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Incest जिंदगी के रंग अपनों के संग

फिर हम लोग हॉल में आ गये जहाँ रवि ने मॉम से थोड़ी बहुत बातें की और नाश्ता कर के अपने घर चला गया.और में अपने रूम में थोड़ा आराम करने के लिए चला गया.और आज सुबह से ले कर अब तक की हुई घटनाओ के बारे में सोचने लगा कि तभी मेरा फोन बजने लगा कॉल निशा की थी.

में-हेलो कौन.

निशा-में हूँ.

में-क्या में आपको जानता हूँ मिस.

निशा-अजय देखो मुझे परेशान मत करो में हूँ निशा.

में-निशा ओह तुम हो इस टाइम याद किया कुछ काम था क्या .

निशा-नही बस तुम्हारी याद आ रही थी.

में-अच्छा ऐसा क्या हो गया जो एक ही मुलाकात में हमारी याद आने लगी.

निशा-ज़्यादा ओवर स्मार्ट बनने की ज़रूरत नही है मैने सिर्फ़ तुम्हारा हॉल चाल लेने के लिए कॉल किया था .

में-ओके में बिल्कुल ठीक हूँ और अब मुझे नीद आ रही है बाद में बात करते है ओके.

सॉरी निशा पर में नही चाहता कि तुम या कोई भी मेरे करीब आए क्यूँ कि में दोस्ती से आगे नही बढ़ सकता क्यूँ कि मेरा दिल तो मेरे पास ही नही है वो तो मैने ऑलरेडी किसी को दे दिया है पर किस्मत का भी अजीब खेल है जिस के पास मेरा दिल है वो मेरे पास होते हुए भी कितनी दूर है.और में कुछ नही कर सकता सिवाए इंतज़ार के शायद ये ही मेरी सज़ा है........

मैने निशा का फोन तो काट दिया पर अब मुझे अपनी ग़लती का अहसास हो रहा था कि ग़लती मेरी ही है जो में निशा के साथ ही क्लोज़ हो गया.

अब मुझे मेरे रूम में घुटन सी महसूस होने लगी इसीलिए में गार्डन में आ गया और अपने बीते हुए दिनो को याद करने लगा.और ना चाहते हुए भी मेरी आँखों से आँसुओ की कुछ बूंदे बाहर आ गयी मुझे इस बात का अहसास तब हुआ जब किसी ने अपने हाथों से उसे सॉफ किया.मेंने देखा तो वो जॅक था.

में-जॅक तुम यहाँ क्या कर रहे हो.

जॅक-कुछ खास नही आज पहली बार शार को रोते हुए देकहाँ है .तुम्हारे आँसू तो रब भी नही निकले थे जब सम और उसके दोस्ट्स ने तुम्हारा बुरा हाल कर दिया था.

में-हाँ अच्छा तुम्हें कैसे पता कि में रोया नही था उस टाइम क्या पता रोया हूँ पर तुम अरे पास आते टाइम खुद को ठीक किया हो.

जॅक-मुझसे झूट बोलने की ज़रूरत नही है भूल गये हम दोस्त है.

में-हूँ.......जॅक तुम्हें याद है तुमने मुझसे पूछा था कि मेरे साथ ऐसा क्या हो गया जो में ऐसा हो गया जो मैने अपनी लाइफ चेंज करने

का फ़ैसला कर लिया .

जॅक-मुझे सब याद है.तुम ने कहा था कि जिस दिन तुम को मुझ पे भरोसा हो जाएगा उस दिन तुम खुद ही बता दोगे.

में-बिल्कुल और आज के उस हादसे के बात मुझे लगता है कि मुझे तुम्हें सब कुछ बता देना चाहिए .

जॅक-अच्छा है मुझे खुशी होगी तुम्हारा दुख बात कर अगर में कोई हेल्प कर सकूँ तो ज़रूर करूगा.

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पास्ट

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में 8थ स्टॅंडर्ड में पहुँच गया था में बहुत खुश भी था क्यूँ कि अब तक सभी मुझे किसी छोटे बच्चे की तरह ट्रीट करते थे और मुझे प्रोमिस

किया गया था कि मेरे 8थ स्टॅंडर्ड में अड्मिशन के साथ ही मुझे कुछ फ्रीडम दे जाएगी इसलिए मेरी ख़ुसी का कोई ठीकआना नही था उस टाइम.

में स्कूल पहुँच के रवि का इंतज़ार कर रहा था पर शायद वो आज आने के मूड में नही था.पर तभी मुझे वो दिखी जब उस को पहली बार देखा उस दिन को उस को शायद मम्मी छोड़ने आई थी मुझे समझ नही आया कि ऐसा उस में क्या खास था पर उस दिन से रोज में अपने टाइम से आधे घंटे पहले जा के गेट पे उस का इंतज़ार करता था उस को बिना देखे कहीं मेरा दिल ही नही लगता है.असल में उसे एक

परी समझता कि क्यूँ कि मामी अक्सर मुझे परिओ की कहानी सुनाती थी जिस में परिया बहुत खूबसूरत हुआ करती थी.मामी कहती थी कि जो एक बार कोई परी को देख ले तो उसे कुछ अच्छा नही लगता मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल था वो मेरे लिए एक ऐसी परी थी जिस को देखे बिना कभी मेरे दिन की शुरुआत नही होती थी.

