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Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

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तब तक काम वाली बाई नाश्ता ले आई

"देख लूँगी तुझे बाद मे" डॉली बोली और कुर्सी पर बैठ गई

"मम्मी दीदी और मोना कहाँ है" मैने पूछा

"बेटा आज उसका पेपर है ना तो मंदिर तक गई है" मम्मी ने बताया

"लेकिन तुझे दीदी से क्या काम है" डॉली ने पूछा

"दीदी ने कहा है कि आज उनका पेपर है तो मैं उन्हे कॉलेज ले जाउ" मैने बताया

"ओह्ह......तो ये बात है, तभी इतना सज़ा धज़ा है लेकिन वहाँ तेरी दाल नही गलने वाली वहाँ सभी लड़किया तेरे से बड़ी है" नाश्ता करते हुए

डॉली ने फिर मुझे चिड़ाया

"वो तो जब मैं वहाँ पहुचूँगा तभी मालूम पड़ेगा वैसे वापस आने पर तू दी से पूछ लेना"

मैं बोला

"मैं जानती हूँ वहाँ क्या होगा दी से पूछने की मुझे कोई ज़रूरत नही है" डॉली बोली

तभी दीदी वापस आ गई और मुझे देखते ही उसने सीटी बजाई और बोली "ओये हीरो, तू मुझे कॉलेज छोड़ने जा रहा है या किसी फोटो शूट मे जा रहा है"

"क्या मतलब...." मैने पूछा

"आबे इतना बन-ने सवारने की क्या ज़रूरत थी" दीदी बोली

"क्या....तुम दोनो भी ना, मेरे बेटे को क्यों नज़रलगा रही हो" इतना कह कर मम्मी उठी और कहीं से लाकर एक कला टीका मेरे माथे पर लगा दिया

"अले...मेला प्याला बच्चा....." डॉली ने मम्मी को चिड़ाया

"अब बकवास बंद करो और चुपचाप नाश्ता करो मुझे और भी कई काम है" मम्मी ने डॉली को डांटा

और फिर हम सभी चुपचाप नाश्ता करने लगे नाश्ते के बाद मम्मी अंदर चली गई और मैं और दीदी बाहर निकल गये तभी डॉली ने मुझे अंदर बुलाया

"हां....क्या बात है" मैं बोला

"बस तुझे एक बात बतानी थी" डॉली बोली

"क्या" मैने पूछा

"सच मे आज दी के कॉलेज की लड़कियो की खैर नही, आज तू लग ही इतना स्मार्ट रहा है लेकिन याद रखना किसी को साथ मे घर मत ले आना जो करना है वही करना वरना पापा को तो तू जानता ही है" डॉली बोली और हँसने लगी

"तू कहे तो मैं जाता ही नही, आज दिन भर तेरे पास ही बैठता हूँ" मैं मुस्कुराते हुए बोला

"मेरे साथ तेरी दाल नही गलने वाली तू वहीं जा"

डॉली बोली

"ओके....जैसी तेरी मर्ज़ी लेकिन बाद मे कुछ नही कहना" मैं बोला

"बाद की बाद मे देखेंगे अब जा दी बाहर खड़ी है, बाइ" डॉली बोली

"बाइ" मैने भी जवाब दिया और बाहर आकर बाइक स्टार्ट की और दीदी को बैठा कर आगे बढ़ा दी

आज डॉली के बात करने से मुझे बहुत अच्छा लगा था मेरे सिर से एक टेन्षन ख़तम हो चुका था............
 
अपडेट 19

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दीदी और मैं शहर के लिए निकल पड़े दीदी ने भी आज बिल्कुल मेरी ही तरह वाइट शर्ट और ब्लू जीन्स पहना हुआ था और वो बहुत सुंदर और हॉट लग रही थी और बिके पर मेरे पीछे दोनो तरफ पैर डाले बैठी हुई थी लेकिन वो मुझसे चिपकी नही थी बल्कि उसने कुछ दूरी बना

कर रखी थी ताकि हमारे बदन आपस मे चिपके नही लेकिन मैं जानता था कि अभी थोड़ी ही देर मे सड़क के गड्ढे उसे मुझसे चिपका देंगे

"वैसे एक बात तो है दी, आज हम दोनो के मेचिन्ग कपड़े देख कर कोई भी पहचान लेगा कि हम भाई बहन है" मैं बोला

"जी नही बल्कि कोई भी ये समझेगा कि हूँ गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड है" दीदी बोली

"वोही तो मैं भी चाहता हूँ कि हम गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड बन जाए लेकिन तुम हो कि मानती ही नही" मैं बोला और तभी रोड पर एक गड्ढा आया और मैने ब्रेक लगाए जिससे दीदी का बदन मेरी बदन से चिपक गया लेकिन अभी भी उसके बूब्स मेरी पीठ पे दबे नही थे तो उसने कुछ नही कहा

"कैसा लड़का है तू अभी कल ही तो तूने मोना को अपनी गर्लफ्रेंड बनाया है और इतनी जल्दी ही मुझे लाइन दे रहा है" दी बोली

"लेकिन मोना के पहले तो मैने तुम्हे प्रपोज़ किया था ना और वैसे भी मोना ने शर्त भी तो रखी है मेरी गर्लफ्रेंड बनने के लिए और अभी वो मेरी गर्लफ्रेंड बनी कहाँ है और वैसे भी अगर तुम मेरी गर्लफ्रेंड बन जाओ तो मोना जैसी 100 कुर्बान" मैं बोला

"वैसे मोना ने शर्त क्या रखी है" दीदी ने पूछा

"वो तो उसने अभी तक बताया ही नही" मैं बोला और मुझे एक बार फिर गड्ढे की वजह से ब्रेक लगाने पड़े और इस बार दीदी की बड़ी बड़ी

चुचियो के मुलायमपन का एहसास मेरी पीठ को हुआ जिससे मैं मस्त हो गया

"तो फिर रात इतनी देर तक तुम दोनो क्या करते रहे" दीदी ने पूछा अभी तक उसने नोटीस नही किया था कि उसके बूब्स मेरी पीठ से टकराए है

"क्या खाक किया, वो मेरे मोबाइल पर लगी हुई थी और इधर उधर की बाते कर रही थी, वैसे तुम क्या समझी थी" मैने पूछा और एक बार

फिर ब्रेक लगा दिया अबकी बार थोड़ा ज़्यादा ही हो गया था इस बार उसके बूब्स पूरी तरह से मेरी पीठ पर दब गये थे

"अरे देख कर गाड़ी चलाना" इस बार दीदी बोली और थोड़ा पिछे हो गई

"देख कर ही तो चला रहा हू अब रोड पर गड्ढे ही इतने है तो मैं क्या करूँ, वैसे तुमने बताया नही कि तुम क्या समझी थी" मैने कहा और

