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Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

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अपडेट 27

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हम सभी लोग नाश्ता कर चुके थे और हॉल मे बैठे हुए दीदी मुझसे नज़र ही नही मिला रही थी और जब भी नज़र मिलती वो मुस्कुरा उठती जबकि डॉली मेरे सामने ही नही आ रही थी अभी जबकि सब लोग हॉल मे बैठे थे वो अभी भी किचन मे घुसी हुई थी तभी मेरे फोन बजा और मैं कॉल रिसीव करने हॉल से बाहर आ गया मैने देखा वो लॅंड लाइन का नो. था पता नही किसका नो. है ये सोच कर मैने फोन उठाया

"हेलो" मैं बोला

"हाई....हॅंडसम" दूसरी तरफ से किसी लड़की की आवाज़ आई

"कॉन" मैं बोला क्योंकि मैने उसे पहचाना नही था

"इतनी जल्दी भूल गये मुझे" उसने कहा

"अरे यार इसमे भूलने की बात ही क्या है जब मैने तुम्हे पहचाना ही नही तो" मैं बोला

"अरे कल ही तो तुमने मेरे साथ खड़े खड़े किया था और फिर भी मुझे नही पहचान रहे" उधर से कहाँ गया

"ओह्ह....मोना" मैं बोला

"हां....मोना" वो बोली

"लेकिन तेरे पास मेरा नंबर. कहाँ से आया" मैने पूछा

"अरे उस दिन जब तेरे फोन मेरे पास था ना तब उसमे से तेरी प्रोफाइल मे तेरा नंबर. याद कर लिया था मैने" उसने बताया

"ओह्ह.....तो कैसे फोन किया, आ रही है क्या आज, सच मे यार बहुत तंग कर रहा है मेरा पप्पू" मैं बोला

"नही मैं नही आ रही बल्कि तू आरहा है आज मेरे घर क्योंकि खाने के बाद पापा मम्मी बाहर जा रहे है और शाम तक ही वापस आ पाएँगे इसलिए आज पूरी दोपहर अपनी है" उसने बताया

"ओह्ह...लेकिन मैं तुम्हारे घर कैसे आ सकता हूँ, मतलब अपने घर मैं क्या बताउन्गा कि मैं क्यों वहाँ आरहा हूँ"मैं बोला

" वो मुझे नही पता लेकिन अगर कुछ करना है तो यही आना पड़ेगा" वो बोली

"ठीक है, सोचता हूँ कुछ" मैं बोला

"ठीक है फिर 12 बजे के आस पास आ जाना, ओके अब रखती हूँ" कह कर उसने फोन काट दिया

मैं भी वापस हॉल मे आ गया क्योंकि अभी बहुत टाइम था मोना के घर जाने मे इसलिए मैने सोचा कि वहाँ जाने का बहाना बाद मे सोच लूँगा

अब सभी के साथ डॉली भी हॉल मे बैठी हुई थी जहाँ पापा मम्मी को बता रहे थे कि उन्हे भी मोना के पापा के साथ जाना था

'चलो एक टेन्षन तो दूर हुई जब पापा ही घर पर नही होंगे तो कोई बहाना बनाना ही नही पड़ेगा क्यों कि मम्मी तो कुछ बोलने वाली है नही" मैने सोचा और बैठ गया

इधर डॉली मुझे वहाँ देखते ही अबनॉर्मल फील करने लगी और मैं समझ गया कि ये फिर यहाँ से भागने की फिराक मे है लेकिन मैं कोई मौका नही छोड़ना चाहता था इसलिए जैसे ही उससे मेरी नज़र मिली मैने उसे उपर जाने का इशारा किया लेकिन उसने वापस नज़रे झुका ली

मुझे थोड़ा गुस्सा आ गया मैने फिर उसे उपर जाने का इशारा किया लेकिन उसने नही का इशारा कर दिया अब तो सच मे बहुत गुस्सा आ गया था मैने उसे आँख दिखाई और बोला "वैसे डॉली सुबह तू मेरे रूम मे क्या कर रही थी"

मेरी बात सुनते ही उसकी सिट्टी पिटी गुम हो गई और चेहरा रुआंसा हो गया उसने मेरी तरफ बड़ी दयनीया नज़रो से देखा और बोली "वो...वो..मैं तो झाड़ू लगाने गई थी"

और उसने मुझे माफी माँगने का इशारा किया और मैने फिर उसे उपर जाने का इशारा किया तो उसने हां मे गर्दन हिला दी

"क्यों आज काम वाली बाई नही आई क्या" मैने पूछा

"नही बेटा आज उसे उसके घर मे कुछ काम है इसीलिए मैने डॉली से कहा था तुम्हारे रूम मे झाड़ू लगाने को" मम्मी बोली

"ओह्ह...तभी तो मैं कहूँ कि ये महारानी आज नौकरानी कैसे बन गयी" मैं बोला और सभी मेरी बात सुनकर हँसने लगे कोई और मौका होता तो डॉली ने मेरी ऐसी तैसी कर देनी थी लेकिन अभी वो दबी बिल्ली थी (इसका मतलब तो समझ ही रहे होंगे आप) इसलिए वो शांत रही
 
"ठीक है मम्मी मैं आती हूँ" तभी दीदी बोली "अरे तुम कहाँ जा रही हो" मैने पूछा

"थोड़ा काम है थोड़ी देर मे आती हूँ" कह कर दीदी बाहर निकल गयी जाहिर है कि उसने पहले ही मम्मी को बता दिया था कि वो कहाँ करनी है

