रश्मि दीदी को इतना मजा आने लगा कि वो
मस्ती में कराहती हुई और जोरों से मेरा लंड चूसने लगी.
अचानक उन्होंने उत्तेजनावश मेरा लंड छोड़ दिया
और मनीष का लंड चूसने लगी.
मनीष का लंड दीदी के गुलाबी होठो के बीच
किसी मोटे बैगन सा नजर आ रहा था.
जैसे मनीष की जीभ दीदी की चूत में गहरी होने लगी
वैसे ही रश्मि दीदी ने हम दोनों के लंड इकट्ठे
मुह के अन्दर लेने की कोशिश करने लगी
लेकिन दोनो भाइयों के लंड दीदी के छोटे
से मुंह में नहीं समा पा रहे थे.
आखिर थक कर रश्मि दीदी ने शारे से बताया कि
अब उन्हें चूत में लंड डलवाना है और
मनीष बिस्तर से उतर कर लंड पकड़ कर नीचे खड़ा हो गया
और हम दोनों ने मिलकर अपनी बहन को कमर के बल लेटा दिया.
अब मनीष उनकी दिलकश चूत को सहलाने लगा
और मैं शानदार चूचियाँ.
रश्मि दीदी से सहन नहीं हुआ और
वह मनीष का तना हुआ लंड पकड़ कर अपनी चूत से रगड़ने लगी.
मनीष आनन्द के अतिरेक से फटा जा रहा था
और उसने लंड को दीदी की गुलाबी चूत के
मुंह पर रख कर निशाना लगा लिया.
मुझे ये देखते हुए इस समय अलौकिक आनन्द की
अनुभूति हो रही थी. सच अपनी बहन को चुदते देखने का
सुख खुद चोदने से कम नहीं है
जिन्होंने देखा है वो लोग जानते ही है...
इसबार जरा धीरे-2 अन्दर घुसाना..
तेरा लंड बड़ा मोटा है. अपनी बहन का थोडा
ख्याल रखना भैया. दीदी ने मुस्कुरा कर मनीष से कहा.
मनीष ने मुस्कराहट के साथ अपने लंड के सुपारे
को रश्मि दीदी की चूत के मुंह से भिड़ा कर
अन्दर डालना शुरू किया. रश्मि दीदी खुद
भी पागल हुई जा रही थी और मोटे सुपारे को
अपनी भट्टी जैसी चूत के अन्दर पाकर दीदी ने
मनीष को कसकर पकड़ लिया और उसके होंठ चूसने लगी.
मनीष भी दीदी के होठ चूसने लगा.
मैं इस समय अपने मौसेरे भाई से चूत चुदाती हुई
मेरी छिनाल दीदी के मुंह को चोदने में लगा था.
मैं बीच बीच में उनके चूतड़ सहलाता हुआ उनकी चूत के
दाने को सहला रहा था और मेरे हाथ से रगड़ खाता
मनीष का लंड मेरी बहन की चूत का बाजा बजा रहा था.
मनीष अचानक उतावला हो उठा और उसने
झटके के साथ रश्मि दीदी की चूत से अपना
सुपाड़ा बाहर निकाल कर पूरा का पूरा अन्दर घुसेड़ दिया
'आआआ.. मर गई. आई.. तूने मेरी चूत फाड़ दी.
ओए.. आआ.. हाँ ऐसे ठीक है.. थोडा धीरे मारो.
ऊऊऊओ.. हाँ.. ऐसे.' चूत पर हुए अचानक
हमले से मेरी बहन रोआंसी सी हो आई,
लेकिन मनीष ने खुद को सँभालते हुए धीरे ध
क्कों के साथ चुदाई जारी रखते हुए स्थिति को संभाल लिया
अब वो बिना जल्दी किए धीरे-2 मेरी दीदी की नर्म-गुलाबी
चूत को चोदने लगा और मेरी रश्मि दीदी वासना के
सुख सागर में गोते लगाने लगी, उनके मुख से तेज
सिसकारियाँ निकलने लगी और उनकी मुख-मुद्रा
बता रही थी कि उसके सुख की कोई सीमा नहीं थी
'ओ ओ ओ.. आआआ.. आआआ.. आ आ आ आआ..
सीई..आआआ.. स्स्स्सीई..' रश्मि दीदी के मुख से
वास्तविक ख़ुशी भरी सिसकारियाँ निकलने लगी
बैंगन जैसा मोटा और लोहे की राड जैसा सख्त मनीष
का लंड दीदी की अँधेरी सुरंग की गहराइयों को नापने लगा
जो खुद भी अपनी जीभ से उसे गर्मजोशी से जवाब दे रही थी.
वासना से कामांध होकर दोनों एक दूसरे को बुरी तरह चाटने लगे.
इस दौरान चुदाई की स्पीड हर धक्के के साथ बढ़ती जा रही थी
और दीदी के गले से निकलने वाली आवाज हर
धक्के के साथ तेज होती जा रही थी.
मनीष मुझे आश्चर्यचकित करते हुए पूरी तरह से
स्थिति को काबू में कर, बहुत मंझे हुए खिलाड़ी
की तरह अपनी मौसेरी बहन की नर्म-गुलाबी
चूत को चोदे जा रहा था. उसका ६ इंच लम्बा
किसी कलाई जैसा मोटा लंड मस्ती के साथ
रश्मि दीदी की चिपचिपी हो चुकी चूत में अन्दर-बाहर हो रहा था.