बाइक की स्पीड कम कर दी क्योंकि मैं नही चाहता था कि हम जल्दी शहर पहुच जाए और मेरे मज़े ख़तम हो जाए

अब तक दीदी के बूब्स को महसूस करके मेरा लंड भी टाइट हो चुका था

"मुझे क्या समझना था जिस तरह से मोना तेरे मोबाइल पर पॉर्न पिक्स देख रही थी और तू भी उसे गर्लफ्रेंड बनाने को मरा जा रहा था उससे

तो क्लियर था कि कल रात तुम दोनो बहुत आगे बढ़ने वाले हो लेकिन तू जो कह रहा है वो मानने वाली बात नही है" दीदी बोली

"तो मोना से ही पूछ लेना, फिर तो मेरी बात का यकीन आएगा ना" मैं बोला

"पूछा था मैने लेकिन उसने भी वही जवाब दिया जो तू कह रहा है" दीदी ने बताया

और तब तक एक बार फिर मैने ज़ोर का ब्रेक लगा दिया जिससे दीदी फिर मेरी पीठ से टकराई और बॅलेन्स बनाने के चक्कर मे उसने मेरी कमर को पकड़ना चाहा तब तक बाइक एक गड्ढे मे और उछली जिससे दीदी का हाथ मेरे खड़े लंड से टकराया और बाइक के संभालने तक वही मेरे खड़े लंड को दबाता रहा

"क्या कर रहा है.....आराम से नही चला सकता क्या मैं गिरते गिरते बची हू अभी" दीदी चिल्लाते हुए बोली

"अब इससे ज़्यादा स्लो कैसे चलाऊ, अच्छा एक काम करो तुम मुझसे चिपक कर और मुझे पकड़ कर बैठ जाओ जिससे तुम गिरोगी नही" मैं

बोला और एक बार फिर गड्ढा और रिज़ल्ट वही "ढपक्क...."

"हूंम्म.....अब मैं समझ गई तेरी चाल" दीदी बोली

लेकिन उसका हाथ अभी तक मेरे लंड पर ही था "क्या समझ गई" मैने पूछा

"यही कि तू बगैर मेरे गर्लफ्रेंड बने ही मुझसे गर्लफ्रेंड वाले मज़े लेना चाहता है और ये बार बार ब्रेक लगाने वाली स्टाइल ना बहुत पुरानी हो गई है समझा" दीदी बोली

"अरे वाह तुम तो बहुत समझदार हो लेकिन मज़े तो तुम भी ले रही हो" मैं बोला

"क्या....मैं कहाँ मज़े ले रही हूँ" दीदी कुछ समझी नही

"ज़रा देखो तो तुम्हारा हाथ कहाँ है" मैने उसे बताया

और जैसे ही उसे समझ मे आया कि उसने अपना हाथ मेरे लंड पे रखा है तो झट से हाथ हटा लिया उसका चेहरा शरम से लाल हो गया और बोली "लेकिन इसमे मेरी क्या ग़लती थी गिरने से बचने के लिए ही मैने वहाँ हाथ रखा था मुझे क्या पता था कि वहाँ तेरा......" और कहते कहते

वो चुप हो गई

"वहाँ मेरा क्या...." मैने उसे छेड़ा

"तुझे पता है कि वहाँ तेरा क्या है अब ज़्यादा बन मत, और ज़रा स्पीड बढ़ा हम लेट हो रहे है" वो बोली
 
"लेकिन फिर तुम कहोगी कि मैं जानबूझ कर गड्ढे कुदा रहा हूँ" मैं बोला

"तू उसकी चिंता मत कर मैं जानती हूँ कि तू वैसे भी गड्ढे कुदा कुदा कर अपने मन की करेगा इसलिए मैं वैसे ही तुझसे चिपक जाती हूँ कम से कम जल्दी तो पहुच जाएँगे" कहते हुए सच मुच दीदी मुझसे चिपक गई और मेरी कमर मे अपने दोनो हाथ लपेट लिए जिससे मेरी मुराद

पूरी हो गई और उसके बूब्स की गर्मी मेरी पीठ मे समाने लगी और मैने बाइक की स्पीड बढ़ा दी जिससे लगातार बाइक गड्ढो मे कूद रही थी

जिससे बार बार दीदी के बूब्स मेरी पीठ पर पूरे दब रहे थे जिसका मैं पूरा मज़ा ले रहा था और शायद वो भी मज़े ले रही थी क्योंकि बाइक

धीरे भी कूदती तो वो और ज़ोर से अपने बूब्स मेरी पीठ मे गढ़ा देती थी

खैर कोई 20 मिनट बाद हम उसके कॉलेज पहुच गये जहाँ एंटर करते ही मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी परीस्तान मे आ गया हूँ चारो तरफ

खूबसूरती जैसे बिखरी पड़ी थी पार्किंग के पास पहुचते ही कुछ लड़कियों ने दीदी को देख कर हाथ हिलाया और और मैने बाइक पार्क कर दी

"देख सोनू यहाँ किसी को बताना मत कि तू मेरा भाई है, समझा" बाइक से उतरते ही दीदी मुझसे बोली

"लेकिन क्यों" मैने पूछा

"लेकिन वेकीन छोड़ जैसा कहा है वैसा ही कर" दीदी बोली

"लेकिन इसमे मेरा क्या फ़ायदा है" मैं अडते हुए बोला

"तू मुझे गर्लफ्रेंड बनाना चाहता है ना तो ये सब उसी के लिए है" दीदी ने बताया

"लेकिन उसमे मेरा कॉन सा फ़ायदा है वो तो तुम सिर्फ़ नाम की ही बनोगी ना" मैं बोला

"हो सकता है आगे चल कर काम की भी बन जाउ" दीदी शर्मा कर मुझसे नज़रे चुराते हुए बोली

"अगर ऐसा है तो ठीक है, मुझे मंजूर है" मैं बोला

तभी वहाँ 3-4 लड़किया आ गई और आते ही सबसे पहले उन्होने मुझे जिस नज़र से देखा उससे मुझे सॉफ लगा कि वो लोग मुझसे इंपरेसेड है मैं भी अपनी आँखो से सभी के बदन का नाप करने लगा और एक बात मुझे समझ मे आई कि ये सभी लड़किया फिगर के मामले मे पर्फेक्ट

है सभी के बूब्स और गान्ड बड़े थे और सभी सुंदर थी वो सभी लड़किया नीचे जीन्स पहने हुई थी जबकि उपर कोई टॉप या टीशर्ट पहनी हुई थी

"वाउ......निशा कॉन है ये हॅंडसम" एक लड़की दीदी से हॅंड शेक करती हुई बोली

"बाय्फ्रेंड होगा, हैना निशा" दूसरी बोली

अभी दीदी कुछ बोलती इसके पहले ही तीसरी बोल पड़ी "अरे बता ना कॉन है ये"