"ओके मम्मी मैं भी अपने रूम मे चलता हूँ" मैं बोला और डॉली को इशारा करते हुए उपर आ गया

मेरे रूम मे पहुचने के कोई 10 मिनिट बाद डॉली आई और सिर झुका कर खड़ी हो गयी शायद वो बहुत शर्मिंदा और डरी हुई थी

"उपर आने मे इतने नखरे क्यों कर रही थी तू" मैं बोला

"वो...वो..." उससे कुछ कहते ही नही बना

"अच्छा चल ये बता कि सुबह तू मेरे साथ क्या कर रही थी" मैं फिर बोला

"वो..वो..." वो फिर अटक गई

"अच्छा....करते वक्त कुछ नही लगा और अब बताने मे शरम आ रही है" मैं बोला

"सोनू वो क्या है ना कि कल मैने मोबाइल मे वो पिक्स देखी थी जिससे मुझे बहुत अजीब लग रहा था और आज सुबह जब मेरी नज़र तुम्हारे उस पर पड़ी तो मैं अपने आपको रोक नही पाई क्योंकि आज तक मैने किसी को भी ऐसे नही देखा था, प्ल्ज़ मुझे माफ़ कर दो अब दोबारा ऐसा नही करूँगी" वो गर्दन झुकाए रुआंसे स्वर मे बोली

"अच्छा....उस दिन जब मुझे पता भी नही था कि तू मेरी बहन है मेरे सिर्फ़ घूर के देखने पर ही तूने इतना भड़क कर दिखाया था और अब

जब तू जानती है कि मैं तेरा भाई हूँ तब भी तू मेरा ला... वो पकड़ रही थी" मैं उसके मज़े लेते हुए बोला

"सॉरी, वो मेरी ग़लती थी" वो बोली

"कॉन सी वाली, मुझे पर भड़कने वाली या सुबह जो किया वो वाली" मैने पूछा

"दोनो ही, प्ल्ज़ मुझे माफ़ कर दो और घर मे किसी को नही बताना प्ल्ज़" वो अपने हाथ जोड़ते हुए बोली उसकी आँखो मे पानी भी आ गया था

और उसकी इस तरह से देखते ही मुझे हँसी आ गयी और मैं ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा मुझे इस तरह से हँसते देख वो समझ नही पाई कि मैं

ऐसा क्यों कर रहा हूँ

"तू...तू...ऐसे हँस क्यों रहा है" उसने पूछा

"ज़रा अपना चेहरा तो देख फिर तुझे भी पता चल जाएगा कि मैं क्यों हँस रहा हूँ" मैं बोला

उसने मिरर मे अपना चेहरा देखा और बोली "ठीक ही तो है, अब जब मैं सॅड हूँ तो ऐसा ही दिखेगा ना"

"लेकिन यार तू फटतू बहुत है मेरे ज़रा से मज़ाक से तेरी ये हालत हो गई" मैं बोला

"मज़ाक....." वो आँखे बड़ी करके बोली

"और नही तो क्या.....सुबह जो तू कर रही थी उसमे तो मुझे भी मज़ा आरहा था बल्कि मैं तो सोच रहा था कि काश उस वक्त मैं नंगा ही होता" मैं बोला

"सोनू के बच्चे......यहाँ मेरी फटी पड़ी थी और तू मज़ाक कर रहा था" कहते हुए वो दौड़ कर मेरे पास आई और मेरे सीने पर बनावटी मुक्के

बरसाने लगी और बाद मे मेरे गले लग गई जिससे उसके बड़े बड़े बूब्स मेरे सीने मे गढ़ से गये और मैं भी उसकी पीठ सहलाने लगा

"सच बता डॉली तू उस वक्त क्या करने की कोशिश कर रही थी" मैं बोला

"जब मैने तेरे उसको देखा ना तो मेरी आँखो के सामने वो मोबाइल की पिक्स आ गयी और उसमे उस लड़के का जो वो था ना उससे मैं तेरे उसकी तुलना करने लग गयी और फिर जब मैने तेरे उसको हाथ मे पकड़ा तो उसकी मोटाई देख कर मेरी इच्छा उसकी लंबाई भी नापने की हुई तो मैं वो नापने लगी लेकिन इतने मे तू जाग गया" वो मेरे गले से लगे हुए ही बोली

"अच्छा अगर मैं नही जागता तो तू और क्या करती" मैने पूछा

"और तो कुछ नही करती क्योंकि टाइम बहुत हो गया था" वो बोली

"तुझे वो सब करते वक्त ज़रा भी नही लगा कि मैं तेरा भाई हूँ" मैं बोला

मेरी बात सुनकर अब वो मुझसे अलग होकर पास रखी कुर्सी पर गई और बोली "अब मैं तुझे तेरा ही जवाब दूँगी जो तूने दीदी के बारे मे दिया था की उपर से ही तो कर रही थी कोई सेक्स तो नही किया ना"

"क्या सच मे तू मेरे साथ कुछ करना चाहती है" मैने पूछा

"जी नही....मैं ऐसा कुछ नही करना चाहती वो तो बस इतना ही है की मुझे पॉर्न पिक्स देख कर ऑपोसिट सेक्स की तरफ कुछ क्यूरीयासिटी बढ़ गई थी तो मैं वो सब कर गई" वो बोली

