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Incest अनैतिक संबंध

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भाभी ने अपना पेटीकोट और ऊपर चढ़ा दिया और उनकी माँसल जाँघ मुझे दिखने लगी. ये देखते ही मुझे झटका लगा और मैंने तुरंत दूसरी तरफ करवट आकर ली और ये देखकर भाभी खिलखिलाकर हँस पडी. रात खाने के बाद मैं छत पर थोड़ा टहल रहा था की तभी आशु का फ़ोन आ गया और मैं उससे बात करने लगा. बात करते-करते रात के ११ बज गए, मैंने आशु को बाय कहा और फ़ोन पर एक लम्बी सी किस दी और फ़ोन रखा. मौसम अच्छा था. ठंडी-ठंडी हवाएँ जिस्म को छू रही थी और मजा बहुत आ रहा था. मैंने सोचा की आज यहीं सो जाता हूँ, पास ही एक चारपाई खड़ी थी तो मैं ने वही बिछाई और मैं दोनों हाथ अपने सर के नीचे रख सो गया.रात के एक बजे मेरे कान में भाभी की मादक आवाज पड़ी; "देवर जी!!!" ये सुनते ही मैं चौंक कर उठ गया और सामने देखा तो भाभी दिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने खड़ी हे. पूनम के चाँद की रौशनी में उनका पूरा बदन जगमगा रहा था. मांसल कमर और उनके कसे हूये स्तन मेरे ऊपर कहर ढा रहे थे! मेरी नजरें अपने आप ही उनकी ऊपर-नीचे होती वक्षो पर गड़ी हुई थी. भाभी जानती थी की मैं कहाँ देख रहा हूँ इसलिए वो और जोर से सांसें लेने लगी. दिमाग में फिर से झटका लगा और मैं ने उनकी मन्त्र-मुग्ध करती वक्षो से अपनी नजरें फेर ली. "यहाँ क्या कर रहे हो देवर जी?" भाभी ने फिर से उसी मादक आवाज में कहा.

"वो मौसम अच्छा था इसलिए ...." मैंने उनसे मुँह फेरे हुए ही कहा. "हाय!!!...सच कहा देवर जी! सससस...ठंडी-ठंडी हवा तो मेरे बदन पर जादू कर रही हे. मैं भी यहीं सो जाऊँ?" भाभी की सिसकी सुन मैं उठ खड़ा हुआ और नीचे जाने लगा. "आप चले जाओगे तो मैं कहाँ सोऊँगी?" भाभी बोलती रही पर मैं रुका नहीं और अपने कमरे में आ कर दरवाजा बंद कर के लेट गया.भाभी का मुझे रिझाने का काम पूरे पांच दिन और चला और इन्हीं दिनों मैं इतना तंदुरुस्त हो गया की अपना ख्याल रख सकूँ! घर के असली दूध-दही-घी की ताक़त से जिस्म में जान आ गई थी. अब मुझे वहाँ से जल्दी से जल्दी निकलना था वरना भाभी मेरे लिंग पर चढ़ ही जाती!

एक हफ्ते बाद में वापस शहर पहुँचा तो मेरा प्यार मुझे लेने के लिए बस स्टैंड आया था. आशु मुझे देखते ही मेरे गले लग गई और उसकी पकड़ देखते ही देखते कसने लगी. "जानू! पूरे दस दिन आप मुझसे दूर रहे हो! आगे से कभी बीमार पड़े ना तो देख लेना! मैं भी आपके ही बगल में लेट जाऊँगी!" ये सुन कर मैं हँस पड़ा. हम घर पहुँचे और आशु के हाथ का खाना खा कर मन प्रसन्न हो गया.मैंने जान कर आशु को भाभी द्वारा की गई हरकतों के बारे में कुछ नहीं बताया वरना फिर वही काण्ड होता! इन पंद्रह दिनों में मैं बहुत कमजोर हो गया था इसीलिए उस दिन आशु ने मेरे ज्यादा करीब आने की कोशिश नहीं की. अगले दिन मैंने ऑफिस ज्वाइन किया तो मेरी कमजोरी नितु मैडम से छुपी नहीं और वो कहने लगी की मुझे कुछ और दिन आराम करना चाहिए.अब तो राखी ने भी ज्वाइन कर लिया था और भी मैडम की बात को ही दोहराने लगी. सिर्फ एक मेरा बॉस था जो मन ही मन गालियाँ दे रहा था.

उस दिन मैं शाम को आशु से मिल नहीं पाया क्योंकि काम बहुत ज्यादा था और राखी मैडम से बैलेंस शीट फाइनल नहीं हो रही थी तो मुझे उसकी मदद करनी पडी. शाम को देर हो गई थी इसलिए मैंने ही उसे घर ड्राप किया था. अगले दिन मुझे आशु का फ़ोन आया तो वो बहुत घबराई हुई थी!

मैं: क्या हुआ? तू घबराई हुई क्यों है?

आशु: आई…. आई…. आई थिंक आई एम प्रेग्नंट!!!

मैं: क्या???!!!! ह….हाऊ…. दिस … हॅपेंड?!

आशु: आई मिस …..माई पिरियड!

ये सुन कर दोनों खामोश हो गए, मेरा दिमाग तो जैसे सुन्न हो चूका था.

आशु: जानू! हेल्लो???? जानू????

आशु की आवाज सुन कर मैं अपनी सोच से बाहर निकला;

मैं: मैं आ रहा हूँ तेरे कॉलेज, मुझे लाल बत्ती पर मिल.

इतना कह कर मैं ऑफिस से भागा.मैडम ने मुझे भागते हुए देखा तो तुरंत मुझे कॉल कर दिया. मैं अभी बाइक के पास ही पहुँचा था. मैंने उन्हें झूठ बोल दिया की परिवार के किसी लड़के को हॉस्पिटल लाये हे. मैं बाइक भगाता हुआ कॉलेज पहुँचा और आशु वहीँ इंतजार कर रही थी. मैं उसे ले कर शहर के दवाखाने नहीं जा सकता था वरना कल को कोई काण्ड अवश्य होता. इसलिए मैं उसे ले कर बाराबंकी आ गया.दो घंटे के रास्ते में हमारी कोई भी बात नहीं हुई, आशु मेरे जिस्म से चिपकी बस सुबक रही थी. उसकी आँख के आँसू मेरी कमीज पीछे से भीगा रहे थे. शहर में घुसते ही पहले मैंने आशु को एक मंगलसूत्र खरीद कर दिया और साथ ही मैं सिंदूर की एक डिब्बी.आशु हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी;

आशु: हम शादी कर रहे हैं? (उसने खुश होते हुए कहा.)

मैं: नहीं! ये सिन्दूर लगा ले और मंगलसूत्र पहन ले अगर डॉक्टर पूछे तो कहना की हमारी शादी को ५ महीने ही हुए हे.

ये सुन कर आशु मायूस हो गई. पर मेरा ध्यान अभी सिर्फ इस बात को जानने में था की क्या वो प्रेग्नेंट है? दिमाग तैयारी करने लगा था की अगर वो प्रेग्नेंट है तो मुझे उसके साथ जल्द से जल्द भागना होगा! एक महंगे से हॉस्पिटल के बाहर मैंने बाइक रोकी और फिर हम दोनों अंदर पहुंचे. कार्ड बनवा कर हम भितर गए.डिटेल में मैंने अपना नंबर डाला और आशु का नाम बदल कर प्रिया कर दिया. कुछ देर इंतजार करने के बाद हम डॉक्टर के केबिन में घुसे और डॉक्टर ने हम दोनों का नाम पूछा तो मैंने उन्हें अपना नाम रितेश बताया.ये सुन कर आशु थोड़ा हैरान हुई क्योंकि मैं आशु को नकली नाम बताना भूल गया था. मैंने आशु का हाथ दबा कर उसे समझा दिया.

डॉक्टर: तो बताइये मिस्टर शुभम क्या समस्या है?

मैं: जी मॅडम ... मुझे लगता है की प्रिया प्रेग्नेंट है... और अभी हम दोनों ही जॉब कर रहे हैं तो.... आई होप यू कॅन अंडर स्टँड!

डॉक्टर: हा ... हा .... प्रिया आप चलो मेरे साथ.

आशु उठ कर उनके साथ चली गई और करीब १५ मिनट बाद डॉक्टर और आशु साथ आये.

डॉक्टर: यू शुड ह्याव युज प्रिकॉशन!

मैं: मॅडम ... वो... सॉरी! पर आशु ने आई पिल तो ली थी.

डॉक्टर: ७२ घंटों के अंदर ली थी?

मैं: नहीं मॅडम .... थोड़ा लेट हो गई थी!

डॉक्टर: देखो इस समय आशु के साथ थोड़ी कम्प्लीकेशन है! शी इज नॉट फिजिकली फिट टू बी a मॉम! अल्सो, यू कान्ट चुस दीं अबोर्शन… कौज देन शी वॉन्ट बी एबल टू कन्सिव …एवर!

ये सुन कर हम दोनों के दूसरे को देखने लगे और हमारी परेशानियाँ हमारी शक्ल से दिख रही थी.

डॉक्टर: सी आई विल राईट सम मेडिकेशन विच.. शी ह्याज टू टेक ऑन अ डेली बेसिस, दिस विल् ओन्ली डीले दीं प्रेग्नानसी. इफ शी स्टॉप दीं मेडिकेशन, देन शी विल ह्याव टू कन्सिव दीं बेबी. शी अल्सो निड मल्टी व्हिटॅमिन टू बी फिजिकली फिट इन ऑर्डर टू … यू नो… बी अ मॉम. वन मोर थिंग आई ह्याड लाईक टू आस्क, हाऊ लाँग ह्याव यू बिन म्यारीड?

मैं: ५ मंथ ! बट व्हाय?

डॉक्टर: यू दिडंत टेल मी एनीथिंग अबाउट योवर वाइफ ऑर्गास्म?

अब ये सुन कर तो मैं दंग रह गया!
 
मैं: I थोट दे आर नॅचरल…..आई…. आई...ह्याड नो आईडिया…. इट्स …अ डीसिज?!!

डॉक्टर: इट्स नॉट अ डीसिज … येस शी रीचेस ऑर्गस्म a बीट अर्ली बट डोन्ट वरी आई ह्यावं टोट हर अ टेकनिक टू लास्ट लाँगर!

ये कहते हुए उन्होंने आशु को आँख मारी! हम दवाई ले कर बाहर आये और दोनों भूखे थे तो मैंने आशु को एक रेस्टरंट में चलने को कहा. वहाँ खाना आर्डर कर ने के बाद हमने बात शुरू की;

मैं: घबराओ मत! सब कुछ ठीक हो जायेगा.

आशु: सब मेरी गलती थी. मैं अगर दवाई टाइम पर ले लेती तो ये सब नहीं होता!

मैं: जो हो गया सो हो गया! अब ये दवाई टाइम से खाना और ये बताओ की तुम अंदर से कमजोर कैसे हो? खाना ठीक से नहीं खाती?

आशु: नहीं तो... मैं तो ठीक से खाती-पीती हूँ!

मैं: और ये ओर्गास्म???

आशु: जब भी हम प्यार कर रहे होते थे तो मैं सबसे पहले..... मतलब वो.... और आप हमेशा देर तक....तो मैं.... (आशु को ये कहने में बड़ा संकोच हो रहा था.)

मैं: पगली! छोड़ ये सब और खाना खा| (मैंने उसका ध्यान उन बातों से हटाया और खाने में लगा दिया.)

खाना खा कर निकले तो बॉस का फ़ोन आ गया पर मैं चूँकि उस समय ड्राइव कर रहा था इसलिए फ़ोन नहीं उठा पाया. पहले मैंने आशु को हॉस्टल छोड़ा क्योंकि अब शाम के ४ बज रहे थे और मुझे ऑफिस पहुँचते-पहुँचते ५ बज गये. बॉस मुझे देखते ही जोर से चिल्लाया; "कहाँ था सारा दिन?" ये सुन कर मैडम अपने केबिन से बाहर आईं और मेरे बचाव में कूद पड़ी; "मुझे बता कर 'गए थे'! कजिन को एक्सीडेंट हो गया था और वो हॉस्पिटल में एडमिट था." ये सुन कर बॉस ने मैडम को घूर के देखा और फिर बिना कुछ कहे अंदर केबिन में चला गया.मैं जानता था की आज तो मैडम को ये बहुत सुनाएगा इसलिए मैंने मैडम से दबे शब्दों में कहा; "मॅडम! मेरी वजह से सर आपको बहुत डाटेंगे! आप को...." आगे मेरे कुछ भी कहने से पहले उन्होंने मेरी बात काट दी; "दोस्त को बचाना तो धर्म है!" इतना कह कर मैडम हँस पड़ी और मैं भी मुस्कुरा दिया. पर मन ही मन जानता था की मॅडम को आज बहुत सुनना पडेगा.

खेर काम तो करना ही था और मैडम को कम डाँट पड़े इसलिए थोड़ी देर बैठ कर काम निपटाया और घर पहुँच गया.घर आते ही आशु को फ़ोन किया और उसे याद दिलाया की उसने गोली खाई या नहीं?! मैंने तो फ़ोन में भी रिमाइंडर डाल लिया ताकि मैं कभी भूलूँ नही. अगले दिन जब आशु से शाम को मिला तो वो मुझे थोड़ी गुम-सुम लगी. पूछने पर उसने कहा;"क्या मैं ये बेबी कंसीव नहीं कर सकती?" ये सुन कर पहले तो सोचा की उसे झिड़क दूँ पर फिर सोचा की उसे ठीक से समझाता हूँ; "जान! अगर आप ये बेबी कंसीव करते हो तो हमें जल्दी शादी करनी पडेगी. जल्दी शादी करने के लिए हमें जल्दी भागना होगा, और भाग तो हम जाएंगे पर भाग कर जाएंगे कहाँ? कहाँ रहनेगे? क्या खाएंगे? सिर्फ प्यार से पेट नहीं भरता ना?" ये सुन कर आशु कुछ सोचने लगी और फिर बोली; "मैं भी जॉब करूँ?"

"जान! आप जॉब करोगे तो पढ़ाई कब करोगे? दोनों चीजें आप एक साथ मैनेज नहीं कर सकते और फिर आप जॉब करोगे तो हम रोज मिलेंगे कैसे? पर आशु का दिमाग इन सवालों के जवाब पहले ही सोच लिया था. "मैं पार्ट टाइम जॉब करुँगी, वो भी आप ही की कंपनी में" ये सुन कर मैं हैरान हो गया और हैरानी से आशु को देखने लगा. "नहीं!!!" मैंने बस इतना ही जवाब दिया और बात को वहीँ दबा दिया. आशु ने भी डर के मारे आगे कुछ नहीं बोला.

कुछ दिन और बीते, हम इसी तरह रोज मिलते पर जॉब के लिए आशु ने मुझसे आगे कोई बात नहीं की. रविवार आया तो आशु ने जिद्द कर के मेरे घर आ गई. और आज तो वो बहुत ज्यादा ही खुश लग रही थी. आज वो पहली बार स्कर्ट पहन के आई थी और अपनी कुर्ती ऊपर उठा कर आशु ने मुझे अपनी नैवेल दिखाई. मेरी नजर उसकी नैवेल पर पड़ी तो मैं टकटकी बांधें उसी को देखता रहा. "क्या बात है आज तो मेरी जान मेरी जान लेने के इरादे से आई है!!!" ये कहते हुए मैंने आशु को अपनी छाती से चिपका लिया.