"अरे मुझे तो कुछ बोलने दो" दीदी ने कहना चाहा

"हां तो बोल ना हम भी तो यही चाहते है" तीसरी वाली फिर बोली

"ये मेरा दोस्त है सोनू, सोनू ये सभी मेरी सहेलिया है पक्की वाली" दीदी बोली

"हाई गर्ल्स" मैं बोला

"हाई...हॅंडसम" तीसरी वाली मुझसे चिपकती हुई बोली जिससे उसका एक दूध मेरी बाँह से रगड़ खा गया

"ओह्ह्ह्ह.....दोस्त है यानी के लाइन ओपन है, सुना दोस्तो

ये निशा का सिर्फ़ दोस्त है इसलिए जिसका भी अपने बाय्फ्रेंड से मन भर गया हो वो यहाँ ट्राइ कर सकती है" तीसरी वाली बोली

"थॅंक्स निशा हमे इस हॅंडसम से मिलवाने के लिए, वैसे तुम रहते कहाँ हो सोनू" पहली वाली बोली और मेरा हाथ पकड़ लिया

"आए....छोड़ उसे, मेरे सामने ही मेरे बाय्फ्रेंड को लाइन मार रही हो" तभी दीदी उससे मेरा हाथ छुड़ाते हुए बोली "और तू भी ज़रा साइड हो

अगर इसकी बाँह रगड़ने से तेरा मन भर गया हो" दीदी मेरे साइड से चिपकी हुई लड़की से भी बोली

"लेकिन अभी तो तू कह रही थी कि ये तेरा दोस्त है" दूसरी वाली बोली

"अब मुझे क्या पता था कि तुम लोग खुलेआम डाका मारने लगोगी" दीदी बोली

"हाय....निशा तूने तो मेरा दिल ही तोड़ दिया क्या क्या सोच लिया था मैने इस हॅंडसम और अपने बारे मे" तीसरी वाली बोली

"जो भी तूने सोचा था ना तेरे बदले अब वो सब मैं कर लूँगी, ठीक" दीदी कलपते हुए बोली

"सॉरी सोनू, काश तुम मुझे इससे पहले मिले होते, अब तो सारी मलाई निशा ही खाएगी" तीसरी वाली बोली

"वैसे तुम चाहो तो कुछ तुम्हारे हिस्से मे भी आ सकती है" मैं हँसते हुए बोला

"अच्छा वो कैसे निशा के होते हुए भी" उसने पूछा

"डियर अपना दिल दरिया है इसमे तुम सभी समा सकती हो" मैने जवाब दिया

"क्यों निशा अब क्या कहती हो, करोगी इसे मेरे साथ शेर" उसने दीदी से पूछा

अब दीदी ने आँख निकाल कर मुझे देखा और बोली "तुम्हारे दरिया की लंबाई चौड़ाई मैं बाद मे नापति हूँ, अब पेपर का टाइम हो गया है तुम

जाओ और ठीक तीन घंटे बाद यही मिलो, ओके"

दीदी की बात सुनकर वो सभी लड़किया हँसने लगी "ओके.." मैं बोला और मैने बाइक स्टार्ट कर ली

"बाइ...." एक साथ वो सभी बोली

"बाइ" मैंने भी कहा और वहाँ से निकल गया अब मुझे तीन घंटे शहर मे घूम कर ही बिताने थे क्योंकि अगर गाओं भी जाता तो आने जाने मे बहुत टाइम लगना था उसपर रोड भी खराब था तो मैं शहर ही घूमने लगा.............
 
अपडेट 20

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दीदी का पेपर 12 बजे ख़तम होना था इसलिए पूरे 3 घंटे मैं यहाँ से वहाँ सहर मे भटकता रहा इस बीच मेरे दिमाग़ मे ये भी चल रहा था कि क्या दीदी मेरे साथ कुछ आगे बढ़ेगी या फिर बस यूँ ही मेरे मज़े लेती रहेगी वैसे घर से आते वक्त उसका मेरी पीठ पर जानबूझ कर बूब्स दबाना और फिर कॉलेज मे अपनी सहेली से ये कहना कि जो तूने सोचा है तेरे बदले मैं कर दूँगी मुझे एक उम्मीद दिखाए जा रहा था कि

निशा के साथ भी मेरा कोई गेम हो सकता है वैसे अगर अभी कुछ टाइम नही होता तो मुझे फरक भी नही पड़ना था क्योंकि मेरे पास मोना थी ही अपने लंड की प्यास बुझाने को लेकिन दीदी के सामने मोना कुछ भी नही थी इतना तो मैं पूरे यकीन से कह सकता हूँ कि अगर दीदी

मेरे सामने अगर पूरे कपड़े ही उतार देती तो शायद मैं उसे देखते हुए ही झड जाता

खैर जैसे तैसे मैने टाइम पास किया और 11.45 बजे मैं वापस दीदी के कॉलेज पहुचा तब तक मुझे भूख भी लग चुकी थी मैने सोच लिया था कि कॉलेज से निकलते ही किसी अच्छे से रेस्टोरेंट मे जाकर खाना खाना है और जैसे ही मैने गाड़ी पार्किंग मे लगाई मुझे दीदी और उसकी सुबह वाली सभी सहेलिया मेरी तरफ आती दिखाई दी

"इतनी देर लगा दी कहाँ था अभी तक मैं कब से वेट कर रही थी" दीदी ने मेरे पास पहुचते ही मेरी बोली

"वो दी..........." दीदी की डाँट सुनते ही मेरे मुँह से सच्चाई निकल ही गयी

"दी.......

अरे यार देखो तो निशा का बाय्फ्रेंड उसे दी कहता है" वही लड़की बोली जो सुबह मेरी बाहों से चिपकी थी

"अरे हां यार.....निशा क्या ये तेरा भाई है" दूसरी बोली

"क्या यार सोनू मैने तुम्हे समझाया था ना कि यहाँ मुझे ऐसे नही बुलाना" दीदी बोली लेकिन मेरी समझ कुछ नही आया

"तो क्या ये सच मे तेरा भाई है?" एक ने पूछा

"अरे नही यार ये मेरे गाओं का ही रहने वाला है और मेरा पड़ोसी है जो बचपन से ही मुझे 'दी' कहता है लेकिन अब हम गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड है तब भी ये गाओं मे मुझे दी ही कहता है मैने इसे आज सख़्त मना किया था की ये मुझे दी ना कहे लेकिन फिर भी इसकी ज़ुबान फिसल ही गई" दीदी ने अपनी पूरी कोशिश कर के आख़िर बात को संभाल ही लिया

"ओह्ह्ह......लेकिन यार ये तुझे दी क्यों बोलता है, क्या ये तुझसे छोटा है" तभी उनमे से एक लड़की ने पूछा