इसी तरह सब चलता रहा अब हम 10थ में थे और वो भी मेरी क्लास में जब मुझे ये बात पता चली तो सच में मुझे इतनी ख़ुसी हुई कि अगर उस वक़्त कोई उस की एक मुस्कान के बदले मेरी जान माँग लेता तो में बिना सोचे समझे उसे दे देता.

आज पूरे दो साल से में उसे रोज देखता पर कभी उसके बारे में जानने की कोशिश ही नही की.इसलिए उस दिन क्लास में पहली बार उस का नाम पता चला .

प्रिया इतना खूबसूरत नाम तभी से प्रिया नाम की लड़किया मुझे अच्छी लगने लगी में सभी प्रिया नाम की लड़कियों में उसी को देखने लगा.

पर मेरे में इतनी हिम्मत अब भी नही थी कि में उस से जा के बात कर सकूँ.वैसे वो मेरे से सिर्फ़ एक बँच आगे ही बैठती थी.लगभग 3मंत्स ऐसे ही निकल गये फिर एक दिन वो स्कूल नही आई वो दिन मेरी जिंदगी का सबसे बुरा बीतने वाला दिन था मैने पूरे दिन वही गेट पे

ही खड़ा रहा इस उम्मीद में कि शायद वो लेट होगयि हो किसी वजह से और लेट स्कूल आए पर ऐसा नही हुआ उस दिन पहली बार

मुझे अहसास हुआ कि वो मेरे लिए क्या मायने रखती है वो दिन कैसे कटा में बता नही सकता मुझे एक एक मिनट एक एक घंटे जैसा लग रहा था .

अगले दिन में अपने टाइम से आधा घंटा पहले ही पहुँच गया कि कही वो जल्दी ना आ जाए इस डर से पर वो उस दिन भी नही आई अब मेरे बर्दास्त के बाहर हो चुकी थी.

लंच टाइम मैने उस की एक फ्रेंड जो उसे के साथ बेंच शेर करती थी उस से प्रिया के बारे में पूछा तो पता चला कि उस को फीवर है अब मुझसे रुका नही गया और मैं उस का अड्रेस ले के उसके घर की ओर चल दिया.उस दिन मैने लाइफ में पहली बार स्कूल मिस किया

बिना किसी को बताए कोई 25 मीं में उसके घर के बाहर था और मेरे समझ में नही आ रहा था कि अंदर उस से और उसकी फॅमिली से क्या कहूँगा फिर मैने हिम्मत कर के डोर्र्बेल बजा दी गेट शायद प्रिया की मॉम ने ही खोला.

में-नमस्ते आंटी में प्रिया का क्लासमेट हूँ दो दिन से प्रिया स्कूल नही आई इसलिए में उस को देखने आया हूँ.

आंटी-अंदर आ जाओ अभी तो तुम्हारी क्लास चल रही होगी ना.

में-जी नही आंटी आज एक फील्ड ट्रिप थी इसीलिए जल्दी छुट्टी हो गयी.

आंटी-नाम क्या है तुम्हारा और कहाँ रहते हो.

में-जी अजय नाम है मेरा और में यहाँ*** अपने मामा के साथ रहता हूँ.

आंटी-तुम्हारे मामा का नाम क्या है.

में-जी राम प्रकास और मामी का मीरा .

आंटी-तुम मीरा के भानजे हो कमाल है मीरा मेरी भी फ्रेंड् है.प्रिया उपर अपने कमरे में है तुम चलो उपर में नाश्ता ले के आती हूँ.

में-जी आंटी .
 
में प्रिया के रूम पे पहुँच के गेट नॉक किया.

प्रिया-कौन है आ जाओ गेट खुला है.

में-हाई प्रिया.

प्रिया-तुम ?

में-अजय तुम्हारी ही क्लास में हूँ शायद तुम ने एक दो बार देखा भी हो.

प्रिया-हाँ देखा है पर तुम यहाँ .

में-वो तुम दो दिन से आई नही ना इसलिए मुझे तुम्हारी चिंता हुई और में****

प्रिया-थॅंक्स

में-अब कैसे तबीयत है तुम्हारी.

प्रिया-अब ठीक हूँ शायद कल से कंटिन्यू करूँ स्कूल तुम ने अपना क्या नाम बताया.

में-अजय नाम है मेरा.

प्रिया-तो अजय आज से हम फ्रेंड्स हैं ना.

में-थॅंक्स मुझे अपना फ्रेंड् बनाने के लिए प्लीज़ तुम थोड़ा मुस्कुरा दो .

प्रिया--अच्छा वो क्यूँ भला.

में-तुम हँसती हुई बहुत प्यारी लगती हो में बता नही सकता कि ***.

