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Incest परिवार बिना कुछ नहीं

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करण: आह मेरी जान। कितनी टाइट हैं तुम्हारी चूत । हर बार लगता है जैसे पहली बार लंड घुसा रहा हूं। ।

करण के धक्कों की स्पीड बढ़ती जा रही थी और साथ ही बढ़ रही थी काम्या की सिसकियां जो पूरे कमरे में गूंज रही थी और माहौल को और भी सेक्सी बना रही थी जिसका सीधा असर बाहर खड़ी माही की चूत पर हो रहा था और मजे के कारण वो अपना हाथ नीचे अपनी चूत पर ले जाती हैं जिससे रस टपक रहा था। जैसे ही उसकी उंगली चूत की दीवारों से टकराती हैं तो मजे के कारण उसकी आंखे बंद हो जाती हैं ।

करण काम्या की चूत से लंड बाहर निकाल लेता है और उसे घोड़ी बनाकर दूसरी तरफ झुका देती हैं ताकि उसकी नजर खिड़की में खड़ी माही पर ना पड़े। घोड़ी बंटी ही काम्या की चूत पीछे की ओर उभर जाती है और करण एक करारा धक्का उसकी चूत पर मारता है जिससे पूरा फिर से उसकी चूत की दीवारों को रगड़ता हुआ अन्दर चला जाता है और काम्या आगे को गिरती हैं जिससे करण थम लेता है और अब उसकी चूत में ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरु कर देता है ।

और मोका मिलते ही नजर उठाकर माही की तरफ देखता हूं जिसकी आंखे मजे के कारण बंद हो गई थी और वो अपना निप्पल चूसते हुए हल्की हल्की सिसकारियां ले रही थी । इस वक़्त वो किसी काम देवी कम नहीं लग रही थी । उसका गोल चेहरा, नाजुक गुलाब जैसे होंठ जो प्यासाकी वजह से सुख चुके थे, सिसकी की वजह से कभी खुल रहे थे कभी बंद हो रहे थे ,बंद हो चुकी आंखे , चूची छत की और मुंह उठाए गोल गोल , पिंक निप्पल , ठोस तने हुए अपनी अकड़ दिखाते हुए मानो करण को चैलेंज दे रहे हो ।

आज पहली बार करण ने अपनी बहन को इस हालत में देखा और वो दिलो जान से उस पर फिदा हो उठा ।

वो जोश में आते हुए अपने लंड को कश कश कर अंदर पेलने लगा जिससे उसका लंड का सुपाड़ा सीधे काम्या की बच्चेदानी पर ठोकर मर रहा था और उसके मुंह से हर धक्के पर सिसकी निकाल रही थी।

करण अपने दोनों हाथ आगे ले जाकर उसकी चूची पकड़ लेता है और उन्हें जोर जोर से दाबने लगता है जिसे काम्या का शरीर लहराने लगता है ।उसकी चूची दबते हुए वो माही की चूची को देख रहा था जिनकी कठोरता के आगे उसे काम्या की चूची फीकी लग रही थी।

फिर वो काम्या को सीधी लिटा देता है और उसकी टांगे मोड़कर उसके कंधो की तरफ उठा देता है। इस पोजीशन में माही उसके लंड को आसानी से काम्या की चूत में घुसते हुए देख सकती थी। करण फिर से अपना लौड़ा उसकी चूत पर सेट करके एक जोरदार धक्का मर देता है और फिर से पूरा लंड चूत के अंदर ।

काम्या : क्या बात है मेरी जान। आह आह आह उफ्फ सी आई री सखी फाड़ ही डालोगे क्या आज !

करण जोश में आते हुए : आह मेरी जान। बिल्कुल कसा हुए जा रही है बहुत टाइट हैं तुम्हारी चूत। बहुत मजा आ रहा है ।

काम्या : उफ्फ है भगवान । कितना मजा आ रहा है आह । और अंदर करो जोर करो । फाड़ दो आज पूरी तरह ।

अपनी भाभी के मुंह से ऐसी आवाजे सुनकर माही आंखे मस्ती बढ़ जाने के कारण खुल जाती हैं और वो देखती हैं कि कैसे उसके भाई का इतना लंबा चौड़ा लंड उसकी चूत में ज रहा है और इसे दर्द के बजाय मजा आ रहा है । उसे अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था । लंड पूरी तेजी से अंदर बाहर हो रहा था।

माही का हाथ अपनी चूत की कोमल पंखुड़ी को जोर से मसलने लगता हैं और उसकी भी सिसकी तेज हो जाती हैं।

तभी करण के धक्के काम्या की चूत कें पूरी तेजी से पड़ने लगती है तो काम्या की सिसकियां बढ़ने लगती है।

काम्या : फॅक मी । आह आह और तेज । जन्नत दिखा दो आज मेरी चूत को , है भगवान , उफ्फ ये कैसा सुख हैं। आह । और तेज मेरी जान अफ आह ।

काम्या का पता नहीं कितनी बार स्खलन हो चुका था लेकिन फिर भी हर मानने को तैयार नहीं थी।

उसकी चूत पूरी गीली थी जिस कारण कमरे में फच फाच की आवाजे गूंज रही थी।

 
तभी करण के धक्के काम्या की चूत कें पूरी तेजी से पड़ने लगती है तो काम्या की सिसकियां बढ़ने लगती है।

काम्या : फॅक मी । आह आह और तेज । जन्नत दिखा दो आज मेरी चूत को , है भगवान , उफ्फ ये कैसा सुख हैं। आह । और तेज मेरी जान अफ आह ।

काम्या का पता नहीं कितनी बार स्खलन हो चुका था लेकिन फिर भी हर मानने को तैयार नहीं थी।

उसकी चूत पूरी गीली थी जिस कारण कमरे में फच फाच की आवाजे गूंज रही थी।

अचानक करण के धक्के पूरी तेज हो जाते हैं और काम्या की चूत की हर नस खुलने लगती हैं । ऐसे ठुकाई आज उसकी पहली बार हो रही थी।

करण के मुंह से आह निकलने लगती हैं और लंड बुलेट ट्रेन की स्पीड से अंदर बाहर हो रहा था ।हर धक्के पर कम्याकी गांड़ बेड से उछल पड़ रही थी। तभी करण अपना पूरा लंड बाहर बाहर निकालता है और पूरी ताकत से अपनी गांड़ को उसकी चूत पर धकेलता हैं और लंड सीधा बच्चेदानी पर टकराता हैं और उसके वीर्य की बौछार होने लगती हैं और काम्या भी सेक्सी लेते हुए एक बार फिर से अपना रस उगल देती हैं और करण उसकी चूचियों गिर पड़ता है ।

आज उनके साथ ही माही की चूत भी अपना रस छोड़ देती हैं और वो अपनी ज़िन्दगी से दूसरे स्खलन का मजा चख लेती हैं जो पहले से कहीं ज्यादा शानदार था।

तूफान गुजर जाने के बाद करण खिड़की की तरफ नजरे बचाकर देखता है तो माही उसे कहीं नजर नहीं आती । और वो काम्या को बांहों में भरकर सो जाता है ।

अगले दिन सुबह करण की आवाज घर में स्थित छोटे से मंदिर से आने वाली घंटियों की आवाज से खुलती हैं और साथ ही साथ माही के भजन की मीठी आवाज उनके कानों में गूंजती हैं । वो अपनी बांहों में लेती काम्या को किस करता हैं और:

करण: उठ जाओ मेरी जान। सुबह हो गई है ।

काम्या उसके गाल पर किस करते हुए : हां मेरी जान । माही की पूजा की आवाज भी आ रही हैं

और ऐसा बोलते हुए वो उठ जाती है और अपने नंगे बदन पर कपड़े पहनती हैं और फ्रेश होने के लिए बाथरूम में घुस जाती हैं ।

