"कह तो ऐसे रही है जैसे सच मे ही उतार देगी" मैं बोला
"हाँ सच मे उतार दूँगी तू कह के तो देख" वो बोली
"और मम्मी और मंजू का डर नही है तुझे कहीं उनमे से कोई आ गया तो......" मैं बोला
"वो दोनो अभी घर पर नही है मंदिर गई हुई है अभी दो घंटे तक आने वाली भी नही है" डॉली ने बताया
"ओह्ह्ह्ह" मेरे मुँह से निकला
"तो उतारू फिर......" डॉली बोली
"नही रहने दे" मैं बोला, मुझे समझ नही आरहा था की आज डॉली खुद ही इतनी मेहरबान क्यों हो रही थी
"क्यों......आज से पहले तो तू मुझे नंगी देखने को मरे जाता था फिर आज क्यों माना कर रहा है" डॉली ने पूछा
"क्योंकि आज से पहले मुझे उम्मीद थी की आगे चल कर मैं तेरे इस सेक्सी बदन से खेल भी सकता हूँ तुझे चोद भी सकता हूँ लेकिन आज सुबह ही तूने मेरे सारे अरमानो पर पानी फेर दिया" मैं बोला
"क्यों मैने क्या किया" उसने पूछा
"सुबह तूने ही तो कहा था ना की तू अभी चुदाई के लिए तैयार नही है" मैं बोला
"हाँ लेकिन शायद तूने ध्यान से सुना नही की मैने ये कहा था की अभी के लिए मेरी ना है" वो बोली
"तो इसका मतलब वही तो है ना" मैं बोला
"नही बिल्कुल नही है उसका मतलब था की सुबह मैं तैयार नही थी" डॉली बोली
"इसका मतलब है की अभी तैयार है" मैने पूछा
"हाँ......" वो बोली
"तो चल उतार कपड़े.........." मैने कहना चाहा लेकिन मेरी बात बीच मे ही काट कर डॉली बोली "पागल है क्या, ये मेरी पहली चुदाई है जिसमे बहुत पेन होता है वो इस तरह कैसे हो सकती है उसके लिए ये टाइम और जगह सही नही है"
"तो ठीक है तू रात को मेरे रूम मे आ जाना तब सही रहेगा" मैं बोला
"और मंजू का क्या वो साइड के रूम मे ही रहती है अगर वो जागी हुई रही और उसने हमारी आवाज़े सुंली तो और फिर कहीं नीचे मम्मी ही जाग गई और मुझे अपने रूम मे ना पाकर वो यहाँ आ गई तो मैं उन्हे इतनी रात मे तेरे रूम मे होने का क्या जवाब दूँगी" डॉली बोली
"तू पहले ही मम्मी से कह कर आना की तू मंजू के साथ सोने जा रही है उसके रूम मे और फिर थोड़ी देर बाद उसके रूम से यहाँ आ जाना" मैं बोला
"लेकिन फिर वो ही बात की अगर मंजू को हमारी चुदाई के बारे मे पता चल गया तो......" डॉली बोली
उसकी बात भी बिल्कुल सही थी "तो फिर क्या करे ऐसे तो हम कभी भी चुदाई नही कर पाएँगे" मैं बोला
मेरी बात सुनकर डॉली कुछ देर सोचती रही फिर बोली "इसका एक सल्यूशन है"
"क्या......" मैने पूछा
"हमे मंजू को भी इस खेल मे शामिल करना होगा" डॉली मेरी आँखो मे देखते हुए बोली
"हमे मंजू को भी इस खेल मे शामिल करना होगा" डॉली मेरी आँखो मे देखते हुए बोली
"क्या............." मैं चीखते हुए बोला
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अब आगे.......
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"हाँ........मंजू को शामिल किए बगैर हम चुदाई नही कर सकते" डॉली बोली
"लेकिन.....लेकिन ऐसा नही हो सकता" मैं बोला
"क्यों नही हो सकता" डॉली ने पूछा
"पहली बात तो ये है की आज तक मैने उसे ऐसी नज़र से नही देखा और दूसरी ये की इस वक्त वो बहुत दुखी है और शायद वो ये सब ना करना चाहे" मैं बोला
"वो क्या चाहती है ये मुझे पता लग चुका है जब वो मेरे साथ नंगी पिक्स देख रही थी तू बस अपनी बता" डॉली बोली और उठ कर खड़ी हो गई जिससे उसकी छोटी सी चड्डी मे फसी गान्ड मेरी आँखो के सामने आ गई थी
डॉली की गान्ड पर नज़र पड़ते ही मेरा लंड हरकत मे आ गया था
"वो क्या है ना डॉली की शायद मुझे मंजू से प्यार हो गया है इसलिए मेरे दिल मे उसके लिए शायद सेक्स वाली फीलिंग्स नही है वो मुझे पूरे कपड़ो मे ही अच्छी लगती है उसे नंगी देखने का मैने कभी सोचा ही नही चुदाई तो बहुत दूर की बात है" मैं बोला
"अरे वा रे मेरे शेर अपनी सग़ी बहनो को नंगा देख सकता है उनसे चुदाई कर सकता है और एक दो दिन से मिली लड़की से तुझे प्यार हो गया है और कहता है उसके लिए तेरे दिल मे सेक्स वाली फीलिंग्स नही है" कहते हुए डॉली ने अपना टॉप अपने पेट से उपर तक खींच लिया जिससे उसका चिकना सपाट पेट और उसकी गहरी नाभि मुझे दिखाई देने लगे
"यार तू समझने की कोशिश तो कर......." मैं बोला
"क्या समझने की कोशिश करू हाँ.......अच्छा चल
बता की तू उससे प्यार करता है तो आगे क्या करेगा" डॉली बोली और उसने अपनी कॅप्री का बटन खोल दिया और कॅप्री थोड़ी नीचे कर दी
