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Incest घर की मुर्गियाँ

विजय- "टीना बेटा, मैं तो अपने काम में इतना बिजी रहता था की तुझे कभी टाइम ही नहीं दे पाया। तू कब

इतनी बड़ी हो गई? मुझे पता ही नहीं चला। मैं तो आज तक तुझे छोटी बच्ची ही समझता आया था, सुख दुख के हर मोड़ पर तुझे भी किसी की जरूरत थी, तेरा भी कोई भाई होता जो तेरी जरूरतों का खयाल रखता.."

टीना - पापा, आज आपको मेरा इतना खयाल क्यों आ रहा है?

विजय- बेटा मुझे लगता है अब तू हमें छोड़कर चली जायेगी।

टीना- ऐसा क्यों बोल रहे है आप? मैं आपको छोड़कर भला कहां जाऊँगी?

विजय- ससुराल।

टीना शर्मा जाती है।

विजय- टीना बेटा, क्या तेरे पापा तेरे दोस्त नहीं बन सकते?

टीना मुश्कुराती है- “क्यों नहीं पापा?"

विजय- ठीक है। तो आज से मैं तेरा दोस्त भी हूँ और भाई भी और पापा भी। जब इतने रिश्ते होगे तो हम दोनों

के बीच कोई बात छिपनी नहीं चाहिए।

टीना- जी पापा मुझे आपसे दोस्ती करके बड़ी खुशी होगी।

विजय- एक बात पूछू?

टीना- जी पूछिए।

विजय- तुझे कैसा लड़का पसंद है?

टीना झेंप जाती है।

विजय- देखो अब मैं सिर्फ तुम्हारा पापा नहीं एक दोस्त भी हूँ, और दोस्त से शर्माते नहीं। बोलो अब?

टीना- पापा मुझे तो सलमान जैसा लड़का पसंद है।

विजय- आहह... मेरी बच्ची तो सलमान की फैन है। तुझे सलमान में क्या पसंद है?

टीना- स्मार्ट बदन और फिट बाडी।

विजय मुश्कुराते हुए- “बाडी... वो तो टापलेश सीन देता है। तुझे टापलेश बाडी पसंद है?"

टीना को अपने पापा से इतनी बोल्ड बातों की उम्मीद नहीं थी। टीना नजरें झुका लेती है।

विजय- टीना बेटा, तू बार-बार ऐसे शर्मायेगी तो दोस्ती खतम।

टीना- नहीं पापा, मैं कहां शर्मा रही हूँ।

विजय- तो बता तुझे टापलेश बाडी पसंद है?

टीना हाँ में गर्दन हिला देती है।

विजय- बेटा ऐसे नहीं बोलकर बताऊओ।

टीना- जी पापा।

विजय- बेटा तेरा कोई बायफ्रेंड भी है?

टीना- जी पापा।

विजय चौंकते हुए- कौन है वो?

टीना मुश्कुराते हुए- “मेरे पापा.."

विजय के चेहरे पर फिर से स्माइल आ गई- “तुझे मालूम है बायफ्रेंड क्या-क्या करते हैं?"

टीना- घूमते हैं, मूवी देखते हैं, और डान्स करते हैं।

विजय- और भी तो कुछ करते हैं।

टीना- और तो मुझे नहीं मालूम।

विजय- क्या बात कर रही है टीना, तुझे वाकई नहीं मालूम?

टीना- नहीं तो।

विजय- अच्छा देख सामने टेबल की दराज में तेरे लिए एक गिफ्ट रखा है। उठाकर ले आ।

टीना उठकर टेबल की दराज खोलती है। उसमें एक गिफ्ट पैक रखा था। टीना उठा लाई।

विजय- बेटा ये गिफ्ट अपने रूम में ले जाओ, और इसको रात में खोलना। फिर मुझे बताना गिफ्ट कैसा लगा?

टीना मुश्कुराती हुई- “पापा, मैं ब्यूटी पार्लर चली जाऊँ?"

विजय- हाँ बेटा चली जाओ, मगर जल्दी आना।

टीना- “जी पापा." और टीना ब्यूटी-पार्लर चली गई।
 
उधर समीर भी कंपनी पहँच गया था। काजल अभी तक संजना के घर पर थी। शाम 4:00 बजे काजल का फोन आता है- “हाय जीजू कैसे हो?"

समीर- यार कहां हो तुम? सुबह से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ।

ही मुझे लेने नहीं आए। जल्दी से आ जाओ मेरा भी यहां

काजल- मैं तो यही संजना दीदी के घर पर दिल नहीं लग रहा।

समीर- "बस आधे घंटे में पहुँचता हूँ.." और समीर जल्दी-जल्दी कम निपटाकर संजना के घर पहुँचता है।

काजल समीर का इंतजार कर रही थी। समीर काजल को लेकर निकल गया।

समीर- कहां चलना है बोलो?

काजल मस्ती के मूड में थी- “मैं तो बेघर हूँ, अपने घर ले चलो। घर में हो मुश्किल तो फार्महाउस ले चलो..."

