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Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

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अपडेट 51

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और कुछ ही धक्को के बाद मेरा लंड मोना की चूत मे अपना पानी निकालने लगा और मेरी बौछारो को मोना की चूत सह नही पाई और वो झरते हुए मेरे पानी से अपना पानी मिलने लगी और मैं वैसे ही उसके उपर ढेर हो गया तो मोना ने मुझे बाहों मे कस लिया और दीदी मेरी लरजती गान्ड पर हाथ फिराने लगी.. ........

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अब आगे..

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कुछ टाइम सुसताने के बाद मैं और मोना दोनो ही बाथरूम से अपने आपको सॉफ करके आ गये थे जबकि दीदी वैसे ही नंगी बैठी हमारा वेट कर रही थी अभी भी हम तीनो ही नंगे थे

"चल निशा अब तू भी अपनी चूत को खुजली मिटा ले अपने भाई के लंड से, मेरी तो सारी खुजली ही ख़तम कर दी इसने चूत के साथ साथ गान्ड को भी नही छोड़ा " मोना बोली

"पहले इसके हथियार को देख कैसे मुरझाया हुआ है लगता है जैसे तूने इसे पूरी तरह निचोड़ लिया है" दीदी मेरे थके हुए लंड को देख कर बोली जो नीचे मुन्डी किए हुए लटक रहा था

"अरे इसको खड़ा करना कौन सा बड़ा काम है सिर्फ़ दो मिनिट का खेल है, चल ऐसा करते है की अब मैं सोनू को उपर से मज़ा देती हूँ और तू नीचे से इसके लंड को मुँह मे लेकर चूस फिर देख ये कैसे खड़ा होता है" मोना बोली

"ना बाबा ना मुँह मे लेना मुझे अच्छा नही लगता" दीदी मुँह बनाते हुए बोली

"यार निशा तेरी प्राब्लम क्या है, हर लड़की को अपने पति का लंड चूसना ही पड़ता है शादी के बाद अभी तू यहाँ मना कर देगी तो चल भी जाएगा लेकिन अपने पति को कैसे मना कहेगी इसलिए मेरी बात मान और अभी से ही प्रॅक्टीस शुरू कर दे वरना बाद मे बहुत पछताएगी" मोना दीदी को समझाते हुए बोली

मोना की बात सुनकर दीदी कुछ सोच मे पड़ गयी और मैं दीदी के पीछे आ गया अब मेरा मुरझाया हुआ लंड दीदी के मांसल कुल्हो से रगड़ खा रहा था जबकि मैने पीछे से दीदी के बड़े बड़े बूब्स को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया था

मेरे ऐसा करने से दीदी आहे भरने लगी थी और कुछ देर सोचने के बाद उसने फ़ैसला कर लिया और बोली "तेरी बात बिल्कुल सही है मोना मुझे भी ये ट्राइ करना ही होगा लेकिन मैं पहली बार मे तेरी तरह नही कर पाउन्गी कुछ टाइम तो लगेगा ही मुझे पर्फेक्ट होने मे"

"ये हुई ना बात और रही बात पर्फेक्ट होने की तो वो तो अभी मैं भी नही हूँ मैं अभी भी सीख ही रही हूँ, चल अब तू लंड को मुँह मे ले" मोना चहकति हुई बोली

अब दीदी मुझसे छूट कर मेरे सामने घुटनो के बल बैठ गई और मेरे लंड को जो अब तक लगभग खड़ा हो चुका था की पकड़ा और उसके सुपाडे पर अपनी जीभ फिराने लगी

दीदी के ऐसा करने से मेरे मुँह से आ निकाल गई मेरे लंड के सुपाडे पर दीदी की गरम गरम जीभ बहुत कमाल दिखा रही थी और अब मेरे लंड ने दो बूंदे बाहर निकाल दी जिसे दीदी ने चाट तो लिया लेकिन फिर बुरा सा मुँह बनाया मुझे लगा शायद अब ये आगे नही रहेगी लेकिन पता नही दीदी ने क्या सोचा और अब उसने मेरे लंड को आधा अपने मुँह मे भर लिया और अपना मुँह आगे पीछे करते हुए उसे चूसने लगी

दीदी के गरम गरम मुँह को महसूस करके मेरे लंड मे उबाल आने लगा और वो एक बार फिर अपने विकराल रूप मे आ गया था और दीदी की मुट्ठी मे होने के बाद भी वो झटके मारने लगा अब मैं ऐसे ही बेड पर लेट गया और दीदी भी वहाँ आकर मेरा लंड चूसने लगी तो मोना भी मेरे सामने आकर खड़ी हो गई अब कभी मैं मोना के होंठ चूस्ते हुए उसके बूब्स दबाता या कभी उन्हे मुँह मे भर कर उन्हे चूसने लगता

कुछ ही देर बाद दीदी ने मेरा लंड बाहर निकाल दिया था लगातार लंड चुसाई से उसकी साँसे भारी हो गई थी और वो ज़ोर ज़ोर से साँसे लेरही थी

"क्यों क्या हुआ, अभी थोड़ी देर पहले तो तू मुझे कह रही थी ना की इतनी जल्दी थक गई अब तुझे क्या हुआ" मोना दीदी को चिड़ाते हुए बोली लेकिन दीदी ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया और मुस्कुरा कर रह गई

