वँया- दिलीप तुम्हे अरुणा और अवन्तिका से बात करनी चाहिए
दिलीप- मैं कुछ बोलता उससे पहले[मेघा को होश आने लगा]
मेघा मामी जी के गले लग्के रोने लगी
छोटी मामी- चुप हो जा बेटी तू रो क्यूँ रही है मैं हूँ ना तेरे पास
मेघा- मम्मा मैं बहुत डर गयी थी
[छोटे मामा भी आ गये]
छोटे मामा- [मेघा के सर पे हाथ रखते हुए] मेरी बहादुर बेटी
मेघा- पापा
[मैने वँया का हाथ पकड़ा और रूमसे निकल गया]
वँया- क्या है
दिलीप- तुम्हे क्या है हर वक़्त रोती रहती हो चलके अरुणा और अवन्तिका को बोलो मेघा को होश आ गया है
हम नीचे हॉल में गये
वँया- अरुणा दी मेघा को होश अगया है
अरुणा- अवन्तिका चल जल्दी
अवन्तिका- जी दीदी
[अरुणा और अवन्तिका मेघा को देखने चली गयी]
दिलीप- यहाँ से नज़दीक कोई मार्केट है
वँया- मेघा की तबीयत खराब है और तुम्हे मार्केट घूमना है
दिलीप- बताना है तो बताओ वरना मैं खुद ढूँढ लूँगा
वँया- रूको चलती हूँ झगड़ालू बैल
दिलीप- क्या बोली
वँया- कुछ नही चलो
[बाहर आके] काका गाड़ी निकालिए
दिलीप- मार्केट जाने के लिए कार लेजाना ज़रूरी है पैदल नही चल सकती
वँया- 2किमी दूर है मार्केट
दिलीप- हाँ तो टॅक्सी ले लेंगे
[वँया और मैं घर से बाहर निकले
वँया ने एक टॅक्सी रुकाई हम उसमे बैठ गये वँया ने बताया कहाँ जाना है
थोड़ी देर बाद हम मार्केट पहुँच गये मैने टॅक्सी वाले को पैसा दिया]
वँया- अब तो बताओ क्या काम है
दिलीप- तुम्हे क्यूँ जानना है
वँया- मत बताओ
मैं एक फ्लवर्स की दुकान पे गया और एक गुलदस्ता खरीदा उस गुलदस्ते पे लिखा था ;;गेट वेल सून
ये लो मैने वँया को गुलदस्ता देते हुए कहा
वँया- मेरे लिए थॅंक यू
दिलीप- मेघा के लिए है
वँया- पर यह तो तुमने लिया है मेघा के लिए तुम्हे ही देना चाहिए
दिलीप- मैं नही दूँगा
वँया- क्यूँ
दिलीप- मैं ये गुलदस्ता मेघा को दूँगा तो मामी अरुणा और अवन्तिका सोचेगी कि मैं छोटे मामा के सामने अपनी बढ़ाई करवाना चाहता हूँ
वँया- कितना ग़लत सोचते हो तुम तुम्हे पता है कल तुम्हारे जाने के बाद अरुणा दी और अवन्तिका कितना रोई हैं
दिलीप- तो मैं क्या करूँ
वँया- तुमने यह गुलदस्ता मेघा के लिए लिया है तो तुम्ही दो मैं नही दूँगी
दिलीप- मेरे लिए इतना नही कर सकती
वँया- नही
दिलीप- तुम्हे मेरी कसम
वँया- दे दूँगी अब चलें यहाँ से फिर हम टॅक्सी में बैठे हमे गये हुवे 2 घंटे हो गये थे
जब हम छोटे मामा के घर पहुँचे तो सी मामा चाइ पी रहे थे छोटी मामी किचन में थी
छोटे मामा- दिलीप कहाँ थे तुम 2 घंटे से
दिलीप- मार्केट गया था
छोटे मामा- बता के जाया करो
दिलीप- जी मामा जी हम मेघा को देख के आते हैं
सी मामा- ठीक है बेटा
दिलीप- मैं और वँया मेघा के रूम में पहुँचे वहाँ पे पाँचो बहनें बाते कर रही थी
विद्या- वानु कहाँ गये थे तुम दोनो
वँया- मार्केट गये थे
[वँया ने वो गुलदस्ता मेघा को देते हुए कहा] दिलीप लेके आया है तुम्हारे लिए
[मैने वँया को घूर के देखा]
मेघा- थॅंक यू दिलीप अरुणा दी ने मुझे बताया कि तुमने ही मेरी मदद की थॅंक यू सो मच
दिलीप- कोई बात नही आप आराम करो
[मेरी इस बात पे अरुणा और विद्या दोनो हँसने लगी]
वँया- अरे आप सब इतना क्यूँ हंस रही हैं
विद्या- बताती हूँ
दिलीप मेघा से इतनी इज़्ज़त से बात कर रहा है जैसे मेघा दादी अम्मा हो उसकी
मेघा- विद्या दीदी जाइए मैं आपसे बात नही करती
अरुणा- देख दादी अम्मा गुस्सा हो गयी
[मेघा अपना मुँह फूला कर बैठ गयी]
[सबने उसे किसी तरह मनाया]
दिलीप- वँया
वँया- क्या है
दिलीप- मैं अपने रूम में जा रहा हूँ
विद्या- दिलीप तुम भी बैठो ना हमारे साथ
[मैं कुछ नही बोला और सबके साथ बैठ गया
सब गॉसिप कर रहे थे और मैं बोर हो रहा था]
मैं फिर उठ गया
दिलीप- वँया मुझे कुछ काम है
मैं थोड़ी देर में आता हूँ
वँया- तुम्हे क्या काम है
[मैने वँया को घूर के देखा]
