• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
"अब जब आपने हुकुम सुना ही दिया है तो हम कॉन होते है कुछ कहने वाले आख़िर सरकार तो आप ही हो ना" पापा बोले और हँसने लगे उनकी बात सुनकर हम सभी के चेहरे पर मुस्कान आ गई

"तो बेटा प्रोग्राम क्या है और कब निकलना है" पापा ने पूछा

"हमे परसो सुबह 8 बजे कॉलेज पहुँच जाना है फिर वहाँ से सभी अपनी अपनी बाइक या स्कूटी से पिक्निक स्पॉट तक जाएँगे चूँकि शहर से वहाँ तक का रोड अच्छा है इसलिए जल्दी ही वहाँ पहुच जाएँगे और फिर शाम के 5 बजे वहाँ से वापस" दीदी ने बताया

"और खाने का क्या इंतज़ाम है, कही ऐसा ना हो के तू मेरे बेटे को भूखा ही रख दे" मम्मी ने पूछा

"ऑफ...ओह्ह्ह...मम्मी आप भी ना, बहुत से रेस्टोरेंट्स है वहाँ" दीदी झुंझलाते हुए बोली

"हाँ......फिर ठीक है, चलो अब मैं खाने की तैयारी करती हूँ" कहने के साथ ही मम्मी उठ गयी और पापा भी बाहर चल दिए जबकि मैं दोनो बहनों के साथ गप्पे लड़ाने लगा लेकिन डॉली के चेहरे पर अभी भी टेन्षन सॉफ दिखाई दे रहा था थोड़ी ही देर बाद मेरा फोन बजा मैने देखा वो गुड्डू का कॉल था मैं भी कॉल अटेंड करते हुए बाहर को निकल गया

(इधर मेरे बाहर निकलने के बाद)

जैसे ही मैं बाहर निकला डॉली झट से दीदी से बोली "जहाँ तक मैं समझ रही हूँ ये तुम्हारी वोही बाय्फ्रेंड वाली स्पेशल पिक्निक है जिसके बारे मे तुमने मुझे बताया था, है ना"

"हां....." दीदी टीवी देखते बोली

"तो फिर तुम सोनू को क्यों ले जा रही हो" डॉली ने पूछा

"अब यार मेरा कोई बाय्फ्रेंड तो है नही और मेरा बहुत मन है उस पिक्निक मे जाने का इसलिए सोनू ही सही" दीदी बोली

"लेकिन आज सोनू तुम्हारे कॉलेज भी जा चुका है और तेरी सहेलिया भी उससे मिल चुकी है फिर" डॉली बोली

"लेकिन वो थोड़े ही ना जानती है कि सोनू मेरा भाई है मैने तो उन्हे ये बताया है कि सोनू मेरा बाय्फ्रेंड है" दीदी हँसते हुए बोली

"क्या....तुमने ऐसा किया" डॉली हैरत से बोली

"उस पिक्निक मे जाने के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार थी फिर ये तो मामूली बात है" दीदी ने बताया

"लेकिन अब क्या करोगी, जैसा तुमने मुझे उस पिक्निक के बारे मे बताया था उस हिसाब से तो तुम फँस गई हो अब" डॉली बोली

"वो कैसे...." दीदी ने पूछा

"जब वहाँ तुम्हारी सभी सहेलिया वहाँ अपने बाय्फ्रेंड के साथ चिपकेगी, चुम्माचाटी करेगी और पता नही क्या क्या करेगी तब तुम क्या करोगी" डॉली बोली

"देख यार उन्हे दिखाने के लिए मैं भी सोनू से चिपकी रहूंगी और एक आध किस भी हो गया तो क्या फरक पड़ता है" दीदी ने जवाब दिया

"क्या...तुम अपने भाई के साथ ही किस करोगी" डॉली उसका जवाब सुनकर हक्का बक्का हो गई थी

"अरे किस की ही तो बात है मैं कॉन सा उसके साथ सेक्स कर रही हूँ और वैसे भी इन सात सालो ने दूरिया इतनी बढ़ा दी है कि उसके साथ भाई वाली फीलिंग ही नही आती" दी बोली

"लेकिन फिर भी वो अपना भाई है" डॉली बोली

"फ़र्ज़ कर डॉली कि अगर सोनू गाओं आने से पहले कुछ दिन शहर मे रुकता और हमारी उससे पहचान नही होती और मैं यूँ ही उससे अजनाबियो जैसे मिलती और फिर हम दोनो मे कुछ हो जाता तो और वैसे भी वो इतना हॅंडसम है कि कोई भी लड़की उसे मना नही कर सकती, फिर" दीदी बोली

दीदी की बात सुनकर डॉली थोड़ी देर सोचती रही वो असमंजस मे पड़ी हुई थी फिर बोली "वैसे क्या होता या ऐसे क्या होता ये सब मुझे नही पता लेकिन शायद तुम अच्छा नही कर रही हो कल तुम्हारी सहेलियों को मालूम पड़ गया की सोनू और तुम भाई बहन हो तो फिर तुम्हारी हालत क्या होगी" डॉली बोली

