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Incest घर की मुर्गियाँ

काजल ये बातें सुनकर असमंजश में पड़ गई- “क्या मुझे राहल भइया से भाभी और समीर के संबंधों के बारे में बताना चाहिए?" ये सोचते हुए काजल वहां से उठकर रूम में आकर लेट गई और सोचने लगी- "भाभी तो राहल के साथ खुश है, अगर मैंने भइया से ये बात बता दी तो राहल भइया जाने क्या कर बैठें? नहीं नहीं, मैं भइया से कुछ नहीं कहूँगी। कुछ दिन की ही तो बात है। फिर तो भाभी को राहुल भइया के पास ही रहना है।

भाभी का चक्कर अपने भाई से है। घर की बात घर में ही दब जायेगी।

काजल को अब नेहा भाभी से कोई गिला नहीं था। एक सुकून का अहसास हो चुका था, जिससे काजल की आँखों में नींद की खुमारी आ चुकी थी।

उधर समीर के रूम में अब तक दोनों के कपड़े उतर चुके थे।

नेहा ने समीर के लण्ड से खेलना शुरू कर दिया था- "भइया क्या बात है, आज तो आपका साइज भी बड़ा सा लग रहा है?

समीर- दिव्या ने इसे तेरे जाने के बाद खूब प्यार दिया।

नेहा- “ओहो भझ्या ये बात है.." और नेहा ने मुँह खोलकर लण्ड का सुपाड़ा मुँह में भर लिया और कुल्फी की तरह चूसना शुरू कर दिया।

... ऊहह.. उम्म्म्म

... आअहह..

.

समीर- आअहह... नेहा तू तो बड़ी खिलाड़ी बन गई आईई... इसस्स्स्स नेहा मजा आ रहा है... सस्स्सी ... आअहह... उईईई...”

नेहा लण्ड को मुँह में लिए अपनी जीभ को चारों तरफ घुमाने लगी, जिससे समीर की उतेजना चरम पर पहुँचने लगी।

समीर- “आहह... बस बस आहह... नेहा रुक्क जा.." और समीर जल्दी से नेहा के मुँह से लण्ड बाहर खींच लेता है।

नेहा- क्या हुआ भइया, बाहर क्यों निकाला?

समीर- दूसरे घर में भी तो जाना है इसको।

नेहा- अच्छा जी.. पहले दूसरे घर की सफाई तो कर लो।

समीर नेहा की बात का मतलब समझ चुका था, और नेहा की टाँगें फैलाकर चूत के होंठों पर अपने होंठ टिका देता है। नेहा की चूत भी गीली हो चुकी थी। समीर दोनों फांकों के बीच अपनी जीभ घुसा देता है।

नेहा की सिसकी निकल जाती है- “आअहह.. भइया क्या चूसते हो... ऐसे ही... मजा आ रहा है..."

समीर यूँ ही चूत को चूसता रहा। लण्ड पूरा फौलद की तरह टाइट हो चुका था। बस अब समीर के लण्ड से बर्दाश्त करना मुश्किल था, और फिर नेहा की टाँगें और फैलाकर लण्ड को चूत के निशाने पर रखा और एक जोरदार शाट मार दिया। लण्ड एकदम बाउंड्री पर करता हुआ बच्चेदानी की दीवार से जा टकराया।

नेहा की बड़ी जोर से सिसकी निकल गई- “हाय भइया मर गई... आअहह... एक ही बार में पूरा घुसा दिया आपने।

एक दो धक्कों में ही नेहा की उहह... आहह.. में बदल गई।

नेहा- “आहह... अहह... अहह... सस्सीई... सस्सीई.. आह... ओहह... उम्म्म्म

... भइय्या.."

समीर ऊपर से और नेहा नीचे से धक्के पर धक्के लगा रहे थे। आधे घंटे की चुदाई में दोनों बुरी तरह से थक चुके थे। नेहा समीर को गुडनाइट किस देकर अपने रूम में चली गई, और समीर दरवाजा बंद करके यूँ हो नंगा सो गया।

*****

*****
 
दूसरी तरफ सुबह 6:00 बजे विजय की आँख खुलती है, और विजय उठकर बाथरूम में फ्रेश होता है। टीना अभी तक सो रही थी। विजय को सुबह-सुबह चाय पीने की आदत थी। विजय किचेन में पहुँचकर दो कप चाय बनाकर ऊपर टीना का रूम खटखटाता है।

विजय- टीना बेटा उठो।

टीना दरवाजा खोलती है। सामने पापा हाथ में चाय के दो कप पकड़े खड़े थे।

विजय- गुड मार्निंग।

टीना- गुड मार्निग पापा।

विजय मुश्कुराता हुआ अंदर टीना के बिस्तर पर बैठ गया।

टीना- पापा मुझसे बोल देते, चाय में बना देती।

विजय- कोई बात नहीं बेटा। आज अपने बायफ्रेंड के हाथ की चाय पीकर बताओ कैसी बनी है?

