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संजना, सुरेखा, सागरिका, समर्थ और जॉय:
बैठक का वातावरण कुछ भिन्न था. समर्थ संजना की चूत चाट रहा था और सुरेखा एवं सागरिका जॉय के लंड को चूस रही थीं. संजना आज पहली बार अपनी मम्मी को सजल के अतिरिक्त किसी के लंड को चूसते हुए देख रही थी. पर उसे जो सबसे अजीब संवेदन था वो अपने नाना के खुरदुरे हाथों को अपने शरीर पर चलने का था. नाना के हाथों का स्पर्श और उनकी उसकी चूत पर लपलपाती हुई जीभ उसे एक अन्य ही लोक में ले जा चुके थे. नाना की चूत चाटने का ढंग परिवार की स्त्रियों से बिलकुल ही अलग था. जहाँ परिवार की स्त्रियों के स्पर्श में एक कोमलता थी, वहीं समर्थ के स्पर्श में कुछ कठोरता सी थी.
समर्थ संजना के रस की गंध और स्वाद में खो चुका था. जिस प्रकार वो संजना की चूत में अपनी जीभ डाल डाल कर उसके रस को चाट रहा था उससे ये सिद्ध होता था कि उसे ये अमृत के समान ऊर्जावान लग रहा था. और संजना केवल इन विचारों में गम थी कि कब उसकी सील टूटेगी और वो भी अन्य सभी के समान चुदाई का आनंद ले पायेगी. उसके शरीर इस कल्पना से ही काँप उठा. समर्थ बिना रुके उसकी चूत में अपने मुंह लगाए हुए चाटता रहा.
जॉय के लंड को चूस कर सुरेखा और सागरिका ने बिलकुल अच्छे से खड़ा और गीला कर दिया था. अब प्रश्न ये था कि आगे क्या करना है.
“मौसी जी, आप पहले अपनी चुदाई करवा लें, आप दोनों कभी मिले नहीं हो न.” सागरिका ने सुरेखा से कहा तो सुरेखा को सागरिका कि इस भावना पर बहुत अपनत्व आया.
“ऐसा कुछ नहीं है, मैं बाद में भी….”
“नहीं, मौसी, पहले आप.”
ये कहकर उसने सुरेखा को सोफे पर लिटा दिया और अपने पिता से कहा कि वे अब मौसी की चुदाई करें. जॉय सुरेखा की चूत पर लंड लगाकर अंदर करने लगा. उधर सागरिका ने देखा कि समर्थ का लंड भी खड़ा है, पर उसका कुछ होना नहीं है क्योंकि संजना की तो चुदाई होने नहीं थी. उसने समर्थ के नीचे जाकर उसके लंड को अपने मुंह में लिया और चूसने लगी. समर्थ ने अपना आसन बदल कर दोनों के लिए कुछ आसानी कर दी, पर उसका मुंह संजना की चूत से हटा नहीं.
सागरिका समर्थ का लंड चूस रही थी जो संजना की चूत चाट रहा था, जॉय ने सुरेखा की चुदाई में अपना ध्यान लगाया हुआ था और बैठक में एक बड़ी शांतिमय ढंग से सब कुछ हो रहा था. जॉय के पूछने पर सुरेखा ने कुछ तेज चुदाई के लिए कहा, पर अधिक नहीं. तो जॉय ने एक अच्छी लय में मद्धम गति से सुरेखा की चुदाई करना आरम्भ कर दिया।
********
सुप्रिया और सजल:
“ओह, मौसी!” सजल के मुंह से निकला. “ओह, मौसी.”
सुप्रिया बिना विश्राम के सजल के लंड पर अपनी जीभ और होंठों का जादू बिखेरती रही. वैसे अब तक सजल तीन स्त्रियों से लंड चुसवा चूका था, पर जो सुप्रिया का ढंग था उसने उसे दीवाना कर दिया था.
“मम्मी ने कहा था कि आप सबसे अच्छी हो और मुझे सिखाओगी भी, तब मैंने सोचा था कि वो यूँ ही बोल रही है, पर आप सच में विलक्षण हो, मौसी.”
“तेरी माँ से अच्छी?” सुप्रिया ने फिर उसे छेड़ा. आदमी सामान्य परिस्थिति में जो उत्तर देता है वो लंड किसी स्त्री के मुंह में होने पर नहीं देता. पर सजल अभी भी चौकन्ना था.