दीदी आनन्द में डूबकर छटपटा रही थी और
किसी जानवर जैसी आवाजें निकाल रही थी
और मनीष के साथ चुम्बन में व्यस्त थी- आआ..
जरा और जोर से चोदो मुझे..
हाय कितना मजा आ रहा है
. थोड़ा रगड़ कर चोदो जरा..
फाड़ दो मेरी चूत को... ..ओए मस्त.. मस्त.
हाय कितना मोटा लंड है तुम्हारा.
बिलकुल गधे के लंड जैसा..
हाय कितना चिपचिपा हो गया है अन्दर तो.
. लेकिन कितना मस्त..' वासना में दीदी डूब उतरा रही थी.
कुछ मिनटों बाद अचानक मनीष ने अपना लंड
दीदी की चूत से बाहर निकाल लिया और
दोनों अलग हो गए. चुदासी दीदी ने
अब मेरे लंड की तरफ देखा. उन्होंने अपनी नर्म-
गुलाबी जीभ से मेरे लंड को चुभलाना शुरू
कर दिया और मैं जन्नत में पहुच गया...
उधर मनीष जो अपना मूसल लंड दीदी की
गोरी गांड के छेद से भिड़ाने में लगा हुआ था
उसने अचानक एक झटका मार कर लंड
का सुपाडा दीदी की गांड के अन्दर सरका दिया.
'आआआह. आआ.. ओए. हाय कितना दर्द हो गया.
निकाल ले.. उई माँ. बेहनचोद तूने तो मेरी गांड
भी फाड़ डाली..' रश्मि दीदी अचानक मनीष
का सुपाडा गांड में जाने से हुए दर्द से चिल्लाने लगी-
ऊऊऊ.. निकाल ले बाहर. मैं कह रही हूँ कुत्ते.
लेकिन इस बार मनीष ने लंड पूरा बाहर न निकाल कर
सुपाड़ा अन्दर रखा और उसे अन्दर बाहर करता रहा.
थोड़ी देर में रश्मि दीदी नार्मल हो गई और
धक्कों में मनीष का साथ देते हुए कहने लगी-
आ.. हे भगवान कितना दर्द हुआ था..
बोलना तो चाहिए पहले... तूने तो जैसे जलती
हुई रॉड ही मेरी गांड में घुसेड़ दी.
भयानक दर्द हुआ ..उफ्फ कितना डरावना लंड है तुम्हारा.
मुझे तो ऐसा लगा मानो मेरी गांड ही चीर दी हो...
जा मोनू जरा तेल या क्रीम ले आ जल्दी से.
मैं जल्दी से तेल आ गया. दीदी ने डिब्बे से थोडा
तेल निकाल कर मनीष के लंड को तर कर दिया
और थोडा तेल उसने अपनी गांड पर मल दिया
और बोली हां भैया अब लगाओ धक्का..
इस बार जब मनीष के गांड पर हल्का सा
दबाव लगाते ही उसका मूसल लंड फिसलता हुआ
रश्मि दीदी कि गांड में सरक गया और
आसानी के साथ अन्दर बाहर होने लगा.
अब रश्मि दीदी के चेहरे कि मुस्कराहट भी लौट चुकी थी,
वो बोली- तुमने तो मेरी जान ही ले ली थी..
लेकिन अब ठीक है.. मजा आ रहा है..
हाँ ऐसे ही चोदो मेरी गांड. हाय.. आऊ.. हाँ ऐसे. थोडा धीमे प्ली
ज.. हाँ ऐसे. हाँ हाँ.. चलो चोदते रहो अपनी बहन की गांड..
कितना मस्ती आती है जब तुम धीमे-2
मेरी गांड में घुसाते हो और तेजी से बाहर निकालते हो..
हाय मेरे मोनू तू भी आजा..
मैं चाहती हूँ कि तू मेरी चूत चोदे और मनीष मेरी गांड मारे.
दीदी की इच्छा सुन कर मैं सातवे आसमान पर पहुच गया
और एक आज्ञाकारी भाई की तरह दीदी के नीचे लेट गया
और रिशू के लंड से भोसड़ा बन चुकी दीदी की
प्यारी चूत को चोदने लगा और
मनीष मेरी प्यारी सी दीदी की गुलाबी गांड का कचूमर निकालने लगा.
'आआह.. गज़ब.. मजा मजा मजा...'
दीदी सुध-बुध खोकर चिल्ला रही थी, जबकि मैं स्वयं भी
ऐसा शानदार नजारा देख कर उत्तेजना से फटा जा रहा था.
आज मेरा दूसरा सपना भी पूरा हो रहा था..
पहला दीदी को चोदना और दूसरा 2इन1..
मैं हमेशा से रश्मि दीदी के साथ डबल पेनेट्रेशन करना चाहता था,
और आज मेरी इच्छा पूरी ही रही थी.
पहले तो मनीष धीरे-2 धक्के लगाता हुआ
मेरी दीदी की गांड को रवां करता रहा और
थोड़ी देर बाद उसने अपने धक्कों में तेजी लाते हुए
धुआंधार रफ़्तार से मेरी कमसिन बहन की गांड कुटाई चालू कर दी.