अब सोचने की बारी दीदी की थी

"कल का कल से देखा जाएगा अभी तो मुझे उस पिक्निक मे जाना है वैसे मुझे पूरा यकीन है कि उनमे से किसी को कभी भी पता नही चलेगा

कि सोनू मेरा भाई है" आख़िर मे दीदी बोली

दीदी की बात सुनकर डॉली ने हार मानने वाले अंदाज़ मे अपने कंधे झुका लिए और बोली "ठीक है लेकिन ये

याद रखना कि सोनू हमारा भाई है कही ऐसा ना हो कि वहाँ के मस्ती भरे महॉल मे बहक कर तुम सारी हदे तोड़ दो"

"तुझे क्या लगता है कि मैं ऐसा कर सकती हूँ?" दीदी ने पूछा

"नही- नही मुझे पता है कि तुम ऐसा नही कर सकती मैं तो बस बता रही थी" डॉली हड़बड़ाते हुए बोली

और तभी मैं वहाँ आ गया जिससे इन दोनो ने टॉपिक ही चेंज कर लिया और एक बार फिर हम गपशप मे बिज़ी हो गये...........
 
अपडेट 24

0000000000

मेरे अंदर आते ही उन दोनो ने टॉपिक चेंज कर दिया और फिर हम यूँ ही गपशप करने लगे

कोई आधा घंटा बाद डॉली ने दीदी से नज़रे चुरा कर मुझे उपर जाने का इशारा किया जिससे मैं हैरान रह गया कि ये ऐसा क्यों कर रही है और फिर उसने दोबारा इशारा किया तो मैं उलझन मे पड़े हुए कोई बनाना बना कर उपर अपने रूम मे आ गया मेरे आने के कोई 5 मिनिट बाद डॉली मेरे रूम मे आई

"क्या है इस तरह इशारे से मुझे उपर क्यों बुलाया" उसके आते ही मैने पूछा

"तुझसे एक बात करनी थी" वो बोली

"कैसी बात" मैने पूछा

"तो तू दीदी के साथ पिक्निक पर जा रहा है" उसने पूछा

"हां आज कॉलेज से आते वक्त दीदी ने बताया था कि परसो मुझे उनके साथ पिक्निक पर जाना है" अब मैं सम्भल गया था क्योंकि पिक्निक पर जाना कोई बड़ी बात नही थी लेकिन फिर भी डॉली मुझसे इस तरह दीदी से छुप कर पूछ ताछ कर रही थी तो कोई तो कारण तो होगा

ही शायद कहनी ये भी तो नही जानती कि वो पिक्निक सिर्फ़ बाय्फ्रेंड और गर्लफ्रेंड के लिए ही है अब मैं समझ गया था कि मुझे बहुत सोच समझ कर जवाब देना था

"दीदी ने और क्या बताया उस पिक्निक के बारे मे" उसने फिर पूछा

"और तो कुछ नही बस इतना बताया कि कहाँ जाना है और कब जाना है" मैं बोला

"और ये नही बताया कि वहाँ क्या होगा या क्या करना है" वो बोली

"वैसे तो कुछ नही बताया लेकिन पिक्निक मे होता ही क्या है बस घूमना, खाना, पीना और मस्ती, और क्या" मैं बोला

"लेकिन ये पिक्निक वैसी सिंपल पिक्निक नही है मैं जानती हूँ कि इस पिक्निक मे क्या होगा" वो बोली

"क्या होगा इस पिक्निक मे, और तू कैसे जानती है क्या तू भी कभी गई है ऐसी पिक्निक मे" मैने पूछा

"अरे मैं नही गयी लेकिन दीदी ने मुझे बताया था एक बार" वो बोली

"क्या होगा उस पिक्निक मे" मैं अंजान बनते हुए बोला

"वहाँ तुझे बहुत कुछ करने का चान्स मिल सकता है" वो शरारती मुस्कान के साथ बोली

"क्या करने का चान्स मिल सकता है मुझे वहाँ" मैने पूछा

"मैं बोल के तो नही बता सकती लेकिन दिखा सकती हूँ, ला तेरा मोबाइल बता ज़रा" इतना कह कर उसने मेरा मोबाइल माँगा

मैने उसे मोबाइल दे दिया उसने कुछ देर मोबाइल मे कुछ किया फिर मुझे एक इमेज दिखाई और बोली "ये करने को मिल सकता है"
 
मैने देखा उस इमेज मे एक कपल फ्रेंच किस मे लगा हुआ था

"और ये भी चान्स मिल सकता है" वो फिर बोली और मुझे एक फोटो और दिखाई जिसमे एक लड़का लड़की के बूब्स दबा रहा था

"और अगर तेरी किस्मत ने साथ दिया तो ये भी हो सकता है" कहते हुए उसने मुझे जो फोटो दिखाई उसमे लड़की एक लड़के को ब्लोवजोब दे रही थी

मैने खुशी का इज़हार किया और बोला "वाउ....कितना मज़ा आएगा ये सब कर के तू तो जानती ही है कि मुझे ये कितना पसंद है मैं तो चाहूँगा की इतने ट्रेलर की जगह सारी फिल्म ही बन जाए"

