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Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

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अपडेट 59

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मैने अपना लंड डॉली के मुँह से बाहर निकाला और मूठ मारते हुए ज़ोर ज़ोर की पिचकारिया छोड़ने लगा जो बेड पर यहाँ वहाँ गिरने लगी और उधर डॉली भी अपनी चूत मे उंगली ज़ोर ज़ोर से चलाने लगी और कुछ ही देर मे उसका भी बदन अकड़ गया और वो आँखे बंद करके झड़ने लगी और मैं भी बेड पर उसके साइड मे लेट कर हापने लगा था...................... .

अब आगे.

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कुछ देर हम दोनो ऐसे ही पड़े रहे फिर डॉली पहले उठी और बाथरूम मे जाकर फ्रेश होकर अपने कपड़े पहन कर आ गई अब तक मैं भी अपने कपड़े पहन चुका था और डॉली के आने बाद मैं भी बाथरूम होकर आ गया तो देखा की डॉली अभी भी रूम मे ही बैठी थी और मुझे बड़े ध्यान से देख रही थी

"क्यों क्या हुआ मज़ा नही आया क्या" मैं उसे अपनी तरफ ऐसे देखते हुए देख कर बोला

"नही मज़ा तो बहुत आया" वो बोली

"तो फिर क्या बात है तू मुझे ऐसे क्यों देख रही है" मैं बोला

"अब सोनू तू इतना भी नासमझ तो नही है जो किसी को हरकतों या बिहेवियर को नही पहचान सके या बातों को ना समझ सके" वो बोली

"ज़रा खुल कर बात यार की आख़िर तू कहना क्या चाहती है" मैं बोला और मैं समझ गया था की अब वो मंजू के बारे मे ही बात करेगी

"तू सब समझ रहा है लेकिन फिर भी सुन की जब मंजू तुझसे ढंग से बात भी नही कर रही है और तुझे इग्नोर कर रही है तो फिर तू क्यों उसके पीछे पड़ा हुआ है उससे जबरन क्यों चिपकना चाहता है" आख़िर डॉली ने बोल ही दिया

"देख डॉली तू जैसा समझ रही है ना वैसा कुछ नही है मैं तो बस इस बेचारी के बारे मे सब जान कर बस उसका दुख बाँटना चाहता हूँ और हाँ तेरी ये बात बिल्कुल सही है की वो मुझे इग्नोर कर रही है लेकिन पता नही क्या बात है की उसके इस तरह बिहेव करने के बाद मेरे अंदर से यही आवाज़ आती है की इस बेचारी को दया प्यार और सहानुभूति की ज़रूरत है इसलिए मैं सिर्फ़ ये कोशिश कर रहा हूँ की वो कैसे भी वो दर्दनाक हादसा भूल कर वापस नॉर्मल हो जाए" मैं बोला

"ओह्ह्ह्ह..तो अब जनाब के अंदर से आवाज़े आने लगी है की मंजू को खुश रखो, लेकिन ये तो बता दे की ये आवाज़े अंदर से कहाँ से आ रही है कहीं वही से तो नही जो अभी कुछ देर पहले मेरे मुँह मे था" डॉली मेरे लंड को तरफ इशारा कर रही थी शायद उसे ये लग रहा था की मैं मंजू को चोदना चाहता हूँ इसीलिए ये सब कर रहा हूँ

"अरे नही यार ऐसा कुछ नही है जब मैने पहली बार उसका दुखी चेहरा देखा था तभी मुझे लगा था की मुझे इसके लिए कुछ करना चाहिए और जब तूने मुझे उसके बारे मे सब बताया तो फिर तो मेरे दिल मे जैसे पक्का कर लिया अब चाहे मंजू मुझसे जैसा भी व्यवहार करे मुझे उसे नॉर्मल लाइफ मे लाना ही है, और वैसे उसके जैसा उदास और गमगीन चेहरा देख कर सिर्फ़ दया ही आ सकती है लंड कभी भी खड़ा नही हो सकता समझी" मैं बोला

"ओह्ह्ह्ह.तो आवाज़े दिल से आ रही है यानी के लव शव, प्यार मुहब्बत का मामला है" डॉली मुस्कुरा कर बोली

"तू फिर लाइन से हट रही है मैने कहा ना ये सिर्फ़ दया और सहानुभूति का मामला है इसमे प्यार मुहब्बत कहा से आ गया" मैं बोला

"लेकिन मुझे तो यही लगता है देख लेना की एक दिन कैसे तेरी दया प्यार मे और सहानुभूति मुहब्बत मे बदलती है" वो चॅलेंज करते हुए बोली

"ऐसा कभी नही होगा लेकिन डॉली यार तू मेरी मदद कर ना उस बेचारी का दुख दूर करने मे" मैने रिक्वेस्ट की

"अब इसमे मैं तेरी क्या मदद कर सकती हूँ" उसने पूछा

"देख इतना तो तू भी समझ चुकी है की वो मुझे अवाय्ड कर रही है और अगर मैं खुद अकेला उससे बात करने की कोशिश करूँगा तो वो मुझे भाव नही देगी लेकिन जब तू भी साथ रहेगी तो शायद वो धीरे धीरे मुझसे खुल जाए" मैने बताया

