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Incest परिवार की लाड़ली complete

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अब रजत के सामने जो नजारा था, वो उसके होश उड़ाने वाला था. उसकी बहन मयूरी उसके सामने पूरी तरह से नंगी थी. उसके कमसिन बदन पर वस्त्र के नाम पर एक भी कपड़ा नहीं था. उसकी बड़ी-बड़ी विशाल चूचियाँ एकदम खड़ी थी, निप्पल टाइट थे और गांड भी बिल्कुल शेप में थी.

तुरन्त नहाने की वजह से मयूरी के शरीर पर अभी भी पानी की बूंदें थी और ये सब रजत को और भी मदहोश कर रहा था. वो समझ नहीं पाया कि ऐसे में उसे क्या करना चाहिए.

उसका मुँह एकदम खुला का खुला रह गया.

उसने नोटिस किया कि उसका लंड उसके शॉर्ट्स में तम्बू बनाये हुए है और वो अब इतना टाइट हो चुका है कि फटने को तैयार है. इतने तनाव की वजह से उसको अपने लंड में हल्का से दर्द महसूस हुआ.

इधर मयूरी इस बात के लिए पूरी तरह से तैयार थी. तौलिया गिरते ही उसने घबराने का नाटक किया और रोने लगी.

उसके ऐसा करने से रजत एकदम घबरा गया, उसे समझ नहीं आया कि अब क्या करना है. फिर थोड़ी देर तक ऐसे ही मूरत की तरह खड़ा रहने के बाद मयूरी के रोने से उसकी तन्द्रा टूटी.

वह मयूरी को चुप करते हुए बोला- आ… अरे… कोई बात नहीं.

मयूरी फिर भी चुप नहीं हुई और वैसे ही नंगे बदन वो अपनी भारी चूचियों के साथ रजत के सीने से लिपट गयी. मयूरी की चूचियां इतनी बड़ी थी कि रजत को वो चुभने लगी. पर यह चुभन उसे एक अलग ही आनन्द का अहसास करा रही थी.

वो एकदम अवाक् खड़ा रहा. इस समय उसके गले में वो अप्सरा लिपटी हुए थी- एकदम नग्न… वो मूर्ति की तरह खड़ा रहा और मयूरी रोती रही.

फिर थोड़ी देर में जब रजत की तन्द्रा टूटी तो उसको समझ आया कि उसको मयूरी को चुप करना चाहिए. वह अपना एक हाथ उसके पीठ पर और दूसरा हाथ उसकी गोल गोल बड़ी बड़ी गांड पर रखते हुए बोला- अरे कोई बात नहीं दीदी… तुम रोओ मत… घर में कोई नहीं है और किसी ने नहीं देखा.

मयूरी रोती हुई- पर तुमने तो देख लिया… मुझे पूरी नंगी… मेरा सब कुछ देख लिया.

रजत- अरे कोई बात नहीं… मैं तो तुम्हारा भाई हूँ… किसी से कुछ नहीं कहूंगा.

और अब धीरे धीरे रजत ने उसकी गांड पर हाथ फेरना चालू कर दिया था. वो थोड़ा थोड़ा सामान्य हो रहा था. पर उसका लंड अभी भी फनफना रहा था.

मयूरी- तुम सच में किसी से कुछ नहीं कहोगे?

रजत- अरे तुम पागल हो? कैसे कहूंगा किसी को? तुम मेरी बहन हो… कुछ कह भी नहीं सकता.

मयूरी- पर तुमने तो मुझे पूरी नंगी देख लिया? मेरा सब कुछ देख लिया?

रजत अब अपने हाथ की एक उंगली को मयूरी की गांड की दरारों में डालकर धीरे-धीरे सहला रहा था. वो अभी तक यही समझ रहा था कि यह मौका फिर दुबारा नहीं मिलने वाला, तो जितना मजा लेना है, ले लो.

लेकिन उस बेचारे को पता नहीं था कि अब उसकी किस्मत खुलने वाली है… अब उसको मजे ही मजे मिलने वाले हैं.

रजत- तो क्या हुआ… कोई बात नहीं… हम अपने घर में हैं… और घर पर कोई नहीं है… तो किसी को पता नहीं चलेगा… तुम निश्चिंत रहो.

अब रजत अपनी एक उंगली मयूरी की गांड के छेद पर रखकर धीरे-धीरे घुसाने की कोशिश कर रहा था. इस समय वो मयूरी के गांड के छेद की गर्मी को अपने उंगलियों में महसूस कर पा रहा था. इधर मयूरी भी रजत की तेज़ धड़कनो को महसूस कर पा रही थी- फिर तो ठीक है… पर प्लीज किसी को बताना मत… कि तुमने मुझे एकदम पूरी नंगी देख लिया है.