"तो क्या इतनी जल्दी तेरी क्यूरीयासिटी ख़तम हो गई" मैं बोला

मेरी बात सुनकर वो चुप हो गई शायद वो खुल कर कुछ नही बताना चाहती थी

"ओके, तो ठीक है लेकिन जब भी तुझे और कुछ करना हो तू मेरे पास आ जाना मैं तेरी सभी जिग्यासा शांत कर दूँगी" मैं बोला

"हूंम्म..." वो बोली और उसने हां मे गर्दन हिला दी

अभी हम कुछ और भी बाते करते इसके पहले ही दीदी आ गई और डॉली को किचन मे मम्मी का साथ देने लेगाई क्योंकि आज काम वाली

बाई जो नही आई थी और इधर मैं सोचने लगा था कि क्या डॉली कुछ करेगी मेरे साथ या नही.......
 
अपडेट 28

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दोपहर के खाने के बाद मुझे लगभग कोई 12.15 बजे मुझे मोना का फोन आया कि पापा मम्मी जा चुके है और मैदान सॉफ है मैने भी मम्मी से कहा कि मैं ज़रा बाहर घूम कर आता हूँ और पैदल ही मोना के घर की तरफ चल दिया जो मेरे घर से कोई 5 मिनिट की दूरी पर था

चलते चलते मैं आजू बाजू भी देख रहा था मेरा गाओं पूरी तरह बदल चुका था पुराने झोपड़ो की जगह अब नये पक्के मकानो ने लेली थी और जो पहले से ही पक्के थे अब वो दोमंजिला हो गये थे खैर मैं मोना के घर पहुचा जैसे वो मेरे ही इंतज़ार मे थी और बेल बजाते ही उसने दरवाजा खोल दिया इस वक्त वो एक ब्लू टॉप मे थी जिसमे एक ही बाँह थी और उसने एक वाइट स्कर्ट पहनी हुई थी इस ड्रेस मे वो एकदम गुड़िया जैसी मासूम लग रही थी

"आ गया तू, चल जल्दी से अंदर आजा अब" मुझे आया देख वो बोली उसने मेरे अंदर जाने के लिए रास्ता दे दिया मैं भी अंदर जाकर सोफे पर बैठ गया तब तक मोना भी दरवाजा बंद करके मेरे पास आ गयी और कुर्सी पर बैठते हुए बोली "खाना खाया की नही"

"कैसी बात करती है जब मैं यहाँ मेहनत करने आया हूँ तो क्या भूखा आउन्गा" मैं बोला

"चल अच्छा हुआ जो तूने खाना खा लिया क्योंकि मैं भी खाना खा चुकी हूँ" वो बोली

तभी दरवाजे की घंटी बजी और हम दोनो ने ही एक दूसरे की तरफ देखा जैसे ये पूछ रहे हो कि कॉन आया हो सकता है इस वक्त लेकिन जवाब हम दोनो के पास नही था तो मोना अपने कंधे उचकाते हुए उठी और दरवाजा खोल दिया और दरवाजा खुलते ही मैने जो नज़ारा देखा तो मेरा मुँह खुला का खुला रह गया और मैं उठ कर खड़ा हो गया

दरवाजे पर एक बला की खूबसूरत लड़की खड़ी हुई थी जिसने इस वक्त साड़ी पहनी हुई थी उसका रंग एकदम सिंदूर की लाली लिए हुआ गोरा सा था और वो बहुत ही खूबसूरत थी उसके खूबसूरत चेहरे के नीचे लगभग 36 साइज़ के बूब्स थे जिसके नीचे चिकना सपाट पेट जिसमे उसकी गहरी नाभि सॉफ दिखाई दे रही थी उसकी कमर कोई28 की रही होगी जबकि उसके सुडौल नितंब जोकि बाहर को निकले हुए थे का साइज़ कोई 38 का होगा

मैं उसकी खूबसूरती मे दूँब कर पालक झपकाए बिना ही उसे देखने लगा और मुझे पता ही नही चला की वो दोनो कब मेरे सामने आकर खड़ी हो गयी

"ओये....कहाँ खो गया, जाग रहा है या सो गया"

मोना मेरे मुँह के सामने चुटकी बजाते हुए बोली "उम्म्म...." मैं जैसे नींद से जागा और मेरे मुँह से इतना ही निकला

मेरी हालत देख कर वो दोनो हँसने लगी और मैने झेप्ते हुए गर्दन झुका ली

"चल यार अब शर्मिंदा मत हो तू पहला लड़का नही है जिसकी ये हालत हुई है पता नही क्या बात है कि जो भी लड़का इसे देखता है उसकी यही हालत होती है, पता नही क्या जादू है इसके पास जो मुझ जैसी जवान लड़की साथ होते हुए भी हर कोई इस शादी शुदा को ही घूरते रहता है" मोना बोली

"अरे चल, शादी शुदा हुई तो क्या हुआ तुझसे एक साल ही तो बड़ी हूँ और वैसे भी शादी शुदा हूँ तब ये हाल है अगर मैं भी तेरे जैसे कपड़े पहनने लगू ना तो शायद मेरे साथ होने पर कोई लड़का तुझे देखे भी नही" वो सारी वाली लड़की बोली और मुझे ये बात बिल्कुल सही लगी मोना उसके सामने कहीं भी नही ठहरती थी
 
