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Incest जिंदगी के रंग अपनों के संग

मैं-हाँ तो क्या हुआ मुझे जूते का शौक है.अच्छा याद दिलाया आप ने जॅक बता रहा था कि कुछ नये डिजाइन लिमिटेड शूस मार्केट मे आए है मैं देख के आता हूँ कि वो यहाँ है कि नही तब तक आप प्लीज़ मोम,डॅड आंड बाकी परिवार वालो के लिए गिफ्ट ले लें .और मैं दूसरी तरफ चला गया काफ़ी ढूँढ ने पे भी मुझे वो शूस नही मिले तो मुझे काफ़ी निराशा हुई और मैं वापिस आने लगा.वापिस आते हुए रास्ते मे मुझे एक लॅडीस बूटिक मे एक लड़की दिखी जो एक ड्रेस को बड़े प्यार से घूर रही थी (जैसे छोटे बच्चे चाँद को घूरते हो ) मुझे उस को ऐसे देख के उस पे बड़ा प्यार आया मैं बूटिक के अंदर चला गया मैं ने फ़ैसला कर लिया था कि मैं इस को ये ड्रेस दिलवाउंगा चाहे मुझे कुछ भी क्यूँ ना करना पड़े.मैने ड्रेस दिखी देखने मे काफ़ी मॉर्डन लग रही थी देखा तो वो एक सिंगल पीस की नेवी ब्लू रंग की बहुत की खूबसूरत ड्रेस थी मैने उस गर्ल से पूछा कि इस ड्रेस मे और कलर है तो उस ने बताया कि नही सर अभी तो सिर्फ़ इस कलर का ही स्टॉक है ये ड्रेस काफ़ी डिमॅंड मे है. ये हम सिर्फ़ ऑर्डर पे ही तैयार करते है .

मैं-और अगर किसी को आरजेंट चाहिए हो तो.

गर्ल-वो तो पासिबल नही है सर .

मैं-आप को किसी ने कभी कहा है कि आप बहुत ही खूबसूरत है.

गर्ल-हाँ लगभग सभी ही कहते है तारीफ करने का कोई फ़ायदा नही सर ये ड्रेस काफ़ी डिमॅंड मे है और महँगी भी.

मैं-(मैं मन मे सोचने लगा कि साले आज अगर तुझे फ्लर्ट करना आता तो तुझे इतनी प्राब्लम नही होती अपनी गुड बॉय की इमेज के लिए तूने ना तो कभी फ्लर्ट किया और ना ही कभी करने दिया अपने दोस्तो को.) वैसे ये ड्रेस तुम पे काफ़ी अच्छी लगेगी तुम पर ट्राइ क्यूँ नही करती .

गर्ल-मैं ट्राइ नही कर सकती क्यूँ कि ये काफ़ी महँगी (कॉस्ट्ली) है.

मैं-तो चलो एक डील करते है तुम मुझे इस की दो ड्रेस लेने मे हेल्प करो और एक ड्रेस तुम्हारे लिए गिफ्ट मेरी तरफ से.क्यूँ कि ये ड्रेस सच मे तुम पे काफ़ी अच्छी लगेगी क्या बोलती हो.

गर्ल-आप मज़ाक कर रहे है ना .

मैं-ये लो मेरा कार्ड पहले तीन ड्रेस की पेमेंट कर लो फिर ड्रेस निकालना ओके

गर्ल-आप कोई बिज़्नेसमॅन मालूम पड़ते है .

मैं-नही ऐसे कोई बात नही है मुझे किसी को बहुत ही खास इंसान को इसे गिफ्ट करना है उस के लिए तो ये कुछ भी नही.

गर्ल-आप की गर्लफ्रेंड काफ़ी लकी है जो उसे आप जैसा प्यार करने वाला मिला है.

मैं-मेरी कोई गर्लफ्रेंड नही है हाँ अभी तलाश जारी है .वैसे तुम भी काफ़ी खूबसूरत हो तुम्हारे तो 10 ,12 बाय्फ्रेंड ज़रूर होगे.

गर्ल-नही ऐसा नही है .आप बाते काफ़ी अच्छी करते है.

मैं-नही ऐसा कुछ नही है मैं बस जो दिल मे आए वो बोल देता हूँ अगर सामने वाले का दिल सॉफ हो तो बातें अपने आप ही अच्छी लगती है.

गर्ल-वैसे आप ने बताया नही कि किस के लिए ले रहे है ये ड्रेस .

मैं-माइ स्वीट –स्वीट सिस्टर’स के लिए तुम को कोई प्राब्लम है.

 
गर्ल-नही आज पहली बार देखा कि कोई अपनी सिस्टर को गर्लफ्रेंड से ज़्यादा वॅल्यू देता है नही तो यहाँ तो सब अपने लिए ही जीते है.

मैं-बिल्कुल देखा होगा क्यूँ कि ये इंडिया नही है कभी इंडिया आ के देखो ये तो सिर्फ़ ड्रेस है वहाँ भाई अपनी बहनो की खुशी के लिए कुछ भी कर सकता है.और बहेन भी अपने भाई के लिए कुछ भी कर सकती है. कभी इंडिया जा के देखो तब तुम्हे मेरी कही हुई बातो का मतलब पता चलेगा.

गर्ल-सुना तो मैने भी बहुत है.अब आप से सुनने के बाद मैं इंडिया कम से कम एक बार ज़रूर आउन्गी.

मैं-गुड ये मेरा कॉंटॅक्ट नंबर ले लो कभी इंडिया आओ तो तुम्हे इंडिया की सेर कराने की ज़िमेदारी मेरी हुई.

गर्ल-थॅंक्स मैं आप की ड्रेस पॅक करवा देती हूँ.और अब मुझे आप से ड्रेस नही चाहिए.

मैं-क्यूँ मैं तुम्हे ये ड्रेस इसलिए नही दे रहा कि तुम मुझे ये ड्रेस लेने मिस्टर हेल्प करो.बल्कि मैं ये ड्रेस तुम को इसलिए दे रहा हूँ कि सच मे ये ड्रेस तुम पे काफ़ी अच्छी लगे गी .

गर्ल-फिर भी सर मैं ये ड्रेस नही ले सकती मैं आप की ड्रेस पॅक करवाती हूँ.

मैं-अच्छा हम दोस्त बन सकते है .