समीर को काजल का ये अंदाज बड़ा ही मस्त लगा। समीर भी एक गाना गुनगुनाता है- “चलो चले दूर कहीं, प्यार के लिए ये जगह ठीक नहीं..” दोनों यूँ ही गुनगुनाते हुए जा रहे थे।

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समीर ने मार्केट से रबड़ी पैक कराई, और दोनों फार्मह अपनी बाँहो में भर लिया।

काजल- “हाय जीजू... क्या करते हो? संजना दीदी को पता चल गया की इस फार्महाउस का इश्तेमाल कैसे कर रहे हो तो?"

समीर- “मेरी जान, ये फार्महाउस तो मुझे संजना ने सुहागरात मानाने के लिए ही दहेज में दिया है। घरवाली के साथ मना चुका हूँ। अब आधी घरवाली के साथ भी मन जाय तो संजना को क्या फरक पड़ेगा?"

काजल- “अच्छा जी आपका इरादा सुहागरात मनाने.......” काजल बोलती-बोलती रुक गई।

समीर ने अपने होंठों को काजल के होंठों से टिका दिए। काजल भी समीर का साथ देने लगी।

समीर मन में- “ओहह... लगता है काजल की चिंगारी शोला है। अब तो आखिरी कील ठोंकने में ज्यादा देर नहीं करनी चाहिए। कहीं ऐसा ना हो की ये फल हमसे पहले कोई और खा जाय.." ये सोचकर समीर अपने हाथों को काजल की चूचियों पर रख देता है।

काजल की सिसकी निकाल गई। समीर काजल को गोद में उठा लेता है, और दिव्या के बेड पर लेजाकर लेटा देता है। समीर अपनी शर्ट पैंट उतारने लगा और सिर्फ अंडरवेर में काजल के ऊपर चढ़ गया। काजल बोलने के मूड में नहीं थी, चुपचाप लेटी समीर को देखती रही।

समीर के हाथ कब काजल की टी-शर्ट और लेगी उतार गये काजल को अहसास भी ना हआ। काजल और समीर दोनों टापलेश हो चुके थे। समीर मार्केट से जो रबड़ी लगा था, उसने वो रबड़ी काजल के सीने पर उड़ेल दी। काजल ने आँखें बंद कर ली।

MDAR

समीर- देखो काजल आज आँखें बंद नहीं करना।

काजल आँखें खोल देती है। समीर के होंठों में रबड़ी के साथ-साथ एक निप्पल भी आ जाता है। रबड़ी की मिठास में निप्पल का टेस्ट भी आने लगा। समीर बड़े ही प्यार से काजल के निप्पल को रबड़ी के साथ चूस रहा था।

काजल- "जीज्जूsss सस्स्सीईई.." काजल भी ये खेल खेलना चाहती थी।

काजल के निप्पल समीर के होंठों में ठीक से पकड़े नहीं जा रहे थे। निप्पल बहुत छोटे थे। समीर मुँह में निप्पल के साथ चूची भी चूसने लगा काजल अपना होश खोती जा रही थी, उसकी बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही थी।

काजल- "अहह... जिज्जूऽऽs क्य्या कर रहे हो?"

समीर को जैसे कुछ सुनाई नहीं दिया। बस काजल की अनछुई चूचियों को चूसे जा रहा था। काजल को बेड पर लिटाकर समीर काजल के ऊपर चढ़ गया। चूची को अपने मुँह में भर लिया। काजल की चूची ज्यादा बड़ी नहीं

थी, आम के साइज की आगे से नोक सी निकली म ठोस थी।

समीर- ओहह... काजल कितनी सेक्सी हो तुम... जी करता है तुम्हारा सारा रस चूस लूं।

काजल- “आहह... जीजू ये क्या होने लगा मुझे आईई... इसस्स्स... सस्स्सीईई अहह.."

समीर एक उंगली को रबड़ी में तर करके काजल के होंठों के करीब ले गया। काजल ने फौरन समीर की उंगली होंठों में भींच लेती है, और उसको बड़े ही मस्त तरीके से चूसने लगती है। समीर की पोजीशन ऐसी थी की लण्ड सीधा चूत पर दबाव डाल रहा था। काजल को भी लण्ड का अहसास होने लगा।

समीर अब आगे बढ़ते हुए अपने होंठों को अब काजल के होंठों से लगाता है और एक हाथ को काजल की पैंटी में डाल देता है। काजल की चूत पूरी गीली हो चुकी थी। समीर एक उंगली को चूत की फांकों में फेरते हुए काजल को किस करता जा रहा था। काजल की तड़प पूरी चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी, और सिसकियां भी लगातार बढ़ती जा रही थी।

काजल- “आअहह.. उईईई... सस्सीई... जिज्जू हाईईई.. जिज्जू मुझे कुछ-कुछ हो रहा है... आअहह... आss सस्स्सीईई... उम्म्म्म ...”