"तेरा मतलब है की मैं तुझे बार बार उससे बात करने मे मदद करू" वो बोली

"हाँ मेरा मतलब यही है" मैं बोला

"ओके मैं कोशिश करूँगी" वो बोली और मेरे रूम से बाहर निकल गई

अब मुझे उम्मीद थी की डॉली के बीच मे आजाने से शायद कुछ बात बने और फिर मैं भी नीचे आ गया और कुछ देर बाद मम्मी और मंजू भी वापस आ गई लेकिन मंजू का चेहरा देख कर एक बार फिर मुझे लगा की जैसे मैं असंभव को संभव करने की कोशिश करता रहा हूँ उसका चेहरा अभी भी हमेशा की तरह मुरझाया हुआ ही था

" हाई....." जैसे ही वो मेरे पास से गुज़री मैं बोला

लेकिन उसने सुन कर भी मेरी बात अनसुनी कर दी और उपर अपने रूम की तरफ बढ़ गई

मुझे ये अच्छा तो नही लगा लेकिन अब जब मैने सोच ही लिया था की उसकी ऐसी हरकतों को नज़रअंदाज करना है तो कोई फरक नही पड़ता था और वैसे भी अब डॉली मेरे साथ थी तो थोड़ा और भरोसा हो गया था मुझे अपने आप पर की जल्दी ही मंजू को दुख और गुम के इस भवरजाल से बाहर निकाल कर वापस मैं उसके चेहरे पर खुशी और मुस्कान खिला दूँगा..............
 
अपडेट 60

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अब डॉली मेरे साथ थी तो थोड़ा और भरोसा हो गया था मुझे अपने आप पर की जल्दी हो मंजू को दुख

और गुम के इस भवरजाल से बाहर निकाल कर वापस मैं उसके चेहरे पर खुशी और मुस्कान खिला दूँगा..............

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अब आगे..

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अब डॉली मुझे लेकर कई बार मंजू के साथ बैठी और मैने मंजू से बात करने की बहुत कोशिश भी की लेकिन पता नही उसे मुझसे क्या परेशानी थी की वो मुझसे बात करने को तैयार ही नही होती थी

खैर ऐसे ही दिन बीत-ते रहे और मेरी कोशिशो का कोई नतीजा सामने नही आया दीदी की गये कोई 2 महीने हो चुके थे और दौरान मैं चुदाई से पूरी तरह महरूम रहा डॉली कभी कभी मेरा लंड चूस कर मुझे ठंडा कर देती थी लेकिन आज तक उसने मुझे कभी भी अपने बूब्स या चूत को च्छुने नही दिया था एक दो बार मन किया की किशन के साथ जाकर उन बंजारनो को ही चोद लेता हूँ लेकिन फिर मंजू का ख़याल आते ही वो ख़याल मेरे दिल से निकल जाता था

इधर डॉली भी बहुत कोशिश कर रही थी की मंजू मुझसे खुल जाए लेकिन वो भी कामयाब नही हो रही थी एक दिन रात का खाना खाने के बाद मैं अपने रूम मे आ गया था और अपने मोबाइल मे लगा हुआ था मंजू अभी नीचे ही थी और डॉली और मम्मी के साथ काम मे हाथ बँटा रही थी वैसे भी वो बहुत लेट उपर अपने रूम मे आती थी अक्सर मेरे सो जाने के बाद और कभी कभी तो आती भी नही थी नीचे ही डॉली के साथ सो जाती थी

अभी रूम मे आए मुझे कोई आधा घंटा हुआ था की मेरे रूम का गैट खुला और डॉली अंदर आई और आते ही बेड पर मेरे साथ लेट कर देखने लगी जो मैं मोबाइल मे क्या कर रहा हूँ लेकिन वहाँ उसे अपनी पसंद का कुछ नही दिखाई दिया क्यों की इस वक्त मैं न्यू पर ई-बुक पढ़ रहा था

"क्या यार, ये क्या बकवास बुक पढ़ रहा है कुछ अच्छा सा लगा बहुत दिनों से कोई चूत गीली करने वाला मसाला नही देखा" डॉली मेरी टाँगो पर टाँग डालती हुई बोली और साइड से मुझसे चिपक गई जिससे उसके बूब्स मेरी बाँह मे दब गये

"नही यार आज कल मूड नही होता" मैं उससे थोड़ा दूर खिसकते हुए बोला

"क्यों, क्यों नही होता मूड" वो हैरत से बोली उसे उम्मीद नही थी की मैं उसके बदन का मज़ा ना लेकर उससे दूर हो रहा था

"बस यार ऐसे ही" मैं बोला

"हूंम्म्ममम.......अब ये बता की ऐसा दीदी और मोना के जाने की वजह से होरहा है या मंजू के आने की वजह से" वो सोचते हुए बोली

उसकी बात सुनकर मैने उसे थोड़ी देर गौर से देखा और बोला "तूने दो वजे तो गिना दी लेकिन तीसरी वजह नही बोली"

"तीसरी वजह? वो कौन सी वजह है" डॉली ने पूछा

"देख पहली वजह तो ये है की दीदी और मोना चली गई दूसरी ये है की मैं मंजू को खुश देखना चाहता हूँ और वो मुझे घास भी नही डालती और तीसरी वजह तू है जो उपर उपर से तो मज़ा ले लेती है लेकिन असली काम से दूर भागती है अब यही वजह है की मेरा मन इन सब कामो से दूर हटने लगा है" मैने बताया

