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Incest खाला जमीला

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में बड़ा खुश हुवा की मामी के जिश्म को हाथ लगाने का मौका मिल रहा है। मैं उठा उनकी चारपाई पे बैठ गया लुबजा की तरफ पीठ करके ताकी उसको कुछ नजर ना आए। में लुबना और मामी बातें भी कर रहे थे साथ साथ। मैंने मामी की टांगें घुटनों के नीचे से दबाना शुरू किया, और धीरे-धीरे ऊपर आ गया उनकी जांघों पें।

मामी एक बार हिली, और कहा- "बेटा यहां से ही दबाओं जरा जोर से। यही से दख रही हैं."

मेरे हाथों में खाला की दायी जांघ थी जो अच्छी खासी मोटी थी। मुझे अपने हाथों में मामी की गरम जांघ का स्पर्श महसूस हो रहा था। नीचे सलवार में मेरा लण्ड खड़ा हो गया था। मैं एक टांग नीचे और एक टांग उठाकर मोड़कर बैठा हवा था। जो टांग नीचे थी वो मामी की तरफ थी। मामी ने अपना हाथ मेरी जांघ पे रख दिया। थोड़ी देर बाद मामी मुझे शाबाश दे देती। मेरे हाथ मामी की फुद्दी से कुछ इंच ही दूर था। मेरी उंगली मामी की जांघ के अंदरूनी भाग में छू रही थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मामी को जांघ इस वक़्त मेरे हाथों में थी।

कुछ देर बाद मामी ने कहा- "बेटा दूसरी टांग भी दबा दो.."

मैं थोड़ा आगे को झुक के मामी की बायीं जांघ दबाने लगा। मेरा लण्ड हल्का सा मामी की दायीं जांघ से टकरा रहा था। मेरा इस बढ़त मजे से बुरा हाल था। मामी ने कुछ देर बाद अपनी टांग थोड़ी हिलाई जिस वजह से मेरा लण्ड अब अच्छी तरह उनकी जांघ में च भने लगा, और मैं जानबूझ के उनकी फुद्दी के पास जांघ को दबाजे लगा।

मामी ने कहा- "बेटा जब थक जाओ ता बस कर देना " और मुझे अजीब स्माइल से देखती रही।

मेरा डर भी कम हो रहा था, मैंने अब अपना लण्ड थोड़ा ऊँचा किया और उनकी जांघ के ऊपर कर दिया। अब ऊपरी सतह पे लण्ड रगड़ रहा था। लण्ड झटके भी मार रहा था, जो मामी को साफ पता चल रहा था, लेकिन वो कुछ कह नहीं रही थी।

लुबना सो चुकी थी। उसने दूसरी तरफ मुँह किया हुवा था।

मामी ने कहा- "बेटा लुबना तो सो गई है."

मेरा दिल तेजी से धड़का क्योंकी मामी ने ये बात कही इस अंदाज में थी जैसे हमने कुछ करना हो। मैंने हाँ में मिर हिलाया, और नीची आवाज में मामी से कहा- "यही लेट जाऊँ आपके साथ?

मामी ने भी नीची आवाज में कहा- "हौं बेटा लेट जा ना.." अब हम नीची आवाज में बात कर रहे थे।

मेरी अपनी गाण्ड का छेद खल बंद हो रहा था इस वक़्त। मामी के साथ जिस पोजीशन में था मैं, ऐसे लग रहा था जैसे कोई तूफान आने वाला हो। मुझे मामी के बात करने का अंदाज इतना सेक्सी लग रहा था की क्या बताऊँ आपको।

मामी ने अपना हाथ दापी जांघ पे रखा और उसकी उंगली मेरे लण्ड को टच हई।

मैंने कहा- "मामी आप मोटी इतनी हो चारपाई पे जगह काम है। मैं कैसे लेट्गा?"

मामी ने कहा- "बेटा में लिटा लूंगी तुमको, चाहे तुमको अपने ऊपर क्यों ना लिटाना पड़े। आखीर कार, मेरे सबसे प्यारे भान्जे हो..." और अब मामी की आधी उंगली मेरे लण्ड पर थी।

मैं अब उनकी उंगली में लण्ड दबाने लगा।

मामी ने कहा- "बेटा क्या हवा, बेचैन लग रहे हो। खैर तो है?"