फिर समीर अपने दोनों हाथों से काजल की पैंटी नीचे खिसका कर गीली हो चुकी चूत में उंगली से सहलाने लगा और एक उंगली को चूत में डालने की कोशिश करने लगा। मगर चूत बहुत टाइट थी। उंगली घुसाने में काजल को दर्द से आहह... निकल गई।

समीर यूँ ही अपनी उंगली चूत पर फेरता जा रहा था। फिर नीचे खिसकता चला गया, और अपने होंठों को चूत पर टिका दिया। काजल की सांसें अटक गई। समीर चूत पर रबड़ी डालकर चूसने लगा। काजल का जिश्म अकड़ता जा रहा था। काजल के हाथ समीर के बालों को नोचने लगे, और समीर के सिर का दबाव भी चूत पर डालने लगी।
 
काजल- “अहह... इसस्स्स... जीजू कुछ करो प्लीज़्ज़.." और काजल ने हाथों में बेड की चादर पकड़ रखी थी।

समीर चूत की फांकों में जीभ को अंदर घुसाने लगा। काजल की चूत बस किसी भी पल पानी छोड़ने वाली थी बस अब काजल का कंट्रोल खतम गो गया, और काजल ने समीर के होंठों पर अपना पानी छोड़ दिया। समीर को काजल का चूतरस बड़ा ही स्वादिष्ट लगा और सारा का सारा चूतरस समीर गले से नीचे उतार गया, और एक डकार लेकर चूत से हटकर ऊपर काजल से पूछता है।

समीर- कैसा लगा साली जी मेरा प्यार?

काजल- जीजू बहुत गंदे हो आप।

समीर- क्यों जी मजा नहीं आया?

काजल- हाँ... आय्या।

समीर अपना अंडरवेर उतारने लगा। काजल की नजरें भी समीर के अंडरवेर पर थीं और समीर का लण्ड फँफनता हआ अंडरवेर से बाहर निकल आया।

समीर- “साली साहिबा, तुम्हारा खिलोना कैसा है देखो छूकर?" कहकर समीर थोड़ा आगे को होता है। लण्ड एकदम सीधा खड़ा था।

काजल लण्ड को देखे जा रही थी।

समीर- क्या हुआ साली जी पसंद नहीं आया?

काजल- नहीं जीजू, ऐसी बात नहीं है।

समीर- फिर पकड़ क्यों नहीं रही?

काजल- नहीं जीजू, मुझे डर लगता है।

समीर हाहाहा... हँसते हुए- “क्यों भला?"

काजल- बस यूँ ही।

समीर- "कुछ नहीं होता, पकड़ो भी..." और समीर काजल के हाथों को पकड़कर अपने लण्ड पर रख देता है- "खेलो इससे। तुम्हारी बहन दिव्या को बहुत प्यारा है ये.."

काजल- अच्छा जी... जीजू कैसे प्यारा है?

समीर- अपने होंठों से प्यार करती है इसे।

काजल- क्या होंठों से?

समीर- ऐसे क्यों चौंक रही हो साली साहिबा? तुम भी अपने होंठों से प्यार करो इसको।

काजल- नहीं। ये मुझसे नहीं होगा।

समीर- ऐसा मत बोलो। मेरा दिल टूट जायेगा।

काजल- जीजू, मुझे गंदा लगता है ये सब।

समीर- "एक बार करोगी फिर गंदा नहीं लगेगा...' और समीर अपने लण्ड को काजल के होंठों की तरफ ले जाकर कहता है- समीर- किस करो काजल इसे..."

काजल लण्ड को हाथ में पकड़कर टोपी को मुँह में लेकर हल्का सा किस करती है, और बाहर निकाल देती है।

समीर- ऐसे नहीं, मुँह खोलो।

काजल हल्का सा मुँह खोलती है और समीर झट से लण्ड मुँह में घुसा देता है। काजल गूं-गूं करती रह गई। समीर धीरे-धीरे लण्ड को मुँह में हिलाने लगा। काजल को अभी ये सब अच्छा नहीं लग रहा था। मगर जीजू की खातिर लण्ड को चूसने लगी और अंदर-बाहर करने में समीर का साथ देने लगी।

समीर के लण्ड में तनाव बढ़ता जा रहा था। अब काजल के मुँह में भी लण्ड आराम से अंदर-बाहर होने लगा। 5 मिनट में ही समीर को लगने लगा की लण्ड से पिचकारी छूटने वाली है। समीर जल्दी से काजल के मुँह से लण्ड बाहर खींचता है, मगर इतने में समीर के लण्ड से पिचकारी छूट गई और सीधा काजल के मुँह पर जा गिरी। काजल का सारा मुँह वीर्य से सन गया।

काजल- आह्ह... जीजू क्या करते हो? मुझे सारा गंदा कर दिया।
 
समीर काजल को उठाकर बाथरूम में ले जाता है और शावर खोल देता है। काजल और समीर दोनों नंगे एक दूसरे की बाहों में शावर में फ्रेश होने लगे।

समीर- कैसा लग रहा है साली जी?

काजल- मजा आ गया जीजू, तुम बहुत अच्छे हो।

समीर का लण्ड काजल की नंगी चूत से बार-बार टच हो रहा था, जिससे लण्ड फिर से खड़ा हो गया।

काजल- चलो जीजू नेहा इंतजार करती होगी।

समीर- अभी एक काम बाकी है।

काजल- क्या?