“इस मामले में तो आप उनसे आगे हो.”
“हम्म्म, स्मार्ट बॉय.” सुप्रिया ने उसके लंड पर थूका और फिर अपने मुंह में लेकर चूसने लगी.
सजल का लंड अब तैयार था, और सुप्रिया अभी उससे चूत नहीं चटवाने चाहती थी क्योंकि उसमे अभी भी वीर्य के अवशेष सम्भव थे. इसीलिए उसने सजल से कहा कि वो उसकी चूत को केवल ऊपर से चाटे और चोदने के लिए गीला भर कर दे. सजल ने उसकी इस बात को समझा और उसकी चूत को ऊपर से चाटा और उँगलियों से चूत के अंदर कुछ देर तक हलचल की. अब समय आ गया था मौसी को चोदने का. सजल की तो जैसे आज लॉटरी लगी हुई थी. शोनाली, सगारिका और अब सुप्रिया, एक से बढ़कर एक सुंदर और चुड़क्कड़ परिवार की महिलाओं का जो उसे साथ मिल रहा था.
सुप्रिया ने उसे पूछा कि ऊपर रहना चाहता है या नीचे? सजल को शोनाली के साथ चुदाई में अलग आनंद आया था सो उसने फिर वही आसन के लिए कहा. सुप्रिया ने उसे लेटने के लिए कहा और उसके लेटते ही एक बार फिर उसेक लंड को मुंह में लेकर चाटा और थूक से गीला करते हुए उसके दोनों ओर पांव किया और उसके लंड पर बैठ गयी. सजल तो जैसे स्वर्ग में चला गया हो. सुप्रिया ने इतनी जल्दी उसके लंड को अंदर लिया की पलभर में ही सजल का लंड उसकी बच्चेदानी से जा टकराया.
“लंड मस्त है तेरा. अपने भाइयों को टक्कर देता है और नाना को भी. बहुत मस्त।” सुप्रिया फिर झुकी और उसने अपने मम्मे सजल के वक्ष से सटाये और उसके होंठ चूमते हुए अपने कूल्हे चलने लगी. ये ऐसा आसन है जिसमे शरीर का पूर्ण व्यायाम हो जाता है, और सुप्रिया की शरीर की लचक ही थी जो इसे सम्भव बना रही थी. हल्के धक्कों के साथ सुप्रिया सजल के लंड पर उछलती रही. पर ये आसन आसान बिलकुल नहीं था और इसी कारण उसने अपने मम्मे सजल की छाती से हटाए पर होंठ अपनी वश में रखे. आसन बदलने से सुप्रिया अपनी गति बढ़ाने में भी सफल हो गयी.
सजल ने अपने सामने झूलते हुए सुघड़ मम्मों को देखा तो उससे रहा नहीं गया और उसने अपने हाथों से उन्हें दबोच लिया और निचोड़ने लगा. सुप्रिया तो जैसे पागल ही हो गयी. उसने अपने आप को सीधा किया और तेज गति से उछलने लगी. सजल ने उसके दूधिया मम्मों को दबाना और निचोड़ना बंद नहीं किया. सुप्रिया के मुंह से अब आनंद भरी सिसकारियां निकल रही थीं. फिर उसने अपने दोनों हाथ सजल के दो ओर किया और अपनी गति और भी तीव्र कर दी. सहारा मिल जाने से उसे अब उछल कूद में कोई भी कठिनाई नहीं हो रही थी. सुप्रिया अचानक ही रुक गयी और उसका शरीर एक बिन जल की मछली के समान फड़कने लगा.
सजल को तो समझ ही नहीं पड़ा कि हुआ क्या। पर तभी सुप्रिया जोर से चीखी और धम्म से सजल की छाती पर गिर पड़ी. सजल अब घबराने लगा कि मौसी को कुछ हुआ तो नहीं. वो क्या करे इस बारे में सोच ही रहा था की सुप्रिया कुनमुनाई और फिर उसकी छाती से लग गयी. उसने धीरे से अपने चेहरे को ऊपर किया और सजल को देखा.
“तूने तो कमाल कर दिया, बेटा। मुझे इतनी जल्दी झड़ा दिया. पर तेरा नहीं हुआ न?”
