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Horror मौत की चाल

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मौत की चाल

''पेट्रोल पंप...पेट्रोल पंप...।

"-डॉली के मुंह से उत्साह भरा स्वर सुनकर राज का ध्यान सड़क के किनारे की ओर गया। उसे देखकर हैरानी हुई। वहां सचमुच एक पेट्रोल पंप दिख रहा था।

वहां पेट्रोल पंप मिलना सचमुच अप्रत्याशित था। राज को इसकी जरा भी उम्मीद नहीं थी कि यहां इस बियाबान जंगल में उन्हें पेट्रोल मिल जायेगा।

उसने कार पेट्रोल पम्प के अंदर ले जाकर फ्यूलिंग मशीन के पास ले जाकर रोकी।

वहां दूर-दूर तक कोई बंदा दिखाई नहीं दे रहा था।

राज ने कार का हॉर्न बजाया लेकिन इसके बाद भी वहां किसी इंसान के दर्शन नहीं हुए।

''तुम यहीं रूको

"-फिर वो डॉली को कार में ही रहने की हिदायत देते हुए कार से उतरा-

''मैं अभी आता हूं।

"

''कहां जा रहे हो...

?"-डॉली ने प्रतिरोध जताने की कोशिश की।

''बस अभी आया।

"-कहकर राज पेट्रोल पम्प पर ही बने केबिन की ओर बढ़ गया। चलते चलते ही उसने सरसरी निगाहों से आसपास का जायजा लिया। पेट्रोल पम्प काफी उजाड़ लग रहा था। इधर-उधर कचड़ा भी फैला पड़ा था

, जैसे बरसों से तो वहां सफाई ही न हुुई हो। पेट्रोल पम्प के केबिन की हालत भी काफी खस्ता लग रही थी।

केबिन का दरवाजा भिड़ा हुआ था। राज ने दरवाजा खटखटाया।

कोई प्रत्युत्तर नहीं मिलने पर उसने दरवाजे को धकेल कर देखा।

केबिन खाली था।

उसे निराशा होने लगी।

इतनी मुश्किल से एक पेट्रोल पम्प मिला

, वो भी बेकार!

उसने केबिन के अंदर नजर मारी। वहां सब कुछ बिखरा पड़ा था। एक कुर्सी

, मेज रखे थे और बहुत सारा छोटा-मोटा सामान कचड़े की तरह बिखरा हुआ था। खाने-पीने की चीजों के पैकेट

, बोतलें वगैरह भी पड़ीं थीं।

लगता था वहां काफी मजे किए गए थे।

और वो डॉली के साथ यहां इस सुनसान

, बियाबान

, उजाड़ जंगल में भाड़ झोंक रहा था।

राज ने मुँह बिचकाया और वापस जाने के लिये पलटा।

पलटते ही वो इतनी जोर से चौंका

, जैसे उसे इलेक्ट्रिक शॉक लगा हो।

उसके ठीक पीछे एक आदमी खड़ा था।

राज हैरान था कि वो आदमी बिना कोई आहट किए कब इतने दबे पांव चलतेे हुए उसके ठीक पीछे पहुंच गया।

बल्कि सच्चाई तो यही थी कि एकदम से उस तरह उस आदमी के सामने आ जाने से वो थोड़ा घबरा भी गया था।

''पेट्रोल खत्म हो गया क्या?"-गंदा सा दिखने वाला वो आदमी माचिस की तीली से अपने दांत कुरेदता हुआ राज पर नजरें गड़ाकर बोला।

उस आदमी की उम्र 40-50 वर्ष रही होगी। उसके बाल भी बिखरे

, कपड़े भी मैले-कुचैले हो रहे थे। दाढ़ी भी थोड़ी बड़ी हुई थी। उसने जींस और शर्ट तथा शर्ट के ऊपर जैकेट पहन रखी थी। उसकी बड़ी-बड़ी आंखों में पीलापन था।

''हां। हमें पेट्रोल चाहिए।

"-राज अपनी भारी आवाज में बोला। फिर पेट्रोल पंप की हालत को देखते हुए उसने तुरंत ही सवाल किया-

''यहां पेट्रोल तो होगा न

?"

वो कुछ देर तक राज को घूरता रहा

, फिर हंसा-

''जरूरत से ज्यादा है।

"-कह कर वो घूम कर फ्यूलिंग मशीन की ओर बढ़ गया।

राज ने सिर को झटका दिया और उसके पीछे-पीछे अपनी कार तक पहुंचा।

उस आदमी ने फ्यूलिंग मशीन से पाइप उठाया और कार के पेट्रोल टैंक का पेट भरने लगा।

उसने राज से ये तक नहीं पूछा कि कितना पेट्रोल डालना है। उसके सीधे टैंक में पाइप लगा देने से राज को हैरानी हुई। आखिरकार उसने खुद ही कहा-

''टंकी फुल कर दो।

"-लेकिन उसकी बात पर उस व्यक्ति ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की।

''वैसे तुम मेरे केबिन में क्या ताका-झांकी कर रहे थे

?"-अचानक उस शख्स ने राज से पूछा।

''ताकाझांकी नहीं कर रहा था।

"-राज बोला-

''किसी को ढूंढ रहा था

, जो पेट्रोल भर सके।

"

''खुद भर लेते

"-वो आंखें सिकोड़ कर उसकी ओर देखते हुए बोला-

''पैसे काउंटर पर छोड़ जाते।

"

उसकी बात पर राज के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

''इंडिया में ऐसा कब से होने लगा

?"-कार में बैठी डॉली ने कहा।

डॉली की आवाज सुनकर वो आदमी कार की सामने वाली खिड़की की ओर पलटा और उससे बाहर झांक रही डॉली की ओर देखने लगा।

डॉली भी अपने सनग्लासेस से उसे देखती रही

, जो कि उसने यूं ही लगा लिये थे।

कुछ देर डॉली को घूरने के बाद वो फिर राज की ओर पलट गया।

''तुम

"-उसने राज की ओर अपनी उंगली ऐसे तानी जैसे खंजर भोंक रहा हो-

''आर्मी में हो क्या

?"

''नहीं तो। ऐसा क्यों लगा तुम्हें

?"

''तुम्हारी आवाज काफी भारी है।

"-वो अजीब ढंग से हंसा-

''उससे मुझे लगा।

"

''मैं

पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर हूं।

"-राज ने कहा

राज की बात सुनकर वो ठहाका मारकर हंस पड़ा। उस जंगल के सन्नाटे में उसकी वो हंसी काफी अजीब लग रही थी।

''पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर

?"-फिर वो हंसी रोक कर बोला-

''तब तो बिल्कुल सही जगह आए हो तुम।

"

''मतलब

?"-राज की भवें उठीं।

उसने राज को चेन स्मोकिंग से खराब हो रहे दांतों की झलक दिखाते हुए कहा-

''अब तो यहां आ ही गये हो। समझ जाओगे।

"

राज उससे और भी सवाल करता लेकिन उसे वो आदमी कुछ सनकी किस्म का लगने लगा था इसलिए उसने उससे और कुछ पूछने का इरादा ड्रॉप कर दिया।

पेट्रोल भरने के बाद उसने पाइप कार की पेट्रोल टंकी से निकालकर वापस फ्यूल मशीन पर टांग दिया।

''सुनो

, मुझे और पेट्रोल चाहिए होगा।

"-राज बोला-

''लेकिन मेरे पास पेट्रोल रखने के लिए कुछ नहीं है। क्या तुम्हारे पास...

?"

''हां।

"-पम्प अटेंडेंट बीच में ही उसकी बात काटते हुए बोला-

''मेरे पास वो चीज है।

"

फिर वो अपने केबिन की ओर बढ़ गया।

कुछ ही देर में वो केबिन से एक पेट्रोल की भरी हुई कैन लेकर वापस लौटा।
 
फिर वो अपने केबिन की ओर बढ़ गया।

कुछ ही देर में वो केबिन से एक पेट्रोल की भरी हुई कैन लेकर वापस लौटा।

''थैंक्स।

"-राज ने उससे कैन लेकर कार की डिक्की में रख ली।

''ले जाओ

"-उसने फिर अनुज को अपने सड़े हुए दांत दिखाते हुए कहा-

''तुम लोगों के काम आयेगा।

"

''क्या

?"-राज की उसकी बात बड़ी बेतुकी सी लगी।

उसने जवाब नहीं दिया। आंखों में अजीब-सी चमक लिए वो राज की ओर देखता रहा।

राज अब उससे और ज्यादा उलझना नहीं चाहता था। उसने सोचा अब वहां से चले जाना ही ठीक होगा। उसने अटेंडेंट को पेट्रोल के पैसे दिये।

पम्प अटेंडेंट ने यंत्रवत अंदाज में उसके हाथों से पैसे ले लिये। कुछ देर वो अपने हाथ में थमे नोटों को अनिश्चित भाव से घूरता रहा

, जैसे उसका उनसे कोई वास्ता ही न हो। राज को लगा कि वो कुछ कहने वाला है।

''वैसे

"-उसने नोटों पर से नजरें उठाकर राज ओर देखा-

''तुम्हारी बहन काफी खूबसूरत है।

"

''वो मेरी बहन नहीं है।

"-राज की आवाज सख्त हो गई-

''और तुम्हें अपने काम से काम रखना चाहिए।

"

''ओह!