प्रिया-मतलब कि वैसे में अच्छी नही लगती क्यूँ है ना.

में-नही ऐसा नही है तुम इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की हो तुम मेरे लिए मेरी परी हो और परिया तो दूसरो को भी हसती है तो

अगर मेरी परी खुद ही मायूष रहेगी तो कैसे चलेगा.

प्रिया-तुम बातें बहुत अच्छी करते हो.

में-तुम हो ही इतने अच्छी.

प्रिया-थॅंक्स तुम आए में यहाँ बहुत बोर हो रही थी.

में-तुम टेन्षन ना लो में अब तुम को कभी बोर नही होने दूँगा.

फिर आंटी नाश्ता ले के आगयि और हम ने नाश्ता किया और कुछ देर प्रिया से बातें करने के बाद शाम को आने का बोल के में घर को निकल गया आज मेरी लाइफ का सबसे ज़्यादा ख़ुसीओ से भरा दिन था आज में खुद को बादलों में महसूस कर रहा था .मुझे नही पता कि लोग जन्नत

किसे कहते है पर मेरी जन्नत मुझे मिल गयी थी घर जाने से पहले में मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे और चर्च होते हुए और उपर वाले को मेरी परी से मेरी दोस्ती करवाने के लिए थॅंक्स बोलता हुआ पहुँचा.

घर पहुँच के में सीधे मामी के पास गया वो किचन में कुछ काम कर रही थी .

में-मामी मुझे आप से कुछ काम है प्लीज़ आप मेरे साथ बाहर हॉल में चलिए .

मामी-ओके तू चल में दो मिंट में आई .

में-आपके लिए मेरी ख़ुसी ज़रूरी है या ये काम.

मामी-बहुत बातें करने लग गया है चल.

मामी आज शाम को आप फ्री है ना.

मामी-हाँ कुछ खास काम नही है बस दो तीन ऐसे ही नॉर्मल से काम है क्यूँ.

में-जो भी काम हो वो आप या तो किसी से करवा ले या कल करेगी क्यूँ कि आज आपको मेरे साथ चलना है मेरी फ्रेंड् के घर उस को फीवर है और इतेफ़ाक़ से उस की मॉम आप की फ्रेंड् है.

मामी-तुझे कैसे पता कि वो मेरी फ्रेंड् है.और नाम क्या है उन का.

में-नाम तो नही पता पर इतना पता है कि वो आप की फ्रेंड् है प्लीज़ मामी मेरी अच्छी मामी मेरी प्यारी मामी आप चलोगे ना.

मामी-सब ठीक तो है ना इतने एक्साइट्मेंट कुछ खास है क्या .

में-क्या आप मेरे लिए इतना नही कर सकते

मामी-ठीक है चलेगे चल जा और अपनी ड्रेस चेंज कर के आ में खाना लगाती हूँ.

सच में आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे यादगार दिन होने वाला था मैने कभी सोचा नही था कि मुझे इतनी ख़ुसी एक साथ भी मिल सकती है पर कहते है ना कि ख़ुसी ज़्यादा देर तक नही रहती सच ही कहते है मुझे भी इस बात का अहसास बहुत जल्द ही हो गया जिस के लिए में उपर वाले का सुक्रिया अदा करने से नही थक रहा था उसी के इस फ़ैसले के बाद मेरा उसके बजूद पे से विश्वास उठ गया मुझे लगने लगा कि अगर वो सच में है तो उसी इंसानो को सिर्फ़ दर्द देने में ही मज़ा आता है नही तो मेरी जिंदगी से इतनी जल्दी ख़ुसीया छीनने का उस का कोई हक नही था..............

मैने शाम तक का वक़्त कैसे काटा ये में बता नही सकता .फिर वो टाइम भी आ गया जिस का मुझे इंतज़ार था और हम प्रिया के घर पहुँच गये.
 
मैने शाम तक का वक़्त कैसे काटा ये में बता नही सकता .फिर वो टाइम भी आ गया जिस का मुझे इंतज़ार था और हम प्रिया के घर पहुँच गये.

वहाँ आंटी मामी को देख के बहुत खुस हुई.

आंटी-अजय तुम तो सच में अपनी मामी को ले के आ गये तुम तो बड़े पक्के निकले अपने वादे के.

में-जी आंटी में अपना वादा किसी भी कीमत पे पूरा करता हूँ और जो पूरे ना कर सकूँ ऐसे वादे करता नही हूँ.

आंटी-बहुत खूब.तुम्हारे आने से प्रिया भी बहुत खुश है.तुम्हारे जाने के बाद से बस तुम्हारी ही बात कर रही है तुम उपर जाओ उस ने खास तौर पे कहा है कि तुम्हारे आते ही तुम्हें उपर भेज दिया जाए.मुझे उम्मीद नही थी कि तुम आज ही अपनी मामी के साथ आ पाओगे पर उस

को पूरा यकीन था की तुम ज़रूर आओगे.

