S
StoryPublisher
Guest
जब कई दिनों तक निरन्तर सोचने के बाद समीर राय किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका तो अंततः उसने हिना से बातर करने का फैसला किया रात को खाने के बाद वह हिना को बंगले के पिछवाड़े लॉन में ले गया। वे दोनों टहलने लगे।
हिना समझ गई कि अब्बू कुछ बात करने की तैयारी में हैं। सो, उसने कोई सवाल न किया व खामोशी से उनके साथ टहलने लगी।
"बेटा, तू यह जानती है कि कुछ दिन पहले तुम्हारी सहेली हेमा का भाई गौतम अपने मामू के साथ मुझसे मिलने आया था.।" समीर राय टहलते-टहलते ही एकाएक बोला।
“जी, अब्बू...।" हिना धीरे से बोली-"मैं जानती हूं...।''
"हिना, मैं नहीं जानता कि उनकी आमद की वजह की तुझे खबर है या नहीं, हो सकता है तुम जानती हो...हो सकता है तुम न जानती हो। मैं बताता हूं कि वे क्यों आए थे। वैसे यह कितनी अजीब बात है कि इस रिश्ते के आने से पहले ही मैं गौतम को तुम्हारे लिये चुन चुका था। मैं सोच रहा था कि इस बारे में तुमसे बात करके तुम्हारा फैसला भी सुन लूं और फिर बात आगे बढ़ाऊं। यह तुम जानती हो कि तुम्हारी अपनी पसन्द के बाद ही मैं कोई रिश्ता फाइनल करूंगा। जब यह रिश्ता आया तो मैं बहुत खुश हुआ। खासतौर पर यह हकीकत जान कर तो बहुत ही खुशी हुई कि अपने हिन्दू मामा के साथ रह रहा गौतम हकीकत में एक मुस्लिम परिवार से है और उसका असली नाम सुहेल है। मैं इसलिए भी खुश था कि जो बात मेरे जहन में थी, वह उधर भी अपना रंग दिखा रही थी। लेकिन शायद यह रिश्ता तुम्हारी किस्मत में नहीं...।" समीर राय ने गहरा सांस लिया।
"क्यों अब्बू..?" हिना ने बेअख्तयार और चिन्तित स्वर में पूछा था।
“गौतम या सुहेल के मामू ने उसकी फैमिली बैकग्राउण्ड के बारे में जो कुछ बताया, वह मैं बस एक हद तक ही सुन सका, मैं उसके हालात सुनते ही सकते में आ गया... ।'
"ऐसा क्या कह दिया उन्होंने.?"
"हिना...गौतम का दादा तुम्हारी मां का कातिल है...।'' समीर राय ने रहस्योद्घाटन किया।
"ओह...।'' हिना के जज्बात पर एकदम ओस पड़ गई-"लेकिन...लेकिन अब्बू इन लोगों ने इस कत्ल का इल्जाम अपने सिर किस तरह लिया ? ऐसा तो कोई नहीं करता...।" उसने पूछा ।
"उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं की। उन्होंने इल्जाम लगाया तो तुम्हारे दादा के सिर...जिससे चलती दुश्मनी के खौफ से ही सुहेल और हेमा अपने मामू के पास यहां आकर और हिन्दू नाम अपनाकर रहने को मजबूर हुये थे। उन्हें नहीं मालूम था कि जिस रोशन राय का वे जिक्र कर रहे हैं...वह मेरा बाप था। अगर उन्हें यह मालूम होता तो शायद वो यह रिश्ता लेकर आने की हिम्मत ही न करते। खैर, उन्होंने चर्चा की कि गौतम के मां-बाप को रोशनगढ़ी के रोशन राय ने कत्ल करवाया. और...और बेटा, यह बात बिल्कुल सही है।''
"क..क्या..?" हिना बाप की सूरत देखने लगी।
"हां, बेटा...।" बाप का सिर झुक गया था।
"लेकिन...अभी तो आप कह रहे थे कि मेरी मां को गौतम के दादा ने कत्ल करवाया ?"