"वो प्रेगनेंसी वाले दिन के बाद मुझे तो लगा था की आप मुझे अब शादी तक छुओगे ही नहीं! आपको रिझाने को ही इतना सज-धज कर आई हूँ! सससस.....आ...आ...ह...नं... सच्ची कितने दिनों से आपके लिए प्यार के लिए तड़प रही थी." आशु ने कसमसाते हुए कहा.

"पागल! तुझे प्यार किये बिना तो मैं भी नहीं रह सकता! उस दिन जब तूने मुझे प्रेगनेंसी की बात बताई तो मैं मन ही मन सोच कर बैठा था की अब जल्दी ही तुझे भगा कर ले जाऊ." मैंने आशु को बाएं गाल को चूमते हुए कहा.

"सच्ची?" आशु ने खिलखिलाते हुए कहा.

"हाँ जी! बहुत प्यार करता हूँ मैं अपनी आशु से." ये कहते हुए मैंने आशु के होंठों को चूम लिया.

मेरे होठों के सम्पर्क में आते ही आशु मचलने लगी और उसने अपने दोनों हाथों को मेरी गर्दन के पीछे ले जाके लॉक कर दिया. आशु उचक कर मेरे होठों को चूस रही थी और मुझे उसकी इस हरकत पर बहुत प्यार आ रहा था. मैंने उसे गोद में उठा लिया और किचन कॉउंटर पर ला कर बिठा दिया. आशु अब बिलकुल मेरे बराबर थी. और उसका मेरे होठों को चूमना जारी था. आशु के होंठ तो आज मुझ पर कुछ ज्यादा ही कहर डाल रहे थे, वो अपने होठों से मेरे होठों को बारी-बारी निचोड़ रही थी. इधर मेरे दिलों-दिमाग में उसकी नाभि ही छाई हुई थी. हाथ अपने आप ही उसकी नाभि के ऊपर थिरकने लगे थे. एक अजीब सी खुमारी थी. उस पर आशु की जिस्म की महक मुझे बहका रही थी. मैंने फिर से आशु को गोद में उठाया और पलंग पर ला कर लिटा दिया और खुद भी उसके ऊपर छा गया.अब मैंने अपने निचले होंठ और जीभ के साथ उसके निचले होंठ को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा. आशु की उँगलियाँ मेरे बालों में रास्ते बनाने लगी थी. निचले होंठ कर रस निचोड़ कर मैंने उसके ऊपर वाले होंठ को भी ऐसे ही निचोड़ा.मेरे हाथ अब नीचे आ कर उसके कुर्ते के ऊपर से स्तनों को दबाने लगे थे. उन्हें धीरे-धीरे मसलने लगे. मैं रुका और अपने घुटनों पर बैठ गया और आशु का हाथ पकड़ के उसे बिठाया. मुझे आगे उसे कुछ कहना नहीं पड़ा और उसने खुद ही अपना कुरता निकाल के फेंक दिया. मैं ने भी ताव में आकर अपनी टी-शर्ट निकाल फेंकी और फिर से आशु के ऊपर चढ़ गया और उसके होठों को अपने होठों में भींच कर चूसने लगा.

आशु ने अपने दोनों हाथों से मेरा चेहरा थाम लिया और उसने भी अपनी जीभ से हमला कर दिया.मेरे मुँह में दाखिल हुई उसकी जीभ मेरी जीभ से लड़ने लगी थी. मैं ने अपने दाँतों से उसकी जीभ पकड़ ली और आशु थोड़ा छटपटाने लगी! इधर मेरी उँगलियों ने आशु की ब्रा के स्ट्राप को नीचे खिसका दिया. मैंने किस तोडा और आशु के कंधे को चूम लिया, जवाब में आशु ने अपनी उँगलियों को मेरे बालों में फँसा दिया. मैंने अपनी उँगलियों से अब उसकी ब्रा को उसके कंधे से होते हुए नीचे लाना शुरू कर दिया. आशु ने अपनी पकड़ मेरे बालों पर ढीली की और अगले ही पल उसकी ब्रा उसके सीने से अलग हो कर जमीन पर पड़ी थी. आशु मेरी आँखों में प्यास देख रही थी और मैं भी उसकी आँखों में वही प्यास देख रहा था. मैंने झुक कर आशु के बाएँ स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा. और आशु ने फिर से अपनी उँगलियाँ मेरे बालों में फँसा दी.

"काश...ससस..ससस...आ.आ..ननहहह....मैं आपको अपना दूध पिला सकती" ये कहते हुए आशु सिसकारियां लेने लगी! उसकी टांगें भी हरकत करने लगीं और मेरी टांगों से लिपटने लगी. आशु की बात आज मुझे बहुत उत्तेजक लग रही थी और मुझे ऐसा लगने लगा की वो मुझे जान-बुझ कर उत्तेजित कर रही हे. "ससस...आ..आ..ह...ह....न...न... जानू! एक बार काट लो ना!" उसका कहना था और मैंने उसके बाएँ स्तन को काट लिया; "आआह्ह्ह्ह.....हहह...स..ससससस...ननन... न!!!!!" उसकी दर्द भरी कराह सुन मुझे और उत्तेजना हुई और मैंने आशु का दायाँ स्तन मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा. "ससस....आ...न.....ह... इसे भी...काटो....ना...प्लीज!" ये सुनते ही मैंने उसके दाएँ वक्ष को दात से काट लिया; "ईईई....माँ....आह....ससस...आ..न..हह...!!!" उसकी कराह निकली और मैं उत्तेजना से भर गया और वापस बाएँ वक्ष को भी काट लिया. "ईईई...माँ......ाआनंनं.....ससस!!!! जानऊउउउउउउउ!!!!" आशु ने अपना दबाव मेरे सर पर और बढ़ा दिया.

अगले दस मिनट तक मैं यूँ ही कभी उसके एक स्तन को चूसता तो कभी दूसरे स्तन को! आशु ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मेरे सर पर से कम की तो मैं नीचे खिसका और उसकी नैवेल पर रूक गया.अपने होठों से मैंने उसकी नैवेल को चूमा, अगले ही पल मैंने अपनी जीभ उसमें डाल दी" इसके परिणाम स्वरुप आशु का पूरा जिस्म ऊपर की तरफ उठ गया.मैंने अपने निचले होंठ को उसकी नैवेल पर ऊपर से नीचे रगड़ना शुरू कर दिया. जीभ से मैं उसकी नैवेल को कुरेदने लगा, आशु से अब ये दोहरा हमला बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वो छटपटाने लगी थी. पाँच मिनट तक उसकी नैवेल की चुसाई कर मैं और नीचे खिसका तो वहां तो अभी स्कर्ट का कब्ज़ा था. आशु ने तुरंत ही नाडा खोला और स्कर्ट अपनी नितंब से नीचे खिसका दी और बाकी का काम मैंने किया. अब तो सिर्फ आशु की पैंटी बची थी. पैंटी देख कर मैं उस पर झुका और आशु की योनी को चूमना चाहा. पर आशु ने मुझे रोक दिया और अपनी पैंटी निकाल कर अपनी दोनों टांगें खोल दी. उसकी ये हरकत देख मेरे मुख पर मुस्कराहट छ गई और मुझे देख आशु ने अपने दोनों हाथों से अपने मुँह को ढक लिया. मैं झुक कर आशु की योनी को चूमने लगा तो उसने फिर मुझे रोक दिया. वो उठ के बैठी और मुझे अपने ऊपर खींच लिया.
 
"आज मेरे जानू को और इंतजार नहीं करवाऊँगी" इतना कह कर उसने मुझे अपने ऊपर से धकेल दिया और मुझे नीचे लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गई. अपनी चारों उँगलियों को आशु ने अपने थूक से योनी और अपनी योनी की फांकों को गीला करने लगी. अपनी दो उँगलियों से उसने अपनी ही थूक से अपनी योनी को अंदर से गीला कर दिया.उसने अपने थूक से सने हाथों से मेरा पाजामा बुरी तरह खींचना शुरू कर दिया. वासना उस पर इस कदर हावी थी की वो तो मेरा पाजामा फाड़ने को भी तैयार थी. आखिर पाजामा निकालते ही उसने उसे दूर फेंक दिया और मेरे कच्छे को देख कर बोली; "सच्ची आज के बाद मेरे होते हुए आप कभी कच्चा मत पहनना! नहीं तो मैं आपके सारे कच्छे फाड़ दूँगी!" आशु का उतावलापन आज साफ़ दिख रहा था. मेरा कच्छा तो उसने नोच कर निकाला और गुस्से से कमरे के दूसरे कोने में फेंक दिया. फिर से उसने अपना गाढ़ा थूक अपनी चारों उँगलियों पर निकाला और पहले मेरे लिंग पर चुपड़ने लगी और फिर बाकी का अपनी योनी में घुसेड़ दिया! आशु का ये रूप देख कर मैं हैरान था!

आशु अब धीरे-धीरे अपनी योनी को मेरे लिंग के ठीक ऊपर ले आई और धीरे-धीरे योनी को नीचे मेरे लिंग पर दबाने लगी. मेरा सुपाड़ा पूरा अंदर जा चूका था और आशु के योनी की गर्मी मुझे अपने लिंग पर महसूस होने लगी थी. मैं जानता था की अगर मैंने नीचे से जरा भी झटका मारा तो आशु की हालत दर्द के मारे खराब हो जायेगी, इसलिए में बिना हिले-डुले पड़ा रहा.

आशु ने बहुत हिम्मत दिखाई और धीरे-धीरे और नीचे आने लगी और मेरा लिंग और अंदर जाने लगा. जब आधा लिंग अंदर चला गया तो आशु रुक गई और मुझे लगा जैसे इसके आगे वो नहीं बढ़ेगी.आशु की चेहरे पर दर्द की लकीरें थीं और मुँह से दर्द भरी आह निकल रही थी. "स..आह...हम्म....मम...हह...आअह्ह्ह...अंह..!!!" आशु की योनी में उठ रहा दर्द उसकी जुबान से बाहर आ रहा था. जितना लिंग अंदर गया था उतना ही अंदर लिए उसने ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया और मैं मन मार कर रह गया की वो मेरा पूरा लिंग अंदर न ले सकी. अगले पांच मिनट तक आशु मेरे पेट पर अपना हाथ रख कर अपनी नितंब ऊपर नीचे करती रही और मेरा बेचारा आधा लिंग ही उसकी योनी की गर्मी की सिकाई पा रहा था. आशु को मेरे चेहरे से मेरी प्यास दिख रही थी और वो जानती थी की मेरा पूरा लिंग उसकी योनी की गर्माहट चाहता है तो उसने ऊपर-नीचे होना रोक दिया और मेरे ऊपर लेट गई. "मुझे लगा की वो स्खलित हो गई है इसलिए आराम कर रही है पर उसने मुझे चौंकाते हुए पुछा; "जानू! आप ऐसे क्यों हो? अपना दर्द मुझसे क्यों छुपाते हो? मैं जानती हूँ की मैं आपको संभोग में वो सुख नहीं दे पाती जो आप चाहते हो पर आपने कभी मुझसे क्यों कुछ नहीं कहा? आपके छूटने से पहले मैं स्खलित हो जाती हूँ पर आप हैं की.....क्या पराया समझते हो मुझे?"

ये सुन कर मुझे एहसास हुआ की मैं आशु से संभोग में उसका पूरा साथ ना देने से थोड़ा दुखी था पर कभी उससे कहने की हिमत नहीं जुटा पाया. "जान! ऐसा नहीं है! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, मेरे लिए तुम्हारे दिल का प्यार जरुरी है! संभोग मेरे लिए मायने नहीं रखता! तुम्हें उससे ख़ुशी मिलती है और तुम्हें खुश देख मैं भी खुश हो लेता हु. बचपन से ले कर जब तक मैं घर पर था तब तक हम साथ खेले-खाये, बड़े हुए पर मेरे कॉलेज के वजह से मुझे शहर आना पड़ा और तब शायद तुमने खुद का ख़याल रखना बंद कर दिया. या शायद घर पर सब के तानों के दुःख के कारन तुम अच्छे से खाना नहीं खाती थी. इसीलिए तुम्हारा शरीर अंदर से कमजोर है और शायद इसीलिए तुम संभोग में ज्यादा देर तक नहीं साथ दे पाती! पर उससे मेरा प्यार तुम्हारे लिए कभी कम नहीं हुआ! हाँ कुछ दिन पहले तुम ने मेरे दिल को बहुत ठेस पहुँचाई थी. पर उस किस्से के बाद तो हम और नजदीक ही आये हैं ना?

मेरी बात सुन कर आशु मेरी आँखों में देखते हुए बोली; "मैं जानती हूँ आप मुझसे कितना प्यार करते हो और मेरे दिल को चोट न पहुंचे इसलिए आप ने मुझे कभी ये नहीं बताया. पर उस दिन जब में उस डॉक्टर के साथ अंदर गई चेक-अप के लिए तब मैंने उन्हें सारी बात बताई और उन्होंने मुझे कुछ बातें बताई! मैं वादा करती हूँ की आज के बाद मैं आपका पूरा साथ दूँगी!"

''आपको वादा करने की कोई जरुरत नहीं है!" ये सुन कर आशु मुस्कुराई और मेरे होठों को चूम लिया. मेरे लिंग अभी भी आधा आशु की योनी में था और आशु ने धीरे-धीरे अपनी कमर को मेरे लिंग पर दबाना शुरू किया. धीरे-धीरे ...धीरे-धीरे ...धीरे-धीरे ...धीरे-धीरे और आखिर में पूरा लिंग आशु की योनी में समां गया.दर्द के मारे आशु की आँखें बंद हो चुकी थी और आँसूँ की धरा बह निकली थी. "ससससस.....आअह्ह्ह्ह......मा....म...म.म.म.म....मममम.....ंन्न......ह्ह्ह्हह्ण....!!!" आशु का दर्द देख कर मन दुखी होने लगा था और लिंग अंदर योनी की गर्मी पा कर मचलने लगा था. "जान! दर्द हो रहा है तो मत करो!" मैंने आशु से कहा पर उसने अपनी ऊँगली मेरे होठों पर रख दी. "ससस...आज...मेरे जानू.....को....सब....ससस...आअह्ह्ह..हहह्णणम्म्म....ममम...!!" आशु की दर्द भरी सिसकारियाँ अचानक ही मादक सिसकारियाँ बन चुकी थी. दो मिनट तक वो बिना हिले-डुले मेरे लिंग को पानी योनी में भरे, आँखें मूंदे हुए बैठी रही. फिर उसने अपने दोनों हाथों को मेरी छाती पर रखा और अपनी कमर धीरे-धीरे ऊपर लाई, लिंग का सुपाड़ा भर अंदर रहा गया था और फिर आशु धीरे-धीरे अपनी कमर को वापस नीचे लाई! दो मिनट में ही उसकी योनी ने रस छोड़ दिया. और वो गर्म-गर्म रस मेरे लिंग को और भी गर्म करने लगा. आशु जैसे ही ऊपर उठी उसका रस बहता हुआ बाहर आया पर इस बार आशु रुकी नहीं और उसने लय-बद्ध तरीके से अपनी कमर ऊपर-नीचे करनी शुरू कर दी. ५ मिनट और फिर आशु उकड़ूँ हो कर बैठ गई और तेजी से उसने अपनी नितंब ऊपर नीचे करने शुरू कर दी. अब तो मेरा लिंग बड़ी आसानी से फिसलता हुआ उसकी योनी में अंदर-बाहर हो रहा था और आशु को भी बहुत जोश चढ़ आया था. अगले दस मिनट तक वो बिना रुके ऐसे ही ऊपर-नीचे करती रही और मेरी और मेरे लिंग की हालत खराब कर दी. मेरे जिस्म में एक ऐठन आई और वही ऐठन आशु के जिस्म में भी आई और दोनों एक साथ अपना रस बहाने लगे, वो रस आशु के योनी में पहले भरा और काफी-कुछ रिस्ता हुआ बाहर आने लगा.