जिसकी वजह से मुझे अब उसकी पैंटी सॉफ दिखाई देने लगी थी और अब मेरा लंड आगे क्या होगा ये सोच कर खड़ा होने लगा था
"क्या करूँगा मतलब" मैने पूछा
"अरे ज़िंदगी भर प्यार ही करेगा या शादी भी करेगा" डॉली बोली
"आब्वियस्ली, जब प्यार किया है तो शादी भी करूँगा" मैं बोला
"तो क्या तब भी तेरे दिल मे उसके लिए चुदाई वाली फीलिंग्स नही आएगी, क्या ज़िंदगी भर तू उसकी सील पॅक चूत की पूजा करता रहेगा" डॉली बोली और इतना कह कर वो पलट गई और अपनी कॅप्री अपने कुल्हो से नीचे कर दी
अब मुझे उसके बड़े बड़े नंगे चूतड़ नज़र आने लगे जिनकी दरार मे उसकी पैंटी को लाइन फसी हुई थी और अब मेरा लंड पूरी तरह अकड़ कर मेरे लोवर मे तंबू बना चुका था
"नही ऐसी बात नही है शादी के बाद ही होता है वो सब होगा लेकिन शादी के पहले मैं उसके साथ चुदाई नही करना चाहता" मैं बोला और अपने खड़े लंड को अड्जस्ट करने लगा जो डॉली ने देख भी लिया था
"लेकिन अभी तो तेरी शादी को बहुत टाइम है और ये भी कन्फर्म नही है की मंजू भी तुझसे प्यार करती है और शादी भी करेगी फिर तब तक तू क्या करेगा" कहते हुए डॉली ने अपनी कॅप्री निकाल फेकि और अपने टॉप को अपनी ब्रा के उपर तक खींच कर सामने पड़े सोफे पर जा बैठी
अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पैंटी मे बैठी थी और मेरा दिल कर रहा था की उसके ये दोनो कपड़े भी उतार फेकू और उसकी चूत मे लंड घुसा कर जोरदार चुदाई कर डालु क्योंकि कोई 3 महीने हो गये थे मुझे चुदाई किए हुए लेकिन ये सिर्फ़ मेरी सोच थी हक़ीकत मे मैं डॉली की मर्ज़ी के बिना उसके साथ कुछ नही कर सकता था
"तब तक के लिए तू है ना और फिर दीदी और मोना भी है" मैं मुस्कुराते हुए बोला
"दीदी और मोना को तो अभी तू भूल ही जा अभी उन्हे वापस आने मे साल से भी ज़्यादा वक्त लगने वाला है और अपने बारे मे तो मैं तुझे बता ही चुकी हूँ की बगैर मंजू को साथ मिलाए हमारी चुदाई कितनी मुश्किल है अब क्या इतने टाइम तू हाथ ठेला ही ढकाएगा" डॉली वैसे ही बैठे बैठे बोली
अब डॉली की बात सुनकर मैं सोच मे पड़ गया था उसकी बात बिल्कुल सही थी लेकिन मंजू को उस सब मे शामिल करने को मेरा दिल मान भी नही रहा था "तो अब मैं क्या करू" मैं बोला
"वही जो मैं बोली की मंजू को शामिल करो अपने ग्रूप मे" डॉली बोली
"लेकिन उसके लिए मेरा दिल नही मान रहा" मैं बोला
"तो ठीक है ना तो उसके साथ चुदाई मत करना बस वैसे ही उपर उपर करने से क्या जाता है अपने काम के लिए इतना भी काफ़ी है" डॉली बोली और खड़े होकर अपना टॉप भी निकाल फेका
अब वो बिल्कुल मेरे सामने खड़ी थी और अब शायद वो अपनी ब्रा भी निकालना चाहती थी क्योंकि उसका एक हाथ उसकी ब्रा को स्ट्रीप पर जा चुका था
"हाँ इतना तो हो सकता है" मैं डॉली के जिस्म का जलवे देखते हुए सुख चुके अपने होंठो पर जीभ फिराते हुए बोला
"ये हुई ना बात, अब जैसा मैं कहती हूँ वैसा ही करना फिर देखना कितनी जल्दी हम इस खेल की लास्ट स्टेज पार कर जाते है" डॉली अपना हाथ वापस खींच कर मेरे गाल गुलेचती हुई बोली
"क्या करना होगा मुझे" मैने पूछा
"ज़्यादा कुछ नही बस आज रात को जब तू सोएगा तो नंगा ही सोना और अपने रूम का गैट भी लॉक मत करना बाकी मैं संभाल लूँगी" डॉली बोली
"लेकिन उससे क्या होगा" मैने पूछा
"अभी जितना कहा है उतना कर ज़्यादा पूछताछ मत कर बाद मे मैं सब बता दूँगी समझा, अब बता की जो मैने कहा है वो कर लेगा ना" डॉली बोली
"हाँ कर तो लूँगा लेकिन अगर मम्मी या किसी और ने देख लिया तो" मैं बोला
"तू उसकी चिंता मत कर मैं हूँ ना मुझसे पहले कोई भी तेरे रूम मे नही आएगा" वो बोली और लोवर के उपर से ही मेरे लंड को पकड़ कर मसलने लगी
"ओके ठीक है" मैं बोला और मैने अपना हाथ उसकी चुचियो की तरफ बढ़ाया लेकिन तभी नीचे से डोरबेल बजने की आवाज़ आई तो डॉली झट से मुझसे अलग हो गई
"श शिट, लगता है मम्मी और मंजू वापस आ गई है या फिर पापा होंगे, मैं अभी तेरे साथ बहुत कुछ करना चाहती थी लेकिन अब ये पासिबल नही है
लेकिन मेरी बात याद रखना जो कहा है वैसे ही करना ओके" डॉली अपने कपड़े पहनते हुए बोली
"ओके" मैने हाँ मे गर्दन हिला दी और फिर डॉली मेरे गाल पर एक किस करके नीचे को भाग ली और इधर मैं उसकी बातों के बारे मे सोचने लगा की आख़िर रात मुझे नंगा सुला कर डॉली करना क्या चाहती है.................
