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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 39

दिलीप- चल जल्दी तय्यार हो जा

[मैने अपने मुँह पे मास्क लगाया ग्लॉब्स पहना

1 मास्टर की खुद रखा

1 अखिल को दिया

बाकी सब चीज़ एक थैले में रखा]

बेहोश करने वाली दवा और वो लाया

अखिल- हां यह ले

दिलीप- बढ़िया है ना

अखिल- एक दम ओरिजिनल

[हम दोनो पहुँचे शीतल के घर

मैने मास्टर की से मेनगेट खोला]

एक काम कर तू इस साइड देख मैं उस साइड देखता हूँ

[मैने किचन में देखा हॉल में देखा बाहर चार रूम्स थे उनसब में देखा

यह अखिल 1 रूम में इतनी देर से क्या कर रहा है

जैसे ही मैं 5वे रूम में एंटर हुआ इतनी तेज़ बदबू आई दम घुटने लगा

और अखिल खड़ा पता नही क्या कर रहा था

मैं आगे जाके उसकी गांद पे लात मार दिया उसकी चीख निकल गयी]

अखिल- अबे मार डालेगा क्या

दिलीप- लुक्खे हम यहाँ पिक्निक मनाने आए हैं

अखिल- अबे उधर देख

दिलीप- [जैसे ही मैने मूड के देखा मेरा दिल दहल गयाशीतल की लाश बेड पे पड़ी थी

मैं कितना भी अपने जज़्बात को कंट्रोल करू पर एक लड़की की लाश वो भी पूरी नंगी

तभी अखिल ने मुझे हिलाया]

अखिल- अबे क्या हुआ

दिलीप- अबे यह क्या है

अखिल- और कर प्लान किडनॅपिंग की

दिलीप- पर यह मरी कैसे इसके जिस्म पर कोई निशान भी नही है

अखिल- अबे इसे ज़हर दिया गया है

दिलीप- तुझे कैसे पता

अखिल- देख इसके होन्ट नीले पड़ गये हैं

दिलीप- मुझे लग रहा है इसका रेप हुआ है

अखिल- रेप नही गॅंगरेप हुआ है

दिलीप- तुझे ऐसा क्यूँ लगता है

अखिल- देख इसके बदन पे खरोंच और काटने के निशान हैं

और इसकी चूत पे खून जम गया है

यह तो पक्का है कि

यह पहले चुदवा चुकी थी

सील टूटने के बाद खून तभी निकलता है

जब लगातार कम्से कम 10 बार चुदाई होती है

दिलीप- एक काम कर इधर उधर देख कही कुछ मिल जाए

अखिल- अबे यहाँ पे एक लाश पड़ी है और तुझे

दिलीप- जो बोला है वो कर

अखिल- अबे कुछ नही है

दिलीप- चल चलते हैं यहाँ से

[मैं आगे बढ़ा ही था

कि मेरा पैर किसी चीज़ से टकराया यह कचरे का डब्बा था

मैं नीचे झुक के देखा तो उपर एक काग़ज़ था

मैने उसे उठा लिया यह एक फोन नंबर था

मैने उस नंबर पे फोन लगाया

तो वो किसी ट्रॅवेल एजेन्सी का नंबर था

तभी मेरे दिमाग़ की घंटी बजी]

सुन तू अभी पता लगा सकता है कि एमएलए का बेटा कहाँ पे है

अखिल- अबे लेकिन हुआ क्या

दिलीप- तू करेगा कि नही

[अखिल ने जल्दी से फोन पे नंबर मिलाया

फोन पे बात करते हुए उसका चेहरे का हाव भाव अजीब था

अखिल- अबे यह एमएलए का बेटा कल ही अमेरिका चला गया

दिलीप- लवदे पे गया सारा प्लान

अखिल- क्यूँ

दिलीप- अबे मेरा प्लान था

कि शीतल के ज़रिए मदन को किडनॅप करेंगे

और मदन की मदद से एमएलए को किडनॅप करेंगे

अखिल- आगे

दिलीप- अबे यहाँ पे प्लान ही ख़तम हो गया और तू आगे का पूछ रहा है

अखिल- तो क्या हुआ तू कोई और प्लान सोच

दिलीप- अबे मैं कोई बचपन से प्लान बना रहा हूँ जो 1 मिनिट में प्लान तय्यार

मेरे प्लान की मेन कड़ी मदन था

अखिल- तो अब क्या करना है

दिलीप- इंतज़ार जब तक मदन अमेरिका से वापस नही आता

और सुन मैं आज ही वापस जा रहा हूँ

[हम दोनो बात कर रहे थे कि किसीने डोर बेल बजाई इस बार अखिल के साथ मेरी भी फॅट गयी]

अखिल- अबे कौन आगया इस वक़्त हमारी मारने

दिलीप- जाके देख

अखिल- मैं नही जाउन्गा

दिलीप- जाता है कि नही

[अखिल धीरे से आयेज बढ़ा और की होल से देखने लगा....
 
