• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest आग्याकारी माँ

सतीश स्टिक को वैसे ही घुमाते हुए उसकी चूत के पास लाया और उसकी चूत पर फेरने लगा. श्वेता मचल उठी, उसकी चूत पानी छोड़ रही थी. सतीश के ऐसा करने मात्र से ही श्वेता स्खलित हो गयी. उसका रस स्टिक पे लगा हुआ था. सतीश स्टिक को श्वेता के मुंह के पास ले गया जिसको श्वेता झट से चाट गयी. श्वेता थोड़ी सी शांत हुई.

श्वेता के हाँफने से श्वेता के स्तनों को सतीश ऊपर नीचे होते हुए देख सकता था. श्वेता का गोरा बदन वासना से तप कर लाल पड़ चुका था. सतीश श्वेता के चेहरे पर संतोष का भाव देख सकता था.

उसे इस हालत में देख कर सतीश का लंड भी तन चुका था. सतीश श्वेता के पीछे गया. श्वेता के बालों को पकड़ कर खींचा और उसका सिर ऊपर की तरफ उठ गया. सतीश ने श्वेता के कंधों पर दांत गड़ा कर चुम्बन किया. उसने अपने होंठ भींच लिए, कामुक अंदाज में दबा लिए. शायद उसे मजा आ रहा था. सतीश श्वेता के बदन की गर्मी को महसूस कर सकता था. उसका बदन एक दम तवे के माफिक गर्म था.

सतीश ने उसे गर्दन पर किस करते हुए श्वेता के हाथ की रस्सी खोली और सतीश उसे इसी हालात मे छोड़ कर किचन में गया. फ्रिज़ से सतीश आइस ट्रे उठा लाया.

श्वेता का रोम-रोम उत्तेजित था. वह पूरी तरह से अपने भाई की स्लेव (सेक्स गुलाम) बन गयी थी. श्वेता को उसका हर एक स्पर्श उन्मादित कर रहा था. यह बिल्कुल अलग अहसास था. श्वेता का पूरा बदन इतना ज्यादा सेंसेटिव हो गया था कि हवा का स्पर्श भी उसे उत्तेजित कर रहा था. श्वेता ने तीन दिन मे कितनी ही बार सेक्स किया था लेकिन यह अहसास कभी नहीं हुआ. वह बस एक भी पल रुके बिना ज़ोरदार चुदाई की कामना कर रही थी. लेकिन उसे सतीश ने कहा था कि अगर पूरा मजा लेना है तो तुम कुछ करोगी नहीं. जो करेगा वह ही करेगा. इसलिए वह कुछ भी नहीं कर रही थी.

सतीश कमरे में वापस आया. श्वेता वहीं फर्श पर घुटने के बल बैठी थी. उसके वापस आने का इंतज़ार कर रही थी. सतिश ने उसे उठाया और श्वेता के हाथों को ऊपर पुल-अप बार पर चौड़ा करके बांध दिया. नीचे श्वेता के दोनों पैरों को भी पुल बार के स्टैंड के सहारे चौड़ा करके बांध दिया ताकि श्वेता हिले डुले ना. सतीश ने आईस क्यूब मुँह में लिया, श्वेता के पेट पर चूमने लगा. श्वेता सिहर सी गयी जैसे श्वेता के बदन में कोई करंट सा दौड़ गया हो. उसे इसका जरा सा अहसास भी नहीं था कि सतिश कुछ ऐसा करने वाला है. श्वेता के फूल की पंखुड़ी की तरह लाल होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान थी. शायद इससे उसे काफी आनंद आ रहा था.

आइस क्यूब को श्वेता के बदन पर घुमाते हुए सतीश ऊपर की ओर बढ़ रहा था. उसका अंग-अंग टूट रहा था. श्वेता काफी उत्तेजित हो रही थी. श्वेता के चेहरे की मुस्कान गहरी हो रही थी. उसे इस चीज से काफी आराम मिल रहा था. सतीश उसके बदन की खुशबू को महसूस कर पा रहा था. यूँ तो उन्होंने कई बार सेक्स किया है लेकिन यह अहसाह ही कुछ और था.

सतीश आईस क्यूब को श्वेता के स्तनों पर घुमा रहा था. श्वेता के गोरे-गोरे स्तनों पर लाल निशान पड़ चुके थे. आइस का स्पर्श पाते ही श्वेता के निप्पल कड़े हो गए थे.

श्वेता आहहहह … ऊ … ओह … की हल्की सीत्कार ले रही थी. चूंकि उसे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया के लिए मनाही थी इसलिए श्वेता मजबूर थी. नहीं तो अभी तक श्वेता उसको चोदने को कह देती या तो खुद ज़बरदस्ती उसको को पटक कर उसके लौड़े पर चढ़ कर चुद लेती. ऐसा सतीश इसलिए सोच रहा था क्योंकि वह उसको कई बार चोद चुका था और वह श्वेता के हर एक भाव से वाक़िफ़ था. उसका यह भाव सतीश को और भी उत्तेजित कर रहा था.

श्वेता के बदन की खुशबू पाकर सतीश का लंड फिर से खड़ा होने लगा था जोकि एक बार पहले ही झड़ चुका था. सतीश उसकी गर्दन के पास था. सतीश उसकी गर्म सांसों को महसूस कर सकता था. श्वेता के बाद सतीश श्वेता के होंठों पर पहुंचा और श्वेता आइस क्यूब को जीभ निकाल कर चाटने लगी. उसकी आँखों पर पट्टी थी. सतीश को इतना पास पाकर उसने सतीश को चूमना चाहा लेकिन सतीश श्वेता के माथे पर चुम्बन करते हुए जल्दी से पीछे हट गया.
 
सतीश ने दूसरी आइस क्यूब ली और घूम के पीछे श्वेता के पैरों के पास आ गया. सतीश ने उसे आइस से उसे स्मूच देना चालू किया. श्वेता बिन पानी की मछली की तरह छटपटाने लगी. सतीश उसकी जांघों से होते हुए श्वेता की गांड पर पंहुचा. श्वेता की गांड एकदम लाल हो चुकी थी.

सतीश ने गांड पर आइस क्यूब घुमाना चालू किया. कभी गांड में घुसाता तो कभी गांड पर घुमाता. उसकी गांड की गर्मी से पूरा आइस क्यूब पिघल गया.

सतीश ने श्वेता की गांड को दांतों से काटना चालू कर दिया. सतीश के हर एक वार से श्वेता चिहुँक जाती. श्वेता की मलमल सी गद्देदार गांड … हाय! सतीश उन्हें काटता-चूमता हुआ चाट रहा था. श्वेता की गांड सतीश की सबसे फेवरेट हैं. सतीश ने दूसरी आइस क्यूब ली और उसकी कमर से होते हुए ऊपर पीठ की तरफ बढ़ने लगा. श्वेता छटपटा रही थी. सतीश उसकी कोमल पीठ को फील कर सकता था. सतीश ऊपर गर्दन की तरफ बढ़ा.