गर्ल-हाँ क्यूँ नही मुझे बेहद ख़ुसी होगी आप जैसा दोस्त पा के.

मैं-तो फिर तुम ये ड्रेस रख रही हो मेरी तरफ से तुम को हमारी फ्रेंडशिप के याद गार के रूप मे और अब मैं कुछ नही सुनने वाला जाओ तीनो के बिल ले के आओ.

आख़िर कार उस ने हार मान ली और वो तीन ड्रेस पॅक करवा के ले आई दो मैं ने ले ली और एक उस को दे दी.

मैं-- चलो कम से कम अपना नाम तो बता ही दो अब

गर्ल-.अभी जल्दी क्या है जब नेक्स्ट टाइम मिलेगे तब के लिए भी तो कुछ होना चाहिए

.मैं- हाँ ये भी सही है .चलो मैं चलता हूँ मुझे लेट हो रहा है.और मैं दी के पास चला गया दी की भी लगभग शॉपिंग पूरी हो गयी थी मैं ने बिल पे कर दिए और हम तीनो घर के लिए निकल गये .मैं ने शैली दी को उन की ड्रेस दे दी उन को वो बहुत पसंद आई वो पूरे रास्ते मेरी तारीफ ही करती रही कि क्या चाय्स है क्या कलर है क्या डिजाइन है एक्सट्रा –एक्सट्रा .मैं ने दी को अभी उन की ड्रेस नही दी थी. दी मुझे ऐसे घूर्ने लगी कि कच्चा ही चबा जाएगी (उस टाइम दी का फेस उस टाइम बिल्कुल वैसा हो गया था जैसे कि किसी 05 साल के बच्ची को चोकलेट के घर मे रख के उस को चोकलेट खाने से मना कर दिया गया हो और बाकी सब को खाने की पर्मिशन हो) फिर हम घर पहुँच गये हम ने शैली दी को उन के घर छोड़ दिया और हम अपने घर आ गये…

घर आ के हम लोग अपने अपने रूम मे चले गये फ्रेश होने के लिए फ्रेश हो के मैं नीचे हॉल मे आया तो वहाँ दी पहले से ही थी और मोम को गिफ्ट दिखा रही थी मैं ने बोला मोम मुझे क्या एक कप कोफ़ी मिलेगी .

 


मामी-हाँ क्यूँ नही तू बैठ मैं ले के आती हूँ और मैं सोफे पे बैठ गया .दी टीवी देख रही थी या देखने का नाटक कर रही थी क्यूँ कि वो सिर्फ़ चॅनेल चेंज कर रही थी मुझे एक शरारत सूझी मैं दी कर गोद मे सिर रख के सो गया.

दी-- क्यूँ परेशान कर रहा है

मैं-मैं कहाँ परेशान कर रहा हूँ

दी-सिर उठा तू मेरे गोद मे से .

मैं-मैं नही हटाता आप को प्राब्लम है तो हटा दो

दी-क्यू अब जा ना शैली के पास मेरे पास क्या लेने आया है

मैं-ओह तो आप इस लिए नाराज़ है दी मैं क्या करता वहाँ एक ही ड्रेस थी मैं ने कोशिश की पर नही मिली.आप को मैं नेक्स्ट टाइम दे दूँगा वैसे भी ड्रेस कुछ खास नही थी

दी-तू ये कैसे कह सकता है कि ड्रेस खास नही थी तू ने दी है वो ड्रेस मेरे लिए स्पेशल है वो .

मैं-पर मैं ने तो आप को दी ही नही

दी-तो क्या हुआ मैं उस से ले लूँगी इस मे कौन सी बड़ी बात है

मैं-अच्छा तो ये प्लान है आप का मैं अभी शैली दी को बता देता हूँ

दी-कोई फ़ायदा नही रहने दे क्यूँ फालतू मे टाइमवेस्ट कर रहा है तू जानता है कि जो चीज़ मुझ को पसंद आ जाती है उस को मैं हासिल कर के ही रहती हूँ.

मैं-ये तो अच्छी बात नही

दी-जिसे जो सोचना है वो सोचे

और ये बोल के दी अपने कमरे मे जाने लगी और तभी मोम कॉफ़्फीे ले के आ गयी.

मामी-तू कहाँ जा रही है कॉफ़्फीे तो पी ले.और दी बैठ के कॉफ़्फीे पीने लगी .

मैं-एक मिनट मोम मैं अभी आया .

मामी-कहाँ जा रहा है कॉफ़्फीे तो पी ले

मैं-बस एक मिंट अपने रूम मे जा रहा हूँ आप के लिए एक गिफ्ट लाया था वो ही लेने जा रहा हूँ.

और ये बोल के मैं अपने रूम मे चला गया .आज तो दीदी की शकल देखने लायक है चलो ठीक है हमेशा मेरी टाँग खीचती रहती है आज मैं भी मोके का पूरा फ़ायदा उठाउंगा.

दी-मोम आप जानती है इस ने शैली को भी एक ड्रेस गिफ्ट की

मामी-तो ये तो अच्छी बात है आख़िर वो भी तो इसकी दोस्त है

दी-मुझे प्राब्लम इस बात से नही है कि इस ने उस को गिफ्ट दिया .मुझे प्राब्लम इस बात से है कि उस ने मुझ को नही दिया देख लेना वो मुझ को प्यार ही नही करता .मैं ही पागल हूँ जो उस मे मेरी जान बसती है.

मोम-अब तू कोई छोटी बच्ची तो है नही की तुझे हर बात समझाई जाए. वो तेरे से बहुत प्यार करता है

इतने में मैं नीचे आ गया

मैं-- ये लो मोम आप का गिफ्ट. जब उन्होने गिफ्ट खोला और ड्रेस देखी तो उन के चहरे पे एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी और दी को चिड़ाते हुए नैना ये ड्रेस मेरे पे कैसी लगेगी .जब नैना दी ने वो ड्रेस देखी तो उसे मोम के हाथ से ऐसे छीना जैसा कि कोई शेर अपने शिकार पे झपटता है और बोली कि मोम ये आप पे बिल्कुल भी अच्छी नही लगेगी.इसलिए इसे मैं रख रही हूँ

.

मोम-ऐसे कैसे रख रही हूँ ये मेरे लाया है

दी-वो मैं नही जानती मैं नही देने वाली

और हम दोनो हँसने लगे हम को हँसता हुआ देख दी भी हँसने लगी और वो समझ गयी कि मैं सिर्फ़ मज़ाक कर रहा हूँ ..