40

दिलीप- अबे कौन है

[अखिल मेरे पास आके]

अखिल- किसी मादर्चोद ने अपने फोन में डोरबेल की रिंगटोन सेट की है

दिलीप- वो गया

अखिल- हां

दिलीप- अबे तो चल ना

[हम लोग शीतल के घर से अपने घर आ गये]

दिलीप- अच्छा ठीक है तो मैं चलता हूँ

अखिल- तू सच में जा रहा है

दिलीप- हाँ

अखिल- कितनी अजीब बात है हमारी दोस्ती को 24 घंटे ही हुए हैं पर अब तू जा रहा है अपुन का एकलौता दोस्त

दिलीप- ज़्यादा सेंटी मत हो और जान का ख्याल रखना

अखिल- कौन जान

दिलीप- अरषि

[यह कहते हुए मैने अखिल को आँख मार दी]

अखिल- ठीक है

[मैं अखिल के पास गया और उसके कान में कुछ कहा]

अब तू जा अपनी जान के पास मैं थोड़ी देर में जाउन्गा

अखिल चला गया

मैने वहाँ से सारा समान लपेटा और एक जगह बिल्डिंग बन रही थी वहाँ पे गड्ढा खोद के गाढ दिया कुछ समान मैने रख लिया और अपना पहले वाला कपड़ा पहेन लिया फिर वहाँ से 1 घंटा चलता रहा एक टॅक्सी में बैठ गया

1 घंटे बाद 1 एम मैं पहुँचा छोटे मामा के घर के बाहर मैने सेक्यूरिटी को जगाया

सेक्यूरिटी- छोटे मालिक आप कहाँ थे सुबह से

मालिक ने आपको ढूँढने के लिए पोलीस को बुलाया था मैं अभी जाके मालिक को बताता हूँ

दिलीप- [एक तो जब भी कहीं जाओ सब छोटे मालिक ही कहेंगे]

उसकी कोई ज़रूरत नही है मैं खुद जा रहा हूँ तुम सो जाओ

[मैने यह बात सेक्यूरिटी को घूर के कहा]

और अंदर गया

हॉल में कोई नही था अभी कौन होगा सब अपने अपने रूम में होंगे

मैं सीधी से उपर आते हुए वँया की रूम की तरफ जाने लगा

मैने गेट नॉक किया

वँया ने गेट नही खोला

मैं अपनी जेब से मास्टर की निकाली

और गेट खोलके अंदर गया

वँया के रूम में लाइट ऑन थी

वँया को अंधेरे में नींद नही आती

मैं वँया के चेहरे को गौर से देखा

वँया आँखें रोके सूज गयी थी

एक तरफ मुझे इस बात का दुख था

कि मैं मेघा दी का बदला नही ले पाया

और दूसरा दुख मेरे 1 दिन ना रहने से वँया की यह हालत हो गई

मैने वँया का सर अपनी गोद में रखके बैठ गया

पता नही कब नींद आ गई

जब मैं उठा तो देखा वँया अभी भी मेरे गोद में सोई हुई है

मैं वँया का सर आहिस्ता से तकिया पर रख ही रहा था

कि वँया की आँख खुल गयी

वँया चीखते हुए मेरे गले लग गयी

और मेरे चेहरे को चूमने लगी

दिलीप- अरे बस बस क्या कर रही हो

[मैं इतना ही बोला था कि वँया ने एक साथ 4 थप्पड़ मेरे 2नो गालो पे जड़ दिए और मेरे गले लग्के रोने लगी]

थप्पड़ मुझपे पड़े और रो तुम रही हो

वँया- तुमने ऐसा किया ही क्यूँ कहाँ थे सुबह से पता है सब कितने परेशान थे

दिलीप- सुबह में टहलने गया था

थोड़ी देर पार्क में बैठ गया बैठते हुए मुझे नींद आ गई

[मैने अपने हिसाब से जो कहानी सोची थी वही वँया को बता दी]

वँया- तुम यही पे बैठो मैं सब को बुलाती हूँ

दिलीप- क्यो तुम भी सुबह सुबह सब की नींद खराब कर रही हो

वँया- कोई नींद नही खराब होगी

दिलीप- वँया यह कहके बाहर चली गयी

मैं जल्दी से बाथरूम भागा और हल्का हुआ

मैं बाथरूम से निकलके बेड पे बैठ गया

और सोचने लगा कि 5 बहनो की हिसाब से कितने थप्पड़ पड़ेंगे

उपर से सी मामा की डाँट और कोटि मामी की गालियाँ....