इस समय मेरे लंड को रश्मि दीदी की चूत के अन्दर
भी मनीष के लंड का साफ़ एहसास हो रहा था
और उसके लंड के भरपूर धक्कों की चोट
मेरे लंड को भी खूब महसूस हो रही थी..
फिर मनीष लगातार अपने धक्कों की रफ़्तार
बढ़ता जा रहा था और रश्मि दीदी की चूत में
स्थित मेरे लंड को उसकी गांड में होने वाली
कुटाई साफ़ महसूस हो रही थी.. वास्तव में तो
मनीष का लंड रश्मि दीदी की गांड मार रहा था
लेकिन चूत में घुसे मेरे लंड को भी उसके भयानक घिस्से महसूस हो रहे थे.
रश्मि दीदी तो मस्ती में सातवें असमान पर थी..
मुझे तो यकीं ही नहीं हो रहा था.. मनीष का मोटा
लंड बिना किसी परेशानी के मेरी प्यारी बहन
की कमसिन गांड में अन्दर-बाहर हो रहा था...
'आआआआ.. ओईईईईई.. और और और और तेज.
.आ ऊऊ.. जोर से धक्के मारो.. आआआआ..
आईई.. ऐसे.. ऊऊऊऊऊ.. आआआ. रगड़
के मारो मनीष.. आआईईई.. आह कैसी मस्ती आ गई..
जैसे मर्जी चोदो मुझे मनीष, और तुम भी मोनू..'
रश्मि दीदी आंख मार कर मुस्कुराते हुए बोली- .
.आज से तुम दोनों मेरे भाई नहीं पति हो...
दोनों इकट्ठे घुसेड़ो.. मेरी चूत और गांड एक झटके में ही भरा
करो अपने धक्कों से.. हाआआआन..
ये तो असली जन्नत है..
गजब. जरा रुकना मेरे प्यारे पतियों..
काफी देर से मैंने आपके लंडों का स्वाद नहीं चखा..
इस बार मैं दोनों को इकट्ठे ही अपने मुंह में लेना चाहती हूँ..
हम दोनों भाइयों ने अपने औजार रश्मि दीदी की
भट्टियों से बाहर निकाले और हमारी रानी
बेहना ने बिना देर किये उन्हें अपने दोनों हाथों की
मुट्ठी में पकड़ कर सहलाते हुए अपनी जीभ
से उनकी मसाज करने लगी.
हमारे लंड पूरे तनाव के साथ खड़े हुए थे
और उत्तेजना में झटके मार रहे थे.
हमारी बहन ने पहले बारी-2 से दोनों लंडों को चूसना
आरंभ किया, और फिर इकट्ठे ही मुंह में डालने की
कोशिश करने लगी और वो इसमें कामयाब भी होने लगी थी.
'वाह जानेमन. तुम तो गजब ढा रही हो..
दोनों ले लिए अपने छोटे से मुंह में?' मैंने
अपनी बहन की प्रशंसा की तो वो शर्मा कर अपनी आँखें छुपाने लगी..
'मुझे लगता है कि हमारी प्यारी दीदी हमारे लौडों
को एक साथ अपने सबसे छोटे छेद में भी ले सकती है...'
मेरे इतना कहते ही एक पल को तो सन्नाटा छा गया,
लेकिन अगले ही पल मेरी बहन ने इस चैलेंज को
स्वीकार करते हुए मुस्कराहट के साथ
अपना सर हिला कर सहमति जताई.
पहले मैंने रश्मि दीदी के नीचे से निकल कर
मनीष के लिए ज्यादा स्पेस बनाया,
जिससे की वो ज्यादा आजाद होकर
अपने लंड को दीदी के चूतड़ों में पेल सके.
मेरा सोचना बिल्कुल सही था और मेरे हटते ही
मनीष ने शहंशाही अंदाज में अपने रुस्तम लंड
को मेरी दीदी के चूतड़ों में पेल दिया.
सिसकारियाँ भरते हुए रश्मि दीदी ने अपने चूतड़
स्थिर रखते हुए मूसल लंड के पूरा
अन्दर घुस जाने का इंतजार किया और
फिर जब मनीष ने हल्के-2 धक्कों से धीरे-2 चोदना शुरू
कर दिया तो मैंने भी अपनी दीदी के चूतड़ों के पीछे
जाकर अपने लंड से दीदी की गांड को कुरेदना शुरू
किया जो पहले से ही मनीष के लंड से पूरी तरह भरी थी.
काफी मशक्कत के बाद आखिर मैंने भी अपने
झटके मारते हुए लंड को मनीष के लंड के समान्तर
रश्मि दीदी की गांड में घुसेड़ दिया तो उनके मुह
से एक गगनभेदी चीख निकल गयी...
दर्द तो मुझे भी हुआ पर यह वाकयी गजब का अनुभव था..
मैं रश्मि दीदी की चुदती हुई गांड के अन्दर पहुँच चुका था
जहाँ पहले से ही मनीष के लंड ने ग़दर
मचाते हुए तबाही ला रखी थी..