टीना चाय का कप लेकर, चाय का एक सिप लेती है- “वाह पापा... आपने तो बहुत बढ़िया चाय बनाई है। मजा

आ गया..."

विजय और टीना आमने सामने बैठे हए य की चुस्की ले रहे थे। विजय की नजरें बार-बार टीना के जिश्म को निहार रही थीं। टीना को भी इस बात का अहसास हो चुका था।

विजय- बेटा रात को बड़ी जल्दी नींद आ गई थी तुझे?

टीना- जी पापा, कल बहुत थकान हो रही थी।

विजय- अच्छा ये बता मेरा गिफ्ट पसंद आया?

टीना ये सुनते ही शर्म से कुछ बोल नहीं पाई और गर्दन नीचे कर लेती है।

विजय- क्या हुआ बेटा, तुझे मेरा गिफ्ट अच्छा नहीं लगा?

टीना फिर भी चुप रहती है।

विजय- कुछ तो बोल टीना, क्या तुझे वाकई पसंद नहीं आया?

टीना- नहीं पापा वो... ऐसी बात नहीं है.... बता नहीं सकती।

विजय- बता ना एक बार। अगर यूँ खामोश रहेगी तो मैं समझंगा तुझे मेरा गिफ्ट पसंद नहीं आया, और अगर पसंद आया हो तो अपनी गर्दन को ऊपर-नीचे ही कर दे।

अब टीना अपनी गर्दन ऊपर-नीचे कर देती है।

विजय- मेरी बेटी को गिफ्ट पसंद आया, तो थॅंक यू नहीं बोलेगी?

टीना- थॅंक यू पापा।

विजय- बस थॅंक यू से काम नहीं चलेगा।

टीना- पापा फिर मुझे क्या करना होगा?

विजय- मेरा गिफ्ट पहनकर दिखाओ।

टीना फिर खामोश।

विजय- बेटा क्या बात है तू बार-बार चुप हो जाती है? क्या तुझे मेरा आना बुरा लग रहा है।

टीना- नहीं पापा ऐसी बात नहीं है। आपके सामने मुझे शर्म आयेगी।

विजय- “मैं जानता हूँ ये तुझे पसंद है बेटा, और मुझे तेरा एक राज भी मालूम है..” विजय को टीना और नेहा

का अपनी दुकान पर सी.सी.टी.वी. कैमरे वाला सीन याद आ जाता है।

टीना का ये बात सुनकर दिल धड़कने लगता है। टीना सोचती है- “पापा डिल्डो की बात कर रहे हैं, और टीना की

आँखों में आँसू निकाल आते है, और टीना रोते हुए पापा से गिड़गिड़ाने लगती है- “वो... पापा सारी... मुझसे गलती हो गई, मुझे माफ कर दो..."
 
विजय टीना को रोता देखकर- “अरें... मेरा बहादुर बेटा कैसे रोने लगा?” और विजय टीना को अपने सीने से लगा लेता है- “अरें.. इसमें रोने वाली कौन सी बात है? तुझे पहनकर नहीं दिखाना तो मत दिखा.." और यूँ ही विजय टीना को अपने सीने से चिपकाये रहता है।

टीना ने सिर्फ काटन का कुर्ता पहना हुआ था, नीचे ब्रा भी नहीं थी। टीना की चूचियां विजय के सीने में धंस रही

थी और ये अहसास विजय को हो चुका था। विजय अपनी गिरफ़्त और टाइट कर लेता है।

विजय- बेटा इसमें रोने वाली क्या बात है? और रही बात गिफ्ट की तो मुझे दुकान पर बैठे हुए सी.सी.टी.वी. की रेकार्डिंग देखकर पता चला की तू और नेहा को ये कितनी पसंद है। इसलिए तेरे लिए ले आया। और मैंने तुझे पहने हुए कैमरे में भी देख लिया था, तो बोल दिया पहनकर दिखा दे..."

टीना सोचती है- “पापा इस राज की बात कर रहे थे, तो क्या पापा के हाथ डिल्डो नहीं लगा। अगर पापा को नहीं मिला तो फिर कहां चला गया? कहीं नेहा तो नहीं ले गई उसे?" अब टीना के दिल को थोड़ी राहत मिलने लगी

विजय के हाथ टीना की कमर को हल्के-हल्के सहलाने लगे थे। अब टीना को भी पापा की गिरफ़्त अच्छी लग रही थी। विजय एक हाथ टीना के बालों में फेरने लगा। अब टीना भी अपने हाथों को पापा की कमर में लपेट लेटी है, जैसे अपने आपको पापा में समा लेना चाहती हो। टीना का यूँ लिपटना विजय का हौसला बढ़ाने लगा

और अब विजय का हाथ कमर से नीचे सरकता हुआ चूतड़ों तक पहुँच गया।

विजय- "मेरी बेटी बहत खूबसूरत है, बहत ही प्यारी सी प्यारी परी है। टीना बोलकर बता ना कैसा लगा मेरा गिफ्ट?"