शाम के लगभग 6.30 बजे मैं नीचे आया मम्मी और मंजू वापस आ गई थी क्योंकि किचन से खटर पटर की आवाज़ आ रही थी शायद शाम के खाने की तैयारी शुरू हो गई थी मैं हॉल मे बैठ गया और मम्मी को चाय के लिए कहा तो मम्मी बोली की अभी भेजती हूँ तो मैं टीवी ओं करके देखने लगा
कोई 5 मिनिट बाद मंजू मेरे लिए चाय लेकर आई " हाई........लो चाय पियो" वो मुस्कुरा कर बोली और मैने
उसके हाथ से कप लेलिया और उसे ध्यान से देखने लगा
अभी उसने रेड कलर की ट्रॅन्स्परेंट सारी पहनी हुई थी और बहुत सुंदर लग रही थी उसकी झीनी सारी के अंदर उसका सपाट गोरा पेट और नाभि स्पष्ट दिखाई पड़ रही थी उसका रेड कलर का ब्लोस स्लीव लसे था और बाल खुले हुए थे इस वक्त वो बहुत प्यारी लग रही थी मैं चाय पीना भूल कर एकटूक उसे ही निहार रहा था
"ऐसे क्या देख रहे हो" तभी मेरे कानो से मंजू की आवाज़ टकराई
मैं जैसे नींद से जगा और झेन्पते हुए बोला "का....कू.....कुछ नही"
"ऐसा तो नही है देख तो तुम बराबर रहे थे, बताओ ना क्या देख रहे थे" उसने फिर पूछा
"वो....वो.....तुम्हारी सारी....." मेरे मुँह से निकला
"तुम्हारी सारी बहुत अच्छी है उसे ही देख रहा था" मैं बोला
"अच्छा........तो मेरी सारी बहुत अच्छी है और मैं?
" उसने फिर पूछा
अब मेरी समझ मे नही आरहा था की मैं क्या कहूँ
"बताओ ना....." उसने पूछा
"तुम भी बहुत अच्छी हो" मैं शरमाते हुए बोला
"अच्छी मतलब? " उसने फिर पूछा मुझे लगा जैसे आज वो मेरा इम्तहान लेने के मूड मे थी
"अच्छी मतलब सुंदर खूबसूरत" मैं बोला लेकिन मैं उससे नज़रे नही मिला पा रहा था अब मेरी बात सुनकर शायद वो भी शर्मा गई थी कुछ पल उसकी आवाज़ नही आई तो मैने उसकी तरफ देखा तो उसका चेहरा शरम से लाल हुआ पड़ा था
"क्या बाते हो रही है भाई" तभी डॉली वहाँ आते हुए बोली मैने डॉली की तरफ देखा जो इस वक्त बहुत ही सेक्सी लग रही थी उसके लो कट टॉप मे से उसकी बड़ी बड़ी चुचिया लगभग 1/4 बाहर दिखाई दे रही थी
"कुछ नही मैं बस मंजू से कह रहा था की जब से वो यहाँ आई है बस सारी ही पहनती है कुछ और क्यों ट्राइ नही करती" मैं चाय का कप रखते हुए बोला
"हाँ ये बात तो सही है सच मे यार मंजू कुछ और भी पहना कर जवानो की तरह ये क्या बुढ़िया की तरह रोज रोज सारी पहनती है, और तू खड़ी क्यों है बैठ ना" डॉली सामने पड़ी चेयर पर बैठते हुए बोली और उसकी बात सुनकर मंजू भी उसके साइड मे रखी चेयर पर बैठ गई
"वो क्या है ना मुझे लगता है की मैं सारी मे बहुत अच्छी लगती हूँ बस इसीलिए सारी ही पहनती हूँ" मंजू बोली
"अरे ऐसा नही है कभी वेस्टर्न ट्राइ करो और भी अच्छी लगोगी" अचानक ही मेरे मुँह से निकल गया
"अच्छााआ.. ......" मेरे मुँह से ये सुनते ही डॉली आँखे बड़ी करके मुझे घूरते हुए बोली
"वो....वो.....मुझे ऐसा लगा तो मैने बोल दिया" मैं एक बार फिर झेन्पते हुए बोला
"वैसे कह तो ये सही रहा है, चल मंजू एक काम करते है तू जीन्स और टॉप पहन और मैं सारी पहनती हूँ और फिर इससे पूछते है की हम दोनो मे से किसे क्या ज़्यादा सूट करता है" डॉली बोली और खड़ी हो गई
"लेकिन......."मंजू ने कहना चाहा
"लेकिन वेकीन कुछ नही वैसे जीन्स तो है ना तेरे पास" डॉली मंजू का हाथ पकड़ कर उसे चेयर से उठाते हुए बोली
"हाँ......" मंजू बोली
"तो चल अब जल्दी से जा और चेंज करके आ मैं भी सारी पहन कर आती हूँ" कहते हुए डॉली ने मंजू को सीढ़ियो की तरफ धकेल दिया और खुद भी अपने रूम मे चली गई
इधर मैं अकेला बैठा सोच रहा था की मंजू सच
मे जीन्स मे कैसी लगेगी और डॉली सारी मे............
इधर मैं अकेला बैठा सोच रहा था की मंजू सच मे जीन्स मे कैसी लगेगी और डॉली सारी मे............ .
.
अब आगे.......
