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Incest क्या ये गलत है ? (completed)

अगर हमको और माँ को तुम्हारी बनना है, तो हम दोनों को मिलकर ये करना होगा। हम तुम्हारे साथ हैं जय।
जय ने कविता को देखा, कविता को ये पूरा एहसास था कि वो क्या बोल रही है। कविता की इन बातों को सुनकर जय ने उसे गोद में उठा लिया, और बोला," तुम जैसी दीदी मिले तो हर भाई खुश रहेगा। आज तुमको हम अपनी दीदी से बीवी बनाएंगे।" जय ने उसकी मांग में भरने को सिंदूर ढूंढने लगा। पर घर में सिंदूर नहीं मिला। जय बड़ी बेसब्री से ढूंढ रहा था। कविता हंसने लगी, फिर उसको रुकने बोली। उसने ड्रेसिंग टेबल से रेड लिपस्टिक निकाली और जय को देकर बोली," ये लो, इसीसे भर दो हमारी मांग, ताकि तुम्हारी पहली सुहागन हम बने। और अपनी आंखे बंद कर ली।
जय उसके करीब आकर उसकी मांग लिपस्टिक के गाढ़े लसलसे पदार्थ से भर दी। जैसे चारों ओर सहनाइयाँ बजने लगी। बाहर अचानक से तेज बारिश शुरू हो गयी। हवाएं चलने से खिड़कियां खुल गयी। जैसे प्रकृति भी इस मनोरम दृश्य को देखना चाहती हो कि जब एक बहन अपने भाई की बीवी बनती है तो कैसा लगता है।
कविता ने फिर आंखे खोली और जय के पैरों को झुककर छुवा। जय ने उसे उठाया, तो कविता शर्म से उसकी ओर देख नहीं रही थी। जय ने उसकी ठुड्ढी पकड़के उसके चेहरे को देखा," अब तुम हमारी बीवी भी हो गयी दीदी। हमको डर लगता था कि कहीं तुम माँ के बारे में हमारे खयाल जानकर हमको छोड़ ना दो। तुम्हारी शादी भी किसी औरसे होते हम देख नहीं पाते। आज अभी से तुम बस हमारी हो।
कविता- आजसे हम आपकी पत्नी होने का गौरव तो उठाएंगे पर अपनी मांग ऐसे ही रखेंगे। हमारी असली शादी उस दिन होगी जब आप माँ को अपनी बना लेंगे, और आपकी उनकी शादी हो जाये। जब माँ और आप एक दूसरे को अपना लेंगे, तब हम अपने रिश्ते की असलियत बताकर उनकी बहू और सौतन बन जाएंगे।
जय- ठीक है, पर ये आप आप क्या लगा रखा है?
कविता- अब हम आपको आप ही बुलाएंगे। अब आप पति हो गए हैं हमारे।
जय- क्या बात है हमारी बिहारी संस्कारी दुल्हन।
तभी ममता का फोन जय के मोबाइल पर आया। जय ने मोबाइल उठाया और कविता को मोबाइल दिखाकर बोला, " देखो तुम्हारी सौतन का फोन है।"
कविता," नहीं अभी तो ये हमारी सास हैं।
ममता ने फोन पर बताया कि वो परसों सुबह पहुंच जाएगी। जय और कविता ये सुनकर खुश हुए और योजना बनाने लगे की अब कैसे ममता को जय के प्यार में गिराना है।
उस रात कविता और जय ने कसम खायी की जब तक जय ममता को चोद ना ले, वो दोनों भी चुदाई नहीं करेंगे। अगले हफ्ते जय के फाइनल ईयर के पेपर भी थे, इस वजह से भी ये इरादा किया गया। कविता फिर अलग कमरे में सोने चली गयी। और जय अपने कमरे में।
 