"अब आया ना बेटा समझ मे, चल सोनू अब बुझा दे अपनी बहन की चूत की प्यास, मैं भी तो देखु की जब एक बहन की चूत मे उसके भाई का लंड जाता है तो कैसा लगता है" मोना फिर बोली

"थोड़ा वेट करले जान पहले मैं अपनी बहन का कर्ज़ उतारूँगा फिर उसके बाद तेरी इच्छा पूरी करूँगा" मैं बोला और मेरी बात सुनकर दीदी और मोना दोनो मेरी तरफ सवालिया नज़रो से देखने लगी थी उन्हे समझ नही आया की मैं किस कर्ज़ की बात कर रहा हूँ

"कर्ज़, कैसा कर्ज़" मोना ने पूछा
 
"अरे अभी इसने मेरा लंड चूसा है ना तो मैं भी इसकी चूत चाटूँगा और इसका कर्ज़ उतर जाएगा" मैं खड़े होते हुए बोला

"श... लेकिन वो कर्ज़ तो मेरा भी तुझ पर तूने वो तो नही उतारा" मोना बोली

"तू चिंता मत कर मैं तेरा भी कर्ज़ उतार दूँगा लेकिन पहले दीदी से निपट लेने दे" कहते हुए मैं दीदी के सामने बैठ गया और उसकी जाँघो के बीच छिपी उसकी चिकनी चूत पर अपना मुँह लगा दिया जोकि अब तक पानी छोड़ना शुरू कर चुकी थी और उसे अपनी जीभ से चाटने लगा

दीदी की चूत का खारा खारा पानी मेरे मुँह मे जा रहा था और उससे मुझे थोड़ा अजीब भी लग रहा था लेकिन मैं समझ चुका था की अगर लड़की से पूरे मज़े लेने है तो उसे पूरे मज़े देने ही होंगे इसलिए मैने उस टेस्ट को भुला दिया और अपनी बहन की चूत को पूरे मन से चाटने लगा लेकिन इस चूत चटाई की वजह से दीदी की टाँगे कपने लगी और वो बेड पर ढेर हो गई जहाँ मोना ने उसका सिर अपनी गोद मे रख लिया और मैं एक बार फिर उसकी चूत चाटने लगा और मज़े दे दीदी की आँखे बंद हो गई

उधर मोना भी ये सब देख कर गरम हो गई थी अब वो भी दीदी के बूब्स दबाते हुए अपनी चूत को उंगली से कुरेदने लगी थी

अब दीदी की आहे लगातार बढ़ती जा रही थी और मज़े मे आकर उसने पैर पटकने शुरू कर दिए थे

"आ.. .स.. .सोनू अब सहा नही जा रहा प्लीज़ अब घुसेड दे अपना लंड मेरी चूत मे और बुझा दे इसकी प्यास" दीदी आहे भरती हुई बोली

"ओके दी, लेकिन तुम्हारा कर्ज़ तो उतर गया ना अच्छे से" मैं दीदी की चूत मे मुँह हटाते हुए बोला

"हाँ.. .भाई अब देर मत कर और पेल दे अपना मूसल मेरी मुनिया मे" दीदी वासना से भरी आवाज़ मे बोली

और दीदी की बात सुनकर मैं उसकी टाँगो के बीच मे आ गया तो मोना बोली "अरे अभी रुक मुझे भी देखना है"

"तो देख ले ना किसने मना किया है" मैं बोला तो मोना भी दीदी की साइड मे आकर बड़े ध्यान से मेरे लंड को दीदी की चूत मे जाते हुए देखने लगी

और फिर मैं धीरे धीरे करके अपने मोटे लंड को दीदी की टाइट चूत मे घुसेड़ने लगा और दीदी की दर्द भरी आवाज़े निकालने लगी जो की मस्ती से भरी पड़ी थी मेरे चूत चाटने की वजह से दीदी की चूत पूरी तरह से पनियाई हुई थी और कल रात को चुदाई की वजह से उसका होल बहुत हद तक खुल गया था इसलिए आज उसे ज़्यादा तकलीफ़ नही हुई और मेरा लंड थोड़ी ही देर

मे जड़ तक अंदर समा गया और फिर मैने धक्के लगाना शुरू कर दिया

वक्त के साथ साथ इधर मेरे धक्को की स्पीड बढ़ते जा रही थी और उधर दीदी की आहो कराहों की

अब मोना भी दीदी के साइड मे लेट गई थी और अपनी चूत को उंगली से चोद रही थी तो मैने सोचा की चलो इसका भी कर्ज़ उतार दिया हूँ तो मैने उसे ढंग से लिटाया और दीदी को चोदते हुए मोना की चूत चाटने लगा और मेरी इस हरकत से मोना जैसे स्वर्ग मे पहुच गई थी

इधर मेरा लंड दीदी की चूत चोद रहा था और उधर मेरी जीभ मोना को ठंडा करने मे लगी हुई थी पूरा कमरा हम तीनो की मस्ती भरी आहो से गूँज रहा था

