

अपनी कैपरी निकाल मै हॉट शार्ट में आ गयी और ऊपर का टॉप निकाल कर अंदर के टैंक टॉप में आ गयी। अब मुझे ज्यादा राहत मिल रही थी। दोनो कपड़े मैंने बिस्तर के दुसरी तरफ गिरा दिए ताकि अगर रात को राहुल उठ भी जाऐ तो वहां खुले कपड़ो पर राहुल की नजर ना जाऐ।

टैंक टॉप के अंदर मेरा ब्रा जरूर मुझे खल रहा था। रात को मै ब्रा पहन कर नहीं सोती हूँ, आज वो ब्रा मुझे कवच की तरह चुभ रहा था।

मैने रजाई के अंदर से ही अपना टैंक टॉप निकाला कर साइड में रखा और फिर ब्रा भी निकाल दिया और उसको भी रजाई से हाथ बाहर निकाल दूसरे निकाले कपड़ो के साथ नीचे गिरा दिया।

मैने अब फिर रजाई के अंदर अपना टैंक टॉप पहनना चाहती थी कि रजाई चमक उठी. कमरे की लाइट जल गयी थी और मै रजाई में चुप चाप बिना हिले रुक गयी।

मै टॉपलेस थी और नीचे मैंने हॉट शार्ट पहना था। डर भी था कि कही राहुल ने रजाई हटा दी तो क्या होगा।

मै टैंक टॉप पहनने के लिए हिलती तो उसे पता चल जाता, इसलिए मै ऐसे ही टॉपलेस रजाई में दुबक कर लेटी रही.

राहुल: “प्रतिमा तुम सो गयी क्या?”

मै रजाई के अंदर दुबक कर कुछ नहीं बोली, ताकि उसको लगे कि मै सोई हूँ. पता नहीं वो किस काम के लिए मुझे उठा रहा था।
 
राहुल: “मेरी रजाई तुम्हारे हाइट की हैं और तुम्हारे पास जो हैं वो मेरी हाइट की हैं। अगर जाग रही हो तो रजाई अदला बदली कर लो”

मेरी तो सांस अटक गयी, ना मै टैंक टॉप पहन पा रही हूँ और रजाई उसको दे नहीं सकती, रजाई हटटे ही तो मै नंगी दिख जाउंगी.

एक ही उपाय था कि मै सिर को रजाई से बाहर निकालू और उसको रजाई देने से मना कर दू. मगर बहाना क्या मारूंगी! पहले ही वो नीचे सो रहा हैं और ऊपर से उसको लम्बी रजाई भी ना दू.

क्या मै उसको सच सच बता दो कि मै नंगी हूँ तो उसको रजाई नहीं दे सकती. मगर फिर वो मेरे बारे में क्या सोचेगा! कमरे में एक गैर मर्द के होते हुए मै नंगी सो रही थी।

मै कुछ फैसला ले पाती उसके पहले ही मेरी रजाई मेरे ऊपर से हट गयी। अच्छा था कि मेरी आंखे पहले ही बंद थी और मैंने नींद में होने का नाटक जारी रखा।

शरम तो बहुत आ रही थी पर यह नाटक जरुरी था ताकि उसके सामने शर्मींदा ना होऊ. फिर रूबी की बात भी मेरे दिमाग में आयी कि मुझे इस तरह नंगा देख कोई भी मर्द भड़क सकता हैं।

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अपनी आदत के अनुसार मैंने सोते वक़्त अपने कपडे तो खोल दिए पर पहनने के पहले ही राहुल ने मुझे नंगा देख लिया था और मैं आँखें बंद किये टॉपलेस लेती रही।

पर तभी मेरे बदन को रजाई ने ढक दिया। मैंने चैन की सांस ली कि मै बच गयी। पर राहुल ने जो मुझे नंगा देख लिया उसका क्या! मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था।

फिर थोड़ी देर में रजाई के ऊपर आती रोशनी बंद हो गयी। शायद राहुल लाइट बंद कर लेट गया था। मैंने एक कोने से रजाई को थोड़ा ऊपर कर बाहर झाँका. नाईट लैंप की हल्की रोशनी थी।

मैने महसूस किया कि राहुल ने रजाई बदल दी थी। अब मै अपना टैंक टॉप पहन सकती थी। पर टैंक टॉप था कहा!. मैंने चारो तरफ हाथ घुमाया पर टैंक टॉप नहीं मिला. शायद रजाई निकालते वक्त टैंक टॉप भी उसके साथ चला गया, या कही गिर गया था।

उसको ढूंढने के लिए मुझे उठना पड़ेगा, और उस हल्की रोशनी में मेरा नंगापन तो राहुल को फिर दिख ही जाऐगा.