"यह बात भी बिल्कुल सही है...।" समीर राय ने भारी दिल से बताया।
"पर अब्बू इससे पहले तो आप मेरी मां के बारे में एक दूसरी ही कहानी सुना चुके हैं...।" हिना उलझन का शिकार थी।
यही ना कि तुम्हारे दादा ने तुम्हें और तुम्हारी मां को रेगिस्तान में छुड़वा दिया था..ताकि तुम दोनों मर जाओ...
''हां, अब्बू... । हिना बोली । यह बात भी सही है। तुम्हारे दादा और मेरे बाप ने ही तुम मां-बेटी की कत्ल की साजिश की थी...।''
"फिर..फिर गौतम का दादा बीच में कहां से आ गया। मेरी मां का कत्ल उसने किस तरह करवाया.?''
"बेटा ! बहुत-सी बातें मैंने तुमको बता दी थी, कुछ गैर जरूरी किस्से मैंने तुम्हें नहीं सुनाये हैं। तुम्हारे दादा दरअसल क्या थे, यह बात मैंने खुलकर तुम्हें नहीं बताई है। फिलहाल, हालात को समझने के लिए बस इतना ही समझ लो कि तुम्हारे दादा एक इन्तहाई संगदिल व हिसंक प्रवृत्ति के शख्स थे। अपनी आन के लिए अगर उन्हें मेरे कत्ल की भी जरूरत पड़ती तो यकीन करो वह कर गुजरते...।'' समीर राय कुछ क्षणों के लिए चुप ही रहा और फिर उसने थोड़ा और डिटेल में जाते हुये । बताया-"गौतम के दादा राजा सलीम और तुम्हारे दादा रोशन राय, एक जमाने में बहुत अच्छे दोस्त थे। फिर एक घोडी की वजह से उन दोनों के बीच मतभेद उभरे और फिर कुछ ही समय में वे एक दूसरे की जान के दुश्मन बन गये। संक्षेप में यह जान लो कि दुश्मनी मोल लेने में तुम्हारे दादा ने पहल की। राजा सलीम की उस घोड़ी को मरवाया...फिर राजा सलीम की बहू यानी इस गौतम या सुहेल की मां को कत्ल करवाया... | जवाब में राजा सलीम ने तुम्हारी मां को कत्ल करवा दिया...जो ऊंट पर भटकती हुई कंगनपुर पहुंच गई थी। इसके इंतकाम में तुम्हारे दादा ने गौतम के बाप राजा सलीम को कत्ल करवा दिया। फिर राजा सलीम मेरी जान का दुश्मन हो गया। मुझ पर कातिलाना हमले हुए। जब उसके बन्दे मेरा कत्ल करने में नाकाम हुए तो राजा सलीम खुद मेरे कत्ल के लिए निकला। उसने बड़ी प्लानिंग से मेरे कत्ल का मंसूबा बनाया, लेकिन अल्लाह को कुछ और ही मंजूर था। वो मुझे कत्ल करने की बजाय..गलती से खुद ही अपने मुलाजिम के हाथों मारा गया, तब जाकर यह सिलसिला रुका... | तुम्हारे दादा ने जो यातनापूर्ण और हौलनाक मौत पाई, उसके बारे में मैं तुम्हे पूरी डिटेल के साथ बता चुका हूं।" समीर राय ने बड़े दुख के साथ यह सब सुनाया
था।
"अब्बू... । यह इंसान इस कद्र सफाक (संगदिल निमर्म) किस तरह बन जाता है...।" हिना भर्राई आवाज के साथ बोली-"अगर दौलत, जायदाद और जमीन ही इन्सान को शैतान बना देती है अब्बू..तो फिर आप ऐसे क्यों नहीं हैं... । आप भी तो अपने इलाके के हाकिम और जागीरदार हैं...।''
"हिना बेटा...! दौलत का नशा..सबसे बड़ा और खतरनाक नशा है। इस नशे में डूबकर इन्सान घमण्ड व गरूर में डूब जाता है। खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर आदमी समझने लगता है और जब किसी को ताकत का नशा हो जाए तो फिर यह नशा कभी नहीं उतरता। बस, उसकी मौत ही इस नशे को उतारती है।" समीर राय ने उसे दुखी लहजे में ही समझाया था।
"खैर अब्बू.. | इस बात को छोड़ें...।" हिना ने फौरन ही खुद को संभाल लिया था। वह भावहीन व संजीदा लहजे में बोली थी-"अब आगे की बात करें..आपने क्या सोचा.?'
