दादू- राम अपनी बहनों के यहाँ तुम ही चले जाओ. उन दोनो को साथ ही ले कर आना. अब समय नही रहा.
पापा- पापा मैने कॉल कर दिया है दोनो को की तैयारी कर के रहे. में आज ही चला जाउन्गा और कल आ जाउन्गा.
फिर सब दालान पर चले गये.
समय कम और काम ज़्यादा था. सभी रिश्तेदारों के यहाँ ये सूभ समाचार देना था. विवाह का मार्केटिंग करना था और खेती भी देखना था.
अनिल काका, सुनील काका और पापा को बाहर का काम मिला और छोटे काका को खेती का.
पापा को तो दो दिन बुआ को लाने में ही लगना था. वो अपना तैयारी में लग गये.
लल्लू ने आ कर सब को खाने की तैयारी जल्दी करने को बता दिया क्योंकि मार्केट जाना था.
लल्लू अपनी बहनों को भी जा कर बता दिया.
सभी बहने भी मा और काकी लोगो के साथ लग गई जल्दी से खाना तैयार करने में.
खाना हो जाने के बाद पापा तो चले गये दोनो बुआ को लाने. और दोनो बड़े चाचा भी रिश्तेदारों में न्योता देने चले गये.
लल्लू- काकी यहाँ घर पर कौन रहेगा. क्या सब का जाना सही है.
ऋतु- अभी दिन है तो हम सभी जा ही सकते है बेटा. हा अगर रात होता तो फिर यहाँ किसी को रहना पड़ता.
लल्लू- फिर सब तैयार हो जाइए.
…………………
बाज़ार जाने के नाम पर तो सभी लड़कियो में जैसे पंख लग गये थे. दौड़ दौड़ कर सही काम जल्दी जल्दी निपटा कर घुस गये तैयार होने में सभी.
लल्लू और राघव बाहर बैठे हुए थे.
राघव- यार भाई क्या तुम लड़की को देखे हो.
लल्लू- नही भैया. क्यू क्या हुआ.
राघव- नही हुआ कुछ नही. में ऐसे ही पूछ रहा हूँ.
लल्लू- मुझे तो कुछ पता ही नही था. कल मुझे पता चला है.
राघव- चल हम लोग भी तैयार हो जाते है.
लल्लू- अभी तो दो घंटा लगेगा इन लोगो को भैया. हमें तैयार हमें में 5 मिनिट्स लगेगा.
राघव हँसने लगा.
लल्लू- भैया आप खुश तो हो ना इस शादी से.
राघव- हा भाई. अब उम्र तो हो ही गया था. अब तुम्हारे जैसे सब से छोटा तो हूँ नही. घर में सब से बड़ा बेटा हूँ तो अगर में अभी शादी करने से मना भी करूँगा तो कोई नही मानेगे.
लल्लू- हा ये बात तो है भैया. सब से खुश तो मुझे दादू दिख रहे थे कल.
राघव- सही कह रहे हो. वैसे तो सब ही बहुत खुश है लेकिन दादू के चेहरे की ख़ुसी तो देखते ही बन रही थी कल.
लल्लू हँसने लगा.
ऋतु- तुम दोनो को नही जाना है क्या बाज़ार.
ऋतु जो बाहर निकली थी वो दोनो को हँसते देख कर बोली.
राघव- जा रहा हूँ मा. लल्लू कह रहा है की आप सब को 2 घंटा से पहले होगा नही तो इसी लिए हम यहाँ बैठे है.
लल्लू- ब..भ..भैया. म.म.मैने कब बोला. ये तो..आप ही कह रहे थे.
ऋतु गुस्से से लल्लू को देख रही थी.
लल्लू घबराता हुआ गर्दन झुका लिया.
ऋतु फिर कमरे में चली गई.
लल्लू- भैया आप क्यू मार खिलाना चाहते हो. मैने क्या बिगाड़ा है आप का. मुझ छोटे से मासूम बच्चे पर आप को थोड़ा सा भी तरस नही आता.
राघव- बहुत प्यार आता है भाई. अब चल जल्दी से हम भी तैयार हो जाते है. नही तो अभी अब किसी ने देख लिया ऐसे बैठे तो पक्का मार पड़ेगी.
फिर दोनो वहाँ से उठ कर कमरे में चले गये.
लल्लू का समान तो काजल के कमरे में था और राघव का ऊपर फर्स्ट फ्लोर पर था अपना सेपरेट कमरा.
राघव ऊपर चला गया अपने कमरे में तैयार होने.
लल्लू काजल वाले रूम में चला गया.
