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Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

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वो बोली

"म..म....अब इसके बारे मे मैं कुछ नही कह सकता लेकिन मुझे उम्मीद है की तुम ऐसा नही कहोगी" मैं हकलाते हुए बोला

"और अब जब कह रहे हो की तुम मुझसे शादी करना चाहते हो मेरे साथ ज़िंदगी बिताना चाहते हो तो अब डॉली वाले सीन का क्या होगा" वो बोली

"मतलब....." मैने पूछा

"मतलब ये की क्या अब भी तुम उसके साथ अपने सेक्षुयल रिश्ते की कंटिन्यू करोगे या फिर अब से सब बंद कर दोगे" उसने पूछा

अब उसकी बात सुनकर मैं सोच मे पड़ गया, मैं भूल चुका था की एक म्यान मे दो तलवार नही रह सकती थी

" क़ायदे से तो वो रिश्ता ही ग़लत है और अब जब ऐसी कंडीशन आ गई है तो मैं उसे समझा बुझा कर मना लूँगा और ये सब बंद कर दूँगा" कुछ देर सोचने के बाद मैं बोला मैं मंजू को अपना बनाने के लिए कोई भी कीमत अदा करने को तैयार था

"ठीक है मान लिया लेकिन फिर भी हम दोनो के एक होने मे एक परेशानी है" वो बोली

"वो क्या....." मैने पूछा

"तुम मुझसे शादी करना चाहते हो लेकिन एक बात भूल गये की भले ही दूर के रिश्ते की सही लेकिन हूँ

मैं भी तुम्हारी बहन ही, अब भला भाई बहन की शादी कैसे हो सकती है" वो बोली

"मैं तो नही भुला लेकिन शायद तुम भूल गई हो की हमारे यहाँ मामा की बेटी और बुआ के बेटे की शादी हो सकती है यदि वो दोनो सगे भाई बहन नही हो तो" मैने उसे याद दिलाया

"ओह्ह्ह्हहाँ ये तो मैं भूल ही गई थी लेकिन तुम्हे याद था मतलब पक्की तैयारी कर के बैठे हो" वो हँसते हुए बोली और मैं उसकी मासूम सी हसी मे खो कर उसके सुंदर चेहरे की निहारने लगा

"लेकिन अभी तक मैने तुम्हारे प्यार को स्वीकारा नही है और नही शादी के लिए हाँ की है" मंजू की इस बात से मेरी तंद्रा टूटी और मैं वापस इस दुनिया मे आया

"क्या मतलब......." मेरे मुँह से निकला साला पूरा दिमाग़ घूम गया था मुझे ऐसा लगा जैसे मंजू और मैं शादी के मंडप मे बैठे थे और किसी ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे मंडप से बाहर निकाल दिया हो

"मतलब ये की अभी हमारे बीच जो बाते हुई है वो सब बच्चो का खेल नही है वो सब बहुत ज़िम्मेदारी की बाते है और ऐसे ही तय नही हो सकती है बहुत कुछ सोचना पड़ता है" वो सीरियस्ली बोली

"तो सोचो ना मना किसने किया है" मैं बोला

"अभी टाइम नही है, और अब वापस घर चलो अंधेरा होने लगा है" वो उठते हुए बोली

"तो रात भर का टाइम तो बहुत होगा ना सोच कर जवाब देने के लिए" मैं भी उठते हुए बोला

"हाँ....." वो मेरी तरफ अजीब निगाहो से देखते हुए बोली

"ओके....लेकिन सुबह खुशख़बरी ही सुनाना" मैं बोला

और फिर हम बाइक पर बैठ कर वापस घर के लिए निकल पड़े और सारे रास्ते मैं यही सोच रहा था की सीधी बाद की बात थी लेकिन उसमे भी मंजू ने सोचने का लफडा डाल दिया खैर मुझे पूरी उम्मीद थी की उसका जवाब हाँ मे होगा लेकिन इस सोचने के चक्कर मे वो बेकार ही अपनी रात खराब करने जा रही थी................
 
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और फिर हम बाइक पर बैठ कर वापस घर के लिए निकल पड़े और सारे रास्ते मैं यही सोच रहा था की सीधी सीधी बात थी लेकिन उसमे भी मंजू ने सोचने का लफडा डाल दिया खैर मुझे पूरी उम्मीद थी की उसका जवाब हाँ मे होगा लेकिन इस सोचने के चक्कर मे वो बेकार ही अपनी रात खराब करने जा रही थी................

अब आगे......

