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Incest कैसे कैसे परिवार

आठवाँ घर: स्मिता और विक्रम शेट्टी

अध्याय ८.३.२

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अब तक:

इधर श्रेया और मेहुल निद्रा में थे तो वहीं नायक परिवार में भोजन के उपरांत मंत्रणा चल रही थी. कुछ समय के विचार विमर्श के बाद ये निश्चित किया गया कि श्रेया के प्रस्ताव को मानने में कोई विशेष आपत्ति नहीं है. अगर शेट्टी परिवार कौटुम्बिक सम्भोग में लिप्त है तो आगे के लिए अनेक संभावनाएं खुल जाएँगी.

इसी के साथ मंत्रणा समाप्त हुई और अंजलि को श्रेया को अपना निर्णय बताने का दायित्व सौंपा गया. अंजलि ने इसे शाम को ही पूर्ण करने का बीड़ा भी उठा लिया.

अब आगे:

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स्मिता का घर:

श्रेया और मेहुल जब उठे तो चार बजने को थे. दोनों ने बाथरूम में जाकर हल्का स्नान किया और फिर बैठक में आ गए. श्रेया ने चाय चढ़ा दी और वर्षा ने मेहुल की ओर देखकर आँखों से पूछा “क्या हुआ?”

मेहुल ने संकेत से बताया कि बहुत अच्छा रहा. वर्षा मुस्कुरा दी. श्रेया की चाय बन गई तो वो लेकर आ गई और तीनों बैठे चाय पीने लगे. वर्षा ने श्रेया को देखा तो उसके चेहरे को दमक से जान लिया कि वो भी प्रसन्न थी. तभी घर की घंटी बजी, मेहुल ने उठकर खोला तो सामने अंजलि थी.

“अरे दीदी, आप? आओ आओ.” उसने अंजलि का स्वागत किया.

अंजलि अंदर आई तो श्रेया समझ गई कि उसका तीर सही लक्ष्य पर लगा था. उसने अंजलि का हाथ पकड़ा और अपने कमरे में ले गई. बिस्तर अब तक ठीक नहीं किया था तो अंजलि ने भौहें सिकोड़ीं.

श्रेया: “अरे मेहुल से चुदवाकर हटी हूँ कुछ देर पहले. बिस्तर अभी भी ठीक नहीं किया. और तुम बताओ.”

अंजलि: “मैंने परिवार में बात की. उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. परन्तु ये होगा कैसे इसकी मुझे चिंता है. अब तक किसी को पता नहीं था हमारे विषय में. पर अब न जाने क्यों एक डर सा लग रहा है.”

श्रेया: “अंजलि, मेरा परिवार और मोहन का परिवार इस प्रकार से कई वर्षों से संलिप्त है. कुछ और लोग हैं जो इस विषय को जानते हैं, परन्तु वो भी अपने सामाजिक प्रतिष्ठा के चलते कभी कुछ नहीं कहेंगे. हमारे घर सटे हुए हैं तो किसी को इतना संशय भी नहीं होगा. समय चलते तुम्हें कुछ अन्य परिवारों के बारे में भी पता चल जायेगा, परन्तु ये तुम सबको अपने आप निर्धारित करना होगा.”

श्रेया आगे बोली, “रही बात कि इसका प्रारम्भ कैसे होगा, तो मैं पापाजी से कहकर कोई रिसोर्ट में जाने के लिए आग्रह कर सकती हूँ, जहाँ हमें कोई और न जानता हो. वहाँ हम अपने मन के अनुरूप इसका आरम्भ कर सकते हैं. अगर तुम सब इसके लिए सहमत हो तो अगले शुक्रवार को हम चल सकते हैं.”

श्रेया ने ये बताना आवश्यक नहीं समझा कि ये वही रिसोर्ट है जहाँ उनके समुदाय के मिलन समारोह होते हैं. अंजलि ने कुछ देर चिंतन किया.

अंजलि, “मुझे परिवार वालों ने ये अधिकार दिया है कि जो मैं सही समझूँ वो निर्णय ले सकती हूँ जो उन सबको मान्य होगा.”

श्रेया अंजलि को आशा से देख रही थी. अंजलि ने सिर उठाकर श्रेया को देखा और उसका असहय समझ गई.

अंजलि, “श्रेया, तुम अंकल से बात कर सकती हो. हम सब शुक्रवार को चलेंगे.”

श्रेया: “बहुत अच्छा निर्णय है. अब मुस्कुरा भी दो.” ये कहते हुए उसने अंजलि को बाँहों में ले लिया और उसके होंठ चूम लिए.

अंजलि भी मुस्कुरा दी और फिर उसने श्रेया के होंठ चूमे और अपने घर चली गई. श्रेया बाहर आई और अपने पति की प्रतीक्षा करने लगी.

*******

समुदाय की मंत्रणा:

मधुजी ने अपनी प्रबंधन समिति को एक मंत्रणा के लिए आमंत्रित करने का निर्णय लिया. उन्होंने अगले दिन सबको अपने घर पर आमंत्रित किया. महिला सदस्याओं के लिए इसमें कोई अड़चन नहीं थी, परन्तु पुरुष सदस्य कुछ आनाकानी करने के बाद सहमत हो गए. अगले दिन सभी समय पर उनके घर पहुंच गए. घर के अन्य सदस्य बाहर थे, और उनके पति गिरी अपने नए मित्र जीवन राणा के घर गए हुए थे. इस बात की मधुजी को अत्यंत प्रसन्नता थी कि जीवन से मिलने के बाद जैसे गिरी में भी शक्ति का संचार हो गया था. अब वो भी अपने कमरे में बंद न रहकर परिवार की रात्रिकालीन क्रीड़ा में भाग लेने लगे थे.

मधुजी ने सबको अपने ऑफिस में बैठाया।

“आपसे मैंने कल बात की थी, एक नए परिवार को जोड़ने के विषय में. मैंने उनके बारे में छानबीन आरम्भ कर दी है. मेरे विचार से तीन चार महीने में हमें उनके बारे में विस्तृत सूचना मिल जाएगी.”

“परन्तु मेरा आपको इस विषय में अपने एक संशय को दूर करने के लिए ये मंत्रणा की है. नया परिवार स्मिता शेट्टी और सुनीति राणा के पड़ोसी परिवार हैं. वर्षा और समीर नायक.”

एक सदस्य ने सीटी बजाई।

“तो मेरा संशय यही है कि इतने निकट रहने वाले परिवारों को जोड़ना सही है या नहीं? आप जानते हो कि हमारे अन्य परिवार नगर में फैले हुए हैं.”

मंजुला (एक सदस्या) बोली, “मुझे इसमें कोई विशेष समस्या नहीं दिखती. वैसे भी हमारे समुदाय में इस वर्ष केवल राणा परिवार ही जुड़ पाया है. नए परिवार को आने में वैसे बी अब से छह महीने तो लग ही जायेंगे. फिर उन्हें भी अपनी समाजिक प्रतिष्ठा की चिंता होगी.”

अन्य सब भी उनके इस विचार से सहमत थे. उन्हें भी इस बात की चिंता थी कि नयी पीढ़ी की सोच पृथक थी और कहीं ऐसा न हो कि आगे चलकर समुदाय का खंडन हो जाये.

“मुझे नहीं लगता कि ऐसा होने की अधिक संभावना है. हाँ, हमें विवाह के विषय में अपने नियम बदलने पर भी विचार करना चाहिए. समुदाय के बाहर विवाह करने पर, परिवार के केवल उस सदस्य को ही एक वर्ष के लिए अलग करना पूरे परिवार को अलग करने से अच्छा होगा. अगर आप सहमत हो तो इस बिंदु पर अगले मिलन समारोह में वोट लिए जा सकते हैं.” मधुजी ने कहा.

“ये उत्तम विचार है. विवाह की संख्या बढ़ रही है. ऐसा न हो कि इस नियम के कारण समुदाय ही समाप्त हो जाये.” एक पुरुष सदस्य ने कहा.

“अब हमें आने वाली नई समिति के विषय में भी सोचना होगा. आप सबने बहुत अच्छा कार्य किया है और इसके लिए हम सभी आभारी हैं. परन्तु नियम यही है कि अगले मिलन पर नए चुनाव होंगे और उसके अगले मिलन में नयी समिति शपथ लेगी.”

सबने सिर हिलाकर सहमति दी.

“जैसा आप जानते हैं आप अपनी ओर से दो सदस्यों का नाम मनोनीत कर सकते हैं, उनकी स्वीकृति होने पर. अन्य सदस्य एक का ही नाम दे सकते हैं. उसके बाद कौन चुना जाता है ये तो चुनाव पर ही निर्भर है. तो मैं चाहूंगी कि आप अपने नाम सोच कर उनसे परामर्श कर लें. अन्य सदस्यों को भी सूचना कर दें ताकि इस समारोह में चुनाव पूर्ण हो सकें. समय अधिक नहीं है, पर हम एक बहुत छोटा समुदाय हैं.”

“हाँ, मेरे विचार से इस सप्ताह में ही नाम निर्धारित हो जायेंगे. इस मिलन पर चुनाव किये जा सकते हैं.”

इसके बाद आर्थिक स्थिति पर चर्चा हुई. फिर मंत्रणा समाप्त करने के पश्चात सब सदस्य अपने घर या कार्य पर चले गए.

*******

स्मिता का घर:

श्रेया मोहन के आने के बाद उसे कमरे में ले गई और अंजलि से हुई बात बता दी. मोहन ने सोचा कि ये बात सबके साथ साझा करना अत्यंत आवश्यक है. उसने इसका दायित्व उठाया और रात्रिभोज के उपरांत इसके विषय में चर्चा करने का समय चुना. शाम को एक दो ड्रिंक्स के बाद भोजन किया गया और फिर मोहन ने कहा कि वो सबके साथ एक बात बाँटना चाहता है. तो सब लोग वहीँ बैठक में बैठ गए. मोहन ने उस रात को सुनाई देने वाली चीखें और फिर श्रेया का अंजलि के घर जाना और फिर आज अंजलि का उनके घर आना सबको बताया.

विक्रम उसकी ओर ध्यान से देख रहा था. अंत में उसने श्रेया द्वारा प्रस्तावित रिसोर्ट की योजना अपने पिता को बताई.

“तो अब हमें ये निर्णय लेना है कि हम उन्हें अपने साथ ले जायेंगे या नहीं?”

“अगर बात इतनी आगे बढ़ा ही चुके हो तो न कहने का प्रश्न ही कहाँ बचता है.” विक्रम ने श्रेया की ओर देखकर कहा.

“पापा.” श्रेया कुछ बोलती उसके पहले ही विक्रम ने उसे रोक दिया, “क्या बात यहीं तक सीमित है या कुछ और भी है.”

“हमने मधुजी को उनके बारे में जाँच करने के लिए निवेदन किया है.”

“तेरी माँ का… कभी कुछ पूछ भी लिया करो.”

“सॉरी, पापा.” मोहन और श्रेया ने कहा. इस पूरे वार्तालाप में महक और मेहुल मौन ही थे.

“सुनिए.” स्मिता ने कहा.

“मुझे इसमें कोई विशेष समस्या नहीं लग रही है. आप क्यों इतना चिंतित हो रहे हैं?”

“अगर अंजलि ने श्रेया से झूठ कहा हो तो?”

“आप श्रेया की बुद्धिमता पर शंका कर रहे हैं. और अंजलि कभी इस घटना को स्वीकार नहीं करती.”

“ओके, तो क्या चाहते हो?”

“रिसोर्ट बुक कर दो. कितने कमरे चाहिए पड़ेंगे?” स्मिता ने अब बागडोर अपने हाथ में ले ली.

“छह हम और वहां से सात. तेरह लोग.”

“किसी को जोड़ लो, मुझे ये अंक अच्छा नहीं लगता.”

“मम्मी को ले लो!” श्रेया ने तुरंत अपना सुझाव दिया.

“अविरल मानेगा तीन दिन के लिए?”

“ओह, उन्हें मनाया जा सकता है. या स्नेहा को ले लेते हैं.”

“हाँ स्नेहा ही ठीक रहेगी.”

इसके बाद विक्रम ने रिसोर्ट के एक तल पर चार बड़े कमरे बुक कर दिए. उसी तल पर बने एक समारोह कक्ष को भी बुक कर दिया. लोकेश जो मधुजी का पुत्र और रिसोर्ट का स्वामी था उसने विक्रम को उत्तम सेवा का आश्वासन दिया. बाद में जब लोकेश ने अपनी माँ मधुजी को बताया तो उन्होंने लोकेश से अपनी ओर से कुछ अन्य निवेदन भी किये. लोकेश ने बिना कारण जाने उन्हें स्वीकार किया. मना करता भी तो कैसे? मधुजी उसे अपनी गांड से जो समझा रही थीं.

********

मेहुल दुविधा में था. परसों उसका महक के साथ का समय था, फिर अगले दिन दिंची क्लब में और फिर उसके अगले दिन स्नेहा के साथ. और अब ये नया बखेड़ा उनके पड़ोसियों के साथ का. वैसे अंजलि मस्त थी और उसे चोदने का विचार उसके मन में कई बार आता था, जब जब वो मिलती थी, जो कम ही होता था. उसकी माँ वर्षा की बात कुछ और ही थी. पका हुआ फल थी जिसकी जवानी अब तक ढली नहीं थी, कुछ उसकी माँ के समान. और उसे इस आयु की स्त्रियों को चोदने में अधिक आनंद आता था. उसे सीखने वाली जो लगभग इसी आयु की जो थीं.

वो महक या स्नेहा के साथ बनी योजना को बदलना चाहता था, विशेषकर महक क्योंकि वो किसी भी कारण से क्लब में जाकर विफल नहीं होना चाहता था. पर उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो करे भी तो क्या?

पर इसका समाधान स्वयं ही हो गया. राणा परिवार ने महक को शॉपिंग के लिए बुलाया जिस दिन उसका महक से समय तय हुआ था. महक मेहुल की ओर देखकर मना करने ही वाली थी कि मेहुल ने उसे रोका और जाने के लिए सहमति देने का संकेत किया. फोन रखकर महक मेहुल की और मुड़ी.

“भैया?”

“मैं कहीं भगा नहीं जा रहा हूँ, पर जिस घर में तुझे जाना है वहाँ अगर अभी से टाल मटोल करेगी तो नकारात्मक व्यवहार माना जा सकता है. मेरी मान, मन लगाकर शॉपिंग करना और उन सबको अपने निर्मल व्यवहार से जीत लेना. फिर मैं तो यहीं हूँ.”

महक मेहुल के सीने से लग गई. उसकी आँखों में आंसू थे.

“भैया, आप संसार के सबसे अच्छे भाई हो!”

मेहुल ने इधर उधर देखा, स्मिता और श्रेया उन्हें देखकर भावुक हो रहे थे.

“क्या देख रहे हो भैया?”

“मैं देख रहा था कि दादा (मोहन) का नंबर मैंने कैसे काट दिया.”

महक हंसने लगी.

“ओके, भैया, आप दोनों वर्ल्ड के बेस्ट भाई हो. अब ठीक.”

“हम्म वर्ल्ड की बेस्ट बहन जब बोल रही है तो मान लेता हूँ. क्यों मम्मी और भाभी?”

“बिलकुल सही. और हमारा परिवार वर्ल्ड का बेस्ट परिवार.”

स्मिता और श्रेया ने आगे बढ़कर उन दोनों को बांध लिया और चारों एक दूसरे से लिपट गए.

मेहुल की एक समस्या हल हो गई थी. उसने भाभी से कहा कि स्नेहा को और दो दिन आगे बढ़ा दो.

“ओह हो हो, मेरे बच्चे का साथ पाने के लिए अब अपॉइंटमेंट लेना पड़ रहा है.”

“भाभी, आप भी!” मेहुल शर्माते हुए बोला।

“चल मैं उसे कहे देती हूँ.” श्रेया ने कहा और फिर सब अपने कार्य में लग गए.

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दिंची क्लब में मेहुल:

मेहुल निर्धारित दिन और समय पर सचिन द्वारा दिए पते पर पहुंच गया. घर से कुछ दूर था, नगर की मुख्य सीमा से बाहर. अपनी गाड़ी को खड़ा करने के बाद वो अंदर गया जहाँ एक सुंदर मध्यम आयु की स्त्री बैठी हुई कुछ पढ़ रही थी. मेहुल को देखकर वो मुस्कुराई और उसका स्वागत करने के बाद उसके आने का उद्देश्य पूछा. मेहुल ने उसे बताया तो उसने मेहुल से उसका पहचान पत्र माँगा. मेहुल ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिया जिसकी उस महिला, जिसका नाम नूतन लिखा हुआ था, ने कॉपी बनाई और मेहुल को लौटा दिया.

उसी समय वहाँ एक और आगंतुक का पदापर्ण हुआ. एक पचास पचपन वर्ष की महिला ने आकर नूतन से बात की और अपना नाम बताया. नूतन ने उससे भी उसका पहचान पत्र लिया और फिर कॉपी बनाकर लौटा दिया. उस महिला को देखकर मेहुल का लंड टनटना गया. महिला ने जिस प्रकार से मेकअप किया था और जिस प्रकार से वो अपने आप को प्रस्तुत कर रही थी, उससे ये विदित होता था कि वो धनाढ्य परिवार की है. सचिन के द्वारा बताई हुई फ़ीस का ध्यान आते ही उसे समझ आ गया कि ये महिला भी अपनी चुदाई के लिए ही आई है.

ये कुछ सीमा तक सच था. रूचि मैडम की माँ राशि ने अपनी सहेलियों में से कुछ को चुनकर इस क्लब के विषय में बताया था. उसका अपनी बेटी के इस नए व्यवसाय में कुछ सहायता करने का उद्देश्य था. रूचि ने पार्थ से बात की और फिर कुछ चिंतन के बाद उनमें से दो महिलाओं को ही चुना गया. अगर इनमे से कोई पारित नहीं होती तो किसी और को अवसर दिया जाना था.

नूतन ने उस महिला, जिसका नाम सोनी था उसे पास के एक कमरे में बैठाया और फिर मेहुल को लेकर चल पड़ी. एक कमरे के आगे जाकर उसने उसे खोला और मेहुल को अंदर आने को कहा. कमरा बहुत अच्छा सजाया हुआ था और किसी भी पाँच सितारा होटल के कमरे को मात कर सकता था. नूतन ने मेहुल को आवश्यक निर्देश दिए. कपड़े उतारकर कहाँ रखने हैं, स्नान करने के बाद गाउन पहनना है और फिर उसके परीक्षण के लिए संचालिका की प्रतीक्षा करनी है.