 
41

एक एक करके सब बहने रोते हुए मेरे गले लग गयी

अरुणा- भैया कैसा है तू कहाँ चला गया था

विद्या- हाँ बोल ना कहाँ था तू

दिलीप- [मैने वही स्टोरी सब को बता दी]

अरुणा- मैं तेरे लिए परान्ठे बनाती हूँ

[अरुणा दी रूम से बाहर चली गयी]

अवन्तिका दी आप को क्या हुआ

अवन्तिका- कुछ नही

दिलीप- नही कुछ तो हुआ है और मेघा दी कहाँ हैं

विद्या- वो अपने रूम में है

[अभी हम बात ही कर रहे थे कि सी मामी सी मामा आ गये]

छोटे मामा- दिलीप कहाँ थे तुम कल सुबह से

[विद्या दी ने मामा को सब बताया]

छोटे मामा- अब तुम आराम करो

दिलीप- ममाजी अपने पोलीस कंप्लेंट किया था क्या

छोटे मामा- हां हम अभी आइजी को फोन कर्देते है

[यह कहके छोटे मामा चले गये]

छोटी मामी- तुम सब जाके फ्रेश हो जाओ

[विद्या दी सब को लेके चली गयी]

[मैं खड़ा छोटी मामी को देख रहा था कि छोटी मामी ने मुझपे थप्पड़ की बारिश करदी]

छोटी मामी- क्यूँ हमारी खुशियों को आग लगाने चला आता है क्या बिगाड़ा है मैने तेरा

दिलीप- लेकिन मैने किया क्या

छोटी मामी- क्या किया है यह तू जाके अपनी बूढ़ी नानी से पूछ

दिलीप- ममििइ आप को मुझे कुछ भी कहना है कह लीजिए

पर अगर आपने मेरी बड़ी नानी के बारे में कुछ ग़लत कहा

तो मेरे गुस्से से आपको ममाजी भी नही बचा पाएँगे

[मेरी यह बात सुनके छोटी पैर पटकते हुए रूम से बाहर चली गयी]

मैं वहाँ से अपने रूम में गया नहाया धोया कपड़े पहेन कर मेघा दी के रूम की तरफ जाने लगा

मैने गेट नॉक किया

10 मिनिट तक गेट नॉक करता रहा

फिर मैने मास्टर की से गेट खोला और जैसे अंदर देखा तो मेरी आँखों से आँसू बहने लगे

मेघा दी कहते हुए मैं उनके पास बैठ गया मेघा दी ने ब्लेड से अपनी कलाई काट ली थी

मैने जल्दी से मेघा दी का दुपट्टा उठाया और ज़ोर से कलाई पे बाँध दिया

[मेरी चीख सुनके सब उपर आने लगे]

सबसे पहले विद्या दी और अरुणा दी मेरे पास आई

विद्या- दिलीप क्या हुआ मेघा को दिलीप

अरुणा जल्दी से डॉक्टर को फोन करो

अरुणा दी डॉक्टर फोन करने लगी

तभी अवन्तिका दी और सुनीता दी अंदर आई

सुनीता दी तो बेहोश ही हो गयी

अवन्तिका दी भाग के नीचे गयी

नीचे छोटी मामी किचन में थी

मम्मी मेघा ने अपनी कलाई काट ली है

छोटे मामा रूम से बाहर निकले

छोटे मामा छोटी मामी दौड़े मेघा दी के रूम की तरफ

रूम में पहुँचते ही छोटी मामी ने मुझे धक्का दे दिया

छोटे मामा छोटी मामी मेघा दी को पकड़ के रोने लगे

छोटी मामी- और बुलाए अपने भानजे को

इसी की नज़र लग गयी हमारे घर को

जब भी यह हमारी जिंदगी में आता है ज़हेर घोल देता है

[छोटी मामी उठके मेरे पास आई और मुझे मारने लगी]

बता क्या हुआ मेरी बेटी को

विद्या- चाची छोड़िए दिलीप को यह आप क्या कर रही हैं

छोटी मामी- तू तो चुप ही रह

यह सब इसी की वजह से हुआ है

बता क्या किया तूने मेरी बेटी के साथ

अरुणा दी डॉक्टर को लेके रूम में आई

डॉक्टर ने जल्दी से मेघा दी के हाथ पे बॅंडेज लगाया

और एक इंजेक्षन दिया

डॉक्टर- आपने बहुत अच्छा किया जो दुपट्टा बाँध दिया

वरना कुछ भी हो सकता था

बच्ची अब ख़तरे से बाहर है

ठीक है अब मैं चलता हूँ

दिलीप- मैने बेड पे मोबाइल के नीचे 1 काग़ज़ देखा

मैने वो काग़ज़ उठा लिया उसमें मेघा दी ने लिखा था

भैया तुम यह मत सोचना कि मैने तुम्हारी कसम तोड़ दी है

और मुझे माफ़ करदेना मैने मेघा दी का मोबाइल उठाया

और जैसे ही ऑन किया

मेघा दी की नंगी तस्वीर किसी ने प्राइवेट नंबर से सेंड की थी

मैं ज़ोर से चिल्लाया मदन.....