रजत- ठीक है दीदी.
 
मयूरी अब चुप हो चुकी थी पर उसने रजत का खड़ा लंड अपने नीचे महसूस किया. वो पहले ही बहुत देर से रजत का हाथ अपने गांड पर महसूस कर पा रही थी. अब तो रजत ने अपनी एक उंगली भी उसके गांड के छेद पर रख कर रगड़ना शुरू कर दिया था. पर मयूरी को इस बात से बहुत आनंद मिल रहा था. उसने रजत की इस हरकत पर कोई प्रतिकिया नहीं दी और उसको वो करने दिया जो वो इतनी देर से कर रहा था.

फिर वो अचानक से बोली सिसकारी लेती हुई- इ… इ… इ…

रजत- क्या हुआ दीदी?

मयूरी- अरे नीचे तुम्हारी जेब में कुछ है शायद… वो मुझे नीचे वहां चुभ रहा है.

और यह कहते हुए उसने अपने एक हाथ से रजत का लंड पकड़ लिया… रजत इस बात के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था, उसके मुँह से जोर से सिसकारी निकल गई… जो आनंद और आश्चर्य से लिप्त थी.

मयूरी के ऐसा करने से रजत का हाथ मयूरी के गांड पर और भी जोर से पकड़ बना रहा था.

रजत- आ… हआ… आए…

मयूरी- क्या हुआ?

रजत- वो… वो…

तब तक मयूरी ने रजत के लंड को जोर से दबाना चालू कर दिया था. रजत इस बात का खूब आनंद ले रहा था पर कुछ कह नहीं पा रहा था. इधर मयूरी को अपने नंगे होने का कोई गम नहीं था. वो तो बस अपने प्लान का एक-एक कदम बढ़ाये जा रही थी और उसको सफलता भी मिलती जा रही थी.

मयूरी- क्या हुआ?

रजत- वो जो तुमने पकड़ रखा है वो मेरा.

मयूरी- क्या है ये?

और मयूरी अनजान बनते हुए नीचे उसके लंड की तरफ देखती है जो उसने अपने एक हाथ से रजत के शॉर्ट्स के ऊपर से ही पकड़ रखा था.

फिर वो थोड़ा अनजान बनते हुए बोली- ओह सॉरी… ये तो तुम्हारा…

रजत- हा… ये मेरा…

मयूरी अनजान बनते हुए- पर ये इतना खड़ा क्यूँ है?

रजत- वो… वो… क… क्योंकि…

मयूरी हैरानी से- क्या ये… मेरी… वजह से… खड़ा है रजत?

रजत- नहीं… नहीं… नहीं दीदी… वो…

मयूरी- फिर किस की वजह से? यहाँ तो मैं ही हूँ बस… वो भी पूरी नंगी… और ओह… हहाँ… मैं तुम्हारी बाँहों में हूँ… और हाँ तुम्हारे हाथ मेरी गांड के छेद पर रगड़ रहे हैं… इससे तो यही साबित होता है कि यह मेरे लिए खड़ा है?

मयूरी ने ऐसा कहते हुए रजत के लंड को उसके शॉर्ट्स के अंदर हाथ डालकर अपने दोनों हाथो से पकड़ लिया और उसके ऐसा कहने से रजत एकदम सकपका गया… उसने अपना हाथ मयूरी की गांड से तुरंत हटाया, मयूरी को अपनी बाँहों से अलग करते हुए पीछे हट गया.

पर मयूरी ने उसका लंड अपने हाथ से नहीं छोड़ा. रजत के चेहरे पर पसीने की बूँदें थी… वो घबरा गया था.
 
मयूरी इसी मौके की तलाश में थी शायद. उसने रजत को शांत करते हुए कहा- रजत भाई, घबराओ नहीं… पर मेरी बात सुनो… तुमने मुझे पूरी नंगी देख लिया है… और मेरी गांड में उंगली भी की है… तो अब तुम्हें इसके बदले में मेरे लिए कुछ करना होगा.

रजत- क… क्या… करना होगा दीदी?

मयूरी- तुम अपने कपड़े उतारो… सारे!

मयूरी ने अपना फरमान जारी किया.

रजत बिल्कुल समझ नहीं पा रहा था कि यह उसके साथ क्या हो रहा है, वो अवाक् रह गया पर फिर धीरे से बोला- अरे? क्यूँ दीदी?