समर और राम्या सुबह जल्दी उठकर रोजाना की तरह जॉगिंग पर गए हुए थे। राम्या का गजब का स्टेमिना था आज रनिंग का । वो किसी भी तरह से समर से कमतर नहीं थी। उसके कदम समर के क़दमों से कदम मिलाते हुए भागे चले जा रहे थे मानो दोनो में एक दूसरे को हराने का चैलेंज लगा हो। लेकिन रोज की तरह दोनो एक साथ मंजिल तक जाते है और फिर दोनो वापिस मुड़कर भागने लगते हैं तो राम्या की स्पीड समर के मुकाबले कुछ ज्यादा ही थी । राम्या जैसे ही सामर से आगे निकलती हैं तो समर के होंठो से हंसी छूट जाती हैं ।

समर हांफते हुए: सिस तुझे देखकर लग रहा है जैसे आज मैराथन जीत कर है मानेगी ।

राम्या( और तेज भागते हुए ): मैराथन तो कुछ भी नहीं है बच्चू मेरे लिए । बाए हाथ का खेल हैं ।

समर: हा हा हा बाए हाथ का खेल" और ऐसा कहते हुए वो उसकी हंसी उड़ाने लगता है जिसका असर सीधा राम्या के दिल पर होता है और उसकी स्पीड बिजली की गति से अचानक बढ़ जाती है और और वो समर को पीछे छोड़ते हुए तेजी से आगे निकल जाती है ।

 
जैसे ही राम्या आगे निकलती हैं वैसे ही भागने के कारण उसकी थिरकती हटाई गान्ड समर के सामने आ जाती है जो उसके भागते हुए कदमों के साथ उपर नीचे हो रही थी । राम्या की गांड़ उसके ट्रैक सूट में बहुत कसी हुई हुई लग रही थी । चूतड़ ट्रैक सूट को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे मानो उन्हें वहां जबरदस्ती कैद किया गए हो । आज उसके चूतड़ कुछ ज्यादा ही उछल रहे थे जिस कारण ना चाहते हुए समर का ध्यान उसके नितम्बो पर चला जाता है और उसे उस आज पहली बार एहसास होता है कि उसकी बहन की गांड़ कितनी बड़ी और मस्त हैं ।

वो नजरे गड़ाए हुए उसके नितम्बों को घूरता रहता है और साथ ही साथ अपनी भागने कि गति बढ़ा देता है , उसे डर था कि राम्या भागती हुई ज्यादा आगे निकल जाए जिससे उसे उसकी उछालती हुई भारी गांड़ ना दिखनी बंद हो जाए । जैसे जैसे वो राम्या के नजदीक आता गया था राम्या और तेजी से भागने लगती हैं जिससे उसकी चौड़ी गांड़ की थिरकन ज्यादा होने लगती हैं जिसका असर सीधे समर के लिंग पर हो रहा था जो जिसने लोवर के अंदर अपना मुंह उठाना शुरू कर दिया था ।

जैसे ही लिंग खड़ा होने लगता हैं समर को हैरानी होती है उसका लिंग ऐसे कैसे अपनी बहन की। गांड़ देख कर खड़ा हो सकता है । वो अपने दिमाग को झटकता हैं और नजरे दूसरी तरफ करते हुए दौड़ने लगता हैं लेकिन आज राम्या की गांड़ इतनी ज्यादा उछल रही थी कि वो अपने आप पर काबू नहीं रख पा रहा था और वासना से अभिभूत होकर अपनी नजरे फिर से अपनी सगी बहन के मस्त पिछवाड़े पर टिका देता है । जैसे जैसे घर नजदीक आता जा रहा था वैसे वैसे उनके दौड़ने की स्पीड बढ़ती जा रही थी । आज राम्या अपना पूरा दम लगा रही थी जीतने के लिए ।

तभी आवाज पीछे से बहुत तेज स्पीड से आते हुए समर उसके बराबर से निकलता है और ना चाहते हुए भी वो अपने आपको नहीं रोक पाता और भागते हुए एक हाथ राम्या की कामुक गांड़ पर मारते हुए घर के अंदर घुस जाता है मानो उसे चिडा रहा हो कि मैं आज फिर से जीत गया और राम्या उसे हैरानी से देखती रह जाती हैं और उसे बुरा भला कहते हुए घर के अंदर घुस जाती हैं ।

 
सारे परिवार की मुलाकात नाश्ते की टेबल पर होती है जहां सबसे पहले माही सबको पूजा के बाद प्रसाद देती हैं । माही ने आज एक व्हाइट कलर का सूट सलवार पहन रखा था और माथे पर चंदन का तिलक लगा हुआ था जो उसके सुंदर मुखड़े को और सुंदर बना रहा था। जैसे ही करण की नजर माही पर पड़ती है उसे रात ही बात याद आ जाती हैं कि कैसे वो खुद अपने ही निप्पल को चूस रही थी । ये बात याद आते ही उसका ध्यान माही के भारी और उठे हुए बूब्स की तरफ चला जाता है जोकि उसे ढीले कपड़े होने की वजह से सही से नजर नहीं आ रहे थे।

उसे यकीन नहीं हो रहा था कि ये वो रात वाली माही हैं जो अपने भाभी के बेडरूम में अपनी भाभी को चुदते हुए देखकर मस्त हो गई थी।

माही : भैया कहां खो गए प्रसाद लीजिए।

करण चौंकते हुए : न न नहीं । यहीं हूं ,

और दोनो हाथ फैलाते हुए प्रसाद ले लेता है जैसे ही माही समर को प्रसाद देती हैं समर उसे छेड़ते हुए : बुआ इसे ज्यादा प्रसाद देना , बेचारी आज फिर से हार गई।

ये सुनते ही राम्या का गुस्सा सातवे आसमान पर पहुंच जाता है और गुस्से से अपनी आंखे निकालते हुए : समर के बच्चे में तुझे देख लूंगी ।और सभी हसने लगते हैं ।

नाश्ता करते हुए करण बार बार सबकी नजर बचाकर माही की तरफ देख रहा था कि उसकी बहन कितनी खूबसूरत हैं लेकिन प्रकृति ने उसके साथ न्याय नहीं किया हैं ।

नाश्ते के बाद करण अपने ऑफिस चला जाता है और माही ब्यूटी पार्लर ।

समर अपने कॉलेज जाने लगता है और काम्या अपने घर में काम में लग जाती है

करण ऑफिस पहुंचता हैं और काम में लग जाता है । लेकिन आज उसका मन काम में नहीं लग रहा था । रह रह कर उसे माही की याद आ रही थी , कितनी खूबसूरत हैं वो और उम्र बढ़ने के साथ साथ उसकी खूबसूरती और बढ़ती जा रही थी। रात कितनी तड़प थी उसके अंदर , आखिर वो एक जवान लड़की थी , उसकी भी कुछ भावनाए है, शारीरिक जरूरतें हैं ।

तभी वो निश्चय करता है कि अब ऐसा नहीं होगा , उसकी बहन जवानी की आग में नहीं जलेगी क्योंकि वो जल्दी ही एक अच्छा लड़का देख कर उसकी शादी कर देगा ताकि उसे वो सभी खुशियां नसीब हो सके जो कि हर एक लड़की का सपना होता है । साथ ही साथ एक बहन को सारे सुख देना भी तो एक भाई का परम कर्तव्य होता है और फिर माही का मेरे सिवा हैं ही कौन।

सारे दिन वो इसी उधे़डबुन में लगा रहता है । उधर घर में काम्या अकेली थी और घर के सारे काम देख रही थी । दोपहर के बाद माही लंच करने घर पर आती है क्योंकि ब्यूटी पार्लर घर के पास ही था। माही घर के अंदर घुसती हैं और काम्या को आवाज लगती हैं ,

माही : हेल्लो भाभी कहां हो आप , दिखाई नहीं पड़ रही हो

उसे कोई उत्तर नहीं मिलता हैं तो वो भाभी के घर के अंदर ढूंढ़ती हैं लेकिन उसे वो नहीं मिलती । गर्मी के कारण उसका सारा शरीर पसीने से नम हो गए था इसलिए वो पहले नहाने का फैसला करती हैं और तौलिया लेकर जैसे ही बाथरूम का गेट खोलती हैं तो उसे काम्या नजर आती हैं जो इस वक़्त नंगी थी और अपने बदन को साफ कर रही थी ।

जैसे ही दरवाजा खुलता है तो काम्या डर जाती हैं कि पर नहीं को आ गया है ?