आशु थक कर पस्त हो गई और मेरे ऊपर ही लुढ़क गई. हम दोनों की सांसें बहुत तेज थी. और लिंग अब भी आशु की योनी के अंदर फँस पडा था. पाँच मिनट के बाद जब दोनों की सांसें सामान्य हुई तो आज मेरे चेहरे की संतुष्टि देख आशु को खुद पर गर्व होने लगा. मैंने करवट ले कर उसे अपने ऊपर से उतारा और अपनी बगल में लिटा दिया. इसी बीच मेरा लिंग भी बाहर आया. आशु की योनी से चम्मच भर गाढ़ा तरल बहंता हुआ बाहर आया जिसे देख कर मुझे बहुत आनंद आया. मैं वापस आशु की बगल में लेट गया, आशु ने मेरी तरफ करवट की और अपनी बायीँ टांग उठा कर मेरे लिंग पर रख दी. वो अब भी उस गाढ़े तरल से अनजान थी!

हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे और दस मिनट बाद मैंने आशु से बात शुरू की;

मैं: मेरी जान ने बड़े मन से डॉक्टर की सारी टिप्स फॉलो की, ऐसी क्या टिप्स दी थी उन्होंने?

आशु: (शर्माते हुए) उन्होंने कहा था की अपने पति को एक्साइट करो! कुछ मर्दों को बातों से एक्साइटमेन्ट होती है तो, किसी को नोचने-काटने से, किसी को चूमने-चूसने से होती है!

मैं: अच्छा?

आशु: हाँ जी! मुझे ये भी बताया की जल्दी स्खलित नहीं होना चाहिए बल्कि जितना रोक सको उतना बेहतर है! जब लगे की क्लाइमेक्स होने वाला है, तभी रुक जाओ और अपने पार्टनर को किस करते रहे. थोड़ा सब्र से काम लो और जल्दीबाजी मत दिखाओ! और तो और मुझे उन्होंने प्राणायाम भी करने को कहा और हस्तमैथुन नहीं करने को कहा.

मैं: तुम हस्थमैथुन करती थी?

आशु: जब आप नहीं होते थे तब करती थी! पर उस दिन के बाद मैंने बंद कर दिया. आपको पता है कितना मुश्किल होता है? आप को तो पता नहीं क्या सिद्धि प्राप्त है की आप खुद को इतना काबू में रखते हो! मुझे तो आपके पास आते ही आपके जिस्म की महक बहकाने लगती हे. मन करता है आपके सीने से चिपक जाऊँ!!!!

मैं: जानू! सब तुम्हारे प्यार का असर है, वही मुझे कहीं भटकने नहीं देता.

अब तक आशु को बिस्तर पर गीलापन महसूस हो गया था. इसलिए वो उठ बैठी और हम दोनों का गाढ़ा-गाढ़ा रस देख कर बुरी तरह शर्मा गई. वो उठी और थोड़ा बहुत रस उसकी योनी से बहता हुआ उसकी जाँघों तक पहुँच गया था. आशु बाथरूम से मुँह-हाथ और योनी धो कर आई और फिर मैंने भी मुँह-हाथ और लिंग धोया! जब में बाहर आया तो आशु चाय बना रही थी और जैसे ही मैंने कच्छा उठाया पहनने को तो आशु आँखें बड़ी कर के देखने लगी. मैंने मुस्कुरा कर कच्छा वापस जमीन पर पड़ा रहने दिया. "क्यों कपडे पहन रहे हो? मेरे सामने शर्म आती है?" आशु ये कह कर हँसने लगी. मैं उसके पीछे आया और उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड लिया. मेरा सोया हुआ लिंग आशु की नितंब से चिपका और मैं उसके कान में खुसफुसाते हुए बोला; "सॉरी जान!"

"अच्छा आप खिड़की के नीचे बैठो, में चाय ले कर आती हु." मैं वापस खिड़की के नीचे बिना कपडे पहने ही बैठ गया.आशु ने मुझे चाय दी और पलंग से चादर उठा कर धोने डाल दी और फिर मेरी गोद में नग्न ही बैठ गई. आशु की नितंब ठीक मेरे लिंग के ऊपर थी;

आशु: अच्छा ...मुझे आपसे ...एक बात कहनी थी. (आशु ने बहुत सोचते-सोचते हुए कहा.)

मैं: हाँ जी कहिये. (मैंने आशु के बालों में ऊँगली फिराते हुए कहा.)

आशु: मुझसे अब आपसे दूर रहा नहीं जाता. आपका कहाँ की नई जिंदगी शुरू करने के लिए पैसों की जरुरत है वो सच है पर ये तो कहीं नहीं लिखा होता की ये सारा बोझ आप ही उठाएंगे? मैं भी आपका ये बोझ बाँटना चाहती हूँ, मैं भी जॉब करुँगी! ताकि जल्दी पैसे इक्कट्ठा हों और मैं और आप जल्दी से यहाँ से भाग जाएँ.

आशु की बात सुन कर मैं हैरान था क्यों की वो बेसब्र हो रही थी और इस समय मेरा उसपर चिल्लाना ठीक नहीं था. तो मैंने उसे समझते हुए कहा;

मैं: जान! मैं बिलकुल मना नहीं करता की आप जॉब मत करो! मैंने तो आपको अपना प्लान बताया था ना? अगले साल से आप भी पार्ट टाइम जॉब शुरू करना! फिलहाल मैं कल ही सर से अपनी सैलरी बढ़ाने की बात करूँगा नहीं तो मैं जॉब स्विच कर लुंगा.

आशु: प्लीज जानू!

मैं: जान! समझा करो! आप पढ़ाई और जॉब एक साथ नहीं संभाल पाओगे! कॉलेज की अटेंडेंस भी जरुरी है ना? फिर हॉस्टल के टाइमिंग भी तो इशू हे.

आशु: मैं सब संभाल लूँगी, शनिवार और रविवार करुँगी तो कॉलेज की अटेंडेंस में भी कुछ फर्क नहीं पडेगा. हॉस्टल की टाइमिंग के लिए मैं आंटी जी से बात कर लूँगी और उन्हें मना भी लुंगी. प्लीज मुझसे अब ये दूरी बर्दाश्त नहीं होती!

मैं: जॉब करोगी तो शनिवार-रविवार हम दोनों कैसे मिलेंगे? तब कैसे रहोगी मुझसे बिना मिले? और ये मत भूलो की हमें कभी-कभी शनिवार-रविवार घर भी जाना होता है, उसका क्या? रास्ते में अकेले आना-जाना कैसे मैनेज करोगी?
 
आशु: मैं आप ही की कंपनी में जॉब करुँगी तो हम एक साथ और भी टाइम बिता पाएंगे और रही घर जाने की बात तो आपके बस इतना बोलने से की आप ऑफिस के काम में बिजी हो तो कोई कुछ नहीं कहेगा. आप बोल देना की मेरे एग्जाम है...कुछ भी झूठ बोल देना...ज्यादा हुआ तो कभी-कभी चले जायेंगे. एटलीस्ट मुझे एक बार कोशिश तो करने दीजिये, एक बार नितु मैडम से बात तो करने दीजिये!

मैं: अच्छा जी तो सब सोच कर आये हो?! मेरे ऑफिस में जॉब करोगे तो मेरे साथ-आना जाना तो छोडो वहां मुझसे बात भी नहीं कर सकती तुम!

आशु: क्यों भला?

मैं: वहाँ किसी ने पूछा तो क्या कहूँ? ये मेरी भतीजी है! या फिर तुम मुझे सब के सामने 'चाचा' कह पाओगी?

आशु: तो हम वहाँ बिलकुल अजनबी होंगे?

मैं जी हाँ!

आशु: हाय! ये तो बेस्ट हो गया फिर! दुनिया की नजर से छुप-छुप कर मिलना, बातें करना बिलकुल फिल्मों की तरह.

मैं: फिल्मों का कुछ ज्यादा ही भूत नहीं चढ़ गया?

आशु: नहीं ...आपके प्यार का भूत है...जो सर से उतरता ही नही.

मैं: आशु ...देख कल को ये बात खुल गई तो ...सब कुछ खत्म हो जायेगा, प्लीज बात को समझ! (मैंने गंभीर होते हुए आशु के सर को चूमा.)

आशु: मैंने आज तक आपसे जो माँगा है आपने दिया है, एक आखरी बार मेरी ये जिद्द पूरी कर दो और मैं वादा करती हूँ की आगे से कभी कोई जिद्द नहीं करुंगी.

मैं: ठीक है, पर आपको मुझसे एक और वादा करना होगा.

आशु: बोलिये

मैं: कॉलेज खत्म होने से पहले हम शादी नहीं करेंगे. तुम अपनी पढ़ाई को हरगिज़ दाव पर नहीं लगाओगी.

आशु: ओफ्फो!!! जानू आप ना सच में बहुत सोचते हो! किस ने कहा की मैं अपनी ग्रेजुएशन कम्पलीट नहीं करुँगी?! मैं शादी के बाद भी तो कॉरेस्पोंडेंस से पढ़ सकती हूँ ना? फिर तो आप कहोगे तो मैं पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर लुंगी. एक्चुअली करना ही पड़ेगा वरना आगे जॉब कहाँ मिलेगी!

आशु ने बड़ी सरलता से ये बात कही पर ये बात मेरे गले नहीं उत्तर रही थी.

मैं: तुमने वादा किया था ना की कॉलेज की नेक्स्ट टोपर तुम बनोगी! मेरी तस्वीर के साथ तुम्हारी तस्वीर लगेगी... भूल गई? (ये कह कर मैं उठ खड़ा हुआ और हाथ बाँधे खिड़की से बाहर देखने लगा.)

आशु: (मुझे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ते हूये.) ठीक है जान! जब तक मेरी ग्रेजुएशन पूरी नहीं होती तब तक हम शादी नहीं करेंगे. पर उससे एक दिन भी ज्यादा नहीं रुकूंगी मैं!

ये कहते हुए आशु ने मेरी नग्न पीठ को चूमा. उसके स्तन मेरी पीठ में गड रहे थे, मैं आशु की तरफ घूमा और उसके होठों को चूम लिया. उसका निचला होंठ मैंने अपने होठों और जीभ से चूसना शुरू कर दिया था.अगले दिन मैंने सर से अपनी सैलरी को ले कर बात करने की ठानी;

मैं: गुड-मॉर्निंग सर!

बॉस: गुड- मॉर्निंग! महालक्ष्मी ट्रेडर्स के नए इनवॉइस आये हैं, उन्हें चढ़ा देना.

मैं: जी...आपसे कुछ बात करनी थी.

बॉस: हाँ बोलो.

मैं: सर मुझे सैलरी में रेज चाहिए.

बॉस: क्यों?

मैं: सर मुझे आपके पास काम करते हुए तकरीबन ३ साल हो गए हैं और इन सालों में मेरी सैलरी में एक भी बार रेज नहीं हुआ.

बॉस: पहले तुम रेगुलर तो बनो.आये-दिन छुट्टी मारते हो, शाम को ऑफिस खत्म होने से पहले ही चले जाते हो. ऐसे थोड़े ही चलेगा!

मैं: सर मेरी छुट्टियाँ पहले से कम हो गई हैं, आखरी बार छुट्टी तब ली थी जब मुझे डेंगू हो गया था. वो छुट्टियाँ भी विथाउट पे थी! शाम को जल्दी जाता हूँ तो बाद में वापस आ कर काम भी तो खत्म कर देता हु. आज तक आपको किसी भी काम के लिए मुझे दो बार नहीं कहना पड़ा है, इसलिए सर प्लीज सैलरी रेज कर दिजिये.

बॉस: देखते हैं...अभी जा कर महालक्ष्मी ट्रेडर्स का डाटा चढ़ाओ.

मैं: सॉरी सर, पर अगर आप सैलरी रेज नहीं करना चाहते तो मैं रिजाइन कर देता हु.

मैंने सर को अपना रेसिग्नेशन लेटर दे दिया.

में: सर इसमें १ महीने का नोटिस पीरियड है, अगले महीने से मैं जॉब छोड़ देता हु.

इतना कह कर मैं चला गया.बॉस बहुत हैरान था क्योंकि उसे ऐसी जरा भी उम्मीद नहीं थी. तकरीबन ३ साल का एक्सपीरियंस था मेरे पास और कहीं भी जॉब कर सकता था. इसलिए मुझे जरा भी परवाह नहीं थी. इधर बॉस की फटी जरूर होगी क्योंकि ऐसा मेहनती 'मजदूर' उसे कहाँ मिलता जो एक आवाज में उसका सारा काम कर देता था. मैंने दोपहर को लंच भी नहीं किया और बिल एंटर करता रहा. लंच के बाद मैडम आईं और जब उन्हें सर से ये पता चला की मैं रिजाइन कर रहा हूँ तो पता नहीं उन्होंने सर को क्या समझाया की सर खुद मुझे बुलाने के लिए आये. मैं उनके केबिन में हाथ बंधे खड़ा हो गया, मैडम और सर मेरे सामने ही बैठे थे;

बॉस: अच्छा ये बताओ की रेज क्यों चाहिए तुम्हें? पार्ट टाइम टूशन तो तुम पढ़ा ही रहे हो और अभी सिंगल हो तो तुम्हारा खर्चा ही क्या है?

मैं: सर २०,०००/- की सैलरी में ८,०००/- तो रेंट है, घर का खर्चा जिसमें खाना-पीना, बिजली-पानी सब जोड़-जाड कर ६-७ हजार हो जाता हे. बाइक का तेल-पानी और मेंटेनेंस १५००/-,तो बचे ३,५००/-! तीन साल में मेरी सेविंग कुछ ६०-६५ हजार ही हुई हे. घर तो मैं ने पैसे भेजना बंद कर दिए! अब आप ही बताइये की आगे शादी करूँगा तो घर कैसे चलेगा मेरा?