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हम घर पहुचे और रोज की तरह ही सब चलता रहा लेकिन घर पहुचने से लेकर रात के खाने तक मैने गौर किया की मंजू के चेहरे पर गहरी सोच के निशान थे शायद वो मेरे प्रपोज़ के बारे मे ही सोच रही थी की उसे मेरी बात मान नी चाहिए या नही लेकिन खाना खाते वक्त मुझे डॉली के चेहरे पर खुशी ही खुशी दिखाई दे रही थी जबकि उधर मंजू बहुत नर्व्स नज़र आ रही थी

खैर खाना ख़तम हुआ और सभी हॉल मे गप्पे लगाने बैठ गये और कुछ देर बाद मम्मी ने सभी को अपने अपने रूम मे जाकर सोने को कहा

"मम्मी आज मैं मंजू के साथ उसके रूम मे सोउंगी" मम्मी की बात सुनकर डॉली बोली और उसकी बात सुनकर मैं समझ गया की आज फिर वो मुझसे चुदवाना चाहती है इसीलिए वो मंजू के साथ सोने का बहाना कर रही है

"लेकिन क्यों....." मम्मी ने पूछा

"मम्मी वो क्या है ना की गर्मी के दिन है इसलिए हम दिन मे भी सो लेते है तो रात को नींद नही आती इसीलिए बस टाइम पास करने को मंजू की कंपनी मिल जाएगी" डॉली बोली

"मुझे कोई प्राब्लम नही है लेकिन मंजू से पूछ लो कहीं उसे परेशानी तो नही होगी" मम्मी बोली

"हम दोनो ने ही तो ये प्लान बनाया है, क्यों मंजू" डॉली मंजू की तरफ देखते हुए बोली जो अभी भी अपनी सोचो मे गुम थी

"हा......हाँ" डॉली की बात सुनकर मंजू अपनी सोचो से बाहर आते हुए बोली

"ओके.....तो अब जाओ और जाकर सो जाओ" कहते हुए मम्मी उठी और अपने रूम की तरफ बढ़ गयी
 
अब मैं सोच मे पड़ गयी की मैं डॉली को कैसे संभालू जो अभी मुझसे चुदवाना चाहती है जबकि दूसरी तरफ मंजू है जो हमारे रिश्ते को लेकर इतनी सीरियस्ली सोच विचार कर रही है और मैं मंजू से वादा भी कर चुका था की मैं किसी तरह डॉली को मना कर उससे जिस्मानी संबंध ख़तम कर लूँगा अभी मैं अपनी इन्ही सोचो मे डूबा हुआ था की मुझे डॉली की आवाज़ सुनाई दी

"ओये हीरो.......क्या सोच रहा है सुना नही मम्मी ने क्या कहा चल अपने रूम मे जा" डॉली मुझे मादक नज़रो से देखते हुए बोली

मैने मंजू की तरफ देखा तो उसकी निगाहे हमारी तरफ नही थे वो दूसरी तरफ देख रही थी और उसके चेहरे पर टेन्षन सॉफ नज़र आ रही थी

शायद उसे डॉली की इस बात से बहुत बुरा लग रहा था की जिस लड़के ने अभी थोड़ी देर पहले ही प्रपोज़ किया था वो कुछ टाइम बाद ही किसी और लड़की को चोदेगा

अब मैं बिना कुछ कहे उठा और अपनी रूम की तरफ चला गया और रूम मे पहुच कर भी मैं यही सोच रहा था की अब मैं डॉली को कैसे समझाउंगा और कैसे उसे अपने से दूर रहने के लिए मनाउन्गा जबकि इस सब मे उस बेचारी की कोई ग़लती नही थी इस सारे खेल की शुरुआत ही मैने की थी और डॉली के अंदर सोए हुए सेक्स को भी मैने ही जगाया था

अभी मुझे यही सब सोचते हुए कोई घंटा भर हुआ था की मेरे रूम का दरवाजा नॉक हुआ मैं समझ गया की ये डॉली जी होगी

"गैट खुला है.....आ जाओ" मैं धड़कते दिल के साथ बोला क्योंकि अब मुझे अपनी ज़िंदगी का अभी तक का सबसे मुश्किल काम करना था

दरवाजा खुला और मेरी उम्मीद के मुताबिक डॉली जी अंदर आई उसके चेहरे पर एक सेक्सी मुस्कान थी और शायद आज वो खुल कर चुदाई के मज़े लेने के मूड मे थी

"देखा मेरा प्लान कामयाब हो गया ना मंजू को अपने साथ शामिल करते ही कैसे हम मज़े करने के लिए फ्री हो गये है" डॉली मेरे पास बेड पर बैठते हुए बोली लेकिन जैसे ही उसकी नज़र मेरे चेहरे पर पड़ी तो वो समझ गई की मैं कुछ परेशान हूँ