टीना- पापा वेरी वेरी ब्यूटीफुल, बहुत ही प्यारा है आपका गिफ्ट।

विजय ये सुनकर जोश में आ जाता है और अपने हाथ से टीना के चूतड़ों को अपने लण्ड की तरफ दबाने लगा। विजय ने कहा- "क्या मेरी गर्लफ्रेंड अपने बायफ्रेंड का दिया गिफ्ट पहनकर दिखायेगी?"

टीना- मगर एक बात तो बताइए की ये गिफ्ट किस खुशी में है? ना मेरा बर्थ-डे है, ना वेलेंटाइन डे।

विजय- बेटा अड्वान्स बर्थ-डे गिफ्ट।

टीना- “नहीं जी... बर्थडे पर तो मझे आपसे दो-दो गिफ्ट चाहिए। एक अपने प्यारे पापा से और एक अपने बायफ्रेंड से..."

विजय- अच्छा जी... मगर तुम्हें भी अपने बायफ्रेंड को कुछ देना होगा।

टीना- क्यों नहीं, मैंने अपने बायफ्रेंड के लिए ऐसा गिफ्ट सोच रखा है।

विजय ने अपना चेहरा टीना की तरफ बिल्कुल माथे के करीब करके पूछा- “कैसा?"

टीना- ये तो साइज है।

विजय- “ओहह... मेरी चुलबुली नटखट.." और विजय टीना का माता चूम लेता है, कहा- “मेरी गुड़िया गिफ्ट तो

पहनकर दिखा..."

टीना- आज नहीं, सनडे को।

विजय- सनडे को क्यों?

टीना- है कुछ स्पेशल।

विजय कुछ सोचने लगता है, जिससे टीना की पकड़ थोड़ी ढीली हो जाती है, और टीना पापा की बाँहो से निकलकर बाथरूम में घुस जाती है।

विजय- “ओह्ह... मेरी गुड़िया भाग गई." और विजय भी नीचे आकर सोफे पर बैठ जाता है। तभी उसकी नजर दीवार पर टंगें कैलेण्डर पर पड़ती है- “सनडे 5 मार्च..”

विजय- “ओह्ह... 5 मार्च तो मेरा बर्थ-डे है.." और विजय के चेहरे पर मुश्कान दौड़ गई।

टीना बाथरूम से फ्रेश होकर नीचे आती है। टीना सिर्फ जीन्स और टी-शर्ट पहनती थी। मगर आज टीना सलवार कमीज पहने हुए सीने को दुपट्टे से ढके हुए विजय के पास आती है।

टीना- पापा आपका टिफिन तैयार कर दं?

विजय टीना का ये रूप देखकर- “अरे... वाह... मेरी बिटिया तो इन कपड़ों में बड़ी गजब लग रही है।

टीना भी एक प्यारी सी स्माइल देती है।

अभी विजय टीना की खूबसूरती की तारीफ कर रहा था की तभी विजय का फोन बज उठता है। विजय देखता है ये तो किरण का फोन है।

विजय- “हेलो किरण, सब ठीक तो है? तुम्हारी माँ की तबीयत कैसी है अब?"

किरण- हाँ सब ठीक है। माँ की हालत में भी सुधार है। तुम आज मुझे लेने आ जाओ।

विजय- तुम तो अभी 4-5 दिन बाद आने वाली थी।

किरण- बस मम्मी की तबीयत अब ठीक है।

विजय- "ठीक है। मैं दोपहर ।

ऊँगा..." और फोन डिसकनेक्ट हो जाता है।

"

विजय टीना से- “टीना, लंच बाक्स तो कैन्सल हो गया.."

टीना- तो फिर अब नाश्ता ही तैयार कर दूं। क्या बनाऊँ नाश्ते में?

विजय- आलू के परांठे बना दे।

टीना- जी पापा।

फिर विजय नाश्ता करके तैयार होकर किरण को लेने निकल जाता है।

*****

*****
 
विजय के जाने के बाद टीना सोचती है- “आखीरकार, बाथरूम से रबड़ का लण्ड कहां चला गया?" टीना नेहा को काल करती है- "हाय नेहा कैसी है?"

नेहा- मजे में हूँ तू सुना?

टीना- तेरे पास कोई है क्या? काजल कहां है?

नेहा- नहीं तो कोई नहीं है। मैं अपने रूम में अकेली हैं।

जल नीचे मम्मी के पास है। क्या बात है?

टीना- यार वो डिल्डो नहीं मिल रहा, तू तो नहीं ले गई?

नेहा- क्या बात कर रही है भला मुझे डिल्डो की क्या जरूरत? मेरे लिए तो ओरिजिनल मौजूद है। वही ढूंढ रखकर भूल गई होगी।

टीना- नहीं यार, मैंने बाथरूम में ही रखा था।

नेहा- कहीं तेरे पापा के हाथ तो नहीं लग गया?

टीना- भला पापा मेरे बाथरूम में क्यों आयेंगे?

