फिर हम लोग अंदर को चल देते हैऽन्दर से देखने मे घर बिल्कुल किसी महल की तरह बना और सज़ा हुआ था देखने मे ही मालूम पड़ रहा था कि बनाने वाले को काफ़ी समझ थी फॅशन की घर के हर हिस्से को ऐसी फिनिशिंग दी गयी थी देखने वाला चाह के भी कोई कमी नही निकाल सकता था.मैने पीछे मूड के देखा तो राजीव जी हमारे पीछे पीछे अंदर आ गये थे और बड़ी ही बेचैनी से ये जानने के लिए मरे जा रहे थे.ये देख के मेरे होंठो पे ना चाहते हुए भी मुस्कान आ गयी.इतने मे रवि अंदर से किसी के साथ सामने वाले कमरे से निकल रहा था जैसे ही उन की नज़र मुझ पे पड़ी वो वहीं बेहोश हो गयी सही सोचा दोस्तो वो मेरी मोम रियल मोम थी.जब हम ने उन को बेहोश होते देखा तो हम उन को वापस कमरे मे ले गये और डॉक्टर को बुला लिया डॉक्टर ने उन को चेक किया और बताया कि एक्सआईटमेंट की वजह से वो बेहोश हो गयी थी.इतनी देर मे डॅड भी आ गये और जब मुझे वहाँ देखा तो उन की आखो से भी आसू निकल गये फिर उन्होने मुझे गले लगाया और कुछ देर तक हम दोनो बाप बेटे ऐसे ही एक दूसरे के गले लगे रहे फिर अलग होते हुए .
डॅड-तुम इंडिया कब आए .और मुझे बताया भी नही.
मैं-आज ही डॅड और आप के लिए सर्प्राइज़ था पर लगता है कुछ ज़्यादा ही हो गया .
डॅड-हाँ सर्प्राइज़ तो तूने ऐसा दिया कि क्या कहना .वो ये कौन है .(जॅक की तरफ इसरा करते हुए).
मैं-मुझे नही पता डॅड अभी तो मैं सिर्फ़ इतना ही जानता हूँ कि ये मेरे टूटर है जो मामा ने भेजे है.
डॅड-ओके अब तू जा के आराम कर जब तेरी मोम उठेगी और उसे पता चलेगा कि मैं उस से पहले तुझ से मिलचुका हूँ तो वो हंगामा खड़ा कर देगी इस लिए अभी तू जा आराम कर और पूछे तो बोलना कि अब तक तुम मुझ से मिले नही हो...
फिर हम आराम करने के लिए अपने कमरो मे जाने लगे तो मैं ने जॅक से कहा कि अब हमारे पास काफ़ी टाइम है एक दूसरे को जानने
का तो क्या कहते हो मैं चाहता हूँ कि मुझे कल तक ये पता हो कि मैं किस के साथ रह रहा हूँ.
जॅक-ठीक है तुम फ्रेश हो के मेरे कमरे मे आओ मुझे भी तो पता चले कि तुम कितने पानी मे हो.
मैं-मज़ाक अच्छा था.चलो मिलते है फिर.
और फिर हम दोनो अपने कमरो मे चल गये.मैं फ्रेश हो के जॅक के कमरे मे गया वहाँ जॅक अपनी गन्स लगा रहा रहा था देखने मे शायद
वो इन्हे किसी सीरीज़ मे लगा रहा था.
मैं-तो आप तुमने इस टाइम गन्स को क्यूँ निकाल लिया हम बात करने वाले थे शायद .
जॅक-मुझे याद है मैं बस ये चेक कर रहा था कि कौन सी गन कम है.
मैं-हद है यार और कितने गन्स चाहिए तुम्हे पूरा एक बॅग भर के है तुम्हारे पास तुम कोई शैडो तो नही हो ना .
जॅक-ऐसा कह सकते हो .छोड़ो आओ बैठो ये मैं बाद मे चेक कर लूँगा .
मैं-गुड चलो बाहर गार्डन मे चलते है.फिर हम दोनो गार्डन मे आ गये.