जब वो माही को देखती हैं तो उसे सुकून मिलता है लेकिन आह पहली बार ऐसा हुआ था कि वो माही के सामने नंगी थी । माही ध्यान से पास से उसकी चूचियां देखती हैं जो कि नारियल के आकार की थी और उन पर पिंक रंग के निप्पल अकड़े हुए खड़े थे और नीचे उसकी टांगो के बीच उसकी चूत का उभर साफ दिख रहा था जो की रात हुई दमदार चुदाई के कारण सूज गई थी । काम्या को जैसे ही माही की नजरो का एहसास होता है शर्म से अपने दोनो हाथ अपनी चूचियों पर रख देती हैं और अपना चेहरा छुपा लेती हैं तो माही के होंठो पर मुस्कान आ जाती हैं और वो अपनी भाभी को सॉरी बोलती हैं और दरवाजे को बंद करते हुए फिर से एक नजर काम्या के जिस्म पर डालती हैं और बाहर आ जाती हैं ।

उधर काम्या का शर्म के मारे बुरा हाल था , उसकी नजर अभी तक उपर नहीं उठ पा रही थी । जैसे ही वो गेट बंद होने की आवाज सुनती हैं तो देखती हैं कि माही बाहर जा चुकी हैं तो एक चैन की सांस लेती हैं ।

फिर अपने आपको कोसते हुए की मुझे दरवाजा ध्यान से बंद करना चाहिए था , कहीं माही के जगह कोई और होता तो । वो अच्छे से नहाने के बाद बाहर आती हैं तो उसने जिस्म पर सिर्फ एक टॉवेल लपेटा हुआ था । माही बाहर ही उसे मिल जाती हैं जिसके होंठो पर फिर से एक कातिल मुस्कान आ जाती हैं जिसे देख कर काम्या चिड जाती हैं और वो वो माही को मारने के लिए उसकी और तेजी से बढ़ती है, । जैसे ही माही काम्या को अपनी और आते हुए देखते हैं तो वो अपनी जान बचाने के लिए भागती है लेकिन जल्दबाजी में कुर्सी में पैर फस जाने के कारण गिर जाती हैं और फिर से खड़ी होकर भागने कि कोशिश करती हैं लेकिन तब तक काम्या उसके पास पहुंच चुकी थी और वो माही को पकड़ लेती हैं और उसकी पीठ पर हल्के हल्के मुक्के बरसाने लगती हैं ।

काम्या : माही की बच्ची भूत शैतान हो गई है आज कल तू । अभी मजा चखाती हूं तुझे ।

माही हंसते हुए : भाभी मेरी कोई गलती नहीं थी आपको रूम को लॉक करके नहाना चाहिए था ।

काम्या: और और तू जो मुंह उठाए चली आई अंदर , तुझे कम से कम दरवाजा तो नॉक करण चाहिए था ।

माही मासूम सी सूरत बनाकर अपने कान पकड़ते हुए :भाभी गलती हो गई मुझे , अच्छा बाबा माफ कर दो ।

काम्या : गलती का अभी मजा चाखती हूं तुझे " और ऐसा कहते हुए माही को पकड़ कर बिस्तर पर गिरा देती हैं और खुद उसे दबाने के लिए उसके उपर लेट जाती हैं और उसके गल पकड़ कर खीचने लगती हैं । माही अपने आपको बचाने के लिए उसे अपने ऊपर से हटाने के कोशिश करती है जिस कारण काम्या का तौलिया खुल जाता है और वो एक बार फिर से माही के सामने नंगी हो जाती हैं जिसे देखकर की फिर से जोरदार हंसी छूट जाती हैं और वो ठहाका मारकर हसने लगती हैं । काम्या की हालत फिर से खराब हो जाती हैं और वो गुस्से में आ जाती हैं और माही को सबको लेती हैं ।

काम्या : बच्चू मेरे नंगे होने का मजाक उड़ाती है अभी तेरी अकल ठिकाने लगाती हूं" और ऐसा बोलकर वो माही के सूट पकड़ा कर खिचने लगती हैं और माही अपने आपको बचाने की कोशिश करती हैं लेकिन जीत काम्या की होती है और वो उसका सूट फाड़ देती हैं जिस कारण माही का उपर का हिस्सा नंगा हो जाता है और ब्रा में कैद उसकी चूचियां उछल पड़ी थी जो आकार में को काम्या से कम थी लेकिन टाइट बहुत ज्यादा थी और ब्रा के अंदर से निप्पल अपना मुंह उठाए खड़े महसूस हो रहे थे । माही शर्म के मारे पानी पानी हो रही थी । आप पहली बार वो किसी के सामने इस हालत में थी । और वो अपने दोनो हाथ अपनी चूचियों पर रख लेती हैं और शर्म के मारे अपनी आंखे बंद कर लेती हैं जिसका पूरा फायदा काम्या उठाती हैं और वो आगे बढ़ते हुए उसकी सलवार का नाड़ा खोल देती हैं ।

 
जैसे ही माही को कुछ समझ में आता है वो तुरंत अपनी सलवार को थामे की कोशिश करती हैं तो काम्या अपने दोनो हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा खोल देती हैं और खींच कर अलग कर देती हैं जिससे उसके दोनो सफेद कबूतर फड़फड़ाते हुए बाहर आ जाते हैं । माही बोखलाहट के मारे अपने दोनो हाथ अपनी चूचियों पर रखती हैं तो इसकी सलवार जिसका नाड़ा पहले ही खुल चुका था सरक कर नीचे आती हैं और उसकी काले रंग की पेंटी नजर आ जाती हैं जिसमें उसकी भारी और उभरी हुई गांड़ समाए नहीं समा पा रही थी ।

काम्या जोर जोर से हंसते हुए माही का मजाक उड़ाती है और बोलती हैं कि अब मजा आया कि नहीं ।

माही की हालत ऐसी मानो काटो तो खून नहीं और वो बोखलाहट के मारे अपनी सलवार उपर उठाती है जिससे उसकी चूचियां फिर से नंगी हो जाती हैं जिन्हें देख कर काम्या की फिर से हंसी छूट जाती हैं । माही को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे तो वो चुपचाप शर्म के मारे आंखे बंद कर लेती हैं । काम्या आज पहली बार उसके नंगे जिस्म को ध्यान से देखती हैं तो नारी स्वभाव के कारण उसे जलन होने लगती है।

उपर के नीचे तक पूरी कयामत थी माही । गोल चेहरा, झुकी हुई बड़ी बड़ी आंखे, गुलाब की पंखुड़ियों से नाजुक रसीले होंठ जोकि कुदरती ही पिंक रंग के थे मानो उन्हें लिपिस्टिक लगा दी गई हो, लंबी पतली गर्दन, और उठा हुए सीना, जिसके दोनो तरफ सेब के आकार के उसकी दो ठोस चूचियां, एक दम सही साइज़, और उन पर तने हुए पिंक रंग के निप्पल जो किसी के झुकाए भी ना झुके , मानो उन्हें टाइट खड़े रहने का कोई वरदान मिला हो , सपाट पेट बिल्कुल अंदर की तरफ, पतली कटावदार कमर, सुडौल चिकनी जांघें और गांड़ ऐसी मानो जो बड़े ढोल हो , बिल्कुल उठी हुई और बाहर की ओर निकली हुई ।