कोई 10 मिनिट की चुदाई के बाद मुझे लगा की अब मैं झड़ने वाला हूँ तो मैने मोना की चूत मे अपना मुँह हटा लिया और दीदी की चूत मे धुआधार धक्के लगाने लगा उधर मोना भी मेरी हालत समझ गयी थी इसलिए अब वो अपनी चूत मे दो उंगलिया घुसा कर अपना पानी निकालने की कोशिश करने लगी जबकि इधर दीदी मेरे ज़ोर के धक्को की संभाल नही पाई और ज़ोर से चिल्ला चिल्ला कर झड़ने लगी अब दीदी की चूत मे बहते पानी को महसूस करके मेरे लंड ने भी हार मान ली और वो भी दीदी की चूत के पानी से अपना पानी मिलाने लगा अब तक मोना का बदन भी अकड़ गया था और भी गहरी गहरी साँसे लेने लगी थी और हम तीनो ही बेड पर निढाल होकर पड़े हुए थे और आज दिन मे ही तीन बार झड़ने की वजह से मेरा बुरा हाल हो गया था इसलिए कब मैं नींद के आगोश मे समा गया मुझे पता ही नही चला

शाम के कोई 5 बजे मेरी नींद खुली तो मैं अकेला वैसा ही नंगा बेड पर पड़ा हुआ था दीदी और मोना कहीं दिखाई नही दे रही थी मैने पास पड़े कपड़े पहने और अपने रूम मे आकर फ्रेश होने के बाद नीचे आ गया दीदी और मोना से मिलने के बाद मैने महसूस किया की दोनो ही लड़किया आज दिन की चुदाई से बहुत खुश है फिर हमने रात का खाना खाया और फिर डॉली के रूम मे आ गये जहाँ रात मे मैने मोना और दीदी को दो बार चोदा और दोनो की ही गान्ड भी मारी

फिर हम सभी थक कर सो गये हमारी खुली चुदाई अब ख़तम हो चुकी थी क्योंकि कल का दिन निकालते ही मुझे पापा मम्मी और डॉली को लेने शहर जाना था.........
 
अपडेट 52

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फिर हम सभी थक कर सो गये हमारी खुली चुदाई अब ख़तम हो चुकी थी क्योंकि कल का दिन निकलते ही

मुझे पापा मम्मी और डॉली को लेने शहर जाना

था.........

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अब आगे

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सुबह मेरी नींद सबसे पहले खुली आज मैं बहुत जल्दी उठ गया था लेकिन फिर भी मैं बहुत ज़्यादा फ्रेश महसूस कर रहा था ज़रा सी भी आलसी नही आ रही थी अब ये कैसे हुआ मेरी समझ मे नही आरहा था वरना तो हर रोज जागने के बाद मुझे बहुत टाइम लगता था बेड छोड़ने मे लेकिन आज बेड पर रहने की इच्छा ही नही होरही थी मैने टाइम देखा तो अभी सुबह के 6 बाज रहे थे और पापा मम्मी की ट्रेन सुबह 9.30 पर शहर आती है इसलिए मुझे बहुत टाइम था अभी तो मैं डॉली के बारे मे सोचने लगा जो अभी वापस आने वाली थी और अभी तक एक वही बची हुई थी मेरे नीचे आने से वरना जब से मैं गाओं आया था मैने अपनी पहचान वाली किसी भी लड़की को नही छोड़ा था दीदी, मोना, टीना, निशा और रूपा सभी को मैं चोद चुका था और सिर्फ़ रूपा को छोड़ कर बाकी सभी की गान्ड भी मार चुका था सिर्फ़ डॉली ही ऐसी थी की अभी तक जिसके मैने बदन तक को ना ढंग से देखा था और ना ही छुआ था

फिर मुझे लगा की आज जो मैं इतना तरो-ताज़ा फील कर रहा हूँ वो कहीं डॉली की वजह से ही तो नही है तो क्या वो आज वापस आने के बाद मुझे आगे बढ़ने का मौका देगी या फिर बस उपर उपर से ही तरका देगी अभी तक जितना भी मैं उसे समझ पाया था उस हिसाब

से वो बहुत मूडी लड़की थी उसके मन की बाते जान पाना बहुत मुश्किल था वो पल मे तोला तो पल मे माशा हो जाती थी ताकि उसे कुछ करना है तो करना है वरना दुनिया की कोई ताक़त उससे ज़बरदस्ती नही करवा सकती थी

फिर मुझे डॉली के साथ बिताए वो हसीन लम्हे याद आने लगे की किस तरह मैने उसे अपना लंड दिखा कर उसके बूब्स देखे थे किस तरह उसके साथ नंगे वर्ड मे बाते की थी और किस तरह उसकी चूत पर पैंटी के उपर से लंड रगड़ कर अपना पानी निकाला था ये सब बाते सोचते हुए पता नही कब मेरा लंड खड़ा होकर झटके मारने लगा था और पता नही कब मेरा हाथ मेरे लंड को सहलाने लगा था