मैं भी आती हूँ
[मैं अपनी गर्दन ना में हिला दिया]
फिर भी वँया खड़ी होगयि फिर हम दोनो मेरे रूम में आए
मैं जल्दी से बाथरूम में घुसा और हल्का होने लगा
मैं बाथरूम से निकला तो वँया मुस्कुरा रही थी
दिलीप- तुमने मेरा नाम क्यूँ लिया
वँया- मैं कुछ समझी नही
दिलीप- मेरी प्यारी भोली वँया
गुलदस्ता तुमने दिया और नाम मेरा लिया
वँया- तुम उनसब से इतनी नफ़रत क्यूँ करते हो
दिलीप- नफ़रत
[मैं ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा]
तुम्हे पता है नफ़रत किसे कहते हैं नफ़रत वो है जो मैं रोज सहता हूँ फिर भी उफ्फ नही करता मैं इंसान हूँ मुझे भी तकलीफ़ होती है मैं सबसे दूर रहता इसकी वजह है आज कोई भी मुझे गाली देता है धूतकारता है मैं सहन कर लेता हूँ और सहन करता रहूँगा लेकिन कल अगर यह लोग मेरे दिल में बस गये तो फिर मैं इनकी नफ़रत इनकी गाली इनका धूतकारना कभी भी सहन नही कर पाउन्गा
दिलीप- मैं वही पे बैठा रोता रहा वँया रूम का गेट खोलके बाहर चली गयी
[चलिए देखते हैं वँया कहाँ गयी]
वँया दिलीप के रूम से सीधा मेघा के रूम की तरफ जाने लगी
ऐसा लग रहा था वँया को दिलीप से ज़्यादा तकलीफ़ हो रही थी
वँया की आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे वँया मेघा के रूम में पहुँची
पाँचो बहनो ने जब वँया की आँखों में आँसू देखा तो वो बहुत ज़्यादा घबरा गयी
विद्या- छोटी क्या हुआ तुझे तू रो क्यूँ रही
[वँया कुछ नही बोली]
अरुणा- वानु क्या हुआ मुझे बताना
विद्या- वँया वँया
[वँया कुछ बोल ही नही रही थी]
सुनीता और मेघा तो ज़्यादा डर गयी और रोने लगी
तभी विद्या ने वँया का कंधा पकड़ के ज़ोर से हिलाया वँया होश में आई और विद्या के गले लग्के रोने लगी
वँया- दीदी वो कह रहा था कि वो मर जाएगा
विद्या- कौन मर जाएगा बताना छोटी मेरा दिल बहुत घबरा रहा है
वँया- दिलीप
सब के मुँह से यही निकला क्या
विद्या- क्या हुआ दिलीप को
[वँया अपने दुपट्टे में से मोबाइल निकल के विद्या को देती है]
विद्या- छोटी यह तो मेरा मोबाइल है यह तेरे पास कहाँ से आया
[वँया वो मोबाइल विद्या से लेती है और उसमें वाय्स रेकॉर्डर प्ले कर्देति है]
विद्या- छोटी यह क्या कर रही
[दिलीप के बाथरूम से निकलने के बाद जो बाते दिलीप और वँया के बीच होती है वो सब मोबाइल के ज़रिए सब को सुनाई देता है जैसे जैसे दिलीप की बात आगे बढ़ती है सब के आँखों से आँसू बहने लगते हैं]
अरुणा- दी हमें देखना चाहिए कहीं दिलीप कोई ग़लत कदम ना उठा ले
[विद्या से]
विद्या- हाँ
[उसके बाद दिलीप की बहनें उसके रूम की तरफ दौड़ी]
[अब देखते हैं इधर क्या हुआ जब वँया रूम से बाहर गयी]
दिलीप- मुझे आज बहुत तकलीफ़ हो रही थी ऐसा लग रहा था कि अब मैं इनलोगो की नफ़रत बर्दाश्त नही कर पाउन्गा तभी मेरे सर में बहुत तेज़ दर्द होने लगा ऐसा लगा कि इस दर्द से मेरी जान निकल जाएगी मेरी पलके भारी होने लगी और मैं बेहोश हो गया वँया और बाकी सब दिलीप के रूम में पहुँचे
वँया दौड़ के दिलीप के पास गयी
वँया- दिलीप उठोना क्या हुआ तुम्हे दीदी देखोना दिलीप नही उठ रहा है
विद्या- अवन्तिका जल्दी से डॉक्टर को फोन लगा
अवन्तिका- डॉक्टर का नंबर तो मम्मा के पास है अभी जाती हूँ नीचे
अवन्तिका- मम्मी आपका फोन कहाँ है
छोटी मामी- वहाँ टेबल पे है तू इतनी घबराई हुई क्यूँ है
अवन्तिका- मम्मी दिलीप बेहोश हो गया है डॉक्टर को फोन करूँगी
सी मामी- उसे क्या हुआ
अवन्तिका डॉक्टर को फोन करने लगी
छोटी मामी- अब तो बता क्या हुआ दिलीप को
अवन्तिका- पापा का कहाँ हैं
छोटी मामी- ऑफीस गये हैं तू बात मत बदल
अवन्तिका ने सारी बात बताई
छोटी मामी- तू क्यूँ चिंता करती है उसे कुछ नही होगा जब तक वो हम सब की खुशियो में आग नही लगाएगा वो मरेगा नही