मयूरी- क्योंकि तुमने मुझे पूरा नंगा देख लिया है तो अब मुझे अच्छा नहीं लग रहा है. इसलिए मैं भी तुमको पूरा नंगा देखूंगी… फिर मुझे बराबर लगेगा… तुम समझ रहे हो न?

रजत घबरा भी रहा था और शर्मा भी रहा था. उसको कुछ समझ नहीं आया, उसने पूछा- पर इससे क्या होगा?

मयूरी- बोला न… मुझे अच्छा लगेगा.

रजत एकदम बेबस महसूस कर रहा था. वो अपनी ही बहन के आगे नंगा मजबूर था जो इस समय खुद ही नंगी थी, पर यह उसके लिए राहत की बात थी क्योंकि किसी नंगे आदमी के सामने नंगा होने में उतना बुरा नहीं लगता. पर अगर वो नंगा इंसान अगर आपकी खुद की बहन हो तो मामला थोड़ा अलग होता है.

रजत आग्रह करते हुए- पर ये मेरा ल.. लंड तो छोड़ दो!

मयूरी- नहीं, अगर तुम भाग गए तो? मैं तो नंगी हूँ, अभी तुम्हारा पीछा भी नहीं कर सकती इस अवस्था में?

रजत हथियार डालते हुए- ठीक है.

रजत ने अपनी टी-शर्ट उतारी और फिर बनियान. फिर उसने अपने शॉर्ट्स उतारे और सिर्फ चड्डी में खड़ा हो गया. वैसे भी उसका लंड पहले से ही बाहर था जो उसकी कमसिन नंगी बहन ने अपने हाथ से पकड़ा हुआ था. फिर भी वो अपना चड्डी उतारने में थोड़ा सकुचाया.

मयूरी- उतरो यार इसको भी… मैं तुम्हारे सामने एकदम नंगी खड़ी हूँ और तुम शर्मा रहे हो? मुझे याद है कि अभी तुमने अपनी उंगलियाँ मेरी गांड में डाल रखी थी. जल्दी करो… वैसे तुम घबराओ नहीं… मैं वादा करती हूँ कि तुम्हें इस बात के लिये कभी भी जीवन में पछतावा नहीं होगा.

अब मयूरी का रोना बंद हो चुका था और उसके चेहरे पर शरारती मुस्कान ने अपनी जगह ले ली थी. रजत भी धीरे-धीरे सामान्य महसूस कर रहा था पर उसका लंड अभी भी अपनी बहिन के इस स्वरूप को देखकर एकदम खड़ा था. ऊपर से मयूरी ने उसका लंड अपने हाथ से पकड़ रखा था और बीच-बीच में दबा भी रही थी.
 
रजत को अब शायद इस बात का एहसास हो चुका था कि आगे क्या होने वाला है.

उसने अपनी चड्डी भी उतार दी और बोला- ये लो दीदी… हो गया मैं भी एकदम नंगा… अब तुम्हें अच्छा लग रहा है?

मयूरी- हाँ… बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है… और तुम्हें?

ऐसा कहते हुए मयूरी रजत के एकदम करीब आ गयी और उसके लंड को गौर से देखने लगी.

रजत अब मयूरी की चूचियों को बेहिचक देख रहा था- मेरा क्या? मैं तो वही कर रहा हूँ जो तुम कह रही हो!

मयूरी- अच्छा? तुम्हें अपना लंड ऐसे खड़ा करने के लिए मैंने कहा क्या? और जो तुम इतनी देर में कभी मेरी चुत तो कभी मेरी ये चूचियां देख रहे हो इसके लिए मैंने कहा क्या? और जो थोड़ी देर पहले तुम अपनी उंगलियाँ मेरी गांड में चला रहे थे, वो? उसके लिए भी मैंने कहा था क्या?

रजत- वो… वो… नहीं… पर…

मयूरी- और ये क्या तुम मेरी चूचियों को ऐसे घूरे जा रहे हो? इनको खा जाओगे क्या?

रजत- न… नहीं तो… मैं नहीं देख रहा?

मयूरी ने फिर वही तीर मारने की सोची जो उसने कल रात को अपने बड़े भाई पर मारा था.

मयूरी थोड़ा मायूस होते हुए- मतलब मेरी चूचियां देखने लायक नहीं हैं क्या?

रजत- अरे नहीं… ये तो कमाल की है.

मयूरी- फिर तुमने ये क्यूँ कहा कि तुम नहीं देख रहे? मतलब मैं तुम्हारे सामने एकदम नंगी हूँ… और तुम मेरी चूचियों को देखो भी ना तो ये तो वही बात हुई ना कि ये उतनी आकर्षक नहीं है?