उससे रहा नहीं गया, श्वेता मुँह पीछे करके सतीश को किस करने की कोशिश करने लगी. सतीश ने पीछे से श्वेता के बाल कस कर पकड़ कर श्वेता की गर्दन सीधी की और आइस को श्वेता के कंधों पर रगड़ने लगा. श्वेता तिलमिलाने लगी. श्वेता छूटने का प्रयास करने लगी लेकिन कोशिश नाकाम थी. बंधन काफी मजबूत था. सतीश आइस को श्वेता के कंधों से कान और गर्दन तक घूमाता. श्वेता आनंद से उन्मादित हो उठती.

ऐसा करने के बाद सतीश उसकी बांहों के नीचे आ गया. चूंकि श्वेता के दोनों हाथ ऊपर पुल-बार में बंधे हुए थे श्वेता के आर्मपिट्स (बगलें) सतीश की तरफ खुले हुए थे. बिल्कुल साफ … एक भी बाल नहीं, एकदम गोरी. श्वेता किसी मॉडल से कम नहीं है. हर हफ्ते पार्लर जाती है और वैक्सिंग भी टाइम से कराती है. सतीश को हर बार फ्रेश मॉल मिलता है.

सतीश ने आइस क्यूब को उसकी कांख पर रगड़ना चालू किया. श्वेता उतेजना के मारे छपटाने लगी. ऐसा सतीश ने पहले कभी नहीं किया था श्वेता के साथ. श्वेता छूटने की कोशिश करने लगी. श्वेता तेज-तेज सिसकारियाँ ले रही थी.

चूंकि उसका मुंह सतीश ने उसी की पैंटी को मुंह में ठूंस कर बंद किया हुआ था तो श्वेता बोल नहीं पा रही थी. यह कल के सेक्स वाली पैंटी थी. श्वेता अक्सर उसे बेड के नीचे डाल देती थी.

सतीश को उसकी कांख की मादक भीनी सी खुशबू पागल बना रही थी. सतीश को नशा सा चढ़ने लगा था. सतीश ने क्यूब छोड कर श्वेता के आर्मपिट्स को चाटना चालू कर दिया. श्वेता छटपटाने लगी, तेज तेज सीत्कार करने लगी. उसका बदन अकड़ने लगा और श्वेता झड़ने लगी.

सतीश ने एक हाथ उसकी चूत पर लगा दिया. श्वेता के रस को अपने हाथों पर ले लिया.

झड़ने के बाद श्वेता रस्सी से लटक कर हाँफने लगी लेकिन सतीश ने उसे आराम करने का मौका नहीं दिया. सतीश श्वेता के आर्मपिट्स चाटने में लगा था. कुछ देर बाद सतीश ने श्वेता के मुंह से पैंटी निकाली और अपने हाथ जो श्वेता के चूत-रस में डूबे हुए थे, होंठों के पास ले गया, श्वेता चाटने लगी. सतीश भी श्वेता के साथ चाटने लगा.

फिर सतीश ने दो उंगली श्वेता के मुंह के अंदर डाल दीं. श्वेता उसकी उंगलियां चाट रही थी. सतीश श्वेता के होंठों पर लगे श्वेता के चूत के रस को चाट रहा था.

पट्टी बंधी आंखों में श्वेता के चेहरे का सबसे कामुक भाग श्वेता के होंठ थे जो चाटने के बाद कमरे की रोशनी में चमक रहे थे. सतीश श्वेता के दाईं तरफ के गाल पर किस करते हुए श्वेता के कान से होते हुए नीचे गर्दन पर पंहुचा. मौसम ठंडा था और कमरे में ए.सी. भी चल रहा था, फिर भी उसकी गर्दन पर पसीने की कुछ बूंदें थीं. ये बूंदें श्वेता के गोरे बदन पर मोती की तरह चमक रही थी. सतीश ने इन मोतियों को चूमा और उसकी बाँहों के नीचे आ गया.

फिर सतीश उसे स्मूच करते हुए श्वेता के सीने के भाग पर किस करते हुए स्तनों की तरफ बढ़ा. श्वेता के स्तन एकदम कड़क थे. उठे हुए सुडौल, जैसे किसी पॉर्न स्टार के होते हैं.
 
फिर सतीश उसे स्मूच करते हुए श्वेता के सीने के भाग पर किस करते हुए स्तनों की तरफ बढ़ा. श्वेता के स्तन एकदम कड़क थे. उठे हुए सुडौल, जैसे किसी पॉर्न स्टार के होते हैं.

सतीश श्वेता के दूधों को पीने लगा. श्वेता आह्ह-आह्ह करती हुई कह रही थी ‘चोद दो भाई प्लीज … चोद दो मुझे’

सतीश एक झटके में ऊपर गया और उसकी आँखों की पट्टी हटा दी. श्वेता एकदम से चिहुँक गयी. जैसे उसकी जान में जान आ गयी हो. उसकी आँखें वासना के नशे में एकदम लाल हो चुकी थीं. चेहरे पर एक हब्शी भाव था जोकि अक्सर सेक्स करते समय दिखता था.

उसको देख के ऐसा लग रहा था कि श्वेता चाहती है कि कोई आकर बस उसे चोद दे.

सतीश ने श्वेता के होंठों को चूमना चालू किया. श्वेता आँखें बंद करके सतीश का साथ दे रही थी. एक हाथ से सतीश नीचे श्वेता के स्तनों को रगड़ रहा था. आँखें बंद करके अपनी स्तनों को मसलवाने का श्वेता पूरा मजा ले रही थी.

सतीश ने अपने होंठ अलग किये, उसने आँखें खोलीं और सतीश की आँखों में देख कर बोली

“फ़क मी भाई … प्लीज फ़क मी!’

श्वेता सतीश से चुदाई की मिन्नतें कर रही थी. सतीश ने श्वेता के स्तन दबाते हुए बोला-

“इतनी जल्दी क्या है जान …”

और फिर सतीश श्वेता के स्तन चूसने में लग गया. श्वेता आँखें बंद करके सिसकारियां लेने लगी.

“आहहहहह … आहहहह … आहहह … आहह”! चोदो भाई मैं तुम्हारी दीवानी हूँ आज चोद के भुर्ता बना दो मेरी चूत का”.

सतीश अपने काम में लगा हुआ था. सतीश जोर-जोर से बॉब्स चूस रहा था जैसे कुँवारे स्तनों में से आज दूध निकाल देगा. श्वेता सिसकारियां लिए जा रही थी, सतीश को गालियां बक रही थी, सतीश से अब चुदाई की विनती कर रही थी.

उसकी बातों पर ध्यान न देते हुए सतीश अपने काम में लगा हुआ था. सतीश श्वेता के पेट पर किस करता हुआ नीचे आया. श्वेता के दोनों पैर सतीश ने चौड़े करके बांधे हुए थे. उसकी उभरी हुई चूत पाव रोटी की तरह फूली हुई बिल्कुल चिकनी, साफ … जैसे चूत न हो संगमरमर हो. बिल्कुल मखमल. उसकी चूत से बहता हुआ रस उसकी जांघों पर आ रहा था.