कुछ देर मैं अपने ख़यालो मे ही गुम रहा फिर मम्मी भी हॉल मे आ गई और मेरे पास बैठ कर टीवी देखने लगी
"ये दोनो लड़किया कहाँ है" मम्मी ने पूछा
"दोनो ही अपने अपने रूम मे गई है" मैं बोला
"क्यों" मम्मी बोली और मैं कोई जवाब दे पता इसके पहले ही मेरी नज़र सीढ़ियो की तरफ गई तो मेरी आँखे वही जम गई मंजू एक टाइट जीन्स और हाफ बाँह की टाइट टीशर्ट पहने आ रही थी और मेरी नज़रो का पिच्छा करते जब मम्मी को नज़र भी मंजू पर पड़ी तो हैरत से मम्मी का मुँह भी खुला का खुला ही रह गया अब तक मंजू हमारे सामने आकर शरमाते हुए खड़ी हो गई थी
"मंजूऊुुउउ.......... ये तू है" मम्मी अपने खुले मुँह पर हाथ रखते हुए बोली
मम्मी की बात सुनकर मंजू ने शरम से अपनी नज़रे ज़मीन मे गढ़ा ली थी
"अरे कुछ बोल ना आज ये नया अवतार कैसे ले लिया, आज तू सीता से गीता कैसे बन गई" मम्मी फिर बोली
"वो......बुआजी वो डॉली ने मुझसे कहा की आज मैं ये कपड़े पहनु और वो सारी पहन के आती है अब मैं तो आ गई हूँ लेकिन वो अभी तक नही आई है, वैसे बुआजी अब आप ही बताइए की मैं सारी मे अच्छी लगती हूँ या इस ड्रेस मे" मंजू बोली तो मम्मी से लेकिन एक बार मेरी तरफ देखा जैसे कह रही हो की उसकी बात का जवाब मैं दूँ लेकिन मैं मम्मी के सामने एकदम से कुछ नही बोल सकता था इस वक्त मंजू कुछ ऐसी लग रही थी
वैसे तो मेरे मन मे उसके लिए कोई भी गंदी भावना नही थी लेकिन टाइट टीशर्ट मे उसके बड़े बड़े बूब्स सॉफ नज़र आरहे थे और जीन्स मे फसी उसकी मांसल जांघें अलग ही समा बना रही थी
"बेटा तेरी तो बात ही अलग है तू जो भी पहनेगी उसमे तू और भी अच्छी लगेगी भगवान तुझे सभी की बुरी नज़र से बचा के रखे लेकिन डॉली को तो अभी ढंग से सारी पहनते भी नही आती और उसके पास सारी भी नही है फिर वो........." मम्मी बोली लेकिन अभी वो अपनी बात पूरी कर पाती इसके पहले ही डॉली ने हॉल मे कदम रखा और पास रखे सोफे पर बैठते हुए बोली "कैसी लग रही हूँ मैं"
अब चुकी उसे सारी पहनते नही आता था तो उसने सारी मे कोई भी पिन नही लगाई थी जिससे उसका पल्लू बैठने को वजह से ढलक गया और उसके लो कट ब्लाउज मे से उसकी चुचियो के दर्शन होने लगे सॉफ नज़र आरहा था की अंदर उसने ब्रा नही पहनी है
"हे राम......ये क्या भेष बनाया है इस पागल लड़की ने जब सारी नही पहननी आती तो मुझसे कह देती देख ज़रा तेरा पल्लू कहाँ जा रहा है ठीक कर उसे" मम्मी डॉली को डाँटते हुए बोली
"ढंग से ही तो पहनी है अब पिन नही मिली तो लगती कैसे" कहते हुए डॉली ने अपना पल्लू ठीक कर लिया
"बड़ी आई ढंग वाली, बेटा मंजू तू इसे सीखा देना सारी पहनना वरना हर जगह हासै करवाती फ़िरेगी अब तुम लोग बैठो मैं किचन मे जाती हूँ" कहते हुए मम्मी उठी और मंजू के गाल पे किस करके चली गई जैसे बताना चाहती हो की मंजू इस ड्रेस मे बहुत अच्छी लग रही है
"क्या सच मे मैं इतनी बुरी लग रही हूँ" डॉली रुवासे लहजे मे मुझे देखते हुए बोली
"अरे नही यार तू है ही इतनी सुंदर तो बुरी कहाँ से लगेगी लेकिन अभी तुझे सारी पहँनी नही आती ना इसीलिए मम्मी ने ऐसा कहा वैसे एक बात कहूँ ये सारी ना तूने शादी के बाद अपने ससुराल मे ही पहनना तुझपे नही जमती ये" मैं बोला
"और मेरे बारे मे क्या ख़याल है" मंजू मुझे मुस्कुरा कर देखते हुए बोली
"क्या ख़याल हो सकता है मैने तो पहले ही कह दिया था और अभी मम्मी भी कह के गई है लेकिन अगर फिर भी सुनना चाहो तो दोबारा सुन लो की ये ड्रेस तुम पर बहुत जच रही है सारी से भी ज़्यादा तुम इसमे अच्छी लग रही हो" मैं बोला
और मेरी बात सुनकर मंजू ने एक बार फिर अपनी नज़रे झुका ली और मैं तारीफ भरी नज़रो से उसकी तरफ देखने लगा जबकि उधर डॉली मुझे मंजू को ऐसे देखते हुए देख कर जलन से मरी जा रही थी......................
देखते हुए देख कर जलन से मरी जा रही थी......................
अब आगे.......