और अब दो लंडों के मिल जाने से दुगनी रफ़्तार से
चुदाई जरूरी थी और हम दोनों भाइयों ने हमारी ब
हन की गांड के परखच्चे उड़ाते हुए चुदाई शुरू कर दी.
हम दोनों इस समय पूरे आवेश में आकर चोद रहे थे
और दीदी की चीखें पूरे घर में गूंजने लगी थी.
अब ये मालूम नहीं की दर्द से या मस्ती से..
२५ मिनट बुरी तरह से दीदी की गांड मारने के बाद
हमने पोजीशन बदल दी और अब मनीष ने कमर
के बल लेटते हुए दीदी की चूत को अपने लंड
पर पहना दिया और अपनी हथेलियों को उसके
नितम्बों के नीचे रख कर उसे ऊपर-नीचे झुलाने लगा.
तूफान मेल की रफ़्तार धक्के खाने पर मेरी
बहन की चूत से पानी के छीटें छूट रहे थे और मैं
अपने लंड को हाथ में पकड़े हुए रश्मि दीदी की
चूत के सामने जगह बनाने लगा. कुछ कोशिश के
बाद मैं भी अपने लंड को दीदी की चूत में फिट करने में कामयाब हो गया.
और फिर जो चुदाई हमने शुरू की..
रश्मि दीदी ने अपना बायाँ पैर खम्भे की
तरह आसमान में उठा दिया, और हम दोनों
भाई जैसे 200 किमी प्रति घंटा की रफ़्तार
से अपने लंडों को दीदी की चूत में पेलते गए...
आखिर रश्मि दीदी फट पड़ी - बहनचोदो
तुम अआह लोगो ने आज मेरी फाड़ डाली है..
आःह्ह्ह ...सालो एक साथ मेरी भुर आःह्ह में
दो लंड इसीईई अआः ह्ह्ह्ह भोसड़ा बनाआ आअआः ...
.कुत्तो मैं झड़ रही हूँ... ऊऊऊ.. मैं झड़ .. अह्ह्ह मेरी चूत
... हाँईईए तुम दोनों आःह इकट्ठे ही मेरी
चूत में झड़ो.. खुशकिस्मत तुम्म्म्महारीईईए
बहन आःह दो दो भाई इकट्ठे ही ऐसे, ऐसे, ऐसे, ऐसे, ऐसे..
रश्मि दीदी ने मरी हुई सी आवाज में अपनी
हार्दिक इच्छा का खुलासा कर दिया और
मनीष संग हम दोनों ने उनको कस कर जकड़ लिया
और ताबड़तोड़ धक्के लगाने चालू कर दिए.
हम दोनों ने उनकी गुलाबी चूत को अपने
भयंकर धक्कों से सुर्ख लाल कर दिया था.
और अचानक मनीष चीखने लगा और तेज़ी
से शॉट्स लगाता हुआ रश्मि दीदी की चूत में
अन्दर गहरे उतरते हुए उससे चिपक गया.
अपने लंड पर मनीष का गर्म वीर्य महसूस होते ही
उत्तेजना के चरम पर पहुँचते हुए मैंने भी फव्वारा छोड़ दिया
और खूब माल निकालते हुए रश्मि दीदी की दो लंडों से भरी हुई चूत से चिपक गया..
हम करीब 5 मिनट तक लंडों को रश्मि दीदी की
चूत में डाले हुए बूंद-2 झड़ते रहे.. मेरे ख्याल
से किसी भी हालत में आधा कप तो हम दोनों
ने निकाला ही होगा रश्मि दीदी की चूत में..
यह तो गजब हो गया..
हम दोनों ने न सिर्फ दीदी की चूत मारी, गांड भी छेदी,
फिर दो-2 लंडों को पहले गांड में घुसेड़ा,
फिर भी मन नहीं भरा तो चूत में भी दो-2
लौड़ों को ठूंस कर चुदाई की...
आज तो रश्मि दीदी रिशू की चुदाई को भी भूल
गयी होगी. मैंने खुद नहीं सोचा था की दीदी और
हम इतना आगे बढ़ जायेंगे.
ऐसा तो मैंने ब्लू फिल्म में भी नहीं देखा था.
आधे घंटे हम वैसे ही पड़े रहे पर मनीष
का अभी मन नहीं भरा था. वो उठा और
जाकर किचेन से शहद ले आया और रश्मि
दीदी की चूत में भर दिया और गांड पर भी लगा दिया
और चाटने लगा. दीदी पहले तो कुछ बोली नहीं
पर १० मिनट बाद वो भी अब अपनी मस्ती में आ गई थी मे
रे लौड़े पर जीभ फेरने लगी. उनकी चूत फिर से लंड मांगने लगी थी.
आह.. दीदी उफ़.. तुम्हारे ये मखमली होंठ आह..
मेरे लौड़े को पागल बना रहे हैं.. और तुम्हारी
जवानी मुझे पागल बना रही है आह..
मेरे मुह से बेसाख्ता निकल गया.
दीदी: बेहेन्चोद अपनी बेहेन को चोद डाला
और दीदी दीदी करता है. खबरदार अगर
चुदाई के वक़्त मुझे दीदी कहा तो.