"-उसने एक हाथ अपने सीने पर रख लिया-

''ओह! आई एम सॉरी। आई एम रियली रियली सॉरी। तुम दोनों यहां...जंगल में...इस तरह अकेले...मुझे समझ जाना चाहिए था।

"

राज ने सिर को झटका दिया और कार की ओर बढ़ गया। वो अब उस सनकी आदमी से और ज्यादा नहीं भिडऩा चाहता था।

राज कार में बैठ गया। ड्राइविंग सीट अब डॉली ने सम्भाल ली थी। राज के बैठते ही उसने कार स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी।

''जरा सम्भल कर जाना

, पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर!

"-पीछे से उस आदमी की चीखती सी आवाज सुनाई पड़ी-

''मौत इन जंगलों में तुम लोगों का इंतजार कर रही है।

"
 
ये सब करीब एक हफ्ते पहले पुराने दोस्तों की एक मुलाकात से शुरू हुआ था।

जय वर्मा और प्रीति राज के बचपन के दोस्त थे। वे तीनों कॉलेज में भी एक साथ थे। लेकिन कॉलेज के बाद से राज की जय और प्रीति से मुलाकात नहीं हुई थी। कभी-कभार फोन पर या सोशल मीडिया के माध्यम से उनमें बातें होती रहतीं थीं।

राज प्रीति को स्कूल टाइम से ही काफी पसंद करता था लेकिन प्रीति की कैमिस्ट्री जय के साथ ज्यादा अच्छी थी। शायद राज के उन दोनों से दूरी बनाने की ये भी एक वजह थी। उसने प्रीति के प्रति अपने आकर्षण को कभी उन पर खुले तौर पर जाहिर नहीं किया था लेकिन इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपते। वे दोनों ही प्रीति के प्रति उसकी फीलिंग्स को जानते थे लेकिन कभी आपस में उस बारे में बात नहीं करते थे।

क्योंकि प्रीति जय को पसंद करती थी।

वो जय के साथ खुश भी थी।

राज भी अपने क्रश से और ज्यादा

'क्रश

' नहीं होना चाहता था

, जिसके चलते कॉलेज खत्म होने के बाद से ही उसने उन दोनों से दूरी बना लेने में ही अपनी भलाई समझी।

लेकिन फिर भी राज को प्रीति की फिक्र रहती थी।

कारण था जय!

जय एक बेहद लापरवाह और मस्तमौला किस्म का इंसान था। उसके पिता का कोई बिजनेस था और वो काफी अमीर थे। लेकिन जय पैसा पानी की तरह बहाया करता था। अक्सर वो कॉलेज के दोस्तों की पिकनिक ट्रिप आयोजित करता रहता था

, जिनमें और भी यार-दोस्तों को शामिल कर लेता था और वैसी ट्रिप्स का पूरा खर्चा भी वो खुद उठाता था। कॉलेज के दिनों में वे लोग कई जगहों पर घूमने जाते रहते थे। जय का घूमने का शौक इतना ज्यादा था कि राज को लगने लगा था कि उसका पूरा भारत भ्रमण करने का ही इरादा था। लेकिन प्रीति पर उसका पूरा रंग चढ़ गया था और वो हर जगह उसके साथ जाने के लिये तैयार हो जाती थी। बल्कि तैयार क्या हो जाती थी

, जाती ही थी।

लेकिन राज की एक लिमिट थी।

उसने जब जय के घूमने-फिरने और पैसे उड़ाने के शौक को अनियंत्रित होते देखा तो उसकी कभी भी अचानक बन जाने वाली सैर-सपाटों की योजनाओं से दूरी बनानी शुरू कर दी। उसके समझाने पर तो जय मानता था नहीं। यही कारण था कि कॉलेज टाइम से ही वे दूर होने लगे थे। कॉलेज के अंतिम वर्ष में तो हालत ये हो गई थी कि स्कूल टाइम में व कॉलेज के शुरूआती दिनों में जहां वे ज्यादातर समय एक साथ ही बिताते थे

, वहीं कॉलेज के अंतिम वर्ष में राज को उनके बहुत कम दर्शन ही होते थे। यहां तक कि कई बार तो हॉलीडेज पर भी वो दोनों गायब रहते थे।

राज को उनकी कमी काफी खलती थी लेकिन वो अपनी उपेक्षा इससे ज्यादा बर्दाश्त भी नहीं कर सकता था।
 
ले जाना तो दूर की बात

, उन्होंने उसे बताने तक की जरूरत नहीं समझी थी कि वे भानगढ़ जा रहे थे।

जाने क्यों उस समय राज को ऐसा लगा

, जैसे उन दोनों से अब उसका सम्बन्ध पूरी तरह खत्म हो चुका था।

लेकिन ऐसा नहीं था।

एक रात अचानक उसे जय का फोन आया और जय ने उसे शिमला में होने की जानकारी दी।

संयोग से राज भी उस समय डॉली के साथ शिमला में ही था।

फिर क्या था

? उनका मिलने का प्लान बन गया।

शिमला के एक सस्ते से रिसॉर्ट में-जहां जय और प्रीति अपने दो और दोस्तों के साथ ठहरे हुए थेे-राज और डॉली की उनसे मुलाकात हुई।

वो मुलाकात जो उन्हें उस रहस्यमयी जगह तक खींच ले गई थी

, जिसे दुनिया के टॉप

10 हॉन्टेड प्लेसेज यानी दस सबसे भुतहा जगहों में गिना जाता था।

वे लोग शिमला के

'ड्रीम प्लेस

' नामक रिसॉर्ट के एक कॉटेज में बैठे थे

, जिसमें जय और प्रीति के साथ ही एक उन्हीं का हमउम्र जोड़ा भी ठहरा हुआ था

, जिनका परिचय जय ने अनुराग सेन और मोहिनी के रूप में करवाया था। राज उन दोनों को पहचानता था। जय के ट्रेवलिंग वाले वीडियोज में उसने अक्सर उन दोनों को जय और प्रीति के साथ ही देखा था।

जय और प्रीति की तरह ही उनकी भी अभी शादी नहीं हुई थी।

इतने दिनों बाद प्रीति को देख कर राज को एक बार फिर स्कूल-कॉलेज के उन्हीं दिनों की याद हो आई
 
जब वो उस लड़की पर दिलोजान से मरता था। लेकिन कभी अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाया था क्योंकि उसने अपनी भावनाओं को समझने के लिए कुछ ज्यादा ही इंतजार कर लिया था। और जब तक वो उन्हें समझ पाता

, तब तक काफी देर हो चुकी थी। बाद में जय और प्रीति के बीच बढ़ती नजदीकियों ने उसे प्रीति से दूरी बनाने के लिए मजबूर कर दिया था।

चार सालों बाद भी प्रीति बिल्कुल नहीं बदली थी।

बल्कि वो और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी।

अनुराग ने बहुत गर्मजोशी से राज से हाथ मिलाया।

''आखिर मुलाकात हो ही गई।

"-अनुराग तारीफ भरे स्वर में बोला-

''जय और प्रीति दोनों तुम्हारी बहुत तारीफ करते हैं।

"

''हम बचपन के दोस्त हैं।

"-राज बोला-

''तारीफ तो करेंगें ही।

"

फिर फॉर्मल हाय-हैलो के बाद वे सभी कॉटेज के एक रूम में बैठे गर्मागर्म कॉफी का आनंद ले रहे थे।

राज

, डॉली

, जय

, प्रीति

, अनुराग और मोहिनी।

''तो

"-राज कॉफी के कप से चुस्की लेते हुए जय से बोला-

''इस बार कहां घूमने जाने का प्रोग्राम है तुम लोगों का

?"

''ऐसी किसी जगह पर तो बिल्कुल भी नहीं

"-जय बोला-

''जहां आम लोग जाते हैं।

"

''मतलब

?"

''मतलब ये

, माई डियर ब्रदर

, कि हम आम जगहों पर घूमने नहीं जातेे। हम बेहद खास जगहों पर ही घूमने जाते हैं। ऐसी जगहें

, जहां जाना आसान न हो।

"

''एक्स्ट्रीम टूरीज्म

?"-डॉली बोली।

''यस!

"-जय उत्साहित स्वर में बोला। फिर वो प्रशंसात्मक स्वर में राज से बोला-

''तुम्हारी गर्लफ्रेंड बहुत समझदार है

राज

!

"

''डॉली मेरी गर्लफ्रेंड नहीं है

"-राज बोला-

''पार्टनर है।

"

डॉली ने खामोशी के साथ कॉफी का घूंट भरा। उसने न जय के उसे राज की

'गर्लफ्रेंड

' कहने का विरोध किया और न ही राज के मना करने पर कुछ कहा।

''खामख्वाह। अरे भाई

, वो बेचारी तो कुछ नहीं कह रही। जब उसे कोई आपत्ति नहीं है तो तुम्हें क्या दिक्कत है

?"