नेहा- यार मैं तो मजाक कर रही हैं। अकेले वहां पर क्या कर रही है? यहीं आ जा।

टीना- नहीं यार, आज कहीं जाने का मन नहीं है। बस लेटकर आराम करना है।

नेहा- चल ठीक है रखती हूँ बाइ।

टीना- बाइ।

अब टीना को और भी टेन्शन हो जाती है, और फिर कुछ सोचकर पापा के रूम में चल देती है, और पापा की अलमारी खोलने लगती है। मगर अलमारी में ताला लगा था। टीना सेफ की चाभी ढूँढने लगी। मगर कहीं अलमारी की चाभी नजर नहीं आती।

टीना- कहीं अलमारी के ऊपर तो नहीं है? और फिर टीना एक स्टूल पर चढ़कर देखती है, तो अलमारी की चाभी नजर आ जाती है। टीना को ऐसी खुशी मिलती है जैसे कोई खजाना मिल गया हो, और दिल की धड़कनों के साथ अलमारी खोलती है। मगर टीना को डिल्डो यहां भी नजर नहीं आया।

टीना- “आखीरकार पापा ने कहां छुपा दिया?" तभी उसे अलमारी में एक और लाकर नजर आता है, और टीना ने जैसे ही लाकर खोला तो टीना की नजरों के सामने डिल्डो रखा था। टीना ने जैसे ही डिल्डो देखा, तो टीना अपने आप से शर्मिंदा होने लगी।

टीना- आह्ह... शिट... ये सब कैसे हो गया मेरे साथ? पापा क्या सोचते होंगे?" और टीना परेशान सी पापा के बेड

पर बैठ गई। काफी देर यूँ ही बैठे रही।

टीना- “क्या करूं अब इसका? इसको उठाती हैं तो पापा की नजर में चोर भी बन जाऊँगी..." और फिर टीना यूँ ही अलमारी बंद करके नेहा के घर चली जाती है।

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उधर संजना भी अपनी कार से कंपनी जा रही थी। तभी एक बदहवास लड़की कार के सामने आ जाती है। ड्राइवर ने एक ब्रेक लगा दिए।

ड्राइवर- “ऐ पागल लड़की, मरना है क्या?"

लड़की संजना की तरफ आती है, और कहती है- “प्लीज़्ज... बचा लो। वो गुंडे मेरी इज्जत लूटना चाहते हैं.."

संजना उधर देखती है, तो 3-4 लोग दौड़ते हुए नजर आते हैं। संजना दरवाजा खोलती है- “बैठो जल्दी..” और लड़की फौरन गाड़ी में बैठ जाती है।

संजना- “चलो ड्राइवर..."

संजना उस लड़की को लेकर अपने आफिस में आ गई। संजना ने एक ग्लास में पानी भरकर उसे दिया।

संजना- क्या नाम है तुम्हारा?

लड़की- जी हिना।

संजना- ये कौन थे, जो तुम्हारी इज्जत लूटना चाहते थे?

हिना- “मैं राज होटल में काम करती हूँ। रोज आते जाते ये गुडे मुझे गंदे-गंदे कामेंटस देते हैं। आज तो इन लोगों ने मेरा हाथ पकड़ लिया...”

संजना- तुम जानती हो इन्हें?

हिना- हाँ, ये लोग हमारे मुहल्ले के ही है।

संजना- फिर तुमने पोलिस में शिकायत क्यों नहीं की?

हिना- मेम, कभी हिम्मत ही नहीं हुई घर की वजह से। मेरे घर में सिर्फ मेरी माँ और एक बहन है। पापा की पिछले साल बाइक से रोड आक्सिडेंट में मौत हो गई थी।

संजना- “आहह... सो सैड। बड़ा दुख हुआ सुनकर... फिर संजना समीर को अपने आफिस में बुलाती है, और समीर को हिना की पूरी कहानी बताती है।
 
संजना- “समीर, हिना को लेकर पोलिस स्टेशन जाओ, और इन चारों के खिलाफ शिकायत लिखवाओ.."

हिना- नहीं मेडम, मुझे डर लगता है। कहीं बाद में इन लोगों ने हमारे साथ... ..."

संजना- “अरे... हिना इसमें डरने की क्या जरूरत है? आज से तुम मेरी कंपनी में काम करोगी..." और फिर समीर हिना को लेकर उन चारों के खिलाफ शिकायत लिखवाता है।

पुलिस फौरन आक्सन लेती है। चारों को उठाकर जेल में डाल देती है।

समीर हिना को उसके घर छोड़ने जाता है।

हिना- सर, वो सामने वाला मकान है।

समीर घर के सामने गाड़ी रोकता है।

हिना गाड़ी से उतरते हुए- “आइए सर, एक कप चाय पीकर जाना..."

समीर- नहीं फिर कभी।

हिना- प्लीज़्ज... सर।

समीर हिना का आफर ठुकरा नहीं सका, और हिना के साथ घर में पहुँचता है। अंदर हिना की माँ रुखसार थी। समीर बोला- “नमस्ते माँ जी..."

