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अपडेट 39
दिलीप- चल जल्दी तय्यार हो जा
[मैने अपने मुँह पे मास्क लगाया ग्लॉब्स पहना
1 मास्टर की खुद रखा
1 अखिल को दिया
बाकी सब चीज़ एक थैले में रखा]
बेहोश करने वाली दवा और वो लाया
अखिल- हां यह ले
दिलीप- बढ़िया है ना
अखिल- एक दम ओरिजिनल
[हम दोनो पहुँचे शीतल के घर
मैने मास्टर की से मेनगेट खोला]
एक काम कर तू इस साइड देख मैं उस साइड देखता हूँ
[मैने किचन में देखा हॉल में देखा बाहर चार रूम्स थे उनसब में देखा
यह अखिल 1 रूम में इतनी देर से क्या कर रहा है
जैसे ही मैं 5वे रूम में एंटर हुआ इतनी तेज़ बदबू आई दम घुटने लगा
और अखिल खड़ा पता नही क्या कर रहा था
मैं आगे जाके उसकी गांद पे लात मार दिया उसकी चीख निकल गयी]
अखिल- अबे मार डालेगा क्या
दिलीप- लुक्खे हम यहाँ पिक्निक मनाने आए हैं
अखिल- अबे उधर देख
दिलीप- [जैसे ही मैने मूड के देखा मेरा दिल दहल गयाशीतल की लाश बेड पे पड़ी थी
मैं कितना भी अपने जज़्बात को कंट्रोल करू पर एक लड़की की लाश वो भी पूरी नंगी
तभी अखिल ने मुझे हिलाया]
अखिल- अबे क्या हुआ
दिलीप- अबे यह क्या है
अखिल- और कर प्लान किडनॅपिंग की
दिलीप- पर यह मरी कैसे इसके जिस्म पर कोई निशान भी नही है
अखिल- अबे इसे ज़हर दिया गया है
दिलीप- तुझे कैसे पता
अखिल- देख इसके होन्ट नीले पड़ गये हैं
दिलीप- मुझे लग रहा है इसका रेप हुआ है
अखिल- रेप नही गॅंगरेप हुआ है
दिलीप- तुझे ऐसा क्यूँ लगता है
अखिल- देख इसके बदन पे खरोंच और काटने के निशान हैं
और इसकी चूत पे खून जम गया है
यह तो पक्का है कि
यह पहले चुदवा चुकी थी
सील टूटने के बाद खून तभी निकलता है
जब लगातार कम्से कम 10 बार चुदाई होती है
दिलीप- एक काम कर इधर उधर देख कही कुछ मिल जाए
अखिल- अबे यहाँ पे एक लाश पड़ी है और तुझे
दिलीप- जो बोला है वो कर
अखिल- अबे कुछ नही है
दिलीप- चल चलते हैं यहाँ से
[मैं आगे बढ़ा ही था
कि मेरा पैर किसी चीज़ से टकराया यह कचरे का डब्बा था
मैं नीचे झुक के देखा तो उपर एक काग़ज़ था
मैने उसे उठा लिया यह एक फोन नंबर था
मैने उस नंबर पे फोन लगाया
तो वो किसी ट्रॅवेल एजेन्सी का नंबर था
तभी मेरे दिमाग़ की घंटी बजी]
सुन तू अभी पता लगा सकता है कि एमएलए का बेटा कहाँ पे है
अखिल- अबे लेकिन हुआ क्या
दिलीप- तू करेगा कि नही
[अखिल ने जल्दी से फोन पे नंबर मिलाया
फोन पे बात करते हुए उसका चेहरे का हाव भाव अजीब था
अखिल- अबे यह एमएलए का बेटा कल ही अमेरिका चला गया
दिलीप- लवदे पे गया सारा प्लान
अखिल- क्यूँ
दिलीप- अबे मेरा प्लान था
कि शीतल के ज़रिए मदन को किडनॅप करेंगे
और मदन की मदद से एमएलए को किडनॅप करेंगे
अखिल- आगे
दिलीप- अबे यहाँ पे प्लान ही ख़तम हो गया और तू आगे का पूछ रहा है
अखिल- तो क्या हुआ तू कोई और प्लान सोच
दिलीप- अबे मैं कोई बचपन से प्लान बना रहा हूँ जो 1 मिनिट में प्लान तय्यार
मेरे प्लान की मेन कड़ी मदन था
अखिल- तो अब क्या करना है
दिलीप- इंतज़ार जब तक मदन अमेरिका से वापस नही आता
और सुन मैं आज ही वापस जा रहा हूँ
[हम दोनो बात कर रहे थे कि किसीने डोर बेल बजाई इस बार अखिल के साथ मेरी भी फॅट गयी]
अखिल- अबे कौन आगया इस वक़्त हमारी मारने
दिलीप- जाके देख
अखिल- मैं नही जाउन्गा
दिलीप- जाता है कि नही
[अखिल धीरे से आयेज बढ़ा और की होल से देखने लगा....