इस वक़्त वो काम्या को किसी काम देवी से कम नहीं लग रही थी, काम्या आगे बढ़ती हैं और उसे अपनी बांहों में ले लेती हैं तो शर्म और डर के मारे वो घबराकर तेजी से काम्या के गले लग जाती हैं । जैसे ही दोनो की नंगी चूचियां आपस में टकराती हैं तो दोनो के मुंह से एक मीठी आह निकल जैत हैं और माही उसे और कस के जकड़ लेती है जिस कारण माही की चूचियों को कठोरता का एहसास हुए अपने सीने पर होता हैं और वो उन्हें अपनी चूचियों से दबाने लगती है ।

माही का तो उत्तेजना के कारण पूरा जिस्म कांप रहा था , काम्या फिर धीरे धीरे उसकी कमर पर हाथ फिराने लगती हैं और उसकी कमर को हल्के हल्के दबाने लगती हैं जिस कारण काम्या की चूत गीली होने लगती हैं ।

तभी वो माही के गालों पर किस करती हैं और उसके चेहरे को पकड़ कर ऊपर उठाती हैं तो माही अपनी नाजुक पलके झुका लेती हैं और काम्या उसके होंठो की तरफ देखते हुए आगे बढ़ती है , जैसे ही काम्या के होंठ माही ले होंठो से टकराते हैं उसका जिस्म रोमांच से भर जाती हैं क्योंकि उसकी जिंदगी का आज पहला किस होने जा रहा था । और वो काम्या से किसी अमरबेल की तरफ लिपट जाती हैं। काम्या प्यार से उसके होंठो को चूमने लगती है , कभी उपर वाले को तो कभी नीचे वाले को। माही भी उसका साथ देते हुए उसके होंठो को चूसने लगती हैं ।

जैसे जैसे किस बढ़ता जा रहा था वैसे वैसे ही मजा भी बढ़ता जा रहा था। काम्या अपनी जीभ का दबाव उसके होंठो पर बनाती हैं जिससे माही को मुंह खुल जाता है और काम्या अपनी जीभ उसके मुंह के अंदर घुसा देती हैं जिससे माही के धैर्य का बांध टूट जाता है और वो भी जोश में आते हुए उसके मुंह के अंदर जीभ घुसा देती हैं और दोनो हाथ काम्या के चूतड़ों पर ले जाकर उन्हें दबाने लगती हैं। किस इतना मजेदार होता है आज उसे एहसास हुआ।

फिर काम्या किस तोड़कर थोड़ा नीचे आती है और माही के ठोस चूचियां को अपने हाथो में भर लेती हैं और दबाने लगती हैं जिससे माही की सिसकी की आवाज गूंजने लगती हैं और वो पागलों की तरफ अपनी चूचियों को उसके हाथ पर उभारने लगती हैं । काम्या आगे बढ़ते हुए उसके एक चूची को मुंह में भर लेती हैं और चूसने लगती है ।

माही का बुरा हाल हो गया था मजे के कारण , निप्पल पर जीभ का एहसास ऐसा मजा देता है उसे सपने में भी उम्मीद नहीं थी ।

माही : आह उफ्फ है भगवान , कितना आनंद हैं , और जोर से चूसो , खा जाओ भाभी । उफ्फ मर डालो आज तो मुझे । "

उसकी सिसकियां सुनकर काम्या जोश में आते हुए उसकी चूची को पूरा मुंह में भर कर चूसने लगती हैं जिसका असर सीधे माही की चूत पर होता है और उसकी पेंटी गीली हो गई थी। काम्या अब इसके निप्पल को चूसने लगती हैं जिससे माही के मजे की कोई सीमा नहीं थी , वो तो जैसे स्वर्ग में थी।

तभी काम्या नीचे आते हुए अपनी धीरे धीरे उसकी पेंटी जो कि पूरी गीली हो चुकी थी उसे निकाल देती हैं जिसका माही कोई विरोध नही करती और अपनी टांगे उठा कर उसका सहयोग करती है।

काम्या उसकी जांघ पर फैले उसके चूत रस को जीभ से चाट लेती है जिस कारण काम्या का गला सूख जाता है । और काम्या अगला हमला करते हुए उसकी चूत पर एक जोरदार किस करती हैं और फिर उसकी जांघो पर जीभ फिराने लगती हैं। चूत पर पहली बार हुआ जीभ का एहसास माही को दिन में तारे दिखा गया था। उसका रोम रोम सुलग उठा था, कितना सुखमय था वो एहसास , लेकिन काम्या ने अपने होठ हटा लिए और थे जिससे माही तड़प उठी थी । काम्या उसकी चूत के पास आती चूसते हुए और माही का बदन कांप जाता की अब उसके चूत वो चुसेगी लेकिन काम्या फिर से अपने होठ हटा लेती और जांघ चाटने लगती। माही का सब्र टूट चुका था, उससे अब बर्दाश्त नहीं होता और वो काम्या का सिर पकड़ कर अपनी चूत से चिपका देती हैं। काम्या तो जैसे इसी इंतजार में थी।

चूत पर लिप्स पड़ते ही माही अपनी टांगो को पूरा खोल देती हैं जिससे काम्या आराम से उसकी चूत चूसने लगती है। वो जीभ को पूरी लंबाई में उपर से नीचे घुमा रही थी । माही का जिस्म उछलने लगा था जिसे काम्या बाद मुश्किल से दबा रही थी । पूरे कमरे में माही की मस्त सिसकियां गूंज रही थी।

काम्या: आह आह उफ्फ , मर डाला री आज तो, और चूसो , चाट जाओ पूरी।

काम्या दोनो हाथ से उसकी चूत के होंठो को फैलाती है और एक उंगली चूत के छेद पर जैसे ही रखती है तो माही उसका हाथ पकड़ लेती हैं और बोलती हैं: आह आह नहीं भाभी उंगली मत डालो । आजतक नहीं डाली मैंने । में चाहती हूं कि सबसे पहले लौड़ा ही घुसे मेरी चूत में । "

काम्या उसकी बात मान लेती हैं और फिर से उसकी चूत चूसने लगती हैं । और चूत के लिप्स को खोलती हैं तो उसे काफी ताकत लगानी पड़ती है क्योंकि चूत बहुत टाइट थी। लिप्स पुट की आवाज के साथ खुल जाते हैं और उसकी थोड़ी सी जीभ चूत के अंदर घुस जाती हैं ।

 
जैसे ही जीभ उसकी चूत कि अनछुई दीवारों को रगड़ती हुई अंदर घुसती है तो दर्द के मारे माही का सारा शरीर अकड़ जाता है और उसका मुंह खुल जाता है और एक दर्द भरी आह उसके मुंह से निकाल जाती हैं। माही की चूत एकदम गरम थी जिस कारण काम्या की जीभ भी जल रही थी । काम्या को लग रहा था जैसे उसने अपनी चूत किसी गरम भट्टी में घुसा दी हो। जैसे ही काम्या उसकी चूत कि दीवारों को चाटना शुरू करती हैं माही उत्तेजना के कारण पागल हो जाती हैं और उसका खुद पर कोई काबू नहीं रहता । काम्या की खुरदरी जीभ उसकी चूत को रगड़ रही थी जिस करण माही मस्ती से उछल पड रही थी। उसकी गान्ड अपने आप काम्या के मुंह पर दबाव बना रही थी और माही मस्ती में आते हुए सिसकती हैं :

माही: उफ्फ , आह आह ,ओह नो , कितना सुखद हैं ये सब, रगड़ रगड़ कर चाटो काम्या मेरी जान। अगर मुझे पता होता इतना मजा आएगा तो में तो कब से चटवा लेती। "