माँ हिना से- “ये कौन है बेटा?"

हिना अपनी माँ को पूरी बात बताती है।

रुखसार- “बेटा तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया।

समीर- अरे... माँ जी ये तो हमारा फर्ज था।

तभी कमरे से हिना की बहन हुमा निकलती है। 18-19 साल की मासूम से चेहरे वाली लड़की। समीर हमा को देखता रह गया।

माँ रुखसार- हुमा बेटा, साहब के लिए कुछ नाश्ता ले आओ।

समीर- "नहीं माँ जी, सिर्फ एक कप चाय...” और चाय पीकर समीर वापस कंप चला जाता है

*****

*****
 
शाम 6:00 बजे टीना भी नेहा के घर से अपने घर पहँच गई। रात 8:00 बजे विजय किरण को लेकर आ गया। टीना को आज पापा के सामने बड़ी झिझक महसूस हो रही थी। और ऐसे ही दिन गुजरते चले गये,

आज सटर्डे था सुबह के 7:00 बजे काजल समीर के रूम में पहुँचती है।

काजल- “क्या बात है जीजू, आजकल बहुत बिजी रहते हो। अपनी साली को भूल ही गये। कल तो हम चले ही जायेंगे..."

समीर- नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है। आज का पूरा दिन आपके नाम।

काजल- वाउ सच में... जीजू फिर तो आज पूरी मस्ती होगी।

समीर- आज हम आपके गुलाम बनकर रहेंगे साली साहिबा।

काजल-फिर ठीक है। चलो तो फार्महाउस चलते हैं।

समीर- ठीक है, तुम तैयार हो जाओ।

काजल समीर के रूम से निकलकर नेहा के रूम में है। नेहा बाथरूम में नहा रही थी।

थोड़ी देर बाद सभी नाश्ते की टेबल पर थे।

अंजली- सुनो जी, कल नेहा चली जायेगी। दामाद जी पहली बार घर आ रहे हैं। बिदाई के लिए कपड़े वगैरह की शापिंग करा लाओ मुझे।

अजय- तुम समीर के साथ चली जाओ। मेरा आज दुकान पर माल आ रहा है।

समीर- पापा आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है।

अजय- क्या हुआ तुम्हारी तबीयत को?

समीर- लूज मोशन।

अजय- तो बेटा दवाई नहीं ली?

समीर- जी पापा ले ली।

अजय- "अंजली तुम नेहा के साथ चली जाओ..."

थोड़ी देर बाद अजय दुकान के लिए निकल गया, और अंजली और नेहा भी मार्केट चले गये। अब घर में सिर्फ समीर और काजल थे, और काजल भी पूरी मस्ती के मूड में थी।

काजल- “ओहह... तो मेरे प्यारे जीजू की तबीयत खराब है?"

समीर काजल को बाँहो में भरता हुआ- "आज तुम ही इलाज कर दो अपने जीजू का...”

काजल- क्यों नहीं.. आज मुझे ही तुम्हारा डाक्टर बनना पड़ेगा। चलो बिस्तर पर लेटो और बताओ क्या प्राब्लम

है।

समीर- मुझे ना... नींद नहीं आती, प्यास भी बहुत लगती है।

काजल- आह्ह.. ये प्राब्लम है। बड़ी ही खतरनाक बीमारी है।

समीर- आह्ह... इसके लिए मुझे क्या करना होगा?

काजल- तुम्हें इसके लिए एकदम ताजा दूध पीना चाहिए। और क्या प्राब्लम है?

समीर- बेचैनी बहुत होती रहती रही है।

काजल समीर के बिल्कुल पास बैठ गई, और कहा- “तुम्हारे अंदर बहुत गर्मी है। उसके लिए तुम्हें पूरे जिश्म को ताजी हवा खिलानी होगी..” और काजल समीर की शर्ट के बटन खोलने लगती है।

समीर- पर डाक्टर मुझे ताजा दूध कहां से मिलेगा?

काजल- “अब तुम्हारे लिए दूध का इंतजाम मुझे ही करना होगा.." और काजल समीर के पेट के ऊपर चढ़ बैठी।

काजल- जीजू ताजा दूध पीना है?

समीर- कहां से मिलेगा?

काजल- “थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी.” और काजल अपनी टी-शर्ट ऊपर निकालती चली गई। काजल के छोटे-छोटे मम्मे निकलकर समीर के सामने आ गये, जैसे दूध पीने का न्योता दे रहे हों।

समीर काजल की नोकदार चूचियों की खूबसूरती निहारता रह गया। फिर अपने हाथों को निप्पल पर फेरने लगा।
 
काजल ना चाहते हुए भी सिसकने लगी- "आईई... इसस्स्स... उईईई.