समीर काजल को गोद में उठाता है और लाकर बेड पर लिटा देता है, और काजल की टांगों को फैलाने लगता है।

काजल- क्या कर रहे हो जीज?

समीर- “तुम्हें फूल बना रहा हूँ.." और समीर ने अपने लण्ड को चूत पर छू दिया

काजल की सांस अटक गई- “नहीं जीजू नहीं, ये नहीं करो..."

समीर- “साली जी कुछ नहीं होगा...” और समीर लण्ड को चूत पर सहलाने लगा।

काजल की सांसें किसी अनहोनी से अटकने लगी, और काजल का जिश्म भी फड़फड़ाने लगा। एक अनकहा डर था काजल को। समीर लण्ड को चूत पर सहलाये जा रहा था। लण्ड के अहसास ने काजल के रोंयें तक खड़े कर दिए थे। समीर के चेहरे पर काजल की हालत देखकर मश्कान आ गई, और समीर लण्ड को ऐसे ही चूत पर फेरता जा रहा था।

काजल को धीरे-धीरे यूँ मसाज करना अच्छा लगाने लगा।
 
काजल को धीरे-धीरे यूँ मसाज करना अच्छा लगाने लगा।

समीर- कैसा लग रहा है साली जी?

काजल- अच्छा एहसास है जीजू।

समीर- काजल देखो अब थोड़ा दर्द होगा, सह लेना।

काजल- क्या करने वाले हो जीजू?

समीर- अपना ये लण्ड तुम्हारी चूत डालने वाला हूँ।

काजल- “नहीं जीजू, ये तो बहुत छोटी है और आपका ये इतना बड़ा.. कैसे जायेगा?" काजल मना तो कर रही

थी, मगर दिल के किसी कोने से ये आवाज भी आ रही थी- "जाने दे अंदर...”

समीर- मेरी जान फिकर ना करो, ये आराम से चला जायेगा।

काजल को डर भी लग रहा था और जाने क्यों दिल भी चाह रहा था।

समीर लण्ड पर थूक मलने लगता है, और फिर काजल की टाँगें फैला देता है, और काजल की चूत का छेद समीर को दिख जाता है। समीर लण्ड की टोपी को धीरे से चूत के छेद पर सेट करता है।

काजल की सिसकी निकल जाती है- “आहह... जीजू संभाल्लकर."

समीर बड़े ही धीरे-धीरे लण्ड को सरकाने लगा। मगर लण्ड छेद में घुस नहीं रहा था और फिसल कर नीचे हो गया।

काजल- “आईई... इसस्स्स्श

ह... जीजू ये नहीं जायेगा अंदर..."

समीर- “एक बार और ट्राई करता हूँ..” और समीर फिर से लण्ड को छेद पर टिकाता है और काजल के होंठों पर अपने होंठ रखकर चूत पर थोड़ा तेज दबाव डालता है। इस बार लण्ड की टोपी चूत में घुस गई। काजल की जान निकलने को हो गई। समीर की गिरफ्त बहुत टाइट थी।

काजल सिसकी- उईईई... आह्ह... अहह..."

समीर ने काजल को यूँ ही दबाये रखा। लण्ड की टोपी ही अभी चूत में थी। समीर थोड़ी देर यूँ ही रुक गया। काजल की हालत बड़ी खराब थी। समीर काजल की चूचियों को धीरे-धीरे मसलने लगा और होंठों को भी चूसता रहा। जिससे काजल थोड़ी देर बाद कुछ नार्मल सी हुई। समीर ने धीरे से काजल के होंठों को आजाद किया।

काजल- “आईईई... जीज्जू बहुत दर्द हो रहा है... ब्बाहर निकाल्लो... उईईई... मा..."

समीर- बस काजल हो गया अब तो।

काजल- नहीं जीज्जू.. बहुत दर्द हो रहा है... आईईई.. आहह.."

समीर सोचने लगा- "अगर लण्ड बाहर निकाल लिया तो फिर काजल दुबारा डलवाने को तैयार नहीं होगी। मुझे काजल की परवाह किए बगैर लण्ड को पूरा घुसाना होगा.." ये सोचकर फिर से समीर काजल को अपनी गिरफ़्त में लेकर एक और जोरदार धक्का मार देता है।

लण्ड काजल की झिल्ली को फाड़ता हुआ चूत में आधे से ज्यादा घुसता चला गया। काजल की जैसे जान ही निकाल गई। काजल समीर की बाँहो में एकदम बेजान सी हो गई। समीर भी काजल की हालत देखकर डर गया

और लण्ड को यूं ही छोड़कर होंठों को काजल के होंठों से अलग किया।

मगर काजल अपना होश खो चुकी थी। काजल की आँखों में आँसू निकले हुए थे। समीर काजल के चेहरे को सहलाने लगता है।

समीर- "काजल... काजल क्या हआ? आँखें खोलो..."