तो अब आप सुरू कर सकते हो.
जॅक-हाँ क्यूँ नही चलो जल्दी सुरू हो जाओ बच्चे.
मैं-तुम क्या जानना चाहते हो मेरे बारे मे सब कुछ तो पता है तुम्हे.
जॅक-नही मुझे वो जानना है जो किसी को नही पता जैसे कि तुम को एक दम से एक नॉर्मल लाइफ जीने की तमन्ना इंडिया आने की वजह और भी बहुत कुछ जो शायद तुम छुपा रहे हो.
मैं-ऐसा कुछ नही है.जैसा तुम सोच रहे हो.और तुम्हे ऐसा क्यूँ लगता है कि मैं कुछ छुपा रहा हूँ.
जॅक-देखो तुम ने अभी पालने के अंदर से कदम बस बाहर निकाला है.और मैने इस दुनिया को बहुत ही अच्छे से देखा है .अगर तुम चाहते हो कि मैं तुम को अपने बारे मे बताऊ उस से पहले तुम को मुझ पे भरोसा करना होगा और अपने बारे मे वो सब बताना होगा जो तुम नही चाहते की किसी और को पता चले.
जॅक की बाते सुनने बाद ना चाहते हुए भी मुझे वो सब याद आने लगा जो मैं किसी भी कीमत पे याद नही करना चाहता था.आज मुझे फिर से उस दर्द का अहसास हो चला.और आखो ने मेरा साथ छोड़ दिया और अपने आप भीग गयी.
मैं-जॅक तुम बिल्कुल सही हो हम दोनो को एक दूसरे पे भरोसा करना होगा. तुम्हे पता है इतने छोटी से उमर मे मैने इस दुनिया की
सबसे बड़ी बात जान ली कि जिंदगी जैसी दिखती है वैसे है नही.
मैं तुम्हे अभी अपनी पूरी स्टोरी नही बता सकता पर विश्वास करो सही टाइम आने पे मैं तुम को वो सब बताउन्गा जो तुम जानना चाहते
मैं वहाँ की स्पेशल फोर्स मे टीम लीडर था.हमारी टीम मे हम साथ (7) मेंबर थे हम को ऐसे मिशन्स दिए जाते थे जिन का कोई भी रेकॉर्ड नही होता था .मैं ने लगभग दुनिया की हर उस जगह पे और उस हालात पे काम किया है जिसे कोई सिर्फ़ सोच के ही अपने लिए मौत को
अपनी जिंदगी के रूप मे चुनना पसंद करते है.पर मुझे मेरी लाइफ पसंद थी क्यूँ कि ये मेरी चाय्स थी मुझे किसी से कोई शिकायत नही थी.
वो दिन भी आया मेरी लाइफ मे जिसे मैं आज तक कभी भूल नही पाया और ना ही कभी भूल सकता हूँ.हम लोग एक मिशन पे थे जिस मे हम को सिर्फ़ कुछ इन्फर्मेशन से इकट्ठा करनी थी.हम लगभग अपना मिशन कंप्लीट कर चुके थे और वापसी की तैयारी कर रहे थे कि तभी हम पे हमला हुआ और मेरे 5 साथी मारे गये और मैं और जोसेफ (मेरा 6थ साथी ) पकड़े गये.उन्होने हमे मारा नही बल्कि मौत से
बदतर जिंदगी दे जीने के लिए वो हमे पूरे एक महीने तक तडपाते रहे और फिर एक दिन हमे एक छोटा सा मोका मिल गया और हम
वहाँ से भाग निकले.अभी हमे ज़्यादा टाइम नही हुआ था वहाँ से भागे हुए कि उन्हे पता चल गया और वो हमे ढूँढने लगे उन्होने जोसेफ का एक पैर काट दिया था जिस वजह से वो भाग नही सकता था.
जोसेफ-सर मैं अब यहाँ से ज़्यादा दूर नही जा सकता.ये बात आप को भी पता है और अगर आप मुझे यूँ ही ले के चलते रहे तो वो हम
दोनो को ही मार देंगे.आप मुझे यही छोड़ के चले जाएँ मैं कुछ देर तक तो उन को रोक ही सकता हूँ.