 
फिर हम ने ऐसे ही हसी मज़ाक मे कॉफ़्फीे पी फिर मोम डिन्नर की तैयारी करने के लिए चली गयी.और मैं फिर दी की गोद मे सिर रख के लेट गया और दी मेरे सिर मे हाथ फेरने लगी मुझे कब नीद आई पता ही नही चली जब आख खुली तो डॅड (मामा) आ चुके थे और मोम डिन्नर के लिए बुला रही थी और मैं अब भी दी की गोद मे सिर रख के सो रहा था .

मैं-क्या दी अगर मैं सो गया था तो उठा देना चाहिए था ना खमखा आप को इतनी देर तक बैठना पड़ा.

दी-तू सोते हुए आज भी तकिया पकड़ के सोता है ना .

मैं-(मुझे बहुत शर्म आई दोस्तो बात ये तब की है जब मुझे मेरा अलग कमरा मिला था तब मुझे रात मे अकेले सोने मे डर लगता था इसलिए जब तक मैं सो ना जाऊ मेरे पास रहती थी और मैं उनकी गोद मे सिर रख के और उन को पकड़ के सोता था .धीरे धीरे ये आदत बन गयी और आज भी कायम है.) हाँ दी बड़े बड़े शहरों मे . छोटी छोटी बाते होती रहती है.और मैं और दी हँसने लगे.

दी-वैसे तू सोते हुए आज भी वो प्यारा सा छोटा सा बच्चा लग रहा था जो कभी मेरी गोद मे सिर रख के सोया करता था तुझे याद है लास्ट टाइम कब तू मेरी गोद मे सोया था और बोलते हुए दी की आखे नम हो गयी .

मैं-दी आप रोओ नही आप ने प्रॉमिस किया था

दी-तू अब मुझे रोने भी नही देगा और जब तू चला जाएगा तो तब कौन रोकेगा मुझे

मैं-मैं बस यहाँ से जा रहा हूँ आप के दिल से नही अगर आप कभी दुखी हुई या रोई तो मुझे पता चल जाएगा.

दी-मेरा बेटा कितना बड़ा हो गया है रे तू अब मुझे बता रहा है कि चलते कैसे है.और मुझे कस के गले लगा लिया .

फिर हम सब ने डिन्नर किया और थोड़ी बहुत बात की फिर सब अपने कमरो मे चले गये सोने के लिए..

अब नीद मेरी आखो से गायब हो चुकी थी . ना . मुझे भी दी की आदत हो गयी थी.और अब मुझे भी बड़ी बेचैनि होने लगी थी.इसलिए मैं थोड़ी देर छत(रूफ) पे चला गया तो वहाँ दी पहले से ही थी उन्हे देख के मुझे फील हुआ कि दी कितना अकेला फील कर रही है.मैं दी के पास गया और.

मैं-तो दी आज सितारे गिने जा रहे है.चलो अच्छा हुआ मुझे भी हेल्प मिल जाएगी तो कहाँ तक गिन लिए उस से आगे मैं गिनता हूँ.

दी-वेरी फन्नी

मैं-तो आप को भी नीद नही आ रही .

दी-हाँ और तू क्या कर रहा है यहाँ

मैं-मुझे भी नीद नही आ रही है.दी एक बात बोलू

दी-हूँ बोल

मैं-दी मुझे आप की बहुत आएगी.

दी-हूँ तो ये बात है आज हमारे लिए प्यार आ रहा है .तुझे जब भी मेरी याद आए फोन कर लिया करना और मैं हर महीने आउन्गी तुझ से मिलने और तू भी तो आ सकता है और चल अब सो जा कल तेरी फ्लाइट है ना

मैं-दी आज मैं आप के पास सो जाऊ..

दी-हाँ चल आ जा

 
फिर हम दोनो नीचे आ गये और दी के रूम मे चले गये हम ने थोड़ी देर तक बात की फिर हम सो गये .सुबह मुझे दी ने उठाया और फिर नीचे चली गई .मैं उठ के अपने रूम मे गया और फिर फ्रेश हो के तैयार हुआ आज मेरे दिल मे एक अजीब सा दर्द उठ रहा था आज पता नही क्यूँ ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं अपनी कोई बहुत ही खास चीज़ यहाँ छोड़ के जा रहा हूँ. ऐसी फेल्लिंग मुझे पहली बार हो रही थी मैं उपर से ठीक ठाक दिख रहा था पर दिल मैं जो दर्द था वो मैं बता नही सकता.

किसी तरह अपने आप को नॉर्मल कर के मैं नीचे आया और सब को मॉर्निंग विश किया .और नाश्ता करने बैठ गया.

मामा-तुम्हारी पॅकिंग पूरी है ना कुछ कमी तो नही.

मैं-नही डॅड दी और मोम ने ऑलरेडी दो-दो बार डबल चेक कर लिया है.अब तो कोई चाह कर भी कमी नही निकाल सकता.

मामा-गुड तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है.

मैं-मुझे ऐसा क्यूँ लग रहा है कि आप ने मेरे उपर नज़र रखने का पूरा प्लान बना लिया है .

मामा-तुझे ऐसा क्यूँ लगता है कि मैं ऐसा कुछ करूगा.

मैं-क्यूँ कि मैं आप और मोम को अच्छे से जानता हूँ लास्ट टाइम जब मैं एक वीक के लिए अपने फ्रेंड्स के साथ पिक्निक पे गया था तो आप लोगो ने कितने आदमी मेरे पीछे लगा रखे थे मुझे सब पता है मुझे ये भी पता है कि आप ने रोबी (ये डॅड के सेक्यूरिटी हॅड है जो हमारी फॅमिली की सेक्यूरिटी और डॅड के बिज़्नेस मे हेल्प करते है ) अंकल को मेरे स्पेशल सेक्यूरिटी के लिए लगा रखा है.

मामा-क्या बात है तू तो बहुत ही स्मार्ट हो गया है .वैसे तुझे ये सब पता कैसे चला.और बता दूं कि तू हम सब की जिंदगी है और हर किसी को अपनी जिंदगी को सेफ रखने का पूरा हक़ है.