मैंने मामी की तरफ देखा तो मामी मुझे सेक्सी नजरों से देख रही थी। इसी दौरान मामी ने मेरा लण्ड एक बार हल्का सा दबाया तो मेरी सिसकी निकल गईं। मामी के होंठों में शरारती मुश्कुराहट आ गई। मुझे भी शरारत सूझी। मैंने मामी की जांघ को जोर से दबा दिया।

मामी ने कहा- "ना करो बेटा दर्द होता है... मामी का हाथ अभी भी मेरे लण्ड के ऊपर रखा हवा था।

मैंने मामी को कहा- "मामी जगह दो, मैंने लेटना है.."
 
मामी ने करवट लो मेरी तरफ और जगह दी। मैं भी मामी की तरफ मुँह करके लेट गया। जगह कम थी इसलिए मामी से जुड़ गया। मुझे अब कोई डर नहीं था लग रहा था। मैंने खाला को झप्पी लगा ली। नीचे से लण्ड को प्रेशर दिया उनकी फुद्दी पें। मामी ने टांगें खोली और लण्ड सीधा घुसता चला गया। मुझे लण्ड पे मामी की सलवार गाली-गोली लगी। मैं मजे से पागल हो गया की मामी की फुद्दी गीली हो गई है मेरी वजह से। मेरे अंदर सेक्स की लहर उठी और मामी को किस करने लगा उनके होंठों पे। मामी के होंठों आम औरतों से मोटे थे जो बहुत अच्छे लगते थे उनके चेहरे पे। मैंने एक हाथ मामी के मम्मे पर रख दिया और उसको दबाने लगा। मामी भी इस बात आँखें बंद किए मुझे किस कर रही थी।

मेरा लण्ड फटा जा रहा था। मामी ने मेरे लण्ड को जांघों में दबाया हवा था फुद्दी के ऊपर। अचानक मामी में मुझे अपने ऊपर कर लिया। टांगें खोलकर मुझे अपनी टांग में फंसा लिया। मेरा लण्ड उनकी फुद्दी से लगा और सिर मेरा उनके मम्मों तक जा रहा था। मैं मामी को अब धक्के मार रहा था फुद्दी पे। मामी आँखें बंद किए आहे भर रही थी।

अचानक चारपाई चरचराई और एक तरफ का पावा टूट गया। आवाज हुई तो लुबना भी हिली। मैं फटाफट अपने बिस्तर पे पहुँचा, और जोर से पूछा- "मामी किया हुबा?

इतनी देर में लुबना भी उठ गई भि शोर की वजह से।

***** *****
 
कड़ी_13

मामी ने कहा- "बेटा पावा टूट गया है...'

लुबना हँस पड़ी फिर हम तीनों हँस पड़े। मामी ने अंदर से दूसरी चारपाई निकाली और लेट गई। दुबारा मामी के पास जाना खतरनाक था। इसलिए मैं लेटा रहा और फिर सो गया।

सुबह आँख अपने टाइम पे खुली। मैंह हाथ धोकर नाश्ता दिया मुझे खाला ने। मैं नाश्ता करने लगा। नाश्ते से फारिग हवा और मैं बाहर निकाल आया। दरवाजे में खड़े होकर टाइम गुजारा कुछ इधर-उधर देखते। फिर मैं अंदर आ गया। नानी के रूम में गया। खाला वहां अकेली थी और बैग में से कपड़े निकाल रही थी। मैंने पीछे से जाकर उनको झप्पी लगा ली।

खाला ने मुड़कर मुझे देखा और कहा- "मेरी तो जान ही निकाल दी तुमनें... देख लिया करो। ऐसे ही चिमट जाते हो, काई देखेंगा तो क्या कहेगा?"

मैंने कहा- "कोई कुछ नहीं कहेगा.." और खाला को किस कर ली। नीचे से खाला की मोटी और बाहर को निकाली हुई गाण्ड में दबाओं डाला। लेकिन खाला ने कुछ नहीं कहा मुझे। मुझे अपनी जांघों पे खाला के नरम चूतड़ महसूस हो रहे थे। मैंने अच्छी तरह वहां लण्ड को रगड़ा और खाला से मस्ती करता रहा।

फिर में बाहर आ गया। किताबें पकड़ी और लिखने बैठ गया। जब सारे बच्चे आ गये तो बाजी मेरे पास पड़ी चयर में आकर बैठ गईं। बाजी को देखते मुझे रात को वारदात याद आ गई की बाजी ने कैसे चुदवाया उस झोपड़ी में। मुझे अचानक एक आइडिया आया।

मने कापी पे लिखा- "बाजी रात को मजा आया आपको झोपड़ी में?" साथ ही बाजी को मैंने कहा- "बाजी जरा देखना मैंने ठीक लिखा काम?"

