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Guest
अपडेट 27
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हम सभी लोग नाश्ता कर चुके थे और हॉल मे बैठे हुए दीदी मुझसे नज़र ही नही मिला रही थी और जब भी नज़र मिलती वो मुस्कुरा उठती जबकि डॉली मेरे सामने ही नही आ रही थी अभी जबकि सब लोग हॉल मे बैठे थे वो अभी भी किचन मे घुसी हुई थी तभी मेरे फोन बजा और मैं कॉल रिसीव करने हॉल से बाहर आ गया मैने देखा वो लॅंड लाइन का नो. था पता नही किसका नो. है ये सोच कर मैने फोन उठाया
"हेलो" मैं बोला
"हाई....हॅंडसम" दूसरी तरफ से किसी लड़की की आवाज़ आई
"कॉन" मैं बोला क्योंकि मैने उसे पहचाना नही था
"इतनी जल्दी भूल गये मुझे" उसने कहा
"अरे यार इसमे भूलने की बात ही क्या है जब मैने तुम्हे पहचाना ही नही तो" मैं बोला
"अरे कल ही तो तुमने मेरे साथ खड़े खड़े किया था और फिर भी मुझे नही पहचान रहे" उधर से कहाँ गया
"ओह्ह....मोना" मैं बोला
"हां....मोना" वो बोली
"लेकिन तेरे पास मेरा नंबर. कहाँ से आया" मैने पूछा
"अरे उस दिन जब तेरे फोन मेरे पास था ना तब उसमे से तेरी प्रोफाइल मे तेरा नंबर. याद कर लिया था मैने" उसने बताया
"ओह्ह.....तो कैसे फोन किया, आ रही है क्या आज, सच मे यार बहुत तंग कर रहा है मेरा पप्पू" मैं बोला
"नही मैं नही आ रही बल्कि तू आरहा है आज मेरे घर क्योंकि खाने के बाद पापा मम्मी बाहर जा रहे है और शाम तक ही वापस आ पाएँगे इसलिए आज पूरी दोपहर अपनी है" उसने बताया
"ओह्ह...लेकिन मैं तुम्हारे घर कैसे आ सकता हूँ, मतलब अपने घर मैं क्या बताउन्गा कि मैं क्यों वहाँ आरहा हूँ"मैं बोला
" वो मुझे नही पता लेकिन अगर कुछ करना है तो यही आना पड़ेगा" वो बोली
"ठीक है, सोचता हूँ कुछ" मैं बोला
"ठीक है फिर 12 बजे के आस पास आ जाना, ओके अब रखती हूँ" कह कर उसने फोन काट दिया
मैं भी वापस हॉल मे आ गया क्योंकि अभी बहुत टाइम था मोना के घर जाने मे इसलिए मैने सोचा कि वहाँ जाने का बहाना बाद मे सोच लूँगा
अब सभी के साथ डॉली भी हॉल मे बैठी हुई थी जहाँ पापा मम्मी को बता रहे थे कि उन्हे भी मोना के पापा के साथ जाना था
'चलो एक टेन्षन तो दूर हुई जब पापा ही घर पर नही होंगे तो कोई बहाना बनाना ही नही पड़ेगा क्यों कि मम्मी तो कुछ बोलने वाली है नही" मैने सोचा और बैठ गया
इधर डॉली मुझे वहाँ देखते ही अबनॉर्मल फील करने लगी और मैं समझ गया कि ये फिर यहाँ से भागने की फिराक मे है लेकिन मैं कोई मौका नही छोड़ना चाहता था इसलिए जैसे ही उससे मेरी नज़र मिली मैने उसे उपर जाने का इशारा किया लेकिन उसने वापस नज़रे झुका ली
मुझे थोड़ा गुस्सा आ गया मैने फिर उसे उपर जाने का इशारा किया लेकिन उसने नही का इशारा कर दिया अब तो सच मे बहुत गुस्सा आ गया था मैने उसे आँख दिखाई और बोला "वैसे डॉली सुबह तू मेरे रूम मे क्या कर रही थी"
मेरी बात सुनते ही उसकी सिट्टी पिटी गुम हो गई और चेहरा रुआंसा हो गया उसने मेरी तरफ बड़ी दयनीया नज़रो से देखा और बोली "वो...वो..मैं तो झाड़ू लगाने गई थी"
और उसने मुझे माफी माँगने का इशारा किया और मैने फिर उसे उपर जाने का इशारा किया तो उसने हां मे गर्दन हिला दी
"क्यों आज काम वाली बाई नही आई क्या" मैने पूछा
"नही बेटा आज उसे उसके घर मे कुछ काम है इसीलिए मैने डॉली से कहा था तुम्हारे रूम मे झाड़ू लगाने को" मम्मी बोली
"ओह्ह...तभी तो मैं कहूँ कि ये महारानी आज नौकरानी कैसे बन गयी" मैं बोला और सभी मेरी बात सुनकर हँसने लगे कोई और मौका होता तो डॉली ने मेरी ऐसी तैसी कर देनी थी लेकिन अभी वो दबी बिल्ली थी (इसका मतलब तो समझ ही रहे होंगे आप) इसलिए वो शांत रही