"पता नही, लेकिन हमारे गाओं मे सभी लड़के अपनी बहनो चाहे वो बड़ी हो या छोटी हो या पड़ोस की या जान पहचान की हो सभी लड़कियो को दीदी ही कहते है" दीदी ने अब बात को पूरी तरह संभाल लिया था

"ओह्ह्ह......" उनमे से एक ने हुंकारी भरी

"तो अब परसो का प्रोग्राम पक्का है ना" उस लड़की के हुंकारी भरते ही दीदी झट से बोली

"अब उसमे क्या शक है, जब हम सभी लोग साथ बैठ कर डिस्कस कर चुके है तो परसो पक्का ही है" दूसरी लड़की बोली

"ठीक है तो परसो वहीं मिलते है, वैसे कल मैं तुझसे और बात कर लूँगी" दीदी बोली

"लेकिन याद रखना कि वहाँ तेरे साथ तेरा बाय्फ्रेंड भी होना चाहिए वरना तुझे वापस भगा दिया जाएगा" उनमे से एक बोली

"ये तो है ना मेरे साथ मे मेरा बाय्फ्रेंड" दीदी मेरी तरफ इशारा करते हुए बोली

"मुझे इस पर भरोसा नही है कि ये तेरा बाय्फ्रेंड है ये तुझे दी भी बुलाता है" वोही फिर बोली

"अरे यार बताया ना कि हमारे गाओं मे...." दीदी ने कहना चाहा

"हमे तेरे गाओं मे क्या होता है उससे कोई मतलब नही अगर ये भी तेरे साथ होगा तो चलेगा लेकिन अगर ये होगा तो पहले तुम दोनो को अपने गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड होने का टेस्ट देना होगा पास हुए तो ठीक नही तो वहीं से वापस कर दिया जाएगा, समझी" वो फिर बोली

"कैसा टेस्ट?" दीदी ने पूछा

"कैसा भी, हम तुम्हे वही करने को कहेंगे जो गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड आपस मे करते ही रहते है उन्ही सब कामो मे से तुम्हे कोई एक काम करना होगा अगर ना कर पाए तो नमस्ते" वोही लड़की बोली

"लेकिन सिर्फ़ मेरे ही लिए टेस्ट क्यों" दीदी ने पूछा

"क्योंकि मुझे नही लगता कि तुम दोनो गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड हो बल्कि भाई बहन ज़्यादा लगते हो अपने चेहरे से" वो लड़की बोली

और उसकी बात सच भी थी हम तीनो भाई बहन का ही चेहरा आपस मे बहुत ज़्यादा मिलता था

"ये तेरी ग़लतफहमी है हम सच मे गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड ही है" दीदी आख़िरी कोशिश करते हुए बोली

"सफाई मत दे परसो जब वहाँ आएगी तो सब क्लियर हो जाएगा, ओके बाइ" वो लड़की बोली और वापस जाने को पलट गई और उसके पलटते ही बाकी की लड़किया जो सुबह मेरे साथ चिपकने को मरे जा राही थी बिना मेरे चेहरे को देखे ही वैसे ही पलट गई मैं समझ गया कि पहले वाली लड़की इनकी लीडर है

और इधर दीदी की हालत खराब हो चुकी थी वो आँखे बड़ी बड़ी करके मुझे देख रही थी

"आख़िर पूरे करे कराए पर पानी फेर दिया तूने, कितना समझाया था तुझे कि यहाँ किसी को पता नही चलना चाहिए कि तू मेरा भाई है" दीदी मुझ पर चिल्लाई
 
"लेकिन दी वो बात तो आपने संभाल ली थी उन्हे तो अपन दोनो का चेहरा मिलते देख ये लगा कि हम भाई बहन है" मैने सफाई दी

"हूंम्म,...... ये बात भी सही है लेकिन मेरी ये पिक्निक तो गई ना" दीदी उदास स्वर मे बोली

"ऐसे कैसे गयी, अभी वो सिर्फ़ अंदाज़ा लगा रहे है कि हम भाई बहन है उन्हे पक्का पता तो नही है ना" मैं बोला

"लेकिन बेटा तू टेस्ट की बात भूल गया, वो वहाँ हमे कुछ भी करने को कह सकते है फिर क्या करेंगे हम" दीदी ने पूछा

"क्या करने को कहेंगे?, हां....एक दम सेक्स करने को तो नही कहेंगे ना और बाकी तो हम जैसे तैसे कर ही लेंगे है ना" मैं उसे दिलासा देते हुए बोला

"बाकी भी कैसे कर लेंगे?" दीदी के चेहरे पर एक सवालिया निशान था

"देखो दी वो हद से हद किस करने को ही कहेंगे ना तो वो तो हम दोनो कर ही सकते है ना" मैं बोला

"जैसे आज तक हम ने बहुत बार किस किया है जो उनके सामने कर लेंगे...., बात करता है, हुनह"दीदी गुस्से से बोली, और उसकी बात भी सहीं थी हमने आज तक ऐसा कुछ भी नही किया था

"तो क्या हुआ थोड़ी प्रॅक्टीस कर लेंगे घर चल कर फिर तो हो जाएगा ना" मैं दीदी के मज़े लेते हुए बोला

"क्याअ......मैं तुझे किस लेने की प्रेक्टिस करवाउन्गी.....नो नेवेर" दीदी बोली

"तो ठीक है पिक्निक को भूल जाओ फिर" मैं बोला

मेरी बात सुनकर दीदी ने कुछ देर सोचा फिर बोली "लेकिन यार उन्हे हम पर शक हो गया है वो हमसे किस से भी कुछ ज़्यादा करवाएँगे"

"और क्या करवा सकते है वो" मैने पूछा

मेरी बात सुनकर अब दीदी चुप हो गई उसके चेहरे को देख कर सॉफ नज़र आ रहा था कि वो कहना तो बहुत कुछ चाह रही है लेकिन कह नही पा रही है मैने उसकी हालत समझी और बोला "देखो दी ऐसे कुछ नही होने वाला जो कहना है खुल कर कहो वरना अपनी पिक्निक को भूल जाओ और वैसे भी तुम मुझे अपना बाय्फ्रेंड मान चुकी हो भले ही नाम का सही इसलिए कुछ करो मत लेकिन बता तो सकती हो"

अब शायद दीदी ने भी हार मान ली थी क्योंकि वो ये पिक्निक मिस नही करना चाहती थी

"यार मैं तुझे बताना तो नही चाहती थी लेकिन जब मैने सबके सामने कबुल कर लिया है कि तू मेरा बाय्फ्रेंड है तो मुझे अब वहाँ तुझे ही लेकर जाना होगा अब मैं किसी और को वहाँ ले भी नही जासकती इसलिए सुन अब वो वहाँ मुझे तुझ से अपने बूब्स दबवाने को कहेंगे और इतने से