बाजी ने कापी पकड़ी और जब कापी पे नजर गई तो मुझे बाजी के तोते उड़ते नजर आए चेहरे पे। लेकिन जल्द कंट्रोल किया उन्होंने और मेरी तरफ देखा। बाजी मुझे सीरियस नजरों से घर रही थी। एक बार तो मैं भी अंदर में डर गया कि कहीं बाजी मुझे फैटी हो ना लगा दें। लेकिन अचानक बाजी के चेहरा में स्माइल नजर आई मुझे।

बाजी ने कहा- "अच्छा तो तुम जासूसी करते रहे मेरी?"

मैंने कहा- "बाजी टाइम बड़ा हो गया था। मैं ऐसे ही देखने उस तरफ आ गया था। आप मुझे पहले बता देती। मैं कौन सा बताना था किसी को। ऐसे मेरी जगह कोई और आ जाता तो फिर?"

बाजी ने कहा- "चलो अब तो पता चल गया ना तेरे को। अब ध्यान रखना अगर वहां जाऊँगी तो?" और हँस दी।

में भी मुश्कुराता हुवा दुबारा काम लिखने लगा। थोड़ी देर बाद मुझे अपनी टांग पे बाजी का पैर लगा। मैंने इग्नोर किया। लेकिन अब पैर धीरे-धीरे मेरी जांघ के ऊपर आ रहा था। मेरे लण्ड में सरसराहट होने लगी। क्योंकी मैं समझ गया था बाजी क्या कर रही हैं। झाले में बुक और कापी लेकर बैठा था। आगे बैंग था सो काफी जगह थी। बाजी ने किताबें के नीचे से धीरे से पैर मेरे लण्ड पे रख दिया जो इस वक़्त खड़ा हो चुका था।

मैंने ऊपर नजर की। बाजी को देखा। बाजी मुझे सेक्सी स्माइल से देख रही थी। मैंने इधर-उधर देखा सब करचे काम कर रहे थे। वो थे भी छोटे थे। घर वाले अंदर थे। बाजी अच्छी तरह मेरे लण्ड पे पैर रगड़ रही थी। मेरा दिल कर रहा था बाजी मेरा लण्ड हाथ में पकड़कर दबायें। बाजी इप्रेस हो रही थी क्योंकी उन्होंने पैर से अंदाजा

कर लिया था की मेरा लण्ड कैसा है?

फिर एक बच्चा उठा और बाजी के पास आया। बाजी ने पैर निकाल लिया। मैं थोड़ी देर और काम लिखा और उठ गया। बैग अंदर रखा। बरांडे में खाला और दाना मामियां बैठी बातें कर रही थी। मैं मामी के साथ चारपाई में बैठ गया और उनकी बातें सुनने लगा।

खाला ने कहा "पट लिया मेरे बेटे ने?"

मैंने कहा- "जी खाला..."
 
मामी ने कहा- "मेरा पुत्तर तो बहुत अच्छा है। सबका खयाल रखता है.." और नजर बचाकर मुझे आँख मार दी। बगल से मुझे गले लगाया और चूमा।

खाला ने कहा "वाह... बड़ा प्यार है मामी भान्जे में... सब हँस दिए।

ऐसे ही बातें हई। फिर लंच का टाइम हो गया।

लंच करके फारिग हुये तो बाजी ने कहा- "मैं सहेली के घर जा रही हूँ लुबना के साथ.."

मामी ने इजाजत दे दी। फिर मुझसे कहा- "जाओं बँटा इनको छोड़ आओ..."

में बाजी लोगों को छोड़कर घर आया तो सब अपने-अपने रूम में जा चुके थे आराम करने। मामी मुझे टायलेट से निकलती नजर आई। मामी जब हाथ धो रही थी मैं पास गया और मामी को कहा- "मामी झाप्पी लगाने को दिल कर रहा आपको..

मामी ने कहा- "यहां कहा लगाओगे झप्पी?"

मैंने कहा- "बैठक में चलते हैं, सब सो रहे होंगे..."