सतीश उस रस को चूसता हुआ चूत तक पहुंचा. हालाँकि ये चूत सतीश ने कई बार चाटी है लेकिन आज की बात ही कुछ और थी. मन कर रहा था इसमें समा जाये. सतीश पूरी की पूरी चूत एक ही बार में मुँह में लेने की कोशिश करने लगा.

श्वेता तिलमिला गयी, सतीश के होंठों और जीभ का स्पर्श अपनी चूत पर पाकर बोली- श्वेता- “चोदो भाई! भाई अब चोद दो ना … क्यों तड़पा रहा है?

लेकिन सतीश जानता था कि यही तो मजा है इस सेक्स का. इसीलिए सतीश अपने काम में लगा हुआ था. श्वेता की गांड को पकड़ कर अपना पूरा मुँह उसकी चूत में घुसा रहा था. सतीश जीभ को अंदर तक घुसा कर उसकी चूत की दीवारों को चाट रहा था.

श्वेता जोर-जोर से सिसकारियां ले रही थी- भाई मेरी जान … तूम भाई नहीं, मेरी जान हो. मैं तेरी रंडी हूँ. अपनी रंडी की चूत पूरी खा जा. भाई मैं तेरे मुंह में झड़ना चाहती हूँ. भाई जिन्दगी भर रंडी बन के रहूंगी तेरी. आहह … आहह चोद, चाट, खा जा पूरी खा जा … पूरा रस पी ले. आज के बाद यह तेरी अपनी चूत है. जब मन करे चोद लेना. खा जा मेरी जान. खा जा अपनी बहन की चूत को … मेरा बहनचोद भाई, खा अपनी बहन की चूत!

श्वेता के इस बर्ताव से सतीश भी काफी उत्तेजित हो गया और जीभ से उसकी चूत की चुदाई करने लगा. श्वेता गांड उठा कर चूत सतीश के मुँह में देने की कोशिश करने लगी. सतीश के मुंह में ही झड़ गई. सतीश ने उसकी चूत से निकले हुए रस का कतरा-कतरा पी लिया जैसे प्रोटीन शेक हो वह. जो मजा उसका रस पीने का था, मानो जैसे सतीश को कुछ बहुमूल्य चीज मिल गयी हो. बहुत ही अनमोल. सतीश ने चाट-चाट कर उसकी बुर भी साफ की.
 
फिर सतीश ऊपर उठा, सतीश ने श्वेता के हाथ खोल दिये. हाथ खुलते ही श्वेता सतीश के ऊपर चढ़ गई. सतीश बेड पर आ गिरा और श्वेता सतीश के होंठों को चूसने-काटने लगी. श्वेता ऐसे होंठ चूस रही थी जैसे उनको खा जायेगी. श्वेता गले तक जीभ उतार कर होंठ चूस रही थी. श्वेता सतीश के ऊपर थी. श्वेता के घुटने मुड़े हुए थे. सतीश की छाती पर बैठ कर ऐसे चूस रही थी जैसे बरसों बाद मिला हो.

अचानक से श्वेता अलग हुई और सतीश के फेस को अपने फेस से सटा लिया और आँखें बंद कर लीं. सतीश को भी एक अजीब सा अहसास हुआ. सतीश भी वैसे ही पड़ा रहा. श्वेता की सांसों को अपने चेहरे पर टकराते हुए महसूस करने लगा. श्वेता के चहरे को महसूस करना एक अलग अहसास था.

फिर सतीश उठा और बोला- “चलो घोड़ी बन जाओ. असली काम तो अभी बाकी है”.

श्वेता मुस्कुरायी और बोली- “हाँ मेरे घोड़े” …

सतीश के होंठों को चूम कर श्वेता सतीश से अलग हुई और घोड़ी बन गयी. सतीश ने उसकी गर्दन पकड़ कर एक ही झटके में अंदर लंड डाल दिया. श्वेता जोर से चिल्लाई. उसे दर्द हुआ. लेकिन श्वेता कुछ नहीं बोली.

लंड को अंदर उसकी चूत में घुसाने के बाद सतीश ने उसकी चूत को चोदना शुरू कर दिया. आह्ह … बहुत मजा आया इतनी देर की तड़प के बाद. जितनी प्यासी श्वेता थी उतनी ही प्यास सतीश के अंदर भी लगी हुई थी उसकी चूत को चोदने की. बहुत मजा आ रहा था जब उसकी चूत में लंड गया. सतीश उसे चोदता रहा.

सतीश श्वेता के बाल पकड़ कर उसे पीछे से चोद रहा था. श्वेता जोर-जोर से सिसकारियां ले रही थी- “आहह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह्ह आहहह हहह हम्म … आआ …”

फिर सतीश ने उसे उठाया और बेड पर एक-एक पैर रखवा कर खड़ा कर दिया और पीछे से उसकी नंगी पीठ से सट कर श्वेता के स्तनों को दबाते हुए धक्के लगाने लगा. बीच में उसकी गर्दन को चूम लेता तो कभी कान को हल्के से काट लेता. कभी श्वेता के गालों को चूमता.

श्वेता बस आंखें मूंदे, दांतों को भींचे चुदाई का मजा ले रही थी. फिर श्वेता मुँह पीछे करके सतीश के होंठों को चूसने लगी. सतीश भी उसका साथ देने लगा. कुछ देर इस आसन में चोदने के बाद सतीश ने उसे पास रखी स्टडी टेबल पर लिटा दिया और पीछे से चोदने लगा. श्वेता सिर को टेबल में दबाये हुए तेज तेज सिसकारियां ले रही थी. पूरे घर में “आहहह … ओह … आहहह … आहहह …” फच-फच की आवाजें गूँज रही थीं.

सतीश को जब लगा कि वह झड़ने वाला है तो सतीश ने उससे पूछा- “क्या करना है”?

श्वेता बिना कुछ बोले अचानक से मुड़ी, सतीश को धकेल कर कुर्सी पर बिठा दिया, सतीश का लंड मुंह में ले लिया और एक दो बार चूसने के बाद ही सतीश श्वेता के मुंह में और फिर श्वेता के चेहरे पर झड़ गया.

उसने सतीश को दिखा कर उंगली से निकाल-निकाल कर हर एक कतरा पीया सतीश के रस का. फिर उठी और सतीश के गोद में आ कर बैठ गयी. सतीश के होंठों पर किस किया.

सतीश ने उससे पूछा- “मैं अंदर नहीं झड़ सकता ना”?

श्वेता हँस कर बोली- “तुम मेरे जिस्म में किसी भी जगह झड़ सकते हो क्योंकि तुम मेरी जान हो”.

इतना बोल कर उसने सतीश के माथे पर किस किया और सतीश का सिर सीने में दबा कर सतीश को अपने स्तनों में समा लिया.