"अरे तुझे ये क्या हुआ है, ऐसा सदा हुआ मुँह क्यों बना रखा है" वो मुझे देखते हुए बोली

"कुछ नही यार बस ऐसे ही......." मैं बोला

"कुछ कैसे नही है कुछ तो ज़रूर है वरना अभी तक तो तूने मुझे अपनी बाँहो मे दबोच लेना था जबकि अभी तो तू देवदास बना बैठा है, बता क्या बात है" डॉली मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए बोली

"वो....वो......तुझसे एक इंपॉर्टेंट बात करनी थी लेकिन पता नही तू समझेगी की नही" आख़िर हिम्मत करके मैं मुद्दे पर आ ही गया

"मैं नही समझूंगी तो कौन समझेगा आख़िर तेरे सबसे करीब मैं ही तो हूँ" वो मेरे हाथ पकड़ कर मेरी आँखो मे बड़े प्यार से देखते हुए बोली

तभी मेरी नज़र दरवाजे की तरफ गई जहाँ मुझे एक हल्की सी परछाई नज़र आई मैं समझ गया की वो मंजू ही होगी शायद वो अपना फ़ैसाला सुनने से पहले जान.ना चाहती होगी की मैं डॉली से दूर होने की अपनी बात पर कितना कायम रहता हूँ..............
 
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तभी मेरी नज़र दरवाजे की तरफ गई जहाँ मुझे एक हल्की सी परछाई नज़र आई मैं समझ गया की वो मंजू ही होगी शायद वो अपना फ़ैसला सुनने से पहले जान.ना चाहती होगी की मैं डॉली से दूर होने की अपनी बात पर कितना कायम रहता हूँ..............

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अब आगे......

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"वो डॉली बात ये है की शाम को मैं और मंजू जब तलब पर गये थे ना तब मैने मंजू को प्रपोज़ किया" मैं बोला

"अरे वा, फिर उसने क्या जवाब दिया" डॉली खुश होते हुए बोली

"अभी उसने कुछ जवाब नही दिया बल्कि कल सुबह तक का टाइम माँगा है" मैने बताया

"तो तू इसी चिंता मे दुबला हुआ देवदास बना बैठा है, टेन्षन मत ले उसका जवाब हाँ मे ही होगा" डॉली बोली

"बात वो नही है डॉली जो तू समझ रही है बल्कि कुछ और है वैसे बात रही उसके जवाब की तो वो जो भी हो मुझे मंजूर होगा क्योंकि लाइफ उसकी है फ़ैसला उसे लेना है" मैं जानबूझ कर बोला क्योंकि मैं ये सब मंजू को सुनाना चाहता था जो छुप कर हमारी बाते सुन रही थी

"जब ये बात नही है तो कौन सी बात है" डॉली ने पूछा

"दरअसल बात ये है की जब मैं वहाँ मंजू से बाते कर रहा था तो उसकी बातों से मुझे लगा की वो तेरे मेरे जिस्मानी संबंध को पसंद नही करती और जहाँ तक मेरा ख़याल है वो तब तक मेरे साथ नही आएगी जब तक की मैं तुझसे ये संबंध ख़तम नही कर लेता" मैं सकुचाते हुए बोला

और मेरी बात सुनकर डॉली सब कुछ समझ गई की मैं क्या कहना चाहता हूँ वो कुछ देर तक सोचती रही और फिर उठ कर खड़ी हो गई मैने देखा की उसकी आँखो मे इस वक्त आँसू थे और साथ ही बहुत सारा गम भी उसके चेहरे पर बिखरा पड़ा था

"डॉली तू.........." मैने कहना चाहा लेकिन उसने अपने हाथ से इशारे से मुझे रोक दिया उसे खड़ा होते देख मैं भी खड़ा हो गया था

"बस.........रहने दे मैं समझ गई हूँ की तू क्या कहना चाहता है, आज से तेरा मेरा अभी तक जो भी था सब ख़तम सब बंद ओके" वो भर्राई हुई आवाज़ मे बोली

"अरे मेरी बात तो सुन........" मैं बोला लेकिन एक बार फिर उसने मेरी बात कर दी

"क्या सुनना चाहता है तू.........यही ना की जिस लड़की ने

सग़ी बहन होने के बाद भी तेरी खुशी के लिए तेरे साथ वो सब किया जो इस रिश्ते मे पाप माना जाता है और तू दो दिन से आई उस लड़की के प्यार मे इतना पागल हो गया है जो तू ये सब भूल गया, कोई बात नही भाई मुझे इस वक्त ही सब समझ जाना चाहिए था जब तू उसके आते ही उसका दीवाना हो गया था ग़लती मेरी ही थी जो तेरे साथ इतना आगे तक बढ़ गई, खैर अब मैं चलती हूँ कल बता देना अपनी मेडम को की तेरे मेरे बीच अब कुछ नही रहा गुड नाइट " कहते हुए डॉली दरवाजे को तरफ बढ़ गई