फिर मैं और मामी बैठक में आ आ गये धड़कते दिल के साथ। मेरा दिल मचले जा रहा था तन्हाई में मामी में मिलने से। बैठक में जाकर मैंने मामी को झप्पी डाल ली। मामी ने भी बाजू डाल दिए मेरी कमर में। पहले मैं और मामी एक दूसरे को देखते रहे। फिर मैंने मामी को गाल पे किस की। मामी ने मुझे दो-तीन किस की। मैंने हिम्मत करते हुये मामी के होंठों पे किस की। मामी ने मुझे की। फिर मैंने मामी के मोटे होंठ अपने होंठों में लिए और चूसने लगा। मामी के होंठ बहुत नरम मुलायम थे। मामी पूरा साथ दे रही थी मेरा। नीचे मेरा लण्ड सहत होकर उनकी फुद्दी पे चुभ रहा था।

किस करते-करतं मैंने मामी के दोनों मम्मे पकड़ लिए, और दबाने लगा। मामी के मम्में बड़े साइज के थे जो मेरे दो हाथों में भी ना आते। मैं मजे से उनको किस कर रहा था और मम्मे दबा रहा था। मुझको कोई होश नहीं था इर्द-गिर्द का। अचानक मुझे अपनी सलवार में मामी का हाथ घुसता महसूस हवा, जो सीधा लण्ड पे गया। मामी ने मुठी बनाकर मेरा अकड़ा हवा लण्ड पकड़ लिया, जो इस वक़्त उनके हाथ में पूरा आ रहा था। मामी उसको दबाने लगी। मेरा मजे से बुरा हाल हो गया।

सेक्स के जोश में मैंने मामी की कमीज में हाथ डाला और बा ऊपर करके नंगे मम्मे पकड़ लिए मामी के। उफफ्फ... क्या नरम और गरम मम्मे थे मामी के। निपल इस बात टाइट हो रहे थे, जो मेरी हथेली में चुभ रहे थे मुझे। में जोर-जोर से मामी के मम्मे दबाने लगा। नीचे मामी मेरे लण्ड को मसल रही थी। मैंने फिर मामी की कमीज ऊपर की गले तक। और उनका बाउन निपल मुझे नजर आया। मम्में अपने पूरा यौवन पे थे मामी के। मेरी आँखें जम गई उनके मम्मों पे।

मामी ने कहा- "देखते ही रहोगे या चूमोगें भी?"

मैं आगे बढ़ा और एक निपल मुह में लेकर मम्मा चूसने लगा मामी का। साथ-साथ दबा भी रहा था।

मामी लण्ड दबाने के साथ मेरे टटें भी हाथ में पकड़कर उनको धीरे-धीरे दबा रही थी। जिससे मेरा लण्ड झटके खाने लगता था। मैंने अपना एक हाथ नीचें किया और मामी की सलवार में घुसा दिया। सीधा हाथ फुद्दी पे गया जो इस बात पानी से लाबालब भरी हुई थी। जैसे ही फुद्दी पे मेरा हाथ लगा, मामी की सिसकियां बुलंद हो गई। मामी की फुद्दी क्लीन शेव्ड थी। एक भी बाल नहीं था इस वक़्त उनकी फुद्दी पे। मैं उनकी फुद्दी की लकार में उंगली फेर रहा था।
 
मामी लण्ड दबाने के साथ मेरे टटें भी हाथ में पकड़कर उनको धीरे-धीरे दबा रही थी। जिससे मेरा लण्ड झटके खाने लगता था। मैंने अपना एक हाथ नीचें किया और मामी की सलवार में घुसा दिया। सीधा हाथ फुद्दी पे गया जो इस बात पानी से लाबालब भरी हुई थी। जैसे ही फुद्दी पे मेरा हाथ लगा, मामी की सिसकियां बुलंद हो गई। मामी की फुद्दी क्लीन शेव्ड थी। एक भी बाल नहीं था इस वक़्त उनकी फुद्दी पे। मैं उनकी फुद्दी की लकार में उंगली फेर रहा था।

मुझे मामी की फुद्दी के हॉट मोटे-मोटे लगे और अंदर को मुड़े हरे थे। मैंने अपनी बड़ी उंगली उनकी फुद्दी में डाल दी और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। मामी आँखें बंद किए सिसकियां कंट्रोल कर रही थी, क्योंकी में देख रहा था होंठ उन्होंने दबाए हुये थे अपने दांतों में।

मामी ने कहा- "बेटा जल्दी कर लो जो करना है। टाइम काफी हो गया है.'

मैं चुप रहा। मामी ही फिर आगे बढ़ी, और सोफे के पास चली गई। वहां जाकर बैठ गई और मुझे इशारे से पास बुलाया। मैं गया तो मामी में मरी सलवार घुटनों तक नीचे कर दी। और मेरा तना हुवा लण्ड एक हाथ में पकड़ा और उसकी मूठ मारने लगी। दूसरे हाथ से मेरे टट्टे सहलाने लगी। मजे की इंतेहा से मेरी आँखें बंद हो गई, और मैं गाण्ड को दबाकर लण्ड को आगे करने लगा।

फिर मामी ने लण्ड को छोड़ा और अपनी सलवार उतार दी, और सोफे में लेट गई। अपनी टांग उठा ली और मुझे कहा- "इधर आओ बेटा."