अवन्तिका- मम्मी आप को जितनी नफ़रत करनी है दिलीप से करिए हम बहनो का प्यार हमारे भाई के लिए काफ़ी है
छोटी मामी- बदतमीज़ अपनी माँ से ज़ुबान लड़ाती है
अवन्तिका बिना कुछ सुने दिलीप के रूम की तरफ जाने लगती है
इधर वँया का रोरोके बुरा हाल था
विद्या- छोटी चुप हो जा दिलीप ठीक हो जाएगा
वँया- यह सब मेरी वजह से हुआ है मैने दिलीप को उकसाया था कि वो अपने दिल का बोझ हल्का करे
विद्या- तेरी कोई ग़लती नही है ग़लती तो हमारी है हम कभी दिलीप को समझ नही पाए
दिलीप के लिए पापा और चाची की नफ़रत को बचपन से देखके हमारे दिल में भी दिलीप के लिए नफ़रत बैठ गयी
जबकि हमें पता ही नही है कि हम दिलीप से नफ़रत क्यूँ करते हैं
अरुणा- आप ठीक कह रही हैं दीदी हर साल हम गाओं जाते थे लेकिन कभी हम ने दिलीप से बात नही की
दिलीप हम से मिलने भी आता था तो हम उसे धूतकार के भगा देते थे
मेघा- दीदी दिलीप को कुछ होगा तो नही
विद्या- कुछ नही होगा दिलीप को आज तक दिलीप हमारी नफ़रत सहता रहा लेकिन अब मैं अपने भैया को कुछ नही होने दूँगी
अरुणा- हम अपने भैया को कुछ नही होने देंगे दीदी
अवन्तिका- हम सब बहने अपने भैया को कुछ नही होने देंगे
विद्या- डॉक्टर को फोन किया
अवन्तिका- जी दीदी थोड़ी देर में अजाएगा
विद्या- पहले दिलीप को बेड पे लिटाओ सब बहनो ने दिलीप को उठाके बेड पे लिटाया
वँया दिलीप के सर को अपनी गोद में रखे हुए थी सब बहनों के आँखो से आँसू बह रहे थे
विद्या- अवन्तिका जाके नीचे बैठ डॉक्टर आए तो जल्दी लेके आना
अवन्तिका रूम से बाहर आई और सीढ़ियो पे बैठ गयी वो अपनी माँ से बात नही करना चाहती थी
थोड़ी देर बाद डॉक्टर आगया
अवन्तिका डॉक्टर को उपर लेके आई
डॉक्टर ने दिलीप को चेक किया एक इंजेक्षन लगाया
डॉक्टर- थोड़ी देर में होश आजाएगा यह कहके डॉक्टर चला गया
अरुणा- देखो दिलीप को होश आरहा है
दिलीप- मैने अपनी आँखें खोल के देखा तो मैं चौंक गया मेरा सिर वँया की गोद में है मेरी पाँचो बहने मेरे आजू बाजू बैठी है काश यह पल यही थम जाए लेकिन मेरे दिमाग़ ने मुझे समझाया यह सच नही है
आप सब यहाँ वँया तुम रो क्यूँ रही हो
अरुणा- दिलीप हमें माफ़ करदो
दिलीप- आप सब जाइए यहाँ से
विद्या- दिलीप हम तबतक यहाँ से नही जाएँगे जब तक तुम हमें माफ़ नही करते
दिलीप- मैने कहा ना मुझे आप सब से बात नही करनी है यह कहके मैने अपना मुँह वँया की गोद छुपा लिया और रोने लगा
अरुणा- दिलीप तुम चाहो तो हमें भी धूतकार लो मार लो पर हमें माफ़ करदो
विद्या- हम बहनों ने कभी भी तुम्हे राखी नही बाँधी शायद इसी लिए तुम हमें माफ़ नही कर रहे हो
दिलीप- आप समझ नही रही हैं आज आप सब जोश में होश खो बैठी हैं लेकिन कल आप सब मुझे फिर से ठुकरा देंगी
तो मैं तो जीते जी मर जाउन्गा
[सब एक साथ दिलीप कहते हुए मेरे गले लग गयी]
विद्या- अगर दुबारा मरने की बात कही तो हम अपनी जान दे देंगे एक बार हमें माफ़ कर्दे हम तुझे अपना भैया नही अपने जिगर का टुकड़ा समझेंगे
दिलीप- [अब मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा था मेरा दिल खुद को रोक नही पा रहा था मैं कितना खुशनसीब हूँ कल मेरे पास सिर्फ़ बड़ी नानी थी लेकिन आज मेरे पास इतनी बहने और वँया है] भैया भी चलेगा
अरुणा- दीदी क्या बोला अभी दिलीप ने
विद्या- मुझे क्या पता उसी से पूछ
दिलीप- भैया भी चलेगा यह कह के मैं विद्या दी के गले लग गया और रोने लगा
अवन्तिका - तू सिर्फ़ विद्या दी का भैया नही है हम सबका है
मेघा- हाँ
अरुणा- दीदी देखो तो
हमारा भैया कैसे लड़कियो की तरह रो रहा है
विद्या- अरुणा तू तो सच बोल रही है अब चुप भी हो जा कितना रोएगा
दिलीप- मैं कहाँ रो रहा हूँ
अरुणा- दीदी मैं अपने भैया के लिए स्पेशल आलू के पराठे बना के लाती हूँ
[यह कहके अरुणा चली गयी]
विद्या- तेरे हाथ के पराठे भैया तू तो गया
मेघा- दीदी अब भैया का क्या होगा
