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Guest
अब रजत के सामने जो नजारा था, वो उसके होश उड़ाने वाला था. उसकी बहन मयूरी उसके सामने पूरी तरह से नंगी थी. उसके कमसिन बदन पर वस्त्र के नाम पर एक भी कपड़ा नहीं था. उसकी बड़ी-बड़ी विशाल चूचियाँ एकदम खड़ी थी, निप्पल टाइट थे और गांड भी बिल्कुल शेप में थी.
तुरन्त नहाने की वजह से मयूरी के शरीर पर अभी भी पानी की बूंदें थी और ये सब रजत को और भी मदहोश कर रहा था. वो समझ नहीं पाया कि ऐसे में उसे क्या करना चाहिए.
उसका मुँह एकदम खुला का खुला रह गया.
उसने नोटिस किया कि उसका लंड उसके शॉर्ट्स में तम्बू बनाये हुए है और वो अब इतना टाइट हो चुका है कि फटने को तैयार है. इतने तनाव की वजह से उसको अपने लंड में हल्का से दर्द महसूस हुआ.
इधर मयूरी इस बात के लिए पूरी तरह से तैयार थी. तौलिया गिरते ही उसने घबराने का नाटक किया और रोने लगी.
उसके ऐसा करने से रजत एकदम घबरा गया, उसे समझ नहीं आया कि अब क्या करना है. फिर थोड़ी देर तक ऐसे ही मूरत की तरह खड़ा रहने के बाद मयूरी के रोने से उसकी तन्द्रा टूटी.
वह मयूरी को चुप करते हुए बोला- आ… अरे… कोई बात नहीं.
मयूरी फिर भी चुप नहीं हुई और वैसे ही नंगे बदन वो अपनी भारी चूचियों के साथ रजत के सीने से लिपट गयी. मयूरी की चूचियां इतनी बड़ी थी कि रजत को वो चुभने लगी. पर यह चुभन उसे एक अलग ही आनन्द का अहसास करा रही थी.
वो एकदम अवाक् खड़ा रहा. इस समय उसके गले में वो अप्सरा लिपटी हुए थी- एकदम नग्न… वो मूर्ति की तरह खड़ा रहा और मयूरी रोती रही.
फिर थोड़ी देर में जब रजत की तन्द्रा टूटी तो उसको समझ आया कि उसको मयूरी को चुप करना चाहिए. वह अपना एक हाथ उसके पीठ पर और दूसरा हाथ उसकी गोल गोल बड़ी बड़ी गांड पर रखते हुए बोला- अरे कोई बात नहीं दीदी… तुम रोओ मत… घर में कोई नहीं है और किसी ने नहीं देखा.
मयूरी रोती हुई- पर तुमने तो देख लिया… मुझे पूरी नंगी… मेरा सब कुछ देख लिया.
रजत- अरे कोई बात नहीं… मैं तो तुम्हारा भाई हूँ… किसी से कुछ नहीं कहूंगा.
और अब धीरे धीरे रजत ने उसकी गांड पर हाथ फेरना चालू कर दिया था. वो थोड़ा थोड़ा सामान्य हो रहा था. पर उसका लंड अभी भी फनफना रहा था.
मयूरी- तुम सच में किसी से कुछ नहीं कहोगे?
रजत- अरे तुम पागल हो? कैसे कहूंगा किसी को? तुम मेरी बहन हो… कुछ कह भी नहीं सकता.
मयूरी- पर तुमने तो मुझे पूरी नंगी देख लिया? मेरा सब कुछ देख लिया?
रजत अब अपने हाथ की एक उंगली को मयूरी की गांड की दरारों में डालकर धीरे-धीरे सहला रहा था. वो अभी तक यही समझ रहा था कि यह मौका फिर दुबारा नहीं मिलने वाला, तो जितना मजा लेना है, ले लो.
लेकिन उस बेचारे को पता नहीं था कि अब उसकी किस्मत खुलने वाली है… अब उसको मजे ही मजे मिलने वाले हैं.
रजत- तो क्या हुआ… कोई बात नहीं… हम अपने घर में हैं… और घर पर कोई नहीं है… तो किसी को पता नहीं चलेगा… तुम निश्चिंत रहो.
अब रजत अपनी एक उंगली मयूरी की गांड के छेद पर रखकर धीरे-धीरे घुसाने की कोशिश कर रहा था. इस समय वो मयूरी के गांड के छेद की गर्मी को अपने उंगलियों में महसूस कर पा रहा था. इधर मयूरी भी रजत की तेज़ धड़कनो को महसूस कर पा रही थी- फिर तो ठीक है… पर प्लीज किसी को बताना मत… कि तुमने मुझे एकदम पूरी नंगी देख लिया है.