सजल ने नकारा तो सुप्रिया बोली, कुछ देर रुक. मुझे साँस लेने दे.” पर वो न सजल के सीने से उठी न ही उसके लंड को अपनी चूत से निकाला। सजल का लंड उसकी चूत में अभी भी फड़फड़ा रहा था. न जाने कितनी देर तक यूँ ही स्थिति बनी रही. फिर सुप्रिया उठी, सजल के लंड को बाहर किया और उसे चाटा। फिर घोड़ी का आसन ले लिया.
“मौसी की गांड मारेगा?” अपनी गांड हिलाकर सुप्रिया ने सजल को निमंत्रण दिया.
“हाँ, हाँ, हाँ.” सजल एक ही बार में कह गया.
“तो चढ़ जा पीछे से. और अच्छे से मारना। तेज तेज, अंदर तक. कर लेगा?”
“हाँ हाँ, अभी भाभी की ऐसे ही मारी थी.” सजल ने गर्व से कहा.
“तो चढ़ जा मेरे घोड़े.”
सजल के तो भाग्य ही खुल गए. आज दो दो महिलाओं की गांड मरने का सौभाग्य जो मिल रहा था. पर निखिल ने जो उसे सिखाया था सागरिका की गांड मारने के समय अब सजल उनकी माँ के ही ऊपर प्रयोग करने जा रहा था. उसने सुप्रिया की ऊँची उठी हुई गांड को देखा और अपने लंड को पकड़ कर उसके मुहाने रखा.
“डर मत, घुसा दे. डरेगा तो आगे क्या करेगा?” सुप्रिया ने उसे समझाया.
सजल ने लंड के टोपे को अंदर धकेला और उसके अंदर जाने के बाद एक लम्बा धक्का लगाया जिससे उसके लंड ने पूरी दूरी तय कर ली.
“शाबास! अब मार मेरी गांड!!”
सजल अब एक स्वचालित मशीन समान सुप्रिया की गांड मारने लगा. भाभी की गांड कुछ अधिक कसी थी और उसके साथ ही एक और लंड उनकी चूत में होने से बहुत ही अधिक तंग थी. पर मौसी की गांड खुली हुई थी और उसे दोनों के बीच का अंतर समझ आ रहा था. दोनों का अलग सुख था. मौसी की गांड में लंड आसानी से चल रहा था पर गर्मी अधिक थी. और उस गर्मी में उसे अपना लंड भी गर्माते हुए अनुभव हो रहा था. और मौसी की गांड की एक खूबी थी. सुप्रिया इतनी बार गांड मरवा चुकी थी कि वो गांड मरवाते समय अपनी गांड की मांसपेशियों को इस प्रकार से संकुचित करती थी कि लंड पर अतिरिक्त तनाव आता था.
“अरे रे!” सुप्रिया अचानक से बोली.
“क्या हुआ मौसी?”
“सुमति के लिए कैसे रोकेंगे मेरी गांड में तेरा पानी?” सुप्रिया ने दुविधा से पूछा.
“आप गांड ऊपर किये रखना, मैं कुछ लेकर इसे बंद कर दूंगा. अभी आप टेंशन मत लो.”
“ठीक है, तो चलने दे.”
सजल की आँखें अब कमरे में घूम रही थीं और उसे उपयुक्त वास्तु दिखाई दे गयी. एक लम्बी मोटी मोमबत्ती टेबल पर रखी थी. मोटी यानि मोटी, और उसके अगले उपयोग के बारे में सोचते हुए सजल ने अपने धक्कों की गति और गहराई बढ़ा दी.
सजल ने कोई दस से पंद्रह मिनट तक अपनी मौसी की गांड को ठोका और सुप्रिया ने भी पूरा आनंद लेकर गांड मरवाई. फिर अंत में सजल ने गांड में अपना पानी छोड़ ही दिया. लंड से पूरा रस निकलने के पश्चात् उसने सुप्रिया से उसी आसन में बने रहने का आग्रह किया. अपने लंड को निकालकर वो टेबल के पास गए और मोमबत्ती लेकर लौटा. सुप्रिया ने देखा तो हंस पड़ी.
“बंद कर मेरी गांड और चल सुमति के पास मेरे साथ. मोमबत्ती से तूने मुझे अपनी जवानी याद करा दी.”
सजल ने बहुत संभाल कर मोमबत्ती को सुप्रिया की गांड में डाला और फिर उसे सहारा देकर खड़ा किया. फिर दोनों सुमति के कमरे की ओर कल पड़े. कपड़े पहनने की दोनों ने इस बार कोई आवश्यकता नहीं समझी.