"ज़्यादा खुश मत हो पहले ये तो जान ले कि तुझे ये सब करना किसके साथ है" डॉली बोली

"किसके साथ" मैने पूछा

"जिसके साथ तू जा रहा है, यानी के दीदी के साथ" उसने बताया

"क्या...दीदी के साथ तू पागल तो नही हो गई" मैने चौंकने की शानदार आक्टिंग की

"अभी रुक सब बताती हूँ पहले ये बता कि आज कॉलेज मे दीदी ने जब तुझे अपनी सहेलियो से मिलवाया तो क्या उन्हे ये बताया था कि तू उनका भाई है" वो बोली

"नही....मेरे सामने तो उन्होने ऐसा कुछ नही बताया था" मैं बोला

"तो सुन पागल मैं नही दीदी हो गई है उस पिक्निक मे जाने के लिए जिसके लिए वो तेरे साथ यानी अपने सगे भाई के साथ भी ये सब करने को तैयार है" कहते हुए डॉली मुझे उस पिक्निक के बारे मे वो सब बहाने लगी जो मुझे पहले से ही पता था और मैं जानता था कि ये सब बताने के बाद उसका मुझसे पहला सवाल क्या होगा इसलिए उसकी बात सुनने के साथ मैने सोच लिया था कि मुझे क्या जवाब देना है

"तो अब बता, कर लेगा तू ये सब दीदी के साथ" बात ख़तम करते ही उसने मुझसे वो सवाल पूछा जिसका अंदाज मैं पहले ही लगा चुका था

अब मैं सोचने की आक्टिंग करने लगा और कुछ देर सोचने के बाद बोला "देख डॉली वैसे तो भाई बहन के रिश्ते मे ये सब ग़लत माना जाता है लेकिन मैं इसे ग़लत नही मानता मैं तो सोचता हूँ कि दीदी अच्छा ही कर रही है जो मुझे अपने साथ लेकर जा रही है मैं उसका भाई हूँ इसलिए उसका ग़लत फ़ायदा नही उठाउंगा लेकिन सोच अगर मेरी जगह दूसरा होता तो जो तूने फोटो मे बताया है उसके आगे भी सब कुछ

कर लेता और फिर पिक्निक मे ही नही उसके बाद भी और फिर आगे जाकर पता नही क्या क्या करता इसलिए मुझे भी दीदी के साथ ये सब करने मे कोई परेशानी नही होगी बस वो लास्ट वाली फोटो मे जो है (ब्लोवजोब) वो ना हो तो बढ़िया है"

मेरी बात सुनकर वो कुछ देर सोचती रही फिर बोली "कह तो तू सही रहा है कि तेरी जगह कोई और होता तो पता नही कि क्या करता लेकिन जो तू कर रहा है वो सही है"

"मैं पहले ही कह चुका हूँ कि मुझे इसमे कुछ भी ग़लत नही लगता अगर भाई बहन दोनो तैयार हो तो, और वैसे भी नेट पर भाई बहन सर्च करो तो सिर्फ़ उनके सेक्स के बारे मे ही रिज़ल्ट शो होता है रक्षाबन्धन के बारे मे नही, और फिर पिक्निक मे जो होगा वो कोई इतना ज़्यादा नही होगा इसलिए मुझे कोई फराक नही पड़ता" मैं बोला

"और अगर दीदी तुझसे आगे भी सबकुछ करने को कहे तो....क्या तू कर लेगा" उसने पूछा

"पहली बात तो दीदी ऐसा कुछ कहेगी नही जहाँ तक मैं समझा हूँ वो सिर्फ़ इस पिक्निक को मिस नही करना चाहती है इसलिए वो ये सब

कर रही है फिर भी अगर उसकी ऐसी इच्छा हुई और उसने मुझसे कहा तो मैं उसके साथ ये सब करने को तैयार हूँ" मैने जवाब दिया

"और अगर कल को मैने भी तुझे अपने साथ ये सब करने को कहा तो...." उसने मुस्कुराते हुए पूछा

"तू कल की क्यों कह रही है तू बोल बस मैं तो अभी करने को तैयार हूँ" मैं उसे आँख मारते हुए बोला

"चल हॅट...मैं नही आने वाली तेरे चक्कर मे वो दीदी ही पागल हुई पड़ी है, और अब चल नीचे, खाने का टाइम हो गया है" वो झट से बोली

और तुरंत ही रूम से बाहर निकल गई मैं समझ गया की वो अभी इस टॉपिक पर ज़्यादा बहस नही करना चाहती थी लेकिन इतना तो मैं

समझ चुका था की दीदी तो बाद की बात है लेकिन ये चिड़िया उससे पहले ही चुग्गा चुग सकती है अब मैं भी उसके पिछे नीचे जाते हुए

उसकी मटकती गान्ड के मज़े लेने लगा.......
 