घर पहुँचकर जय बोला।
"हम हैं ना। तुम बेफिक्र रहो।" जय बोला " आज तुम आराम करो, खाना बाहर से मंगवा लेते हैं।" कविता को सोफे पर बैठाके बोला। जय और कविता खाना खाके बिस्तर पर लेट गए। कविता उसके बगल में ही चिपकी हुई लेटी थी। जय अपने मोबाइल पर तस्वीरें देख रहा था। उसमें उसकी माँ ममता की तस्वीर भी थी, जिसपर उसकी आंखें टिकी हुई थी। ममता का चेहरा बहुत चुदासी लग रहा था। जय ने उसको देखकर कहा- क्या दिखती है, हमारी माँ, तुम बिल्कुल उसकी परछाई हो, दीदी।
कविता- ये हमारी तारीफ है या माँ की ?
जय- तुम दोनों की।
कविता आँखे खोली, और जय की आंखों में कुछ देर देखकर बोली," जय, हम तुमसे कुछ पूछें, बुरा तो नहीं मानोगे ना ?
जय- बिल्कुल नहीं, पूछो ना।
कविता- इस समय जो हम तुम्हारी आँखों मे देख रहे हैं, वो एक बेटे का प्यार नहीं, बल्कि किसी आशिक़ का अपनी माशूका के लिए होता है। क्या ये सच है, कि तुम माँ को बेटे की तरह नहीं बल्कि औरत के तरह चाहते हो? क्या .....
जय- इसके आगे सवाल मत करना, दीदी। तुम शायद सुन नहीं पाओगी। जय ने कविता के होंठों पर उंगली रखते हुए कहा।
कविता- हम अब सब सुन सकते हैं, हमको कोई अचम्भा या आश्चर्य नहीं होगा अगर तुम कह दो की तुम माँ को चाहते हो ! क्योंकि तुम कहो ना कहो तुम्हारी आंखे सब बता रही हैं।
जय कविता को खुद से अलग करके उठ गया और खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया, वो दरअसल कविता से कहने में झिझक रहा था, कि कहीं कविता बुरा ना मान जाए। अभी अभी तो उनकी प्रेम कहानी शुरू हुई थी।
कविता उसके पीछे से आकर उसको बांहों में पकड़ लेती हैं, और उसके दिल की बात समझ चुकी थी। उसके पीठ पर सर रखके उसको बोलती है," जानू, हम तुमको हमेशा खुश देखना चाहते हैं, तुम खुश रहोगे तभी हमको अच्छा लगेगा। और अब तो हम तुमको अपने पर अधिकार दे चुके हैं, और तुम पर भी अगर हमारा थोड़ा सा हक़ है, तो प्लीज बता दो। दीदी ना सही बीवी समझ के बता दो।
जय- इतना आसान नहीं है ये कहना, पता नहीं तुम क्या सोचोगी। अभी अभी तुम्हारा और हमारा संबंध बना है। तीन दिन पहले तक तुम सिर्फ हमारी बहन थी, पर अब बीवी बनना चाहती हो। हाँ, तुमको हक़ है कि हमारे बारे में सब जानो, पर कोई भी औरत अपने पति/ प्रेमी के साथ दूसरी औरत बर्दाश्त नहीं करती। हाँ हम ममता को प्यार करते हैं। भले ही हम उसके बेटे हैं पर वो हमको बहुत पसंद है। माँ जब सामने होती है, तो लगता है जैसे उसको देखते रहें। इस उम्र में भी कितनी खूबसूरत है। उसको जब देखते हैं तब मन करता है कि उसको हमेशा के लिए अपना बना लें। उसके अंदर एक अजीब सा आकर्षण है, जो हमको उसकी ओर खींचता है। ममता और तुमको हम एक समान चाहते हैं। तुम दोनों ही हमारी अंदर की दबी वासना को बाहर लाती हो। बाहर की औरतें हम पर कोई खास आकर्षण नही डालती। जब घर में तुम दोनों जैसी कामुक औरतें हो तो कोई बाहर की औरतों को देखे भी क्यों।
हम दरअसल तुम दोनों को अपनाना चाहते हैं, तुम दोनों को अपनी बीवी बनाना चाहते हैं। अब चाहे तुम जो भी सोचो, पर सच ये है कि हम यही चाहते हैं, कि माँ और तुम हमेशा के लिए हमारी बनकर रहो।
जय ये सब कहके मुड़ा नहीं, उसकी हिम्मत हुई नहीं। कविता उसके सामने घूमके आई, उसकी आँखों में जय ने देखा, तो वो बोली," तुम माँ को इतना चाहते हो? ये तो हमको पता ही नही था। हमसे पहले माँ का हक़ है। तुमने तो आज, माँ बेटे, भाई बहन के रिश्ते की परिभाषा ही बदल दी। हम तुमको अपने ऊपर पूरा हक दे चुके हैं, और अब माँ पर भी एक बेटी के तौर पर छूट देते हैं। भले अंजाम जो भी हो, हम तुम्हारा भरपूर साथ देंगे। अगर हम भाई बहन के रिश्ते को नया नाम दे सकते हैं, तो माँ बेटे के बीच भी ये बीज बोया जा सकता है। आज तुमने ये बात बोलकर हमको पत्नी से भी ऊंचा दर्जा दे दिया। हमारा रिश्ता इस सच्चाई की बुनियाद पर और मजबूत होगा।
 
दोनों ने एक दूसरे का मुंह देखी, और लण्ड की ओर झपटी। दोनों कुतिया की तरह, भोज खत्म होने पर जो जूठे पत्तल को बेसब्री से चाटती हैं, वैसे ही मूठ को चाटने लगी। पल भर में ही सारा मूठ चाट गयी।
दोनों ने शशि की तरफ देखा तो वो खर्राटे मारकर सो चुका था। माया के हाथ पर लगा मूठ, ममता चाट गयी, और ममता के गालों से चिपका मूठ माया चट कर गयी।
माया- दीदी ये तो सो गए अब क्या करेंगे, बुर में तो अभी आग लगनी शुरू हुई है।
ममता- तू चिंता मत कर, हम दोनों हैं ना। अभी खूब मस्ती करेंगे।
माया- अब इनसे भी नहीं हो पाता है, उम्र भी 52 हो गयी है। दारू पीने के बाद तो कुछ कर ही नहीं पाते। इन मर्दों को क्या पता, की औरतों की चुदने की प्यास उम्र के साथ बढ़ती ही जाती है। और इन लोगों का एंटीना तभी ढीला हो जाता है।
ममता- चल हम और तुम इस एंटीना को छोड़, अपने हाथों को एंटीना बनाते हैं। और खुद अपना चैनल चलाते हैं।

दोनों एक दूसरे को चुम्मा लेने लगी, बैठे बैठे ही। कब उन दोनों का चुम्मा जंगली हो गया पता ही नहीं चला। एक दूसरे को बिल्लियों की तरह नोचने लगी। एक दम जंगली बिल्लियां लग रही थी। ममता उसके ऊपर लेट गयी और माया ममता चूतड़ों पर थप्पड़ मार रही थी। दोनों ने चुम्बन जारी रखते हुए एक दूसरे की बुर में उंगलियां घुसा रखी थी, और तेजी से उंगलियां हिला रही थी। थोड़ी देर में दोनों झड़ गयी और फिर लेट गयी।
माया- ऐसा करके कब तक हम काम चलाएंगे। हमारा सेक्स जीवन खत्म हो गया है। अब इस उम्र में कौन मिलेगा हम लोगों को?
ममता- घबराओ मत जो भी होगा, ठीक ही होगा। शायद अब हमारे नसीब में कोई नहीं हैं। हमें एक दूसरे का सहारा बनना पड़ेगा। अब कौन देगा हमारा साथ, ये ही तो थे बस।
"हम हैं ना। तुम बेफिक्र रहो।"
ममता- तुमने कुछ सुना माया। माया- नहीं तो! क्यों
ममता- हमको लगा हम किसीका आवाज़ सुने।
 