में-जी में प्रिया के पास जा रहा हूँ.वैसे भी अब आप लोगो को मेरी कोई ज़रूरत नही है.

मामी-जाना है तो जा नही तो अगर मेरा मूड चेंज हो गया तो शायद …

में-जा रहा हूँ.

में उपर चला गया प्रिया कोई मेग्ज़ीन पढ़ रही थी और मुझे देखते ही एक दम से उसके चहरे पे ख़ुसी और गुस्सा दोनों के भाव आ गये जो मेरे समझ से परे था.

में-हाई प्रिया कौन सी मेग्जीन पढ़ रही हो.

प्रिया-तुम्हें उस से क्या .तुम ने 4पीएम का बोला था और अभी 4.30 हो रहे है तुम आधा घंटा लेट हो तुम्हें पता है में कितना मिस कर रही हूँ तुम्हें.

में-सच में बस एक ही बार के मुलाकात में तुम्हारा ये हाल है तो आगे क्या होगा क्यूँ कि अब तो में तुम्हारी फ्रेंड्सशिप का ऑफर छोड़ने वाला नही हू.सॉरी में तो टाइम पे ही था पर तुहमरी मॉम ने रोक लिया नीचे.

प्रिया-ओके ज़्यादा बहाने बनाना की ज़रूरत नही है.चलो कही घूमने चलते है.

में-पर तुम्हें तो फीवर है ना .

प्रिया-नही अब में बिल्कुल ठीक हूँ में यहाँ बोर हो रही हूँ और मॉम मुझे अकेले कही भी नही जाने देगी प्ल्ज़ तुम साथ चलो ना प्ल्ज़्ज़.

में-ओह तो इसलिए हमारा वेट हो रहा था तुम तो बहुत सेल्फिश हो यार. ओके चलो तुम्हारे मॉम से पूछते है.

प्रिया-ओके और में सेल्फिश नही हूँ तुम्ही ने तो कहा था कि तुम मेरी मुस्कान के लिए कुछ भी कर सकते हो.

में-तो तुम मेरी बातें सुन रही थी मुझे लगा कि में तो यूँ ही बक बक कर रहा हूँ……चलो चलते है.

फिर हम ने प्रिया की मॉम और मेरी मामी से पार्मिशन ली और पास के ही माल में घूमने के लिए चले गये.

प्रिया-आज माल में घूम ने का अलग ही मज़ा आ रहा है.

में-सच में मुझे भी आज बहुत ही अच्छा लग रहा है.

प्रिया-मुझे आइस-क्रीम खानी है चलो खाते है.

में-तुम पागल हो क्या अभी तुम्हारा फीवर भी ढंग से ठीक नही हुआ और तुम को आइस क्रीम खानी है ये ग़लत है चलो कुछ और खाते है.

प्रिया-नही मुझे वो ही खानी है प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़

में-बिल्कुल नही किसी कीमत पे नही.

(वो किसी बच्चे की तरह ज़िद करने लगी जैसे कोई बच्चा अपनी मॉम से कोई खिलोना खरीदने के लिए ज़िद कर रहा हो और उस की माँ उस बच्चे को वो खिलोना ना खरीदने की वजह बता रही हो.उस की ये मासूमियत ने पता नही क्या जादू किया कि मेरे मूह से ओके निकल

गया और वो एक दम से उसकी ख़ुसी का ठिकाना नही रहा और भाग के मेरे गले लग गयी.)
 
में एकदम से किसी दूसरी ही दुनिया में पहुँच गया.और मेरे हाथ ना चाहते हुए भी उसको अपने आगोश में लेते चले गये.में किसी को एक्ष्प्लेन नही कर सकता कि मुझे कितना आनंद मिल रहा था उस टाइम हम में से कोई भी एक दूसरे से अलग होने की कोई कोशिश नही कर रहा था.हमारा ध्यान जब टूटा जब किसी ने हम पे कॉमेंट किया मैने पीछे हो के देखा तो वो हमारा ही क्लासमेट था .पर उस की गिनती

उन लड़को में की जाती थी जिस का काम दूसरो को परेशान करना था इसलिए सब उस से दूर ही रहते थे.देखने में स्मार्ट और मुझसे शायद एक या दो साल बड़ा भी था नाम था हॅरी पूरे स्कूल में वो और उसके दोस्त मार-पीट के लिए फेमस थे.

हॅरी-प्रिया इसमें क्या रखा है हमारे गले लग के देखो कितना मज़ा आएगा एक बार लग गयी तो जिंदगी भर कभी भूल नही पाओगी.वैसे भी अभी ये बच्चा है इससे कुछ होने वाला नही है .

हॅरी के कॉमेंट और प्रिया के बारे में सुन के मेरे दिमाग़ ने काम करना बिल्कुल बंद कर दिया और में गुस्से से पागल हो गया मुझे नही पता कि अगर उस टाइम प्रिया ने मुझे नही रोका होता तो में क्या कर जाता.

में-प्रिया मुझे छोड़ दो में इसे आज जिंदा नही छोड़ने वाला.