मैं-मैं ये नही कह रहा कि आप ग़लत है बस मैं ये कह रहा हूँ कि मुझे लाइफ मे सब कुछ अपने बल पे करना है.मैं ने ये सोचा है कि मैं इंडिया जा के एक बहुत ही मिडल क्लास लाइफ जीना चाहता हूँ मैं भी अपने बल पे कुछ करना चाहता हूँ इसलिए आप इस मे कुछ इंटरफ़ायर नही कर सकते.आप ने मेरे 18थ बर्तडे पे प्रॉमिस किया था.बस मैं कुछ नही सुनना चाहता .

मामा-पता है कैसे तूने मुझे इमोशनल कर के तूने वो वादा ले लिया उस की तो तू मुझे याद भी मत दिया कि कैसे इतने बड़े बिज़्नेसमॅन को बेबकूफ़ बना दिया तूने.

मैं- वो तो बस मेरा लक अच्छा था .पर आप ने प्रॉमिस किया था अब आप पीछे नही हट सकते प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़.

मामा-ओके पर मेरी भी एक शर्त है जो तुझे माननी ही पड़ेगी और मैं तुझसे पूछ नही रहा हूँ बता रहा हूँ.

मैं-मैं ये कोई बात नही होती मोम आप मामा को बोलो कि ये ग़लत है.

मोम-मैं क्या बोलूं तुम बाप –बेटे की बात है मुझे बीच मे पड़ के किसी एक की तरफ़दारी नही करनी.और अगर फिर तू चाहता है तो सुन तेरे डॅड ठीक कह रहे है तुझे उन की बात माननी ही पड़ेगी.

मैं-आप रहने ही दो आप से बात करना ही बेकार है .ओके डॅड पर मैं ये शर्त जान के ही डिसाइड करूगा.

मामा-ठीक है चल नाश्ता कर जल्दी फिर बाकी तैयारी भी करनी है.

इन सब मैं ने गौर किया की दी ने एक बार भी बीच मैं नही बोला जब कि वो ऐसे मोके कभी अपने हाथ से जाने नही देती है.तब मैने दी की तरफ देखा तो उन का चहरा बिल्कुल उतरा हुआ था.मुझसे दी की ऐसे हालत देखी नही गयी पर मैं अभी कुछ नही कर सकता था.

फिर हम ने नाश्ता किया और मैं डॅड के साथ उन के ऑफीस चला गया कुछ सेलेक्ट स्टाफ था जो मुझ से मिलना चाह रहा था उन से मिल के हम घर आ गये .फिर मेरे जाने की तैयारी होने लगी और मैं ये सोच-सोच के पागल हो रहा था कि डॅड का सर्प्राइज़ क्या होगा.फिर मैने सोचा जो होगा देख लेगे बस अब दिमाग़ खपाने की ज़रूरत नही है.फिर मैं दी के रूम मे चला गया वहाँ दी गुमासूम सी अपने बॅड पे लेटी हुई थी पेट के बल.ध्यान से सुनने से मालूम पड़ा कि दी तो रो रही है .अब मुझसे नही रहा गया और मैं गेट खोल के अंदर चला गया.

मैं-दी आप क्या कर रही है.

दी-तू यहाँ तू तो डॅड के साथ ऑफीस गया था ना फिर यहाँ ….

मैं-क्या दी जो ऑफीस जाता है वो वापस नही आता क्या .और वैसे भी मैं मालिक हूँ कोई एंप्लाय नही जो टाइमिंग से ही ऑफीस से निकल सकता है.

दी-वेरी फन्नी ये सब छोड़ ये बता यहाँ कर रहा है.

मैं- दी ये सब छोड़ो ये बताओ कि आप क्यूँ रो रही है.

दी-मैं कहाँ रो रही हूँ.आख मैं कुछ चला गया था वो ही निकाल रही थी.

मैं-दी मूवी मैं भी देखता हूँ और इतना मुझे भी पता है कि बंद कमरे मे आख मे कुछ नही जा सकता .और आप नाश्ते की टेबल पे भी उदास दिख रही थी.

दी-तो और क्या ख़ुसी मे नाचू.तू तो चला जाएगा मैं क्या करूगी अकेले.

मैं-क्या दी आप भी ऐसे छोटी छोटी सी बातों पे अपने इतने आसू बहा देती हो.

दी-ये तुझे छोटी बात लग रही है.

 
मैं-और नही तो क्या .इस का सोल्युशन मेरे पास है देखो मोम अभी कुछ दिनो के बाद इंडिया आ रही है आप भी उन के साथ आ जाना फिर देखते है क्या करना है.चलो अब थोड़ा सा मुस्कुरा दो ये हुई ना बात .आप ना हमेशा खुस रहा करो क्यूंकी आप के खुस रहने से सब खुस रहते है.

दी- चल झुट्टे वो तो तेरे से खुश रहते है.

मैं-मैं तो आप के खुश रहने से खुश रहता हूँ ना .

दी-क्या बात है बहुत बात बनाना सीख गया है सो स्मार्ट .और मेरे गाल खीचने लगी.

मैं-दी आप ना ये मेरे गाल मत खिचा करो .मुझे बिल्कुल बच्चो जैसी फिल्लिंग होती है.

दी-तू तो बच्चा ही है मेरे लिए ..... चल अब नीचे नही तो मोम ने मेरी जान ले लेनी है .अगर कुछ भी टाइम पे नही हुआ तो .

मैं- ऐसा कुछ नही होगा अब कम से कम कुछ टाइम के लिए आप को बहुत प्यार मिलने वाला है .आप को तो मुझे थॅंक्स बोलना चाहिए.और फिर हम नीचे आ गये...

उस के बाद हम नीचे आ गये और मैं तैयार होने के लिए चला गया.जब तैयार हो के नीचे आया तो सभी लोग हॉल मे जमा हो रखे थे जिन मे घर मे काम करने वाला स्टाफ भी था और साथ ही एक नया चेहरा उस बंदे ने अपने आप को फिट रखा हुआ था कि कोई प्रोफेसनल भी उस के आगे अपने आप को शर्मिंदा महसूस करे उस की हाइट 6 के आस पास होगी.

मामा-अजय इन से मिलो ये है आप के सर्प्राइज़ और आज से आप के बॉडीगार्ड+दोस्त+टूटर .

मैं-मैं कुछ समझा नही मामा.