भी उनका मन नही भरा तो वो मुझे तेरा वो पकड़ने को कहेंगे" दीदी ने बताया

दीदी की बात सुन कर मेरी इक्षा तो हुई कि उनसे पुच्छू कि वो का मतलब क्या है लेकिन उसकी हालत जो कि बहुत नर्व्स थी को देख कर मैने ज़्यादा मज़ाक करना ठीक नही समझा

"ये तो मुसीबत हो गई, किस तक तो ठीक था लेकिन अब इन सब का क्या करे, मेरी बात मानो दी तुम उस पिक्निक को भूल ही जाओ अब" मैं बोला

"नही यार मेरी बहुत इच्छा है उस पिक्निक पर जाने की मैं भी अपनी लाइफ एंजाय करना चाहती हूँ" दीदी बोली

"लेकिन अब ये कैसे हो सकता है" मैं मिट्टी का माधव बने हुए बोला जबकि मुझे मेरी मंज़िल अपनी आँखो के सामने नज़र आरहि थी कि अब बस वक्त का ही तक़ाज़ा है वरना दीदी तो गई

"अभी चल, मैं कुछ सोचती हूँ बाद मे" दीदी बोली और चुप हो गई

फिर मैने बाइक स्टार्ट की और हम उसके कॉलेज से बाहर निकल गये और एक रेस्टौरेंट मे खाना खाया और वापस घर की तरफ चल दिए इस बीच हमारी कोई बात नही हुई और फिर गाओं का रोड शुरू हो गया जहाँ बड़े बड़े गड्ढे एक बार फिर हमारा इंतेज़ार कर रहे थे लेकिन इस बार दीदी ने मुझसे कोई दूरी नही बनाई बल्कि अब वो हर बार बाइक के उछल्ने या मेरे ब्रेक मारने पर मुझे अपने बूब्स का इंप्रेशन अच्छे से महसूस करवा रही थी जिससे जाने अंजाने ही मेरा लंड उसकी इस हरकत से खड़ा हो गया था और तभी बाइक एक गड्ढे की वजह से उच्छली और इस बार दीदी के बूब्स तो मेरी पीठ पर गढ़े ही लेकिन साथ ही उसका एक हाथ मेरे लंड के उपर आकर ठहर गया और ठहरने

के साथ ही उसके हाथ ने मेरे लंड को अपनी गिरफ़्त मे भी लेलिया मैं समझा कि ये अंजाने मे हुआ है जैसा सुबह हुआ था लेकिन बहुत टाइम हो जाने के बाद भी उसके हाथ से उसके हाथ से मेरा लंड नही छूटा बल्कि अब तो वो उसे दबा भी रही थी मैं जैसे मज़े से सातवे आसमान

पर था लेकिन मेरे मन मे कौंधते हुए सवाल ने कि दीदी ऐसे कर सकती है ने मुझे बोलने पर मजबूर कर दिया "दी एक बार फिर तुम्हारा हाथ ग़लत जगह पर पहुच गया है"

"मैं जानती हूँ" दीदी बोली और उसने मेरा लंड ज़ोर से अपनी मुट्ठी मे भींच लिया

"क्या....फिर तुम अपना हाथ अलग क्यों नही कर रही" मैने पूछा

"क्योंकि मुझे पिक्निक के लिए प्रॅक्टीस करनी है जो मैने अभी से ही स्टार्ट कर दी है" दी बोली और उसका हाथ अपना काम करता रहा

'वाउ.....मेरी तो चल पड़ी' मैने मन मे सोचा और बोला "ऐसे मे तुम्हारी प्रॅक्टीस तो हो जाएगी लेकिन मेरा क्या होगा, मैं कैसे कर पाउन्गा वहाँ वो सब"

"अभी तू ज़्यादा मत सोच बाइक चलाता रह और मुझे अपना काम करने दे, तेरी प्रेक्टिस के बारे मे घर चल कर बात करेंगे समझा" दीदी बोली और फिर चुप होकर अपने काम मे लग गई जिससे मैं बहुत मज़े मे था

"दी अगर तुम कहो तो मैं इसे बाहर निकाल देता हूँ, और अच्छे से कर लेना" मैने उसे छेड़ा

"अब ज़्यादा मत बन, जैसे चल रहा है वैसे चलने दे वरना भाड़ मे गई वो पिक्निक" दीदी ने मुझे धमकाया

अब मैने भी चुपचाप रहने मे ही अपनी भलाई समझी और धीरे धीरे बाइक चलाते हुए दीदी के बूब्स और उसके हाथ का मज़ा लेते हुए अपने घर की तरफ बढ़ने लगा जहाँ आज रात शायद मुझे दीदी के बूब्स अपने हाथो से दबाने को मिलने वाले थे..............
 
अपडेट 21

♡♡♡♡♡♡

दोपहर के करीब 2 बजे हम घर पहुच गये रास्ते भर दीदी ने जिस तरह पॅंट के उपर से मेरे लंड को सहलाया था और जिस तरह से मेरी पीठ पर अपने बूब्स दबाए थे उससे मेरा लंड अभी तक फुल टाइट था और मुझे पता था कि जब तक मैं उसे शांत नही कर देता वो मानने वाला

नही था इसलिए घर पहुचते ही मैने मूठ मारने की सोच लिया था

बाइक खड़ी कर के मैं घर के अंदर पहुचा तो देखा कि हॉल मे डॉली के साथ मोना बैठी हुई है आज मुझे मोना का चेहरा बहुत खिला खिला लग रहा था शायद रात की चुदाई का ही असर था और आज वो लग भी बहुत सेक्सी रही थी उसने एक ढीली ढली टीशर्ट और लोंग स्कर्ट

पहनी थी जब वो थोड़ा भी हिलती तो उसकी टीशर्ट मे उसके बूब्स झूलने लगते मैं समझ गया कि आज इसने ब्रा नही पहनी है

"हाई निशा, कैसा रहा पेपर" दीदी को देखते ही मोना ने पूछा

"बहुत अच्छा....." दीदी ने जवाब दिया

"और तेरा क्या हुआ भाई कुछ बात जमी कि नही" डॉली ने मुझसे पूछा

मैं समझ गया कि डॉली मुझसे कॉलेज के बारे मे पूछ रही है लेकिन मैं कुछ बोलता इसके पहले ही दीदी बोल पड़ी "कैसी बात, और इसे क्या काम था शहर मे"

"कुछ नही यार दी, तुम भी ना वो ये आज बहुत सज सवर कर तुम्हारे कॉलेज गया था ना तो वही पूछ रही हूँ की किसी लड़की ने लाइन दी

कि नही" डॉली बोली

"तू भी ना....चलो भाई अब मैं तो अपने रूम मे जाकर सोती हू रात भी देर हो गयी थी और सुबह भी जल्दी उठी थी, अरे मोना ज़रा तू भी मेरे साथ आ कुछ बात करनी है तुझसे" दीदी बोली और फिर मेरी तरफ़ देखा और उपर जाने लगी

