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आंखें खुलते ही राज की निगाह सतीश पर पड़ी, लेकिन तभी एक आवाज ने उसे चौंका दिया
"नमस्कार डॉक्टर राज.....।"
राज ने चौंककर आवाज की दिशा में देखा।
दाईं तरफ डॉक्टर जय सीने पर हाथ रखे थोड़ा झुका हुआ मुस्करा रहा था। उसके करीब ही कुर्सी पर ज्योति बैठी हुई थी।
"हैलो राज!" उसे अपनी तरफ देखते पाकर बो भी क्रूर मुस्कराहट के साथ बोली।
राज ने हैरत से उन दोनों के चेहरों की तरफ देखा। ज्योति को देखने पर उस मालूम हुआ कि ज्योति के दाए गाल पर दो नीले रंग की छोटी-छोटी खरोंचे मौजूद थी। ऐसे ही नीले निशान टैक्सी ड्राईवर बंता सिंह ने शिंगूरा के चेहरे पर भी बताए थे। इस वक्त पहली बार राज पर राज खुला कि शिंगूरा ज्योति
का ही दूसरा नाम था।
आज ही पहली बार नीकण्ठ को यह भी पता चला कि शिंगूरा हर वक्त आंखों पर रंगीन शीशें वाला चश्मा और चेहरे पर नकाब क्यों डाले रहती है!
लेकिन सबसे ज्यादा हैरान करने वाला सवाल तो यह था कि डेढ़ साल पहले मरने वाले इन्सान जिन्दा कैसे हो गए? क्या वाकई ज्योति जादूगरनी थी या यह जय वर्मा कोई भूत-प्रेत था?
"आप हम दोनों को जिन्दा देखकर काफी हैरान नजर आते हैं?" डॉक्टर जय ने कहा।
राज ने अपने शुष्क होंठों पर जुबान फेरी, उसके गले में कांटे से पड़ रहा थे। वो भी मुश्किल से एक शब्द मुंह से अदा कर पाया
"पानी....."
.
"जग्गा.....।" डॉक्टर जय ने फौरन उस भयानक सूरत बदमाश को आवाज दी।
वो फौरन प्रकट हुआ तो डॉक्टर जय बोला
"एक गिलास ठण्डा पानी लाओ।"
एक मिनट बाद ही पानी आ गया और डॉक्टर जय के इशारे पर जग्गा ने गिलास राज के होंठों से लगा दिया और राज एक ही सांस में वो ठण्डे पानी का पूरा गिलास पी गया।
अब जरा राज के होशो-हवास ठिकाने आए तो उसने एक गहरी निगाह ज्योति और डॉक्टर जय पर डालते हुए कहा
"मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं आ रहा है.....।"
.
.
.
ज्योति ने एक भयानक और पैशाचिक कहकहा लगाया और उसे घूरते हुए बोली
"हां, तुम्हें यकी न आना भी नहीं चाहिए। क्योंकि तुम तो अपनी समझ में हमें खत्म कर आए थे.....।"
"तो क्या वो हकीकत नहीं थी?” राज ने पूछा।
"हकीकत तुम्हारे सामने है.....।" डॉक्टर जय को होठों पर रहस्यमय मुस्कराहट थी।
तभी मेज पर सतीश कुलबुलाया और डॉक्टर जय लपक कर
उसके सिरहाने जा खड़ा हुआ और फिर उसकी नब्ज देखने लगा। फिर वो राज से बोला
" सतीश साहब को गलती से क्लोरोफार्म कुछ ज्यादा मात्र में सुंघा दिया गया। जिससे इनकी जान खतरे में पड़ गई थी, बड़ी मुश्किल से मैंने क्लोरोफार्म का आसर खत्म किया है। कल रात से यह इसी तरह बेहोश हैं, अब इन्हें तब से पहली बार होश आ रहा है। अब यह खतरे से बाहर है।"
"नमस्कार डॉक्टर राज.....।"
राज ने चौंककर आवाज की दिशा में देखा।
दाईं तरफ डॉक्टर जय सीने पर हाथ रखे थोड़ा झुका हुआ मुस्करा रहा था। उसके करीब ही कुर्सी पर ज्योति बैठी हुई थी।
"हैलो राज!" उसे अपनी तरफ देखते पाकर बो भी क्रूर मुस्कराहट के साथ बोली।
राज ने हैरत से उन दोनों के चेहरों की तरफ देखा। ज्योति को देखने पर उस मालूम हुआ कि ज्योति के दाए गाल पर दो नीले रंग की छोटी-छोटी खरोंचे मौजूद थी। ऐसे ही नीले निशान टैक्सी ड्राईवर बंता सिंह ने शिंगूरा के चेहरे पर भी बताए थे। इस वक्त पहली बार राज पर राज खुला कि शिंगूरा ज्योति
का ही दूसरा नाम था।
आज ही पहली बार नीकण्ठ को यह भी पता चला कि शिंगूरा हर वक्त आंखों पर रंगीन शीशें वाला चश्मा और चेहरे पर नकाब क्यों डाले रहती है!
लेकिन सबसे ज्यादा हैरान करने वाला सवाल तो यह था कि डेढ़ साल पहले मरने वाले इन्सान जिन्दा कैसे हो गए? क्या वाकई ज्योति जादूगरनी थी या यह जय वर्मा कोई भूत-प्रेत था?
"आप हम दोनों को जिन्दा देखकर काफी हैरान नजर आते हैं?" डॉक्टर जय ने कहा।
राज ने अपने शुष्क होंठों पर जुबान फेरी, उसके गले में कांटे से पड़ रहा थे। वो भी मुश्किल से एक शब्द मुंह से अदा कर पाया
"पानी....."
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"जग्गा.....।" डॉक्टर जय ने फौरन उस भयानक सूरत बदमाश को आवाज दी।
वो फौरन प्रकट हुआ तो डॉक्टर जय बोला
"एक गिलास ठण्डा पानी लाओ।"
एक मिनट बाद ही पानी आ गया और डॉक्टर जय के इशारे पर जग्गा ने गिलास राज के होंठों से लगा दिया और राज एक ही सांस में वो ठण्डे पानी का पूरा गिलास पी गया।
अब जरा राज के होशो-हवास ठिकाने आए तो उसने एक गहरी निगाह ज्योति और डॉक्टर जय पर डालते हुए कहा
"मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं आ रहा है.....।"
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ज्योति ने एक भयानक और पैशाचिक कहकहा लगाया और उसे घूरते हुए बोली
"हां, तुम्हें यकी न आना भी नहीं चाहिए। क्योंकि तुम तो अपनी समझ में हमें खत्म कर आए थे.....।"
"तो क्या वो हकीकत नहीं थी?” राज ने पूछा।
"हकीकत तुम्हारे सामने है.....।" डॉक्टर जय को होठों पर रहस्यमय मुस्कराहट थी।
तभी मेज पर सतीश कुलबुलाया और डॉक्टर जय लपक कर
उसके सिरहाने जा खड़ा हुआ और फिर उसकी नब्ज देखने लगा। फिर वो राज से बोला
" सतीश साहब को गलती से क्लोरोफार्म कुछ ज्यादा मात्र में सुंघा दिया गया। जिससे इनकी जान खतरे में पड़ गई थी, बड़ी मुश्किल से मैंने क्लोरोफार्म का आसर खत्म किया है। कल रात से यह इसी तरह बेहोश हैं, अब इन्हें तब से पहली बार होश आ रहा है। अब यह खतरे से बाहर है।"