अब मेरा दिमाग़ पूरी तरह खराब हो चुका था डॉली की इस हालत मे मुझे पगला कर रख दिया था मैं झट से आगे बढ़ा और उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया

"छोड़ मुझे........" वो रोते हुए बोली अपना हाथ छुड़ाने लगी

"यार पहले मेरी बात तो सुन......." मैं बोला

"अब क्या रह गया है सुनने को सब कुछ तो सुना दिया" वो अभी भी अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी

"चल बता क्या कहा या सुनाया है मैने यही ना की मुझे ऐसा लगा की जैसे मंजू को तेरा मेरा रिश्ता पसंद नही है" मैं एक हाथ से उसका चेहरा पकड़ कर उसकी आँखो मे देखता हुआ बोला

"हाँ तो......इसके बाद रह ही क्या गया है अब" वो वैसे ही ज़िद भरे लहजे मे बोली
 
"लेकिन क्या मैने ऐसा कहा की हमे अब अलग हो जाना चाहिए या फिर ये सब बंद कर देना चाहिए" मैं बोला

"ये कोई बोल के बताने वाली बात नही है, जिस तरह से तू उसका दीवाना है, जितना प्यार तू उससे करता है उससे सॉफ है की तू उसकी ये बात भी मानेगा ही इसीलिए तेरे कहने से पहले ही मैं सब ख़तम कर रही हूँ" डॉली अपने आँसू पौन्छ्ते हुए बोली

"देख डॉली जब मंजू के साथ मेरी ये सब बाते हो रही थी ना तब मैने भी उससे यही कहा था की मैं ये सब बंद कर दूँगा लेकिन बाद मे मैने जब इस बारे मे सोचा तो मैने फील किया की मैं ये सब

बंद नही कर सकता भले ही मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ और उसके लिए अपनी जान भी दे सकता हूँ लेकिन उससे पहले से मैं तुझसे प्यार करता हूँ लेकिन तू मेरी बहन है तो मैं तेरे साथ ज़िंदगी नही बिता सकता इसी लिए मंजू मेरी ज़िंदगी मे आई और अगर तू मेरी बहन नही होती तो शायद मैं कभी मंजू की तरफ देखता भी नही लेकिन उसकी बात भी सही है की कोई भी अपने प्यार को शेर नही कर सकता मगर अब जो भी हो चाहे वो माने या ना माने चाहे उसका जवाब कुछ भी हो मैं तुझसे अलग नही हो सकता" कहते हुए मैने डॉली को अपने गले से लगा लिया और मेरी आँखो से भी पानी बहने लगा डॉली भी रोते हुए मुझसे चिपक गई थी और मैं ये बात तो बिल्कुल ही भूल गया था की मंजू दरवाजे के पास खड़ी ये सब सुन रही है

कुछ देर तक हम दोनो ऐसे ही एक दूसरे के गले लगे खड़े रहे फिर मैने ही डॉली को लाकर बेड पर बिताया और उसके आँसू पोन्छे और खुद को भी ठीक किया

"लेकिन सोनू अगर तूने मेरा साथ नही छोड़ा और इस वजह से मंजू नही मानी तो" डॉली बोली

"देख डॉली मंजू मेरे लिए जो भी है वो अलग बात है और तू और दीदी मेरे लिए जो है वो अलग बात है अब चाहे मंजू माने या ना माने मैं अपनी बहनो से अलग तो नही हो सकता ना" मैं बोला

"लेकिन वो भी तो ग़लत नही कह रही है ना, वो तुझे अपनी बहनो से अलग होने को नही कह रही बल्कि उनके साथ ग़लत काम ना करने को कह रही है" डॉली गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए बोली कहाँ तो अभी वो इसी बात को वजह से रो रही थी और कहाँ अब मंजू को ही सही ठहरा रही थी

"तू है किसकी तरफ अभी जिस बात के लिए मुझे बुरा कह रही थी अब उसी बात का फेवर खुद ही कर रही है" मैं बोला

"यार भले ही हम आपस मे कुछ भी करते हो लेकिन जो सही है वो सही ही तो रहेगा ना" डॉली गर्दन झुका के बोली

