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Incest बदनसीब रण्डी

फुलवा ने देखा कि दूध का ग्लास अनछुआ पड़ा था। प्रिया का घूंघट उठाया गया था। प्रिया की फैली लिपस्टिक और फूले हुए होंठ बता रहे थे कि यहां तक कोई तकलीफ नहीं हुई थी। प्रिया अपने घुटनों पर सर रखकर सिसक रही थी।

चिराग, “प्रिया!! मां आ गई है!”

प्रिया और सिसकने लगी तो फुलवा ने चिराग के कंधे पर चाटा मारा।

फुलवा, “बेवकूफ मर्द! एक काम करने को कहा था और वह भी नहीं किया! लौड़े के अलावा कभी कुछ सोचा है? बेचारी बच्ची को पहले डरा दिया और अब मुंह फुलाए खड़े हो! हटो!!”

फुलवा की बात से पति पत्नी चौंक गए। फुलवा ने प्रिया को गले लगाया।

फुलवा, “क्या उसके कीड़े से डर गई?”

प्रिया ने अपने सर को हिलाकर हां कहते हुए, “सब ने कहा कि पहली बार दर्द होता है। मां हर रात रोया करती थी। मैं जानती हूं कि चिराग अच्छा है पर कीड़ा काटेगा!!”

फुलवा, “मेरे बापू ने मुझे जहां बेचा वह आदमी मेरी कुंवारी चूत की नीलामी करता था। एक बार चुधवाने के बाद झिल्ली फट जाती है पर उसे तो पैसे कमाने थे। तो वह अगली सुबह मेरी झिल्ली सील देता।”

प्रिया अपना डर भूल कर, “आप को हर रात दर्द होता?”

फुलवा, “मर्द उसकी का तो पैसा देते! पर उन्हें सिर्फ कुंवारी को चोदना नहीं था, उन्हें कुंवारी को फतह करना था। तो मुझे झड़ने, मज़ा आने के लिए मुझे खास दवा छुपाकर खिलाई जाती। ऐसी दवा जिस से औरत का दर्द गायब हो कर उसका मज़ा कई गुना बढ़ जाए! यह दवा अगर मर्द ले तो उसका लौड़ा कई घंटों तक खड़ा रहेगा!”

प्रिया चुपके से, “आप को पता है उस दवा का नाम?”

फुलवा, “पता है? मैने उसे दूध में मिलाकर, इस गधे को मिलकर पीने को कहा था! पर इसने क्या किया? तुम्हें डरा दिया! (प्रिया के कान में) मर्द!! इन्हें सिर्फ एक काम सूझता और करने को आता है!”

प्रिया हंस पड़ी और फुलवा ने उसे दूध का ग्लास दिया।

फुलवा, “मेरी बात न मानने की सजा के तौर पर यह दूध चिराग को नहीं मिलेगा! अब उसकी बीवी उसे रात भर पुकारेगी और उसे बिना दवा के अपनी बीवी को शांत करना होगा!”

चिराग चौंक गया और डरी हुई प्रिया पुरा दूध गटागट पी गई।

प्रिया गहरी सांस लेकर, “मैं तयार हूं!”

फुलवा, “जल्दबाजी नहीं करते! चिराग, तुम सिर्फ प्रिया के खुले हिस्से छू और चूम सकते हो। कुछ और किया तो याद रखना!”

चिराग ने प्रिया की दूसरी तरफ से बैठते हुए उसके हाथ को अपने हाथ में लिया। प्रिया की उंगलियों को चूमते हुए चिराग ने प्रिया की हथेली को चाटते हुए चूमा। प्रिया के हाथों से आती मेहंदी की महक उसे किसी भी खुशबू से ज्यादा उत्तेजित कर रही थी।

प्रिया की सांस तेज़ होने लगी और उसकी आह निकल गई।

फुलवा ने चिराग को घूंघट पूरी तरह उतार कर चूमने की इजाजत दी।

चिराग ने प्रिया के सर से घूंघट उठाया और प्रिया शरमा गई। चिराग ने प्रिया के गाल चूमते हुए धीरे से अपने होंठों को प्रिया के होंठों पर लगाया और प्रिया पिघलने लगी। प्रिया को चूमते हुए चिराग के हाथ ने प्रिया के रसीले मम्मे को ब्लाउज के ऊपर से दबाया तो प्रिया कुछ डर गई। प्रिया ने कुछ कहने से पहले चिराग चीख पड़ा।

फुलवा, “जो खुला है वहीं छूना है! कहीं और छू लिया तो तेरे गोटे दुबारा मरोड़ दूंगी!!”

प्रिया को फुलवा की बात गलत लगी पर साथ ही उसे फुलवा के सहारे पर विश्वास हुआ! फुलवा ने चिराग के गोटे छोड़े तो वह दुबारा प्रिया के गालों को चूमने और कानों में उत्तेजक बातें बोल कर चूमने लगा। प्रिया की सांस फूलने लगी और वह अनजाने में चिराग का कुर्ता पकड़ कर उसे अपने पास खींचने लगी।

फुलवा प्रिया के दूसरे कान में, “क्या तुम चिराग का कुर्ता उतारना चाहती हो? (प्रिया ने सर हिलाकर हां कहा) तुम्हारा चिराग के बदन पर हक़ है! जो चाहे कर लो!”

प्रिया की आंखों में डर के साथ कोई नशा मिला हुआ था। प्रिया ने चिराग का कुर्ता उतार दिया तो फुलवा ने प्रिया को चिराग से दूर किया।

फुलवा, “खेल के नियम एक से होते हैं! तुम्हें पूरा दूध मिला है पर तुम्हें अपने आप पर काबू रखते हुए सिर्फ खुले हिस्से पर प्यार करना है!”

प्रिया चिराग की बाहों में लिपट गई और उसे चूमते हुए उसकी गर्दन पर चूमने लगा।

चिराग ने आह भरी तो सबको पता चला कि प्रिया के दांत चिराग के गले पर लग गए थे। फुलवा ने प्रिया को शाबाशी दी और चिराग को नशे में चूर प्रिया को संभालने को कहा। कुछ ही पलों में दोनों भड़के जवान बदन एक दूसरे के लिए तड़प उठे और फुलवा ने चिराग को प्रिया का ब्लाउज खोलने की इजाज़त दी।

प्रिया शरमा गई पर चिराग को ऐसी शरमाती जवानी की आदत नहीं थी। चिराग ने अपनी दुल्हन के खुले कंधे पर चूमते हुए उसकी खुलती पीठ पर अपनी उंगलियों को हल्के से फेरा। प्रिया उत्तेजना वश सिहर उठी और आह भरते हुए चिराग की बाहों में समा गई।

फुलवा प्रिया के कान में, “क्या तुम उसे जीतने दोगी? तुम आहें भरती रही और वह तुम्हें तड़पाए? उसका पजामा उतार दो!”

नशे में धुत दुल्हन ने दूल्हे के पजामे के नाडे को खींचा तो गांठ बैठ गई। नशे की ताकत से दुल्हन ने जोर का झटका दिया और नाड़ा ही टूट गया। चिराग को धक्का देकर बिस्तर में लिटाकर प्रिया ने उसका पजामा उतार दिया। प्रिया बिना कुछ बताए अपने पति की खुली टांगों और जांघों को चूमने लगी। प्रिया ने अपनी मदहोशी में चिराग के कच्छे को छूते हुए उसके फूले हुए अंग को टटोलने की कोशिश की तो फुलवा ने उसका कान पाकड़ कर उसे दूर करते हुए उसे बेड पर लिटा दिया।

फुलवा, “बदन जल रहा है? (प्रिया: हां!!) लहंगे में आग लगी है? (प्रिया: हां!!) चिराग इसका लहंगा उतार!”

चिराग बड़ा कामिना था! उसने प्रिया की खुली नाभी को चूमते हुए उसे तड़पाते हुए उसका नाड़ा अपने दांतों में पकड़कर धीरे धीरे खींचा। नाड़ा खुला तो प्रिया ने खुद अपनी कमर उठाकर अपने लहंगे को उतारने की सहूलियत दी।

सफेद bridal lingerie में वासना में जलती जवानी किसी भी मर्द को पागल कर दे। चिराग तो उसका पति था! चिराग अपनी पत्नी की खुली टांगों को फैलाकर चूमते हुए टांगों के जोड़ में भीगी हुई सफेद lace की पट्टी को सूंघता उत्तेजना से फटने की कगार पर था।

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उत्तेजना से पगलाती हुई प्रिया ने अपने पति को ऊपर खींचने की कोशिश करते हुए उसका बनियान खींच लिया। चिराग ने अपना बनियान प्रिया को दे दिया जो उसने तुरंत एक ओर फेंक दिया।

फुलवा, “चिराग! अपनी बीवी के मम्मे देखना चाहेगा?”