जॅक-तुम पागल हो गये हो .हम दोनो यहाँ से निकल जाएगे बस तुम थोड़ी सी हिम्मत रखो.
जोसेफ-आप जानते है ये मुमकिन नही है सर आप समझते क्यूँ नही आप को सिर्फ़ आप के लिए ही नही हमारे उन सभी साथियों के लिए जिंदा रहना है.क्यूँ कि आप ही उन को इंसाफ़ दिला सकते है.आप मुझ से वादा करे कि चाहे वो कोई भी क्यूँ ना हो जिस की गद्दारी
की वजह से हमारे साथियों को अपने जान देनी पड़ी आप उस को जिंदा नही छोड़ेगे.
जॅक-ठीक है मैं समझ गया.मैं तुम से वादा करता हूँ कि मैं उस को अपने हाथो से मौत की सज़ा दूँगा चाहे वो कोई भी हो मुझे इस से कोई फ़र्क नही पड़ता.
फिर मैं किसी तरह वहाँ से वापस अपने देश आया और फिर मुझे 6महीने लग गये उस शक्श को ढूँढने.फिर मैने अपने वादे के अनुसार उस को उस के किए की सज़ा दे दी.
मैं-पर तुम को कैसे पता कि तुम्हारे साथ गद्दारी हुई थी.
जॅक-ये मुझे उन की क़ैद मे ही मालूम पड़ा कि उन को हमारे आने की जानकारी पहले से थी और हमारा सारा प्लान भी.
फिर मुझे जैल हुई जहाँ से तुम्हारे मामा ने मुझे छुड़ाया और मेरे साथियों के घर वालो को उन का हक़ दिलवाया .जिस के बाद मैं तुम्हारे
मामा के साथ काम करता हूँ.
मैं-सब ठीक है पर तुम मेरे साथ कुछ समझ मे नही आया.?
जॅक-बस तुम इतना ही समझ लो कि तुम्हारे मामा ये चाहते थे कि मैं तुम को वो सब सिखाऊ जो मुझे आता है.ताकि वक़्त आने पे तुम
अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा कर सको.
और अब मैं आराम करने जा रहा हूँ तुम भी आराम करो बाकी बाते बाद मे करते है.....
मैं अभी नीद मे ही था कि मुझे मेरे सिर पे किसी का हाथ फील हुआ मैने आखे खोली तो सामने मेरी मोम थी जो 15सालो बाद अपने बच्चे को देख रही थी.
मैं-आप की तबीयत ठीक नही है ना फिर आप अपने बिस्तर से क्यूँ उठी मुझे बुला लिया होता आपके पास मैं आ जाता .
मोम-तुझे पता है मेरी बीमारी भी तू है और दवा भी अब तू आ गया तो देख मैं अब बिल्कुल ठीक हूँ .और अगर तुझे बुलाना ही होता तो
सालो पहले ही बुला लिया होता .तू भी ये सोच रहा होगा कि कैसे माँ है ये जो अपने बेटे से दूर रही इतने दिन और मिलने भी न आ सकी.
मैं-ऐसा बिल्कुल नही है.और मैं उन के गले लग के रोने लगा वो और भी रोने लगी कुछ देर तक ऐसे ही रहने के बाद मुझ को अपने से अलग करते हुए.
मोम--तेरे लिए एक खुशखबरी है जिस को सुन के तू रोना भूल जाएगा तेरी दूसरी माँ भी बहुत जल्द इंडिया आ रही है हमेशा के लिए.
और अब रोना बंद कर रोते हुए तू बिल्कुल भी अच्छा नही लगता .मैने तुझे इतने बड़ी खुसखबरी सुनाई है लगता है तुझे ख़ुसी नही हुई.
मैं--नही ऐसा नही है आप नही जानती कि मुझे कितनी ख़ुसी हुई ये जान के वो सब भी हमारे साथ ही रहेगे.मैं तो बस ये ही सोच के खुद
को इस दुनिया का सबसे ख़ुसनसीब और दौलतमंद महसूस कर रहा हूँ.