मेरा जवाब सुन कर मैडम के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई पर सर के पास कोई जवाब नहीं बचा था.

बॉस: ठीक है मैं २०००/- बढ़ा देता हूँ!

मैं: सॉरी सर! एटलीस्ट मुझे ५,०००/- का रेज चाहिए. (अब मैं बार्गेन करने पर उत्तर आया तो मैडम के चेहरे पर और मुस्कराहट छा गई.)

बॉस: क्या? मैं इतना रेज नहीं कर सकता.

मैं: सर मार्किट में ३०,०००/- का ऑफर मिल रहा है मुझे, मैं तो फिर भी आपसे २५,०००/- मांग रहा हूँ, वो भी ३ साल बाद! हर साल अगर २०००/- भी बढ़ाते तो भी अभी आपको ६,०००/- बढ़ाने पड़ते!

बॉस: नहीं! ३,०००/- बढ़ा दूँगा इससे ज्यादा नहीं!

मैं: सर आप रस्तोगी जी को ३५,०००/- देते हैं, ना तो वो ऑफिस से बाहर का काम करते हैं ना ही ऑफिस के अंदर रह कर कोई काम करते हे. जब तक आप उन्हें चार बार न कह दें वो फाइल खत्म करते ही नही.

बॉस: उनकी फॅमिली है, बच्चे हैं!

मैं: तो सर काबिलियत का कोई मोल नहीं? अगर फॅमिली का ही मोल है तो मैं अपने सारे परिवार को यहीं बुला लेता हूँ! फिर तो मुझे ज्यादा पैसे मिलेंगे ना?

बॉस: क्या करोगे ५,०००/- बढ़वा के? तुम्हारे परिवार के पास इतनी जमीन है!

मैं: सर मैं उनके टुकड़ों पर नहीं पलना चाहता, अपना अलग स्टैंड है मेरा. अगर जमीन ही देखनी होती तो मैं यहाँ २०,०००/-की नौकरी क्यो करता?
 
बॉस: चलो अगर मैं सैलरी बढ़ा दूँ तो तुम्हें ये शाम को जल्दी जाना बंद करना होगा!

मैं: सर मैं अगर जल्दी जाता हूँ तो वापस आ कर सारा काम खत्म कर देता हूँ और अगले दिन आपको फाइल टेबल पर मिलती हे. बाकी ऑफिस में सोमवार से शुक्रवार काम होता है मैं तो फिर भी ६ दिन आता हु.

बॉस ने ना में सर हिलाया और मैंने भी आगे कुछ नहीं कहा और वापस अपने डेस्क पर बैठ गया और काम करने लगा. शाम को मैंने इनवॉइस की फाइल सर को कम्पलीट कर के दी और आशु से मिलने निकल पडा. आशु को जब ये सब बताया तो वो ये सुन कर मायूस हो गई. उसने अभी तक नितु मैडम से अपनी जॉब की बात नहीं की थी वरना बॉस मेरी सैलरी कतई रेज नहीं करता.क्योंकि उसे आशु का स्टिपेन्ड भी देना पड़ता और मेरी सैलरी रेज भी करनी पड़ती.

"लगता है आपके साथ ऑफिस में काम करना सपना रह जायेगा." उसने मायूस होते हुए कहा. मैंने आशु की ठुड्डी पकड़ के ऊपर उठाई और उसकी आँखों में ऑंखें डाले कहा; "ये अकेला ऑफिस तो नहीं है ना जहाँ हम दोनों साथ काम कर सकते हैं, ये नहीं तो कोई दूसरा ऑफिस सही."

पर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था. करीबन एक हफ्ते बाद एक और एम्प्लोयी ने बॉस के काइयाँपन से तंग आ कर रिजाइन कर दिया. उसी दिन सर ने मुझे अपने केबिन में बुलाया और कहा;

बॉस: राज मैं तुम्हारी सैलरी रेज कर रहा हूँ, लेकिन अगले महीने से!

मैं: ठीक है सर...थैंक यू!

मैं ख़ुशी-ख़ुशी बाहर आया और अपना काम करने लगा की तभी मैडम आ गईं; "अरे पार्टी कब दे रहे हो?"

"अगले महीने मॅडम ... सैलरी अगले महीने से बढ़ेगी!"

"ये ना!! सच्ची बहुत कंजूस हैं! चलो कोई बात नहीं अगले महीने पार्टी पक्की! अच्छा सुनो...वो प्रोजेक्ट के डिटेल आ गई हैं मेरे पास तो उस पर डिस्कशन करना है, लंच के बाद| ठीक है?

"जी मॅडम"

मैडम के जाते ही मैंने आशु को कॉल किया और उसे खुशखबरी दी और उसे नए प्रोजेक्ट के बारे में भी बताया. "अभी के अभी मैडम को कॉल कर और कॉफ़ी पीने के बहाने कॉलेज के आस-पास बुला और उनसे जॉब की बात छेड़ और जैसे समझाया था वैसे ही बात करना." ये सुन कर आशु बहुत खुश हुई और उसने तुरंत ही मैडम को फ़ोन मिलाया और उसके कुछ देर बाद मैडम भी निकल गई. आगे जो कुछ हुआ उसके बारे में आशु ने मुझे खुद बताया;

आशु: हाई मॅडम!

नितु मैडम: हाई!!!

दोनों एक टेबल पर बैठ गए और मॅडम ने दो कॉफ़ी आर्डर की.

आशु: आई एम सॉरी टू बोदर यू मॅडम!

नितु मैडम: ओह नो नो नो… दॅट इज ओके! I अल्वेज लूक फॉर रिजन टू इस्केप फ्रॉम ऑफिस! सो व्हॉट डू यू डू? व्हेअर डू यू स्टे?

आशु: आई एम a बी कॉम स्टूडेंटअँड आई लिव्ह इन दीं हॉस्टेल नियरबाय. आई अक्च्युअली निड योवर हेल्प. उमम्म्म...…आई एम अक्च्युअली लूकिन फॉर सम वर्क. अक्च्युअली…उमम्म्म...…. आई डोन्ट वांट टू बी a बरडन ऑन माई फॅमिली…आई थोट आई कॅन … यू नो अर्न समथिंग…. अँड आई अर्न फ्रॉम दीं एक्सपिरियंस… कॅन यू हेल्प मी फाइन अ पार्ट टाइम जॉब? लाईक स्यातर्डे अँड संडे… शायद इन योवर कंपनी? हिअर इज माई १० अँड १२ मार्कशिट! (आशु ने बहुत सोच-सोच कर और घबराते हुए बोला.)

ये सुन कर मैडम कुछ सोच में पड़ गईं और फिर बोलीं;

नितु मैडम: ओके जॉईन मी फ्रॉम स्याटर्डे! आई ह्यावं a प्रोजेक्ट अँड I वाज थिंकइनg ऑफ समवन ऑफ योवर क्यालीबर टू वर्क विद. बट, स्टीपेंड विल् बी १,०००/- ओन्ली, सिन्स यू आर नॉट जोईनिंग अस फॉर ६ डे अ वीक!

आशु: नो प्रॉब्लेम मॅडम, दॅट इज नॉट एन इशू. शुक्रिया मॅडम! शुक्रिया!!!!

लंच के बाद जब मैडम आईं तो वो बहुत खुश लग रहीं थीं, उन्होंने मुझे और रेखा को अपने केबिन में बुलाया.

नितु मैडम: एक लड़की और हमें ज्वाइन कर रही है, पर वो सिर्फ शनिवार और रविवार ही आ पायेगी.

रेखा: क्यों मॅडम?

नितु मैडम: यार! काम ज्यादा है और यहाँ कोई भी नहीं है जो पी. पी. टी. और एक्सेल पर फटाफट काम करता हो. ये लड़की अभी स्टूडेंट है और कुछ काम सीखना चाहती हे. राज जी आप रविवार आ पाओगे? क्योंकि मंडे टू शनिवार तो ऑफिस का काम ही चलेगा पार्ट टाइम में आप दोनों काम करो तो मैं आपको कम्पेन्सेट भी करवा दुंगी.

मैं: ठीक है मॅडम ... नो प्रॉब्लेम.

राखी: ठीक है मॅडम ... कोई दिक्कत नही.

शाम को जब मैं और आशु मिले तो आज मैंने उसे कस कर अपनी बाहों में भर लिया. आशु को समझते देर ना लगी की उसकी नौकरी पक्की हो गई हे. मैंने उसे कुछ बातें साफ की, सब के सामने उसे मुझसे मेरा नाम ले कर बात करनी है और किसी को जरा भी शक नहीं होना चाहिए की हम दोनों एक दूसरे को जानते हैं.ये सुन कर आशु बहुत एक्साइट हो गई! कुछ दिन और बीते और आखिर शनिवार आ ही गया. आशु ने अपने हॉस्टल में आंटी जी से बात कर ली और उन्हें वही तर्क दिया जो उसने नितु मैडम को दिया था. आंटी जी ने बात कन्फर्म करने के लिए मुझे कॉल भी किया और मैंने उन्हें विश्वास दिला दिया की आशु कोई गलत काम नहीं कर रही है.पर उन्हें ये नहीं बताया की वो मेरी ही कंपनी में काम करेगी. शनिवार सुबह मैं जल्दी से ऑफिस पहुँच गया.ठीक १० बजे आशु की एंट्री हुई. नारंगी रंग के सूट में आज आशु क़यामत लग रही थी.

आशु को देखते ही ये बोल अपने आप मेरे मुँह से निकलने लगे;

"एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा, जैसे

खिलता गुलाब, जैसे

शायर का ख्वाब, जैसे

उजली किरन, जैसे

बन में हिरन, जैसे

चाँदनी रात, जैसे

नरमी बात, जैसे

मन्दिर में हो एक जलता दिया. हो!"

मेरी बगल में ही राखी खड़ी थी और ये गाना सुनते ही मुझे कोहनी मारते हुए बोली; "क्या बात है राज जी?!!" अब मुझे कैसे भी बात को संभालना था तो मैंने बात बनाते हुए कहा; "सच में यार ये हूर-परी कौन है?"

"पता नहीं! चलो न चल के इंट्रो लेते हैं इसका." राखी ने खुश होते हुए कहा.

"ना यार! कहीं बॉस की कोई रिश्तेदार निकली तो सर क्लास लगा देंगे दोनों की." अभी हम दोनों ये बात कर ही रहे थे की आशु के ठीक पीछे से नितु मैडम और सर आ गये. और उन्हें देख कर हम दोनों अपने-अपने डेस्क पर चले गये. मैडम ने बॉस से आशु का इंट्रो कराया और बताया की प्रोजेक्ट के लिए आशु ने 'एज अ ट्रेनी' ज्वाइन किया हे. फिर मैडम ने मुझे और राखी को बुलाया और आशु से इंट्रो कराया; "आशु ये दोनों आपके टीम मेट्स हैं, राखी और राज " आशु ने राखी से हाथ मिलाया और मुझे हाथ जोड़ कर नमस्ते कहा. ये देख कर राखी के चेहरे से हँसी छुप नहीं पाई और उसे हँसता देख मैडम ने उससे पूछा भी की वो क्यों हँस रही है पर वो बात को टाल गई. "और राज ये हैं डॉली , फर्स्ट ईयर कॉलेज स्टूडेंट हैं." अब मैंने भी अपनी हँसी किसी तरह छुपाई और बस "नमस्ते" कहा. ये देख कर आशु के चेहरे पर भी मुस्कराहट आ गई. "अरे हाँ..आपकी डायरी इन्हीं ने लौटाई थी." मैडम ने मुझे डायरी वाली बात याद दिलाई| "ओह्ह! रियली!!! शुक्रिया डॉली जी!!" मैंने मुस्कुरा कर आशु को थैंक यू कहा.
 
मेरा आशु को डॉली कहने से उसे थोड़ा अटपटा सा लगा जो उसके चेहरे से साफ़ झलक रहा था.खेर मैडम ने आशु को ब्रीफ करने के लिए हम दोनों तीनों को अपने केबिन में बुलाया और आशु को राखी के साथ प्लानिंग और एनालिसिस में लगा दिया और मेरा काम इनकी प्लानिंग और एनालिसिस के हिसाब से पी. पी. टी. और एक्सेल शीट तैयार करना था. अभी चूँकि मुझे पहले बॉस का काम करना था तो मैं उसी काम में लगा था. पर मेरी नजरें काम में कम और आशु पर ज्यादा थी. आशु को वादा करने से पहले मैं कभी-कभी चाय-सुट्टा पीता था. उसी वक़्त राखी भी आ जाया करती थी पर वो सिर्फ चाय ही पीती थी. आज भी वही हुआ, राखी खुद भी आईं और साथ में आशु को भी ले आई.

राखी: अरे मुझे क्यों नहीं बोला की आप चाय पीने जा रहे हो?

मैं: आप लोग बिजी थे! (मैंने आशु की तरफ देखते हुए कहा और मुझे अपनी तरफ देखता हुआ पा कर आशु का सर शर्म से झुक गया.)

राखी: अच्छा?? (मेरे आशु को देखते हुए राखी ने जान कर अच्छा शब्द बहुत खींच कर बोला. जिसे सुन आशु की हँसी छूट गई.)

मैं: और बाताओ क्या-क्या सीखा रहे हो आप डॉली जी को? (मैंने इस बार राखी की तरफ देखते हुए कहा.)

राखी: घंटा! मैडम तो बोल गई की प्लानिंग करो एनालिसिस करो पर साला करना कैसे है ये कौन बताएगा? (राखी के मुँह से 'घंटा' शब्द सुन आशु हैरान हो गई.)

मैं: तो २ घंटे से दोनों कर क्या रहे थे?

राखी: कुछ नहीं.... कुछ इधर-उधर की बातें.आपकी बातें!!! (राखी ने मुझे छेड़ते हुए कहा.)

मैं: मेरी बातें?

राखी: और क्या? जब मैं पहलीबार ज्वाइन हुई तब मुझसे तो आपने कभी बात नहीं की? और डॉली को देखते ही गाना निकल गया मुँह से?

ये सुन कर मैं जानबूझ कर शर्मा गया और आशु हैरानी से आँखें बड़ी करके मुझे देखने लगी.

आशु: कौन सा गाना गए रहे थे सर?

राखी: एक लड़की को देखा तो....

मैं कुछ नहीं बोला और एक घूँट में सारी चाय पी कर वापस ऊपर आ गया, और मुझे जाता हुआ देख राखी ठहाके मार के हँसने लगी. आज आशु के मुझे 'सर' कहने पर मुझे एक अजीब सी ख़ुशी हुई और वो भी शायद समझ गई थी. लंच के बाद मैं दोनों के साथ रिसर्च, प्लानिंग और एनालिसिस में उनके साथ लग गया.मैंने दोनों को पुराना डाटा दिखाया और उसकी मदद से रेश्यो निकालना बता कर मैं अपने डेस्क पर वापस आ गया.कुछ देर बाद नितु मैडम भी आईं और वो भी मेरे इस बदले हुए बर्ताव से थोड़ा हैरान थी. उन्होंने मुझे दोनों की मदद करते हुए देख लिया था इसलिए मेरी सराहना करने से वो नहीं चूँकि; "अरे भैया तुम दोनों से ज्यादा होशियार है राज ! कुछ सीखो इनसे, अपना काम तो करते ही हैं साथ-साथ दूसरों की मदद भी करते हैं." ये बात मैडम ने रस्तोगी जी को सुनाते हुए कही.