चिराग प्रिया को चूमते हुए ऊपर बढ़ा और प्रिया शरमा गई। प्रिया चिराग की बाहों में समा गई और चिराग ने चुपके से अपनी बीवी के ब्रा का हुक खोला। अपनी बीवी के कानों में उसकी तारीफ करते हुए चिराग ने चुपके से उसकी ब्रा को निकाल कर फेंक दिया।

चिराग के सीने के खुर्तरे बालों पर प्रिया की उभरी उत्तेजित लाल चूचीयां छू कर रगड़ गईं और प्रिया की आह निकल गई। चिराग बड़ा कमिना था! उसने अपनी बीवी की नंगी चूचियों को अपने सीने के बालों से हर सांस के साथ रगड़ते हुए चिढ़ाया।

धीरे धीरे नीचे सरकते हुए चिराग ने अपनी बीवी की खिलती जवानी को प्यार से देखा। उसकी बीवी की जवानी को देखता वह पहला मर्द था। चिराग के अंदर से जानवर दहाड़ा की वही इस कमसिन जवानी का इकलौता मर्द होगा!

चिराग ने अपनी दुल्हन की चुचियों को चूमने के बजाय पहले उसके हर सांस के साथ उछलते मम्मों को हल्के से दबाते हुए चूमा और बड़े धीरज के साथ उन्हें प्यार किया। जब प्रिया बेसब्री में अपने पैर मारने लगी तब जाकर चिराग ने प्रिया की रसीली लाल बेरियों को अपनी जीभ से चाट कर चूमते हुए चूसना शुरू किया।

फुलवा का बदन अपने बेटे की करामात देखते हुए जल रहा था और उसके मन में अतीत का एक चेहरा उसके साथ यही प्यार करना याद दिला रहा था।

प्रिया तड़पकर, “चिराग!! करो!! करो!!”

फुलवा, “क्या करो?”

प्रिया सिसक उठी, “कुछ भी!! यह आग सही नहीं जाती!!”

फुलवा, “तो इसके इलाज चिराग ने अब भी छुपाया हुआ है! जाओ, उसे खींच कर बाहर निकालो!”

प्रिया ने चिराग को बेड पर लिटा कर उसके कच्छे को उतार दिया। चिराग का 7 इंच लम्बा 3इंच मोटा कीड़ा सर उठाकर खड़ा हो गया। प्रिया ने मर्द का कीड़ा इतने करीब से पहली बार देखा था।

फुलवा प्रिया के कान में फुसफुसाकर, “उसे प्यार से सहलाओ! अगर दोस्ती हो गई तो काटेगा नही!”

प्रिया ने डरते हुए चिराग के लौड़े को एक उंगली से किसी अनजान कुत्ते को सहलाने जैसे सहलाया। प्रिया की कांपती उंगलियों के सहलाने से चिराग तड़प उठा। चिराग ने अपनी आह दबाई पर कीड़ा चौंक उठा।

फुलवा ने प्रिया का हाथ पकड़ कर उसके हाथ में अपने बेटे का लौड़ा थमा दिया। प्रिया अपनी हथेली में भरे इस गरम धड़कते हुए अंग को छू कर महसूस करने लगी। फुलवा ने अपने हाथ में प्रिया का हाथ पकड़ कर अपने बेटे का लौड़ा हिलाया तो चिराग ने दर्द भरी आह भरते हुए प्रिया को पुकारा।

प्रिया को अचानक एक अनोखी ताकत का एहसास हुआ और वह खुद से चिराग का लौड़ा हिलाने लगी। फुलवा के कहने पर प्रिया ने कीड़े के मुंह को पहले चूमा और फिर चाटते हुए चूसकर तसल्ली कर ली की कीड़े के कोई दांत नहीं हैं। प्रिया को यह तसल्ली करते हुए बड़ा मज़ा आ रहा था क्योंकि चिराग उसकी हर हरकत पर तड़पकर उसे पुकारता।

चिराग फट कर प्रिया को अपना पानी पिलाने से बस आधे मिनट की दूरी पर था जब फुलवा ने प्रिया को रुक ने का आदेश दे कर बेड पर लेटने को कहा। चिराग ने विरोध किया तो फुलवा ने उसे चुनाव करने का मौका दिया।

“तू अपना पानी उड़ा या फिर इसका पानी पी जा!! क्या करेगा?”

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चिराग के लबों पर शिकारी वाली मुस्कान छा गई। चिराग ने प्रिया को पीठ पर लिटाते हुए उसके मम्मों को चूमते हुए नीचे सरक कर प्रिया की लगभग पारदर्शी भीगी हुई पैंटी को चूमते हुए उसकी कमर में से उतारना शुरू किया।

प्रिया की आंखों में डर की छटा आने लगी तो फुलवा ने अपना गाउन उड़ाकर प्रिया को अपने खुले सीने से लगाया। प्रिया ने सिसकते हुए अपनी मां की बाहों में समाकर उसे कस कर पकड़ा पर प्रिया के बदन ने उसकी कमर को ऊपर उठा कर चिराग को उसकी मन मर्जी करने दी।

चिराग ने प्रिया के पैरों को फैला कर ऊपर उठाया और प्रिया ने फुलवा को कस कर पकड़ा।

प्रिया, “मां!!…” कर चौंक गई जब चिराग ने उसकी डबरा बनाती जवानी के ऊपरी घास के हिस्से को चूमा।

महिला मंडल ने मिलकर तय किया था कि प्रिया की अनछुई जवानी के लिए चिराग ने सराहनीय संयम दिखाया था तो उसे अनछुआ पाना चिराग का हक़ बनता था। प्रिया के मना करने और शरमाने के बाद भी उसकी निचली झाड़ी को छांट कर महीन रेशमी घास बनाया गया था।

चिराग अब पागल सांड की तरह उसी घास को चूमता चाटता प्रिया को पागल कर रहा था। जब प्रिया को लगा की उस से और सहा नहीं जायेगा और इस दर्द से कीड़े का काटना बेहतर होगा तब चिराग नीचे सरका। प्रिया की चीख निकल गई जब चिराग की जीभ के छूने भर से प्रिया की चूत के ऊपर के दाने में बिजली दौड़ गई। प्रिया का बदन अकड़ा और उसकी चूत में से पानी बाहर निकल आया।

चिराग ने अपनी मां को देखा पर उसने अपने सर को हिलाकर मना किया। चिराग ने अपनी दुल्हन की कुंवारी चूत की पंखुड़ियों को चाट कर चूमने लगा और प्रिया पागलों की तरह अपना सिर हिलाकर रोने लगी। चिराग से अब रहा नहीं जा रहा था पर वह अपनी मां के इशारे के लिए रुका हुआ था।

चिराग ने अपने दाएं अंगूठे से प्रिया की जवानी के फूले गुलाबी मोती को सहलाते हुए अपनी जीभ से चाटते हुए अपनी दुल्हन की कामाग्नि के स्त्रोत को सहलाना शुरू किया। प्रिया की चीखें चरम पर पहुंची जब चिराग की जीभ ने उसकी जवानी के परदे को चाटा।

फुलवा अपनी बेटी के बालों को सहला कर उसे अपनी चूची खिला रही थी। प्रिया की सिसकती चीखें फुलवा के भरे हुए मम्मे में गूंज कर फुलवा की एक महीने से भूखी चूत को गीला कर रही थीं।

प्रिया बेचारी उत्तेजना के नशे में धुत होकर तड़पती रही। प्रिया की कोरी गर्मी ने उसे ऐसे जलाया की जल्द ही उसका झड़ना तेज और जल्द होने लगा। जैसे प्रिया के स्खलन की तीव्रता बढ़ी वैसे ही उन के बीच का अंतराल कम होते गया।

आखिर में वह समय भी आ ही गया जब प्रिया के मुंह से अपनी मां की चूची फिसल गई और वह तड़पती अकड़ती बेसुध होकर लगातार झड़ने लगी। प्रिया की चूत में से यौन रसों का फव्वारा फूट पड़ा जिस में चिराग बड़ी मुश्किल से बच पाया।

फुलवा ने अपना सर हिलाकर हां कहा और चिराग ने अपना फौलादी औजार आगे बढ़ाया। चिराग के फूले हुए सुपाड़े ने उसकी दुल्हन की यौन पंखुड़ियों को फैलाया और अपने लिए जगह बनाई। प्रिया की चूत में आधा सुपाड़ा समा गया और वह एक मासूम आह भरते हुए बेसुध पड़ी रही।

फुलवा ने इशारे से चिराग को दौड़ लगाने से रोका और उसे प्रिया के ऊपर आने को कहा। चिराग ने अपने सुपाड़े से प्रिया की झिल्ली को सहलाते हुए अपने बदन से प्रिया की कमसिन जवानी को ढक दिया। चिराग के बदन की गर्मी महसूस कर बेसुध प्रिया मासूमियत में हल्के से मुस्कुराई। चिराग ने अपना वजन अपनी कोहनियों पर रखते हुए अपनी प्यारी दुल्हन का चेहरा अपने हाथों में लिया।

चिराग ने अपनी कमर उठाई और अपने सुपाड़े को लगभग बाहर निकाल लिया तो प्रिया ने बेहोशी में अपनी कमर उठाई। चिराग ने मुस्कराकर अपनी कमर को पूरा जोर लगा कर नीचे दबाया।

प्रिया चीख पड़ी, “मां!!…”

प्रिया ने अपने पति का मुस्कुराता चेहरा देखा। प्रिया की सबसे खास जगह से निकला तेज दर्द लहरों की तरह धीरे धीरे उतरने भी लगा था। प्रिया ने अपना मुंह अपने प्रेमी के गले और कंधे के जोड़ में छुपाया और अपनी दाहिनी हथेली से मां का हाथ कस कर पकड़ा।

चिराग बिना हिले प्रिया की कोरी जवानी को अपने प्रेमी से पहचान बनाने दे रहा था। चिराग को प्रिया की कमर उठने का एहसास हुआ तो उसने प्रिया के चेहरे को अपने गले में से बाहर निकालते हुए उसकी आंखों में देखा।

चिराग प्यार से, “अब दर्द कम हो गया?”