मैं उनकी टांगें में बैठ गया और लण्ड को हाथ में पकड़कर उनकी चिकनी गीली फुद्दी पे लण्ड रगड़ने लगा ताकी उनके पानी से लण्ड गीला हो तो अंदर डालू। चार-पाँच बार ऐसा करके जब देखा की मेरा लण्ड गीला हो गया है,

तो गौर से मामी की फुददी देखने लगा जो साइज में बड़ी और होंठ मोटे थे उसके। मामी की चिकनी जांघों के बीच उनकी फुद्दी अपना नजारा दिखा रही थी मुझे।

मैंने सुराख पे लण्ड सेट किया और लण्ड को पुश किया अंदर की तरफ। मेरा लण्ड आसानी से अंदर चला गया। मामी की फुद्दी अंदर से जलती हई भटठी का मंजर पेश कर रही थी। अचानक बाहर का दरवाजा जोर-जोर से खड़का। हम दोनों के रंग उड़ गये।

मामी ने मुझे पीछे को जल्दी से धक्का दिया और कहा- "अंदर चले जाओ जल्दी करो.."

मैंने सलवार ऊपर की और खड़े लण्ड के साथ अंदर चला गया। बरामदे में चारपाई पे लेट गया और साता बन गया। दिल में आने वाले को गालियां निकालने लगा। मुझे कदमों की आवाज सुनाई दी बाहर की तरफ से, और पता चला बाजी और लुबना आई हैं। दिल में इनको गाली दी- "बहनचोद अभी आना था इनको। पाँच मिनट लेट आ जाती, तो मेरा तो काम बन जाता.."

इसी तरह सोचते-सोचते मेरी आँख लग जाती है। शाम 6:00 बजे उठा मैं।

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शाम को जब उठा मुँह हाथ धोकर फ्रेश हुवा। इस बक्त सब लोग सहन में बैठे गप्पें मार रहे थे। लेकिन खाला ऊपर छत पे थी। मैं भी ऊपर चला गया। खाला टहल रही थी।

खाला ने मुझे देखा और कहा- "उठ गया मेरा बेटा.."

मैंने कहा- "जी खाला। इस बात आपके सामने ही हैं.."

खाला मुश्कुराई. "ही मुझं नजर आ रहा है तुम सामने ही हो...

फिर हम चारपाई पे बैठ गये।

खाला ने पूछा- "बोर तो नहीं हुये यहां आकर? हुये हो तो बता दो हम जल्दी चले जाते हैं."

मैंने कहा- "नहीं खाला, दिल लगा है यहां। मैं ठीक है। मैं तो यहां आकर गुजरीवाला से भी ज्यादा एंजाय कर रहा है." और खाला को आँख मार दी।

खाला हँसी और मुझे चपत लगाई. "बदतमीज हो तुम। यहां आकर तुम तेज हो गये हो, वहां ठीक थे तुम... ऐसे बातें करते शाम का अंधेरा गहरा होने लगा।

मैंने खाला को कहा- "उधर बाँड्री वाल के पास जाते हैं, और बाहर खेत देखते हैं.."

फिर मैं और खाला उठे, बौंड्री वाल के पास खड़े हो गये। में खाला से सटकर खड़ा हो गया था। हम बाहर का नजारा कर रहे थे। किसान अपने घरों को वापस आ रहे थे। थोड़ी देर बाद अंधेरा ज्यादा हो गया तो मैंने बगन से खाला को झप्पी लगाया, और खाला से लाड़ करने लगा।

खाला ने मुझे रोका भी की कोई देख लेगा।

मैंने कहा- "अंधेरा है, किसी को नजर नहीं आता... फिर मैं झप्पी लगाए घूमा और खाला के पीछे आ गया।

अब पोजीशन में थी। खाला दीवार पे बाजू रखें थोड़ा झुकी हुई थी। उनकी मोटी गाण्ड बाहर को निकली हुई थी। मेरा लण्ड उनकी गाण्ड में घुस गया, जो अभी नीम जान था। खाला चुपचाप खड़ी रही। आगे मैंने खाला के पेट पे हाथ रख दिया।
 
मैंने कहा- "अंधेरा है, किसी को नजर नहीं आता... फिर मैं झप्पी लगाए घूमा और खाला के पीछे आ गया।

अब पोजीशन में थी। खाला दीवार पे बाजू रखें थोड़ा झुकी हुई थी। उनकी मोटी गाण्ड बाहर को निकली हुई थी। मेरा लण्ड उनकी गाण्ड में घुस गया, जो अभी नीम जान था। खाला चुपचाप खड़ी रही। आगे मैंने खाला के पेट पे हाथ रख दिया।

खाला ने कहा "तुम्हारा दिल नहीं भरता क्या? हर वक्त मुझसे चिपके रहते हो। अब मुझे भी तुमने आदत डाल दी हुई है। जब तक मुझसे चिपको ना मुझे भी चैन नहीं आता."