शशि- तुम दोनों बहनों का नाम इतिहास में लिखा जाएगा, की दोनों एक ही मर्द के साथ चुदति हो और खुश भी रहती हो। वैसे तुम दोनों ये गाना ही क्यों चलाई।
माया- आप हमारे राजा हैं और राजा की कई रानियां होती हैं। आप की किस्मत में तो सिर्फ हम दो बहनें हैं। और ये गाना इसलिए क्योंकि आप दीदी के जीजा भी हैं और दीदी को चोदते हैं तो हमारे जीजा भी हुए। इसलिए ये वाला गाना।
ममता और माया शशि का लौड़ा एक साथ चुसने लगी। दोनों उसके लण्ड पर पहले खूब थूक लगाई और फिर उसके लण्ड को चूमने लगी। कभी माया उसके शिश्न को चूसती तो ममता लण्ड के पिछले हिस्से को। कभी ममता आंड को चूसने लगती। शशि काफी नशे में था। शराब ने तो जो नशा किया वो किया ही सामने दो शबाब भी कमाल का नशा कर रही थी। दोनों खूब मज़े से शशि का काला लौड़ा चूस रही थी।
ममता और माया बेशर्मों की तरह शशि की आंखों में देखकर हंसते हुए लण्ड चूस रही थी। दोनों लण्ड चूसने में एक दूसरे की मदद कर रही थी। जब ममता चूसने लगती, तो माया शशि का लण्ड पकड़के उसके मुंह में घुसाने लगती, और वैसा ही ममता करती, जब माया चूसती। लण्ड के दोनों साइड दोनों ने अपनी जीभ चिपका कर लण्ड को रगड़ना चालू किया। दोनों लण्ड चाटते चाटते एक दूसरे के लटके जीभ से जीभ टकराने लगी। दोनों बहनें और भी कामुक हो उठी। लण्ड को छोड़कर एक दूसरे की जीभ से जीभ जानबूझकर टकराने लगी और चार पांच बार ऐसा करके, एक दूसरे को चुम्मा लेने लगी। शशि ने ये देखकर दोनों के मुंह पर थूक दिया। दोनों बहनों ने उसकी ओर देखा और चुम्बन के दौरान ही मुस्कुराई। फिर एक दूसरे के चेहरे को चाटकर साफ कर दिया। बहुत ही कामुक दृश्य था वो। दोनों फिर लण्ड चूसने में व्यस्त हो गयी।शशि खड़ा होकर लण्ड चुसवाने का आनंद ले रहा था।
वो तीनो अपने मे मशगूल थे, इस बात से अनजान की कोई और भी उनकी हरकतों को देख रहा है।
तभी दोनों उठी और शशि को बिस्तर पर लिटा दिया। दोनों उसके दोनों तरफ लेट गयी और अपनी चुच्चियों को उसके चेहरे पर लटका दी। ममता एक हाथ से उसके सर को सहलाते हुए, अपनी चुच्ची उसके मुंह मे दे दी और दूसरी तरफ माया अपनी 36 साइज की चुच्चियों के चूचक उसके मुंह में रगड़ते हुए लण्ड को हाथों से हिला रही थी। माया की बांयी और ममता की दांयी जांघ शशिकांत के जांघों पर जमी हुई थी।
शशि दोनों की नंगी पीठ सहलाते हुए, ममता की चुचियों को पी रहा था।
ममता- देवरजी, हम दोनों बहनें आपको अच्छे से खुश कर रहीं हैं ना?
शशि ने नसीली आंखों से उसकी ओर देखकर हां में सर हिलाया।
तभी हिलाते हिलाते नशे की वजह से शशि को खुद पर काबू नहीं रहा और आआहह करते हुए उसके लण्ड से मूठ चूने लगा।
"ममता दीदी, लण्ड से मूठ निकल गया, देखो ना।" माया बोली.
 