अवन्तिका- वही होगा जो अरुणा दी का परान्ठा चाहेगा
दिलीप- आप सब इतना क्यूँ घबरा गयी अरुणा दी पराठे ही तो बनाने गयी हैं कोई बॉम्ब बनाने थोड़ी गयी हैं
अवन्तिका- भैया बॉम्ब बनाके खिलती तो चलता लेकिन अरुणा दी के पराठे
विद्या- अवनी ऐसा नही कहते
अवन्तिका- सॉरी दी
दिलीप- [मुझे तो इस बात से खुशी हो रही थी आज पहली बार मैं अपनी दी के हाथों से बने हुए पराठे खाउन्गा]
[जब अरुणा नीचे गयी]
अरुणा- मम्मी जल्दी किचन से बाहर जाओ
छोटी मामी- क्या करेगी मैं खाना बना रही हूँ
अरुणा- आप खाना बाद में बना लेना मुझे अपने भैया के लिए आलू के पराठे बनाने है
छोटी मामी- एक काम करना आलू के पराठे में थोड़ा सा ज़हेर मिला के अपने भैया को खिला देना
अरुणा- मम्मी अगर अपने ऐसा दोबारा कहा तो
सी मामी- बहुत ज़ुबान चलाने लगी है
अरुणा- आप जाइए यहाँ से
[छोटी मामी बिना कुछ बोले अपने कमरे की तरफ चली गयी]
[दिलीप के रूम में]
दिलीप- दीदी आप मुझसे बात नही करेंगी [मैने सुनीता दी से पूछा]
विद्या- यह तो हम से भी कम ही बात करती है यह सिर्फ़ मेघा से बात करती है
दिलीप- [मैने सुनीता दी की तरफ देखा]
सुनीता- नही भैया दी झूठ बोल रही हैं मैं तो सब से बात करती हूँ मैं तो तुझसे भी बात कर रही हूँ
तू तो मेरा भैया है है ना है कि नही
दिलीप- [मैं विद्या दी की तरफ देखा यह कम बोलता हुआ]
[विद्या दी अवनतिका दी और मेघा दी हँसने लगी उनका हसना बंद ही नही हो रहा था]
सुनीता- आप सब को क्या हुआ है
[तभी अरुणा दी पराठे लेके आ गयी]
अरुणा- पेश है मेरे हाथो के बने स्पेशल आलू के पराठे मैं अपने भैया को अपने हाथो से खिलाउन्गी
[दिलीप- [अरुणा दी मेरे साथ बेड पे बैठ गयी और मुझे अपने हाथों से पराठे खिलाने लगी]
[सब आँखें फाड़ फाड़ के मुझे खाते हुए देख रहे थे]
आप सब भी खाओना
अरुणा- वो सब मेरे हाथ के बने हुवे पराठे नही खाती
दिलीप- इतना स्वादिष्ट है
विद्या- सच में
दिलीप- आप खुद ख़ाके देखो
[उसके बाद तो सब पराठे पे टूट पड़े 5 मिनिट के अंदर सारे पराठे ख़तम हो गये]
अरुणा- यह क्या सारा चट कर गये आज तक तो कभी नही खाया
दिलीप- क्यूँ
अरुणा- मैं बताती हूँ पहली बार जब मैं पराठे बना रही थी मेरी ग़लती से पराठे में लाल मिर्च और नमक ज़्यादा पड़ गया था जब सब ने मेरे हाथ के बने हुए पराठे खाए तो सब ने मेरा बहुत मज़ाक उड़ाया उस दिन से जब भी मैं पराठे बनाती थी
उसमें नमक और लाल मिर्च 10गुना ज़्यादा मिला देती थी
विद्या- इसका मतलब तू हमें आज तक अपने मगरमच्छ आँसू दिखा के अपने ज्वालामुखी टाइप पराठे खिलाती रही
अरुणा- हाँ
विद्या- हाँ की बच्ची रुक तुझे बताती हूँ
[विद्या दी अरुणा दी को चपत लगाने लगी]
अरुणा- भैया बचाओ भैया बचाओ
दिलीप- [मैं उठने लगा]
विद्या- अगर तू वहाँ से उठा है तो तेरी टांगे तोड़ दूँगी
दिलीप- [मैं फिर बैठ गया]
अरुणा- मेरा प्यारा भैया अपनी दीदी को नही बचाएगा
दिलीप- [मैं तो फँस चुका था दोनो तरफ से तभी मुझे गाँव का एक मुहावरा याद आगया]
एक महापुरुष ने कहा था दो औरतो के झगड़े में ना किसी मर्द को पड़ना चाहिए ना ही किसी औरत को
[जहाँ विद्या दी मेरी बात पे खुश दिख रही थी वही अरुणा दी ने अपना मुँह फूला लिया]
[मैने अवन्तिका दी की तरफ देखा]
अवन्तिका- दीदी आप दोनो को यह औरत बोल रहा है
[इस बात पे मैने अपना माथा पीट लिया]
[विद्या और अरुणा दी मेरी सामने आके खड़ी हो गयी
विद्या- मैं तुझे किस आंगल से औरत दिखती हूँ
दिलीप- मैने आपको औरत थोड़े ही कहा है
अरुणा- तो तू मुझे औरत कह रहा है
दिलीप- मैने तो मुहावरे में औरत कहा था
[विद्या दी और अरुणा दी ने एक दूसरे को देखा और लगी मुझे पीटने]
[तभी छोटी मामा के चिल्लाने की आवाज़ आई
वो मेघा दी को आवाज़ दे रही थी]
[मैं मेघा दी की तरफ देखा तो मेघा दी बहुत डरी हुई दिख रही थी]
