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Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

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अपडेट 89

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मंजू ने निचोड़ निचोड़ कर मेरे लंड से आख़िरी बूँद भी बाहर निकाल ली उसका हाथ भी मेरे पानी से भर गया था जब मेरा लंड मुरझाने लगा तो मंजू उठ कर खड़ी हो गई और उसी तरह मेरे पानी से भरे चेहरे और हाथ के साथ दूसरे हाथ से अपनी कपड़े उठाने लगी

"अरे पहले ये सब सॉफ तो कर लो" मैं बेड पर बैठते हुए बोला

"जी नही ये तो मेरे चेहरे के लिए टॉनिक है मैं इसकी मालिश करूँगी तो मेरी सुंदरता और बढ़ जाएगी" मंजू मुझे आँख मार कर बोली

अब मैं क्या कहता उसे यही करना था तो करे

"ओके अब मैं चलती हूँ रात काफ़ी हो गई है लेकिन सॉरी मैं अभी तुम्हे किस नही कर सकती वरना मेरा टॉनिक फैल जाएगा" वो हँसते हुए बोली और वैसे नंगे ही रूम से बाहर निकल गई

पीछे से उसकी मटकती नंगी गान्ड देख कर मन मे आया की पकड़ कर अभी उसमे अपना लंड घुसेड दूँ लेकिन मुझे पता था की यही वो चीज़ है जो मुझे सबसे आख़िर मे मिलने वाली है और इसमे किसी को कोई ग़लती नही थी ये मेरी ही ज़िद की वजह से होना था अब आगे गोआ मे क्या और कैसे होना था मैं यही सब सोचते हुए कब सोया पता ही नही चला..................

अब आगे.......

सुबह मैं फ्रेश होकर नीचे आया जहाँ अभी नाश्ता बस शुरू ही होने वाला था

"आओ बेटा बैठो" पापा मुझे देख कर बोले "और कल सुबह गोआ जाने की सारी तैयारी कर ली है ना"

"पापा आज कर लूँगा ना" मैं भी डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए बोला

"और तुम दोनो ने" पापा मंजू और डॉली से बोले

"हम भी आज ही कर लेंगे, वैसे कल ट्रेन कितने बजे की है" डॉली जवाब देते हुए बोली

"कल सुबह 8 बजे तुम्हे निकलना है और परसो सुबह 9 बजे तक तुम लोग गोआ मे होंगे" पापा ने बताया

फिर नाश्ता शुरू हो गया और सब उसी मे बिज़ी हो गये इस दौरान मेरी नज़र मंजू पर पड़ी तो वो बड़ी हसरत भरी निगाहो से मुझे देख रही थी और देखती भी क्यों नही आख़िर गोआ मे पहली रात ही तो उसकी सुहागरात होनी थी यानी परसो ही बस आज और कल दिन की बात बाकी थी तभी मेरी नज़र डॉली पर पड़ी जो नाश्ता ख़तम कर के उठ के जा रही थी और जैसे ही

वो पीछे मूडी तो मेरे सामने उसकी गदराई गान्ड आ गई

तुरंत ही मेरे लंड ने ठुमका मारा मैने मन ही मन उसे समझाया की बेटा बस दो दिन और इंतज़ार कर ले फिर मंजू की कुवारि चूत और डॉली की कुवारि गान्ड दोनो का भोग एक साथ ही लगाउन्गा तुझे

नाश्ते के बाद मैं गाओं मे घुमाने के लिए निकल गया और फिर दोपहर के खाने पर ही वापस आया खाना खाने के बाद सभी अपने अपने रूम मे जाने लगे इस वक्त वो मंजू डॉली और मैं ही थे वहाँ तभी डॉली ने मुझे टोका "जाने की तैयारी करेगा अभी या फिर सोएगा"

"पहले तैयारी करूँगा और फिर अगर टाइम रहा तो एक झपकी भी ले लूँगा, लेकिन तू क्यों पूछ रही है" मैं बोला

"वो.....वो....थोड़ी खुजली हो रही है यहाँ" डॉली अपनी चूत को सहलाते हुए बोली

"अभी उसमे उंगली कर ले तेरी चूत अब मैं तेरी खरबूजे जैसी गान्ड फाड़ कर ही छोड़ूँगा" मैं बोला

"तो मैं कब मना कर रही हूँ गान्ड देने के लिए लेकिन वो तो गोआ मे ही होगा ना लेकिन पहले मेरी मुनिया के बारे मे तो सोच......" डॉली मिन्नत करते हुए बोली

"चल ठीक है उसका भी कुछ कर दूँगा लेकिन अभी नही रात मे देखते है" मैं बोला

"क्या सच मे वहाँ खुजली होती रहती है एक बार करवाने के बाद" मंजू जो अभी तक चुपचाप हमारी बाते सुन रही थी डॉली से बोली

"अरे ऐसा कुछ नही है कोई खुजली उजली नही होती बस मूड बन गया था तो बोल दिया" डॉली हँसते हुए बोली

"क्यों मंजू डर लग रहा है क्या खुजली से" मैं भी हँसते हुए बोला

"मुझे कोई डर वॉर नही लग रहा और अगर खुजली हुई भी तो तुम हो ना उसे मिटाने के लिए" मंजू आँख मारते हुए बोली

"ओके...मैं चलता हूँ" कहते हुए मैं अपने रूम की तरफ बढ़ गया
 
अपने रूम मे आकर मैं गोआ की तैयारी मे लग गया थोड़ी देर बाद मंजू भी अपने रूम मे आ गई थी और उसके रूम से भी खतर पटर की आवाज़े आने

लगी थी मैं समझ गया की वो भी तैयारी मे बिज़ी है

खैर मैं सारी तैयारी कर चुका तो थोड़ी थकान और थोड़ी गर्मी के कारण बेड पर लेता तो झट से आँख लग गई और जब खुली तो मम्मी के उठाने से