 
अपडेट 42

सब मुझे देखने लगे

विद्या दी मेरे पास आई

विद्या- दिलीप क्या हुआ तुम चीखे क्यूँ और यह मदन कौन है

दिलीप- कुछ नही दीदी मैं बाहर जा रहा हूँ

विद्या- पर क्यूँ

दिलीप- ऐसे ही आ जाउन्गा थोड़ी देर में

वँया- दिलीप कहाँ जा रहे हो

दिलीप- शाम तक आ जाउन्गा

[यह कहके मैं नीचे आ गया]

मैने रोड पे आके एक टॅक्सी पकड़ी

थोड़ी देर बाद मैं पहुँचा अखिल के घर

मैं डोरबेल बजाया

अखिल ने गेट खोला

अखिल- तुझे क्या हुआ

दिलीप- अंदर जाके बोल बाहर जा रहा हूँ जल्दी

अखिल अंदर गया और बाहर आ गया

चल जल्दी

अखिल- कहाँ

दिलीप- कल वाले घर

फिर हम दोनो पहुँचे सोसाइटी वाले घर

अखिल गेट बंद करके जैसे ही मुड़ा

मैं 2 थप्पड़ मार दिया उसको

अखिल- अबे क्यूँ मार रहा है

दिलीप- तूने बोला था मदन अमेरिका चला गया

पर आज मुझे खबर मिली कि वो यहीं इस शहर में है तुझे 5 मिनिट देता हूँ

एमएलए की फॅमिली और मदन का पता दोनो चाहिए मुझे

वरना एसपी आएगा और हम दोनो को उठाके ले जाएगा

[अखिल ने 10 मिनिट में सब पता लगा लिया]

अखिल- एमएलए की एक बेटी है और हरामी बेटा

और मदन इस लोकेशन पे है

दिलीप- तो कल क्यूँ बोला कि मदन अमेरिका चला गया

अखिल- अबे अप्पुन कोई तेरे जैसा थोड़ी है

शीतल की लाश देखके अप्पुन की फॅट गयी

इसी लिए अप्पुन ने तेरे से झूठ बोला

[मैने एक और थप्पड़ मारा अखिल को]

एमएलए की बेटी को किडनॅप करेंगे वो भी आज तू पता लगा कि वो कहाँ पर है

अखिल- अबे मैं नही करूँगा एमएलए की बेटी का किडनॅप

दिलीप- क्या बोला

[मैने एक और थप्पड़ मारा अखिल को]

अखिल- अबे आज तुझे क्या होगया कितना मारेगा अप्पुन को

दिलीप- आज अगर कोई मज़ाक किया तो सीधे थप्पड़ मारूँगा

[अखिल बाहर चला गया मैं भी बाहर गया एक ज़रूरी काम से और वापस आ गया )

1 घंटे बाद अखिल वापस आया

अखिल- एमएलए की बेटी का नाम निम्मी है और यह अपनी मासी के यहाँ रहती है

इसका अपने बाप और भाई से कोई ताल्लुक नही है

जितना हरामी इसका बाप है उतनी ही सुलझी यह है

दिलीप- मैने तुझसे एमएलए की बेटी का कॅरक्टर नही पूछा अभी कहाँ है निम्मी

अखिल- 1 घंटे में कॉलेज जाएगी

दिलीप- 1 गाड़ी का जुगाड़ कर अभी मौका मिलेगा तो उठा लेंगे

अखिल- अप्पुन क्या कहता है जब निम्मी ने एमएलए से कोई रिश्ता नही रखा

तो हमे निम्मी को किडनॅप नही करना चाहिए

दिलीप- तू अपना सुझाव अपने पास रख नही तो चल एसपी के पास

अखिल- आज तुझे क्या हो गया

दिलीप- जाके 1 गाड़ी का बंदोबस्त कर यह ले पैसे

अच्छा सुन तेरा कोई अकाउंट है किसी बॅंक में

अखिल- हां है अप्पुन का

यह ले [अखिल ने मुझे एक कागज दिया]

और बाहर चला गया

मैने किसिको फोन लगाया

हेलो मैं दिलीप बोल रहा हूँ

जी मैं ठीक हूँ

आप कैसे हैं

जी मुझे आपकी मदद चाहिए

पहले आप वादा कीजिए आप किसी को नही बताएँगे

यह बात आपके और मेरे बीच रहेगी

मुझे 1करोड़ रुपया चाहिए

आप विश्वास रखिए मैं कोई ग़लत काम नही कर रहा हूँ

और यह पैसे मैं आपको वापस कर दूँगा

ठीक है मैं अकाउंट नंबर सेंड करता हूँ

यह कह के मैं फोन काट दिया

मैं घर लॉक किया

और वही पे गया जहाँ पे मैने अपना समान गाढ़ा था

मैं अपना समान निकाला और वापस अपने घर आगया

थोड़ी देर में अखिल आया

अखिल- निम्मी को किडनॅप करके रखेंगे कहाँ

दिलीप- वो मैने सोच लिया है हम दोनो गाड़ी में बैठे और निकल पड़े

निम्मी को उठाने....