मेहुल के पूछने पर नूतन ने बताया कि वे भी बीस एक मिनट में पहुंच जाएँगी. नूतन ने मेहुल को एक प्रपत्र भी दिया और उसे भरने के लिए कहा. उसमें गोपनीयता की शपथ और अन्य कुछ विवरण भरने थे. इसके बाद उसने कमरे को बंद किया और चली गई. मेहुल ने अपने कपड़े बताये अनुसार रखे और स्नान के लिए चला गया. वहाँ पर उपलब्ध गाउन को पहना, कोई अंतर्वस्त्र की आवश्यकता नहीं थी. मेहुल ने उस फॉर्म को भरा और अपने हस्ताक्षर करने के बाद उसे टेबल पर रख दिया. फिर वो सोफे पर बैठकर कमरे के दरवाजे की ओर देखते हुए अगले पड़ाव की प्रतीक्षा करने लगा.

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दिंची क्लब में सोनी:

मेहुल को छोड़कर नूतन सोनी के पास आई और उन्हें अपने साथ एक दूसरे कमरे में ले गई. सोनी भी कमरे की भव्यता से प्रभावित हुए बिना न रह सकी. नूतन ने मेहुल के ही समान सोनी को समझाया, फॉर्म भरने के लिए दिया और चली गई. सोनी ने स्नान किया और फॉर्म भरा. क्लब की फ़ीस पर अवश्य उसे कुछ शंका थी परन्तु राशि (रूचि मैडम की माँ) ने उसे समझाया था कि उसे हर पैसे की कीमत कई गुना मिलेगी. सोनी के पति एक बड़े व्यवसाई थे और महीने में कई दिन बाहर ही रहते थे. जब राशि ने उनके साथ जाना छोड़ा तो सोनी को आश्चर्य हुआ था.

कुछ दिनों पहले उसने राशि से बात की तो राशि ने बताया कि उसने अपनी अलग व्यवस्था कर ली है और अब उसकी चुदाई नियमित रूप से जवान और मोटे कड़े और बड़े लौडों से होती है. सोनी के निवेदन पर कुछ दिन पहले राशि ने उसे अपने घर बुलाया और उसे इस क्लब के बारे में बताया. यहाँ की गोपनीयता को बनाये रखने के लिए उसने मुझे हमारे मुंबई में किये गए अनाचारों के वीडियो दिखाए. अगर सोनी गोपनीयता नहीं बना पाई तो वो उन्हें सोनी के पति के पास भेजने में कोई संकोच नहीं करेगी. क्लब की फीस अधिक थी, पर राशि ने पाई पाई का मोल बताया. आज सोनी यहाँ पहली बार आई थी. राशि ने उसे ये तो समझा दिया था आज उसकी भरपूर चुदाई होगी और हर प्रकार से संतुष्ट हो कर ही लौटेगी.

अब वो उस व्यक्ति की राह देख रही थी जो उसकी परीक्षा लेने वाला था. “इतने लौड़े खाये हैं कि ये लौंडा भी मेरे तलवे चाटेगा.” ये सोचते हुए सोनी मन ही मन मुस्कुरा उठी.

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आठवाँ घर: स्मिता और विक्रम शेट्टी

अध्याय ८.३.२

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अब तक:

इधर श्रेया और मेहुल निद्रा में थे तो वहीं नायक परिवार में भोजन के उपरांत मंत्रणा चल रही थी. कुछ समय के विचार विमर्श के बाद ये निश्चित किया गया कि श्रेया के प्रस्ताव को मानने में कोई विशेष आपत्ति नहीं है. अगर शेट्टी परिवार कौटुम्बिक सम्भोग में लिप्त है तो आगे के लिए अनेक संभावनाएं खुल जाएँगी.

इसी के साथ मंत्रणा समाप्त हुई और अंजलि को श्रेया को अपना निर्णय बताने का दायित्व सौंपा गया. अंजलि ने इसे शाम को ही पूर्ण करने का बीड़ा भी उठा लिया.

अब आगे:

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स्मिता का घर:

श्रेया और मेहुल जब उठे तो चार बजने को थे. दोनों ने बाथरूम में जाकर हल्का स्नान किया और फिर बैठक में आ गए. श्रेया ने चाय चढ़ा दी और वर्षा ने मेहुल की ओर देखकर आँखों से पूछा “क्या हुआ?”

मेहुल ने संकेत से बताया कि बहुत अच्छा रहा. वर्षा मुस्कुरा दी. श्रेया की चाय बन गई तो वो लेकर आ गई और तीनों बैठे चाय पीने लगे. वर्षा ने श्रेया को देखा तो उसके चेहरे को दमक से जान लिया कि वो भी प्रसन्न थी. तभी घर की घंटी बजी, मेहुल ने उठकर खोला तो सामने अंजलि थी.

“अरे दीदी, आप? आओ आओ.” उसने अंजलि का स्वागत किया.

अंजलि अंदर आई तो श्रेया समझ गई कि उसका तीर सही लक्ष्य पर लगा था. उसने अंजलि का हाथ पकड़ा और अपने कमरे में ले गई. बिस्तर अब तक ठीक नहीं किया था तो अंजलि ने भौहें सिकोड़ीं.

श्रेया: “अरे मेहुल से चुदवाकर हटी हूँ कुछ देर पहले. बिस्तर अभी भी ठीक नहीं किया. और तुम बताओ.”

अंजलि: “मैंने परिवार में बात की. उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. परन्तु ये होगा कैसे इसकी मुझे चिंता है. अब तक किसी को पता नहीं था हमारे विषय में. पर अब न जाने क्यों एक डर सा लग रहा है.”

श्रेया: “अंजलि, मेरा परिवार और मोहन का परिवार इस प्रकार से कई वर्षों से संलिप्त है. कुछ और लोग हैं जो इस विषय को जानते हैं, परन्तु वो भी अपने सामाजिक प्रतिष्ठा के चलते कभी कुछ नहीं कहेंगे. हमारे घर सटे हुए हैं तो किसी को इतना संशय भी नहीं होगा. समय चलते तुम्हें कुछ अन्य परिवारों के बारे में भी पता चल जायेगा, परन्तु ये तुम सबको अपने आप निर्धारित करना होगा.”

श्रेया आगे बोली, “रही बात कि इसका प्रारम्भ कैसे होगा, तो मैं पापाजी से कहकर कोई रिसोर्ट में जाने के लिए आग्रह कर सकती हूँ, जहाँ हमें कोई और न जानता हो. वहाँ हम अपने मन के अनुरूप इसका आरम्भ कर सकते हैं. अगर तुम सब इसके लिए सहमत हो तो अगले शुक्रवार को हम चल सकते हैं.”

श्रेया ने ये बताना आवश्यक नहीं समझा कि ये वही रिसोर्ट है जहाँ उनके समुदाय के मिलन समारोह होते हैं. अंजलि ने कुछ देर चिंतन किया.

अंजलि, “मुझे परिवार वालों ने ये अधिकार दिया है कि जो मैं सही समझूँ वो निर्णय ले सकती हूँ जो उन सबको मान्य होगा.”

श्रेया अंजलि को आशा से देख रही थी. अंजलि ने सिर उठाकर श्रेया को देखा और उसका असहय समझ गई.

अंजलि, “श्रेया, तुम अंकल से बात कर सकती हो. हम सब शुक्रवार को चलेंगे.”

श्रेया: “बहुत अच्छा निर्णय है. अब मुस्कुरा भी दो.” ये कहते हुए उसने अंजलि को बाँहों में ले लिया और उसके होंठ चूम लिए.

अंजलि भी मुस्कुरा दी और फिर उसने श्रेया के होंठ चूमे और अपने घर चली गई. श्रेया बाहर आई और अपने पति की प्रतीक्षा करने लगी.

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समुदाय की मंत्रणा:

मधुजी ने अपनी प्रबंधन समिति को एक मंत्रणा के लिए आमंत्रित करने का निर्णय लिया. उन्होंने अगले दिन सबको अपने घर पर आमंत्रित किया. महिला सदस्याओं के लिए इसमें कोई अड़चन नहीं थी, परन्तु पुरुष सदस्य कुछ आनाकानी करने के बाद सहमत हो गए. अगले दिन सभी समय पर उनके घर पहुंच गए. घर के अन्य सदस्य बाहर थे, और उनके पति गिरी अपने नए मित्र जीवन राणा के घर गए हुए थे. इस बात की मधुजी को अत्यंत प्रसन्नता थी कि जीवन से मिलने के बाद जैसे गिरी में भी शक्ति का संचार हो गया था. अब वो भी अपने कमरे में बंद न रहकर परिवार की रात्रिकालीन क्रीड़ा में भाग लेने लगे थे.

मधुजी ने सबको अपने ऑफिस में बैठाया।

“आपसे मैंने कल बात की थी, एक नए परिवार को जोड़ने के विषय में. मैंने उनके बारे में छानबीन आरम्भ कर दी है. मेरे विचार से तीन चार महीने में हमें उनके बारे में विस्तृत सूचना मिल जाएगी.”

“परन्तु मेरा आपको इस विषय में अपने एक संशय को दूर करने के लिए ये मंत्रणा की है. नया परिवार स्मिता शेट्टी और सुनीति राणा के पड़ोसी परिवार हैं. वर्षा और समीर नायक.”

एक सदस्य ने सीटी बजाई।

“तो मेरा संशय यही है कि इतने निकट रहने वाले परिवारों को जोड़ना सही है या नहीं? आप जानते हो कि हमारे अन्य परिवार नगर में फैले हुए हैं.”

मंजुला (एक सदस्या) बोली, “मुझे इसमें कोई विशेष समस्या नहीं दिखती. वैसे भी हमारे समुदाय में इस वर्ष केवल राणा परिवार ही जुड़ पाया है. नए परिवार को आने में वैसे बी अब से छह महीने तो लग ही जायेंगे. फिर उन्हें भी अपनी समाजिक प्रतिष्ठा की चिंता होगी.”

अन्य सब भी उनके इस विचार से सहमत थे. उन्हें भी इस बात की चिंता थी कि नयी पीढ़ी की सोच पृथक थी और कहीं ऐसा न हो कि आगे चलकर समुदाय का खंडन हो जाये.

“मुझे नहीं लगता कि ऐसा होने की अधिक संभावना है. हाँ, हमें विवाह के विषय में अपने नियम बदलने पर भी विचार करना चाहिए. समुदाय के बाहर विवाह करने पर, परिवार के केवल उस सदस्य को ही एक वर्ष के लिए अलग करना पूरे परिवार को अलग करने से अच्छा होगा. अगर आप सहमत हो तो इस बिंदु पर अगले मिलन समारोह में वोट लिए जा सकते हैं.” मधुजी ने कहा.

“ये उत्तम विचार है. विवाह की संख्या बढ़ रही है. ऐसा न हो कि इस नियम के कारण समुदाय ही समाप्त हो जाये.” एक पुरुष सदस्य ने कहा.

“अब हमें आने वाली नई समिति के विषय में भी सोचना होगा. आप सबने बहुत अच्छा कार्य किया है और इसके लिए हम सभी आभारी हैं. परन्तु नियम यही है कि अगले मिलन पर नए चुनाव होंगे और उसके अगले मिलन में नयी समिति शपथ लेगी.”

सबने सिर हिलाकर सहमति दी.

“जैसा आप जानते हैं आप अपनी ओर से दो सदस्यों का नाम मनोनीत कर सकते हैं, उनकी स्वीकृति होने पर. अन्य सदस्य एक का ही नाम दे सकते हैं. उसके बाद कौन चुना जाता है ये तो चुनाव पर ही निर्भर है. तो मैं चाहूंगी कि आप अपने नाम सोच कर उनसे परामर्श कर लें. अन्य सदस्यों को भी सूचना कर दें ताकि इस समारोह में चुनाव पूर्ण हो सकें. समय अधिक नहीं है, पर हम एक बहुत छोटा समुदाय हैं.”

“हाँ, मेरे विचार से इस सप्ताह में ही नाम निर्धारित हो जायेंगे. इस मिलन पर चुनाव किये जा सकते हैं.”

इसके बाद आर्थिक स्थिति पर चर्चा हुई. फिर मंत्रणा समाप्त करने के पश्चात सब सदस्य अपने घर या कार्य पर चले गए.

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स्मिता का घर:

श्रेया मोहन के आने के बाद उसे कमरे में ले गई और अंजलि से हुई बात बता दी. मोहन ने सोचा कि ये बात सबके साथ साझा करना अत्यंत आवश्यक है. उसने इसका दायित्व उठाया और रात्रिभोज के उपरांत इसके विषय में चर्चा करने का समय चुना. शाम को एक दो ड्रिंक्स के बाद भोजन किया गया और फिर मोहन ने कहा कि वो सबके साथ एक बात बाँटना चाहता है. तो सब लोग वहीँ बैठक में बैठ गए. मोहन ने उस रात को सुनाई देने वाली चीखें और फिर श्रेया का अंजलि के घर जाना और फिर आज अंजलि का उनके घर आना सबको बताया.

विक्रम उसकी ओर ध्यान से देख रहा था. अंत में उसने श्रेया द्वारा प्रस्तावित रिसोर्ट की योजना अपने पिता को बताई.

“तो अब हमें ये निर्णय लेना है कि हम उन्हें अपने साथ ले जायेंगे या नहीं?”

“अगर बात इतनी आगे बढ़ा ही चुके हो तो न कहने का प्रश्न ही कहाँ बचता है.” विक्रम ने श्रेया की ओर देखकर कहा.

“पापा.” श्रेया कुछ बोलती उसके पहले ही विक्रम ने उसे रोक दिया, “क्या बात यहीं तक सीमित है या कुछ और भी है.”

“हमने मधुजी को उनके बारे में जाँच करने के लिए निवेदन किया है.”

“तेरी माँ का… कभी कुछ पूछ भी लिया करो.”

“सॉरी, पापा.” मोहन और श्रेया ने कहा. इस पूरे वार्तालाप में महक और मेहुल मौन ही थे.

“सुनिए.” स्मिता ने कहा.

“मुझे इसमें कोई विशेष समस्या नहीं लग रही है. आप क्यों इतना चिंतित हो रहे हैं?”

“अगर अंजलि ने श्रेया से झूठ कहा हो तो?”

“आप श्रेया की बुद्धिमता पर शंका कर रहे हैं. और अंजलि कभी इस घटना को स्वीकार नहीं करती.”

“ओके, तो क्या चाहते हो?”

“रिसोर्ट बुक कर दो. कितने कमरे चाहिए पड़ेंगे?” स्मिता ने अब बागडोर अपने हाथ में ले ली.

“छह हम और वहां से सात. तेरह लोग.”

“किसी को जोड़ लो, मुझे ये अंक अच्छा नहीं लगता.”

“मम्मी को ले लो!” श्रेया ने तुरंत अपना सुझाव दिया.

“अविरल मानेगा तीन दिन के लिए?”

“ओह, उन्हें मनाया जा सकता है. या स्नेहा को ले लेते हैं.”

“हाँ स्नेहा ही ठीक रहेगी.”

इसके बाद विक्रम ने रिसोर्ट के एक तल पर चार बड़े कमरे बुक कर दिए. उसी तल पर बने एक समारोह कक्ष को भी बुक कर दिया. लोकेश जो मधुजी का पुत्र और रिसोर्ट का स्वामी था उसने विक्रम को उत्तम सेवा का आश्वासन दिया. बाद में जब लोकेश ने अपनी माँ मधुजी को बताया तो उन्होंने लोकेश से अपनी ओर से कुछ अन्य निवेदन भी किये. लोकेश ने बिना कारण जाने उन्हें स्वीकार किया. मना करता भी तो कैसे? मधुजी उसे अपनी गांड से जो समझा रही थीं.

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मेहुल दुविधा में था. परसों उसका महक के साथ का समय था, फिर अगले दिन दिंची क्लब में और फिर उसके अगले दिन स्नेहा के साथ. और अब ये नया बखेड़ा उनके पड़ोसियों के साथ का. वैसे अंजलि मस्त थी और उसे चोदने का विचार उसके मन में कई बार आता था, जब जब वो मिलती थी, जो कम ही होता था. उसकी माँ वर्षा की बात कुछ और ही थी. पका हुआ फल थी जिसकी जवानी अब तक ढली नहीं थी, कुछ उसकी माँ के समान. और उसे इस आयु की स्त्रियों को चोदने में अधिक आनंद आता था. उसे सीखने वाली जो लगभग इसी आयु की जो थीं.

वो महक या स्नेहा के साथ बनी योजना को बदलना चाहता था, विशेषकर महक क्योंकि वो किसी भी कारण से क्लब में जाकर विफल नहीं होना चाहता था. पर उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो करे भी तो क्या?

पर इसका समाधान स्वयं ही हो गया. राणा परिवार ने महक को शॉपिंग के लिए बुलाया जिस दिन उसका महक से समय तय हुआ था. महक मेहुल की ओर देखकर मना करने ही वाली थी कि मेहुल ने उसे रोका और जाने के लिए सहमति देने का संकेत किया. फोन रखकर महक मेहुल की और मुड़ी.

“भैया?”

“मैं कहीं भगा नहीं जा रहा हूँ, पर जिस घर में तुझे जाना है वहाँ अगर अभी से टाल मटोल करेगी तो नकारात्मक व्यवहार माना जा सकता है. मेरी मान, मन लगाकर शॉपिंग करना और उन सबको अपने निर्मल व्यवहार से जीत लेना. फिर मैं तो यहीं हूँ.”

महक मेहुल के सीने से लग गई. उसकी आँखों में आंसू थे.

“भैया, आप संसार के सबसे अच्छे भाई हो!”

मेहुल ने इधर उधर देखा, स्मिता और श्रेया उन्हें देखकर भावुक हो रहे थे.

“क्या देख रहे हो भैया?”

“मैं देख रहा था कि दादा (मोहन) का नंबर मैंने कैसे काट दिया.”

महक हंसने लगी.

“ओके, भैया, आप दोनों वर्ल्ड के बेस्ट भाई हो. अब ठीक.”

“हम्म वर्ल्ड की बेस्ट बहन जब बोल रही है तो मान लेता हूँ. क्यों मम्मी और भाभी?”

“बिलकुल सही. और हमारा परिवार वर्ल्ड का बेस्ट परिवार.”

स्मिता और श्रेया ने आगे बढ़कर उन दोनों को बांध लिया और चारों एक दूसरे से लिपट गए.

मेहुल की एक समस्या हल हो गई थी. उसने भाभी से कहा कि स्नेहा को और दो दिन आगे बढ़ा दो.

“ओह हो हो, मेरे बच्चे का साथ पाने के लिए अब अपॉइंटमेंट लेना पड़ रहा है.”

“भाभी, आप भी!” मेहुल शर्माते हुए बोला।

“चल मैं उसे कहे देती हूँ.” श्रेया ने कहा और फिर सब अपने कार्य में लग गए.