शशि- ठीक है मिस कॉल देते हैं। उसने मिस कॉल दिया तो माया चुपके से कोई 5 मिनट बाद कमरे में आ गयी। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। इस वक़्त वो नाइटी में थी। ममता के इशारे पर उसने पहले अपनी नाइटी उतारी अंदर उसने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी, और इसीलिए बिल्कुल नंगी हो गयी, आकर सीधा शशि के पैरों में गिरी। माया माफी मांग रही थी।
शशि- उठो माया, हमारे पास आओ।
माया- पहले हमको माफ कीजिये तब।" सुबकते हुए बोली। माया जो कि दिन में स्कूल टीचर होती है, जिसको सब माया मैडम कहके बुलाते हैं। इस वक़्त किसी भिखारी की तरह भीख मांग रही थी।
शशि- अरे माफ किये आओ ना। तुम हमारी धर्मपत्नी हो, हमने गलती की थी, तुमको मारके।
माया उठकर उसकी दूसरी जांघ पर बैठ गयी, और उसके गाल सहलाते हुए बोली- आप कभी गलत नहीं हो सकते। आप हमसे माफी क्यों मांग रहे हैं।
दोनों बहनें, शशि की जांघ पर नंगी बैठी थी। शशि दोनों को कमर से पकड़ रखा था।
माया- ये लीजिये, चखना खाइये। आप माफी मांगेंगे ना तो हम आपको खिलाते रहेंगे।
शशि- माया, ममता तुम दोनों एक ही मर्द के साथ रहना कैसा लगता है।
ममता- जैसा आपको दो सगी बहनों को सौतन बनाने में आता है। और तीनों ज़ोर से हँसे।
शशि- तो तुम दोनों क्या करने वाली हो ?
माया और ममता दोनों एक साथ बोली- हम दोनों आपको खुश करेंगे।
फिर दोनों ममता और माया ने गोद से उताड़ गयी। ममता ने एक बेहद गंदा भोजपुरी गाना अपने मोबाइल पर लगा दिया, जिसके बोल थे," बुरिया करे लस लस ऐ जीजा"। फिर दोनों बहनों ने अपने बचपन मे सीखा हुआ नृत्य करने लगी। दोनों बिल्कुल नंगी होने की वजह से चुचियाँ और चूतड़ हिल रहे थे। लगभग दोनों जुड़वा लग रही थी। दोनों की ऊंचाई, बदन का डील डॉल एक सा ही था। दोनों बहुत ही गंदी हरकत कर रही थी, नाचने के क्रम में। इस वक़्त दोनों किसी रंडियों से कम नही लग रही थी। दोनों के बाल खुले हुए थे। माया के माथे में सिंदूर था, बाल काले घने थे, जिस वजह से मांग में लगा सिंदूर बहुत सेक्सी लग रहा था। वो गले में सोने का मंगलसूत्र काली मोतियों में पिरोए धागे से गूँथी हुई पहने थी, पैरों में चांदी के पायल सज रही थी। कानों में सोने के छोटे आकार के टॉप थे। हाथों में केवल चार चार कांच की चूड़ियाँ थी। पैर की उंगलियों में चांदी की ही बिछिया पहनी थी। एक शादी शुदा औरत का पूर्ण नग्न अवतार लग रही थी। गाँव मे रहने के बावजूद वो खुद को बहुत मेन्टेन रखती थी। उम्र की वजह से अपनी बहन की तरह उसकी कमर, जांघों, बाहों पर चर्बी जमा हो गयी थी। अपने पेट को उसने निकलने नहीं दिया था, पर चिकने और भारी चूतड़ काफी बाहर आ चुके थे। जाँघे बिल्कुल गोरी, बाल ना होने की वजह से एक दम मुलायम और चिकनी थी। उसकी चुच्चियाँ थोड़ी झूल गयी थी, पर अभी भी काफी तनी थी। पर इस उम्र में औरत इसकी वजह से और खूबसूरत हो जाती है। दोनों का चेहरा तो वैसे ही बहुत खूबसूरत था। माया की गाँड़ और चुचियाँ सब ममता के तरह ज़ेरॉक्स थे। वही आकर वही साइज। शशि उन दोनों के नाच में मस्त होकर 5 6 पेग पी गया। फिर वो भी उठकर आ गया उनके बीच में। दोनों बहनों ने मिलकर सबसे पहले उसका पजामा उतारा फिर उसका कुर्ता। उसके गंजी और जांघिये समेत सारे कपड़े उतार दिए और उसको नंगा कर दिया। ममता और माया दोनों घुटने पर बैठ गयी।
 