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हम सभी लोग नाश्ता कर चुके थे और हॉल मे बैठे हुए दीदी मुझसे नज़र ही नही मिला रही थी और जब भी नज़र मिलती वो मुस्कुरा उठती जबकि डॉली मेरे सामने ही नही आ रही थी अभी जबकि सब लोग हॉल मे बैठे थे वो अभी भी किचन मे घुसी हुई थी तभी मेरे फोन बजा और मैं कॉल रिसीव करने हॉल से बाहर आ गया मैने देखा वो लॅंड लाइन का नो. था पता नही किसका नो. है ये सोच कर मैने फोन उठाया
"हेलो" मैं बोला
"हाई....हॅंडसम" दूसरी तरफ से किसी लड़की की आवाज़ आई
"कॉन" मैं बोला क्योंकि मैने उसे पहचाना नही था
"इतनी जल्दी भूल गये मुझे" उसने कहा
"अरे यार इसमे भूलने की बात ही क्या है जब मैने तुम्हे पहचाना ही नही तो" मैं बोला
"अरे कल ही तो तुमने मेरे साथ खड़े खड़े किया था और फिर भी मुझे नही पहचान रहे" उधर से कहाँ गया
"ओह्ह....मोना" मैं बोला
"हां....मोना" वो बोली
"लेकिन तेरे पास मेरा नंबर. कहाँ से आया" मैने पूछा
"अरे उस दिन जब तेरे फोन मेरे पास था ना तब उसमे से तेरी प्रोफाइल मे तेरा नंबर. याद कर लिया था मैने" उसने बताया
"ओह्ह.....तो कैसे फोन किया, आ रही है क्या आज, सच मे यार बहुत तंग कर रहा है मेरा पप्पू" मैं बोला
"नही मैं नही आ रही बल्कि तू आरहा है आज मेरे घर क्योंकि खाने के बाद पापा मम्मी बाहर जा रहे है और शाम तक ही वापस आ पाएँगे इसलिए आज पूरी दोपहर अपनी है" उसने बताया
"ओह्ह...लेकिन मैं तुम्हारे घर कैसे आ सकता हूँ, मतलब अपने घर मैं क्या बताउन्गा कि मैं क्यों वहाँ आरहा हूँ"मैं बोला
" वो मुझे नही पता लेकिन अगर कुछ करना है तो यही आना पड़ेगा" वो बोली
"ठीक है, सोचता हूँ कुछ" मैं बोला
"ठीक है फिर 12 बजे के आस पास आ जाना, ओके अब रखती हूँ" कह कर उसने फोन काट दिया
मैं भी वापस हॉल मे आ गया क्योंकि अभी बहुत टाइम था मोना के घर जाने मे इसलिए मैने सोचा कि वहाँ जाने का बहाना बाद मे सोच लूँगा
अब सभी के साथ डॉली भी हॉल मे बैठी हुई थी जहाँ पापा मम्मी को बता रहे थे कि उन्हे भी मोना के पापा के साथ जाना था
'चलो एक टेन्षन तो दूर हुई जब पापा ही घर पर नही होंगे तो कोई बहाना बनाना ही नही पड़ेगा क्यों कि मम्मी तो कुछ बोलने वाली है नही" मैने सोचा और बैठ गया
इधर डॉली मुझे वहाँ देखते ही अबनॉर्मल फील करने लगी और मैं समझ गया कि ये फिर यहाँ से भागने की फिराक मे है लेकिन मैं कोई मौका नही छोड़ना चाहता था इसलिए जैसे ही उससे मेरी नज़र मिली मैने उसे उपर जाने का इशारा किया लेकिन उसने वापस नज़रे झुका ली
मुझे थोड़ा गुस्सा आ गया मैने फिर उसे उपर जाने का इशारा किया लेकिन उसने नही का इशारा कर दिया अब तो सच मे बहुत गुस्सा आ गया था मैने उसे आँख दिखाई और बोला "वैसे डॉली सुबह तू मेरे रूम मे क्या कर रही थी"
मेरी बात सुनते ही उसकी सिट्टी पिटी गुम हो गई और चेहरा रुआंसा हो गया उसने मेरी तरफ बड़ी दयनीया नज़रो से देखा और बोली "वो...वो..मैं तो झाड़ू लगाने गई थी"
और उसने मुझे माफी माँगने का इशारा किया और मैने फिर उसे उपर जाने का इशारा किया तो उसने हां मे गर्दन हिला दी
"क्यों आज काम वाली बाई नही आई क्या" मैने पूछा
"नही बेटा आज उसे उसके घर मे कुछ काम है इसीलिए मैने डॉली से कहा था तुम्हारे रूम मे झाड़ू लगाने को" मम्मी बोली
"ओह्ह...तभी तो मैं कहूँ कि ये महारानी आज नौकरानी कैसे बन गयी" मैं बोला और सभी मेरी बात सुनकर हँसने लगे कोई और मौका होता तो डॉली ने मेरी ऐसी तैसी कर देनी थी लेकिन अभी वो दबी बिल्ली थी (इसका मतलब तो समझ ही रहे होंगे आप) इसलिए वो शांत रही