अपडेट 25

#########

रात का खाना हो चुका था और कुछ देर हम सभी हॉल मे बैठे बाते करते रहे इस बीच कई बार दीदी से मेरी आँखे मिली और कभी मैने उन्हे अपने लिप्स की तरफ तो कभी अपने लंड की तरफ इशारा किया जिससे वो बार बार शरमा रही थी और मुझे आँख दिखा कर ऐसा ना करने को कह रही थी जबकि डॉली के चेहरे से इस वक्त कुछ ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी सोच मे पड़ी हो

खैर रात के 10 बज चुके थे और अब मम्मी पापा ने सभी से अपने अपने रूम मे जाने के लिए कह दिया था सबसे पहले मैं ही उठा और उपर अपने रूम मे आ गया और आकर अपना मोबाइल चेक करने लगा आज भी व्हाट्सअप पर बहुत से मेसेज थे जिनमे अधिकतर ग्रूप मे आई हुई पॉर्न पिक्स और वीडियो ही थे मैं उन्हे ही देख रहा था की थोड़ी देर बाद मेरे रूम मे दीदी आई

"क्या देख रहा है मोबाइल मे" आते ही उसने पूछा

"कुछ खास नही बस दोस्तो के मेसेज चेक कर रहा था" मैं मोबाइल एक तरफ रखते हुए बोला

"हूंम्म...और अभी नीचे बहुत मस्ती चढ़ि हुई थी तुझे" दीदी मेरे पास बैठते हुए बोली

"क्यों ऐसा क्या किया वहाँ मैने" मैं जानबूझ कर बोला

"जैसे तुझे पता ही नही, कैसे इशारे कर रहा था तू वहाँ अगर कोई देख लेता तो" दीदी बोली

"अच्छा वो...अरे यार दी तुम भी ना अब मैं अपनी गर्लफ्रेंड से मज़े नही करूँगा तो और किस से करूँगा और वैसे भी मैं सबसे नज़रे बचा कर ही तो कर रहा था ना" मैं उसके गाल को सहलाते हुए बोला

"चल हाथ पिछे कर अभी मैं सिर्फ़ नाम की ही गर्लफ्रेंड हूँ तेरी और हाँ अब से अकेले मे मुझे दीदी कहना बंद कर दे ताकि कुछ आदत पड़

जाए वरना वहाँ पिक्निक मे भी दीदी ही कहेगा" दीदी मेरा हाथ हटाते हुए बोली

"तो फिर क्या कहूं" मैने पूछा

"कुछ भी, मेरा नाम ही ले लिया कर" वो बोली

"लेकिन तुम्हारा नाम लेने मे मुझे अच्छा नही लगेगा ना" मैं बोला

"तो फिर तू मुझे कुछ भी बुला लेकिन दीदी नही" वो बोली

"हूंम्म....तो फिर मैं तुम्हे 'जान' बुलाऊ" कुछ

टाइम सोचने के बाद मैं बोला

"ऐसे तो कोई अपनी गर्लफ्रेंड को बुलाता है, क्या तू मुझे ऐसे बुलाएगा" वो आँख दिखाते हुए बोली

"जब हमे वहाँ गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड ही बनकर जाना है और वही सब करना है तो फिर एक दूसरे को बुलाना भी तो वैसे ही पड़ेगा ना, वैसे तुम मुझे क्या कह कर बुलाओगी" मैं बोला

"हुम्म....कह तो तू ठीक रहा है लेकिन मैं तुझे सोनू कह कर ही बुलाउन्गी" वो बोली

"मैं बताऊ, मैं तुम्हे जान कह कर बुलाउन्गा और तुम मुझे जानू, ठीक है ना" मैने उसे छेड़ा

"बड़ा आया जानुउऊ.....मेरे लिए तू सोनू ही ठीक है" वो नाक सिकोडते हुए बोली

"हां....जानू तो वो ही था पार्क वाला" मेरे मुँह से अचानक ही निकल गया लेकिन मैं समझ गया की ग़लती हो चुकी है

और उधर मेरी बात सुनकर दीदी का चेहरा उतर गया जैसे मैने उसे गाली दे दी हो उसकी आँखे भी नम हो गई और उसकी गर्दन नीचे झुक गई

"सॉरी दी, मुझसे ग़लती हो गई मुझे ऐसा नही कहना चाहिए था पर पता नही कैसे मेरे मुँह से निकल गया" मैं तुरंत बोला

लेकिन दीदी कुछ नही बोली और उसकी आँख से आँसू की दो बूँद नीचे गिर गयी जिसे देख कर मुझे बहुत ही बुरा लगा और मैं कान पकड़

कर उसके सामने उठ-बैठक लगाते हुए उससे माफी माँगने लगा "सॉरी यार दीदी अब तो माफ़ कर दो देखो मैने कान भी

पकड़े है और कितनी उठक-बैठक भी लगा ली अब कहो तो मुर्गा भी बन जाता हू"

इतना कह कर सच मे मुर्गा बन गया जैसे टीचर स्कूल मे बनाते थे

अब मुझे मुर्गा बना देख उसे हँसी आ गयी और वो मेरे कान पकड़ कर मुझे उठाते हुए बोली "मैने अभी कहा था ना कि अकेले मे मुझे दीदी मत कहना"