मोम-चल ठीक है अब उठ और नीचे आ जा तेरे डॅड और बाकी सब भी तेरे से मिलना चाहते है.और मेरे माथे(फॉरहेड ) पे किस कर के वो नीचे चली गयी.
मैं उठा और हाथ मूह धो के नीचे की ओर चल दिया.जहाँ किसी मेले जैसा महॉल था.नीचे जा के मैने डॅड के पैर छुए और उन्होने मुझे अपने गले लगा लिया.फिर मैं मोम से मिला और डॅड ने सब से मेरा इंट्रो करवाया.जब वो राजीव जी से मेरा इंट्रो करवा रहे थे तो मैं ने उन्हे
रोक दिया.डॅड इन्हे मैं पर्सनाली इंट्रो दे देता हूँ आख़िर ये जनाब यहाँ के साहब जो है कहीं इन्हे बुरा लगा तो मेरी खैर नही.
मैं--तो मिस्टर.राजीव मैं हूँ अजय गुप्ता सन ऑफ डी.पी गुप्ता और मैं आज से यहीं रहुगा अगर आप को कोई भी प्रॉब्लम हो तो प्लीज़
मेरे डॅड से बात करें.
डॅड-ये सब आख़िर हो क्या रहा है.कोई मुझे भी कुछ बताएगा.
जॅक-सर बात कुछ ये है कि...........और फिर ये हुआ.
डड-मिस्टर.राजीव आप को कल से यहाँ आने की ज़रूरत नही है.आप मेरी दी हुई छूट का ग़लत मिस यूज़ कर रहे तो आप के लिए ये
ही बेहतर होगा की आप यहाँ से अभी चले जाए मैं मिश्रा जी से बोल दूँगा कि वो आप का हिसाब देख लें .
राजीव-प्लीज़ सर मुझे माफ़ कर दें आगे से ऐसा नही होगा.
मैं-डॅड रहने दे बाद मे देखते है.आप जा सकते है मिस्टर.राजीव पर कल से मिस्टर.जॅक को असिस्ट करेंगे अगर आप को ओके है तो ठीक है नही तो सॉरी.
राजीव-मुझे ओके है सर
मैं-ठीक है आप जा सकते है.
डॅड कोई तो मिस्सिंग है यहाँ .
डॅड-हाँ वो तेरे अंकल के यहाँ गयी है.अभी किसी को पता नही कि तुम आ गये हो इसलिए अभी तक तुम से मिलने भी कोई नही आया.मैने सोचा कि तुम अभी थके हुए हो गे तो आज आराम कर लो कल एक शानदार पार्टी करते है जिस मे सब को इन्वाइट करते है तुम सब से मिल भी लेना.
मैं-ओके दद जैसा आप ठीक समझे .
मोम-आप लोगो की बातचीत ख़तम हो गयी हो तो डिन्नर कर ले.
मैं-मुझे तो बहुत भूक लगी है मैं तो जम के खाउन्गा .
जॅक-मैं भी पीछे नही रहने वाला इंडियन डिशस का अपना ही मज़ा है आज बहुत ही दिन बाद शानदार दावत होने वाली है.
डॅड-तुम लोग बाते करो मैं डिन्नर कर के आता हूँ बहुत दिनो के बाद सुषमा ने अपने हाथो से खाना बनाया है.मैं भी जम के खाउन्गा.
फिर हम सब डिन्नर करने लगे डाइनिंग टेबल पे एक से बढ़ के एक इंडियन डिज़ेस लगी हुई थी .मैने इतनी डिशस कभी एक साथ नही
देखी थी.मोम मुझे अपने हाथो से खिलाने लगी खाना सच मे बहुत ही स्वादिष्ट था मज़ा आ गया .
इसी तरह हम लोगो ने डिन्नर ख़तम किया और फिर आराम करने के लिए अपने -अपने कमरो मे चले गये.
दोस्तो अब मैं आप लोगो को अपनी इंडियन फॅमिली के बारे मे बता दूं जिनसे मैं मिल चुका हूँ.
