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सतीश ने दूसरी बार में व्हिप को सामने से उसके पेट वाले हिस्से पे मारा, श्वेता फिर से चिहुंकी. सांसें श्वेता की फिर से अटक सी गईं. लेदर उसके जिस्म पे सटीक चिपक रहा था. स्लो मोशन में देखें, तो लेदर उसके नंगे स्किन पे सटाक से चिपकता और एक कम्पन के साथ वापिस आता. हर बार पे श्वेता की सांसें अटक सी जातीं.
सतीश ने उससे इस दूसरे वार के साथ बोला- “बोलो एक और बार मास्टर, आग्रह करो मारने के लिए”
उसने कांपते हुए दर्द भरी आवाज में कहा- “यस्स … प्लीजज … वन्स हम्म वन्स मोर्रर्र … मास्टर”
श्वेता की आवाज से जाहिर था कि उसे दर्द हो रहा था. लेकिन उसके चेहरे पे वासना के भाव थे.
सतीश घूमते हुए श्वेता की बायीं तरफ आया और उसके नंगे सॉफ्ट गांड पे दे मारा. श्वेता जोर से चिहुंकी.
श्वेता-‘आहह ईसस्सस … हम्म..’
सतीश- ‘से … अगेन..’
उसने एक झटके में जल्दी से बोला- “वंस मोर मास्टर”
सतीश ने उसके दूसरे गांड पे मारा. श्वेता दांत भींच कर दर्द से चिहुंक उठी.
‘आहह … उक्क..’
श्वेता की ‘आहह..’ दर्द से अटक के रह गयी. फिर एक पल बाद उसने ‘उम्मम्मम … ईस्स..’ की आवाज के साथ लंबी सांस छोड़ी.
सतीश होंठों को दांत से चबाते हुए बड़े ही कामुक लहजे में बोला- “फिर से बोलो”.
‘उम्म्म यसस्स … वंस मोर मास्टर … हम्म आहह …
उसके इस अंदाज से सतीश के अन्दर वासना की लहर सी दौड़ गयी. श्वेता किसी एक्सपर्ट रंडी की तरह बर्ताव कर रही थी. शायद यह वाइन के नशे का नतीजा था. श्वेता दर्द को अपना चुकी थी और अब सतीश के वार का मजा ले रही थी. साथ ही श्वेता बड़बड़ा भी रही थी- “उम्म्म … ओह … यस मास्टर … आई लाईक दैट … उम्म्मम … हम्मम … आहह … यस प्लीज मास्टर … वन्स मोर मास्टर”
ऐसा करते हुए श्वेता अपने गांड बड़े कामुक अंदाज में हिलाते हुए दांतों से होंठों को काटने लगी. वाइन के नशे ने उसे रंडी बना दिया था.
उसके इस अंदाज से सतीश भी गर्म हो गया और सतीश ने जोर से श्वेता की नंगी पीठ, उठे हुए नग्न बॉब्स, नंगे पेट, नंगी गांड, मखमली टांगों पे लगातार कई कोड़े बरसा डाले.
श्वेता बस दर्द के मारे ‘आ आहह … ओह ओ ईईईई … ऊम्म..’ करके चीखती रही. श्वेता कुतिया की तरह चिल्ला रही थी.
सतीश ने कोड़े बरसाना रोका. उसने सिसकते हुए सांस ली … श्वेता रो रही थी. श्वेता की आंखों में आंसू थे. लेकिन चेहरे पे वही कामुक भाव थे. श्वेता निढाल पड़ी सांसों पे काबू पाने की कोशिश कर रही थी. श्वेता की चीखें काफी तेज थीं. सतीश को लगता था कि श्वेता की तेज आवाजें आसपास के नजदीक के फ्लैट तक सुनाई पड़ी होंगी.
अब सतीश रुक गया. सतीश श्वेता की आंखों में आंसू नहीं देख सकता था. सतीश ने उससे पूछा- “आरामसे करना चाहती हो”?