प्रिया-रहने दो अजय इन जैसो के मूह नही लगते चलो हम कहीं और चलते है प्ल्ज़ मेरी लिए अपना गुस्सा छोड़ दो प्ल्ज़्ज़.

हॅरी-ले जाओ नही तो शायद ये अपने पैरो पे जा ही ना पाए.

प्रिया-अजय छोड़ो उस की बात पे ध्यान ना दो चलो यहाँ से .

फिर हम लोग घर आ गये इस बीच हमारी कोई बात नही हुई शायद प्रिया भी समझ गयी थी कि में गुस्सा में हूँ इसलिए उस ने भी कोई बात करने की कोई ज़्यादा कोशिश नही की.

में और मामी अपने घर आ गये रास्ते में मैने मामी से भी ज़्यादा बात नही की और घर आते ही अपने कमरे में चला गया और वहाँ दीवार पे घुसे मारने लगा में तब तक गुस्से मारता रहा जब तक कि मेरे हाथो ने मेरा साथ ना छोड़ दिया और अब गुस्से की जगह दर्द ने ले ली थी

और मुझे उस गुस्से से ज़्यादा अच्छा ये दर्द लग रहा था मेरे दोनों हाथों की फिंगर्स बुरी तरह छिल गयी थी जिन में से खून भी निकल रहा था और जब गुस्सा शांत हुआ तब जा के मुझे होश आया कि ये मैने क्या कर दिया अब अगर मामी या नैना दी ने देख लिया तो क्या जबाब दूँगा ….

जहाँ अभी तक में गुस्से में था वही अब नैना दी की याद आते ही डर के मारे मेरी हालत खराब थी और मुझे कुछ सूझ नही रहा था.आख़िर कार मैने हार मानते हुए सबसे पहले अपने हाथों को अच्छे से धोया और अपने हाथो में हाफ दस्ताने पहन के नीचे हॉल में चला गया जहाँ मामी सब के लिए खाना लगा रही थी.

मामी-अच्छा हुआ जो तू खुद ही आ गया में तुझे ही बुलाने आने वाली थी चल बैठ में नैना को बुला के लाती हूँ उसके बाद स्टार्ट करते है.

में-मामी बात ये है कि आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नही है तो क्या प्ल्ज़ में आज के लिए अपना खाना अपने रूम में ले जाऊ प्लज़्ज़्ज़.

मामी-सब ठीक तो है ना में ये नोटीस कर रही हूँ कि जब से हम रखा (प्रिया की मॉम)के यहाँ से आए है तू काफ़ी टेन्स लग रहा है सब ठीक है ना .

में-आपको ऐसा क्यूँ लगता है वो में बस थोड़ा थका हुआ महसूस कर रहा हूँ बस और कोई बात नही है.

मामी-चल ठीक है आज के लिए सिर्फ़ में तेरा खाना तेरे रूम में भिजवा देती हूँ .

में-में खुद ही ले जाता हूँ जब यहाँ तक आ गया तो किसी और को परेशान होने की कोई ज़रूरत नही है.

मामी-ठीक है ले जा में नैना को बुलाने जा रही हूँ.

में अपने लिए जल्दी में थोड़ा सा राइस लिया क्यूँ कि उसे में बिना हाथ टच किए भी खा सकता था .और अपने रूम में चला गया.मुझे अभी आए कुछ ही टाइम हुआ था कि किसी ने मेरे डोर पे नोक की मेरे समझ में नही आया कि इस टाइम कौन है मैने गेट ओपन किया तो सामने दी खड़ी अपनी खाने की प्लाट के साथ.

में-दी आप यहाँ और ये खाने की प्लाट साथ में क्यूँ आपने डिन्नर नही किया अभी तक.

दी-चल रास्ता छोड़ अंदर आने दे.मुझे अकेले खाने की आदत नही है इसलिए यहाँ तेरे पास आई हूँ.

में-पर मैने तो डिन्नर कर लिया सॉरी दी मुझे पता नही था कि आप आने वाली है नही तो आप का वेट कर लेता.

दी-मुझे सब पता है ज़्यादा स्मार्ट बनने की ज़रूरत नही है समझा और चल डिन्नर करते है मुझे पता है अभी तूने भी नही किया होगा .

में-दी आप भी ना कमाल करती है.

दी-चल अब छोटा है तो छोटा ही रह और बता कि बात क्या है जो तू ऐसा बिहेव कर रहा है और देख अगर पिटने का मन हो तो ही झूट बोलीओ समझा नही तो फिर देख लिओ.

में-दी आप तो अंतर्यामी हो महा ज्ञानी हो आपके पास कोई दूरदृष्टि जैसे कोई चीज़ है क्या .(और में अपना सिर दी के गोद में रख दिया वो प्यार से अपना हाथ मेरे सिर पे फेरने लगी )
 
दी-अब बता भी क्या बात है .

मैने बस अपना हाथ दी के सामने कर दिया.जिस को देख के दी को पहले तो मुझे पे बहुत ही गुस्सा आया फिर मेरे दर्द का अहसास होते

ही वो शांत हो गयी और मेरे हाथो में पट्टी करने लगी.