"जा...जा....रहने दे अपनी ही बढ़ाई अपने मुँह से किए जा रही है, वैसे इनसे मिलो सोनू ये मेरी बेस्ट फ्रेंड रूपा है वैसे तो ये मेरी दोस्त है लेकिन मैं इसे भाभी कहती हूँ क्योंकि इनकी शादी से पहले मैं इसके पति को भैया कहती थी वो हमारे ही साइड वाले कमरे मे किराए से रहते है और अपने ही गाओं के हॉस्पिटल मे काम करते है, और भाभी ये सोनू है निशा का भाई जिसके बारे मे मैने तुम्हे बताया था" मोना बोली

" ओह्ह्ह्ह......तो ये है वो सोनू जिसने तेरी....." अभी रूपा आगे कुछ कह पति इसके पहले ही मोना ने उसकी बात काट दी और बोली "बस - बस, आगे कुछ बोलने की ज़रूरत नही है, तुम दोनो बैठ कर बाते करो मैं अभी ठंडा लेकर आती हूँ गर्मी बहुत है ना"

मोना बोली और ठंडा लाने अंदर चली गई और सचमुच अबी मुझे गला तर करने की बहुत ज़रूरत थी क्यों की वो रूपा के जलवे देख कर ही सुख गया था

"हेलो...तो तुम हो निशा के भाई सोनू" रूपा ने अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ा दिया

"और आप रूपा भाभी" मैने उसका हाथ अपने हाथ मे ले लिया

क्या मस्त नरम हाथ था यार उसका की उसके हाथ को टच करते ही मुझे लगा जैसे मैने किसी रयी के गोले को छू लिया हो और उसके हाथो की गर्मी से मेरा लंड खड़ा होने लगा

"अरे भाभी वाभी छोड़ो वो तो मैं मोना की हूँ तुम मुझे सिर्फ़ रूपा बुलाओ" वो बोली

"ओके, हाई रूपा" मैं बोला और मैने उसका हाथ धीरे से दबा दिया

"बैठो, खड़े क्यों हो" उसने अपना हाथ वापस खिच लिया और सोफे पर बैठते हुए बोली तो मैं भी बैठ गया

"वैसे एक बात तो है की तुम हो बड़े हॅंडसम और चेहरे से भी बहुत सीधे सादे और भोले भले लगते हो लेकिन मुझे यकीन नही आरहा की अभी यहाँ आए तुम्हे 2 या 3 दिन ही हो रहे है और तुमने उस बंजारन लड़की के साथ साथ मोना को भी निपटा दिया" वो बोली

उसकी बात सुनकर मुझे जैसे करेंट लगा और मैं उछल कर खड़ा हो गया मैं समझ नही पा रहा था की ये सब इसे कैसे पता चला

"क्याअ...." मेरे मुँह से सिर्फ़ इतना ही निकला

"ज़्यादा चौंको मत, चुपचाप बैठ जाओ मैं सब बताती हूँ" मेरी हालत देख कर वो बोली

"ये...ये...तुम क्या अन्ट शन्ट बक रही हो, मेरी कुछ समझ नही आरहा है" मैं बोला क्योंकि मैं जानता था की ये सब सिर्फ़ मैं और मोना ही जानते है मैने इसे बताया नही और मोना खुद अपनी चुदाई की बात इसे क्यों बताएगी

"ज़्यादा बनो मत, अभी मोना ने तुम्हे बताया था ना की हम दोनो पक्के वाली सहेलिया है तो सुनो मोना और मैं हम दोनो एक दूसरे से अपनी कोई बात नही छुपाते हम दोनो का हर राज हम दोनो को पता है जिस रात तुमने मोना को कली से फूल बनाया था उसके अगले दिन ही मोना ने मुझको सब बता दिया था अपने बारे मे भी और उस बंजारन के बारे मे भी, अब तुम सोचोगे की ऐसी कैसी दोस्ती है इन दोनो के बीच मे तो सुनो जब तक तुम मोना की लाइफ मे नही आए थे तब तक मैं उसकी और वो मेरी हम दोनो ही एक दूसरे की खुजली शांत किया करते थे" वो मुझे दबाती हुई बोली

"खुजली, कैसी खुजली" मैने पूछा

"ज़्यादा बनो मत, खुजली मतलब चूत की खुजली, चूँकि अब तुम अपने लंड से उसकी खुजली मिटा रहे हो इसलिए शायद अब वो मेरे पास नही आ रही है इसीलिए आज मैं यहाँ आई थी लेकिन तुम मिल गये" वो बोली

उसकी बात सुन कर मैं सन्न रह गया क्योंकि मुझे उससे ये उम्मीद नही थी की वो इस तरह दो पल मे ही मुझसे इतनी गंदी भाषा मे बात कर लेगी तो मैं भी थोड़ा खुल गया और बोला "भाभी जहाँ तक बात रही मोना की तो वो तो कुवारि है इसलिए तुम उसे शांत करती हो लेकिन तुम तो शादी शुदा हो फिर तुम्हे क्यों ज़रूरत पड़ी मोना की"

मेरी बात सुन कर उसका मुँह उतर गया और कुछ उदास सी लगने लगी मुझे उसका उतरा हुआ चेहरा देख कर दुख हुआ तो मैं बोला "सॉरी रूपा अगर मैने तुम्हारा दिल दुखाया हो तो"

