S
StoryPublisher
Guest
तब तक काम वाली बाई नाश्ता ले आई
"देख लूँगी तुझे बाद मे" डॉली बोली और कुर्सी पर बैठ गई
"मम्मी दीदी और मोना कहाँ है" मैने पूछा
"बेटा आज उसका पेपर है ना तो मंदिर तक गई है" मम्मी ने बताया
"लेकिन तुझे दीदी से क्या काम है" डॉली ने पूछा
"दीदी ने कहा है कि आज उनका पेपर है तो मैं उन्हे कॉलेज ले जाउ" मैने बताया
"ओह्ह......तो ये बात है, तभी इतना सज़ा धज़ा है लेकिन वहाँ तेरी दाल नही गलने वाली वहाँ सभी लड़किया तेरे से बड़ी है" नाश्ता करते हुए
डॉली ने फिर मुझे चिड़ाया
"वो तो जब मैं वहाँ पहुचूँगा तभी मालूम पड़ेगा वैसे वापस आने पर तू दी से पूछ लेना"
मैं बोला
"मैं जानती हूँ वहाँ क्या होगा दी से पूछने की मुझे कोई ज़रूरत नही है" डॉली बोली
तभी दीदी वापस आ गई और मुझे देखते ही उसने सीटी बजाई और बोली "ओये हीरो, तू मुझे कॉलेज छोड़ने जा रहा है या किसी फोटो शूट मे जा रहा है"
"क्या मतलब...." मैने पूछा
"आबे इतना बन-ने सवारने की क्या ज़रूरत थी" दीदी बोली
"क्या....तुम दोनो भी ना, मेरे बेटे को क्यों नज़रलगा रही हो" इतना कह कर मम्मी उठी और कहीं से लाकर एक कला टीका मेरे माथे पर लगा दिया
"अले...मेला प्याला बच्चा....." डॉली ने मम्मी को चिड़ाया
"अब बकवास बंद करो और चुपचाप नाश्ता करो मुझे और भी कई काम है" मम्मी ने डॉली को डांटा
और फिर हम सभी चुपचाप नाश्ता करने लगे नाश्ते के बाद मम्मी अंदर चली गई और मैं और दीदी बाहर निकल गये तभी डॉली ने मुझे अंदर बुलाया
"हां....क्या बात है" मैं बोला
"बस तुझे एक बात बतानी थी" डॉली बोली
"क्या" मैने पूछा
"सच मे आज दी के कॉलेज की लड़कियो की खैर नही, आज तू लग ही इतना स्मार्ट रहा है लेकिन याद रखना किसी को साथ मे घर मत ले आना जो करना है वही करना वरना पापा को तो तू जानता ही है" डॉली बोली और हँसने लगी
"तू कहे तो मैं जाता ही नही, आज दिन भर तेरे पास ही बैठता हूँ" मैं मुस्कुराते हुए बोला
"मेरे साथ तेरी दाल नही गलने वाली तू वहीं जा"
डॉली बोली
"ओके....जैसी तेरी मर्ज़ी लेकिन बाद मे कुछ नही कहना" मैं बोला
"बाद की बाद मे देखेंगे अब जा दी बाहर खड़ी है, बाइ" डॉली बोली
"बाइ" मैने भी जवाब दिया और बाहर आकर बाइक स्टार्ट की और दीदी को बैठा कर आगे बढ़ा दी
आज डॉली के बात करने से मुझे बहुत अच्छा लगा था मेरे सिर से एक टेन्षन ख़तम हो चुका था............
"देख लूँगी तुझे बाद मे" डॉली बोली और कुर्सी पर बैठ गई
"मम्मी दीदी और मोना कहाँ है" मैने पूछा
"बेटा आज उसका पेपर है ना तो मंदिर तक गई है" मम्मी ने बताया
"लेकिन तुझे दीदी से क्या काम है" डॉली ने पूछा
"दीदी ने कहा है कि आज उनका पेपर है तो मैं उन्हे कॉलेज ले जाउ" मैने बताया
"ओह्ह......तो ये बात है, तभी इतना सज़ा धज़ा है लेकिन वहाँ तेरी दाल नही गलने वाली वहाँ सभी लड़किया तेरे से बड़ी है" नाश्ता करते हुए
डॉली ने फिर मुझे चिड़ाया
"वो तो जब मैं वहाँ पहुचूँगा तभी मालूम पड़ेगा वैसे वापस आने पर तू दी से पूछ लेना"
मैं बोला
"मैं जानती हूँ वहाँ क्या होगा दी से पूछने की मुझे कोई ज़रूरत नही है" डॉली बोली
तभी दीदी वापस आ गई और मुझे देखते ही उसने सीटी बजाई और बोली "ओये हीरो, तू मुझे कॉलेज छोड़ने जा रहा है या किसी फोटो शूट मे जा रहा है"
"क्या मतलब...." मैने पूछा
"आबे इतना बन-ने सवारने की क्या ज़रूरत थी" दीदी बोली
"क्या....तुम दोनो भी ना, मेरे बेटे को क्यों नज़रलगा रही हो" इतना कह कर मम्मी उठी और कहीं से लाकर एक कला टीका मेरे माथे पर लगा दिया
"अले...मेला प्याला बच्चा....." डॉली ने मम्मी को चिड़ाया
"अब बकवास बंद करो और चुपचाप नाश्ता करो मुझे और भी कई काम है" मम्मी ने डॉली को डांटा
और फिर हम सभी चुपचाप नाश्ता करने लगे नाश्ते के बाद मम्मी अंदर चली गई और मैं और दीदी बाहर निकल गये तभी डॉली ने मुझे अंदर बुलाया
"हां....क्या बात है" मैं बोला
"बस तुझे एक बात बतानी थी" डॉली बोली
"क्या" मैने पूछा
"सच मे आज दी के कॉलेज की लड़कियो की खैर नही, आज तू लग ही इतना स्मार्ट रहा है लेकिन याद रखना किसी को साथ मे घर मत ले आना जो करना है वही करना वरना पापा को तो तू जानता ही है" डॉली बोली और हँसने लगी
"तू कहे तो मैं जाता ही नही, आज दिन भर तेरे पास ही बैठता हूँ" मैं मुस्कुराते हुए बोला
"मेरे साथ तेरी दाल नही गलने वाली तू वहीं जा"
डॉली बोली
"ओके....जैसी तेरी मर्ज़ी लेकिन बाद मे कुछ नही कहना" मैं बोला
"बाद की बाद मे देखेंगे अब जा दी बाहर खड़ी है, बाइ" डॉली बोली
"बाइ" मैने भी जवाब दिया और बाहर आकर बाइक स्टार्ट की और दीदी को बैठा कर आगे बढ़ा दी
आज डॉली के बात करने से मुझे बहुत अच्छा लगा था मेरे सिर से एक टेन्षन ख़तम हो चुका था............