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Incest खाला जमीला

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मैंने कहा- "खाला मेरा दिल कर रहा है की मैं आपको हग करं। मुझे सकून मिलता है आपको हग करके।

खाला ने कहा "चलो कर लो हग..."

मैं आगे बढ़ा और खाला को पीछे से झप्पी डाल ली और खाला की कमर में हाथ डाल लिए और खाला को किस कर दी कान के ऊपर।

खाला ने चेहरा हिलाया और कहा- "ना करो गुदगुदी होती है यहां..."

नीचे से लण्ड अभी मैंने फास पे रखा था खाला से। मैं फिर खाला को टांग करने के लिये कान में किस की। खाला फिर हिली जिसमें से हवा की मेरा अकड़ा हुवा लण्ड खाला की गाण्ड में दब गया, जिसको खाला ने भी महसूस कर लिया था क्योंकी खाला एकदम रुक गई थी।

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update 05

जैसे ही खाला को मेरा हाई लण्ड अपने चूतरों पे महसूस हवा, खाला हिल के रह गई। मैं भी डर गया और थोड़ा पीछे हो गया।

खाला ने कहा "चला बेटा अब लगा ली ना झप्पी... अब मुझे छोड़ दो मैंने काम करने हैं."

इतने में मैं रिलैक्स हो गया। जब देखा खाला का मूड नार्मल है, तो मैं फिर आगे बढ़ा और खाला के गाल पे किस की और लण्ड को भी खाला के भारी चूतरों पर हल्का सा रगड़ दिया।

खाला हँस दी और कहा- "बाज नहीं आते तुम फिर भी..."

में भी मुश्कुरा दिया और खाला को छोड़ दिया। फिर मैंने अपना बैग उठाया और खाला को सलाम करके घर चला गया।

घर गया तो देखा बाजी नरेन और आँटी परवीन अम्मी के पास बैठी बातें कर रही हैं। बाजी नरेन ने मुझे देखा

और स्माइल की। मैं आगे बढ़ा और आँटी से सलाम किया और बाजी से भी।

अम्मी में कहा "जाओं किचन में पराठा बनाया है मैंने तुम्हारा वो खा लो निकालकर ...

बाजी न ज ने कहा- "चलो मैं तुमको खाना निकाल देती हैं... और बाजी किचेन में चली गईं।

मैंने बाजी को कहा- "में कपड़े चेंज कर आऊँ.." फिर मैं अंदर गया और जल्दी से सलवार कमीज पहनकर किचन में चला गया। वहां बाजी अंडा फ़ाई कर रही थी मेरे लिये। फिर मैं खाना खाने लगा। बाजी बाहर चली गई। थोड़ी देर बाद बाजी अंदर आई तब तक मैं खाना खा चुका था।

बाजी ने कहा- "मेरे साथ आओ, हमारे घर थोड़ा काम है.."

जब हम उनके घर पहुँचे तो देखा घर पर कोई नहीं था। मैंने बाजी से पूछा- "और सब कहां हैं?"

बाजी ने बताया- "आयशा सकीना नानी के घर हुई हैं..."

बाजी मुझे स्टोर में ले गई। वहां से एक छोटा टेबल और तख्त निकलना था। लेकिन ऊपर सामान पड़ा हवा था। बाजी ने अपना दुपट्टा उतार दिया था। अब बाजी के भारी मम्मे अच्छे से नजर आ रहे थे, और गाण्ड बगल को निकली हुई थी। बाजी की जांघों में गोस्त बहुत चढ़ा हुवा था, चलते हुये थिरकती हैं।

हम दोनों मिलकर सामान उठाने लगे। बाजी का जिश्म बार-बार मुझसे छरहा था। बाजी की जर म जांघ मुझे अपनी मोताई माथ गरम-गरम महसूस हो रही थी। फिर एक चीज उठाने लगे तो वो भारी थी। बाजी मेरे पीछे आई और हम दोनों उठाने लगे। क्योंकी बाजी की हाइट मुझसे थोड़ी सी लंबी थी। सामान उठाते हुये बाजी के मम्मे पूरा दब गये मेरी पीठ पे। ये पहली बार था जब बाजी इतना नजदीक आई मेरे। सामान उठाते हमें मेरे तो रोंगटे खड़े हो गये क्योंकी जिश्म हिल रहा था तो बाजी के मम्मे भी खूब रगड़ रहे थे मुझे मेरी पीठ पें। इससे मेरा लण्ड परा टाइट हो गया और मेरी सलवार में तंब सा बन गया था।

फिर हमने सामान हटा लिया और तख्त उठाकर बाहर निकल आए। इतने में बाजी मेरे तंबू पर नजर पड़ गई और बाजी मुश्कुराने लगी। मैं भी शर्मिंदा सा मुश्कुरा दिया।

बाजी ने कहा- "इधर क्या हुवा?" और खिलखिला के हँस पड़ी।

मैंने भी जब देखा की बाजी बुरा नहीं मान रही, तो में रिलैक्स हो गया और कहा- "बाजी में जाग गया है। अच्छा भला सा रहा था आपने जगह दिया इसको..."