जय की उस बात पर अनुराग

, प्रीति और मोहिनी भी हंस पड़े।

डॉली केवल मुस्कुरा कर रह गई।

''इनफ विद दिस!

"-राज बोला-

''ये बताओ

, कहां-कहां का एक्स्ट्रीम टूरीज्म कर चुके हो तुम लोग

?"

''कई जगह जा चुके हैं। चेर्नोबिल

, भानगढ़

, और भी कई जगह जा चुके हैं। इस बार अंटार्कटिका जाने की तैयारी में हैं।

"

''हां। मुझे पता है तुम दोनों भानगढ़ जा चुके हो।

"

''वहां तो तुम लोग भी जा चुके हो।

"-जय बोला-

''आखिर पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर हो।

"

''तुम्हें वहां कोई भूत मिला

?"-अनुराग

राज

से बोला-

''हम गए थे तब हमें तो नहीं मिला।

"

''स्टॉप इट

, अनुराग!

"-मोहिनी ने उसके कंधे पर हाथ मारा।

राज ने जय की ओर देखा।

''अनुराग को भूत-प्रेतों पर बिल्कुल भी यकीन नहीं है।

"-जय हंसते हुए बोला-

''इसे मैंने जब से बताया है कि तुम

'पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर

' हो

, वो इस चीज का बहुत मजाक उड़ाता है। ध्यान से! तुम्हारी बहुत टांग खींचने वाला है ये।

"

''मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है।

"-अनुराग अपनी आवाज में दुनिया भर की शराफत घोलते हुए बोला।

''क्या तुम्हें पता है

"-प्रीति मेज पर रखे कॉफी के कप को अपनी हथेलियों के बीच घुमाते हुए बोली-

''एक जगह है

, जो भानगढ़ से भी ज्यादा डरावनी है

? और यहां से ज्यादा दूर भी नहीं है।

"

डॉली और राज ने एक-दूसरे की ओर देखा

, फिर डॉली प्रीति की ओर देखते हुए गम्भीर स्वर में बोली-

''ऐसी कौन सी जगह है

?"

''एक घर है

,"-अंंजना का स्वर एक्साइटेड हो गया-

''जिसे दुनिया के

'टॉप टेन हॉन्टेड प्लेसेज

' में गिना जाता है। कहा जाता है कि वहां जितनी भयावह घटनाएं घटित हुईं

, उतनी कहीं भी नहीं हुईं हैं। विदेशों के पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर्स भी अब उस जगह में दिलचस्पी लेने लगे हैं। अमेरिका की एक कंपनी ने तो उस जगह को भारी कीमत देकर खरीद भी लिया है।

"

''कहां है ये घर

?"

''दिल्ली से नेशनल हाइवे-

44 पर कालका से

2025 किलोमीटर पहले पूर्व की ओर एक सड़क जाती है। उसी सड़क पर काफी दूरी पर जंगल के सुनसान इलाके में स्थित है ये घर। इंटरनेट पर इस जगह के बारे में जितना पढ़ा है और चित्र वगैरह देखे हैं

, उससे तो यही पता चलता है कि ये काफी सूनसान इलाका है इसलिए वैसे ही डरावना लगता है। वहां आसपास कोई गांव भी नहीं है। एकदम वीराने में स्थित है।

"

''मैं कालका गई हूं।

"-डॉली दिलचस्पी लेती हुई बोली-

''लेकिन वहां आसपास किसी हॉन्टेड प्लेस के बारे में नहीं सुना। कुछ और बताओ इस जगह के बारे में।

"

''कुछ और क्या बताना है

"-जय बोला-

''तुम लोग चाहो तो वहां तीन दिन

, तीन रातें बिताने का शानदार मौका मिल सकता है तुम्हें।

"

''क्या मतलब

?"-राज बोला।

''अरे

, भाई

, इसीलिए तो मैंने तुम्हें यहां बुलाया है। तुम पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर हो। मुझे लगा ऐसी जगह में तुम्हारी दिलचस्पी कुछ ज्यादा ही होगी।

"

''वो सब छोड़ो

"-राज हाथ हिलाकर बोला-

''ये बताओ

, वहां तीन दिन

, तीन रात रूकने का क्या चक्कर है

?"

''चक्कर सुनोगे तो घनचक्कर हो जाओगे।

"-अनुराग सैंडविच अपने मुंह में ठूंसते हुए बोला।

''दरअसल

, अमेरिका की

'पैरानॉर्मल होल्ड

' नाम की जिस कंपनी ने उस जगह को खरीदा है

, वो वहां एक 'आइसोलेशन इवेंट' आयोजित कर रही है। एक तरह का चैलेंज समझ लो।

"

'' 'आइसोलेशन इवेंट' ?"

''हां। उस भूत बंगले में तीन दिन

, तीन रात बिताने का चैलेंज। जैसा तुम लोग करते हो न

, किसी हॉन्टेड मानी जाने वाली जगह पर जाते हो

, वहां रिसर्च वगैरह करते हो

, उसी तरह का रिसर्च प्रोग्राम समझ लो। तीन कपल को उस घर में तीन दिन और तीन रातें बितानी होंगीं। और ऐसा करने पर प्रत्येक कपल को एक-एक लाख डॉलर का ईनाम कंपनी की ओर से दिया जाएगा।

"

''एक-एक लाख डॉलर!

"-डॉली के मुंह से निकला।

''हां।

"

''हमने तो ऐसे किसी चैलेंज या इवेंट के बारे में नहीं सुना।

"-राज बोला।

''क्योंकि उन लोगों ने इसका ज्यादा प्रचार-प्रसार नहीं किया। लेकिन फिर भी मुझे इस बात की हैरानी है कि तुमने कैसे नहीं सुना। आखिर तुम तो इसी फील्ड से जुड़े हो। लेकिन जो भी हो

, इस इवेंट के रूप में एक-एक लाख डॉलर कमाने का सुनहरा मौका है हम लोगों के पास। हम चारों ने तो फैसला कर लिया है। चाहो तो वो तीसरा कपल तुम बन सकते हो।

"
 
राज और डॉली ने एक-दूसरे की ओर देखा।

''कम ऑन!

"-जय उन्हें उकसाते हुए बोला-

''तुम्हारे लिए तो इसमें और भी बड़ा बोनस है यार। तुम्हें एक ऐसी जगह पर जाने को मिलेगा

, जो हॉन्टेड है। क्या पता वहां सचमुच किसी भूत से ही सामना हो जाए

? तुम्हारा पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर का कैरियर चमक जाएगा।

"

राज ने कुछ नहीं कहा। वो अब इस चीज का आदि हो गया था। लोग भूत-प्रेतों से जुड़ी चर्चा को सीरियसली लेते ही नहीं थे। और न ही उसे जय से ऐसी कोई उम्मीद थी कि वो उनकी टांग नहीं खींचेगा।

''तो क्या कहते हो

?"-जय उत्साहित स्वर में बोला।

''इसमें उन लोगों का क्या फायदा है

?"-डॉली बोली-

''एक लाख डॉलर बहुत बड़ी रकम होती है। तीन लाख डॉलर इस तरह लुटाने पर उन्हें भी तो कोई फायदा होगा

? आखिर इस तरह कुछ लोग एक भुतहा मकान में रहें तो इससे उन्हें किस तरह का फायदा हो सकता है

?"

''उन्हें फायदा ही फायदा है।

"

''कैसे

?"

''असल में वो कंपनी हॉरर थीम पर फनहाउस संचालित करने वाली एक बहुत बड़ी कंपनी है। विदेशों में उनके कई ऐसे फनहाउस हैं। तुम लोगों ने डिजनी वर्ल्ड का नाम तो सुना ही होगा

? उसी तरह के लेकिन हॉरर थीम पर आधारित एंटरटेनमेंट पार्क वगैरह चलाते हैं वो लोग। इतना ही नहीं

, उनका प्रोडक्शन हाउस हॉरर फिल्में भी बनाता है। उनकी कई हॉरर फिल्में तो सुपरहिट भी रहीं हैं। अब ये मत कहना तुम लोगों ने

'घोस्ट आई

' नहीं देखी

? लॉकडाउन लगने से पहले लोग पागल हुए जा रहे थे ये फिल्म देखकर। बीते साल की सबसे बड़ी हॉरर फिल्मों में से एक है। इतनी सुपरहिट कि अगर बीच में ये कोरोना वाला पंगा नहीं होता तो अब भी मल्टीप्लेक्सों में करोड़ों डॉलर कमा रही होती। और फिल्म सुपरहिट होने का मतलब जानते हो न

? मतलब उन पर पैसों की बरसात हो रही है। और वो अपने पैसों को बिजनेस में इन्वेस्ट कर उसे दुगुने से तिगुना

, तिगुने से चौगुना करने में जुटे हुए हैं। एक लाख डॉलर की रकम तो उनके लिए सौ के नोट के बराबर होगी।

"

राज की भंवें उठीं।

''अच्छा

,"-जय ने स्वीकार किया कि वो कुछ ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर बोल गया था-

''दो हजार के नोट के बराबर होगी। दो-दो हजार के दो नोटों के बराबर होगी। लेकिन एक लखपति आदमी को दो-चार

, पांच-दस हजार रूपए की रकम उड़ा देने से क्या फर्क पड़ता है। और वो भी तब जब उसमें उसका भी फायदा हो रहा हो...।

"

''वही तो मैंने पूछा

"-डॉली बोली-इसमेें उनका क्या फायदा है

?"