सेक्स के बाद लड़की से ऐसे गले लगने का अहसास ही कुछ और होता है. सतीश कुछ देर उसकी बांहों में ऐसे ही पड़ा रहा. मन कर रहा था कि श्वेता के नंगे बदन पर रात भर ऐसे ही पड़ा रहूँ. लेकिन अब नींद आना शुरू हो गई थी. बदन में सुस्ती छाने लगी थी. फिर कुछ देर बाद श्वेता उठी और बाथरूम में चली गयी.

रात काफी हो गयी थी तो सतीश सोने चला गया. श्वेता बाथरूम से वापस आयी. सतीश के सीने पर सिर रख कर चिपक के सो गई. सतीश ने भी उसे बांहों में लिया और नींद कब आ गयी पता ही नहीं चला.
 
सतीश सुबह उठा तो श्वेता उस के पास नहीं थी. शायद श्वेता जल्दी उठ गई होगी. सतीश फ्रेश होकर हॉल मे बैठा था. श्वेता नाश्ता लेकर आयी. वह उस समय बिल्कुल नंगी थी. श्वेता के हाथ में एक ट्रे में कॉफी थी. श्वेता सतीश के पास आकर सतीश से नाश्ता करने के लिए कहने लगी.

सतीश ने श्वेता की चूत की तरफ देखा. चूत कल की तरह बिल्कुल चिकनी और बाल रहित थी. पता ही नहीं चल रहा था कि कल रात को ही इस चूत को उसने बुरी तरह से चोदा है. श्वेता के सेक्सी बदन की जितनी तारीफ करे उतनी कम लगती है.

उसको सतीश इससे पहले कितनी ही बार चोद चुका है मगर जब भी उसको ऐसे नंगी देखता है तो लगता है कि वह पहली बार उसको नंगी देख रहा है. उसका सेक्सी गोरा बदन किसी पॉर्न स्टार से कम नहीं है. उसे देखते ही सतीश के लंड में हलचल होने लगती है. सतीश खुद को बहुत किस्मत वाला मानता है कि उसको श्वेता के साथ सेक्स करने का मजा मिलता है.

सतीश श्वेता के नंगे बदन को देख रहा था. रात की चुदाई के बाद नींद पूरी हो चुकी थी और श्वेता के बदन में एक नई ऊर्जा भर चुकी थी. उसी का नतीजा था कि श्वेता के नंगे बदने से सतीश की नजरें हट ही नहीं रही थीं.

श्वेता के स्तन तने हुए थे. सतीश ने अंडरवियर पहना हुआ था और श्वेता के उभरे हुए स्तनो के बीच में तने हुए श्वेता के निप्पल देख कर सतीश का लंड सतीश के अंडवियर में फिर से खड़ा होना शुरू हो गया.

श्वेता अंडरवियर में तन रहे सतीश के लंड को देख कर स्माइल करने लगी. सतीश की टांगें फैली हुई थीं और बीच में अंडरवियर था केवल. उस के अंदर सतीश का लंड टाइट होकर अपनी शेप में आने लगा था.

सतीश कुछ और करता इससे पहले ही श्वेता सतीश के पास बेड पर आकर बैठ गई. उसने ट्रे को बेड पर रखा और उसके बगल में आकर बैठ गई. श्वेता के स्तन हिल रहे थे. इधर-उधर डोल रहे थे. बेड पर बैठने के बाद उसकी सेक्सी चूत और भी मस्त लग रही थी.

श्वेता सतीश की तरफ देख रही थी. सतीश उसकी तरफ देख रहा था. उसकी नजर एक बार सतीश के अंडरवियर पर जा रही थी और फिर ऊपर आ जाती थी. सतीश की नजर श्वेता के स्तनो से फिसल कर उसकी चूत पर चली जाती थी और फिर ऊपर आ जाती थी.

सतीश- “तुम तो सिर्फ कॉफ़ी लायी हो”?

श्वेता ने ट्रे से ब्रैड उठाया और सतीश से बोली-

श्वेता- “आज मैं ही तुम्हारा नाश्ता हूँ जान, आ जाओ, खा लो मुझे”

इतना कहकर श्वेता ने जैम की शीशी उठा ली.

सतीश ने देखा कि श्वेता अपने नंगे स्तनो पर जैम लगा रही थी. सतीश मुस्कुराया और उसे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया और ब्रेकफ़ास्ट करने लगा. श्वेता मादक सिसकारियां भर रही थी. सतीश जब भी श्वेता के स्तनो से जैम चूसता श्वेता सिर को ऊपर उठा कर आँख बंद किये हुए होंठ भींच कर मजे लेने लगती. ऐसे ही सतीश ने अपना ब्रेकफास्ट किया.

सतीश- “चलो हो गया नाश्ता”.

उसने कामुक अंदाज में एक मुस्कराहट के साथ सतीश को देखा

श्वेता- “अभी कहाँ मेरी जान”!

श्वेता उठी और जैम की बोतल उठा कर कमरे से बाहर निकल गई. सतीश भी श्वेता के पीछे-पीछे चल पड़ा. हॉल में जाकर वह डाइनिंग टेबल पर अपने पैर चौड़े करके बैठ गयी. उसकी बुर सतीश के मुँह के बिल्कुल सामने थी. उसने टेबल से जैम की बोतल ली और ढ़ेर सारा जैम अपनी चूत पर लगा लिया.

सतीश ने उसकी आँखों में देखा और मुस्कुराया और अपना मुंह उसकी चूत में लगा दिया.

जीभ का स्पर्श पाते ही श्वेता चिहुँक उठी. उसने एक हल्की मीठी सी सिसकारी ली- “उम्म्ह… अहह… हय… याह… आम्म … हह आहह हह्ह”!

वह आँखें बंद करके मजे लेने लगी. सतीश जोर-जोर से उसकी चूत को चूसने लगा. उसकी सिसकारियां तेज होने लगीं.

हॉल में डाइनिंग टेबल पर बिल्कुल नंगी बैठी हुई श्वेता सतीश से अपनी सेक्सी चूत चटवा रही थी. सतीश भी अंडवियर में ही था. उन्हें किसी का डर नहीं था. वह घर में बिल्कुल अकेले थे.

सतीश ने एक सेकेंड के लिए देखा तो उसकी आँखें बंद थीं और वह सिर ऊपर किये वासना की गहराइयों में गोते लगा रही थी. श्वेता के हाथ श्वेता के बालों में थे जिससे कि श्वेता के आर्मिपिट्स दिख रहे थे.
 
इस हालत से सतीश को कल का सीन याद आ गया. जब सतीश कल श्वेता के आर्मपिट्स को चाट रहा था. कल रात पहली बार सतीश ने किसी लड़की के साथ ऐसा किया था. उसे वासना विभूत ऐसे हालात में देख कर सतीश पगला गया और उसकी चूत जोर-जोर से चूसने लगा. जैम तथा श्वेता के चूत रस की मिली हुई खुशबू सतीश को पागल कर रही थी.