मुझे सुनकर जोश आया। मैंने नीचे से लण्ड आगे को दबा दिया जो सीधा उनके चूतड़ों की लकीर में फंस गया था। मैंने खाला को कहा- "खाला कमीज में हाथ डाल लं, आपके पेट को हाथ लगाना है?"

खाला ने धीरे आवाज में कहा- "डाल लो, लेकिन कोई शरारत नहीं करनी.."

मैंने कमीज में हाथ डाला और उनके नंगे पेंट को सहलाने लगा। खाला का जिश्म कांप रहा था और मेरा भी। खाला ने अपनी गाण्ड पीछे कर ली हुई थी। अब खाला आधी घोड़ी की पोजीशन में आ गई हुई थी। मैंने मोका गनीमत जाना और थोड़ा पीछे होकर अपनी सलवार नीचे की थोड़ी सी, जिससे सिर्फ लण्ड ही नंगा हो। फिर खाला की कमीज पकड़कर पीछे से बगल में कर दी, और लण्ड का अब उनके चूतड़ों में दबा दिया। जो सीधा उनके गरम और भारी चूतड़ों के बीच फंस गया। खाला की सिसकी निकाल गई।

में जोश से उनके पेट का नरम गोस्त हाथ में पकड़कर मसल रहा था, जैसे मम्मे मसलते हैं। मैंने खाला को फुसफुसाकर कहा- "खाला आपकी बनियान में हाथ रख लूं। दिल कर रहा है?"

खाला चुप रही। मैं हिम्मत करके हाथ अंदर किए जो उनकी ब्रा से टकराए।

मैंने उनके मम्मे पकड़ लिए ब्रा के ऊपर से ही, और कहा- "खाला आओ तो यहां से बहुत गरम हो... मम्में दबाकर उनको बताया कि यहां से।

खाला ने कहा "बेटा बनियान में दबे जो होते हैं इसलिए। ऊपर से गर्मी भी है ना?

मैंने कहा- "तो आप ना पहना करो ये बनियान..."

खाला बोली- "बेटा जरुरी है पहनना, वरना यहां से जिश्म खराब हो जाता है.."

हम ये बातें फुसफुसाहट के अंदाज में कर रहे थे।

खाला ने कहा "बेटा इसका बनियान नहीं कहते, बल्की कुछ और नाम है इसका.."

मैंने पूछा- "क्या नाम है?"

खाला बोली- "बताना नहीं किसी को..."

मैंने कहा- "ठीक है खाला.."

खाला ने कहा, "इसको जिपर कहते हैं। शार्टकट में ब्रा बोलते हैं...."

मैं समझ गया। मैंने कहा- "खाला आप बहुत अच्छी हो, मुझे सब बता देती हो... इसके साथ ही नीचे से घस्सा लगाया। मेरा लण्ड इस बात लोहे की रोड की तरह सख्त होकर उनकी गाण्ड में धंसा हवा था। ऊपर से मैं मम्में दबा रहा था। मैंने खाला को कहा0 "बा ऊपर करें ना... मुझे आपके मम्मे पे हाथ लगाना है.."

खाला ने कहा "नहीं बेटा, अभी नहीं फिर कभी। अभी यहां जगह नहीं ठीक है.."
 
मैं चुप हो गया। जब मैंने लण्ड पकड़कर खाला की गाण्ड में ऊपर से नीचे किया तो खाला सीधी हो गई। और कहा- "चलो बेटा टाइम काफी हो गया, नीचे चलते हैं..." इस दौरान खाला ने अपनी कमीज सेट कर ली।

मैं ना चाहते हमें भी खाला के साथ नीचे आ गया। रात का खाना बस तैपार था। थोड़ी देर में खाना लग गया। सबने मिलकर खाया।

खाने के बाद बाजी अमीना ने कहा- "अम्मी सालन एक प्लेट में डाल दें, मैं अपनी दोस्त को दे आऊँ और टहल भी आएंगे मैं और अली..."