प्रिया मासूमियत से, “हो गया?”

चिराग हंसकर, “नहीं मेरी जान! अभी तो मज़ा शुरू हुआ है! अगर तुम्हारा दर्द कम हो गया हो तो हम मज़ा कर सकते हैं!”

प्रिया ने मुड़कर फुलवा को देखते हुए, “कीड़ा काटेगा!!…”

फुलवा हंसकर, “नहीं मेरी बच्ची!! कीड़ा तो तुम्हारा दोस्त है! और उसके तो दांत भी नहीं है! अब बस सोचो की तुम चिराग से कितना प्यार करती हो और उसे कितना खुश करना चाहती हो।”

प्रिया चिराग की आंखों में देख कर, “मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं! मैं आ…”

चिराग ने अपनी कमर पीछे ली और प्रिया की आह निकलने पर भी सुपाड़े तक बाहर निकल कर ही रुका।

चिराग, “मेरी आंखों में देखो जानू!! क्या मैं तुम्हें चोट पहुंचाऊंगा?”

प्रिया, “नहीं!!!…

ई!!…

ई!!…

आ!!…

आह!!…”

प्रिया की उंगलियों ने चिराग की पीठ में गड़ते हुए अपने प्रेमी पर कब्जा किया। जख्मी हो कर चिराग को दोहरा एहसास हो रहा था। कच्ची जवानी में चूसा जाता लौड़ा और पीठ में घुसते तेज़ नाखून!

चिराग ने अपनी दुल्हन को अपनी पत्नी बनाने में वक्त जाया करना ठीक नहीं समझा और लंबे तेज़ झटके देते हुए अपनी प्रेमिका को लूटने लगा। प्रिया चिराग के लौड़े से अपनी खुफिया जगह में से बनते और उठते दर्द जैसे अनोखे एहसास को समझ नहीं पा रही थी।

प्रिया ने कल सोच रखा था कि अगर उसे दर्द हुआ तो ही वह रोएगी पर बाकी सबने कहा वैसे मजा आया तो मजे ले कर हंसेगी! प्रिया को पटा ही नहीं चल रहा था कि अगर उसे मजा आ रहा था तो वह रो क्यों रही थी। प्रिया की आंखों में से आंसू बह रहे थे और वह चिराग को अपने घुटने उठाकर, नाखून गड़ाकर अपने ऊपर खींचते हुए रो कर चूमने की कोशिश कर रही थी।

चिराग इस कुंवारी लड़की के चेहरे से दुल्हन का श्रृंगार उतर कर मादक जवानी को अपनाती पत्नी का रूप धारण कर लेना देखते हुए समझ रहा था की लोग कुंवारियों के लिए जंग क्यों लड़ा करते थे। यह जवानी उसकी थी, सिर्फ उसकी! अगर कोई इसे चिराग ने लेना तो दूर बांटने के बारे में भी सोचता तो चिराग उसे… चिराग के अंदर से दहाड़ता जानवर जोर से गुर्राया और उसके लिए यही सही जवाब था।

चिराग उत्तेजना से झड़ने से एक सांस की दूरी पर था जब उसने अपने लौड़े को अपनी दुल्हन की कोख की ओर पेल दिया था। पर अब अपनी पत्नी के बदलते रूप देखते हुए चिराग को नई ताकत मिल गई थी। चिराग अपने पूरे लौड़े को जड़ से सुपाड़े तक घुमाता अपनी बीवी की पहली आहें चख रहा था। प्रिया अब भी उत्तेजना से चूर दर्द भुलाकर रोते और चीखते हुए झड़ने लगी।

चिराग का लौड़ा गरम रसों से भिगो कर निचोड़ लिया गया। चिराग के संयम का बांध टूटा और वह जानवर की तरह गुर्राते हुए अपनी पत्नी से लिपटकर उसकी कोख में अपने गरम बीज बोने लगा।

कुछ पल में दोनों जैसे कई जिंदगियां एक साथ जी गए।

चिराग, “प्रिया, तुम ठीक हो ना?”

प्रिया चुपके से चिराग के कान में, “फिर से?…”

चिराग मुस्कुराकर अपनी पत्नी को चूमते हुए, “मैंने तो बॉटल में से जिन्न निकाल दिया!”

प्रिया ने शर्माकर चिराग के गले में अपना मुंह छुपाया और गुस्से में वहां हल्के से काट लिया।

चिराग गुर्राकर, “मुझे काटेगी!! रुक तुझे अपने कीड़े से कटवाता हूं!”

कीड़ा प्रिया को अंदर से काटने लगा और प्रिया ने अपनी टांगों को उठाकर अपनी एड़ियों से चिराग की कमर को कस कर पकड़ा। चिराग और प्रिया की जवानी की लड़ाई से चुपके से दूर होते हुए फुलवा कमरे में से बाहर निकल गई।

फुलवा का बदन जवानी की आग में जल रहा था पर उसकी आंखों में खुशी के आंसू थे। आज वह सिर्फ अपने बेटे के लिए नहीं बल्कि अपनी बेटी के लिए भी मां थी। सिर्फ मां!!

फुलवा वहीं सोफे पर लेट कर रोने लगी। आज वह सही मायनों में अपनी पुरानी जिंदगी से आज़ाद हो गई थी।........

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सुबह 7 बजे सुहागरात के कमरे का दरवाजा खुला और एक आंख से शर्माकर बाहर देखा। हॉल में सन्नाटा देख कर मर्द के कुर्ते में ढकी कमसिन जवानी ने फुलवा के कमरे में रखे अपने कपड़ों के लिए दौड़ लगाई।

प्रिया फुलवा के कमरे में दाखिल हुई तो फुलवा, साफ़िया, काम्या और मोहिनी ने तालियां बजाईं और मानव शाह ने सीटियां बजाकर प्रिया का स्वागत किया।

प्रिया शर्माकर फुलवा की बाहों में समाकर शिकायत करते हुए, “मां!!…”

फुलवा, “अरे मेरी बच्ची, तू शर्माती क्यों है? नई दुल्हन को चिढाना तो बहुत पुरानी रस्म है!”

मानव, “जब मैने कहा था कि हमारे साथ तुम्हारी चाल बिगड़ सकती है, मैं इसी बिगड़ी चाल की बात कर रहा था!”

फुलवा, “बात से याद आया! तुमने तो कहा था कि अगर तुम्हें किसने कीड़ा लेने को मजबूर किया तो तुम उसे मार दोगी। मेरा बेटा जिंदा है ना?”

प्रिया को अब कुछ हिम्मत आ गई थी, तो प्रिया ने मुस्कुराकर शर्म से लाल होकर,

“अधमरा छोड़ दिया तो चलेगा?”

सबने तालियां बजाकर प्रिया को बधाई दी और वह अपने चेहरे को अपनी हथेलियों में छुपाकर अपने पुराने बेड में बैठ गई। हंसी मजाक में कुछ देर बिताकर सुबह की चाय फुलवा ले आई और प्रिया को उसे चिराग को देने को कहा।

प्रिया ने चिराग के कमरे में चाय ले जाने के बाद काफी देर तक आहें भरी, चीखी और रोई। आधे घंटे बाद जब दोनों बाहर आए तो प्रिया की हालत साफ बता रही थी कि चाय बेहद ठंडी हो गई थी।

अब की बार सबने चिराग को चिढाना शुरू किया और प्रिया अपनी फुलवा मां के बगल में बैठ कर मुस्कुराती रही।

मानव, “तो चिराग! अगर यही हालत रोज सुबह नहीं चाहते तो तुम्हें कहीं हनीमून पर जाना चाहिए! कहां जाने का तय किया है?”

चिराग सोचते हुए, “ मैंने मॉरीशस या बाली जाने का सोचा था पर अभी तक प्रिया का पासपोर्ट बना नहीं है! सोच रहा हूं यहीं कहीं नजदीक जाएं!”

मानव, “देखो, मैं वैसे किसी को शादी का तोहफा देने के खिलाफ हूं! (साफ़िया ने अपनी आंखें घुमाकर मानव का मजाक उड़ाया) पर मेरे पहचान का आदमी आज गोवा जा रहा है। अगर तुम चाहो तो उसके साथ जा सकते हो! 5 दिन बाद वह तुम दोनों को वापस आते हुए ले आएगा!”