तभी मुझे जैसे होश आया और एहसास हुआ की बेड पर मैं अकेला नही हूँ और मैने देखा तो मोना और दीदी दोनो अभी भी नंगी ही बेड पर मेरे दोनो साइड सोई हुई थी दीदी की एक टाँग मेरी टाँग के उपर थी और उसकी चूत को गर्मी मुझे अपनी जाँघ पर महसूस हो रही थी जबकि मोना मेरे दूसरे साइड मे पीठ के बल सोई हुई थी मैने अब गौर से दोनो को देखा और दोनो के बदन की तुलना करने लगा और जब मैं ऐसा कर रहा था तो एक बार फिर मेरी आँखो के सामने डॉली का चेहरा आ गया और जितना भी मैने डॉली को नंगा देखा था उस हिसाब से इन दोनो का ही बदन मुझे फीका लगने लगा और सच भी यही था की चाहे दीदी और मोना कितनी भी सुंदर और सेक्सी थी लेकिन डॉली के आगे फैल थी और डॉली के नंगे शरीर को इमॅजिन करके मेरा लंड एक बार फिर झटके मारने लगा और मुझे बड़ी शिद्दत से चुदाई की तलब महसूस होने लगी

मेरे दोनो ही साइड एक से बढ़ कर एक सेक्सी लड़किया सोई हुई थी और यही मुश्किल मेरे सामने थी की मैं दोनो मे से चोदु किसको फिर मुझे याद आया की मेरे लंड को ये हालत मेरी बहन के बारे मे सोच कर हुई है तो अब बहन की चूत ही मारना है अब वो डॉली हो या निशा फरक नही पड़ता है तो मैने दीदी का पैर अपने उपर से अलग किया और उसे दूसरी साइड करवट पर कर दिया और खुद उसकी पीठ से चिपक कर उसकी गर्दन ओर किस करते हुए उसके बूब्स दबाने लगा और इधर मेरा लंड दीदी की गान्ड की दरार पर रगड़ खाने लगा

मेरे ऐसा करने से दीदी नींद मे ही कुन्मू नाने लगी और आहे भरने लगी थोड़ी ही देर बाद मैने अपना एक हाथ आगे लेजा कर दीदी की चूत को सहलाना शुरू कर दिया और जल्दी ही अपनी एक उंगली उसकी चूत मे अंदर बाहर करने लगा और उसकी गान्ड पर जोरो से लंड रगड़ने लगा
 
अब दीदी भी धीरे धीरे अपनी कमर आगे पीछे करने लगी थी लेकिन अभी तक उसकी नींद खुली नही थी और जैसे ही मुझे अपनी उंगली पर दीदी की चूत मे रिस्ता पानी महसूस हुआ मैं समझ गया की अब इसकी चुदाई की जासकती है और मैने पीछे से ही थोड़ा नीचे होकर अपना लंड उसकी चूत पर सेट किया और एक ज़ोर का धक्का लगा दिया जिससे एक बार मे ही मेरा आधे से ज़्यादा लंड दीदी की चूत मे था और दीदी की एक जोरदार चीख से सारा कमरा गूँज उठा

"ऊऊऊऊमाआआ.. ........" दीदी ज़ोर से चीखी अब उसकी नींद पूरी तरह से खुल चुकी थी और जैसे ही उसे महसूस हुआ की उसके साथ अभी क्या हुआ है वो बोली "ये कॉन्सा तरीका है सोनू क्या ऐसे भी कोई करता है"

"ऐसे ही तो करते है दीदी" मैं एक धक्का और लगाते हुए बोला अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत मे था इस बीच दीदी की चीख सुनकर मोना भी जाग गई थी और बेड पर बैठ कर समझने की कोशिश कर रही थी की दीदी क्यों चीखी थी

"आहह.. ..पागल कहीं के मैं सोई हुई थी और तूने मुझे जगाए ही इतनी ज़ोर से अपना लंड अंदर कर दिया पता है कितना दर्द हुआ मुझे" दीदी एक बार फिर चिल्ला कर बोली अब तक मोना भी समझ गई थी की दीदी क्यों चीखी थी

"तो क्या हुआ जितना दर्द होना था हो चुका अब मज़ा लेलो" कहते हुए मैं दीदी के बूब्स ज़ोर ज़ोर से दबाते हुए धक्के मारने लगा

"देख निशा मैने सही कहा था ना, यही फ़ायदा है अपने भाई से चुदवाने का जब भी मन करे शुरू हो जाओ और आज तो तेरी मॉर्निंग सही मे गुड हो गयी है जो जागने से पहले ही तेरी चूत मे इतना बड़ा मूसल घुसा हुआ था" मोना दीदी की छेड़ते हुए बोली

"आहह. ..मुझे नही करनी ऐसी गुड मॉर्निंग आ मेरी जगह तू ही लेले ये लंड अपनी चूत मे" दीदी मेरे धक्को से हिलते हुए बोली

"लेकिन अभी ये नही होसकता क्योंकि अभी मुझे सिर्फ़ अपनी बहन को ही चोदना है" मैं ज़ोर के धक्के लगाते हुए बोला

"क्यों, अभी रात मे ही तो तूने इसे चोदा था ना फिर भी कोई कसर रह गयी थी क्या" मोना ने पूछा