रजत- दीदी… ऐसी बात नहीं है… ये इतनी आकर्षक हैं कि इन पर से नजर हटाना मुश्किल है. मेरा तो जी करता है कि इनको खा जाऊँ.

मयूरी ख़ुशी और आश्चर्य से- सच रजत??

रजत- हाँ दीदी… सच में…

मयूरी- और क्या करना चाहते हो तुम मेरे साथ?

रजत- तुम तो काम की देवी हो दीदी… तुम्हारा शरीर तो जैसे वरदान है इस संसार के ऊपर!

और ऐसा कहते हुए रजत ने अपना एक हाथ मयूरी की चूची पर रख दिया और हल्के से दबा दिया.

मयूरी चिहुँक पड़ी… हालाँकि वो इस चीज़ के लिए पहले से तैयार थी पर सेक्स को लेकर वो भी पहले से अनुभवी नहीं थी. उसको भी इसका हर सुख नया-नया सा लग रहा था. वो धीरे से फिर से रजत के गले लग गयी और बोली- तो अगर तुम मेरे साथ कुछ करना चाहते हो रजत तो यही वक्त है… तुम्हें मेरी अनुमति है मेरे शरीर से खेलने की.

रजत- सच दीदी…

मयूरी- हाँ मेरे प्यारे छोटे भाई… खा जाओ अपनी दीदी के इस जवान शरीर को!

रजत आगे बढ़ा और अपने होंठ मयूरी के होंठ पर रख दिये, उसका एक हाथ मयूरी की जांघों के बीच चुत के साथ छेड़छाड़ करने में व्यस्त हो गया जबकि दूसरा हाथ उसकी एक चूची को उमेठने में लग गया.

मयूरी आंखें बंद करके इन सुखद पलों का आनंद लेने लगी, साथ ही साथ वो रजत के लंड के साथ खेलती रही.
 
रजत थोड़ी देर मयूरी को गहरा चुम्बन देने के बाद उससे अलग हुआ और नीचे बैठ गया. वो अपना मुँह मयूरी की चुत के पास ले जाकर उसको सूंघने लगा और मयूरी ने अपनी चुत की झाँटें आज ही साफ़ की थी तो उसका योनिक्षेत्र एकदम साफ़ सुथरा था. मयूरी की कंवारी चुत एकदम गुलाबी-गुलाबी लग रही थी और उसकी खुशबू रजत को पागल कर रही थी. रजत के लिए जीवन में यह पहली बार था जब वो किसी लड़की की नंगी चुत को इतने नजदीक से देख रहा था. और किस्मत की बात थी कि वो चूत उसकी खुद की बड़ी बहिन की थी, वो कमाल की सुंदरी थी, बल्कि कहा जाये तो कामदेवी थी.

मयूरी ने अपना एक पाँव उठाकर बिस्तर पर रखकर रजत को अपने चूत चाटने का आमंत्रण दिया. रजत अपनी जबान से मयूरी को सुख देने में जुट गया और मयूरी अब स्वर्ग का आनंद लेने लगी. दोनों भाई-बहन काम वासना में लिप्त सब कुछ भूलकर एक दूसरे पर कुर्बान हो जाना चाहते थे. क़रीब 15 मिनट की लगातार चुत-चटाई में मयूरी एक बार झड़ गयी और रजत अपनी कामुक सगी बहन के कामरस का एक एक बून्द चाट गया.

फिर उसने मयूरी को पलटने को बोला और उसके पीछे जाकर उसकी गांड के छेद पर अपनी ज़बान रखी और बड़ी ही कला के साथ वो अपनी बहन की गांड को अपने ज़बान से चाटने लगा।

मयूरी के लिए यह सुख एकदम नया था, वो पागल हुई जा रही थी। उसको विश्वास नहीं हो रहा था कि गांड को चटवाने में इतना मज़ा आता होगा। पर अभी उसको ये सुख मिल रहा था।

थोड़ी ही देर में मयूरी ने इतने सुख का अनुभव किया कि वो चरम सीमा पर पहुँच गयी और उसके चूत ने अपना अमृत छोड़ दिया। रजत को इस बात का अहसास हुआ और वो झट से अपना मुँह आगे को लाया और उसकी चूत से निकले हुए अमृत की एक एक बून्द फिर से चाट गया.

