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आठवाँ घर: स्मिता और विक्रम शेट्टी
अध्याय ८.३.२
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अब तक:
इधर श्रेया और मेहुल निद्रा में थे तो वहीं नायक परिवार में भोजन के उपरांत मंत्रणा चल रही थी. कुछ समय के विचार विमर्श के बाद ये निश्चित किया गया कि श्रेया के प्रस्ताव को मानने में कोई विशेष आपत्ति नहीं है. अगर शेट्टी परिवार कौटुम्बिक सम्भोग में लिप्त है तो आगे के लिए अनेक संभावनाएं खुल जाएँगी.
इसी के साथ मंत्रणा समाप्त हुई और अंजलि को श्रेया को अपना निर्णय बताने का दायित्व सौंपा गया. अंजलि ने इसे शाम को ही पूर्ण करने का बीड़ा भी उठा लिया.
अब आगे:
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स्मिता का घर:
श्रेया और मेहुल जब उठे तो चार बजने को थे. दोनों ने बाथरूम में जाकर हल्का स्नान किया और फिर बैठक में आ गए. श्रेया ने चाय चढ़ा दी और वर्षा ने मेहुल की ओर देखकर आँखों से पूछा “क्या हुआ?”
मेहुल ने संकेत से बताया कि बहुत अच्छा रहा. वर्षा मुस्कुरा दी. श्रेया की चाय बन गई तो वो लेकर आ गई और तीनों बैठे चाय पीने लगे. वर्षा ने श्रेया को देखा तो उसके चेहरे को दमक से जान लिया कि वो भी प्रसन्न थी. तभी घर की घंटी बजी, मेहुल ने उठकर खोला तो सामने अंजलि थी.
“अरे दीदी, आप? आओ आओ.” उसने अंजलि का स्वागत किया.
अंजलि अंदर आई तो श्रेया समझ गई कि उसका तीर सही लक्ष्य पर लगा था. उसने अंजलि का हाथ पकड़ा और अपने कमरे में ले गई. बिस्तर अब तक ठीक नहीं किया था तो अंजलि ने भौहें सिकोड़ीं.
श्रेया: “अरे मेहुल से चुदवाकर हटी हूँ कुछ देर पहले. बिस्तर अभी भी ठीक नहीं किया. और तुम बताओ.”
अंजलि: “मैंने परिवार में बात की. उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. परन्तु ये होगा कैसे इसकी मुझे चिंता है. अब तक किसी को पता नहीं था हमारे विषय में. पर अब न जाने क्यों एक डर सा लग रहा है.”
श्रेया: “अंजलि, मेरा परिवार और मोहन का परिवार इस प्रकार से कई वर्षों से संलिप्त है. कुछ और लोग हैं जो इस विषय को जानते हैं, परन्तु वो भी अपने सामाजिक प्रतिष्ठा के चलते कभी कुछ नहीं कहेंगे. हमारे घर सटे हुए हैं तो किसी को इतना संशय भी नहीं होगा. समय चलते तुम्हें कुछ अन्य परिवारों के बारे में भी पता चल जायेगा, परन्तु ये तुम सबको अपने आप निर्धारित करना होगा.”
श्रेया आगे बोली, “रही बात कि इसका प्रारम्भ कैसे होगा, तो मैं पापाजी से कहकर कोई रिसोर्ट में जाने के लिए आग्रह कर सकती हूँ, जहाँ हमें कोई और न जानता हो. वहाँ हम अपने मन के अनुरूप इसका आरम्भ कर सकते हैं. अगर तुम सब इसके लिए सहमत हो तो अगले शुक्रवार को हम चल सकते हैं.”
श्रेया ने ये बताना आवश्यक नहीं समझा कि ये वही रिसोर्ट है जहाँ उनके समुदाय के मिलन समारोह होते हैं. अंजलि ने कुछ देर चिंतन किया.
अंजलि, “मुझे परिवार वालों ने ये अधिकार दिया है कि जो मैं सही समझूँ वो निर्णय ले सकती हूँ जो उन सबको मान्य होगा.”
श्रेया अंजलि को आशा से देख रही थी. अंजलि ने सिर उठाकर श्रेया को देखा और उसका असहय समझ गई.
अंजलि, “श्रेया, तुम अंकल से बात कर सकती हो. हम सब शुक्रवार को चलेंगे.”
श्रेया: “बहुत अच्छा निर्णय है. अब मुस्कुरा भी दो.” ये कहते हुए उसने अंजलि को बाँहों में ले लिया और उसके होंठ चूम लिए.
अंजलि भी मुस्कुरा दी और फिर उसने श्रेया के होंठ चूमे और अपने घर चली गई. श्रेया बाहर आई और अपने पति की प्रतीक्षा करने लगी.
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समुदाय की मंत्रणा:
मधुजी ने अपनी प्रबंधन समिति को एक मंत्रणा के लिए आमंत्रित करने का निर्णय लिया. उन्होंने अगले दिन सबको अपने घर पर आमंत्रित किया. महिला सदस्याओं के लिए इसमें कोई अड़चन नहीं थी, परन्तु पुरुष सदस्य कुछ आनाकानी करने के बाद सहमत हो गए. अगले दिन सभी समय पर उनके घर पहुंच गए. घर के अन्य सदस्य बाहर थे, और उनके पति गिरी अपने नए मित्र जीवन राणा के घर गए हुए थे. इस बात की मधुजी को अत्यंत प्रसन्नता थी कि जीवन से मिलने के बाद जैसे गिरी में भी शक्ति का संचार हो गया था. अब वो भी अपने कमरे में बंद न रहकर परिवार की रात्रिकालीन क्रीड़ा में भाग लेने लगे थे.