मामा-देखो तुम्हारी ज़िद के आगे हम ने अपनी हार मान ली है.पर हूँ तो तुम्हारा मामा ही ना चिंता तो होती ही है ना जब तुम बाप बनोगे तब तुम्हे पता चलेगा और डॉन'ट वरी मैं अपना प्रॉमिस नही तोड़ रहा ये बस तुम को ट्रैनिंग देने के और अगर तुम चाहो तो तुम इन से बहुत कुछ सीख सकते हो और ये तुम्हारे साथ इंडिया जा रहे है .और मेरा वादा है कि ये तुम्हारी लाइफ मे इंटरफायर नही करेगे जब तक हालात काबू से बाहर ना हो जाए.या तुम हेल्प ना माँगो.

मैं-ओके मामा पर याद रहे मेरी लाइफ मैं नो एंटर फेर .

मामा-जब तक हालत बेकाबू ना हो जाए तब तक सिर्फ़ .

मैं-हाँ तो ठीक ओके तो फिर चलें बाकी की बाते हम रास्ते मे कर लेगे.

मामा-गुड आइडिया चलो

फिर मैं सब से मिल के बडो का आशीर्वाद ले के जाने लगा तो बाहर मुझे शैली दी मिल गयी शायद वो हमारे ही घर आ रही थी.

दी-तो राजकुमार चल दिए अपने देश.

मैं-हाँ अब यहाँ तो कोई हमे राज करने नही देता तो सोचा क्यूँ ना नयी जगह ट्राइ किया जाए.

दी-तुम तो अब बहुत बाते बनाने लगे हो ये लो तुम्हारे लिए है इसे घर जा के खोलना .मैं तुम्हे बहुत मिस करूगी

मैं-मी टू और इतना बोल के मैने उन को गले लगा लिया फिर हम दोनो अलग हुए और मैं सब को बाइ बोल के एरपोर्ट के लिए निकल गया.गाड़ी मे हम सिर्फ़ तीन लोग ही थे क्यूँ कि सब को आने के लिए मैने पहले ही मना कर दिया था क्यूँ कि मैं किसी को भी रोता हुआ नही देख सकता था.मामी को मनाने मे ज़्यादा टाइम नही लगा पर दी तो जैसे मेरी बात सुनने को ही तैयार नही थी.किसी तरह बड़ी मुस्किल से मनाया उन को ये सिर्फ़ मैं ही जानता हूँ पूरा एक घंटा लग गया सिर्फ़ उन को ये समझाने मे कि उन को रोता हुआ देख के मैं जा नही पाउन्गा.फाइन्ली सब ठीक हो रहा था.हम एरपोर्ट पहुँच गये फ्लाइट टाइम पे थी मामा से विदा ले के हम लोग अंदर चले गये.अभी तक उस बंदे से मेरी बातचीत नही हुई थी जिस को मामा ने मेरे साथ भेजा था.मैने सोचा ये ही सही टाइम है सब क्लियर कर लेने का .फ्लाइट टेक ऑफ हुए करीब 20मिंट हो गये थे मैं ने सोचा कि अब मुझे ही बातचीत सुरू करनी चाहिए.

मैं-हाई मैं अजय गुप्ता आप को मामा ने मेरे बारे मे तो बता ही दिया होगा.मैं बस कुछ बाते क्लियर करना चाहता हूँ.

उसने कहा मेरा नाम जॅक है और मुझे कोई प्रॉब्लम नही है मुझे ऑलरेडी सब पता है और मैने तुम दोनो की बाते सुनी थी तुम्हारे घर पे और मुझे कोई प्रॉब्लम नही है जब तक तुम मेरे काम मे मुझे इंटर फेर नही करते आइ प्रॉमिस कि मेरी तरफ से तुम्हे कोई प्रॉब्लम नही होगी....

मैं-बहुत अच्छा तो आज से हम फ्रेंड .

जॅक - हाँ क्यूँ नही वैसे भी अब तो साथ मे ही रहने वाले है .

मैं-तो जॅक क्या करते थे आप इस से पहले.

जॅक-क्या बात है सब कुछ यहीं जान लोगे कुछ बाद के लिए भी बचा के रखो.वैसे कोई गर्लफ्रेंड है तुम्हारी ओह सॉरी.

मैं-नही अभी तक तो कोई नही पर अब ज़रूर बनानी है.आप की शादी हुई है या अभी भी ..

जॅक-हँसते हुए तुम तो काफ़ी इंट्रेस्टिंग हो यार नही अभी शादी नही की कोई मिली ही नही .पर मज़े पूरे लिए कितनी आई कितनी गयी पता ही नही.मैं तुम्हारी हेल्प कर सकता हूँ गर्लफ्रेंड बनाने मे वैसे तुम को देख के लगता नही है कि तुम को ज़रूरत है मेरी हेल्प की इस मॅटर पे.

मैं-बिल्कुल सही कहा आप ने अब जो भी करना है वो मुझे अपने ही दम पे करना है.

जॅक-बिल्कुल सही मुझे भी यही लगता है .कि तुम्हे मोका दें तो तुम कुछ भी कर सकते हो.वैसे हम को लेने कॉन आ रहा है.

मैं-मेरा फ्रेंड है रवि वो आ रहा है लेने के लिए.(दोस्तो आप सोच रहे हो गे कि ये तो पिछले 15सालो से तो बाहर था तो इस की दोस्ती किसी इंडियन लड़के से कैसे हो गयी.तो दोस्तो यहाँ पे बता दूं कि रवि आज से दो साल पहले तक वो अमरीका मे ही रहता था दो साल पहले उस के दादा की डेत पे ये लोग इंडिया आए थे और फिर वो यही रहने लगे क्यूँ कि उस के दादा अपने जमाने मे ज़मीदार हुआ करते थे तो इन के पास यहाँ काफ़ी जयदाद है और इस के दादा का बिज़्नेस भी है .क्यूँ कि रवि के डॅड एक्लोते होने के कारण सब अब उन ही को संभालना था जो वो वहाँ से नही कर सकते थे इस लिए उन्होने यहाँ पे शिफ्ट होने का फ़ैसला लिया.)

जॅक-क्यूँ तुम्हारे घर से कोई नही आ रहा .

मैं-किसी को पता होगा तब तो कोई आएगा.

जॅक-मतलब ?

मैं-मैं ने किसी भी नही बताया कि मैं आ रहा हूँ सर्प्राइज़ है .