मेरी बात सुन कर वो कुछ देर चुप रही शायद वो कुछ सोच रही थी फिर बोली "देखो सोनू मैं अभी सिर्फ़ 23 साल की हूँ लेकिन मेरी शादी आज से 4 साल पहले ही हो चुकी है क्यो की मेरे पापा बहुत ग़रीब है और हम जैसी ग़रीब लड़कियों को अच्छा लड़का मिलना नामुमकिन होता है यही सोच कर मेरे पापा ने मुझे दोगुनी उमर से भी ज़्यादा वाले लड़के से मेरी शादी कर दी क्योंकि वो पैसे वाले थे उपर से सरकारी नौकरी पर भी थे अब कहाँ मैं 19 की और वो 40 के यहाँ तक की वो सुहागरात पर भी एक ही बार कर के सो गये जिसमे भी उनसे कुछ नही हुआ और फिर ज़िंदगी ऐसे ही गुज़रते रही आज हमारी शादी को 4 साल बीत गये तब भी हमारा कोई बच्चा नही है क्योंकि मेरे पति महीने भर मे सिर्फ़ एक या दो बार ही सेक्स करते है इसीलिए जब से मुझे मोना मिली मैं बहुत खुश थी लेकिन अब लगता है की तुमने उसे भी मुझसे छीन लिया है" वो बोली

"जब ऐसा है तो तुम किसी और आदमी से अपने आपको शांत क्यों नही कर लेती" मैं बोला

"ये सुनने मे अच्छा है लेकिन है बहुत बुरा अगर किसी भी वक्त मेरे पति को पता चल गया की मैं उनके अलावा भी कहीं और मुँह मार रही हूँ तो वो तुरंत ही मुझे छोड़ देंगे और फिर मुझे कोई नही अपनाने वाला और मेरे पापा तो वैसे ही ग़रीब है इसलिए मैने कभी किसी और के बारे मे नही सोचा" उसने एक बार मे ही अपनी दर्द भरी कहानी मुझे सुना दी
 
"हूंम्म..." मेरे मुँह से बस इतना ही निकला

"क्या बाते हो रही है" तभी वहाँ मोना ठंडा लेकर आई

"कुछ नही बस तेरी ही तारीफ हो रही थी" मैं बोला और मैने और रूपा ने अपने अपने ग्लास उठा लिए और ठंडा पीने लगे

"अच्छा क्यों?" ठंडा पीते हुए मोना ने पूछा जवाब मे मैने उसे वो सब बता दिया की किस तरह उसने रूपा के सामने अपना मुँह फाडा था और रूपा को मेरी और बंजारन की चुदाई के अलावा हम दोनो की चुदाई के बारे मे भी बता दिया था

"सॉरी यार, लेकिन भाभी मेरी पक्की सहेली है और हम कोई भी बात एक दूसरे से नही छुपाते इसलिए मैने इसे सब बता दिया" मोना गर्दन नीचे झुका कर बोली

थोड़ी देर के लिए हम सभी चुप हो गये क्योंकि कहीं ना कहीं ग़लती हम सभी की थी

"अच्छा चलो अब बेकार की बाते बंद करो और जब हम सब ही एक दूसरे के सभी राज जान गये है तो सभी पक्के वाले दोस्त बन जाते है और सभी कसम खाते है की कभी भी हमारे बीच की बाते बाहर नही करेंगे" रूपा बोली

"ओके...मुझे मंजूर है" मैं बोला

"मुझे भी" मोना बोली

फिर हम सभी बाते करने लगे रूपा मुझसे पूछ रही थी की मैने पहली बार मोना के साथ कैसे किया और मैं जवाब दे रहा था जबकि मोना कुछ सोचे जा रही थी

और कुछ देर बाद ही मोना बोली "सोनू क्या तुम मेरे लिए एक काम करोगे"

"क्या" मैने पूछा

"पहले वादा करो की मुझे मना नही करोगे" मोना बोली

"यार ऐसी भी क्या बात है जिसके लिए मैं तुझे मना कर दूँगा" मैने फिर पूछा

"कोई भी बात हो पहले वादा कर की मना नही करेगा" मोना फिर ज़िद भरे स्वर मे बोली

"चल वादा किया" मैं बोला

"तो फिर एक ही बात है बस, की तुझे वही सब रूपा के साथ भी करना होगा जो तू मेरे साथ करता है" मोना बोली

और उसकी ये बात सुनकर मैं और रूपा दोनो ही हैरान रह गये

"सच यार बेचारी बहुत परेशान है अपने बूढ़े पति से प्लीज़ इसकी मदद कर दे ना" मोना बोली

अब अँधा क्या चाहे दो आँखे और उपर से नेकी और पूछ पूछ मेरी नज़र सामने बैठी रूपा के बड़े बड़े बूब्स पर ठहर गई

"मुझे कोई परेशानी नही है बस ये हाँ कह दे" मैं मोना को देखते हुए रूपा की तरफ इशारा करते हुए बोला

"लेकिन यार अगर कहीं मेरे पति को मालूम पड़ गया तो....." रूपा डरते हुए बोली

"कैसी बात कर रही है यार, पहली बात तो सोनू ऐसा नही है की हमारी बाते बाहर जाए और फिर जो भी होगा मेरे घर पर ही होगा फिर तुम्हे ज़्यादा सोचने की ज़रूरत नही है" मोना बोली