बाजी ने कहा- "चला फिर में सुला भी देती हैं."

मैंने कहा- "नहीं नहीं, आप रहने दो। अब ये खुद सो जायेगा...

" ऐसी बातें करके लण्ड और हाई हो रहा था।

तख्त सहन में रख दिया और बाजी ने मेरे करीब से गुजरते हो मेरे लण्ड को एक बार पकड़कर दबा दिया। ये दृश्य एक सेकेंड से काम वक्त में हो गया। मैं तो हिल ही गया अंदर से। बाजी में भी शो नहीं किया और नार्मल हो रही। मैं फिर टायलेट गया और वहां से नार्मल होकर बाहर आया तो अपने घर की तरफ चल पड़ा।

 
ऐसे ही दिन गुजरते रहे। खाला से मस्ती और बाजी नरेंन में मस्ती चलती रही। फिर हमको गर्मियों की छुटियां हो गई 3 महीना की। मैं बहुत खुश था क्योंकी हम रिश्तेदारों के घर जाते थे मिलने और मैं वहीं रहता था।

जिस दिन छुटियां हुई, तो मैं घर आया और बैंग रखा। अम्मी से पूछा- "कब जायेंगे हम नानी के घर?"

अम्मी ने कहा "एक-दो दिन रुको फिर बताती हैं। तुम्हारे अब्बू में पोछती हैं..."

मैं खाना खाकर बढ़कर दरवाजे में खड़ा था और इधर-उधर नजर मार रहा था।

आँटी परवीन अपने घर से निकली और मेरे पास आई और कहा- "तुमने मेरे साथ बाजार तक जाना है में तुम्हारी अम्मी से पूछ आऊँ..” कहकर आँटी अंदर चली गई और थोड़ी देर बाद बाहर आ गई और कहा- "चलो चलते हैं..." 4:00 बज गये थे बाजार पहुँचते आधा घंटा लगा। बाजार में भीड़ काफी थी।

औंटी ने कहा- "मेरे साथ-साथ रहना..."

मैंने हाँ में सिर हिला दिया। मैं आँटी के साथ-साथ चल रहा था और आँटी को साइड से पकड़ा हवा था। थोड़ा आगे गये तो बाजार टांग था तो दो रेहड़ी वालों में सामान लादा हवा था और रास्ता बंद हो गया था। इतने में देखा देखी काफी भीड़ हो गई वहां। गर्मी भी लगाने लगी। भीड़ में धक्कम-पेल से मैं औंटी के पीछे हो गया। एक हाथ से आँटी को साइड से पकड़ा हवा था उनकी कमीज से। मैं पीछे से आँटी से जकड़ चुका था। जिस वजह से मेरा लण्ड खड़ा होने लगा, जो सीधा आँटी परवीन के चूतर के नीचे लगाने लगा।

 
औंटी ने कहा- "मेरे साथ-साथ रहना..."

मैंने हाँ में सिर हिला दिया। मैं आँटी के साथ-साथ चल रहा था और आँटी को साइड से पकड़ा हवा था। थोड़ा आगे गये तो बाजार टांग था तो दो रेहड़ी वालों में सामान लादा हवा था और रास्ता बंद हो गया था। इतने में देखा देखी काफी भीड़ हो गई वहां। गर्मी भी लगाने लगी। भीड़ में धक्कम-पेल से मैं औंटी के पीछे हो गया। एक हाथ से आँटी को साइड से पकड़ा हवा था उनकी कमीज से। मैं पीछे से आँटी से जकड़ चुका था। जिस वजह से मेरा लण्ड खड़ा होने लगा, जो सीधा आँटी परवीन के चूतर के नीचे लगाने लगा।

आँटी को जब महसूस हवा तो खाला ने पीछे मुड़कर देखा। मैं अपना ध्यान सीधा रखा हवा था। आँटी को भी पता था भीड़ बहुत है, मैंने जानबूझ के नहीं किया ऐसा। आँटी फिर सीधी हो गई। मुझे मजा आने लगा औंटी के नरम और भारी गाण्ड में लण्ड रगड़ने का। बार-बार हिलना पड़ रहा था। पीछे से धक्के लग रहे थे जिससे लण्ड गगड़ रहा था। जो हाथ मेरा आँटी को साइड से पकड़ा हवा था उससे मैंने आँटी की पसलियों के पास से जिम में हाथ दबाकर आँटी को पकड़ लिया।

मैंने कहा- "औंटी और कितने देर है, बहुत गर्मी लग रही है..'