 


अपडेट 43

अखिल ने एक सड़क पे गाड़ी रोक दी

अखिल- यही रास्ते से वो आएगी

थोड़ी देर बाद

वो देख वही निम्मी है

दिलीप- पर उसके पीछे कौन है

अखिल- अबे यह तो मदन है अब क्या करेंगे

दिलीप- दोनो को उठाएँगे तू गाड़ी उनके पास ले चल

[मैने कागज पे बेहोशी वाली दवा लगाई

सुन जब बाहर निकलेगा तो मास्क पहेन लेना

अखिल ने गाड़ी को मदन के पास रोक दिया]

भाई यह पता बताना

मदन- किसी और से पूछो

दिलीप- भाई आप ही बता दो बहुत देर से ढूंड रहा हूँ

मदन- बोला ना किसी दूसरे से पूछो

निम्मी- दीजिए मैं बताती हूँ

दिलीप- आप आगे आजाईए मैं अपाहिज हूँ

निम्मी- ओह

दिलीप- [जैसे ही निम्मी मेरे पास आई मैने वो कागज उसके नाक पे लगा दिया

निम्मी की आँखें भारी होने लगी]

अरे भाई देखो इनको क्या हुआ

मदन जैसे ही निम्मी के पास आया मैने कागज उसकी नाक पे दबा दिया

उसके बाद दोनो गाड़ी से लग्के बेहोश होगये

अखिल मास्क लगाके गाड़ी से बाहर आया

और जल्दी से दोनो को अंदर डालके गाड़ी को चला दिया

अखिल- अबे कैसे लोग हैं हम ने 2 लोगो को बीच सड़क पे अगवा कर लिया

और किसी का ध्यान भी नही गया

दिलीप- यह किधर जा रहा है

अखिल- सोसाइटी

दिलीप- अबे लुक्खे हम दिन में 2 बेहोश लोगों को गाड़ी से घर लेके जाएँगे

और सोसाइटी वाले हमारी आरती उतारेंगे

अखिल- अबे तो कहाँ चलूं

दिलीप- बताता हूँ

[फिर मैं रास्ता बताता रहा और हम पहुँच गये]

मैने निम्मी को उठाया और अखिल ने मदन को

एक काम कर मैं इसको इस रूम में रखता हूँ तू इसको उस रूम में रख

मैने निम्मी को कुर्सी पे बिठा दिया

उसके हाथ पैर दोनो को बँधा मुँह पे टेप चिपकाया और दूसरे रूम में गया

अखिल मदन को कुर्सी पे बाँध रहा था]

अबे इसको कुर्सी पे नही बांधना है उसपे बांधना है पहले इसको नंगा कर

अखिल- तेरा मतलब इसके कपड़े उतारू

दिलीप- तू इसको नंगा करेगा या मैं तुझे नंगा करूँ

[यह सुनके अखिल ने जल्दी से मदन को नंगा कर दिया]

फिर हम ने मदन को टेबल पे लिटा दिया और उसके दोनो पैरों को अलग साइड में बाँध दिया

अखिल- अबे कहीं तू इसका रेप तो नही करने वाला

दिलीप- चलबे मैं तेरी तरह नही हूँ

अखिल- अब क्या करेंगे

दिलीप- इंतज़ार

[1 घंटे बाद]

अखिल- अबे इसको होश आरहा है

दिलीप- मास्क पहेन और इसके मुँह पे टेप चिपका

[मैं भी मास्क पहेन लिया]

और कॅमरा उठाके मदन नही नंगे मदन की फोटो खींचने लगा

जब मदन ने आँख खोली तो वो अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगा

[मैं अपना हाथ उठाया अखिल ने मेरे हाथ में सरिया दिया] मैं एक सरिया मदन की गंद पे मारा मदन की चीख टेप में ही दब गयी]

चुप एक दम चुप

दोबारा अगर हाथ पैर चलाया है तूने तो यह सरिया ऐसी जगह मारूँगा कि तू नमर्द बन जाएगा

मैने कॅमरा उठाया और फोटो खींचने लगा

मदन फिर अपने हाथ पैर चलाने लगा]

कुछ याद आया

मदन रोने लगा

अखिल- अले ले ले एमएलए का लाल रो रहा है

दिलीप- [मैने अखिल को घूर के देखा]

एक सवाल पूछूँगा जवाब हाँ या ना में देना वरना[ मैने अपना हाथ फिर उठाया अखिल ने मेरे हाथ में आसिड की बॉटल दे दी]

यह आसिड तेरी गांद में डाल दूँगा

( मदन ने अपनी गर्दन हाँ में हिला दी]

तूने शीतल को मारा है

[मैने टेप हटा दिया]

मदन- हाँ

दिलीप- [दोबारा टेप लगाया मैने फिर एक सरिया मदन की गांद पे मार दिया.....,.)