"ओह्ह्ह्ह.लेकिन मैने तो तुझसे पहले ही कह दिया था की मैं ऐसे ही करूँगी फिर तूने मुझसे चुदाई की उम्मीद क्यों बाँधी और फिर कुछ नही मिलने से तो जो मिल रहा है वो ही अच्छा होता है ना" डॉली बोली

"यही तो लफडा है की तू जिसे अच्छा समझ रही है मेरे लिए वोही ग़लत है उपर उपर से करने से मेरी प्यास बुझने के बजाए और बढ़ जाती है और मैं तड़प्ता रह जाता हूँ क्योंकि मेरे लंड को अब चूत की आदत पड़ चुकी है वो मुँह से नही मानने वाला और फिर उपर से करने से अच्छा तो मुझे मूठ मारना पसंद है" मैं बोला
 
मेरी बात सुनकर डॉली कुछ सोचने लगी और मैं अपने मोबाइल मे बिज़ी रहा कोई 5 मिनिट बाद डॉली बोली "देख सोनू चुदाई के मज़े तो मैं भी लेना चाहती हूँ लेकिन डरती हूँ की कुछ उल्टा सीधा हो गया तो क्या होगा और दूसरी बात ये है की मैं अपनी वर्जिनिटी अपने पति के लिए बचा कर रखना चाहती हूँ इसलिए मैं तेरे साथ ये सब नही कर पा रही हूँ"

"अरे पागल आज कल इतने साधन है की उल्टा सीधा कुछ भी होने का सवाल ही नही है और जहाँ तक बात रही अपने पति को वर्जिनिटी देने का तो पहले ये तो सोच ले की क्या वो भी तेरे लिए शादी तक कुँवारा ही रहेगा और दूसरी बात ये सोच की क्या तुझे पक्का पता है की तू शादी होने के बाद ही मरेगी उससे पहले नही" डॉली की बात सुनकर मेरे मन मे जो आया मैं बोल उठा

"कह तो तू सही रहा है आजकल कौन सा लड़का शादी तक बगैर चुदाई के रहता है और ये बात भी सही है की कल किसने देखा है हो सकता है की शादी के पहले ही मेरा राम नाम सत्य हो जाए" मेरी बात सुनकर वो कुछ देर सोचने के बाद बोली

"तो फिर क्यू तडपा रही है अपने आपको और अपनी चूत को करले अपने मन की" मैं गरम लोहे पर हथौड़ा मारते हुए बोला

मेरी बात सुनकर वो कुछ देर तक कुछ सोचती रही फिर बोली "देख तेरे सेक्स से दूर भागने की पहली वजह दीदी और मोना है तो उन्हे तो मैं वापस ला नही सकती और दूसरी वजह मंजू है तो चल उसी पर ट्राइ करते है अगर वो तुझसे बात करने लगी तो एक प्राब्लम तो दूर हो ही जाएगी और वो ना मानी तो फिर तीसरी वजह जो मुझसे है उसके बारे मे सोचेंगे ओके"

"बस सोचेंगे ही कुछ करेंगे नही" मैं बोला

"करेंगे भी लेकिन पहले मंजू से तो निपट लेते है" वो बोली

"क्या बकवास कर रही है यार तू भी दो महीनो से इतनी कोशिश करने के बाद भी जिसके कानो पर जू तक नही रेंगी अब वो क्या मानने वाली है अपन जहाँ से शुरू हुए थे आज भी वहीं खड़े है और अब तो मुझे लगने लगा है की मैं ही ग़लत हूँ जो उस पत्थर की मूरत को हसने की कोशिश करने लगा हूँ शायद वो उसी काबिल है" मैं बोला

"लेकिन आख़िरी बार कोशिश करने मे क्या जाता है" वो ज़िद करते हुए बोली

"ठीक है कर ले अपनी आख़िरी कोशिश लेकिन पहले ये बता दे की इस कोशिश के लिए तुझे कितना टाइम चाहिए" मैं बोला

"क्या मतलब" उसकी कुछ समझ मे नही आया

"मेरा मतलब ये है की मंजू के मना करने के बाद तू तीसरी वजह यानी के अपने बारे मे कितने दिनों बाद कुछ करेगी" मैं बोला

"देख यार जो काम दो महीनो मे नही हो पाया उसके लिए दो हप्ते तो चाहिए ही होंगे ना" वो सोच कर बोली

"ओके दिए तुझे 15 दिन लेकिन उसके बाद तू नाटक मत करना वरना फिर समझ जाना" मैं बोला

"ओके उसके बाद मैं आर या पार ही करूँगी" डॉली बोली

"क्या मतलब" अब पूछने की बारी मेरी थी

"मतलब ये की या तो मैं तुझसे चुदवा लूँगी या फिर कभी भी तुझसे ऐसी बाते नही करूँगी" डॉली ने अपना फ़ैसाला सुनाया और ये सुनकर मुझे अपने आप पर गुस्सा आने लगा की क्यों मैने उसके साथ इतनी जल्दी की लेकिन अब क्या हो सकता था तीर कमान से निकल चुका था और आप तो ये जानते ही है की डॉली कितने गुस्से वाली और मूडी लड़की है तो अब मेरा कुछ भी कहना नही बनता था