अरुणा- मेघा पिताजी तुझे आवाज़ दे रहे हैं
[तभी छोटे मामा मेरे रूम में दाखिल हुए उनके चेहरे को देखके हम सब डर गये
छोटे मामा- मेघा हम आपसे सिर्फ़ एक बार पूछेंगे कल आप कहाँ गयी थी
दिलीप- [यह तो बड़े मामा का अंदाज़ है]
[पीछे से छोटी मामी भी आ गयी]
विद्या- चाचा जी बात क्या है
छोटे मामा- अभी हम मेघा को कॉलेज गये थे वहाँ हमें पता चला कि कल कॉलेज की तरफ से कोई पिक्निक प्लान नही किया गया था मेघा जवाब दीजिए
मेघा- पिताजी मुझे माफ़ कर दीजिए लेकिन मैं आपको नही बता सकती
छोटे मामा- मेघा
छोटी मामी- आप शांत हो जाइए
[छोटे मामा मामी को घूर्ने लगे छोटी मामी ने अपनी गर्दन नीचे कर ली]
छोटे मामा- मेघा अगर आपने कुछ ग़लत नही किया है तो हम आपसे वादा करते हैं हम आपको माफ़ करदेंगे
दिलीप- [मेघा दी ने अपनी गर्दन ना में हिला दी]
[मामा जी गुस्से में मेघा दी की तरफ बढ़ने लगे]
[डर तो बहुत लग रहा था पर क्या करूँ बहेन का सवाल था मुझे पता था कि छोटे मामा कभी गुस्सा नही करते
लेकिन जब करते है तो जल्दी शांत नही होते ]
[मैं मामा जी के सामने खड़ा हो गया]
छोटे मामा- दिलीप सामने से हट जाओ
दिलीप- आप शांत हो जाइए
छोटे मामा- हम ने कहा सामने से हट जाओ
दिलीप- आप शांत हो जाइए
छोटे मामा- दिलीप
[मामा जी ने अपना हाथ उठा लिया मुझे मारने के लिए]
[सब की चीख निकल गयी]
हम फिर कह रहे हैं
दिलीप- मैं वही पे खड़ा रहा
मामा जी मुझे मारने लगे
एक तो आज तक किसीने मुझपे हाथ नही उठाया उपर से ममाजी पहलवान टाइप 1 मार रहे थे ऐसा लग रहा था कि 10आदमी मिलके पीट रहे हैं मामा जी मुझे मारते रहे मैं वही पे खड़ा रहा जब ममाजी का गुस्सा शांत हुआ तो वो चले गये
छोटी मामी भी चली गयी मैं वही पे बैठ गया दर्द के कारण
चोट मुझे लगी है रो आप सब रही हैं मैं बिल्कुल ठीक हूँ
मेघा दी मेरे पास आने लगी
तभी वँया जो शुरू से चुप थी
वँया ने मेघा दी को धक्का दे दिया
दिलीप- वँया
मैने मेघा दी को जाके उठाया यह क्या कर रही हो
वँया- क्या कर रही हूँ यह अगर सच बता देती तो चाचा तुम्हे इतनी बुरी तरह मारते
दिलीप- मतलब तुम बदला लोगि
मेघा- नही भैया मारने दीजिए दीदी को मुझे तो घिन आ रही है अपने आप से आज ही मुझे भाई मिला और आज ही मेरी वजह से मेरे भाई को
दिलीप- विद्या दी आप सब बाहर जाइए मुझे मेघा दी से अकेले मिनट बात करनी है
[वँया तो जा ही नही रही थी विद्या और अरुणा दी उसे पकड़ के ले गये]
मैने गेट लॉक किया और मेघा दी के पास बैठ गया
पहले आप रोना बंद कीजिए मैने अपने हाथो से मेघा दी के आँसू पोछे
अब आप अगर मुझे दिल से अपना भाई मानती हैं तो मुझे सच बताएँगी
मेघा- भैया जान माँग लो दे दूँगी पर
दिलीप- ठीक है
मैं मामा जी से जाके कह देता हूँ कल मैं गाओं वापस जा रहा हूँ और कभी वापस नही आउन्गा
मेघा- भैया मुझे मजबूर मत करो
दिलीप- एक आखरी बात कहना चाहता हूँ मान लीजिए कल मुझे कॅन्सर हो जाए तो मैं भी आप सब को कुछ नही बताऊ
और मर जाउ कितना अच्छा लगेगा आप सब को ना
मेघा- भैया ऐसा मत बोलो मैं बताती हूँ
[यह बात आज से एक महीना पहले की है]
[आज भी मैं रोज की तरह कॉलेज गयी]
मैं घर से सीधा कॉलेज जाती थी जब मैं अपने क्लास की तरफ बढ़ रही थी तो अचानक मेरे सामने एक लड़का आके खड़ा होगया मैं घबरा गयी
लड़का- मुझे तुमसे बात करनी है
मेघा- बोलो
लड़का- यहाँ नही अकेले में
मेघा- जो बात करनी है यही पे करो
लड़का- आइ लव यू
मेघा- बट आइ डोंट लव यू
[मुझे पता था कि यह इस कॉलेज के गुन्डो में से एक था जो लड़के पढ़ते नही सिर्फ़ टाइम पास करने आते हैं]
यह कह के मैं क्लास रूम में चली गयी
उस दिन से वो लड़का रोज मुझे परेशान करने लगा
[1 हफ्ते बाद]
आज फिर वो लड़का मेरे सामने आगया
मेघा- मुझे क्यूँ परेशान कर रहे हो
लड़का- मैं तुमसे प्यार करता हूँ