ममता के घर लौटने पर
कविता ने ममता के पैर छुए, पर इस बार वो बेटी बनके नहीं, खुद को ममता की बहु समझ रही थी। ममता ने कविता को अपने सीने से लगा लिया। जय ममता के बैग उठाके रूम में रख आया। कविता और ममता दोनों सोफे पर जाके बैठ गयी।
कविता अपनी माँ के पैर दबा रही थी। फिर जय ममता के लिए पानी लेके आया। ममता उससे गिलास लेकर पूरा पानी पी गयी। कविता ने जय के करोड़पति बनने की सारी बात ममता को बताई। ममता सब जानते हुए अनजान बनते हुए कहा," अच्छा, लगता है वो केस हमलोग जीत गए। जय तुम्हारा इस बार अच्छा जन्मदिन रहा, क्यों? तुम्हारे बाबूजी ने इस विरासत के साथ तुम पर ज़िम्मेदारी भी छोड़ी है। अब तुम इस घर के मालिक बन गए हो। तुम्हें अब अपने पिता की जगह लेनी है। अपनी बहन की शादी करनी है। हम जानते हैं कि तुम अभी इन सब बातों के लिए काफी छोटे हो, पर ये सब चीज तुमको अभी से सीखनी है। तुम एक महान बाप के बेटे हो, वो जहां भी हैं तुम्हारे साथ साथ हम सबपर दया दृष्टि बनाये हुए हैं। अब उनका आशीर्वाद लेके तुम एक जिम्मेदार पुरुष बनो। अब तुम्हारा निर्णय सिर्फ तुम्हारे लिए नहीं, बल्कि हम सबको ध्यान में रखके करोगे। तुम अब इस घर के सारे फैसले लोगे। तुम एक अच्छे आदमी बनोगे हमको तुम्हारी काबिलयत पर पूरा भरोसा है, और तुमको आशीर्वाद देते हैं। इधर आओ हमारे पास।"
जय ममता के करीब गया और ममता ने उसे अपने सीने से लगा लिया। जय ममता से पूरी तरह चिपक गया। और उसकी चुच्चियों में अपना चेहरा समा दिया।उसके होंठ ममता के चुचियों के ऊपरी हिस्से से टकड़ा रहे थे। वैसे तो वो अलग नहीं होना चाहता था, पर ममता ने उसके माथे पर चुम्मा लेके उसको खुद से अलग किया। जय लेकिन फिर से ममता को बाहों में भर लिया। ममता ने सोचा कि वो भावुक हो रहा है, पर शायद उसे ये पता नही था कि जय उसे माँ की तरह नहीं एक औरत की तरह गले लगा रहा था। ममता," अरे जय हमारा बच्चा,आजा।" बोलके उसके माथे को सहला रही थी। जय ने ममता के कंधे पर सर रखके, कविता को आंख मारी। कविता उसको देखकर मुस्कुराई और, थम्प्स अप दिखाया। अगले एक हफ्ते जय की परीक्षा थी। तो जय ने जमकर पढ़ाई की, पर पढ़ाई से ज्यादा उसका ध्यान अपनी माँ बहन के मस्त बदन पर ज्यादा था। कविता को भी बिना लण्ड के शुरू में रहना मुश्किल हो रहा था। उसकी बुर भी जब तब जय के लण्ड के लिए पनियाती रहती थी। पर उसने जो कसम उठायी थी, उसे इमानदारी से निभा रही थी।
इस बार जय उतना ढंग से नहीं पढ़ पाया। फिर भी उसने लगभग 76 प्रतिशत के बराबर अंक पाने का अनुमान लगाया, जो कि तीनों वर्षों का औसत निकालने पर 82.5 प्रतिशत होता था। बहरहाल यहां अब उसे अंकों की नहीं बल्कि अपनी सगी माँ को चोदने की पड़ी थी। कविता भी अपनी ड्यूटी पर जा रही थी। कविता और जय एक दूसरे को मैसेंजर के जरिये, सेक्सटिंग किया करते थे। जय इस बीच उसको काम पर जाने से मना करता रहा। पर कविता बोली आप जब माँ को चोद लोगे, उस दिन खुद जॉब छोड़ देंगे और फिर आपकी सेवा करेंगे। ड्यूटी बंद तो होगी ही। रोज सुबह वो अपनी बुर की तस्वीर खींचकर जय को मैसेंजर पर भेजके गुड मॉर्निंग कहती थी। जय की परीक्षा खत्म हो चुकी थी, पर उसे अब अपनी माँ को पटाना था, जो अपने आप में ही एक कठिन परीक्षा थी।
 
घूमते घूमते दोनों किले के पिछले हिस्से में पहुंच गए, जहां एक जोड़ा किले से बाहर पेड़ों के करीब एक दूसरे को किस कर रहे थे। जय ने उनको देखा और फिर ममता की नज़र भी उनपर गयी। दोनों दुनिया से बेखबर किस कर रहे थे। थोड़ी ही देर में उस औरत ने अपनी साड़ी उठा ली और लड़के ने अपना लण्ड उसके बुर में घुसा दिया। ममता और जय दोनों देख रहे थे। तभी उन दोनों के हाथ कब मिल गए पता ही नही चला। जय ने ममता को अपनी ओर खींच लिया। ममता और जय दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, कि गाइड का शोर उन दोनों के कानों से टकराया। जय उधर देखा और ममता हंसते हुए चली गयी।

इस तरह वो लोग दिनभर घूमते रहे और अंत मे एक वॉटरफॉल पर गए। वहां सब लोग घूम रहे थे और कुछ लोग नहा भी रहे थे। जय और ममता घूम रहे थे, तभी ममता बोली," जय हमको पेशाब लगा है, और यहां कैसे.....
जय- अरे तुम आओ चलो हम देखते हैं। थोड़ी दूर पर झाड़ियां थी। जय ने बोला," हम यहां खड़े हैं, तुम जाके कर लो।"
ममता- कोई आ गया तो।
जय - लेट मत करो जाओ जल्दी करके आओ।
ममता डरते हुए गयी और अपनी साड़ी साया के साथ उठा ली। फिर अपनी कच्छी को उतारने लगी। उसकी कच्छी उतरते ही उसकी नंगी गाँड़ पर खूबसूरत चूतड़ साफ दिखने लगे। ममता की गाँड़ एक दम चिकनी थी। भारी भारी नितम्भ जो इस उम्र की औरतों की पहचान होती है, ममता उन्हें दिन दहाड़े नंगी कर दी थी। ममता चाहती थी कि जय उसके गाँड़ को पूरा देखे।
फिर वो सु सु करने बैठ गयी, और सीटी की आवाज़ के साथ मूतने लगी। वो ऐसे बैठ कर करीब 3 मिनट तक मूती। जब वो अपनी कच्छी ऊपर की और मुड़ी तो जय उसे एक टक देख रहा था।
जय और ममता की नज़रे टकराई, पर ना तो जय ने और नाहीं ममता ने नज़रे हटाई। ममता अपनी साड़ी ठीक की। फिर जय के पास आकर उसका हाथ पकड़ लिया, और उसके साथ किसी प्रेमिका की तरह चलने लगी।
जय और ममता वॉटरफॉल के पास आये तो, ममता ने एक फोटोग्राफर को तस्वीर खींचने को बोला। ममता और जय ने एक दूसरे से चिपककर फोटो खिंचवाए। ममता जय के बांयी ओर खड़ी थी, जय ने उसे अपनी ओर चिपका लिया था। एक तस्वीर में जय ममता के गालों पर किस कर रहा था। घूमते फिरते अंत मे शहर में शॉपिंग करने पहुंचे। वहां जय ने ममता के लिए झुमके लिए।
इस तरह उनका दिन खत्म हुआ। और वो अपने कमरे में आ गए। दोनों थके थे तो खाना रूम में ही मंगवा लिया। ममता फ्रेश होकर आयी, उसने सिर्फ नाइटी पहनी थी। उधर जय सिर्फ बॉक्सर में था। फिर ममता जय के पास आकर बैठ गयी। और दोनों टेबल पर बैठके खाना खाने लगे।
खाना खाने के बाद जय ने सोफे पर सोना चाहा, तो ममता बोली," यहां बिस्तर पर सोओ ना।
जय उसकी ओर देखा," ठीक है।
दोनों माँ बेटे बिस्तर पर सो गए। अभी लेटे ही हुए थे कि ममता ने जय से पूछा," जय तुमको कैसे पता कि वो लड़की किसी और के साथ है।
जय- माँ, ऐसी बातें छुपती थोड़े ही है। पता चल ही जाता है।
ममता- अगर वो लड़की तुम्हारे पास आ जाये तो, क्या तुम उसको अपना लोगे?
जय- उसे तो हम कभी भी अपना सकते हैं।
ममता- ये जानते हुए की वो किसी और के साथ थी।
जय- ये तो आजकल आम बात है, हर लड़का लड़की को एक साथी की जरूरत होती है।
ममता ने आगे कुछ नहीं पूछा और मुस्कुराई।
ममता- ठीक है, सो जाते हैं कल जाना भी है हमको।
जय- हां, ठीक है।
 