''उस हॉन्टेड जगह का प्रचार होगा। लोग उसके बारे में जानेंगेंं। आर्टिकल वगैरह छपवाएंगें। हम लोगों ने वहां तीन दिन

, तीन रात बिताए तो वहां हमें कैसा लगा

, हमारे अनुभवों वगैरह को वो उस जगह के प्रचार-प्रसार में इस्तेमाल करेंगें

, और क्या

?"

''उस जगह का प्रचार प्रसार करने से उन्हें क्या फायदा होगा

?"

''वो लोग वहां हॉरर थीम पर आधारित कोई फनहाउस या होटल वगैरह बनाना चाहते हैं। अभी बीच में लॉकडाउन लग जाने के कारण उनका प्रोजेक्ट टल गया। लेकिन अब वो इस खाली समय का उपयोग इस तरह के इवेंट का आयोजन करके करना चाहते हैं। जिससे इस बीच उस जगह के प्रचार-प्रसार का सिलसिला शुरू हो सके।

"

डॉली ने राज की ओर देखा।

''प्लीज!

"-जय अनुनयपूर्ण स्वर में राज से बोला-

''मेरे लिए मान जाओ

, यार। सच कह रहा हूं

, बहुत मजा आयेगा। एक हॉन्टेड जगह में तीन दिन

, तीन रात। इतना मजा तो भानगढ़ में भी नहीं आया था क्योंकि वहां से हमें जल्दी लौटना पड़ा था। और जहां तक मैंने सुना है

, ये जगह भी बहुत डरावनी है।

"

''बहुत ज्यादा डरावनी

"-प्रीति बोली।

''और क्या

?"-अनुराग बोला-

''किसी हॉन्टेड प्लेस पर जाओ और रात में वहां न ठहरो तो साला जाने का मतलब ही क्या हुआ

? दिन में तो बेचारे भूत-प्रेत लोग आराम करते हैं। दिन में तो वैसे भी वहां कुछ दिखने वाला नहीं होता।

"

''वैसे भी

"-प्रीति बड़े स्टाइल से सिर को झटककर बोली-

''भूत-प्रेत जैसा कुछ नहीं होता।

"

''अरे...अरे...।

"-अनुराग ने प्रतिरोध जताया-

''ऐसा मत कहो। बेचारे

राज

और डॉली की जॉब पर ही सवाल खड़ा कर दिया तुमने।

"

राज के चेहरे पर अब भी अनिश्चय के भाव दिखाई दे रहे थेे।

''कम ऑन यार!

"-जय आकर उसके बगल में बैठ गया और उसके हाथ पकड़कर बोला-

''तुम लोग तो वैसे ही ऐसी जगहों पर रिसर्च करने जाते रहते हो। क्या हमारे साथ तीन दिन नहीं रूक सकते

? प्लीज! पुराने दिनों की खातिर!

"

''ओके!

"-राज बोला-

''हम लोग तैयार हैं।

"

''हुर्रे।

"-प्रीति ने खुशी से नारा सा लगाया-

''हम दुनिया की दस सबसे डरावनी जगहों में से एक पर घूमने जा रहे हैं। ये हमारी जिन्दगी के सबसे यादगार तीन दिन होंगें।

"

''लेकिन वहां हमें और क्या-क्या करना पड़ेगा

? मुझे इस इवेंट के बारे में पूरी जानकारी चाहिए।

"

''ये हुई न बात!

"-जय जोश के साथ बोला-

''जानकारी की चिंता तुम मत करो। वो सब मैं तुम्हें दे दूंगा। तुम और डॉली बस तैयार रहना। तीन दिनों बाद हम सब यहां से साथ-साथ ही चलेंगें...।

"

''यहां से तो साथ-साथ नहीं जा पाएंगें।

"-राज बोला-

''हमें दिल्ली में कुछ जरूरी काम है। आज शाम ही वापस लौटना पड़ेगा।

"

''फिर

?"

''तुम हमें उस जगह का एड्रेस भेज देना। हम कार से वहां आ जाएंगें।

"

''ठीक है। मैं तुम्हें इवेंट से जुड़ी सारी जानकारी मेल कर दूंगा।इसकी टर्म्स एंड कंडीशंस वगैरह तुम सब उस फार्म पर देख सकोगे। मेरा यकीन करो। इसमें कोई जाल

, धोखाधड़ी जैसी बात नहीं है। मैंने उस कंपनी के बारे में अच्छी तरह तस्दीक करने के बाद ही इस इवेंट में पर्टिसिपेट करने के लिए एप्लाई किया था। ये बहुत पुरानी और काफी प्रसिद्ध कंपनी है। मेरा एक दोस्त भी इस कंपनी में काम करता है। उसी के माध्यम से मुझे इस इवेंट के बारे में पता चला था।

"

''ठीक है। ठीक है।

"

''वैसे हम सबके अलावा वहां उस मकान का केयरटेकर और कंपनी की ओर से भेजा गया एक होस्ट भी होगा। यानि हम अकेले भी नहीं होंगें।

"

''अकेले

?"-अनुराग बोला-

''वो तो वैसे भी नहीं होंगें।

66 लोग अकेले थोड़े ही होते हैं।

"

''बेचारे वहां रहने वाले भूत भी पूरी बारात आते देखकर परेशान हो जाएंगें।

"-प्रीति हंसते हुए बोली।

फिर उस कंपनी और उस इवेंट के बारे में वो लोग देर तक बातें करते रहे। वही उनके बीच बातचीत का मुख्य मुद्दा रहा। इस दौरान उनकी अनुराग और मोहिनी से भी अच्छी जान-पहचान हो गई। राज ने नोट किया कि अनुराग और मोहिनी जय और प्रीति के काफी क्लोज थे।

उतने ही जितना एक समय वो हुआ करता था।

राज को भी वे दोनों पसंद ही आये। जय के ट्रेवलिंग वीडियोज में राज ने पहले भी उन दोनों को जय और प्रीति के साथ देखा था लेकिन उस समय ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

करीब एक घंटे बाद जब वे दोनों वापस लौटने लगे तो जय और प्रीति बाहर गेट तक उन्हें छोडऩे आये।

डॉली और प्रीति आपस में बातें करते हुए आगे चल रहे थे जबकि जय और राज उनसे थोड़ा पीछे थे।

''इस इवेंट में जो एक लाख डॉलर मिलेंगें

"-जय राज से बोला-

''उससे फाइनांशियल रूप से हमारी काफी हैल्प होगी।

"

''फाइनांशियल

?"-राज की भंवें उठीं।

''मैंने तुम्हें बताया नहीं।

"-जय थोड़े नर्वस भाव से बोला-

''हमारी आर्थिक स्थिति थोड़ी ठीक नहीं चल रही है। अण्टार्कटिका की ट्रिप को तो छोड़ो

, यहां तो क्रेडिट काड्र््स के बिल भरना तक मुश्किल हो रहा है। ये ऑफर तो जैसे भगवान ने सीधे लॉटरी की तरह मेरी झोली में भेज दिया। वरना बहुत मुश्किल हो जाती।

"

''तुम तो ऐसे कह रहे हो

, जैसे पैसे मिल गए हैं।

"

''मिल ही जाएंगें। ये तो अच्छा हुआ कि हम लोगों को पहले मौका मिल गया। वरना मेरे ख्याल से तो ऐसे ऑफर पर लोग टूट पडऩे थे।

"

''तो क्यों नहीं टूट पड़े लोग

?"

'' 'पैरानॉर्मल होल्ड

' ने इसका ज्यादा प्रचार-प्रसार ही नहीं किया। उनकी भारत की ब्रांच का एक आदमी इत्तफाक से मेरा दोस्त है। उसी के माध्यम से मुझे इसके बारे में पता चला।

"

''कंपनी ने इसका प्रचार-प्रसार क्यों नहीं किया

?"

''क्योंकि उन्हें पता था कि बिना प्रचार किए ही ऐसे ऑफर के लिए लाइन लग जानी थी। प्रचार करते तब तो उनके लिए सलेक्ट करना मुश्किल हो जाता।

"

''इसकी सारी जानकारी मुझे मेल करना। मैं एक बार इस बारे में अच्छी तरह पढ़ लेना चाहता हूं।

"

''बिल्कुल। बिल्कुल। मैं शाम तक तुम्हें मेल करता हूं।

"

''और तुम्हारी फाइनांशियल कंडीशन के बारे में कुछ कहना चाहूंगा। वैसे तो कॉलेज में ही मैंने तुम्हें कम से कम नहीं तो हजार बार समझाया था लेकिन एक बार फिर कह रहा हूं। हाथ रोक कर खर्च करना सीखो। जितनी धुआंधार स्पीड से तुम पैसे उड़ाते हो

, उससे तो कुबेर का खजाना खाली होने में भी देर न लगे।

"

''यार

, तुम फिर शुरू हो गए।

"

''अभी तुम्हीं ने बताया न कि प्रॉब्लम में चल रहे हो।

"

''अरे मेरे बाप

, सांस लेने में दिक्कत होती है तो आदमी इलाज करवाता है या सांस लेना ही बंद कर देता है

?"