"अब मुझे नही पता की क्या सही है या क्या ग़लत है मैं बस इतना जानता हूँ की मैं तुझसे अलग नही हो सकता, और वैसे भी अभी तक मंजू का जवाब नही आया है की उसके दिल मे क्या है अब अगर उसे मेरा प्यार मंजूर भी होगा तो मेरी शर्त यही रहेगी की मैं तेरे या दीदी के साथ क्या करता हूँ उससे उसे कोई मतलब नही होगा लेकिन हाँ ये वादा है की इसके बाद मैं बाहर किसी भी लड़की के साथ कभी भी कुछ भी नही करूँगा" मैं बोला

"और अगर मंजू को ये मंजूर नही हुआ तो" डॉली बोली

"तो उसकी किस्मत.......वो एक सच्चा प्यार करने वाला प्रेमी खो देगी" मैं बोला

"और तेरा क्या........तू जो उससे इतना प्यार करता है जैसे भुला पाएगा उसे" डॉली मेरी आँखो मे देखते हुए बोली

"ज़िंदगी सब भुला देती है डियर, देखा नही की बेचारी मंजू के साथ ही क्या बीती लेकिन अब उसे सब भुला कर आगे बढ़ना ही पड़ेगा वैसे ही मेरी भी काट जाएगी" मैं बोला

"लेकिन फिर भी अगर हम ये बंद कर दे तो......" डॉली बोली

"अब कुछ नही हो सकता मैने कह दिया तो कह दिया वैसे भी मंजू अगर समझदार होगी तो इतना तो समझ ही लेगी की मैं नो भी कर रहा हूँ घर मे ही कर रहा हूँ अगर उसने किसी और से शादी की और वो आदमी बाहर मुँह काला करने वाला हुआ तो फिर वो क्या कर पाएगी उसका? फिर तो उसके पास दो ही ऑप्षन्स होंगे या तो उस आदमी को छ्चोड़े या फिर जैसा चलता है चलने दे लेकिन मेरे तो गॅरेंटी है की मैं कभी भी बाहर किसी लड़की से कुछ नही करूँगा" अब मैने ये बात इसलिए कही की मंजू को बाहर खड़ी है वो अच्छे से सुन ले

"मतलब की तू मानेगा बहन चोद बन कर ही ज़िंदगी गुजारेगा " डॉली शैतानी मुस्कान के साथ बोली

"अब जब मैं ऐसा बन ही गया हूँ तो गुज़रेगी भी तो ऐसे ही" मैं भी मुस्कुरा कर बोली

"तो अभी का क्या प्लान है, कुछ करना है या नही" डॉली बोली

"नही आज की रात कुछ नही करना मैने मंजू से कहा था अब से तेरे साथ कुछ नही करूँगा इसलिए सुबह उसका क्या जवाब है मालूम पड़ जाए फिर कुछ करेंगे अगर उसका जवाब ना मे है तो कोई बात ही नही है और अगर हाँ मे हुआ तो पहले मैं उससे ये सब बाते करूँगा अगर वो मानी तो ठीक है वरना उसके और मेरे रास्ते अलग अलग लेकिन उससे बात होने तक कुछ नही" मैं बोला

"ओके तो मैं चलती हूँ रात भी बहुत हो गई है" डॉली खड़ी होते हुए बोली

"ठीक है" मैं बोला और खड़ा हो गया तभी मेरी नज़र दरवाजे को तरफ गई जहाँ अब मुझे कोई परछाई दिखाई नही दी शायद हमारी बाते ख़तम होने के कारण मंजू वहाँ से चली गई थी

अब डॉली भी मेरे रूम से जा चुकी थी और मैं बेड पर लेटे हुए सोच रहा था की कल मंजू का जवाब क्या होगा यदि ना मे हुआ तो मैं अपने आपको कैसे संभालूँगा और यदि हाँ मे हुआ तो उसे अपनी बहनो के साथ रिश्ते ख़तम ना करने के लिए कैसे मनाउन्गा खैर एक बात तो अच्छी हुई थी की उसने मेरी और डॉली की सारी बाते सुन ली थी अब मुझे उसकी ज़्यादा एक्सक्यूस नही देना पड़ेगा. ..................
 