दिलीप- चल जल्दी तय्यार हो जा
[मैने अपने मुँह पे मास्क लगाया ग्लॉब्स पहना
1 मास्टर की खुद रखा
1 अखिल को दिया
बाकी सब चीज़ एक थैले में रखा]
बेहोश करने वाली दवा और वो लाया
अखिल- हां यह ले
दिलीप- बढ़िया है ना
अखिल- एक दम ओरिजिनल
[हम दोनो पहुँचे शीतल के घर
मैने मास्टर की से मेनगेट खोला]
एक काम कर तू इस साइड देख मैं उस साइड देखता हूँ
[मैने किचन में देखा हॉल में देखा बाहर चार रूम्स थे उनसब में देखा
यह अखिल 1 रूम में इतनी देर से क्या कर रहा है
जैसे ही मैं 5वे रूम में एंटर हुआ इतनी तेज़ बदबू आई दम घुटने लगा
और अखिल खड़ा पता नही क्या कर रहा था
मैं आगे जाके उसकी गांद पे लात मार दिया उसकी चीख निकल गयी]
अखिल- अबे मार डालेगा क्या
दिलीप- लुक्खे हम यहाँ पिक्निक मनाने आए हैं
अखिल- अबे उधर देख
दिलीप- [जैसे ही मैने मूड के देखा मेरा दिल दहल गयाशीतल की लाश बेड पे पड़ी थी
मैं कितना भी अपने जज़्बात को कंट्रोल करू पर एक लड़की की लाश वो भी पूरी नंगी
तभी अखिल ने मुझे हिलाया]
अखिल- अबे क्या हुआ
दिलीप- अबे यह क्या है
अखिल- और कर प्लान किडनॅपिंग की
दिलीप- पर यह मरी कैसे इसके जिस्म पर कोई निशान भी नही है
अखिल- अबे इसे ज़हर दिया गया है
दिलीप- तुझे कैसे पता
अखिल- देख इसके होन्ट नीले पड़ गये हैं
दिलीप- मुझे लग रहा है इसका रेप हुआ है
अखिल- रेप नही गॅंगरेप हुआ है
दिलीप- तुझे ऐसा क्यूँ लगता है
अखिल- देख इसके बदन पे खरोंच और काटने के निशान हैं
और इसकी चूत पे खून जम गया है
यह तो पक्का है कि
यह पहले चुदवा चुकी थी
सील टूटने के बाद खून तभी निकलता है
जब लगातार कम्से कम 10 बार चुदाई होती है
दिलीप- एक काम कर इधर उधर देख कही कुछ मिल जाए
अखिल- अबे यहाँ पे एक लाश पड़ी है और तुझे
दिलीप- जो बोला है वो कर
अखिल- अबे कुछ नही है
दिलीप- चल चलते हैं यहाँ से
[मैं आगे बढ़ा ही था
कि मेरा पैर किसी चीज़ से टकराया यह कचरे का डब्बा था
मैं नीचे झुक के देखा तो उपर एक काग़ज़ था
मैने उसे उठा लिया यह एक फोन नंबर था
मैने उस नंबर पे फोन लगाया
तो वो किसी ट्रॅवेल एजेन्सी का नंबर था
तभी मेरे दिमाग़ की घंटी बजी]
सुन तू अभी पता लगा सकता है कि एमएलए का बेटा कहाँ पे है
अखिल- अबे लेकिन हुआ क्या
दिलीप- तू करेगा कि नही
[अखिल ने जल्दी से फोन पे नंबर मिलाया
फोन पे बात करते हुए उसका चेहरे का हाव भाव अजीब था
अखिल- अबे यह एमएलए का बेटा कल ही अमेरिका चला गया
दिलीप- लवदे पे गया सारा प्लान
अखिल- क्यूँ
दिलीप- अबे मेरा प्लान था
कि शीतल के ज़रिए मदन को किडनॅप करेंगे
और मदन की मदद से एमएलए को किडनॅप करेंगे
अखिल- आगे
दिलीप- अबे यहाँ पे प्लान ही ख़तम हो गया और तू आगे का पूछ रहा है
अखिल- तो क्या हुआ तू कोई और प्लान सोच
दिलीप- अबे मैं कोई बचपन से प्लान बना रहा हूँ जो 1 मिनिट में प्लान तय्यार
मेरे प्लान की मेन कड़ी मदन था
अखिल- तो अब क्या करना है
दिलीप- इंतज़ार जब तक मदन अमेरिका से वापस नही आता
और सुन मैं आज ही वापस जा रहा हूँ
[हम दोनो बात कर रहे थे कि किसीने डोर बेल बजाई इस बार अखिल के साथ मेरी भी फॅट गयी]
अखिल- अबे कौन आगया इस वक़्त हमारी मारने
दिलीप- जाके देख
अखिल- मैं नही जाउन्गा
दिलीप- जाता है कि नही
[अखिल धीरे से आयेज बढ़ा और की होल से देखने लगा....