मामी ने सालन प्लेट में डाला। मैंने पकड़ लिया। हम दोनों बाहर निकाल आए घर से। गाँव के आखीर पे था बाजी की सहेली का घर। उसी तरफ वो झोपड़ी भी थी। बाजी की सहेली के घर सालन पकड़ाया। बाजी की दोस्त ने ही दरवाजा खोला था। उसका नाम ज़ारा था, जिम उसका हेल्दी था, कद दरमियाना, रंग गोरा चिट्टा था उसका। बाजी से दो साल छोटी ही थी। मुझे उसने गौर से देखा और मैंने भी उसको ऊपर से नीचे तक देखा। मुझे उसकी आँखों में अजीब सी चमक नजर आई।

दो मिनट उन्होंने बात की। बाजी में उससे इजाजत ली और हम निकल आए वहां से, और उस वीरान जगह पहुँच गये, जहां झोपड़ी थी। उस जगह पहुँचकर बाजी में मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा- "अली, तुम्हारा दिल कर रहा है मेरी लेने का?"

में हैरान हो गया की बाजी में मुझे खुद कहा है। मुझे लगा बाजी मुझे रिश्वत के तौर पे अपनी फुद्दी दे रही हैं। में चुप खड़ा रहा।

बाजी ने दुबारा पूछा और कहा- "जल्दी बताओ वर जा लेट हो जायेंगे.."

मैंने धीरे आवाज में ही की। बाजी में मेरा हाथ पकड़ा और झोपड़ी नुमा कमरे की तरफ चल दी। जब झोपड़ी में दाखिल हुये हम तो बाजी ने मुझे गले लगा लिया, और मुझे बाजी की तेज धड़कन अपने सीने में महसूस हुई। मैंने भी बाजी का झप्पी लगा ली, और उनको किस करने लगा।

मुझे पता था टाइम कम है हमारे पास। इसलिए मैंने एक बाजी की फुद्दी पे हाथ रख दिया सलवार के ऊपर से ही। जो इस वक्त गीली हुई पड़ी थी। मैं समझ गया बाजी रास्ते में ही गरम हो गई थी। शायद पहले से सोचा हुवा था उन्होंने मुझसे आज चुदवाने का। बाजी में अपना दुपट्टा उत्तरा और नीचे कच्ची जमीन पे बिछा दिया

और अपनी सलवार उतार के उस पे लेट गई और मुझे भी सलवार उतारकर नीचे आने कहा।

मैंने सलवार उतारी और खड़े लण्ड के साथ उनकी टांगों में बैठ गया।

बाजी ने अपनी टाँग बायें दायें फैला ली और मुझसे कहा- "डाला अली अंदर जल्दी से कोई आ ना जाए?"

मैं आगे हुबा और लण्ड पे थूक लगाया और उनकी फुद्दी पे लण्ड रखा। लेकिन अंधेरा होने की वजह से मुझे मुश्किल हो रही थी। जो शायद बाजी को भी समझ लग गईं। क्योंकी मैंने पहले कभी फुद्दी मारी नहीं थी। बाजी ने अपने एक हाथ से मेरा लण्ड पकड़ा और फुद्दी के सुराख पे रखा, और मुझसे कहा अब पुश करो। मैंने लण्ड को जोर दिया तो लण्ड फैंसता हवा सारा अंदर चला गया। बाजी की फुद्दी आलरेडी खुली हुई थी। लेकिन फिर भी इतनी टाइट थी की लण्ड फैस के गया था।

बाजी की सिसकियां निकलने लगी। मैं अब घुटनों पे बजन डालकर लण्ड को आगे-पीछे करने लगा। फुद्दी की गरमी इतनी ज्यादा थी की मुझे लग रहा था मेरा लण्ड अभी पिघल जाएगा फुद्दी के अंदर। मुझे बाजी ने अपने ऊपर गिरा लिया और किस करने लगी। मैं अपने दोनों हाथों से बाजी की बगल से उनके चूतड़ दबा रहा था, जो मुझे बहुत मजा दे रहे थे। बाजी की जिल्द चिकनी थी। मेरे हाथ उनके चूतड़ों पे फिसल रहे थे। नीचे से जोर जोर से मैं धक्के लगा रहा था।

थोड़ी देर बाद है बाजी ने चूत को अंदर से दबा लिया, साथ ही मेरे लण्ड पे भी दबाओं आया। इतनी टाइट पकड़ थी की मेरे लिए मुश्किल हो गया लण्ड आगे-पीछे करना। फिर मुझे लण्ड में गरम पानी का एहसास हुवा जिसने जादू का काम किया। मेरा लण्ड भी फूलने फूलने लगा। मुझे लगा मेरा भी निकलने वाला है। जिसको बाजी ने महसूम कर लिया। उसने हाथ में मेरा लण्ड पकड़कर बाहर निकाला और लण्ड को जबरदस्त अंदाज में मूठ मारने लगी। बाजी के मूठ मारने का अंदाज किसी फुददी के स्वाद से कम स्वाद नहीं था। मुझे भी अपने लण्ड से जान निकलती महसूस हुई।

बाजी ने कहा- "तुम्हारा पानी नहीं निकलता?"