दी-अब बता किस पे गुस्सा आ रहा था जो तूने अपने आप पे निकाला .

मैने उन्हे सब बात बता दिया कि कैसे हॅरी ने गंदे कॉमेंट किया और में कुछ नही कर सका.

दी-चल छोड़ कोई नही उस को बाद में देख लेगे.अभी तू चल ढंग से खाना खा ले पहले .

में-हाँ पर मेरे हाथ में चोट लगी है .

दी-ज़्यादा बोलने की ज़रूरत नही है बोल तो ऐसे रहा है कि जैसे आज पहली बार मेरे हाथ से खाएगा चल चुप कर के मूह खोल में खिला देती हूँ .

में-आप ग्रेट हो दी .

दी ने मुझे पूरा खाना अपने हाथों से खिलाया और फिर नीचे चली गयी और एक पेनकिलर ला के दी और मुझे सुलने लगी क्यूँ कि उन्हे पता था की अगर वो मुझे बिना सुलाए चली गयी तो में पूरी रात सोने वाला नही हूँ.दी के गोद में सिर रख के कब नीद आई पता ही नही चला

सुबह मेरी नीद घड़ी के अलार्म से खुली और में स्कूल के लिए तैयार हो के निकल गया.

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आज का महॉल मेरे लिए पूरी तरह चेंज था आज प्रिया ने खुद आ कर मुझे मॉर्निंग विश किया और हम क्लास में चले गये आज से हम साथ ही बैठने वाले थे इसलिए आज का दिन मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.इसी तरह दिन गुजरने लगे और हम अब इंटर में पहुँच चुके थे और

अब प्रिया हमारे स्कूल की सबसे खूबसूरत लड़कियों में पहले नंबर पे थी और लड़के उस से दोस्ती करने के लिए लाइन लगा के खड़े

हुआ करते थे पर वो किसी को घास नही डालती थी.

पर मेरे लिए अब वो काफ़ी सेंसटीव हो गयी थी मेरा किसी भी लड़की से दोस्ती करना या घूमना उसे बिल्कुल पसंद नही था और अगर में उस से एक दिन भी उस से दूर रहता तो वो पागल हो जाती पता नही क्यूँ पर मुझे ले कर वो कुछ अलग ही बिहेव करने लगी जिस से मुझे ख़ुसी और डर दोनों लगते थे.ऐसे ही एक बार हम लोग स्कूल की तरफ से पिक्निक पे जा रहे थे और मेरे बगल की सीट पे एक और हमारी

क्लास फेलो बैठ गयी फिर जो हंगामा किया प्रिया ने में बता नही सकता पूरे पिक्निक में उस को ये ही समझता रहा की उस में मेरी कोई ग़लती नही थी.

टोटल लाइफ बहुत ही अच्छी चल रही थी पर दिक्कत तब सुरू हुई जब उस का बचपन का बेस्ट फ्रेंड् रोहन हमारी जिंदगी में आया .वहाँ

से हमारी लाइफ चेंज हो गयी लाइफ के मायने चेंज हो गये और वो हो गया जो मैने कभी नही सोचा था.और उसी की वजह से आज

मेरी लाइफ ऐसी है वीरान और उस प्यार का इंतज़ार करते हुए……

रोहन प्रिया के डॅड के बिज़्नेस पार्ट्नर का बेटा था और प्रिया का चाइल्डहुड फ्रेंड् इसलिए प्रिया उस से बहुत जल्द घुल मिल गयी अब प्रिया

में चेंज आने लगा ये वो प्रिया नही रही जिसे में पिछले कई सालो से जानता था.

में-प्रिया आज मूवी देखने चले तुम्हारी फ़ेवरेट मूवी है गेस करो कौन सी है.

प्रिया-मैने वो कल ही देख ली रोहन के साथ नेक्स्ट टाइम हम चलेगे.और सॉरी अभी मुझे रोहन के साथ उसके कजन की बर्तडे पार्टी में जाना है तो बाद में मिलती हूँ.

में-ओके कोई नही नेक्स्ट टाइम तुम पार्टी एंजाय करो मिलते है फिर कल.

कुछ ही देर में रोहन आ गया और वो उसके साथ चली गयी उस टाइम दिल में जो दर्द हुआ उस को ऐसे जाते हुए देख कर में बता

नही सकता पर कही ना कही एक ख़ुसी भी थी कि वो खुस है और मेरे लिए इससे ज़्यादा कोई चीज़ मायने नही रखती थी में तो उसी

बस हमेंशा ही खुस देखना चाहता था जो की वो थी शायद मेरे में ही कोई कमी होगी नही तो मेरे बेस्ट फ्रेंड्(हा सही सुना आप ने हम दोनों

में से किसी ने भी एक दूसरे को अभी तक प्रपोज़ नही किया था) मुझे ऐसे छोड़ के नही जाती.खैर में भी घर चला गया.
 