आँटी ने कहा- "वो जगह बना रहे हैं गुजरने की, बस 5 मिनट और रुकना पड़ेगा.."

में अपना हाथ आँटी के पेट में ले गया चादर के नीचे से और वहां अपना हाथ दबाने लगा। आँटी ने अपना एक हाथ मेरे हाथ पे रखा और वही रोक लिया, लेकिन पीछे नहीं किया मेरा हाथ। मैं अपने पंजों पे खड़ा हवा और लण्ड को पीछे किया, और अब थोड़ा ऊपर हो गया था। अब मेरा लण्ड आँटी की गाण्ड के बीच में आ रहा था। मैंने आराम से आँटी की कमीज पीछे से साइड में की और लण्ड को आगे कर दिया, जो सीधा आँटी के चूतर के बीच में घुस गया।

आँटी का जब मेरा लण्ड वहां महसूम हुवा ता आँटी एकाएक हिली, पाछे देखा, एक नजर मारी और आराम से अपनी टांग थोड़ा खोल दी, और मेरे लण्ड को दबा लिया। मुझसे अब पंजों पे खड़ा नहीं हुवा जा रहा था थक गया था मैं। लेकिन जो मजा मिल रहा था उसके में खड़ा रह रहा था पंजा पें। आगे से आँटी में मेरा हाथ छोड़ दिया, जो मैं धीरे से उनके पेट पर घुमाने लगा। नीचे से लण्ड पे औंटी के गरम चूतर मुझे महसूस हो रहे थे। मैं लड़खड़ा गया और थोड़ा पीछे हो गया। मेरे पंजे दुख रहे थे। इतने में रास्ता खुल गया हम आगे बढ़ गये।

औंटी नार्मल थी कुछ भी शो नहीं किया उन्होंने। शापिंग करके हम बाजार में निकाल आए। शाम हो गई थी। घर दर था। आँटी ने रिक्शा कर लिया। मैं औटी के साथ जाकर बैठ गया। मैं सोने की आक्टिंग करते औंटी के साथ अपना सिर लगा दिया, और हाथ उनके मम्मों के थोड़ा नीचे रख दिया।

औंटी ने कहा- "नींद आ रही है?"

मैंने कहा- "ही आँटी जी.."

औंटी ने मुझे अपने बाज के घेरे में लिया और मुझं दबा लिया अपने साधा रिक्शा में अधेरा था। औंटी ने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया जो उनके मम्मों के पास था, और हाथ को थोड़ा ऊपर करके अपने मम्मों पे रख दिया। लेकिन अपना हाथ पीछे नहीं किया। मेरे हाथ को मसल रही थी। फिर अपना हाथ पीछे कर लिया। मैंने हाथ वहीं रखे रखा। मेरा लण्ड पूरा तन के खड़ा हो गया था। अपने हाथ को धीरे-धीरे औटी के बाहरी मम्मों पे फेरने लगा। ऊपर से आँटी के थोड़े से मम्मे नंगे थे। मेरी उंगली जब वहां टच हुई तो आँटी एक बार हिली। मैं वहां हाथ को दबा दिया। मुझे बहुत मजा आ रहा था। इतने में मेरा एरिया शुरू हो गया।

औंटी ने कहा- "उठो घर आ गया है...'

मैं सीधा हो गया, और घर पहुँचने तक नार्मल हो गया। रिक्शा से उतर के आँटी ने मुझे प्यार दिया और अपने घर चली गई, और मैं अपने घर।

***** *****

 
कड़ी_06

मैं घर गया तो अम्मी लोग खाना खा रहे थे। मैं भी पास में बैठ गया एक चारपाई पै और खाने लगा। खाना खाकर फारिग हये।

अम्मी ने कहा "चलो आओं तुम्हारी खाला के घर चलते हैं.."