मधुजी ने सबको अपने ऑफिस में बैठाया।
“आपसे मैंने कल बात की थी, एक नए परिवार को जोड़ने के विषय में. मैंने उनके बारे में छानबीन आरम्भ कर दी है. मेरे विचार से तीन चार महीने में हमें उनके बारे में विस्तृत सूचना मिल जाएगी.”
“परन्तु मेरा आपको इस विषय में अपने एक संशय को दूर करने के लिए ये मंत्रणा की है. नया परिवार स्मिता शेट्टी और सुनीति राणा के पड़ोसी परिवार हैं. वर्षा और समीर नायक.”
एक सदस्य ने सीटी बजाई।
“तो मेरा संशय यही है कि इतने निकट रहने वाले परिवारों को जोड़ना सही है या नहीं? आप जानते हो कि हमारे अन्य परिवार नगर में फैले हुए हैं.”
मंजुला (एक सदस्या) बोली, “मुझे इसमें कोई विशेष समस्या नहीं दिखती. वैसे भी हमारे समुदाय में इस वर्ष केवल राणा परिवार ही जुड़ पाया है. नए परिवार को आने में वैसे बी अब से छह महीने तो लग ही जायेंगे. फिर उन्हें भी अपनी समाजिक प्रतिष्ठा की चिंता होगी.”
अन्य सब भी उनके इस विचार से सहमत थे. उन्हें भी इस बात की चिंता थी कि नयी पीढ़ी की सोच पृथक थी और कहीं ऐसा न हो कि आगे चलकर समुदाय का खंडन हो जाये.
“मुझे नहीं लगता कि ऐसा होने की अधिक संभावना है. हाँ, हमें विवाह के विषय में अपने नियम बदलने पर भी विचार करना चाहिए. समुदाय के बाहर विवाह करने पर, परिवार के केवल उस सदस्य को ही एक वर्ष के लिए अलग करना पूरे परिवार को अलग करने से अच्छा होगा. अगर आप सहमत हो तो इस बिंदु पर अगले मिलन समारोह में वोट लिए जा सकते हैं.” मधुजी ने कहा.
“ये उत्तम विचार है. विवाह की संख्या बढ़ रही है. ऐसा न हो कि इस नियम के कारण समुदाय ही समाप्त हो जाये.” एक पुरुष सदस्य ने कहा.
“अब हमें आने वाली नई समिति के विषय में भी सोचना होगा. आप सबने बहुत अच्छा कार्य किया है और इसके लिए हम सभी आभारी हैं. परन्तु नियम यही है कि अगले मिलन पर नए चुनाव होंगे और उसके अगले मिलन में नयी समिति शपथ लेगी.”
सबने सिर हिलाकर सहमति दी.
“जैसा आप जानते हैं आप अपनी ओर से दो सदस्यों का नाम मनोनीत कर सकते हैं, उनकी स्वीकृति होने पर. अन्य सदस्य एक का ही नाम दे सकते हैं. उसके बाद कौन चुना जाता है ये तो चुनाव पर ही निर्भर है. तो मैं चाहूंगी कि आप अपने नाम सोच कर उनसे परामर्श कर लें. अन्य सदस्यों को भी सूचना कर दें ताकि इस समारोह में चुनाव पूर्ण हो सकें. समय अधिक नहीं है, पर हम एक बहुत छोटा समुदाय हैं.”
“हाँ, मेरे विचार से इस सप्ताह में ही नाम निर्धारित हो जायेंगे. इस मिलन पर चुनाव किये जा सकते हैं.”
इसके बाद आर्थिक स्थिति पर चर्चा हुई. फिर मंत्रणा समाप्त करने के पश्चात सब सदस्य अपने घर या कार्य पर चले गए.
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स्मिता का घर:
श्रेया मोहन के आने के बाद उसे कमरे में ले गई और अंजलि से हुई बात बता दी. मोहन ने सोचा कि ये बात सबके साथ साझा करना अत्यंत आवश्यक है. उसने इसका दायित्व उठाया और रात्रिभोज के उपरांत इसके विषय में चर्चा करने का समय चुना. शाम को एक दो ड्रिंक्स के बाद भोजन किया गया और फिर मोहन ने कहा कि वो सबके साथ एक बात बाँटना चाहता है. तो सब लोग वहीँ बैठक में बैठ गए. मोहन ने उस रात को सुनाई देने वाली चीखें और फिर श्रेया का अंजलि के घर जाना और फिर आज अंजलि का उनके घर आना सबको बताया.
विक्रम उसकी ओर ध्यान से देख रहा था. अंत में उसने श्रेया द्वारा प्रस्तावित रिसोर्ट की योजना अपने पिता को बताई.
“तो अब हमें ये निर्णय लेना है कि हम उन्हें अपने साथ ले जायेंगे या नहीं?”
“अगर बात इतनी आगे बढ़ा ही चुके हो तो न कहने का प्रश्न ही कहाँ बचता है.” विक्रम ने श्रेया की ओर देखकर कहा.
“पापा.” श्रेया कुछ बोलती उसके पहले ही विक्रम ने उसे रोक दिया, “क्या बात यहीं तक सीमित है या कुछ और भी है.”
“हमने मधुजी को उनके बारे में जाँच करने के लिए निवेदन किया है.”
“तेरी माँ का… कभी कुछ पूछ भी लिया करो.”