मामी-अजय क्या बात है बेटा आज कल तू कुछ परेशान लग रहा है.

में-नही मामी वो क्या है ना कि बस आगे की स्टडी को ले के थोड़ा परेशान हूँ बस जल्द ही नॉर्मल हो जाउन्गा.

मामी-कोई प्राब्लम है तो बता बेटा कोचैंग कर ले या नैना से हेल्प ले ले नही तो में भी हूँ बेटा.

में-ठीक है मामी में अब से बिल्कुल भी टेंसन नही लूँगा ठीक है मामी में रवि के घर जा रहा हूँ वो लोग जल्द ही इंडिया शिफ्ट होने वाले है

ना इसलिए में उस से मिलने जा रहा हूँ.

मामी-ओके पर पहले कुछ खा के जा .

में-नही मामी आप तो जानती ही हो कि रवि की मॉम कितनी जिद्दी है वो मुझे सबसे पहले ठूंस ठूंस के खाना खिलाएँगे फिर कुछ और बात होगी इसलिए में वही खा लूँगा.

मामी-जैसा तू ठीक समझे.

फिर में अपने यार (कोई ग़लत सोच नही)के पास चला गया और कोई 15 से 20 मिंट मे उसके घर भी पहुँच गया.

में-आंटी बहुत जोरो की भूक लगी है पहले कुछ खाने को दे दीजिए फिर चाहे तो सूली पे चढ़ा देना.

रवि-तू तो बहुत ही समझदार हो गया .मार ना खानी पड़े इसलिए आते ही खाने की डिमॅंड कर दी ताकि कोई भी कुछ ना बोले और बाद में तो सब नॉर्मल होना ही है.

में-बेटा जब सिर पे तलवार लटक रही हो तो बचने के तरीके निकालने ही पड़ते है नही तो क्या पता मोका देख के तुम जैसे भी हाथ सॉफ कर लिया करते है .

रवि-यार आज तो अरमानो पे पानी फेर दिया तूने सोचा था कि दो चार तो आज दे ही दूँगा तुझे पर साले जब किस्मत में लगे हो लोडे तो कहाँ से मिलेगे पकोडे.

में-चल ज़्यादा डायलॉगे मत मार नही तो आंटी को बोल देता हूँ कि तू कैसे डायलॉगे मार रहा है आज कल.

रवि-चल बे डरा किस को रहा है.तू तो भाई है अपना चल खाना खाते है फिर बातें करते है.

हम ने खाना खाया और फिर कुछ देर तक आंटी से ब्रह्मज्ञान (यानी कि जबरदस्त वाली खीचाई ) लेने के बाद में और रवि रवि के रूम में

आ गये जहाँ आ के मैने चैन की सांस ली .

में-भाई आज आंटी का मूड इतना खराब क्यूँ था.

रवि-अबे खराब कहाँ था तू तो सूकर माना कि जिया दी नही है उन्होने तो तेरे लिए स्पेशल हॉकी बॅट खरीद के रख रखा है तू अपने प्रिया के चक्कर में हम सब को तो भूल ही गया .

में-ऐसा कुछ नही है चल कही बाहर चलते है.

रवि-में भी यही कहने वाला था कि चल बाहर चलते है चल यार मूवी देखने चलते है क्या बोलता है.

में-ठीक है चल .

फिर हम लोग यहाँ से मूवी देखने के लिए चल दिए जब तक रवि टिकेट लेने के लिए गया था तब तक में अपना टाइम[पास के लिए इधर उधर घूमने लगा और वहाँ घूम रहे कपल को देखने लगा और उन सब को देख के एक बार फिर मुझे प्रिया की याद आने लगी .और तभी

मुझे सामने से प्रिया और रोहन आते हुए दिखाए दिए उन्होने मुझे नही देखा क्यूँ कि में उन के पीछे की तरफ था और वो दोनों एक दूसरे में मगन थे.

रवि-चल एंट्री करते है टिकेट मिल गयी साली बड़ी मुस्किल से मिली है पर तेरे भाई ने जुगाड़ लगा ही ली.

में-मुझे नही देखनी मूवी चल चलते है यहाँ से मुझे कुछ ठीक नही लग रहा है यहाँ पे .

रवि-तुझे एक दम से क्या हुआ जो तुझे अब मूवी नही देखनी.एक तो इतनी बड़ी मुस्किल से टिकेट मिले है उपर से अब तेरे नखरे.

में-देख मैने एक बार बोल दिया ना कि मुझे नही देखनी तुझे देखनी है तो देख में घर जा रहा हूँ.
 