डॅड-डी.पी गुप्ता उम्र 50 से 55 के बीच की है .आप लोगो से झूठ नही बोलुगा देखने मे अब उतने आक्टिव नही है शायद डेस्क वर्क और अपना खुद का बिज़्नेस होने के कारण थोड़े आलसी हो गये है जिस से थोड़ा पेट भी बाहर को निकल गया है.सिर के बाल भी कुछ खास हिस्सो से ऐसे गायब हुए है जैसे गधे के सिर से सींग.स्वाभाव के बहुत ही अच्छे और जिंदादिल आदमी है वो अपनी लाइफ मे पैसो
की अहमियत समझते है शायद इसलिए भी कि उन्होने अपना बिजनेस अपने मजबूत कंधो पे अपनी कड़ी मेहनत से बनाया है.और ये
भी जानते है कि बिना पैसो के जिंदगी बाद से बदतर हो जाती है इसलिए वो कई ऐसे आश्रमो के ट्रस्टी है जहाँ ग़रीब और अनाथ बच्चे
रहते औट पढ़ते है .मुझे इन की सबसे अच्छी बात इन का अपने उपर घमण्ड ना करना लगता है मुझे नाज़ है कि मैं ऐसे घर मे पैदा हुआ.
मोम-सुषमा 40 से 45 देखने मे नॉर्मल कोई खास बात नही इस के कि इन्होने डॅड का हर फ़ैसले और मोड़ पे साथ दिया है.
और हम आराम करने अपने अपने कमरो मे चले गये.रात मे मैं ये ही सोच रहा था कि मैं कल कैसे सब से मिलुगा और और सब का रिक्षन क्या होगा ये ही सोचते हुए मुझे कब नीद आई मुझे पता भी नही चला सुबह मेरी नीद गेट के नॉक से खुली मैं ने अपने मोबाइल मे
टाइम देखा तो सिर्फ़ 5 बज रहे थे मैने सोचा कि कौन होगा इतनी सुबह और ये सोचते हुए ही मैने गेट खोला तो सामने जॅक खड़ा था जो
पूरी तरह से फ्रेश लग रहा था
मैं-.जॅक क्या हुआ इतनी सुबह क्यूँ उठा दिया यार मेरे उठने का टाइम7.30 के बाद का है.
जॅक-आज से तुम्हारा टाइम्टेबल चेंज हो रहा है नोट कर लो मुझे 10 मिनट मे तुम नीचे चाहिए और कोई बहाना नही चाहिए मुझे मैं टाइम
का बहुत पाबंद हूँ तो ध्यान रखना कि 10 मिनट मॅग्ज़िमम.
मैं-ओके तुम चलो मैं आता हूँ.
और मैने जॅक को जितनी भी गालियाँ आती थी वो सब दे डाली पर मन मे .और मूह धो के और अपना ट्रॅक सूट पहन के नीचे आ गया.
जॅक-तुम तीन मिनट लेट हो आज पहला दिन है इसलिए माफ़ कर दे रहा हूँ नेक्स्ट टाइम पनिश्ड होगे.
मैं-ओके गब्बर सिंग अब बता भी दो कि किसलिए इतनी सुबह उठाया है.
जॅक-आज से तुम पर डे 5बजे उठोगे और मेरे साथ प्रॅक्टीस करोगे .
मैं-सर जी मैं यहाँ लड़ाई करने नही आया इसलिए मुझे प्रॅक्टीस की कोई ज़रूरत नही है उस के लिए तुम हो ना.
जॅक-ठीक है पर नॉर्मल एक्सरसाइज़ तो करने ही पड़ेगी.और शायद तुम्हे पता ना हो मैं स्पोर्ट्स के हर फील्ड की अच्छी ख़ासी नालेज
रखता हूँ इसलिए आगे से ध्यान रखना .
मैं-ओके मतलब कि तुम मेरी जान नही छोड़ने वाले तो फिर चलो सुरू करो इस मासूम से बच्चे पे ज़ुल्म.