"कितना सोएगा बेटा रात के 8 बज रहे है" मम्मी की आवाज़ मेरे कानो से टकरा रही थी

मैं आँखे मलते हुए उठा और घड़ी पर मेरी निगाह पड़ी तो सच मे रात के 8 बज चुके थे

"अरे इतना टाइम हो गया" मैं उठते हुए बोला

"हाँ बेटा, चल अब जल्दी से फ्रेश हो कर नीचे आजा तेरे पापा गोआ जाने के बारे मे तुम लोगो से कुछ बात करना चाहते है और कुछ बताना भी चाहते है" मम्मी बोली और वापस जाने लगी

"ओके. ...मम्मी मैं 5 मिनिट मे आता हूँ" मैं बोला और फ्रेश होने के लिए बाथरूम मे घुस गया

नीचे आने के बाद पापा मम्मी ने कोई घंटे भर मेरी मंजू और डॉली की क्लास ली और बहुत सी हिदायते घहूँटी की तरह पीला दी की गोआ मे क्या करना है क्या नही और हमेशा साथ मे रहना, ज़्यादा रात तक बाहर नही घूमना वग़ैरा वग़ैरा और हम तीनो बड़े ध्यान से उनकी बाते सुनते रहे और हाँ मे गर्दन हिलाते रहे भले ही गोआ जाकर हमने उनकी कोई बात नही मान.नि थी लेकिन अभी तो हाँ ही कहना था

उसके बाद रात कोई 10.30 तक हम सभी डाइनर कर चुके तो पापा ने सभी से कहा की अपने अपने रूम मे जाकर जल्दी से सो जाओ क्योंकि कल सुबह जल्दी उतना था

"ठीक है फिर मैं मंजू के रूम मे ही सो जाती हूँ दोनो साथ ही उठ जाएँगे सुबह और वैसे भी मेरी तैयारी तो हो ही चुकी है" डॉली मम्मी से बोली क्योंकि आज वो फिर चुदवाना चाहती थी

"नही आज तू मंजू के रूम मे नही बल्कि मैं तेरे साथ तेरे रूम मे सोउंगी" मम्मी ने धमका किया डॉली के लिए

"क्य्ाआ....ले....लेकिन क्यों?" डॉली हैरत से बोली

"बेटा आज तू पहली बार इतने दिनों के लिए मुझसे दूर जा रही है तो आज रात मैं तेरे साथ ही रहना चाहती हूँ" मम्मी बड़े प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोली

और डॉली भी समझ गई की उसके लिए मम्मी का प्यार उमड़ रहा है तो वो भी मन मार कर तैयार हो गई "ओके मों जैसा आप चाहे"

फिर मम्मी डॉली के साथ उसके रूम मे चली गई और मैं और मंजू उपर आ गये मेरे रूम के पास पहुचते ही मैने मंजू को पकड़ कर दीवार से चिपका दिया और अपना होंठ उसके होंठो पर रख कर

एक गहरा किस किया और बोला "आज भी कुछ करे क्या"

"नही अब जो भी होगा वो गोआ पहुच कर ही होगा तब तक थोड़ा खुद तड़पो और थोड़ा मुझे तड़पने दो आख़िर उसका भी एक मज़ा है" मंजू बड़े प्यार से मेरे होंठो पर उंगली फिराते हुए बोली

"मैं कहाँ तड़पने वाला हूँ मेरे लिए डॉली है ना" मैं उसके एक बूब को सहलाते हुए बोला

"लेकिन अब मौका कहाँ है, आज रात तो कुछ हो नही सकता और कल सुबह ट्रेन मे होंगे फिर कब करोगे" वो भी मेरे लंड को पैंट के उपर से सहलाते हुए बोली

"ट्रेन मे ही कर लूँगा उससे मज़े" मैं बोला "इंपॉसिबल, ट्रेन मे कैसे होगा" वो हैरत से बोली

"टाइम आएगा तो खुद ही देख लेना" मैं उसके बूब्स को ज़ोर से भींचते हुए बोला

"देख लेंगे, अब हाथों मुझे थोड़ी पॅकिंग और करनी है और फिर सुबह जल्दी उतना है" कहते हुए उसने मुझे अपने से दूर धकेला और भाग कर अपने रूम मे घुस गई

"ओके गुड नाइट " वो दरवाजे से झाँक कर बोली

"सेम तो यू " मैं भी उसे एक फ्लाइयिंग किस देते हुए बोला

फिर मैं और वो दोनो ही अपने अपने रूम मे बंद हो गये मैने एक बार फिर अपना बाग चेक किया की कुछ च्छुटा तो नही और फिर पूरी तसल्ली करने के बाद गोआ के हसीन सपनो मे खोकर नींद के हवाले हो गया

अगली सुबह बहुत भागम भाग वाली रही और जैसे तैसे हम टाइम पर स्टेशन पहुच गये पापा और मम्मी दोनो ही हमे छोड़ने आए थे और कुछ देर मे ही हमारी ट्रेन भी आ गई जिसमे 3र्ड एसी मे हमारा रिज़र्वेशन था फिर हम पापा मम्मी से विदा लेकर अपने कॉमपार्टमेंट मे बैठ गये और ट्रेन अपने सफ़र के लिए रवाना हो गई हो लगभग 24 घंटे का था और हम तीनो के दिमाग़ मे यही चल रहा था की गोआ कैसा होगा और वहाँ हमारे बीच क्या क्या होगा.....................
 
अपडेट 90

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फिर हम पापा मम्मी से विदा लेकर अपने

कमपार्टमेंट मे बैठ गये और ट्रेन अपने सफ़र के

लिए रवाना हो गई जो लगभग 24 घंटे का था और

हम तीनो के दिमाग़ मे यही चल रहा था की गोआ

कैसा होगा और वहाँ हमारे बीच क्या क्या

होगा.........................

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अब आगे.. ..