''फिजूल की बात है। लेकिन तुम्हें समझाना भी बेकार है। मैंने तो कॉलेज टाइम में ही हार मान ली थी। अपने नहीं तो कम से कम प्रीति के बारे में तो सोचो।

"

''प्रीति!

"-जय ने गहरी निगाहों से उसे देखा-

''तो ये बात है! अभी तक प्रीति की फिक्र करते हो

? तो बीच-बीच में कॉल वगैरह क्यों नहीं करते

? मुझे बुरा लग जायेगा

, इसलिए

?"

राज ने कुछ नहीं कहा। वो एक ऐसी बात थी

, जो उन तीनों के बीच आज तक अनकही थी। और इतने सालों बाद की मुलाकात में जय का अचानक इस तरह बोल देने पर राज को समझ ही नहीं आया कि उससे क्या कहे।

तभी जय का मोबाइल पर किसी की कॉल आ गई। वो राज से इजाजत लेकर मोबाइल पर बात करते हुए दूसरी ओर चला गया।
 
आगे चल रही डॉली और प्रीति में से डॉली कार में बैठ चुकी थी। प्रीति ने उसे बाय किया

, फिर घूमकर राज के पास आई।

''जा रहे हो

?"-वो राज से बोली।

प्रीति के पास आते ही राज के दिल की धड़कनें अपने-आप ही बढ़ गईं। इतने सालों बाद ये पहला मौका था

, जब प्रीति और वो करीब-करीब अकेले थे। डॉली कार में बैठी थी और जय फोन पर बात करते हुए काफी दूर चला गया था।

''हां।

"-राज ने यूं ही हाथ से कार की ओर इशारा करते हुए कहा-

''जाना तो होगा ही।

"

''ठीक है फिर। बाय!

"-कहते हुए प्रीति आगे बढ़कर उसके गले से लग गई। प्रीति के उस तरह गले मिलने से राज और भी ज्यादा अचकचा गया।

''मुझे पता था।

"-फिर उससे अलग होकर प्रीति मुस्कुराते हुए बोली।

''क्या पता था

?"-राज हैरानी से बोला।

''कि तुम कोई मुझसे भी अच्छी ढूंढ लोगे।

"-कहकर प्रीति ने उसे आंख मारी और हंसती हुई वहां से चली गई।

राज पीछे खड़ा हैरानी से उसे देखता रहा। उसकी तन्द्रा तब भंग हुई

, जब पीछे कार मेें बैठी डॉली ने उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए जोर से हॉर्न बजाया।

पुराने दोस्तों से हुई वो मुलाकात ही उन्हें वहां ले आई थी। जय ने उन्हें उस हॉन्टेड घर का जो एड्रेस भेजा था-जहां उन्हें तीन दिन बिताने थे-वो दिल्ली से कालका जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-

44 पर कालका से थोड़ा पहले मुख्य मार्ग से हटकर एक सड़क पर आगे कहीं था

, जो काफी सुनसान थी। काफी देर बाद उन्हें एक पेट्रोल पंप दिखा था

, वो भी कबाडख़ाने जैसी हालत में और उसके पंप अटेंडेंट ने भी राज का अच्छा-खासा दिमाग खराब कर दिया।

उनकी कार फिर उसी सड़क पर आगे दौड़ी जा रही थी। सड़क के दोनों ओर दूर-दूर तक जंगल के सिवाय कुछ नहीं दिख रहा था।

उस रास्ते पर चलते हुए उन्हें काफी देर हो गई थी लेकिन अब तक एक भी गाड़ी नजर नहीं आई थी। गाड़ी तो दूर की बात

, उस पागल पम्प अटेंडेंट के पेट्रोल पंप के अलावा और कुछ भी नजर नहीं आया था।

सिर्फ जंगल!

''मैंने तुमसे कार रोकने के लिए कहा था

"-राज बोला-

''तुमने रोकी क्यों नहीं

?"

''किसलिए

?"-डॉली कार चलाते हुए सामने सड़क की ओर देख रही थी-

''जिससे तुम जाकर उस पागल से भिड़ सकते

?"

''तुमने सुना नहीं उसने क्या कहा...

?"

''मैंने सुना। लेकिन मुझे वो पंगेबाज आदमी लगा। जानबूझकर भड़काने की कोशिश कर रहा था। ये तो अच्छा हुआ कि तुम बाहर ही उससे नहीं भिड़ गये थे।

"

राज चुप हो गया। उस पम्प अटेंडेंट ने चलते समय जो अजीब बात उनसे कही थी

, वो उसके दिमाग से निकलने का नाम ही नहीं ले रही थी।

डॉली ने एक बार उसके चेहरे पर नजर डाली

, फिर उसके कंधे पर हाथ रखकर थपकते हुए बोली-

''कम ऑन

, डूड। तुमने उसे बताया न कि तुम पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर हो

, तो वो तुम्हारा मजाक उड़ाने की कोशिश कर रहा होगा। डोंट ओवरथिंक इट!

"

''मुझे लगता है

"-राज ने सिगरेट का पैकेट निकालकर एक सिगरेट होंठो से लगाई और लाइटर से उसे सुलगाते हुए बोला-

''दुनिया में कुछ भी बिना मतलब के नहीं होता है।

"

''क्या मतलब

? तुम्हें उस सनकी की बातों में कोई मतलब नजर आता है

? चलो

, लगी एक-एक हजार की शर्त। अगर तुम उसकी बातों में कुछ भी सेंस साबित कर पाये तो।

"

तभी रास्ते में किसी चीज ने राज का ध्यान खींच लिया।

''मुझे लगता है

"-वो सीट पर सम्भलकर बैठ गया-

''हमारी मंजिल आ गई है।

"

डॉली की नजरों ने उसकी नजरों का पीछा किया।

सामने सड़क पर एक बोर्ड तेजी से नजदीक आता जा रहा था

, जिस पर बड़े-बड़े लाल अक्षरों में लिखा था-

खतरा

कृपया इधर न जाएं।

डॉली ने उसी बोर्ड के पास सड़क पर ही कार रोक दी और सवालियों निगाहों से राज की ओर देखा।

बोर्ड के बगल से एक कच्चा रास्ता अंदर जंगल की ओर जा रहा था

, जो उस सड़क की तरह ही दोनों ओर से घने विशाल पेड़ों से घिरा हुआ था।

''तुम्हें क्या लगता है

"-डॉली बोली-

''यही वो रास्ता है

?"

''होना तो यही चाहिए।

"-राज सोचपूर्ण भाव से बोला-

''जैसा बताया गया था

, उस हिसाब से तो यही रास्ता है।

"

''तो चलें

?"

''इतनी दूर यहां इस बोर्ड को देखने तो नहीं आए हैं।

"

''एक बार फिर सोच लो

"-डॉली बोली-

''ये सब मुझे काफी अजीब लग रहा है।

"

''अजीब तो है

"-राज ने स्वीकार किया-

''लेकिन जिस लाइन में मैं हूं

, उसमें जो अजीब न देखने को मिल जाये...

"

उसकी बात अधूरी ही रह गई।

एक ट्रक तेजरफ्तार में उनकी कार के एकदम बगल से गुजरा।

ट्रक बेहद हल्के से कार के बगल के हिस्से को छूते हुए गुजरा

, जिससे जोर की आवाज गूंजी और कार बुरी तरह हिल गई। कार के ट्रक से रगडऩे वाली साइड के शीशे टूट कर अंदर की ओर नीचे गिर गए। कांच के कुछ टुकड़े डॉली की गोद में आकर गिरे। दूसरी ओर के शीशों में भी दरार पड़ गई। कार ढुलकते हुए आगे बढ़ी और सीधी सड़क किनारे लगे बोर्ड से जा टकराई

, जिससे बोर्ड उखड़कर सड़क किनारे ही ढेर हो गया।

''ओ माई गॉड!

"-डॉली के मुंह से चीख निकल गई। उस आकस्मिक घटना से राज भी हैरान रह गया। वे दोनों उस रास्ते में और उस पर आगे बढऩे के डिसीजन को लेकर सोच-विचार करने में इतने खो गये थे कि उन्हें पता भी नहीं चला कि वो ट्रक कब उनके पास तक पहुंच गया था।

क्या वो ट्रक वाला अंधा होकर गाड़ी चला रहा था

?
 