उसकी सिसकारियां तेज होने लगी, सतीश का सिर श्वेता अपनी बुर पर दबाने लगी. कुछ ही पल में उसका बदन अकड़ने लगा और श्वेता फव्वारे के साथ झड़ने लगी. सतीश उसकी चूत के रस को पी गया.

श्वेता कुछ देर के बाद शांत हुई.

सतीश ने उठा कर उसे वहीं डाइनिंग टेबल पर ही आधा लिटा दिया. श्वेता कमर से ऊपर तक डाइनिंग टेबल पर लेटी हुई थी. कमर से नीचे अपने पैरों पर खड़ी थी. हाथ आगे की तरफ किये डाइनिंग टेबल के उस छोर को पकड़े हुई थी. श्वेता के गांड हवा में उठे हुये थी.

सतीश ने श्वेता के गांड पर चपत लगाना चालू किया. सतीश जोर-जोर से चपत लगता और पूछता- “कैसा लग रहा है”?

श्वेता- “ईट्स वन्डरफुल भाई”

सतीश-“डु यू वांट मोर?”

श्वेता- “यस प्लीज भाई”!

हर वार के साथ श्वेता चिहुँक जाती. श्वेता के मुंह से आह! निकल जाती.

सतीश को पता था उसे दर्द हो रहा है लेकिन सतीश आश्चर्यचकित था कि श्वेता के चेहरे पर कोई दुःख का भाव ही नहीं था. श्वेता दांतों को भींचे हुए आँखें बंद किये हुए आनंद ले रही थी. उसका यह रूप सतीश को और भी उत्साहित कर रहा था. सतीश के द्वारा चपत लगाने से श्वेता की गांड बिल्कुल लाल हो गई थी. सतीश उसे इस हालत में देख कर इतना उत्तेजित हो गया कि झटके से सतीश ने अपना अंडर वेअर निकाला और उसकी गर्दन को पकड़ कर पीछे टेबल पर दबा दिया.

पहली बार में ही पूरा लंड डाल दिया उसकी चूत में जिससे श्वेता कराह उठी. उसे दर्द हुआ लेकिन उसने कुछ नहीं बोला. धक्का इतना तेज था कि श्वेता टेबल पर आगे खिसक गयी थी. सतीश ने धक्के लगाने चालू किये. उसने सिसकारियां लेना चालू किया. श्वेता जोर-जोर से सिसकारियां ले रही थी.

“आहहहह … उहह”! की आवाजें पूरे हॉल में गूंज रही थीं. उसकी मखमली पीठ सतीश के सामने थी. गोरी चमड़ी सूरज की हल्की सी रौशनी में संगमरमर की तरह चमक रही थी.

सतीश अचानक से रुका और श्वेता के पीठ पर हाथ फेरते हुए आगे की तरफ झुका. अचानक धक्के रुक जाने से उसने पीछे मुड़ के थोड़ी परेशानी के भाव से सतीश को देखा. सतीश ने श्वेता के कानों में धीरे से कहा “इसी अवस्था में रहना, हिलना मत”!

उसने हामी में सिर हिलाया.

सतीश उसे वहीं हॉल में डाइनिंग टेबल पर नंगी छोड़ कर श्वेता के बेड रूम में गया जहाँ कल रात सतीश ने उसकी चुदाई की थी. वहां से सतीश ने पतली सी रस्सी ली जिससे सतीश ने उसे कल बांधा था. फिर सतीश वापस हॉल में आ गया. सतीश के आने तक श्वेता वैसे ही डाइनिंग टेबल पर पड़ी थी. गांड को हवा में उठाये, अध-लेटी अवस्था में. जाते ही सतीश ने लंड उसकी चूत में डाल दिया. श्वेता की तो जैसे जान में जान आ गयी हो वैसे चिहुँक उठी. सतीश आगे झुका और श्वेता के कान में धीरे से बोला- “मजे के लिए तैयार हो जाओ”

सतीश ने हल्के से उसकी पीठ पर रस्सी से मारा, श्वेता सिहर गयी. श्वेता के चेहरे पर एक क़ातिल सी मुस्कान थी. सतीश को आज तक नहीं पता चला उसे इस दर्द में मजा कैसे आता था. लेकिन सतीश श्वेता के इस अंदाज़ से उत्तेजित काफी हो जाता था.

उसकी पीठ पर जब सतीश रस्सी से मारता तो श्वेता और भी कामुक अंदाज में वासना से कराह उठती.

होंठ भींच के कहती- “और मारो भाई”

हर एक वार के साथ उसकी आह! निकल रही थी. उसकी आह में बहुत ही ज्यादा उत्तेजना थी. सतीश उसकी चूत में लंड डाले हुए उसकी पीठ पर हल्के कोड़े बरसा रहा था. हालांकि सतीश इस बात का पूरा ध्यान रख रहा था कि उसे चोट न लगे क्योंकि सतीश श्वेता से बहुत प्यार करता था. यह क्रिया सिर्फ उत्तेजना मात्र के लिए थी.

इस क्रिया से श्वेता भी काफी उत्तेजित हो रही थी. उत्तेजना से श्वेता कामुक सिसकारियाँ ले रही थी- “आहह! ओह्ह! ओह्ह! येस्स! … वन मोर! यस”! जैसी आवाजें निकल रही थी.
 
सतीश और भी उत्तेजित हो रहा था.

हालाँकि सतीश का वार इतना तेज नहीं था फिर भी जब रस्सी उसकी मखमली कोमल पीठ पर पड़ती तो अपने पीछे हल्का सा लाल निशान छोड़ जाती. जोकि कुछ देर में गायब हो जाता. हर वार पर श्वेता के मुँह से एक कामुक आहह निकलती जो सतीश के जिस्म को रोमाँचित कर रही थी. बीच-बीच में सतीश उसकी पीठ को चूम लेता. कभी जीभ फेर देता. उसे इससे काफी आनंद मिलता.

हर चोट के साथ चुम्बन की क्रिया चल रही थी. सतीश ने कोड़े बरसाना बंद करके धक्के लगाना चालू किया. उसकी कामुक सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगी ‘आहह … आह … उहह … ओहहह … ओ माय गॉड यस! यस यस यस फ़क मी! चोदो मुझे भाई! मेरे राजा … चोद के भुर्ता बना दो मेरी चूत का! यस! आहहह … ओह … उम्म ओ यस”!

श्वेता टेबल पर कुहनी रख कर उचक के चूत चुदवा रही थी. सतीश उसकी नंगी पीठ को अपने बदन से सटा कर धक्के लगा रहा था.

अचानक सतीश ने धक्के लगाते हुए उसकी गर्दन पकड़ कर टेबल पर दबा दिया. श्वेता टेबल पर पसर गयी, उसकी पीठ सामने आ गयी. सतीश ने धक्के लगाते हुए श्वेता के पीठ पर रस्सी के कोड़े बरसाना चालू कर दिया.

लेकिन यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि सतीश के कोड़ों का वार बस इतना था कि श्वेता उत्तेजित हो. सतीश को उसे चोट पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था.