मयूरी ने अब रजत को बिस्तर पर बैठने को कहा. रजत ऐसे बैठा था कि उसके पाँव नीचे जमीन पर लटक रहे थे. मयूरी ने उसके पैर फैलाये और उसके लंड को अपने हाथ से पकड़कर अपने रसीले होंठों पर रख लिया. पहले तो उसने अपनी जबान से उसके लंड को चाटा फिर उस प्यार से मूसल जैसे लंड को अपने मुँह में ले लिया और अपना मुँह आगे-पीछे करने लगी, जैसे वो अपना मुँह अपने छोटे भाई के लंड से चुदवा रही हो.

लगभर दस मिनट की इस नायाब क्रिया के बाद जब रजत के लंड ने अपना पानी छोड़ा तो मयूरी ने उसके लंड से निकले हुए एक-एक कतरे को चाट-चाट कर साफ कर दिया.
 
फिर रजत ने मयूरी को उठाया और उसके गुलाबी रसीले होंठों पर अपने होंठ रख दिए. रजत को उसके मुँह से अपने ही वीर्य का स्वाद आ रहा था पर वो इस समय हर उस चीज़ का आनंद ले रहा था जिसको वो अब तक गन्दा समझता रहा था.

थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे के होंठ और जबान को चाटते रहे कि अचानक घर के दरवाजे की घंटी बजी.

मयूरी- लगता है मम्मा आ गयी.

रजत- हाँ… शायद!

मयूरी- अब?

रजत- अब तो बाकी का काम बाद में करना पड़ेगा.

मयूरी- ठीक है मेरे राजा… अपनी दीदी की चूत को एक बार प्यार से अलविदा कहो और जाकर दरवाजा खोलो… मुझे कपड़े पहनने में थोड़ा वक्त लगेगा.

रजत- ठीक है मेरी जान!

ऐसा कहते हुए रजत ने मयूरी की चूत पर एक लम्बा सा चुम्बन दिया और अपने कपड़े पहनता हुआ बाहर चला गया. बाहर जाते समय उसने अपने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था ताकि मयूरी आराम से अपने कपड़े पहन सके.

मयूरी ने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहने और मुस्कुराती हुई अपने बिस्तर पर लेट गयी. बाहर से उसको शीतल (उसकी माँ) की रजत से बातचीत की आवाज़ आ रही थी तो वो समझ गयी कि माँ आ गयी है.

अब वो अपने आगे के योजना के बारे में सोचने लगी. अब तक उसने अपने दोनों भाइयों को ट्राई कर लिया था और दोनों उसके चंगुल में फंस चुके थे. उसने दोनों को अपने चुत का स्वाद चखा दिया था और दोनों के लंड का स्वाद चख चुकी थी. अब वो ये सोच रही थी कि आगे किस भाई से अपने चुत चुदवायेगी।

फिर उसको ख्याल आया कि क्यूँ ना दोनों से एक साथ सेक्स का मजा लिया जाये?

पर यह कठिन काम था… क्योंकि दो बड़े कारण थे – एक तो यह कि दोनों सगे भाई थे और दोनों को एक दूसरे के साथ मयूरी के सम्बन्धों के बारे में पता नहीं था. दूसरा यह कि दोनों की कुछ महीनों से आपस में बनती नहीं थी.

फिर मयूरी ने निश्चय किया कि यही सही मौका है दोनों भाइयों को मिलाने का… इसी बहाने दोनों में सुलह भी हो जाएगी और उसको दोनों के लंड से एक साथ चुदवाने का मौका भी मिल जायेगा. अब वो अपने आगे की योजना पर काम करने लगी.

 
दिन भर सब कुछ सामान्य रहा. शाम को अशोक घर आया तो उसने बताया कि उसके बड़े भाई यानि के मयूरी के बड़े चाचा की तबियत अचानक ख़राब हो गयी है तो उसको देखने जाना है. उसने शीतल को कहा- आज रात पैकिंग कर लो, कल सुबह की ट्रेन से हम निकलेंगे.

उसने बताया कि उन लोगों को वापिस आने में दो-तीन दिन लग जायेंगे. घर में माहौल काफी गंभीर था.

लेकिन इधर मयूरी के कामनावशित दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था. मयूरी को ये एक अच्छा मौका लगा जब वो अपनी अगली चाल चल सकती थी. अब घर में सिर्फ वो और उसके दो भाई रहने वाले थे जिसमें से एक को उसने कल शाम में अपनी चूत का स्वाद चखाया था और एक को आज सुबह ही अपनी चूत के साथ-साथ अपनी गांड का भी स्वाद चखा चुकी थी. वो अपने आगे की योजना को पुख्ता करने की सोच में लग गयी.