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खैर फिर कुछ देर ऐसे ही बाते होती रही और डॉली मुझे और मंजू को हँस हँस के बाते करते देख जलती भुंती रही फिर मम्मी ने उन दोनो से किचन मे आने के लिए कहा तो दोनो अपने अपने रूम मे चेंज करने के लिए चली गई और मैं भी बाहर टहलने के लिए निकल गया
रात के लगभग 08.30 बजे मैं घर वापस लौटा क्योंकि हमारे घर पर ये वक्त डाइनर का होता था मैं सीधा उपर अपने रूम मे पहुचा और फ्रेश होकर नीचे आने की हुआ तो मुझे मंजू के रूम की लाइट जलती हुई दिखाई दी और रूम का दरवाजा भी खुला हुआ था तो मैने उसके रूम मे झाँक कर देखा तो मंजू अभी ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी अपने बाल सॉवॅर रही थी मैने हल्के से गेट नॉक किया तो उसने पलट कर मेरी तरफ देखा और इस वक्त उसने जो ड्रेस पहनी थी उसमे उसे देख कर तो एक बार मैं फिर पलके झपकाना भूल गया
इस वक्त उसने एक वाइट टॉप और फ्लवर प्रिंट वाली लेगैंग्स पहनी हुई थी जो उसकी बॉडी से चिपके हुए थे जिसमे से उसके बदन से सभी उतार चढ़ाव सॉफ नज़र आरहे थे और इस वक्त वो बहुत ही मासूम और खूबसूरत लग रही थी और मैं एकटक उसे देख रहा था
"कब से आवाज़ लगा रही हूँ कहाँ खोए हुए हो" मंजू की आवाज़ ने जैसे मुझे नींद से जगाया अभी वो मेरी नाक पकड़ कर हिलाते हुए बोल रही थी
"वो......वो... ..कहीं नही" मैं पीछे हट.ते हुए बोला
"मुझे पता है की तुम कहाँ खोए हुए थे" वो स्माइल करते हुए बोली
"कहाँ खोया हुआ था मैं" मैं ऐसे बोला जैसे मेरी चोरी पकड़ी गई हो
मेरी बात सुनकर वो कुछ देर मुस्कुराते हुए कुछ सोचती रही फिर बोली "वो बात बाद मे कर लेंगे पहले ये बताओ की अभी मैं इस ड्रेस मे कैसी लग रही हूँ"
"बहुत ही सुंदर और मासूम" मैं बोला
"वो तो मुझे पता है की मैं कैसी हूँ लेकिन सुंदर और मासूम के अलावा मैं कैसी लग रही हूँ" उसने पूछा
अब मुझे समझ नही आया की वो क्या जान.ना या सुन.ना चाहती है लेकिन जवाब तो देना ही था इसलिए मैं बोला "बहुत ही क्यूट"
"क्या यार छोटे से बच.छे हो क्या हो सुंदर, खूबसूरत, मासूम और क्यूट के अलावा और समझते और कहते ही नही हो, साला शाम को भी इतनी हॉट ड्रेस पहनी और अभी भी लेकिन तब से अभी तक तुम्हारी सुई वहीं अटकी है" अब वो झल्लाते हुए बोली
'ऊऊ.....तेरी' अब मैं समझ गया था की वो क्या सुन.ना चाहती थी लेकिन मैं डर भी रहा था की अगर मैं ऐसा कुछ बोलू और तो वो कहीं बुरा ना मान जाए लेकिन फिर भी मैं हिम्मत करके बोला
"वो.....वो.....एक बात और कहना था की तुम शाम वाली
और अभी वाली ड्रेस मे बहुत ही हॉट और सेक्सी लगती हो"
"क्या........" वो मेरे मुँह से ये वर्ड सुनकर हैरत से बोली लेकिन उसके चेहरे पर खुशी के निशान भी थे
"अब मुझे ऐसा लगा तो कह दिया" मैं मासूम बनता हुआ बोला
"अरे पगले यही तो मैं जान.ना चाहती थी लेकिन तुम तो क्यूट और मासूम तक ही अटके पड़े थे लेकिन अभी जो तुमने कहा है वो सही तो कहा है ना मज़ाक तो नही किया" उसने पूछा
"मैने क्या आज तक तुमसे कभी मज़ाक किया है? वो तो मैं पहले ही ये सब कह देता लेकिन डरता था की कहीं तुम बुरा ना मान जाओ इसलिए नही कहा" मैं बोला
"ओह....सोनू थॅंक यू सो मच जो तुम मेरी इतनी केर करते हो" वो मेरा हाथ पकड़ते हुए बोली
"बाते बाद मे पहले डिन्नर के लिए चलो वरना पापा नाराज़ हो जाएँगे" मैं अपना हाथ छुड़ाते हुए बोला
"ओह्ह्ह हाँ बस एक मिनिट" वो बोली और रूम से अंदर जाकर कुछ उठा पटक की और फिर वापस आकर मेरा हाथ पकड़ कर बिना कुछ कहे नीचे को तरफ चल दी और मैं भी बिना कुछ बोले उसके साथ ही लिया आज मुझे वो बहुत खुश लग रही थी और मुझे बहुत सुकून फील हो रहा था................
आज मुझे वो बहुत खुश लग रही थी और मुझे बहुत सुकून फील हो रहा था................ .