इस दौरान पहली बार श्वेता के चेहरे पर सतीश को शिकन दिखी. शायद श्वेता इस दोहरे आघात के लिए तैयार नहीं थी. लेकिन श्वेता दर्द में भी कामुक सिसकारियाँ ले रही थी- “आहह आहह … ओहह अहहह आऊच ओहह आह आहह आहहह” की आवाजें कमरे में गूंज रही थी.

जब उसने इस क्रिया को अपना लिया तो श्वेता गांड हिला-हिला के चुदने लग गई.

अचानक लंड उसकी चूत में से फिसलकर एक झटके में निकाला और उसकी गांड में घुस गया. श्वेता की कुंवारी गांड़ मे सतीश का 9 इंच लम्बा और 4 इंच चौड़ा लंड जड़ तक घुस गया श्वेता के मुंह से जोरदार चीख निकल गयी, अचानक हुए इस आघात से श्वेता बिलबिला गयी. उसकी आँखों में आंसू आ गये.

उसने हाथ मेज़ पर पटक-पटक कर रुकने का इशारा किया. मगर सतीश अपनी मस्ती में खोया हुआ था. कुछ देर के बाद जब सतीश ने उसकी हालत पर ध्यान दिया तो सतीश रुका, श्वेता के पास गया. उसकी आँखों में आंसू थे, श्वेता रो रही थी.पर उसने सतीश को लंड बाहर निकालने को नही कहा,सतीश को श्वेता की कुंवारी गांड़ में लंड जाने से बहुत मजा आया

सतीश उसकी गांड में लंड डाले वैसे ही उससे सट कर श्वेता के ऊपर लेटा रहा. उसकी पीठ को सतीश अपने सीने तथा पेट के भागों में महसूस कर सकता था. उसकी पीठ एकदम गर्म हो गयी थी.

उत्तेजित होने के कारण उसकी सांसें बहुत तेज गति के साथ चल रही थीं. सतीश ने उनको सामान्य करने की कोशिश की. श्वेता भी सामान्य होने की कोशिश में लगी हुई थी. सतीश के बदन के स्पर्श से उसे काफी आराम मिला. श्वेता धीरे-धीरे सामान्य होने लगी.

सतीश ने श्वेता के गाल, कानों पर तथा कानों के पीछे गर्दन पर किस करना चालू किया. उसे अच्छा लगने लगा. सतीश के होठो का स्पर्श पाते ही श्वेता फिर गर्म होने लगी. उसने एक हाथ पीछे लाकर सतीश के चेहरे को महसूस करने की कोशिश की. सतीश ने श्वेता के हाथों को चूम लिया.

स्थिति सामान्य पाकर सतीश हल्के-हल्के धक्के लगाने के बारे में सोचने लगा और सतीश स्थिति को भांप कर धीरे से हल्के धक्के लगाने चालू किये.

श्वेता ने सिसकारियाँ लेना शुरू कर दिया- “आहह … उम्म … ओहह … हूम्मम …धीरे भाई धीरे याहहह”

सतीश धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करने लगा अब श्वेता को भी मजा आने लगा वह अपनी गांड़ आगे पीछे करने लगी तब सतीश समझ गया अब श्वेता को भी मजा आने लगा है,

सतीश ने धक़्क़े तेज किये तो उसकी सिसकारियाँ तेज होने लगीं.

श्वेता फिर से मजा लेकर चुदने लगी.

सतीश उसे कंधे पर किस करते हुए उठा और हाथ में रखी रस्सी को श्वेता के गले में फंसा कर अपनी तरफ खींचा. श्वेता टेबल के किनारे को प्रतिरोध में पकड़े हुई थी फिर भी कुहनी के बल हल्की सी ऊपर उठी. उसकी नंगी पीठ जो लाल पड़ गयी थी थोड़ी ऊपर उठ गई. उसकी नंगी पीठ कामुक लग रही थी. सतीश ने उसकी पीठ पर किस किया और उसी अवस्था में उसकी गांड चुदाई स्टार्ट कर दी.
 
श्वेता कुछ बोल नहीं पा रही थी. बस कामुक सिसकारियां निकाल करके चुदाई का मजा ले रही थी. उसका सिर सतीश की तरफ उठा हुआ था और आँखें बंद थीं. श्वेता बस गांड में लंड का मजा ले रही थी. श्वेता के माथे पर हल्की सी शिकन थी लेकिन श्वेता के चेहरे से लग रहा था कि उसे मजा आ रहा है.

उसी अवस्था में सतीश ने उसे खड़ा करवाया और पास रखी कुर्सी पर एक पैर रखवा कर दोनों हाथ ऊपर करवा दिए. श्वेता दोनों हाथ ऊपर किये हुए कुर्सी पर पैर रख कर सतीश का लंड अपनी गांड में लिए हुए खड़ी थी. सतीश उसकी पीठ से चिपक गया. हाथ से श्वेता के स्तनों को दबाते हुए श्वेता के कान, गर्दन तथा कंधों के भाग में किस करते हुए उसकी गांड चुदाई करने लगा. इस पोज़ में श्वेता ज्यादा ही कामुक लग रही थी. सतीश उत्तेजित हो कर जोर-जोर से झटके लगाने लगा.

श्वेता देर तक टिक नहीं पाई और स्खलित हो गई. उसकी चूत का रस बह कर उसकी जांघों से होता हुआ टांगों पर आ रहा था. सतीश श्वेता के रस को चखना चाहता था लेकिन इस पोज़ में संतुलन बनाने के लिए उसे पकड़े रहना जरूरी था.

श्वेता एकदम गर्म हो चुकी थी. किसी रंडी की तरह सतीश को गालियां बक रही थी- “चोद बहनचोद … भड़वे, जब देखो मेरी गांड के पीछे पड़ा रहता था. आज मिली है, फाड़ दे इसे … चोद अहह .. आहहह .. आहह … और जोर से चोद … फाड़ दे मेरी गांड”!

श्वेता के मुंह से निकलने वाले ऐसे शब्द सतीश को उत्तेजित कर रहे थे. सतीश ने श्वेता के मुँह के पास उंगली ले जाकर उसे चुप करने का इशारा किया. पहले तो वह सतीश के इशारे को नजरअंदाज करने लगी. फिर सतीश ने उसकी गांड में एक जोर का धक्का दिया और पूरा लंड जड़ तक अंदर घुसा कर फिर से श्वेता के चेहरे के पास उंगली ले जाकर अपने होंठों पर रख कर समझाने की कोशिश की.

अबकी बार उसने सतीश की तरफ ध्यान से देखा. सतीश ने अपने होंठों पर उंगली रखी हुई थी. सतीश का लंड उसकी गांड में फंसा था.

सतीश श्वेता के कानों में बोला- “रिमेम्बर … टूडे यू आर माय स्लट”? (तुम्हें याद है न तुम मेरी रखैल हो आज …)

श्वेता मुस्करा कर चुप हो गयी और गांड चुदाई का मजा लेने लगी.