दीदी के मुह से गाली सुनकर न जाने क्यों
मुझे बहुत अच्छा लगा. मैंने कहा वाह दीदी
मज़ा आ गया तुम्हारे मुह से ऐसी बात सुनके
रश्मि: मोनू .. मुझे पता चल चुका है की
जो मज़ा नंगेपन में है.. वो शराफ़ात में नहीं..
उफ़.. तेरा ये गर्म लौड़ा मुझे चूसने में बहुत मज़ा आ रहा है.
तुम्हारी ये बहन अब पूरी तरह तुम दोनों की है..
आ जाओ नोंच डालो मेरे जिस्म को..
कर दो मुझे अपने इस लौड़े से ठंडी..
आह.. अब मेरा जिस्म जलने लगा है.
दीदी सीधी होकर बाँहें फैलाए बिस्तर पर लेट गई.
मनीष दीदी के पास लेट गया और उनके एक
निप्पल को दबाने लगा.. उसके होंठों को चूसने लगा.
मैंने दीदी के पैर मोड़े और टाँगों के बीच लेट गया
और उनकी पाव रोटी जैसी फूली हुई चूत पर धीरे
से अपनी जीभ रख दी और मैं अपनी जीभ से उ
सकी चूत की मालिश करने लगा.
अब हम तीनो एक-दूसरे को चूमने और चाटने में बिज़ी हो गए थे.
दीदी- आह.. मनीष उफ़.. आराम से आह..
चूसो.. आह.. सारा रस पी जाओ.. आह..
मज़ा आ रहा है मोनू.. आह.. आह.. सस्सस्स आह..
मोनू.. दर्द हो रहा है आह.. प्यार से मालिश करना
.. आह.. तेरी बहन हूँ आह.. उफफ्फ़.
दस मिनट तक हमारी मस्ती चलती रही.
अब हम वासना की आग में जलने लगे थे
. मनीष का लौड़ा टपकने लगा.
दीदी- आह.. उहह.. मोनू मज़ा आ रहा है..
इससस्स.. आह.. खूब चूसो.. आह.. और दबा के..
ससस्स चूसो.. आह.. मज़ा आ गया. अ
ब मैं चूची पीने ऊपर गया और मनीष
ने मेरी जगह ले ली. वो अब आइस्क्रीम की तरह चूत को चाट रहा था..
दीदी की चूत से रस टपकना शुरू
हो गया था.. वो अब तड़पने लग गई थी.
दीदी- आह..ससस्स.. मोनू.. आह..
मेरी चूत की आग बहुत बढ़ गई है.. आह..
अब उफफफ्फ़.. सस्सस्स.. मोनू आह.. लौड़ा घुसा दो..
आह.. मुझे कुछ हो रहा है.. आह.. प्लीज़ मोनू.. आ
ह.. फक मी आह.. फक मी.. सस्सस्स आह.
मनीष भी अब बहुत ज़्यादा उत्तेज़ित हो गया था.
उसके लौड़े से भी रस की बूँदें टपकने लगी थीं.
. मेरे बदले वो बैठ गया और लौड़े को दीदी की
चूत पर टिका कर धीरे से दबाने लगा.
दीदी- आह.. चोदो मुझे आह.. उई घुसा दो आह..
पूरा डालो.. आह.. मेरी चूत को फाड़ दो आज.. आह.. आईई..
मनीष ने धीरे-धीरे अब कमर को हिलाना शुरू कर दिया था.
हर झटके के साथ वो लौड़े को थोड़ा आगे बढ़ा देता
और दीदी की आह.. निकल जाती. कुछ ही देर में
उसने पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया और मैं दीदी के
ऊपर लेटकर उनके निप्पल को चूसने लगा.
दीदी- आह.. अब चुदाई शुरू कर दो..
मुझे दर्द नहीं हो रहा है.. आह.. करो न.. आह..
चोद दो मुझे.. आह.. आज मेरी सारी गर्मी निकाल दो आह..
मनीष स्पीड से लौड़े को अन्दर-बाहर करने लगा.
दीदी भी गाण्ड उठा कर उसका साथ देने लगी.
चुदाई जोरों से शुरू हो गई.. कमरे का तापमान बढ़ने लगा.
'ठप.. ठप.. पूछ..फ्छ.. आह.. उहह.. इससस्स..
आह.. उहह.. उहह..' की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं.
मनीष- ले रश्मि.. आह.. आज आह.. मेरा पॉवर देख..
आह.. तेरी चूत का आह चूरमा बना दूँगा मैं.. आह..
आज के बाद तू जब भी उहह.. चूत को देखेगी..
आह.. मेरी याद आएगी तुझे..
दस मिनट तक मनीष स्पीड से दीदी को चोदता रहा.
साला मुझसे झूठ बोला था की सिर्फ एक बार लड़की चोदी है,
मनीष तो पक्का चोदू था. पहले 2 बार झड़ चुका था
इसलिए अबकी बार कहाँ वो जल्दी झड़ने वाला था.
अब तो उसका टाइम और बढ़ गया.
मगर दीदी दीदी की चूत लौड़े की चोट ज़्यादा देर सह ना पाई
और उनके रस की धारा बहने को व्याकुल
हो गई.
UPDATE - 64
मनीष ने और तेज़ी से लौड़े को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.
दीदी का बाँध टूट गया..
वो झड़ने लगी. कुछ देर बाद वो शान्त पड़ गई..