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मैं बेड पर लेटे हुए सोच रहा था की कल मंजू का जवाब क्या होगा यदि ना मे हुआ तो मैं अपने आपको कैसे संभालूँगा और यदि हाँ मे हुआ तो उसे अपनी बहनो के साथ रिश्ते ख़तम ना करने के लिए कैसे मनाउन्गा खैर एक बात तो अच्छी हुई थी की उसने मेरी और डॉली की सारी बाते सुन ली थी अब मुझे उसकी ज़्यादा एक्सक्यूस नही देना पड़ेगा. .................. •

अब आगे

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जैसे तैसे रात कट चुकी थी और नया दिन निकल चुका था जो की मेरी ज़िंदगी का सबसे खास दिन था आज मंजू मुझे अपना फ़ैसला बताने वाली थी वैसे रात को वो मेरी और डॉली की सारी बाते सुन चुकी थी इसलिए उसे कोई भी फ़ैसला लेने मे परेशानी नही होनी थी

खैर मैं सुबह उठने के बाद नहा धोकर नीचे आ गया था और हॉल मे बैठ कर नाश्ते चाय का वेट कर रहा था अभी तक डॉली या मंजू मुझे दिखाई नही दी थी शायद वो किचन मे होगी ये सोच कर मैं किचन मे गया तो वो दोनो वहाँ भी नही थी और मम्मी नाश्ता बना रही थी

"मम्मी ये डॉली कहाँ है दिखाई नही दे रही है " मैने मम्मी से पूछा

"वो मंजू के साथ मंदिर गई है बेटा, तू हॉल मे बैठ नाश्ता बस बन ही गया है मैं भिज वाती हूँ" मम्मी बोली

और उनकी बात सुनकर मैं वापस हॉल मे आ गया और सोचने लगा की आज क्या खास है जो मंजू मंदिर गई है लेकिन मुझे इसका कोई जवाब मालूम पड़ता उसके पहले ही नाश्ता मेरे सामने था और फिर मैं नाश्ता करने लगा

अभी मैं चाय नाश्ते से फ्री हुआ ही था की डॉली और मंजू भी वापस आ गई लेकिन दोनो ने मेरी तरफ देखा भी नही और सीधे अंदर चली गई मैं फिर टीवी देखते हुए उन दोनो का हॉल मे आने का इंतज़ार करते रहा लेकिन आधा घंटा होने के बाद भी दोनो मे से कोई नही आई तो मैं बाइक लेकर गाओं मे निकल गया मेरा मन डर रहा था की मंजू का जवाब कहीं ना मे तो नही है क्योंकि आज उसने मुझसे नज़रे भी नही मिलाई थी

फिर ऐसे ही दोस्तो के साथ बाते करते हुए मैने टाइम पास किया और 12 बजे के आस पास घर वापस पहुचा

"चलो अच्छा हुआ तू आ गया मैं अभी तुझे ही फोन लगाने जा रहा था, चल हाथ धोकर आजा खाना लगने ही वाला है" मेरे पहुचते ही पापा बोले

और फिर मैं हाथ मुँह धोकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गया और मम्मी मेरा और पापा का खाना लगाने लगी

"मम्मी डॉली कहाँ है" मैने पूछा

"बेटा वो अपने रूम मे है" मम्मी ने बताया

"लेकिन लंच नही करना क्या उसे" मैने पूछा

"वो कह रही थी की उसे भूख नही है अभी" मम्मी बोली

"और मंजू, वो कहाँ है" मैने फिर पूछा

"उसका भी यही कहना है की सुबह नाश्ता ज़्यादा हो गया था इसलिए भूख नही लगी है" मम्मी बोली

अब मैं चुपचाप खाना खाने लगा और डॉली और मंजू के खाना नही खाने की वजह सोचने लगा तो मुझे लगा की शायद मंजू का जवाब ना मे रहा होगा और जिस वजह से दोनो मे कुछ कहा सुनी हुई होगी इसीलिए दोनो खाना नही खा रही है

अब मेरा भी दिल घबराने लगा था मैने जैसे तैसे आधा अधूरा खाना खाया और डॉली के रूम मे गया की उससे पूछ सकु की आख़िर बात क्या है लेकिन वो अपने रूम मे नही थी

'कहाँ जा सकती है ये........' मैं सोचते हुए वापस

आया और सारे घर मे घूम कर डॉली को तलाश किया लेकिन वो कहीं दिखाई नही दी तो मैं तक हार कर उपर अपने रूम मे आ गया जहाँ मुझे मंजू के रूम से कुछ आवाज़े आई तो मैं मंजू के रूम की तरफ चल दिया

मंजू के रूम का दरवाजा खुला हुआ था और अंदर

डॉली और मंजू बेड पर बैठे हुए कुछ बाते कर रही थी जो मुझे देख कर उन्होने बंद कर दी और इस वक्त दोनो ही बहुत सीरीयस लग रही थी..............
 
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मंजू के रूम का दरवाजा खुला हुआ था और अंदर डॉली और मंजू बेड पर बैठे हुए कुछ बाते कर रही थी जो मुझे देख कर उन्होने बंद कर दी और इस वक्त दोनो ही बहुत सीरीयस लग रही थी.............. .