अब रूपा कुछ देर तक सोचती रही फिर जैसे उसने फ़ैसाला कर लिया और बोली "ओके मुझे मजूर है"

"तो ठीक है हमने बहुत टाइम खराब कर लिया अभी तक अब चलो और बाकी टाइम का फ़ायदा उठाओ वरना पता नही और कौन आजाए" मोना बोली और खड़ी हो गयी

उसके साथ साथ ही रूपा भी खड़ी हो गयी और दोनो ही साथ साथ आगे बढ़ने लगी और दोनो के ही चूतड़ कपड़ो के उपर से देख कर मुझे ऐसा लग रहा था की अगर दोनो सिर्फ़ पैंटी मे होती तो शायद ऐसी लगती और मैं उन दोनो की मटकती गान्ड देखते हुए पीछे पीछे चलने लगा और मैं बहुत खुश भी था की आज एक साथ दो चूत मुझे चोदने को मिलने वाली है लेकिन मैं ये नही जानता था की ये सब करते वक्त मेरा कितना बुरा हाल होने वाला है.......
 
अपडेट 29

@@@@@@

हम तीनो मैन गेट लॉक कर मे मोना के बेडरूम मे आ गये थे वहाँ पहुचते ही मोना झट से मुझे चिपक गई और मेरे होंठो से अपने होंठ जोड़ लिए और मेरा लंड पैंट के उपर से पकड़ कर सहलाने लगी उसकी इस हरकत से मेरा लंड भी अब टाइट होने लगा और मैं एक हाथ उसके बड़े बड़े बूब्स दबाने लगा और एक हाथ उसकी गान्ड पर फेरने लगा उधर रूपा बड़े ध्यान से हमे देख रही थी

"बड़े बेसबरे हो यार तुम दोनो, आते ही शुरू हो गये और मुझे भूल ही गये" रूपा बोली

"सॉरी यार, लेकिन मेरी चूत मे आग लगी है अगर तुम नही आती तो शायद अभी तक मैं एक बार चुद भी जाती" मोना मेरे होंठ छोड़ती हुई बोली लेकिन उसका हाथ अभी भी मेरे लंड पर ही था

"लेकिन जल्दी मे मज़ा नही है थोड़ा आराम से करो ना" रूपा बोली

"ना भाई ना, मुझे तो बहुत जल्दी है तुम दोनो करना आराम से, चल सोनू निकाल अपना लंड और ठूँस दे मेरी चूत मे और इसकी गर्मी निकाल दे" मोना अपने कपड़े निकालते हुए बोली

"लेकिन रूपा सही कह रही है हमे थोड़ा...." मैने कहना चाहा लेकिन मोना ने मेरी बात काट दी और बोली "मैने कहा ना पहले एक बार मेरा पानी निकाल दे फिर अगली बार हम आराम से ही करेंगे"

अब तक मोना पूरी नंगी हो गई थी जबकि मैं भी सिर्फ़ चड्डी पर ही था लेकिन अभी तक रूपा अपने पूरे कपड़ो मे थी

"अरे अब चड्डी भी उतार ना" मोना बेड पर अपनी टाँगे फैला कर लेट-ते हुए बोली

"यार हम दोनो तो नंगे हो जाएँगे लेकिन ये अभी तक वैसे ही है पहले इसे भी तो नंगी करो" मैं रूपा की तरफ देखते हुए बोला

"चल रूपा रानी अब तू भी अपने कपड़े उतार ही दे" अपनी चूत मे उंगली करते हुए मोना बोली मैने देखा इसकी चूत अब पानी बहाने लगी थी

"तुम ही आकर उतार दो ना" रूपा अपना निचला होंठ दबाते हुए मुझे देख कर बोली

इसकी बात सुनकर मैं आगे बढ़ा ही था की मोना चिल्लाई "ओये इतने नखरे क्यों कर रही है उसमे तो बहुत टाइम लगेगा और इधर मेरी चूत मे आग लगी हुई है, सोनू प्लीज़ उसे बाद मे नंगी कर लेना पहले एक बार मुझे ठंडा कर दे यार"

मोना की बात सुनकर मैं मुस्कुरा दिया और रूपा से बोला "ओके रूपा रानी पहले मैं इस चुदासी की आग बुझा दूँ फिर हम आराम से खेलेंगे तब तक तुम अपनी सारी तो उतार ही लो"

मेरी बात सुनकर रूपा ने हाँ मे गर्दन हिलाई और अपनी सारी उतारने लगी और तब तक मैं बेड पर मोना की दोनो टाँगो के बीच मे अपनी पोज़िशन ले चुका था जहाँ मोना अपने दोनो हाथो की उंगलियो से अपनी चूत की दीवारो को फैला कर उसका मुँह खोले लेटी हुई इंतज़ार कर रही थी की कब मेरा लंड इसकी चूत मे घुसे

मैने अपना लंड पकड़ा और उसकी चूत की दरार मे उपर नीचे करने लगा जिससे मोना की सिसकियाँ निकलने लगी और वो अपनी कमर आगे को धकेलने लगी की लंड अंदर चला जाए लेकिन मैं अभी उसे और तरसाने के मूड मे था तो मैं वैसे ही लंड को उपर नीचे करता रहा