साफ़िया, “ प्रिया, हां बोलो! मानव शाह जैसा कंजूस जो भी दे वह दोनों हाथों से पकड़ लो! मेरी शादी में इसने मुझे तुलसी के पौधे को गमले में डाल कर दिया था। आज तक का वह सबसे बेहतरीन तोहफा निकला!”

मानव, “हुंह!! उसे तुम ही लाई थी! मैं उसे क्यों संभालता?”

साफ़िया ने मानव का हाथ पकड़ कर शुक्रिया अदा किया तो मानव ने बात बदलते हुए चिराग से उसका जवाब पूछा। चिराग ने गोवा में पहुंचकर अच्छा रिजॉर्ट ढूंढने का सोच कर हां कहा।

प्रिया खुशी से उछलते हुए, “आप के दोस्त यहां कब आएंगे? मां गोवा जाते हुए कितना वक्त लगेगा? क्या पहनूं?”

मानव शाह ने हंसकर जवाब दिया, “मेरी गाड़ी तुम्हें मेरे दोस्त के पास पहुंचाएगी। गोवा तो यूं पलक झपकते पहुंच जाओगे। सबसे जरूरी बात, गोवा में कपड़े कम से कम पहनना!”

प्रिया शरमा कर अपनी बैग भरने भागी और मानव शाह ने फोन पर बात कर सारे इंतजाम कर दिए। सुबह 11 बजे चिराग और प्रिया फुलवा से विदा लेकर मानव शाह की गाड़ी में बैठे तो ड्राइवर बिना कुछ बताए उनकी मंजिल की ओर बढ़ा।

प्रिया, “भैय्या, हम किसके घर जा रहे हैं? उनके पास कौनसी गाड़ी है?”

ड्राइवर पीछे के आईने में देख कर मुस्कुराते हुए, “वो साहब का घर किसी को नहीं पता! हम हवाईअड्डे पर जा रहे हैं!”

चिराग, “लेकिन यह रास्ता तो…”

जल्द ही गाड़ी जुहू की छोटी हवाई पट्टी पर पहुंची। हवाई पट्टी के एक कोने में एक लंबा नुकीला हवाई जहाज खड़ा था जिसके दरवाजे में एक आदमी था। ड्राइवर ने नए जोड़े को हवाई जहाज तक लाया और आदमी ने दोनों को अंदर लिया।

उस छोटे हवाई जहाज से तीर जैसे उड़ते हुए पलक झपकते गोवा के समुंदर किनारे की हवाई पट्टी पर दोनों को उतारा। इस से पहले कि चिराग आगे की मंज़िल का सोचता एक बूढ़े आदमी ने दोनों को एक तेज़ छोटी नाव में बिठाया और समुंदर के अंदर एक छोटे से टापू पर पहुंचाया।

बूढ़ा, “मेरा नाम जूलियस D’Souza है और मैं इस खास रिजॉर्ट का केयरटेकर हूं। यह टापू पूरी तरह किसी भी तरह की नजर से दूर है। यहां एक स्पेशल फोन है जो मुझे आप के पास कभी भी बुला सकता है। मैं हर सुबह 8 बजे नाश्ता, दोपहर 2 बजे खाना और रात 8 बजे डिनर लेकर आऊंगा। मैं जानता हूं कि आप नए दूल्हा दुल्हन हो तो पहले boat से हॉर्न बजाऊंगा! दोपहर का खाना लगा दिया है। शाम को मिलते हैं! God bless you!!”

जूलियस के जाने के बाद प्रिया ने गोल चक्कर लगाया और चीख पड़ी।

प्रिया, “ये तो बाली से भी बेहतर है! क्या तुम्हें इसका पता था?”

चिराग, “नहीं! यह एक बहुत खास रिजॉर्ट होगा जिसकी एक रात की कीमत भी पूछने लायक नहीं होगी!”

प्रिया ने अपने पैरों में से जूते उतारे और भागने लगी।

चिराग, “हम एक टापू पर हैं! कहां जा रही हो?”

प्रिया (अपना टॉप उतार कर फेंकते हुए), “पकड़ो तो जानो!”

चिराग के लंबे पैरों ने प्रिया का पीछा करते हुए उसे टापू के दूसरी ओर पहुंचते हुए पकड़ लिया। चिराग ने अपनी खिलखिलाती बीवी को बिकिनी टॉप और शॉर्ट्स में भागते हुए पकड़ा तो दोनों संगमरमर जैसे सफेद रेत में गिर गए। दोनों में बच्चों जैसी कुश्ती शुरू हो गई और कुछ ही पलों में दोनों नीले समंदर के खारे पानी में भीग गए।

अपनी मासूम बीवी की भीगी जुल्फों को दूर करते हुए चिराग का दिल (और लौड़ा) भर आया। चिराग ने प्रिया के भीगे होठों को चूमते हुए उसकी आहें चखी। दोनों एक दूसरे से लिपटकर बिना बोले एक दूसरे से प्यार का इज़हार करने लगे।

प्रिया ने अपने प्यार से लिपटते हुए अपनी एड़ियों से चिराग की कमर को अपने ऊपर खींच लिया। चिराग भी भूखा होकर प्रिया को चूमते हुए उसके गालों को चूमता और उत्तेजित करता रहा।

जल्द ही प्रिया और नही सह पाई और चिराग के बदन से कपड़े खींचने लगी। चिराग ने अपने कपड़े उड़ाते हुए नंगा होकर प्रिया को देखा। प्रिया हवस भरी आंखों से उत्तेजित हो कर दोपहर की धूप में चिराग का बदन देख रही थी।

चिराग ने प्रिया को इशारा किया तो प्रिया इठलाते हुए खड़ी हो गई। प्रिया ने चिराग की ओर पीठ करके पहले अपने पैरों को थोड़ा फैलाया। प्रिया ने पीछे मुड़कर अपने आशिक को देखते हुए अपनी शॉर्ट्स का बटन खोल कर अपनी कमर को हिलाते हुए उस शॉर्ट्स को उतारना शुरू किया। भीगी हुई शॉर्ट्स में से धीरे धीरे बेपर्दा होती लाल बिकिनी पैंटी को देख चिराग का दिल जोरों से धड़कता रहा।

प्रिया ने अपने प्रेमी को ललचाते हुए अपने गले के पीछे बंधी बिकिनी टॉप की गांठ खोली और फिर अपनी खुलती पीठ दिखाते हुए अपने बिकिनी टॉप की आखरी गांठ खोल दी। बिकिनी टॉप नीचे पानी में गिर गया तो प्रिया ने उसे उठाकर चिराग की ओर उड़ाया।

चिराग ने अपनी बीवी के टॉप को पकड़ लिए और किसी कुंवारे लड़के की तरह उसे सूंघने लगा। प्रिया ने हंसकर अपने हाथ से अपने भरे हुए मम्मे छुपाते हुए चिराग की ओर बढ़ कर उसे ललचाया। चिराग का धड़कता लौड़ा धूप में समुंदर के पानी से चमकता प्रिया को बुला रहा था।

प्रिया चिराग के गोद में बैठ गई जिस से उसके मम्मे चिराग के सीने पर दब गए और चिराग का फनफनाया सांप बिकिनी पैंटी पर रगड़ता अपने बिल पर रगड़ने लगा। चिराग ने आह भरी पर प्रिया ने बेरहमी से उसके कान को चूमते हुए अपनी कमर हिलाकर सांप की बिल में जाने से रोके रखा।

प्रिया ने चिराग को ऐसे ही तड़पते हुए अपनी चूत के दाने को तब तक सहलाया जब तक उसके बदन की आग ने बिकिनी पैंटी को लगभग जला न दिया।

प्रिया ने फिर अपनी लंबी उंगलियों से अपनी पैंटी की बीच की पट्टी को किनारे सरकाते हुए सांप के बिल का दरवाजा खोला। फनफनाता सांप झट से अपने बिल के सुकून में समा गया और दोनों प्रेमियों की चीख निकल गई।

प्रिया ने चिराग से लिपटकर अपनी कमर हिलाते हुए अपने प्रेमी को अपना बदन अर्पण कर दिया। प्रिया के बदन पर सूखे खारे पानी से बनता नमक चाटते हुए चिराग उसे साफ कर रहा था जब प्रिया की चूत में से यौन रसों की बौछार ने दोनों के नीचे बहते समुंदर में अपनी जवानी का नमक मिलाया।

चिराग और प्रिया एक दूसरे में खो कर अपने प्यार को खुले समुंदर में बहा रहे थे जब दोनो की जवानी का सैलाब फुट पड़ा। दोनों समुंदर के किनारे पड़े एक दूसरे की बाहों में लिपटे पड़े रहे।

प्रिया, “मुझे नहीं लगता कि मैं दुबारा समुंदर किनारे सिर्फ पैर भिगो कर खुश हो पाऊंगी!”

चिराग, “मानव शाह का मढ में एक घर है। शायद वह उसे बेचने को तयार हो जाएं!”

दूसरी भूख ने दोनों प्रेमियों को घर के अंदर लाया। सैंडविच, कटलेट और ढेर सारा शरबत देख कर प्रिया शरमाई और चिराग हंस पड़ा।

चिराग, “जूलियस अंकल को पता था कि हम गरम खाना नहीं खाने वाले!”