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अब आगे......

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उन दोनो ने मुझे देख लिया था इसलिए अब मैं बिना बाते किए वहाँ से जा भी नही सकता था

"अरे डॉली तू यहाँ है और मैं तुझे नीचे ढूँढ रहा था" मैं बोला

"क्यों क्या काम था......." डॉली ने पूछा

"कू...कू....कुछ नही बस ऐसे ही बोर हो रहा था तो सोचा तेरे साथ टाइम पास कर लू" मैं हिचकते हुए बोला क्योंकि मुझे उससे कुछ काम तो था नही

"तो आ यही बैठ जा....." डॉली बोली

"नही, तुम दोनो ही बाते करो अब मैं अपने रूम मे जाता हूँ" कह कर मैने खिसकना चाहा क्योंकि मैं मंजू का सामना नही करना चाहता था

"रूको सोनू, अंदर आओ मुझे तुमसे कुछ बाते करनी है" तभी मंजू बोली

"ले....लेकिन" मैने कहना चाहा

"लेकिन वेकीन कुछ नही, मैने कहा ना अंदर आओ" मंजू हुकुम चलाते हुए बोली

और आख़िर मुझे अंदर जाकर बैठना ही पड़ा और फिर कुछ देर के लिए रूम मे खामोशी च्छा गई क्योंकि डॉली के पास कहने के लिए कुछ था नही और मैं बात शुरू करना नही चाहता था अब जो भी कहना था वो मंजू को ही कहना था लेकिन वो कुछ कहने के बजाए मुझे ही देखे जा रही थी और जैसे उसकी नज़रे मुझे चुभ सी रही थी

"कहो क्या कहना है" आख़िर मुझे ही कहना पड़ा

"वो......कल शाम तुमने मुझसे कुछ कहा था और

आज मैं उसका बात का जवाब देने वाली थी.....याद है या भूल गये?" मंजू बोली

"याद है......." मैं बोला
 
"तो फिर मेरा जवाब पूछा क्यों नही" वो फिर बोली

"वो.....वो......मेरी हिम्मत ही नही हुई पूछने की, अब तुम ही बता दो" मैं बोला

"वैसे क्या समझते हो क्या जवाब होगा मेरा......."

मंजू सस्पेनस क्रियेट करते हुए बोली

"अब मैं क्या कह सकता हूँ फ़ैसला तुम्हे लेना है लेकिन एक बात मैं तुम्हे बता दूँ की कल जो भी मैने तुम्हे कहा था उसमे से एक बात मैं पूरी नही कर पाउन्गा" मैं बोला

"डॉली को ना चोदने वाली बात ना......" मंजू बोली

क्योंकि रात को वो मेरी और डॉली की सारी बाते सुन चुकी थी

"हाँ......." मैं बोला

"मुझे पता था की तुम डॉली को नही छोड़ सकते, चलो मान लिया लेकिन फिर भी गेस करो की मेरा फ़ैसला क्या होगा" उसने फिर पूछा

अब मैं फँस गया था की क्या जवाब दूँ वैसे मुझे लग रहा था की उसका फ़ैसला ना मे ही होगा क्योंकि कल शाम मैने उसे कहा था की आगे से मैं डॉली से जिस्मानी रिश्ते ख़तम कर दूँगा लेकिन रात को ही अपने उस फ़ैसले से पलट गया था

"क्या सोच रहे हो बताओ ना" मंजू फिर बोली और उधर डॉली बड़े ध्यान से ये सब देख और सुन रही थी

"मुझे नही पता......." कहते हुए मैं उठ गया क्योंकि मंजू के मुँह से ना सुनने के बाद मेरी हालत खराब हो जानी थी क्योंकि गला तो अभी से रुंधने लगा था

"अरे......अरे......उठ क्यों गये बैठो ना" मंजू

मुझे उठते देख कर बोली

मैं बगैर कुछ बोले खड़ा रहा

"प्लीज़ सोनू अगर तुम मुझसे सच मे प्यार करते हो तो एक बार तो बता दो की मेरा जवाब क्या होगा" मंजू बोली

और अब उसने मुझे प्यार का वास्ता देदिया था तो अब तो चुप रहने का सवाल ही नही था

"ना........" मैं भरे हुए गले से बोला मेरी आँखे भी भर आई थी

और इतना कहते ही मैं तेज़ी से रूम से बाहर निकलने को हुआ लेकिन मंजू मुझसे तेज निकली शायद वो ये सब पहले ही समझ गई थी की मैं क्या कहने और क्या करने जा रहा हूँ इसलिए अभी मैं रूम के गैट तक ही पहुचा था की उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे आँसू जो अब तक मेरी आँखो से बाहर निकल चुके थे को पोंछ कर मेरे गले से लग गई