अब आगे
सभी लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे और खाना स्टार्ट कर चुके थे जबकि मंजू बार बार सबसे नज़रे चुरा कर मुझे देख रही थी और भी मेरी नज़र उससे मिलती तो वो शर्मा कर मुस्कुरा देती थी और ये सब डॉली की नज़रो से नही छुप पाया की किस तरह मैं और मंजू नैन मटक्का कर रहे है और उसके चेहरे पर जलन के भाव स्पष्ट नज़र आरहे थे वो तो अच्छा हुआ की वहाँ पापा मम्मी भी बैठे थे वरना पता नही शायद अभी तक वो हमे झाड भी देती
"अरे यार डॉली मैं तो बताना ही भूल गया था की तुम लोगो का गोआ का ट्रिप फाइनल हो गया है" तभी पापा बोले
"क्या सच.......तो कब निकलना है हमे और कितने दिनों का तौर है" डॉली खुशी से चहकति हुई बोली
"आज 12 तारीख है और तुम्हे 15 की सुबह ट्रेन से निकलना है जो तुम्हे 16 की सुबह गोआ पहुचा देगी फिर वहाँ तुम्हारे पास 16 से 20 तारीख तक का टाइम है 20 की रात को तुम वहाँ से निकल जाओगी यानी 5 डेज़ और 4 नाइट का पॅक है ये" पापा ने बताया
"वहाँ होटेल वग़ैरा तो बुक हो गई है ना" डॉली ने पूछा
"सब कुछ सेट कर दिया है तुम्हे बस ट्रेन मे बैठना ही है वहाँ पहुचते ही स्टेशन पर ही तुम्हारा गाइड मिल जाएगा जो आगे पूरी ट्रिप पर तुम्हारे साथ ही रहेगा" पापा बोले
"ओह्ह्ह्ह.थॅंक्स पापा" डॉली बोली
"और सोनू, तुम कुछ नही बोले तुम्हे खुशी नही हुई ये सब सुनकर" पापा ने मुझसे पूछा लेकिन मैं तो इस वक्त मंजू के साथ नैन मटक्के मे बिज़ी था इसलिए कुछ कह नही पाया था
"क्यों नही पापा मैं बहुत खुश हूँ लेकिन मुझसे ज़्यादा इच्छा डॉली की थी वहाँ जाने की इसलिए खुशी का इज़हार करने का मौका मैने उसे दे दिया" मैं हँसते हुए बोला और मेरी बात सुनकर सभी हँस पड़े और ये सब देख कर डॉली मुझे घूर्ने लगी और फिर इधर उधर की बाते करते हुए सभी ने खाना ख़तम किया और फिर मैं और पापा हॉल मे आकर टीवी देखने लगा जबकि सभी लॅडीस सॉफ सफाई मे लग गई थी कुछ देर बाद पापा अपने रूम मे चले गये और मंजू और डॉली भी हॉल मे आ गई थी लेकिन मंजू
नींद आ रही है कह कर उपर अपने रूम मे चली गई जबकि मैं कुछ देर उसके साथ रहना चाहता था लेकिन अब कुछ नही हो सकता था तभी मम्मी भी वहाँ आ गई
"अरे......तुम लोग अभी तक अपने रूम मे नही गये, चलो अब जाओ रात बहुत हो गई है" मम्मी बोली
"मम्मी वो क्या है ना की आज हम दोनो ही दोपहर मे सो लिए थे इसलिए नींद नही आ रही है तो मैने सोचा की सोनू के साथ बैठ कर गोआ मे क्या क्या घूमना है कहाँ कहाँ जाना है उसका प्लान बना लेती हूँ" डॉली बोली और मैं हैरत मे था की उसने मुझसे तो ऐसा कुछ कहा ही नही था लेकिन चुप रहने मे ही मेरी भलाई थी क्योंकि डॉली ने कुछ सोच कर ही ऐसा कहा होगा
"लेकिन तुम लोग तो कभी वहाँ गये नही फिर ये सब कैसे डिसाइड करोगे" मम्मी ने पूछा
सोनू के मोबाइल से हम गोआ की सारी जानकारी नेट से निकाल कर सारा प्लान बना लेंगे" डॉली बोली
"पता नही क्या कह रही है मेरी तो कुछ समझ मे नही आरहा है, लेकिन ठीक है जो करना है वो करो लेकिन यहाँ नही अपने रूम मे और रात ज़्यादा नही होनी चाहिए टाइम पर सो जाना समझी" मम्मी बोली और अपने रूम की तरफ बढ़ गयी
"थॅंक्स मॉम, और सोनू तू अपना मोबाइल लेकर मेरे रूम मे आजा" कहती हुई डॉली मुझे आँख मार कर अपने रूम की तरफ चली गई और मैं समझ गया की कुछ हॉट होने वाला है क्योंकि उपर मंजू भी है तो वो मेरे रूम मे कुछ कर नही सकती थी इसीलिए उसने मुझे अपने रूम मे बुलाया है अब मोबाइल तो मेरे जेब मे ही था तो मैं भी डॉली के पीछे हो लिया
मैं डॉली के रूम मे पहुचा तो वो वहाँ नही थी शायद बाथरूम मे थी क्योंकि पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी तो मैं वहीं बैठ गया और उसके बाहर आने का वेट करने लगा मुझे उम्मीद थी की अब जब वो मेरे आने से पहले ही बाथरूम मे गई है तो कुछ हॉट बन के ही आएगी लेकिन बाथरूम का दरवाजा खुलते ही मेरी सारी उम्मीडो पर पानी फिर गया डॉली इस वक्त जिस ड्रेस मे थी वो एक फ्रॉक टाइप की थी थी वाइट कलर की थी जो उसके गले से लेकर घुटनो के नीचे तक आ रही थी जिस मे डॉली लग तो बहुत सेक्सी रही थी लेकिन मुझे मज़ा नही आरहा था क्योंकि मुझे तो कुछ ज़्यादा ही बोल्ड ड्रेस की उम्मीद थी उससे
"चल निकाल अपना मोबाइल और गोआ की सर्च कर फिर प्लान करते है कुछ" वो मेरे पास बेड पर बैठती हुई बोली
"क्या सच मे तूने इसीलिए मुझे यहाँ बुलाया है" मैं उसे देखते हुए बोला
"तो और क्या, तूने सुना नही मम्मी के सामने मैने क्या कहा था" वो एक शरारती मुस्कान के साथ बोली
"ओह्ह्ह्ह.." मैं बोला और मैने गूगल पर गोआ सर्च कर दिया
"वैसे तूने क्या सोचा था" वो मुझे छेड़ते हुए बोली
"रहने दे अब वो बात पहले ये देख सर्च रिज़ल्ट आ गया है अब बना प्लान" मैं बोला