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दिंची क्लब में मेहुल:

मेहुल निर्धारित दिन और समय पर सचिन द्वारा दिए पते पर पहुंच गया. घर से कुछ दूर था, नगर की मुख्य सीमा से बाहर. अपनी गाड़ी को खड़ा करने के बाद वो अंदर गया जहाँ एक सुंदर मध्यम आयु की स्त्री बैठी हुई कुछ पढ़ रही थी. मेहुल को देखकर वो मुस्कुराई और उसका स्वागत करने के बाद उसके आने का उद्देश्य पूछा. मेहुल ने उसे बताया तो उसने मेहुल से उसका पहचान पत्र माँगा. मेहुल ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिया जिसकी उस महिला, जिसका नाम नूतन लिखा हुआ था, ने कॉपी बनाई और मेहुल को लौटा दिया.

उसी समय वहाँ एक और आगंतुक का पदापर्ण हुआ. एक पचास पचपन वर्ष की महिला ने आकर नूतन से बात की और अपना नाम बताया. नूतन ने उससे भी उसका पहचान पत्र लिया और फिर कॉपी बनाकर लौटा दिया. उस महिला को देखकर मेहुल का लंड टनटना गया. महिला ने जिस प्रकार से मेकअप किया था और जिस प्रकार से वो अपने आप को प्रस्तुत कर रही थी, उससे ये विदित होता था कि वो धनाढ्य परिवार की है. सचिन के द्वारा बताई हुई फ़ीस का ध्यान आते ही उसे समझ आ गया कि ये महिला भी अपनी चुदाई के लिए ही आई है.

ये कुछ सीमा तक सच था. रूचि मैडम की माँ राशि ने अपनी सहेलियों में से कुछ को चुनकर इस क्लब के विषय में बताया था. उसका अपनी बेटी के इस नए व्यवसाय में कुछ सहायता करने का उद्देश्य था. रूचि ने पार्थ से बात की और फिर कुछ चिंतन के बाद उनमें से दो महिलाओं को ही चुना गया. अगर इनमे से कोई पारित नहीं होती तो किसी और को अवसर दिया जाना था.

नूतन ने उस महिला, जिसका नाम सोनी था उसे पास के एक कमरे में बैठाया और फिर मेहुल को लेकर चल पड़ी. एक कमरे के आगे जाकर उसने उसे खोला और मेहुल को अंदर आने को कहा. कमरा बहुत अच्छा सजाया हुआ था और किसी भी पाँच सितारा होटल के कमरे को मात कर सकता था. नूतन ने मेहुल को आवश्यक निर्देश दिए. कपड़े उतारकर कहाँ रखने हैं, स्नान करने के बाद गाउन पहनना है और फिर उसके परीक्षण के लिए संचालिका की प्रतीक्षा करनी है.

मेहुल के पूछने पर नूतन ने बताया कि वे भी बीस एक मिनट में पहुंच जाएँगी. नूतन ने मेहुल को एक प्रपत्र भी दिया और उसे भरने के लिए कहा. उसमें गोपनीयता की शपथ और अन्य कुछ विवरण भरने थे. इसके बाद उसने कमरे को बंद किया और चली गई. मेहुल ने अपने कपड़े बताये अनुसार रखे और स्नान के लिए चला गया. वहाँ पर उपलब्ध गाउन को पहना, कोई अंतर्वस्त्र की आवश्यकता नहीं थी. मेहुल ने उस फॉर्म को भरा और अपने हस्ताक्षर करने के बाद उसे टेबल पर रख दिया. फिर वो सोफे पर बैठकर कमरे के दरवाजे की ओर देखते हुए अगले पड़ाव की प्रतीक्षा करने लगा.

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दिंची क्लब में सोनी:

मेहुल को छोड़कर नूतन सोनी के पास आई और उन्हें अपने साथ एक दूसरे कमरे में ले गई. सोनी भी कमरे की भव्यता से प्रभावित हुए बिना न रह सकी. नूतन ने मेहुल के ही समान सोनी को समझाया, फॉर्म भरने के लिए दिया और चली गई. सोनी ने स्नान किया और फॉर्म भरा. क्लब की फ़ीस पर अवश्य उसे कुछ शंका थी परन्तु राशि (रूचि मैडम की माँ) ने उसे समझाया था कि उसे हर पैसे की कीमत कई गुना मिलेगी. सोनी के पति एक बड़े व्यवसाई थे और महीने में कई दिन बाहर ही रहते थे. जब राशि ने उनके साथ जाना छोड़ा तो सोनी को आश्चर्य हुआ था.

कुछ दिनों पहले उसने राशि से बात की तो राशि ने बताया कि उसने अपनी अलग व्यवस्था कर ली है और अब उसकी चुदाई नियमित रूप से जवान और मोटे कड़े और बड़े लौडों से होती है. सोनी के निवेदन पर कुछ दिन पहले राशि ने उसे अपने घर बुलाया और उसे इस क्लब के बारे में बताया. यहाँ की गोपनीयता को बनाये रखने के लिए उसने मुझे हमारे मुंबई में किये गए अनाचारों के वीडियो दिखाए. अगर सोनी गोपनीयता नहीं बना पाई तो वो उन्हें सोनी के पति के पास भेजने में कोई संकोच नहीं करेगी. क्लब की फीस अधिक थी, पर राशि ने पाई पाई का मोल बताया. आज सोनी यहाँ पहली बार आई थी. राशि ने उसे ये तो समझा दिया था आज उसकी भरपूर चुदाई होगी और हर प्रकार से संतुष्ट हो कर ही लौटेगी.

अब वो उस व्यक्ति की राह देख रही थी जो उसकी परीक्षा लेने वाला था. “इतने लौड़े खाये हैं कि ये लौंडा भी मेरे तलवे चाटेगा.” ये सोचते हुए सोनी मन ही मन मुस्कुरा उठी.

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क्लब में शोनाली और पार्थ:

शोनाली और पार्थ एक की कार में कुछ ही देर में पहुंचे. शोनाली अपने नए रोमियो को लेकर कुछ उत्सुक थी, पर पार्थ ने उसे कुछ भी नहीं बताया था.

शोनाली: “रूचि मैडम के जुड़ने से हमारा क्लब अब हानि से उठकर लाभ में आ चुका है. अब उनकी माँ भी हमें नए सदस्य देकर सहायता कर रही हैं. हमें उनका कृतग्न होना चाहिए.”

पार्थ: “बुआ, वो तो हम हैं. इसी कारण उन्हें घर पर सेवा दी जा रही है, जो अन्य किसी भी सदस्य को नहीं मिलतीं.”

शोनाली: “ये भी ठीक है. तो चलो आज के लिए शुभकामनायें.”

पार्थ: “आपको भी बुआ. मम्मी के लिए माल संभाल के रखियेगा.”

शोनाली: “ये भी कोई बोलने की बात हुई? आज तक दीदी को मैंने कभी निराश किया है?”

पार्थ ने शोनाली के होंठ चूमे और फिर कार से बाहर निकला, शोनाली भी निकली और क्लब में चली गई. नूतन ने उन्हें उनके कमरों का नंबर दिया और दोनों एक नए अनुभव के लिए चल पड़े. नूतन उन दोनों को जाते हुए देख रही थी.

“ये अच्छा काम है, नयी चूत और नया लंड इनको ही पहले मिलता है.” उसने सोचा. अब उसकी आवश्यकता पड़ने में कुछ समय था. उसने नापने का फीता निकलकर अपने साथ रख लिया.

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क्रमशः
 
आठवाँ घर: स्मिता और विक्रम शेट्टी

अध्याय ८.३.३

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अब तक:

जहाँ मेहुल का आज दिंची क्लब में परीक्षण था, वहीँ रूचि मैडम की माँ राशि ने अपनी एक सहेली सोनी को भी सदस्यता के लिए प्रेरित किया था. रूचि मैडम के जुड़ने के बाद क्लब में अब लाभ का अंश बढ़ रहा था. मेहुल और सोनी अपने कमरों में साक्षात्कार लेने वालों की प्रतीक्षा कर रहे थे.

अब आगे:

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दिंची क्लब में सोनी और पार्थ:

पार्थ ने कमरे में प्रवेश किया तो सोनी ने उसे सिर उठाकर देखा. और देखती रह गई. उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. अगर ये मेरी चुदाई करने वाला है तो बहुत आनंद आएगा.

“नमस्ते सोनी जी, मैं पार्थ हूँ.”

“न न न नमस्ते, पार्थ!”

“आपको आने में कोई कठिनाई तो नहीं हुई न? ड्राइवर लाने ही यहाँ मनाही है.”

“नहीं, राशि ने अच्छे से बताया था.”

“मुझे क्षमा करें, मैं भी स्नान करके आता हूँ.”

सोनी ने केवल सिर हिलाया. पार्थ ने झटपट स्नान किया और गाउन पहन लिया. आते समय उसने बिस्तर के पास उपस्थित वस्तुओं का निरीक्षण किया. जैल की ट्यूब नई थी, और अन्य वस्तुएं भी नयी ही थीं.

“जी सोनी जी, तो इसके पहले कि मैं आपको हमारे नियम इत्यादि बताऊँ क्या आपको कोई प्रश्न पूछना है.”

“आपके क्लब के सभी लड़के आप जैसे हैंडसम हैं क्या?”

पार्थ हंसने लगा. “अधिकतर हैं. पर आपको पता है कि यहां हम लड़कों को सुंदरता के कारण नियुक्त नहीं करते. आपको पता है न?”

“कुछ कुछ.”

पार्थ: “इस क्लब में रोमियो बनने के हेतु, चार योग्यताएँ आवश्यक हैं, एक लंड का आकार दस इंच से अधिक होना चाहिए, रोमियो को चुदाई में पारंगत होना चाहिए, रोमियो को स्वयं पर अतिरिक्त गर्व नहीं होना चाहिए, और अंतिम पर सबसे मुख्य कि उसे गोपनीयता रखना आना चाहिए.”

सोनी: “द द द दस इंच!”

पार्थ सोनी की आँखों में झांककर बोला: “जी. कम से कम. अब मैं आपको कुछ नियम बताता हूँ. आज के लिए और कुछ आगे के लिए.”

“पहला नियम केवल आज के लिए है: आज आपकी चुदाई जैसी मैं चाहूँगा वैसे ही करूँगा. अगर आपको किसी भी समय अड़चन या किसी भी प्रकार की कठिनाई हो, आप तुरंत बता दीजियेगा. हमारे क्लब में सदस्याएं आनंद लेने के लिए आती है, बलात्कार का यहाँ कोई प्रयोजन नहीं है.”

“दूसरा भी केवल आज के लिए ही है: आज मैं आपके मुंह, चूत और गांड तीनों में अपना रस गिराऊँगा। आपको हर बार उसे पीना होगा.”

“इसके बाद से अगर आप सदस्य बनती हैं तो आपकी चुदाई जैसा आप चाहेंगी वैसे ही की जाएगी.”

इसके बाद पार्थ ने कुछ और नियम भी उसे बताये. “तो आप क्या आगे बढ़ना चाहेंगी?”

सोनी ने स्वीकृति में सिर हिलाया.

पार्थ ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और सोनी के हाथ को थामा, फिर उसे खड़ा कर दिया. सोनी की आयु ५५ वर्ष के लगभग थी, परन्तु उसने स्वयं को बहुत संभाल कर रखा था और इसीलिए उसका शरीर उसकी आयु को छुपा रहा था. पर पार्थ की पैनी दृष्टि ने इस छलावे को भांप लिया था. फिर उसे सोनी के लंड के आकार के बारे में आश्चर्य होने से भी ये विश्वास हो गया था कि आज की चुदाई सोनी भूलेगी नहीं. हाँ, क्लब में उसे चोदने के लिए और भी रोमियो मिलेंगे, पर पहला बड़ा लंड उसका ही होगा.

सोनी के चेहरे को उठाकर पार्थ ने अपने होंठ उसके होंठों से जोड़ दिए. सोनी मानो पिघल गई. उसने भी पार्थ का साथ दिया और क्षण भर में दोनों के चुंबन की ऊर्जा से कमरा तपने लगा. सोनी के शरीर में मानो अग्नि जल उठी. उसने ऐसा अनुभव कभी नहीं किया था. पार्थ ने उसे चूमते हुए उसके गाउन को उतार फेंका. अब सोनी नग्नावस्था में पार्थ से लिपटी हुई उसके चुंबन का आनंद ले रही थी. उसने भी अपने हाथ बढ़ाये और प्रातः के गाउन को निकाल दिया. अब दोनों नंगे एक दूसरे से चिपके हुए चुंबन का आनंद लेने लगे.

“बैठिये.” पार्थ ने सोनी से कहा. सोनी आज्ञा मानकर बैठ गई और उसके सामने पार्थ का लंड आ गया.

“ओह माँ, ये लंड है?” सोनी अचरज से देख रही थी. “मेरी चूत में कैसे जायेगा?”

“आप इसकी चिंता न करें, चूत में भी जायेगा और गांड में भी. और आपको आनंद भी आएगा. पर पहले आप इसे अपने मुंह से चूसकर आनंदित करें.”

“मुझे डर लग रहा है, पार्थ.”

“सोनी जी, मैंने इसी लंड से लड़कियों की भी चुदाई की है और उनकी गांड भी मारी है. आपको सच में डरने की आवश्यकता नहीं है.” इस बार पार्थ ने लंड को सोनी के होंठों से लगा दिया.

सोनी ने मुंह खोला और पहले जीभ से पार्थ के लंड को चाटा। हर कोण से चाटने के बाद उसने लंड मुंह में लिया और चूसने लगी. यहाँ उसका वर्षों का अनुभव था, और इसमें वो निपुण थी. पार्थ भी खड़ा हुआ यही सोच रहा था कि सोनी के लंड चूसने का ढंग बहुत भिन्न था और कामोत्तेजक भी. बीच बीच में लंड निकालकर सोनी उसे हर ओर से चाटती और फिर चूसने लगती. धीरे धीरे वो पार्थ के लंड को अपने मुंह में अधिक अंदर तक लेने में सफल हो रही थी. पर एक व्यवधान के बाद वो रुक गई और फिर उतनी ही गहराई तक लंड को चूसने और चाटने में लगी रही.

पार्थ जानता था कि इस बार अगर वो जल्दी झड़ेगा तो चूत और गांड में अधिक समय तक टिक पायेगा. इसीलिए वो भी स्वयं जल्दी झड़ने के लिए आतुर था. सात आठ मिनट की चुसाई के बाद पार्थ ने सोनी को बताया कि अब वो झड़ने वाला है और उन्हें पूरा पानी पीना होगा. सोनी बिना रुके अपने काम में लगी रही और जब पार्थ ने अपना पानी छोड़ा तो सोनी ने बिना संकोच या कठिनाई के उसके लगभग पूरा रस पीने में सफलता पाई. जो उसके मुंह से बाहर निकला, उसे उसने उँगलियों के माध्यम से इकट्ठा करने के बाद चाट लिया.

“बहुत सुंदर! सोनी जी, इस पड़ाव में तो आप उच्च कोटि से भी ऊपर निकल गयीं.”

सोनी अपनी प्रशंसा सुनकर चहक उठी.

“तो अब मुझे भी आपके इस प्रयास का उत्तर देना होगा, चलिए बिस्तर पर ही चलते हैं, आगे का खेल वहीँ खेलेंगे.” पार्थ ने सोनी को बिस्तर पर बैठा दिया. फिर उसके पाँव खोले और चूत की ओर देखा जो अब पसीजी हुई थी.

“मुझे इसका स्वाद लेना है, आप लेट जाएँ तो अच्छा है.”

सोनी बिस्तर पर उचित स्थिति में लेट गई और अपने पाँवों को फैला दी.

पार्थ ने कुछ ही क्षणों में सोनी को अपनी प्रतिभा से अवगत करा दिया. सोनी वैसे तो कई लोगों से चुदवा चुकी थी, परन्तु उनमें से अधिकांश चूत चाटने के क्षेत्र में अनुभवी नहीं थे. वे एक प्रकार से नौसिखिये थे जो चोदना तो भली भांति जानते थे पर चाटने और चूसने में निपुण नहीं थे. पर जिस प्रकार से पार्थ उसकी चूत से खेल रहा था, जिस प्रकार से उसके होंठ, जीभ और उँगलियाँ अपना संगीत बना रही थीं उसका स्तर भिन्न ही था. सोनी की चूत से पानी बहे जा रहा था और पार्थ निःसंकोच उसे पी रहा था.

जब पार्थ को ये लगा कि सोनी अब चुदने के लिए पर्याप्त रूप से आतुर हो चुकी है तो वो हटा और अपना आसन सोनी के पैरों के बीच में लगाया. सोनी ने उसके मोटे लम्बे लंड को देखा तो सिहर उठी. क्या सच में वो इस दैत्य को अपनी चूत में ले पायेगी? क्या ये उसके जीवन का अंतिम दिन है? परन्तु उसने सोचा कि अंतिम हो या नहीं, इस लंड से चुदे बिना मरना भी ठीक नहीं होगा.

“थोड़ा प्यार से डालना, पार्थ। मैंने इतने बड़े लंड से कभी चुदवाया नहीं है. प्लीज.”

“सोनी जी, मैंने आपको विश्वास दिलाया था और फिर से कहता हूँ, कि कुछ क्षणों के लिए आपको अवश्य कष्ट हो सकता है, हालाँकि मैं प्रयास करूँगा कि वो भी न हो, परन्तु उसके बाद आपको आनंद की ऐसी ऊंचाई पर ले जाऊँगा जिसे अपने अब तक अनुभव नहीं किया है. पर कुछ संयम रखना होगा.”

“मैं तुम पर विश्वास कर रही हूँ. राशि ने भी यही कहा था. वो मुझसे झूठ नहीं बोलती. मैं तुम्हारी शरण में हूँ. ले चलो जहाँ मैं आज तक नहीं पहुँची।” सोनी ने कुछ साहस से कहा, हालाँकि उसका मन अभी भी विस्मित था.

पार्थ ने अपने लंड से सोनी की चूत को घिसना आरम्भ किया. सोनी की चूत ने आशय समझकर आने वाले आगंतुक के लिए रस से अपनी गुफा को भिगाया. पार्थ ने बहुत ध्यान और संयम के साथ अपने लंड को सोनी की चूत में डालना आरम्भ किया. पक्क की हल्की ध्वनि के साथ उसके सुपाड़े ने अपना स्थान सोनी की चूत में ग्रहण कर लिया. सोनी साँस रोके अपनी चूत के संहार की प्रतीक्षा कर रही थी. पर अब तक सब ठीक था.