मगर अभी भी काजल की आँखें बंद थी। समीर ने बेड के पास से पानी की बोतल उठाई और थोड़ा पानी के छींटे काजल के चेहरे पर डाली। काजल को होश आया और अपनी आँखें खोलकर समीर को देखने लगी।
 
काजल “दर्द से तड़प रही थी- “आईईई... जीजू तुमने तो मुझे मार डाला प्लीज़्ज... निकाल लो.."

समीर- काजल वाकई तुम्हारी चूत बहुत छोटी है। मेरा लण्ड भी अंदर ही फँस गया है, निकाल ही नहीं रहा।

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काजल- बाहर को खींचो।

समीर जैसे ही लण्ड को बाहर खींचता काजल दर्द से तड़प जाती।

काजल- "जीजू अभी थोड़ी देर यूँ ही रुक जाओ.." और काजल नार्मल होने की कोशिश कर रही थी।

उधर समीर धीरे-धीरे काजल की चूचियां सहलाने लगा, और नीचे झुक कर चूची को मुँह में भर लेता है काजल के निप्पल थोड़े-थोड़े हाई हो चुके थे। समीर अपने होंठों से निप्पल को चूसने लगा।

काजल की दर्द और उत्तेजना की मिली जुली सिसकियां निकल रही थीं। समीर का लण्ड चूत में जाम हो चुका था। काजल की चूचियों को चूसने से काजल की चूत में गीलापन आने लगा। जिससे समीर को अपने लण्ड की पकड़ चूत पर कुछ हल्की महसूस हुई, और समीर निप्पल को बड़ी ही मस्ती में चूसने लगा जिससे काजल की

चूत पानी छोड़ती जा रही थी।

समीर को अब लगा जैसे वो अब लण्ड बाहर खींच सकता है, कहा- “काजल अब देखू बाहर खींचकर?"

काजल- हाँ देख लो।

समीर धीरे-धीरे लण्ड को थोड़ा सा बाहर खींचता है। लण्ड करीब दो इंच बाहर आ गया था। फिर समीर को एक

आईडिया सूझता है।

समीर- साली जी एकदम बाहर नहीं खींच सकता।

काजल- क्यों नहीं खींच सकते?

समीर- अगर अंदर ही टूट गया तो?

काजल- फिर कैसे निकालोगे?

समीर- मुझे थोड़ा-थोड़ा अंदर-बाहर करके निकालना पड़ेगा।

काजल- ठीक है जीजू।

समीर ने वापिस लण्ड को अंदर कर दिया।

काजल की हल्की सी सिसकी निकाल गई- “अहह... अहह... जीजू धीरे-धीरे,

फिर समीर धीरे-धीरे लण्ड को आगे-पीछे करने लगा। चूत गीली होने से चूत में जगह बनने लगी। समीर थोड़ा

सा बाहर निकालता फिर उतना ही अंदर कर देता। लण्ड अब आराम से अंदर-बाहर हो रहा था। समीर ने काजल को कली से फूल बना दिया था। काजल का दर्द भी अब मजे में बदल चुका था। काजल की सिसकियो से समीर को ये अहसास हो गया।

काजल- “आहह... आहह... हाँ हाँ अहह... सस्स्सीईई... अहह..."

समीर- अब कैसा लग रहा है साली जी?

काजल- जीजू, आहह... ऐसे ही करते रहो।
 
समीर ने काजल के होंठों को किस करते हए धक्के तेज कर दिए। अब काजल को भी मजा आने लगा और काजल भी नीचे से धक्के लगाने लगी।

काजल- “आअहह... सस्सीई... उह्ह... फुच-फूच सस्स्सीईई... ऊहह... उम्म्म्म

... आअहह..."

समीर दे दनादन लण्ड अब आराम से अंदर-बाहर कर रहा था।

काजल- “आहह... जीजू ऐसे ही करो...”

समीर भी चूत में लण्ड अंदर-बाहर किए जा रहा था। काजल का जिश्म अब अकड़ना शुरू हो गया, और काजल ने समीर की कमर में नाखून गाड़ दिए। काजल को ऐसा अहसास पहली बार हो रहा था। काजल अपनी चूत को ऊपर करती चली गई, और ढेर सारा चूतरस छोड़ दिया। काजल तृप्त हो चुकी थी।

समीर के धक्के अभी भी लगातार स्पीड बनाए हुए थे, और फिर समीर के लण्ड में भी अकड़ाहट होने लगी और दो-तीन जोर के झटका मारकर समीर लण्ड बाहर खींच लेता है। लण्ड से पिचकारी छुटने लगी, और फिर समीर भी धम्म से काजल के ऊपर ही गिर पड़ा। दोनों थक के चूर, जाने कब तक एक दूसरे के ऊपर लेटे रहे।

शाम के 6:00 बजे काजल को होश आता है- "जीजू उठो 6:00 बज गये। घर नहीं चलना क्या?"