कुछ देर इसी पोज में चोदने के बाद सतीश ने उसे डाइनिंग टेबल पर बैठा दिया और उसकी चूत से बह रहे रस को पीने लगा. श्वेता आंख बंद करके चूत चटाई का मजा लेने लगी. सतीश उठा और उसी पोज़ में उसकी एक टांग को उठाये एक ही झटके में अपने लंड को उसकी चूत में घुसा दिया.

इस झटके से उसका मुंह खुल गया. सतीश ने मौके का फायदा उठा कर अपनी जीभ डाल कर उसका मुंह टटोल लिया. बड़े ही उत्तेजक तरीके से किस करते हुए उसकी चूत चुदाई करने लगा.

श्वेता भी सतीश का पूरा साथ दे रही थी. आँखें बंद करके होंठ चुसाई का मजा ले रही थी. श्वेता इतने उत्तेजक तरीके से सतीश का होंठ चूस रही थी कि सतीश रोमांचित हो गया था. सतीश ने धक्के तेज कर दिए. सतीश श्वेता के उछलते हुए मम्मों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था.

चोदते-चोदते सतीश ने उसे गोद में उठा लिया. श्वेता भी सतीश के गले में बांहें डाले सतीश से एकदम चिपक गयी. उसे वैसे ही लेकर सतीश कुर्सी पर बैठ गया. श्वेता सतीश के गले में बांहें डाले हुए थी. उसने सतीश के चेहरे को अपने स्तनों में दबा लिया और खुद उचक-उचक के चुदने लगी. सतीश श्वेता के स्तनों को अपने चेहरे पर महसूस कर सकता था.

श्वेता के स्तनों से नाश्ते के दौरान लगाए गए जैम की खुशबू आ रही थी जो उसने सतीश को नाश्ते में खिलाया था. यह पोज़ काफी उत्तेजक था.

आप समझ सकते हैं कि सतीश के चेहरे पर श्वेता के स्तन थे जिनमें से मादक मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी. श्वेता का कोमल बदन रौंदने के चलते सतीश उसकी कोमलता को पूरे मजे के साथ महसूस करने लगा था. एक तरफ सतीश का मुंह श्वेता के स्तनो पर लगा था और नीचे की तरफ सतीश का लंड उसकी चूत को चोद रहा था.

ऐसी स्थिति में जो आनंद सतीश को आ रहा था आप लोगों को यहाँ पर शब्दों में बता नहीं सकता. उस वक्त ऐसा लग रहा था कि श्वेता कितनी मादक है जो अपने भाई को इतना मजा दे रही है. अगर दुनिया में कोई मजा है तो वह बहन की चुदाई करने में ही है. ऐसा लग रहा था सतीश को उसकी चूत को चोदते हुए.
 
उसकी चूत में जाते हुए लंड का घर्षण सतीश को उसकी चूत को फाड़ने के लिए मजबूर कर रहा था. सतीश ने श्वेता के स्तनो के निप्पलों को अपने दांतों में पकड़ कर काट लिया और उसकी जोर से एक कामुक सिसकारी निकल गई- “उई मां … आह्ह् … मर गयी”.

श्वेता को तड़पती हुई पाकर सतीश के अंदर जैसे शैतान सा जाग उठा था. जिसके कारण सतीश पूरी ताकत के साथ उसकी चूत में अपने लंड को धकेलने लगा. जितना जोर सतीश से लग सकता था सतीश उसकी चूत में लंड को डालने के लिए लगा रहा था.

इन जोरदार धक्कों का परिणाम यह हुआ कि सतीश को असीम आनंद की प्राप्ति होने लगी. साथ में श्वेता के मुंह से निकलने वाली कामुक सिसकारियाँ और मीठे दर्द भरी आवाज जैसे आग में घी का काम करने लगीं.

सतीश ने ठान लिया कि इसकी चूत को फाड़ ही दूंगा आज. श्वेता के शरीर को थामकर सतीश ने अपनी पूरी ताकत उसकी चूत में झोंक दी. आह्ह … मेरे चोदू भाई … मैं तो मर गई … ऐसे शब्दों के साथ श्वेता बड़बड़ाने लगी.

उसकी ये बातें सतीश को जैसे हवस की धारा में बहाए ले जा रही थीं. सतीश ताबड़तोड़ उसकी चूत को रौंदने लगा और दो तीन मिनट के बाद सतीश के अंदर की सारी ताकत सतीश के लंड में आकर सिमट गई और उस ताकत ने सतीश के वीर्य को बाहर आने पर मजबूर कर दिया. सतीश उससे कस कर चिपक गया और उसकी चूत में ही झड़ गया. वह दोनों काफी देर तक इसी अवस्था में पड़े रहे.

ऐसी गजब की चुदाई सतीश ने श्वेता के साथ पहले कभी नहीं की थी. दोनों को सामान्य होने में दस मिनट से ज्यादा का वक्त लग गया. श्वेता की चूत सूज कर लाल हो चुकी थी. गांड़ फट गई थी गांड़ से बहुत सारा खून निकला था सतीश का वीर्य उसकी चूत से बाहर बहता हुआ दिखाई दे रहा था.

जब दोनों भाई बहन की सांसें सामान्य हो गईं तो सतीश उसे बाँहों में उठा कर बाथरूम में ले गया. श्वेता सतीश की गोद में बिल्कुल नंगी थी. सतीश उसकी आंखों में देख रहा था और श्वेता उस्की आंखों में देख रही थी. दोनों एक दूसरे में जैसे खोये से थे. श्वेता के चेहरे पर संतुष्टि का भाव था.

श्वेता के होंठों पर हल्की सी मुस्कान थी. श्वेता सतीश को ही देख रही थी. उसकी आँखों में सतीश के लिए प्यार था. बेइन्तहा प्यार. सतीश ने गोद में उठाये हुए ही उसको होंठों पर हल्का सा चुम्बन किया. उसने भी आँख बंद करके सतीश का वेलकम किया. फिर बाथरूम में जाकर दोनों साथ में नहाये. सतीश ने उसकी पीठ और गांड पर आइस रगड़ी. उसका दर्द गायब हो गया. इतनी लंबी चुदाई के बाद बेड पर जाते ही दोनों सो गए. श्वेता खाना बनाने की जिद कर रही थी. लेकिन सतीश ने उसे मना कर दिया और उसको अपने बदन से चिपका कर सो गया.

सतीश 12 बजे उठा तो श्वेता कमरे में नहीं थी. सतीश हॉल में आया. किचन में देखा तो श्वेता खाना बना रही थी. सतीश हॉल बैठ कर टीवी देखने लगा.