 
अपडेट 44

फिरसे मदन की चीख टेप में दब गयी

मैं अखिल को इशारा किया

अखिल मेरे साथ रूम में आया

दिलीप- अच्छा सुन अभी मदन अपने किए हुए सारे जुर्म क़ुबूल करेगा

तुझे छुप के उसकी रेकॉर्डिंग करना है

और याद रहे रेकॉर्डिंग में मदन का सिर्फ़ चेहरा नज़र आए

अखिल- ठीक है

दिलीप- अच्छा सुन अभी हम इसे बेहोश करेंगे

जब तक तू जाके खाना लेके आ

[अखिल बाहर चला गया]

मैं बाहर आया

मदन अपने बँधे हाथ पैर चला रहा है

मैं सरिया लेके मदन के सामने खड़ा हो गया]

देख चुप चाप लेटा रह वरना यह सरिया तेरी गंद में पेल दूँगा

मुझे लगा कि मदन कुछ बोलना चाहता है

[आइ जी ऑफीस]

एसपी- सर एक बात समझ में नही आई

आइजी- यही ना कि शीतल की लाश हमें आज मिली पर डॉक्टर्स का कहना है कि 3 दिन पहले उसका गॅंगरेप हुआ और फिर ज़हर देके मारा गया

एसपी- सर एक और बात है शीतल 3 दिन पहले मरी पर आज हमें किसीने प्राइवेट नंबर से फोन किया

कि इस सोसाइटी के इस घर में एक लाश है और सर ठाकुर साहब का भांजा दिलीप भी कल यहीं देखा गया था

आइजी- तुम यह कहना चाहते हो कि दिलीप का गायब होना और शीतल का खून अरविंद वो एक लड़का है वो भी गाओं का

और यह मत भूलो कि शीतल का गॅंगरेप हुआ है

ट्रिंग ट्रिंग आइजी ने फोन उठाया

आइजी- हेलो

जी सर

क्या जी मैं अभी

[फोन कट गया]

एसपी- क्या हुआ सर

आइजी- एमएलए का बेटा और बेटी किडनॅप हो गये

एसपी- वाह

आइजी- अरविंद यह बहुत ज़्यादा हो रहा है अगर जल्दी एमएलए का बेटा और बेटी नही मिले

तो एमएलए चुप नही बैठेगा

एसपी- सर हमें एमएलए की गिरफ्तारी का वॉरेंट क्यूँ नही मिलता

आइजी- यही तो आज तक मेरी समझ में नही आया जब भी मैं वॉरेंट लेने कोर्ट जाता हूँ

तभी मॅजिस्ट्रेट को एक फोन आता है और वो मना कर देते हैं

[दिलीप हाउस]

दिलीप- मैने टेप हटा दिया]

मदन- तुझे पता नाì है कि तूने किससे पंगा लिया है

दिलीप- मैं फिर टेप चिपका दिया मदन के मुँह पे]

[अखिल खाना लेके आ गया]

अखिल- अबे पोलीस इनको ढूँढ रही है

दिलीप- तो डर क्यूँ रहा है

अखिल- अप्पुन किसीसे नही डरता

दिलीप- 4 प्लेट में चलके खाना परोस

अखिल- ठीक है

पर मदन के हाथ खोल देंगे तो वो कोई लफडा ना कर्दे

दिलीप- हाथ क्यूँ खोलेंगे

अखिल- अबे फिर मदन को खिलाएँगे कैसे

दिलीप- मैं क्या उसका जीजा हूँ जो उसको अपने हाथ से खाना खिलाउन्गा

प्लेट उसके मुँह पे रख देना कुत्ते के तरह चाट के खाएगा

[अखिल खाना परोस के ले आया]

2 प्लेट मैं अपने साथ निम्मी वाले रूम में ले गया

मैं रूम में एंटर हुआ तो देखा निम्मी अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही है

मुझे देखते ही उसने अपनी आँखें बंद करली

मैं आगे बढ़ा और उसके मुँह से टेप हटा दिया

निम्मी- मुझे यहाँ क्यूँ लाए मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है

प्लीज़ मुझे छोड़ दो

दिलीप- [मैने प्लेट से एक नीवाला लेके उसके मुँह पे लगाया]

निम्मी मुझे घूर्ने लगी और अपना सर मेरे हाथ पे मारा नीवाला गिर गया

निम्मी- मुझे नही खाना मैं तो तुम्हे जानती भी नही हूँ फिर तुमने मुझे क्यूँ अगवा किया है

दिलीप- मैने मेघा दी वाला मोबाइल अपनी जेब से निकाला और निम्मी की तरफ करके ऑन कर दिया]

निम्मी आँखें फाड़ के देखने लगी]

यह मेरी बहेन है और तुम्हे पता है इसकी यह हालत किसने की है मदन ने

तो बेहतर यही होगा कि तुम चुप चाप खाना खाओ मेरे सय्यम की परीक्षा मत लो

मैं अपने आप को समझाने की कोशिश कर रहा हूँ कि तुम्हारे भाई के किए की सज़ा तुम्हे ना दूं

[फिर मैने निम्मी को खाना खिलाया और दोबारा उसके मुँह पे टेप चिपका दिया....