राज कार से बाहर निकला और उसने ट्रक के जाने की दिशा में देखा। ट्रक काफी दूर निकल चुका था। ट्रक की स्पीड सचमुच बहुत ज्यादा थी।

अंदर डॉली ने कार का अपनी ओर वाला दरवाजा खोलने की कोशिश की लेकिन वो एक्सीडेंट के कारण पिचक कर फंस गया था। थोड़ी देर कोशिश करने के बाद डॉली हार मानकर खिसककर दूसरी ओर वाले दरवाजे से ही बाहर निकली।

उसने हतप्रभ से खड़े राज के चेहरे के आगे अपनी हथेली लहराई।

''हैलो!

"-वो बोली-

''चला गया है वो! अब पीछे से इस तरह से घूरते रहने से बिजली नहीं गिर जाएगी उस पर।

"

''मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा है।

"-राज होंठों ही होंठों में बुदबुदाया।

''हां

"-डॉली नाराजगी भरे स्वर में बोली-

''मुझे भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा है कि हम अभी भी जिंदा है। एक फुल साइज के ट्रक द्वारा हमें रौंद दिए जाने की कोशिश किए जाने के बाद भी। पता नहीं किस चीज की जल्दी थी ट्रक वाले को। मुझे तो यही समझ नहीं आया कि ट्रक चला रहा था कि ट्रक उड़ा रहा था।

"

''तुमने एक बात नोट की

"-राज बोला-

''उतनी देर से हमेंं इस पूरे रास्ते पर एक साइकिल भी नहीं दिखाई दी। और अभी मुश्किल से एक मिनट के लिए तुमने कार यहां रोकी तो ये ट्रक एकदम से हमारे सिर पर पहुंच गया।

"

उसकी बात सुनकर डॉली भी सोचने के लिए मजबूर हो गई लेकिन फिर उसने सिर को झटका देते हुए कहा-

''जिंदा बच गए वही बहुत बड़ी बात है। मुझे तो लगता है ये हमारे लिए संकेत है कि अभी भी समय है। हमें वापस लौट जाना चाहिए।

"

''पहले तो ये बोर्ड खड़ा करना है।

"

''क्यों

? इस बोर्ड में क्या है

?"

''अरे। इसी पर तो लिखा है कि इधर न जाएं। अगर हमने इसे इस तरह गिरा छोड़ दिया तो हो सकता है कोई अनजाने में इस ओर चला जाए...।

"

डॉली को हंसी आ गई।

''इसमें हंसने की क्या बात है

?"

''हंसने की बात नहीं तो और क्या है

? तुम्हें क्या लगता है इस जंगल में कोई इस सड़क पर जा रहा होगा और सीधे रास्ते पर जाना छोड़कर जंगल में गाड़ी घुसा देगा

?"

''फिर भी

"-राज झुककर बोर्ड को उठाने की कोशिश करता हुआ बोला-

''ये बोर्ड जैसा था

, वैसा लगा देना ही ठीक होगा।

"

बोर्ड काफी बढ़ा था। डॉली झुककर दूसरी ओर से बोर्ड को पकड़कर उठाने की कोशिश करने लगी। दोनों ने मिलकर बोर्ड को सीधा खड़ा किया

, फिर उसके लोहे के पायों को उन्हीं गढ्ढों में धंसा कर-जिनसे उखड़कर वो गिरा था-उनमें मिट्टी भरकर बोर्ड को फिर खड़ा कर दिया।

तभी एक कार वहां पहुंची।

''ये लोग भी आ गए।

"-राज डॉली से बोला।

कार जय चला रहा था। राज और डॉली को देख कर उसने कार के अंदर से ही उनकी ओर हाथ हिलाया। फिर उसने कार साइड में रोक दी। उसके साथ प्रीति भी थी। वो और प्रीति दोनों कार से उतरकर उनके पास पहुंचे।

''तो

"-जय उनके पास आकर दोनों हाथ कमर पर रखकर खड़े हो गया-

''बोर्ड लगाया जा रहा है? गुड जॉब! गुड जॉब!

"

''बको मत!

"-राज झुंझलाकर बोला।

''अभी हमारा एक ट्रक से एक्सीडेंट हो गया था।

"-डॉली राज की झुंझलाहट की सफाई देती हुई बोली।

''अरे

?"-जय हैरानी से बोला।

''ट्रक वाला अंधों की तरह चला रहा था। साइड से टक्कर मारते हुए निकला। कार का उस ओर का तो दरवाजा ही फंस गया है।

"

''हे भगवान!

"-प्रीति कार के दूसरी ओर जाकर ट्रक से रगड़ खाए हिस्से का जायजा लेती हुई बोली-""ये तो सचमुच बहुत खराब लग रहा है।

"

''सस्ते में छूट गए

"-राज बोर्ड लगा कर हाथ झाड़ते हुए बोर्ड के पास से हटते हुए बोला-

''थोड़ा-सा इधर-उधर और हो जाता तो उस साले ट्रक वाले ने तो पूरी कार ही उड़ा देनी थी।

"

''मुझे हैरानी है।

"-जय बोला-

''हम लोगों को तो काफी देर से इस रास्ते पर और कोई गाड़ी दिखाई नहीं दी।

"

''हमें खुद नहीं दिखी।

"-राज बोला-

''वो ट्रक तो जैसे आसमान से टपका था।

"

''एक काम करो

"-प्रीति बोली-

''तुम लोग हमारी कार में हमारे साथ चलो।

"

''थैंक्स!

"-डॉली बोली-

''पर इस कार को ऐसे ही तो नहीं छोड़ सकते न। पहले चैक कर लेते हैं।

"

''ओके।

"

डॉली और राज फिर कार में बैठ गए। कार आराम से स्टार्ट हो गई। जय और प्रीति बाहर खड़े उन्हीं की ओर देख रहे थे। कार स्टार्ट होते ही डॉली ने मुस्कुराकर उनकी ओर

'थम्ब्स अप

' किया

, जिसके जवाब में वे भी मुस्कुराए और अपनी कार मे जा बैठे।

''एक बार फिर सोच लो

"-डॉली बोली-

''मुझे ऐसा लगता है जैसे अब भी हमारे पास मौका है।

"

''किस चीज का मौका

?"-राज हैरानी से बोला-

''हम इतनी दूर क्या वापस लौट जाने के लिए आए हैं

?"

''एक मिनट!

"-डॉली ने गौर से उसके चेहरे को देखा-

''क्या तुम एक लाख डॉलर के चक्कर में...

?"-उसने अपनी बात अधूरी छोड़ दी।

''मेरे लिए बात पैसों की नहीं है।

"-राज बोला-

''जय ने इस जगह की तारीफ ही इतनी कर दी है कि अब उस घर को देखना तो बनता है।

"

''वाह!

"-डॉली प्रशंसात्मक स्वर में बोली-

''तुम तो संत आदमी हो। माया-मोह से कोसों दूर!

"

डॉली के चिढ़ाने वाले अंदाज पर राज मुस्कुरा दिया।

''अच्छा बाबा

, पैसों की भी बात है। मरा जा रहा हूं पैसों के लिये। अब ठीक है

?"

डॉली जोर से हंसी।

''मजाक मत उड़ाओ।

"

''फिर जरूर अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड के साथ कुछ प्यार भरे लम्हें बिताने की चाहत तुम्हें यहां खींच लाई होगी।

"

''बकवास मत करो। प्रीति जय की गर्लफ्रेंड है।

"

''इसका मतलब तुम्हारे दिल में उसके लिए कुछ नहीं है

?"

''मैंने कहा न वो मेरे बेस्ट फ्रेंड की गर्लफ्रेंड है। और मेरी भी बेस्ट फ्रेंड है। और कुछ नहीं।

"

''हां। वो तो मैंने देखा ही था

, जब हम लोग शिमला से लौट रहे थे। तुम अपने बेस्टफ्रेंड की गर्लफ्रेंड से कैसे चिपककर गले मिल रहे थे!

"

''तुम वापस जाना चाहती हो क्या

?"-राज टॉपिक चेंज करने की कोशिश करते हुए बोला।

''मैं तुम्हारा फैसला जानना चाहती हूं।

"

''मुझे यकीन नहीं हो रहा है

, हम इस बारे में बात भी कर रहे हैं। पूरी बातचीत करने के बाद फैसला करने के बाद ही तो हम यहां आये हैं। अगर वापस ही जाना ही था तो हम यहां आते ही क्यों

? वो देखो

, वो दोनों तो आगे चले भी गए।

"

जय और प्रीति की कार कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ गई थी।

''क्योंकि उन दोनों को अभी-अभी एक हैवी ट्रक ने कुचलने की कोशिश नहीं की है।

"-डॉली बोली लेकिन कहने के साथ ही उसने भी अपनी कार उनकी कार के पीछे डाल दी।
 
रास्ता काफी लम्बा

, टेढ़ा-मेढ़ा और घुमावदार था। कहीं-कहीं तो रास्ते के किनारे उगी झाडिय़ों के कारण रास्ता इतना संकरा हो गया था कि उनकी कार दोनों ओर से झाडिय़ों से रगड़ खाते हुए आगे बढ़ी।

अपनी मंजिल पर पहुंचकर उन्होंने कार रोकी।

वो एक मकान था।

पुराना

, दो मंजिला मकान। वो पुराना तो लग रहा था लेकिन उस सुनसान उजाड़ जगह पर होने के बाद भी काफी अच्छी हालत में दिख रहा था। जंगल के बीच में एक छोटे से मैदान जैसी जगह में वो मकान बना हुआ था। हालांकि उसे देखने वाले के दिमाग में-अगर कोई भूला-भटका वहां पहुंच जाए तो-सबसे पहले यही बात आनी थी कि ऐसी वीरान जगह पर आखिर किसी ने मकान क्यों बनाया होगा

?