फिर दोनों जल्दी-जल्दी फ्रेश होते हैं। काजल ने चल हुए बेड पर नजर डाली। चादर पर एक बड़ा सा खून का

धब्बा नजर आया समीर की नजर भी धब्बे पर गई, और समीर ने चादर को बाथरूम में लेजाकर पानी के टब में डाल दिया, और दोनों घर के लिए निकाल पड़े।

इधर टीना भी ब्यूटी-पार्लर से घर आ चुकी थी। अभी तक टीना ने पापा का दिया गिफ्ट नहीं खोला था। टीना किचेन में पापा के लिए खाना बना रही थी। विजय वहीं किचेन में आ जाता है।

टीना- पापा कैसी तबीयत है अब आपकी?

विजय- तेरे हाथों में जादू है, थोड़ी सी मालिश ने एकदम दर्द गायब कर दिया।

टीना के चेहरे पर भी मुश्कान दौड़ गई।

विजय- क्या बना रही है मेरी बिटिया?

टीना- पापा मटर पनीर।

विजय- वाह... मेरी फेवोरिट है। जल्दी से बना लो, बड़ी जोरों की भूख लगी है।

टीना- बस पापा 5 मिनट में लाई।

विजय- “ओके। तब तक मैं नहाकर फ्रेश हो जाता हूँ.." और विजय बाथरूम में चला गया।

पाँच मिनट बाद खाना तैयार हो गया। टीना ने खाना ट्रे में लिया और पापा के रूम की तरफ चल दी। विजय के कपड़े बेड पर पड़े थे।

टीना- पापा आ जाइए, खाना तैयार है।

विजय की बाथरूम से आवाज आती है- “बस बेटा, दो मिनट में आया..."

बेड से कपड़े उठाकर पहनने

दो मिनट बाद विजय हाथ में तौलिया पकड़े अपने अंडरवेर को कवर कर लगता है। जैसे ही विजय ने तौलिया हटाया, टीना की नजर सीधे अंडरवेर

टीना मन ही मन सोचती है- “आहह शिट... मेरी नजर भी कहां जा रही है? कछ तो शर्म कर टीना?"

विजय- क्या सोचने लगी टीना?
 
टीना एकदम हड़बड़ा गई और जल्दबाजी में मुंह से निकल गया- “कुछ नहीं पापा। पहले खाना खा लीजिए, कपड़े बाद में पहन लेना..."

बस फिर क्या था विजय यूँ ही अंडरवेर में बेड पर टीना के सामने बैठ गया, और दोनों खाना खाने लगे। अब टीना की नजर कैसे बच सकती थी? ना चाहते हुए भी बार-बार पापा के अंडरवेर पर नजर पहुँच जाती थी।

विजय- वाह बेटा, खाना तो बड़ा ही सवादिष्ट बनाया है तूने। मेरी बच्ची तो वाकई बड़ी हो गई है।

टीना- अच्छा तो आप मुझे अब तक बच्ची समझते थे?

विजय- समझता था। मगर अब लगता है जैसे तू कब की जवान हो गई।

पापा के इस तरह जवान कहने से टीना को शर्म सी महसूस हुई, और थोड़ी देर के लिए चुप हो गई।

विजय- क्या हुआ टीना क्यों चुप हो गई?

टीना- कुछ नहीं पापा।

विजय मटर पनीर की सब्जी का एक कौर टीना की तरफ बढ़ाता है- “लो बेटा एक कौर मेरे हाथ से खाओ..."

टीना मुँह खोल देती है- “अब मैं भी अपने पापा को अपने हाथ से खिलाऊँगी." और टीना भी एक कौर हाथ में लेकर जैसे ही विजय की तरफ बढ़ाती है टीना का बेलेंसे बिगड़ जाता है और हाथ सीधा सब्जी की प्लेट में। सारी सब्जी विजय के ऊपर गिर जाती है।

विजय- बेटा, मैं सब्जी मुँह से खाता हूँ। \

टीना- आहह... सारी पापा, वो मेरा बेलेंसे स्लिप हो गया।

विजय- “कोई बात नहीं, मुझे अब दोबारा नहाना पड़ेगा..."

सब्जी विजय के नंगे पेट पर और अंडरवेर पर जा गिरी थी। अब तो टीना की नजरें सीधे अंडरवेर पर ही थीं। अंडरवेर से लण्ड की शेप टीना को साफ नजर आ रही थी। विजय बेड से उठता हुआ बाथरूम में पहुँच गया। टीना बर्तन उठाकर बेड की चादर उतारने लगी।

तभी बाथरूम से विजय की आवाज आती है- “बेटा मेरे कपड़े दे देना.."