“सॉरी, पापा.” मोहन और श्रेया ने कहा. इस पूरे वार्तालाप में महक और मेहुल मौन ही थे.
“सुनिए.” स्मिता ने कहा.
“मुझे इसमें कोई विशेष समस्या नहीं लग रही है. आप क्यों इतना चिंतित हो रहे हैं?”
“अगर अंजलि ने श्रेया से झूठ कहा हो तो?”
“आप श्रेया की बुद्धिमता पर शंका कर रहे हैं. और अंजलि कभी इस घटना को स्वीकार नहीं करती.”
“ओके, तो क्या चाहते हो?”
“रिसोर्ट बुक कर दो. कितने कमरे चाहिए पड़ेंगे?” स्मिता ने अब बागडोर अपने हाथ में ले ली.
“छह हम और वहां से सात. तेरह लोग.”
“किसी को जोड़ लो, मुझे ये अंक अच्छा नहीं लगता.”
“मम्मी को ले लो!” श्रेया ने तुरंत अपना सुझाव दिया.
“अविरल मानेगा तीन दिन के लिए?”
“ओह, उन्हें मनाया जा सकता है. या स्नेहा को ले लेते हैं.”
“हाँ स्नेहा ही ठीक रहेगी.”
इसके बाद विक्रम ने रिसोर्ट के एक तल पर चार बड़े कमरे बुक कर दिए. उसी तल पर बने एक समारोह कक्ष को भी बुक कर दिया. लोकेश जो मधुजी का पुत्र और रिसोर्ट का स्वामी था उसने विक्रम को उत्तम सेवा का आश्वासन दिया. बाद में जब लोकेश ने अपनी माँ मधुजी को बताया तो उन्होंने लोकेश से अपनी ओर से कुछ अन्य निवेदन भी किये. लोकेश ने बिना कारण जाने उन्हें स्वीकार किया. मना करता भी तो कैसे? मधुजी उसे अपनी गांड से जो समझा रही थीं.
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मेहुल दुविधा में था. परसों उसका महक के साथ का समय था, फिर अगले दिन दिंची क्लब में और फिर उसके अगले दिन स्नेहा के साथ. और अब ये नया बखेड़ा उनके पड़ोसियों के साथ का. वैसे अंजलि मस्त थी और उसे चोदने का विचार उसके मन में कई बार आता था, जब जब वो मिलती थी, जो कम ही होता था. उसकी माँ वर्षा की बात कुछ और ही थी. पका हुआ फल थी जिसकी जवानी अब तक ढली नहीं थी, कुछ उसकी माँ के समान. और उसे इस आयु की स्त्रियों को चोदने में अधिक आनंद आता था. उसे सीखने वाली जो लगभग इसी आयु की जो थीं.
वो महक या स्नेहा के साथ बनी योजना को बदलना चाहता था, विशेषकर महक क्योंकि वो किसी भी कारण से क्लब में जाकर विफल नहीं होना चाहता था. पर उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो करे भी तो क्या?
पर इसका समाधान स्वयं ही हो गया. राणा परिवार ने महक को शॉपिंग के लिए बुलाया जिस दिन उसका महक से समय तय हुआ था. महक मेहुल की ओर देखकर मना करने ही वाली थी कि मेहुल ने उसे रोका और जाने के लिए सहमति देने का संकेत किया. फोन रखकर महक मेहुल की और मुड़ी.
“भैया?”
“मैं कहीं भगा नहीं जा रहा हूँ, पर जिस घर में तुझे जाना है वहाँ अगर अभी से टाल मटोल करेगी तो नकारात्मक व्यवहार माना जा सकता है. मेरी मान, मन लगाकर शॉपिंग करना और उन सबको अपने निर्मल व्यवहार से जीत लेना. फिर मैं तो यहीं हूँ.”
महक मेहुल के सीने से लग गई. उसकी आँखों में आंसू थे.
“भैया, आप संसार के सबसे अच्छे भाई हो!”
मेहुल ने इधर उधर देखा, स्मिता और श्रेया उन्हें देखकर भावुक हो रहे थे.
“क्या देख रहे हो भैया?”
“मैं देख रहा था कि दादा (मोहन) का नंबर मैंने कैसे काट दिया.”
महक हंसने लगी.
“ओके, भैया, आप दोनों वर्ल्ड के बेस्ट भाई हो. अब ठीक.”
“हम्म वर्ल्ड की बेस्ट बहन जब बोल रही है तो मान लेता हूँ. क्यों मम्मी और भाभी?”
“बिलकुल सही. और हमारा परिवार वर्ल्ड का बेस्ट परिवार.”
स्मिता और श्रेया ने आगे बढ़कर उन दोनों को बांध लिया और चारों एक दूसरे से लिपट गए.
मेहुल की एक समस्या हल हो गई थी. उसने भाभी से कहा कि स्नेहा को और दो दिन आगे बढ़ा दो.
“ओह हो हो, मेरे बच्चे का साथ पाने के लिए अब अपॉइंटमेंट लेना पड़ रहा है.”
“भाभी, आप भी!” मेहुल शर्माते हुए बोला।
“चल मैं उसे कहे देती हूँ.” श्रेया ने कहा और फिर सब अपने कार्य में लग गए.