अगली सुबह अशोक शीतल को लेकर स्टेशन चला गया अपने भाई को देखने के लिए. विक्रम उनको छोड़ने स्टेशन गया. तब तक मयूरी और रजत घर में बिल्कुल अकेले थे. मयूरी रसोई में कुछ काम कर रही थी की रजत ने अचानक से पीछे से जाकर उसकी चूचियों को दबोच लिया.

मयूरी चिल्लायी- क्या कर रहे हो रजत?

रजत थोड़ा डरते हुए- क्या हुआ दीदी?

मयूरी थोड़ी झल्लाहट के साथ- ये तुम क्या कर रहे हो?

रजत अब सहम गया था. वो समझ नहीं पा रहा था कि यह क्या हो रहा है? अभी सुबह ही तो उसने अपनी इस क़यामत जैसी दिखने वाली दीदी को अपना लंड चुसाया था. उसकी चूचियों को उसने उमेठ दिया था, उसने अपनी बहन की चूत के रस का एक-एक बून्द अमृत की तरह चाट लिया था और अब वो ऐसे व्यवहार कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही ना हो. फिर भी वो डरते हुए थोड़ी हिम्मत जुटाकर बोला- मैं तो बस आपको छेड़ रहा था… सॉरी…

मयूरी समझ गयी थी कि उसके ऐसे व्यवहार से रजत डर गया है. पर ये मयूरी के चाल का अगला कदम था. उसको पता था कि वो क्या कर रही है. वो बिल्कुल अनजान बनते हुए बोली- आगे से ध्यान रखना…

और यह बोलकर मयूरी अपने काम में लग गयी. रजत भी वापिस हॉल में आकर टीवी देखने लगा.

लगभग एक घंटे बाद विक्रम स्टेशन से वापिस आया.

रजत ने दरवाजा खोला और बिना कुछ बोले वापिस आकर हॉल के सोफे पर बैठ गया और टीवी देखने लगा. वो अब भी परेशान था कि यह उसके साथ क्या हो रहा है. अभी अच्छा मौका था जब अपनी बड़ी बहन को चोद सकता था पर मयूरी के अचानक से बदले ऐसे व्यवहार से वो परेशान था. वो सोच रहा था कि कहीं ऐसे तो नहीं कि मयूरी को अपनी सुबह की घटना पर पछतावा हो रहा हो और वो अब आगे ऐसा कुछ नहीं करने देगी.

रजत ने सोचा कि अगर ऐसा है तो वो उससे बात करेगा और इस बात को यही ख़त्म कर देगा.
 
विक्रम ने घर में आते ही अपने कमरे का रुख किया और वो अंदर चला गया. इधर मयूरी ने रसोई का काम ख़त्म किया और अपने कपड़े बदले. उसने आप एक छोटी सी स्कर्ट पहनी और ऊपर में एक काले रंग का टॉप जो बहुत ही ज्यादा ढीला था. टॉप के नीचे उसने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी पर उसकी बड़ी-बड़ी और गोल-गोल चूचियों के उभारों को आराम से देखा जा सकता था. मयूरी की चूचियां इतनी बड़ी थीं कि वो इन ढीले कपड़ों में कहाँ छुपने वाली थी.

फिर मयूरी हॉल में आयी और टीवी के सामने एक कामुक मुद्रा में खड़ी हो गयी. उसने विक्रम को आवाज़ लगायी- भैया?

विक्रम- हाँ…

मयूरी- जरा बाहर आना…

विक्रम- क्या हुआ?

मयूरी- एक जरूरी बात करनी है… प्लीज जल्दी बाहर आओ…

विक्रम (बाहर आते हुए)- क्या हुआ मयूरी?

मयूरी- इधर सोफे पर बैठ जाओ, एक जरूरी बात करनी है.

विक्रम रजत के साथ सोफे पर थोड़ी दूरी बनाकर बैठ गया. अब दोनों भाइयों के दिल में धक्-धक् हो रही थी कि मयूरी पता नहीं क्या बोलने वाली है. क्योंकि कल से लेकर आजतक इस घर में काफी कुछ हो चुका था.

विक्रम- हाँ बोलो…

मयूरी- देखो… तुम दोनो को मैं एक सरप्राइज देने वाली हूँ.

विक्रम- क्या सरप्राइज?

मयूरी अब दोनों भाइयों के सामने राज का पर्दा खोलने वाली थी- तुम दोनों को अभी तक लग रहा होगा कि तुमने मेरी चूचियों के साथ खेल लिया, मेरी चूत का स्वाद चख लिया तो अपना लौड़ा मेरी चूत में डाल के मेरी इस कंवारी चूत मजा ले लोगे?