मैं खुशी-खुशी तैयार हो गया। घर से निकले और खाला के घर पहुँच गये। खाला ने मुझे गले लगाया और प्यार दिया। फिर अम्मी और खाला सहन में बैठकर बातें करने लगी। खालू अंदर रूम में टीवी देख रहे थे। खाला से लुबना का पूछा तो उन्होंने कहा वो छत पें गई है। मैं छत पे गया तो देखा लुबना दीवार के पास खड़ी साथ वाले घर की लड़की, जो उसकी दोस्त थी उससे बातें कर रही थी।

खटका हवा तो लुबना मुझे देखा और अपनी तरफ बुला लिया। मैं लुबना के पास चला गया और उसकी दोस्त से सलाम लिया और लुबना से भी। छत में पूरा अंधेरा था। में लुबना के दायें साइड पे खड़ा था। लुबना का एक हाथ ऊपर दीवार पे टिकाया हुवा था, एक नीचे था। मैंने उसको पकड़ लिया और दबाने लगा, साथ-साथ उनकी बातें भी सुन रहा था। मुझे लुबना के हाथों का स्पर्श बहुत मजा दे रहा था।

लण्ड में अकड़ाव आता जा रहा था। मैं लुबना के साथ जाकर खड़ा हो गया। गर्मियों के दिन थे, लुबना बारीक कमीज पहनी हुई थी। मैंने उसका हाथ अपने दायें हाथ में ले लिया और बाया हाथ खुला छोड़ दिया। मैंने अपना हाथ अपने आगे से गुजार कर लुबना का हाथ पकड़ा हुवा था, जो मेरे लण्ड के पास ही था। लुबना भी उससे बातें करते हुये सरसरी तौर पे जवाब दे रही थी। ऐसे करते एक बार हाथ ज्यादा हिल गया और लुबना का हाथ मेरे टाइट लण्ड से टकरा गया।

जैसे ही ऐसा हुवा लुबना ने अपना हाथ पीछे कर लिया। लेकिन मेरा हाथ अभी भी नहीं छोड़ा। मुझे बहुत मजा आया जब लुबना का नरम हाथ लण्ड पे लगा। मैंने अपना बायां बाजू अब लुबना के साइड पे दबा दिया और धीरे-धीरे उसको रगड़ने लगा। मेरा बाजू उसकी कमर को साइड से और जांघों की साइड पे रगड़ हो रहा था। मैं अंदर से पूरा गरम हो गया था, लण्ड झटके मार रहा था। मेरा दिल कर रहा था लुबना मेरे लण्ड को पकड़ लें और उसको दबाए।

मुझसे रहा नहीं गया। मैं उसका हाथ अपने लण्ड पे रख दिया, जो पहले से मेरे हाथ में था उसका हाथ। लुबना ने पीछे करना चाहा, लेकिन मैंने दबाकर रखा। मैं मोके का फायदा उठा रहा था, क्योंकी पास में सहेली खड़ी थी तो लुबना कुछ कह नहीं सकती थी। थोड़ी देर उसका हाथ वहीं रहा, लेकिन उसने मेरा लण्ड नहीं पकड़ा।

थोड़ी देर बाद उसकी सहेली चली गई, और लुबना ने अपना हाथ छुड़ा लिया और कहा- "ये क्या बदतमीजी है?"

मैं एक बार घबरा तो गया लेकिन जब देखा की लुबना अपनी स्माइल को दबा रही हैं तो इतने से ही मैं शेर हो गया। मैंने कहा- "सारी मुझसे कंट्रोल नहीं हवा। तुम्हारा हाथ ही बहुत नरम है। दिल ही नहीं करता इसको छोड़ने का..."

लुबना बोली- "तुमको बड़ा शौक है मेरा हाथ पकड़ने का?"

मैंने कहा- "अब आदत हो गई हैं क्या करंग.." और मैंने फिर से लुबना का हाथ पकड़ लिया।

अब लुबना मेरी तरफ हो गई हई थी। हम बिल्कुल पास खड़े थे। पूरा अंधेरा और दो जवान लड़का लड़की है तो शैतान आ ही जाता है। मेरा लण्ड अभी भी खड़ा था। मैं थोड़ा और करीब हो गया लुबना के। उसका हाथ मैंने अपने दोनों हाथों में लिया हुवा था।