हिना समझ गई कि अब्बू कुछ बात करने की तैयारी में हैं। सो, उसने कोई सवाल न किया व खामोशी से उनके साथ टहलने लगी।
"बेटा, तू यह जानती है कि कुछ दिन पहले तुम्हारी सहेली हेमा का भाई गौतम अपने मामू के साथ मुझसे मिलने आया था.।" समीर राय टहलते-टहलते ही एकाएक बोला।
“जी, अब्बू...।" हिना धीरे से बोली-"मैं जानती हूं...।''
"हिना, मैं नहीं जानता कि उनकी आमद की वजह की तुझे खबर है या नहीं, हो सकता है तुम जानती हो...हो सकता है तुम न जानती हो। मैं बताता हूं कि वे क्यों आए थे। वैसे यह कितनी अजीब बात है कि इस रिश्ते के आने से पहले ही मैं गौतम को तुम्हारे लिये चुन चुका था। मैं सोच रहा था कि इस बारे में तुमसे बात करके तुम्हारा फैसला भी सुन लूं और फिर बात आगे बढ़ाऊं। यह तुम जानती हो कि तुम्हारी अपनी पसन्द के बाद ही मैं कोई रिश्ता फाइनल करूंगा। जब यह रिश्ता आया तो मैं बहुत खुश हुआ। खासतौर पर यह हकीकत जान कर तो बहुत ही खुशी हुई कि अपने हिन्दू मामा के साथ रह रहा गौतम हकीकत में एक मुस्लिम परिवार से है और उसका असली नाम सुहेल है। मैं इसलिए भी खुश था कि जो बात मेरे जहन में थी, वह उधर भी अपना रंग दिखा रही थी। लेकिन शायद यह रिश्ता तुम्हारी किस्मत में नहीं...।" समीर राय ने गहरा सांस लिया।
"क्यों अब्बू..?" हिना ने बेअख्तयार और चिन्तित स्वर में पूछा था।
“गौतम या सुहेल के मामू ने उसकी फैमिली बैकग्राउण्ड के बारे में जो कुछ बताया, वह मैं बस एक हद तक ही सुन सका, मैं उसके हालात सुनते ही सकते में आ गया... ।'
"ऐसा क्या कह दिया उन्होंने.?"
"हिना...गौतम का दादा तुम्हारी मां का कातिल है...।'' समीर राय ने रहस्योद्घाटन किया।
"ओह...।'' हिना के जज्बात पर एकदम ओस पड़ गई-"लेकिन...लेकिन अब्बू इन लोगों ने इस कत्ल का इल्जाम अपने सिर किस तरह लिया ? ऐसा तो कोई नहीं करता...।" उसने पूछा ।
"उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं की। उन्होंने इल्जाम लगाया तो तुम्हारे दादा के सिर...जिससे चलती दुश्मनी के खौफ से ही सुहेल और हेमा अपने मामू के पास यहां आकर और हिन्दू नाम अपनाकर रहने को मजबूर हुये थे। उन्हें नहीं मालूम था कि जिस रोशन राय का वे जिक्र कर रहे हैं...वह मेरा बाप था। अगर उन्हें यह मालूम होता तो शायद वो यह रिश्ता लेकर आने की हिम्मत ही न करते। खैर, उन्होंने चर्चा की कि गौतम के मां-बाप को रोशनगढ़ी के रोशन राय ने कत्ल करवाया. और...और बेटा, यह बात बिल्कुल सही है।''
"क..क्या..?" हिना बाप की सूरत देखने लगी।
"हां, बेटा...।" बाप का सिर झुक गया था।
"लेकिन...अभी तो आप कह रहे थे कि मेरी मां को गौतम के दादा ने कत्ल करवाया ?"
"यह बात भी बिल्कुल सही है...।" समीर राय ने भारी दिल से बताया।
"पर अब्बू इससे पहले तो आप मेरी मां के बारे में एक दूसरी ही कहानी सुना चुके हैं...।" हिना उलझन का शिकार थी।
यही ना कि तुम्हारे दादा ने तुम्हें और तुम्हारी मां को रेगिस्तान में छुड़वा दिया था..ताकि तुम दोनों मर जाओ...