"अरे छोड़ यार मोबाइल को गोआ घुमाने के लिए गाइड है ना वहाँ पहले तू ये बता की तूने क्या समझा था की मैने तुझे यहाँ क्यों बुलाया है" डॉली बोली और उसने मेरे हाथ से मोबाइल छीन कर एक साइड रख दिया
"आ गई ना अपनी जगह पर अब सुन मैं ये समझा था की तू आज कुछ स्पेशल करने के मूड मे है और शायद इसीलिए मुझे यहाँ बुलाया है" मैं बोला
"स्पेशल मतलब?" उसने मुस्कुराते हुए पूछा "स्पेशल मतलब चुदाई" मैं बोला
"क्या..........नो वे तूने ये सोच भी कैसे लिया" वो वैसे ही मुस्कुराते हुए बोली
"अब मुझे ऐसा ही लगा तो सोच लिया" मैं बोला हालाँकि मैं जानता था की डॉली ये सब नही करेगी लेकिन फिर भी मैने चुदाई की बात कह दी थी
"एक बात कहूँ.....तुझे सही लगा था जो तूने सोचा था बिल्कुल सही सोचा था मैने आज चुदाई करने के लिए ही तुझे यहाँ बुलाया है" वो बोली
और अब हैरत मे पड़ने की बरी मेरी थी और मेरे मुँह से निकल ही गया "क्या....... ये क्या कह रही है तू ये सब यहाँ मम्मी पापा के रहते कैसे पासिबल है"
"क्यों बच्चू अभी बड़ी चुदाई की बाते कर रहा था और अब मैं तैयार हूँ तो पापा मम्मी के डर से फट गयी लेकिन तू चिंता मत कर मैने सब सेट कर लिया है तुझे परेशान होने की ज़रूरत नही है हमारी चुदाई के बारे मे किसी को पता नही चलेगा" वो बोली
"लेकिन, लेकिन कैसे" मैने पूछा
"वो क्या है ना की रात को सोने से पहले पापा मम्मी दूध पीकर सोते है और आज मैने उसमे मम्मी की स्लीपिंग पिल्स का थोड़ा ओवर डोस मिला दिया है अब वो दोनो सुबह तक उठने वाले नही है और मंजू तो वैसे भी नीचे आने वाली है नही तो नो पंगा" उसने बताया
"लेकिन तूने ये सब किया क्यों" मेरे मुँह से निकला
"देख भाई तू पहले ही बहुत लड़कियो को चोद चुका है मतलब तू झुता हो चुका है लेकिन इस वक्त मेरे मन मे तुझसे चुदवाने को इच्छा नही थी इसलिए मैं उन लड़कियो के बारे मे भूल जाती हूँ लेकिन अब मैं तुझसे चुदवाना चाहती हूँ और यहाँ मेरे अगेन्स्ट मंजू भी है जिसके साथ अभी खाना खाते वक्त तेरा नैन मटक्का देख कर मुझे लगा की कहीं मुझसे पहले वो ना चुदवा ले तुझसे और मुझे उसका भी झुता लंड लेना पड़े इसलिए मैने खाना खाते वक्त ही ये प्लान बनाया और ये सब किया" डॉली ने बताया
अब मैं सोच रहा था की कितनी ख़तरनाक लड़की है मेरी छोटी बहन डॉली जो मुझे मंजू के साथ सिर्फ़ इशारा करते देख कर ही कितना कुछ कर बैठी...................
इशारा करते देख कर ही कितना कुछ कर बैठी...................
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अब आगे......
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"क्या सोच रहा है" मुझे चुप देख कर डॉली ने पूछा
"कुछ नही बस यही सोच रहा था की जिस वक्त का इतने दिनों से इंतज़ार किया आख़िर वो वक्त आ ही गया" मैं मुस्कुराते हुए बोला
"वो तो ठीक है लेकिन मेरी बात तो याद है ना की हमे इस सब मे मंजू को शामिल करना ही है चाहे जैसे भी हो क्योंकि अगर वो शामिल नही हुई तो आगे से हम ना तो गोआ मे मज़े कर पाएँगे और ना ही घर पर" डॉली बोली
"मैने कहा है ना की जितना बनेगा मैं उतना करूँगा मंजू को इन सब मे शामिल करने के लिए" मैने जवाब दिया
मेरे इतना कहने के बाद अब थोड़ी खामोशी च्छा गई थी क्योंकि अब हम दोनो के पास ही कोई बात नही थी करने को सिर्फ़ एक ही काम था चुदाई करने का लेकिन ना मैं आगे बढ़ सकता था ना वो पहल कर रही थी कोई 5 मिनिट ऐसे ही चुप्पी मे और एक दूसरे के देखने मे बीत गये
"ओके अब क्या करना है" मैं खामोशी तोड़ते हुए बोला
"अब जो भी करना है तुझे करना है" डॉली शरारती मुस्कान के साथ बोली और बेड से उठ कर खड़ी हो गई
"जब आगे सब मुझे ही करना था तो इतनी देर से कहा क्यों नही बेकार ही 5 मिनिट खराब कर दिए" मैं
भी बेड से उठ कर डॉली की तरफ बढ़ते हुए बोला
और मुझे अपनी तरफ बढ़ते देख कर वो मुस्कुराते हुए पीछे हटने लगी लेकिन बहुत धीरे धीरे और कुछ कदम चल कर मैने उसे पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसकी आँखो मे आँखे डाल कर देखने लगा
डॉली भी मेरी नज़रो से नज़र मिलाए हुई थी और इसी तरह पता नही कब मेरे होंठ उसके तपते होंठो से जा मिले
उसके होंठो से मेरे होंठ मिलते ही डॉली भी मेरे साथ देने लगी और मैं उसके होंठो की गर्मी की चूस चूस कर ख़तम करने मे लग गया डॉली भी पूरा साथ देते हुए दीवानो की तरह मेरे होंठ चूस रही थी
कुछ ही देर मे हम दोनो की जीभ एक दूसरे के मुँह के अंदर घुस कर आपस मे लड़ाई करने लगी थी और मुझे पता ही नही चला की कब मेरे हाथ उसकी बड़ी बड़ी चुचियो से खिलवाड़ करने लगे थे शुरू मे तो मैं आराम से उन्हे सहलाता रहा लेकिन जैसे जैसे हमारी किस गहरी होती गई और स्मूच का टाइम बढ़ते गया मेरे हाथो का दबाव उसकी छाती पर बढ़ते गया अब मैं उन्हे सहलाने की जगह नोचने और खिचने लगा था जिससे डॉली को शायद दर्द होने लगा था इसलिए उसने मुझे अपने से दूर धकेल दिया