मैंने कहा- "नहीं बाजी.." फिर हमने कपड़े पहने और घर की तरफ चल दिए।

***** *****
 
कड़ी_15

हम घर पहुँचे बाजी सीधा टायलेट गई, और मैं सहन में बैठ गया खाला के पास। छोटी मामी ने चाय सर्व की

सबको। सभी चाय पीते हो बातें करते रहे। संछेप में मैं जल्दी सो गया। बन्योंकी लण्ड का सकून था अभी।

सुबह में उठ भी जल्दी गया। में बाहर निकल गया टहलने। जब वापस आया तो खाला भी उठ चुकी थी।

खाला ने कहा "बड़ी बात है तुम उठ गये आज इतनी सुबह.."

में मुश्कुरा के रह गया। मैंने खाला को कहा- "नाश्ता ला दें.."

खाला ने कहा "जूबिया बना रही है बस थोड़ी देर सबर कर लो.."

मैं चुप हो गया। कुछ देर बाद मामी ने नाश्ता दिया।

नाश्ता करके मैं उठने लगा तो मामी ने कहा- "बेटा तैयार रहना आज हम लोगों को शहर घूमने जाना है.."

मैं बड़ा खुश हुवा की चलो एंजाय होगा वहां, और कुछ मस्ती भी हो जायेगी। बाजी अमीना और लुबना भी बड़ी खुश हई। प्लान में बना की छोटे माम ने हमको लेकर जाना था। साथ में छोटी मामी, बड़ी मामी, खाला, में, लुबना और बाजी ने जाना था। डिनर भी रात को बाहर करना था।

इसलिये सभी उत्तेजित नजर आ रहे थे। शाम तक तैयारियां चलती रही। छोटी मामी चूड़ीदार पाजामी में इस बत भरपूर सेक्सी लग रही थी। लंबी टौंगें उनकी लुक को बढ़ा रही थी।

बड़ी मामी ने ब्लैक सूट पहना हुवा था जो गहरी गर्दन का था, कमीज टाइट थी। पीछे से देखने से मम्मे और चूतर अलग ही नजर आ रहे थे। कमर छोटी लग रही थी। जिम एकदम पूरा शेष में नजर आ रहा था। मामी के चूतड़ों की धिरकन साफ नजर आ रही थी जब वो चलती।

खाला जमीला भी इस बात कयामत ढा रही थी लाल कमीज और सफेद सलवार में। खाला इस वक़्त सेक्स बाम्ब बनी नजर आ रही थी। 3:00 बजे मामू भी आ गये दुकान बंद कर के। बड़े माम घर आ गये ताकी वो नानी के पास रह सकें।

हम 4:00 बजे घर से निकले। एक घंटा पार्क तक जाने में लगा। जब पार्क में एंटर हुये तब धूप की शिद्दत बहुत थोड़ी रह गई थी। पार्क में इस वक़्त काफी लोग थे, लेकिन भीड़ नहीं था। सबसे पहले हमने पार्क का एक चक्कर लगाया। मैं खाला के साथ-साथ चल रहा था। मामी जूबिया, बाजी और लुबना सबसे आगे उसके बाद माम और मामी, फिर मैं और खाला थोड़े-थोड़े फासले में हम आगे-पीछे चल रहे थे।

मैंने खाला का हाथ पकड़ रखा था। मैं बड़ा एंजाप कर रहा था। इस बात खाला के साथ पार्क में घूमाता हवा। खाला भी बड़ी खुश नजर आ रही थी। हम सब एक झूले के पास पहुँचे, जो गोल चक्कर में घुमाता था और साथ-साथ ऊपर नीचे भी होता था। माम में । टिकटें ले लिए। बड़ी मामी नहीं बैंठी, क्योंकी उनको चक्कर आ जाते थे।

मैं और खाला साथ बैठ गये। खाला थोड़ा घबराई हुई थी, बोली- "बेटा मुझे तो डर लग रहा है..."

मैंने कहा- "खाला, मैं हूँ ना आपके साथ। आप नहीं घबराओ.."
 
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