रजत- ठीक है दीदी.
तुरन्त नहाने की वजह से मयूरी के शरीर पर अभी भी पानी की बूंदें थी और ये सब रजत को और भी मदहोश कर रहा था. वो समझ नहीं पाया कि ऐसे में उसे क्या करना चाहिए.
उसका मुँह एकदम खुला का खुला रह गया.
उसने नोटिस किया कि उसका लंड उसके शॉर्ट्स में तम्बू बनाये हुए है और वो अब इतना टाइट हो चुका है कि फटने को तैयार है. इतने तनाव की वजह से उसको अपने लंड में हल्का से दर्द महसूस हुआ.
इधर मयूरी इस बात के लिए पूरी तरह से तैयार थी. तौलिया गिरते ही उसने घबराने का नाटक किया और रोने लगी.
उसके ऐसा करने से रजत एकदम घबरा गया, उसे समझ नहीं आया कि अब क्या करना है. फिर थोड़ी देर तक ऐसे ही मूरत की तरह खड़ा रहने के बाद मयूरी के रोने से उसकी तन्द्रा टूटी.
वह मयूरी को चुप करते हुए बोला- आ… अरे… कोई बात नहीं.
मयूरी फिर भी चुप नहीं हुई और वैसे ही नंगे बदन वो अपनी भारी चूचियों के साथ रजत के सीने से लिपट गयी. मयूरी की चूचियां इतनी बड़ी थी कि रजत को वो चुभने लगी. पर यह चुभन उसे एक अलग ही आनन्द का अहसास करा रही थी.
वो एकदम अवाक् खड़ा रहा. इस समय उसके गले में वो अप्सरा लिपटी हुए थी- एकदम नग्न… वो मूर्ति की तरह खड़ा रहा और मयूरी रोती रही.
फिर थोड़ी देर में जब रजत की तन्द्रा टूटी तो उसको समझ आया कि उसको मयूरी को चुप करना चाहिए. वह अपना एक हाथ उसके पीठ पर और दूसरा हाथ उसकी गोल गोल बड़ी बड़ी गांड पर रखते हुए बोला- अरे कोई बात नहीं दीदी… तुम रोओ मत… घर में कोई नहीं है और किसी ने नहीं देखा.
मयूरी रोती हुई- पर तुमने तो देख लिया… मुझे पूरी नंगी… मेरा सब कुछ देख लिया.
रजत- अरे कोई बात नहीं… मैं तो तुम्हारा भाई हूँ… किसी से कुछ नहीं कहूंगा.
और अब धीरे धीरे रजत ने उसकी गांड पर हाथ फेरना चालू कर दिया था. वो थोड़ा थोड़ा सामान्य हो रहा था. पर उसका लंड अभी भी फनफना रहा था.
मयूरी- तुम सच में किसी से कुछ नहीं कहोगे?
रजत- अरे तुम पागल हो? कैसे कहूंगा किसी को? तुम मेरी बहन हो… कुछ कह भी नहीं सकता.
मयूरी- पर तुमने तो मुझे पूरी नंगी देख लिया? मेरा सब कुछ देख लिया?
रजत अब अपने हाथ की एक उंगली को मयूरी की गांड की दरारों में डालकर धीरे-धीरे सहला रहा था. वो अभी तक यही समझ रहा था कि यह मौका फिर दुबारा नहीं मिलने वाला, तो जितना मजा लेना है, ले लो.
लेकिन उस बेचारे को पता नहीं था कि अब उसकी किस्मत खुलने वाली है… अब उसको मजे ही मजे मिलने वाले हैं.
रजत- तो क्या हुआ… कोई बात नहीं… हम अपने घर में हैं… और घर पर कोई नहीं है… तो किसी को पता नहीं चलेगा… तुम निश्चिंत रहो.
अब रजत अपनी एक उंगली मयूरी की गांड के छेद पर रखकर धीरे-धीरे घुसाने की कोशिश कर रहा था. इस समय वो मयूरी के गांड के छेद की गर्मी को अपने उंगलियों में महसूस कर पा रहा था. इधर मयूरी भी रजत की तेज़ धड़कनो को महसूस कर पा रही थी- फिर तो ठीक है… पर प्लीज किसी को बताना मत… कि तुमने मुझे एकदम पूरी नंगी देख लिया है.
रजत- ठीक है दीदी.