पार्थ ने लंड पर उसी प्रकार से दबाव बनाये रखा और उसके लंड का प्रयाण भी आगे चलता रहा. लगभग आधे लंड के अंदर जाने के बाद पार्थ रुका और सोनी के चेहरे को देखा. उसे देखकर वो मुस्कुराया.

“कुछ पता लगा?” पूछने पर सोनी ने न में सिर हिलाया.

“ठीक है, अभी लंड पूरा अंदर नहीं है, मैं इसी लम्बाई से आपकी चुदाई करूँगा, धीरे धीरे आपको स्वयं ही और गहराई से चुदने की इच्छा होगी.”

पार्थ ने सधी ताल से सोनी की चुदाई आरम्भ की, सोनी को ये आभास नहीं हुआ कि हर कुछ धक्कों के बाद पार्थ अपने लंड को कुछ और गहराई तक डाल रहा था. वो तो इस चुदाई से इतना उत्तेजित हो चुकी थी कि अब उसे पार्थ के कहे अनुसार और अधिक गहरी चुदाई की इच्छा होने लगी.

“थोड़ा और डालो, बहुत अच्छा लग रहा है. ऐसा मुझे कभी नहीं लगा. प्लीज, थोड़ा और.”

पार्थ कब मना करने वाला था. उसने कुछ और अंदर तक लंड डाला और कुछ गति भी बढ़ा दी. सोनी को अब आनंद की परिभाषा समझ आने लगी थी. अब उसकी लंड की चाह और तीव्र होने लगी थी. और जैसे जैसे वो पार्थ को प्रोत्साहित करती, पार्थ उसे और तीव्रता से चोदने लगता. अचानक सोनी की साँस मानो रुक गई. उसकी आँखें फ़ैल गईं। उसे लगा कि अब उसका अंत आ गया है. पार्थ ने अचानक ही अपने पूरे लंड को उसकी चूत में उतार दिया था और रुक गया था.

पार्थ भी सोनी के चेहरे के भाव देख रहा था. कुछ देर तक सोनी यूँ ही निष्चल पड़ी रही, फिर सचेत हुई और उसने पार्थ को देखा.

“मैं मरी नहीं?”

“नहीं.”

“तो फिर चोदो मुझे. मरने तक चोदो। पूरा लंड डाल दिया है न? तो अब मुझे उसका प्रताप भी दिखाओ.”

“ये हुई न बात, अब आप उस शिखर पर पहुंचेंगी जिसकी अपने कल्पना भी नहीं की होगी.”

इसके साथ ही पार्थ ने अपने शक्तिशाली कूल्हे हिलाये और सोनी की चूत को अपने लंड की पूरी लम्बाई से चोदने लगा. सोनी को सच में कुछ नए ब्रम्हांड के दर्शन होने लगे. वो जैसे आकाश में रंग बिरंगे तारों के मध्यस्त थी, हर रंग नया था, अनूठा था. उसके शरीर का अंग अंग उसका आनंद ले रहा था. विशेषकर उसकी चूत जिसे किसी बलशाली वस्तु से प्रताड़ित किया जा रहा था. उन्हीं रंगों में अचानक परिवर्तन हुआ. सब एक दूसरे में मिलने लगे, फिर अलग हुए, फिर मिले. उसका शरीर एक नया अनुभव कर रहा था जो जीवित होने पर सम्भव नहीं था.

उसकी आँखे उसके सामने किसी को देख रही थीं, जो एक अत्यंत सुंदर और बलशाली पुरुष था. और उन दोनों का शरीर जुड़ा हुआ था. सोनी की आँखों में एक बार रंग मिल गए पर इस बार वे जुड़े रहे, उसे लगा कि उसका शरीर उसके वश में नहीं था. वो छटपटा रही थी, पर आनंद से. उसकी एक तीव्र किलकारी या चीख ने उसे इस तंद्रा से जगाया. उसके शरीर के स्पंदन रुक नहीं रहे थे. सामने वो पुरुष अभी तक उससे जुड़ा हुआ था. धीरे धीरे वो लौटी तो पार्थ को पहचान गई. उसे ये भी आभास हुआ कि अब पार्थ का लंड उसकी चूत में अवश्य था, पर कुछ कम कड़ा था. पार्थ उसे देखकर मुस्कुराया.

“कैसा लगा, सोनी जी?”

“क्या, मैं अभी भी जीवित हूँ. मुझे तो समस्त ब्रम्हांड के दर्शन हो गए.”

पार्थ ने अपना लंड बाहर निकाला. सोनी को हाथ पकड़कर उठाया और उसके मुंह को लंड पर लगा दिया. सोनी स्वतः ही उसे चाटने लगी और फिर थोड़ी देर चूसी भी.

“पार्थ तुमने सच कहा था, मुझे ऐसा अनुभव कभी भी नहीं हुआ है.”

“धन्यवाद, और अब अपनी चूत से रस निकालकर चाटिये. फिर कुछ देर विश्राम करते हैं.”

सोनी अपनी चूत में ऊँगली डालकर पार्थ और अपने रस के मिश्रण को चाटने लगी.

विश्राम के समय सोनी ने अपने विषय में कुछ कुछ बताया. उनके पति के व्यवसाय के कारण अधिकतर बाहर जाना पड़ता था. पहले वो भी उनके साथ जाती थीं, परन्तु अकेली वहाँ भी ऊब जाती थीं. फिर सहेलियों के साथ किट्टी पार्टियों में सम्मिलित हो गयीं. कुछ ही वर्ष पहले उनकी किट्टी की सहेलियों ने मुंबई जाने की योजना बनाई. उनमें से एक ने किसी एक एजेंसी के द्वारा युवा साथियों की व्यवस्था कर ली. उस यात्रा में सोनी ने पहली बार अपने पति के सिवाय किसी और से सहवास किया था. एक शारीरिक अपेक्षा की संतुष्टि हो गई.

इसके बाद ये एक सामान्य प्रक्रिया हो गई. आनंद तो आता था, परन्तु इसका मुख्य ध्येय शरीर की आवश्यकता ही रही. कुछ महीनों पहले राशि ने जाना बंद कर दिया. पूछने पर इस क्लब के बारे में बताया, और आज वो अपने इस निर्णय से पूर्णतया संतुष्ट थी. पार्थ ने कुछ अधिक नहीं बताया.

और अब समय अंतिम चरण को विधिवत पूरा करने का था. पार्थ मन में तो सोनी को सदस्यता दे ही चुका था, परन्तु सोनी की गांड का भोग किये हुए वो उन्हें छोड़ भी नहीं सकता था. पार्थ के लंड ने अंगड़ाई ली तो सोनी से छुपा न रहा. उसकी आँखों में भय की परछाईं देखकर पार्थ ने उन्हें आश्वासन दिया.

“पार्थ, अब तक मेरी गांड केवल मेरे पति ने ही मारी है, वो भी इन ३२ वर्षों में कुल आठ से दस बार. गांड मरवाये हुए मुझे एक लम्बा समय हो चुका है. हालाँकि मैं जानती हूँ कि तुम मुझे अधिक कष्ट नहीं दोगे, पर अगर मैं कहूँ रुकने के लिए तो कृपा करके बुरा न मानना।”

“ये विश्वास मैं आपको पहले भी दिला चुका हूँ.” पार्थ के मन में लड्डू फूट रहे थे. सोनी के कहने का ये तात्पर्य था कि उसकी गांड इस आयु में भी एक सीमा तक अछूती ही थी. गांड की कसावट के बारे में सोचकर पार्थ का लंड फनफना गया और सोनी की आँखें फट गयीं.

“आइये, पहले आपकी गांड को इस क्रिया के लिए उचित स्थिति में लेकर आते हैं. इससे आपको न केवल आनंद ही आएगा, बल्कि आगे आने वाले आनंद की भी कल्पना हो जाएगी. इसके बाद सच मानिये आप गांड मरवाने के लिए सदा उतावली रहेंगी. और इस क्लब के हर रोमियो से आपको इस आनंद की प्राप्ति होगी.”

सोनी का शरीर सिहर उठा. पार्थ ने अनजाने में ही उसकी सदस्यता की पुष्टि कर दी थी. पार्थ सोनी को देखकर ये सोच रहा था कि आज के बाद ये चुदाई के लिए इतनी आतुर रहेंगी कि दो तीन महीने में ही डबल चुदाई के लिए भी मान जाएँगी. पार्थ ने शोनाली बुआ से ये निश्चित करने का प्रण किया कि जब भी सोनी का इस प्रकार का निवेदन आएगा, उसे अवश्य बताया जाये. अन्यथा तीन महीने के बाद वो स्वयं ही इस कांड को पूरा करेगा. पार्थ ने सोनी का हाथ पकड़कर उन्हें बिस्तर पर घोड़ी का आसन लेने का आदेश दिया. घोड़ी बनकर भी सोनी के हाथ पाँव काँप रहे था.

पार्थ ने सामने के मनोरम दृश्य को देखा तो उसका तना लंड ऊपर नीचे होने लगा. सोनी की चिकनी गांड पर हाथ फिराते हुए उसने अपनी जीभ से उसके गांड के फूल को छेड़ा. सोनी को गुदगुदी सी हुई और वो मचल गई.

“क्या कर रहे हो?”

“ओह, इतनी सुंदर और मनभावन गांड को देखकर स्वाद लेने का मन किया.” पार्थ ने उत्तर दिया और फिर से जीभ से सोनी की गांड को चाटा। सोनी खिलखिलाने लगी. पार्थ अपने पथ पर अग्रसर रहा. सोनी की गोलाइयों को अपने हाथों से अलग किया और सामने उभरी गांड पर अपने मुंह से लार टपका दी. अँगूठे से लार को सोनी की गांड के छल्ले पर रगड़ा. अब सोनी का भय न जाने कहाँ खो गया. सोनी की गांड को अब पार्थ ने फिर से चाटना आरम्भ किया. इस बार उसकी इस क्रिया में लालसा थी. सोनी की गांड केवल उसके पति ने ही मारी थी. उसकी गांड को किसी ओर ने कभी स्पर्श भी नहीं किया था, चाटना तो दूर ही बात रही.

पार्थ सोनी को उस सीमा तक ले जाना चाहता था जहाँ सोनी का भय समाप्त हो जाये. अगर वो तनाव में रही तो उसकी गांड मारने में बहुत कठिनाई होनी थी, और सम्भवतः सोनी को आनंद के स्थान पर इस कृत्य से अरुचि हो जाती. उसे किसी भी प्रकार की शीघ्रता नहीं थी. दो घंटे की सीमा केवल रोमियो के लिए होती है. पार्थ अपने पूरे ध्यान के साथ सोनी की गांड का रसास्वादन कर रहा था. सोनी की गांड भी अब तनवममुक्त हो चुकी थी. गांड के अंदर जीभ डालकर पार्थ ने सोनी को विस्मित किया और वो झड़ गई. पार्थ मुस्कुराया, ये किला अब मेरे आगे हार मान ही लेगा.

अपनी जीभ से कई मिनट तक पार्थ सोनी की गांड का भोग करता रहा. इसके बाद उसने जीभ निकाली और अपनी छोटी ऊँगली पर जैल लगाया और हल्के से गांड को भेद दिया. सोनी की सिसकी निकली, पर उसने आपत्ति नहीं की. कुछ देर तक उस एक ऊँगली से ही पार्थ गांड मारता रहा. फिर उसने ट्यूब से भारी मात्रा में जैल सोनी की गांड में उड़ेला. फिर गांड के दोनों पाटों को भींचकर जैल को अंदर तक जाने दिया. दोबारा इसी को दोहराने के बाद फिर ऊँगली से गांड को चिकना किया. फिर दूसरी ऊँगली को भी उसमे जोड़ दिया.

अब तक सोनी पूर्ण रूप से तनावमुक्त हो चुकी था. उसका पार्थ पर अथाह विश्वास बन गया था. जितनी देर उसने उसकी गांड को उचित स्थिति में लाने में लगाया था, उसका यही अर्थ था कि वो उसकी बलि तो नहीं ही चढ़ाएगा. अचानक सोनी की आँखें भीग गयीं. उसने निर्णय लिया कि चाहे उसे कितनी भी पीड़ा हो, वो पार्थ को अपनी गांड की भेंट पूरी श्रध्दा से चढ़ायेगी. उसकी गांड ने उसके इस निर्णय का सम्मान किया और पार्थ ने ये अनुभव किया मानो सोनी की गांड की तंग गली कुछ ढीली हो गयी है.

समय आ चुका था. पार्थ ने अपने लंड पर जैल लगाया, गांड में फिर और जैल डाला. और सोनी को बताया कि वो अब गांड मारने जा रहा है. अगर उसे किसी भी प्रकार की असहजता हो तो वो रुक जायेगे. सोनी के मौन का अर्थ पार्थ ने समझ लिया. वो अपनी गांड की आहुति दे रही थी. और पार्थ इसे स्वीकार करने के लिए कर्तव्यबद्ध था.

गांड के संकरे छेद पर अपने लंड को लगाकर पार्थ ने हल्के दबाव के साथ सुपाड़े को अंदर धकेल दिया. सोनी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की. पार्थ ने दबाव बनाये रखा और जब लंड लगभग तीन इंच के लगभग अंदर चला गया तो वो रुक गया. फिर इसी गहराई तक उसने गांड मारना आरम्भ किया. सोनी को इस गहराई तक कोई कष्ट नहीं था. पार्थ के हल्के धक्के उसकी गांड को खोलने में सफल हो रहे थे. सोनी भी इस नए संवेदन सानन्दित हो रही थी. तीन चार मिनट तक इस गहराई को नापने के बाद पार्थ ने फिर लंड को अंदर धकेला और इस बार आधा लंड गांड में समा गया.

पार्थ का इस प्रक्रिया का ढंग ही कुछ ऐसा था कि सोनी को फिर कोई पीड़ा या कष्ट नहीं हुआ. पर उसे अपनी गांड भरी भरी अवश्य लगने लगी. पार्थ ने अब इस गहराई तक गांड मारने का कार्यक्रम आरम्भ किया. गांड ने उसका स्वागत किया और कुछ ही देर में उपयुक्त खुलापन मिल गया. इस गहराई तक भी पार्थ ने तीन चार मिनट गांड मारी. अब सही परीक्षा का समय था. लंड को दबाते हुए पार्थ इस बार आठ नौ इंच तक की गहराई पर जाकर रुका.

सोनी को अब अपनी गांड पैक होने का आभास होने लगा. पार्थ ने वही प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए इस गहराई को भी जीत लिया. अब अंतिम पड़ाव था. उसने सोनी की गांड पर हाथ फिरते हुए उसके कूल्हे पकड़े और फिर लंड को अंदर बाहर करते हुए एक झटके में पूरा अंदर पेल दिया. सोनी अचम्भित सी रह गई. इस बार उसे अपनी गांड में एक तीव्र जलन सी हुई, पर पल भर में जैसे वो जलन से खुजली में परिवर्तित हो गई. गांड के अंदर कुनमुनाहट होने लगी. तब उसे उस सत्य का आभास हुआ कि पार्थ के पूरे मुसल ने उसकी गांड में अपना झंडा गाड़ दिया है.

सोनी अचंभित थी कि पार्थ ने कितने संयम का परिचय दिया था. उसकी गांड में एक ऐसा संवेदन हो रहा था जिसका उसे पहले कभी अनुभव नहीं किया था. एक पूर्ति का आभास था. उसे जिस बात का डर था उसने तो अपनी उपस्थिति नहीं दिखाई थी.

“पूरा लंड ले लिया आपने, सोनी जी. बधाई हो. अब मैं आपकी गांड मारने का कार्यक्रम करूँगा। वैसे अब कोई भी कठिनाई नहीं होने चाहिए, पर अगर हो तो बताइयेगा अवश्य.”

पार्थ ने बहुत हल्की गति से अपने लंड का प्रयत्न सोनी की गांड में आरम्भ किया. इस धीमी गति के कारण सोनी को भी लंड के संचालन का पूरा आभास हो रहा था. उसका शरीर एक भिन्न उत्तेजना से कांप रहा था. पार्थ गांड मारने की कला का विशेषज्ञ था. क्लब की कुछ महिलाओं की तो गांड की सील भी उसने ही तोड़ी थी. आज वो स्त्रियाँ हर सम्भव प्रकार की चुदाई में दक्ष हो चुकी थीं. उसे विश्वास था कि सोनी भी उसी राह पर अग्रसर है. एक बार उसे इस प्रकार की चुदाई का आनंद मिल गया तो शीघ्र ही वो अपनी सारी झिझक छोड़कर चुदवाया करेगी.

हल्की गति से जब सोनी की गांड अभ्यस्त हो गई तो पार्थ ने अपने लंड की गति बधाई. सोनी कूँ कूँ की ध्वनि से सिसकारियां लेने लगी. अब गति अवरोधक की आवश्यकता नहीं थी, पर पार्थ ने नियंत्रण नहीं खोया और शनैः शनैः गति बढ़ाता रहा. एक सीमा पर आकर वो रुक गया. उसे इस बात का भान था कि अत्यधिक तीव्र गति से सोनी को चोटिल होने की संभावना थी. और उसने यही गति अंत तक बनाये रखी.

सोनी आनंद के सागर में तैर रही थी. उसे अविस्मरणीय आनंद प्राप्त हो रहा था. अपितु ऐसा सुख उसे आगे जीवन में कभी दोबारा नहीं प्राप्त होगा क्योंकि उसकी गांड मारने वाला हर रोमियो पार्थ के समान संयमी तो नहीं होने वाला. उसके कामांध मन ने जैसे ये पुष्टि कर दी कि वो अब क्लब में सदस्या तो बनेगी ही, पर अन्य रोमियो भी उसकी चूत और गांड का मंथन करेंगे.

“ओह, पार्थ. तुमने मुझे आज जीत लिया. मेरी गांड में न जाने क्या हो रहा है?” सोनी बड़बड़ाई.

इस खेल का पारखी पार्थ उसकी इन भावनाओं को समझ गया. अब उसने अधिक परीक्षा न लेने का विचार मन में लाया और अपने एक हाथ से सोनी के भग्नाशे को मसलने लगा. सोनी के शरीर से मानो ज्वालामुखी फूट पड़ा. शरीर की छटपटाहट ऐसी बड़ी जैसे पानी से निकालने पर मछली तड़पती है. पार्थ को अपने हाथ पर सोनी के रस की फुहार ने अवगत करा दिया की अब इस खेल का अंत करना ही उचित है.