फिर हम बाहर गार्डन मे आ गये गार्डन मे आते ही जॅक ने कुछ काय्न्स मेरी दोनो बाजुओ पे और दोनो पैरो पे बाँध दिए.जो कि हर काय्न का बजन कोई 250 ग्राम के आस पास होगा .मैने सोचा कि उस से पुछु कि ये किसलिए है फिर सोचा कि कोई फ़ायदा नही करना तो फिर भी है इस से अच्छा है की जो ये कहता है करते है.
फिर जॅक ने मुझे इस वजन के साथ अड़जस्ट होने को बोला जो मुझे लगा ईज़ी है पर वो तो बाद मे पता चला कि ये जितना ईज़ी दिखता है वो है नही मेरा पूरा शरीर पसीने से भीग गया मैने अगर ऐसी एक्सर्साइज़ पहले अगर शायद दो-चार बार की होती तो शायद मैं
किसी डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूई के फाइटर की तरह दिखता. मैने किसी तरह35 से 40 मिनट तक जॅक का साथ दिया फिर थक के वही बैठ
गया .जॅक ने शरीर के हर उस हिस्से मे दर्द दे दिया था जहाँ मैने कभी सोचा भी नही था.
जॅक-1स्ट दे के लिए काफ़ी हुआ चलो आराम करते है फिर हम दोनो वही बैठ गये और वो मुझे बताने लगा कि मैं जिस कॉलेज मे अड्मिशन ले रहा हूँ उस मे ऐज आ स्पोर्ट टीचर की जॉब भी लग गयी.(मुझे अब किसी भी बात पे कोई हैरानी नही होती थी क्यूँ कि एक चीज़ मैं
समझ गया था कि नतिंग ईज़ इंपॉसिबल)
फिर हम ऐसे ही कुछ देर तक बाते करते रहे फिर घर जाते हुए जॅक ने मुझे ऐसे बॅलट्स दिए जिन मे कुछ बजन भी था पर वो एक फॅशिनेबेल पीसस भी लग रहे थे और उन्हे फिर से मेरे हाथ पाँव मे बाँध दिया .और उसे कभी ना उतारने को कहा.फिर मैं घर जाने लगा तो मुझे मेरा एक एक हाथ पाँव दस दस किलो का लग रहा था मेरी चाल ऐसी हो गयी थी जैसे किसी ने मेरा बलात्कार कर लिया हो मैं
किसी तरह घर के अंदर गया जहाँ डॅड ने मेरी ऐसी हालत देखते ही पहले तो उन को कुछ समझ नही आया फिर जब समझ आया तो
उन की हसी छूट गयी.और वो हँसने लगे.
मैं-क्या डॅड यहाँ मेरी बॅंड बजी पड़ी है और आप को हसी आ रही है.
अपने आप को देखो कैसे मोटे होते जा रहे हो एक काम क्यूँ नही करते आप भी कल से हम को जाय्न करो मज़ा आएगा.
जॅक-अच्छा आइडिया है आप भी कल चलिए हमारे साथ वैसे भी आप को अपना बजन कम करने की ज़रूरत है.
डडि-नही मैं ऐसे ही ठीक हूँ.
मोम-किचन से आते हुए बिल्कुल ज़रूरत है.जॅक आप इन को कल से अपने साथ ले जाएँ और अगर ये आप की बात ना माने तो आप
मुझे बता दीजिएगा मुझे पता है कैसे ठीक करना है.
डॅड-तुम क्यूँ टेन्षन ले रही हो अब तुम्हारा ऑर्डर हो गया तो मैं तो वैसे भी मना नही कर सकता.मैं कल से ही जाय्न कर लूँगा जॅक को .
फिर मैं अपने कमरे मे आ के बेड पे लेट गया तो मुझे मेरा फोन दिखा और मैने सोचा कि क्यूँ ना नैना दी से बात की जाए आख़िर उन्हे भी
तो मालूम पड़े की जिसे वो कुंभकारण कहती है वो सुधर गया है......