"पहले बोलो माफ़ किया" मैं बोला

"हां...माफ़ किया" वो अपने गालो पर धूलक आए आँसू पोछते हुए बोली

मैं अब इस बारे मे ज़्यादा बात कर के उसका दिल और नही दुखाना चाहता था इस लिए बोला "तो जान उस टेस्ट के बारे मे क्या सोचा है तुमने"

"टेस्ट, कॉन्सा टेस्ट?" उसने पूछा

"अरे वोही टेस्ट जो वो हिट्लर टाइप की लड़की लेने को कह रही थी जिसे हमारे गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड होने पर शक था" मैने बताया

"अरे हां, वो तो मैं भूल ही गयी थी वैसे उसका नाम निशा है और वो हमारे ग्रूप की लीडर है और साली जो एक बार कह देती है वो पत्थर की

लकीर होता है क्योंकि सारे ग्रूप की लड़किया उसके पैसो से मौज करती है तो सब उसकी पित्ठू है" दीदी ने बताया

"मतलब वो तुम्हे टेस्ट लिए बगैर पिक्निक पर आने नही देगी" मैने पूछा
 
"हां बात तो ऐसी ही है, और पता नही वो टेस्ट मे हमे क्या करने को कहे क्योंकि वो तो कई बाय्फ्रेंड के साथ सेक्स भी कर चुकी है" दीदी बोली

"तो क्या जो तुमने कॉलेज से आते वक्त बताया था कि वो हमे किस, बूब्स प्रेस्सिंग और तुम्हे मेरा वो पकड़ने से भी ज़्यादा कुछ करवा सकती है" मैने फिर पूछा

"हां....." कहते हुए दीदी ने गर्दन हिलाई

"अब सबके सामने इससे ज़्यादा क्या करवा सकती है वो और वैसे भी कोई बहन अपने भाई का वो थोड़े ही पकड़ सकती है, देखना तुम्हारे इतना करने से ही वो मान जाएगी" मैं बोला

"तू अभी उसे अच्छे से जानता नही है ना इसलिए ऐसा बोल रहा है" दीदी बोली

"अब बाय्फ्रेंड गर्लफ्रेंड सबके सामने इतना ही तो कर सकते है ना" मैं बोला

"लेकिन उसके लिए गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड का रिश्ता ही सेक्स का रिश्ता है मैने उसे कई बार कॉलेज के पिछे के ग्राउंड मे खुले मे अपने बाय्फ्रेंड का वो चूस्ते हुए देखा है" दीदी बोली लेकिन शरम से उसका चेहरा लाल हो चुका था और उसकी बात सुनकर इधर मेरा लंड खड़ा हो गया था

"क्या कह रही हो.....मतलब वो तुम्हे भी सबके सामने वैसा करने को कह सकती है" मैं झूठी हैरानी से बोला

"सबके सामने तो नही लेकिन अकेले उसके सामने करने को तो कह ही सकती है" दीदी बोली

"फिर तो गड़बड़ हो गई, जितना हमने सोचा था वहाँ तक तो ठीक है लेकिन ये तो कुछ ज़्यादा ही हो जाएगा" मैं बोला

"जब ये नौबत आएगी तब देख लेंगे यार अभी तो उसके पहले का सोचना है" दीदी बोली

"हां....अभी तो हमने टेस्ट के बारे मे जो सोचा था उसकी भी तैयारी नही की है, तो चलो प्रॅक्टीस शुरू करते है" मैं मुस्कुराते हुए बोला

"तू भी कम नही है तुझे भी बस एक मौका चाहिए" उसने आँखे निकाली

"ऊए...पिक्निक पर जाने का शौक मुझे नही चढ़ा है और उस पर मैं तुम्हारी हेल्प ही कर रहा हूँ फिर भी मुझे ही आँख दिखा रही हो, चलो

उठो अपने रूम मे जाओ, मुझे नही जाना किसी पिक्निक विक्निक पे" मैं झूठे गुस्से से बोला

"अले..अले... मेरा सोनू तो गुस्सा हो गया मैं तो मज़ाक कर रही थी, चल बता कहाँ से शुरू करेगा अपनी प्रॅक्टीस" दीदी मेरे गाल गुलेचती हुई बोली

"मैने कहा ना मुझे नही जाना तुम्हारे साथ" मैं वैसे ही बोला

और बस.....मेरे इतना कहते ही दीदी ने दोनो हाथो से मेरा चेहरा पकड़ कर अपने होंठ मेरे होंठो से लगा दिए और मुझे साथ लिए खड़ी हो गई

उसके होंठो कांप रहे थे साँसे चढ़ गई थी और आँखे बंद हो गई थी मुझे ऐसे लग रहा था जैसे दो काँपते हुए अँगारे मेरे होंठो पर रख दिए गये हो

उसके नर्म होंठो की गर्मी जैसे मुझे पिघलाए दे रही थी मैने भी अपने हाथ उसकी कमर पर रख दिए और उसके होंठो को चूमने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी उसके बदन से आती मादक खुसबु मुझे उत्तेजना के समुंदर मे धकेले जा रही थी और मेरा लंड अपने विकराल रूप मे