दीदी की बात सुनकर मोना ने मेरी तरफ देखा तो मैने ना मे सिर हिला कर मैने इशारे मे उसे समझा दिया कि मैने दी को कुछ नही बताया

है अब मोना भी दीदी के पिछे चली गयी

"ओके डॉली अब मैं भी थोड़ा आराम करता हूँ" मैं बोला और अपने रूम मे जाने को हुआ

"ये इशारे कैसे हो रहे थे और दीदी को मोना से तेरे बारे मे क्या बात करनी है" तभी डॉली ने पूछा जाहिर था कि उसने हमारे इशारे देख लिए थे लेकिन अब

मुझे सूझ नही रहा था कि डॉली को क्या जवाब दूं अगर उसे ये कहता कि मैने कोई इशारा नही किया है तो मैं और भी फँस जाता और मैं

सोचने लगा कि डॉली को क्या बोलूं

"तू चुप क्यों है बोलता क्यों नही" डॉली ने फिर पूछा

"वो...वो बात ये है की...देख तू बुरा मत मानना हन, वो असल मे कल रात....." मैं बोलते बोलते रुक

गया मैने प्लान कर लिया था कि डॉली को अब कैसे फसाना है क्योंकि जिस दिन उसे पहली बार देखा था तभी से उसकी मोटी गान्ड की

थिरकन मुझे चैन नही लेने दे रही थी और मैने सोच लिया था कि भले ही इसकी चूत ना मिले लेकिन गान्ड तो मार के ही छोड़ूँगा

"कल रात...कल रात क्या...." डॉली के माथे पर बाल पड़ गये थे

"वो.....कल रात मोना ने मेरे मोबाइल पर कुछ पिक्स देख लिए थे" मैं बोला

"पिक्स देख लिए थे तो क्या हुआ, और पूरी बात एक बार मे बता यूँ रुक रुक कर मत बोल" वो बोली
 
"वो कल उसने मेरे मोबाइल मे कुछ गंदे पिक्स देख लिए थे जो मेरे दोस्तो ने मुझे व्हाट्सअप पर भेजे थे और बाद मे उसने दीदी को बोला कि इसके मोबाइल मे कुछ है लेकिन उस समय बताया नही लेकिन अब शायद दीदी उससे यही पूछने वाली है

इसलिए मैने उसे इशारो मे कहा कि वो दीदी को ना बताए" आख़िर मैने पूरी बात बोल ही दी

"गंदे पिक्स मतलब.." उसने पूछा

"वो...वो...लड़के लड़कियो के सेक्स वाले...." मैं बोला

मेरी बात सुनकर वो कुछ देर चुप रही फिर बोली "तेरा मोबाइल दिखाना ज़रा..."

"तू रहने दे मैं खुद ही अभी उन्हे डेलीट कर दूँगा" मैं बोला

"मैने तेरा मोबाइल माँगा है उन्हे डेलीट करने को नही कहा" डॉली बोली

"लेकिन तू मोबाइल का करेगी क्या" मैने पूछा

"मैं देखना चाहती हूँ कि वो पिक्स कैसे होते है" वो बोली

"लेकिन तू ये सब पापा मम्मी को तो नही बताएगी ना और वैसे भी उसमे मेरी ग़लती नही है ये पिक्स व्हाट्सअप पर आए थे" मैं बोला

"नही बताउन्गी चल अब अपना फोन दे" वो बोली फिर मैने अपना फोन उसे देदिया

"कहाँ है वो पिक्स" उसने मोबाइल हाथ मे लेते हुए पूछा

"व्हाट्स अप इमेज वाले फोल्डर मे" मैने बताया

"चल ठीक है अब तू जा सकता है अपने रूम मे मैं पिक्स देखने के बाद तुझे मोबाइल लौटा दूँगी" ये कहते हुए वो अपने रूम की तरफ बढ़ गई

'लगता है धीरे धीरे ये भी लाइन पर आजाएगी' सोचता हुआ मैं सीढ़िया चढ़ने लगा और लास्ट सीधी पर ही मोना मुझसे टकराई

"क्या हुआ दी क्या पूछ रही थी" मैने झट से उससे पूछा

"वही रात के बारे मे"

"तो तूने क्या कहा"

"मैने सब सच सच बता दिया कि रात को क्या हुआ"

"नही तू ऐसा नही कर सकती, सच बता तूने क्या कहा" मैं बोला

"अरे यार जब तूने ना मे इशारा किया था तो मैं समझ गई थी कि तूने उसे कुछ नही बताया है तो मैने भी बोल दिया कि कुछ नही किया और इधर उधर की बाते ही करते रहे" वो बोली
 
उसकी बात सुन कर मैने उसका गाल चूम लिया और बोला "अभी दी क्या कर रही है"

"वो तो सोने के लिए बेड पर लेट गई थी" उसने बताया

"तो अब तू कहाँ जा रही है" मैने पूछा

"अब तो मैं घर ही जाउन्गी लेकिन अगर तू कहे तो थोड़ी देर रुक सकती हूँ" वो शरारती मुस्कान के साथ बोली

मैं समझ गया कि इसकी चूत मे आग लगी हुई है और इधर मेरा भी लंड खड़ा हुआ था ही मैने उसे अपनी गोद मे उठाया और अपने रूम मे आ गया लेकिन मेरे पास टाइम कम था क्योंकि डॉली कभी भी यहाँ आ सकती थी मोबाइल लौटाने को जब मैने ये बात मोना को बताई तो

उसका मुँह छोटा सा हो गया

"अब क्या करे मैं तो बहुत उम्मीद लेकर आई थी" वो निराश होते हुए बोली

"तू चिंता मत कर मेरी जान भले ही हम खुल कर नही कर सकते लेकिन एक क्विकी तो हो ही सकती है" मैं बोला

"क्या मतलब" उसने पूछा

"मतलब झट पट वाली चुदाई" मैं बोला और मैने गेट बंद कर के अपने पॅंट और शर्ट उतार दिए और अंडरवेर भी नीचे कर ली अब मेरा खड़ा

लंड झटके मारते हुए मोना को सलामी दे रहा था जिसे वो बड़े गौर से देख रही थी

अब मैं मोना के पास पहुचा और उसके हाथ मे अपना लंड पकड़ा दिया और उसे दीवार से चिपका कर उसकी टीशर्ट मे हाथ डाल कर

उसके बूब्स दबाते हुए उसके होंठो को चूमने लगा इधर मोना भी मस्ती मे आकर मेरे लंड को मसल्ने लगी

कुछ देर बाद मैने उसके बूब्स छ्चोड़ कर उसकी स्कर्ट उपर कर दी और स्कर्ट उपर होते ही मेरी हैरत का ठिकाना नही था उसने पैंटी भी नही पहनी थी

"ये क्या तूने पैंटी नही पहनी" और मैने उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया