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दिंची क्लब में मेहुल:
मेहुल निर्धारित दिन और समय पर सचिन द्वारा दिए पते पर पहुंच गया. घर से कुछ दूर था, नगर की मुख्य सीमा से बाहर. अपनी गाड़ी को खड़ा करने के बाद वो अंदर गया जहाँ एक सुंदर मध्यम आयु की स्त्री बैठी हुई कुछ पढ़ रही थी. मेहुल को देखकर वो मुस्कुराई और उसका स्वागत करने के बाद उसके आने का उद्देश्य पूछा. मेहुल ने उसे बताया तो उसने मेहुल से उसका पहचान पत्र माँगा. मेहुल ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिया जिसकी उस महिला, जिसका नाम नूतन लिखा हुआ था, ने कॉपी बनाई और मेहुल को लौटा दिया.
उसी समय वहाँ एक और आगंतुक का पदापर्ण हुआ. एक पचास पचपन वर्ष की महिला ने आकर नूतन से बात की और अपना नाम बताया. नूतन ने उससे भी उसका पहचान पत्र लिया और फिर कॉपी बनाकर लौटा दिया. उस महिला को देखकर मेहुल का लंड टनटना गया. महिला ने जिस प्रकार से मेकअप किया था और जिस प्रकार से वो अपने आप को प्रस्तुत कर रही थी, उससे ये विदित होता था कि वो धनाढ्य परिवार की है. सचिन के द्वारा बताई हुई फ़ीस का ध्यान आते ही उसे समझ आ गया कि ये महिला भी अपनी चुदाई के लिए ही आई है.
ये कुछ सीमा तक सच था. रूचि मैडम की माँ राशि ने अपनी सहेलियों में से कुछ को चुनकर इस क्लब के विषय में बताया था. उसका अपनी बेटी के इस नए व्यवसाय में कुछ सहायता करने का उद्देश्य था. रूचि ने पार्थ से बात की और फिर कुछ चिंतन के बाद उनमें से दो महिलाओं को ही चुना गया. अगर इनमे से कोई पारित नहीं होती तो किसी और को अवसर दिया जाना था.
नूतन ने उस महिला, जिसका नाम सोनी था उसे पास के एक कमरे में बैठाया और फिर मेहुल को लेकर चल पड़ी. एक कमरे के आगे जाकर उसने उसे खोला और मेहुल को अंदर आने को कहा. कमरा बहुत अच्छा सजाया हुआ था और किसी भी पाँच सितारा होटल के कमरे को मात कर सकता था. नूतन ने मेहुल को आवश्यक निर्देश दिए. कपड़े उतारकर कहाँ रखने हैं, स्नान करने के बाद गाउन पहनना है और फिर उसके परीक्षण के लिए संचालिका की प्रतीक्षा करनी है.
मेहुल के पूछने पर नूतन ने बताया कि वे भी बीस एक मिनट में पहुंच जाएँगी. नूतन ने मेहुल को एक प्रपत्र भी दिया और उसे भरने के लिए कहा. उसमें गोपनीयता की शपथ और अन्य कुछ विवरण भरने थे. इसके बाद उसने कमरे को बंद किया और चली गई. मेहुल ने अपने कपड़े बताये अनुसार रखे और स्नान के लिए चला गया. वहाँ पर उपलब्ध गाउन को पहना, कोई अंतर्वस्त्र की आवश्यकता नहीं थी. मेहुल ने उस फॉर्म को भरा और अपने हस्ताक्षर करने के बाद उसे टेबल पर रख दिया. फिर वो सोफे पर बैठकर कमरे के दरवाजे की ओर देखते हुए अगले पड़ाव की प्रतीक्षा करने लगा.
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दिंची क्लब में सोनी:
मेहुल को छोड़कर नूतन सोनी के पास आई और उन्हें अपने साथ एक दूसरे कमरे में ले गई. सोनी भी कमरे की भव्यता से प्रभावित हुए बिना न रह सकी. नूतन ने मेहुल के ही समान सोनी को समझाया, फॉर्म भरने के लिए दिया और चली गई. सोनी ने स्नान किया और फॉर्म भरा. क्लब की फ़ीस पर अवश्य उसे कुछ शंका थी परन्तु राशि (रूचि मैडम की माँ) ने उसे समझाया था कि उसे हर पैसे की कीमत कई गुना मिलेगी. सोनी के पति एक बड़े व्यवसाई थे और महीने में कई दिन बाहर ही रहते थे. जब राशि ने उनके साथ जाना छोड़ा तो सोनी को आश्चर्य हुआ था.
कुछ दिनों पहले उसने राशि से बात की तो राशि ने बताया कि उसने अपनी अलग व्यवस्था कर ली है और अब उसकी चुदाई नियमित रूप से जवान और मोटे कड़े और बड़े लौडों से होती है. सोनी के निवेदन पर कुछ दिन पहले राशि ने उसे अपने घर बुलाया और उसे इस क्लब के बारे में बताया. यहाँ की गोपनीयता को बनाये रखने के लिए उसने मुझे हमारे मुंबई में किये गए अनाचारों के वीडियो दिखाए. अगर सोनी गोपनीयता नहीं बना पाई तो वो उन्हें सोनी के पति के पास भेजने में कोई संकोच नहीं करेगी. क्लब की फीस अधिक थी, पर राशि ने पाई पाई का मोल बताया. आज सोनी यहाँ पहली बार आई थी. राशि ने उसे ये तो समझा दिया था आज उसकी भरपूर चुदाई होगी और हर प्रकार से संतुष्ट हो कर ही लौटेगी.
अब वो उस व्यक्ति की राह देख रही थी जो उसकी परीक्षा लेने वाला था. “इतने लौड़े खाये हैं कि ये लौंडा भी मेरे तलवे चाटेगा.” ये सोचते हुए सोनी मन ही मन मुस्कुरा उठी.