"तू नही समझेगी मोना की अभी मेरे दिल और दिमाग़ मे क्या चल रहा है अभी तो मुझे बस दीदी की चोदने दे बस" कहते हुए मैं ज़ोर के धक्के लगाने लगा लेकिन शायद इस पोज़िशन मे दीदी की तकलीफ़ हो रही थी तो उसने मुझे रुकने को कहा और मेरे रुकते ही वो घोड़ी बन गयी और मैं उसके पीछे आकर उसकी कमर पकड़ कर एक बार फिर उसे जानवरों की तरह चोदने लगा और उधर मोना मेरे पीछे आ गई और अपनी उंगली मेरी गान्ड की दरार मे घुमाने लगी जिससे मेरी उत्तेजना बहुत बढ़ गयी और मेरे धक्को की स्पीड बहुत ज़्यादा बढ़ गयी मेरा लंड दीदी की चूत को पूरी गहराई तक उतरने लगा और दीदी मज़े से हाय हाय करने लगी उसकी चूत बेतहाशा पानी छोड़ने लगी थी और इधर मोना की उंगली मुझे उकसाए जा रही थी

फिर अचानक ही मोना ने अपनी वो उंगली मेरी गान्ड मे घुसेड दी जिससे मुझे थोड़े दर्द के साथ बहुत मज़ा आया और मैं उस मज़े मे बह कर ज़ोर के धक्के लगाते हुए दीदी की चूत मे झड़ने लगा और मेरे लंड को बारिश को दीदी सहन नही कर पाई और वो भी मेरे साथ झड़ने लगी और बेड पर ढेर हो गई मैं भी उसी हालत मे उसके उपर गिर गया जिस वजह से मोना की उंगली मेरी गान्ड से निकल गयी और हम दोनो तेज तेज साँसे लेकर नॉर्मल होने की कोशिश करने लगे

कोई 5 मिनिट बाद दीदी की नज़र घड़ी पर गई तो वो झट से उठी और बोली "चल सोनू अब तू जल्दी से तैयार होज़ा तुझे सबको लेने शहर जाना है, और मोना तू मेरा साथ दे हम इस रूम को सॉफ करते है वरना अगर डॉली को यहाँ हुई मस्ती का पता चल गया ना तो फिर हमारी खैर नही"

दीदी की बात सुनकर मैं उपर अपने रूम मे चला गया और दीदी और मोना अपने कपड़े पहन कर डॉली का रूम सॉफ करने मे लग गयी

कोई आधा घंटे बाद मैं तैयार होकर नीचे आया तो दीदी चाय बना चुकी थी

"ले सोनू आज चाय से ही काम चला ले नाश्ता बाहर किसी होटेल मे कर लेना" दीदी मुझे चाय देकर बोली और जल्दी से अंदर चली गई मैं समझ सकता था की वो इतनी जल्दी मे क्यों है उसे अपनी पहली चुदाई के सारे सबूत जो मिटाने थे जो डॉली के रूम मे चप्पे चप्पे मे फेले हुए थे

खैर मैने चाय ख़तम की और पापा की बोलरो गाड़ी निकाल के शहर की तरफ निकल गया मैने टाइम देखा तो 8.30 बज गये थे यानी के अभी मेरे पास एक घंटा था शहर पहुचने के लिए जोकि काफ़ी था लेकिन बीच मे मुझे नाश्ता भी करना था

फिर मैने शहर के बाहर पहुच कर ही एक होटेल मे नाश्ता किया और स्टेशन की तरफ रवाना हुआ लेकिन

रास्ते मे पड़ने वाली रेलवे क्रॉसिंग ने मेरे 15 मिनिट खराब कर दिए और मैं 9.45 बजे प्लॅटफॉर्म पर पहुचा जहाँ मुझे पता चला की पापा मम्मी वाली ट्रेन 20 मिनिट पहले ही आचुकी है और मैं उन्हे ढूँढने लगा की वो लोग कहाँ बैठे है............
 
अपडेट 53

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ट्रेन को आए 15 मिनिट हो गये थे और सभी लोग अभी कहाँ बैठे होंगे यही सोच कर मैं उन्हे ढूँढने लगा तभी मुझे ख़याल आया की मैं पापा को फोन करके पूछ लेता हूँ की वो कहाँ है लेकिन जैसे ही मैने मोबाइल निकालने को जेब मे हाथ डाला तो जेब मे मोबाइल था ही नही शायद जल्दी मे मैं मोबाइल घर मे ही भूल गया था फिर मैं सिर पर हाथ मारते हुए आगे बढ़ गया सबको ढूँढने के लिए

अभी मैं कुछ ही कदम आगे बढ़ा था की मेरे कदम जहाँ के तहाँ रुक गये और जैसे मैं इस दुनिया मे ही नही रहा और एकटूक मेरे सामने जो नज़ारा था उसे देखने लगा मुझसे कुछ कदमो की दूरी पर एक बेंच पर एक निहायत ही खूबसूरत लड़की अपना बाग पकड़ कर बैठी हुई थी जोकि इतनी मासूम लग रही थी जैसे कोई बच्चा होता है लेकिन इन सब से हॅट कर जो सबसे खास बात थी वो ये थी की उसके चाँद से चेहरे के उपर गम और उदासी के काले बदल छाए हुए थे

मेरी नज़रे उसके चेहरे से हटने का नाम ही नही ले रही थी मैं ये भी भूल गया था की मैं यहाँ किसलिए आया हूँ और बस उसे ही देखे जा रहा था

"ओइईईई.. ...कहाँ खोया हुआ है कब से तुझे आवाज़ लगा रही हूँ लेकिन तू है की सुन ही नही रहा" तभी कंधो पर एक थपकी पड़ी और डॉली की आवाज़ मेरे कानो से टकराई और जैसे मैं नींद से जगा