''हां, अब्बू... । हिना बोली । यह बात भी सही है। तुम्हारे दादा और मेरे बाप ने ही तुम मां-बेटी की कत्ल की साजिश की थी...।''
"फिर..फिर गौतम का दादा बीच में कहां से आ गया। मेरी मां का कत्ल उसने किस तरह करवाया.?''
"बेटा ! बहुत-सी बातें मैंने तुमको बता दी थी, कुछ गैर जरूरी किस्से मैंने तुम्हें नहीं सुनाये हैं। तुम्हारे दादा दरअसल क्या थे, यह बात मैंने खुलकर तुम्हें नहीं बताई है। फिलहाल, हालात को समझने के लिए बस इतना ही समझ लो कि तुम्हारे दादा एक इन्तहाई संगदिल व हिसंक प्रवृत्ति के शख्स थे। अपनी आन के लिए अगर उन्हें मेरे कत्ल की भी जरूरत पड़ती तो यकीन करो वह कर गुजरते...।'' समीर राय कुछ क्षणों के लिए चुप ही रहा और फिर उसने थोड़ा और डिटेल में जाते हुये । बताया-"गौतम के दादा राजा सलीम और तुम्हारे दादा रोशन राय, एक जमाने में बहुत अच्छे दोस्त थे। फिर एक घोडी की वजह से उन दोनों के बीच मतभेद उभरे और फिर कुछ ही समय में वे एक दूसरे की जान के दुश्मन बन गये। संक्षेप में यह जान लो कि दुश्मनी मोल लेने में तुम्हारे दादा ने पहल की। राजा सलीम की उस घोड़ी को मरवाया...फिर राजा सलीम की बहू यानी इस गौतम या सुहेल की मां को कत्ल करवाया... | जवाब में राजा सलीम ने तुम्हारी मां को कत्ल करवा दिया...जो ऊंट पर भटकती हुई कंगनपुर पहुंच गई थी। इसके इंतकाम में तुम्हारे दादा ने गौतम के बाप राजा सलीम को कत्ल करवा दिया। फिर राजा सलीम मेरी जान का दुश्मन हो गया। मुझ पर कातिलाना हमले हुए। जब उसके बन्दे मेरा कत्ल करने में नाकाम हुए तो राजा सलीम खुद मेरे कत्ल के लिए निकला। उसने बड़ी प्लानिंग से मेरे कत्ल का मंसूबा बनाया, लेकिन अल्लाह को कुछ और ही मंजूर था। वो मुझे कत्ल करने की बजाय..गलती से खुद ही अपने मुलाजिम के हाथों मारा गया, तब जाकर यह सिलसिला रुका... | तुम्हारे दादा ने जो यातनापूर्ण और हौलनाक मौत पाई, उसके बारे में मैं तुम्हे पूरी डिटेल के साथ बता चुका हूं।" समीर राय ने बड़े दुख के साथ यह सब सुनाया
था।
"अब्बू... । यह इंसान इस कद्र सफाक (संगदिल निमर्म) किस तरह बन जाता है...।" हिना भर्राई आवाज के साथ बोली-"अगर दौलत, जायदाद और जमीन ही इन्सान को शैतान बना देती है अब्बू..तो फिर आप ऐसे क्यों नहीं हैं... । आप भी तो अपने इलाके के हाकिम और जागीरदार हैं...।''
"हिना बेटा...! दौलत का नशा..सबसे बड़ा और खतरनाक नशा है। इस नशे में डूबकर इन्सान घमण्ड व गरूर में डूब जाता है। खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर आदमी समझने लगता है और जब किसी को ताकत का नशा हो जाए तो फिर यह नशा कभी नहीं उतरता। बस, उसकी मौत ही इस नशे को उतारती है।" समीर राय ने उसे दुखी लहजे में ही समझाया था।
"खैर अब्बू.. | इस बात को छोड़ें...।" हिना ने फौरन ही खुद को संभाल लिया था। वह भावहीन व संजीदा लहजे में बोली थी-"अब आगे की बात करें..आपने क्या सोचा.?'