 


अपडेट 45

दिलीप- जब मैं बाहर आया तो देखा कि खाना नीचे ज़मीन पे गिरा है

और अखिल मदन की तरफ मुँह करके खाना खा रहा था

मैने भी खाना खाया

यह खाना ज़मीन पे कैसे गिरा

अखिल- कुत्ता खाना नही खा रहा है

दिलीप- यह खाना उठा और दोबारा प्लेट में रख देखता हूँ कैसे नही ख़ाता है

मैने सरिया उठाया और मारा मदन की गांद पे

यह तेरे बाप के भड़वा गिरी के पैसे का खाना नही है

अभी यह खाना रखेगा 5 मिनिट में अगर तूने खाना नही खाया

तो इस सरिया पे आसिड लगाउन्गा और तेरी गांद में पेल दूँगा

[मदन कुत्ते की तरह खाने लगा मैं अखिल के साथ रूम में गया

कहा -पूछ

अखिल- क्या

दिलीप- वही जो तू सोच रहा है

अखिल- अप्पुन यह सोच रहा है कि यह घर किसका है

दिलीप- पहले अपने दिल पे हाथ रख

अखिल- क्यूँ

दिलीप- रखना

अखिल- ले रख लिया अब बोल

दिलीप- यह घर एमएलए का है

अखिल- अप्पुन के कान में कुछ घुस गया है क्या

दिलीप- नौटंकी बंद कर यह घर मदन के बाप एमएलए का है

अखिल- अबे तेरे को इस सिटी में कोई और घर नही मिला

दिलीप- तुझे क्या लगता है एमएलए को पता नही होगा कि किसीने उसके बेटे को उठा लिया है

और वो इस शहेर का चप्पा चप्पा छान मारेगा सिर्फ़ यह घर छोड़ कर

अखिल- तुझे ऐसा क्यूँ लगता है

दिलीप- क्यूंकी जो लोग ग़रीबी से नफ़रत करते हैं वो कभी अपनी ग़रीबी याद नही करते

अखिल- अबे सीधा बताना

दिलीप- एमएलए पहले भड़वा था और इसी घर में रहता था

वो कभी इस घर के बारे में नही सोच सकता कि हम ने उसके बेटे को यही रखा है

अखिल- तेरे दिमाग़ में यह सब आइडिया आता कहाँ से है

दिलीप- पहले अपने मोबाइल में देख कोई एसएमएस आया है

[अखिल ने जब मोबाइल के इंबॉक्ष मेसेज पढ़ा तो चीख पड़ा]

अखिल- अबे किसीने अप्पुन के अकाउंट में 1 करोड़ रुपया जमा किया है अप्पुन की तो लॉटरी लग गयी

[अखिल नाचने लगा]

दिलीप- इतना खुश मत हो मैने वो पैसा मँगाया है

[यह सुनके अखिल ने ऐसा मुँह बनाया जैसे मैने उसकी मार ली हो]

अखिल- तू कॉन्सा करोड़पति है और है भी तो इतने पैसे का तू करेगा क्या

दिलीप- आरडीएक्स

अखिल- आरडीएक्स मतलब

दिलीप- [मैने अखिल के कान में सारी बात बताई]

अखिल- अबे अप्पुन को एमएलए से बदला लेना है अप्पुन लोग यह सब करने में में खुद ही फँस जाएँगे

दिलीप- तू अपना दिमाग़ मत चला वो मेरा काम है और तू यही पे रुक मैं आता हूँ

[मैने रुमाल पे बेहोशी की दवा लगाई और जाके मदन के मुँह पे रख दी

सारा समान फिट किया

अखिल तय्यार हो जा

अखिल- अप्पुन तय्यार है

[30 मिनिट बाद]

मदन ने अपनी आँखें खोली तो देखा वो पूरे सूट बूट में कुर्सी पे बँधा है

सिर्फ़ कमर के नीचे पूरा नंगा था

दिलीप- एक सवाल पूरा जवाब कोई झूट नही

वरना जबभी यह रस्सी खींचुँगा 1 बूँद आसिड तेरे कहाँ पे गिरेगा वो तो तुझे पता ही है

पहला सवाल

तूने शीतल के साथ चक्कर क्यूँ चलाया

मदन- मुझे शीतल से कोई प्यार नही था यह 6 महीने पहले की बात है

बॉर्डर से सटके एक ज़मीन थी गवर्नमेंट उसकी नीलामी कर रही थी

उस नीलामी में जितने लोग आए थे उनसब की फॅमिली से हम ने एक-2 लड़की को उठा लिया

बोली 50करोड़ से शुरू हुई

मेरे पिता ने 50करोड़ 1 रुपया की बोली लगाई

जैसे ही गिनती

1

2 पे पहुँची किसीने पीछे से 60करोड़ की बोली लगा दी

यह कोई और नही इस शहर का सबसे बड़ा बिज्निस मेन ठाकुर जतिन वीर परताप सिंग था....