जॅक-ओके चलो फिर तैयार हो जाओ हम लॅंड करने वाले है.

हम फिर हम एरपोर्ट से बाहर आते है तो रवि हमे मिल जाता है.मुझे देखते ही दौड़ के मेरे गले लग जाता है .मैं उसे पीछे करते हुए कमिने पीछे हट साले ये इंडिया है कही यहाँ के लोगो ने हमारे बीच दोस्ताना समझ लिया तो गड़बड़ हो जाएगी.और वैसे भी तू इतना स्मार्ट नही है.फिर हम दोनो हँसते हुए एक बार और गले मिलते है और फिर मैं रवि को जॅक से इंट्रो करवाता हूँ फिर हम रवि के घर फ्रेश होने के लिए चल देते है...

फिर हम रवि के घर को चल पड़े मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं किसी और दुनिया मे आ गया हूँ इतने लोग देख के ऐसा लग रहा था कि जैसे सब मे जल्दी जाने की होड़ लगी हुई थी कि जैसे अगर वो पीछे रह गये तो दुनिया ही ख़तम हो जाएगे .इतनी भीड़ देख के एक बार तो मैं डर ही गया पर जल्द ही खुद को नॉर्मल कर लिया.रास्ते भर मैने किसी से कोई बात नही की .सिर्फ़ रवि और जॅक ही आपस मे बात कर रहे थे ऐसा लग रहा था कि दोनो मे अच्छी ख़ासी पट रही है .फिर हम सब रवि के घर पहुँच गये .

 
(दोस्तो मैं यहाँ आप को रवि की फॅमिली के बारे मे बता दूं.रवि की फॅमिली मे चार मेंबर है रवि के डॅड रमेश एक बहुत बड़े डॉक्टर है और उन्होने अब इंडिया मे अपना खुद का हॉस्पिटल खोल लिया है और अपना ज़्यादातर टाइम ये यही रहते है.उन के एज यही कोई 50 के आस पास होगी पर कोई भी उन को देख के ये नही बोल सकता कि ये 50 के आस पास के भी है.और इस के लिए ये बहुत मेहनत भी करते है .

रवि की मोम एक हाउसवाइफ हैं इन का नाम सोनी है ये भी एक सोशियल वॉर्कर है इस लिए आए दिन इन की फोटो अख़बारो,मेग्ज़ीन और टीवी चेनलों मे आती रहती है.इन की एज कोई 45 के आस पास है दिखने मे आम सी ही है इनकी ख़ासियत है इन का नेचर कोई अगर इन से 10 मिंट बात कर ले तो अपनी सारी जिंदगी इन्हे भूल नही आए.तीसरा और आख़िरी मेंबर है रवि की बेहन नाम है जिया उम्र यही कोई 24 से 25 के आस पास .देखने मे कमाल की ऐसी कि कोई अगर एक बार कोई देख ले तो दुबारा देखने की इच्छा ज़रूर हो .एक की ख़ासियत है इन का इतना प्यारा सा मुखड़ा देखने मे इतनी मासूमियत है कि क्या कहना.ये भी अपने फ्रेंड सर्कल मे काफ़ी फेमस है उस की वजह है इन का तेज दिमाग़ प्राब्लम कैसे भी हो सोल्यूशन इन के पास हमेशा तैयार मिलता है .वैसे ये अभी मेडिकल के पढ़ाई कर रही है .लास्ट मेंबर को तो आप जानते ही हो जी हाँ रवि मेरा दोस्त .)

घर पे डोर्र्बेल बजाई तो दरवाज़ा जिया दी ने खोला और मैं उन्हे देखते ही उन के गले लग गया गूडमॉर्निंग दी.

दी-गुड मॉर्निंग सोना चल पहले अंदर तो आ या यही ही सारा प्यार दिखा देगा .

मैं-अंदर आना ज़रूरी है

दी-नही कोई ज़रूरी नही.पर सोच ले बाकी सारे काम यही करने पड़ेंगे.

मैं-मैं तो फिर अंदर ही चलते है

और हम अंदर चले गये कुछ देर बात करने के बाद हम लोग फ्रेश होने चले गये फ्रेश हो के हम ने कॉफ़ी पी और हल्का सा नाश्ता किया और कुछ देर आराम करने चले गये.

दोपहर को किसी के जगाने से मेरी नीद खुली मैने आख खोल के देखा तो वो दी थी जो मुझे उठा रही थी .चल जल्दी उठ मुझे नैना का 3 बार कॉल आ चुका है तू ने उस को अभी तक कॉल नही किया वो काफ़ी नाराज़ है चल जल्दी से फ्रेश हो जा और लंच के लिए नीचे आजा और अपने गेस्ट को भी ले आना .

और फिर मैने सबसे पहले मोम को कॉल की कुछ देर उन से बात करने के बाद मैने सोचा कि चलो मोम को तो मना लिया अब दी की बारी.मुझे पता है वो काफ़ी गुस्से मे होगी आज तो मेरी खैर नही.मैने उपर वाले का नाम ले के दी को फोन लगा दिया पर दी ने फोन काट दिया .ओह तेरी मामला तो ज़्यादा ही गंभीर है अब क्या करूँ.अब तो गया मैं काम से अब तो जिया दी ही कुछ कर सकती हैं .दी कहाँ है आप दी कहाँ है..

दी-यही हूँ क्यूँ चिल्ला रहा है बोल.

मैं-वो मुझे आप की हेल्प चाहिए .

दी-मेरी हेल्प इतनी जल्दी अभी तो तुझे आए हुए ठीक से 24 घंटे भी नही हुए और अभी से हेल्प माँगने लगा .

मैं-दी प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ नैना दी बहुत ही ज़्यादा नाराज़ है और जब वो नाराज़ होती है तो किसी की नही सुनती आप तो जानती ही हो ना उन्हे ये भी पता नही होता कि वो क्या कर रही है प्लज़्ज़्ज़ दी आप मेरी हेल्प कर दे मुझे पता है आप के सिवाए इस दुनिया मेरी कोई हेल्प नही कर सकता .

दी-हाँ हाँ चल ठीक है पर इस के बदले मुझे भी कुछ चाहिए होगा .