आ कर उसकी नाभि के पास टच हो रहा था शायद वो भी मेरे लंड को महसूस कर रही थी और अब उसने मेरे होंठो को चूमना छोड़ कर उन्हे चूसना शुरू कर दिया था मैं भी मस्त होकर उसका साथ देने लगा कुछ ही देर मे उसकी जीभ मेरे मुँह मे घुस कर मेरी जीभ को ढूँढ

रही थी और जल्द ही उसे कामयाबी भी मिल गई और अब हम दोनो की जीभ आपस मे उलझ रही थी और हम दोनो के मुँह का सलिवा एक दूसरे के मुँह मे जा रहा था

इधर अब मेरी भी हिम्मत बढ़ गई थी मैने अपना राइट हॅंड उपर लाते हुए उसके लेफ्ट बूब को उसकी टी-शर्ट के उपर से ही सहलाना शुरू कर दिया मेरा हाथ उसके बूब पर टच होते ही उसके शरीर ने झटका सा खाया जैसे उसे करेंट लगा हो अब वो और ज़्यादा मुझसे चिपक गई

तभी मैने अपने लेफ्ट हॅंड से उसके राइट हॅंड को पकड़ा और उसे लोवर के उपर से अपने लंड पर रख दिया मेरे ऐसा करते ही उसने मुझसे नज़रे मिलाई और मैने उसकी आँखो मे देखते हुए अपने लंड पर उसका हाथ दबा दिया

अब उसने भी मेरा खड़ा लंड अपनी मुट्ठी मे भर लिया और उसे दबाने लगी जब तक मेरा हाथ उसके पिछवाड़े जाकर उसके कुल्हो को सहलाने लगा जबकि दूसरा हाथ जो अभी तक उसके बूब को सहला रहा था अब वो उसे दबाने लगा था दीदी के मुँह से आहे निकलने लगी थी और अब वो और भी ज़्यादा वाइल्ड हो कर मेरी जीभ को चूस्ते हुए मेरा लंड दबा रही थी

जितनी ज़ोर से वो मेरा लंड दबाती उतनी ही ज़ोर से मैं उसका चूतड़ और चुचि दबाता हम दोनो ही अब जैसे वासना मे डूब गये थे और पता

नही कब मेरा हाथ उसके बूब से हट कर उसके पेट पर आ गया था और उसकी टी-शर्ट उपर करने लगा था

मेरा हाथ अपने नंगे पेट पर लगते ही उसके शरीर ने एक झुरजुरी सी ली और इधर मेरा हाथ उसकी टी-शर्ट उठा कर उसकी ब्रा के उपर से उसके दूध को दबाने लगा हम दोनो ही मस्त हो चुके थे दोनो की ही साँसे धौकनी की तरह चल रही थी और पता नही ये खेल अभी और

कहाँ तक जाने वाला था की तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजी और हम दोनो जैसे होश मे आए

घंटी बजते ही वो छिटक कर मुझसे दूर हुई और बगैर नज़र मिलते ही भाग कर मेरे रूम से निकल गई

मैने फोन उठा कर देखा तो कंपनी का फोन था

"तेरी माँ की चूत मादरचोद लौडे लगा दिए इतने अच्छे सीन के" मेरे मुँह से निकला और मैं बाथरूम की तरफ बढ़ गया क्योंकि अब मुझे अपने फन निकाले खड़े कोबरा को शांत करना था वैसे अभी जितना भी हुआ था वो कम नही था और अभी तो कल का दिन और रात भी बाकी थी पिक्निक से पहले और इतना टाइम बहुत था मेरे लिए की परसो पिक्निक मे मैं दीदी को छोड़ सकता

और फिर बाथरूम मे जाकर मैं अपना हाथ ठेला चलाने लगा कभी दीदी के चेहरे और बूब्स को याद करके तो कभी डॉली की मोटी गान्ड को

...............
 
अपडेट 26

************

सुबह मेरी नींद खुली तो देखा की डॉली मेरे रूम मे झाड़ू लगा रही है झुकने की वजह से उसके बड़े बड़े बूब्स मेरी आखों के सामने थे मन

किया की अभी जाकर उन्हे जोरो से मसल दूं लेकिन ऐसा नही हो सकता था

एक तो सुबह का वक्त दूसरे डॉली के बूब्स के दर्शन कर के मेरे लंड महाराज पूरी तरह से तन के मेरे लोवर मे तंबू बना चुके थे मेरा मन किया की डॉली को अपने लंड के उभार के दर्शन कर्वाऊ लेकिन कैसे थोड़ा सोचने के बाद मैने कुछ आहे भरी जैसे कि मैं नींद मे सेक्स कर

रहा हूँ "आह.....उम्मह.....हां.....ऐसे...ही...."