मैने नैना दी को फोन लगाया उन्होने दूसरे बेल मे ही फोन पिक कर लिया जैसे उन्हे पता हो कि मैं कॉल करने वाला हूँ.
नैना दी-तो मिस्टर.अजय को हमारी याद आ ही गयी हम तो ध्यानी हो गये.हमे तो लगा की मिस्टर.अजय इंडिया जा के बहुत बिज़ी हो गये
है और न्यू फॅमिली भी मिल गयी तो हमे क्यूँ याद करेंगे भला.
मैं-दी आप नही जानती आप को मैने कितना मिस किया.और आप को गर्व होगा मुझे पर जब आप को पता चलेगा कि मैने आज किया है.
दी-ऐसा तूने क्या कर दिया जो मुझे गर्व होगा तुझ पे.कही तुझे अपने शूलेस बढ़ने तो नही आगये.
हाहहहाहा.
मैं-क्या दी आप भी ना आप को पता है ये स्टोरी मेरे कुछ दोस्त भी पद रहे है तो हम ने डिसाइड किया था कि एक दूसरे के राज
नही खोलेगे.और आप को बता दूं वो मैं सिक्स मंत्स पहले ही सीख चुका हूँ.
दी-हाहहाहा चल छोड़ ये बता कि कौन सा तीर मारा है तूने.
मैं-आज सुबह 5बजे और वो भी बिना किसी के उठाए उठा हूँ आप सोच सकती है कि ये कितना महान काम है मेरा नाम गिनीज़ बुक
मे एड होना चाहिए.पर मेरी महानता तो देखो मैं ऐसा कुछ नही कर रहा .
दी-चल अपना बोल बचन बंद कर और ये बता कि इतने सुबह कैसे उठ गया .
मैं-क्या दी आप ना मेरी टाँग खीचना कभी नही छोड़ सकती है ना.तो सुनो सुबह........और फिर ये हुआ.और हसना बंद करो प्लीज़ नही तो नही तो....
दी-अच्छा अच्छा ठीक है चल नही हँसते पर कसम से मुझे होना चाहिए था वहाँ.
मैं-अरे हाँ मैं तो भूल गया आप लोग इंडिया कब आ रहे है.
दी-बहुत जल्द बस इतना ही जान ले.चल अब फ्रेश हो के नाश्ता कर ले बाद मैं कॉल करती हूँ.
और फिर मैं फ्रेश होने चले गया और फिर नीचे आ गया पूरे शरीर मैं ऐसा लग रहा था कि किसी ने सूइयां चुभा दी हो जॅक को देख के फिर से दिल से प्यार फुट पड़ा.
जॅक-क्या बात है अजय सारी गालियाँ आज ही दे दोगे.
मैं अपने मन में --ओह तेरी इसे कैसे पता कि मैं इसे गालियाँ दे रहा हूँ वो भी थोक के भाव
मैं--.नही जॅक आप को ऐसा क्यूँ लग रहा है कि मैं आप को गाली नो नेवेर कभी नही .
डॅड-तो आज का क्या प्लान है अजय.
मैं-कुछ खास नही डॅड बस कुछ शॉपिंग करनी है यहाँ के हिसाब से ताकि मैं भी इंसान लग सकूँ.
डॅड-ओके तुम अपनी मोम से कॅश या कार्ड ले लेना .और मैं ऑफीस जा रहा हूँ कोई काम हो तो फोन कर लेना.
मैं-डॅड मुझे कॅश या कार्ड की ज़रूरत नही है.मेरे पास ऑलरेडी क्रेडिट कार्ड है जो मामा ने स्पेशल इंडिया के लिए ही दिया है वो भी अनलिमिटेड .
डॅड-पर उस को यूज़ करने की कोई ज़रूरत नही है यहाँ किसी चीज़ की कोई कमी नही है तुम मेरा कार्ड यूज़ करो आख़िर अब तक
तुम अपने मामा के पास थे तो कोई बात नही थी पर अब तुम यहाँ हो तो मेरे बेटे बन के रहो.
मैं-आप मामा से बात कर ले फिर मुझे बता दे मैं आप दोनो के बीच नही आने वाला.