"आन्न्‍णणन्......हूंम्म्मममम..कहीं नही" मेरे मुँह से निकला

"अरे ऐसे क्या दीवानो की तरह बिहेव कर रहा है कब से तुझे ढूँढ रहे है हम और तेरा मोबाइल भी ऑफ जा रहा है बंद करके रखा है क्या" डॉली फिर बोली

"अरे नही यार वो क्या है ना मोबाइल मैं घर पर ही भूल गया था, वैसे पापा और मम्मी कहाँ है" मैने पूछा लेकिन मेरी नज़र बार बार उस सुंदरी की तरफ जा रही थी और अब वो भी मुझे और डॉली को बाते करते हुए देख रही थी

"क्यों बेटा सोनू कहाँ रह गये थे हम कब से तुम्हारा वेट कर रहे थे" पास आते ही पापा बोले

"पापा वो रेलवे क्रॉसिंग पर फँस गया था इसलिए लेट हो गया, चलिए अब चलते है" मैं बोला

"अरे रूको भाई पहले तुम्हारी मम्मी भी तो आजाए" पापा बोले

और कुछ ही देर मे मम्मी भी आ गई और आते ही मुझे किस करके गले लगाया जबकि मेरी नज़र बार बार उस सुंदरता की मूरत पर ही जा रही थी और उसे देख कर बार बार मेरे दिल मे एक टीस सी उठ रही थी की अब इसके भोले भले मुखड़े से दूर जाना पड़ेगा पता नही क्या आकर्षण था उसके चेहरे मे जो वो मुझे उसकी ओर खींचे जा रहा था

"चलो भाई सोनू अब लगेज उठाओ और चलो" पापा बोले

और पापा को बात सुनकर मैं भारी मन से लगेज उठाने लगा मेरा मन अभी वहाँ से जाने को नही कर रहा था दिल कह रहा था की कम से कम उसका नाम पता ही पूछ लू लेकिन सब के सामने मेरी हिम्मत नही हो रही थी और आख़िर मे बाग उठा कर हम सभी आगे बढ़ने लगे मैं बड़ी हसरत भरी उदास नज़रो से उस लड़की को देखे जा रहा था की अब शायद ही कभी ये हसीन चेहरा देखने को मिले की तभी डॉली की आवाज़ सुनाई दी "ऊओ....मेडम अब तुझे क्या अलग से कहना पड़ेगा क्या चलने के लिए"

और डॉली की आवाज़ सुनकर जैसे मैने पीछे पलट कर देखा तो मेरी खुशी का ठिकाना ही नही रहा वो उसी लड़की से कह रही थी और डॉली की बात सुनकर वो लड़की हल्का सा मुस्कुराते हुए अपना बाग उठा कर डॉली के साथ चलने लगी और इधर मेरा दिल जो अभी थोड़ी देर पहले ज़ीरो वॉट के पुराने बल्ब की तरह हो गया था अब 100 वॉट के एल सी डी की तरह चमकने लगा था क्योंकि अब ये पक्का हो गया था की वो लड़की अब हमारे साथ हमारे घर ही जा रही थी

और थोड़ी देर बाद ही हम सब गाड़ी मे बैठ कर गाओं की तरफ रवाना हो गये थे पापा गाड़ी चला रहे थे और मैं सामने की सीट पर बैठा था जबकि मम्मी डॉली और वो लड़की बीच की सीट पर बैठी थी मेरा दिल कर रहा था की इस लड़की के बारे मे पुछु की ये कौन है इसका नाम क्या है लेकिन पापा के सामने होने की वजह से मैं पूछने मे झिझक रहा था की तभी मम्मी ने मेरी सारी परेशानी दूर कर दी

"बेटा सोनू इन दो दिनों मे कोई परेशानी तो नही हुई ना तुम दोनो भाई बहन को" मम्मी ने पूछा

"नही मम्मी कोई परेशानी नही हुई" मैं पीछे मूड कर देखते हुए बोला डॉली अभी खिड़की से बाहर देख रही थी जबकि उस लड़की की आँखे बंद थी तो मैने मम्मी से इशारे मे पूछा की ये कौन है

"अरे मैने तुम दोनो का परिचय तो करवाया ही नही" कहते हुए मम्मी ने उस लड़की को हिलाया जिससे उसने आँखे खोल ली और मेरी तरफ देखने लगी तो मम्मी बोली "बेटा मंजू ये मेरा बेटा सोनू है और सोनू ये मेरे चचेरे भाई यानी के तुम्हारे मामा की बेटी है मंजू"

मम्मी की बात सुनकर मंजू ने हल्की मुस्कान के साथ अपनी गर्दन हिला दी और मैने भी उसी तरह जवाब दिया

फिर मम्मी ने कोई बात नही की तो मैं भी सीधा होकर बैठ गया अब मेरे दिमाग़ मे एक ही नाम घूम रहा था "मंजू" और ये पहली बार हुआ था की गाओं वापस आने के बाद किसी लड़की की बारे मे मेरे मन मे गंदे ख़याल नही आए थे बल्कि उस लड़की के लिए मेरे मन मे इज़्ज़त थी

सारे रास्ते मेरा मन कर रहा था की मैं उसके सुंदर चेहरे को देखु लेकिन ऐसा करना ग़लत था क्योंकि पापा मम्मी भी गाड़ी मे ही थे तो मैं मन मार कर चुपचाप बैठा रहा और थोड़ी ही देर मे हम घर पहुच गये जहाँ निशा दीदी एक ऐसी खबर सुनाने को तैयार बैठी थी जो बाकी सब लोगो के लिए खुशख़बरी थी लेकिन मेरे लिए किसी सदमे से कम नही थी................
 