"चल उठ, चलते है" वो खड़े होते हुए बोली

"कहाँ" मैं भी खड़े होते हुए बोला

"अपनी आख़िरी कोशिश करने के लिए मंजू के पास" वो बोली

"लेकिन वो तो नीचे थी" मैं बोला

"जी नही वो मेरे साथ ही उपर आई थी और अभी अपने रूम मे ही है" डॉली बोली और दरवाजा खोल कर बाहर निकल गई तो मैं भी उसके पीछे ही लिया

डॉली के बुलाने पर मंजू ने दरवाजा खोला तो डॉली अंदर दाखिल हो गई और मैं भी उसके पीछे पीछे अंदर चला गया.................
 
अपडेट 61

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डॉली के बुलाने पर मंजू ने दरवाजा खोला तो डॉली अंदर दाखिल हो गई और मैं भी उसके पीछे पीछे अंदर चला गया................. .

अब आगे.. ...

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रूम मे घुसते ही मेरी नज़र मंजू पर पड़ी और उसका चेहरा देखते ही मेरे दिल मे एक टीस सी उठी और मुझे लगने लगा की मैं शायद ग़लत कोशिश कर रहा हूँ क्योंकि मंजू की सूरत देख कर नही लगता था की उसके चेहरे पर कभी भी मुस्कान आ सकती है

अभी अकेले होने पर भी उसके चेहरे पर बहुत ज़्यादा उदासी थी और ऐसा लग रहा था जैसे वो रोई भी है

" हाई मंजू, नींद नही आ रही है क्या" डॉली मंजू के पास बेड पर बैठते हुए बोली जबकि मैं खड़ा ही रहा

"हाँ यार अभी से नींद कैसे आएगी" मंजू ने जवाब दिया

"तो फिर बाते करे" डॉली बोली

डॉली की बात सुनकर मंजू ने बड़ी उलझन से मुझे देखा और चुप रही मुझे लगा की शायद उसे यहाँ मेरी मौजूदगी पसंद नही आ रही थी और डॉली भी शायद समझ गई थी तो डॉली झट से मुझसे बोली "अरे सोनू तू खड़ा क्यों है वहाँ कुर्सी पर बैठ जाना"

"नही सोनू तुम यहाँ मत बैठो, तुम जाओ अपने रूम मे" डॉली की बात सुनकर मंजू तुरंत बोली

"ले.....लेकिन क्यों" मैने पूछा

"वो बताना ज़रूरी नही है बस इतना समझ लो की मैं तुमसे बात नही कर सकती और तुम्हारी मौजूदगी भी मुझे पसंद नही है" मंजू रूखे लहजे मे बोली और मुझे ऐसे लगा जैसे उसने मुझे सरे आम नंगा कर दिया हो उसके इस रवैये से मुझे बहुत इन्सल्ट फील हुई और मैं वापस जाने के लिए मूड गया

"रुक सोनू" तभी डॉली ने मुझे रोका और मंजू से बोली "यार मंजू तेरी प्राब्लम क्या है, जब से सोनू ने तेरी आपबीती सुनी है ये बेचारा बस इसी कोशिश मे है की तुझे सारे गम भूलने मे मदद कर सके और तेरी खुशिया वापस लाकर तेरे चेहरे पर मुस्कान खिला सके लेकिन तू हमेशा ही इसे अवाय्ड कर देती है और आज तो तूने हद कर दी जो उसे यहाँ से जाने को कह दिया और वो भी ये कह कर की तुम्हे उसकी मौजूदगी पसंद नही है"
 
डॉली की बात सुनकर मंजू चुप बैठी रही लेकिन डॉली जैसे मानने वाली नही थी वो फिर बोली "बोलो मंजू चुप क्यों हो, वो बेचारा तुम्हे खुश देखना चाहता है उसके मन मे तुम्हारे लिए सहानुभूति है दया है और कुछ हद तक शायद प्यार भी है जो किसी अपने के लिए होता है लेकिन तुम ये सब जानते हुए भी हर बार उसकी इन्सल्ट क्यों कर देती हो"

अब मंजू भी अपने आप को चुप नही रख पाई और तेज लहजे मे बोली "तो मैं क्या करू क्या मैने उससे कहा है की वो मुझ पर दया करे मुझसे सिंपती दिखाए और वो मुझे अच्छा नही लगता है बस उसका चेहरा मुझे फूटी आँख भी नही सुहाता है उससे ज़्यादा मुझे कुछ नही कहना है अब तुम दोनो ही यहाँ से जासकते हो" इतना कह कर मंजू बेड से खड़ी हो गई

"अरे तेवर तो देखा मेडम जी के, किस बात का घमंड है तुझे जो ऐसा कह रही है, तुझे सोनू जैसे लड़के का जो तेरी इतनी केर करता है का चेहरा फूटी आँख नही सुहाता है ये कहने से पहले ज़रा सी शरम तो कर लेती मुझे तो लगता है की तुझे उस नेता के गुंडे बेटे का ही चेहरा पसंद आ गया है जो तेरा ** करने वाला था इसीलिए तुझे सोनू का चेहरा पसंद नही आरहा है" डॉली बहुत ज़्यादा गुस्से मे थी इसलिए वो बिना सोचे समझे ये सब बोल गई