कुछ देर में श्वेता खाना लेकर आयी. उसने ऊपर सिर्फ पीली कलर की ब्रा पहन रखी थी. नीचे स्कर्ट जैसी कोई मॉडर्न ड्रेस थी. सतीश सिर्फ शॉर्ट्स में था. उसने खाना लगाया. उन्होंने टीवी देखते हुए खाना खाया. फिर श्वेता उसकी गोद में आकर बैठ गयी. सतीश को किस किया और सतीश के सीने में अपना सिर छुपाने लगी. सतीश को ऐसे ही गले लगाये हुए श्वेता टीवी देख रही थी.कुछ देर बाद,

सतीश- “चलो कहीं बाहर घूमने चलते हैं”.

उसने सिर सतीश के सीने में छुपाये वैसे ही पूछा- “कहाँ”?

सतीश- “बाद में डिसाइड करेंगे पहले चलते हैं”.

श्वेता- “ओके”!

श्वेता तैयार होने चली गयी. सतीश गया और पांच मिनट में तैयार होकर वापस आ गया. सतीश ने जा कर श्वेता के कमरे में देखा, श्वेता अभी तक कमरे में ही थी. सतीश हॉल में बैठ कर उसका इन्तजार कर रहा था.
 
करीब 45 मिनट बाद श्वेता सीढ़ी से उतरते हुए आयी. उसने ब्लू कलर का गाउन पहन रखा था जो श्वेता के पैरों तक घुटने के नीचे तक आ रहा था. आँखों में काजल लगा रखा था. होंठों पे लाल कलर की लिपस्टिक. सुन्दर तो श्वेता पहले से है लेकिन इस अवतार में श्वेता अप्सरा लग रही थी.

सीढ़ी से उतरते हुए श्वेता हॉल में आ रही थी. मानो ऐसा लग रहा था जैसे कोई अप्सरा आसमान से उतर कर उसकी तरफ आ रही हो. उसे देख कर सतीश आश्चर्य के मारे भौंचक्का सा रह गया. श्वेता चलती हुई सतीश के पास आई और बोली- “मुँह तो बंद कर लो मिस्टर”!

यह बात कहकर श्वेता हँसने लगी.

उसकी ये अदा भरी हँसी सतीश को श्वेता के प्यार में पागल कर रही थी. खैर सतीश संभला और खड़ा हुआ, सतीश बोला- “अब चलें मैडम”?

उसने मुस्कराते हुए सतीश के हाथ में हाथ डाला और चलने लगी.

सतीश ने वाइट कलर की टी शर्ट पर ब्लू कलर का ब्लेजर डाल रखा था और नीचे लाइट ब्लू जीन्स. दोनों परफ़ेक्ट कपल लग रहे थे.

सतीश ने बाइक की चाबी उठाई, फिर उसकी तरफ देखा. सोचा इस पटाखे को ऐसे खुले में ले जाना ठीक नहीं. सतीश ने मुस्कराते हुए चाबी को वापस रख दिया. सतीश ने पापा की कार की चाबी ली और चल दिया.

दोनों कार में बातें करते हुए जा रहे थे. दोनों निश्चित कर रहे थे कि हमे कहाँ कहाँ घूमना है. क्या क्या करेंगे.

अचानक सतीश की नजर श्वेता के गले में पड़े नेकलेस पर गयी. थोड़ा अजीब था. ऐसा पहले सतीश ने उसे पहनते नहीं देखा था. वह पतली सी चेन जैसा था. आगे की तरफ दो रिंग एक आकार में बड़ी और दूसरी छोटी, जुड़ी हुई थी.

सतीश ने उससे इशारे से लोकेट के बारे में पूछा तो श्वेता उसे हाथों से छेड़ते हुए सतीश को बताने लगी- “यह तुम्हारी निशानी है मेरे शरीर पर. यह ये बताती है कि मुझ पे बस तुम्हारा अधिकार है. मैं बस तुम्हारे ऑर्डर्स फॉलो करुँगी”.

श्वेता सतीश को बताने लगी कि कैसे बी.डी.एस.एम. में स्लेव (गुलाम) को दिया जाता है. ताकि उसे याद रहे कि उसको मास्टर के प्रति पूरी तरह न्यौछावर रहना है, उसका हर कहना मानना है.

उसकी इतनी विस्तृत जानकारी पर सतीश हैरान था. लेकिन श्वेता के मुँह से ऐसी बातें अच्छी लग रही थी. उसने सतीश को दिखाया कि उस पर सतीश का नाम भी लिखा था. उसने सतीश को अपना ब्रेसलेट दिखाया जिस पर “ऑन्ड बाय सतीश” (सतीश की गुलाम) लिखा हुआ था.

सतीश- “ये सब के सामने मत पहनना”.

श्वेता- ठीक है. लेकिन जब भी हमें अकेले में वक़्त मिलेगा, तुम मुझे इसी रूप में देखोगे”.

सतीश- “ठीक है बाबा”.

सतीश ने गाड़ी एक मल्टीप्लेक्स सिनेमा हाल के सामने रोकी. उसे उतार कर सतीश गाड़ी पार्क करने गया और सतीश ने दो कॉर्नर टिकट भी ले ली. दोनों हॉल में अपनी सीट पर बैठ गए. यह शहर का सबसे अच्छा सिनेमा हॉल था. सतीश उसके के साथ पहले भी यहाँ आ चुका था. यहाँ भीड़ काफी कम होती है. जो लोग होते हैं वह भी किसी से मतलब नहीं रखते. सतीश ने उसके के साथ यहां भी मजे किये थे.

इत्तेफाक से यह वही सीट थी जहाँ वह पिछली बार बैठे थे. सीट पर बैठते ही दोनों ने एक दूसरे को देखा. दोनों को पुरानी बातें याद आ गयी थीं. जब वह पिछली बार यहाँ आये थे, हालाँकि इतनी आजादी नहीं थी क्योंकि दोनों काफी छुपते-छुपाते आये थे.

सतीश के दिमाग में उस दिन का पूरा सीन घूम गया. सतीश ने उसकी तरफ देखा. श्वेता सतीश की तरफ ही देख रही थी. दोनों ने एक साथ स्माइल दी. श्वेता भी वही सोच रही थी जो सतीश सोच रहा था. शरमा कर उसने मुँह नीचे कर लिया. श्वेता अभी भी मुस्करा रही थी.

खैर फिल्म शुरू हुई. दोनों फिल्म देख रहे थे. करीब आधे घंटे बाद सतीश श्वेता के कानों के पास गया और गाल पर किस करके कान में कहा- “चेक योर फ़ोन”! (अपना फोन देखो!)

सतीश ने उसे भेजा था- “हाय स्लट”.

उसने जवाब दिया- “यस मास्टर”!

सतीश – “हाऊ वॉज लास्ट नाईट”? (पिछली रात कैसी बीती?)

श्वेता- “इट वॉज़ वंडरफुल मास्टर”! (बहुत ही अद्भुत मालिक!).

सतीश – “वॉना डू इट अगेन”? (फिर से करना चाहोगी?)

श्वेता- “यस प्लीज मास्टर. ईट्स माइ प्लेजर मास्टर”! (हाँ मालिक जरूर, मुझ को भी इससे खुशी मिलेगी)
 
Back
Top