धीरे धीरे ट्रेन ने स्पीड पकड़ ली थी और धददड़ करते हुए आगे बढ़ी जा रही थी हम तीनो को एक ही साइड की लोवर, मिड्ल और अप्पर बर्त मिली थी तो अभी हम तीनो ही नीचे को सीट पर बैठे हुए थे

अब पहली बार मैने अपने आस पास नज़र दौड़ाई तो देखा की सामने की सीट पर भी तीन लोग बैठे हुए है जिनमे एक कोई 50-55 साल का अधेड़ आदमी था एक कोई 35 साल की मस्त सी दिखने वाली आंटी थी और एक लगभग 18-19 साल की हॉट फिगर वाली खूबसूरत लड़की थी उसके फिगर मे खास बात थी उसकी चुचिया जोकि उसकी उमर के हिसाब से बहुत बड़ी थी अभी तक मैने जो सबसे बड़ी चुचिया देखी थी वो मोना की थी लेकिन इस लड़की की चुचिया मोना को भी मात कर रही थी जबकि उसकी उमर मोना से कम थी अब मैने साइड वाली बर्त पर देखा तो वहाँ एक न्यूली मॅरीड जोड़ा बैठा हुआ था जो शायद हनी मून के लिए निकला हुआ था लड़का कोई खास नज़र नही आरहा था लेकिन उसकी वाइफ मस्त थी

मैने उठ कर सारी बुगी का एक राउंड लगाया तो देखा की सारी सीट्स फुल थी और होती भी क्यों नही आख़िर छुट्टियों और शादी का सीज़न चल रहा था उस पर ट्रेन भी किसी ऐसी वैसी जगह नही बल्कि गोआ जा रही थी तो ये तो होना ही था खैर मैं वापस आकर अपनी सीट पर बैठ गया डॉली खिड़की की तरफ बैठी थी जबकि मंजू बीच मे थी और मैं लास्ट मे बैठा

हुआ था

"कहाँ गये थे" मेरे वापस आकर बैठते ही मंजू ने पूछा

"कहीं नही बस बुगी का राउंड लगाने गया था" मैं बोला

"तो क्या देखा......" उसने फिर पूछा

"सारी सीट्स फुल है पूरी बुगी खचाखच भरी है" मैने बताया
 
"अरे...अरे......ये तो बहुत बुरा हुआ" वो गर्दन हिला कर मेरी नाक पकड़ते हुए बोली

"क्यों......" मैने पूछा अब तक डॉली की तवज्जो भी

हमारी तरफ हो गई थी जबकि सामने की सीट पर बैठे हुए लोग अभी उंघ सो रहे थे शायद उनकी सारी रात ट्रेन मे ही गुज़री थी

"वो इसलिए की जब बुगी पूरी फुल है तो तुम डॉली को कैसे चोद पाओगे यहाँ" मंजू मुझे और डॉली को अपने पास खींच कर धीरे से बोली ताकि उसकी आवाज़ सिर्फ़ हम दोनो ही सुन सके

"क्या.......इसने ऐसा कहा था" डॉली हैरान होते हुए बोली क्योंकि उसे पता नही था की मेरे और मंजू की ऐसी कोई बात हुई है

"हाँ......रात मे कहा था इसने की आज ये ट्रेन मे तेरी चुदाई करेगा" मंजू ने उसे बताया

"वाउ........वाह मेरे भाई वाह क्या सोचा है, कितना

मज़ा आएगा ट्रेन मे वो सन करते हुए" डॉली खुश होते हुए बोली

"ज़्यादा खुश मत हो यहाँ तुम्हारी दल नही गलने वाली क्योंकि सोनू अभी सारी बुगी का चक्कर लगा आया है और सारी बुगी अभी फुल है" मंजू बुरा सा मुँह बनाते हुए बोली शायद डॉली का ऐसे खुश होना उसे अच्छा नही लगा था

"लेकिन तुम शायद टाय्लेट को भूल गयी हो जहाँ हमेशा भीड़ नही होती और खास कर रात को" मैं मुस्कुराते हुए बोला

"च्चिईीई.........तुम लोग टाय्लेट मे वो सब करोगे" मंजू नाक सिकोडते हुए बोली

"तो क्या हुआ, जब करना है तो करना है क्या फरक पड़ता है की टाय्लेट है या किचन है, क्यों सोनू" डॉली झट से बोली

"बिल्कुल ठीक कहा" मैं बोला

"बहुत गंदे हो तुम लोग मैं तो ऐसा कभी ना करू" मंजू बुरा सा मुँह बनाकर बोली

तभी सामने की सीट पर बैठा आदमी उठा तो हमारी बाते बंद हो गई मैने देखा की अब सामने बैठी आंटी और लड़की ने भी उनघना छोड़ दिया था

और वो बड़े ध्यान से हमारी तरफ देख रही थी

"कहाँ जा रहे हो बच्चो" आख़िर आंटी ने पूछ ही लिया

और उसके बाद हमारी बातों का सिलसिला शुरू हो गया अब सफ़र भी 24 घंटे का था तो जान पहचान करना तो बनता ही था बातों ही बातों मे मालूम पड़ा की सामने की सीट पर बैठा आदमी और वो आंटी पति पत्नी है और लड़की उनकी बेटी है जिसका नाम शुभी है और वो लोग किसी शादी मे गोआ जा रहे है हमने भी उन्हे बताया की हम घुमने के लिए गोआ जारहे है इसी बीच साइड बर्त पर बैठा जोड़ा भी हम से घुल मिल गया और उन्होने भी अपने बारे मे बताया की वो लोग भी गोआ ही जा रहे है हनी मून के लिए उसमे लड़के का नाम रिंकू था और लड़की का नाम पूनम था इसी बीच सामने बैठे वाले अंकल जो कहीं गये हुए थे वो भी वापस आ गये थे और उनसे भी हम सभी की इंट्रो हो चुका था और हमारी बाते चालू थी चूँकि साइड बर्त वालो को दिक्कत हो रही थी तो वो दोनो भी आकर हमारे साथ ही बैठ गये लड़की पूनम मेरे साइड बैठ गयी और लड़का रिंकू सामने अंकल के साइड मे बैठ गया अब चूँकि सीट तीन लोगो के लिए थी और चार लोग बैठे थे तो थोड़ा चिपक कर बैठना पड़ा जिस वजह से पूनम की चुचि मेरी बाँहो से रगड़ खाने लगी थी जोकि बहुत ही मस्त एहसास दे रही थी जैसी किसी कुवारि लड़की की होती है मैने मंजू से वादा तो कर लिया था की अब बाहर कहीं मुँह नही मारूँगा लेकिन पूनम और शुभी को देख कर मुझे अपने ईमान डोलता हुआ लगा और फिर मैने सोचा की अभी मंजू और मेरी शादी थोड़े ही नही हुई है जब शादी हो जाएगी ये तब की बात है लेकिन अगर अभी मुझे पूनम या शुभी मे से कोई भी मिलेगी तो मैं ज़रूर चोदुन्गा