दोनों ने पर भर खाना खाया और समुंदर में खोए पसीने की भरपाई करने के लिए ढेर सारा शरबत भी पिया। जाहिर सी बात थी की खारा पानी और रेत धोने के लिए दोनों नहाने गए और फिर वहीं दुबारा अलग पानी उड़ा कर दुबारा नहाने लगे।

चिराग को दिन में चार बार चोदने की आदत थी जिसके के लिए प्रिया ने मन ही मन अपनी सास/मां को धन्यवाद दिया।

रात को जूलियस अंकल ने boat का हॉर्न बजाकर अपने आने की खबर दी तब तक प्रेमियों ने टापू के हर हिस्से पर अपनी मोहर लगाई थी।

जूलियस अंकल ने दोनों के लिए कैंडल लाइट डिनर लगाते हुए घर की सफाई की और पानी की टंकी भर दी। चिराग ने जूलियस अंकल को किनारे लेकर कुछ पूछा और अंकल ने अपनी मंजूरी दी।

उस रात को प्रिया ने चांद तारों को देखते हुए अपने पति की बाहों में गुजारा। उसे अपनी कोख में फैली गर्मी को महसूस करते हुए लगा की आज उसकी मां उसे देख कर खुश होती। प्रिया के पास उसका प्यार था और जल्द ही परिवार भी होगा।

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सुबह की पहली किरण का स्वागत प्रिया ने अपने पति को चूसकर उठाते हुए किया। जूलियस अंकल नाश्ता लेकर आए तब तक चिराग ने प्रिया को अच्छे से सबक सिखाकर बिना हड्डी की गुड़िया बना दिया था।

जूलियस अंकल ने दोपहर के खाने के बाद पहनने के कपड़े लाए थे। पार्टी ड्रेस देख कर प्रिया चौंक गई।

प्रिया, “हम कहीं जा रहे हैं?”

चिराग मुस्कुराकर, “गोवा के कैसिनो लूटने!!”

जूलियस अंकल ने लाया ड्रेस प्रिया ने जल्दी पहने जिस वजह से चिराग ने उसे उसकी खूबसूरती की तारीफ करते हुए वापस भर दिया। दोपहर 2 बजे जूलियस अंकल के आते हुए दोनों ने जल्दबाजी में अपने कपड़े दोबारा पहने और तयार हो गए।

दोपहर का खाना खाकर तीनों boat में बैठ कर किनारे पहुंच गए। जूलियस अंकल ने अपनी गाड़ी चिराग को दी और enjoy करने का आदेश भी दिया।

चिराग प्रिया को लेकर वहां से सीधे एक कैसिनो पहुंचा और उसने प्रिया को खेल के नियम सिखाते हुए 1000 रुपए दिए।

प्रिया अपनी फोटोग्राफिक मेमोरी के कारण जल्द ही जितने लगी और उसके 1000 2 घंटों में 1 करोड़ रुपए बन गए। चिराग के कहने पर प्रिया ने 1000 रुपए की टिप दी और दोनों वहां से बाहर निकले। प्रिया ने नाचते हुए फिर चिराग को गले लगाया और एक क्लब में जाकर दोनों नाचे।

आधे घंटे बाद प्रिया को अगले कैसिनो जाने का मन हुआ और 2 घंटे बाद वहां से भी 1000 के करोड़ बनाकर दोनों बाहर निकले। सबेरे जब गोवा के आखरी कैसिनो को साफ कर जब दोनों हंसते हुए बाहर निकले तब तक प्रिया 5000 से 4 करोड़ 99 लाख 95 हजार बना चुकी थी।

कैसिनो में से बाहर निकलते ही उन्हें एक पुलिस ऑफिसर ने रोका।

DSP सालसकर, “तुम दोनों बहुत होशियार हो की 1 करोड़ जितने के बाद 1 हजार की टिप देकर कैसिनो के complain से बच गए पर याद रखना तुम्हें दोबारा कैसिनो में आने नहीं दिया जाएगा!”

प्रिया मासूमियत में हंसकर, “हम तो हनीमून पर मजा करने कैसिनो आए थे। वापस जाने की हमें कोई इच्छा नहीं!”

DSP सालसकर, “प्रियाजी, आपके बारे में हमने छानबीन की और आपका कोई अतीत नहीं मिला। पर फोटोग्राफिक मेमोरी अक्सर अनुवांशिक होती है। क्या आप के किसी रिश्तेदार में यह खूबी है?”

प्रिया को अपनी मां याद आई और वह कोई चीज याद रखना चाहे ऐसे उसकी हालत नहीं थी। चिराग ने आगे बढ़कर कहा की प्रिया का अतीत नहीं क्योंकि वह अनाथ है। सालसकर ने दोनों को आइंदा कैसिनो से दूर रहने को कहते हुए उन्हें उनके रिसॉर्ट तक पहुंचाया।

प्रिया ने चिराग को जूलियस अंकल को उठाने से रोका और दोनों ने बाकी रात boat में बैठ कर बिताई। प्रिया का मन डर से भरा हुआ था।

प्रिया चिराग की बाहों में समा कर, “मुझे नहीं लगता कि मेरी मां को फोटोग्राफिक मेमोरी थी। मेरे अब्बू को यकीनन यह नहीं थी। मेरे बाकी रिश्तेदार की मुझे कोई खबर नहीं। अगर मुझे कोई बीमारी हुई तो?”

चिराग, “अगर कल मुझे कुछ हो गया तो क्या तुम मुझे छोड़ दोगी?”

प्रिया गुस्से में, “क्या बकवास है!”

चिराग मुस्कुराकर, “बिलकुल!!”

प्रिया अपने प्यार की बाहों में समा कर अपनी मां की अच्छी यादें याद करने लगी।

3 दिन चिराग की बाहों में बिताकर प्रिया जूलियस अंकल को शुक्रिया अदा कर वापस लौटने के लिए हवाई पट्टी पर पहुंची। मानव शाह के दोस्त ने दोनों को अपने नुकीले तीर में बिठाया और सब लोग वापसी के सफर में लग गए।

प्रिया, “आप मानव शाह को कैसे जानते हो?”

आदमी, “उन्होंने मेरी रिटायरमेंट के बाद मुझे कुछ काम के कॉन्ट्रैक्ट दिए।“

प्रिया, “आप रिटायरमेंट की उम्र के नहीं लगते! आप क्या करते थे?”

आदमी मुस्कुराकर, “मैं एक तरह का पत्रकार था जो वहां की खबर यहां लाने का काम करता था।”

चिराग, “आप हमेशा दस्ताने पहनते हो। जिसका मतलब आप के हाथ पर चोट के निशान हैं। ऐसे लोगों को हवाई जहाज का लाइसेंस नहीं मिलता पर आप के पास है। आप आम पत्रकार नहीं थे! आप वह खबर लाते जिसे लाना मना किया गया था!”

प्रिया, “आप जासूस थे!! James Bond की तरह!”

आदमी, “नहीं। मैं पकड़ा गया और मेरी पहचान खुल गई। अनजाने में किए एक एहसान ने मेरी जान बचाई पर मुझे रिटायर किया गया। अब मैं वही काम मानव शाह के लिए करता हूं और जाहिर सी बात है। (जहाज को छू कर) अच्छी कीमत में करता हूं।”

प्रिया और चिराग जुहू से गाड़ी में बैठे और वापस आने लगे जब प्रिया ने चिराग को बताया,

“मैंने उस आदमी को कैसिनो में कुछ बुरे लोगों के साथ देखा। अब मुझे पता है कि मानव शाह ड्रग्स की तस्करी कैसे रोकता है!”

चिराग, “इसी वजह से उसका नाम पता वह किसी को नहीं बताता। हमारी खामोशी की कीमत उसकी जान है!”

दोनों ने एक और राज़ अपने सीने में दबाया और घर लौटे।

प्रिया ने मानव को हनीमून के लिए शुक्रिया कहने की कोशिश की पर उसने उस रिजॉर्ट को उसका खाली पड़ा कमरा कहकर टाल दिया। चिराग ने प्रिया को बताया की जब वह लगभग 5 करोड़ जीती तब वह भी 5 लाख जीता था पर प्रिया की जीत में उसकी जीत आसानी से छुप गई।

चिराग ने इन पैसों से एक इन्वेस्टमेंट फंड बनाया और वह प्रिया के नाम कर दिया। इस तरह प्रिया कभी भी किसी के पैसों की मोहताज नहीं होगी। प्रिया ने अपने इन्वेस्टमेंट फंड को खुद चलाने का जिम्मा उठाया। मानव शाह ने प्रिया की फोटोग्राफिक मेमोरी का लोहा मानते हुए उसके इन्वेस्टमेंट फंड में अपने 5 करोड़ लगाए।

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दो साल बाद

अब सब जानते थे कि चिराग ही C corp का असली वारिस है तो चिराग पर मरने वाली लड़कियां कम नहीं थीं। जवान, अमीर और होशियार चिराग को उसी के घर में उसी की शादी की दूसरी सालगिरह की पार्टी में ललचाने की वजह भी थी। अंदेशा था कि चिराग ने प्रिया को 6 महीनों से छुआ नहीं था। मर्द ऐसी हालत में अक्सर फिसलते हैं!