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अध्याय ८.३.२
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अब तक:
इधर श्रेया और मेहुल निद्रा में थे तो वहीं नायक परिवार में भोजन के उपरांत मंत्रणा चल रही थी. कुछ समय के विचार विमर्श के बाद ये निश्चित किया गया कि श्रेया के प्रस्ताव को मानने में कोई विशेष आपत्ति नहीं है. अगर शेट्टी परिवार कौटुम्बिक सम्भोग में लिप्त है तो आगे के लिए अनेक संभावनाएं खुल जाएँगी.
इसी के साथ मंत्रणा समाप्त हुई और अंजलि को श्रेया को अपना निर्णय बताने का दायित्व सौंपा गया. अंजलि ने इसे शाम को ही पूर्ण करने का बीड़ा भी उठा लिया.
अब आगे:
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स्मिता का घर:
श्रेया और मेहुल जब उठे तो चार बजने को थे. दोनों ने बाथरूम में जाकर हल्का स्नान किया और फिर बैठक में आ गए. श्रेया ने चाय चढ़ा दी और वर्षा ने मेहुल की ओर देखकर आँखों से पूछा “क्या हुआ?”
मेहुल ने संकेत से बताया कि बहुत अच्छा रहा. वर्षा मुस्कुरा दी. श्रेया की चाय बन गई तो वो लेकर आ गई और तीनों बैठे चाय पीने लगे. वर्षा ने श्रेया को देखा तो उसके चेहरे को दमक से जान लिया कि वो भी प्रसन्न थी. तभी घर की घंटी बजी, मेहुल ने उठकर खोला तो सामने अंजलि थी.
“अरे दीदी, आप? आओ आओ.” उसने अंजलि का स्वागत किया.
अंजलि अंदर आई तो श्रेया समझ गई कि उसका तीर सही लक्ष्य पर लगा था. उसने अंजलि का हाथ पकड़ा और अपने कमरे में ले गई. बिस्तर अब तक ठीक नहीं किया था तो अंजलि ने भौहें सिकोड़ीं.
श्रेया: “अरे मेहुल से चुदवाकर हटी हूँ कुछ देर पहले. बिस्तर अभी भी ठीक नहीं किया. और तुम बताओ.”
अंजलि: “मैंने परिवार में बात की. उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. परन्तु ये होगा कैसे इसकी मुझे चिंता है. अब तक किसी को पता नहीं था हमारे विषय में. पर अब न जाने क्यों एक डर सा लग रहा है.”
श्रेया: “अंजलि, मेरा परिवार और मोहन का परिवार इस प्रकार से कई वर्षों से संलिप्त है. कुछ और लोग हैं जो इस विषय को जानते हैं, परन्तु वो भी अपने सामाजिक प्रतिष्ठा के चलते कभी कुछ नहीं कहेंगे. हमारे घर सटे हुए हैं तो किसी को इतना संशय भी नहीं होगा. समय चलते तुम्हें कुछ अन्य परिवारों के बारे में भी पता चल जायेगा, परन्तु ये तुम सबको अपने आप निर्धारित करना होगा.”
श्रेया आगे बोली, “रही बात कि इसका प्रारम्भ कैसे होगा, तो मैं पापाजी से कहकर कोई रिसोर्ट में जाने के लिए आग्रह कर सकती हूँ, जहाँ हमें कोई और न जानता हो. वहाँ हम अपने मन के अनुरूप इसका आरम्भ कर सकते हैं. अगर तुम सब इसके लिए सहमत हो तो अगले शुक्रवार को हम चल सकते हैं.”
श्रेया ने ये बताना आवश्यक नहीं समझा कि ये वही रिसोर्ट है जहाँ उनके समुदाय के मिलन समारोह होते हैं. अंजलि ने कुछ देर चिंतन किया.
अंजलि, “मुझे परिवार वालों ने ये अधिकार दिया है कि जो मैं सही समझूँ वो निर्णय ले सकती हूँ जो उन सबको मान्य होगा.”
श्रेया अंजलि को आशा से देख रही थी. अंजलि ने सिर उठाकर श्रेया को देखा और उसका असहय समझ गई.
अंजलि, “श्रेया, तुम अंकल से बात कर सकती हो. हम सब शुक्रवार को चलेंगे.”
श्रेया: “बहुत अच्छा निर्णय है. अब मुस्कुरा भी दो.” ये कहते हुए उसने अंजलि को बाँहों में ले लिया और उसके होंठ चूम लिए.
अंजलि भी मुस्कुरा दी और फिर उसने श्रेया के होंठ चूमे और अपने घर चली गई. श्रेया बाहर आई और अपने पति की प्रतीक्षा करने लगी.
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समुदाय की मंत्रणा:
मधुजी ने अपनी प्रबंधन समिति को एक मंत्रणा के लिए आमंत्रित करने का निर्णय लिया. उन्होंने अगले दिन सबको अपने घर पर आमंत्रित किया. महिला सदस्याओं के लिए इसमें कोई अड़चन नहीं थी, परन्तु पुरुष सदस्य कुछ आनाकानी करने के बाद सहमत हो गए. अगले दिन सभी समय पर उनके घर पहुंच गए. घर के अन्य सदस्य बाहर थे, और उनके पति गिरी अपने नए मित्र जीवन राणा के घर गए हुए थे. इस बात की मधुजी को अत्यंत प्रसन्नता थी कि जीवन से मिलने के बाद जैसे गिरी में भी शक्ति का संचार हो गया था. अब वो भी अपने कमरे में बंद न रहकर परिवार की रात्रिकालीन क्रीड़ा में भाग लेने लगे थे.