विक्रम और रजत एक साथ- कककक… क्या????

विक्रम और रजत… दोनों भाइयों की आँखें फ़टी की फ़टी रह गयी. उनको अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ कि उनकी बहन ये क्या कह रही है. दोनों अभी तक ये समझ रहे थे कि ये खूबसूरत और हसीं वाकया सिर्फ उनके साथ ही हुआ है पर यहाँ तो बात कुछ और थी. उस से भी ज्यादा, उनकी अपनी बहन दोनों भाइयों के सामने ऐसे खुले में चूत, चूचियां और लौड़ा जैसे शब्दों का उपयोग कर रही थी वो भी बेधड़क.

दोनों एक दूसरे को देखते रह गए और कुछ पल तक बातों को समझने का प्रयास करते रहे.

फिर उनकी इस ख़ामोशी को मयूरी ने तोड़ते हुए बात को साफ़ किया- हाँ… तुम दोनों ज्यादा आश्चर्यचकित मत होओ… मैंने तुम दोनों को अपनी इस प्यारे से शरीर के दर्शन भी कराये हैं और बहुत हद तक मजा भी दिया है.

विक्रम और रजत एक साथ- कककक… क्या????

मयूरी- हाँ… तुम दोनों बिल्कुल सही सोच रहे हो. भैया, कल शाम को तुम्हें बहुत मजा आया ना जब तुम मेरी चूत को जोर-जोर से चाट रहे थे और अपना लंड तुमने मेरे मुँह में पेल दिया?

विक्रम हकलाते हुए- मम… मैं… मैं… वो… वो…

मयूरी- कोई बात नहीं, मुझे भी बहुत मजा आया… और तुम रजत, तुम्हें तो मेरी गांड का छेद बहुत प्यारा लगता है न? आज सुबह ही तुमने पहले अपनी उँगलियों से फिर अपनी जीभ से… बहुत मजा लिया?

ऐसा कहते हुए मयूरी ने अपना टॉप निकाल फेंका और उसको हवा में लहराते हुए रजत के मुँह पर फेंक दिया.
 
फिर वो आगे बोली- रजत, जब तुम मेरी चूचियों को जोर-जोर से उमेठ रहे थे तो सच कह रही हूँ कि मुझे भी बहुत मजा आया… तुम्हारे लंड से निकले हुए पानी के एक-एक बून्द का स्वाद मुझे तृप्त कर रहा था.

रजत और विक्रम अब भी बात को समझ नहीं पा रहे थे. वो कभी मयूरी को देखते तो कभी एक-दूसरे को.

मयूरी ने फिर आगे बात की- मैं यह साफ़ कर देना चाहती हूँ कि अभी तक मेरा तुम दोनों के साथ जो भी हुआ, उसके लिए मैं एकदम शर्मिंदा नहीं हूँ, बल्कि मुझे इस बात का बहुत ख़ुशी है कि मेरी इस जवानी को कोई बाहर वाला लूटे, इससे पहले मेरे अपने भाई इस का मजा लें और मुझे भी मजा दें. पर मैंने इस विषय में बहुत सोचा, और फिर इस निर्णय पर आयी कि मैंने तुम दोनों से हमेशा एक जैसा प्यार किया है. तुम दोनों मुझे अपनी जान से भी ज्यादा प्यारे हो… मैंने हर साल राखी भी तुम दोनों की कलाई पर एक-साथ बाँधी है…

विक्रम और रजत मूक बने बस मयूरी की बात को सुन रहे थे और समझने की कोशिश कर रहे थी कि वो आखिर चाहती क्या है?

मयूरी ने अपनी बात पूरी की- तो बहुत विचार-विमर्श के बाद मैंने यह निर्णय लिया है कि तुम दोनों अगर चाहो तो मेरी चूत का आधा ही नहीं, बल्कि पूरा मजा ले सकते हो… अपना लंड इसमें डालकर मेरी चूत को निहाल कर सकते हो और अपनी इस बहन का जीवन तृप्त कर सकते हो. पर एक शर्त होगी!

विक्रम और रजत फिर एक साथ थोड़ी ख़ुशी और थोड़े आश्चर्य के साथ- क्या शर्त?

मयूरी- अगर तुम दोनों मेरी इस चूत का आगे कभी भी मजा लेना चाहते हो तो…

विक्रम और रजत ने उसकी बात को बीच में काटते हुए उत्साह से पूछा- तो?