जैसे ही रूम का दरवाजा खोला लल्लू वही जम गया.
काजल अभी सिर्फ़ एक कच्छी में खड़ी थी.
काजल दरवाजा खुलते ही घबरा गई और बेड पर रखे साड़ी से खुद को ढकने लगी.
लल्लू को देख कर उसे थोड़ा चैन मिला.
काजल- मुआ ऐसे कोई करता है क्या. डरा ही दिया था अभी.
लल्लू- मैने क्या किया है. सब मेरे पर ही गुस्सा रहते है.
लल्लू पैर पटकता हुआ कमरे से बाहर आ कर फिर से खाट पर बैठ गया.
पूरे 2 घंटे बाद सब बाहर निकल आने लगे.
कोमल- भाई तुम क्या ऐसे ही जाओगे.
लल्लू- गुस्से में; मा तैयार हो रही है. मेरा कपड़ा उसी रूम में है.
पीछे से आती रोमा- तो जा ना जल्दी तैयार हो जा. चाची का अब हो गया होगा.
लल्लू- दीदी आप ज़रा मेरा दो बेग होंगे वो ला दो ना.
रोमा- में क्यू लाउ. जाना है तो जा नही जाना तो मत जा.
लल्लू वही बैठा था तब तक राघव भी आ गया.
राघव- अरे तू अभी तक यही बैठा है.
लल्लू- क्या मेरा जाना ज़रूरी है भैया. यहाँ घर में भी तो कोई रहना चाहिए. आप सब को कार से ले कर चले जाओ ना. में यहाँ घर पर रहता हूँ. वैसे भी दादू भी यहाँ अकेले ही है.
राघव- क्या बात है. क्या हुआ. अभी तो तू बहुत खुश था. फिर तेरा चेहरा क्यू लटक गया है.
लल्लू- कौन कहता है में खुश नही हूँ. में बहुत खुश हूँ.
कोमल- हा तुम कितने खुश हो वो तो तुम्हरे चेहरे से ही पता चल रहा है. पूरे बारह बजे है.
लल्लू- लेट हो गया ना आप को भी मेरे कारण से इस लिए मुझे लगा……
सोनम- इतना मत सोचा कर तू.
लल्लू बुलेट की स्पीड बढ़ाता हुआ बोला.
लल्लू- दीदी वो लोग कहा मिलेंगे हमें.
सोनम- मैने कोमल और रोमा को समझा दिया है. बाज़ार शुरू होने से पहले छोटी पुलिया है वही ये लोग रुकेंगे.
स्पीड बढ़ने से सोनम डर कर लल्लू से चिपक कर बैठ गई.
लल्लू को सोनम की कठोर उभार अपने पीठ पर रगड़ता हुआ बहुत अच्छा लग रहा था.
लल्लू- दीदी आज आप बहुत सुंदर लग रही हो.
लल्लू सोनम को बाइक क साइड मिरर मे देखता बोला.
सोनम उस में देखी तो दोनो की नज़रे मिल गई.
सोनम शरमा कर मुस्कुराती हुई लल्लू से और कस कर चिपकते हुए उसके कंधे पर पीछे अपना मूह छुपा ली.
थोड़ी देर में सोनम अपना चेहरा निकाल कर मिरर में फिर से देखी तो लल्लू वही देख रहा था.
लल्लू की तो आनंद की कोई सीमा नही थी.
सोनम मिरर में देखी तो लल्लू उसे ही देखता पाया.
सोनम का चेहरा शरम से लाल हो गया टमाटर की तरह.
लल्लू सोनम को देख कर मुस्कुरा पड़ा.
सोनम अब उधर देखी ही नही वो दूसरी साइड देखी तो लल्लू को उस तरफ के मिरर में खुद को देखता पाई.
सोनम एक मुक्का प्यार से लल्लू को मार दी पीठ पर और फिर उसकी पीठ में चेहरा छुपा कर दोनो हाथो से उसके सीने पर बाँध ली.
लल्लू को असीम आनंद का अहसास हो रहा था.
दोनो यू ही लूका च्छूपी का खेल खेलते हुए वहाँ पुलिया के पास आ गये.
वहाँ पर ये लोग थे ही नही.
लल्लू वहाँ रुक गया.
लल्लू- दी ये लोग तो है नही यहाँ. अब क्या आगे देखे.
सोनम- हा भाई आगे ही देखेंगे ना क्योंकि पीछे होने का तो कोई चान्स नही है उन लोगो का.
लल्लू फिर बाइक आगे बढ़ा दिया.
बाज़ार क्रे अंदर आ कर दोनो उन लोगो को देखने लगे.