"डॉली क्या अनाप शनाप बक रही हो प्लीज़ चुप हो जाओ और चलो यहाँ से" मैं बोला

"नही नही डॉली रूको नही और भी जो कहना है कहो लेकिन पहले ये सुन लो की पूरा नही तो 90% तो मिलता ही है सोनू का चेहरा उस गुंडे से इसीलिए ये मुझे अच्छा नही लगता है जब भी मेरी नज़र इस पर पड़ती है मुझे इस दरिंदे की याद आजाती है" मंजू इतना बोली और फुट फुट कर रोने लगी

और इधर उसकी बात सुनकर हम दोनो भाई बहन फटी आँखो से एक दूसरे को देख रहे थे शायद हम दोनो की ही उम्मीद नही थी की मंजू के मुझे अवाय्ड करने के पीछे ये बात भी हो सकती है बहुत देर तक कोई कुछ नही बोला और जिस हालत मे था वैसे ही रहा बस मंजू ही थी जो लगातार रोती रही थी

"सॉरी मंजू मुझे नही पता था यार की ऐसा भी कुछ है वो तो मैं सोनू की इन्सल्ट से भड़क गई थी मुझे माफ़ कर दे यार" आख़िर डॉली मंजू के पास जाकर उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोली लेकिन मंजू सुबक्ते ही रही

"प्लीज़ यार सॉरी तो बोल दिया ना और माफी भी माँग ली है अब तो चुप हो जा" डॉली फिर बोली लेकिन मंजू चुप हो रही और धीरे धीरे सिसकती रही

"प्लीज़ मंजू डॉली को माफ़ करदो और चुप ही जाओ आज से मैं कोशिश करूँगा की जितना कम हो सके मैं अपना ये मनहूँस चेहरा तुम्हारे सामने ना लाउ यदि हो पता तो मैं कभी तुम्हारे सामने ही नही आता लेकिन ये इंपॉसिबल है प्लीज़ अब तो मान जाओ" मैं बोला

"इट'स ओके अब मैं ठीक हूँ" थोड़ी देर बाद मंजू बोली

और फिर मैं उसके रूम से बाहर निकल गया और थोड़ी ही देर बाद डॉली भी वहाँ से आ गई लेकिन वो मेरे रूम मे ना आकर सीधे नीचे अपने रूम मे चली गई और इधर मैं सोच रहा था की जिस चेहरे के साथ मैं मंजू को खुश करने की कोशिश कर रहा था वही बार बार उसे दुख पहुचा रहा था लेकिन अब मैं कर भी क्या सकता था अपना चेहरा तो बदलने से रहा लेकिन अब मैने सोच लिया था की जितना भी बन पड़ेगा उतना ही कम मंजू के सामने जाउन्गा ताकि उसे ज़्यादा तकलीफ़ ना हो और फिर यही सब सोचते हुए मुझे नींद लग गई.......................
 
अपडेट 62

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अब मैने सोच लिया था की जितना भी बन पड़ेगा उतना

ही कम मंजू के सामने जाउन्गा ताकि उसे ज़्यादा तकलीफ़

ना हो और फिर यही सब सोचते हुए मुझे नींद लग

गई.......................

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अब आगे.....

सुबह मेरी नींद जल्दी ही खुल गई थी और मैं तैयार होकर नीचे आ गया लेकिन तभी मुझे मंजू दिखाई दी और रात को हुई सारी बाते मुझे याद आ गई और वो सब सोचते ही मेरे दिल मे एक चुभन सी हुई जिस लड़की को मैं हर हाल मे खुश देखना चाहता था जिसके सारे गम भुला देना चाहता था आज उसी के लिए मेरा चेहरा परेशानी का सबब बना हुआ था क्योंकि मेरे चेहरे की वजह से ही वो अपने साथ हुए उस दर्दनाक हादसे की भूल नही पा रही थी तभी मंजू की नज़र मुझ पर पड़ी और हम दोनो की निगाहे मिली तो मैने झट से दूसरी साइड मुँह फेर लिया और मैं इससे ज़्यादा कर भी क्या सकता था फिर मैने डॉली को आवाज़ लगाई तो वो मेरे लिए चाय नाश्ता ले आई लेकिन इस वक्त डॉली का चेहरा भी उदास था और उसने मुझसे कोई बात नही की फिर मैं वापस अपने रूम मे गया और एक बड़ा सा रुमाल अपने चेहरे पर बाँध कर नीचे आ गया मैं नही चाहता था की बार बार मंजू की नज़रे मेरे चेहरे पर पड़े और वो परेशान हो

"अरे.......ये चेहरा क्यों छुपा रखा है ऐसे"

मम्मी मुझे देख कर बोली

"मम्मी गर्मी का सीज़न है अगर बगैर चेहरा ढँके बाहर जाउन्गा ना तो काला पड़ जाउन्गा इसीलिए मैं आज से अपने चेहरे को छुपा कर ही रखूँगा" मैने जवाब दिया