जय और ममता ने वही खाया। माहौल अभी भी गंभीर बना हुआ था। दोनों खाना खाके वापिस बस पर चढ़ गए। बस फिर चल दी। कुछ दूर चलने के बाद ममता ने जय की ओर देखा, उसका चेहरा बहुत उदास था, ममता को उसके चेहरे पर मायूसी और पश्चाताप उभरता महसूस हो रहा था। ममता से ये देखा नहीं गया, आखिर वो उसकी माँ थी। ममता ने उसके चेहरे को अपनी ओर घुमाया, और बोली," हम कल कुछ ज़्यादा, भला बुरा बोल दिए तुमको, तुम उदास अच्छे नहीं लगते हो, जय। तुम तो बहुत चंचल हो वैसे ही रहो।
जय- माँ इसका मतलब तुम हमको माफ कर दी।
ममता मुस्कुराके," हहम्मम्म ।
जय," माँ, तुम कितनी अच्छी हो।
ममता- माँ हूँ ना, अपने बेटे को इतना उदास कैसे देख सकती हूँ। और जो कल रात हुआ उसमें हम भी तो जिम्मेदार हैं।
जय- हमारा मन हल्का हो गया।

ममता ने अपने अक़्स की बात मानते हुए, जय को अपनी ओर से ग्रीन सिग्नल देना चाहती थी। ममता ने उससे कहा," अब तुम काफी बड़े हो गए हो। हमको तो अब कविता के साथ साथ तुम्हारी शादी के बारे में सोचना होगा।"
जय- हमको शादी नहीं करनी है माँ अभी।
ममता - क्यों नहीं ? तुम इतने जवान हो गए हो और अब तो पैसेवाले भी हो गए हो। IAS आज नहीं तो कल निकाल ही लोगे।तुम्हारे लिए तो अच्छी लड़कियां मिलेंगीं। क्या तुमको किसी और से प्यार है?
जय ने उसकी ओर देखा- हमको बात नहीं करना इस बारे में।
ममता- क्यों नहीं करना है? हमसे कैसी शर्म जय बेटा।" ममता की आवाज़ में एक दृढ़ता थी, जो जय को हिम्मत देने के लिए काफी थी।
जय ने ममता की ओर देखा," जिस लड़की को हम चाहते हैं, उसके मन की बात हम समझ नहीं पा रहे हैं।"
ममता बिल्कुल भोली बनते हुए," अच्छा तुमको कोई पसंद है। आजकल तो लड़के अपनी मर्ज़ी से शादी कर लेते हैं। गांव में होते तो जात, बिरादरी, सबका ध्यान रखना पड़ता है। तुमको लेकिन पूरी आजादी है अपनी दुल्हन चुनने के लिए। कैसी दिखती है वो?
जय- बहुत सुंदर, बिल्कुल तुम जैसी। तुम जैसी ही कद काठी है।" जय भी उसके साथ फ़्लर्ट करना शुरू कर दिया, पर इस बार उसने सोचा कि इस खेल को थोड़ा लंबा चलाएंगे। ताकि ममता को उसे मना करने की कोई वजह ना मिले।
ममता- तेरे कॉलेज में पढ़ती होगी जरूर। वो भी तुमको चाहती होगी, हमको पूरा भरोशा है।" ममता ने अपनी तरफ से ग्रीन सिग्नल देना शुरू किया, दोनों जानते थे, कि यहाँ किसी और कि नहीं ममता की ही बात हो रही है।
जय- पता नहीं, हमको लगता है, कि उसको हम पसंद नहीं है। वो हमको अपनाना नहीं चाहती है शायद।
ममता - तुम को कैसे पता, हो सकता है कि उसकी मजबूरी हो। क्या तुमने उसकी मजबूरी की वजह पूछी है। क्या पता बेचारी किस उधेड़ बुन में हो?
तुम मर्द लोग ऐसे ही होते हो, औरत के लिए ये सब कितना मुश्किल होता है तुमको क्या पता? समाज और परिवार दोनों का डर सताता है।
जय- हो सकता है कि उसका किसी और के साथ चक्कड़ हो?
ममता हड़बड़ाते हुए," क्या....... फिर संभालते हुए बोली,"हो सकता है, पर तुमको उसे अपनाना होगा अगर तुम उसको चाहते हो।