पूनम की चुचि के मज़े लेता हुआ मैं बातों मे शामिल था लेकिन बार बार मेरी नज़र पूनम के पति रिंकू पर ही जा रही थी ना जाने क्यों मुझे वो कुछ ठीक नही लग रहा था वो जिस तरह उन अंकल से चिपक कर बैठा था और जैसी हरकते कर रहा था उससे मुझे शक हो रहा था की कहीं ये गान्डमर्रा (गे) तो नही है

खैर ऐसे ही बातों बातों मे लंच टाइम हो गया था और केटरिंग स्टाफ वाले सभी को लंच पॅक सर्व करने लगे थे हमारे लिए भी लंच आ गया था तो पूनम और रिंकू अपनी सीट पर जाने लगे लेकिन इस दौरान रिंकू ने एक ऐसी हरकत की जिसे सिर्फ़ मैं ही देख पाया और इस हरकत की देख कर मेरा शक यकीन मे बदल गया की ये रिंकू वाकई मे गान्डमर्रा है हुआ ये था की सीट से उठते वक्त मौका देख कर रिंकू ने अंकल का लंड दबा दिया था और ये देख कर अंकल भी मुस्कुरा दिए थे यानी के लाइन क्लियर थी अंकल भी तैयार थे मतलब ट्रेन मे रिंकू की गान्ड मारना पक्की बात थी

खैर अब हम सभी लंच मे बिज़ी हो गये थे लेकिन लंच के दौरान भी हमारी बाते बंद नही हुई थी बातों के दौरान बार बार मेरी नज़र पूनम की नज़रो से टकरा रही थी और उसकी नज़रे मेरी नज़रो से बहुत कुछ कह रही थी मैं समझ गया था की अगर मैने थोड़ी भी कोशिश कर ली तो इसे तो ज़रूर चोद सकता हूँ..............
 
अपडेट 91

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लंच के दौरान भी हमारी बाते बंद नही हुई थी

बातों के दौरान बार बार मेरी नज़र पूनम की नज़रो

से टकरा रही थी और उसकी नज़रे मेरी नज़रो से बहुत

कुछ कह रही थी मैं समझ गया था की अगर

मैने थोड़ी भी कोशिश कर ली तो इसे तो ज़रूर चोद सकता हूँ..............

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अब आगे. ......

लंच हो चुका था और इधर उधर की बाते चल रही थी मेरा पूरा ध्यान पूनम की तरफ था और वो भी बातों के साथ लगातार मेरी तरफ देख कर सेक्सी मुस्कान दिए जा रही थी

गर्मियो के दिन थे और दोपहर होने और खाना खा लेने के कारण सभी लोगो को आलस ने जकड़ लिया था और सभी अब थोड़ी देर सोकर आराम कर लेना चाहते थे तो मंजू और डॉली ने मुझसे उठने के लिए कहा और डॉली नीचे की बर्त पर लेट गई और मंजू बीच वाली पर लेकिन मुझे तो इस वक्त पूनम की ही लगी हुई थी तो मैं वहीं डॉली के पास जैसे तैसे झुक कर बैठा हुआ था

सामने वाली का भी यही हाल था आंटी नीचे लेटी हुई थी और शुभी बीच वाली बर्त पर जबकि अंकल सीट के पास खड़े हुए थे रिंकू और पूनम अपनी सीट पर बैठे हुए थे

अभी थोड़ी ही देर हुई थी की रिंकू उठा और अंकल के पास जाकर खड़ा हो गया और उनसे कुछ बाते करने लगा वो बहुत धीरे एकदम फुसफुसाने जैसे बोल रहा था इसलिए मैं उसकी आवाज़ सुन नही पाया लेकिन फिर उसने जो हरकत की उसे देख कर मेरे होश उड़ गये पूरी बुगी भरी हुई थी लेकिन अभी सभी लोग अपनी सीट पर लेटे हुए थे इसलिए मौके का फ़ायदा उठा कर रिंकू ने अंकल का लंड पकड़ लिया और कोई 30 सेकेंड तक उसे मसलते रहा जब वो ये कर रहा था तो मेरी नज़र पूनम पर गई तो वो भी वही देख रही थी और जैसे ही उसकी नज़र मेरी नज़रो से टकराई तो उसने मुस्कुरा दिया मैं सच मे बहुत झेप गया की एक पति अपनी नयी नवेली पत्नी के सामने ये सब कैसे कर सकता है अभी मैं यही सोच रहा था की अंकल और रिंकू एक तरफ बढ़ गये मैं समझ गया की अब रिंकू की गान्ड ट्रेन के टाय्लेट मे मरेगी

इन दोनो के जाते ही पूनम ने मुझे देखा और बोली "वहाँ बैठने मे तकलीफ़ हो रही होगी यहाँ मेरे पास आ जाओ"

उसकी बात भी सही थी झुक कर बैठने के कारण मेरी कमर और कंधो मे दर्द होने लगा था मैं उठा और देखा तो मंजू और डॉली की आँखे बंद थी वो दोनो सो चुकी थी मैं आगे बढ़ा और पूनम के पास बैठ गया और खिड़की से बाहर का नज़ारा देखने लगा ट्रेन अपनी पूरी रफ़्तार से दौड़ी जा रही थी

