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सतीश स्टिक को वैसे ही घुमाते हुए उसकी चूत के पास लाया और उसकी चूत पर फेरने लगा. श्वेता मचल उठी, उसकी चूत पानी छोड़ रही थी. सतीश के ऐसा करने मात्र से ही श्वेता स्खलित हो गयी. उसका रस स्टिक पे लगा हुआ था. सतीश स्टिक को श्वेता के मुंह के पास ले गया जिसको श्वेता झट से चाट गयी. श्वेता थोड़ी सी शांत हुई.
श्वेता के हाँफने से श्वेता के स्तनों को सतीश ऊपर नीचे होते हुए देख सकता था. श्वेता का गोरा बदन वासना से तप कर लाल पड़ चुका था. सतीश श्वेता के चेहरे पर संतोष का भाव देख सकता था.
उसे इस हालत में देख कर सतीश का लंड भी तन चुका था. सतीश श्वेता के पीछे गया. श्वेता के बालों को पकड़ कर खींचा और उसका सिर ऊपर की तरफ उठ गया. सतीश ने श्वेता के कंधों पर दांत गड़ा कर चुम्बन किया. उसने अपने होंठ भींच लिए, कामुक अंदाज में दबा लिए. शायद उसे मजा आ रहा था. सतीश श्वेता के बदन की गर्मी को महसूस कर सकता था. उसका बदन एक दम तवे के माफिक गर्म था.
सतीश ने उसे गर्दन पर किस करते हुए श्वेता के हाथ की रस्सी खोली और सतीश उसे इसी हालात मे छोड़ कर किचन में गया. फ्रिज़ से सतीश आइस ट्रे उठा लाया.
श्वेता का रोम-रोम उत्तेजित था. वह पूरी तरह से अपने भाई की स्लेव (सेक्स गुलाम) बन गयी थी. श्वेता को उसका हर एक स्पर्श उन्मादित कर रहा था. यह बिल्कुल अलग अहसास था. श्वेता का पूरा बदन इतना ज्यादा सेंसेटिव हो गया था कि हवा का स्पर्श भी उसे उत्तेजित कर रहा था. श्वेता ने तीन दिन मे कितनी ही बार सेक्स किया था लेकिन यह अहसास कभी नहीं हुआ. वह बस एक भी पल रुके बिना ज़ोरदार चुदाई की कामना कर रही थी. लेकिन उसे सतीश ने कहा था कि अगर पूरा मजा लेना है तो तुम कुछ करोगी नहीं. जो करेगा वह ही करेगा. इसलिए वह कुछ भी नहीं कर रही थी.
सतीश कमरे में वापस आया. श्वेता वहीं फर्श पर घुटने के बल बैठी थी. उसके वापस आने का इंतज़ार कर रही थी. सतिश ने उसे उठाया और श्वेता के हाथों को ऊपर पुल-अप बार पर चौड़ा करके बांध दिया. नीचे श्वेता के दोनों पैरों को भी पुल बार के स्टैंड के सहारे चौड़ा करके बांध दिया ताकि श्वेता हिले डुले ना. सतीश ने आईस क्यूब मुँह में लिया, श्वेता के पेट पर चूमने लगा. श्वेता सिहर सी गयी जैसे श्वेता के बदन में कोई करंट सा दौड़ गया हो. उसे इसका जरा सा अहसास भी नहीं था कि सतिश कुछ ऐसा करने वाला है. श्वेता के फूल की पंखुड़ी की तरह लाल होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान थी. शायद इससे उसे काफी आनंद आ रहा था.
आइस क्यूब को श्वेता के बदन पर घुमाते हुए सतीश ऊपर की ओर बढ़ रहा था. उसका अंग-अंग टूट रहा था. श्वेता काफी उत्तेजित हो रही थी. श्वेता के चेहरे की मुस्कान गहरी हो रही थी. उसे इस चीज से काफी आराम मिल रहा था. सतीश उसके बदन की खुशबू को महसूस कर पा रहा था. यूँ तो उन्होंने कई बार सेक्स किया है लेकिन यह अहसाह ही कुछ और था.
सतीश आईस क्यूब को श्वेता के स्तनों पर घुमा रहा था. श्वेता के गोरे-गोरे स्तनों पर लाल निशान पड़ चुके थे. आइस का स्पर्श पाते ही श्वेता के निप्पल कड़े हो गए थे.
श्वेता आहहहह … ऊ … ओह … की हल्की सीत्कार ले रही थी. चूंकि उसे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया के लिए मनाही थी इसलिए श्वेता मजबूर थी. नहीं तो अभी तक श्वेता उसको चोदने को कह देती या तो खुद ज़बरदस्ती उसको को पटक कर उसके लौड़े पर चढ़ कर चुद लेती. ऐसा सतीश इसलिए सोच रहा था क्योंकि वह उसको कई बार चोद चुका था और वह श्वेता के हर एक भाव से वाक़िफ़ था. उसका यह भाव सतीश को और भी उत्तेजित कर रहा था.
श्वेता के बदन की खुशबू पाकर सतीश का लंड फिर से खड़ा होने लगा था जोकि एक बार पहले ही झड़ चुका था. सतीश उसकी गर्दन के पास था. सतीश उसकी गर्म सांसों को महसूस कर सकता था. श्वेता के बाद सतीश श्वेता के होंठों पर पहुंचा और श्वेता आइस क्यूब को जीभ निकाल कर चाटने लगी. उसकी आँखों पर पट्टी थी. सतीश को इतना पास पाकर उसने सतीश को चूमना चाहा लेकिन सतीश श्वेता के माथे पर चुम्बन करते हुए जल्दी से पीछे हट गया.