क्रमशः
बैठक का वातावरण कुछ भिन्न था. समर्थ संजना की चूत चाट रहा था और सुरेखा एवं सागरिका जॉय के लंड को चूस रही थीं. संजना आज पहली बार अपनी मम्मी को सजल के अतिरिक्त किसी के लंड को चूसते हुए देख रही थी. पर उसे जो सबसे अजीब संवेदन था वो अपने नाना के खुरदुरे हाथों को अपने शरीर पर चलने का था. नाना के हाथों का स्पर्श और उनकी उसकी चूत पर लपलपाती हुई जीभ उसे एक अन्य ही लोक में ले जा चुके थे. नाना की चूत चाटने का ढंग परिवार की स्त्रियों से बिलकुल ही अलग था. जहाँ परिवार की स्त्रियों के स्पर्श में एक कोमलता थी, वहीं समर्थ के स्पर्श में कुछ कठोरता सी थी.
समर्थ संजना के रस की गंध और स्वाद में खो चुका था. जिस प्रकार वो संजना की चूत में अपनी जीभ डाल डाल कर उसके रस को चाट रहा था उससे ये सिद्ध होता था कि उसे ये अमृत के समान ऊर्जावान लग रहा था. और संजना केवल इन विचारों में गम थी कि कब उसकी सील टूटेगी और वो भी अन्य सभी के समान चुदाई का आनंद ले पायेगी. उसके शरीर इस कल्पना से ही काँप उठा. समर्थ बिना रुके उसकी चूत में अपने मुंह लगाए हुए चाटता रहा.
जॉय के लंड को चूस कर सुरेखा और सागरिका ने बिलकुल अच्छे से खड़ा और गीला कर दिया था. अब प्रश्न ये था कि आगे क्या करना है.
“मौसी जी, आप पहले अपनी चुदाई करवा लें, आप दोनों कभी मिले नहीं हो न.” सागरिका ने सुरेखा से कहा तो सुरेखा को सागरिका कि इस भावना पर बहुत अपनत्व आया.
“ऐसा कुछ नहीं है, मैं बाद में भी….”
“नहीं, मौसी, पहले आप.”
ये कहकर उसने सुरेखा को सोफे पर लिटा दिया और अपने पिता से कहा कि वे अब मौसी की चुदाई करें. जॉय सुरेखा की चूत पर लंड लगाकर अंदर करने लगा. उधर सागरिका ने देखा कि समर्थ का लंड भी खड़ा है, पर उसका कुछ होना नहीं है क्योंकि संजना की तो चुदाई होने नहीं थी. उसने समर्थ के नीचे जाकर उसके लंड को अपने मुंह में लिया और चूसने लगी. समर्थ ने अपना आसन बदल कर दोनों के लिए कुछ आसानी कर दी, पर उसका मुंह संजना की चूत से हटा नहीं.
सागरिका समर्थ का लंड चूस रही थी जो संजना की चूत चाट रहा था, जॉय ने सुरेखा की चुदाई में अपना ध्यान लगाया हुआ था और बैठक में एक बड़ी शांतिमय ढंग से सब कुछ हो रहा था. जॉय के पूछने पर सुरेखा ने कुछ तेज चुदाई के लिए कहा, पर अधिक नहीं. तो जॉय ने एक अच्छी लय में मद्धम गति से सुरेखा की चुदाई करना आरम्भ कर दिया।
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सुप्रिया और सजल:
“ओह, मौसी!” सजल के मुंह से निकला. “ओह, मौसी.”
सुप्रिया बिना विश्राम के सजल के लंड पर अपनी जीभ और होंठों का जादू बिखेरती रही. वैसे अब तक सजल तीन स्त्रियों से लंड चुसवा चूका था, पर जो सुप्रिया का ढंग था उसने उसे दीवाना कर दिया था.
“मम्मी ने कहा था कि आप सबसे अच्छी हो और मुझे सिखाओगी भी, तब मैंने सोचा था कि वो यूँ ही बोल रही है, पर आप सच में विलक्षण हो, मौसी.”
“तेरी माँ से अच्छी?” सुप्रिया ने फिर उसे छेड़ा. आदमी सामान्य परिस्थिति में जो उत्तर देता है वो लंड किसी स्त्री के मुंह में होने पर नहीं देता. पर सजल अभी भी चौकन्ना था.
“इस मामले में तो आप उनसे आगे हो.”