मैने सोचा बिस्तर के दुसरी तरफ पड़े अपने कपड़े ही पहन लेती हूँ, मेरा टॉप और कैपरी पैंट वहीं पड़े हैं। मै बिस्तर के दुसरी तरफ लुढ़की और नीचे देखा पर मेरे कपड़े वहां नहीं थे.

मैने तो कपड़े खोल कर वहीं गिराए थे फिर कहा गए! कही राहुल ने मेरे साथ मस्ती करने के लिए कपड़े हटा तो नहीं दिए. मेरी नजर सामने गयी जहा एक हेंगर पर मेरा टॉप और कैपरी लटके हुए थे.

राहुल ने ही नीचे गिरे कपड़े देख उन्हे संभाल कर रख दिया होगा। पर इस चक्कर में मै फंस चुकी थी। मुझे उठकर वो कपड़े लेने थे.

मगर राहुल तो अभी अभी लेटा हैं, वो अभी जाग रहा होगा। अभी उठना ठीक नहीं होगा। मैंने थोड़ा इंतजार करना ठीक समझा.

मेरी आंख कब लग गयी मुझे पता ही नहीं चला. सुबह मेरा हाथ मेरे पेट पर पड़ा और मुझे अहसास हुआ कि मै नंगी लेटी हूँ. मेरे बदन पर रजाई भी नहीं ढकी थी।

रजाई को मै अपने पांवो के नीचे छूता हुआ महसूस कर पा रही थी। रात को सोते वक्त मैंने शायद अपनी रजाई लात मार कर हटा दी होगी या हो सकता हैं राहुल ने ही मुझे देखने के लिए यह किया होगा।

हो सकता हैं राहुल जाग रहा हो. मैंने हल्की सी पलके खोली, वहां उजाला था। पर कोई दिखाई नहीं दिया। मैंने पूरी आंख खोल दी और इधर ऊधर देखा तो राहुल नहीं था।

मै उठ बैठी और दायें बायें देखने लगी मेरा टैंक टॉप कहा हैं। मगर वो कही दिखा नहीं. तभी राहुल वहां आ गया, उसके हाथ में मेरा टैंक टॉप था।

राहुल: “तुम शायद यह ढूंढ रही हो!”

मैने मेरे पांवो में पड़ी रजाई को तुरंत खिंच कर अपने आप पर डाल कर बदन को ढक लिया और राहुल को गुस्से में देखने लगी।

मैं: “तुम्हे शर्म नहीं आती किसी लड़की को ऐसे देखते हुए?”

राहुल: “पहले तुम खुद अपने कपड़े निकालती हो, फिर खुद लात मार कर अपनी रजाई निकाल देती हो. फिर भी दोष मेरा! ”

मैं: “तुम्हे पता था रजाई गलती से निकल गयी हैं तो फिर से ओढ़ा भी तो सकते थे!”

राहुल: “पिछली बार कोशिश की थी, क्या मिला? एक थप्पड़!”

मैं: “पर कम से कम देखना तो नहीं चाहिये ना. नजरे फेर लेते”

राहुल: “ठीक हैं मै ऊधर देखता हूँ, तुम यह पहन लो”

उसने वो टैंक टॉप मुझे दे दिया और मैंने जल्दी से उसे पहन लिया। मै अब टैंक टॉप और हॉट शार्ट में रजाई के बाहर आयी। मै वाशरूम की तरफ जाने लगी। अलमारी के आईने के सामने से निकली तो उस सफ़ेद टैंक टॉप और काले हॉट शार्ट में मेरा गौरा बदन बहुत सेक्सी लग रहा था।
 
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