"तो फिर क्या देखा तुमने" अचानक पूनम ने धीरे से पूछा

"क....क्या देखा और कब" मैं बोला हालाँकि मैं समझ गया था की वो क्या कहना चाहती है

"बनो मत, मैने देखा था की जब रिंकू वो सब कर रहा था तो तुम उसे देख रहे थे" वो बोली

"का.....क्या कर रहा था वो......." मैने हकलाते हुए पूछा

"अब क्यों मेरा मुँह खुलवाने पर तुले हुए हो" वो थोड़ी चिढ़ती हुई बोली

"लेकिन खुल कर तो बताओ की तुम किस बारे मे बात कर रही हो" मैं ढिठई से बोला

"तुम नही मानोगे ऐसे" उसने अपनी गर्दन हिलाई और फिर बोली "तो सुनो जब रिंकू ने उन अंकल का 'लंड' पकड़ा था तब तुम उसे देख रहे थे"

उसके मुँह से लंड शब्द सुनकर तो मेरे तोते उड़ गये और मेरा मुँह खुला का खुला रह गया मुझे उससे ये उम्मीद नही थी

"अब ऐसे मुँह फाडे मुझे क्या देख रहे हो बताओ देखा था उसे या नही" वो फिर बोली

"हाँ देखा था" मैं गर्दन हिलाते हुए बोला

"तो फिर क्या समझा" उसने पूछा

"यही के वो गे है और अंकल को पता कर उनसे गान्ड मरवाना चाहता है, सही कहा ना मैने" मैं बोला जब वो लड़की होकर सीधे सीधे लंड जैसे वर्ड यूज कर रही थी तो मुझे भी गान्ड बोलने मे क्या दिक्कत थी

"हुम्म..." उसने गर्दन हिलाई
 
"लेकिन तुम्हारे रहते वो ऐसा कैसे कर सकता है और फिर खुद तुम भी उसे रोक नही रही हो जबकि मेरे ख़याल से तुम्हारी शादी भी अभी अभी ही हुई है" मैं उलझन मे बोला

"हाँ अभी 10 दिन ही हुए है और अभी तक उसने मुझे एक बार भी नही च्छुआ है लेकिन सब पहले से ही हम दोनो मे तय हो गया था" वो बोली

"क्या तय हो गया था ज़रा डीटेल मे बताओ" मैं उसकी हिस्टरी जान.ने को उत्सुक हो गया था

"दरअसल बात ये है की हमारी शादी शादी नही बल्कि एक समझौता है जो हम दोनो को क़ुबूल है" वो बोली

"कैसा समझौता" मैने पूछा

"सुनो, मैं एक ग़रीब परिवार से हूँ मैं अपने मा बाप की इकलौती औलाद हूँ मेरे पापा मेरे जनम के कुछ साल बाद ही गुजर गये थे मा ने जैसे तैसे मुझे पाला और अभी मैं 19 साल की ही हुई थी की वो भी चल बसी अब मैं पूरी तरह बेसहारा हो गई थी मुझे समझ नही आरहा था की अब मैं आगे ज़िंदगी कैसे गुज़ारुँगीऔर वो भी भयानक दरिंदो के बीच जो मेरी इज़्ज़त को लूट लेना चाहते थे अभी मेरी मा को मरे दो दिन भी नही हुए थे की मुँहल्ले के एक गुंडे ने मेरे साथ ज़बरदस्ती करनी चाही तो मैं बचने को भागती दौड़ती एक घर मे घुस गई जहाँ एक आंटी रहती थी मैने उसे अपने बारे मे सब कुछ बता दिया तो उसने कुछ देर सोचा और फिर मुझे अपने साथ ही रहने के लिया बोला और जब थोड़ी रिलॅक्स हो गई तो उसने अपने बारे मे बताया की वो कॉल गर्ल सप्लाइ करने के धन्धे मे है और उसने मुझे भी ये धंधा जाय्न करने को कहा अब मैं सोच मे पड़ गयी थी आख़िर मैने उसकी बात मान.ने का फ़ैसला कर लिया था क्योंकि मुझ जैसी ग़रीब और बेसहारा लड़की से कोई भी शादी नही करने वाला था बस सब अपनी हवस का शिकार ही बनाते थे जबकि कॉल गर्ल बनने के बाद मुझे इस काम के पैसे भी मिलते तो मैने आंटी को हाँ कह दिया अब चुकी मैं अभी तक वर्जिन थी तो मैने ये बात आंटी को बताई तो वो बहुत खुश हुई और पहली बार मे ही मुझे 50 हज़ार मिले फिर रेट कम हो गया

अब मुझे हर रात के 20 हज़ार मिलते थे लेकिन अभी मैं ये काम 15 दिन ही कर पाई थी की मेरी मुलाकात रिंकू से हुई जो दूसरे शहर से आया था फिर हमारी बाते चली और उसने मुझे ऑफर दिया की वो मेरे साथ शादी कर सकता है लेकिन वो गे है जिस वजह से हो मेरे साथ सेक्स नही करेगा वो मुझसे शादी सिर्फ़ दुनिया को दिखाने भर के लिए कर रहा है तो मैने उसे कहा की ऐसे कैसे गुज़रेगी वो तो किसी भी आदमी से सेक्स करके अपना काम निकाल लेगा लेकिन मेरा क्या होगा तो उसने कहा की हम हर महीने दो तीन बार किसी दूसरे शहर मे घुमने जाएँगे जहाँ मैं अपने पसंद के किसी भी आदमी के साथ सेक्स कर लिया करूँगी और मैं उसे भी किसी आदमी के साथ करने से मना नही करूँगी उसके बात मुझे अच्छी लगी क्योंकि वो एक अमीर आदमी था और वैसे भी मैं कॉल गर्ल का काम मजबूरी मे ही कर रही थी तो मैने हाँ कर दी बस यही बात है और हम गोआ भी इसीलिए जारहे है" उसने बताया