पार्टी में चिराग के साथ नाचती लड़की ने उसे खूब रगड़ा पर चिराग की पैनी नजर प्रिया पर थी जो पेस्टन दारूवाला का हाथ पकड़ कर उसका दुखड़ा सुन रही थी। गाना खत्म होते ही चिराग प्रिया के बगल में पहुंचा और प्रिया को वादा करते हुए सुना।

प्रिया, “पेस्टन तुम डरता कैसे? मैं आयेगी डिंपी से मिलने और उसके लिए गिफ्ट भी लाएगी!”

पेस्टन, “डिकरा, हम 30 साल जवान होता तो तुम्हारा चिराग को हरा के तुमको उठाता!”

प्रिया, “come on! आप अभी भी कितना active हैं! डिंपी को रोज आप थकाते हो!”

प्रिया को चिराग के हवाले करते हुए पेस्टन, “इसको संभालो! इसका कीमत तुमको मेरी उमर में पता चलेगा!”

पेस्टन दारूवाला चला गया और चिराग प्रिया को देखता रहा।

चिराग, “उस खडूस दारूवाला पर तुमने क्या जादू किया?”

प्रिया अकड़ते हुए, “पेस्टन की डिंपी पेट से है और वह डिंपी के लिए परेशान है!”

चिराग पेस्टन को देखते हुए, “खडूस बुड्ढा 80 के नीचे नही हो सकता। डिंपी कितनी बूढ़ी होगी!”

प्रिया, “12 साल की।”

चिराग, “क्या!! पेस्टन ने 12 साल की लड़की को पेट से किया है?”

प्रिया मुंह बनाकर, “दिमाग गटर में से बाहर निकालो! डिंपी उसकी पालतू कुत्ति है। और वह बूढ़ी होकर भी पेट से हो गई है इस लिए खास अस्पताल में है।”

चिराग, “मुझे इस से क्या मतलब?”

प्रिया मुस्कुराकर, “वह बूढ़ी कुत्ति और उसके बच्चे पेस्टन के 3000 करोड़ के वारिस हैं। अगर तुम्हें डिंपी की अभी फिकर है तो शायद अगली बार दारूवाला इतना खुसट नहीं होगा!”

चिराग हार कर, “ठीक है! मैं उस डिंपी से मिलने जाऊंगा। उस से खेलूंगा भी।”

प्रिया मुस्कुराकर, “डरो मत! मैं तुम्हारे साथ रहूंगी!”

चिराग का गुस्सा फूट पड़ा।

चिराग, “बिलकुल नहीं! तुम जानवरों के अस्पताल में नहीं जा रही! बस!!”

प्रिया, “मुझसे बेहतर डिंपी को कौन समझ सकता है?”

चिराग, “वही तो! अगर डिंपी के पेट में दारूवाला का वारिस है तो तुम्हारे पेट में हमारा वारिस है। तुम जानवरों के हस्पताल में नहीं जा रही!”

सब की आंखें प्रिया के 8 महीने फूले हुए पेट से चिराग के लाल चेहरे पर गई।

प्रिया, “मां!!… चिराग मुझे डांट रहा है!”

फुलवा ने प्रिया की तरफदारी करते हुए चिराग को डांटना शुरू किया।

फुलवा, “डिंपी एक अच्छी पालतू कुत्ति है? वह एक अच्छे अस्पताल में है? अगर मैं अस्पताल में रही तो क्या तुम प्रिया को मुझसे मिलने से रुकोगे?”

चिराग, “हां!… हां!… और हां!!… जब प्रिया अस्पताल में जायेगी तब वह हमारे बच्चे के लिए जायेगी! तब तक मैं उसके साथ कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहता!”

दारूवाला चिराग से, “तुम इस प्यारी बच्ची को मेरी बेबी से मिलने से रोकेगा? मेरे खिलाफ जायेगा?”

चिराग गहरी सांस लेकर, “दारूवाला जी, मैं आप की भावनाओं की कदर करता हूं पर एक पति, एक बाप की हैसियत से मैं प्रिया को अभी डिंपी से मिलने नहीं दे सकता!”

दारूवाला अपना सर हिलाकर चला गया और सब लोगों ने पूरा वाकिया न देखने का नाटक किया।

काम्या के पति मोहन गांधी ने चिराग के कंधे पर हाथ रखकर उसे एक तरफ लाया।

मोहन गांधी, “दारूवाला Alpha prime male है। ऐसा alpha male जो बाकी सब alpha का बॉस है। उस से अपने परिवार की हिफाजत के लिए आज तक सिर्फ 2 alpha male लड़े हैं।”

चिराग थक कर, “क्या हुआ उनका?”

मोहन गांधी मुस्कुराकर, “मानव शाह को तो तुम जानते हो। अब देखना है कि तुम्हारे साथ क्या होता है!”

चिराग अचरज में, “Thank you?”

फुलवा और प्रिया को देख हर औरत को ऐसी सास बहू की चाहत होती और चिराग की आंखों को प्रिया पर देख कर है औरत को प्रिया होने की चाहत होती।

आज की पार्टी में किसी वजह से छोटेलाल और मानव शाह नहीं आ पाए थे। पार्टी ख़त्म होने के बाद जब सब घर लौटे तो फुलवा अपनी बहु को अपनी गोद में सर रख कर आराम करने देते हुए प्लान बना रही थी कि कैसे दोनों डिंपी से मिलने जाएं। चिराग उन्हें देख कर सोच रहा था की दो alpha prime females को एक मर्द भला कैसे काबू करे।

फोन की घंटी ने सबको चौकाया और चिराग ने फोन उठाया।

मानव फोन पर, “चिराग!! वक्त नहीं है! प्रिया को ढूंढने वाले तुम्हारे दरवाजे पर कभी भी पहुंची जायेंगे! मैं और छोटे उन्हें रोक नहीं सकते! प्रिया को अभी अंदर छुपा! अभी!!”

दरवाजे पर दस्तक हुई और सबकी नजरें दरवाजे पर रह गई। चिराग ने प्रिया को बेडरूम में बंद कर दिया और अपने फोन से उसे इस कमरे की बातें सुनाने लगा ताकि वह बाहर ना आए।

फुलवा ने शांत चेहरे से दरवाजा खोला और बाहर खड़े आदमी को देख कर उसका मुंह खुला रह गया।

आदमी ठंडे स्वर में, “अंदर आ सकता हूं?”

फुलवा ने उसे अंदर आने दिया और कुर्सी की ओर इशारा किया।

आदमी, “आप के पास ज़िन नाम की लड़की है। मुझे वह चाहिए!”

चिराग, “मैं ऐसी किसी लड़की को नहीं जानता।”

आदमी, “मैं किसी भी इंसान से मिलने से पहले उसकी सारी जानकारी इक्कठा करता हूं। फुलवा कोई विदेश में रही औरत नहीं! वह एक रण्डी और डकैत थी! और तुम चिराग! तुम्हें एक हिजड़े ने पाला है! में तुम दोनों को चुटकियों में बरबाद कर सकता हूं! तुम्हें दोबारा रण्डी और अनाथ बना सकता हूं! या फिर ज़िन को मेरे हवाले कर कई गुना तरक्की के मालिक बनो!”

अगर वह आदमी फुलवा और चिराग को डराना चाहता था तो उसका असर उल्टा हुआ।

फुलवा, “आप से मुझे ज्यादा उम्मीद थी, लाला ठाकुर! आप मुझे रण्डी बना दोगे पर मैं तो वैसे भी जी चुकी हूं। मुझे कोई फरक नही पड़ेगा!”

चिराग, “मैंने अपनी जिंदगी के पहले 18 साल अपनी मां को ढूंढने में बीता दिए। लेकिन अब मैं उस से मिल चुका हूं। अब आगे जो भी हो, मैं अनाथ नहीं हूं!”

लाला ठाकुर, “मैं SP अधिकारी की इज्जत मिटा दूंगा!”

चिराग, “मां, अधिकारी सर ने अपनी सारी दौलत हिजड़ों को मदद करने वाली संस्था को दी। उन्हें मरे अब कई साल हो चुके हैं। अब हमें उनकी सच्चाई सब को बतानी चाहिए! इस से अगली पीढ़ी के बच्चों को प्रेरणा मिलेगी!”

फुलवा ने अपने सर को हिलाकर चिराग की बात मानी तो लाला ठाकुर उनकी आंखों के सामने मानो टूट कर बिखरने लगा।

लाला ठाकुर, “तुम दोनों नहीं जानते की तुम्हारे कितने अच्छे दोस्त हैं। मैं अब बस एक तरीके से ज़िन को हासिल कर सकता हूं। ऐसा तरीका जिसे मैने कभी नहीं आजमाया। सच्चाई से!”