"क्यों सता रहा है साले, डाल देना अब" मोना तड़पति हुई बोली और मैने गच्छ से अपना पूरा लंड एक ही बार मे जड़ तक उसकी चूत मे ठूँस दिया

"ओह्ह्ह्ह्ह्ह माँ......अबे कुत्ते क्या किया ये......इतना बड़ा मूसल एक बार मे ही पेल दिया...." मोना चिल्लाई दर्द के मारे उसकी आँखो मे आँसू आ गये थे

"साली कुतिया तू ही तो मारे जा रही थी अंदर लेने को ले अब झेल" मैं भी उसकी तरह गाली बजाते हुए बोला और

एक बार फिर लंड पूरा बाहर निकाल कर घुसेड दिया
 
"कुत्ता नही तू गधा है....इतना मोटा लंड गधे काही होता है.....अफ......हाए.....और ज़ोर से चोद मेरे गधे और ज़ोर से....." मोना मस्ती मे बोली

"ठीक है मेरी गधि आज मैं तेरी चूत का भुर्ता ही बना देता हूँ" मैं बोला और ज़ोर ज़ोर से मोना को चोदने लगा वो भी कमर उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी

मोना तो पहले से ही गरम और उतावली थी चुदाई के लिए इसलिए थोड़ी ही देर मे उसका पानी निकलने लगा और वो मुझे बाहों मे भर कर झड़ने लगी जबकि इस धुआधार चुदाई और मोना की गरम टाइट चूत की वजह से मेरे लंड ने भी उसकी चूत को पानी से भर दिया और उधर रूपा भी हमारी चुदाई देख कर गरम हो गई थी और चूत सहला रही थी

मैं कोई 30 सेकेंड्स तक मोना के उपर ढेर हुआ पड़ा था की मैने अपनी गान्ड की दरार पर किसी की उंगली महसूस की मैने पलट कर देखा तो वो रूपा थी जो मुझे उठने का इशारा कर रही थी मैं भी मोना की चूत से लंड निकालते हुए उठ खड़ा हुआ मेरे इस तरह से उठने से मोना ने आँख खोली फिर रूपा को देख कर उसने अपनी आँखे वापस बंद कर ली

मैं बेड से उतर कर रूपा के पास आ गया जो इस वक्त पेटिकोट और ब्लाउस मे खड़ी हुई थी उसके ब्लाउस मे उसके दूध कड़क हो कर अपने निप्पेल तन कर बाहर आने को मचल रहे थे जबकि उसका चेहरा इस वक्त वासना के नशे मे लाल होकर तमक सा रहा था

जैसे ही मैं उसके पास पहुँचा उसकी नज़र मेरे लंड पर गई जोकि अभी अभी झड़ने के कारण सिकुडा हुआ था और अभी उस पर मोना और मेरा दोनो का मिला जुला पानी लिपटा पड़ा था अब रूपा ने मेरे मुरझाए हुए लंड को पकड़ा और उसे खिचते हुए एक तरफ जाने लगी मैं उससे पूछना चाहता था की वो किधर जा रही है लेकिन मैं चुप रहा और उसके पीछे पीछे चलने लगा

मैं इसके पहले कभी मोना के घर नही आया था इसलिए मुझे नही पता था की मोना के रूम मे बाथरूम भी है रूपा मुझे सीधे वहाँ ले गयी और फिर अच्छे से साबुन लगा कर मेरे लंड को धोने लगी उसके इस तरह करने से मेरा लंड एक बार फिर खड़ा हो गया अब रूपा ने मेरे सुपाडे के उपर की चमडी को अलग किया और सुपाडे को अच्छे से धोया

मेरी समझ मे जब नही आया तो मैने पूछ ही लिया "तुम इसे इस तरह अच्छे से सॉफ क्यों कर रही हो"

"क्योंकि मैं नही चाहती की उस बंजारन की चूत का पानी मेरे मुँह मे या मेरी चूत मे जाए" वो मेरे लंड को धोती हुई बोली

"क्या...तुम इसे मुँह मे लेने वाली हो?" मैने पूछा

"ऐसे क्यों पूछ रहे हो, आज तक किसी ने तुम्हारा ये मूसल मुँह मे नही लिया क्या" उसने पूछा

"यार अभी तक दो को ही तो चोदा है उस बंजारन के साथ तो उतना टाइम नही था और मोना को मैने बोला नही, वैसे मन तो मेरा भी बहुत करता है लंड चुसवाने का" मैं बोला

"तो चलो आज मैं तुम्हारी ये इच्छा भी पूरी कर दूँगी क्योंकि मुझे लंड चूसने का बहुत शौक है और आज तक इतना मोटा और लूंबा लंड कभी भी मेरे मुँह मे नही गया है" वो बोली

"वैसे कितने लंड लिए है तुमने अभी तक" मैने पूछा

"ज़्यादा नही लेकिन 5 - 6 तो ले ही चुकी हूँ" उसने बताया

"लेकिन अभी तो तुम बहुत डर रही थी की पति को मालूम पड़ गया तो क्या होगा फिर ये लंड कैसे ले लिए" मैं बोला
 
"अरे यार अब मैं इतनी भी सीधी नही हूँ, कुछ तो मेरे गाओं के मेरे पुराने आशिको के लिए है गाओं मे और दो तो यहाँ से गाओं जाते वक्त ट्रेन मे लिए है अजनबियो के लेकिन उनसे चुदवाया नही है" उसने बताया