पूरे कमरे में माही की मस्ती भरी सिसकारियां गूंज रही थी । काम्या और जोर से उसकी चूत चाटने लगती हैं , तो माही के मजे की कोई सीमा नही थी। वो जो जी में आए रहा था बडबडा रही थी। मस्ती के कारण फिर से उसकी आंखो बंद हो चुकी थी । माही अपने एक निप्पल को हाथ से पकड़ कर मुंह में भर लेती हैं और चूसने लगती हैं । माही इस वक़्त पूरी तरह से पागल हो चुकी थी और काम्या की जीभ लगातार अपना कमाल दिखा रही थी। माही की चूत में बाढ़ सी आयु हुई थी जिसे काम्या चट करती जा रही थी ।

माही उसके सिर को पकड़ कर अपने चूत पर दबा रही थी और काम्या जोर जोर से उसकी चूत चूस रही थी । माही की गांड़ उपर नीचे उछल रही थी , उसका पूरा जिस्म मस्ती से भर रहा था। तभी उसकी चूत में हलचल शुरू होने लगती हैं तो वो अपनी चूत को जोर जोर से काम्या की जीभ पर पर मारने लगती हैं और तभी उसे लगता लगता हैं कि मजे के कारण उसकी चूत फट जाएगी और वो काम्या के सिर को पूरी ताकत से अपनी चूत पर दबा देती हैं और मस्ती के कारण उसका मुंह खुल जाता है : उफ्फ हाय मेरी चूत , आह है भगवान में गई "

और उसकी चूत का बांध टूट जाता है और उसका रस चूत काम रस बहा देती हैं जिसे काम्या चूसती जाती हैं ।

आनंदितिरेक में माही की आंखे बंद हों जाती हैं और वो बेड पर पड़ी पड़ी आन्हे भरती हैं । काम्या तो जैसे निहाल हो गई थी इतनी मस्त चूत को चूस कर और मजे के कारण उसका भी पानी निकाल जाता हैं और वो माही के चूचियों पर ढह जाती हैं ।

थोड़ी देर के बाद दोनो को होश आता है और नहाकर खाना खाती हैं और माही अपने कमरे में चली जाती है ।और बेड पर लेट जाती हैं । आज उसे एहसास हुआ कि चूत इतना मजा भी से सकती हैं । उफ्फ अगर सिर्फ जीभ घुसने से ही इतना मजा आया हैं तो जब लौड़ा अंदर जाएगा तो वो धन्य हो जाएगी । लौड़ा शब्द ध्यान में आते ही उसे करण का लन्ड याद आ जाता है क्योंकि उसने आज तक सिर्फ एक ही लन्ड देखा था वो भी अपने सगे भाई का। उफ्फ कितना बड़ा और मोटा था वो । कितना भयंकर लग रहा था जैसे कोई अजगर हो , उसे तो यकीन ही नहीं हुआ था कि वो उसकी भाभी की छोटी सी चूत के अंदर घुस गया था पूरा । हाय भाभी कैसे उसे रोज लेती होगी, कितना दर्द होता होगा उन्हें लेकिन वो तो उस दिन खूब मजे से चुदवा रही थी ।

है भागवान , हाय मैं क्या सोच रही हूं , ये सब गलत हैं वो मेरा सगा भाई हैं , मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए ।

और वो सोने की कोशिश करने लगी थी। थोड़ी देर बाद वो गहरी नींद में चली जाती हैं

उधर काम्या की तो जैसे आज लॉटरी निकाल गई थी। उसे रह रह माही की टाइट चूत याद आ रही ही जिसे आज उसने जी भरकर चूसा था । सारा दिन घर के कारण करने के कारण काम्या भी थक चुकी थी और वो भी अपने कमरे में सोने चली जाती हैं।

शाम को पूरे परिवार की मुलाकात शाम की चाय पर होती हैं । करण चाई पीते हुए : इतनी अच्छी चाई किसने बनाई है ?

माही खुश होते हुए : भैया सिर्फ एक में तो इतनी अच्छी चाय बना सकती हूं इस घर में "।

भाई मेरा इनाम कहां हैं अच्छी चाय बनाने का ?

करण : मिल जाएगा जल्दी है । उसके ही बारे में बात करते हैं ।मैंने आज पूरे दिन बहुत गहन विचार किया और आखिरकार मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि हमे एक अच्छा सा लड़का देख कर माही की शादी कर देनी चाहिए "

इस बात से जहां एक ओर समर, राम्या और काम्या के चेहरे खुशी से खिल जाते है वहीं माही उदास हो जाती हैं और बोलती हैं : मुझे नहीं करनी शादी अब । जो मेरी किस्मत में था हो गया ।

काम्या: लेकिन किस्मत बदल भी तो सकती हैं माही । जरूरी नहीं कि इंसान हादसों के बाद जीना छोड़ दे।"

करण: मेरी बात समझने की कोशिश करो , में को भी कर रहा हूं तुम्हारे अच्छे के लिए कर रहा हूं

माही: में आपकी सब बात मानने के लिए तैयार ही भाई लेकिन शादी नहीं करनी मुझे किसी भ शर्त पर । ये मेरा फाइनल निर्णय हैं "

और इतना बोलने के साथ ही उसकी रुलाई फुट पड़ती हैं और वो अपना चेहरा छुपा कर उपर भाग जाती हैं।

सभी अवाक से उसे देखते रह जाते हैं और वो सब भी उदास हो जाते हैं । माहौल एक दम गंभीर हो चुका था, कोई कुछ नहीं बोल रहा था तभी काम्या पहल करती है: राम्या तुम मेरे साथ किचन में चलो और मेरी हेल्प करो।

समर तुम ये कुछ जरूरी सामान ले कर बाजार से आओ। "

और उसके हाथ में एक लिस्ट थमा देती हैं ।

और फिर करण की और देखते हुए : आप जाइए और माही को मनाए , और जब आप नीचे आए तो वो आपके साथ मुस्कुराती हुई आनी चाहिए । "

करण धीरे धीरे भारी क़दमों से उपर जाता है और पूरी हिम्मत समेट कर माही का डोर नॉक करता है तो अंदर से कोई उत्तर नही आता।

करण: माही प्लीज़ गेट खोल,

माही सिसकते हुए : जाइए आप , मुझे नहीं करनी शादी,

करण: अरे पहले दरवाजा तो खोल, बैठकर आराम से बात करते हैं"

माही: नहीं मुझे कोई बात नहीं करनी आपसे। मैं क्या आप पर बोझ बन गई हूं

और ऐसा बोलकर जोर जोर से रोने लगती हैं ।

करण: अच्छा जो तू कहेंगी वो ही होगा , लेकिन प्लीज़ प्लीज़ गेट तो खोल"

माही: नहीं पहले मेरी कसम खाओ आप ।

करण कुछ दी सोचता हैं और और बोलता हैं ठीक है माही तुम्हारी कसम। जो तुम चाहोगी वो ही होगा लेकिन मेरी प्यारी गुड़िया अब तो दरवाजा खोल।

माही खुश होते हुए दरवाजा खोल देती हैं, करण देखता है कि उसका पूरा चेहरा आंसुओ से भीग गया था और रोने के कारण आंखे लाल हो गई थी।

वो आगे बढ़कर उसे गले लगा लेता और उसकी पीठ थपकने लगता हैं तो माही की रुलाई फुट जाती हैं और वो करण को जोर से अपनी बांहों में भरकर रोने लगती हैं

करण का भी मन भारी हो जाता है और उसकी आंखो में भी आंसू आ जाते हैं लेकिन वो खुद को संभालते हुए : मत रो मेरी बहन, मै तुम्हारी आंखों में आंसू नहीं देख सकता , और उसका आंसुओ से भीगा हुआ चेहरा ऊपर उठाकर उसके आंसू पीने लगता हैं तो माही अपने भाई का प्यार देख कर खुश हो जाती हैं और खुशी के मारे उसको कस कर अपने आप से चिपका लेती हैं और अपने आंसू रोकने लगती हैं