 
46

पास्ट

मदन- मेरे पीटने 70करोड़ की बोली लगाई

ठाकुर ने सीधे 100करोड़ की बोली लगा दी

और ज़मीन ठाकुर की हो गई

मेरे पिता गुस्से में वहाँ से चले गये

तभी मैने सोच लिया कि मैं अपने पिता के अपमान का बदला लूँगा

जब मैने पिताजी को बोला कि हमे ठाकुर को सबक सिखाना चाहिए

तो पिताजी ने सॉफ इनकार कर दिया

पता नही क्यूँ

आज तक जब भी कोई हमारे खिलाफ खड़ा हुआ

हम ने उसके घर की हर औरत को अपने बाज़ार में नीलाम कर दिया

मैं अपने प्लान को आगे बढ़ाने के लिए

ठाकुर की सबसे छोटी बेटी मेघा को प्रपोज़ किया

तो मेघा ने मुझे थप्पड़ मार दिया

इससे मेरा गुस्सा और बढ़ गया

तभी मैने प्लान बनाया

मैने एक सीधी लड़की को अपने प्यार के जाल में फँसाया और उसके दिमाग़ में हर वक़्त यह बात डाला कि मैने सिर्फ़ सुनीता को ग़लती से छु दिया तो

सुनीता ने पूरे कॉलेज में मुझे थप्पड़ मारके बेज़्जत किया

उस्दिन से कॉलेज में मेरी कोई इज़्ज़त नही रही

एक दिन तो मैं शूसाइड करने जा रहा था तभी मैने तुम्हे देखा और देखते ही प्यार हो गया

तो वो बोली कि तुम्हे बदला लेना चाहिए और उसने प्लान भी बना लिया

मैं ज़ाबूझ के मना करता रहा

पर वो नही मानी

सबसे पहले उसने मेघा से दोस्ती की

और उसका भरोसा जीता

फिर उसने मेघा से उसकी कमज़ोरी उसके बाप की कमज़ोरी सब पता कर लिया

फिर हम ने फाइनली प्लान बनाया

अब हम मेघा को यूज़ करेंगे

हम ने मेघा को माल बुलाया

माल जाने के रास्ते में एक सुनसान इलाक़ा पड़ता है

हम उसे रास्ते में ही उठा लेना चाहते थे

ताकि हम पर कोई शक़ ना करे

लेकिन अचानक वो हमारे घर आगयि और सारा प्लान खराब हो गया

लेकिन हमारा एक तीसरा साथी उसी वक़्त आ गया

और मेघा को बेहोश कर दिया

मैने शीतल को कॉलेज जाने को बोला

उसके बाद मैं मेघा को अपने एक गॉडाउन में ले गया

उसको नंगा किया

और उसकी फोटो खींचा

मैने चाहता तो उसको मसल सकता था

होसकता था कि वो शूसाइड कर लेती

पर मुझे उसके बाप से बदला लेना था

तभी मुझे पोलीस की साइरन सुनाई दी

और मैं भाग गया

उसके बाद जब मैं वापस वहाँ पे गया तो मेघा वहाँ नही थी

मैं शीतल के घर गया

और अपने तीसरे साथी को बुलाया

जब मैने उसे यह बताया तो वो मुझे छोड़ के चला गया

जब वो चला गया तो अचानक शीतल मेरे सामने आगयि

मैने उसे बहुत समझाया पर वो नही मानी

शीतल ने कहा कि वो ठाकुर को सब बता देगी

जब वो जाने के लिए पीछे मूडी तो मैने उसके सर पे मारके बेहोश कर्दिया

और अपने ग्राहको को बेच दिया

मेरे ग्राहक पूरी रात उसका रेप करते रहे

लास्ट में मैने उसके सामने ज़हर की डब्बी रख दिया

उसने उसी वक़्त ज़हर खा लिया और मर गयी

प्रेज़ेंट

दिलीप- कुछ छुपा तो नही रहा

मदन- सब बता दिया

दिलीप- मैं मदन के मुँह पे टेप चिपकाया

और रस्सी खींच दिया

आसिड की एक बूँद मदन के पैट पे पड़ी

मदन की चीख टेप में ही दब गयी]

सुन हराम के जने अगर अब झूठ बोला है

तो यह बॉटल का मुँह तेरे लंड पे सेट कर्दुन्गा

और रस्सी खींचके तुझे नमर्द बना दूँगा

बोल अब बोलेगा झूठ

मदन तड़प्ते हुए ज़ोर से अपनी गर्दन ना में हिलाने लगा

[मैने उसके मुँह से टेप हटा दिया]

मदन- फिर आज सुबह मैने मेघा के फोन पे उसकी नंगी तस्वीर को सेंड कर दिया

बस इतना ही है

[मदन ने रोते हुए बोला]

दिलीप- तेरे तीसरे साथी का नाम बताता है या खींचू रस्सी

मदन- ठाकुर का फॅमिलिडॉकटर रंजन

दिलीप- डॉक्टर्र्र.....,..,,.,.,'..

 
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