"और बच्चे, उनका क्या" मैने पूछा

"अरे जब शादी को है तो बच्चे भी तो होने चाहिए ना" मैने उसे समझाया

"वो........उसने मुझसे कह रखा है की कब भी मैं मा बन.ना चाहूँ उसे बता दूँ वो किसी अच्छे से हॉस्पिटल मे उसका और मेरा टेस्ट ट्यूब बेबी करवा लेगा" उसने बताया

"ह्म......मतलब सब बाते क्लियर है सब सोच रखा है" मैं गर्दन हिलाते हुए बोला

थोड़ी देर के लिए चुप्पी च्छा गई फिर मैं ही बोला "वो तो अंकल के साथ मज़े करने चला गया लेकिन तुम्हारा क्या होगा"

"मेरे लिए तुम होना" वो मुस्कुराते हुए बोली

"मतलब मैं तुम्हे पसंद हूँ" मैने कहा

"नही तो क्या इतना सब तुम्हे ऐसे ही बाते दिया" वो बोली

"लेकिन करेंगे कहाँ" मैने पूछा
 
"वहीं जहाँ अभी अंकल और रिंकू कर रहे होंगे यानी टाय्लेट मे" वो आँख मारते हुए बोली

"लेकिन वहाँ मज़ा नही आएगा" मैं बोला

"मज़ा चूत मे लंड जाने से आता है जगह से नही समझे" वो मेरा हाथ पकड़ कर बोली

"तो कब डलवाओगी अपनी चूत मे मेरा लंड" मैं भी उसके हाथ दबाते हुए बोला

"आज......अभी" वो मेरी आँखो मे देखते हुए बोली

"अभी लेकिन........." मैने कहना चाहा

"अभी सभी लोग गर्मी के मारे लेटे हुए है यही सही मौका है फिर पता नही मौका मिले या नही" वो बोली

"ओके तो चलो" मैं बोला अभी तक इससे हुई बातों के बाद मेरा लंड खड़ा हो चुका था

"ठीक है मैं जाती हूँ फिर तुम आ जाना" वो बोली

"लेकिन मुझे कैसे पता चलेगा की तुम कोन्से टाय्लेट मे हो" मैं बोला

"मैं टाय्लेट के गेट मे अपनी चुननी को थोड़ा सा अटका दूँगी तुम उसी मे आ जाना" कहते हुए वो अंकल और रिंकू जिधर गये थे उसके ऑपोसिट वाले टाय्लेट की तरफ बढ़ गई

जैसे ही वो मेरी आँखो से ओझल हुई मैं भी खड़ा हुआ और डॉली और मंजू की तरफ देखा दोनो घोड़े बेच कर सो रही थी मैं एक बार और इधर उधर नज़र घुमाई और पूनम के पीछे निकल गया

टाय्लेट के आस पास कोई नही था और मुझे पूनम की चुननी भी दिखाई दे गई तो मैने गेट को नॉक किया तो झट से वो खुला और पूनम ने फुर्ती से मुझे अंदर खींच लिया और गेट लॉक कर दिया अंदर घुसते ही मेरी नज़र उस पर पड़ी तो मैं शॉक्ड रह गया सामने पूनम सिर्फ़ पैंटी मे खड़ी थी

उसके बड़े बड़े बूब्स बहुत ही मस्त लग रहे थे और उसकी मोटी मोटी जाँघो के बीच पैंटी के अंदर फूली

हुई चूत भी गजब का समा बना रही थी मैं उसके पास पहुँचा और उसके होंठो को चूसने लगा और उसके बूब्स दबाने लगा वो भी मेरे पैंट की ज़िप खोल कर मेरे लंड को बाहर निकाल कर उससे खेलने लगी अभी दो मिनिट ही ये सब हुआ था की उसने मुझे रोक दिया

"हमारे पास इतना टाइम नही है जो करना है जल्दी करो" कहते हुए वो मेरे तरफ पीठ करके खड़ी हो

अब उसकी पैंटी मे फसी बड़ी सी गान्ड मेरी आँखो के सामने थी और उसकी बात सुनकर मैं भी अपने कपड़े उतारने लगा अभी मैं कपड़े उतार कर फ्री हुआ हो था की पूनम अपनी पैंटी नीचे कर के सामने झुक गई जिससे उसकी नंगी चूत मुझे दिखाई देने लगी

"चलो अब देर मत करो और ठूँस दो अपना लंड मेरी चूत मे और निकाल दो मेरी सारी गर्मी" पूनम बेकरार होते हुए बोली

अब मैने भी देर करना ठीक नही समझा और उसकी चूत पर लंड सेट करके एक ही झटके मे आधा लंड उसकी चूत मे उतार दिया अचानक हुए इस हमले से वो बौखला गई शायद उसे कुछ दर्द भी हुआ था आख़िर मेरा लंड था भी थोड़ा मोटा

"आराम से कर जानवर मैं कहीं के भागी नही जा रही हूँ" वो सिसकारी भरते हुए बोली

फिर मैने धीरे धीरे कर के पूरा लंड उसकी चूत मे उतार दिया और उसकी चुदाई करने लगा

जैसे जैसे उसकी चूत गीली हो रही थी मेरे धक्को की स्पीड बढ़ती जा रही थी ठप ठप का एक मधुर संगीत पूरे टाय्लेट मे गूँज रहा था जो मेरी जाँघो के उसके चूतडो से टकराने से पैदा हो रहा था 5

मिनिट की चुदाई के बाद ही वो काँपने लगी उसके पैर थरथरने लगे

"आ......मेरा होने वाला है" वो बोली

"मैं भी बस आया ही समझो" कहते हुए मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा और 8-10 धक्को के बाद मेरा भी निकलने लगा और पूनम की चूत मेरे पानी से भर गई और मैं वैसे ही उसकी चूत मे लंड फसाए खड़ा हापने लगा.....................
 