शाम को जब जाने का नंबर आया तो मैं सोचने लगा की कैसे आशु को घर छोड़ूँ? अब मैं सामने से जा कर तो पूछ नहीं सकता था इसलिए मुझे कुछ न कुछ तो सोचना ही था! तभी मैडम ने उसे खुद ही लिफ्ट ऑफर कर दी और मैं बस आशु और मैडम को जाता हुआ देखता रहा. राखी पीछे से आई और मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए बोली; "आज लिफ्ट मिलेगी?" मैंने बस मुस्कुरा कर हाँ कहा और फिर आशु की जगह राखी को अपने पीछे बिठा कर उसके घर छोडा. मेरे घर पहुँचने के घंटे भर बाद आशु का वीडियो कॉल आया, वो बाथरूम में बैठे हुए खुसफुसाई;

आशु: आई लव यू जानू! उम्म म्म्म म...... मा....!!!!

मैं: क्या बात है बहुत खुश है आज?

आशु: जानू! बर्थडे के बाद आज का दिन मेरे लिए सबसे जबरदस्त था! कल के दिन के लिए सब्र नहीं कर सकती मैं|

मैं: अच्छा जी? जब मुझसे नाराज हुई थी और हमने पहली बार 'प्यार' किया था वो दिन जबरदस्त नहीं था? (मैंने आशु को छेड़ते हुए कहा.)

आशु: वो दिन तो मेरे जीवन का वो स्वरनािम दिन था जिसका बयान मैं कभी कर ही नहीं सकती. उस दिन तो हमने एक दूसरे को समर्पित कर दिया था. हमारा अटूट रिश्ता उसी दिन तो पूरा हुआ था.

मैं: वैसे आज मुझे तुम्हारे 'सर' कहने पर बड़ी अजीब सी फीलिंग हुई! पेट में तितलियाँ उड़ने लगी थी!

आशु: आपका नाम ले कर आपको पुकारने का मन नहीं हुआ, इसलिए मैंने आपको 'सर' कहा. एक बात तो बताइये, आपने सच में मुझे देख कर गाना गाय था?

मैं: हाँ, तू लग ही इतनी प्यारी रही थी की गाना अपने आप मेरे मुँह से निकल गया.

ये सुन कर आशु मुस्कुराने लगी. फिर इसी तरह हँसी-मजाक करते-करते खाने का समय हो गया और खाना मुझे ही बनाना था पर बुरा आशु को लग रहा था. "हमारी शादी जल्दी हुई होती तो मैं आपके लिए खाना बनाती." आशु ने नाराज होते हुए कहा. "जान! शादी के बाद जितना चाहे खाना बना लेना पर तब तक थोड़ा-बहुत एडजस्ट तो करना पड़ता हे." मैंने आशु को मनाते हुए कहा.

"वैसे कितना रोमांटिक होगा जब आप और मैं एक साथ एक ही ऑफिस जायेंगे?! स्टाफ के सारे लोग हमें देख कर जल-भून जायेंगे!" आशु की बात सुन कर मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई.

"लोगों को जलाने में बहुत मजा आता हैं तुम्हें?" मैंने पूछा.

"अब आपके जैसा प्यार करने वाला हो तो जलाने में मजा तो आएगा ही." आशु ये कहते हुए हँसने लगी. तभी बाहर से सुमन की आवाज आई; "अरे अब क्या बाथरूम में बैठ कर एकाउंट्स के सवाल हल कर रही है?! जल्दी बाहर आ, खाना लग गया हे." आशु ने हड़बड़ा कर कॉल काटा और मुझे बहुत जोर से हँसी आ गई. बाद में उसका मैसेज आया; "बहुत मजा आता है ना आपको मेरे इस तरह छुप-छुप कर आपसे बात करने में?!" मैंने भी जवाब में हाँ लिखा और फ़ोन रख कर खाना बनाने लगा. खाना खा कर बड़ी मीठी नींद सोया और सुबह जल्दी से तैयार हो गया, सोचा की आज आशु को मैं ही ऑफिस ड्राप कर दूँ पर फिर याद आया की किसी ने देख लिया तो? तभी दिमाग में प्लान आया की मैं आशु को बस स्टैंड पर छोड़ दूँगा वहाँ से वो पैदल आ जायेगी. पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. आशु को मैडम ही लेने आ रही थी. मैं अपना मन मार के ऑफिस पहुँचा, पर वहां कोई नहीं था तो मैं नीचे चाय पीने लगा, तभी वहां राखी आ गई और वो भी मेरे साथ चाय पीने लगी.
 
नितु मैडम और आशु एक साथ गाडी से निकले और हमारे पास ही आ कर खड़े हो गए और चाय पीने लगे. चाय पी कर हम सब एक साथ ऊपर आये और सीधा मैडम के केबिन में बैठ गये. कल के काम पर डिस्कशन के बाद मैडम ने तीनों को अलग-अलग बिठा दिया और राखी को प्लानिंग और आशु को एनालिसिस का काम दे दिया. मैं बैठा कुछ पी. पी. टी. स्टडी कर रहा था. मैडम भी मेरे पास आ गईं और कल जो कुछ थोड़ा बहुत काम हुआ था उसके ग्राफ्स बनाने में मदद करने लगी. मैडम को पमरे साथ बैठा देख आशु को अंदर से जलन होने लगी थी. वो बहाने से बार-बार आ रही थी और मैडम से कुछ न कुछ पूछ रही थी. हालाँकि आशु बहुत कोशिश कर रही थी की उसकी जलन मुझ पर जाहिर ना हो पर मैं उसकी जलन महसूस कर पा रहा था. आखरी बार जब आशु मैडम से कुछ पूछने आई तो मैडम उठ खड़ी हुई; "राज आप ये पी. पी. टी. का आर्डर ठीक करो मैं जरा डॉली को एक बार सारा काम समझा दूँ वरना बेचारी सारा टाइम इधर-उधर भटकती रहेगी.”

आशु को आधा घंटा समझाने के बाद मैडम ने मुझे उसकी हेल्प करने को कहा और खुद बाहर चली गई. अब मैंने आशु के साथ बैठ कर उसे कुछ फाइल्स वगैरह के बारे में बताया, क्योंकि उसे कंप्यूटर उसे थोड़ा-बहुत ही आता था जो भी उसने अभी तक कॉलेज में सीखा था. आज मैंने उसे माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के बारे में बताया और टाइप करने के लिए कुछ शॉर्टकट बताये. ये सब आशु ने ध्यान से सुना और अपने राइटिंग पैड में लिख लिया. जब मैं उठ के जाने लगा तो आशु ने मेरा हाथ चुपके से पकड़ लिया और मुझे खींच कर बिठा दिया. वो खुसफुसाती हुई बोली; "कहाँ जा रहे हो आप? बैठो ना थोड़ी देर और!" मैं भी बैठ गया पर हम दोनों में कोई बात नहीं हो रही थी. बस एक दूसरे को देख रहे थे. आशु ने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया था और उसके हाथों की तपिश मुझे मेरे ठन्डे हाथों पर होने लगी थी. उसके होंठ थर-थरा रहे थे और मेरा मन भी उन्हें चूमने को व्याकुल था! आज अगर ऑफिस नहीं होता तो हम दोनों मेरे घर पर एक दूसरे के पहलु में होते!

"यहाँ कोई एकांत जगह नहीं है जहाँ आप और मैं थोड़ा टाइम....." आशु इतना कहते हुए रुक गई. मुझे उसका उतावलापन देख कर हँसी आ रही थी; "जान! ये ऑफिस है मेरा! यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं हो सकता, किसी ने देख लिया ना तो ???"

ये सुन कर आशु का दिल टूट गया, "अच्छा चाय पियोगी?" ये सुन कर आशु की आँखों में चमक आ गई. हम दोनों उठ के नीचे आये और मैंने आशु को मेरी वाली स्पेशल चाय पिलाई. हम अभी चाय पी ही रहे थे की राखी आ गई; "अच्छा जी! मेरे से चोरी-छुपे चाय पी जा रही है?" उसने हम दोनों को छेड़ते हुए कहा.

"मैंने सोचा की आज डॉली जो को राज वाली स्पेशल चाय पिलाई जाये." मैंने बात बनाते हुए कहा.

"वो तो बिना सिगेरट के पूरी नहीं होती!" ये कहते हुए राखी ने चाय के साथ एक सिगरेट ली और कश ले कर मेरी तरफ बढ़ा दी. ये देख कर आशु हैरान हो गई. उसे लगा शायद मैंने उससे किया वादा तोड़ दिया हे.

"सॉरी! मैंने छोड़ दी." मेरा जवाब सुन कर राखी हैरान हो गई?

"हैं??? आप ही ने तो इलाइची वाली चाय के साथ ये कॉम्बो बनाया था और अब खुद ही नहीं पी रहे?" राखी की बात सुन कर आशु दुबारा हैरान हो गई.

"पर अब छोड़ दी. अब जीने की आदत हो गई हे." ये मैंने आशु को देखते हुए कहा. इस बार तो राखी ने मेरी चोरी पकड़ ही ली; "अच्छा जी!!! डॉली जी को खुश करने को कह रहे हो!" ये सुन कर हम तीनों ठहाका लगा कर हँसने लगे. बस इसी तरह हँसी-मजाक में वो दिन निकला और मैडम ने ही राखी और आशु को घर छोड़ा और मैं अकेला घर वापस आ गया.

इसी तरह आशु और मेरे प्यार भरे दिन बीतने लगे, सोमवार से शुक्रवार उससे शाम को मिलना और फिर शनिवार और इतवार साथ-साथ ऑफिस में पूरा दिन गुजारना. घर से फ़ोन आता तो मैं कह देता की मैं नहीं आ पाउँगा क्योंकि बॉस छुट्टी नहीं दे रहा हे. आशु के आने के बाद ऑफिस में एक ग्रुप बन गया था. मैं, नितु मैडम, राखी और आशु का एक ग्रुप और बाकी लोगों का एक ग्रुप! मैडम भी आशु के काम से बहुत खुश थीं और प्रोजेक्ट भी आधा खत्म भी हो गया था. मैडम तो इतनी खुश थीं की उन्होंने कहा की आशु की ग्रेजुएशन के बाद वो हमारा ऑफिस ही ज्वाइन कर ले.पर ये तो मेरा मन जानता था की आशु की ग्रेजुएशन के बाद तो हम दोनों ही यहाँ नहीं होंगे!

आज का दिन बहुत अलग था. चूँकि आज शनिवार था तो आज आशु भी ऑफिस आई हुई थी. ११ बजे राखी ऑफिस में आई और उसके हाथ में मिठाई का डिब्बा था. सबसे पहले बॉस को और फिर मैडम को उसने खुशखबरी दी की उसकी शादी तय हो गई हे. ऑफिस में सब का उसने मुंह मीठा कराया और मेरा नंबर आखरी था. आशु से प्यार होने से पहले मैं राखी को बहुत पसंद करता था. पर कभी उससे काम के इलावा कोई बात नहीं की. हम दोनों ने जो भी थोड़ा बहुत खुल के बातें की वो सब राख के मुंबई मिलने के बाद था. शायद इसीलिए उसकी शादी की बात सुन कर थोड़ा दुःख हुआ! पर अगले ही पल मुझे आशु का हँसता हुआ चेहरा दिखा और मुझे होश आया की मेरे पास तो आशु का प्यार है! मन में ख़ुशी थी इस बात की, की राखी की शादी हो रही है पर दुःख शायद इस बात का था की पिछले कुछ दिनों में हम जो थोड़ा बहुत खुल कर बातें करने लगे थे वो अब कभी नहीं हो पायेगी! मैं अपना ये गम छुपाये हुए था पर शायद आशु समझ चुकी थी. लंच में हम दोनों नीचे चाय पीने गए थे की तभी आशु ने मुझे एक तरफ अकेले में आने को कहा.

आशु: राखी वही लड़की है न जिसे आप बहुत प्यार करते थे?

मैं: पसंद करता था!

आशु: समझ सकती हूँ की आपको कैसा लगा होगा आज!

मैं: आई एम हॅपी फॉर हर!

आशु: आई नो, बट व्हॉट अबाऊट योवर इनर वाऊंड! इट मस्टबी हर्टींग यू फ्रॉम इंसाईड?!

मैं: इट दिड हर्ट, बट देन आई सॉ योवर ब्युटीफुल स्माइलींग फेस अँड रिअलाईज आई ह्यावं दीं मोस्ट लविंग पर्सन विद मी.

ये सुन कर आशु के गाल शर्म से लाल हो गये. आगे हम कुछ बातें करते उससे पहले ही राखी आ गई और उसकी और आशु की बातें शुरू हो गई. दोनों कपड़ों को ले कर कुछ बातें कर रही थीं, मैंने आखरी घूँट चाय का पिया और फिर वहाँ से निकल आया. वो पूरा दिन आशु मेरे आस-पास मंडराती रही, किसी न किसी बहाने से मुझसे कुछ भी पूछने आती और मुझे हँसाती बुलाती रहती. उस दिन आशु को नजाने क्या सूझी की उसने मैडम से जल्दी जाने की बात बोली, अब मैडम तो उसे घर छोड़ने के लिए निकलना चाहती थीं क्योंकि उनको बॉस के सामने काम करना बिलकुल पसंद नहीं था.

बॉस हमेशा उनपर धौंस जमाते और काम करवाते रहते थे. इसलिए मैडम इसी फिराक में रहती की कहीं न कहीं किसी न किसी बहाने से ऑफिस से निकल जाये. पर आशु ने बड़ी शातिर चाल चली; "मॅडम वो मुझे आझाद बाग मार्किट जाना है! वहाँ आपकी कार कैसे जाएगी? वहाँ तो पार्किंग भी नहीं मिलती? आप अगर सर (मेरी तरफ इशारे करते हुए) से कह दें तो वो मुझे वहाँ छोड़ देंगे?!" आशु ने जब मेरी तरफ इशारा किया तब मैं उसी तरफ देख रहा था पर जैसे मैडम ने मेरी तरफ देखा मैंने तुरंत नजरें फेर ली. मेरी खुशकिस्मती की मैडम समझ नहीं पाईं और उन्होंने मुझे आवाज लगा कर बुलाया; "राज जी! जरा हमारी डॉली की मदद कर दो. उसे आझाद बाग मार्किट जाना है, आप उसे वहाँ छोड़ दो."

ये सुन कर बिलकुल हैरान था; "पर मॅडम वहाँ तो इस वक़्त बहुत भीड़ होती है?"

"हाँ जी तभी तो आपको कह रही हूँ, आप डॉली को वहाँ छोड़ कर घर निकल जाना." मैडम ने कहा.

"पर मॅडम ...वो सर???" मैने थोड़ी चिंता जताई.