करण उसकी कमर को ऐसे ही सहलाता रखता है, माही के ज्यादा जोर से चिपकने के कारण उसकी बूब्स करण के सीने में गाड़ गए थे और उनके कठोर निप्पल उसे अपने सीने में चुभते हुए महसूस हो रहे थे। उफ्फ कितने बड़े और मस्त हैं उसकी बहन की चूचियां । जैसे ही उसे रात का दृश्य याद आता है तो उसकी आंखो के सामने माही की नंगी चूची आ जाती हैं, जिसका असर सीधे उसके लन्ड पर होता है और वो अपना सिर उठाना शुरू कर देता है ।

वो एक हाथ से धीरे धीरे उसकी कमर सहला रहा था । माही की रुलाई पूरी तरह से रुक चुकी थी । अब कमर पर घूमता उसके भाई का हाथ उसे अच्छा लग रहा था।

माही की नाजुक और चिकनी कमर का एहसास पाकर उसका लन्ड अब बुरी तरह से अकड़ गया था जो अब माही चूत पर अड़ा पड़ा था। जैसे ही करण के लन्ड का एहसास उसे अपनी चूत पर होता है उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं वो शर्म के मारे करण से और जोर से चिपक जाती हैं जिस कारण लन्ड उसकी चूत को अच्छे से रगड़ रहा था। इस कामुक रगड़ से उसके मुंह से आहत निकाल जाती हैं जिसे करण साफ सुनता हैं और वो जोश में आते हुए अपने दोनो हाथ सलवार के उपर से ही उसके उठे हुए भारी चूतड़ों पर के जाता है और उन्हें दबा देता है जिसका सीधा असर माही की चूत पर होता है और उसमें तरंगे उठने लगती हैं ।

तभी करन दोनो हाथो से उसका चेहरा ऊपर उठाता है और पहले उसकी आंखो में देखता है तो और फिर उसके नाजुक सेक्सी लिप्स को देखता है और अपने होंठो पर जीभ फिराने लगता है ।

जैसे ही माही उसकी नजरो का पीछा करती हैं तो उसे एहसास हो जाता है कि उसके भाई की नजरे उसके लिप्स पर हैं तो वो शर्म से पानी पानी हो जाती हैं और वो अपनी जीभ निकाल कर अपने होंठो को गीला करती हैं और अपनी नजरे झुका लेती हैं और उसकी छाती में घुसे बरसाने लगती हैं ।

करण को ग्रीन सिग्नल मिल गया था।

वो बेसब्री से उसका चेहरे उपर करता हैं और अपने प्यासे जलते हुए लिप्स को अपने बहन के नाजुक, कामुक और रसीले होंठो से चिपका देता हैं । जैसे ही माही को अपने होती पर अपने भाई के होंठो का एहसास होता है उसकी सांसे जैसे रुक सी जाती हैं और वो अपनी चूत को बुरी तरह से उसके पूरे तरह से खड़े हुए लन्ड पर रगड़ती हैं और उसके होंठो को चूमती हुई कमरे से बाहर भाग जाती हैं ।

जैसे ही माही बाहर आती हैं अभी हुए हादसे को याद करके उसके होंठो पर स्माइल आ जाती हैं और वो भागते हुए नीचे आ जाती हैं । जैसे ही काम्या उसके होंठो और मुस्कान देखती हैं तो वो भी खुशी के मारे उसे अपने गले लगा लेती हैं ।

उधर जैसे ही माही उसकी बांहों से निकल कर बाहर जाती हैं उसे जैसे होश आता है और सोचता हैं कि ये भगवान है क्या हो गया।

ऐसा नहीं होना चाहिए था वो मेरी सगी बहन हैं ।

 
तभी उसे अपने खड़े हुए लन्ड का एहसास होता है जो कि पेंट के उपर से साफ नजर आ रहा था और पूरी तरह से अकड़ा हुआ था , उसे हैरानी होती है तभी उसे माही की हरकत याद आती हैं कि कैसे उसने खुद अपनी चूत को उसके लन्ड पर दबाया था और अपने होंठो पर जीभ फिराकर उसे ग्रीन सिग्नल दिया था। उफ्फ कितने गरम थे उसके होंठ , मानो जलते हुए अंगारे हो और साथ ही साथ कितने रसभरे थे। काश मैं अच्छे से चूस पाता।

और ऐसा सोचते हुए उसका लन्ड पेंट में ऐसे उछलता है जिसे उसे फाड़कर बाहर आ जायगा।

करण उसे हाथ से हल्के से दबाता हैं और बोलता हैं कि थोड़ा सब्र किया कर लन्ड महाराज । वो मेरी बहन कि चूत हैं "

लेकिन लन्ड को क्या फर्क पड़ता है चूत होनी चाहिए चाहे वो मा की हो या बहन की उसका काम तो बस चोदना होता है

उधर समर बाजार जाता हैं और काम्या ने हो सामान कि लिस्ट दी थी उसके हिसाब से सारा सामान्य खरीद कर घर की तरफ वापिस लौट पड़ता है , आस उसका भी मन उदास था अपनी बुआ के आंसू देखकर । माही उसे कितना प्यार करती हैं , उसकी हर ख्वाहिश पूरी करती हैं , जब उसे किसी चीज की जरूरत होती है तो वो चुपके से माही को बोलता था और माही उसकी मदद कर देती थी, लेकिन आज जो कुछ हुआ घर पर उससे माही को कितना दुख हुआ इसका अंदाज़ा वो लगा पा रहा था ।

समर सोचता है कि अगर उसकी बुआ शादी नहीं करना चाहती तो कोई बात नहीं लेकिन जब तक वो जिंदा हैं अपनी बुआ का ख्याल रखेगा ताकि वो खुशी से रह सके।

इसी उधेड़बुन में डूबा हुआ वो घर पहुंचता है तो देखता हैं कि खाना बन चुका था वो सभी लोग उसका ही इंतजार कर रहे है । वो जल्दी से फ्रेश होकर आता हैं और डायनिंग टेबल पर बैठ जाता है अपनी प्यारी बुआ के पास जो को अब उससे खुश नजर आ रही थी, उसका मतलब पापा ने उसे मना लिया है ।

सभी खाना शुरू करते हैं और माही की माही उपर नहीं उठ रही थी क्योंकि उसके ठीक सामने करण बैठा हुआ था, अभी उपर रूम में को उनके बीच हुआ था उससे सोच सोच कर उसे शर्म आ रही थी कि उसका भाई क्या सोच रहा होगा उसके बारे में । ये सब सोचकर उसका मन खाने में नहीं लग रहा था।

समर: बुआ देखो ना पनीर की सब्जी कितनी अच्छी बनी हैं आप खाओ इसे भी ," और इतना कहकर वो उसकी प्लेट में सब्जी निकाल देता है ।

माही : नहीं समर , मुझे ज्यादा भूख नहीं हैं ,

काम्या: इसका मतलब करण तुम्हे ठीक से नहीं मना पाए हैं " ।

और काम्या गुस्से से करण की तरफ देखते हुए: क्यों जी आपको जो काम दिया था अच्छे से क्यों पूरा नहीं हुए " मेरी रानी अब तक नाराज क्यों हैं " ।

करण के कुछ बोलने से पहले ही माही बोल पड़ती है : नहीं भाभी, में बिल्कुल खुश हूं , भैया को कुछ मत कहो आप ।

काम्या: देखो कितना प्यार करती हैं अपने भाई से , इनको कोई कुछ भी कहे तो जलन होती है इसे" ।

और काम्या के ऐसे बोलते ही सब खिलखिलाकर हंस पड़ते हैं तभी समर आगे आता है और अपने हाथ में खाने का निवाला बनाता है और बोलता हैं कि अपनी बुआ को मैं खुद अपने हाथ से खाना खिलाऊंगा ।