लल्लू- दीदी आप इस ओर देखना में उस ओर देखता हूँ.
बाज़ार रोड के दोनो साइड था.
दोनो उन लोगो को ढूँढते हुए आगे बढ़ रहे थे.
तभी एक शोरुम के सामने इनका स्कॉर्पियो खड़ी दिखी.
दोनो शोरुम के सामने बाइक ले कर खड़ा कर दिए.
सभी लोग वही खड़े थे.
ऋतु- आ गये तुम. हो गया तुझे नाटक किए हुए. और सोनम तू भी इसके साथ रह कर इसके जैसा ही बनती जा रही है.
अब चल जल्दी से.. लेट हो रहा है.
लल्लू-( मन में.) बहनचोद ये हो क्या रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे में सब का पालतू कुत्ता बन गया हूँ. जब मन किया सब आ कर प्यार करते है फिर जब मन किया दुथकार देते है.
लल्लू सब के पीछे पीछे शोरुम में चला गया.
सब अपनी खरीदारी में लग गये.
वहाँ कुछ ज़्यादा उन लोगो को पसंद नही आया तो सब वहाँ से बाहर आ गये.
सोनम- मा में फॉर्म सॅब्मिट करने आई थी ना तो हम एक शोरुम में गये थे वहाँ सब कपड़े बहुत अच्छे है. वही चलते है.
ऋतु- तो इतनी देर से बताई क्यू नही. ऊपर से उस नाटक बाज के चक्कर में पड़ी थी. तुम्हे पता था तो हमारे साथ आना था ना.
लल्लू सब से पीछे खड़ा सब सुनता हुआ मुस्कुरा रहा था.
सोनम लल्लू के पास आ कर उसका हाथ पकड़ बाहर आ गई.
सोनम- भाई हमें उस दुकान ले चलो ना. यहाँ कुछ ख़ास कपड़े थे ही नही.
लल्लू चुप चाप बाइक स्टार्ट कर उस शोरुम की ओर चल पड़ा.
सब का शॉपिंग लगभग निपट ही गया था. और जो थोड़ा बहुत रह गया था वो अब अगले दिन आ कर दो चार लोग कर लेते.
वैसे समय भी काफ़ी हो गया था.
अभी अब शाम हो गया था और चारो और अंधेरा फैलने लगा था.
सोनम रह रह कर चारो और कुछ ढूँढ रही थी.
कोमल सोनम को इतना बेचैन देखा तो उस से रहा नही गया.
कोमल- क्या बात है दी. आप कुछ परेशान लग रही हो.
सोनम- नही कोमल. कोई बात नही है. आज तो बड़ा मज़ा आया शॉपिंग में.
कोमल- दी, अगर नही बताना चाहती तो कोई बात नही. यू बात तो मत बदलो.
सोनम- यार में काफ़ी देर से भाई को नही देखी हूँ. पता नही कहा है. आज सब उसके पीछे ही लग गये है. सब किसी ना किसी बात पर उसे डाँट देते है.
कोमल- हा दी. में भी देख रही हूँ. भाई आज बहुत उदास था. शायद बाहर होगा वो.
फिर सब समान पॅक करवा कर गाड़ी में रखवा दिया.
ऋतु काउंटर पर जा कर बिल पे कर दी.
फिर सब बाहर आ गये.
अब राघव भी परेशान था की क्या करे. कैसे इन लोगो को बताए.
लल्लू को देखना भी ज़रूरी था.
सोनम अलग परेशान थी जब देखी की बुलेट तो वहाँ खड़ी है लेकिन लल्लू नही है वहाँ.
तभी पास के दुकान वाला आ कर राघव से लल्लू के लिए पूछा.
दुकान वाला - भाई साहब अब आप के भाई कैसे है.
उस दुकान वाले की बात सुन्न कर सब चौक गये.
सोनम तो रोने ही लगी.
सोनम- भैया क्या हुआ भाई को.
दुकान वाला- क्या आप लोगो को पता नही है. वाहह क्या काम किया है उन्होने. बेचारे को थोड़ी चोट भी लग गई लेकिन ऐसा जज़्बा ऐसा कठिन काम सब नही कर सकता. इसके लिए कोई जिगर वाला ही चाहिए.
कैसे है अब वो भाई साहब.
कोमल, सोनम- एक साथ… क्या…..
कोमल को तो सुन्न कर ही हालत खराब होने लगा.. और वही हाल सोनम का भी था.
ऋतु काजल रागिनी शालिनी सब अब परेशान हो गये.