अपडेट 54

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थोड़ी ही देर मे हम घर पहुच गये जहाँ निशा दीदी एक ऐसी खबर सुनाने को तैयार बैठी थी जो बाकी सब लोगो के लिए खुशख़बरी थी लेकिन मेरे लिए किसी सदमे से कम नही थी................ .

अब आगे...

घर पहुच कर जैसे ही हम अंदर दाखिल हुए तो मोना और दीदी के दमकते हुए चेहरे दिखाई पड़े दोनो खुशी से ऐसे चाहक रही थी जैसे उन दोनो को कोई खजाना मिल गया हो और उनकी खुशी छुपाए नही छुप रही थी मैं बहुत सोच पड़ गया की ऐसा क्या हुआ है जो दोनो खुशी से फूले नही समा रही है लेकिन मेरे समझ मे कुछ नही आया इस दौरान दीदी और मोना दोनो ही बहुत प्यार और अपनेपन से मंजू से मिली दोनो की ही आँखो मे मंजू के लिए सहानुभूति भी थी जिसका मतलब मैं समझ नही पाया था

हालाँकि मंजू मेरे चचेरे मामा की बेटी थी तो शायद बचपन मे मैं उससे मिला भी हूँ लेकिन मुझे उसकी कोई याद नही थी लेकिन लगता था की वो मेरे घर मे सबसे ही बहुत घुली मिली हुई थी तभी तो सभी लोग उसकी बहुत केर कर रहे थे अब दीदी और मोना की आँखो मे उसके लिए सहानुभूति और उसका उदास और दुखी चेहरा देख कर मैं समझ गया था की मंजू के साथ कुछ ग़लत ही हुआ है वरना इतने प्यारे चेहरे पर उदासी और गम कभी भी सोभा नही देती थी

खैर जब सबका मिलना मिलना हो गया तो मैने दीदी से पूछ ही लिया की वो क्यों खुशी से इतना उछल रही है आख़िर बात क्या है

"अभी बताती हूँ" कहते हुए दीदी ने एक लेटर निकाला और पापा को तरफ देख कर बोली "पापा मैने और मोना ने जिस कोर्स के लिए अप्लिकेशन दिया था ना वहाँ हमारा सेलेक्षन हो गया है ये लेटर वहीं से आया है और हमे परसो ही वहाँ जाय्न करना है"

"कौन सा कोर्स" मैने पूछा तो दीदी ने सब बताया और ये भी की उन्हे कल सुबह ही निकलना होगा क्योंकि जिस शहर मे वो इन्स्टिट्यूट है वो हमारे शहर से कोई 500 किमी दूर था जहाँ जाने मे सारा दिन ही लग जाना था और वो कोर्स 18 मंत का था

"श.. ...तो ये बात है" मैं बोला

"मैने तो बहुत मना किया इसे बेटा लेकिन ये और तेरे पापा नही माने और इस कोर्स के लिए हामी भर दी" मम्मी बोली

"तो क्या हुआ मम्मी इतना अच्छा कोर्स तो है" मैं बोला

"कोर्स तो अच्छा है बेटा लेकिन इन 18 महीनो मे ये एक बार भी घर नही आपाएगी क्योंकि वहाँ छुट्टियाँ नही मिलती है" मम्मी ने बताया

" व्हाट.. ....क्या ये सच है दीदी की तुम इतने दिन घर नही आपाओगी" मैं मुँह फाडे दीदी से बोला

"हाँ यार सोनू ये बात तो है, लेकिन डोन्‍ट वरी दिन बीत-ते टाइम नही लगेगा और फिर मैं आ जाउन्गी" दीदी मेरे तरफ देखते हुए बोली

"लेकिन.. ..." मैने कहना चाहा

"अरे छोड़ो भी सोनू अब वो जाना चाहती है तो जाने दो और वैसे भी कुछ दिनों मे उसकी शादी हो जाएगी तो फिर वो बेचारी ससुराल मे तो ये सब नही कर पाएगी ना, लेकिन निशा तू सुन ले बेटा कोर्स कंप्लीट करते ही तेरी शादी की तैयारी शुरू हो जाएगी अपना वादा तो याद है ना" पापा बोले

"जी पापा" अपनी शादी की बात सुनकर दीदी शरम से सिर झुकाते हुए बोली

"कैसा वादा" मैने पूछा
 
"अरे बेटा मत पूछ, तेरे पापा ने निशा को ये कोर्स करने की इजाज़त इसी शर्त पर दी थी की उसके बाद इसकी शादी कर देंगे" मम्मी ने बताया