लाला ठाकुर फुलवा की आंखों में देख कर, “तुम गरीब थी। भूख जानती हो। भूख कई तरह की होती है। आम भूख खाने से थमती है। गरीबी की भूख में सिर्फ इतना खाना मिलता है कि उसकी जलन रुकती है। मजबूरी की भूख खाने के लिए पेट को अंदर से खाने लगती है। वहशत की भूख वह होती है जब इंसान जीने के लिए दूसरे इंसान को खा जाए। आखरी होती है मौत की भूख जब इंसान खाना खा नही पता और फिर मर जाता है।”

लाला ठाकुर चिराग को देख कर, “एक और भूख होती है। श्रापित भूख! यह ऐसी वहशी भूख होती है जो महापापियों को मिलती है। जहां इंसान कुछ भी खाए उसकी भूख न मिटती है और न ही वह मरता है। इस श्राप का इलाज है एक खास निवाला। ऐसा निवाला जिसे पाने से पाप मुक्त हो कर वह मर पाए! ज़िन मेरा इलाज वाला निवाला है! उसे मुझे दे दो!!”

मां बेटे के डरे हुए चेहरे देख कर लाला ठाकुर मुस्कुराया।

लाला ठाकुर, “मैं श्रापित हूं। मैं कभी नहीं भूलता। पिंकी मैंने अपना वादा निभाया और तुम्हारे भाइयों को न केवल तुम्हारा पैगाम दिया पर इंसाफ के लिए तुम्हारे पिता का पता भी दिया। 2 महीनों बाद मैं तुम्हें बचाने आया था। पर दो दिन पहले ही तुम्हारे भाई तुम्हें छुड़ा कर ले गए थे। उसके बाद मैंने तुम्हें ढूंढने की कोशिश नहीं की।”

फुलवा रो पड़ी और लाला ठाकुर अपनी कहानी बताने लगा।

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लाला ठाकुर, “मैं स्कूल में था जब एक अनजान आदमी ने मुझे एक्सीडेंट से बचाया। मैं उसे अपने घर ले गया और उसे अपने घर में नौकरी दिलाई। यही मेरा महापाप था!”

फुलवा की आंखों में देखते हुए लाला ठाकुर, “ठीक एक महीने बाद वह मेरी प्रिया दीदी को अगवा कर ले गया। पुलिस ने कहा कि मेरी दीदी अपनी मर्जी से भागी है और रिपोर्ट लेने से इंकार किया। मैने कसम खा ली की मैं प्रिया दीदी को वापस लाऊंगा।”

चिराग को देखते हुए लाला ठाकुर, “मेरी भूख उस दिन शुरू हुई। मुझे फोटोग्राफिक मेमोरी का श्राप है। मैं कभी कुछ नहीं भूलता। मेरे माता पिता ने मुझे मदद करने से मना किया तो मैने अपना पैसा खुद बनाया। पैसा कोई मायने नहीं रखता अगर तुम अपना निवाला उन पैसों से खरीद ना पाओ।”

फुलवा को देखते हुए, “उम्र के 25 वे साल तक मैं लगभग पूरे देश के हर रंडीखाने को ढूंढ चुका था। शायद उतनी रंडियां चोद चुका था। पर मेरी भूख बस बढ़ रही थी। जहां मुमकिन था मैने लड़कियों को बचाया पर मेरी भूख नहीं थमी। वह मेरा निवाला नहीं थी!”

चिराग को देखते हुए, “तुमने अपना बचपन बिताया अपनी मां को ढूंढने में। मैने अपनी जिंदगी लूटा दी प्रिया दीदी की एक झलक के लिए।”

अधर में नजर लगाए, “30 साल बीत गए। मां बापू मर गए। मेरी भूख न मुझे जीने देती और ना ही मरने देती। ऐसे अधूरे इंसान से कौन शादी करे? पैसे के लिए कई आईं और मैने उन्हें पैसे दे कर भगा दिया पर मेरा दिल कब का मर चुका था। उसे मेरा भूखा पेट खा चुका था!”

कुछ होश में आ कर फुलवा को देखते हुए, “4 साल पहले मुझे एक कॉल आया। डरी हुई आवाज न बताया की मेरी आपा मर चुकी है और अब मैं उसे ढूंढना बंद कर दूं। कॉल बहुत कम वक्त का था पर मैंने उसका पता लगा लिया और अपने गुंडों के साथ पुरानी दिल्ली पहुंचा। वहां मुझे वह दगाबाज मिला जिसने मेरी दीदी को अगवा किया था। मेरे सर पर खून संवार था। मैंने पूछताछ की तो पता चला कि दगाबाज ने पिछले हफ्ते मेरी दीदी की सीढ़ियों से गिराकर मार डाला था।”

लाला ठाकुर के चेहरे पर किसी खूंखार जानवर के भाव थे।

लाला ठाकुर, “दगाबाज ने मुझ से वादा लिया की अगर वह मुझे अपनी दीदी की आखरी निशानी का पता बता दे तो मैं उसे नहीं मारूंगा। भूख बड़ी बेरहम सजा है। मैने वादा किया कि मैं उसे नहीं मारूंगा पर उसके सामने उसे 30 साल से पनाह देने वाले सब को मार डाला।”

फुलवा को देखते हुए, “दगाबाज को मैं जंगल में ले गया और वहां पर उसे एक टीले पर बांध कर छोड़ दिया। अपनी जीत की खुशी मनाते हुए दगाबाज ने बताया की ज़िन को नरबली के लिए बेचा गया है और उसने एक बात छुपाई थी। यही की अब तब ज़िन राज नर्तकी की भेंट चढ़ चुकी होगी। मैंने अपना वादा निभाया और उसे जिंदा छोड़ दिया। मैने भी उसकी तरह एक बात छुपाई थी। यही की जिस टीले पर हाथ पांव बांध कर उसे रखा था वह लाल चिटियों का छत्ता था। कुछ ही पलों में जंगल दगाबाज की चीखों से गूंज उठा जब चीटियां उसे जिंदा खा गई।”

अपने ससुर की दर्दनाक मौत से चिराग को कोई अफसोस नहीं था।

फुलवा को देखते हुए, “मैं राज नर्तकी की हवेली पहुंचा तब दोपहर का वक्त था। हवेली की जगह पर एक खंडहर था। कई सौ लाशों को जंगली जानवर नोच कर खा रहे थे। पता लगाना मुश्किल था कि कौनसी लाश कब मरे हुए इंसान की है! ज़िन जैसे गायब हो गई थी।”

चिराग को देखते हुए, “ मैंने तहकीकात जारी रखी और पता चला कि कुछ लोगों को उनका चोरी हुआ सामान वापस मिल गया है। साथ ही किसी चूतपुर के मुनीम ने राज नर्तकी के जेवरात museum को दान कर दिए थे। लेकिन चूतपुर के मुनीम से कुछ हाथ नहीं आया!”

अपनी आंखें बंद कर लाला ठाकुर, “उस रात मैंने अपनी पिस्तौल में एक गोली भरी, नली को अपने मुंह में लिया और घोड़ा दबाया। पिस्तौल चली, गोली पर चोट लगी पर गोली नहीं चली! मैने कहा था ना, इस श्राप का कोई इलाज नहीं!”

"चार साल नाउम्मीद होकर जीने के बाद पिछले हफ्ते मैं भक्तावर सेठ से मिलने गया जब उसकी बीवी एक पेंटिंग की जगह बदल रही थी। पेंटिंग का नाम राज नर्तकी था और उसके पहने जेवरात मैने लखनऊ के म्यूजियम में देखे थे। कलाकार का नाम प्रिया लिखा था पर भक्तावर ने कोई जवाब नहीं दिया। भक्तावार के पहचान की प्रिया को ढूंढना मुश्किल नहीं था और मैं यहां तक पहुंच गया।”

लाला ठाकुर की आंखें नम हो गई थी और वह अपने घुटनों पर बैठ गया।

लाला ठाकुर गिड़गिड़ाते हुए, “मुझे कोई फरक नहीं पड़ता कि आप लोगों ने प्रिया की निशानी को कैसे रखा है। उसे जिंदा रखने के लिए मैं आप का एहसानमंद हूं। बस ज़िन को एक बार मैं उसके घर ले जाऊं! बस एक बार मैं उसे उसकी मां का हक लौटाऊं तो मेरी जिंदगी भर की तड़प मिट जाए! अपनी भांजी को एक बार देख लूं तो शायद गोली धोखा ना दे!”

लाला ठाकुर पूरी तरह टूट गया था। जब उसके कंधे पर सहानुभूति भरा हाथ रखा गया तो वह रोने लगा।

लाला ठाकुर, “मैं थक गया हूं। दीदी से किया वादा मुझे जीने नहीं देता और यह भूख मुझे मरने नहीं देती! बस एक बार मैं प्रिया दीदी को किसी तरह उसके घर ले जाऊं तो शायद मैं मर पाऊं!!”

प्रिया ने लाला ठाकुर के बगल में बैठ कर, “अम्मी जानती थी कि आप उन्हें ढूंढ रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने मरने के बाद अपनी सहेली उर्फी के जरिए आप को संदेश भिजवाया। उर्फी मौसी कैसी है?”