समीर यूँ ही काजल के निप्पलो को मसलता रहा, और काजल की सिसकियां बढ़ती गई, और समीर भी अब ताजा दूध पीने के लिए अपने होंठों को काजल के निप्पल से लगा देता है। उफफ्फ... दोनों की आहह... इस्स्स्स की सिसकियां निकल जाती हैं,

...

समीर काजल का ताजा दूध पीने लगता है। काजल के निप्पल चूसते-चूसते हार्ड होने लगे किशमिश की तरह। समीर निप्पल की नोक को ऐसे चूस रहा था, जैसे बच्चे दूध पीते हैं। और नीचे लण्ड में तनाव बढ़ता जाता है। समीर को काजल की चूचियां बड़ी ही स्वादिष्ट लग रही थी।

काजल की सिसकियां पूरे कमरे में गूंजने लगी- “अहह... आहह... इसस्स्स ... पी जाओ जीज्जू उम्म्म्म... चूस लो सारा दूध आअहह...

समीर काजल का जोश देखकर और मस्ती में चूसने लगा। नीचे समीर के लण्ड का आकार पूरी स्टील की रोड की तरह हो गया, और काजल की चूत पर ठोकर मारने लगा।

काजल- जीजू नीचे कुछ चुभने लगा है, क्या है ये?

समीर- है तुम्हारा चाहने वाला कोई।

काजल- “अच्छा जरा मैं भी तो देखू अपने सीकुए को.” और काजल सरकती हुई नीचे पहुँच गई। लण्ड को

अंडरवेर से बाहर निकाल लिया- “आहह... मेरा सीकुर आँसू क्यों बहा रहा है। वो मेरे सोना चुप हो जा। मैं अपने सोना को अभी बहुत सारा प्यार करूँगी..” और काजल अपना मुँह खोलती चली गई।

समीर को बड़ा ठंडा सा अहसास होने लगा, और समीर की भी आss निकल गई- “ऊहह... आई इस्स्स्स

... सस्सी ..."

काजल अब आइस्क्रीम की तरह लण्ड को चूस रही थी। पूरा अंदर तक ले जाती फिर बाहर निकाल देती। समीर के लण्ड में फुलाव बढ़ता जा रहा था। अब काजल के मुँह में लण्ड फँस-फँस कर जा रहा था, और समीर के लण्ड की हालत ऐसी थी की कभी भी सैलाब बह सकता था।

समीर- "उहह... साली जी मेरा होने वाला है..."

काजल एकदम से लण्ड बाहर निकाल देती है, और समीर के लण्ड की धार एकदम काजल की चूचियों पर जा गिरती है। काजल बोली- “आहह... जीजू ये क्या कर दिया आपने?"

समीर- "प्यार में ऐसा भी होता है साली साहिबा..." और समीर काजल को गोद में उठाता हआ बाथरूम में घुस गया और शावर खोल देता है। काजल और समीर शावर के नीचे ठंडे-ठंडे पानी में एक दूजे की बाँहो में होंठों को चूमने लगते हैं। समीर काजल के होंठों को दांतों में दबाकर चूस रहा था।

शवर के पानी में किसिंग काजल को और उत्तेजित कर रही थी। समीर काजल को चू 'अब नीचे की तरफ बढ़ने लगा। अपनी जीभ से काजल को ऐसे चाटत रहा था जैसे कोई मक्खन चाट रहा हो। अब समीर की जीभ काजल चूची को चाटते हुए पेट तक पहुँच गई थी। जब जीभ नाभि से नीचे जा रही थी, काजल में अकड़ाहट बढ़ने लगी और काजल का हाथ फौरन समीर के बालों में पहँच गया।

मगर समीर तब तक अपनी जीभ को काजल की गुलाबी चूत की फांकों में घुसा देता है। काजल तो जैसे तड़प ही गई। चूत में गीलापन और शावर का पानी मिल चुका था जो समीर चाट रहा था।

काजल- "हाय जीजू ऊहह... आअहह... उम्म्म्म

... उईईई... आअहह... सस्स्स्सी ..."

समीर चूत की गहराई तक अपनी जीभ घुसाने लगा। काजल की टाँगें अब काँपने लगी और फिर काजल को ऐसा लग रहा था जैसे चूत से कोई ज्वालामुखी निकलने वाला है। और फिर काजल समीर के सिर को अपनी चूत में घुसाये जा रही थी।

काजल- "आअहह... सस्स्सी ... उईईई... आआआ आह्ह... अहह...” और बस काजल का झरना बह गया, जिसे समीर ने अपने गले में उतार लिया। काजल अब पूरी तरह तृप्त हो चुकी थी।

थोड़ी देर दोनों यूँ ही शावर के नीचे एक दूजे की बाँहो में लिपटे रहे। दस मिनट बाद समीर काजल को गोद में उठाकर बिस्तर पर लिटा देता है। काजल टाँगें फैलाये लेटी थी। चूत की फांकें समीर की नजरों के सामने थीं। चूत पानी में धुलकर एकदम पिंक बड़ी ही हसीन लग रही थी काजल की चूत। समीर ये नजारा देखकर अपनी उंगली को काजल की चूत पर छू देता है, तो काजल की चूत में उंगली एकदम घुस जाती है।

काजल- अहह... जीजू क्या करते हो?