"कौन सा आप पहली बार जल्दी निकल रहे हो, मैं कह दूँगी की आज आपकी टूशन क्लास थोड़ा जल्दी थी." मैडम की बात सुन कर डॉली का मन प्रसन्न हो गया और उसकी ख़ुशी उसके चेहरे से झलकने लगी. मैंने अपना बैग उठाया और हम दोनों नीचे आने को उतरने लगे. पर मैं जानबूझ कर चुप रहा ताकि मैडम को ये ना लगे की ये हमारी मिली-भगत हे. नीचे आ कर मैंने आशु से कहा; "बहुत दिमाग चलने लगा है आज कल तेरा?" आशु बस हँसने लगी और आ कर मेरी बाइक पर पीछे बैठ गई. "अच्छा जाना कहाँ है?" मैंने पूछा. "बाज़ार जायेंगे और कहाँ?" आशु ने थोड़ा इठलाते हुए जवाब दिया. मैंने बाइक उसी तरफ भगाई, वहाँ पहुँच कर आशु ने मुझे एक दूकान के सामने रुकने को कहा. मेरा हाथ पकड़ के मुझे वो अंदर ले गई और मेरे लिए शर्ट पसंद करने लगी. पर बेचारी जल्दी ही मायूस हो गई; "क्या हुआ जान!" मैंने उससे प्यार से पूछा तो उसने बताया की जो स्टिपेन्ड मिला था उससे वो मेरे लिए एक शर्ट लेना चाहती थी पर शर्ट की कीमत १२००/- से शुरू थी. "अरे पगली! ये तो स्टिपेन्ड है सैलरी थोड़े ही?! जब सैलरी मिलेगी तब ले लेना शर्ट, अभी हम तेरे लिए कुछ बालियाँ खरीदते हे. पर आशु का मन नहीं था इसलिए मैंने उसे बहुत मस्का लगाया और उसके लिए मैंने बहुत सुंदर इमीटेशन वाली जेवेलरी खरीदवाई. पैसे आशु ने ही दिए और अब वो बहुत खुश थी; "पहली सैलरी जब मिलेगी ना तो आपके लिए मैं बिज़नेस सूट खरीदूँगी!" उसने मुझे चेताया और मैंने भी उसकी बात में हाँ मिला दी. उस दिन उसे मैंने ठीक ६ बजे उसके हॉस्टल छोड़ दिया और घर वापस आ गया.मन अब हल्का था और इसका सारा श्रेय आशु का जाता हे. अगर वो मेरी जिंदगी में ना होती तो मैं अभी कहीं बैठ कर दारु पी रहा होता.

कुछ और दिन बीते और आखिर मेरा जन्मदिन आ गया पर वो आया रविवार के दिन! शुक्रवार को ही आशु ने मुझे कह दिया था की मैं रविवार की छुट्टी ले लूँ पर जब मैंने नितु मैडम से छुट्टी मांगी तो उन्होंने कहा; "राज जी! रविवार को तो वीडियो कॉन्फ्रेंस है और हम सबको वहीँ बैठना है और आप ही तो उन्हें ग्राफ्स और पी. पी. टी. समझाओगे! ये (बॉस) तो उस दिन यहाँ होंगे नहीं!" अब मैं आगे क्या कहता इसलिए मैंने उनकी बात मान लीं और आशु को लंच में फ़ोन कर के बता दिया. आशु का तो मुँह बन गया और वो मुझसे 'थोड़ा' नाराज हो गई. अगले दिन जब वो आई तब भी मुझसे कुछ नहीं बोली और मुझे गुस्सा दिखाते हुए मुँह इधर-उधर झटकती रही! उस दिन बॉस ने सारा काम मेरे मत्थे थोप दिया था और खुद रस्तोगी जी और बाकियों को ले कर इलाहबाद निकल गये. मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर यहि सोच कर संतोष कर लिया की कम से कम आशु तो मेरे सामने है ना. अब उसे मनाने के लिए मैं ही उसकी डेस्क के आस-पास मंडराता रहा.

"जान! मेरा प्यार बच्चा! मुझसे नाराज है?" मैंने सबसे नजर बचाते हुए आशु से तुतलाती हुई जुबान में कहा. ये सुन कर आशु के चेहरे पर हँसी छा गई. "जानू! प्लीज कल छुट्टी ले लो, आपका बर्थडे अच्छे से सेलिब्रेट करना है!" आशु ने बहुत सारा जोर दे कर कहा. "बाबू! मैडम ने कहा है की कल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग है और हम तीनों आना हे. इसलिए मुझे तो क्या आपको भी छुट्टी नहीं मिलेगी. ऐसा करते हैं की ऑफिस के बाद कहीं बाहर चलते हैं!" मैंने आशु को समझाते हुए कहा. "पर हॉस्टल में क्या कहूँगी?" आशु ने पूछा. अब इसका तो कोई इलाज नहीं था मेरे पास! "एक आईडिया है! आज जा के आंटी से कह देना की कल तुम्हें गाँव जाना है, मैं तुम्हें ठीक ७ बजे लेने आऊँगा और फिर तुम अपना छोटा सा बैग मेरे घर पर रख देना. उसके बाद ऑफिस और फिर बाद में पार्टी!" ये सुन कर आशु इतनी खुश हुई की उसने मुझे गले लगाने को अपने हाथ खोल दिया पर जब उसे एहसास हुआ की वो ऑफिस में है तो उसने ऐसे जताया जैसे वो अंगड़ाई ले रही हो.

अगले दिन सारा काम प्लान के हिसाब से हुआ, मैं आशु को लेने अपनी बाइक पर हॉस्टल पहुँचा और वो सुमन को बाय बोल कर मेरे साथ निकल पडी. हमने घर पर आशु का बैग (जिसमें आशु जब गाँव जाती थी तो कुछ किताबें ले जाय करती थी.) रखा और फिर मैंने कपडे बदले और दोनों ऑफिस आ गये. आज मैंने आशु के सामने पहली बार शर्ट और टाई बांधी थी. शर्ट अंदर टक थी और टाई लटक रही थी. आशु का मन बईमान हो रहा था और वो बार-बार सब की नजरें बचा कर मुझे कभी किस करने का इशारा, तो कभी आँख मार देती. जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू हुई तो मैडम ने सबसे पहले अपना ओपनिंग स्टेटमेंट दिया और उसके बाद आशु और राखी ने अपने एनालिसिस के बारे में बताया और मैं उन्हीं के साथ खड़ा हो कर ग्राफ्स दिखा रहा था. इसी एनालिसिस और ग्राफ्स के साथ मैंने नितु मैडम के क्लोजिंग स्टेटमेंट की पी. पी. टी. चला दी.
 
प्रेजेंटेशन के बाद मैडम बहुत खुश थीं और वो राखी और आशु के गले लग कर अपनी ख़ुशी प्रकट कर रही थी. पर मुझसे वो गले नहीं मिलीं बल्कि हैंडशेक किया और बधाई दी! “गाईज आई ह्याड लाईक टू सेलिब्रेट दिस डे, नॉट ओन्ली वी नेल दीं प्रेझेंटेशन बट इट्स अवर बिलवेड राज 'ज बर्थ डे!” मैडम की बातें सुन कर मैं हैरान हो गया और अचरज भरी आँखों से उन्हें देखने लगा.

“यू थोट यू कॅन इस्केप वीदाऊट गिविंग अस ट्रीट?? हम्मंन??” मैं अब भी हैरान था और इधर राखी आ कर मेरे गले लग गई और 'हॅपी बर्थ डे डिअर' बोली. मैं अब भी हैरान था की मैडम को कैसे पता? "मॅडम, बट हाऊ दिड यू …..” मेरी बात मैडम ने पूरी होने ही नहीं दी और बोल पड़ीं; "आई एम रियली सॉरी! एक ही जगह काम करते हुए हमें ३ साल होगये पर आज तक मैंने कभी आपको बर्थडे विश नहीं किया, न कभी मैंने आपसे पूछा न कभी इस बारे में सोचा पर उस दिन अचानक से मेरी नजर आपकी फाइल पर पड़ी और आपका रेजुम पढ़ा तब पता चला. सच में हम लोग अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त हैं की अपने करीबी लोगों के, अपने कलिग के बर्थडे तक याद नहीं रखते.खेर अब ऐसा नहीं होगा और आज की पार्टी मेरी तरफ से!" मेरा ध्यान अब भी मैडम की बातों पर था और आशु मेरी तरफ देख कर हैरान थी. मैडम मेरे पास आईं और मुझे 'हॅपी बर्थ डे राज जी!' बोला और गले लग गईं, मैं अब भी कोई रियाक्ट नहीं कर पा रहा था. मेरे मुँह से बस 'शुक्रिया मॅडम' निकला.

नितु मैडम को मेरे गले लगा देख आशु को जलन होने लगी और वो मेरे पास आई 'हॅपी बर्थ डे सर!!!' बोल कर मेरे गले लग गई. मैंने भी बहुत गर्म जोशी से उसे कस के गले लगा लिया और 'शुक्रिया' बोला. “लेट्स गो टू अ पब!” मैडम ने बड़ी गर्म जोशी में कहा और राखी तुरंत तैयार हो गई पर मैं और आशु अब भी खामोश खड़े थे. "डॉली आप ड्रिंक करते हो?" मैडम ने आशु से पूछा. "किया तो नहीं मैडम पर आज जरूर करुंगी." आशु ने भी बड़ी गर्म जोशी से जवाब दिया. "और आप राज जी, आज तो आपको भी पीनी होगी!" मैडम ने मुझे हुक्म देते हुए कहा. मैंने नजर बचाते हुए आशु की तरफ देखा तो वो पहले से ही मेरी तरफ देख रही थी और जैसे ही हमारी नजर मिली तो उसने सर हिला कर हाँ कहा. मैंने भी मैडम को जवाब सर हिला कर हाँ कहा.

मैडम ने और मैंने अपनी-अपनी गाड़ियाँ ऑफिस के पार्किंग लोट में ही छोड़ दी और मैंने कैब बुलवाई, मैं ड्राइवर के साथ और बाकी तीनों पीछे बैठ गये. पब का चुनाव मैंने ही किया, ये एक ब्रेवरी थी और यहाँ की बियर बहुत ही मशहूर थी. हम चारों ने दो काउच वाला टेबल पकड़ा, अब मैडम एक काउच पर बैठ गईं और राखी दूसरे काउच पर.बचे मैं और आशु, तो आशु तो मैडम के बगल में बैठने से रही. आखिर वो राखी की बगल में बैठ गई और मैं मैडम के बगल में, ड्रिंक्स मेनू मैडम और मैंने उठाया; "भई मैं तो ३० मिली चिवागे लूँगी आप लोग देख लो क्या लेना हे." इतना कह कर मैडम ने मेनू रख दिया.

"मॅडम पहले एक-एक लार्जर बिअर लेते हैं, इट्स देअर स्पेशालिटी अँड आई प्रॉमिस यू आर गोना लव इट!” मैडम ने झट से मेरी बात मान ली और मैंने ४ लार्जर बिअर आर्डर की. "क्या बात है राज जी? बड़ी नॉलेज है आपको बीयर्स की?" राखी ने मुझे छेड़ते हुए पूछा. "कॉलेज के दिनों में कभी-कभी दोस्तों के साथ आता था." मैंने कहा. जब बियर आई, सबने चीयरररर.. स्स किया और एक-एक सिप लिया तो मैडम की आँखें हैरानी से फटी रह गई. "राज जी! यू आर अ जिनियस! मानना पड़ेगा की आपकी ड्रिंक्स के मामले में चॉइस बहुत बढ़िया है!"

राखी भी तारीफ करने से नहीं चुकी; "सीरियसली राज जी! ना तो ये कड़वी है ना ही इसकी महक इतनी स्ट्रांग है! मैंने आजतक जितनी भी बियर पि ये वाली उनमें बेस्ट हे."

"अरे डॉली तुम्हें अच्छी नहीं लगी?" मैडम ने डॉली से पूछा. "मॅडम पहली बार के लिए ये एक्सपीरियंस बहुत बढ़िया हे. मैं सोच रही थी की ये बदबू मारेगी और मुझे कहीं वोमिट ना हो जाये पर ये तो बहुत स्मूथ हे." आशु ने मेरी तरफ देखते हुए कहा. अब खाने की बारी आई तो आशु को छोड़ कर हम तीनों नॉन-वेज निकले. हम सब के लिए तो मैंने चिकन विंग्स मंगाए और आशु के लिए हनी चिल्ली पोटैटो, आज पहली बार उसने ये डिश खाई और उसे पसंद भी बहुत आई. बियर का मग खत्म करते ही, सब पर बियर सुरूर चढ़ने लगा. लाउड म्यूजिक का असर राखी और आशु पर छाने लगा, अगला राउंड फिर से रिपीट हुआ. इस बार तो बियर खत्म होते ही राखी उठ खड़ी हुई और डी.जे. के सामने खड़ी होकर झूमने लगी और गाने पर थिरकने लगी.

दो मिनट बाद वो आशु को भी खींच कर ले गई. बियर का नशा आशु पर थोड़ा ज्यादा ही दिखने लगा और दोनों ने झूमना शुरू कर दिया. गाने अभी अंग्रेजी बज रहे थे, मैं और मैडम अकेले बैठे बस गाने को एन्जॉय कर रहे थे.

कुछ देर बाद मैडम ने पूछा की क्या मैं हार्ड ड्रिंक लूँगा तो मैंने हाँ कह दिया. मैडम ने दो चिवागे ३० मिली मंगाई! हमने चियर्स किया और पहला सिप लिया. मैंने आज पहलीबार इतनी महंगी दारु पि थी और उसका स्वाद वाक़ई में बहुत अच्छा था. बिलकुल स्मूथ और गले से उतरते हुए बिलकुल नहीं जल रही थी. टेस्ट भी बिलकुल स्मूथ... मैं तो उसके सुरूर में खोने लगा था. इतने दिनों बाद दारु मेरे सिस्टम में गई थी और पूरा सिस्टम ख़ुशी में नाच रहा था! मैडम को अब अच्छा नशा हो गया था और वो उठ कर खड़ी हुईं और वेटर को बुला कर उसके कान में कुछ कहा और फिर मेरा हाथ पकड़ के मुझे खड़ा किया. मैडम मुझे जबरदस्ती डांस फ्लोर पर ले गईं और उन्होंने थिरकना शुरू कर दिया. डी.जे. ने आखिर मैडम का गाना बजा दिया; "आजा माहि... आजा माहि...आ सोनिये वे आके ..." ये सुनते ही मैडम ने जो डांस किया की मैं बस देखता ही रह गया, आशु और राखी भी मैडम के साथ डांस करने लगे. मैडम मेरी तरफ देखते हुए डांस कर रही थी और लिप सिंक कर के गा रही थीं; "आजा माही... आजा माही... आ सोनेया वे आके अज मेरा गल लग जा तू!" ये सुन कर मुझे बड़ी शर्म लग रही थी. पर आशु का ध्यान इस पर नहीं था.