और फिर हम लोगो ने नाश्ता किया और मैं बाहर गार्डन मैं घूमने चला गया.शॉपिंग तो करना है पर जाउ कैसे हाँ रवि को कॉल करता हूँ उस को सब पता होगा यहाँ का आख़िर दो साल से रह रहा है.
रवि-यार हॉस्पिटल मैं हूँ इसलिए आज तुझे से मिलने भी नही आ पाया.
मैं-तू ठीक तो है ना.
रवि-हाँ मैं तो ठीक हूँ तुझे बताया था ना मेरा कज़िन अड्मिट है उसी के पास हूँ.
मैं-ओके चल ध्यान रख और शाम को पार्टी है टाइम से पहले आ जाना चोकीदार कम है यहाँ.
रवि-कमीने कभी तो दिल खुश करने वाली बात बोला कर.जैसे पहले आ जा दिल नही लग रहा या ऐसा ही कुछ.
मैं-तू क्या मेरी माशूक है साले जो ऐसा बोलू चल फोन रख रहा हूँ बाद मे बात करते है.
यार ये तो बिज़ी है अब किस को ले के जाऊ.तभी मेरी नज़र रघु पे पड़ी(रघु हमारे यहाँ काम करने वाले माली रामलाल का बेटा है मेरी
ही उम्र का है शरीर भी ठीक ठाक है.कल ही इंट्रो हुआ था इस से) रघु .
रघु-बोलिए मालिक.
मैं-यार मैने कल ही कहा था कि हम दोनो दोस्त है.और वैसे भी काम करने वाले बहुत है यहाँ मुझे दोस्त की ज़रूरत है आगे तुम्हारी मर्ज़ी तुम्हे दोस्त बनना है या नौकर.
रघु-ठीक है फिर हम आज से दोस्त हुए.अब बताइए क्यूँ बुलाया.
मैं-तुम्हारी गाड़ी पटरी पे आ रही है थोड़ा टाइम लगेगा चलो कोई नही .यार मुझे शॉपिंग करनी है थोड़ी और मुझे यहाँ के बारे मे कुछ भी
पता नही है तो मैं सोच रहा था कि तुम मुझे थोड़ा गाइड करो अगर तुम्हारे पास टाइम हो तो.
रघु-कैसी बात करते हो आप भी मेरे पास टाइम ही टाइम है.बस राजीव सर .,...
मैं-तुम उन की टेन्षन ना लो आज से तुम्हे कोई भी काम हो तो जॅक सर के पास चले जा या करो तुम्हे कोई प्रॉब्लम नही होगी.अब तुम
तैयार हो के आओ फिर चलते है.या रूको मैं भी चलता हूँ मुझे भी अपनी एक टी शर्ट और पैंट दो मुझे भी एक नॉर्मल लड़का ही लगना है....
फिर मैने भी रघु से कपड़े ले के चेंज किए और हम लोग जाने के लिए तैयार हो गये.
रघु-तो अजय मैं तुम्हे अजय बुला सकता हूँ ना.
मैं-बिल्कुल अब हम दोस्त है.
रघु-तो हम जाएँगे कैसे .
मैं-तुम बताओ .
रघु-यार बाइक ठीक रहेगी जो घर के समान लाने मे यूज़ होती है उस से हम ट्रॅफिक से बच जाएगे .और हम ज़्यादा घूम लेंगे.
मैं-ठीक है ले आओ.
कुछ ही देर मैं वो बाइक ले के आ गया.इतना टाइम कैसे लग गया .
रघु-यार वो की राजीव सर पास ही होती है तो उन्हे ही ढूँढने मे टाइम लग गया.
मैं-चल कोई नही .
रघु-बैठो चलते है.पहले कहाँ चले.
मैं-मुझे नही पता कोई मस्त जगह ले चल.पर पहले किसी एटीएम पे बाइक रोकना.
और हम लोग निकल पड़े पहले हम लोग एटीएम पे गये और कुछ कॅश विड्रो किया फिर हम घूमने निकल पड़े .