हम दोनों स्कूल की बातें कर रहे थे। कितना काम मिला छुट्टयों का? साथ-साथ मैंने करवाई जारी रखी। थोड़ा और करीब हवा तो मेरे लण्ड की टोपी लुबना की जांघ पे लगी हल्की सी। मेरे अंदर करंट दौड़ गया क्योंकी पहली बार में लुबना के इतने करीब गया था। मैंने अपने लण्ड का दबाओं बढ़ाया तो मेरा लण्ड उसकी नरम जांघों में धंस गया। लुबना की जांघ रई के जैसे नरम थी, और इस बात गरम भी थी।

लुबना बात करते हुये एक बार रुकी भी। क्योंकी उसको भी पता चल गया था मेरा लण्ड कहां लग रहा था, लेकिन उसने कुछ कहा नहीं। मेरा मजे से बुरा हाल हो रहा था। मैं लुबना को खींचकर और करीब कर लिया। अब हमारी साँसें आपस में टकरा रही थी। मैंने मोका गनीमत जाना और थोड़ा पीछे होकर लुबना की जांघों के बीच का अंदाजा लगाया जहां उसकी फुदी थी, और लण्ड को आगे कर दिया। लण्ड उसकी कमीज समेत उसकी जांघों में घुस गया और लण्ड झटके खाने लगा।

लुबना भी अब चुप हो गई थी और मजे ले रही थी। मैं अब लण्ड को खुलकर आगे-पीछे कर रहा था। मैंने धीरे से अपनी लमीज साइड पे की और लण्ड दुबारा लुबना की जांघों में घुसाया, जहां मुझे और ज्यादा गर्मी महसूस हुई। मैंने लुबना का हाथ छोड़ा और उसकी जांघों को पकड़ा और टीला करने लगा। लुबना समझ गई उसने अपनी टांगें थोड़ी खोली और लण्ड सीधा फुद्दी से जा टकराया। उसने टांगें बंद कर ली।

मैंने झप्पी डाल दी और लण्ड अंदर-बाहर करने लगा। शर्म की वजह से हम दोनों में से कोई भी बात नहीं कर रहा था। मैं उसको गाल पे किस करने लगा, कभी गर्दन में करता। होंठों पे कर नहीं रहा था झिझक हो रही श्री दूसरा मुझे करनी नहीं आती थी।

लुबना आहे बढ़ने लगी- “आहह.. उहह... ओहह... आह.. ओफफ्फ..."

 
मैं बहुत एंजाय कर रहा था। लुबना का नरम गरम जिश्म मुझे पूरा मजा दे रहा था। इतने में अचानक नीचे से अम्मी ने मुझे आवाज लगाई तो हम सड़बड़ा गये, और जल्दी से सीधे हो गये। हम दोनों शर्म के मारे एक दूसरे को देख भी नहीं रहे थे।

मैंने आवाज लगाई- "आ रहा है..." फिर हम नीचे आ गयें। जहां अम्मी तैयार थी घर जाने के लियें।

अम्मी के साथ मैं घर आ गया। घर आए तो अम्मी ने कहा- "तुम्हारी खाला और लुबना में जाना है तुम्हारी नानी के घर। तुम उनके साथ चले जाना..."

मैं ये सुनकर बहुत खुश हुवा। मैंने पूछा- “कच जाना है?"

अम्मी ने कहा "परसों जाना तुम लोगों ने। परसों रात को निकलना है..."

जानी का घर मुल्तान में था। सिटी से 10-12 किलोमीटर दूर एक गाँव में। रात को निकलतं तो सुबह 7-8 बजे वहां पहुँचते हम।

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****

फिर मैं अपने रूम में जाकर लेट गया, और सोचने लगा- "गाँव जाकर कैसे एंजाय करना है?" और यही सोचते सोचते मैं सो गया।

सुबह लेट उठा। क्योंकी स्कूल से इटियां थी। फ्रेश हवा फिर नाश्ता किया, और घर से बाहर निकाल आया। दोस्त क्रिकेट खेलने जा रहे थे, मैं भी उनके साथ चला गया। वहां दो घंटे खेलता रहा। फिर घर की तरफ आ रहा था तो देखा खाला सामान उठाए घर जा रही थी। मैं जल्दी से आगे हवा और खाला में सलाम किया और सामान पकड़कर उनके साथ चलने लगा।

घर जाकर सामान किचन में रखा। लुबना का पूछा तो वो अपना काम लिख रही थी ऊपर छत पे बैठकर। खाला किचेन की सेल्फ के नीचे से सामान निकालकर ऊपर रख रही थी शेल्फ पो मैं क्या देखता है की जब खाला झुकती थी तो खाला के भारी चूतर पीछे को निकल आते थे। जब उठती ता कमीज उनके चूतरों की गहरी दरार में घुसी होती। में मंजर देखकर मेरा लण्ड खड़ा होने लगा।

मुझे इर्द-गिर्द का होश नहीं रहा और नजर खाला के चूतरों पे टिक गई। फिर खाला ने जब सामान निकाल लिया तो खाला बर्तन धोने लगी। मैं आगे बढ़ा और पीछे से खाला को झप्पी लगाया और खाला से कहा- "आपने आज मुझे गले नहीं लगाया और अब मुझे खुद आपको झप्पी डालनी पड़ी है.."