मैंने भी थोड़ा डांस करना शुरू कर दिया था और तीनों के साथ डांस कर रहा था. अगला गाना बजा; "एंजल..." और फिर तो मैडम और मैंने मिलके साथ डांस किया. मैडम ने आकर मुझे गले लगा लिया और मेरा हाथ उठा कर अपनी कमर पर रख लिया और अपनी बाहें मेरे गले में डाल दि और हम दोनों थिरकने लगे. आशु ने जब ये देखा तो उसने कुछ रियेक्ट नहीं किया बस मुझे आँख मार दी और अपना डांस चालु रखा. "माई बेबी’ गो टू.....” मैं और मैडम एक साथ लिप सिंक कर के गा रहे थे. फिर गाने की लाइन आई; "तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया, बैठे ही बैठे मैंने दिल खो दिया!" तो मैडम ने मेरी आँखों में आँखें डालते हुए गाने लगी. मैंने मैडम की इस बात का कोई जवाब नहीं दिया. देता भी क्या? मुझे लग रहा की मैडम तो बस गाना गा रही हैं, सच में मुझसे प्यार का इजहार थोड़े ही कर रहीं हैं! वैसे ये सुनने में रोमांटिक तो लग रहा था पर हम तो पहले ही आशु के हो चुका था.!

अगला गाना चेंज हुआ तो मैडम शर्मा गईं और अपना पेग पीने चली गईं और इधर आशु मेरे पास आ कर नाचने लगी. अगला गाना ये प्ले हुआ; "गज़ब का है दिन सोचो ज़रा ये दीवानापन देखो ज़रा तुम हो अकेले हम भी अकेले मज़ा आ रहा है कसम से.. कसम से.." बस फिर क्या था मैंने और आशु ने किसी की भी परवाह किये बगैर एक दूसरे को कस कर बाहों में भरा और गाने पर थिरकने लगे.
 
अब मैडम भी अपना पेग खत्म कर के वापस आ चुकी थीं, मैंने भी धीरे-धीरे आशु से दूरी बना ली और मैडम को शक नहीं होने दिया. अगला गाना बजा; "थोया-थोया" और अब तक राखी जो लड़कियों वाले ग्रुप में नाच रही थी वो मेरे पास आ गई;

"तूने क्या किया मेरी जान-ए-जा

एक नज़र में ही दिल चुरा लिया

मुझको क्या हुआ कोई जाने न

तुझको देखा तोह होश खो दिया" राखी ने ये लाइन मेरी तरफ ऊँगली करते हुए गाई.अब जब मेरी बारी आई तो मैंने भी गाने की आगे की लाइन गाई;

"तेरी हर नज़र तेरी हर अदा

क्या कहु तुमपे दिल है यह फ़िदा

तुझसे है ज़मीन तुझसे आसमान

तुझसे बढ़कर नहीं कोई नशा" और हम सारे नाचने लगे. अब बारी थी मेरी की मैं भी अपना पेग खत्म कर दूँ तो मैं तीनों को नाचता हुआ छोड़ के अपना पेग पीने लगा.

तभी वहां नेक्स्ट गाना लगा; “शेप ऑफ यू” मैं जल्दी से वपस डांस फ्लोर पर आ गया और चारों जोश से भर के नाचने लगे, "आई एम इन लव विद योवर बॉडी…

ओह—I—ओह—I—ओह—I—ओह—I" ये लाइन चारों एक साथ चीखते हुए गा रहे थे. इस गाने के खत्म होने के बाद चारों चूँकि थक चुके थे. इसलिए सारे वापस आ कर काउच पर 'फ़ैल' गए! जब सबकी सांसें दुरुस्त हुईं तो राखी ने कहा की उसे एक और बियर चाहिए और आशु ने कहाँ मुझे कोई हार्ड ड्रिंक ट्राय करना हे. मैं हैरानी से आशु की तरफ देखने लगा, मैंने सोचा की मुझे उसे समझाना चाहिए तो मैंने बात बदलते हुए कहा; "आप में से किसी को ब्रेवरी ट्यांक देखना है?" आशु ने जल्दी से अपना हाथ उठाया पर उसके अलावा किसी ने कोई जोश नहीं दिखाया. मैडम ने भी कहा की बाद में देखेंगे अभी मैं ड्रिंक्स का आर्डर दे दू. "डॉली जी, आप आज लाईट ट्राय कर के देखो|" मैंने कोशिश की कि आशु हार्ड ड्रिंक ना ले वरना वो आज क्या रायता फैलाती ये मैं जानता था. "ये हार्ड ड्रिंक है?" आशु ने फटक से पूछा. "नहीं... इट्स लाँग आई ल्यांड आइस टी"

"पर बियर के बाद चाय कौन पीता है!" आशु ने बड़े भोलेपन से पूछा.

आशु की बात सुन कर मैं बहुत जोर से हँसा, राखी और यहाँ तक कि मैडम को भी नहीं पता था कि लाईट क्या होती है! "ये कोई चाय नहीं है बल्कि दो-तीन तरह कि हार्ड ड्रिंक्स को मिला कर बनाया जाता हे. टेस्ट में ये मीठी होती है पर नशा बियर के मुकाबले थोड़ा ज्यादा होता हे." ये सुन कर तीनों ने ट्राय करने की हामी भरी और मैंने तीनों के लिए ये मंगाई और अपने लिए 'एल बिअर' मंगा.| जब आर्डर सर्व हुआ तो तीनों मेरी तरफ देखने लगे और पूछने लगे की मैंने क्या मंगाया है? "ये 'एल बिअर' हे. ये थोड़ी स्ट्रांग है, टेस्ट में हलकी सी कॉफ़ी की महक आती हे." ये सुनना था की सबसे पहले मैडम ने एक सिप लिया और दूसरा सिप आशु ने लिया और लास्ट सिप राखी ने लिया.

"ये तो थोड़ी कड़वी है!" आशु ने मुँह बनाते हुए कहा. उसके इस बचकानेपन पर मुझे हँसी आ गई. आधी बियर खत्म कर मैं वाशरूम के लिए उठा और आशु भी उठ खड़ी हुई और फिर हम दोनों वाशरूम आ गये. अंदर घुसने से पहले ही मैंने आशु का हाथ पकड़ लिया और उसके कान में बोला; "हार्ड ड्रिंक मत लेना!" उसने सवालियां नजरों से पूछा की आखिर क्यों नहीं लेना तो मैंने उसे समझाया; "नशे में अगर तुमने कुछ बक दिया तो काण्ड हो जायेगा!" पर उसने मेरी बात को अनसुना किया और वाशरूम में घुस गई. मैं भी वाशरूम में घुस गया पर मन ही मन तैयारी कर चूका था की बेटा आज तो काण्ड होना तय है! वापस आया तो मैडम ने कहा की सब ब्रेवरी ट्यांक देखना चाहते हे. मैं उन्हें काउंटर के पीछे ले गया और उन्हें स्टेनलेस स्टील से बने टैंक दिखाये. तीनों वो देख कर खुश हो गए, दरअसल ये तो दारु थी जिसका थोड़ा-थोड़ा नशा सब पर छाने लगा था. हम वापस आ कर बैठे ही थे की डी.जे. ने गाना लगाया 'साइको सैयां'.अब ये सुन के तो तीनों पागल हो गए और मुझे खींच कर डांस फ्लोर पर ले आये और तीनों मेरे से चिपक कर नाचने लगे. मैं भी शराब के सुरूर में तीनों के साथ कदम से कदम मिला कर डांस करना शुरू कर दिया. उसके बाद तो डी.जे ने एक के बाद ऐसे गाने बजाये की हम चारों ने बिना रुके आधा घंटा डांस किया. आखिर कर थक कर हम चारों काउच पर बैठे और मैडम ने लास्ट राउंड खुद आर्डर किया. चिवागे के २ ३० मिली पेग और मेरे और अपने लिए मैडम ने ६० मिली लार्ज पेग मंगाया. मेरा कोटा सबके मुकाबले काफी बड़ा था इसलिए मैं अब भी होश में था. जबकि आशु और राखी तो ढेर हो चुका था., दोनों को बहुत तगड़ा नशा हो चुका था.

मैंने मैडम से चलने को कहा तो उन्होंने बिल मंगवाया और बिल ८,०००/- का आया. अब मैं और मैडम बिल भरने के लिए जिद्द करने लगे पर मैडम ने बात नहीं मानी और खुद ही बिल भरा. जब मैडम उठ कर खड़ी हुईं तो नशा उन पर जोर दिखाने लगा और वो लडख़ड़ाईं, मैंने उन्हें संभालना चाहा तो मेरा हाथ सीधा उनकी कमर पर जा पहुंचा.फिर मैडम ने जैसे-तैसे खुद को संभाला, पर आशु और राखी तो काउच पर ऐसे फैले हुए थे जैसे की कोई लाश! मैंने दोनों को उठाया और चलने को कहा तो दोनों से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था. मैडम ये देख कर हँसने लगी. अब मैंने दोनों को जैसे-तैसे सहारा देकर उठाया और दोनों ने अपनी एक-एक बाँह मेरे गले में डाल दी. मैं दोनों के बीच में था और मैंने दोनों को उनकी कमर से संभाला हुआ था. आशु और राखी का सर मेरे सीने पर था और मैडम ने इस मौके का फायदा उठा कर अपना फ़ोन निकला और मेरी इस हालत में फोटो खींची और फिर हम चारों की सेल्फी भी ली. जैसे-तैसे मैं दोनों को बाहर ले कर आया और मैडम भी लड़खड़ाते हुए बाहर आ कर खड़ी हो गई.

"राज जी ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई !!! कैब बुला..... लो ..... नाआ...." मैडम ने शब्दों को खींच-खींच कर बोलना शुरू कर दिया. पर मैं कैब बुलाऊँ कैसे? आशु और राखी दोनों मेरे सीने से चिपकी हुई थी. मैंने दोनों को हिला- डुला कर होश में लाना चाहा, जैसे ही दोनों को थोड़ा होश आया की दोनों ने उलटी करनी शुरू कर दी. दोनों ही मुझसे अलग हो कर अलग-अलग दिशा में जा कर उलटी करने लगी. अब मैंने फटाफट फ़ोन निकाला और कैब बुक कर दी. मैंने पानी की बोतल ला कर आशु और राखी को दी और तभी कैब आ गई. अब तो मुझ पर भी दारु का असर चढ़ना शुरू हो गया था पर उतना नहीं था जितना मैडम और आशु पर था. मैं आगे बैठा और बाकी तीनों बड़ी मुश्किल से पीछे बैठे.किसी का हाथ किसी पर था तो किसी का मुँह किसी की गोद में! ड्राइवर भी हँस रहा था और कह रहा था साहब कैसे छोड़ोगे सब को? मैंने उसे पहले मैडम को घर छोड़ने के लिए कहा और गाडी उस तरफ चल पडी. मैडम का घर आया तो मैंने मैडम को जगाया, उनकी तो आँख भी नहीं खुल रही थी. कुनमुनाते हुए वो उठीं और शायद उनको थोड़ा होश था तो वो बोलीं की आज रात सब उन्हीं के घर सो जाते हे. मैंने मना किया तो मैडम ने कहा की आशु को हॉस्टल इस हालत में कैसे छोड़ोगे? और राखी को उसके घर कैसे छोड़ोगे? उसके घर वाले बवाल करेंगे. आखिर मैडम ने राखी के घर फ़ोन कर के बोल दिया की राखी उन्हीं के घर रुकेगी रात और कल सुबह आ जायेगी घर.

मैं और मैडम पहले गाडी से उतरे पर बाकी दोनों देवियाँ बेसुध पड़ी थी. मैंने आशु को खींच कर बाहर निकला और मैडम ने राखी को, आशु को मैंने गोद में उठा लिया और जैसे ही उसे मेरे जिस्म का एहसास हुआ उसने अपने दोनों हाथों को मेरे गले में डाल दिया. मैडम ने मुझे जब इस तरह से आशु को उठाये हुए देखा तो वो आँखें चढ़ा कर मुझे छेड़ते हुए बोली; "क्या बात है राज जीईईईईईईईईई !!!" मैंने बस मुस्कुरा दिया और आगे कहता भी क्या.मैडम ने राखी को अपने शरीर का सहारा दे रखा था और उसका दाएं हाथ मैडम के गले में था. मैडम आगे और मैं पीछे था. दरवाजा खोल कर मैडम अंदर आईं और मुझे एक कमरे की तरफ इशारा किया, मैं वहीँ पर आशु को ले कर घुस गया.मैडम भी मेरे पीछे-पीछे राखी को ले कर आईं और राखी तो बेड पर औंधी पड़ गई (कुछ इस तरह)|

पर आशु ने अपनी बाहों को मेरे गले में कस रखा था. जब मैं उसे लिटाने लगा तो वो मुझे किस करने के लिए इशारा करने लगी. ये मैडम ने देखा तो वो दरवाजे का सहारा ले कर खड़ी हो गईं और देखने लगीं की क्या मैं उसे किस करूँगा या नहीं?! चाहता तो मैं भी आशु को चूमना था पर मैडम के होते हुए ये नहीं हो सकता था. मैंने मैडम की तरफ मुँह घुमा लिया ताकि आशु मुझे किस न कर सके.मैडम ये देख कर हँस पड़ी और मैं भी हँस दिया. जैसे-तैसे मैंने आशु के हाथों को अपनी गर्दन से छुड़ाया और मुड़ के जाने लगा तो वो बुदबुदाते हुए बोली; "जानू!...उम्म्म... ममम.... प्लीज...!!!" अब मैं क्या कहूं क्या करूँ कुछ समझ नहीं आया पर शुक्र है की मैडम ने इसका कोई गलत मतलब नहीं निकाला और बोली; "आज कुछ ज्यादा ही नशा हो गया डॉली को, ये भी होश नहीं है की वो कहाँ है और किसके साथ हे." मैंने बस जवाब में 'जी' कहा और हम बाहर हॉल में आ गए, अब बात ये थी की मैं सोऊँगा कहाँ? पर मैडम तो आज कुछ ज्यादा ही मूड में थी. उन्होंने १००० पाईपर की बोतल निकाली और दो पेग बना कर ले आई.

मैं तो आज जैसे सातों जन्म की दारु की प्यास बुझा लेना चाहता था क्योंकि जानता था की कल से आशु मुझे पीने नहीं देगी. इसलिए मैंने पेग लिया और खड़ा-खड़ा ही पीने लगा और मैडम के घर को देखने लगा. उनसे नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी इसलिए मैं बस नजरें चुरा रहा था. "राज जीईईईईईई!!! आप मेरे रूम में सो जाइये मैं यहाँ हॉल में काउच पर सो जाऊंगी." अब भला मैं ये कैसे मान सकता था; "नहीं मॅडम आप अंदर सो जाइये मैं यहाँ सो जाऊंगा."
 
"आज तो आप बर्थडे बॉय हैं, आज तो आपका ज्यादा ख्याल रखना चाहिए." मैडम ने सिप लेते हुए कहा.

"मॅडम अब तो १२:३० बज गए, मेरा दिन ख़त्म! अब तो मैं वापस से पहले वाला राज ही हु." मैंने अपने पेग का आखरी घूँट पीते हुए कहा.