तभी बस एकाएक एक किले पर जाके रुकी। जय और ममता साथ उतरकर घूमने लगे।
 
हहम्मम्म, ठीक है पर, अब तुम उसको मत सताओ। वो बेचारा पता नही क्या करेगा। कहीं ग्लानि से भरकर आत्महत्या ना कर ले।
ममता," नहीं, हम ऐसा नहीं होने देंगे।
" तो ठीक है, उसका खयाल रखो, उसको अपनाओ वही तुम्हारी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी सच्चाई है....सच्चाई है....सच्चाई है।" आवाज़ उसके कानों में गूंजते हुए बन्द हो गयी।
क्या ये सब बातें सच हो सकती हैं, क्या एक माँ अपने बेटे के साथ यौन संबंध बना सकती है? क्यों नहीं ! कुदरत ने तो हम दोनों को औरत और मर्द बनाया था, समाज ने ही माँ बेटे का बंधन लगाया। ये सच्चाई है कि हमारे मन मे भी उसके प्रति कुछ तो है? और उसने तो साबित कर दिया आज ये करके की उसके मन में भी हमारे लिए प्यार है, नहीं तो वो हमारे साथ जबरदस्ती कर सकता था? उसकी आँखों में प्यार था और जब हम उसको झिरक दिए तो पश्चाताप भी था। वो भी हमको प्यार करता है ? क्या ये सच में गुनाह है ? ये सब सोचते हुए उसे कब नींद आ गयी, उसे पता ही नहीं चला।
सुबह जब अलार्म बजी तब जय की नींद खुली, उसने घड़ी देखी पांच बजे रहे थे। उसने आंखे मलते हुए ममता को देखा, वो भी उसी कुर्सी पर सो रही थी। कुर्सी पर बैठे बैठे झुक रही थी। जय बाथरूम गया और फ्रेश होने लगा। जब जय अंदर गया तो आवाज़ से ममता की नींद खुली।
जय थोड़ी देर में बाहर आया, वो बस टॉवल लपेटे थे। उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि ममता की ओर देखे। ममता ने उसे, देखा पर कुछ कहा नहीं। बस तौलिया लेकर, अंदर घुस गई। जय इधर तैयार हो चुका था। और अपनी माँ का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था। ममता अंदर गयी पर उसने कोई कपड़े नहीं लिए थे। उसने अपनी नाइटी धो दी थी और नहाने के बाद उसके पास पहनने को कपड़े नहीं थे। अब वो क्या करती, उसने आखिर जय को आवाज़ लगाई।
ममता- जय....जय......सुनो हम कपड़ा लाना भूल गए हैं। ज़रा हमारा साया (पेटीकोट) देना।
जय- हाँ, ठीक है।
जय ने ममता का बैग खोला तो उसके सामने ममता की ब्रा और पैंटीयां फर्श पर गिर गयी। ममता की एक मैरून रंग की कच्छी बहुत मस्त लग रही थी। वो पूरी जालीदार थी, और ममता के साइज से काफी छोटी लग रही थी। उसमें ममता के एक तिहाई से भी कम चूतड़ ढकने की क्षमता थी। जय उसकी सारी ब्रा और कच्छीयाँ निहार रहा था।

तभी ममता की आवाज़ गूँजी- जय, जल्दी दे दो। लेट हो रहा है ना।
जय जैसे घबराके बोला- लाया, एक मिनट। और उन कच्छीयों को वापिस रखके, उसके लिए उसका गुलाबी साया लेकर बाथरूम के दरवाज़े पर गया। ममता ने बाथरूम का दरवाज़ा खोला, और हाथ बढाके उसके हाथ से साया ले लिया।
कुछ ही देर में ममता साया को अपने चुच्चियों पर टिका कर बाहर निकली। साया उसकी जांघों के ऊपरी हिस्से पर खत्म हो रहा था। लगभग उसकी पूरी जांघ नंगी थी। जाँघे बिल्कुल चिकनी, गोरी चमचमाती हुई बेहद सुंदर लग रही थी। गदरायी हुई पीठ पूरी तरह नंगी थी, क्योंकि ममता के बाल आगे की तरफ लटके हुए थे। ममता चल के आयी तो उसकी गाँड़ उसकी चाल के साथ थिरक रही थी। जय तिरछी नज़रों से सब देख रहा था। ममता ने उसकी तरफ देखा, तो वो दूसरी तरफ देखने लगा, ममता ने कुछ नहीं कहा।
ममता तैयार होने लगी, उसने जय के सामने ही ब्रा पैंटी और साड़ी पहनी। जय पूरे समय उसको देखता रहा।
थोड़ी देर में दोनों बाहर निकले और सीधा जाकर टूरिस्ट बस में बैठ गए। उसमें करीब तीस लोग थे। जय और ममता साथ बैठे थे। ममता खिड़की के तरफ बैठी थी। उसने आज अपने बाल खुले रखे थे। वो दोनों शांत बैठे थे। तभी बस चल पड़ी। करीब आधे घंटे बाद वो एक ढाबे पर नास्ते के लिए रुके।
जय ने आखिर इस चुप्पी को तोड़ा, और बोला," क्या खाओगी तुम माँ?
ममता," कुछ भी मंगा लो।
जय- यहां बस सिर्फ आधे घंटे रुकेगी, इसलिए जो खाना हो खा लो? इसके बाद सीधे 2 बजे खाना मिलेगा।
ममता ने फिर कहा," पूरी सब्जी खाएंगे।
 
