सब का शॉपिंग लगभग निपट ही गया था. और जो थोड़ा बहुत रह गया था वो अब अगले दिन आ कर दो चार लोग कर लेते.
वैसे समय भी काफ़ी हो गया था.
अभी अब शाम हो गया था और चारो और अंधेरा फैलने लगा था.
सोनम रह रह कर चारो और कुछ ढूँढ रही थी.
कोमल सोनम को इतना बेचैन देखा तो उस से रहा नही गया.
कोमल- क्या बात है दी. आप कुछ परेशान लग रही हो.
सोनम- नही कोमल. कोई बात नही है. आज तो बड़ा मज़ा आया शॉपिंग में.
कोमल- दी, अगर नही बताना चाहती तो कोई बात नही. यू बात तो मत बदलो.
सोनम- यार में काफ़ी देर से भाई को नही देखी हूँ. पता नही कहा है. आज सब उसके पीछे ही लग गये है. सब किसी ना किसी बात पर उसे डाँट देते है.
कोमल- हा दी. में भी देख रही हूँ. भाई आज बहुत उदास था. शायद बाहर होगा वो.
फिर सब समान पॅक करवा कर गाड़ी में रखवा दिया.
ऋतु काउंटर पर जा कर बिल पे कर दी.
फिर सब बाहर आ गये.
अब राघव भी परेशान था की क्या करे. कैसे इन लोगो को बताए.
लल्लू को देखना भी ज़रूरी था.
सोनम अलग परेशान थी जब देखी की बुलेट तो वहाँ खड़ी है लेकिन लल्लू नही है वहाँ.
तभी पास के दुकान वाला आ कर राघव से लल्लू के लिए पूछा.
दुकान वाला - भाई साहब अब आप के भाई कैसे है.
उस दुकान वाले की बात सुन्न कर सब चौक गये.
सोनम तो रोने ही लगी.
सोनम- भैया क्या हुआ भाई को.
दुकान वाला- क्या आप लोगो को पता नही है. वाहह क्या काम किया है उन्होने. बेचारे को थोड़ी चोट भी लग गई लेकिन ऐसा जज़्बा ऐसा कठिन काम सब नही कर सकता. इसके लिए कोई जिगर वाला ही चाहिए.
कैसे है अब वो भाई साहब.
कोमल, सोनम- एक साथ… क्या…..
कोमल को तो सुन्न कर ही हालत खराब होने लगा.. और वही हाल सोनम का भी था.
ऋतु काजल रागिनी शालिनी सब अब परेशान हो गये.
राघव- अब वो ठीक है. अभी हम वही जा रहे है.
फिर जल्दी से सब जैसे तैसे गाड़ी में बैठ कर क्लिनिक की ओर चल पड़े.
इधर वो डॉक्टर लल्लू के सारे कपड़े निकाल कर उसे एग्ज़ॅमिन कर रही थी.
लल्लू को एक साइड बगल में पैर में जंघा में कमर में हाथ पर और सर में चोट आया था. सभी जगह छिल गया था जहा से थोड़ा थोड़ा खून बहा था जो अब सुख गया था.
डॉक्टर डेटोल से उस सभी घोव को साफ कर उस पर दबाई लगा दी.
सर में जहा लगा था वहाँ सॉफ कर दबाई लगा कर पट्टी कर दी.
डॉक्टर - और कहा लगा है चोट.
लल्लू- अभी तो पता ही नही चल रहा है.
डॉक्टर दो तीन सुई भी लगा दी.
डॉक्टर - दर्द थोड़ी देर में ख़त्म हो जायगा. मैने नींद का भी इंजेक्षन लगा दिया है अभी थोड़ी देर सोने के बाद जब उठोगे तो दर्द ख़त्म हो जायगा आप का.
फिर बाते करते करते ही लल्लू सो गया.
डॉक्टर अपने पति से- आज हमारा तो पूरा संसार उजड़ने से इस लड़के ने बचा लिया.
डॉक्टर पति- सही कह रही हो. आज हम लोगो क ग़लती का ख़ाम्याजा ये बेचारा भुगत रहा है. काज़ में इस लड़के का कुछ दर्द बाँट पाता. आज अगर ये लड़का नही होता तो हम जीते जी मर जाते.
डॉक्टर- कितना भयॅबह था वो मंज़र. ये लड़का तो हमारे लिए भगवान बन कर ही आया था. पता नही कैसे हम इसका कर्ज़ उतारेंगे.
डॉक्टर पति- सही कह रही हो. बस तुम इसे जल्द से जल्द पहले जैसा स्वस्थ कर दो.
तब तक लल्लू के फॅमिली भी वहाँ क्लिनिक में आ गये.
राघव गाड़ी से निकलता तब तक कोमल और सोनम निकल कर क्लिनिक में घुस गई भाई भाई करती हुई.
डॉक्टर पति शोर सुन कर बाहर आया.
डॉक्टर पति- जी कहिए. क्यू शोर कर रही है.
सोनम- यहाँ मेरा भाई एडमिट है. हम उसे देखने आए है.
डॉक्टर पति- लेकिन आज क्लिनिक तो बंद है और यहाँ कोई पेसेंट नही है.
तभी पीछे से राघव के साथ बाकी लोग भी आ गये.
राघव को देख कर डॉक्टर का पति समझ गया की ये लोग लल्लू के फेमिली मंबर हैं.
फिर वो सब को वही सोफा और चेर्स पर बैठाया.
राघव- कैसा है अब मेरा भाई.
डॉक्टर पति- अब ठीक है. अभी सो रहा है वो.
फिर हाथ जोड़ कर सब को देखते हुए.
डॉक्टर पति-. आज ये नही होते तो हम अपने एकलौते बेटे को खो देते. ये बेटा हमें शादी के पूरे 10 साल बाद हुआ है. हमारा पूरा संसार आज आप के बेटे ने उजड़ने से बचा लिया.
कोमल- सिर.. क्या हम अपने भाई को देख सकते है.
डॉक्टर पति- में अभी आता हूँ.
फिर डॉक्टर का पति वहाँ से उठ कर अंदर आया.
अंदर डॉक्टर अपने चेयर पर बच्चे को ले कर बैठी हुई थी.
डॉक्टर का पति - इसके फॅमिली वाले आए है. वो इसे देखना चाहते है.
डॉक्टर - हा तो बुला लो ना. देखने दो उन लोगो को. पहले ज़रा एक चादर डाल दो इस पर.
डॉक्टर का पति एक चादर ले कर लल्लू के ऊपर डाल दिया.
चादर डालते ही लल्लू के बदन में पीछे जो टॅटू बना था वो सुनहरे रंग में चमकने लगा.
वो टॅटू जहा जहा चोट लगा था सर को छोड़ कर उन सभी जगह बनने लगा.
सभी जगह वैसे ही सुनहरे रंग में चमक रहा था. थोड़ी देर में ही सारे घाव भर गये.
जैसे लग रहा था की कही चोट ही नही लगा है.
यहाँ तक की सर में जो पट्टी के नीचे घाव था वो भी सही हो गया.
तब तक लल्लू के सभी घर वाले उसे देखने आए.
लल्लू तो अभी सो रहा था.