“हम्म्म, स्मार्ट बॉय.” सुप्रिया ने उसके लंड पर थूका और फिर अपने मुंह में लेकर चूसने लगी.
सजल का लंड अब तैयार था, और सुप्रिया अभी उससे चूत नहीं चटवाने चाहती थी क्योंकि उसमे अभी भी वीर्य के अवशेष सम्भव थे. इसीलिए उसने सजल से कहा कि वो उसकी चूत को केवल ऊपर से चाटे और चोदने के लिए गीला भर कर दे. सजल ने उसकी इस बात को समझा और उसकी चूत को ऊपर से चाटा और उँगलियों से चूत के अंदर कुछ देर तक हलचल की. अब समय आ गया था मौसी को चोदने का. सजल की तो जैसे आज लॉटरी लगी हुई थी. शोनाली, सगारिका और अब सुप्रिया, एक से बढ़कर एक सुंदर और चुड़क्कड़ परिवार की महिलाओं का जो उसे साथ मिल रहा था.
सुप्रिया ने उसे पूछा कि ऊपर रहना चाहता है या नीचे? सजल को शोनाली के साथ चुदाई में अलग आनंद आया था सो उसने फिर वही आसन के लिए कहा. सुप्रिया ने उसे लेटने के लिए कहा और उसके लेटते ही एक बार फिर उसेक लंड को मुंह में लेकर चाटा और थूक से गीला करते हुए उसके दोनों ओर पांव किया और उसके लंड पर बैठ गयी. सजल तो जैसे स्वर्ग में चला गया हो. सुप्रिया ने इतनी जल्दी उसके लंड को अंदर लिया की पलभर में ही सजल का लंड उसकी बच्चेदानी से जा टकराया.
“लंड मस्त है तेरा. अपने भाइयों को टक्कर देता है और नाना को भी. बहुत मस्त।” सुप्रिया फिर झुकी और उसने अपने मम्मे सजल के वक्ष से सटाये और उसके होंठ चूमते हुए अपने कूल्हे चलने लगी. ये ऐसा आसन है जिसमे शरीर का पूर्ण व्यायाम हो जाता है, और सुप्रिया की शरीर की लचक ही थी जो इसे सम्भव बना रही थी. हल्के धक्कों के साथ सुप्रिया सजल के लंड पर उछलती रही. पर ये आसन आसान बिलकुल नहीं था और इसी कारण उसने अपने मम्मे सजल की छाती से हटाए पर होंठ अपनी वश में रखे. आसन बदलने से सुप्रिया अपनी गति बढ़ाने में भी सफल हो गयी.
सजल ने अपने सामने झूलते हुए सुघड़ मम्मों को देखा तो उससे रहा नहीं गया और उसने अपने हाथों से उन्हें दबोच लिया और निचोड़ने लगा. सुप्रिया तो जैसे पागल ही हो गयी. उसने अपने आप को सीधा किया और तेज गति से उछलने लगी. सजल ने उसके दूधिया मम्मों को दबाना और निचोड़ना बंद नहीं किया. सुप्रिया के मुंह से अब आनंद भरी सिसकारियां निकल रही थीं. फिर उसने अपने दोनों हाथ सजल के दो ओर किया और अपनी गति और भी तीव्र कर दी. सहारा मिल जाने से उसे अब उछल कूद में कोई भी कठिनाई नहीं हो रही थी. सुप्रिया अचानक ही रुक गयी और उसका शरीर एक बिन जल की मछली के समान फड़कने लगा.
सजल को तो समझ ही नहीं पड़ा कि हुआ क्या। पर तभी सुप्रिया जोर से चीखी और धम्म से सजल की छाती पर गिर पड़ी. सजल अब घबराने लगा कि मौसी को कुछ हुआ तो नहीं. वो क्या करे इस बारे में सोच ही रहा था की सुप्रिया कुनमुनाई और फिर उसकी छाती से लग गयी. उसने धीरे से अपने चेहरे को ऊपर किया और सजल को देखा.
“तूने तो कमाल कर दिया, बेटा। मुझे इतनी जल्दी झड़ा दिया. पर तेरा नहीं हुआ न?”