(आज हमारी दोस्ती को कोई 12 साल के आस पास हो गये थे पर आज तक कभी भी मैने या रवि ने एक दूसरे से उँची आवाज़ में बात नही की थी और आज प्रिया की वजह से मैने अपने बेस्ट फ्रेंड् से झगड़ा कर लिया किसी ने सही ही कहा है कि बड़ी बड़ी जंग की वजह

छोटी छोटी सी बातें ही होती है)

और में रवि का जबाब सुने बगैर वहाँ से निकल गया और घर आ गया घर आ के में सीधे अपने रूम में चला गया और ये सोचने लगा कि जो मैने देखा क्या वो सच था क्या सच में वो प्रिया थी या मुझे कोई वहम हुआ था.पर प्रिया और रोहन तो किसी पार्टी में गये हुए है ना तो

वो मूवी थियेटर में नही हो सकते मुझे ज़रूर कोई धोका ही हुआ होगा.में भी ना कितना शक्की हो गया हूँ आज कल अगर प्रिया ने वो

मूवी देखी नही होती तो वो मेरे साथ ज़रूर जाती मूवी देखने के लिए आख़िर ये कोई पहली बार थोड़े ही था जो वो मेरे साथ मूवी देखने जा रही थी.

में भी ना खमखा ही परेशान हो रहा हूँ इस से अच्छा है उस को फोन कर के पता कर लूँ कि वो कहाँ है ..

मुझे अब अपनी ग़लती का अहसास हो रहा था कि मैने रवि के साथ बहुर बुरा किया और फिर वो मेरा दोस्त के साथ भाई भी है .

में-मामी में रवि के यहाँ जा रहा हूँ वो नाराज़ है मुझे उस को मनाना है तो आज में उसी के पास रहुगा वैसे भी कल हॉलिडे है तो कोई परेशानी नही होगी.

मामी-चला जा पर नैना से पूछ ले नही तो तेरे जाने के बाद मुझ पे गुस्सा करती है कि मैने क्यूँ जाने दिया आख़िर उस का प्यारा खिलोना है तू.

में-प्लीज़ मामी आप आज किसी तरह संभाल लो अगर रवि ऐसे ही नाराज़ रहा तो में सही से नही रह पाउन्गा आप जानती हो प्ल्ज़्ज़.

मामी-ओके ठीक है रात को तो में किसी तरह संभाल लूँगी सुबह जल्दी आ जाना नही तो पूरा घर सिर पे उठा लेगी वो तू तो जनता ही है उसे..

में-आप बिल्कुल भी टेन्षन ना लो में टाइम से पहले ही आ जाउन्गा.

मामी से गले मिल के मैने उन्हे उस काम के लिए थॅंक्स किया जो उन के अलावा एस दुनिया में कोई नही कर सकता था और रवि के घर की तरफ निकल पड़ा मैने सोच लिया था कि अब से में प्रिया के बारे में नही सोचुगा क्यूँ कि में चाहे उस से कितना भी प्यार करता हूँ चाहे मुझे उस की ख़ुसी कितनी भी प्यारी हो आपनो से बढ़ के नही उन के आँसू पे लाखो प्रिया कुर्बान और फिर वो खुस है उसे उस का बेस्ट फ्रेंड् मिल गया तो में क्यूँ अपनी जिंदगी बर्बाद करू और वो भी ऐसी जिंदगी जिस से कई लोगो की जिंदगी जुड़ी है मेरे परेशान रहने से आज एक की आँखों में आँसू आए है अगर कल भगवान ना करे नैना दी की आँखों में आँसू आ गये तब तो मेरा जीना ही बेकार है कुछ सालो की दोस्ती

के लिए कैसे लोग आपनो को छोड़ देते है मेरे समझ में ये नही आ रहा था दुख या गम कितना भी बड़ा क्यूँ ना हो अगर अपने साथ हो तो सब मामूली लगते है पर अगर सोचो कि अपने ही साथ ना हो तो क्या होगा.यही सब सोचता हुआ और एक फ़ैसला करते हुए कि में फिर से यही अजय बन जाउन्गा जो 8थ स्टॅंडरड में हुआ करता था जो अपनी परी को सिर्फ़ दूर से ही देख के खुश हो लिया करता था .रवि के घर

के सामने खड़ा था मेरी डोरबेल बजाने की हिम्मत नही हो रही थी क्यूँ कि मुझे कही ना कही ये डर था कि कहीं रवि ने मुझसे मिलने से मना कर दिया तो में क्या करूगा.

फिर मैने हिम्मत कर के किसी तरह डोरबेल बजा दी गेट खुला तो सामने एक अजीब सा जानवर था जिस के दो हाथ दो पैर दो आखे एक मूह और एक नाक थी.बस उपर वाले से एक ग़लती हो गयी थी इस जानवर को पूछ देना भूल गये थे नही तो बाकी सब कुछ बिल्कुल ठीक था बंदरिया बनाने के लिए बस पूछ की कमी थी.

(दोस्तो ये सोनम थी रवि की कजिन और एक बेहद ही खूबसूरत और सेक्सी लड़की यहाँ रहने की वजह से ये काफ़ी खुले विचारो वाली लड़की थी मुझसे केवल 3 महीने से छोटी थी और मेरी बहुत प्यारी दुश्मन भी में इसे हमेंशा से ही बंदरिया कह के बुलाता था जिससे ये बहुत

चिढ़ती थी और मुझे चिडाने में बहुत ही मज़ा आता था.)
 
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