सोनी की चूत को सहलाते हुए, उसके भग्न को छेड़ते हुए पार्थ ने कुछ कुछ गति बधाई और सोनी को आनंद की उस पराकाष्ठा तक ले गया जहाँ वो जीवन में कभी नहीं गई थी. सोनी को फिर उसी ब्रम्हांड के दर्शन हुए, चाँद, तारे और न जाने कितने रंग उसकी आँखों के आगे चलायमान हो गए. अपने शरीर पर उसका वश न रहा. कुछ समय उपरांत उसे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उसके शरीर में कहीं कोई पानी भर रहा हो. अपने शिखर से उतरते हुए इस संवेदना का कारण पता चल गया.

पार्थ के लंड से रस की धार उसकी गांड को भर रही थी. गांड में ठंडे और गर्म का सम्मिश्रण हो रहा था. एक अनूठी अनुभूति थी. पार्थ ने लंड पूरा गाड़कर अपना रस छोड़ा था. अब उसके वीर के किले से बाहर निकलने का समय था. संभालते हुए उसने अपने लंड को सोनी की खुली गांड से बाहर निकाला. सोनी एकदम वहीँ पर ढह गई. पार्थ मुस्कुराया. उसे अब अपने क्लब के लिए एक और स्त्री मिल गई थी.

चेतना लौटने पर सोनी ने स्वप्निल आँखों से पार्थ को देखा, “थैंक यू. तुमने आज मुझे पूर्ण रूप से बदल दिया. मैं इसे सदा याद रखूँगी.”

इसके बाद सोनी ने अपनी गांड में ऊँगली डाली और कुछ रस एकत्रित किया. “हालाँकि मुझे ये सोचकर पहले घिन आई थी की मुझे ये भी करना होगा, पर तुम्हारे इस उपकार के लिए मैं इसे भी पूरी रूचि के साथ ग्रहण करुँगी.” सोनी ने अपनी उँगलियों को चाटा और पार्थ को दिखाया.

“इतना ही पर्याप्त है. इसका अभिप्राय केवल इतना ही है कि आप आगे से किसी भी इस कृत्य को घिनौना नहीं समझेंगी. अब आप जाकर स्नान कर लें.” पार्थ ने कहा और सोनी को हाथ से उठाया.

सोनी नहाने चली गई, पार्थ ने उसकी सदस्यता के आवेदन को स्वीकृति दी. सोनी के बाहर आने पर उसने भी स्नान किया और बाहर आया तो सोनी कपड़े पहन चुकी थी. पार्थ ने टेबल के अंदर से एक लाल कंगन निकाला और सोनी को दिया.

“आप अभी गांड मरवाने में इतनी अनुभवी नहीं हैं. क्लब में आने पर आप ये पहन लिया कीजिये. इससे हमारे रोमियो को पता चल जायेगा कि आपके साथ कैसा व्यवहार करना है. जब आप पूर्ण रूप से आश्वस्त हो जाएँ तब इसे पहनना बंद कर सकती हैं.”

सोनी ने कंगन अपने पर्स में रख लिया और पार्थ का एक बार फिर धन्यवाद किया.

“आपको कार चलने में अगर असुविधा हो तो मैं आपकी कार चला सकता हूँ.”

सोनी ने इसके लिए स्वीकृति दी तो पार्थ ने कहा कि वो उसी कमरे में रुकें और जब निकलने का समय होगा तो वो उन्हें ले चलेगा.

इसके बाद पार्थ आवेदन पत्र लेकर चला गया और सोनी अपनी कल्पना में खो गई.

क्रमशः
 
आठवाँ घर: स्मिता और विक्रम शेट्टी

अध्याय ८.३.४

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अब तक:

जहाँ मेहुल का आज दिंची क्लब में परीक्षण था, वहीँ रूचि मैडम की माँ राशि ने अपनी एक सहेली सोनी को भी सदस्यता के लिए प्रेरित किया था. रूचि मैडम के जुड़ने के बाद क्लब में अब लाभ का अंश बढ़ रहा था. मेहुल और सोनी अपने कमरों में साक्षात्कार लेने वालों की प्रतीक्षा कर रहे थे.

अब आगे:

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दिंची क्लब में शोनाली और मेहुल:

शोनाली अपनी सैंडल चटखाते हुए निर्धारित कमरे तक पहुंची और दरवाजा खोला. मेहुल जो बहुत देर से उसी ओर देख रहा था अंदर आई महिला को देखकर चौंक गया. वहीँ शोनाली भी स्तब्ध रह गई.

शोनाली: “तुम! मेहुल!”

मेहुल: “शोनाली आंटीजी आप! ओह शिट!”

शोनाली: “हम्म्म, पार्थ ने मुझे बताया नहीं कि आज तुम्हारा साक्षात्कार है. उसे तो मैं बाद में ठीक करुँगी.”

मेहुल: “आंटीजी, मुझे भी सचिन ने ये नहीं बताया कि आप यहाँ की संचालिका हैं. अगर आप चाहें तो मैं अभी यहाँ से चला जाता हूँ.” ये कहते हुए मेहुल उठने लगा.

शोनाली ने मेहुल को देखा, “नहीं, इसकी कोई आवश्यकता नहीं है. जो भी है हम अब एक दूसरे के विषय में जान ही चुके हैं. तो क्लब के लिए मैं इसे यूँ ही नहीं जाने दे सकती. और फिर तुम भी मेरे विचार से जाना नहीं चाहोगे. तुम बैठो, मैं स्नान करके आती हूँ.”

शोनाली स्नान करने घुस गई और सोचने लगी कि निखिल और पार्थ के साथ उनके ही आठ परिवारों के समूह में तीन तीन बड़े लंड वाले कैसे हो सकते हैं? नितिन को मिला लें तो चार हो जायेंगे. स्नान करने के बाद उसने गाउन डाला और कमरे में आ गई. मेहुल ने उसके भीगे शरीर को देखा और बालों से चूते पानी को देखकर उसका लंड खड़ा हो गया. अब उसका जाना सम्भव नहीं था.

“तो मेहुल, मैं पहले यहाँ के कुछ नियम बता देती हूँ. फिर तुम्हारा नाप लिया जायेगा, तुम्हें विश्वास है कि तुम्हारा लंड दस इंच से अधिक बढ़ा है.”

मेहुल उनके मुंह से लंड सुनकर चकित हुआ, “जी, विश्वास है.”

इसके बाद मेहुल को भी शोनाली ने नियम बताये.

शोनाली: “मेहुल, यहाँ पर हमारी सदस्य महिलाएं अपने शरीर की प्यास मिटाने के लिए आती है. वो यहाँ प्यार ढूंढने नहीं बल्कि छुड़ने के लिए आती हैं. इस बात को सदा याद रखना. कभी कभी किसी सदस्या अगर अधिक निकट आने का प्रयास करे तो पार्थ या मुझे इसके बारे में बता देना.”

इसके बाद उसने कमरे में रखे फोन से नूतन को बुलाया. नूतन ने अपने हाथ में फीता लिया और कमरे में चली आई.

“नूतन, तुम्हें मेहुल के लंड को खड़ा करने के बाद नापना है. ये कार्य तुम्हारे लिए नया नहीं है, तो मुझे अधिक कुछ बताने की आवश्यकता नहीं है.” शोनाली ने नूतन से कहा.

नूतन मेहुल के पैरों के बीच बैठी और गाउन को हटाया. मेहुल के आधे खड़े लंड को देखते ही नूतन और शोनाली को पता चल गया कि नापना व्यर्थ है, पर नियम की अनदेखी भी नहीं की जा सकती थी. नूतन ने लंड को चाटा और फिर मुंह में लेकर चूसने लगी. शोनाली का कहना सही था, नूतन इस कार्य में विशेष रूप से निपुण थी और कुछ ही देर में मेहुल का लंड पूर्ण रूप से तन गया.

शोनाली भी देख रही थी. उसे कालिया का लंड याद आ गया. आज मेरी गांड फटेगी!

“ठीक है नूतन, अब नापो।”

नूतन ने मेहुल को खड़े होने के लिए कहा और फिर उसके लंड को थामकर उसे नापा।

“११. ८ इंच है.” नूतन ने हकलाते हुए बताया.

“हम्म्म, बहुत सही. हमारे यहाँ का रिकॉर्ड क्या है अब तक का?”

“मुझे याद नहीं है मैडम, पर ये अवश्य पता है कि १२ इंच तक कोई भी नहीं है.”

“मेरा भी यही विचार है. कालिया भी मेहुल के आसपास ही है. ठीक है तुम जा सकती हो.”

नूतन चली गई और कुछ ही देर में फोन बजा.

“मैडम कालिया का लंड ११. ७ इंच है.”

“धन्यवाद, नूतन.”

“हाँ तो मेहुल, अब बताओ कि क्या तुम अगले चरण पर जाना चाहोगे?”

“जी, बिलकुल.”

“अगर यहाँ आये हो तो अवश्य तुम्हें चुदाई की तकनीकें पता हिंगी. तो क्यों नहीं तुम मुझे अपने मुंह और जीभ का कौशल दिखाओ.” शोनाली ने मेहुल से कहा.

“अवश्य।” मेहुल ने कहा और उसे बाँहों में लेकर होंठ चूमने लगा. शोनाली का अर्थ कुछ भिन्न था परन्तु मेहुल ने ये जानकर भी इस प्रकार से हो आगे बढ़ने का निर्णय लिया. कुछ ही पलों में शोनाली उसकी बाँहों में कसमसाने लगी और मेहुल ने दोनों के शरीर पर लदे गाउन उतार दिए. एक दूसरे से यूँ ही लिपटे हुए चूमते हुए मेहुल सधे पाँवों से शोनाली को बिस्तर की ओर ले गया. बिस्तर के पास जाकर उसने चुंबन तोड़ा और शोनाली को बिस्तर पर लेटने का संकेत दिया.

शोनाली कंपकंपाते हुए बिस्तर पर लेटी तो मेहुल ने उसके पैरों को फैलाया और फिर उसकी चूत के पास नाक लगाकर एक गहरी साँस ली. शोनाली की चूत की सुगंध उसके नथुनों से होते हुए उसके फेफड़ों में समै गई. फिर उसने जीभ से केवल भग्नाशे को छेड़ा और कुछ देर तक बस यही करता रहा. शोनाली की साँसे अब और तीव्र हो चली थीं. इसके बाद मेहुल चूत के बाहरी भाग को चाटने लगा. हर छिद्र को उसने चाटा और इस पूरे समय शोनाली केवल आहें और सिसकारियां ही लेती रही. जैसे ही मेहुल की जीभ ने शोनाली की चूत में प्रवेश किया, शोनाली का संयम टूट गया और वो मेहुल के मुंह में ही झड़ गई. मेहुल ने कोई आपत्ति नहीं की, न ही अपने सिर को गंतव्य से हटाया.

मेहुल अपनी लय में शोनाली की चूत चाटता और चूसता रहा. जब शोनाली फिर झड़ने के निकट पहुंची तो अचानक मेहुल ने अपनी जीभ बाहर निकाल ली. शोनाली छटपटा उठी. पर मेहुल ने उसकी गांड के नीचे हाथ रखते हुए उसके कूल्हे उठाये और अपनी जीभ को शोनाली की गांड की गोलाई पर फिराने लगा. शोनाली की छटपटाहट और बढ़ गई. उसने भी अपने कूल्हे और उठा लिए और मेहुल के लिए अब गांड का स्वाद लेने में सरलता हो गई.

मेहुल ने भी इस सुगमता का लाभ उठाया और गांड के छेद को भरपूर चाटा। फिर जब उसे लगा कि शोनाली स्वयं को संभाल पायेगी तो उसने कूल्हे के नीचे से हाथ हटाकर गांड को खोला और जीभ अंदर कर दी. शोनाली की सिसकारी ने उसे बता दिया कि वो सही पथ पर है. पर इस आसन में ये कार्य अत्यधिक कठिन था, इसीलिए मेहुल ने इसे बाद में पूर्ण करने का निर्णय लिया और लौट कर चूत पर ध्यान लगाया. कुछ ही देर में शोनाली एक बार और झड़ी और उसके चेहरे पर तृप्ति का भाव आ गए.

“बहुत अच्छा, अति उत्तम. अब मुझे तुम्हारे लंड की शक्ति का परीक्षण करना है. तो आओ मुझे अपना लंड चूसने के लिए दो.”

मेहुल ने शोनाली को बैठाया और वो जब बिस्तर के किनारे आ गयी तो उसे अपना लंड प्रस्तुत कर दिया.

शोनाली ने मेहुल के लंड को चाटने और चूसने में अपना पूरा परिश्रम लगाया. लंड बड़ा होने के कारण उसे कुछ असहजता अवश्य हुई, पर इस क्लब में बड़े लंड वाला वो पहला नहीं था तो शोनाली ने शीघ्र ही अपनी ताल पकड़ ली. मेहुल उसके सिर पर हाथ रखे हुए था और शोनाली के इस परिश्रम का आनंद ले रहा था. परन्तु उसके मन में एक विचार और चल रहा था.

उसकी तीव्र बुद्धि ने शीघ्र ही ये समझ लिया कि अगर पार्थ और उसकी मामी इस प्रकार के क्लब के संयोजक हैं तो उनके परिवार में भी कौटुम्बिक व्यभिचार परम्परा होगी. अब उसे ये पता था कि राणा परिवार इसमें संलिप्त था. वहीं कल के रहस्योद्घाटन के बाद नायक परिवार में भी यही प्रथा थी. शोनाली की बेटी सागरिका का विवाह समर्थ सिंह के परिवार में तय हुआ था, तो सम्भव है कि वहां भी इस प्रकार का ही वातावरण होगा. अर्थात, इन आठ घरों में से पाँच घरों में पारिवारिक चुदाई चलती थी. ये कितना अविश्वसनीय संयोग था? क्या अन्य तीनों परिवार बजाज, डिसूजा और पटेल भी?

क्या इस विषय में उसे कुछ छानबीन करना चाहिए? अगर पता चल भी गया तो क्या अंतर पड़ेगा? फिर उसकी आँखों में उन परिवारों की स्त्रियों के चेहरे और भरेपूरे शरीर घूमने लगे. अवश्य, अंतर तो पड़ेगा. उसने इसके लिए अपने नए मित्र सचिन की सहायता लेने का निश्चय किया. सचिन भी अपनी माँ की चुदाई करता था और माँ बेटे इस क्लब का हिस्सा थे, माँ सदस्या के रूप में तो सचिन रोमियो की भूमिका में. इस योजना के बारे में आगे सोचने का निश्चय करने के बाद उसने शोनाली के मुंह में अपने लंड के धक्के लगाने आरम्भ किये. शोनाली जो अब तक अकेली ही सारा परिश्रम कर रही थी, इस सहायता से प्रसन्न हो गई. शोनाली के मुंह में झड़ने के बाद शोनाली ने उसके वीर्य को पीने में कोई कोताही नहीं की.

शोनाली के मेहुल के रस में कुछ नया ही स्वाद आया. उसे अपनी नन्द सुमति के भाग्य पर जलन हुई जो गांड में छोड़े हुए रस का स्वाद पहले लेने वाली थी. पर शोनाली ईर्ष्या करने वाली स्त्रियों में तो थी नहीं, उसने अपने इन विचारों को शीघ्र ही मन से दूर कर दिया.

“तुम्हें कितना समय लगेगा?” शोनाली ने मेहुल से पूछा फिर उसके लंड को देखा. लंड अभी भी उसी स्थिति में था, हाँ कुछ कड़ापन कम हुआ था पर उसका आकार अभी भी यथावत था.

“अधिक नहीं, बस कुछ ही मिनट.” मेहुल ने घड़ी की ओर देखा तो उन्हें अभी २५ मिनट ही लगे थे, अर्थात अन्य दो चरणों के लिए पर्याप्त समय था.

शोनाली उससे कुछ इधर उधर की बात करने लगी. इतना अनुभव कैसे है, कितनी स्त्रियों को चोदा है, इत्यादि. उसे आश्चर्य हुआ कि मेहुल का लगभग सम्पूर्ण अनुभव मध्यम आयु या उनसे बड़ी स्त्रियों के साथ ही था. क्लब के लिए इसका ये अनुभव बहुत मूल्यवान होने वाला था, अगर वो उत्तीर्ण होता. पर मेहुल के लंड की वर्तमान स्थिति को देखकर शोनाली को विश्वास था कि ऐसा न होने की संभावना नगण्य थी.

शोनाली की अपेक्षा के अनुसार अधिक देर प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी. अपने हाथ से इस पूरे समय वो मेहुल के लौड़े को सहलाती रही थी. जब उसे लगा कि वो अंगड़ाइयाँ लेने लगा है तो अपने मुंह से कुछ देर चाटकर उसे गीला किया.

“मेरे विचार से अब चुदाई की परीक्षा की जा सकती है. तुम मुझे जिस प्रकार से भी चाहो चोद सकते हो. क्लब में हर लौड़े से चुदवा चुकी हूँ तो मुझे नहीं लगता कि कोई कठिनाई होगी. पर पहले मेरी चूत को चाटकर समुचित रूप से गीला कर दो.”

शोनाली ने लेटते हुए अपने पैर खोल दिए. मेहुल ने कुछ समय उसकी चूत को चाटा और फिर अपने लंड को उसपर रखते हुए घिसने लगा. चूत से हल्का पानी रिसा और मेहुल ने सही अवसर जानकर एक अच्छा धक्का लगाया और उसके लंड का आधा भाग शोनाली की चूत में प्रविष्ट हो गया. शोनाली को आनंद की अनुभूति होने लगी. उसे विश्वास हो गया कि मेहुल की माँग क्लब में बहुत अच्छी रहने की आशा थी. मेहुल ने शोनाली के चेहरे को देखा और किसी प्रकार की व्यथा को न देखकर लंड को बाहर निकाला और इस बार के धक्के ने उसे लगभग पूरी गहराई तक पहुंचा दिया.

“ओह! सचमुच बड़ा है. कुछ बचा है क्या?” शोनाली को लगा कि अब लंड पूरा घुस चुका होगा.

मेहुल ने कोई उत्तर नहीं दिया। वो अपने पाशविक रूप में लौटने लगा था. उसने लंड को फिर से बाहर निकाला और इस बार के धक्के की शक्ति इतनी अधिक थी कि न केवल लंड पूरा अंदर समा गया, बल्कि इतना सुगठित पलंग भी हिल गया. शोनाली की भी स्थिति एकदम परिवर्तित हो गई. उसकी चूत में मानो कोई चाकू चल गया हो. इतने लौड़े लेने के बाद भी मेहुल के शक्तिशाली धक्के ने उसकी नींव हिला दी.