मेघा- रोज एक ही बात कहते हो जब मैं ना कह चुकी हूँ आज आखरी बार सुन लो मैं तुमसे प्यार नही करती मैं इतनी परेशान थी कि मुझे पता ही नही चला कि मैं किधर जा रही हूँ
तभी किसी लड़की ने मेरा हाथ पकड़ के खींच लिया
लड़की- पागल हो क्या अभी सीढ़ी से गिर जाती
मेघा- क्या मैं सीढ़ी से गिरने वाली थी
लड़की- हां
मेघा- ओह थॅंक यू सो मच
लड़की- इट्स ओके मैं शीतल
मेघा- आइ आम मेघा उस दिन से हम बहुत अच्छे फ्रेंड्स बन गये
मैं और शीतल हर बात शेयर करते इसी तरह दिन बीतते गये
उस दिन मैं शीतल के साथ थी वो लड़का फिर आया इस बार तो उसने हद करदी उसने मेरा हाथ पकड़ लिया मुझे बहुत गुस्सा आया मैने गुस्से में उस लड़के को थप्पड़ मार दिया थप्पड़ की आवाज़ सुनके वहाँ पे भीड़ जमा हो गयी
जब प्रिन्सिपल ने सुना कि किसीने मेरा हाथ पकड़ा है वो दौड़े हुए आए
उस लड़के का बाप यहाँ का एमएलए था इसीलिए प्रिन्सिपल ने उस लड़के को वॉर्निंग दी
प्रिन्सिपल- बेटी यह बात ठाकुर साहब को मत बताना
मेघा- ओके सर मैं भी शीतल को बाइ बोलके घर चली आई
भैया तुम्हारे आने के एक दिन पहले शीतल ने मुझे बोला
शीतल- मेघा 2दिन बाद मेरा बर्तडे है
मेघा- वाउ यार अच्छा बता तुझे क्या गिफ्ट चाहिए
शीतल- तू
मेघा- मतलब
शीतल- कल और परसो मैं तेरे साथ बिताना चाहती हूँ
मेघा- ठीक है कल का दिन और परसो का दिन तेरा हुआ
शीतल- मैं 48अवर्स कह रही हूँ
मेघा- नही यार दिन का तो ठीक है पर रात को बाहर रुकने की पर्मिशन पापा कभी नही देंगे
[मैने माँ को भी पिक्निक के बारे में झूठ कहा सुनीता की तबीयत ठीक नही थी तो वो कॉलेज नही गयी
इस लिए माँ भी आसानी से मान गयी]
मेघा- मैं बहुत खुश थी
शीतल मेरी एक ही फ़्रेंड थी
शीतल को उसके बर्तडे पे मेरा साथ चाहिए था
प्रेज़ेंट-
मेघा- भैया वो देखो
दिलीप- मेन गेट की तरफ देखा
ऐसा लग रहा था कि कोई हमारी बाते सुनने की कोशिश कर रहा है
[यह वँया ही होगी] आप चिंता मत करो
मेघा- हमारी बाते कोई सुन रहा है
दिलीप- सुनता है तो सुनने दीजिए वो जिंदगी भर बाहर खड़ा रहे
इस रूम से आवाज़ बाहर जाएगी ही नही तो वो सुनेगा क्या
मेघा- तुम्हे कैसे पता
दिलीप- आप बताइए ना जो बता रही थी
पास्ट
मेघा- मैं सुबह होके रेडी हो गयी
शीतल ने कहा था कि 10 बजे माल में आजना
मैं 8 बजे ही निकल गयी पापा ने 1घंटा पहले ही बोला जानेको
मैं सोचने लगी
2 घंटे पहले माल जाके क्या करूँगी शीतल के घर ही चली जाती हूँ
शीतल के पापा बिज्निस मॅन हैं और वो दूसरे सिटी में रहते हैं उन्होने शीतल के लिए अलग घर ले रखा है
शीतल के साथ केर्टेकर भी रहती है
मैं पहुँची शीतल के घर
मेन गेट खुला था
मैं अंदर गयी
शीतल के रूम से कुछ आवाज़ आ रही थी
मैं सीढ़ियो से उपर जाने लगी
जब मैं उपर पहुँची तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी
जिस लड़के मदन को मैने थप्पड़ मारा था
वो और मेरी बेस्ट फ़्रेंड शीतल सेक्स कर रहे थे
मेरी आँखों से आँसू बहने लगे
मदन- मेरी जान आज हमारा प्लान पूरा हो जाएगा
शीतल- हाँ मेरा राजा
आज हम सुनीता से बदला लेंगे उसकी बहेन को बर्बाद करके
मेघा- [सुनीता से बदला पर आज तक सुनीता का किसी के साथ झगड़ा तो नही हुआ]
मदन- हाँ मेरी जान
शीतल- मदन तुम्हे तो सुनीता से बदला लेना चाहिए
मदन- बेस्ट फ़्रेंड का नाटक करते करते कहीं सच में तो
शीतल- मदन तुम ऐसा कैसे सोच सकते हो तुम्हारे लिए मैं इस कॉलेज में आई हूँ तुम्हारे लिए मैने मेघा से दोस्ती की
मदन- सॉरी जान गुस्सा मत हो बताता हूँ मेरा प्लान क्या है हम पहले मेघा को यूज़ करेंगे
और जब हमें सही मौका मिलेगा तब हम सुनीता पे वार करेंगे
शीतल- उसके बाद मेघा और सुनीता तुम्हारी रखैल और मेरी गुलाम होगी
मेघा- सुनीता के बारे में ऐसा सुनके मैं अपने आप को रोक नही पाई
शीतल.........................