"मुझे पता था कि दिन मे हमे ज़्यादा मौका नही मिलेगा इसलिए मैने ब्रा पैंटी नही पहनी थी और उतारने का झंझट ना हो इसीलिए स्कर्ट पहनी है" उसने जवाब दिया

"अरे वाह तू तो बड़ी समझदार है" कहते हुए मैने उसकी चूत मे अपनी बीच वाली उंगली घुसा दी और आगे पिछे करने लगा उसकी चूत अब पानी छोड़ने लगी थी और डॉली कभी भी आ सकती थी इसलिए मैने अब ज़्यादा टाइम करना ठीक नही समझा और मोना की टीशर्ट उसके कंधो तक उठा दिया और उसकी दोनो जाँघो को अपनी बाहों मे उठा कर अपनी कमर से लगा दिया और उसके एक दूध को अपने मुँह मे भर कर चूस्ते हुए खड़े खड़े ही उसकी चूत मे लंड ठूंस दिया

"आहह....." उसके मुँह से एक हल्की सी सिसकारी निकल गई और उसकी आँखे बंद हो गई

इधर अब मेरे धक्के शुरू हो गये एक तो ये मोना की दूसरी चुदाई थी उस पर खड़े खड़े करने की वजह से लंड एकदम फसा फसा सा

उसकी चूत मे जा रहा था जिससे मेरे लंड मे दर्द सा होने लगा था

तो मैं उसे ऐसे ही गोद मे उठा कर बेड पर लाया और उसे बेड पर लेटा दिया और मैं नीचे खड़ा हो कर उसकी टाँगे पूरी फैला कर उसकी चुदाई करने लगा मेरे हर धक्के के साथ उसके बड़े बड़े बूब्स का हिलना मुझे रोमांचित किए जा रहा था और मेरे धक्को की स्पीड बढ़ती जा रही थी और कुछ ही देर मे मोना झड़ने लगी और उसकी चूत मेरे लंड को भिचने लगी जिससे मुझसे भी नही रहा गया और मैं भी भर भरा कर उसकी चूत मे अपना माल भरने लगा और उसके उपर ढेर हो गया

कोई दो मिनिट हम ऐसे ही पड़े रहे कि किसी के सीढ़िया चढ़ने की आवाज़ आई मैं झट से उठा और अपनी चड्डी लेके बाथरूम की तरफ भागा और मोना को गेट खोलने का इशारा कर दिया मोना ने भी झट से अपनी टीशर्ट नीचे की और अपने बाल ठीक करते हुए गेट खोल कर बेड का चादर ठीक करके बेड पर ही बैठ गयी...........
 
अपडेट 22

☆☆☆☆☆☆

मैं अभी भी बाथ रूम मे ही था जब डॉली रूम मे आई मोना बेड पर ही बैठी अपनी साँसे व्यवस्थित कर रही थी

"सोनू कहाँ है" डॉली ने आते ही पूछा

"बाथ रूम मे" मोना बोली

"दीदी सो गई क्या" डॉली ने फिर पूछा

"हां तभी तो मैं यहाँ बैठी हूँ लेकिन सोनू भी बाथरूम मे ही घुसा हुआ है" मोना बोली

"वैसे क्या काम था तुझे सोनू से" डॉली ने फिर पूछा

"कुछ नही बस ऐसे ही" मोना बोली

"कहीं ये तो नही चाहिए था" डॉली मेरा मोबाइल दिखाते हुए बोली

"इसका मैं क्या करूँगी" मोना बगैर कुछ समझे बोली उसे नही पता था कि मैने डॉली से क्या कहा था

"मुझे मत बना मुझे सोनू बता चुका है कि तू इसमे की वो वाली पिक्स देख चुकी है" डॉली बोली

"अच्छा वो.....वो तो मैं सारी देख चुकी हूँ अब क्या देखूँगी" मोना बोली

"अरे फिर से खुजली हो रही होगी तो देखने का मन किया होगा तेरा इसीलिए यहाँ सोनू का वेट कर रही है, है ना" डॉली बोली

"जी नही मुझे कोई खुजली उजली नही हुई, वैसे तूने भी ये पिक्स देख ही ली है तो बता कैसी लगी" अब मोना ने पूछा

"क्या बताऊ यार इतना मज़ा आया कि अभी तक मेरी गीली है" डॉली धीरे से बोली लेकिन मैं दरवाजे से कान लगाए था इसलिए मुझे सुनाई दे गया

"तो अब क्या करेगी तू, कैसे ठंडी करेगी अब अपनी चूत को" मोना बोली

"उंगली के अलावा और क्या कर सकती हूँ जबकि अभी एक बार कर भी चुकी हूँ" डॉली वैसे ही धीरे से बोली

"हूंम्म्म....सच मे यार बड़ी मजबूरी है अपनी भी उंगली से अलावा कुछ नही कर सकते" मोना आह भरते हुए बोली

"लेकिन यार ये सोनू इतनी देर से बाथरूम मे क्या कर रहा है" डॉली बोली

"जैसे तूने उंगली की है शायद वैसे ही वो भी अपना 'हाथ ठेला' धकेल रहा होगा" मोना हँसते हुए बोली

"'हाथ ठेला.....मतलब" डॉली कुछ समझी नही

"क्या तुझे पता नही की लड़के अकेले अपने आप को कैसे ठंडा करते है" मोना ने पूछा

"नही....." डॉली बोली

"तो फिर तूने इस मोबाइल मे क्या देखा, ला इधर दे मैं तुझे दिखाती हूँ" कहते हुए मोना ने मोबाइल अपने हाथ मे ले लिया और उसमे एक

चुदाई का वीडियो लगा कर उसे फॉर्वर्ड कर दिया और एकदम लास्ट पर ले आई जहाँ एक लड़का झड़ते वक्त अपना लंड चूत से

निकाल लेता है और फिर अपने हाथ से ही लंड हिलाते हुए झड जाता है

ये सब देख कर डॉली की आँखे फटी की फटी रह गयी

"ओह माइ गॉड....ये.....ये .....लड़के लोग ऐसा करते है"

डॉली के मुँह से निकला

"हां....इसी लिए तो मैने कहा कि हाथ ठेला धका रहा होगा वैसे इसे मूठ मारना कहते है" मोना ने उसे और ज्ञान दिया

"तू तो बहुत कुछ जानती है यार" डॉली के मुँह से निकला

"अब तुझसे बड़ी हूँ तो जानती भी तुझसे ज़्यादा ही होंगी ना" मोना बोली

"क्या तूने कभी किसी लड़के से मज़े लिए है" डॉली ने पूछा

"ना बाबा ना, मेरी इच्छा तो बहुत होती है लेकिन बदनामी के डर से मैने ऐसा कुछ नही किया ये आजकल के लड़के ना चोदते बाद मे है और वीडियो पहले बना लेते है और फिर खुद भी चोदते है और अपने दोस्तो से भी चुदवाते है जब मन भर जाता है तो उस वीडियो को बेच देते है