"लेकिन घर मे ये सब करने की क्या ज़रूरत है जब बाहर जाएगा तब रुमाल बाँध लिया करना, चल उतार अभी इसे" मम्मी बोली

"वो मैं बाहर ही तो जा रहा हूँ मम्मी" मैं बोला और बाहर निकल गया

अब मेरे सामने और कोई चारा नही था या तो मुझे अपने रूम मे बंद रहना था या घर से बाहर रहना था या फिर मंजू के सामने अपना चेहरा लेकर नही जाना था इसलिए मैं ज़्यादा से ज़्यादा कोशिश करने लगा की मैं मंजू के सामने कम ही पडू यहाँ तक की अब तो कई बार मैं अपना खाना भी उपर अपने रूम मे ही खाने लगा था

ऐसा करते हुए कब 15 दिन बीत गये पता ही नही चला अब मुझे डॉली की शर्त याद आई की उसने कहा था की 15 दिनों के बाद वो मुझे बता देगी की वो मेरे साथ चुदाई करने वाली है या नही वैसे मैं डॉली को पूरी नंगी देख चुका था उसके बूब्स भी छुए थे और डॉली की पैंटी के उपर लंड भी रगड़ा था लेकिन आज तक कभी भी मैने उसे किस तक नही किया था और नही उसके बदन के किसी भी हिस्से को अच्छे से महसूस किया था अभी मैं अपने रूम मे था और डॉली की बात याद आते ही मैं उससे मिलने के लिए नीचे आ गया इन 15 दिनों मे कभी भी डॉली मेरे रूम मे नही आई थी और दो चार बार से ज़्यादा हमारी बाते भी नही हुई थी और रही मंजू की बात तो अभी पिच्छले 8-10 दिनों से मैने उसे नही देखा था अभी सुबह का टाइम था और कुछ ही देर मे नाश्ता भी करना था डॉली शायद किचन मे होगी ये सोच कर मैं वहाँ गया तो डॉली वहाँ नही थी लेकिन मम्मी से मालूम पड़ा की वो अपने रूम मे है शायद उसे थोड़ा बुखार था इसलिए वो आराम कर रही थी मैं उसके रूम मे पहुचा तो बेड पर लेटी कोई बुक पढ़ रही थी
 
" हाई डियर क्या हुआ ऐसे बेड पर क्यों पड़ी है" मैं बेड पर उसके पास बैठते हुए बोला

"कुछ नही यार बस थोड़ा बुखार था इसीलिए लेटी हूँ" उसने मुस्कुरा कर जवाब दिया और मैने उसके माथे पर हाथ लगा कर चेक किया बुखार हल्का ही था

फिर थोड़ी देर मैं उससे इधर उधर की बाते करते रहा और आख़िर मे मैं मुद्दे पर आते हुए बोला "अब बता डॉली आगे क्या करना है"

"आगे क्या करना है मतलब, मैं कुछ समझी नही" वो बोली

"अरे तूने 15 दिन माँगे थे ना मंजू को मानने के लिए तो अब पूरे हो गये है अब क्या तू मेरे साथ वो सब करेगी जो दीदी और मोना करती है" मैं बोला

"ओह्ह्ह्ह.वो वाली बात, लेकिन वो बात तुझे अभी भी याद है मैं तो समझी थी की मंजू से इन्सल्ट करवाने के बाद तू सारी मस्ती भूल गया होगा" डॉली हँसते हुए बोली

लेकिन मुझे उसकी बात सुनकर बुरा लगा क्योंकि कहीं ना कहीं अब मंजू मेरी कमज़ोरी बनते जा रही थी और शायद ज़िद भी डॉली की बात सुनकर मैं चुप ही रहा और शायद वो भी समझ गई की मुझे बुरा लगा है तो वो जल्दी से बोली "सॉरी भाई मैने तो मज़ाक मे कहा था प्लीज़ बुरा मत मानना"

"इट'स ओके, लेकिन तूने मेरी बात का जवाब नही दिया" मैं बोला

"देख सोनू मैने अभी उस बारे मे कुछ नही सोचा है बल्कि सोचने का टाइम ही नही मिला उस रात मंजू के साथ जो भी हुआ उसके बाद मैं बहुत टेन्षन मे रही कभी मुझे वो सही लगती और कभी ग़लत और फिर उस दिन के बाद तू भी सबसे कटा कटा ही रहने लगा है यहाँ तक की दो दो दिन तक तेरा चेहरा भी देखने को नही मिलता है इसलिए मैं कुछ डिसाइड नही कर पाई" डॉली बोली

"अरे इसमे सोचने की क्या बात है हाँ तो हाँ ना तो ना" मैं बोला और शायद मैने फिर ग़लती कर दी थी

"तो फिलहाल तो मेरी 'ना' है" डॉली बोली और आगे मैं कुछ कह पाता इसके पहले ही मम्मी नाश्ते के लिए बुलाने आ गई और मैं मन मार कर डॉली के रूम से बाहर आ गया

थोड़ी ही देर बाद पापा मम्मी डॉली मंजू और मैं हम सभी नाश्ता कर रहे थे आज बहुत दिनों से बाद मैं मंजू को देख रहा था लेकिन अभी मजबूरी थी सबके साथ नाश्ता करने की वरना शायद आज भी मैं उसे अपना चेहरा नही दिखाता