मेहुल अब कहाँ रुकने वाला था. वो लम्बे धक्कों के साथ शोनाली की चुदाई करने लगा. एक बार लंड की ताल सही बैठे के बाद उसने शोनाली के मम्मों पर हाथ रखे और उन्हें मसलते हुए उसकी भीषण चुदाई करने लगा. शोनाली को इस सब से संतुलित होने में कुछ समय लगा पर फिर उसने भी मेहुल का साथ देना प्रारम्भ कर दिया. मेहुल का लंड शोनाली की हर गहराई को छू रहा था और शोनाली को भी इसमें पूर्ण आनंद मिल रहा था.

मेहुल की शक्ति और सामर्थ्य से वो बहुत प्रभावित हुई. क्लब की कुछ विशिष्ट महिलाएं जो इस प्रकार की चुदाई के लिए लालायित रहती थीं उनके लिए तो मेहुल एक वरदान होने वाला था. विशेषकर उसकी क्षमता और तीव्रता जो किसी इंजन के पिस्टन के समान द्रुत गति से चलायमान था. शोनाली भी इस चुदाई से आल्हादित होकर पानी छोड़ रही थी. उसकी जलमग्न चूत में मेहुल के लंड के चलने से ऐसी ध्वनि आ रही थी मानो कोई नौका चल रही हो.

“छप, छप, छप, छप, छप, छप.”

शोनाली की चुदाई करते समय मेहुल के सामने उस महिला की भी छवि आ रही थी जिसे उसने रिसेप्शन पर देखा था. उसकी आयु पचपन की रही होगी, पर चुदाई में पूरा आनंद देगी. उसकी गांड मारने में क्या आनंद आएगा. पर उसके पहले उसे शोनाली आंटी की गांड का फालूदा बनाना था. और इसके लिए भी वो उत्सुक था. उसकी तीव्र गति से चुदाई और मन में चल रहे अनेक कलुषित विचारों के ही कारण उसके लंड में अब उबाल आने लगा था. शोनाली भी अब सम्भवतः दो बार झड़ चुकी थी तो उसे अब झड़ने में कोई समस्या नहीं दिखी. उसने शोनाली को बताया कि वो झड़ने वाला है और शोनाली ने उसे उत्साह से झड़ने के लिए आमंत्रित किया. कुछ ही पलों में मेहुल का वीर्यरस शोनाली की चूत को सींच रहा था. अपने लंड से अंतिम बून्द निकलने तक मेहुल ने लंड को अंदर ही जमाये रखा और फिर बाहर निकाल लिया.

शोनाली ने उसे पास बुलाया और लेटे हुए उसके लंड को स्वछता प्रदान की. इसके बाद उसने मेहुल को हटने के लिए कहा और फिर वैसे ही लेटे हुए अपनी चूत में से मिश्रित रस को निकालकर चाटा। बस यही मिल सकता है. गांड वाला मिश्रण तो सुमति दीदी के लिए सुरक्षित रखना होगा. कुछ देर लेटे रहने के बाद वो उठी और टेबल में से गांड बंद करने वाला प्लग निकाला। उसे ढूंढकर एक मोटा प्लग निकाला क्योंकि उसकी गांड का फैलाव छोटे प्लग को रोक नहीं पाता और सुमति के लिए उसकी गांड में कुछ नहीं बचता.

शोनाली ने मेहुल को समझाया कि उसकी गांड में झड़ने के पश्चात उसे उसकी गांड को उस प्लग से बंद करना है. मेहुल ने इसके लिए हामी भरी. पर इसके साथ ही उसे ये भी विश्वास हो गया कि इस परिवार में भी चुदाई की प्रथा है. क्या सच में इतने परिवार इस प्रकार से लिप्त हैं? आंटी किसके लिए उसके वीर्य को संभाल रही हैं? पार्थ के परिवार के बारे में सोचा तो उसे सुमति पर सबसे अधिक संशय हुआ. उसका लंड अब फिर से अपने रौद्र रूप में आ रहा था. शोनाली उसकी इस प्रतिक्रिया से मुस्कराई. मेहुल का लंड कालिया से किंचित ही बड़ा था, इसीलिए समस्या कोई नहीं थी. पर एक अनावश्यक सी झुनझुनी उसकी गांड में हो रही था. सम्भवतः ये सोचकर कि जब सुमति को पता लगेगा कि उसका आज का भोग पड़ोस के ही लड़के का है तो उसकी प्रतिक्रिया क्या होगी।

शोनाली ने घड़ी देखी, अब केवल ४५ मिनट ही शेष थे. “पर्याप्त हैं.” ये सोचकर वो उठी और मेहुल को पीछे आने के लिए कहा.

बिस्तर पर जाकर घोड़ी बन गई और टेबल की ओर संकेत करके मेहुल को जैल की ट्यूब लेने के लिए कहा.

“क्या मैं कुछ समय इस सुंदर गांड की सराहना कर सकता हूँ?” मेहुल ने प्रश्न किया तो शोनाली ने उसे अनुमति दे दी.

“वाओ आंटीजी. आपकी गांड बहुत ही मस्त है और क्या गोलाई है.” मेहुल ने उसके नितम्ब पर हाथ से सहलाते हुए कहा.

कुछ देर यूँ ही हाथों से सहलाने के बाद उसके गांड के दोनों और के गोलार्धों को अलग किया तो लुपलुप करती गांड का छेद उसके सामने खुल गया. अपनी जीभ से गांड की बाहरी झुर्रीदार त्वचा को चाटा तो शोनाली सिहर गई. मेहुल ने अपनी जीभ से बाहर के हर छिद्र हर रोम को चाटकर लाल कर दिया. फिर गांड के अंदर जीभ से कुरेदना आरम्भ किया. जब उसे लगा कि गांड अब लौड़े के लिए उतावली हो रही है तो उसने ट्यूब से जैल निकाला और गांड में अच्छे से भर दिया. दो उँगलियों की सहायता से गांड पूर्ण रूप से चिकनी हो गई. अपने लंड पर भी जैल चिपड़ने के बाद उसने घड़ी देखी, ३५ मिनट.

“आंटीजी, मैं आ रहा हूँ.” मेहुल ने चेताया.

“स्वागत है.” शोनाली ने उत्तर दिया, “अपने ढंग से मारो. गांड मेरी बहुत मारी गई है, इसीलिए हर प्रकार के आक्रमण के लिए सदैव उत्सुक रहती है.”

मेहुल ने गांड में सुपाड़ा डाला, जो बिना किसी अड़चन के अंदर चला गया. इतने बड़े लौडों से मरवाती है, खुली तो होनी ही थी. तीन इंच तक लंड को अंदर डालने के बाद मेहुल रुका, फिर लंड को बाहर खींचा और एक तीव्र धक्के के साथ पूरे लंड को अंदर पेल दिया. शोनाली की चीख निकली और वो औंधे मुंह बिस्तर पर गिर गई. इस कारण उसकी गांड में लंड और तंग हो गया. मेहुल ने शोनाली को उठने या सम्भलने का अवसर नहीं दिया. इस प्रकार उसे गांड में कुछ अधिक घर्षण मिल रहा था और वो लम्बी थापों के साथ शोनाली की गांड मारने में जुट गया.

तीन चार मिनट तक इस प्रकार से गांड मारने के बाद उसने गति कम की और शोनाली को घोड़ी के आसन में लौटने में सहायता की.

“बड़े निर्मम हो, मेहुल.” शोनाली ने कहा तो सही पर इसमें अभियोग का अभिप्राय नहीं था.

एक बार सही स्थिति में आने के बाद मेहुल ने फिर से शोनाली की गांड का बैंड बजाना आरम्भ कर दिया. शोनाली अब तक मेहुल की अद्भुत शक्ति और सामर्थ्य की प्रशंसक बन चुकी थी. उसने भी गांड हिला हिला कर, उछाल उछाल कर मेहुल की ताल से ताल मिलाई।

मेहुल को शोनाली की ये प्रतिक्रिया बहुत भा गई. अधिकतर उससे गांड मरवाने वाली आंटियां उसे ही पूरा परिश्रम करने देती थीं और बस ऊह आह वाह के अतिरिक्त कोई और अन्य प्रतिक्रिया कम ही देती थीं. इसका अर्थ ये नहीं की उन्हें गांड में उसका लौड़ा अच्छा नहीं लगता था, बस वो इतनी उन्मुक्त होकर नहीं चुदवाती थीं.

“आंटीजी, क्या गांड है आपकी, और आपकी ये थिरकते हुए गोल गोल नितम्बों का तो कोई सानी नहीं. सच में आपकी गांड मारने में जो मजा आ रहा है उतनी किसी और गांड में नहीं आया. यू आर टू गुड ए फक.” मेहुल प्रशंसा किये बिना न रह सका.

शोनाली ने भी अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए उसका उत्तर दिया, “लौड़ा तेरा भी मस्त है. क्या गांड की सिलाई खोल रहा है. सच में तुझसे गांड मरवाने के लिए मुझे अपना कलेंडर बनाना पड़ेगा. पार्थ के साथ भी इतना…” शोनाली झोंक में बोल तो गई पर रुक कर भी उसने सच्चाई को उजागर कर ही दिया. वो चुप हो गई.

“आंटीजी, मैं बच्चा नहीं हूँ, मैं समझ चुका हूँ कि पार्थ आपकी चुदाई करता ही होगा. अन्यथा इस प्रकार से आप दोनों इस क्लब का प्रबंधन नहीं कर रहे होते. पर मुझे कोई अंतर नहीं पड़ता है. ये आपके बीच का विषय है. बस मुझे बीच बीच में अपनी गांड मारने का अवसर देती रहना.”

शोनाली ने गहरी श्वास भरी और अपनी गांड को फिर उछालने लगी, मेहुल ने भी निर्भीक होकर गति और गहराई दोनों को चपल कर दिया. कमरे में गूंजती थापों का संगीत सुरीला हो चला था. उसमे शोनाली की सिसकारियां और मेहुल के हू हू के स्वरों ने नया ही रंग भर दिया था. दो बार झड़ चुकने के कारण अब मेहुल बहुत देर से शोनाली की गांड मार रहा था. परन्तु इस गति ने उसे भी अब अपने अंत तक ला ही दिया था.

“आंटीजी, मैं झड़ने ही वाला हूँ. प्लग से आपकी गांड बंद क्र दूँगा जैसा अपने कहा है.”

“ओके ओके. भर दे मेरी गांड और बंद कर दे उसे. मेरा भी अब और झड़ने का संबल नहीं है.” शोनाली ने एक प्रकार से चैन की साँस ली.

मुझ और तेज धक्कों के बाद मेहुल ने अपना लंड जड़ तक गाढ़ दिया और झड़ने लगा. प्लग को उसने अपने हाथ में लिया और उसे शोनाली की चूत से झरते पानी से गीला किया. झड़ने के बाद उसने अपने लंड के सुकड़ने तक लंड को पूरा अंदर गाड़े रखा. फिर अत्यंत सावधानी से लंड को बाहर निकाला. और प्लग से शोनाली की गांड को बंद कर दिया. कुछ बूँदे अवश्य बाहर छूट गयीं. शोनाली ने हाथ पीछे कर के प्लग की जाँच की. जो कुछ बूँदे उसकी उँगलियों के सम्पर्क में आयीं उन्हें इकट्ठा करके चाट लिया. मेहुल ने घड़ी देखी. दो घंटे पूरे होने में बस दो ही मिनट शेष थे. शोनाली ने भी ये देखा और मुस्कुरा दी.

“अब तुम हटो पाँच मिनट के लिए.” शोनाली ने कहा.

उसके बाद उसने अपने बैग से एक बेल्ट निकली जिसे कमर में बाँधा। उस बेल्ट में एक और बेल्ट थी जो नीचे की ओर जाती थी. उस बेल्ट को भी बाँधा और मेहुल को उसका अभिप्राय समझ आ गया. दूसरी बेल्ट के बाँधने से अब प्लग गांड से निकल नहीं सकता था. पर इससे शोनाली को अवश्य असुविधा हो रही होगी. मेहुल ने उस स्त्री के प्रति शोनाली के प्रेम को देखकर उसके मन में शोनाली के प्रति आदर और बढ़ गया.

इसके बाद शोनाली ने कपड़े पहने और मेहुल से कहा कि वो चाहे तो स्नान कर सकता है. मेहुल ने झटपट स्नान किया और कमरे में आकर अपने कपड़े पहन लिए.

“मैं दिंची क्लब के रोमियो के रूप में तुम्हारा स्वागत करती हूँ. फिर मिलेंगे. अब मुझे निकलना होगा.” ये कहते हुए शोनाली ने फॉर्म पर उत्तीर्ण लिखकर हस्ताक्षर किये और सैंडल चटकाती हुई चली गई.

मेहुल का प्रस्थान:

मेहुल कपड़े पहनकर बाहर आया तो देखा कि उसके बगल वाले कमरे से सोनी निकल रही हैं. उसने उन्हें नमस्ते कहा.

“हैलो, मैडम.”

“हैलो यंग मैन, क्या नाम है तुम्हारा?”

“जी मेहुल. आज मेरा इंटरव्यू था यहाँ काम के लिए.” मेहुल सोनी के साथ चलते हुए बोला।

“गुड़, इसका अर्थ हम मिलते रहेंगे. मैं भी आज सदस्य बनी हूँ.”

“जी बहुत अच्छा. अवश्य ही मिलना होगा तब तो. आप संतुष्ट हैं?” मेहुल ने पूछा तो सोनी ने उसकी ओर देखा.

मेहुल को लगा उसने गलत प्रश्न कर दिया, “मेरा अर्थ है क्लब से, वातावरण इत्यादि.”

“हाँ संतुष्ट हूँ. क्लब से भी, वातावरण से भी और इत्यादि से भी. इत्यादि से सबसे अधिक.” ये कहते हुए सोनी हंस दी. मेहुल ने भी उसके हंसी में साथ दिया. रिसेप्शन पर पार्थ और शोनाली खड़े थे. शोनाली ने सोनी की बिगड़ी चाल को देखा तो मुस्कुरा पड़ी.

धीरे से पार्थ के कान में फुसफुसाई, “इसकी चाल बदल दी तुमने.”

“आइये सोनी जी, मैं आपको आपके घर छोड़ देता हूँ.” पार्थ ने सोनी से कहा तो सोनी ने अपने पर्स से कार की चाबी उसे थमा दी.

फिर नूतन की ओर देखकर बोली, “नूतन धन्यवाद.”

नूतन का चेहरा खिल उठा. उसे इस प्रकार से कम ही लोग धन्यवाद करते थे, “आपका स्वागत है, मैडम. क्लब की सदस्य बनने के लिए आपका आभार और बधाई.”

“फिर मिलते हैं, नूतन.” ये कहकर सोनी पार्थ के साथ बाहर चली गई.

“तुम कैसे आये हो, मेहुल?”

“जी, अपनी कार से.”

“हम्म्म, नूतन क्या कोई अन्य कार्य है आज?”

“नो, मैडम. आल डन फॉर द डे.”

“तो चाहो तो मेहुल के साथ चली जाओ, सिक्युरिटी को लॉक करने का आदेश दे देते हैं.”

“धन्यवाद, मैडम.” ये कहते हुए नूतन ने सिक्युरिटी को बुला भेजा.

“मेहुल, मैं चलती हूँ. तुम नूतन का ध्यान रखना.” ये कहते हुए शोनाली ने मेहुल को आँख मारी और अपनी कार की ओर चली गई.

सिक्युरिटी के आने के बाद उसे प्रभार देकर नूतन ने अपनी पुस्तक, पर्स इत्यादि लिया और मेहुल के साथ निकल गई.

क्रमशः
 
आठवाँ घर: स्मिता और विक्रम शेट्टी

अध्याय ८.३.५

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अब तक:

मेहुल दिंची क्लब के अपने साक्षात्कार में उत्तीर्ण हो गया था. शोनाली उसके रस से अपनी गांड भरे हुए अपने घर चली गयी थी जहाँ वो इसे अपनी प्रिय नन्द सुमति को प्रस्तुत करने के लिए उतावली थी. पार्थ ने भी एक नई सदस्या सोनी को क्लब में सम्मिलित कर लिया था और वो स्वयं ही उसे घर छोड़ने जा रहा था. शोनाली ने मेहुल से रिसेप्शन पर बैठी नूतन को घर छोड़ने का आग्रह किया जिसे मेहुल ने सहर्ष स्वीकार किया था. नूतन की आयु भी शोनाली के आसपास की ही प्रतीत हो रही थी और शोनाली के संकेत से ये विदित था कि अगर वो चाहे तो नूतन भी उससे चुदाई करवाने की इच्छुक थी.

पार्थ सोनी और मेहुल नूतन को लेकर चल पड़े, और शोनाली अकेली चली गई.

अब आगे:

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पार्थ और सोनी:

पार्थ सोनी को लेकर चल पड़ा. सोनी के चेहरे पर संतुष्टि और समर्पण के भाव थे, जिन्हें पार्थ भली भांति समझता था. एक गहरी साँस लेते हुए पार्थ ने हर नई सदस्या के साथ चली बात को दोहराया. उसने सोनी को समझाया कि क्लब दिल लगाने का स्थान नहीं है. इसे केवल वो अपनी शारीरिक तृप्ति का ही एक मार्ग समझे. ऐसा करने से उसे कभी भी भविष्य में दुःख नहीं पहुंचेगा. सोनी भी बुद्धिमान थी और उसने पार्थ को विश्वास दिलाया कि उसका ऐसा कोई आशय नहीं है, न ही पहले था. वो अपने जीवन से संतुष्ट थी, और जो कमी थी उसका उसे उपचार मिल गया था.

इसके बाद सोनी ने पार्थ से पूछा कि राशि ने और किन किन स्त्रियों के नाम सुझाये हैं. सोनी के अतिरिक्त जो चार और नाम थे वो उसने सोनी को बताये. और ये भी बताया कि वो केवल एक ही को अभी सदस्यता दे सकता था.

“सबको लेने में क्या बुराई है?” सोनी ने पूछा.

“क्लब में अभी इतने रोमियो नहीं हैं कि हम इससे अधिक सदस्य बना सकें. आज एक जुड़ा है इसीलिए दो स्थान बने हैं. हम एक रोमियो के जुड़ने पर ही एक या दो सदस्य बनाते हैं.”

“हम्म्म, बात तो सही कह रहे हो, पार्थ.” इसके बाद सोनी ने उन चारों में से एक का नाम सुझाया.

“सुंदर है, धनी है, विधवा है मेरे समान, और चुड़क्कड़ है हम सबसे अधिक. जहाँ तक मुझे पता है वो अवश्य सबसे पहले जुड़नी चाहिए. उसके बाद…” ये कहते हुए सोनी ने अपनी सूची पार्थ को बता दी. पार्थ ने उसे याद कर लिया।

“और क्लब में क्या क्या चलता है? क्या करती हैं यहाँ पर इतनी सारी महिलाएं?”