या फिर नेट पर अपलोड कर देते है" मोना झुरजुरी लेते हुए बोली

"तो क्या तू शादी से पहले सेक्स के मज़े नही लेगी" डॉली ने पूछा

"लगता तो यही है क्योंकि मेरा कोई भाई भी नही है जिससे मैं ये मज़े ले लेती" मोना बोली

"क्या......कैसी बाते कर रही है तू, क्या कभी कोई अपने भाई से भी ये सब करती है" डॉली हैरत से बोली

"ऐसा ना करके बाहर के लड़को के साथ चुदाई करने वाली लड़कियो को मैं पागल समझती हूँ, अब तू ही बता क्या कोई भाई बहन पर शक कर सकता है, क्या कोई भी भाई अपनी बहन को ब्लॅकमेल कर सकता है फिर जब भी चाहो मज़े कर सकते है घर पर ही और बदनामी का डर भी नही होता और रही बात कोई करता है या नही ये जानने की तो गूगले पर सिर्फ़ भाई बहन लिख कर ही सर्च कर के देख लेना फिर तुझे मालूम पड़ेगा" मोना ने लंबा चौड़ा भाषण ठोक दिया और उसकी बात सुनकर मैं खुश हो गया वो मेरा ही काम आसान कर रही थी

"मैं नही मनती की ऐसा होता होगा" डॉली बोली

"इसमे क्या बड़ी बात है ले तू खुद ही देख ले" कहते हुए मोना ने गूगले पर भाई बहन टाइप कर के सर्च कर दिया

और फिर रिज़ल्ट देख कर डॉली की आँखे फटी की फटी रह गयी........
 
अपडेट 23

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रिज़ल्ट देख कर डॉली की फटी की फटी रह गई सर्च रिज़ल्ट के जितने भी पेज उसने देखे सभी मे बस चुदाई ही चुदाई की कहानियाँ थी

"क्यों, अब क्या कहती है" उसकी हालत देख कर मोना ने पूछा

"मुझे यकीन नही हो रहा है कि ऐसा भी हो सकता है लेकिन ये सब तो कहानियाँ ही है ना" डॉली बोली

"कहानियाँ भी वैसे ही बन जाती है क्या मेडम, भले ही 10 कहानियाँ हो लेकिन उनमे से एक तो हक़ीकत होगी ही ना" मोना बोली

अब उसकी बात सुनकर डॉली चुप हो गई थी शायद उसे मोना की बात मे दम लगा था और मैने यही मौका सही समझा बाहर आने के लिए

"अरे डॉली तू कब आई" मैं बाहर आते हुए बोला

"उन्न..." मेरी आवाज़ सुनकर डॉली चौंक सी गयी वो शायद भूल गयी थी कि मैं भी इस रूम मे हूँ

"अरे क्या हुआ तू ऐसे चौंकी क्यो" मैं बोला

"वो...वो..तू इतनी देर से बाथरूम मे क्या कर रहा था" वो मेरी बात घूमाते हुए बोली

"अरे यार गर्मी लग गई थी और पेशाब मे जलन हो रही थी इसीलिए कमोड पर बैठा हुआ था" मैने बहाना मारा और बोला "ला अब मेरा मोबाइल दे मैं वो सारी पिक्स डेलीट कर दाता हू"

"यदि तुझे वो पिक्स अच्छी लगती है तो रहने दे मैं मम्मी पापा को नही बताउन्गी" वो धीरे से बोली

"अरे नही मुझे उनमे कोई ज़्यादा इंटेरेस्ट नही है वो तो व्हाट्सअप पर आ गई थी इसीलिए मोबाइल मे पड़ी हुई थी, उन्हे डेलीट कर देना ही ठीक होगा" मैं बोला और उनमे से एक पिक डेलीट कर दी

"अरे ये क्या कर रहा है मैने कहा ना कि रहने दे" वो झपट कर मेरे हाथ से मोबाइल छीनते हुए बोली

"लेकिन वो मुझे पसंद नही है" मैं बोला

"तुझे नही है तो क्या हुआ मुझे तो है" वो अपनी रो मे बोल गई

"क्या......" मुझे उससे ये उम्मीद नही थी की वो ऐसा बोलेगी

"वो...वो...." उसने कुछ कहना चाहा की तभी मोना कह उठी "अब जाने भी दे सोनू उसे पसंद है तो मत कर डेलीट और वैसे भी कॉन सा अंकल आंटी तेरा फोन चेक कर रहे है"

"कहती तो तू ठीक है" मैं बोला

"ओके अब मैं चलती हू बहुत टाइम हो गया है" मोना बोली

"चल मैं भी नीचे तक तेरे साथ चलती हूँ" डॉली मेरा मोबाइल बेड पर रखते हुए बोली

और फिर वो दोनो वहाँ से निकल गई और मैं भी सोने की कोशिश करने लगा और अभी अभी मोना के साथ की हुई मेहनत की वजह से जल्द ही मेरी आँख भी लग गई

शाम को मैं उठ कर नीचे आया पापा मम्मी और मेरी दोनो बहने हॉल मे ही बैठे थे

"आज तो बहुत सो लिए बेटा" पापा बोले

"हां पापा पता नही कैसे इतनी गहरी नींद लग गयी थी" मैने घड़ी देखी शाम के 7 बज चुके थे

"आप भी ना बस, उसे अभी काम ही क्या है, देख बेटा अभी छुट्टियों तक तो इनकी मत सुनना जो मन मे आए वही करना" मम्मी बोली

मम्मी की बात सुनकर पापा हंस दिए

"पापा मुझे आपसे एक बात कहनी थी" तभी दीदी बोली

"हां बेटा बोलो" पापा बोले

"पापा वो क्या है ना की परसो मेरी सभी सहेलिया पिक्निक पर जा रही है और मेरी भी बहुत इक्षा है उस पिक्निक पर जाने की तो क्या आप

मुझे जाने देंगे" दीदी सकुचाई हुई सी बोली

"कहाँ की है पिकनिक" पापा ने पूछा दीदी ने उस जगह का नाम बताया

"लेकिन ये तो बहुत दूर है हमारे गाओं से कोई 100 किमी होगा अब बेटा इतनी दूर तुझे अकेला कैसे भेज दे" पापा बोले

"पापा मैं अकेली कहाँ जा रही हूँ सोनू भी साथ जाएगा ना मेरे साथ इस बहाने वो भी घूम आएगा" दीदी झट से बोली

और मैने देखा की दीदी की मुझे साथ ले जाने वाली बात सुनकर डॉली के माथे पर बल पड़ चुके थे

"हां ये ठीक रहेगा इसी बहाने मेरा बच्चा भी थोड़ा घूम फिर लेता, क्योजी" मम्मी बोली
 
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