मैं-आप के लिए तो जान भी हाजिर है .वैसे उमीद है आप मेरी जान नही माँगेंगी कि क्यूँ हाँ ना दी.वो क्या है ना कि ये मैं ने बहुत सी फ़िल्मो मे देखा है कि हरो यही ही डायलॉग मारता है इसलिए मैने भी मार दिया .

दी-हा हा हा हा हँसते हुए नही मुझे तेरी जान भी नही चाहिए.

मैं-तो ठीक है फिर तो आप जो बोलो वो आप का.

दी-हाँ क्यूँ नही चल टाइम आएगा तो देख लेने .चल तू फ्रेश हो जा मैं देखती हूँ कि क्या कर सकते है.

अब मैं टेन्षन फ्री हो के फ्रेश होने जा सकता था मैं अभी अपने रूम की ओर जा ही रहा था कि मैने सोचा कि चलो जॅक को भी बोल दूं लंच के लिए ये सोच के मैं जॅक के कमरे मे जाने लगा .अभी मैं जॅक के कमरे के गेट पे ही खड़ा था कि अंदर का नज़ारा देख के मेरी तो जान ही सूख गयी……

 
जॅक वहाँ बिस्तर पे बैठ के गन्स चेक कर रहा था .मैं जॅक ये सब क्या है .

जॅक-कुछ नही मैं तो बस अपना समान चेक कर रहा था .

मैं-ये सब तुम लाए कहाँ से .

जॅक-क्या तुम भी बच्चो जैसी बात करते हो.जहाँ से हम आए है.

मैं-पर तुम ये सब जाए कैसे.एरपोर्ट सेक्यूरिटी ने तुममे रोका नही.

जॅक-बच्चे एक बात ध्यान से सुन लो कि पैसे से वो सब किया जा सकता है जो हम को नमुकिन लगता है और फिर तुम्हारे मामा किस दिन कम आए गे.

मैं-वो ठीक है पर तुम इसे लाए क्यूँ हो यहाँ इस की क्या ज़रूरत है.

जॅक-तुम सोचते बहुत हो टाइम आने पे पता चल जाएगा चलो अभी मुझे फ्रेश होने दो तुम्हे मेरे बारे मे बहुत कुछ जानना है .जो कि मैं तुम्हे अभी नही बता सकता .तो जा के तुम भी फ्रेश हो जाओ और लंच पे मिलते है.

मैं-बस एक लास्ट सवाल कि अगर रवि या उस के घर वालो को इस के बारे मे मालूम पड़ गया तो.

जॅक-उन्हे पहले ही मालूम है .

ये मेरे लिए एक और झटका था .मैने सोचा कि अब ज़्यादा दिमाग़ लगाउन्गा तो पागल हो जाउन्गा इस से अच्छा है कि सब कुछ अपने आप होने दो सब टाइम तो टाइम अपने आप पता चल जाएगा.

मैं-ओके लंच पे मिलते है.और ये बोल के मैं अपने कमरे मे फ्रेश होने चला गया.फ्रेश होने के बाद हम ने साथ लंच किया लंच के बाद मैं ने दी से बात की और कमाल की बात पता नही कि कैसे पर जिया दी ने नैना दी को मना लिया था .ये जान के मेरी ख़ुसी दुगनी हो गयी थी अब हम घर जाने की तैयारी करने लगे.मैं काफ़ी एक्साइत था मुझे ये भी पता नही वहाँ जा के क्या होना है.

जॅक-तो तैयार हो तुम घर चलने के लिए

मैं-मैं हाँ लगभग बस रवि से मिल के चलते है. दी रवि कब तब तक आएगा.

दी-बस आ रहा है आधे घंटे मे आ जाएगा.मैने फोन किया था रास्ते मे है.वैसे क्या करने का सोचा है तूने आगे .

मैं-दी मैं तो अब लाइफ एंजाय करने की सोच रहा हूँ .अभी तो कुछ सोचा नही वैसे रवि ने क्या लिया है.

दी-रवि तो ***** कर रहा है .तू भी ये सब्जेक्ट ही ले ले अच्छा रहेगा.

मैं-हाँ ठीक है मैं जल्द ही जा के अड्मिशन करवा लूँगा.

दी-उस की टेन्षन मत ले मैं करवा देती हूँ .

मैं-नही मुझे यहाँ किसी की भी हेल्प नही चाहिए.वैसे भी मैं यहाँ एक मिडल क्लास फॅमिली से जीना चाहता हूँ और आप सब के सपोर्ट की ज़रूरत है.

दी-सोच ले एक बार और तुझे काफ़ी प्राब्लम होगी यहाँ इंडिया मे मिडल क्लास फॅमिली की लाइफ इतनी भी अससन नही है.और फिर अंकल आंटी मान जाएगे इस के लिए .

मैं-आप उस की टेन्षन ना लो मैं उन्हे मना लूँगा .और बिना प्राब्लम के जीना भी कोई जीना है.

दी-तेरी मर्ज़ी हम तो तेरे को बस समझा सकते है आगे तेरी मर्ज़ी .अगर कभी हेल्प की ज़रूरत हो तो बता देना .

मैं-उस के लिए ही मिस्टर.जॅक आए है मेरे साथ यहाँ उस की टेन्षन ना ले आप नही जानती इन को ये क्या चीज़ है .सच तो ये है कि मैं भी अभी नही जानता कि ये क्या है या कौन है.

दी-मुझे पता है रवि बता रहा था कि ये वहाँ की स्पेशल फोर्स मे थे.

मैं-मुझे नही पता मुझे तो बस इतना पता है कि ये मेरे टूटर है और खतेरनाक भी बस .

दी-वेरी गुड वैसे तू जानता है कि जिस कॉलेज मे भी तू अड्मिशन लेगा वहाँ पे ये स्पोर्ट्स टीचर के लिए आप्लाइ करेंगे.

मैं- नही मुझे ये नही पता था.सच कहूँ तो मुझे कुछ भी नही पता.वैसे भी इन के अप्लाइ करने भर से इन को वहाँ पे जॉब नही मिल जाएगी.

दी-तुझे क्या लगता है अंकल (मेरे मामा) ने इन के लिए कुछ सोचा नही होगा.तुझे शायद पता नही है पर यहाँ के हर कॉलेज मे किसी ना तरह उन ही की कंपनी से पैसा आता है .

मैं-ठीक है मैं ने अब अपना दिमाग़ लगाना छोड़ दिया है ये रवि कहाँ रह गया ज़रा उस को आप फोन करके देखेंगी.