पार्थ: “कुछ तो आपको इस महीने के अंत की पार्टी में पता चल जायेगा. हर माह के अंतिम शनिवार और रविवार को पार्टी होती है. इसमें सभी रोमियो आते ही हैं और अधिकांश सदस्याएं भी आती हैं. ये एक सेक्स पार्टी होती है जिसमें आपको अनेकानेक प्रकार की चुदाई के दृश्य देखने मिलेंगे. आप स्वयं भी अपनी इच्छानुसार भाग ले सकती हैं. अगले सप्ताह आप की एक और सहेली के भी जुड़ने का अनुमान है.”

सोनी: “क्या किसी महिला की कोई विशेष कामना भी होती है?”

पार्थ ने गियर बदला और कुछ देर सोचने के बाद बोला, “मैं आपको किसी का नाम नहीं बताऊंगा, पर कुछ की विशिष्ट इच्छाओं और कामनाओं के बारे में बता देता हूँ.”

सोनी ध्यान से सुनने लगी.

“एक महिला हैं जो फल्फर की भूमिका निभाती हैं. ये ऐसी भूमिका है जिसमें वो एक प्रकार से सफाई का बीड़ा उठाती हैं. जब भी किसी महिला की चुदाई पूर्ण होती है तो वो उसकी चूत या गांड को चाटकर साफ करती हैं और उनके रस को पीती हैं. पार्टी के समापन के निकट आने पर ही वो अपनी चुदाई करवाती हैं. परन्तु जितनी चुदाई पार्टी में चलती है, तो उनके लिए सबकी सफाई करना सम्भव तो नहीं होता, परन्तु उनकी इस लालसा से अब अन्य सदस्य महिलाएं अवगत हैं तो वो उनकी प्रतीक्षा करती हैं या स्वयं ही उनके सामने चली जाती हैं.”

सोनी आश्चर्य से सुन रही थी.

“एक महिला हैं जो स्वयं को लेस्बियन मानती हैं, वे कभी भी लंड को चूत में नहीं लेतीं। उन्होंने जीवन में केवल चार या पांच लंड ही अपनी चूत में लिए हैं. उनमें से एक मेरा भी है, सदस्या बनने के लिए उन्होंने ये बलिदान किया था.” पार्थ ने हंसकर कहा तो सोनी भी हंस पड़ी.

“तो वो क्लब में आती ही क्यों हैं?”

“उन्हें अपनी चूत में लंड अच्छे नहीं लगते, परन्तु गांड मरवाने में बहुत रूचि है. तो उन दो दिनों में वे लगभग हमारे सारे रोमियो से अपनी गांड मरवाती हैं. फिर उन्हें भी अपनी संगत के लिए चूतें भी मिल ही जाती हैं. कई महिलाओं को उनसे अपनी चूत चटवाने में असीम सुख मिलता है.”

“ओके”

पार्थ ने सोनी की ओर देखा, “क्या आप सच में कुछ और सुनना चाहेंगी?”

सोनी ने हामी भरी.

“हमारी एक सदस्या हैं जिनका एक अलग ही व्यसन है. इसे अंग्रेजी में गोल्डन शॉवर कहते हैं.”

“ये क्या होता है?”

पार्थ ने सोचा फिर बता ही दिया, “उन्हें रोमियो और अन्य स्त्रियों के मूत्र पीने या उससे स्नान जैसा करने में आनंद आता है. क्योंकि इसके कारण उनकी चुदाई बाद में कम होती है, तो पहले वो मन भर के चुदवाती हैं और फिर अपनी इस इच्छा को पूरा करती हैं. अपनी चुदाई के बाद वो अधिकांश समय बाथरूम के टब में ही रहती हैं, जहाँ जब किसी को जाना होता है तो वो उन्हें अपना मूत्र दान करता है.”

“छी छी छी.” सोनी के मुंह से निकल पड़ा.

“इसीलिए मैंने पूछा था. सेक्स में कई लोगों के अपने अपने विचार और विकृतियां होती हैं. बड़ी बात ये है कि क्लब में इन्हें पूरा करने का हम सम्पूर्ण प्रयास करते हैं. दूसरी ओर कोई भी किसी दूसरे की विकृति से घृणा नहीं करता. सब अपने आनंद में डूबे रहते हैं.”

“पार्टी में डबल और ट्रिपल चुदाई सबसे अधिक होती है. आप समझ रही होंगी. इसका अर्थ है कि एक ही स्त्री की चूत और गांड में दो अलग लंड, और कभी कभी मुंह में तीसरा लंड भी होता है. सबसे अधिक प्रचलित यही है.”

सोनी सोच रही थी कि उसने तो अपने जीवन में कुछ देखा ही नहीं. सोनी का घर भी आ गया था. उसने पार्थ के होंठ चूमे और उसे धन्यवाद दिया.

“मुझे बताना अपने किसे चुना. वैसे राशि भी क्लब की पार्टी में आएगी क्या?”

“अब तक तो नहीं आयी हैं, परन्तु आगे के बारे में कहना सम्भव नहीं. हो सकता आ ही जाएँ. और आपकी जिस सहेली को चुनूँगा आपको अवश्य बता दूंगा.”

सोनी उतर कर घर चली गई, पार्थ उसकी मटकती गांड को देखता रहा और फिर अपने घर के लिए चल पड़ा.

नूतन और मेहुल:

मेहुल नूतन को लेकर चल पड़ा. नूतन की चूत में हलचल मची हुई थी. उसने जब से मेहुल के लंड ला नाप लिया था वो उस लंड से चुदवाने की कल्पना मात्र से ही उत्तेजित हो गई थी. शोनाली ने उसे इस इच्छा को पूरी करने का सुअवसर तो दिया था, पर क्या मेहुल भी उसका साथ देगा?

“तो कैसा रहा क्लब में प्रवेश?” उसने बात आरम्भ करने के प्रयोजन से पूछा.

“अच्छा और अप्रत्याशित.” मेहुल ने उत्तर दिया. पर ये नहीं बताया कि उसने शोनाली के इस रूप की कभी कल्पना भी नहीं की थी.

“शोनाली और मैं कॉलेज में साथ थीं.” नूतन ने बताया. इस बात पर मेहुल चौंक गया और उसने नूतन को देखा.

“आप दिखती तो नहीं हैं. मुझे तो आप बहुत युवा लगती हैं. कैसे?”

इस बात पर नूतन खिलखिला पड़ी. “मस्का मार रहे हो? और अगर इस मस्के से कुछ पाना चाहते हो तो…”

“तो?”

“पा सकते हो, जो चाहो, जैसे चाहो.” ये कहकर नूतन ने अपने हाथ मेहुल की जांघ पर रखे और सहला दिया.

“हम्म्म, सुझाव अच्छा है. अब अगर आपको कोई आपत्ति नहीं तो मैं क्योंकर पीछे हटूँगा। पर पहले आप शोनाली मैडम और अपने विषय में कुछ बताइये.”

“हम दोनों कॉलेज में एक साथ थीं. हॉस्टल के एक ही कमरे में हम एक साल रहीं थीं, फिर शोनाली की माँ ने हमें एक फ्लैट किराये पर दिलवा दिया था. हम दोनों एक दूसरे से तो संबंध हॉस्टल में ही बना चुके थे, पर फ्लैट में आने के बाद तो हम लड़कों से भी चुदवाने लगे. ये हमें बहुत समय बाद पता चला कि शोनाली की मम्मी का हमें फ्लैट दिलवाने का उद्देश्य क्या था.”

“जब हम दोनों कॉलेज में होतीं तो हमें बताये बिना वो फ्लैट में आतीं और चुदवाती थीं. घर वैसे ही साफ सुथरा रहता और हम दोनों को कभी भी कोई शंका नहीं हुई. हम दोनों के कमरे अलग थे और फिर बॉय फ्रेंड भी बन गए. मैं तो एक हो बॉय फ्रेंड के साथ छह आठ महीने रहती थी, पर शोनाली किसी को एक महीने से अधिक नहीं टिकने देती थी. एक दिन मुझे कॉलेज में ही बहुत तेज ज्वर चढ़ गया तो मैं अपने फ्लैट में लौट गई. देखा तो शोनाली के कमरे में से कुछ पटकने जैसी ध्वनि आ रही थी. शोनाली तो कॉलेज में थी, तो यहाँ कौन था.”

“मैंने डरते हुए कमरे में झाँका तो शोनाली की मम्मी दो लड़कों से चुदवा रही थीं. समस्या ये हुई कि उन्होंने मुझे देख लिया था, हालाँकि मुझे उस समय पता नहीं चला. मैं अपने कमरे में गई और दवा लेकर लेट गई. कुछ देर में मुझे नींद आ गई. दो या तीन घंटे बाद मेरे कमरे में कोई आया तो मैंने आँख खोली. शोनाली की मम्मी खड़ी हुई थीं.

“नूतन, बेटी क्या हुआ?” उनके स्वर में चिंता थी, पर कोई ग्लानि नहीं थी.

“आंटीजी, बहुत तेज ज्वर है. अब कुछ ठीक लग रहा है.” आंटी ने मुझे पानी पिलाया और फिर खाने के लिए कुछ लेकर आ गयीं. मुझे प्रेम से खिलाया और फिर मुझे लिटा दिया.

“अगर अब तक तुम नहीं समझी हो तो मैंने ये फ्लैट जितना तुम दोनों के लिए लिया है, उतना ही अपने लिए भी.”

मैंने उन्हें देखा पर कुछ बोला नहीं.

“मेरे तलाक के बाद मुझे भी चुदाई की इच्छा होती है. तुम दोनों तो इसके लिए तरसती नहीं हो, पर मुझे अपने नगर में चुदवाने में बहुत कठिनाई है. तो शोनाली ने मुझे ये रास्ता सुझाया था. अगर तुमने उन लड़कों को नहीं पहचाना हो तो वो दोनों शोनाली के बॉय फ्रेंड रह चुके हैं. मुझे नए नए लंड दिलवाने के लिए ही वो इतनी जल्दी बॉय फ्रेंड बदलती है. और फिर उन्हें मुझे सौंप देती है.”

“जिस दिन उसे कोई सही लड़का मिल जायेगा, उस दिन ये सब भी रुक जायेगा. तब तक मैं भी इसका पूरा आनंद ले रही हूँ.”

“इस रहस्य के खुलने के बाद आंटी हमारे पास नियमित रूप से आने लगीं. फिर शोनाली को उनके पति जॉय मिल गए और मुझे अपने पति. दो वर्ष बाद हम दोनों ने विवाह कर लिए. आंटी ने वो फ्लैट दो तीन वर्ष और रखा और फिर छोड़ दिया. उन्हें भी एक पुरुष मित्र ने विवाह के लिए प्रस्ताव रखा और उन्होंने विवाह कर लिया और इन सबसे दूर हो गयीं.”

“शोनाली और उसके पति जॉय सेक्स के विषय में उन्मुक्त थे और उन्होंने अन्य साथियों के साथ चुदाई करना आरम्भ कर दिया. मैं अपने पति के प्रति उनके देहांत तक निष्ठावान रही. उनके बीमे के कारण मुझे काफी धनराशि मिल गई, पर उनके व्यवसाय को संभालना मेरे लिए कठिन था. शोनाली के समझाने पर मैंने उसके पति जॉय को दस प्रतिशत का हिस्सा बेच दिया और फिर उन्होंने उसे अच्छे से संभाल लिया. अब वो उसमे ३०% के भागीदार हैं और इतने पर ही हम सब संतुष्ट हैं.”

मेहुल ध्यान से सब सुन रहा था.

“मेरे पति के देहांत की बरसी के कुछ दिन बाद शोनाली ने मुझे अपने जीवन को फिर से जीने का आग्रह किया. हमारे कोई संतान नहीं थी, तो एकाकीपन सताता था. उसने मुझे आग्रह किया कि अगले कुछ दिन तक जो वो कहेगी, वही मैं करुँगी और जीवन के रस से पुनः आनंद लूँगी। उसके अगले दिन उसने पार्थ को मेरे पास भेजा. इसके बाद क्लब से जुड़ना हुआ और अब हालाँकि मैं अपने पति के लिए दुःखी हूँ पर अन्य रूप से जीवन जीने का प्रयास कर रही हूँ.”

मेहुल को उसकी इस कहानी से उसके प्रति आदर बढ़ गया. और शोनाली के प्रति भी. नूतन का घर भी आ गया था. गाड़ी लगाकर दोनों अंदर चले गए.

शोनाली:

शोनाली ने कार में बैठते ही सुमति को फोन किया और बता दिया कि वो घर लौट रही है, उसके लिए उपहार लेकर. सुमति बहुत प्रसन्न हो गई और शोनाली ने फोन काट दिया. आज उसे कुछ अधिक ही संतुष्टि मिली थी. इसका एक कारण मेहुल के द्वारा की गई श्रेष्ठ चुदाई, दूसरा मेहुल के साथ मिलना जो एक आश्चर्य था और जिसके लिए उसने पार्थ की खिंचाई करनी थी. और फिर नूतन को मेहुल के साथ भेजना. उसे विश्वास था कि मेहुल नूतन की भी भरपूर चुदाई करेगा. अन्यथा नूतन को न जाने कब मेहुल का साथ मिलता, ये कहना सम्भव नहीं था.

कल उसे क्लब के अगले सप्ताह की नियुक्तियाँ देखनी होंगी, फिर माह के अंत की पार्टी भी सिर पर आ चुकी थी. इस बार उसे नहीं लगता था कि वे कोई विशेष कार्यक्रम कर पाएंगे. उसने कल सिमरन से बात करके कैटरिंग का प्रबंध करने का निर्णय लिया. अन्य कार्यक्रम के लिए भी उसे पार्थ और रूचि से बात करनी होगी. वैसे भी वो इस बार रूचि की माँ राशि को आमंत्रित करना चाहती थी. वो सदस्या थीं, परन्तु क्लब कभी आई नहीं थीं. इस बार उनकी दो सहेलियाँ भी रहेंगी, तो हो सकता है आ जाएँ.

घर पहुंचकर उसके कार बंद करने के पहले ही तड़ाक से दरवाजा खुला और सुमति का उद्वेलित चेहरा सामने दिखा. शोनाली को हंसी आते आते रह गई. कार से निकलकर उसने सुमति का हाथ थामा और दोनों शोनाली के कमरे में चली गयीं. सुमति ने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और शोनाली को आशा से देखने लगी. सुमति भी अब तक अपने कपड़े निकाल चुकी थी. वो जाकर सोफे पर बैठ गई और अपने पैर फैला लिए. सुमति उसके सामने बैठी और गांड के प्लग को देखा.

“बहुत बड़ा लंड था क्या, भाभी? ये मोटा वाला प्लग लगाया हुआ है.” सुमति ने पूछा.

“हाँ बहुत बड़ा था, और उसने मेरी गांड को पूरा भरा हुआ है. उसका रस मेरी गांड में तैर रहा है. थोड़ा ध्यान से निकालना प्लग को नहीं तो बाहर गिर जायेगा फिर आपको दुःख होगा.”

“वाह क्या बात है, वैसे कौन था?”

“बाद में बताउंगी. पहले अपना काम करो.”

सुमति ने शोनाली की गांड के नीचे अपनी जीभ फैलाई और फिर धीरे से प्लग को निकाला. प्लग के कुछ ही बाहर आते आते शोनाली की गांड से रस बहने लगा. सुमति ने उसे चाटते हुए प्लग को निकालना चालू रखा. जैसे जैसे प्लग बाहर आता, रस भी बाहर निकलता. अब प्लग उस स्थान पर था जहाँ से उसे पूरा ही बाहर निकला था. सुमति ने अपने अनुभव के आधार पर शोनाली की गांड को ऊपर उठाया और प्लग को बाहर खींचा और एक ही झटके में अपना मुंह शोनाली की गांड पर लगाकर खोल दिया. शोनाली की गांड से रस की नदी सुमति के मुंह में प्रवेश कर गई.

आरम्भ की धार जब चुक गई तो सुमति ने अपनी जीभ से शोनाली की गांड को अंदर से चाटा और हर बून्द को पी लिया. ये सुमति का अद्भुत अनुभव ही था कि एक भी बून्द उसके मुंह के बाहर नहीं गिरी. अंदर बाहर से गांड को चाटने के बाद सुमति संतुष्ट हो गई और चटखारे लेते हुए बैठ गई.

“बहुत स्वादिष्ट मिश्रण था आज तो दीदी, कौन है वो?”

“मेहुल, आठ नंबर वालों का लड़का. और उसका लंड अब तक का क्लब का सबसे बड़ा और मोटा लंड है.”

“ओह! तो फिर मुझे भी चुदवाओ न भाभी. एक नए मोटे लौड़े से गांड मरवाने की बड़ी इच्छा है.”

“ठीक है, देखती हूँ कब आपकी ये इच्छा पूरी कर पाती हूँ. पर जल्दी ही उसके लौड़े से अपनी चूत और गांड फड़वाने के लिए आप मन बना लीजिये. चलिए अब मैं नहा लेती हूँ. फिर देखते हैं घर में और क्या चल रहा है.”

फिर कुछ सोचते हुए, “दीदी, मैं पार्थ की क्लास लेने वाली हूँ. उसने मुझे बताया नहीं कि मेहुल है आज का नया रोमियो. तो आप बीच में मत पड़ना, ठीक है?”

सुमति अपने बेटे के ऊपर क्रुद्ध शोनाली को देखती रही. फिर उसने सिर हिलाया.

“मैं जानती हूँ भाभी, आप उसे भी आहत नहीं करोगी. पर क्या आप ये करते हुए इस बात को निश्चित कर सकती हैं कि मैं वहाँ नहीं रहूँ.”

“ठीक है. अब मैं नहा लेती हूँ.”

इसके बाद शोनाली नहाने चली गई और सुमति अपनी जीभ और मुंह में बसे स्वाद को लिए हुए बाहर.

महक की भावी ससुराल:

महक जब राणा परिवार के घर पहुंची तो सुबह के दस बजे हुए थे. सुनीति ने उसे अंदर खींचा और गले से लगा लिया. फिर उसे कंधों से पकड़कर कुछ दूर करते हुए ध्यान से देखा.

“सच में तुम बहुत सुंदर हो महक. असीम को तुमसे अच्छी पत्नी नहीं मिल सकती थी.”

महक शर्मा गई. पर इसका उसके पास कोई उत्तर तो था नहीं.

“अब ये बताओ कि क्या लोगी? फिर मैंने कुमार को कहा है वो हमें जहाँ जाना है ले जायेगा.” सुनीति ने उसे सोफे पर बैठाते हुए पूछा.

“चाय या कॉफी, कुछ भी ठीक है.” महक ने कहा.

सुनीति ने सलोनी को कॉफी बनाने के लिए कहा और फिर बोली कि तब तक कपडे बदलकर आती है.