राघव- अब वो ठीक है. अभी हम वही जा रहे है.
फिर जल्दी से सब जैसे तैसे गाड़ी में बैठ कर क्लिनिक की ओर चल पड़े.
इधर वो डॉक्टर लल्लू के सारे कपड़े निकाल कर उसे एग्ज़ॅमिन कर रही थी.
लल्लू को एक साइड बगल में पैर में जंघा में कमर में हाथ पर और सर में चोट आया था. सभी जगह छिल गया था जहा से थोड़ा थोड़ा खून बहा था जो अब सुख गया था.
डॉक्टर डेटोल से उस सभी घोव को साफ कर उस पर दबाई लगा दी.
सर में जहा लगा था वहाँ सॉफ कर दबाई लगा कर पट्टी कर दी.
डॉक्टर - और कहा लगा है चोट.
लल्लू- अभी तो पता ही नही चल रहा है.
डॉक्टर दो तीन सुई भी लगा दी.
डॉक्टर - दर्द थोड़ी देर में ख़त्म हो जायगा. मैने नींद का भी इंजेक्षन लगा दिया है अभी थोड़ी देर सोने के बाद जब उठोगे तो दर्द ख़त्म हो जायगा आप का.
फिर बाते करते करते ही लल्लू सो गया.
डॉक्टर अपने पति से- आज हमारा तो पूरा संसार उजड़ने से इस लड़के ने बचा लिया.
डॉक्टर पति- सही कह रही हो. आज हम लोगो क ग़लती का ख़ाम्याजा ये बेचारा भुगत रहा है. काज़ में इस लड़के का कुछ दर्द बाँट पाता. आज अगर ये लड़का नही होता तो हम जीते जी मर जाते.
डॉक्टर- कितना भयॅबह था वो मंज़र. ये लड़का तो हमारे लिए भगवान बन कर ही आया था. पता नही कैसे हम इसका कर्ज़ उतारेंगे.
डॉक्टर पति- सही कह रही हो. बस तुम इसे जल्द से जल्द पहले जैसा स्वस्थ कर दो.
तब तक लल्लू के फॅमिली भी वहाँ क्लिनिक में आ गये.
राघव गाड़ी से निकलता तब तक कोमल और सोनम निकल कर क्लिनिक में घुस गई भाई भाई करती हुई.
डॉक्टर पति शोर सुन कर बाहर आया.
डॉक्टर पति- जी कहिए. क्यू शोर कर रही है.
सोनम- यहाँ मेरा भाई एडमिट है. हम उसे देखने आए है.
डॉक्टर पति- लेकिन आज क्लिनिक तो बंद है और यहाँ कोई पेसेंट नही है.
तभी पीछे से राघव के साथ बाकी लोग भी आ गये.
राघव को देख कर डॉक्टर का पति समझ गया की ये लोग लल्लू के फेमिली मंबर हैं.
फिर वो सब को वही सोफा और चेर्स पर बैठाया.
राघव- कैसा है अब मेरा भाई.
डॉक्टर पति- अब ठीक है. अभी सो रहा है वो.
फिर हाथ जोड़ कर सब को देखते हुए.
डॉक्टर पति-. आज ये नही होते तो हम अपने एकलौते बेटे को खो देते. ये बेटा हमें शादी के पूरे 10 साल बाद हुआ है. हमारा पूरा संसार आज आप के बेटे ने उजड़ने से बचा लिया.
कोमल- सिर.. क्या हम अपने भाई को देख सकते है.
डॉक्टर पति- में अभी आता हूँ.
फिर डॉक्टर का पति वहाँ से उठ कर अंदर आया.
अंदर डॉक्टर अपने चेयर पर बच्चे को ले कर बैठी हुई थी.
डॉक्टर का पति - इसके फॅमिली वाले आए है. वो इसे देखना चाहते है.
डॉक्टर - हा तो बुला लो ना. देखने दो उन लोगो को. पहले ज़रा एक चादर डाल दो इस पर.
डॉक्टर का पति एक चादर ले कर लल्लू के ऊपर डाल दिया.
चादर डालते ही लल्लू के बदन में पीछे जो टॅटू बना था वो सुनहरे रंग में चमकने लगा.
वो टॅटू जहा जहा चोट लगा था सर को छोड़ कर उन सभी जगह बनने लगा.
सभी जगह वैसे ही सुनहरे रंग में चमक रहा था. थोड़ी देर में ही सारे घाव भर गये.
जैसे लग रहा था की कही चोट ही नही लगा है.
यहाँ तक की सर में जो पट्टी के नीचे घाव था वो भी सही हो गया.