अपडेट 51
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और कुछ ही धक्को के बाद मेरा लंड मोना की चूत मे अपना पानी निकालने लगा और मेरी बौछारो को मोना की चूत सह नही पाई और वो झरते हुए मेरे पानी से अपना पानी मिलने लगी और मैं वैसे ही उसके उपर ढेर हो गया तो मोना ने मुझे बाहों मे कस लिया और दीदी मेरी लरजती गान्ड पर हाथ फिराने लगी.. ........
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अब आगे..
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कुछ टाइम सुसताने के बाद मैं और मोना दोनो ही बाथरूम से अपने आपको सॉफ करके आ गये थे जबकि दीदी वैसे ही नंगी बैठी हमारा वेट कर रही थी अभी भी हम तीनो ही नंगे थे
"चल निशा अब तू भी अपनी चूत को खुजली मिटा ले अपने भाई के लंड से, मेरी तो सारी खुजली ही ख़तम कर दी इसने चूत के साथ साथ गान्ड को भी नही छोड़ा " मोना बोली
"पहले इसके हथियार को देख कैसे मुरझाया हुआ है लगता है जैसे तूने इसे पूरी तरह निचोड़ लिया है" दीदी मेरे थके हुए लंड को देख कर बोली जो नीचे मुन्डी किए हुए लटक रहा था
"अरे इसको खड़ा करना कौन सा बड़ा काम है सिर्फ़ दो मिनिट का खेल है, चल ऐसा करते है की अब मैं सोनू को उपर से मज़ा देती हूँ और तू नीचे से इसके लंड को मुँह मे लेकर चूस फिर देख ये कैसे खड़ा होता है" मोना बोली
"ना बाबा ना मुँह मे लेना मुझे अच्छा नही लगता" दीदी मुँह बनाते हुए बोली
"यार निशा तेरी प्राब्लम क्या है, हर लड़की को अपने पति का लंड चूसना ही पड़ता है शादी के बाद अभी तू यहाँ मना कर देगी तो चल भी जाएगा लेकिन अपने पति को कैसे मना कहेगी इसलिए मेरी बात मान और अभी से ही प्रॅक्टीस शुरू कर दे वरना बाद मे बहुत पछताएगी" मोना दीदी को समझाते हुए बोली
मोना की बात सुनकर दीदी कुछ सोच मे पड़ गयी और मैं दीदी के पीछे आ गया अब मेरा मुरझाया हुआ लंड दीदी के मांसल कुल्हो से रगड़ खा रहा था जबकि मैने पीछे से दीदी के बड़े बड़े बूब्स को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया था
मेरे ऐसा करने से दीदी आहे भरने लगी थी और कुछ देर सोचने के बाद उसने फ़ैसला कर लिया और बोली "तेरी बात बिल्कुल सही है मोना मुझे भी ये ट्राइ करना ही होगा लेकिन मैं पहली बार मे तेरी तरह नही कर पाउन्गी कुछ टाइम तो लगेगा ही मुझे पर्फेक्ट होने मे"
"ये हुई ना बात और रही बात पर्फेक्ट होने की तो वो तो अभी मैं भी नही हूँ मैं अभी भी सीख ही रही हूँ, चल अब तू लंड को मुँह मे ले" मोना चहकति हुई बोली
अब दीदी मुझसे छूट कर मेरे सामने घुटनो के बल बैठ गई और मेरे लंड को जो अब तक लगभग खड़ा हो चुका था की पकड़ा और उसके सुपाडे पर अपनी जीभ फिराने लगी
दीदी के ऐसा करने से मेरे मुँह से आ निकाल गई मेरे लंड के सुपाडे पर दीदी की गरम गरम जीभ बहुत कमाल दिखा रही थी और अब मेरे लंड ने दो बूंदे बाहर निकाल दी जिसे दीदी ने चाट तो लिया लेकिन फिर बुरा सा मुँह बनाया मुझे लगा शायद अब ये आगे नही रहेगी लेकिन पता नही दीदी ने क्या सोचा और अब उसने मेरे लंड को आधा अपने मुँह मे भर लिया और अपना मुँह आगे पीछे करते हुए उसे चूसने लगी
दीदी के गरम गरम मुँह को महसूस करके मेरे लंड मे उबाल आने लगा और वो एक बार फिर अपने विकराल रूप मे आ गया था और दीदी की मुट्ठी मे होने के बाद भी वो झटके मारने लगा अब मैं ऐसे ही बेड पर लेट गया और दीदी भी वहाँ आकर मेरा लंड चूसने लगी तो मोना भी मेरे सामने आकर खड़ी हो गई अब कभी मैं मोना के होंठ चूस्ते हुए उसके बूब्स दबाता या कभी उन्हे मुँह मे भर कर उन्हे चूसने लगता
कुछ ही देर बाद दीदी ने मेरा लंड बाहर निकाल दिया था लगातार लंड चुसाई से उसकी साँसे भारी हो गई थी और वो ज़ोर ज़ोर से साँसे लेरही थी
"क्यों क्या हुआ, अभी थोड़ी देर पहले तो तू मुझे कह रही थी ना की इतनी जल्दी थक गई अब तुझे क्या हुआ" मोना दीदी को चिड़ाते हुए बोली लेकिन दीदी ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया और मुस्कुरा कर रह गई
"अब आया ना बेटा समझ मे, चल सोनू अब बुझा दे अपनी बहन की चूत की प्यास, मैं भी तो देखु की जब एक बहन की चूत मे उसके भाई का लंड जाता है तो कैसा लगता है" मोना फिर बोली
"थोड़ा वेट करले जान पहले मैं अपनी बहन का कर्ज़ उतारूँगा फिर उसके बाद तेरी इच्छा पूरी करूँगा" मैं बोला और मेरी बात सुनकर दीदी और मोना दोनो मेरी तरफ सवालिया नज़रो से देखने लगी थी उन्हे समझ नही आया की मैं किस कर्ज़ की बात कर रहा हूँ
"कर्ज़, कैसा कर्ज़" मोना ने पूछा