खाला मुश्कुरा दी और कहा- "तुमको इतनी फिकर होती है मेरी झप्पी लगाने की.."

मैंने कहा- "जी खाला मुझे बहुत मजा आता है आपको झप्पी लगाकर."

खाला ने कहा "चला आइन्दा लगा लिया करूंगी... और अब जब तक बर्तन नहीं धुलतं तुम मुझे झप्पी लगाकर रखो.."

मैं बहुत खुश हवा ये सुनकर। मैंने अपने हाथ खाला के गले में डाल दिए और उनका जोर से झप्पी लगा ली,

और आगे बढ़कर खाला के गाल पे किस कर दी। लगातार 3-4 किस की। फिर मैंने अपना चेहरा खाला के कंधे पे रख दिया। जहां से मेरी नजर सीधी खाला के मम्मों पे पड़ रही थी। खाला के आधे मम्मे तो कमीज के बाहर थे। मुझे खाला की ब्लैक ब्रा भी नजर आ रही थी। खाला ने ब्लेक कमीज और सफेद सलवार पहनी हुई थी। मेरे दोनों हाथ खाला के मम्मों के ऊपरी भाग से छू रहे थे। मैं वहां हाथ फेरने लगा।

खाला को गुदगुदी हुई तो कहा- "ना करो बेटा गुदगुदी होती है..... मैं हँस दिया और ज्यादा दबाओं डाल दिया वहां और हाथ को फेरने लगा। नीचे से लण्ड पूरा अकड़ा हवा था। मैं थोड़ा आगे हवा और लण्ड खाला के मोटे चूतरों पे लगा। खाला के चूतर बाहर का निकले हुये थे। बर्तन धोते हुये खाला हिल रही थी। नीचे मेरा लण्ड उनसे रगड़ खा रहा था, जो मुझे बहुत मजा दे रहा था। मैं मजे से पागल हो रहा था। खाला ने कुछ नहीं कहा वो लगी रही अपने काम में।

 
खाला को गुदगुदी हुई तो कहा- "ना करो बेटा गुदगुदी होती है..... मैं हँस दिया और ज्यादा दबाओं डाल दिया वहां और हाथ को फेरने लगा। नीचे से लण्ड पूरा अकड़ा हवा था। मैं थोड़ा आगे हवा और लण्ड खाला के मोटे चूतरों पे लगा। खाला के चूतर बाहर का निकले हुये थे। बर्तन धोते हुये खाला हिल रही थी। नीचे मेरा लण्ड उनसे रगड़ खा रहा था, जो मुझे बहुत मजा दे रहा था। मैं मजे से पागल हो रहा था। खाला ने कुछ नहीं कहा वो लगी रही अपने काम में।

खाला में बर्तन धो लिए थे। अब सुखा कर के टोकरी में रख रही थी। मैं अपने बाजू खाला के बगलों के नीचे से गुजारकर खाला के कंधे पकड़ लिए और उनको गर्दन में किस कर दी। मैं पूरा चिपक गया था खाला से। मेरे बाजू खाला के मम्मों की साइड से दब गये थे। मुझे उनके नरम मम्में अच्छी तरह महसूस हो रहे थे। मैं मजे से पागल हो रहा था और बहुत गरम हो गया था। मैंने नीचे से लण्ड को जोर से खाला के चूतरों में दबाया तो खाला बेचैन हो गई।

खाला ने कहा "चलो शाबाश... अब मुझे छोड़ो, मैं सफाई कर लं रूम की..."

मैंने ना चाहतं हमें भी खाला को छोड़ दिया, और ऊपर लुबना के पास चला गया। देखा तो लुबना काम लिख रही थी। मैं पास जाकर बैठ गया और उससे हा हेलो की। मैंने इर्द-गिर्द देखा तो कोई भी नहीं था। मैंने एक हाथ लुबना के बायें मम्मे पें रख दिया, जो मुश्किल से मेरे हाथ में आ रहा था।

लुबना एकदम चौकी और उसने मेरा हाथ झटक दिया और कहा- "ना करा कोई देख लेगा.."