सलोनी चाय लेकर आई और इतने में सुनीति भी आ गई. सुनीति ने सलोनी को कुमार को बुलाने के लिए कहा और भावी सास बहू चाय पीने लगीं. कुमार आया और उसने महक को नमस्ते की और फिर अपनी चाय पीने लगा.

“तो मॉम, क्या कार्यक्रम है आज आपका? मुझे दो बजे तक छोड़ देना, कुछ काम है.”

“ठीक है, वैसे महक भी गाड़ी चला ही लेती है, तुम चाहो तो हमें मॉल में छोड़कर भी जा सकते हो. तुम्हारे रहने से व्यर्थ का व्यवधान ही रहेगा और तुम भी बोर हो जाओगे.” सुनीति ने कहा.

“ये भी ठीक है. तो चलें?” कुमार के कहने पर सब उठे ही थे की जीवन भी आ गए. महक ने उनके पाँव छूकर आशीर्वाद लिया.

“अरे अब ये सब कौन करता है बहू? जीती रहो.” जीवन ने भी उसे आशीर्वाद दिया. “कहाँ जाने का कार्यक्रम है?”

“बाबूजी, महक को शॉपिंग के लिए ले जा रही हूँ. फिर ये यहीं रुकेगी आज.”

“ये तो बड़ी अच्छी बात है, तो फिर हम शाम को बैठेंगे.”

महक चल पड़ी फिर कार में बैठकर सुनीति से बोली, “मैंने घर में आज रुकने के लिए नहीं बताया.”

सुनीति ने कहा, “कोई बात नहीं, मैं अभी स्मिता से कहे देती हूँ. और सलोनी तुम्हारे घर से तुम्हारे रुकने के लिए आवश्यक वस्त्रादि ले आएगी.”

सुनीति ने स्मिता से आज्ञा ली, और फिर सलोनी से कहा कि वो दोपहर में जाकर आठ नंबर वाले घर से महक का बैग ले आए.

“चलो, अब कोई चिंता नहीं. अब ये बताओ कि तुम साड़ी कैसी पहनती हो?”

“जी, मेरी ऐसी कोई विशेष रूचि नहीं है और मैं आप जैसा चाहेंगी, वही पहन लूँगी.”

“वैसे तुम्हारी मम्मी भी तुम्हारे लिए यही सब करने वाली हैं, पर मेरी इच्छा है कि तुम एक रस्म में तो मेरी साड़ी पहनो.”

“बिलकुल, आप जैसा चाहो.”

“वैसे तुम्हें मैं बता दूँ, आज तुम मेरे और अपने ससुरजी के साथ सोने वाली हो.”

महक ने कुछ नहीं कहा पर कुमार ने लम्बी आह भरी.

“अब तुझे क्या हो गया?” सुनीति ने हंसकर पूछा.

“मैं सोच रहा था कि भाभी आयी हैं तो मुझे भी कुछ प्यार मिलेगा.”

“वो सब भी मिलेगा, अब तो नियमित आया करेगी महक. हैं न महक?”

“जी”

“तो फिर मेरा और भैया का क्या होगा?”

“क्यों तेरी दीदी नहीं है क्या?”

“अरे मम्मी वो आज अपनी सहेली के घर रहने वाली हैं. आपको बताया तो था.”

“अरे हाँ. चल कोई नहीं सलोनी को बुला लेना दोनों भाई. पर आज के लिए महक केवल हम दोनों पति पत्नी की ही है. समझे.”

“समझा मॉम. अब आपकी बात तो माननी ही होगी न?” कुमार ने ऐसे नाटक करते हुए बोला कि महक हंस पड़ी.

“हँसते हुए और भी सुंदर लगती हो महक. ऐसे ही रहा करो. हमारे बीच में कोई दीवार नहीं होनी चाहिए. बहू भी हमें बेटी ही लगती है.”

“हाँ भाभी. सलोनी मौसी हमारी असली मौसी नहीं हैं, पर हम उन्हें मम्मी की बहन ही समझते हैं और भाग्या को अपनी. आप बिलकुल औपचारिकता में मत पड़ना. मम्मी पापा इसीलिए आज आपको अपने साथ रहने के लिए कह रहे हैं कि आपका डर या अन्य भावनाएं मिट सकें और हम सब प्रेम से आगे एक साथ जीवन का आनंद ले सकें.”

महक को ये बात बहुत भाई. उसे पता था कि उसकी मॉम और श्रेया भाभी की मॉम के बीच सहज संबंध नहीं थे. हालाँकि पिछले कुछ दिनों से सुजाता आंटी का व्यवहार कुछ बदला हुआ लग रहा था. मॉम की उनके प्रति राय भी अब कुछ बदल सी रही थी.

मॉल आने के बाद कुमार ने सुनीति और महक को कार की चाबी दे दी और फिर मोबाइल से उबर बुक की. सुनीति और महक मॉल में चले गए और कुछ देर बाद कुमार भी निकल गया.

स्मिता का घर:

सुनीति से बात होने के बाद स्मिता ने फोन काटा और अपने पति विक्रम को बताया कि महक आज अपने भावी ससुराल में ही रहेगी.

“वैसे ये आवश्यक भी है. मेरे सिवाय परिवार में कोई उनसे संबंधियों के रूप में अब तक मिला नहीं है. हम दोनों परिवारों को एक बार साथ मिलने का कार्यक्रम बनाना चाहिए.” स्मिता ने कहा.

विक्रम: “हाँ, ये कर सकते हैं. मैं एक दो दिन में आशीष से बात करूँगा। फिर देखते हैं. वैसे तुम और सुनीति ही इस पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था करोगी और तुम दोनों को मना करने का साहस किसी में नहीं है.” विक्रम ने चुहल की.

स्मिता: “ठीक है. कल आप आशीष से बात करना मैं सुनीति से कर लूँगी। अब एक अन्य बात है.”

“क्या?”

“मेरे पास समुदाय के प्रबंधन समिति के सदस्य के लिए प्रस्ताव आया है. वैसे भी चुनाव होगा. परन्तु आपसे पूछे बिना मैं कुछ नहीं करुँगी। “

“मुझे क्या आपत्ति हो सकती है. हाँ ये अवश्य है कि तुम अधिक व्यस्त हो जाओगी, पर वो भी ठीक है. एक वर्ष की ही तो बात है. पर महक का विवाह भी है तो ये निर्णय मैं तुम पर ही छोड़ता हूँ. मेरी ओर से स्वीकृति है.”

“ठीक है, तो मैं नामांकन भर देती हूँ. आवश्यक तो है नहीं कि जीत ही जाऊँगी। और आज क्या सोच रहे हैं? महक है नहीं. मेहुल बाहर है. पता नहीं कब लौटेगा? मोहन भी श्रेया के साथ गया हुआ है और सम्भवतः दोनों श्रेया के मायके में ही रुकेंगे. तो हम दोनों ही हैं आज. आप ऑफिस जा रहे हो क्या?”

“रहने दो. इतने दिनों तो हमें एकांत मिला है. तो मैं ऑफिस से छुट्टी मरता हूँ और हम दोनों अपने पूर्व समय के समान घूमने, और आनंद करने चलते हैं. फिर शाम को अपनी पार्टी करेंगे.”

“अच्छा सुझाव है. कहाँ चलना है?”

“तुम तैयार हो और सोचो. तब तक मैं भी सोचता हूँ. पर चलते हैं कहीं अच्छे स्थान पर.”

स्मिता तुरंत चली गई और विक्रम फोन पर आसपास के स्थानों को देखने लगा जहाँ वो अन्य पर्यटकों को भेजता है. एक स्थान उसे उपयुक्त लगा और उसने वहीँ जाना तय किया. फिर वो भी तैयार होने के लिए अपने कमरे में चला गया.

अब शाम हो चुकी है.

सुजाता का घर:

शाम होते तक मोहन और श्रेया सुजाता के घर पहुंच गए. सुजाता उन्हें देखकर बहुत प्रसन्न हो गई. श्रेया और सुजाता गले मिलीं और मोहन के साथ श्रेया बैठक में जा बैठी. कुछ ही देर में अविरल और विवेक भी आ गए. सुजाता के पाँव तो जैसे आज थिरक रहे थे. उसने तुरंत उठकर अविरल, मोहन और विवेक के लिए ड्रिंक्स की व्यवस्था की. फिर उसने अपने और श्रेया के लिए भी हल्की ड्रिंक्स बनाईं। फिर पुरुष वर्ग को अकेला छोड़कर माँ बेटी दूसरी ओर बैठ गयीं.

श्रेया: “मॉम, अपने मुझे बताया क्यों नहीं कि मेहुल का लंड इतना बड़ा और मोटा है? सच में बहुत आनंद आया उसके साथ चुदाई में.”

सुजाता: “उसने मुझे परं लिया था कि मैं किसी को भी नहीं बताऊँगी, तुमसे भी यही कहा होगा?”

श्रेया: “हाँ, और मैं भी अपनी बात पर अडिग हूँ.”

सुजाता: “तेरी गांड मारी या नहीं?”

श्रेया: “नहीं मॉम, उस दिन समय कम था. वैसे अभी तक उसने मम्मी जी की गांड भी नहीं मारी है. तो ये तय हुआ है कि हम दोनों की गांड एक साथ मारेगा. बड़ा मजा आने वाला है उस दिन. आपकी गांड मारी थी क्या?”

सुजाता की आँखें जैसे स्वप्निल हो गयीं, “हाँ मारी थी और ऐसा अनुभव दिया था कि मैं उसके सामने नतमस्तक हो गयी. अब तो अगर वो मुझे बुलाये और मुझे बीच सड़क में भी नंगा करके गांड मारना चाहे तो मैं दौड़ी चली जाऊँगी।”

“ओह हो, मॉम. आप तो उसकी दीवानी हो गयी हो, पापा को कोई चिंता तो नहीं करनी चाहिए?” श्रेया ने हसंते हुए पूछा.

सुजाता: “उन्हें न आज तक करने की आवश्यकता पड़ी और न ही आगे पड़ने वाली है. एक बात कहूँ?”

“जी.”

सुजाता: “मेहुल तुझे बहुत मानता है. उसे समझाना कि वो स्नेहा को थोड़ा प्यार से चोदे. स्नेहा उसकी इतने दिनों तक यूँ ही उपेक्षा करती रही है. न जाने क्यों मुझे एक डर सा सता रहा है अपनी बच्ची के लिए.”

श्रेया: “मॉम, मेहुल से शालीन और सौम्य लड़का और दूसरा कोई नहीं है. आप कहती हो तो मैं उसे बोल दूँगी पर डरने जैसी कोई बात मुझे लगती नहीं.”

दो ड्रिंक्स और पीने के बाद सुजाता और श्रेया किचन में खाना लगाने के लिए गए और इतने में ही स्नेहा भी आ गयी. उसने सुजाता और श्रेया को तो देखा नहीं पर मोहन को देखते ही उछल पड़ी.

“जीजू! कब आये? मुझे बोला क्यों नहीं मैं पहले लौट आती.” उसने दौड़कर मोहन को गले लगा लिया और उसे चूमने लगी.

“बस यूँ मन किया तो चले आये. साली से मिले हुए जो इतने दिन हो गए थे.”

“ये अच्छा किया. दीदी कहाँ हैं?”

“किचन में.”

स्नेहा किचन में गई और श्रेया के गले लग गई. दोनों बहनें एक दूसरे को चूमते हुए मिल रही थीं. सुजाता की आँखों में आंसू आ गए. फिर तीनों ने खाना लगाया और सबने बैठकर सप्रेम भोजन किया. भोजन के बाद कुछ देर यूँ ही गपशप चलती रही.

“तो फिर आज सोने का क्या प्रावधान है, सुजाता?”

“मैं तो कहती हूँ सब एक ही कमरे में रहें. बहुत दिन हो गए हमें साथ में चुदाई किये हुए. क्या कहते हो सब?”

सबने अपनी स्वीकृति दी और ये निश्चय हुआ कि अविरल और सुजाता का कमरा ही इस कृत्य के लिए श्रेष्ठ है. घर को बंद करने के बाद सभी उस कमरे में चल दिए.

स्मिता का घर:

स्मिता और विक्रम दिन भर घूमने के बाद शाम को घर पहुंचे. दोनों को इस प्रकार से अकेले घूमने से अपने पुराने समय की याद आ गयी. उन्होंने निश्चय किया कि महीने में कम से कम एक बार वो इसी प्रकार से बाहर जाया करेंगे. घर पहुंचने के बाद दोनों नहाये और फिर बैठक में विक्रम ने पीने के लिए ड्रिंक्स बनाये. रात के लिए खाना वे साथ ले आये थे.

स्मिता: “चलो, अब हम अकेले हैं. मोहन और श्रेया सुजाता के घर पर हैं और महक अपनी भावी ससुराल में. बस मेहुल को ही आना है. तो देखते हैं कब लौटेगा.”

विक्रम के मन में एक विचार आया, “देखो तो सही कहाँ है, और अगर वो भी किसी मित्र के साथ है और रुकना चाहे तो रुक जाने देना.”

स्मिता: “लगता है आज आपका मूड कुछ अधिक रोमांटिक है.”

विक्रम ने स्मिता को बाँहों में भरते हुए बोला, “सच यार, हमारे पास अब एक दूसरे के लिए पर्यप्र समय ही नहीं रहता. कोई न कोई कार्यक्रम या घटना हमें दूर रखती है. इसीलिए कह रहा हूँ.”

स्मिता ने मेहुल को फोन लगाया.

स्मिता: “हैलो मेहुल? हाँ कहाँ हो अब तक आये नहीं.”

मेहुल: “”

स्मिता: “अच्छा अपनी किसी मित्र के साथ हो, आज आओगे या नहीं?”

मेहुल: “”

स्मिता: “अगर चाहो तो वहाँ ही रुक सकते हो. तुम्हारे पापा ने भी अनुमति दी हुई है.”

मेहुल: “”

स्मिता: “बहुत शरारती हो गए हो. आना कल तो तुम्हें सिखाऊँगी।” हँसते हुए स्मिता ने उत्तर दिया.

मेहुल: “”

स्मिता: “ठीक है, कल सुबह मिलते हैं. एन्जॉय.”

स्मिता ने फोन काटा और विक्रम की ओर देखा, “चलो अब कोई रोड़ा नहीं है. जो मन में आये सो करो आज.”

दोनों एक दूसरे की बाँहों में लिपटे हुए अपने जीवन के अविस्मरणीय पलों के बारे में बातें करते रहे और ड्रिंक्स भी लेते रहे. आज की रात भिन्न थी.

नूतन और मेहुल:

जब स्मिता का फोन आया तो मेहुल नूतन के घर में उसके बिस्तर पर नंगा लेटा हुआ था. नूतन उसके लंड को चूस रही थी. क्लब से आने के बाद नूतन ने खाना बाहर से मंगा लिया था और खाने के बाद नूतन को मेहुल के लंड से चुदवाने का अवसर भी मिला था. पर इस सब में समय बहुत निकल गया था और शाम हो चुकी थी. नूतन चाहती थी कि अगर सम्भव हो तो मेहुल आज की रात वहीं रुक जाये और उसने मेहुल से भी इसके लिए निवेदन किया था. मेहुल ने कुछ उत्तर नहीं दिया था.

परन्तु जब फोन पर बात हो गई तो नूतन मेहुल की बातों से जान गई कि उसकी प्रार्थना मान ली गई है. मेहुल के लंड को वो और तीव्रता से चूसने में जुट गई. मेहुल ने फोन काटा और नूतन से कहा कि वो आज की रात उसके साथ बिताने के लिए उपलब्ध है. नूतन के आनंद की सीमा न रही. वो खाने के बाद हुई निर्बाध चुदाई की याद करते हुए सिहर उठी.

सुनीति का घर:

सुनीति और महक शॉपिंग समाप्त करते हुए चार बजे घर पहुंच गयीं थीं. इस अवधि में भावी सास बहू में बहुत बातचीत हुई और उनमे घनिष्टता भी बढ़ गयी. महक को अब सुनीति के साथ कोई भी झिझक नहीं रह गई थी. वैसे तो ये दोनों परिवार एक दूसरे के साथ वर्षों से रह रहे थे और एक दूसरे से अच्छे परिचित भी थे, परन्तु अब होने वाली घनिष्टता और अंतरंगता उस सब पर हावी थी. घर पहुंचकर सलोनी ने महक का बैग उसे दिया और महक और सुनीति स्नान करने चली गयीं।

बाहर आने पर सलोनी ने चाय बनाई हुई थी. कुछ देर अब बैठकर बातें करने के बाद जीवन भी आ गए और वो भी बातों में सम्मिलित हो गए. महक भी जीवन के बलशाली व्यक्तित्व से प्रभावित हुए बिना न रह सकी. जीवन ने बताया कि उनके परम मित्र और सुनीति के माता पिता दो दिन बाद आने वाले हैं. कल ड्राइवर को गाड़ी लेकर भेजा जाना है. ये सुनकर सुनीति की प्रसन्नता की कोई सीमा नहीं रही. उसने जीवन के गले लगा लिया और उन्हें चूमने लगी. तब तक सलोनी भी आ गई. उसे ये भी जानकर कि बलवंत और गीता आ रहे है बहुत ख़ुशी हुई.

घर का वातावरण कई स्तर और प्रफुल्लित हो उठा. उसके बाद छह बजे तक परिवार के अन्य सदस्य भी घर आ गए. असीम को देखकर महक का मन विचलित हो गया. परन्तु वो समुदाय के नियम जानती थी. विवाह तक उन्हें दूर रहना था. वे अन्य किसी के भी साथ चुदाई कर सकते थे, परन्तु एक दूसरे के साथ नहीं. असीम और महक भी एक दूसरे को आँखें चुराकर देख रहे थे. पर कुछ करने की स्थिति में नहीं थे. कुछ देर बाद सलोनी ने सबके लिए पीने पिलाने की व्यवस्था कर दी और दिन भर में हुई घटनाओं के बारे में बातें चलती रहीं. सुनीति ने महक के लिए ली गयी वस्तुओं को सबको दिखाया और जैसा अपेक्षित था सबको बहुत अच्छी लगी.

ड्रिंक्स के बाद भोजन हुआ और फिर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुनीत महक को अपने कमरे में ले गयी. असीम और कुमार पहले ही सलोनी पर घात लगाए हुए थे तो सलोनी ने कुछ समय बाद उनके कमरे में आने का आश्वासन दिया. अग्रिमा जीवन की गोद में जा बैठी और फिर उसके साथ ही चली गयी. असीम और कुमार अपने कमरे में चले गए और सलोनी की प्रतीक्षा करने लगे.

क्रमशः
 
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