मधुजी ने सबको अपने ऑफिस में बैठाया।
“आपसे मैंने कल बात की थी, एक नए परिवार को जोड़ने के विषय में. मैंने उनके बारे में छानबीन आरम्भ कर दी है. मेरे विचार से तीन चार महीने में हमें उनके बारे में विस्तृत सूचना मिल जाएगी.”
“परन्तु मेरा आपको इस विषय में अपने एक संशय को दूर करने के लिए ये मंत्रणा की है. नया परिवार स्मिता शेट्टी और सुनीति राणा के पड़ोसी परिवार हैं. वर्षा और समीर नायक.”
एक सदस्य ने सीटी बजाई।
“तो मेरा संशय यही है कि इतने निकट रहने वाले परिवारों को जोड़ना सही है या नहीं? आप जानते हो कि हमारे अन्य परिवार नगर में फैले हुए हैं.”
मंजुला (एक सदस्या) बोली, “मुझे इसमें कोई विशेष समस्या नहीं दिखती. वैसे भी हमारे समुदाय में इस वर्ष केवल राणा परिवार ही जुड़ पाया है. नए परिवार को आने में वैसे बी अब से छह महीने तो लग ही जायेंगे. फिर उन्हें भी अपनी समाजिक प्रतिष्ठा की चिंता होगी.”
अन्य सब भी उनके इस विचार से सहमत थे. उन्हें भी इस बात की चिंता थी कि नयी पीढ़ी की सोच पृथक थी और कहीं ऐसा न हो कि आगे चलकर समुदाय का खंडन हो जाये.
“मुझे नहीं लगता कि ऐसा होने की अधिक संभावना है. हाँ, हमें विवाह के विषय में अपने नियम बदलने पर भी विचार करना चाहिए. समुदाय के बाहर विवाह करने पर, परिवार के केवल उस सदस्य को ही एक वर्ष के लिए अलग करना पूरे परिवार को अलग करने से अच्छा होगा. अगर आप सहमत हो तो इस बिंदु पर अगले मिलन समारोह में वोट लिए जा सकते हैं.” मधुजी ने कहा.
“ये उत्तम विचार है. विवाह की संख्या बढ़ रही है. ऐसा न हो कि इस नियम के कारण समुदाय ही समाप्त हो जाये.” एक पुरुष सदस्य ने कहा.
“अब हमें आने वाली नई समिति के विषय में भी सोचना होगा. आप सबने बहुत अच्छा कार्य किया है और इसके लिए हम सभी आभारी हैं. परन्तु नियम यही है कि अगले मिलन पर नए चुनाव होंगे और उसके अगले मिलन में नयी समिति शपथ लेगी.”
सबने सिर हिलाकर सहमति दी.
“जैसा आप जानते हैं आप अपनी ओर से दो सदस्यों का नाम मनोनीत कर सकते हैं, उनकी स्वीकृति होने पर. अन्य सदस्य एक का ही नाम दे सकते हैं. उसके बाद कौन चुना जाता है ये तो चुनाव पर ही निर्भर है. तो मैं चाहूंगी कि आप अपने नाम सोच कर उनसे परामर्श कर लें. अन्य सदस्यों को भी सूचना कर दें ताकि इस समारोह में चुनाव पूर्ण हो सकें. समय अधिक नहीं है, पर हम एक बहुत छोटा समुदाय हैं.”
“हाँ, मेरे विचार से इस सप्ताह में ही नाम निर्धारित हो जायेंगे. इस मिलन पर चुनाव किये जा सकते हैं.”
इसके बाद आर्थिक स्थिति पर चर्चा हुई. फिर मंत्रणा समाप्त करने के पश्चात सब सदस्य अपने घर या कार्य पर चले गए.
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स्मिता का घर:
श्रेया मोहन के आने के बाद उसे कमरे में ले गई और अंजलि से हुई बात बता दी. मोहन ने सोचा कि ये बात सबके साथ साझा करना अत्यंत आवश्यक है. उसने इसका दायित्व उठाया और रात्रिभोज के उपरांत इसके विषय में चर्चा करने का समय चुना. शाम को एक दो ड्रिंक्स के बाद भोजन किया गया और फिर मोहन ने कहा कि वो सबके साथ एक बात बाँटना चाहता है. तो सब लोग वहीँ बैठक में बैठ गए. मोहन ने उस रात को सुनाई देने वाली चीखें और फिर श्रेया का अंजलि के घर जाना और फिर आज अंजलि का उनके घर आना सबको बताया.
विक्रम उसकी ओर ध्यान से देख रहा था. अंत में उसने श्रेया द्वारा प्रस्तावित रिसोर्ट की योजना अपने पिता को बताई.
“तो अब हमें ये निर्णय लेना है कि हम उन्हें अपने साथ ले जायेंगे या नहीं?”
“अगर बात इतनी आगे बढ़ा ही चुके हो तो न कहने का प्रश्न ही कहाँ बचता है.” विक्रम ने श्रेया की ओर देखकर कहा.
“पापा.” श्रेया कुछ बोलती उसके पहले ही विक्रम ने उसे रोक दिया, “क्या बात यहीं तक सीमित है या कुछ और भी है.”
“हमने मधुजी को उनके बारे में जाँच करने के लिए निवेदन किया है.”
“तेरी माँ का… कभी कुछ पूछ भी लिया करो.”