मगर मनीष का अभी बाकी था..
वो धीरे-धीरे कमर को हिला रहा था.
दीदी अब शान्त लेट गई थी..
उनका सारा जोश ठंडा हो गया था.
तभी अचानक मनीष ने अचानक लंड तेजी से अन्दर बाहर करना शुरू किया
और दीदी की चूत में झड गया.
उसके बाद मनीष एक तरफ लुढ़क गया और
मैं घुटनों के बल बिस्तर पर खड़ा हो गया..
जिसे देख कर दीदी मुस्कुराई.
दीदी- क्या हुआ बहनचोद?
मोनू: रश्मि डार्लिंग तुम दोनों का तो हो गया
अब जरा मेरे लंड को थोड़ा चूस कर चिकना कर दे..
उसके बाद तुझे घोड़ी बना कर चोदूँगा..
तेरी चूत की गर्मी तो निकल गई..
अभी मेरा रस निकलना बाकी है.
दीदी हँसती हुई मेरे लंड को चूसने लगी..
अपने मुँह में पूरा लौड़ा लेकर अच्छी तरह
उसको थूक से तर कर दिया.
मोनू: आह्ह.. आह्ह.. बस दीदी..
अब बन जा घोड़ी..
आज तेरी सवारी करूँगा..
आह्ह.. अब बर्दास्त नहीं होता आह्ह.. आह्ह..
दीदी घुटनों के बल अच्छी तरह पर फैला कर घोड़ी बन गई..
वैसे तो रिशू ने उनको घोड़ी बना बना कर एक्सपर्ट कर दिया था
पर मेरे साथ तो पहली बार था..
जिस तरह वो घोड़ी बनी थी..
मुझको बहुत अच्छा लगा कि मेरी बहन एकदम पर्फेक्ट घोड़ी बनी है
मैंने कहा, वाह.. दीदी क्या जबरदस्त घोड़ी बनी है तू..
अब ठुकाई का मज़ा आएगा..
तेरी चूत कैसे फूली हुई है..
उफ़फ्फ़ साली ऐसी चूत देख कर लौड़े की भूख ज़्यादा बढ़ जाती है
मैंने लौड़े को चूत पर टिकाया
और पूरा एक साथ अन्दर धकेल दिया
दीदी- आईईइ.. मोनू आराम से.. आह्ह..
एक बार में पूरा घुसा दिया.. आह्ह..
आज तो आराम से करो..
कल से जैसे चाहो चोद लेना..
मोनू: अरे सॉरी यार..
तेरी चूत देख कर बहक गया था..
अब ख्याल करूँगा
मैं अब दीदी की कमर पकड़ कर चोदने लगा..
मेरे हाथ दीदी की मुलायम गाण्ड को भी सहला रहे थे.
बीच-बीच में दीदी की गाण्ड के छेद में उंगली भी घुमा रहा था.
थोड़ी देर की मस्ती के बाद दीदी भी गरम हो गई
और गाण्ड को पीछे धकेल कर मज़े को दुगुना बनाने लगी
दीदी- आह.. आह.. मोनू.. आह्ह..
आज की रात हर तरीके से मुझे चोदो..
आह.. आह.. फास्ट करो..
और तेज मोनू आह्ह.. मज़ा आ रहा है
मैं अब तेज़ी से चोदने लगा.
मेरा लौड़ा अब फूलने लगा था.
कितना सह पाता वो चूत की गर्मी को
आख़िर मेरे लौड़े ने रस की धारा चूत में मारनी शुरू कर दी.
उसका अहसास पाकर दीदी की चूत भी झड़ गई.
दो नदियों के मिलन के जैसे उनके कामरस का मिलन हो गया.
अब हम दोनों भी शान्त पड़ गए..
दीदी की कमर में दर्द हो गया.
जैसे ही मैने लौड़ा बाहर निकाला..
वो बिस्तर पर कमर के बल लेट गई और
लंबी साँसें लेने लगी. मनीष भी उसके पास ही लेट गया.
दीदी- उफ़फ्फ़ मोनू.. इस बार तो तुम दोनों ने लंबी चुदाई की..
आह्ह.. मेरी चूत की खुराक पूरी कर दी.
मोनू: अब तो तुमको चुदने की इतनी आदत हो गयी है
दीदी फिर बिना चुदे नींद कैसे आती है.
UPDATE - 65
दीदी के जवाब देने से पहले ही मनीष ने फिर से रश्मि दीदी
की चूत में शहद लगा दिया. तब दीदी ने उसको बोला
बस मनीष बस अब हिम्मत नहीं है.
अब सुबह होने वाली है
. हम थोडा सो लेते है.
हम दोनों ने दीदी की बात मान ली और हम सो गए.
सुबह मेरी नींद थोडा जल्दी खुल गयी
मैंने देखा की हम तीनो नंगे एक दुसरे से गुथे हुए सो रहे थे.
मनीष का लंड सुबह सुबह नींद में भी खड़ा है
और रश्मि दीदी की चूत से वो शहद बह रहा था
जो मनीष ने रात में डाला था.
वो दोनों अभी भी गहरी नींद में सो रहे थे.