और ऐसा बोलकर वो निवाला उसके मुंह के पास लेकर जाता है तो माही खुशी के मारे अपने होठ खोलती हैं और निवाला खा लेती हैं , समर जैसे ही दूसरा निवाला बनाता है माही उसे मना करती हैं और बोलती हैं कि मैं खुद खा लूंगी । लेकिन समर नहीं मानता और उसे फिर से खाना खिलाता है ।

समर के बाद बाद काम्या और राम्या भी उसे अपने हाथ से खाना खिलाती है और माही परिवार का इतना प्यार दिल कर उसका दिल भर आता हैं और आंखे नाम हो जाती हैं ।

काम्या : अजी आप भी खाना खिलाओ माही को , आ जाओ"

करण आगे आता है और निवाला बनाकर जैसे ही अपने हाथ उसके मुंह के पास ले जाता हैं तो दोनो की आंखे टकरा जाती हैं और दोनो के होंठो पर एक स्माइल आती हैं और माही अपने प्यार होंठो को खोल देती हैं और जैसे ही करण की उंगलियां उसके लिप्स से टकराती हैं माही के बदन के तार झनझना जाते हैं और वो निवाला अंदर ले लेती हैं और जैसे ही करण अपना हाथ बाहर करता हैं तो माही उसकी हाथ में काट लेती हैं तो करण के होंठो से एक दर्द भरी आह निकल जाती हैं जिस पर सब हसने लगते हैं और करण भी मुस्कुरा पड़ता हैं ।

काम्या: बहुत अच्छा लिया माही , आज इनकी वजह से ही तुम्हारा दिल दिखा और तूने अपना बदला ले ही लिया "।

माही मुस्कुराते हुए: अगर आज के बाद किसी ने मेरी शादी की बात करी तो उसके हाथ में नहीं काटूंगी बल्कि उसे कच्चा चबा जाऊंगी ।

और ऐसा बोलकर अपने दूध से गोरे दांत बाहर निकाल लेती है जैसे सब को डरा रही हो ।

काम्या और राम्या का तो हंसी के मारे बुरा हाल हो चुका था तो समर की भी हालत कुछ जुदा नहीं थी। हान करण बीच बीच में हंस रहा था।

ऐसे ही हंसते हंसते वो सभी खाना कहते हैं । घर के माहौल फिर से खुशनुमा बन चुका था। खाना खाने के बाद राम्या और माही किचन में चली जाती है और करण बाहर घूमने चला जाता है ।

काम्या और समर बाहर बने हॉल में आ जाते हैं और टीवी देखने लगते हैं ।

सामर: मा आज के बाद बुआ को कोई कुछ नहीं कहेगा। देखो आज वो कितना रोई हैं

काम्या : हां बेटे , मुझे भी बहुत दुख हुए उसकी आंखो में आंसू देखकर । लेकिन बेटा तेरे पापा ने भी तो ये बात माही के भले की लिए ही कहीं थी। अब हम दोनों कौन सा हमेशा बैठे रहगे, भगवान ना करे कल कुछ हो गया तो माही की ध्यान को रखेगा ?

समर जल्दी से अपनी मा के होंठो पर उंगली रख देता है : खबरदार जो आज के बाद ऐसे अशुभ शब्द आपकी जुबान पर आए तो" ।

और ऐसा बोलते हुए अपनी मम्मी की बांहों में भर लेता है और उसके चेहरे पर किस करने लगता हैं ।

काम्या भी उसे अपने गले लगा लेती हैं और उसकी पीठ पर हाथ फिराने लगती हैं ।

काम्या: बेटा आज की बात और हैं कल तेरी शादी के बाद तेरी पत्नी को अगर माही का घर में रहना पसंद नहीं आया तो , तब ?

समर कुछ देर के लिए सोच में पड़ जाता है वहीं दूसरी तरफ माही किचन से आ चुकी थी लेकिन जैसे ही उनकी बाते सुनती है तो वहीं रुक जाती हैं ।

समर काफी गंभीर हो जाता है। और फिर जैसे को फैसला करता है ।

समर: मम्मी मैं आपके सिर पर हाथ रखकर कसम खाता हूं कि ऐसा कभी नहीं होगा क्योंकि मैं शादी ही नहीं करूंगा । "

और ऐसे बोलते हुए अपने हाथ को काम्या के सिर पर रख देता है। काम्या की तो जैसे बोलती बंद हो जाती हैं ।उसका दिल तपड उठता है समर के शब्दों को सुनकर । वहीं दूसरी तरफ जैसे ही गेट के पास खड़ी माही समर के ये शब्द सुनती हैं उस जैसे लकवा मर जाता है और वहीं फर्श पर बैठ जाती हैं , उसके दिमाग में काम करना बंद कर दिया था।

काम्या: नहीं बेटा ऐसे नहीं बोलते, तू अभी बच्चा हैं , अपनी कसम वापिस ले ले ।

समर: मा एक राजपूत अपनी जुबान से पीछे नहीं हटता चाहे उसकी जान ही क्यों ना चली जाए"।

समर ऐसे बोलता हैं जैसे वो अपना आखिरी फैसला सुना चुका हैं । काम्या की तो जैसे आवाज ही नहीं निकल रही थी। बस उसकी आंखों से लगातार आंसू बहे जा रहे थे। समर आगे उसे फिर से अपने गले लगा लेता है और चुप कराने लगता हैं और उसके आंसुओ को अपनी जीभ निकाल कर चाटने लगता है ।

अपने बेटे का प्यार देखकर के आंसू हल्के पड़ने लगते जाऊं और वो जोर से समर को अपने गले लगा लेती हैं और उसके गालो को चूमती है जैसे उस पर अपना सारा प्यार लूटा देना चाहती हों ।

समर: मा आप एक वादा करो मुझसे की आज के बाद हम इस बारे में कोई बात नहीं करेंगे और ना ही आप घर में किसी को मेरी कसम के बारे में बताओगे ।

माही बुआ को कभी ये बात पता नहीं लगनी चाहिए वरना उन्हें बहुत दुख होगा । "

काम्या: ठीक है बेटा मैं कभी किसी को नहीं बताउंगी ।

माही जैसे ही ये सब सुनती हैं उसका दिल रों पड़ता है और उसकी आंखों से पानी निकलने लगता हैं , और वो रोते हुए तेजी से अपने उपर बने कमरे में चली जाती हैं और कमरा अंदर से बंद कर लेती हैं ।

माही के आंसू आज रुक ही नहीं रहे थे , है भगवान ये सब क्या हो रहा है मेरी वजह से , आखिर मुझे क्यों सबके दुख का कारण बनाते हो बार बार ! मेरी ज़िन्दगी में खुशी ना हो तो ना सही लेकिन समर की खुशी क्यों मेरी वजह से बर्बाद होगी।

कहां जाऊं मैं, क्या करू , कुछ समझ नहीं आ रहा है ।

और ऐसा बोलते हुए जोर जोर से रोने लगती हैं ।

 
उधर करण बाजार से वापिस आ गया था और राम्या भी किचन का काम करके वापिस हॉल में आ जाती हैं । जैसे ही राम्या और कारण आते हैं तो समर और काम्या दोनो एक दम नॉर्मल नजर आते हैं जैसे अभी वहां कुछ हुए ही नहीं था।

तभी करण चाई की गुज़ारिश करता हैं और राम्या एक दम से बोलती हैं कि माही बुआ से अच्छी चाई कोई नहीं बनाता ।

करण: लेकिन माही हैं कहां , जा देख राम्या कहीं अपने रूम में तो नहीं हैं , बुलाकर ला उसे।

और इतना सुनते ही राम्या उपर आती हैं और माही के गेट के बाहर आवाज लगाती हैं : बुआ चलिए आपको नीचे पापा बुला रहे हैं , ।

माही जैसे ही ये सुनती हैं वो पूरी हिम्मत करके अपने आंसू को रोकती हैं और अपना चेहरा साफ करती हैं और गेट खोलकर उसके साथ नीचे आ जाती हैं ।