लाला ठाकुर ने प्रिया का चेहरा अपने हाथों में लेकर, “हमेशा दूसरों के बारे में सोचना अच्छा नहीं होता दीदी! (सिसक कर) अब उर्फी नही रही पर चंदा गल्फ में नौकरी कर काफी अमीर बन कर अपने गांव लौट गई है। तुम नही जानती पर तुम अपनी मां की छवि हो! क्या तुम प्रिया का हक लेकर मुझे आज़ाद करोगी? अपने गांव लौटकर अपनी विरासत संभालोगी?”

प्रिया, “अम्मी हर रक्षा बंधन के दिन एक धागा मेरे हाथ पर बांध कर कहती की एक दिन मेरे मामाजी मुझे मिलेंगे। मुझे यकीन नहीं हो रहा की वह बात सच है! लेकिन मामाजी मैं अभी गांव नहीं आ सकती!”

लाला ठाकुर, “तुम डरना मत! कोई तुम्हें नहीं रोकेगा!! (चिराग को देख कर) इसे कितने में खरीदा था? छोड़ो! कितना चाहते हो? जो चाहे मांग लो! करोड़? 10 करोड़? सौ करोड़? कितना?”

प्रिया खड़ी हो गई और दोबारा बोली,

“मामाजी, मैं कोई गुलाम नहीं, चिराग की बीवी हूं। अब देख रहे हो ना की मैं अभी गांव क्यों नहीं आ सकती?”

लाला ठाकुर प्रिया का खिलता बदन निहारते हुए, “तुम मजबूर गुलाम नहीं हो? इज्जतदार अमीर बहु हो? तुम मां बनने वाली हो? मैं… मैं नाना बनूंगा?”

प्रिया, “फुलवा मां ने मुझे नरबली होने से बचाया, मुझे पढ़ाया, मुझे काबिल बनाया और मुझे अपने प्यार से भी मिलाया! मैं आज ज़िन नहीं प्रिया हूं क्योंकि फुलवा मां मुझे मिली!”

लाला ठाकुर फुलवा के पैरों में गिर गया और रोते हुए बोला,

“मैंने अपनी दीदी को बरबाद होने दिया, तुम्हें रंडीखाने में छोड़ा और ज़िन को भी बचाने में नाकाम रहा पर तुमने न केवल खुद को बचाया पर मेरी दीदी की आखरी निशानी को भी बचाया! उसे अपनी बहु बनाया! उसे सम्मान दिया! मैं नालायक आप का गुलाम रहूंगा!”

फुलवा ने लाला ठाकुर को उठाते हुए, “आप ने मुझे औरत होने का एहसास दिलाया। अगर आप ना होते तो मैं अंदर ही अंदर कब की मर चुकी होती। आप हमेशा मुझे याद रहे क्योंकि आप अकेले थे जिन्होंने मुझे इज्जत दी। मेरे भाइयों ने भी मुझ में एक रण्डी देखी पर आप ने प्यार को तरसती लड़की को पहचाना। आप दुखी न होना। जो हुआ वह बस नसीब की बात थी। सोचो, अगर आप मुझे Peter अंकल से बचा लेते तो ना चिराग पैदा होता और ना ही मैं प्रिया को बचा पाती!”

लाला ठाकुर ने हाथ जोड़कर मां बेटे से उन्हें धमकाने की माफी मांगी और अपनी भांजी से उसे न बचा पाने के लिए भी माफी मांगी। लाला ठाकुर वह राक्षस था जो कुछ मिनटों में अपना अहंकार और गर्व त्याग कर अचानक इंसान बन गया था।

लाला ठाकुर को कमरे में आए आधा घंटा हुआ था जब दोबारा घंटी बजी।

चिराग ने दरवाजा खोलते ही मानव शाह, छोटेलाल और भक्तावर ने अंदर कदम रखा। तीनों दोस्त बातें करने के तय समय बाद उन्हें बचाने आए थे। प्रिया को लाला ठाकुर का हाथ अपने हाथों में लेकर बातें करते हुए देख कर तीनों पीछे मुड़ कर चले गए।

फुलवा ने प्रिया से बात करके तय किया कि लाला ठाकुर हर रोज प्रिया के साथ एक घंटा फुलवा की मौजूदगी में बीता सकता है। प्रिया अपने बच्चे को जन्म देने के 2 महीनों बाद अपने पूरे परिवार समेत अपने मामाजी के साथ अपना गांव देखने जायेगी।

हालांकि चिराग को लाला ठाकुर पर पूरा भरोसा नहीं हुआ था वह बस उसके alpha prime male होने का हिस्सा था। चिराग ने दारूवाला से मदद मांगी और लाला ठाकुर के अतीत को खंगाला।

लाला ठाकुर ने अपने माता पिता से मिली पूरी दौलत को अपनी दीदी के नाम से एक ट्रस्ट में रख कर उसे बढ़ाते हुए C corp के बराबरी का कारोबार बनाया था। यह पूरी दौलत अब वह अपनी भांजी को देने के लिए उतावला था। सास बहू और मामाजी रोज मिलते, बातें करते और चिराग के मना करने के बावजूद डिंपी से भी मिल कर आए।

लाला ठाकुर की अपनी निजी संपत्ति थी जो उसने बड़ी बेरहमी से उन लोगों से छीन कर बनाई थी जो औरतों को देह व्यापार में झोंकना अपना धंधा समझते थे। इस संपत्ति की शुरुवात मासूमों के खून से हुई थी पर अंत दगाबाजों के खून से हुआ था। लाला ठाकुर ने इस दौलत को दुनिया में कई जगह लगाकर बड़े और खतरनाक दोस्त बनाए थे जिन में कई देश शामिल थे।

लाला ठाकुर गुनाहों का मानव शाह था।

फुलवा के जन्मदिन के 7 दिन बाद चिराग को लाला ठाकुर ने जल्दबाजी में अस्पताल बुला लिया। प्रिया को दर्द शुरू हो गया था और दोनों मर्द हॉस्पिटल के गलियारों के चक्कर काटते हुए अगले 11 घंटों में दोस्त बन गए।

प्रिया की चीखें सुनकर दोनों ने तय किया कि अगर चिराग ने प्रिया को दुबारा छूने की कोशिश की तो उसका लौड़ा काट दिया जाए। उनकी बेवकोफियों पर काम्या और काली हंस पड़ी पर मानव और मोहनजी ने हमदर्दी जताई।

डॉक्टर जब फुलवा के साथ चिराग की बेटी को लाए तब चिराग ने प्रिया के बारे में पहले पूछा और लाला ठाकुर ने उसे अपना दामाद मान लिया। प्रिया थकी हुई थी पर अपने बेटी को सीने से लगाए काफी खुश और डरी हुई थी।

सबने प्रिया की तारीफ की और डॉक्टर ने प्रिया को 3 दिन बाद हॉस्पिटल से रिहा करने का वादा किया। सवा महीने बाद छोटी साक्षी अपने माता पिता दादी और नाना के साथ मंदिर गई और दो महीने बाद अपने पहले सफर पर निकली।

गांव में दिवाली जैसी रोशनाई थी कि बरसों के बाद प्रिया लौट रही थी। चिराग और प्रिया अपनी बेटी से साथ प्रिया के घर में कुछ दिन रहे लेकिन दोनों को मुंबई लौटना पड़ा। C corp अब चिराग खुद चला रहा था तो प्रिया अपने मामाजी से मिली फोटोग्राफिक मेमोरी के कारण अपनी इन्वेस्टमेंट फंड के साथ अब धीरे धीरे अपनी विरासत में मिली कंपनी भी संभालने वाली थी।

मामाजी से विदा लेकर चिराग और प्रिया लौटने के लिए गाड़ी में बैठे तो फुलवा ने दोनों के माथे को चूमा और उनके साथ आने से मना कर दिया।

चिराग, “मां, यहां रहकर क्या करोगी? आप के सारे दोस्त रिश्तेदार मुंबई में है!”

फुलवा शर्माकर, “मैं मुंबई आती जाती रहूंगी लेकिन मुझे अपनी जिंदगी का छूटा हुआ एक पड़ाव पूरा करना है। मैं बेटी, प्रेमिका, मां और दादी बन चुकी हूं पर (लाला ठाकुर का हाथ पकड़ कर) मुझे पत्नी बन कर जीना है।”

प्रिया ने चिराग का हाथ पकड़ कर उसे बिना बोले समझाया और दो मर्दों ने आंखों ही आंखों में एक दूसरे को धमकाया। चिराग ने फुलवा से कहा कि वह फोन पर बात करते रहेगा और लाला ठाकुर को तीखी नजर से देखते हुए चला गया।

एक महीने बाद गांव दोबारा रौशनाई से चमक रहा था क्योंकि गांव के ठाकुर ने गांव के मंदिर में शादी कर ली थी। आज फुलवा अपने पहले प्यार को अपना आखरी प्यार बना चुकी थी।

अपनी पोती को गोद में लिए अपने पति, बेटे और बहु को देखते हुए फुलवा मुस्कुराई। फुलवा जानती थी कि वह न कभी बदनसीब थी और न कभी रण्डी। किस्मत ने बस उसे थोडा इंतजार कराया था।

समाप्त
 
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