श्वेता कुछ नहीं बोली, उसने बस ना में सर हिलाया.
सतीश ने उससे बोला- “हम कभी बाद में कर सकते हैं जब तुम तैयार हो रहोगी”
श्वेता ने गुस्से से उसे देखा.
सतीश अपने पूरे होशोहवास में था. लेकिन श्वेता पर सेक्स का भूत सवार था. ऊपर से वाइन ने उसे और खोल दिया था. श्वेता इस वाइल्ड सेक्स का पूरा मजा ले रही थी. हालांकि सतीश उसके स्वभाव को जानता था. उसे रोका नहीं जा सकता. सतीश ढीला पड़ा, तो श्वेता नाराज हो जाएगी. यह वाइल्ड सेक्स ही तो श्वेता की इच्छा थी. उसने सतीश की कई सेक्स इच्छाओं को पूरा किया था, आज सतीश की बारी थी.
सतीश उसके पीछे आया और उसके बाल पकड़ कर खींचे. श्वेता दर्द के साथ कामुकता भरी सिसकियां ले रही थी. उसने फुंफकार के सर ऊपर किया. गुस्से और कामवासना का सम्म्लित भाव उसके चेहरे पे था. श्वेता जोर जोर से सांस ले रही थी या यूं कहें श्वेता हांफ रही थी. सच में श्वेता “हम्म हम्मम..” करके हांफ भी रही थी.
सतीश ने बोला- “तुम्हें पसन्द आया मेरी रंडी”?
उसने हामी में सर हिलाया.
सतीश ने उसे बनावटी गुस्से से डाँट के कहा “तेज बोल मेरी रंडी”
श्वेता रोती सी आवाज में कांपती आवाज में बोली- “मुझे ये अच्छा लग रहा है मास्टर”
सतीश ने उसके गांड पर फिर से व्हिप से मारा. उसने गांड उचकाते हुए “उम्म्म हम्म उम्मम्म …” की आवाजें निकालीं. श्वेता अपनी सिसकारियों को दबा रही थी … या यूं कहें कि जितना हो सके, श्वेता धीमी आवाज कर रही थी.
सतीश ने उससे इस दूसरे वार के साथ बोला- “बोलो एक और बार मास्टर, आग्रह करो मारने के लिए”
उसने कांपते हुए दर्द भरी आवाज में कहा- “यस्स … प्लीजज … वन्स हम्म वन्स मोर्रर्र … मास्टर”
श्वेता की आवाज से जाहिर था कि उसे दर्द हो रहा था. लेकिन उसके चेहरे पे वासना के भाव थे.
सतीश घूमते हुए श्वेता की बायीं तरफ आया और उसके नंगे सॉफ्ट गांड पे दे मारा. श्वेता जोर से चिहुंकी.
श्वेता-‘आहह ईसस्सस … हम्म..’
सतीश- ‘से … अगेन..’
उसने एक झटके में जल्दी से बोला- “वंस मोर मास्टर”
सतीश ने उसके दूसरे गांड पे मारा. श्वेता दांत भींच कर दर्द से चिहुंक उठी.
‘आहह … उक्क..’
श्वेता की ‘आहह..’ दर्द से अटक के रह गयी. फिर एक पल बाद उसने ‘उम्मम्मम … ईस्स..’ की आवाज के साथ लंबी सांस छोड़ी.
सतीश होंठों को दांत से चबाते हुए बड़े ही कामुक लहजे में बोला- “फिर से बोलो”.