मैंने कहा- "नहीं देखता, मेरी नजर है इर्द-गिर्द..

लेकिन उसने मुझे हाथ नहीं लगा दिया। मैंने फिर हाथ उसकी जांच पे रख दिया और दबाने लगा। उसने मना नहीं किया। छत पे खाला लोगों में छोटा सा रूम बनाया हुवा था। जिसमें पुराना सामान पड़ा हुवा था।

मजे लुबना को कहा- "चलो स्टोर राम में चलते हैं.."

लुबना ने कहा- "अम्मी आ जायेंगी...

मैंने कहा- "खाला नीचं काम कर रही हैं मैं देख कर आया है."

बार-बार कहने पे लुबना मानी और हम उठकर स्टोर रूम में चले गये। वहां खड़ा ही हवा जा सकता था लेटने की जगह नहीं थी। वहां जाते ही मैंने लुबना को गले लगा लिया। लण्ड तो पहले से ही अकड़ा हुवा था। मैंने एक हाथ लुबना का अपने लण्ड पे रखा और उसको कहा- "मसलो..." और मैं उसको किस करने लगा उसके नरम गाल पे। मैं पूरा चेहरा पे उसको किस कर रहा था।

नीचे लुबना मेरा लण्ड दबा रही थी। अब लुबना की सिसकियां भी निकाल रह थी। लुबना मुझे रोकी और करा "हाथ बाहर निकाला." लेकिन मैंने नहीं निकलें बार-बार कहने से वो चुप हो गई। मैं मजे से उसके चूतरों को दबाने लगा और चूतरों की लकीर में उंगली ऊपर से नीचे कर रहा था।

लुबना में अब मुझको जोर से अपने साथ लगा लिया था। मैंने अपना एक हाथ आगे से सलवार में डाल दिया, जो सीधा लुबना की गरम चूत से जा टकराया, जो इस वक़्त गीली हुई पड़ी थी। मैं उसकी फोड़ी पे हाथ फेरने लगा। मुझं हैरत का झटका लगा जब लुबना ने मेरी सलवार में हाथ डालकर मेरा लण्ड पकड़ लिया।

मैं मजे से हवाओं में उड़ने लगा। मेरा जिम मजे से झटके खाने लगा। मैंने अपनी सलवार घुटनों तक नीचे कर दी, और लुबना की भी। फिर मैंने अपने लण्ड में थूक लगाया और लुबना की जांघों में डाल दिया जो सीधा उसकी फुद्दी से रगड़ खा रहा था। लुबना ने मुझे अपनी तरफ खींचा। मैं लण्ड को अंदर-बाहर करने लगा। मेरा दिल कर रहा था लुबना की फुद्दी देख, लेकिन स्टारर म में अंधेरा था।

मैंने लुबना की कमीज ऊपर कर दी बजियर समेत। मैंने उसके मम्मे पकड़ लिये और दबाने लगा। लबना की और जोर से सिसकियां निकल रही थी। मैंने बायें मम्मे का निपल मुह में ले लिया और चूसने लगा। अब लण्ड अंदर-बाहर करने की स्पीड कम हो गई थी। क्योंकी मैं अब थकावट महसूस कर रहा था। ऐसी हालत में खड़े होकर लुबना के निपल अकड़े हये थे और मटर के दानें जितना उसका जिपल था। मैं जोर-जोर से उसके मम्में दबा रहा था।

अचानक लुबना ने मुझे जोर से पकड़ लिया और सारा वजन मुझपर डाल दिया। उसका जिश्म कांप रहा था। लण्ड पे मुझे गरम पानी गिरता हुवा महसूस हुवा। मैं अब रुक गया था क्योंकी लुबना में अपनी टाँगें दीली की हुई थी। फिर वो सीधी हुई और कहा- "अब चलते हैं काफी देर हो गई है." इस दौरान उसने सलवार भी ऊपर कर ली और कमीज भी ठीक कर ली।

मैंने ना चाहतं हमें भी अपनी सलवार ठीक की। फिर हमने एक जोर की झप्पी लगाई। लुबना में होंठों में एक हल्की किस की और हम बाहर आ गये।