श्वेता के हाँफने से श्वेता के स्तनों को सतीश ऊपर नीचे होते हुए देख सकता था. श्वेता का गोरा बदन वासना से तप कर लाल पड़ चुका था. सतीश श्वेता के चेहरे पर संतोष का भाव देख सकता था.
उसे इस हालत में देख कर सतीश का लंड भी तन चुका था. सतीश श्वेता के पीछे गया. श्वेता के बालों को पकड़ कर खींचा और उसका सिर ऊपर की तरफ उठ गया. सतीश ने श्वेता के कंधों पर दांत गड़ा कर चुम्बन किया. उसने अपने होंठ भींच लिए, कामुक अंदाज में दबा लिए. शायद उसे मजा आ रहा था. सतीश श्वेता के बदन की गर्मी को महसूस कर सकता था. उसका बदन एक दम तवे के माफिक गर्म था.
सतीश ने उसे गर्दन पर किस करते हुए श्वेता के हाथ की रस्सी खोली और सतीश उसे इसी हालात मे छोड़ कर किचन में गया. फ्रिज़ से सतीश आइस ट्रे उठा लाया.
श्वेता का रोम-रोम उत्तेजित था. वह पूरी तरह से अपने भाई की स्लेव (सेक्स गुलाम) बन गयी थी. श्वेता को उसका हर एक स्पर्श उन्मादित कर रहा था. यह बिल्कुल अलग अहसास था. श्वेता का पूरा बदन इतना ज्यादा सेंसेटिव हो गया था कि हवा का स्पर्श भी उसे उत्तेजित कर रहा था. श्वेता ने तीन दिन मे कितनी ही बार सेक्स किया था लेकिन यह अहसास कभी नहीं हुआ. वह बस एक भी पल रुके बिना ज़ोरदार चुदाई की कामना कर रही थी. लेकिन उसे सतीश ने कहा था कि अगर पूरा मजा लेना है तो तुम कुछ करोगी नहीं. जो करेगा वह ही करेगा. इसलिए वह कुछ भी नहीं कर रही थी.
सतीश कमरे में वापस आया. श्वेता वहीं फर्श पर घुटने के बल बैठी थी. उसके वापस आने का इंतज़ार कर रही थी. सतिश ने उसे उठाया और श्वेता के हाथों को ऊपर पुल-अप बार पर चौड़ा करके बांध दिया. नीचे श्वेता के दोनों पैरों को भी पुल बार के स्टैंड के सहारे चौड़ा करके बांध दिया ताकि श्वेता हिले डुले ना. सतीश ने आईस क्यूब मुँह में लिया, श्वेता के पेट पर चूमने लगा. श्वेता सिहर सी गयी जैसे श्वेता के बदन में कोई करंट सा दौड़ गया हो. उसे इसका जरा सा अहसास भी नहीं था कि सतिश कुछ ऐसा करने वाला है. श्वेता के फूल की पंखुड़ी की तरह लाल होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान थी. शायद इससे उसे काफी आनंद आ रहा था.
आइस क्यूब को श्वेता के बदन पर घुमाते हुए सतीश ऊपर की ओर बढ़ रहा था. उसका अंग-अंग टूट रहा था. श्वेता काफी उत्तेजित हो रही थी. श्वेता के चेहरे की मुस्कान गहरी हो रही थी. उसे इस चीज से काफी आराम मिल रहा था. सतीश उसके बदन की खुशबू को महसूस कर पा रहा था. यूँ तो उन्होंने कई बार सेक्स किया है लेकिन यह अहसाह ही कुछ और था.
सतीश आईस क्यूब को श्वेता के स्तनों पर घुमा रहा था. श्वेता के गोरे-गोरे स्तनों पर लाल निशान पड़ चुके थे. आइस का स्पर्श पाते ही श्वेता के निप्पल कड़े हो गए थे.
श्वेता आहहहह … ऊ … ओह … की हल्की सीत्कार ले रही थी. चूंकि उसे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया के लिए मनाही थी इसलिए श्वेता मजबूर थी. नहीं तो अभी तक श्वेता उसको चोदने को कह देती या तो खुद ज़बरदस्ती उसको को पटक कर उसके लौड़े पर चढ़ कर चुद लेती. ऐसा सतीश इसलिए सोच रहा था क्योंकि वह उसको कई बार चोद चुका था और वह श्वेता के हर एक भाव से वाक़िफ़ था. उसका यह भाव सतीश को और भी उत्तेजित कर रहा था.
श्वेता के बदन की खुशबू पाकर सतीश का लंड फिर से खड़ा होने लगा था जोकि एक बार पहले ही झड़ चुका था. सतीश उसकी गर्दन के पास था. सतीश उसकी गर्म सांसों को महसूस कर सकता था. श्वेता के बाद सतीश श्वेता के होंठों पर पहुंचा और श्वेता आइस क्यूब को जीभ निकाल कर चाटने लगी. उसकी आँखों पर पट्टी थी. सतीश को इतना पास पाकर उसने सतीश को चूमना चाहा लेकिन सतीश श्वेता के माथे पर चुम्बन करते हुए जल्दी से पीछे हट गया.