समीर- अपनी साली से मस्ती कर रहा हूँ।

समीर चूत में उंगली करता रहा, और समीर के लण्ड में फिर से तनाव आ जाता है। समीर अपनी उंगली को चूत में तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। थोड़ी ही देर में काजल की चूत गीली हो जाती है, और समीर भी काजल की टांगों के बीच आ जाता है, और अपने लण्ड को चूत के छेद पर टिका देता है।

काजल- अहह... इसस्स्स...” करने लगती है।

समीर लण्ड पर जोर लगाता चला गया, और काजल की सिसकी निकलती चली गई।

काजल- “उम्म्म्म

... उईईई... जीजू धीरे दर्द हो रहा है आह्ह... अहह..."

समीर लण्ड को अंदर घुसाये जा रहा था। आधा लण्ड काजल की चूत में घुस चुका था, और समीर जोर लगता गया और पूरा लण्ड काजल की चूत में घुसता चला गया।

समीर- कैसा लग रहा है साली साहिबा?

काजल- “थोड़ा दर्द हो रहा है जीजू। आहह... सस्स्स... बस यूँ ही रुक जाओ ..."
 
समीर थोड़ी देर काजल की चूचियां चूसने लगता है। अब काजल की चूत और गीली हो गई। समीर को अपने लण्ड पर पकड़ कुछ ढीली महसूस हुई, और समीर ने लण्ड को थोड़ा बाहर खींचा और फिर अंदर घुसा दिया। ये धक्के अब काजल को अच्छा लगने लगा, और समीर भी अब अपनी स्पीड तेज कर देता है। लण्ड फूच-फूच की आवाज के साथ अंदर-बाहर हो रहा था। दोनों की आवाज आह्ह... आहह... हाय गूंजने लगी।

समीर और काजल दोनों झड़ने के करीब पहुँच गये। काजल ने समीर को जोर से जकड़ लिया और झड़ती चली गई। और समीर ने भी लण्ड को बाहर खींचकर अपना वीर्य काजल के पेट पर उड़ेल दिया। दोनों झड़ चुके थे। समीर काजल के ऊपर यूँ ही लेट जाता है। थोड़ी देर बाद दोनों फिर से ये खेल शुरू करते हैं। अबकी बार समीर ने काजल को डोगी स्टाइल में चोदा।

आज काजल और समीर ने सेक्स का खेल पूरे दिन खेला। समीर और काजल बुरी तरह थक चुके थे। लगभग 3:00 बजे समीर और काजल फ्रेश हुए।

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उधर दूसरी तरफ टीना सोच रही थी- “कल पापा का बर्थ-डे है और पापा का दिया गिफ्ट पहनकर दिखाना है..."

शाम 6:00 बजे किरण के पास अंजली का फोन आता है।

अंजली- हाय किरण कैसी हो?

किरण- ठीक हूँ भाभीजी तुम सुनाओ?

अंजली- कल नेहा जा रही है सुसराल। दामाद जी पहली बार घर आ रहे हैं। मैं सोच रही थी तुम्हारे हाथ की खीर भी बनवा लूँ।

किरण- अरे... भाभीजी क्यों नहीं?

अंजली- तो फिर अभी आ जाओ।

किरण- कैसे आऊँ? अभी तो ये भी दुकान से नहीं आए।

अंजली- तो क्या हुआ तुम फोन करके पूछ लो।

किरण- अच्छा अभी पूछती हूँ।

टीना- क्या हुआ मम्मी?

किरण- कल नेहा सुसराल जा रही है। तेरी आँटी मुझसे खीर बनवाना चाहती है। बुला रही है।

टीना- तो चली जाओ मम्मी।
 
किरण- “तेरे पापा से पूछती हूँ..” और किरण विजय को फोन पर ये बात बताती है।

विजय- देखो मुझे तो आने में देर हो जायेगी, तुम चली जाओ।

किरण फिर अंजली को फोन मिलती है- “अंजली भाभी तुम समीर को भेज दो, मैं उसके साथ आ जाऊँगी.."

अंजली- “अच्छा अभी भेजती हूँ...” और अंजली समीर को बोलती है किरण को लाने के लिए। ''

किरण टीना से- किरण- "टीना बेटा, अपने पापा के लिए खाना बना देना..."

टीना- जी मम्मी ठीक है।

तभी समीर बाइक से किरण के घर पहुँचता है, और फिर किरण और समीर घर के लिए निकल गये।

रास्ते में किरण समीर से- “समीर बेटा, अब तो रोज दिव्या के साथ मस्ती में रातें कट रही होंगी..."

समीर- अरे... कहां आँटी पूरे 8 दिन होगे दिव्या के साथ मस्ती किए हुए।

किरण- आहह... ये तो बड़ी सजा मिल रही है मेरे बच्चे को। कब ला रहे हो दिव्या को?