“सॉरी, पापा.” मोहन और श्रेया ने कहा. इस पूरे वार्तालाप में महक और मेहुल मौन ही थे.
“सुनिए.” स्मिता ने कहा.
“मुझे इसमें कोई विशेष समस्या नहीं लग रही है. आप क्यों इतना चिंतित हो रहे हैं?”
“अगर अंजलि ने श्रेया से झूठ कहा हो तो?”
“आप श्रेया की बुद्धिमता पर शंका कर रहे हैं. और अंजलि कभी इस घटना को स्वीकार नहीं करती.”
“ओके, तो क्या चाहते हो?”
“रिसोर्ट बुक कर दो. कितने कमरे चाहिए पड़ेंगे?” स्मिता ने अब बागडोर अपने हाथ में ले ली.
“छह हम और वहां से सात. तेरह लोग.”
“किसी को जोड़ लो, मुझे ये अंक अच्छा नहीं लगता.”
“मम्मी को ले लो!” श्रेया ने तुरंत अपना सुझाव दिया.
“अविरल मानेगा तीन दिन के लिए?”
“ओह, उन्हें मनाया जा सकता है. या स्नेहा को ले लेते हैं.”
“हाँ स्नेहा ही ठीक रहेगी.”
इसके बाद विक्रम ने रिसोर्ट के एक तल पर चार बड़े कमरे बुक कर दिए. उसी तल पर बने एक समारोह कक्ष को भी बुक कर दिया. लोकेश जो मधुजी का पुत्र और रिसोर्ट का स्वामी था उसने विक्रम को उत्तम सेवा का आश्वासन दिया. बाद में जब लोकेश ने अपनी माँ मधुजी को बताया तो उन्होंने लोकेश से अपनी ओर से कुछ अन्य निवेदन भी किये. लोकेश ने बिना कारण जाने उन्हें स्वीकार किया. मना करता भी तो कैसे? मधुजी उसे अपनी गांड से जो समझा रही थीं.
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मेहुल दुविधा में था. परसों उसका महक के साथ का समय था, फिर अगले दिन दिंची क्लब में और फिर उसके अगले दिन स्नेहा के साथ. और अब ये नया बखेड़ा उनके पड़ोसियों के साथ का. वैसे अंजलि मस्त थी और उसे चोदने का विचार उसके मन में कई बार आता था, जब जब वो मिलती थी, जो कम ही होता था. उसकी माँ वर्षा की बात कुछ और ही थी. पका हुआ फल थी जिसकी जवानी अब तक ढली नहीं थी, कुछ उसकी माँ के समान. और उसे इस आयु की स्त्रियों को चोदने में अधिक आनंद आता था. उसे सीखने वाली जो लगभग इसी आयु की जो थीं.
वो महक या स्नेहा के साथ बनी योजना को बदलना चाहता था, विशेषकर महक क्योंकि वो किसी भी कारण से क्लब में जाकर विफल नहीं होना चाहता था. पर उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो करे भी तो क्या?
पर इसका समाधान स्वयं ही हो गया. राणा परिवार ने महक को शॉपिंग के लिए बुलाया जिस दिन उसका महक से समय तय हुआ था. महक मेहुल की ओर देखकर मना करने ही वाली थी कि मेहुल ने उसे रोका और जाने के लिए सहमति देने का संकेत किया. फोन रखकर महक मेहुल की और मुड़ी.
“भैया?”
“मैं कहीं भगा नहीं जा रहा हूँ, पर जिस घर में तुझे जाना है वहाँ अगर अभी से टाल मटोल करेगी तो नकारात्मक व्यवहार माना जा सकता है. मेरी मान, मन लगाकर शॉपिंग करना और उन सबको अपने निर्मल व्यवहार से जीत लेना. फिर मैं तो यहीं हूँ.”
महक मेहुल के सीने से लग गई. उसकी आँखों में आंसू थे.
“भैया, आप संसार के सबसे अच्छे भाई हो!”
मेहुल ने इधर उधर देखा, स्मिता और श्रेया उन्हें देखकर भावुक हो रहे थे.
“क्या देख रहे हो भैया?”
“मैं देख रहा था कि दादा (मोहन) का नंबर मैंने कैसे काट दिया.”
महक हंसने लगी.
“ओके, भैया, आप दोनों वर्ल्ड के बेस्ट भाई हो. अब ठीक.”
“हम्म वर्ल्ड की बेस्ट बहन जब बोल रही है तो मान लेता हूँ. क्यों मम्मी और भाभी?”
“बिलकुल सही. और हमारा परिवार वर्ल्ड का बेस्ट परिवार.”
स्मिता और श्रेया ने आगे बढ़कर उन दोनों को बांध लिया और चारों एक दूसरे से लिपट गए.
मेहुल की एक समस्या हल हो गई थी. उसने भाभी से कहा कि स्नेहा को और दो दिन आगे बढ़ा दो.
“ओह हो हो, मेरे बच्चे का साथ पाने के लिए अब अपॉइंटमेंट लेना पड़ रहा है.”
“भाभी, आप भी!” मेहुल शर्माते हुए बोला।
“चल मैं उसे कहे देती हूँ.” श्रेया ने कहा और फिर सब अपने कार्य में लग गए.