"क्या बात है बेटा आज कल तुम दिखाई ही नही पड़ते जब भी तुम्हारी मम्मी से पूछता हूँ की सोनू कहाँ है तो एक ही जवाब मिलता है की अपने रूम मे है और मुझे एक बात और बता चली गई की आजकल तुम खाना भी अपने रूम मे ही खाने लगे हो आख़िर बात क्या है जो तुम सबसे अलग पड़ते जा रहे हो अचानक ही इस एकांत का क्या कारण है" एकाएक पापा बोले

"का...का...कुछ नही पापा बस ऐसे ही" मैं बस इतना ही कह पाया मेरी समझ मे नही आरहा था की पापा को क्या जवाब दूँ

"नही बेटा बहुत दुनिया देखी है मैने अचानक ही किसी मे इतना बड़ा बदलाव आने की कोई बड़ी वजह ही होती है अब तुम नही बताना चाहो तो बात और है" पापा बोले

"देख बेटा सोनू मैं भी यही बात तुझसे कहने वाली थी, बेटा जो भी परेशानी हो तू बे झिझक हमे बता दे हम कोई कसर नही रखेंगे तुझे खुश रखने मे लेकिन ऐसे जुदा जुदा तो मत रह तू नही जानता हमे कितना बुरा लगता है" अब मम्मी बोली और मैं समझ नही पा रहा था की क्या कहूँ

"देखो मम्मी ऐसी कोई बात नही है असल मे अभी मुझे करने को कोई काम नही है और कॉलेज शुरू होने मे भी थोड़ा टाइम है तो बोर होने से अच्छा मैं अपने रूम मे ही पड़ा रहता हूँ और बुक्स पढ़ते रहता हूँ लेकिन कोशिश करूँगा की आगे से मैं ऐसा नही करू" मैं बोला

"थॅंक्स बेटा लेकिन याद रखना की कम से कम नाश्ता और दोनो टाइम का खाना सबके साथ ही हो" पापा बोले

"जी पापा" मेरे मुँह से इतना ही निकला और तभी मेरी नज़र मंजू पर पड़ी जो मुझे बड़े ध्यान से देख रही थी शायद आज पहली बार उसने मुझे इतने गौर से देखा होगा और मुझसे नज़र मिलते ही उसने निगाहे झुका ली लेकिन उसके होंठो पर एक हल्की सी मुस्कान थी जो मुझे आज पहली बार नज़र आई थी....................
 
अपडेट 63

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"जी पापा" मेरे मुँह से इतना ही निकला और तभी मेरी

नज़र मंजू पर पड़ी जो मुझे बड़े ध्यान से देख

रही थी शायद आज पहली बार उसने मुझे इतने गौर

से देखा होगा और मुझसे नज़र मिलते ही उसने

निगाहे झुका ली लेकिन उसके होंठो पर एक हल्की सी

मुस्कान थी जो मुझे आज पहली बार नज़र आई

थी.......................

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अब आगे........

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नाश्ते के बाद मैं वापस अपने रूम मे आ गया था मेरे मन मे अभी पापा और मम्मी की ही बाते चल रही थी मेरे इस तरह अकेले रहने से उन्हे काफ़ी दुख हो रहा था लेकिन इस तरह रहना भी मेरी मजबूरी थी क्योंकि शायद अब तक मेरे दिल मे मंजू के लिए प्यार पनप चुका था और मैं उसे अपना चेहरा जो उसे उस दरिंदे की याद दिलाता था दिखा कर दुखी भी नही कर सकता था अब मेरे सामने बहुत बड़ी समस्या थी की एक तरफ मेरे मा बाप थे और दूसरी तरफ मेरा प्यार अब मैं किसे खुश रखू यही मेरी समझ मे नही आरहा था और मैं लगातार इसी बारे मे सोचे जा रहा था तभी मुझे मंजू की वो हल्की सी मुस्कान याद आई तो मेरे मन मे जैसे खुशी के लड्डू फुट पड़े कितनी मासूम और मधुर मुस्कान थी उसकी और मेरी आँखो के सामने बार बार मंजू का मुस्कुराता हुआ चेहरा नज़र आने लगा लेकिन फिर मेरी सोच डॉली की तरफ चली गई जिसने आज मुझे चुदाई के लिए सॉफ सॉफ मना कर दिया था अब मेरे सामने एक प्राब्लम और हो गई थी की अब मैं अपने लंड को ठंडा कैसे करू क्योंकि अभी तक डॉली की तरफ से उम्मीद थी तो मैं कैसे भी अपने मन को शांत कर लेता था लेकिन अब वो उम्मीद भी ख़तम हो गई थी तो अब जल्द ही कोई ना कोई जुगाड़ तो करना ज़रूरी ही था और बहुत देर तक मैं इन्ही सब बातों के बारे मे सोचता रहा

अभी भी मैं अपने विचारो मे ही खोया हुआ अपने बेड पर लेटा हुआ था की मेरे रूम का गेट नॉक हुआ मेरी समझ मे नही आया की कौन हो सकता है क्योंकि पापा कभी उपर आते नही थे और मम्मी और डॉली को नॉक करने की कोई ज़रूरत नही थी शायद काम वाली बाई होगी ये सोच कर मैं बोला "कौन है, अंदर आ जाओ गेट खुला है"