अपडेट 92 आ

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ट्रेन मे पूनम की चुदाई हो चुकी थी और हम दोनो ही अपनी सीट्स पर वापस आचुके थे अब मुझे भी थकान और गर्मी की वजह से नींद आने लगी थी इसलिए मैं भी अपनी बर्त पर जाकर लेट गया और फिर मुझे नींद ने आ घेरा

शाम के कोई 7 बजे मेरी नींद खुली तब तक सूरज डूब चुका था और हल्का हल्का अंधेरा होने लगा था मैने उठ कर देखा तो सभी लोग जागे हुए थे और उनके बीच कुछ बाते भी हो रही थी मैं अपनी सीट से उतर कर सीधे टाय्लेट गया और फ्रेश होकर मंजू के साइड मे बैठ गया जैसे ही उसने मुझे देखा उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गई और वो

बड़े ध्यान से मुझे देखने लगी मैं समझ नही पाया की वो इस तरह क्यों मुस्कुरा रही है

'कहीं इसे मेरे और पूनम की बारे मे पता तो नही चल गया' मेरे मन मे ये सवाल आया लेकिन फिर मैने सोचा की मैं अच्छे से सब कुछ देख कर ही पूनम के पीछे गया था फिर इसे कैसे पता चल सकता है लगता है बात कुछ और ही है

"ऐसे क्या देख रही हो" मैने उससे पूछा

"मैने कहा था ना की ट्रेन मे तुम्हारा और डॉली का कुछ नही हो सकता" वो बोली

"तो......तो क्या हुआ डॉली तो तैयार है ना" मैं बोला

"नही......वो तैयार थी लेकिन अब नही है" मंजू

फुसफुसाते हुए बोली

"लेकिन क्यों?" मैने पूछा

"ये तुम उसी से पूछ लो" कहते हुए मंजू उठ कर डॉली की दूसरी बाजू बैठ गई और डॉली को मेरी तरफ खिसका कर उसके कान मे कुछ कहा तो डॉली मेरी तरफ देखने लगी

"क्या हुआ......" मैं बोला

"यार सोनू इस ट्रेन को टाय्लेट देखी है कितनी गंदी है, मुझे तो वहाँ पेशाब करने मे भी घिंन आ रही है अब ऐसे मे अपन वहाँ वो सब कैसे कर पाएँगे......ना बाबा ना ट्रेन वाला प्रोग्राम तो कॅन्सल

गोआ पहुच कर ही करेंगे यहाँ मेरे बस का नही है" डॉली नाक सिकोडते हुए बोली

"लेकिन....." मैने कहना चाहा

"कोई लेकिन वेकीन नही मैने कहा ना जो करना है गोआ मे ही करेंगे" वो तुनकते हुए बोली

अब मेरे पास और कोई चारा नही था सामने वाली आंटी और उसकी बेटी शुभी तो अब मेरी तरफ देख भी नही रही थी और मंजू और डॉली तो कुछ करने से रही थी तो आख़िरी रास्ता पूनम का ही बचा था जो रात मे मेरे लंड को प्यास बुझा सकती थी लेकिन पता नही क्यों अभी वो भी शांत ही बैठी थी उसकी हरकतों से नही लगता था की वो रात मे चुदवाने के लिए तैयार होगी

खैर टाइम बीत.ता गया और रात के 9.30 बज गये और केटरिंग वाले सभी के लिए डिन्नर लाने लगे हमारा भी डिन्नर आ गया तो हम सभी लोग उसमे बिज़ी हो गये आधा घंटा बाद हम सभी खाना खा चुके थे और एक बार फिर गपशप शुरू हो गई थी लेकिन मेरी हसरत भरी निगाहे बार बार पूनम की तरफ जा रही थी लेकिन पता नही क्यों वो मेरी तरफ देख भी नही रही थी खैर ऐसे ही रात के 12 बज गये और सभी सोने की तैयारी करने लगे मैं भी मन मार कर अपनी सीट पर लेट गया और पूनम को मन ही मन गालियाँ बकने लगा लेकिन अब कुछ हो भी नही सकता था और इसी तरह किलप्ते हुए मेरी नींद लग गई

सुबह जब नींद खुली तो हम गोआ के मुदगाओं मे थे और डॉली के उठाने की वजह से ही मैं उठा था मैने चारो तरफ देखा तो पूनम उसका पति और सामने वाले तीनो मा बाप बेटी कोई भी वहाँ नही थे

"बाकी सब कहाँ है" मैने पूछा

"सब लोग ट्रेन से उतर चुके है हम ही आख़िरी है, चलो अब जल्दी से समान लेकर उतरो" डॉली बोली

"थोड़ा रूको पहले मैं फ्रेश तो हो लू" मैं बोला

"अब जो भी करना है प्लॅटफॉर्म पर करना" कहते हुए डॉली ने मुझे एक बाग पकड़ा दिया और फिर हम तीनो ही अपना लगेज ले कर ट्रेन से उतर गये

अभी हम उतरे ही थे की मेरा मोबाइल बजा

"हेलो...." मैं बोला

"सर मैं गोआ मे आपकी गाइड, आप लोग कहाँ हो" मेरे कानो मे किसी लेडी की आवाज़ आई

फिर मैने उसे अपनी पोज़िशन बताई तो दो मिनिट के अंदर ही वो हमारे पास आ गई और हमे अपने साथ लेकर होटेल की तरफ निकल गई वो कोई 30-32 साल की एक लेडी थी जो ज़्यादा सुंदर तो नही थी लेकिन उसका फिगर कमाल का था

रास्ते मे उससे बहुत सी बाते हुई और आख़िर कोई एक घंटे बाद हमारा होटेल भी आ गया रूम मे पहुचते ही वो बोली "सिर अभी आप लोग आराम कीजिए रात के सफ़र से आप तक गये होंगे शाम को हमारी मुलाकात होगी और आपकी ये शानदार ट्रिप भी शुरू हो जाएगी"

"ओके" मैं बोला और वो चली गई

अभी सच मे हम सभी थके हुए थे और ट्रेन मे नींद भी ढंग से नही हुई थी तो सभी फ्रेश होने के बाद एक बार फिर नींद पूरी करने लगे..............
 