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दिंची क्लब में मेहुल:
मेहुल निर्धारित दिन और समय पर सचिन द्वारा दिए पते पर पहुंच गया. घर से कुछ दूर था, नगर की मुख्य सीमा से बाहर. अपनी गाड़ी को खड़ा करने के बाद वो अंदर गया जहाँ एक सुंदर मध्यम आयु की स्त्री बैठी हुई कुछ पढ़ रही थी. मेहुल को देखकर वो मुस्कुराई और उसका स्वागत करने के बाद उसके आने का उद्देश्य पूछा. मेहुल ने उसे बताया तो उसने मेहुल से उसका पहचान पत्र माँगा. मेहुल ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिया जिसकी उस महिला, जिसका नाम नूतन लिखा हुआ था, ने कॉपी बनाई और मेहुल को लौटा दिया.
उसी समय वहाँ एक और आगंतुक का पदापर्ण हुआ. एक पचास पचपन वर्ष की महिला ने आकर नूतन से बात की और अपना नाम बताया. नूतन ने उससे भी उसका पहचान पत्र लिया और फिर कॉपी बनाकर लौटा दिया. उस महिला को देखकर मेहुल का लंड टनटना गया. महिला ने जिस प्रकार से मेकअप किया था और जिस प्रकार से वो अपने आप को प्रस्तुत कर रही थी, उससे ये विदित होता था कि वो धनाढ्य परिवार की है. सचिन के द्वारा बताई हुई फ़ीस का ध्यान आते ही उसे समझ आ गया कि ये महिला भी अपनी चुदाई के लिए ही आई है.
ये कुछ सीमा तक सच था. रूचि मैडम की माँ राशि ने अपनी सहेलियों में से कुछ को चुनकर इस क्लब के विषय में बताया था. उसका अपनी बेटी के इस नए व्यवसाय में कुछ सहायता करने का उद्देश्य था. रूचि ने पार्थ से बात की और फिर कुछ चिंतन के बाद उनमें से दो महिलाओं को ही चुना गया. अगर इनमे से कोई पारित नहीं होती तो किसी और को अवसर दिया जाना था.
नूतन ने उस महिला, जिसका नाम सोनी था उसे पास के एक कमरे में बैठाया और फिर मेहुल को लेकर चल पड़ी. एक कमरे के आगे जाकर उसने उसे खोला और मेहुल को अंदर आने को कहा. कमरा बहुत अच्छा सजाया हुआ था और किसी भी पाँच सितारा होटल के कमरे को मात कर सकता था. नूतन ने मेहुल को आवश्यक निर्देश दिए. कपड़े उतारकर कहाँ रखने हैं, स्नान करने के बाद गाउन पहनना है और फिर उसके परीक्षण के लिए संचालिका की प्रतीक्षा करनी है.
मेहुल के पूछने पर नूतन ने बताया कि वे भी बीस एक मिनट में पहुंच जाएँगी. नूतन ने मेहुल को एक प्रपत्र भी दिया और उसे भरने के लिए कहा. उसमें गोपनीयता की शपथ और अन्य कुछ विवरण भरने थे. इसके बाद उसने कमरे को बंद किया और चली गई. मेहुल ने अपने कपड़े बताये अनुसार रखे और स्नान के लिए चला गया. वहाँ पर उपलब्ध गाउन को पहना, कोई अंतर्वस्त्र की आवश्यकता नहीं थी. मेहुल ने उस फॉर्म को भरा और अपने हस्ताक्षर करने के बाद उसे टेबल पर रख दिया. फिर वो सोफे पर बैठकर कमरे के दरवाजे की ओर देखते हुए अगले पड़ाव की प्रतीक्षा करने लगा.
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दिंची क्लब में सोनी:
मेहुल को छोड़कर नूतन सोनी के पास आई और उन्हें अपने साथ एक दूसरे कमरे में ले गई. सोनी भी कमरे की भव्यता से प्रभावित हुए बिना न रह सकी. नूतन ने मेहुल के ही समान सोनी को समझाया, फॉर्म भरने के लिए दिया और चली गई. सोनी ने स्नान किया और फॉर्म भरा. क्लब की फ़ीस पर अवश्य उसे कुछ शंका थी परन्तु राशि (रूचि मैडम की माँ) ने उसे समझाया था कि उसे हर पैसे की कीमत कई गुना मिलेगी. सोनी के पति एक बड़े व्यवसाई थे और महीने में कई दिन बाहर ही रहते थे. जब राशि ने उनके साथ जाना छोड़ा तो सोनी को आश्चर्य हुआ था.
कुछ दिनों पहले उसने राशि से बात की तो राशि ने बताया कि उसने अपनी अलग व्यवस्था कर ली है और अब उसकी चुदाई नियमित रूप से जवान और मोटे कड़े और बड़े लौडों से होती है. सोनी के निवेदन पर कुछ दिन पहले राशि ने उसे अपने घर बुलाया और उसे इस क्लब के बारे में बताया. यहाँ की गोपनीयता को बनाये रखने के लिए उसने मुझे हमारे मुंबई में किये गए अनाचारों के वीडियो दिखाए. अगर सोनी गोपनीयता नहीं बना पाई तो वो उन्हें सोनी के पति के पास भेजने में कोई संकोच नहीं करेगी. क्लब की फीस अधिक थी, पर राशि ने पाई पाई का मोल बताया. आज सोनी यहाँ पहली बार आई थी. राशि ने उसे ये तो समझा दिया था आज उसकी भरपूर चुदाई होगी और हर प्रकार से संतुष्ट हो कर ही लौटेगी.
अब वो उस व्यक्ति की राह देख रही थी जो उसकी परीक्षा लेने वाला था. “इतने लौड़े खाये हैं कि ये लौंडा भी मेरे तलवे चाटेगा.” ये सोचते हुए सोनी मन ही मन मुस्कुरा उठी.
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