थोड़ी देर दीदी ने आराम किया फिर हम सब फ्रेश हुए
और चाय पी. रश्मि दीदी बोली की मौसा मौसी
के आने से पहले नहा कर तैयार हो जाओ
और हम तीनो एक साथ नहाने के लिए चले गए...
रश्मि दीदी नहाते हुए जाकर कमोड पर बैठने लगी
तो मैंने कहा दीदी क्या कर रही हो.
वो बोली की उनको पेशाब लगी है तो
मैंने उन्हें खड़े होकर मूतने को कहा और
उसकी चूत पर मुह लगा दिया.
दीदी ने कहा क्या कर रहो हो मोनू.
हटो ऐसे मेरा पेशाब नहीं आयेगा.
मैंने दीदी के चूत को चाटना शुरू कर दिया और
उनकी चूत का दाना चुबलाने लगा
तो दीदी बर्दाश्त नहीं कर पाई और मूतने लगी.
मैंने उनकी चूत में मुह लगा कर उनका मूत पिया
. क्या टेस्ट था दीदी के मूत का.
मेरा एक और सपना आज पूरा हो गया.
जब हम नहा कर निकले तो ११ बजे थे.
दीदी ने नहा कर काले रंग की ब्रा पैंटी पहन ली.
हमने तो कपडे पहने ही नहीं थे.
दीदी को ब्रा पैंटी में देख कर हमारे लंड फिर से ऐठने लगे.
दीदी ने हँसते हुए बोली अब तो तुम लोगो के लंड पर
राखी बांधनी पड़ेगी क्योंकि अब ये ही मेरे काम आएंगे.
क्यों ठीक है न.
हमारा मन तो कर रहा था की दीदी को फिर से चोद दे
लेकिन मौसा मौसी के आने का टाइम हो गया था
तो हम लोगो थोड़ी मस्ती करके कपडे पहन लिए.
मैंने अब रश्मि दीदी को बता दिया की शायद
रिशू वहां आया होगा तो रश्मि ने रिशू के घर फ़ोन किया.
रिशू से दीदी की कुछ बात हुई तो
दीदी ने मुझसे कहा की हम आज ही वापस जायेंगे.
मैंने कहा हमारी ट्रेन तो कल की है और
आज का टिकेट नहीं मिलेगा तो दीदी ने कहा कोई बात नहीं,
हम बस से चलेंगे.
आधे घंटे बाद मौसी और मोनिका आ गए.
मौसा जी सीधे अपने नर्सिंग होम चले गए थे.
मोनिका और दीदी ने हम दोनों को राखी बाधी
फिर हम बस से अपने शहर लौट आये.
जब हम अपने शहर पहुचे तो रात काफी हो गयी थी
फिर दीदी बोली चलो रिशू के घर चलो.
हम कल अपने घर जायेंगे.
अब मुझे रिशू से कोई प्रॉब्लम नहीं थी क्योंकि
अब तो मैंने भी दीदी को चोद लिया था तो
हम दोनों रिशू के घर पहुच गए.
वो दीदी का इंतज़ार कर रहा था.
पर उसको पता नहीं था की मैं भी साथ में हूँ.
वो मुझे देख कर थोडा चौक गया.
तो दीदी ने उसके कान में कुछ कहा तो फिर
वो दीदी को लेके अपने कमरे में चला गया
और मुझे दुसरे कमरे में सोने भेज दिया.
मैं काफी थका था तो जाकर गहरी नींद में सो गया.
सुबह १० बजे दीदी ने मुझे जगाया और
कहा फ्रेश होकर चाय पी लो.
चाय पीते पीते दीदी ने कहा
रश्मि: सुन मोनू, अंकल (रिशू के पापा) का ट्रान्सफर वापस हो गया है.
कल कामिनी आंटी और रिक्की वापस आ जायेंगे.
और अगले महीने अंकल भी आ जायेंगे.
दादी तो अंकल के छोटे भाई के पास कुछ दिन दिल्ली में ही रहेंगी
पर कामिनी आंटी तो ज्यादातर घर पर ही रहती है...
पता नहीं अब मुझे रिशू के साथ होने का मौका कब मिलेगा.
मोनू: दीदी जिस ट्रेन से हम आने वाले थे
वो शाम को ७ बजे आती है तो
तब तक तो तुम रिशू के साथ खूब मजे करो
और फिर आज के बाद जब भी हम दोनों घर पर
अकेले हो तब भी तो तुम रिशू को बुला ही सकती हो.
रश्मि: बाद की बात बाद में देखेंगे पर
आज तो ठीक है हम ७.३० बजे घर चलेंगे
और ये कह कर वो वापस रिशू के कमरे में उससे चुदवाने चली गयी.
मैंने सोचा चलो ठीक है आखिर उसका लंड भी तो बड़ा है
पर अब तो हर रात मैं हो चोदुंगा दीदी को.
शाम को हम घर पहुच गए और
उसी रात से दीदी मेरी रात की बीवी बन गयी.
अब मैं लगभग रोज़ रात को दीदी को चोदने लगा
सिवाय जब उनके पीरियड चल रहे होतेथे.
कहीं मैं मामा न बन जाऊं
इसीलिए दीदी ने गोलियां लेना शुरू कर दिया था.