उसकी आँखो मे भी आँसू आचुके थे

"सॉरी सोनू मुझे नही पता था की तुम सच मे मुझसे इतना प्यार करते हो वरना मैं कभी भी ऐसा मज़ाक तुम्हारे साथ नही करती..........लव यू टू

सोनू......लव यू वेरी मच" मंजू सुबक्ते हुए बोली और उसकी ये बात सुनकर मैने भी उसे अपने आप के और करीब करते हुए अपनी बाँहो मे भींच लिया

मैं चुपचाप सिसकते हुए उसे अपने आप से भिंचे हुए खड़ा था और वो पता नही क्या क्या बड़बड़ाते हुए अपने आपको ही कोसे जा रही थी जबकि मैं उसके इकरार करने की वजह से जैसे खुशी से फूला नही समा रहा था............
 
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मैं चुपचाप सिसकते हुए उसे अपने आप में भिंचे हुए खड़ा था और वो पता नही क्या क्या बड़बड़ाते हुए अपने आपको ही कोसे जा रही थी जबकि मैं उसके इकरार करने की वजह से जैसे खुशी से फूला नही समा रहा था............ .

अब आगे.......

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मैं उसे बाहों मे भरे हुए उसकी पीठ सहला रहा था और वो सिसकते हुए अपने आपको कोसे जा रही थी उसमे जिस्म की खुश्बू को मैं अच्छे से महसूस कर रहा था थोड़ी देर ऐसे ही चिपके रहने के बाद मैने उसे अपने से अलग किया और उसकी आँखो मे देखते हुए बोला "अभी तुमने जो कहा वो सच तो है ना या फिर मज़ा लेरही हो"

"मेरी आँखो मे देख कर बताओ क्या मैं मज़ाक कर रही हूँ" वो सीरियस्ली बोली

"लेकिन मुझे यकीन नही हो रहा है" मैं बोला

"तो एक बार और सुन लो आई लव यू" वो बोली और उसने मेरा हाथ पकड़ कर उसे चूम लिया

"आई लव यू टू डियर" कहते हुए मैने भी उसके माथे को चूम लिया

"ओये.........मैं भी हूँ यहाँ, भूल तो नही गये"

तभी डॉली बोली और सच ही हम दोनो कुछ देर के लिए उसे भूल ही गये थे

"सॉरी यार....." मैं और मंजू एक साथ ही बोल पड़े

"हे भगवान......ऐसा प्यार की अब दोनो के ही मुँह से एक जैसे ही वर्ड निकल रहे है" डॉली मुँह पर हाथ रखते हुए बोली

"अब छोड़ भी यार........" मंजू शरमाते हुए बोली

"चल छोड़ दिया लेकिन अब मेरा क्या......" डॉली बोली

"क्या मतलब.." मंजू ने पूछा

".मतलब ये की अब तो तुम दोनो की सेट्टिंग हो गई है अब मैं तुम दोनो के बीच मे अड्जस्ट हो सकती हूँ या नही" डॉली बोली

डॉली की बात सुनकर मंजू ने मेरी तरफ देखा तो मैं बोला "मंजू मैं तुमसे कह ही चुका हूँ की

मैं डॉली को नही छोड़ सकता हूँ"

"और निशा दीदी को?" मंजू ने पूछा

"क्या मतलब....." मैं सकपका कर बोला मैं समझ नही पाया की उसे कैसे पता लगा दीदी के बारे मे

" या फिर मोना या उसकी रूपा भाभी को या फिर निशा दीदी की दोनो सहेलियो को? " मंजू धमाका किए जा रही थी और मैं समझ गया की उसे हे सब डॉली ने बताया होगा मैने डॉली की तरफ देखा तो उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी

"दीदी की फ्रेंड्स या रूपा भाभी या फिर बाहर की सभी गर्ल्स आज से मैं किसी को तरफ देखूँगा भी नही बॅट डॉली, निशा दीदी और मोना के लिए सॉरी" मैं बोला

"जहाँ तक निशा दीदी की बात है तो ठीक है वो भी घर की ही है लेकिन मोना क्यों" मंजू ने पूछा

"आक्च्युयली बात ये है की वो मेरे और दीदी के संबंधो के बारे मे जानती है और अगर मैं एकाएक ही उससे दूर हो गया तो शायद वो हमारी बदनामी ना कर्दे इसीलिए वैसे कोशिश करूँगा की उससे बहुत कम ही मिलू लेकिन डॉली और दीदी के लिए मान जाओ प्लीज़" मैं झेन्पते हुए बोला
 
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