और जैसे ही गैट खुला और अंदर जिसकी एंट्री हुई उसे देख कर मैं हैरत से उछल पड़ा और बेड से नीचे उतर कर खड़ा हो गया मुझे अपनी आँखो पर यकीन नही हो रहा था और मेरा मुँह खुला का खुला रह गया था मेरे सामने मेरे रूम मे मंजू खड़ी थी

वो इस वक्त साड़ी पहने हुए थी और हमेशा की ही तरह बहुत खूबसूरत लग रही थी
 
"तू....तू....तुम" हकलाते हुए मेरे मुँह से बस इतना ही निकला और मेरी ऐसी हालत देख कर उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गई थी

"क्यों मैं तुम्हारे रूम मे नही आ सकती क्या" वो बोली

"ना....नही वो बात नही है लेकिन......" मैने कहना चाहा

"क्या लेकिन..." उसने पूछा

"वो क्या है ना की मेरा ये मनहूँस चेहरा तुम्हे उस गंदे आदमी की याद दिलाता है जिसने तुम्हारी ज़िंदगी खराब कर दी और इसीलिए आजकल मैं अकेला ही रहने लगा हूँ ताकि तुमसे बहुत कम सामना हो और ऐसे मे तुम ही मेरे सामने आ गई तो थोड़ा अजीब लग रहा है" मैं बोला

मेरी बात सुनकर वो थोड़ी देर सोचती रही फिर बोली "देखो सोनू उस दिन मैं शायद कुछ ज़्यादा ही बोल गई थी उसके लिए मुझे माफ़ करना अब तुम्हारा चेहरा ही तो मिलता है उससे सिर्फ़ इतनी ही बात थी और मैने बात का बतंग ड बना दिया था जिसकी वजह से तुम्हे बहुत परेशानी उठानी पड़ी और तुम अपने ही घर मे पराए से हो गये और मुँह छुपा के रहने लगे और इस वजह से अंकल और आंटी यानी तुम्हारे पापा मम्मी को भी बहुत दुख हुआ और इस सब की वजह मैं ही हूँ तो प्लीज़ अब ये सब बंद करो और फिर से अपनी नॉर्मल लाइफ गुजारो"

"लेकिन तुम्हारा क्या, मेरे फिर से तुम्हारे सामने पड़ने पर तुम्हारी यादे ताज़ा हो जाएगी तो तुम्हे फिर दुख होगा" मैं बोला

"तुम उसकी चिंता मत करो क्योंकि अब मैने अपने आपको समझा लिया है और वैसे भी सिक्के के दो पहलू होते ही है दो मिलते जुलते चेहरे मे से अगर एक दरिन्दा निकला था तो एक मददगार दोस्त भी तो हो सकता है ना" वो बोली

"हूंम्म्मम.. .......वैसे तुम क्या इतना कहने ही यहाँ आई थी क्या" मैं उसकी बात समझते हुए बोला

"जी नही असली बात तो दूसरी है जिसके बहाने यहाँ आकर मैं ये सब बाते कर पाई" वो मुस्कुराते हुए बोली

"कौन सी बात" मैने पूछा

"यही की खाने का टाइम हो गया है सुबह ही अंकल ने तुमसे कहा है की खाना सब साथ ही खाएँगे और तुमने उनसे प्रॉमिस भी किया था मैं वही याद दिलाने आई थी" वो बोली

"ऊ तेरी........इतना टाइम हो गया" मैं घड़ी की तरफ देखते हुए बोला जो अभी 12 बजा रही थी

"जी हाँ, अब चले" वो बोली

"हाँ, तुम चलो मैं बस आता ही हूँ" मैं बोला

"जल्दी आना" वो बोली और एक सुंदर सी स्माइल देते हुए मेरे रूम से निकल गई

और मैं बाथरूम मे घुस गया और हाथ मुँह धोते हुए सोचने लगा की ज़िंदगी भी क्या चीज़ है आज सुबह तक मैं जिसे चेहरा भी दिखाने से डरता था अभी वो खुद मुझसे मिलने आई थी और अभी तक जिसके चेहरे पर मैने हल्की सी मुस्कान थी नही देखी थी अभी वो लगभग हँसते हुए वापस गई थी 'वाह री किस्मत तेरे खेल निराले' मैने सोचा और तभी मुझे याद आया की डॉली ने भी 15 दिनों का टाइम माँगा था मंजू को मनाने के लिए और आज टाइम पूरा होते ही मंजू मानी भी है थी और उसके चेहरे से गम के

बदल छँटने लगे थे और मुस्कान रूपी धूप खिलने लगी थी लेकिन इसका मतलब ये नही था की मुझे उससे चिपके रहना था क्योंकि कभी भी मेरा चेहरा उसे वापस डिप्रेस कर सकता था लेकिन जो भी हो शुरुआत तो हो चुकी थी और बहुत जल्द मंजू वापस अपनी नॉर्मल लाइफ मे आ जाने वाली थी यही सब सोचते हुए मैं खाने के लिए नीचे आ गया...............
 
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