ममता की आंखों में अब आंसू नहीं थे, उसने सर झुकाये ही कहा, "हहम्मम्म"।
जय- क्या तुम हमको माफ करोगी?
ममता- हमको नहीं पता, हम अपने आप को भी शायद माफ नहीं कर पाए।जाओ तुम जाके सो जाओ। और दुबारा मत पूछना कुछ, चलो जाओ अब। फिलहाल हमको अकेले छोड़ दो।
जय ने उस वक़्त उसे कुछ नहीं कहा, बस जाकर सीधे सोफे पर सो गया। ममता उसके चेहरे पर अफसोस देख रही थी। पर ये वो अफसोस नहीं थी जो वो सोच रही थी, बल्कि जय को अपनी बेवकूफ़ी पर अफसोस हो रहा था। उसने सोचा, अपने ऊपर काबू रख नहीं पाए और पता नहीं आगे मौका मिलेगा की नहीं।
जय सो गया, ममता फिर भी जाग रही थी। वो अपने बेटे को देखी, उसके चेहरे को देखी कितना भोला लग रहा था वो, पर क्या वो सच में गलती कर रहा था। क्योंकि अगर वो गलती कर रहा था, तो ममता जो सपने में जय के साथ कर रही थी, वो तो पाप था। पर वो सपने में कितना हसीन लग रहा था। उसमें तो उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था। उसने अपने बेटे को तो भला बुरा कहा पर जो उसने बाथरूम में उसकी अंडरवियर के साथ मूठ मारी थी, वो तो और भी गलत था। वो खुद भी अपने बेटे के गठीले बदन को देखकर, उसपर मोहित हो चुकी थी। उसके बॉक्सर का तंबू जब बनता है तो, कितना बड़ा होता है। और आज जब उसका काला लण्ड देखी, तो कितना बड़ा था। ममता के दिमाग में उसका लण्ड बार बार आ रहा था। वो खुद भी उतनी ही गुनहगार है, जितना कि जय। लेकिन हम उसकी माँ हैं, ये कैसे हो सकता है कि एक माँ अपने बेटे के बारे में ऐसा सोचे? वो हमसे ही पैदा हुआ है, हमारे जिगड़ का टुकड़ा है, और हम उसके बारे में इतना गंदा कैसे सोच सकते हैं। उसके अंदर का शैतानी दिमाग बोला कि ममता तुम कबसे अच्छा बुरा सोच रही हो, तुम वही औरत हो जो अपनी बहन के पति और देवर के साथ चुदवाती हो? अपने अंदर की औरत को क्यों मार रही हो? तुमने इतने सालों में खाली साल में एक बार गाँव जाकर चुदवाती हो तुम चाहती तो आज तुम्हारे लिए एक मर्द का इंतज़ाम हो गया था। और उसकी आँखों में देखा नहीं तुमने कि कितना चाहता है वो तुमको। तभी ममता जैसे खुद से बोल परी, अरे नहीं हम ये कैसे कर सकते हैं, हमारा बेटा है वो और हम अपने बेटे के साथ कैसे चुदवा सकते हैं? हम इतना गिर नहीं सकते और किसीको पता चल जाएगा तो हम कहीं के नहीं रहेंगे। उसे अपने सीने का दूध पिलाये हैं हम। फिर उसके अंदर से आवाज़ आयी," तो अब उसे अपने बुर का नमकीन पानी पिलाओ। तेरा बेटा है, तो उसके साथ सपने में जो कर रही थी, वो क्या था? मत भूलो की सपने में जो तुम उसके साथ कर रही थी, वो वासना सच मे अंदर कहीं दबी पड़ी है। सपने हमारे दिमाग की वो उपज है जो हम सोचते तो हैं, पर डर से किसीको बोलते नहीं है। तुम्हारे अंदर वही डर है। उस डर को बाहर निकालो ममता। उसको देखके तो तेरा मन भी जय पर आ चुका है। उसके बदन को कितने घूर घूर कर देख रही थी, और उसके लण्ड को भी देखके तुम्हारा मन ललचाया था। अपने अंदर की प्यास को मत मारो, बहने दो खुदको स्वच्छंद नदी की तरह। और तुमको समाज का डर कब सताने लगा, खुद इतने सालों से शशिकांत से चुदवा रही हो, अगर सिर्फ बच्चे चाहिए थे तो, बच्चे होने के बाद क्यों चुदवा रही हो उसके साथ। क्योंकि तुमको लण्ड चाहिए, एक औरत को हमेशा एक मर्द की जरूरत है, और वो तुम्हारे जीवन में तीसरी बार आया है। तुम कितनी खुशनसीब हो कि, जिंदगी ने तुम्हारे लिए इतने मौके दिए, बहुतों को तो ये मिलता भी नहीं। वो इसकी तलाश में घर के बाहर मुंह मारती हैं, और उनकी बदनामी जरूर होती है। पर ज़रा सोचो अगर जय से रिश्ता कायम हो गया, तो तुम्हें घर के बाहर तो नहीं जाना पड़ेगा। तुमको घर की चार दीवारी के अंदर सब कुछ मिल जाएगा। अच्छा जय को इतना बुरा भला क्यों बोली तुम, जानती हो तुम वो कितना ग्लानि महसूस कर रहा होगा। ममता बड़बड़ाई," तो क्या उससे चुदवा लेती, माँ हूँ उसकी इतना तो हमको बोलना ही था।"
 
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