"चलिए ना आपकी न मेरी, हम दोनों ही सो जाते हैं!" मैडम ने थोड़ा दबाव बनाते हुए कहा और मेरा हाथ पकड़ के मुझे कमरे की तरफ ले जाने लगी. पर मैं वहीँ रूक गया और बोला; "मॅडम अच्छा नहीं लगता! आशु...मेरा मतलब डॉली और राखी भी हैं घर पर... वो कल सुबह उठेंगी तो कुछ गलत न सोचें.इसलिए प्लीज मॅडम आप अंदर सो जाइये मैं बाहर सो जाता हु." मैंने मैडम से विनती की तो मैडम मेरी आँखों में देखने लगी; "सच्ची राज जी! आप ..... कुछ ज्यादा ही .... खय... (ख़याल)… सोचते हो." मैडम ने किसी तरह से बात को संभालते हुए कहा. वो जानती थी की मेरे मन में उनके लिए प्रेमियों वाल प्यार नहीं बल्कि एक अच्छे दोस्त जैसे मान-सम्मान हे. इसलिए वो मुस्कुरा दीं और मुझे अंदर से तकिया ला कर दिया और फिर सोने चली गई. मैं भी काउच पर जूते-मोजे उतार के लेट गया और फ़टक से सो गया.शराब का नशा अब दिमाग पर बहुत चढ़ रहा था.

रात के करीब २ बजे होंगे की मुझे किसी के हाथ का स्पर्श अपने होठों पर हुआ.ये कोई और नहीं बल्कि आशु थी जो अभी भी नशे में थी और अपने बिस्तर से उठ कर मेरे सिरहाने खड़ी थी. पर मुझ पर तो दारु का नशा सवार था इसलिए मैं बस उस हसीं पल का लुत्फ़ उठा रहा था. जिसमें आशु मेरे होठों को बारी-बारी चूस रही थी. उसके हाथों ने मेरी कमीज के बटन खोलने शुरू कर दिए थे और मैं अब भी होश में नहीं आया था. सारे बटन खोल कर आशु मेरी टांगों की तरफ आई और झुक कर मेरी पैंट की ज़िप खोली, फिर बेल्ट खोलने की कोशिश में उसने मुझे थोड़ा हिला दिया जिसके कारन मेरी नींद टूटी और मैं कुनमुनाया; "उम्म्म...ममम" पर आशु को जैसे कुछ फर्क ही नहीं पड़ा और वो फिर से मेरी बेल्ट खोलने लगी. पर चूँकि बेल्ट बहुत टाइट थी तो उसे खोलने में आशु को कठनाई हो रही थी. उसने हार मानते हुए मुझे ही हिलाना शुरू कर दिया. ३-४ बार हिलाते ही मेरी आँख खुल गई. पर हॉल में कम रौशनी थी जिससे मैं ये नहीं देख पाया की कौन है और खुसफुसाते हुए पूछ बैठा; "कौन है?" जवाब में आशु ने मेरे होठों को फिर से अपने मुँह में भर लिया और मेरे ऊपर के होंठ को चूसने लगी. अब मुझे समझते देर न लगी की ये आशु है, पर दिमाग नशे से इतना सुन्न था की मैं जल्दी रियेक्ट नहीं कर पाया. पर फिर भी इतनी सुद्ध तो थी की मैं अपने घर नहीं बल्कि मैडम के घर पर हूँ और वहाँ मेरे और आशु के अलावा दो लोग और हे. मैंने बड़ी मुश्किल से आशु के होठों से अपने होठों को छुड़वाया और खुसफुसाते हुए बोला; "जान! क्या कर रहे हो? हम मॅडम के घर पर हैं! कोई आ जायेगा...." पर मेरी बात पूरी होने से पहले ही आशु मेरे ऊपर लेट गई और फिर से अपने होठों से मेरे होठों को कैद कर लिया. अब तो मुझे भी जोश आ ने लगा था पर खुद को काबू करने लगा. दो मिनट मेरे होंठ चूसने के बाद आशु ने खुद ही उन्हें छोड़ दिया और मेरी छाती पर सर रख कर बोली; "जानू! आज बहुत मन कर रहा है! बड़े दिन हुए आपने मुझे प्यार नहीं किया?!"

"जान! हम मॅडम के घर पर हैं, कोई आगया तो?" मैंने आशु को समझाते हुए कहा.

"कोई नहीं आएगा जानू! मॅडम और राखी दोनों गहरी नींद में हैं और मैंने मॅडम के कमरे का दरवाजा बंद कर दिया हे. प्लीज मान जाओ ना!" अब मेरा प्यार मुझसे इतने प्यार से मिन्नत कर रहा है तो मैं भला उसका दिल कैसे तोड़ सकता था. "तो आप नहीं मानने वाले ना?!" मैंने आशु के बालों में हाथ फेरा और उसे उठ कर खड़ा होने को कहा. मैंने एक बार खुद इत्मीनान किया की मैडम और राखी सो रहे हैं ना?! फिर दोनों कमरों के दरवाजे को मैंने धीरे से बंद कर दिया. वापस आया तो आशु काउच पर लेटी थी और उसने अपने डिवाइडर का नाडा खोल कर नीचे खिसका दिया था. उसकी पैंटी भी घुटनों तक उतरी हुई थी. अब मैंने भी जल्दी से अपनी पैंट खोल दी और कच्छा नीचे किया और लिंग पर खूब सारा थूक चुपेड़ा.अपने घुटने मोड़ कर मैं आशु के ऊपर छा गया और हाथों से पकड़ के लिंग उसकी योनी के द्वार से भीड़ा दिया. मैं जानता था की जैसे ही मैं लिंग आशु की योनी में पेलुँगा वो दर्द से चिल्लायेगी इसलिए मैंने सबसे पहले उसके होठों को अपने मुँह से ढक दिया. मैंने अपनी जीभ उसके मन में डाल दी और आशु उसे चूसने लगी. इसका फायदा उठाते हुए मैंने नीचे से अपने लिंग को उसकी योनी में उतार दिया. सिर्फ सुपाड़ा ही अंदर गया था की आशु ने मेरी जीभ को दर्द महसूस होने पर काट लिया. अब 'आह' कहने की बारी मेरी थी पर वो आवाज निकल नहीं पाई, जोश आया तो मैंने नीचे से एक और झटका मारा और आधा लिंग योनी में पहुँच गया.आशु ने मेरी जीभ छोड़ दी और उसकी सीत्कारें मेरे मुँह में ही दफन हो कर रह गई. कुछ "गुं..गुं..गुं..!!!" की आवाजें बाहर आ रहीं थी.

आशु का दर्द मुझसे कभी बर्दाश्त नहीं होता था. इसलिए मैं तुरंत रूक गया.मैंने उसके होठों के ऊपर से अपना मुँह हटा लिया, मेरे हटते ही कुछ पल में आशु की सांसें सामान्य हुई और वो बोली; “जानू! प्लीज ... रुको मत! पूरा अंदर कर दो!!!!" आशु की बात सुन उसका मेरे लिए प्यार मैं समझ गया और वापस उस पर झुक गया.धीरे-धीरे बिना रुके मैंने अपना पूरा लिंग उसकी योनी में पहुँचा दिया. अब मैंने धीरे-धीरे अपने लिंग को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया. आशु से ये सुख बिना आवाज किये बयान करना मुश्किल था. उसने अपने दाहिने हाथ की कलाई अपने मुँह पर भर ली और उसे काटने लगी. उसकी सीत्कार उसके मुँह में ही कैद होने लगी और इधर मेरी रफ़्तार तेज होने लगी थी. १० मिनट तक ही आशु टिक पाई और फिर वो झड़ने लगी. पर इससे पहले की मैं झड़ता राखी के कमरे का दरवाजा खुला और वो बाहर आई. उसपर नजर सबसे पहले आशु की पड़ी और उसने मुझे एकदम से अपने ऊपर से ढकेल दिया. जब मेरी नजर आशु की नजर के पीछे-पीछे गई तो राखी मुझे वाशरूम जाती हुई दिखी और मैं भी हड़बड़ा कर उठा और फटाफट अपनी पैंट पहनने लगा. आशु ने भी अपने कपडे ठीक किये और अंदर कमरे में भाग गई. ये तो शुक्र था की हॉल में रौशनी कम थी और काउच जिस पर हम दोनों थे वो दरवाजे के साथ वाली दिवार के साथ था. राखी ने हम दोनों को नहीं देखा और वो सीधा ही वाशरूम में घुस गई थी. जब वो बाहर आई तो मैं चुप-चाप ऐसे लेटा था जैसे सो रहा हूँ, उसने आ कर मेरी टाँग हिला कर मुझे उठाया; "डॉली कहाँ है?" ये सुन कर तो मैं अवाक रह गया, मुझे लगा की उसने मुझे और आशु को संभोग करते हुए देख लिया! मैंने फिर भी अनजान बनते हुए, कुनमुनाते हुए कहा; "प....पता नहीं!"

"अंदर तो नहीं है? आप लोग उसे वहीँ तो नहीं छोड़ आये ना?" ये सुन कर मुझे सुकून हुआ की उसने कुछ देखा नहीं! मैं तुरंत उठ के बैठ गया और ऐसे दिखाने लगा की मुझे सच में नहीं पता की वो कहाँ हे. मैंने हॉल की लाइट जलाई; "आप ने वाशरूम देखा?" पर तेज लाइट से जैसे ही कमरे में रौशनी हुई हम दोनों की आँखें चौंधिया गईं और राखी ने अपनी आँखों पर हाथ रखा और बोली; "मैं अभी वहीँ से तो आ रही हु." मैं जान बुझ कर उसी कमरे में घुसा और देखा आशु वहीँ सो रही है; "अरे ये तो रही!" मैंने फिर से चौंकने का नाटक करते हुए कहा. राखी अंदर आई और एक दम से चौंक गई; "ये यहाँ कैसे आई? मैं जब उठी तब तो यहाँ कोई नहीं था?" उसने जा कर आशु को छू कर देखा और फिर उसे जगाने लगी तो आशु चौंक कर उठ गई और हैरानी से हम दोनों को देखने लगी. "तू यहाँ तो नहीं थी जब मैं उठी?" राखी ने आशु से पूछा.

"मैं किचन में थी पानी पीने, जब वापस आई तो आप यहाँ नहीं थे. क्या हुआ?" आशु की बात सुन कर राखी की हँसी छूट गई.

"यार तुमने सच में डरा दिया मुझे! मुझे लगा की कोई भूत-प्रेत है यहाँ!" अब ये सुन कर हम तीनों हँस पडे.वो दोनों वापस लेट गए और मैं पहले बाथरूम में घुसा और जा कर लिंग हिलाया और पानी निकाल कर सो गया.

सुबाह सात बजे मैडम ने मुझे उठाया और हमारी गुड मॉर्निंग हुई फिर उन्होंने कॉफ़ी का मग मुझे दिया. "नींद तो आई नहीं होगी आपको?" मैडम ने मुझसे पूछा.

"मॅडम नींद तो जबरदस्त आई पर राखी ने रात को भूत देख लिया!" मेरी बात सुन कर मैडम एक दम से हैरान हो गई. फिर मैंने उन्हें सारी बात बताई तो मैडम हँस पडी. हमारी हँसी सुन कर आशु और राखी दोनों बाहर आ आ गये. मैडम ने उन्हें भी कॉफ़ी दी और हमारी कल रात के बारे में बातें शुरू हुईं. जब मैडम ने आशु को बताया की वो नशे में मुझे मैडम के सामने किस करने वाली थी तो वो बुरी तरह झेंप गई! "आय-हाय! शर्मा गई लड़की! अब तो नाम बता दे की कौन है वो लड़का?" आशु की नजरें झुकी हुई थी और उसने बस इतना ही कहा; "है एक...." बस इसके आगे वो कुछ नहीं बोली और कॉफ़ी का कप रख कर वाशरूम चली गई.

राखी: वैसे राज जी, आपके शराब के ज्ञान को सलाम! (राखी ने मुझे छेड़ते हुए कहा.)

नितु मैडम: सब तरह शराब चखी है आपने. (मैडम ने राखी की बात में अपनी बात जोड़ दी.)

मैं: मॅडम कॉलेज के दिनों में ...... ये सब ट्राय की थी. (मैंने थोड़ा झिझकते हुए जवाब दिया.)

राखी: पर पैसे कहाँ से लाते थे तब?

मैं: पार्ट टाइम में टूशन पढ़ाता था. उससे जो पैसे कमाता था उससे ये शौक़ पूरे होते थे.

नितु मैडम: अरे वाह! तभी से इनडीपेंडनट हो आप!

राखी: और भी कोई शौक़ है इसके अलावा?

अब मैं सोच में पड़ गया की कुछ बोलूँ या नहीं पर तभी आशु आ गई और उसने जाने की इज्जाजत मांगी.

नितु मैडम: अरे पहले नाश्ता तो करो!

फिर मैडम, राखी और आशु सब एक साथ किचन में घुस गए और मैं भी फ्रेश हो कर मैडम की बालकनी में खड़ा हो गया और सुबह की धुप का मजा लेने लगा. नाश्ता कर के हम सब को निकलते-निकलते ९ बज गये. मैडम ने आज मुझे और राखी को छुट्टी दे दी और ये सुनते ही आशु की आँखें चमक उठी. मैंने कैब बुक की और सबसे पहले राखी का ड्राप पॉइंट डाला और फिर लास्ट में मेरा और आशु का. राखी जब उतरी तो वो मेरे पास आई और मुझे कान पकड़ के सॉरी बोला. मैं भी बड़ा हैरान था की ये मुझे क्यों सॉरी बोल रही हे. "कल रात शायद नशे में मैंने आपसे कोई बदसलूकी की हो तो उसके लिए सॉरी."

"पर आपने कुछ नहीं किया! रिलैक्स!" मैंने उसे आशवस्त किया की कुछ भी नहीं हुआ. फिर जब हम घर पहुँचे तो आशु फुल मूड में थी. दरवाजे बंद होते ही आशु ने मुझे जोर से खींचा और पलंग के सामने खड़ा कर दिया और फिर जोर से धक्का दे कर मुझे पलंग पर गिरा दिया. मैं अभी सम्भल भी नहीं पाया था की आशु मेरे ऊपर कूद पड़ी और मेरे पेट पर बैठ गई. फिर झुक कर उसने मेरे होठों को अपने होठों से मिला दिया फिर अपना मुँह खोला और अपनी जीभ से मेरे ऊपर वाले होंठ को सहलाया. उसे अपने मुँह में भर के चूसने लगी. मेरे हाथों ने उसकी पीठ को सहलाना शुरू कर दिया. अब बारी थी मेरी, मैंने भी थोड़ा जोश दिखाया और उस के किस का जवाब देने लगा. मैंने अपने हाथों से उसे कास के अपने से चिपका लिया और पलट कर अपने नीचे ले आया. नीचे आ कर मैंने उसके डिवाइडर को निकाल कर फेंक दिया और उसकी कच्छी उतार के पहले उसे सूँघा, फिर उसे भी फेंक दिया. आशु की नग्न योनी मेरे सामने थी और ऐसा नहीं था की मैं वो पहली बार देख रहा था. बल्कि जब भी देखता था तो सम्मोहित हो जाता था.
 
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