किसी ने हमे याद किया,,,,,

.अभी मेरी बात भी पूरी नही हुई थी कि रवि अंदर आता हुआ दिखा.

 
किसी ने हमे याद किया,,,,,

.अभी मेरी बात भी पूरी नही हुई थी कि रवि अंदर आता हुआ दिखा.

मैं-तू कहाँ चला गया था हमे छोड़ के.

रवि-यार तुझे शायद पता नही है मेरे एक कज़िन की तबीयत खराब है उसी को देखने के लिए गया था मोम भी वही है कल से.

मैं-ओके चल फ्रेश हो जा फिर तुझे हमे छोड़ने भी जाना है.

रवि-ओके तू बस 5मिंट रुक मैं आधे घंटे मे आया .और फिर वो हँसता हुआ चला गया .

और मैं बाहर आ के गार्डन मे घूमने लगे आधे घंटे के बाद रवि आया और हम निकल लिए मेरी मंज़िल की ओर .कोई 20मिनट के बाद रवि गाड़ी रोकी और सेक्यूरिटी गार्ड्स से कुछ बात करने लगा फिर 5 मिंट के बाद वो वापिस आया और गार्ड ने गेट खोल दिया.और हम अंदर चल दिए………

फिर हम गाड़ी से उतार गये और मेन गेट की ओर जाने लगे रास्ते मे हम को कुछ लोग मिले जो शायद वहाँ काम करते थे .वो हमे ऐसे घूर रहे थे जैसे कि हम किसी चिड़िया घर से भाग के आए हो.जॅक को इस से कोई फ़र्क नही पड़ रहा था.हम लोग मेन गेट तक पहुँच के डोरबेल बजाने ही वाले थे कि गेट ओपन हुआ और अंदर से एक 35 से 40 साल के बीच का एक बंदा बाहर आया और वो भी हमे घूर्ने लगा अब मुझ से बर्दास्त नही हुआ और मैने पूछा तुम सब मुझे घूर क्यूँ रहे हो मेरे ख़याल से तो मैं भी एक नॉर्मल आदमी ही हूँ.

आदमी-वो सब ठीक है तुम कौन हो यहाँ क्या कर रहे हो.अगर किसी कंपनी के सेल्समन हो तो वापस चले जाओ.

मैं-आप को क्या लगता है हम आप को सेल्समन लगते है.और सेल्समन को यहाँ इतनी आसानी से एंट्री मिल जाती है फिर तो सेक्यूरिटी का कोई काम ही नही है.

आदमी-तुम मुझ से बहस मत करो और जिस भी कम के लिए आए हो वो बोलो और निकल लो यहाँ से.नही तो सेक्यूरिटी को बुलाता हूँ अभी.

मैं- ऐसे कैसे निकल लो अभी तो हमे आप के साहब से मिलना है माँसाहब भी चलेगी और आप हमे अंदर ले के चलें प्लीज़ मुझे जो भी काम होगा मैं उन से मिल के ही बताउन्गा.

आदमी-मैं ही साहब हूँ यहाँ का बोलो क्या काम है .

मैं-मज़ाक अच्छा है अब मेरा दिमाग़ खराब हो उस से पहले आप मुझे अंदर जाने दे.

आदमी-तुम ऐसे नही मानने वाले.सेक्यूरिटी -02 कहाँ मार गये सब के सब .

इतने मे चार सेक्यूरिटी वाले दौड़ के आते है और हमारे पास खड़े हो जाते है.

गार्ड1-जी सर कहिए क्या बात है.

आदमी-तुम लोग ड्यूटी पे सोते हो क्या ये दोनो अंदर कैसे आए तुम सब को कल से आने की ज़रूरत नही है समझे.

गार्ड1-माफ़ कीजिए सर पर ये दोनो रवि जी के साथ आए है .और बड़े साहब का ऑर्डर है कि उन को कभी भी आने जाने से ना रोका जाए.

आदमी-तो तुम उस के दोस्त हो तभी इतना उड़ रहे हो .वो कहाँ है .

मैं-अपना दिमाग़ ना ही लगाओ तो तुम्हारे लिए अच्छा होगा .वो गाड़ी पार्क करने गया था पता नही अब तक आया क्यूँ नही.

आदमी-तुम मुझे धमकी दे रहे हो.

मैं-अब तक तो नही दी अगर तुम को बुरा लगा हो तो अब दे दूं.वैसे तुम हो कौन चोकीदार हो क्या जो यहाँ गेट पे खड़े हो.

आदमी-मैं यहाँ मॅनेजर हूँ और तुम जो कोई भी हो जितनी जल्दी हो यहाँ से निकल लो नही तो....

अभी उस की बात पूरी भी नही हुई थी कि जॅक बीच मैं बोल पड़ा देखो मुझे इस टाइम रेस्ट की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है या तो तुम अंदर ले के चलो या मैं अपने तरीके से चला जाता हूँ तुम बाद मे आ जाना.

क्या हो रहा यहाँ पे ..... इतने मैं पीछे से रवि आता है और वहाँ भीड़ को देख के हमारे पास आ जाता है.

रवि-ये सब क्या हो रहा है राजीव जी इतनी भीड़ क्यूँ लगा रखी है.और तुम अब तक यहाँ क्या कर रहे हो अंदर क्यूँ नही गये.

मैं-आप के राजीव जी हमे ये बता रहे थे कि वो क्या कर सकते है .और हाँ मैं और जॅक इन को सेल्समन लगते है कमाल है ना.

रवि-राजीव जी आप आज कल ज़्यादा ही परेशान कर रहे है .मुझे और भी कुछ कंप्लेन मिली है अभी.

आदमी-देखिए मैं अपना कम कर रहा हूँ और आप अपना काम करें मुझे ना बताए कि क्या करना है और क्या नही समझे साहब ने सिर्फ़ आप को आने जाने की परमिशन दी है ना कि आप के दोस्तो को भी लाने की कंप्लेन तो मैं आप की करूगा .

मैं-देखो अब अंदर चलते है आगे की बातचीत वही करते है.

रवि-हाँ वो तो ठीक है पर देख तो इन्हे अपने ग़लती मानने की वजाय मेरे को ही ग़लत बोल रहे है.

मैं-तू अंदर ले के चल रहा है या मैं खुद जाऊ.

 
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