सजल ने नकारा तो सुप्रिया बोली, कुछ देर रुक. मुझे साँस लेने दे.” पर वो न सजल के सीने से उठी न ही उसके लंड को अपनी चूत से निकाला। सजल का लंड उसकी चूत में अभी भी फड़फड़ा रहा था. न जाने कितनी देर तक यूँ ही स्थिति बनी रही. फिर सुप्रिया उठी, सजल के लंड को बाहर किया और उसे चाटा। फिर घोड़ी का आसन ले लिया.
“मौसी की गांड मारेगा?” अपनी गांड हिलाकर सुप्रिया ने सजल को निमंत्रण दिया.
“हाँ, हाँ, हाँ.” सजल एक ही बार में कह गया.
“तो चढ़ जा पीछे से. और अच्छे से मारना। तेज तेज, अंदर तक. कर लेगा?”
“हाँ हाँ, अभी भाभी की ऐसे ही मारी थी.” सजल ने गर्व से कहा.
“तो चढ़ जा मेरे घोड़े.”
सजल के तो भाग्य ही खुल गए. आज दो दो महिलाओं की गांड मरने का सौभाग्य जो मिल रहा था. पर निखिल ने जो उसे सिखाया था सागरिका की गांड मारने के समय अब सजल उनकी माँ के ही ऊपर प्रयोग करने जा रहा था. उसने सुप्रिया की ऊँची उठी हुई गांड को देखा और अपने लंड को पकड़ कर उसके मुहाने रखा.
“डर मत, घुसा दे. डरेगा तो आगे क्या करेगा?” सुप्रिया ने उसे समझाया.
सजल ने लंड के टोपे को अंदर धकेला और उसके अंदर जाने के बाद एक लम्बा धक्का लगाया जिससे उसके लंड ने पूरी दूरी तय कर ली.
“शाबास! अब मार मेरी गांड!!”
सजल अब एक स्वचालित मशीन समान सुप्रिया की गांड मारने लगा. भाभी की गांड कुछ अधिक कसी थी और उसके साथ ही एक और लंड उनकी चूत में होने से बहुत ही अधिक तंग थी. पर मौसी की गांड खुली हुई थी और उसे दोनों के बीच का अंतर समझ आ रहा था. दोनों का अलग सुख था. मौसी की गांड में लंड आसानी से चल रहा था पर गर्मी अधिक थी. और उस गर्मी में उसे अपना लंड भी गर्माते हुए अनुभव हो रहा था. और मौसी की गांड की एक खूबी थी. सुप्रिया इतनी बार गांड मरवा चुकी थी कि वो गांड मरवाते समय अपनी गांड की मांसपेशियों को इस प्रकार से संकुचित करती थी कि लंड पर अतिरिक्त तनाव आता था.
“अरे रे!” सुप्रिया अचानक से बोली.
“क्या हुआ मौसी?”
“सुमति के लिए कैसे रोकेंगे मेरी गांड में तेरा पानी?” सुप्रिया ने दुविधा से पूछा.
“आप गांड ऊपर किये रखना, मैं कुछ लेकर इसे बंद कर दूंगा. अभी आप टेंशन मत लो.”
“ठीक है, तो चलने दे.”
सजल की आँखें अब कमरे में घूम रही थीं और उसे उपयुक्त वास्तु दिखाई दे गयी. एक लम्बी मोटी मोमबत्ती टेबल पर रखी थी. मोटी यानि मोटी, और उसके अगले उपयोग के बारे में सोचते हुए सजल ने अपने धक्कों की गति और गहराई बढ़ा दी.
सजल ने कोई दस से पंद्रह मिनट तक अपनी मौसी की गांड को ठोका और सुप्रिया ने भी पूरा आनंद लेकर गांड मरवाई. फिर अंत में सजल ने गांड में अपना पानी छोड़ ही दिया. लंड से पूरा रस निकलने के पश्चात् उसने सुप्रिया से उसी आसन में बने रहने का आग्रह किया. अपने लंड को निकालकर वो टेबल के पास गए और मोमबत्ती लेकर लौटा. सुप्रिया ने देखा तो हंस पड़ी.
“बंद कर मेरी गांड और चल सुमति के पास मेरे साथ. मोमबत्ती से तूने मुझे अपनी जवानी याद करा दी.”
सजल ने बहुत संभाल कर मोमबत्ती को सुप्रिया की गांड में डाला और फिर उसे सहारा देकर खड़ा किया. फिर दोनों सुमति के कमरे की ओर कल पड़े. कपड़े पहनने की दोनों ने इस बार कोई आवश्यकता नहीं समझी.
क्रमशः