अपडेट 92 ब

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मेरी नींद खुली तो देखा दोपहर के 12 बज चुके थे डॉली और मंजू दोनो नहा धोकर फ्रेश हो चुकी थी और बेड पर बैठे टीवी देख रही थी जैसे ही डॉली ने देखा की मैं उठ गया हूँ तो वो मुस्कुराइ

"चल अब जल्दी से नहा ले मैने लंच ऑर्डर कर दिया है" वो बोली अब तक मंजू भी मेरी तरफ देखने लगी थी और उसकी आँखो मे पता नही कैसा नशा मुझे दिखाई दे रहा था

मैं उठा और अगले 15 मिनिट्स मे नहा कर तैयार हो गया तब तक लंच भी आ गया था तो बगैर और कोई बात किए हम उस पर टूट पड़े क्योंकि सुबह नाश्ता भी नही किया था लंच के दौरान भी मंजू

और डॉली बार बार शरारती नज़रो से मुझे देख रही थी और खुद भी आँखो आँखो मे ही इशारो मे बाते कर रही थी

खैर लंच ख़तम करके हम तीनो ही बेड पर बैठ कर टीवी देखने लगे तब तक होटेल वाले हमारे लंच के बर्तन भी ले जा चुके थे और उनके जाते ही डॉली ने रूम का गेट लॉक कर दिया और मेरे पास आकर बैठ गई

"तो अब क्या प्रोग्राम है" डॉली मेरी जाँघ पर हाथ फेरते हुए बोली

"अभी क्या है हमारी ट्रिप तो शाम से शुरू होगी गाइड मे बताया तो था" मैं बोला

"अरे वो तो गोआ घुमाने की ट्रिप स्टार्ट होगी ना लेकिन अपना प्रोग्राम करने के लिए तो पूरा दिन पड़ा है ना" डॉली बोली

"मतलब........" मैं समझ तो गया था की वो क्या

कहना चाहती है लेकिन फिर भी अंजान बनते हुए मैने पूछा

"मतलब ये की अभी हमे मंजू का सुहाग दिन मनाना है और उसके बाद कल ट्रेन मे हो मेरी प्यास नही बुझ पाई थी उसे बुझाना है" डॉली बोली अब वो पैंट के उपर से मेरा लंड दबा रही थी जो धीरे धीरे अपनी औकात मे आता जा रहा था

"मंजू के सुहाग दिन की बात तो ठीक है लेकिन तूने भी वादा किया था की गोआ पहुचते ही तू मुझे मेरी फेवोवरिट चीज़ गिफ्ट देगी" मैं बोला अब मेरे हाथ भी उसके टॉप के अंदर घुस कर उसके बूब्स दबाने लगे थे अंदर उसने ब्रा नही पहनी थी

"कौन सी चीज़" वो जान कर बोली जबकि उसे पता था की मैं किस चीज़ के बारे मे कह रहा हूँ
 
"ये चीज़........." कहते हुए मैने उसे अपनी गोद मे उल्टी कर के लेटा दिया और उसकी स्कर्ट उपर को खींच दी और जैसे ही उसकी स्कर्ट उपर हुई जैसे मेरी आँखे चौंधिया गई अंदर उसने पैंटी भी नही पहनी थी यानी उसने सिर्फ़ स्कर्ट और टॉप ही पहना था उसके माखन जैसे सफेद सफेद गोल गोल उभरे हुए चूतड़ मेरी आँखो के सामने थे तभी डॉली ने पलट कर मेरी तरफ देखा और मेरा खुला मुँह देख कर उसकी हँसी छूट गई

"ऐसे क्या देख रहा है, मैने ब्रा पैंटी क्यों नही पहनी है यही सोच रहा है ना लेकिन फिर भी मैने स्कर्ट टॉप दो कपड़े तो पहने ही है लेकिन इस मेडम ने ब्रा पैंटी तो पहनी ही नही है इस पर भी सिर्फ़ एक ही कपड़े मे काम निकाल लिया है" डॉली हँसते हुए मंजू की तरफ देखते हुए बोली जो सिर्फ़ एक गाउन पहने हुए थी

डॉली की बात सुनकर मंजू ने मुस्कुराते हुए शरम से अपनी गर्दन नीचे झुका ली

"क्या सच......." मेरे मुँह से निकला

"अबे इसमे क्या है खुद ही उसका गाउन उतार कर देख ले" डॉली बोली

और उसकी बात सुनकर मैने उसे अपनी गोद से उतरा और मंजू की तरफ खिसक गया जैसे ही मंजू ने मुझे ऐसा करते देखा वो थोड़ा पीछे को हटी "नो.......नो.....नो" वो सिमट.ती हुई बोली

"अब ये क्या है यार आज तेरी चूत की ओपनिंग होने वाली है जो कपड़े उतार कर ही होगी फिर ऐसे क्यों शर्मा रही है" डॉली बोली

"तेरी भी तो गान्ड फटने वाली है आज फिर तू क्यों कपड़े पहने हुए है अभी तक" मंजू किलप्ते हुए बोली

"अच्छा तो ये बात है" कहते हुए डॉली एक सेकेंड मे ही अपने दोनो कपड़े उतार कर नंगी हो गई और बोली "चल सोनू अब तू भी अपने कपड़े उतार दे और फिर तेरी होने वाली बीवी का गाउन उतारना "

डॉली की बात सुनकर मैने भी अपने कपड़े उतार फेके और पूरा नंगा हो गया मेरा लंड खड़ा हुआ झटके मार रहा था मैं मंजू के पास पहुचा और उसे खड़ा कर दिया और एक झटके मे उसका गाउन उतार दिया अब हम तीनो ही रूम मे नंगे खड़े थे

"ये हुई ना बात" डॉली के मुँह से निकला

"अब पहला नंबर किसका है" मैने पूछा

"पहला नंबर तो हमेशा चूत का ही होता है गान्ड तो बाद मे ही मरती है" डॉली बोली

"तो मंजू तुम तैयार हो, एक बार फिर सोच लो" मैने मंजू से पूछा तो उसने हाँ मे गर्दन हिला दी..........
 
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