करण उसे देखते हुए ': आइए हमारे घर के मशहूर रसोइया , जो सबसे अच्छी चाई बनाती हैं सबके लिए चाई लेकर आए" ।

ये सुनते ही राम्या जोर जर से हसने लगती हैं और ना चाहते हुए भी समर, काम्या और माही के होंठो पर एक फीकी सी मुस्कान आ जाती हैं ।

माही चाई बनाकर ले आती हैं और सभी साथ में चाई का लुत्फ लेते हैं और फिर सभी सोने ले लिए अपने कमरे में चले जाते हैं ।

माही , समर और राम्या का कमरा उपर था जबकि करण और काम्या नीचे सोते थे।

माही जैसे ही अपने कमरे में घुसती हैं फिर से उसका मन उदास हो जाता है और वो समर के बारे में सोचने लगती हैं कि समर उससे कितना प्यार करता हैं और ऐसा सोचते सोचते वो गहरी सोच में डूब जाती हैं । उधर समर भी सोच में ही डूबा हुए था लेकिन उस खुशी थी कि अब उसकी बुआ को ज़िन्दगी भर कोई परेशानी नहीं होगी और वो आराम से उसका ध्यान रखेगा । वहीं दूसरे कमरे में राम्या आराम से सो गई थी जबकि नींद समर और माही दोनो की आंखो से कोसो दूर थी ।

नीचे जैसे ही करण और काम्या कमरे के अंदर जाते है करण हमेशा की तरह उसे बांहों में भर लेता है और बेड पर ले जाता है , लेकिन आज काम्या ने उसके गले में अपनी बांहे नहीं डाली थी जैसे रोज डालती थी।

करण: क्या हुआ मेरी जान , कुछ उदास लग रही हो ?

काम्या उसे चाह कर भी कुछ नहीं बता सकती थी इसलिए बहाना बना देती हैं कि मेरी तबीयत ठीक नहीं हैं ।

करण प्यार से उसके चेहरे को चूम लेता है और : क्या हुआ है मेरी जान को। कुछ तो बताओ हमे भी "

काम्या : ऐसे ही बस तबीयत ठीक नहीं है , मन ठीक नहीं है।

करण: ओए होए मेरी जान , मन तो मैं ठीक कर देता हूं उसकी तुम चिंता मत करो " ।

और ऐसा बोलकर उसके उपर लेट जाता है और उसके होंठो पर अपने लिप्स रख देता है और चूसने लगता है । काम्या ज्यादा सपोर्ट नहीं करती लेकिन करण नीचे आते हुए अपने दोनो हाथ उसके बूब्स पर रखकर दबा देता है जिससे काम्या अंदर तक हिल जाती हैं और उसे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करती हैं लेकिन तभी करण उसकी सलवार के अन्दर हाथ डालते हुए उसकी चूत मुट्ठी में भरकर दबा देता है और फिर एक उंगली अंदर घुसा देता है । जैसे ही उंगली अंदर घुसती हैं काम्या से मुंह से एक कामुक आह निकल जाती हैं और वो जोश में आकर अपनी बांहे उसके गले में डाल देती हैं । काम्या का आज मन सच में ठीक नहीं था लेकिन मन अपनी जगह और चूत अपनी जगह । वैसे भी चूत उसके शरीर का सबसे सवेंदंशील हिस्सा हैं जहां पर हाथ लगते ही वो कमजोर पड़ जाती हैं और आज भी ये ही हुआ। चूत पर हाथ लगते ही माही, समर, उसकी कसम सब को भूल जाती हैं और करण के रंग में रंग जाती हैं ।

करण जोश में आते हुए : हाय मेरी जान। लगता है मन ठीक हो गया है और ऐसे बोलते हुए उसकी चूची को दबा देता और दूसरे हाथ से उसकी चूत में उंगली करता रहता है । काम्या हाथ आगे बढाकर उसका लन्ड पड़क लेती हैं और उसे दबाने लगती हैं । करण एक झटके के साथ उसके सारे कपड़े निकाल कर उसे नंगी कर देता हैं और और खुद भी नंगा हो जाता है और उसकी चूचियों को चूसते हुए उसकी चूत पर लन्ड रगड़ने लगता हैं जिससे काम्या का शरीर उपर नीचे होने लगता है ।चूत पर लन्ड की रगड़ उससे बर्दाश्त नहीं होती और वो अपनी करण उपर उठाकर लन्ड अन्दर लेने की कोशिश करती हैं तो करण अपने लन्ड का एक जोरदार धक्का उसकी चूत पर मार देता है और लन्ड एक ही झटके में पूरा जड़ तक घुसा देता है । जैसे ही लन्ड अंदर घुसता हैं तो काम्या की आह निकल जाती हैं ,

काम्या : मेरी जान , आह उफ्फ मार डाला , कितनी बार कहा है कि धीरे धीरे घुसाया करी शुरू में। " दर्द होता है बहुत " ।

करण लन्ड को उपर बाहर खींचता हैं और फिर से ताकत लगाकर अंदर पूरा डाल देता है और काम्या की फिर से आह निकल जाती हैं , ।

करण अपने धक्कों कि स्पीड बढ़ा देता हैं और काम्या भी नीचे से अपनी गांड़ उठाकर उसका साथ देती हैं।

काम्या: कितना मजा आ रहा है मेरी जान , चोदो और अंदर तक चोदो , फाड़ दो मेरी चूत आज" ।

करण : उफ्फ तेरी चूत कितनी टाइट हैं मेरी जान , हर बार लगता हैं जैसे पहली बार घुसा रहा हूं ,"

काम्या : आपका लन्ड पूरी बाहर देता है हाय उफ्फ करते रहो, फाड़ दो पूरी दी। "

तभी करण उसे घोड़ी बनाकर देता है जिससे उसकी चूत उभर कर सामने आ जाती हैं और करण अपने लन्ड को उसकी चूत के छेद पर सेट करता हैं और कचकचा कर एक ही धक्के में फिर से पूरा घुसा देता है । धक्का इतना तेज था कि काम्या आगे गिरने को होती हैं जिसे करण थम लेता है । काम्या: है भगवान , आस सी सी ऑफ ओह , मेरी जान कितना मजा दे रही है मुझे, उफ्फ और चोदो बस मैं जाने वाली हूं।

करण और तेजी से उसे चोदने लगता है , पूरे कमरे में फ़च फ़च की आवाज गूंज रही थी , धक्के इतने तेज पर रहे थे कि पूरा बेड हिल रहा था । फिर करण के धक्कों में एक तूफानी तेजी आ जाती हैं और वो कस कस धक्के लगाने लगता हैं तभी काम्या नीचे अपनी चूत को पीछे जोर से लाती हैं और लन्ड को अंदर घुसा कर सिसकी लेती हुई झड़ जाती हैं ।

काम्या : उफ्फ हाय मैं गई।

और उसकी चूत से पानी छूट जाता है , वहीं करण भी अपने लन्ड को पूरा बाहर निकालता है और पूरी ताकत से आखिरी धक्का उसकी चूत में लगा देता हैं और वीर्य की बौछार कर देता हैं जिससे काम्या की जलती हुई चूत ठंडी पड़ जाती हैं , और करण भी उसकी कमर पर गिर जाता है । इस जोरदार चुदाई के बाद करण सो जाता है जबकि काम्या को अब फिर से समर की फिकर हो रही थी।

उधर जैसे जैसे रात गुजरती जा रही थी माही की आंखो से नींद उड़ती जा रही थी । वो शायद अपने आपको दुनिया में सबसे सुखी समझ रही थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था तो वो सब कुछ किस्मत के सहारे छोड़े देती हैं और भारी मन के साथ सोने को कोशिश करती हैं ।

अगले दिन सुबह राम्या हमेशा की तरह जल्दी उठ जाती हैं और समर का हॉल मैं इंतजार करती हैं ताकि दोनों साथ में दौड़ने जाए।

 
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