UPDATE 66
दिन ऐसे ही बहुत मजे मजे में कट रहे थे पर
जिसने अपनी सगी बहन को चोद लिया हो
उसको तो अब हर जवान लड़की में एक चूत ही नज़र आती है.
कुछ ऐसा ही हाल मेरा था.
मैं जितना ज्यादा दीदी को चोदता उतना ही
मुझे नयी चूतों को चोदने की इच्छा बढती जाती.
अब तो कामिनी आंटी भी वापस आ गयी थी.
उनको तो पहला मौका मिलते ही मैं चोद ही सकता था
पर अब मैंने मन बना लिया था
की मैं जैसे भी हो रिक्की को भी चोद डालू.
किस्मत मेरा साथ दे रही थी.
कुछ ही दिनों के बाद मम्मी पापा एक शादी
में ५-६ दिनों के लिए दिल्ली चले गए. घर खाली था
और मैं रश्मि दीदी को सुबह से ही चोद रहा था
और बार बार दीदी की गांड में ऊँगली डाल रहा था.
दीदी- तुम ये मेरी गाण्ड में उंगली क्यों डाल रहे हो?
मोनू- दीदी सच कहूँ..
तेरी गाण्ड देख कर मन बेचैन हो गया है..
ऐसी मटकती गाण्ड..
उफ़फ्फ़ इसमें लौड़ा जाएगा..
तो मज़ा आ जाएगा..
बस यही देख रहा था कि अबकी बार मैं तेरी गाण्ड ही मारूँगा.
दीदी- नो वे... और वैसे भी आज का मेरा हो गया मैं थक गयी हूँ
मोनू- अरे अभी कहाँ थक गई यार..
अभी तो बहुत पोज़ बाकी हैं..
आज तो घर पर कोई नहीं है.
यही मौका मिला है की तुम्हें आज
अलग-अलग तरीके से चोदूँ और प्लीज़ दीदी आज गाण्ड मारने दो ना..
उस दिन के बाद तुमने मुझे कभी भी गांड नहीं दी...प्लीज़..
दीदी- नहीं कहा न मैंने बहुत दर्द होता है
मोनू- बस आज की बात है दीदी....
बहुत आराम से मारूंगा...
तुमको तो अब तक चुदाई के लिए एकदम पक्की हो जाना चाहिए.
फिर चाहे ३-४ एक साथ आ जाये...
कोई आगे डाले या पीछे...
दीदी- ये क्या बकवास बात कर रहे हो ?
मैं क्यों चुदूँगी ३-4 से.. रंडी बनाने का इरादा है क्या?
मोनू: अरे दीदी मजाक कर रहा था पर
याद करो की कैसे जब मैंने और
मनीष ने एक साथ चोदा था कितना मज़ा आया था...
दीदी: मजा तो आया था. पर दो की बात और है..
.तीन चार...न बाबा न. पर थ्रीसम में बड़ा मज़ा आता है.
सुन क्यों न मनीष को बुला ले
दो-चार दिनों के लिए. बड़ा मज़ा आयेगा.
मोनू: हां दीदी, तुम उसको आज ही आने के लिए
फ़ोन कर दो तो वो कल तक आ जायेगा.
पर आज तो मेरे बारे में सोचो
दीदी: तेरे बारे में क्या सोचू
मोनू: दीदी मेरा कामिनी आंटी को चोदने का बड़ा मन है.
आज उनको कैसे भी बुला लो न.
दीदी: क्यों मुझसे दिल भर गया तेरा जो
अब कामिनी आंटी को चोदना चाहता है.
मोनू: कैसी बात करती हो दीदी.
उनके बेटे रिशू ने तुम्हे चोदा था न
उसी का बदला लेने के लिए मैं उन्हें चोदुंगा.
मैंने शरारत से कहा.
दीदी: हां हां. मुझे सब पता है...
सुन आज तो मैंने रिशू को बुलाया है
इसलिए आज कामिनी आंटी को नहीं बुला सकती.
वैसे भी वो एकदम चालू औरत है.
उसकी चूत तो तू कभी भी मार सकता है.
मैं मनीष से कहती हूँ की वो मोनिका को साथ ले आये.
मनीष ने जो मुझे चोदा था तो
मोनिका से जी भर के तू मेरा बदला ले लेना. दीदी मुस्कुराते हुए बोली
मोनिका के कड़क बदन की बात सुनते ही मेरे लंड ने एक झटका खाया.
मैंने खुशी से दीदी को बिस्तर पर पटक दिया
और उसके होंठ चूसने लगा.
दीदी भी मस्ती में आ गई और मेरा साथ देने लगी.
मेरा लण्ड तो लोहे जैसा सख़्त हो गया था.
एक तो ऐसी क़ातिल जवानी पास में हो
और दूसरी चूत मिलने की ख़ुशी...
लंड तो लोहा अपने आप ही बन जायेगा.
दीदी- अरे मोनू, ये तुम्हारे लौड़े को क्या हो गया..
कैसे झटके खा रहा है.. लगता है इसको
मोनिका बहुत पसंद है
जो उसका नाम सुन एक दम तन गया है.
मोनू- अरे दीदी इसको सारी बहनों से प्यार है पर
अभी तो इसको तुम्हारी मुलायम गाण्ड का मज़ा मिलने वाला है
इसीलिए उछल रहा है.