मदन और शीतल मुझे देखते ही बुत बन गये
तू ही मेरी एक फ़्रेंड थी और तूने ही मुझे धोखा दिया मैं तुम दोनो का वो हाल करूँगी
इसके आगे मैं कुछ बोल पाती उससे पहले ही किसी ने मेरी गर्दन पे इंजेक्षन लगा दिया
मेरी आँखें भारी होने लगी और मैं बेहोश हो गयी जब मेरी आँख खुली तो मेरे होश उड़ गये
मेरे हाथ पैर दोनो बँधे हुए थे एक टेबल के बीच वाले हिस्से पे मुझे बाँध के लिटाया हुआ था
मेरे दोनो पैर टेबल के अलग साइड में बँधे थे मुझे एहसास हुवा कि मेरे बदन पे एक भी कपड़ा नही था
मदन मेरी फोटो खींच रहा था मैं रोती रही बिलखती रही चिल्लाती रही पर मदन टेबल के चारो तरफ घूम के मेरे नंगे जिस्म की फोटो खींचता रहा मैं दुआ कर रही थी कि मुझे मौत आजाए
तभी मेरे कानो में पोलीस साइरन की आवाज़ पड़ी मैने डर से अपनी आँखें बंद कर ली
मेरी गर्दन पे फिर किसी ने इंजेक्षन लगा दिया और मैं फिर बेहोश हो गयी
उसके बाद जब मेरी आँख खुली तो मैं अपने कमरे में थी
मेरे पास मेरा पूरा परिवार था
प्रेज़ेंट
अब तुम ही बताओ अगर मैं पापा को यह सारी बाते बता दूं तो क्या पापा चुप बैठेंगे
नही वो शीतल और मदन को कहीं से भी ढूंड निकालेंगे और जान से मार देंगे
फिर वो अपने आप को पोलीस के हवाले करदेंगे उन्हे या तो फाँसी होगी या उम्रक़ैद
फिर मेरी माँ और मेरी बहनों का क्या होगा
दिलीप- होगा तो मदन और शीतल के साथ वो जो ना कभी किसीने देखा होगा और ना कभी किसी सुना होगा
[यह सब बात मैं बहुत ज़्यादा गुस्से में कह रहा था]
मेघा- देखा इसी लिए मैं नही बता रही थी
तुम्हे मेरी कसम यह सब बात भूल जाओ
दिलीप- ठीक है आप मेरी कसम खा के कहिए आप कभी शूसाइड करने की कोशिश नही करेंगी
मेघा- मैं तुम्हारी कसम नही खाउन्गी
दिलीप- तो मैं भी आपकी कसम नही मानूँगा
मेघा- मैं तुम्हारी कसम खाती हूँ मैं कभी शूसाइड नही करूँगी
दिलीप- ठीक है आप यही सो जाइए
मेघा- मैं अपने कमरे में जा रही हूँ
दिलीप- नही
[मैने मेघा दी का हाथ पकड़ा अपने बेड पे ले गया मेघा दी का सर अपनी गोद में रखा]
सो जाइए
मेघा- भैया हमेशा मेरे साथ रहोगे ना
दिलीप- हाँ दीदी अब सो जाइए
[मेघा दी सो गयी]
आज का दिन ही अजीब था शाम 6 बजे ही लग रहा था कि रात हो गयी
[मैने गेट खोला तो देखा वँया दीवार से सट के सो रही थी
मैने वँया को गोद में उठाया और उसके रूम में लेजाके सुला दिया
मैने अरुणा दी का रूम नॉक किया
अरुणा दी ने गेट खोला
अरुणा- मेघा कहाँ है
दिलीप- सो रही है आप भी आराम करो
[एक एक करके मैं सब बहनो के रूम में गया]
6 घंटे ऐसे ही बीत गये
कोई भी खाना खाने नही आया मैं अपने रूम में गया
[कोट पैंट पहना अपने पैसे अपना मोबाइल जेब में रखा]
[मैं मेघा दी को देखा]
मेघा दी मुझे माफ़ करदेना मैं आपकी कसम तोड़ रहा हूँ कल आप मुझे कसम देती तो शायद मैं नही तोड़ता
लेकिन आज भाई का फ़र्ज़ पूरा करना है मैं घर से बाहर आया और निकल पड़ा
दिलीप- मैं निकल तो गया घर से पर कुछ समझ ही नही आरहा था पहली बार बाहर अकेले
डर नही लग रहा था पर बेचैनी ज़रूर थी मैं चलने लगा
1 घंटे तक चलता रहा
तभी 1 पार्क दिखा मैं पार्क के अंदर गया और 1 बेंच पे बैठ गया
एक तो रात उपर से ठंड उपर से छोटे मामा ने जो पीटा उससे जल्द ही नींद आ गई
पता नही कितनी देर तक मैं सोया रहा
मुझे ऐसा लगा कोई मेरी जेब टटोल रहा है
मैने उसका हाथ पकड़ा और ज़ोर से दबा दिया
आँख खोला तो देखा यह मेरी ही उमर का लड़का है
तभी लड़के ने मेरे मुँह पे एक मुक्का मार दिया
पूरा जबड़ा हिल गया
वो अपना हाथ छुड़ाके भागने की कोशिश कर रहा था
मैने भी उसके मुँह पे एक मुक्का मार दिया
लड़का- अया हाथ है या हथौड़ा
दिलीप- [मैने एक और मुक्का उसके मुँह पे मारा]
लड़का- सॉरी माफ़ कर्दे आगे से कभी पंगा नही लूँगा
दिलीप- [मैने उसका हाथ छोड़ दिया]
तू सुबह 5 बजे मेरी जेब क्यूँ टटोल रहा था
लड़का- चोरी करने के लिए अपुन पैसे के लिए कुछ भी करेगा
दिलीप- कुछ भी
लड़का- हाँ
दिलीप- 1 खून करने का कितना लेगा
[वो लड़का मुझे नीचे से उपर घूर्ने लगा]
लड़का- अपुन सारे काम करता है पर खून और रेप कभी नही
दिलीप- 1 लड़की की इन्फर्मेशन निकालने का कितना लेगा