मयूरी थोड़ा मुस्कुराती हुई- अरे धैर्य रखो… बता रही हूँ… बता रही हूँ… मैं देख रही हूँ कि तुम दोनों भाई अपनी बहन को चोदने के लिए उतावले हुए जा रहे हो.

विक्रम और रजत एक दूसरे की तरफ देखते हुए झेंप से जाते हैं.

मयूरी आगे बोली- तो, अगर तुम दोनों मेरे इस जिस्म का पूरा मजा लेना चाहते हो, मेरी इन गोल-गोल भारी-भारी चूचियों को पकड़कर मसल देना चाहते हो, मेरी गांड के छेद पर फिर से अपनी जबान को फेरना चाहते हो, मेरी चूत को अगर चोदना चाहते हो तो तुम दोनों को ये एक साथ करना पड़ेगा.

विक्रम गुस्से से- मतलब?

मयूरी- मतलब कि मैं तुम दोनों पर एक-साथ अपनी जवानी लुटाना चाहती हूँ.

विक्रम- यह नहीं हो सकता?

मयूरी- क्यूँ नहीं हो सकता?

विक्रम- इसने मेरी गर्लफ्रेंड के साथ…

मयूरी- अरे भैया… तुम पागल हो क्या? रजत भी तो यही बोल सकता है? पर तुम दोनों समझ क्यूँ नहीं रहे कि सपना ने तुम दोनों का चूतिया बनाया है वो भी एक साथ… रजत ने जो भी किया उसकी मर्जी से ही किया न? उसके साथ को जबरदस्ती तो नहीं की न?

विक्रम- वो जो भी है? पर मैं इस धोखेबाज के साथ कुछ शेयर नहीं कर सकता.
 
मयूरी अपना फैसला सुनाती हुई बोली- तो एक बात मेरी भी सुन लो… अगर तुम लोग एक साथ नहीं आओगे तो मेरे शरीर को हाथ लगाने के बारे में भी मत सोचना… अगर मैं अपनी चूत तुम्हें दूंगी तो एक साथ … नहीं तो मैं अपना कोई और इंतज़ाम कर लूंगी. और कान खोलकर सुन लो, अगर मैं चाहूँ तो मेरे लिए लंड की लाइन लग जाएगी… ऐसा हुस्न है मेरे पास… पर क्या तुम्हें कभी ऐसा हुस्न मिलेगा, वो भी अपने घर में? ये तुम सोचो? तुम जब चाहो तब मुझे चोद सकते हो और अपना लंड मेर शरीर के हर छेद में डाल सकते हो… पर ये तुम्हें साथ में ही करना होगा. ये मेरा अंतिम फैसला है… तुम चाहो तो अपने कमरे में जाकर आपस में बातचीत कर के सुलह कर सकते हो… मैं यही तुम्हारा इंतज़ार करुँगी.

ऐसा कहते हुए बड़े ही कामुक अंदाज़ में अपना हाथ अपनी पैंटी में डालकर अपने चूत को छेड़ने लगी.

पर दोनों में से कोई भी उठा नहीं.

मयूरी ने फिर से जोर देते हुए कहा- अब तुम दोनों अंदर जाओगे या मैं अपने हाथ से ही अपने आपको सुखी कर लूँ. और अगर ऐसा हुआ तो यह बात तो पक्की है कि मेरे इस सुन्दर से जिस्म का सुख कोई और ही भोगेगा क्योंकि अब मैं बिना चुदाई के नहीं रह सकती. अगर तुम नहीं तो कोई और सही, पर मुझे चुदाई तो चाहिए… अब जाओ और जल्दी से बातचीत कर के अपना मामला ठीक करो. अगर बात बनती है तो दोनों वापिस आकर मेरे एक-एक चूचियों को मसलना शुरु करो.

और ऐसा कहते हुए उसने अपने चूचियों को अपने हाथों से जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया और अपने गीले लाल-लाल होंठों की अपने सफ़ेद दांतों से बड़े ही कामुक अंदाज़ में काटने लगी.

इधर दोनों भाई उठे और अपने कमरे में चले गए. दोनों भाइयों में लगभग छह महीने से बातचीत बंद थी और इतने दिन के बाद वो आपस में बातचीत करने वाले थे. दोनों को थोड़ा अजीब लग रहा था पर अब बात करना इतना जरूरी हो गया था कि क्या कहें. अगर वो बात कर के आपस में सुलह नहीं करते तो उनकी वो कामदेवी बहन उन्हें अपना चूत तो क्या … एक चुम्बन भी नहीं देने वाली थी.
 
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