"ओह्ह्ह्ह" मैं बोला क्योंकि हम लोग गाओं के थे और हमारे तरफ लड़कियो की शादी जल्दी हो जाती है तो ये तो होना ही था और वैसे भी इस बीच दीदी की दो साल और मिल जाएँगे लाइफ एंजाय करने के लिए लेकिन मेरी तो वात लग चुकी थी क्योंकि दीदी और मोना दोनो ही एक साथ डेढ़ साल के लिए जा रही थी यानी के अब मेरी सेक्स लाइफ ख़तम होने वाली थी क्योंकि जब दीदी नही होगी तो निशा और टीना से भी मुलाकात नही होगी और मोना के बगैर रूपा से मिलना भी नही होगा और डॉली का तो कुछ कह ही नही सकते है अगर वो मान गई तो ठीक वरना फिर से किशन और अशोक के साथ उन बंजारनो से ही काम चलाना पड़ेगा

"हाए रे मेरी फूटी किस्मत पहले तो इतना सब एक साथ दे दिया और फिर एक ही झटके मे सब वापस भी लेलिया" मैने अपने माथे को ठोकते हुए मन ही मन सोचा

"अरे तुझे क्या हुआ, सिर क्यों पीट रहा है" डॉली शरारती मुस्कान के साथ बोली

"कुछ नही बस थोड़ा सिर दर्द कर रहा है" कहकर मैं उठ कर अपने रूम की तरफ बढ़ गया दीदी और मोना के जाने की खबर सुनकर मेरा मूड ऑफ हो गया था जिस वजह से मैं मंजू को भी भूल गया था मैं अपने रूम मे आया और बेड पर लेट गया और सोचने लगा की अब मेरा क्या होगा

कोई एक घंटे बाद डॉली मेरे रूम मे आई

"क्यों भाई खाना नही खाना है क्या, चल नीचे सभी तेरा इंतज़ार कर रहे है" वो मुझे बोली

"खाने का मूड नही है यार" मैं उठ कर बैठते हुए बोला

"क्यों दीदी के जाने का इतना गम है क्या वैसे अगर वो जा रही है तो मैं तो हूँ तेरा ख़याल रखने को या फिर दीदी किसी 'और' तरह से तेरा ख़याल रखने लगी थी" डॉली और पर कुछ ज़्यादा ही ज़ोर देते हुए बोली

उसकी बात सुनकर मैं कुछ देर चुप हो गया फिर खड़े होते हुए बोला "चल, खाना खाने चलते है"

"मेरी बात का जवाब नही दिया तूने" वो फिर बोली

"उसके बारे मे बाद मे बात करेंगे अभी चल, अरे हाँ वैसे ये मंजू का मॅटर है क्या उदासी छाई हुई है उसके चेहरे पर और वो दुखी भी बहुत लग रही थी" मैं डॉली का हाथ पकड़ कर आगे बढ़ते हुए बोला

"जब तू दीदी के बारे मे मुझसे बात करेगा ना तब मैं तुझे मंजू के बारे मे बता दूँगी, ठीक है" डॉली बोली

अब मैने उससे ज़्यादा बात करना ठीक नही समझा और हम नीचे आ गये जहाँ सभी डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे और वहाँ मुझे मंजू का जो रूप दिखाई दिया उसने एक बार मुझे फिर अपने मोह जाल मे फँसा लिया

इस वक्त उसने सारी पहनी हुई थी जिसमे वो बला की हसीन लग रही थी खाना खाने के दौरान सारे वक्त मेरी निगाह उसी पर टिकी हुई थी जिसे शायद दीदी और डॉली दोनो ही समझ चुकी थी

खाना खाने के बाद मैं हॉल मे आ गया और मोना अपने घर चली गई क्योंकि उसे कल जाने की तैयारी भी करनी थी जबकि डॉली, दीदी और मंजू किचन मे मम्मी के साथ थी और कुछ ही देर मे वो सब भी हॉल मे आ गये और फिर गप शप शुरू हो गई लेकिन मंजू किसी भी बात का जवाब हूँ हाँ मे ही दे रही थी ज़रूरत पड़ने पर ही वो थोड़ा बहुत बोल रही थी मैने बहुत कोशिश की की उससे ज़्यादा बाते कर साकु लेकिन उसने मुझे भाव ही नही दिया और वो मुझे और मेरी बातों को इग्नोर करती रही जिससे मुझे बहुत बुरा लगा लेकिन मैं कर भी क्या सकता था लेकिन ये मुझे अच्छा नही लगा और मैं उठ कर अपने रूम मे आ गया और बेड पर लेट कर सोने की कोशिश करने लगा लेकिन इस दौरान भी मेरी आँखो के सामने मंजू का चेहरा घूम रहा था और उसकी मुझे इग्नोर करने की कोशिश याद आती रही जिससे मेरे दिल मे एक हुक सी उठती रही और मैं मन ही मन उसे कोसने लगा

कोई आधा घंटे बाद मुझे कुछ लोगो के उपर आने की आहट सुनाई दी तो मैने खुले दरवाजे से बाहर देखा दीदी और मंजू दोनो ही दीदी के रूम की तरफ जा रही थी और उनके पीछे ही डॉली भी आई जो मुझे आँख मार कर उन लोगो के पीछे दीदी के रूम मे चली गई और मैं फिर से सोने की कोशिश करने लगा.....
 
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