मेरी पलके हल्की हल्की खुली थी जिससे मैं डॉली को देख पा रहा था मेरी आहो की आवाज़ सुनकर वो पलटी और मुझे नींद मे देख मुस्कुराने लगी लेकिन जैसे ही उसकी नज़र मेरे लोवर पर गई उसका मुँह खुला की खुला रह गया और वो एकटक मेरे लंड की तरफ देखने लगी शायद आज ज़िंदगी मे पहली बार उसने ओरिजिनल मे कोई लंड इस तरह देखा था

उसने एक बार और मेरे चेहरे पर नज़र डाली और मुझे सोता पाकर मेरे पास बेड पर आकर बैठ गई

और बड़े ध्यान से मेरे लंड को लोवर के अंदर ही झटके मारते हुए देखने लगी उसके होंठ ये सब देख कर सूख गये थे शायद इसलिए वो

अपने होंठो पर जीभ फिराने लगी थी

एक बार फिर उसने मेरे चेहरे की तरफ देखा मैं अभी भी गहरी नींद मे होने की आक्टिंग कर रहा था फिर पता नही उसके मन मे क्या आया

कि उसने अपना एक हाथ आगे बढ़ाया और बिल्कुल मेरे लंड के पास लाकर वापस खिच लिया

'साली हरामजादि पकड़ ही लेती एक बार' मैने मंन मे ही उसे गाली दी

अब फिर पहले उसने दरवाजे की तरफ देखा और मेरे चेहरे पर नज़र मार कर उसने फिर अपना हाथ आगे बढ़ाया और इस बार मेरा लंड

पकड़ ही लिया जोकि इस वक्त अपने पूरे शबाब पर था और इधर मैं सोच रहा था कि काश इस वक्त मेरा लंड नंगा होता

थोड़ी देर वो मेरा लंड ऐसे ही पकड़े रही फिर उसने उसी तरह अपनी मुट्ठी का राउंड बाहर निकाला और मेरे लंड की मोटाई का अनुमान लगाने लगी फिर उसने मेरे लंड को जड़ से अपनी एक मुट्ठी मे पकड़ा और उसके उपर दूसरी मुट्ठी से अब शायद वो मेरे लंड की लंबाई का

जायज़ा ले रही थी लेकिन उसकी दोनो मुठियो के बाद भी उपर कोई आधा इंच जगह खाली रह गयी थी

अब मुझे यही वक्त सही लगा आक्ट मे आने का क्योंकि वो लंड पहले ही पकड़ चुकी थी और मोटाई का अंदाज लगाने के बाद अब लंबाई भी चेक कर चुकी थी तो अब कुछ और करने को रह नही गया था और मैं उसे रंगे हाथ पकड़ना चाहता था

"ये क्या कर रही है तू डॉली...." मैं बोला अभी तक उसकी दोनो मुठिया मेरे लंड पर बँधी हुई थी

मेरी आवाज़ सुनकर वो ऐसे उच्छली जैसे उसे बिच्छू ने डंक मारा हो उसके हाथ मेरे लंड पर से हट गये थे और वो उच्छल कर खड़ी हो गई

थी उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ रही थी और साँसे तेज चलने लगी थी जिससे उसकी बड़ी बड़ी चुचिया ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे होने लगी थी

"ये क्या कर रही थी तू अभी" मैं बेड पर बैठते हुए बोला

"वो...वो......." उसके मुँह से आवाज़ ही नही निकल रही थी और उसकी आँखो मे आँसू आ गये थे उसके चेहरे पर अभी ऐसे भाव थे जैसे उस चोर के चेहरे पर होते है जिसकी चोरी रंगे हाथो पकड़ ली गई हो

"हां...हां....बोल" मैं उसकी हालत के मज़े लेते हुए बोला

"वो....मैं झाड़ू लगा रही थी" वो हकलाते हुए बोली

"क्यों आज काम वाली बाई कहाँ गई" मैने पूछा

"वो...वो..आज नही आ रही है" वो फिर बोली

"वो तो ठीक है लेकिन झाड़ू क्या तू बेड पर लगा रही थी और तेरे हाथ कहाँ थे" मैं बोला

अब तो पक्का उसकी वॉट लग गई थी वो चुप चाप मुझे देखने लगी

"अरे बताना ऐसे चुप क्यों है" मैं फिर बोला

"वो...वो........." अभी वो कुछ कह पाती की नीचे से मम्मी की आवाज़ आई वो डॉली को बुला रही थी

और डॉली तो मम्मी की आवाज़ सुनकर ऐसे भागी जैसे जान बची तो लाखों पाए
 
'भाग ले, भाग ले, जितना चाहे उतनी जल्दी भाग ले लेकिन आख़िरी बार अब तू फिर कभी भी नही भाग पाएगी' मैने मन मे सोचा और बाथरूम की तरफ जाने लगा क्योंकि मेरा लंड अभी भी हार्ड था और जल्द से पेशाब करके उसे बैठाना बहुत ज़रूरी था तभी मुझे दीदी के रूम से कुछ आवाज़ आई और मुझे रात की बात याद आ गई मैने अपना खड़े लंड की तरफ देखा और वैसे ही लोवर मे टेंट बनाए हुए दीदी के रूम की तरफ चल दिया

मैं दीदी के रूम मे पहुचा वो शायद अभी नहाने जाने की तैयारी कर रही थी और उसकी पीठ मेरी तरफ थी मैने मौके का फ़ायदा उठाया

और जाकर पिछे से उससे चिपक कर अपनी बाहें उसकी कमर पर लपेट ली और उसके कान मे धीरे से बोला "गुड मॉर्निंग जान...."