‘उम्म्म यसस्स … वंस मोर मास्टर … हम्म आहह …
उसके इस अंदाज से सतीश के अन्दर वासना की लहर सी दौड़ गयी. श्वेता किसी एक्सपर्ट रंडी की तरह बर्ताव कर रही थी. शायद यह वाइन के नशे का नतीजा था. श्वेता दर्द को अपना चुकी थी और अब सतीश के वार का मजा ले रही थी. साथ ही श्वेता बड़बड़ा भी रही थी- “उम्म्म … ओह … यस मास्टर … आई लाईक दैट … उम्म्मम … हम्मम … आहह … यस प्लीज मास्टर … वन्स मोर मास्टर”
ऐसा करते हुए श्वेता अपने गांड बड़े कामुक अंदाज में हिलाते हुए दांतों से होंठों को काटने लगी. वाइन के नशे ने उसे रंडी बना दिया था.
उसके इस अंदाज से सतीश भी गर्म हो गया और सतीश ने जोर से श्वेता की नंगी पीठ, उठे हुए नग्न बॉब्स, नंगे पेट, नंगी गांड, मखमली टांगों पे लगातार कई कोड़े बरसा डाले.
श्वेता बस दर्द के मारे ‘आ आहह … ओह ओ ईईईई … ऊम्म..’ करके चीखती रही. श्वेता कुतिया की तरह चिल्ला रही थी.
सतीश ने कोड़े बरसाना रोका. उसने सिसकते हुए सांस ली … श्वेता रो रही थी. श्वेता की आंखों में आंसू थे. लेकिन चेहरे पे वही कामुक भाव थे. श्वेता निढाल पड़ी सांसों पे काबू पाने की कोशिश कर रही थी. श्वेता की चीखें काफी तेज थीं. सतीश को लगता था कि श्वेता की तेज आवाजें आसपास के नजदीक के फ्लैट तक सुनाई पड़ी होंगी.
अब सतीश रुक गया. सतीश श्वेता की आंखों में आंसू नहीं देख सकता था. सतीश ने उससे पूछा- “आरामसे करना चाहती हो”?
श्वेता कुछ नहीं बोली, उसने बस ना में सर हिलाया.
सतीश ने उससे बोला- “हम कभी बाद में कर सकते हैं जब तुम तैयार हो रहोगी”
श्वेता ने गुस्से से उसे देखा.
सतीश अपने पूरे होशोहवास में था. लेकिन श्वेता पर सेक्स का भूत सवार था. ऊपर से वाइन ने उसे और खोल दिया था. श्वेता इस वाइल्ड सेक्स का पूरा मजा ले रही थी. हालांकि सतीश उसके स्वभाव को जानता था. उसे रोका नहीं जा सकता. सतीश ढीला पड़ा, तो श्वेता नाराज हो जाएगी. यह वाइल्ड सेक्स ही तो श्वेता की इच्छा थी. उसने सतीश की कई सेक्स इच्छाओं को पूरा किया था, आज सतीश की बारी थी.
सतीश उसके पीछे आया और उसके बाल पकड़ कर खींचे. श्वेता दर्द के साथ कामुकता भरी सिसकियां ले रही थी. उसने फुंफकार के सर ऊपर किया. गुस्से और कामवासना का सम्म्लित भाव उसके चेहरे पे था. श्वेता जोर जोर से सांस ले रही थी या यूं कहें श्वेता हांफ रही थी. सच में श्वेता “हम्म हम्मम..” करके हांफ भी रही थी.
सतीश ने बोला- “तुम्हें पसन्द आया मेरी रंडी”?
उसने हामी में सर हिलाया.
सतीश ने उसे बनावटी गुस्से से डाँट के कहा “तेज बोल मेरी रंडी”
श्वेता रोती सी आवाज में कांपती आवाज में बोली- “मुझे ये अच्छा लग रहा है मास्टर”
सतीश ने उसके गांड पर फिर से व्हिप से मारा. उसने गांड उचकाते हुए “उम्म्म हम्म उम्मम्म …” की आवाजें निकालीं. श्वेता अपनी सिसकारियों को दबा रही थी … या यूं कहें कि जितना हो सके, श्वेता धीमी आवाज कर रही थी.