समीर- बस एक दो दिन में ले आऊँगा।

समीर और किरण यूँ ही बातें करते हुए घर पहुँच गये। घर पर नेहा ने दरवाजा खोला

नेहा- अरे.. आँटी टीना को नहीं लाई?

किरण- बेटा वो सुबह आ जायेगी। अंजली भाभी कहां हैं?

नेहा- किचेन में।

फिर किरण अंजली के साथ किचेन में पहुँच गई। नेहा ऊपर अपने रूम में पहुँचती है। आज काजल की समीर ने जमकर चुदाई की थी। काजल बुरी तरह थकी हुई नेहा के बेड पर लेटी थी।

नेहा- क्या बात है ननद रानी, तबीयत तो ठीक है तुम्हारी?

काजल- नहीं भाभी ऐसी कोई बात नहीं है। बस थोड़ा आराम करने का मन था।

नेहा शापिंग से लाये कपड़े काजल को दिखाने लगी।

नीचे अजय भी दुकान से घर आ चुका था। किरण को देखकर अजय के चेहरे पर स्माइल आ जाती है अजय कहता है- “अरे... भाभी क्या बना रही हो?" ।

किरण- भाई साहब खीर बना रही हूँ आपके लिए।

अजय- फिर तो आज आपकी खीर जरूर खायेंगे
 
उधर दूसरी तरफ टीना पापा के बर्थ-डे पर पापा के लिए कुछ स्पेशल गिफ्ट देना चाहती थी। मगर इस वक्त तो मार्केट जाना भी पासिबल नहीं था। काफी देर सोचने के बाद टीना पास की कंफेक्सनरी से बर्थ-डे केक और पापा के लिए पेन और डायरी गिफ्ट पैक करा कर घर आ जाती है। रात के 8:00 बज चुके थे। पापा अभी तक दुकान से घर नहीं आये थे। टीना ने आज पापा के लिए खाने में शाही पनीर और कचौरी तैयार कर ली थी। रात के 8:45 हो चुके थे।

टीना खुद को शीशे में देखती है। टीना को अपने कपड़े कुछ अँच नहीं रहे थे, और अपने रूम में पहुँचकर फटाफट

अपने कपड़े उतार फेंके। तभी टीना को पापा का दिया गिफ्ट पैक नजर आया और टीना ने जल्दी से पापा की लाई ब्रा पैंटी पहन ली। उफफ्फ... क्या गजब की हाट लग रही थी टीना।

अगर पापा ने इस हाल में देख लिया तो पता नहीं क्या होगा? कुछ सोचकर टीना अलमारी में से एक नाइलान की लांग नाइटी निकालती है, जो टीना के घुटनों तक कवर करती है। टीना के चेहरे पर बड़ी ही सेक्सी मुश्कान आ जाती है। अब टीना की नजरें बार-बार घड़ी को देख रही थीं। 9:15 हो चुके थे। अभी तक पापा नहीं आये थे। आज टीना को अपने पापा का बड़ी बेसब्री से इंतजार था। तभी डोरबेल बजती है।

टीना दौड़कर दरवाजा खोलती है। सामने विजय खड़ा था।

टीना- आह्ह... पापा बड़ी देर कर दी आने में। मैं कब से आपका इंतजार कर रही हूँ।

विजय टीना का ये रूप देखकर चकित रह गया। विजय बोला- “आह्ह... मुझे नहीं मालूम था की मेरी बेटी आज मेरा इतनी बेसब्री से इंतजार कर रही है..."

टीना- चलिये जल्दी से फ्रेश हो जाइए, मैं खाना लगाती हूँ।

विजय को आज टीना के बोलने में किरण का अहसास हो रहा था। विजय बाथरूम में जाकर फ्रेश होने लगा। टीना खाना पापा के रूम में ही ले आई। विजय अभी तक बाथरूम में था।

टीना- अरे... पापा जल्दी से आ जाइए खाना फिर ठंडा हो जायेगा।

विजय फ्रेश होकर बाथरूम से बाहर निकलता है- “क्या बनाया है मेरी बेटी ने?"

टीना- शाही पनीर।

विजय- अ... वाह मेरी बच्ची तो अब खाना भी बनाने लगी।

टीना- पापा अब आप मुझे बच्ची मत कहा करो।

विजय- बच्चे चाहे कितने भी बड़े हो जायें, बाप की नजरों में तो हमेशा बच्चे ही रहते हैं।

टीना- “अच्छा पहले जल्दी से खाना खा लीजिए...” और दोनों मिलकर खाना खाने लगे।

विजय- आज तो मेरी बेटी बहुत ही प्यारी लग रही है।

टीना मुश्कुराती हुई- “सच पापा?"

विजय- हाँ तेरी कसम।

टीना- मेरे पापा को मुझमें क्या प्यारा लगता है?

विजय- मेरी बेटी तो ऊपर से लेकर नीचे तक बहुत प्यारी लगती है।
 
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