"क्या जानवरों की तरह कर रहे हो आराम से नही कर सकते क्या" डॉली बोली
"यार डॉली तू जानती है की जितना तडपा हूँ मैं तेरे साथ ये सब करने को भले ही मैं तुझे पहले कई बार नंगा देख चुका हूँ लेकिन ढंग से च्छुने का पहली बार मौका मिला है तो मैं कंट्रोल नही कर पाया लेकिन अब आगे से मैं सब कुछ आराम से करूँगा" और ये कह कर मैने उसे अपनी तरफ खींचा और उसकी ड्रेस को उसके बूब्स के नीचे खींच दिया अंदर उसने ब्रा नही पहनी थी तो उसकी बड़ी बड़ी चुचिया मेरी आँखो के सामने आ गई थी अब मुझसे रहा नही गया तो मैने उसे दीवार से टीकाया और उसकी ड्रेस के उपर से ही उसकी चूत को सहलाते हुए उसके चुचियो को चूमने लगा
डॉली मज़े मे आँखे बंद कर चुकी थी और पहली बार अपनी चुचियो पर किसी मर्द के होंठो के स्पर्श का मज़ा लेरही थी अब मैं कभी उसके एक बूब को दबाता और दूसरे को मुँह मे लेकर चूस्ता अब धीरे धीरे मेरे बदन मे गर्मी बढ़ती जा रही थी तो मैने अपनी टीशर्ट उतार फेकि नीचे मैने कुछ पहना नही था तो अब मैं उपर से पूरा नंगा होकर गया था अब मैं घुटनो के बाल नीचे बैठ गया और डॉली की ड्रेस को नीचे से उपर उसकी नाभि के उपर तक उठा दिया
अंदर उसने पैंटी पहनी हुई थी जिसमे से उसकी पानी बहती चूत एकदम फूली हुई अलग ही नज़र आ रही थी अब मैने उसके दोनो भारी चूतडो को अपनी हथेलियो से पकड़ा और उसकी नाभि को चूमते हुए उसने अपनी जीभ घुमाने लगा जबकि उसके पिछवाड़े को मेरी हाथ अच्छे से मसल रहे थे धीरे धीरे मैं उसकी नाभि से नीचे आते जा रहा था लेकिन मेरा चूमना और चाटना अभी बंद नही हुआ था जैसे ही मेरा मुँह उसकी पनियाई हुई चूत के सामने आया मैने उसे पैंटी के उपर से ही चूम लिया तो डॉली सिहर उठी और उसने मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा दिया उसकी चूत की मादक खुश्बू से मेरा लंड जैसे पत्थर की तरह कड़क हुआ जा रहा था और मुझसे अब ज़्यादा सहन नही हो रहा था तो मैं उसकी पैंटी को नीचे खिचने लगा लेकिन डॉली ने मेरा सिर उसकी चूत पर दबा हुआ था की नही छोड़ा जिससे मैं उसकी पैंटी को नीचे नही कर पाया और डॉली मेरे मुँह पर अपनी चूत को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगी मैं समझ गया था की वो अब झड़ने वाली है तो मैने अपनी उंगली उसकी गान्ड की दरार मे चलानी शुरू कर दिया और जैसे ही उसकी गान्ड का छेद मुझे म्मःसूस हुआ मैने उसमे उंगली घुसेड दी उंगली थोड़ी सी ही अंदर गई लेकिन मेरी इस हरकत मे डॉली की चूत को पानी पानी कर दिया वो झड़ चुकी थी और उसका पानी बह कर उसकी जाँघो को गीला कर रहा था और अब वो मेरा सहारा लेकर धीरे धीरे नीचे बैठ गई और अपनी साँसे संभालने लगी जबकि अभी भी मैं एक हाथ से उसकी चुचियो और दूसरे हाथ से उसकी गीली चूत को सहला रहा था
कोई दो मिनिट बाद वो नॉर्मल हुई और मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखा और मेरे होंठ चूम लिए
"थॅंक यू सो मच भाई अब मेरी बरी" डॉली बोली और मुझे उठने का इशारा किया तो मैं उसके सामने खड़ा हो गया
अब डॉली घुटनो के बल बैठ गई और मेरे जीन्स खोल कर अंडरवेर के साथ ही मेरी जाँघो से नीचे कर
दिया जिससे मेरा फौलादी मोटा लंड उसकी आँखो के सामने आ गया जिसे उसने बड़े प्यार से चूम लिया
अब वो मेरे लंड को पकड़ कर मुस्कुराते हुए उसके सुपाडे पर अपनी जीभ घुमा कर उस पर लगे मेरे प्रेकुं को बड़े मज़े से चाट रही थी
थोड़ी ही देर मे उसने मेरे लंड को मुँह मे लेकर चूसना शुरू कर दिया और मैं आनंद के गहरे समुंदर मे गोते लगाने लगा मेरी टाँगे मज़े दे कपने लगी मुझे लगा की कहीं मैं गिर ना जाउ इसलिए माने डॉली को अपने से अलग किया और बेड पर आकर लेट गया मेरे बेड पर लेट.ते ही डॉली लपक कर मेरे पास आई और मेरा लंड फिर से अपने मुँह मे भर लिया
अब डॉली ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड को अपनी मुट्ठी मे पकड़ कर अपने मुँह मे अंदर बाहर करते हुए चूस रही थी और मैं भी नीचे से अपनी कमर उठा कर उसका साथ दे रहा था
डॉली बहुत अच्छे से मेरा लंड चूस रही थी और मैं मज़े से आँखे बंद किए कमर मटका रहा था कोई दो मिनिट बाद ही डॉली के मुँह को गर्मी और मेरे लंड के सुपाडे पर चल रही उसकी जीभ ने मुझे पिघला दिया और मैं ज़ोर ज़ोर से कमर उठा कर झड़ने लगा मेरा कुछ पानी तो डॉली गटक गई और कुछ उसके चेहरे और कुछ बेड पर गिर गया
मेरे झड़ने के बाद भी डॉली ने चाट चाट कर मेरा लंड सॉफ कर दिया और मैं आँखे बंद किए बेड