मेरे अचानक ही ऐसा करने से वो चिहुक गई और उसने मुझसे छूटना चाहा लेकिन मेरी बाहों की पकड़ मजबूत थी इसलिए वो कसमसा कर

ही रह गई अब तक मेरा खड़ा लंड उसकी गान्ड की दरार मे अच्छे से सेट हो गया था

"क्या कर रहा है सोनू, चल हट मुझे नहाने जाना है" वो बोली लेकिन उसने अबकी बार छूटने की कोशिश नही की शायद उसे भी अपनी गान्ड पर मेरा लंड अच्छा लग रहा था

"प्रॅक्टीस कर रहा हूँ जान प्रॅक्टीस, जो रात को अच्छे से नही कर पाया था" मैं अब थोडा आगे पिछे होते हुए बोला जिससे मेरा लंड उसकी गान्ड की दरार मे उपर नीचे होने लगा

"मुझे नही लगता कि तुझे प्रॅक्टीस की ज़रूरत है बल्कि तू तो मुझे एक्सपर्ट लगता है इन कामो मे, बाप रे बाप रात को कितना आगे बढ़ गया था तू वो तो भला हो उस फोन का वरना पता नही तू और क्या क्या कर जाता" अब वो भी मेरे साथ आगे पिछे झूमकर मेरे लंड की रगड़

अपनी गान्ड पर महसूस करते हुए बोली

"जान ये बात तो तुमने सही कही कि ये काम किसी को भी सीखना नही पड़ता ये सब अपने आप ही हो जाता है लेकिन हमारे बीच ये हो नही सकता था अगर हम अपने रिश्ते को ना भूलते उस वक्त" मैं अब अपने दोनो हाथ उसके बूब्स पर रखते हुए बोला

"हां ये तू सही कह रहा है अगर हमारे दिमाग़ मे अगर उस टाइम ज़रा भी हमारे रिश्ते के बारे मे सोच आजाती तो शायद हम कुछ नही कर पाते" कहते हुए उसने भी अपने दोनो हाथ मेरे हाथो पर रख लिए

अब मैं उसकी गर्दन पर अपने होंठ रखते हुए उसके बदन की मादक खुसबु मे डूबकर अपनी गरम सांसो से उसे पिघलाने की कोशिश करने लगा साथ ही साथ मैने अपने हाथ उसके बूब्स पर रख दिए लेकिन मैं उन्हे दबा नही पा रहा था क्योंकि दीदी ने इस वक्त अपने हाथो से मुझे

रोका हुआ था लेकिन मेरी कोशिश अभी भी जारी थी और धीरे धीरे ही सही मैं उसके दोनो कबूतरो को सहला ज़रूर रहा था जबकि मेरा लंड अभी भी उसकी गान्ड मे हलचल मचाए जा रहा था

मेरे लंड की हरकत और अपनी गर्दन पर मेरे होंठ और गरम सांसो ने दीदी की साँसे भारी कर दी थी और उसके हाथो की पकड़ मेरे हाथो पर ढीली हो है थी जिससे अब मैं उसके नरम मगर थोड़ा कड़ा पन लिए बूब्स को अब ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था लेकिन यहीं मुझसे एक ग़लती हुई और मैने उसके एक ताने हुए निपल को ज़ोर से च्युटि मे भर कर मसल दिया जिससे दीदी दर्द के मारे एक झटके से मुझसे अलग हो गई और मैं मुँह फाडे उसे देखने लगा

"बस, बहुत हो गया अब, अब तू हद से आगे बढ़ रहा है" वो आँख दिखाते हुए बोली

"लेकिन दी....कितना मज़ा आ रहा था" मैं बोला

"बहुत मज़े ले लिए तूने, अब तू जा और मुझे नहाने दे" वो मुझे बाहर की तरफ इशारा करते हुए बोली

"लेकिन दी वो प्रॅक्टीस......." मैने कहना चाहा

"अभी कोई प्रॅक्टीस व्रेक्टिस नही जितना हो गया ठीक है बाकी रात मे देखेंगे, अब तू जा" वो बोली

"रात मे पक्का ना...." मैने कहना चाहा

"अब तू जाता है या नही...." वो मेरी तरफ लपकी लेकिन उसके पास आने से पहले ही मैं उसके रूम से बाहर था और रूम से निकालते ही

मुझे भड़ाक से गेट बंद होने की आवाज़ सुनाई दी

'चल भाई आज दिन की शुरुआत तो जबरदस्त हुई है और रात का इशारा भी दीदी ने दे ही दिया है लेकिन दोपहर कैसे बीतेगी, चल उसका भी कोई ना कोई जुगाड़ हो ही जाएगा' सो मैं अपने रूम मे आते ही बाथरूम मे घुस गया अब भाई इतनी देर से खड़े हुए लंड को शांत भी तो करना था ना...........
 
Back
Top