मकान के सामने काफी खुली जगह थी। उन्होंने अपनी कारें वहीं खड़ी कर दीं। मकान के सामने इतनी खाली जगह थी कि अभी वहां आठ और कारें खड़ी की जा सकती थीं और उसके बाद भी आराम से काफी खाली जगह बच जाती। उस मैदान में ढेर सारी घास-फूंस और छोटे-मोटे

, कहीं-कहीं बड़े भी

, पौधे भी उगे हुए थे

, जिससे वो जंगल का हिस्सा लगता था। जंगल का ऐसा हिस्सा

, जिस पर पेड़ नहीं थे।

वो खाली मैदान जैसी जगह चारों ओर से जंगल से घिरी हुई थी। मकान के बगल से एक रास्ता पीछे की ओर जाता दिख रहा था।

मकान के सामने के हिस्से में थोड़ा साइड से जंगल की ओर सटकर एक लकड़ी का बड़ा-सा पुराना केबिन भी बना हुआ था

, जिसका दरवाजा बंद था।

वे चारों कार से उतरे।

पहली ही नजर में वो किसी भुतहा मकान से कम नहीं लग रहा था।

लेकिन वो कोई साधारण भुतहा मकान नहीं था।

दुनिया के

'टॉप टेन हॉन्टेड प्लेसेज

' में से एक था।

''हमें...

"-प्रीति के स्वर में हिचकिचाहट के भाव आ गए-

''इस मकान में रहना होगा

?"

किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। जय की गम्भीर नजरें भी उसी मकान पर टिकी हुईं थीं।

मकान लम्बे अरसे से रंगाई-पुताई नहंीं होने से बदहाल दिख रहा था। खिड़की के पल्ले शीशे के थे

, जिन पर धूल की मोटी परत जमी हुई थी। मकान की दूसरी मंजिल पर अगल-बगल में दो खिड़कियां थीं

, जिसके नीचे पहली मंजिल पर दरवाजा ऐसा लुक दे रहा था

, जैसे मकान न होकर कोई चेहरा हो। वो खिड़कियां आंखों की जगह हों और दरवाजा मुंह की जगह।

''ये दिन में इतना डरावना दिख रहा है

"-डॉली बोली-

''तो रात के समय तो जरूर इसे देख कर किसी साधारण आदमी का हार्टफेल ही ही हो जाए।

"

प्रीति और जय ने उसकी बात के जवाब में स्वीकृति में सिर हिलाये।

''बाकी लोग कहां हैं

?"-राज बोला।

तभी मकान के पीछे की ओर से अनुराग और मोहिनी आते दिखे।

''लव बर्ड्स।

"-जय बोला।

दोनों उनके पास आ पहुंचे।

''और

?"-अनुराग राज से बोला-

''कैसा रहा सफर

?"

अनुराग उनमें सबसे हट्टा तगड़ा था। उसकी हाइट छ: फीट दो इंच के करीब थी और शरीर भी पहलवानों की तरह हट्टा कट्टा लेकिन फिल्म स्टारों की तरह फिट भी था। वो क्लीन शेव्ड भी रहता था

, जिससे देखने में ही किसी हीरो जैसा ही लगता था।

''ठीक था।

"-राज

बिना रास्ते में हुए एक्सीडेंट का जिक्र किए बोला-

''बस एक सनकी पेट्रोल पंप वाले ने दिमाग खराब किया। तुम लोग यहां कितनी देर से पहुंचे हुए हो

? और किस चीज से आए हो

?"

''कार से।

"-अनुराग बोला-

''पीछे खड़ी की है। हम लोग भी अभी थोड़ी ही देर पहले यहां पहुंचे हैं।

"

''तुमने कहा था

"-डॉली जय से बोली-

''यहां हमें कोई और भी मिलेगा

?"

''एक तो इस मकान का केयरटेकर ही है

"-जय बोला-

''उसके अलावा एक उस कंपनी का आदमी भी है

, जिसके ऑफर पर हम यहां आये हैं। वो हमारे होस्ट की भूमिका निभाएगा।

"

''उसे तो यहां पहले से होना चाहिये था।

"-अनुराग असंतोषपूर्ण स्वर में बोला।

''मैं उस बारे में तुम लोगों को कुछ बताना चाहता हूं।

"-जय सफाई देने वाले अंदाज में बोला।

''क्या

?"-राज बोला। उसकी आवाज में अजीब भाव नोट करके वे सभी सावधान हो गए।

''देखो

"-जय बोला-

''अब हम यहां तक आ ही गए हैं

, यहां तीन दिन बिताने के इरादे से आये हैं और एक लाख डॉलर के ईनाम के लिये आये हैं तो जाहिर है कि हमें कुछ न कुछ चुनौतियों का सामना तो करना ही पड़ेगा...।

"

''कुछ न कुछ

?"-मोहिनी उस मकान को घूरते हुए बोली-

''इस भूत बंगले में तीन दिन दिन बिताना कम चुनौती है क्या

?"

''नहीं। मेन चुनौती तो वही है। लेकिन कंपनी वाले चाहते हैं साथ में कुछ एंटरटेनमेंट भी होता रहे।

"

''एंटरटेनमेंट

?"-अनुराग बोला-

''किस तरह का एंटरटेनमेंट होगा यहां

?"

''उसी तरह का जिस तरह में वे माहिर हैं।

"

''क्या मतलब

?"

''मतलब ये

, भोले बलम

, कि वो ऐसी कंपनी है

, जो हॉरर थीम पर आधारित पार्क

, रेस्टोरेंट वगैरह बनाती है। इसीलिये तो उनका इंट्रेस्ट ऐसी हॉन्टेड मानी जानी वाली जगहों में है...।

"

''मानी जाने वाली

?"-मोहिनी बोली-

''कहीं सचमुच ही न हो ये हॉन्टेड

!"

''...तो जब उन्होंने ईनाम इतना बड़ा रखा है तो जाहिर है कि चैलेंज भी उतना ही बड़ा होगा।

"

''बात को गोल-गोल मत घुमाओ।

"-अनुराग बोला-

''सीधे-सीधे बताओ

, बात क्या है

?"

''बात ये है कि यहां हमें कुछ डराने वाली चीजें दिखेंगीं

, जिन्हें देखकर हमें डरना नहीं है।

"

''क्या

?"

''हां। समझ लो ये उन कंपनी वालों की उस हॉरर थीम के पार्क में सैर करने जैसा ही है। फर्क सिर्फ इतना ही है कि उनके हॉरर पार्क में लोग पैसे खर्च करके भूत देखने जाते हैंं और यहां हमें वो फ्री में भूत दिखाएंगें। बल्कि भूत देखने के पैसे देंगें।

"

अनुराग का मुंह खुला-का-खुला रह गया। उसने राज की ओर देखा। राज भी जय की बात सुनकर गम्भीर हो गया था। उसने अनुराग की ओर

देखा

, फिर जय से बोला-

''किस तरह के भूत दिखाई देंगें हमें यहां पर

?"

''अरे

, यार!

"-जय बोला-

''मैं ये नहीं कह रहा हूं कि यहां हमें भूत ही दिखाई देंगें। मेरे कहने का मतलब है कि हमारे इन तीन दिनों के स्टे को रोचक और यादगार बनाने के लिये उन लोगों ने यहां कुछ सैटअप किये होंगें

, जो डरावने लग सकते हैं। लेकिन हमें डरना नहीं है। हमें याद रखना है कि अगर ऐसा कुछ दिख रहा है तो वो नकली है।

"

''बकवास!

"-अनुराग मुंह बिगाड़कर बोला।

''क्या हुआ

?"-जय बोला।

''मेरे साथ किसी ने भूत-प्रेत बनकर मजाक किया तो मैं उसका टेंटुआ दबा दूंगा। सचमुच का भूत बना दूंगा उसे।

"

''देखो

, ये सब उनकी टर्म्स एंड कंडीशंस में शामिल है

, जो इस चैलेंज में शामिल होने का फॉर्म भरने के साथ ही हमने एक्सेप्ट किया है।

"-जय गम्भीर स्वर में बोला-अब हम पीछे नहीं हट सकते। और हटते हैं-या अब उनकी किसी भी शर्त को मानने से इनकार करते हैं-तो हमारी इतनी दूर आने की मेहनत पर पानी फिर जायेगा।

"

''साफ-साफ बताओ

"-राज अपनी हथेली सामने लहराकर बोला-

''कि वो किस तरह से हमें डराने की कोशिश करेंगें

?"