टीना पापा के कपड़े उठाकर बाथरूम के दरवाज ।है। दरवाजा खुला था। टीना की नजर जैसे ही अंदर गई टीना के रोंगटे खड़े हो गये। पापा एकदम नंगे सावर के नीचे खड़े थे। लण्ड एकदम किसी रोड की तरह सीधा तना हुआ था। ऐसा लग रहा था जैसे पापा का लण्ड खड़ा हो।

टीना का हलक मूखने लगता है और चूत में एकदम खारिश सी पैदा होने लगती है। मगर टीना को ये अहसास होता है। ये क्या कर रही है तू? ये तेरे पापा हैं। टीना अपने दिल को समझाकर अपनी नजरें हटा लेटी है, और पापा को आवाज देती है।

टीना- पापा आपके कपड़े।

विजय- बेटा रुको, अभी लेता हूँ।

टीना की धड़कनें बढ़ने लगती हैं। टीना कुछ सोचकर अपनी आँखें बंद कर लेती है। विजय दरवाजे पर खड़ी टीना

को देखता है। टीना की दोनों आँखें बंद थी। विजय हाथ आगे बढ़ाकर टीना से कपड़े ले लेता है।

टीना से पापा के रूम में अब रुका नहीं जा रहा था। वो जल्दी-जल्दी बेड पर दूसरी चादर बिछा देती है, और खाने के बरतन उठाकर रूम से बाहर निकल जाती है। किचेन में सफाई करते हुए बार-बार टीना के जेहन में पापा का नंगा जिश्म आ रहा था। टीना जल्दी-जल्दी सफाई करके ऊपर अपने रूम में पहुँचती है, और दरवाजा

अंदर से बंद कर लेती है।

टीना की धड़कनें 100 किलोमीटर की रफ्तार से धड़क रही थी। टीना धड़ाम से अपने बिस्तर पर गिर जाती है,

और अपनी सांसों को कंट्रोल करने की कोशिश करने लगती है। थोड़ी देर में टीना नार्मल हो जाती है।
 
रात के 9:00 बज चुके थे। टीना आज पूरी तरह गरम हो चुकी थी। चूत में बड़ी आग भड़क रही थी। ऐसी आग सिर्फ लण्ड मा सकता था। मगर अब टीना को नेहा के घर रुकने पर विजय ने पाबंदी लगा दी थी। तभी टीना को सुबह पापा का दिया गिफ्ट याद आता है, और वो गिफ्ट पैक खोलने लगती है।

टीना सोचती है- “अभी तो मेरा बर्थ-डे भी एक महीने बाद है। फिर पापा ने मुझे आज गिफ्ट किस खुशी में दिया? क्या हो सकता है इसमें? टीना ने अब तक गिफ्ट की पैकिंग खोल दी थी। और जैसे ही डब्बे को खोला तो टीना की आँखें खुली की खुली रह गई।

टीना- “ओह माई गोड... लेडीस अंडरगार्मेंट्स... पापा मेरे लिए लाये? टीना को यकीन नहीं आ रहा था। पापा ने ये गिफ्ट मुझे क्यों दिया?" टीना एकदम पत्थर की बुत बनी गिफ्ट को देखे जा रही थी। टीना सोच रही थी पापा ने ये गिफ्ट क्यों दिया? मगर कोई जवाब नहीं मिल रहा था। क्या पापा मुझे माडल बनाना चाहते थे? या इस रूप में देखना चाहते हैं? या मेरे साथ सेक्स करना चाहते है? छीः छीः ये मैं क्या सोचने लगी। टीना विजय के दोस्त अजय से और समीर से सेक्स कर चुकी थी। मगर जाने क्यों पापा के नाम से ही आज टीना को अपने आप पर बड़ी शर्म आ रही थी..."



टीना ब्रा सेट वापस डब्बे में करके अलमारी में रखती है और लाइट बंद करके बिस्तर पर लेट जाती है। थोड़ी देर बाद टीना को फिर से पापा का नंगा जिश्म याद आ जाता है। टीना में सेक्स की आग भड़कने लगती है, और टीना अपनी चूचियों को हाथों से मसलने लगती है। मगर आग तो चूत में लगी थी। चूची मसलने से क्या होगा? और टीना सलवार का नाड़ा खोल देती है और अपनी उंगली को चूत में घुसा देती है। चूत पूरी तरह भीग चुकी थी। चूत की आग आज उंगली से भी बुझने वाली नहीं थी।

तभी टीना को डिल्डो का खयाल आता है, और फिर टीना उठकर बाथरूम में पहुँचती है, और सेल्फ पर रबड़ का लण्ड देखती है। मगर यहां से (डिल्डो) रबड़ का लण्ड गायब था। अब टीना की सिट्टी पिट्टी गम हो गई। सारा जोश एकदम ठंडा पड़ गया। फिर टीना को ये यकीन हो गया की डिल्डो जरूर पापा के हाथ लग गया।

टीना चुपचाप आकर बेड पर लेट गई, और सोचने लगी- “कैसे सामना करूँगी पापा का? जब पापा मुझसे इसके बारे में पूछेगे...

टीना बेचारी ये सब सोच रही थी, तभी टीना का मोबाइल बजता है। टीना को जैसे मोबाइल की आवाज सुनाई ही नहीं दी, और मोबाइल बजते-बजते बंद हो गया।

थोड़ी देर बाद फिर से मोबाइल बजता है। इस बार टीना को जैसे होश आया हो। टीना उठकर देखती है। ये तो पापा की काल थी।

टीना- हेलो।

विजय- बेटा क्या कर रही हो?

टीना- पापा सो गई थी।

विजय- इतनी जल्दी?