लड़का- उस लड़की का स्टेटस पता होना माँगता
दिलीप- किसी बिज्निस की बेटी है यहाँ अकेली रहती है
लड़का- 15000
दिलीप- 10000 दूँगा
लड़का- 15000 से एक रुपया भी कम नही
दिलीप- तो फिर रहने दे
लड़का- अरे तू तो गुस्सा हो गया
दिलीप- 10000
लड़का- डन
लड़का- नाम तो बता लड़की का
दिलीप- फोटो है
लड़का- भेज भेज मेरे मोबाइल पे
दिलीप-[मैने अपना मोबाइल निकाला]
लड़का- रुक रुक 1 मिनिट तेरा मोबाइल दिखा
दिलीप- [वो लड़का अपनी जेब से एक सिम कार्ड निकाल के मेरे मोबाइल में डालने लगा]
यह क्या कर रहा है
लड़का- तुझे देखके लगता है तू कोई झोल पार्टी है
मैं तेरे मोबाइल में खांचा सिम कार्ड डाल रहा हूँ
दिलीप- मेरे मोबाइल में सिम तो है
लड़का- कल अगर तू किसी लफडे में अंदर होगया तो पोलीस तेरा नंबर चेक करेगी उसमें तो मेरा नंबर दिख जाएगा ना अप्पुन किसी लफडे में ना फँसे इसी लिए अपन तेरे मोबाइल में खांचा कार्ड डाल रहा है इसका नंबर ही नही दिखता है
दिलीप- पर मैं तो फोटो भेज रहा हूँ फोन थोड़ी कर रहा हूँ
लड़का- अरे यह पोलीस वाले बहुत बड़े मामू होते हैं यह पता कर लेते हैं कि मोबाइल कहाँ है यह तो सिम कार्ड है
इसीलिए अगर कोई लफडे वाला काम है तो मोबाइल और सिमकार्ड दोनो फेन्क दे
दिलीप- [फिर उसने मेरे मोबाइल से फोटो भेजा और अपना सिम निकालने लगा]
यह सिम कितने का देगा
लड़का- 1000
दिलीप- यह ले 1000 और 5000 5 काम होने के बाद
लड़का- 4 घंटे बाद यही पे मिलना
दिलीप- धोखा तो नही देगा
लड़का- अपन ग़लत काम भी सही तरीके से करता है
दिलीप- [मैं आँख बंद करके सोचने लगा] थोड़ी देर बाद किसी के हँसन की आवाज़ आई
मैने आँख खोलके देखा तो 3 4 लड़किया आपस में बाते करके हंस रही थी
घड़ी में टाइम देखा तो 7बजे थे
[तभी मेरे दिमाग़ में 1 आइडिया आया]
मैं उन लड़कियों के पास गया
मैने हाथ जोड़ के कहा
धन्यवाद देवियो
वो सब मुझे आँखें फाड़ फाड़ के देखने लगी
मैं पार्क से बाहर निकलके आगे बढ़ गया मैं एक सस्ते होटल गया
500 में 12 घंटे
मैं रूम में गया नहाया धोया फ्रेश हुवा
वही कपड़े दोबारा पहेन के वापस पार्क में आके बैठ गया
आधे घंटे बाद वो लड़का आ गया
लड़का- इस लड़की का नाम शीतल वर्मा है यह पहले किसी और कॉलेज में पढ़ती थी
अचानक कुछ दिन पहले यह दूसरे कॉलेज में पढ़ने लगी इसका हरामी एमएलए के बेटे के साथ चक्कर है
पहले इसके साथ एक केयरटेकर रहती थी
1 हफ्ते पहले इसकी केयरटेकर गायब हो गई अप्पुन ने पता किया
2दिन से यह घर से बाहर नही निकली
यह इस सोसाइटी में रहती है
दिलीप- अच्छा एक बात बता तूने एमएलए को हरामी क्यूँ कहा
लड़का- जब 1000 कमिने मरते हैं तो 1 हरामी पैदा होता है
और जब वैसे 1000 हरामी मरते हैं तो एमएलए जैसा महहरामी पैदा होता है
यह हरामी एमएलए इस शहेर का सबसे बड़ा रंडीखाना चलता हैऔरतो और बच्चो की तस्करी करता है
पहले यह हरामी एमएलए इसी रंडीखाने का एक भडवा था
दिलीप- [यह कहते हुए उस लड़के की आँखों में आँसू आ गये]
तू रो क्यूँ रहा है
लड़का- क्यूंकी अप्पुन भी उसी रंडीखाने की उपज है मैं तो बहुत खुश हूँ कि मेरी माँ मुझे जानम देते हुए ही मर गयी वरना दुनिया के ताने सुन सुन के मर जाती और अपन एक एक को चीर देता अपन ने 2 बार एमएलए को मारने की कोशिश की पर मार नही पाया तू सोच रहा है अपन तेरे को यह बात क्यूँ बता रहा है तेरी आँखो में अपन ने एक ऐसा दर्द देखा है
जो एक बिन माँ बाप का बच्चा ही समझ सकता है
दिलीप- मैं तुझे एक बात बताता हूँ मैं नेता के बेटे से बदला लेना चाहता हूँ
और अगर तू एमएलए से बदला लेना चाहता है तो हम दोनो का दुश्मन एक है
लड़का- अपन सिर्फ़ एमएलए को ठोकना चाहता है और अपन आज से तेरे साथ है हाथ मिला
दिलीप- मैं दिलीप
लड़का- मैं अखिल
दिलीप- यह ले बाकी पैसे
अखिल- यह पैसे तू अपने पास रख और बता तूने कुछ सोचा है आगे क्या करेगा
दिलीप- शीतल जहाँ रहती है वहाँ हमे एक घर चाहिए और यह याद रखना वो घर साउंडप्रूफ हो
अखिल- हो जाएगा
दिलीप- हमारे पास सिर्फ़ 4दिन है
[ पाँच5वे दिन बड़े मामा नही ठाकुर धर्मेश वीर परताप सिंग यमराज बनके आएँगे]..,