अगर हमको और माँ को तुम्हारी बनना है, तो हम दोनों को मिलकर ये करना होगा। हम तुम्हारे साथ हैं जय।
जय ने कविता को देखा, कविता को ये पूरा एहसास था कि वो क्या बोल रही है। कविता की इन बातों को सुनकर जय ने उसे गोद में उठा लिया, और बोला," तुम जैसी दीदी मिले तो हर भाई खुश रहेगा। आज तुमको हम अपनी दीदी से बीवी बनाएंगे।" जय ने उसकी मांग में भरने को सिंदूर ढूंढने लगा। पर घर में सिंदूर नहीं मिला। जय बड़ी बेसब्री से ढूंढ रहा था। कविता हंसने लगी, फिर उसको रुकने बोली। उसने ड्रेसिंग टेबल से रेड लिपस्टिक निकाली और जय को देकर बोली," ये लो, इसीसे भर दो हमारी मांग, ताकि तुम्हारी पहली सुहागन हम बने। और अपनी आंखे बंद कर ली।
जय उसके करीब आकर उसकी मांग लिपस्टिक के गाढ़े लसलसे पदार्थ से भर दी। जैसे चारों ओर सहनाइयाँ बजने लगी। बाहर अचानक से तेज बारिश शुरू हो गयी। हवाएं चलने से खिड़कियां खुल गयी। जैसे प्रकृति भी इस मनोरम दृश्य को देखना चाहती हो कि जब एक बहन अपने भाई की बीवी बनती है तो कैसा लगता है।
कविता ने फिर आंखे खोली और जय के पैरों को झुककर छुवा। जय ने उसे उठाया, तो कविता शर्म से उसकी ओर देख नहीं रही थी। जय ने उसकी ठुड्ढी पकड़के उसके चेहरे को देखा," अब तुम हमारी बीवी भी हो गयी दीदी। हमको डर लगता था कि कहीं तुम माँ के बारे में हमारे खयाल जानकर हमको छोड़ ना दो। तुम्हारी शादी भी किसी औरसे होते हम देख नहीं पाते। आज अभी से तुम बस हमारी हो।
कविता- आजसे हम आपकी पत्नी होने का गौरव तो उठाएंगे पर अपनी मांग ऐसे ही रखेंगे। हमारी असली शादी उस दिन होगी जब आप माँ को अपनी बना लेंगे, और आपकी उनकी शादी हो जाये। जब माँ और आप एक दूसरे को अपना लेंगे, तब हम अपने रिश्ते की असलियत बताकर उनकी बहू और सौतन बन जाएंगे।
जय- ठीक है, पर ये आप आप क्या लगा रखा है?
कविता- अब हम आपको आप ही बुलाएंगे। अब आप पति हो गए हैं हमारे।
जय- क्या बात है हमारी बिहारी संस्कारी दुल्हन।
तभी ममता का फोन जय के मोबाइल पर आया। जय ने मोबाइल उठाया और कविता को मोबाइल दिखाकर बोला, " देखो तुम्हारी सौतन का फोन है।"
कविता," नहीं अभी तो ये हमारी सास हैं।
ममता ने फोन पर बताया कि वो परसों सुबह पहुंच जाएगी। जय और कविता ये सुनकर खुश हुए और योजना बनाने लगे की अब कैसे ममता को जय के प्यार में गिराना है।
उस रात कविता और जय ने कसम खायी की जब तक जय ममता को चोद ना ले, वो दोनों भी चुदाई नहीं करेंगे। अगले हफ्ते जय के फाइनल ईयर के पेपर भी थे, इस वजह से भी ये इरादा किया गया। कविता फिर अलग कमरे में सोने चली गयी। और जय अपने कमरे में।
जय ने कविता को देखा, कविता को ये पूरा एहसास था कि वो क्या बोल रही है। कविता की इन बातों को सुनकर जय ने उसे गोद में उठा लिया, और बोला," तुम जैसी दीदी मिले तो हर भाई खुश रहेगा। आज तुमको हम अपनी दीदी से बीवी बनाएंगे।" जय ने उसकी मांग में भरने को सिंदूर ढूंढने लगा। पर घर में सिंदूर नहीं मिला। जय बड़ी बेसब्री से ढूंढ रहा था। कविता हंसने लगी, फिर उसको रुकने बोली। उसने ड्रेसिंग टेबल से रेड लिपस्टिक निकाली और जय को देकर बोली," ये लो, इसीसे भर दो हमारी मांग, ताकि तुम्हारी पहली सुहागन हम बने। और अपनी आंखे बंद कर ली।
जय उसके करीब आकर उसकी मांग लिपस्टिक के गाढ़े लसलसे पदार्थ से भर दी। जैसे चारों ओर सहनाइयाँ बजने लगी। बाहर अचानक से तेज बारिश शुरू हो गयी। हवाएं चलने से खिड़कियां खुल गयी। जैसे प्रकृति भी इस मनोरम दृश्य को देखना चाहती हो कि जब एक बहन अपने भाई की बीवी बनती है तो कैसा लगता है।
कविता ने फिर आंखे खोली और जय के पैरों को झुककर छुवा। जय ने उसे उठाया, तो कविता शर्म से उसकी ओर देख नहीं रही थी। जय ने उसकी ठुड्ढी पकड़के उसके चेहरे को देखा," अब तुम हमारी बीवी भी हो गयी दीदी। हमको डर लगता था कि कहीं तुम माँ के बारे में हमारे खयाल जानकर हमको छोड़ ना दो। तुम्हारी शादी भी किसी औरसे होते हम देख नहीं पाते। आज अभी से तुम बस हमारी हो।
कविता- आजसे हम आपकी पत्नी होने का गौरव तो उठाएंगे पर अपनी मांग ऐसे ही रखेंगे। हमारी असली शादी उस दिन होगी जब आप माँ को अपनी बना लेंगे, और आपकी उनकी शादी हो जाये। जब माँ और आप एक दूसरे को अपना लेंगे, तब हम अपने रिश्ते की असलियत बताकर उनकी बहू और सौतन बन जाएंगे।
जय- ठीक है, पर ये आप आप क्या लगा रखा है?
कविता- अब हम आपको आप ही बुलाएंगे। अब आप पति हो गए हैं हमारे।
जय- क्या बात है हमारी बिहारी संस्कारी दुल्हन।
तभी ममता का फोन जय के मोबाइल पर आया। जय ने मोबाइल उठाया और कविता को मोबाइल दिखाकर बोला, " देखो तुम्हारी सौतन का फोन है।"
कविता," नहीं अभी तो ये हमारी सास हैं।
ममता ने फोन पर बताया कि वो परसों सुबह पहुंच जाएगी। जय और कविता ये सुनकर खुश हुए और योजना बनाने लगे की अब कैसे ममता को जय के प्यार में गिराना है।
उस रात कविता और जय ने कसम खायी की जब तक जय ममता को चोद ना ले, वो दोनों भी चुदाई नहीं करेंगे। अगले हफ्ते जय के फाइनल ईयर के पेपर भी थे, इस वजह से भी ये इरादा किया गया। कविता फिर अलग कमरे में सोने चली गयी। और जय अपने कमरे में।