"वाउ...अजनाबियो के भी" मैं बोला

"अब उस वक्त हालात ही ऐसे बन गये की मुझे वो करना पड़ा था" वो बोली

"हूंम्म..." मेरे मुँह से निकला

अब तक रूपा मेरे लंड को धोकर टवल से पोंछ चुकी थी और हम रूम मे वापस आ गये जहाँ मोना भी बेड पर बैठ गयी थी

"अरे, अभी तक इसके कपड़े नही उतारे तूने" मोना मुझसे बोली

"नही, अभी तो ये मेरे लंड को सॉफ कर रही थी अपने मुँह मे लेने के लिए" मैं रूपा की तरफ देखते हुए बोला

"छी.....क्या सच मे तू इसका लंड अपने मुँह मे लेगी" मोना ने बुरा सा मुँह बनाते हुए रूपा से पूछा

"तो क्या हुआ....तूने फ़िल्मो मे नही देखा क्या" रूपा ने उससे पूछा

"लेकिन फिल्म वाली लड़कियो को तो पैसे मिलते है ना इसके लिए और ये कितनी गंदी जगह होती है जहाँ से ये लोग सू..सू करते है बाप रे बाप मैं तो कभी ऐसा नही करने वाली" मोना झुरजुरी सी लेते हुए बोली

"सब का अपना अपना ख्याल होता है लेकिन मुझे इसमे मज़ा आता है तो मैं करती हूँ" रूपा बोली और उसने मेरा लंड पकड़ लिया जो की मेरे पेट से चिपके हुए झटके मार रहा था

"अभी रूको पहले अपने कपड़े तो उतार लो" मैं बोला

"अभी नही, पहले मैं तुम्हारा लंड चूस कर उसका पानी पीना चाहती हूँ उसके बाद बाकी सब काम करेंगे" कहते हुए रूपा घुटनों के बल नीचे बैठ गई

कुछ देर तक उसने मेरे लंड को अपने एक हाथ से पकड़ कर गौर से देखा और फिर सो मेरे सुपाडे को जहाँ छेद होता है वहाँ अपनी जीभ से चाटने लगी और उसकी गरम जीभ के स्पर्श से मानो मैं जन्नत मे था थोड़ी देर तक उसने ऐसा करने के बाद मेरे सुपाडे को अपने होंठो के बीच दबा लिया और अपनी जीभ उसके छेद पर घुमाने लगी उसके मुँह की गर्मी होंठो के दबाव से मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे मेरा मुँह किसी चूत मे हो और चूत के अंदर से कोई इल्ली मेरे लंड पर चल रही हो और उधर उसकी उंगलिया मेरे अंडकोष पर चल रही थी की अचानक ही उसने मेरा लंड अपने मुँह मे भर लिया और मेरी तरफ देखा लेकिन इधर मेरी आँखे तो मज़े से बंद हो गई थी और मेरे दोनो हाथ मेरे कुल्हो पर थे और मेरा बदन धनुष जैसा अकड़ गया था जबकि उधर मोना मुँह फाडे ये सब देख रही थी

कुछ ही देर मे रूपा अपना मुँह आगे पीछे करते हुए मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी और फिर तो उसने हद ही कर दी जब उसने अपनी जीभ से मेरे टट्टो को चाटना शुरू करके अपने हाथ से मेरे लंड की मूठ मारने लगी मुझे ऐसा लगने लगा की मैं अब बस झड़ने ही वाला हूँ लेकिन अब फिर उसने मेरे लंड को मुँह मे भरा और फिर चूसना शुरू कर दिया बॅस....अब मेरी सहन शक्ति ने जवाब दे दिया और मैने उसके बाल पकड़ लिए और ज़ोर ज़ोर से उसके मुँह को चोदने लगा मेरा लंड उसके गले पर कहीं चोट मारने लगा जिसकी वजह से उसे सांस लेने मे भी तकलीफ़ होने लगी और वो मेरे लंड को अपने मुँह से निकालने की कोशिश करने लगी लेकिन मेरी पकड़ ज़्यादा मजबूत थी और मैं उसके मुँह मे धक्के पर धक्के लगाए जा रहा था सांस ना ले पाने की वजह से उसका चेहरा लाल सुर्ख हो चुका था उपर से उसे ख़ासी भी आ रही थी की तभी मैने आख़िरी धक्का लगाया और मेरा लंड उसके गले मे धार पर धार छोड़ने लगा झड़ने के कारण मेरी पकड़ ज़रा सी ढीली हुई तो उसने मेरे लंड को मुँह से निकालना चाहा लेकिन तब तक उसका पूरा मुँह मेरे पानी से भर गया था

अब मेरा लंड उसके मुँह से बाहर आ गया था और मेरे पैर थर थर कांप रहे थे जबकि रूपा उकड़ू हो कर हांप और खांस कर अपनी साँसे काबू मे कर रही थी मेरा बहुत सा पानी वो निगल चुकी थी जबकि बहुत सा खसने के कारण उसके मुँह से बाहर गिर रहा था और उधर ये सब नज़ारा देख कर मोना की आँखे फटी रह गयी थी

"जा...जानवर..." तभी मुझे रूपा की आवाज़ सुनाई दी जो हान्फते हुए मुझे देख रही थी......
 
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