टीना- जी आज थकान हो रही थी।

विजय- चलो सो जाओ गुड नाइट।

टीना- गुड नाइट पापा।

*****

*****
 
दूसरी तरफ काजल और समीर घर पहुँच चुके थे। काजल की हालत ज्यादा बढ़िया नहीं थी। टांगों में चलते हुए बड़ा दर्द हो रहा था। मगर काजल किसी पर अपना दर्द जाहिर नहीं करना चाहती थी। सबके साथ डिनर करके काजल अपनी भाभी नेहा के रूम में पहुँचती है। फिर भी काजल की चाल नार्मल नहीं थी।

नेहा- क्या हुआ मेरी ननद को?

काजल- कुछ नहीं भाभी, वो पर फिसल गया था।

नेहा- अच्छा जी। मूव लगा दूं?

काजल- नहीं, ऐसे ही ठीक हो जायेगा।

नेहा- "तुम यहीं लेटो, मैं हल्दी वाला दूध लाती हूँ..” कहकर नेहा नीचे चली जाती है।

काजल लेटे हए सोचती है- "सेक्स करने में जब मेरी इतनी बुरी हालत हो गई। मगर भाभी को भइया से सेक्स करते हुए इतना दर्द क्यों नहीं हुआ। जबकी भइया का तो लगता था समीर से भी बड़ा था। भाभी ने तो बड़े मजे से उस रात कई बार सेक्स किया। फिर मेरी ऐसी हालत क्यों हो गई?"

काजल लेटे हुए यही सोच रही थी। तभी नेहा हल्दी वाला दूध काजल को देती है, और काजल दूध पी जाती है।

नेहा- बस अब आँखें बंद करके सो जाओ, सुबह तक दर्द चला जायेगा।

काजल आँखें बंद करके लेट गई। मगर चूत में अभी भी दर्द हो रहा था। काजल को नींद नहीं आ रही थी। नेहा रूम की लाइट बंद करके काजल के बराबर में लेट जाती है। करीब रात के 11:00 बजे नेहा ब पीरे से उठती है, और रूम से बाहर निकल जाती है।

अभी तक काजल को भी नींद नहीं आई थी। काजल नेहा के इस तरह उठकर जाने से हैरान थी, और धीरे से उठकर देखती है की नेहा कहां जा रही है?

काजल जैसे ही दरवाजे से बाहर देखती है, तो नेहा समीर के रूम में जाती दिख गई। काजल मन में- "ओह माई गोड... क्या भाभी अपने भाई से ही... ...." काजल को तो यकीन नहीं हो रहा था।

काजल पूरी तरह कनफर्म करना चाहती थी। इसलिये लड़खड़ाते कदमों से समीर के रूम की तरफ चल दी। समीर के रूम का दरवाजा अंदर से बंद हो चुका था। मगर रूम की लाइट जली हुई थी जिससे काजल को दरवाजे में एक झिरी दिखाई दे गई, और फिर काजल ने अपनी आँखें झिरी से टिका दी। रूम का नजारा काजल को एकदम क्लियर देखने लगा। जैसा सोचा था बिल्कुल वैसा ही सीन काजल के सामने था।

समीर ने नेहा को बाँहो में भींच रखा था और नेहा की गर्दन को चूम रहा था।

काजल मन में- “ओहह... तो ये राज है भाभी का? भाभी का तो चरित्र खराब है। क्या मुझे राहल भइया से इस बारे में बात करनी चाहिए?" काजल अपनी भाभी नेहा के बारे में जाने क्या-क्या सोचे जा रही थी।

तभी समीर के बोलने की आवाज सुनाई देती है- "काजल सो गई क्या?"

नेहा- जी भइया, आज काजल का पैर स्लिप हो गया था। पैर में दर्द बता रही थी। हल्दी वाला दूध पीकर तभी सो गई थी।

समीर- और सुना बहना, राहुल कितना प्यार करता है तुझे?

नेहा- भइया वो तो मुझे दीवानों की तरह प्यार करते हैं। रात भर सोने नहीं देते और दिन में मोका मिल जाय तो दिन में भी। वो तो यहां भेजने को भी तैयार नहीं थे की कैसे रहँगा तेरे बिना? और सास ससुर भी बेटी की तरह प्यार करते हैं, और मेरी ननद काजल एक दोस्त की तरह। उसने तो टीना की कमी का अससास भी होने दिया। बिल्कुल टीना की तरह चुलबुली है।

समीर- वाह... नेहा तेरी किश्मत तो खुल गई।

नेहा- जी भइया। और भइया आपको एक बात और बताऊँ? उनका वो तो आपसे भी लगभग 3 इंच बड़ा है।

समीर- वाह नेहा.. तेरी तो बल्ले-बल्ले हो गई। मगर एक बात बता, पहली रात राहुल को तुझपर शक तो नहीं

हुआ?

नेहा- “नहीं भइया। जब उनका अंदर गया तो मुझे भी थोड़ा दर्द तो हुआ, और मैं थोड़ा जानबूझ कर भी चिल्लाई,

और राहुल मुझे हौसला देते रहे.."
 
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