मैं नीचे चला गया और वो अपना काम लिखने बैठ गई दुबारा। नीचे आकर मैंने खाला से इजाजत ली और घर आ गया। मैंने भी बैग उठाया और पढ़ने लगा, काम लिखा। जब में फारिग हवा तब शाम 4:00 बजे का टाइम था। अम्मी किचेन में थी। मैं बाहर गली में निकल आया तो एक दोस्त खड़ा था, उससे गपशप करने लगा। थोड़ी देर बाद दोस्त चला गया। मैं भी घर आ गया। ऐसे ही टाइम गुजरता गया। रात 8:00 बजे का टाइम हवा तो आँटी परवीन आ गईं।

 
इस वक्त हम छत पे बैठे हुये थे। आँटी मेंरी चारपाई पे आकर बैठ गई। मैं लेटा हुवा था। ठंडी हवा चल रही थी। अब्बू अभी तक नहीं आए थे। आँटी अम्मी से बातें करने लगी। मैंने करवट ली और थोड़ा नीचे हो गया। जिससे ये हवा की मेरा लण्ड औटी के चूतर के बराबर आ गया। बैठने से आँटी के चूतर भी फैल गये थे। मैं थोड़ा आगे हवा, तो मुझे अपनी टांग में आँटी का चूतर लगने लगा।

मैं थोड़ा अडजस्ट हवा और लण्ड को आँटी के चूतर के साथ लगा दिया, और शा ऐसे किया जैसे मैं सो गया हैं। आँटी के चूतर की गमी और नर्मी की वजह से मेरे लण्ड में जान आने लग गई। जो एक मिनट बाद पूरा खड़ा हो गया और लण्ड की नोक आँटी की माटी गाण्ड पे च बने लगी। इतना होने के बावजूद आँटी नार्मल अंदाज में माँ से बातें किए जा रही थी, जैसे कुछ हवा ना हो।

मेरी हिम्मत बढ़ने लगी। मैं लण्ड को और दबाओं दिया, तो उनकी गाण्ड के एक भा में धंस गया था। मैं अब बिल्कुल बगैर हिले लेटा हुवा था और लण्ड झटके मार रहा था। मैं मजे से पागल हो रहा था। जब कुछ देर में नहीं हिला तो आँटी थोड़ा सा हिली और मेरे लण्ड पे दबाओ बढ़ा दिया। मेरा दिल मुह में आ गया जब आँटी में ऐसा किया। मेरा दिल पूरा रफ़्तार से धड़कनें लगा। मैरा जिश्म एक बार कांपा।

आँटी ने कहा- "बेटा चादर ले लो, ऊपर ठंडी हवा चल रही है आपका ठंड ना लग जायेगी... ऐसा औंटी ने मुझे हिलाकर कहा क्योंकी में साता शो किया हवा था।

में उठा और पैरों में पड़ी चादर अपने ऊपर ले ली सीने तक और दुबारा करवट ले ली आँटी की तरफ। मैंने क्या किया की चादर के अंदर से आराम से अपनी सलवार थोड़ी नीचे की और लण्ड बाहर निकाल लिया, जो इस वक़्त अपने पूरा यौवन पें था। मैंने आँटी की कमीज का पल्ल उठाया और लण्ड उनकी गाण्ड पै दबा दिया।

औंटी में एकदम मेरी तरफ देखा। उनको शायद पता चल गया था की मैंने क्या किया है। लेकिन आँटी परवीन खामोश रहीं। मैं ऐसे हीथोड़ी देर मजे लेता रहा। फिर अब्बू आ गये तो अम्मी उठकर नीचे चली गई और आँटी भी उठकर अपनी छत की तरफ चली गई। उठतं हमें आँटी ने एक बार जोर से मेरे लण्ड पे अपनी गाण्ड दबाई थी। मैं बहुत खुश हवा और मजा भी आया।

फिर थोड़ी देर तक अम्मी अब्बू से बातें हुई गाँव जाने की, और मैं बातें करता सो गया मुझं, पता भी ना चला।

मैं सुबह उठा तो नाश्ता करके मैं अपनी पैकिंग करने लगा। कुछ अम्मी ने कर दी। मैं नजदीक मार्केट में गया। एक-दो जरूरी चीजें लेनी थी वो ली। बस ऐसे ही दिन गुजर गया। रात को में 11:00 बजे घर से निकाला। अब्बू भी साथ थे। अम्मी ने मुझे वहां आराम से रहने की ताकीद की थी। मैं छुट्टियों का काम भी साथ में ले लिया, जो वहां जाकर भी करना था क्योंकी वहां हमलोगो का 15-20 दिन रहने का प्रोग्राम था।

मैंने नई कमीज सलवार डाली हुई थी। हम खाला के घर पहुँचे तो वो भी सहन में खड़े थे तैयार।

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