''मुझे खुद नहीं पता कि वो लोग क्या करेंगें

?"-जय ने कंधे उचका दिए-

''मुझे बस इतना बताया गया है कि हमारे स्वागत के लिये उनका आदमी तैयार रहेगा। अब जाहिर है

, जो कुछ करेगा

, वो उनका आदमी ही करेगा।

"

''उनका आदमी क्या करेगा

?"

''अरे भई मुझे नहीं पता।

"-जय के स्वर में झुंझलाहट के भाव आ गये-

''लेकिन जो भी करेगा

, हमें डराने के लिये ही करेगा। तो ऐसी कोई भी ऊल-जलूल चीज यहां दिखे तो हमें डरना नहीं है। मैं यही तुम लोगों को समझाने की कोशिश कर रहा हूं।

"

''बहुत अच्छी कोशिश कर रहे हो।

"-अनुराग व्यंग भरे स्वर में बोला-

''और अगर हम लोगों के साथ सचमुच कुछ गलत हो जाता है और हम उसे उन कंपनी वालों का ही काम समझ कर मूर्ख बनते रहें

, तब क्या होगा

?"

''राइट!

"-मोहिनी ने अनुराग का समर्थन किया-

''तुमने वो भेडिय़ा आया वाली कहानी नहीं सुनी क्या

?"

''अरे!

"-जय हतप्रभ स्वर में बोला-

''तुम लोग कहना क्या चाह रहे हो

? भाई एक लाख डॉलर-वो भी तीन दिन में-कमाना हंसी-खेल नहीं है। तुम्हें क्या लगा था

, हलवा होगा

?"

''मुझे तो ये अब पहले से ज्यादा खतरनाक लग रहा है।
 
"-मोहिनी बोली।

''खतरनाक-वतरनाक मैं नहीं जानता।

"-अनुराग का स्वर सख्त हो गया-

''मैं अपनी बात पर कायम हूं। मुझे यहां तीन दिन

, तीन रातें बिताने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन तुम्हारे वो कम्पनी वाले हमें डराने के लिये कोई होकस-पोकस करने वाले हैं तो वो हमें डराने से पहले अपनी चिंता खुद करें। अगर उनके आदमी हम लोगों के साथ कोई स्टंट करने की कोशिश करेंगें तो फिर अपनी हड्डी-पसली टूटने के जिम्मेदार भी वही होंगें।

"

''नहीं।

"-जय बोला-

''ये भी बात है। हमें उनके आदमी के साथ को ऑपरेट करने के लिये कहा गया है।

"

''आदमी

?"

''हां। जो यहां हमारा होस्ट बनेगा।

"

''कौन है वो आदमी

?"

''मैं उसका नाम वगैरह नहीं जानता। असल में मैं उसके बारे में कुछ भी नहीं जानता। मुझे सिर्फ इतना बताया गया है कि वो हमें यहीं पर मिलेगा। आगे जो भी होगा

, उसके बताए अनुसार होगा। हमें यहां कैसे रहना है

, किन-किन रूल्स को फॉलो करना है

, ये सब भी वही बतायेगा।

"

''रूल्स को भी फॉलो करना है

?"

''और नहीं तो क्या

? भाई

, समझ लो तीन दिन के लिए हम यहां एक रियलिटी शो में हिस्सा ले रहे हैं।

"

अनुराग ने पलटकर उस घर की ओर देखा और थोड़ी देर तक देखता रहा।

''और वो ट्रक

?"-यकायक राज बोला।

''क्या

?"-जय चौंका।

''वो जो अचानक जैसे हवा से प्रगट हो गया था। जिसने हमारी कार को टक्कर मारी थी।

"

''तो उसका क्या

?"-जय अचकचा गया।

''तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ था

?"-अनुराग हैरानी से बोला

, फिर उसने थोड़ी दूर पर खड़ी राज की कार पर नजर मारी। कार के एक हिस्से पर लगे रगड़ के निशान देख कर उसकी आंखें फैल गईं।

''हां।

"-राज ने अनुराग को जवाब दिया

, फिर जय से बोला-

''क्या वो भी उन कंपनी वालों का ही काम हो सकता है

?"

''क्या मतलब

?"-जय हैरानी से बोला।

''तुम्हीं तो कह रहे हो कि वो लोग हमें डराने की कोशिश करेंगें।

"

''कम ऑन

, यार

, वो एक्सीडेंट तो रियल ही होगा। वो लोग हमें यहां डराने की कोशिश करेंगें लेकिन किसी ऐसे तरीके से नहीं

, जिससे हमें नुकसान पहुंचे। हमारी जान नहीं लेने वाले वो लोग। वो लोग कोई खूनी दरिंदे नहीं है

, फनहाउस चलाने वाले हैं।

"

राज चेहरे पर शांत भाव लिए उसे देखता रहा।

जय ने डॉली की ओर देखा।

''क्या तुम्हें भी लगता है

"-फिर वो डॉली से बोला-

''कि वो एक्सीडेंट भी इन कंपनी वालों ने ही किया होगा

?"

डॉली ने जवाब देने के लिए मुंह खोला ही था कि तभी एक कार की आवाज ने उनका ध्यान खींच लिया।

सबकी नजरें उस रास्ते की ओर उठ गईं

, जिस रास्ते से वे लोग खुद वहां आए थे। एक कार धूल उड़ाते हुए उसी ओर आ रही थी।

''अब ये कौन है

?"-मोहिनी बोली।

जय ने कार को ड्राइव कर रहे शख्स को पहचाना

, फिर बोला-

''ये यहां का केयरटेकर है।

"

केयरटेकर का नाम सुरेश डोंगरा था। वो एक करीब

50 वर्षीय आदमी था

, जिसके सारे बाल डाई की कृपा से एकदम शाइनी ब्लैक थे। डाई की बदौलत अपने बालों की सफेदी तो उसने छुपा ली थी लेकिन अपने मोटापे को छुपाने का उसके पास कोई साधन नहीं था।

उसके साथ एक बला की खूबसूरत युवती भी थी।

जैसे ही वे दोनों कार से उतरेे

, डोंगरा के साथ आई युवती पर नजर पड़ते ही मोहिनी का हाथ अपने मुंह पर चला गया।

''ओ माई गॉड!

"-उसके मुंह से निकला।

''क्या हुआ

?"-डॉली ने चौंक कर उसकी ओर देखा।

मोहिनी ने उसकी बात का जवाब नहीं दिया। वो बस मुंह पर हाथ रखे हुए डोंगरा के साथ आई उस युवती को देखती रही।

''ये केयरटेकर है यहां का

?"-अनुराग डोंगरा की ओर देखते हुए बोला।

''हां।

"-जय बोला।

''अपनी बेटी के साथ आया है!

"-अनुराग उसके साथ आई खूबसूरत युवती पर नजर डालते हुए संतुष्टिपूर्ण स्वर में बोला।

''बोल भी मत देना उसके सामने वैसा। मंगेतर है उसकी।

"

''तौबा तौबा! सारा मूड खराब कर दिया।

"

''हूर के साथ लंगूर!

"-जय बोला।

''लंगूर के हाथ में अंगूर!

"-अनुराग ने भी उसके सुर में सुर मिलाया।

तब तक डोंगरा और वो युवती दोनों ही उनके पास पहुंच चुके थे। जय ने तुरंत चेहरे पर गम्भीरता की परत ओढ़ ली और बड़ी गर्मजोशी से डोंगरा से हाथ मिलाया। फिर उसने बाकी सब लोगों से डोंगरा का परिचय भी करवाया।

''ये मेरी मंगेतर है।

"-डोंगरा अपने साथ आई युवती का परिचय उनसे कराते हुए बोला-

''रिंकी। आप लोगों के तीन दिन के स्टे के दौरान हम दोनों भी आपके साथ यहीं रहेंगें।

"

''मोर

"-अनुराग बड़े दार्शनिक अंदाज में बोला-

''द मैरियर।

"

''क्या

?"-डोंगरा की भंवें उठीं।

''मैंने कहा

, जितने ज्यादा हों उतना अच्छा।

"

''ओह!

"

मोहिनी ने अपने मुंह पर से हाथ हटा लिया था लेकिन वो रिंकी के चेहरे से अब भी नजरें नहीं हटा पा रहीं थीं। रिंकी की नजरें कुछ देर के लिए मोहिनी के चेहरे पर ठिठकीं

, फिर वो बाकियों की ओर देखने लगी।

''आप अपनी मंगेतर को ऐसी जगह ले आये

?"-प्रीति बोली।

''क्या मतलब

?"-डोंगरा ने उसकी ओर देखा।

''मतलब ये कोई पिकनिक स्पॉट थोड़े ही है।

"

डोंगरा ने प्रीति की ओर देखा

, फिर बोला-

''हमारे लिये तो पिकनिक ही है। और मेरे ख्याल से आपके लिये भी।

"

''दैट्स माई बॉय!

"-अनुराग प्रशंसात्मक स्वर में बोला।

डोंगरा ने अनुराग की ओर देखा
 
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